History Class 11 Chapter 2 | लेखन कला और शहरी जीवन | Class 11th History Chapter 1 | Part 1

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो "लेखन कला और शहरी जीवन" नामक इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का परिचय देता है, जिसमें मेसोपोटामिया की सभ्यता पर प्रकाश डाला गया है। यह सभ्यता गणित, लेखन और शहरी जीवन की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण है। वीडियो में मेसोपोटामिया शब्द की उत्पत्ति, इसकी भौगोलिक स्थिति, समकालीन सभ्यताएं और इस क्षेत्र की खोज के महत्व पर चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त, यह मेसोपोटामिया में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं, पुरातात्विक खोजों और समय के साथ उनके दृष्टिकोण में आए परिवर्तनों की पड़ताल करता है।

  • मेसोपोटामिया की सभ्यता गणित, लेखन और शहरी जीवन की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण है।
  • मेसोपोटामिया शब्द यूनानी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है दो नदियों के बीच की भूमि।
  • यह सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन थी।
  • पुरातात्विक खोजों ने मेसोपोटामिया के इतिहास और संस्कृति को समझने में मदद की है।
  • समय के साथ, पुरातात्विक दृष्टिकोण बाइबल की कहानियों को साबित करने से वैज्ञानिक खोजों पर केंद्रित हो गया है।

परिचय

आज की कक्षा में इतिहास का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय शुरू करने जा रहे हैं जिसका नाम है लेखन कला और शहरी जीवन। यह अध्याय मेसोपोटामिया की सभ्यता के बारे में है, जहाँ जोड़, घटा, गुणा, भाग की शुरुआत हुई, लिखने की शुरुआत हुई, और शहरी जीवन की शुरुआत हुई।

मेसोपोटामिया क्या है?

मेसोपोटामिया शब्द दो यूनानी शब्दों 'मेसोस' (मध्य) और 'पोटामोस' (नदी) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है दो नदियों के बीच की भूमि। यह क्षेत्र फरात और दजला नदियों के बीच स्थित है। शहरी जीवन की शुरुआत यहीं से हुई थी। आज का इराक देश मेसोपोटामिया का ही हिस्सा है।

मेसोपोटामिया सभ्यता का महत्व

मेसोपोटामिया की सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन मानी जाती है। शहरी जीवन, साहित्य, गणित और खगोल विद्या की शुरुआत यहीं से हुई।

मेसोपोटामिया में भाषाएँ

शुरू में मेसोपोटामिया में सुमेरी भाषा बोली जाती थी। बाद में, अकदी भाषा और फिर आरामा भाषा का प्रचलन हुआ। ईसा मसीह के जन्म से पहले के समय को ईसा पूर्व कहा जाता है।

लिपि और भाषा का विकास

2000 ईसा पूर्व के बाद मेसोपोटामिया की लिपि और भाषा आसपास के इलाकों में फैल गई थी। मिस्र के राजा (फराओ) और मेसोपोटामिया के राजा आपस में मेसोपोटामिया की भाषा में ही पत्र लिखते थे। लेखन कला के विकास से राज्य का कामकाज, व्यापार और ज्ञान को सुरक्षित रखना आसान हो गया।

मेसोपोटामिया के विभिन्न नाम

मेसोपोटामिया के दक्षिणी भाग को सुमेर कहा जाता था, जहाँ सुमेरियन लोग रहते थे। अक्कद में अकदी भाषा बोलने वाले लोग रहते थे। बेबिलोनिया, बेबिलोन नगर के कारण प्रसिद्ध हुआ, जहाँ से बेबिलोनिया साम्राज्य का उदय हुआ। मेसोपोटामिया के उत्तरी भाग को आसरिया कहा जाता था।

पुरातात्विक खोज और महत्व

1840 के दशक में मेसोपोटामिया में खुदाई शुरू हुई। उरू और मारी जैसे स्थलों पर वर्षों तक खुदाई चली, जिससे इमारतें, मूर्तियाँ, आभूषण, कब्र, औजार और मुद्राएँ मिलीं। यूरोप वासियों के लिए मेसोपोटामिया का महत्व इसलिए था क्योंकि बाइबल में इसका उल्लेख है।

पुरातात्विक दृष्टिकोण में परिवर्तन

पहले खुदाई का मकसद बाइबल की कहानियों को सही साबित करना था, लेकिन अब सच्चाई को वैज्ञानिक तरीके से पता लगाना है। पहले सिर्फ राजाओं और अमीर लोगों की चीजों पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब आम लोगों के जीवन को भी समझा जाता है। खुदाई के लिए तकनीक भी बहुत सीमित थी, लेकिन अब आधुनिक तकनीक उपलब्ध है।

मेसोपोटामिया की विशेषता

मेसोपोटामिया के पूर्वोत्तर भाग में हरे-भरे मैदान, पहाड़ और झरने थे। उत्तरी भाग में घास के मैदान थे, जहाँ लोग पशुपालन करते थे। पूर्वी भाग में दजला नदी ईरान जाने के लिए परिवहन का साधन थी। दक्षिणी भाग रेगिस्तानी इलाका था, जहाँ लेखन प्रणाली और शहरों की शुरुआत हुई।

खेती की शुरुआत और विकास

मेसोपोटामिया में लगभग 7000 से 6000 ईसा पूर्व के बीच खेती की शुरुआत हुई। दक्षिणी मेसोपोटामिया में बारिश कम होती थी, इसलिए लोग नहरों और नदियों पर निर्भर रहते थे। लोग गेहूं, जौ और मसूर की खेती करते थे।

संसाधनों का उपयोग

मेसोपोटामिया के लोग खेती के साथ-साथ पशुपालन, मछली पकड़ना और खजूर के पेड़ भी लगाते थे। दक्षिणी मेसोपोटामिया को दुनिया की सबसे उपजाऊ भूमि माना जाता था, लेकिन वर्षा कम होने के कारण लोगों को नहरों और नदियों पर निर्भर रहना पड़ता था।

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Transcript

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0:00 हेलो प्यारे बच्चों गुड इवनिंग। कैसे हैं आप सभी लोग? उम्मीद करते हैं आप लोग अच्छे होंगे और बहुत ही अच्छे से आपकी पढ़ाई भी चल रही होगी। प्यारे बच्चों आज के इस क्लास में हम लोग इतिहास का एक बहुत ही इंपॉर्टेंट चैप्टर शुरू करने जा रहे हैं जिसका नाम है लेखन कला और शहरी जीवन। प्यारे बच्चों, वैसे तो ये चैप्टर बहुत आसान है, लेकिन आप सभी लोग समझते हैं कि ये चैप्टर बहुत हार्ड है। मैं आपको आज इस अंदाज में इस चैप्टर को पढ़ाऊंगा ना कि आपको मजा आ जाने वाला है। आप में से बहुत सारे बच्चों के मन में यह सवाल आ रहा होगा कि सर ये चैप्टर इतना खास क्यों है? तो प्यारे बच्चों ये चैप्टर इसलिए खास है क्योंकि हम लोग इस चैप्टर में पढ़ते हैं मेसोपोटामिया की सभ्यता के बारे में। अब मेसोपोटामिया की सभ्यता क्या है? तो जैसे आप 12 क्लास में जाइएगा तो वहां पर आप पढ़िएगा हड़प्पा सभ्यता के बारे में तो उसी तरह से 11 क्लास में आपको मेसोपोटामिया की सभ्यता के बारे में पढ़ना

0:47 पड़ता है। इसी सभ्यता के बारे में क्यों? तो प्यारे बच्चों ऐसा कहा जाता है कि सबसे पहले ये जो हम लोग जोड़ करते हैं घाटा गुना भागा जोड़ घाटा गुना भागा ये सभी की जो शुरुआत है ये मेसोपोटामिया से ही हुआ था। फिर कहा जाता है कि जो हम लोग लिखने के लिए जो शुरू किए ना लिखना हम लोग जो लिखते हैं अभी पहले के जमाने में लोग लिख नहीं पाता था ना पहले बोलता था पहले तो बोल भी नहीं पाता था तो ये जो लिखने की शुरुआत है ये भी मेसोपोटामिया से ही हुआ है ना और शहरी जीवन शहरी जीवन का मतलब हुआ कि जैसे हम लोग आज शहर में रहते हैं बहुत सारे लोग है ना एकदम अच्छा अच्छा कपड़ा पहनते हैं नाला बनाते हैं तो ये जो शहरी जीवन की शुरुआत है ये भी मेसोपोटामिया से ही हुआ था इसीलिए प्यारे बच्चों ये चैप्टर खास है और ये सभ्यता खास है और इसी सभ्यता ता के बारे में हम लोग पढ़ेंगे। अब आप ध्यान से इस नक्शा को देखिए। यह है अपना

1:34 प्यारा सा देश भारत। आप देख सकते हैं। यह प्यारा सा देश अपना भारत है। यह है आपका हड़प्पा सभ्यता। याद रखिएगा यह क्या है? यह है आपका हड़प्पा सभ्यता। आपको दिख रहा है? चलो ये है आपका हड़प्पा सभ्यता जो कि आप क्लास 12th में पढ़ोगे। इसी से थोड़ा सा दूर आप जाओगे यहां पर तो ये है प्यारे बच्चों मेसोपोटामिया की सभ्यता। जिस सभ्यता के बारे में हम लोग आज पढ़ने वाले हैं। है ना? तो ये खास क्यों है? क्योंकि शहरी जीवन की शुरुआत यहीं से हुई। लिखने की शुरुआत यहीं से हुई। हम लोग जो गणित पढ़ते हैं, मैथ पढ़ते हैं, वर्गमूल पढ़ते हैं ये सभी की शुरुआत यहीं से हुई। तो इसी के बारे में तो आज पढ़ने वाले हैं। ठीक है? चलिए प्यारे बच्चों, अब हम लोग शुरू से शुरू करते हैं। आपके सामने क्वेश्चन आएगा कि बताओ इस सभ्यता को आखिर मेसोपोटामिया की सभ्यता क्यों कहते हैं?

2:20 तो प्यारे बच्चों आप सिंपली लिखिएगा कि यह जो मेसोपोटामिया शब्द है ध्यान से देखिएगा। मेसोपोटामिया तो ये जो मोस मेसोपोटामिया शब्द है यह दो शब्द से मिलकर बना है। ठीक है? एक शब्द है प्यारे बच्चों मेसोस एक शब्द है मेसोस एक है पोटामोस पोटामोस। तो ये दो शब्द से मिलकर बना है आपका मेसोपोटामिया। एक है आपका मेसोस एक है पोटामोस। आपको पूछेंगे कि मेसोस का मतलब क्या होता है? तो प्यारे बच्चों मेसोस का मतलब होता है सिंपली मध्य। मध्य का मतलब होता है बीच। मध्य का मतलब होता है बीच। और पोटामोस का मतलब होता है नदी। पोटेमोस का मतलब होता है नदी। यानी कहने का मतलब क्या हो गया कि प्यारे बच्चों दो नदी है तो दो नदी के बीच में जो जमीन है इसी जमीन

3:07 को हम लोग मेसोपोटामिया कहते हैं। चलिए हम लोग समझते हैं। तो ये पूछा जाता है कि मेसोपोटामिया कौन सी भाषा का शब्द है? याद रखिएगा यूनानी। तो ये जो मेसोपोटामिया है जैसे हिंदी भाषा होता है, इंग्लिश भाषा होता है, उर्दू भाषा होता है तो उसी तरह से एक भाषा होता है यूनानी। तो ये जो मेसोपोटामिया है ये आपका यूनानी भाषा का शब्द है। मेसोपोटामिया जो शब्द है ये दो शब्द से मिलके बना है मेसोस और पोटामोस। मेसोस का मतलब होता है बीच। पोटेमोस का मतलब होता है नदी। अर्थात इसका मतलब हुआ कि दो नदी के बीच का जो जगह है उसी को हम लोग कहते हैं मेसोपोटामिया। तो याद रखिएगा मेसोपोटामिया का कोई अगर अर्थ पूछे तो आप कहोगे कि यह जो मेसोपोटामिया शब्द है यह यूनानी भाषा का दो शब्द से मिलके बना है। एक है मेसोस एक है पोटेमोस। मेसोस का अर्थ होता है मध्य। पोटामोस का अर्थ होता है

3:53 नदी। अर्थात दो नदियों के बीच का जो जमीन है इसी को मेसोपोटामिया कहा गया। अब यहां ध्यान से अगर देखिएगा तो एक नदी प्यारे बच्चों आपका यह वाला नदी है। एक नदी आपका यह वाला नदी है। आपको अभी हम दिखाएंगे। तो ये चीज याद रखिएगा कि दो नदी था तो दोनों नदी के बीच का जो जमीन है इसी को प्यारे बच्चों मेसोपोटामिया कहते हैं। अब आप पूछोगे सर वो दो नदी कौन-कौन सा था? तो वो दो नदी का नाम याद रखिएगा क्योंकि बार-बार आएगा। एक नदी का नाम था फरात नदी और एक नदी था जिनका नाम था दजला नदी। इंग्लिश में भी नाम याद रखिएगा। फरात नदी को इंग्लिश में कहते हैं यूफ्रेट्स। जैसे गंगा नदी है। तो गंगा नदी को इंग्लिश में गंगा नदी ही कहते हैं। है ना? तो उसी तरह से प्यारे बच्चों एक नदी है जिन नदी का नाम क्या है? फरात नदी जिसको इंग्लिश में कहते हैं यूफ्रेट्स। और एक नदी है जिनका

4:40 नाम है दजला नदी। दजला ये नदी का नाम है दजला नदी और इसी नदी को कहते हैं इंग्लिश में टिगरीज। अब ये दोनों चित्र आप देख लीजिए आपको समझ में आ जाएगा। अब जैसे ऊपर वाला जो नदी है ये जो नदी है प्यारे बच्चों इस नदी का नाम क्या है? दजला नदी। दजला। दजला को ही हम लोग कहते हैं टिगरीज। और जो नीचे वाला है इंग्लिश में इसको कहते हैं यूफुरेट्स। और हिंदी में इसको हम लोग क्या कहते हैं? याद रखिएगा हिंदी में इसको कहते हैं फड़ात। हिंदी में क्या कहते हैं? फरात। तो जो नीचे वाला नदी है नीचे वाला नदी प्यारे बच्चों इस नदी को क्या कहते हैं? फरात नदी। और जो ऊपर वाला नदी है इस नदी को कहते हैं दजला नदी। और जो इसके बीच का जो जमीन है यह वाला जमीन ये वाला यही वाले को इसी जगह को हम लोग कहते हैं मेसोपोटामिया। तो याद रखिएगा दो नदी के बीच का जो जगह है इसी को मेसोपोटामिया

5:25 कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो शहरी जीवन है इसकी शुरुआत मेसोपोटामिया से हुई। तो ये भी याद रखिएगा शहरी जीवन की शुरुआत कहां से हुई? मेसोपोटामिया से। आज जो हम लोग शहर के शहर के लोग रहते हैं ना तो शहर के लोग जो इस तरह से रहते हैं तो सबसे पहले कहां के लोग इस तरह से रहते थे? याद रखिएगा शहर मेसोपोटामिया के। तो ऐसा माना जाता है कि जो आज हम लोग शहरी जीवन जी रहे हैं, इस शहरी जीवन की शुरुआत मेसोपोटामिया से हुई है। ये जो मेसोपोटामिया है आज के दिन नहीं है। लेकिन उसी मेसोपोटामिया जहां पर पहले मेसोपोटामिया था उस जगह पर प्यारे बच्चों अभी इराक देश है इराक। तो याद रखिएगा आज का जो इराक देश है ये मेसोपोटामिया का ही हिस्सा है। जैसे हड़प्पा सभ्यता में कौन सा देश है? तो भारत भी है पाकिस्तान भी है। तो उसी तरह

6:10 से ये जो मेसोपोटामिया था इस जगह पर प्यारे बच्चों आज के दिन क्या है? इराक है। तो जल्दी से आप लोग बताओ सबसे पहले यह जो मेसोपोटामिया है दो शब्द से मिलके बना है। एक है मेसोस एक है पोटेमोस। मेसोस का मतलब होता है बीच। पोटेमोस का मतलब होता है नदी। यानी दो नदी के बीच का जो जमीन है इसी को मेसोपोटामिया कहते हैं। अच्छा ये जो क्षेत्र है मेसोपोटामिया दो नदी के बीच में है। एक नदी को प्यारे बच्चों हम लोग कहते हैं फरात। नीचे वाला नदी है फरात। ऊपर वाला जो नदी है यह है दजला। इन दोनों के नदी के बीच का जो जगह है इसी को तो मेसोपोटामिया कहते हैं। और ऐसा कहा जाता है कि यह जो शहरी जीवन है इसकी शुरुआत इसी मेसोपोटामिया की सभ्यता से हुई है। और आज जो ये मेसोपोटामिया है इसी जगह पे प्यारे बच्चों आपका इराक है। जैसे कि आप इस नक्शा को देखिए। ये क्या है? यही तो था उस समय प्यारे बच्चों यही था आपका मेसोपोटामिया

6:57 और यही मेसोपोटामिया जो है अभी आपका इराक बन गया है। तो अगर कोई कहे आज जो इराक है इराक यह मेसोपोटामिया का ही हिस्सा था। याद रखिएगा एक समय इसी को मेसोपोटामिया कहा जाता था जो कि आज के दिन इराक बन गया है। समझ गए आप? चलिए आगे अब हम लोग बढ़ते हैं प्यारे बच्चों। ये जो मेसोपोटामिया की सभ्यता है ये सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन मानी जाती है। हमने क्या कहा था आपको कि जब आप 12th क्लास में जाओगे तो सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में पढ़ोगे जो कि आपका इतिहास का पहला चैप्टर है। तो सिंधु घाटी का जो संबंध है वो मेसोपोटामिया से था। तो कहा जाता है कि जो मेसोपोटामिया की सभ्यता है ये सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन मानी जाती है। समकालीन का मतलब होता है एक ही समय में। यानी जब यहां पर हड़प्पा सभ्यता था उसी समय मेसोपोटामिया की सभ्यता था। जैसे अभी हम

7:43 पढ़ रहे हैं। आप भी पढ़ रहे हैं तो हम दोनों क्या हो गए? समकालीन हो गए। यानी एक ही समय में उसी के आसपास। तो जब यहां पर मेसोपोटामिया की सभ्यता था उसी समय हड़प्पा सभ्यता भी था। इसीलिए मेसोपोटामिया की सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता के समकालीन माना जाता है। ठीक? और शहरी जीवन की जो शुरुआत है ये मेसोपोटामिया से ही हुई थी। याद रखना। अब ये जो सभ्यता है क्यों फेमस है? क्यों इसके बारे में पढ़ते हैं? तो क्योंकि शहरी जीवन की शुरुआत मेसोपोटामिया से हुआ। ये जो साहित्य हम लोग पढ़ते हैं साहित्य इनकी शुरुआत मेसोपोटामिया से हुआ। ये जो गणित हम लोग पढ़ते हैं गणित मैथ जो पढ़ते हैं ये भी मेसोपोटामिया से इनकी शुरुआत हुई। ये जो खगोल विद्या पढ़ते हैं, खगोल विद्या मतलब ग्रह के बारे में, है ना? पृथ्वी के बारे में, मंगल ग्रह के बारे में, चांद के बारे में, अंतरिक्ष के बारे में ये सब चीज के

8:30 बारे में जो हम लोग पढ़ते हैं आसमान, चांद, ग्रह, सूरज ये सब के बारे में जो पढ़ते हैं ये सभी को खगोल विद्या कहते हैं। तो ये जो खगोल विद्या की शुरुआत है, ये मेसोपोटामिया से ही हुआ था। समझ रहे हो कितना खास है। उसके बाद लेखन कला। लेखन कला मतलब लिखने की जो शुरुआत है, यह भी आपका मेसोपोटामिया से हुआ था। अब आप बताओ ये सारी चीजों की शुरुआत अगर वहीं से हुई है तो उसके बारे में तो पढ़ना बनता है। बिल्कुल तो खगोल विद्या, लेखन कला, खगोल विद्या, खगोल विद्या मतलब वही ग्रह, पृथ्वी, नक्षत्र के बारे में पढ़ना। गणित, साहित्य, शहरी जीवन ये सभी की शुरुआत कहां से हुई? मेसोपोटामिया से। ठीक है? अब हम लोग सबसे पहला टॉपिक पर आते हैं कि मेसोपोटामिया में कौन सी भाषा बोली जाती थी? तो प्यारे बच्चों अगर बात करें शुरू-शुर का तो शुरू-शुर में जो है

9:15 मेसोपोटामिया में सुमेरी भाषा बोली जाती थी। जैसे हिंदी भाषा इंग्लिश भाषा होता है, उर्दू भाषा होता है तो उसी तरह से एक भाषा होता था सुमेरी। तो कहा जाता है कि मेसोपोटामिया में जब मेसोपोटामिया सभ्यता की शुरुआत हुआ था उस वक्त में वहां पर सुमेरी भाषा बोला जाता था। है ना? सुमेरी। फिर बाद में समय के साथ-साथ भाषा बदलता है। आप जानते हो ना? एक समय पहले जो है लोग यहां पर क्या कहते हैं? संस्कृत भाषा बोलता था लेकिन आज के दिन लोग हिंदी भाषा बोलता है। फिर हो सकता है आने वाले सालों में कुछ और भाषा बोलने लगे। होता है कि नहीं? तो समय के साथ जो भाषा है वो बदलते जाता है। तो शुरुआत में यहां पर सुमेरी भाषा बोला जाता था जब मेसोपोटामिया की शुरू हुई थी मेसोपोटामिया सभ्यता की। लेकिन बाद में प्यारे बच्चों अकदी भाषा बोला गया। अकदी ये भी एक भाषा है। भाषा का

10:01 नाम है अकदी। फिर उसके बाद यह भाषा भी बदल गया। और अब जो है अकदी के जगह आरामा भाषा बोला जाने लगा। आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि सर ये 2400 ईसा पूर्व क्यों लिखा गया है? 1400 ईसा पूर्व क्यों लिखा गया है? समय तो बढ़ना चाहिए ना। जैसे 2025 आ रहा है फिर 25 चल रहा है फिर 26 आएगा फिर 27 आएगा तो समय तो बढ़ना चाहिए। लेकिन यहां पर तो समय घट रहा है। 2400 1400 1000 आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? तो प्यारे बच्चों देखिए एक इंसान था जिसका नाम था ईसा या पूरा नाम ईसा मसीह। है ना? देखिए मुस्लिम लोग इनको कहते हैं हजरत ईसा अल सलातो अस्सलाम। और जो हिंदू है या बाकी जो ईसाई है वो लोग कहते हैं ईसा मसीह। ठीक है? तो ईसा मसीह का जो पैदाइश है प्यारे बच्चों जिस दिन हुआ उस समय को मान लिया गया जीरो। यानी ईसा मसीह का जिस दिन

10:47 पैदाइश हुआ उस समय को मान लिया जीरो। अब ईसा मसीह के पैदा होने के पहले वाले समय को कहा गया ईसा पूर्व। याद रखिए ईसा मसीह के पैदा होने के जो पहले वाला समय है उसको ईसा पूर्व कहा गया। और ईसा मसीह के पैदा होने के बाद वाला समय को कहा गया ईस्वी। इंग्लिश में इसी को हम लोग लिखते हैं एडी और इंग्लिश में ईसा पूर्व को लिखते हैं बीसी। बीसी का मतलब होता है बिफोर क्रिस्ट। तो हम लोग जो लिखते हैं ना 2400 ईसा पूर्व हम लोग लिखते हैं ना 2400 ईसा पूर्व तो इसका मतलब क्या हुआ? यानी ईसा मसीह के पैदा होने के 2400 साल पहले की बात हो रही है। और जब हम लोग लिखते हैं ईस्वी तो इसका मतलब हुआ ईसा मसीह के पैदा होने के यानी हम लोग अगर लिखेंगे क्या कि 1000 ईसवी हम लोग लिखेंगे 1000 तो इसका मतलब ईसा मसीह के पैदा होने के 1000 साल

11:34 बाद की बात हो रही है। जब हम लोग लिखेंगे ईसा पूर्व तो इसका मतलब हुआ कि ईसा मसीह के पैदा होने के पहले की बात हो रही है। दोनों चीज आप समझ गए। अब यहां पर लिखा हुआ है 2400 ईसा पूर्व है। तो इसका मतलब हुआ कि ईसा मसीह के पैदा होने के 2400 साल पहले की बात हो रही है। अब आप बताइए ईसा मसीह कब पैदाइश हुआ? तो आज से 2025 साल पहले पैदाइश हुआ था ईसा मसीह का। है ना? तो इधर 2025 साल और उधर आपका 2400 साल। तो सब मिलाकर के लगभग हो गया 4400 साल। फिर यहां पर लिखा हुआ है 1400 साल। 1400 ईसा पूर्व। तो इसका मतलब क्या हुआ? कि ईसा मसीह के पैदा होने के 1400 साल पहले की बात हो रही है। अब बताइए ईसा मसीह के पैदाइश कब हुआ है? तो अभी क्या चल रहा है? 2025 तो इसका मतलब ईसा मसीह का पैदा इसका 2025 साल हुआ है। और बात हो रही है ईसा

12:20 मसीह के पैदा होने के 1400 साल पहले। यानी 2000 में 1400 साल जोड़ देंगे तो 3400 साल पहले की बात हो रही है। बात समझ रहे हो? ये चीज है प्यारे बच्चों थोड़ा सा कंफ्यूजन होगा। जल्दी बच्चों को नहीं समझ में आता लेकिन समझ में आ जाएगा। तो मेसोपोटामिया में कौन सी भाषा बोली जाती थी? तो अगर मेसोपोटामिया की जब शुरुआत हुई थी उस वक्त में सुमेरी भाषा बोली जाती थी। है ना? लेकिन लगभग 2400 ईसा पूर्व है यानी कुछ समय के बाद फिर वहां पर अकदी भाषा बोली जाने लगी। अकदी अब सुमेरी की जगह अकदी भाषा बोली जाने लगी। फिर धीरे-धीरे धीरे-धीरे लोग अकदी भाषा भूल गए और लोग वहां पर आरामिक भाषा बोलने लगे। तो पूछा जाएगा आरामिक भाषा कब से बोली जाने लगी? 1400 ईसा पूर्व पहले। ये जो आरामिक भाषा है याद रखिएगा। हेबरू भाषा से मिलताजुलता भाषा था। तो ये जो आरामिक भाषा है ना ये भाषा से थोड़ा मिलताजुलता भाषा है। ठीक

13:07 है? लेकिन उस वक्त में जब आरामिक भाषा शुरू हुआ था लोग ज्यादा नहीं बोलते थे। धीरे-धीरे फैल रहा था। लेकिन 1000 ईसा पूर्व पहले ये जो आरामिक भाषा है ये पूरे मेसोपोटामिया में बोला जाने लगा। ठीक है? लेकिन फिर धीरे-धीरे अगर आज की बात करें तो आज मेसोपोटामिया को इराक कहा जाता है। तो आज भी इराक के कई सारे जगह है जहां पर आरामिक भाषा बोला जाता है। लेकिन उतना नहीं बोला जाता। ठीक है? तो जल्दी से आप लोग बताओ अगर हम आपसे सवाल करेंगे कि इस सभ्यता में यानी मेसोपोटाम में की सभ्यता में सबसे पहले कौन सी भाषा बोली जाती थी? सुमेरियन। सुमेरियन के बाद अकदी भाषा बोली जाती थी। अकदी के बाद अरामाइक भाषा बोली जाती थी। और आज के दिन भी बहुत ऐसा जगह है जहां पर अरामिक भाषा बोला जाता है। कहां पर? इराक देश में। ठीक है? बताइए कौन सी भाषा है जो हिब्रू भाषा से मिलताजुलता

13:54 भाषा था? जल्दी से बताइए कौन सी भाषा है जो हिब्रू भाषा से मिलताजुलता भाषा था? तो याद रखिएगा आरामाइक भाषा। तो क्वेश्चन पूछा जाता है कि ये जो आरामाइकिक भाषा है ये थोड़ा हिब्रू भाषा से थोड़ा मिलताजुलता भाषा था। समझ गए? ये सभी भाषा का नाम है। अब हम लोग देखते हैं कि मेसोपोटामिया की जो लिपि है और जो भाषा है इनका विकास कैसे हुआ? आप पूछोगे सर लिपि क्या होता है? भाषा तो हम लोग समझ रहे हैं। जैसे हम बोल रहे हैं तो ये भाषा है। हिंदी भाषा बोल रहे हैं। कुछ लोग इंग्लिश भाषा बोलते हैं। लेकिन ये लिपि क्या है? लिपि का मतलब प्यारे बच्चों सिंपली समझो। लेखन कला यानी जो हम लोग लिख रहे हैं ना जैसे हम लोग लिखेंगे ई सा तो ये ईसा इसी को लिपि कहते हैं। लिखने की कला लेखन कला इसी को लिपि कहते हैं। और जो हम लोग बोल रहे हैं ये हम लोग का हो गया भाषा। तो जो बोल रहे हैं

14:40 कौन सी भाषा बोल रहे हैं? भाषा मतलब बोल रहे हैं वो भाषा और जो लिख रहे हैं वो लेखन कला जिसको लिपि कहेंगे सिंपली। तो अब हम लोग देखते हैं कि जो मेसोपोटामिया था जैसे आप देखिए ये आपका मेसोपोटामिया था। ठीक है? यह आपका मेसोपोटामिया था। ध्यान से देखिएगा। तो ये जो मेसोपोटामिया है दो नदी के बीच में था। कौन-कौन सा नदी? एक नीचे वाला नदी को फरात नदी कहते हैं। ऊपर वाला नदी को दजला नदी। इन दोनों के नदी के बीच का जो जगह है इसी को कहते हैं मेसोपोटामिया। अब देखो मेसोपोटामिया में लिपि और भाषा का विकास किस प्रकार हुआ? 2000 ईसा पूर्व के बाद यानी ईसा मसीह के पैदा होने के 2000 साल पहले की बात हो रही है। उस समय जो है ना मेसोपोटामिया की लिपि और भाषा आसपास के इलाकों में फैल गई थी। यानी ईसा मसीह के पैदा होने के 2000 साल पहले की बात हो रही है कि जो मेसोपोटामिया

15:26 की भाषा था वो लगभग आसपास के इलाकों में फैल गया था। जैसे मेसोपोटामिया में जो भाषा बोला जाता था वो तुर्की में भी फैल गया था। भू मध्य सागर में भी उत्तरी सीरिया में भी जैसे आज के दिन बहुत सारे जगह जो हिंदी भाषा बोली जाती है। हिंदी भाषा नेपाल में भी बोला जाता है। बहुत सारा देश में भी बोला जाता है। तो इसका मतलब क्या हुआ? ये जो भारत की हिंदी भाषा है वो आसपास के इलाकों में फैल गई है। तो उसी तरह से जो मेसोपोटामिया की भाषा था ये भी आसपास के इलाकों में फैल गया था। जैसे ये क्या है? ये आपका मेसोपोटामिया में है। लेकिन मेसोपोटामिया की भाषा सीरिया में बोला जाता था। मेसोपोटामिया की भाषा तुर्की में बोला जाता था। मेसोपोटामिया की जो भाषा है पूर्वी मध्य सागर में बोला जाता था इस साइड में। तो इसका मतलब क्या हो गया? कि ये जो मेसोपोटामिया की भाषा है लगभग 2000 साल ईसा पूर्व यानी ईसा पूर्व

16:13 मतलब ईसा मसीह के पैदा होने के लगभग 2000 साल पहले ये जो मेसोपोटामिया की भाषा है वो अगल-बगल के इलाकों में फैल गई थी। अब जो मिस्र के राजा थे मिस्र के राजा याद रखिएगा उस वक्त में जो मिस्र का राजा था प्यारे बच्चों उसको कहा जाता था फड़ाओ मुस्लिम लोग उन्हीं को फिरौन कहते हैं फिरौन जैसे भारत में राजा को कहा जाता था सुल्तान है ना सुल्तान कहा जाता था बंगाल में कहा जाता था नवाब तो उसी तरह से प्यारे बच्चों जो मिस्र है मिस्र एक देश का नाम है अब देखो ये देश इसको ये इजिप्ट जिसको इंग्लिश में इजिप्ट कहते हैं तो मिस्र क्या है एक देश का नाम है तो मिस्र के जो राजा थे ना उसको कहा जाता फिरौन फिरौन या इसी को कहा जाता है फड़ाओ। फिरौन आप लोग सुने होंगे। तो मिस्र के राजा जो थे फिरौन और जब मेसोपोटामिया के राजा थे जब ये लोग एक दूसरे से बात करते थे जब एक

17:01 दूसरे को चिट्ठी भेजते थे तो मेसोपोटामिया के भाषा में ही लिखा जाता था। तो ये आपका है मिस्र मिस्र और ये है आपका मेसोपोटामिया। ये है आपका मेसोपोटामिया। तो मेसोपोटामिया और मिस्र ये दोनों राजा जब आपस में बात करते थे तो कौन सी भाषा में? मेसोपोटामिया की भाषा में एक दूसरे को चिट्ठी लिखते थे। पहले तो मोबाइल फोन नहीं था, टेलीफोन नहीं था कि कॉल कर देंगे। तो एक दूसरे को जो चिट्ठी लिखते थे कौन सी भाषा में? मेसोपोटामिया की भाषा में। इससे और ज्यादा ये भाषा फैला। लिपि यानी लेखन कला। लेखन कला के विकास से राज्य का कामकाज चलाना, व्यापार करना और ज्ञान को लिखकर सुरक्षित रखना आसान हो गया। अब जब लोगों को लिखने के लिए आ गया। पहले जब लोगों को लिखने के लिए नहीं आता था तो लोग क्या करते थे पता है? भूल जाते थे। जैसे हम आपको कुछ पढ़ा रहे हैं। अगर आप नहीं लिखिएगा तो भूल जाइएगा ना। लिख

17:48 लोगे तो याद रहेगा। तो लोग उस समय जब लिखने नहीं जानते थे तो लोग बहुत सारी बातें भूल जाते थे। लेकिन जब लोगों को लिपि यानी लेखन कला आ गया, लिखने की कला आ गया तो उनके बाद क्या हुआ पता है? हर चीज को लोग लिखने लगा। जो भी काम करता था लिखने लगा। जो भी व्यापार यानी बिजनेस करता था वो सब लिखने लगा। किसको कितना बाकी दिए, कितना उधार दिए, जो भी नॉलेज होता था सब चीज लिखते गया। जैसे आप लोग अभी सारा चीज लिखोगे तो सारा चीज लोग लिखते गया। समझ गए? तो ये फायदा हो गया लेखन कला से। तो पहले बात जल्दी से बताओ। ये जो मेसोपोटामिया की भाषा है लगभग कब आसपास के इलाकों में फैलना शुरू हो गया? 2000 ईसा पूर्व है। यानी ईसा मसीह के पैदा होने के 2000 साल पहले ये जो मेसोपोटामिया की भाषा है वो सीरिया, तुर्की भूमध्य सागर में फैलना शुरू हो गया। उनके बाद जो मिस्र

18:33 के राजा थे फिरौन और फराओ जिसको कहते हैं और जो आपका मेसोपोटामिया के राजा थे ये दोनों आपस में मेसोपोटामिया के ही भाषा में बात करते थे और एक दूसरे को चिट्ठी भेजते थे और जब लोगों को लिखने की कला आ गया तो उनके बाद जो भी व्यापार होता था, कामकाज होता था, जो भी ज्ञान लोगों को ज्ञान मिलता था वो सारी चीजों को अब लोग लिख के सुरक्षित रखते थे। ठीक है? अब देखते हैं मेसोपोटामिया के अलग-अलग नाम। तो प्यारे बच्चों यह जो है अपना प्यारा सा देश है भारत। हमारा और आपका प्यारा सा देश भारत। अब यहां आप देखोगे तो यह है आपका मेसोपोटामिया। ठीक? यह है आपका मेसोपोटामिया। अब ध्यान से देखिएगा। ऊपर के साइड को हम लोग कहते हैं उत्तर। याद रखिएगा ऊपर का जो साइड है इसको क्या कहा जाता है? उत्तर। जो नीचे का साइड है प्यारे बच्चों, इसको कहा जाता है दक्षिण।

19:19 यह सब याद रखना। 12th में भी काम आएगा। और जो बाया साइड है इसको कहा जाता है पश्चिम। इसको क्या कहा जाता है? पश्चिम। और जो दाया साइड है इसको कहा जाता है पूरब। ठीक पूरब बात समझे? ऊपर के साइड को क्या कहते हैं? उत्तर। ध्यान से देखना। ऊपर उत्तर, दाया साइड को पूरब, बाया साइड को पश्चिम और नीचे के साइड को दक्षिण कहते हैं। ठीक है? जैसे अगर हम बात करेंगे कि जो बंगाल है वो किधर है? पूरब साइड है। जो गुजरात है वो किधर है? पश्चिम साइड है। जो जम्मू कश्मीर है वो किधर है? उत्तर साइड है। जो आपका चेन्नई है वो किधर है? तो याद रखिएगा दक्षिण तरफ है। ऐसे याद रहेगा। अब यहां पर ध्यान से देखिए। यह जो सुमेर है सुमेर मेसोपोटामिया के अलग-अलग नाम हुआ। तो सबसे पहला जो नाम था वो है सुमेर। यह जो है मेसोपोटामिया के दक्षिणी भाग का नाम था।

20:05 जहां सुमेरियनों ने प्रारंभिक सभ्यता की नींव रखी थी। जैसे भारत इंडिया हम लोग क्या है? इंडियन है। तो भारत के लोगों को भारतीय कहा जाता है। इंडिया के लोगों को इंडियन कहा जाता है। तो उसी तरह से जो सुमेर के लोग थे वहां के लोगों को सुमेरियन कहा गया। जैसे हम लोग इंडिया के हैं तो हम लोगों को क्या कहा जाता है? इंडियन। हम लोग क्या हैं? इंडियन है। तो उसी तरह से जो लोग सुमेर में रहते थे उन लोगों को क्या कहा गया? सुमेरियन। कि शुरुआत में मेसोपोटामिया में कौन सी भाषा बोली जाती थी? सुमेरी भाषा। उसके बाद अकदी भाषा। तो उसी तरह से ये जो मेसोपोटामिया है इसका दक्षिणी भाग को कहा जाता था सुमेर। तो बताइए सुमेर कौन सी जगह को कहा जाता था? मेसोपोटामिया के दक्षिणी भाग को कहा जाता था। और यह जो सुमेर है यहां पर कौन लोग रहते थे? सुमेरियन लोग रहते थे। क्योंकि सुमेर को लोग सुमेरियन। उसके बाद

20:52 अक्कद ये जो क्षेत्र है इस अक्कद जो जगह था अक्कद यहां पर कौन से लोग रहते थे तो अक्कद ही लोग रहते थे जो लोग अकदी भाषा बोलते थे वही लोग रहते थे और इन्हें सुमेरियनों के बाद इस क्षेत्र में सत्ता स्थापित की और सुमेरियन के बाद अक्कद लोग आए थे तो पहले सुमेरियन भाषा बोला जाता था फिर सुमेरियन भाषा जब खत्म हो गया फिर अकदी भाषा आया तो पहले सुमेरियन लोग रहता था फिर उसके बाद अकदी लोग रहने लगा ठीक उसके बाद फिर प्यारे बच्चों आया बेबिलोनिया ये जो नाम है बेबिलोन नगर के कारण प्रसिद्ध हुआ है ना वहां पर मेसोपोटामिया में जैसे आप ध्यान से देखिएगा यह है आपका पूरा मेसोपोटामिया की सभ्यता है ना ये आपका है मेसोपोटामिया की सभ्यता तो शुरू शुरू में जो दक्षिण भाग था जैसे ऊपर की साइड को क्या कहते हैं याद रखिए ऊपर की साइड को हम लोग कहते हैं

21:37 उत्तर नीचे के साइड को हम लोग कहते हैं दक्षिण इधर आपका है पश्चिम इधर आपका है पूरब ठीक है तो नीचे के साइड को क्या कहते हैं दक्षिण कहते हैं तो हमने क्या कहा कि शुरुआत में जो है सुमेर किस जगह को कहा जाता था तो ये जो दक्षिण का तरफ है ये ये है आपका सुमेर। ठीक है? फिर प्यारे बच्चों सुमेर के बाद यहां पर कौन सा कौन से लोग आए? कौन से लोग यहां पर रहने लगे? अकदी लोग रहने लगे। और इस जगह को कहा गया अक्क। और यहां लोग कौन सी भाषा बोलते थे? अकदी। ठीक है? उसके बाद फिर कौन आए? बेबिलोनिया। अब बेबोलियानिया क्या किया? ये जो सुमेर जहां पर था इस पूरे जगह पर अब किसका कब्जा हो गया? बेबिलोनिया का। बेबोलिया ने किनको कहा गया? तो एक शहर था यहां पर जिनका नाम था बेबिलोन। तो बेबिलोन नगर था। एक शहर था। इसी नगर के वजह से यहां इस जगह का नाम पड़ गया बेबिलोनिया। तो ये जो नाम है

22:24 बेबिलोन नगर के कारण प्रसिद्ध हुआ। जहां से शक्तिशाली बेबिलोनिया साम्राज्य का उदय हुआ था। तो यहां पर फिर एक और साम्राज्य बन गया था जिनको कहते हैं बेबिलोनिया साम्राज्य। और ये बेबिलोनिया जो साम्राज्य है ये किसने बनाया था? बेबिलोनिया के लोगों ने बनाया था। फिर उसके बाद प्यारे बच्चों यहां पर आया आसरिया। यह जो है मेसोपोटामिया के उत्तरी भाग का राज्य था। जैसे दक्षिणी भाग का नाम था सुमेर। तो इसके उत्तरी तरफ ये था आपका आसिया उत्तर साइड में उत्तर ये नीचे दक्षिण ये वाला भाग को दक्षिण ऊपर के साइड को उत्तर तो ये जो आस्रिया जगह है ये मेसोपोटामिया के उत्तरी भाग का नाम था और आस्रियाइयों ने एक विशाल और संगठित साम्राज्य स्थापित किया था। तो जल्दी से अगर हम आपको पूछेंगे कि मेसोपोटामिया में अलग-अलग लोग आए और अलग-अलग नाम पड़ा। सबसे पहले बात करते हैं

23:10 मेसोपोटामिया में जो दक्षिण तरफ के जो लोग रहते थे उन लोगों को कहा गया सुमेरियन और उस जगह का नाम पड़ा सुमेर। तो सुमेर किधर था? मेसोपोटामिया के दक्षिण तरफ था। ठीक? उसके बाद आया अक्कद। तो ये जो अक्कड़ जगह है प्यारे बच्चों ये मेसोपोटामिया के थोड़ा सा उत्तर तरफ था। अक्कद। और यहां के लोग कौन सी भाषा बोलते थे? अकदी भाषा बोलते थे। और सुमेर के लोग कौन सी भाषा बोलते थे? सुमेरी भाषा बोलते थे। और सुमेर के लोगों को सुमेरियन कहा जाता था। अकद के लोगों को अक्कड़ी कहा जाता था। और वहां के भाषा को भी अकड़ी भाषा बोला जाता है। ठीक? उसके बाद फिर आया बेबिलोनिया। बेबिलोनिया क्या है? तो एक शहर था। एक शहर था बेबिलोन नाम का। तो उसी शहर के लोगों ने वहां पर कब्जा कर लिया पूरे सुमेर पर। अब सुमेर पर कब्जा किसका हो गया? बेबिलोनिया का। तो अब सुमेर का नाम पड़ गया बेबिलोनिया। यहीं से बेबुलनिया साम्राज्य जो कि काफी शक्तिशाली

23:57 था। फिर इसके बाद प्यारे बच्चों बेबिलोनिया के बाद आया आसरिया। क्या आया? आसिरिया। बेबिलोनिया के बाद आसरिया जो कि मेसोपोटामिया के उत्तर तरफ था। आसीरिया। तो पहले नाम क्या था? सुमेर। फिर आया अक्कर। फिर उसके बाद आया बेबिलोनिया। फिर आया असरिया। तो हम लोग ये तो समझ गए कि मेसोपोटामिया के अलग-अलग जगह का अलग-अलग नाम था। लेकिन अब पूछेगा कि किस समय पे यानी कौन से समय पे नाम अलग-अलग था। जैसे हम कहेंगे 2000 में भारत का नाम भारत है। मान लो 2050 में भारत का नाम बदल गया और भारत का नाम कुछ और रख दिया। तो ये पूछेगा ना कि भारत का नाम कुछ और कब रखा गया? तो देखिए सुमेर जो नाम था प्यारे बच्चों ये 3000 ईसा पूर्व था। यानी ईसा मसीह के पैदा होने के 3000 साल पहले नाम पड़ा सुमेर। यह दक्षिणी की भाग का नाम था। है ना?

24:43 मेसोपोटामिया का दक्षिणी भाग का नाम क्या था? सुमेर। यह नाम कब पड़ा? 3000 साल पहले ईसा मसीह के पैदा होने के। फिर उसके बाद अगला नाम था अक्क। अक्कड़ जो है ये अकदी भाषा लोगों का प्रभाव यहां पर था। यानी जो लोग अकदी भाषा बोलते थे उन लोगों वो लोग जिस जगह जो लोग अकदी भाषा बोलते थे तो वो लोग जिस जगह पर रहते थे उसी जगह का नाम था अक्क। अक बोल दीजिए या अक्क बोल दीजिए। और यह जो है प्यारे बच्चों कब नाम पड़ा? लगभग ईसा मसीह के पैदा होने के 2400 साल पहले की बात है। फिर उसके बाद बेबिलोन एक शहर था। उसी के वजह से नाम पड़ा बेबिलोनिया एक जगह का नाम। और बेबिलोनिया नाम कब पड़ा? तो ईसा मसीह के पैदा होने के 2000 साल पहले की बात है। फिर प्यारे बच्चों एक और जगह था वो है असीरिया। तो असीरिया जो नाम है ये उत्तर में असीरियाओं का राजा था। उत्तर साइड यानी मेसोपोटामिया का उत्तर

25:30 तरफ नाम क्या पड़ा? असीरिया। और ये कब पड़ा? ईसा मसीह के पैदा होने के 1100 साल पहले की बात है। तो आप लोग हो सके तो स्क्रीनशॉट ले लीजिए। ये याद रखिएगा। पहले नाम था सुमेर फिर अक्क फिर बेबिलोनिया फिर असीरिया। दक्षिणी भाग का नाम सुमेर। अकरी भाषा लोग कहां रहते थे? अक्क में। बेबीलोन शहर की वजह से बेबिलोनिया नाम पड़ा। और उत्तर में जो अस उत्तर में असरियाई लोग थे और इसको इस जगह को उत्तर में यानी मेसोपोटामिया का उत्तर तरफ का जो जगह है उसको कहा गया असीरिया। और मेसोपोटामिया का जो दक्षिण तरफ का जगह है इसको कहा गया सुमेर। ठीक है? बहुत अच्छा। अब प्यारे बच्चों अगला टॉपिक देखते हैं। मेसोपोटामिया में पुरातात्वीय खोज और उनका महत्व। पुरातात्वय खोज मतलब क्या होता है? देखिए दो शब्द आपको याद रखना पड़ेगा जब आप 11th क्लास में आ गए हैं तो। और ये शब्द बार-बार आएगा। ठीक है? एक होता है प्यारे बच्चों पुरातत्व। पुरातत्व। हम आपको पहला

26:17 चैप्टर में भी बताए थे। पुरातत्व। पुरातत्व का मतलब क्या होता है? पुरातत्व का मतलब होता है उन चीजों को पुरातत्व कहा गया जो खुदाई के दौरान मिलता है जिनसे इतिहास के बारे में पता चलता है। जैसे आप किसी जगह पर जाते हैं वहां पर खुदाई करते हैं और खुदाई करने के बाद जमीन के नीचे आपको कुछ मिलता है और उस चीज से जो चीज आपको मिला जमीन के नीचे अगर उस चीज से इतिहास के बारे में पता चला तो इसका मतलब उस चीज को उस सामान को उस वस्तु को पुरातत्व कहेंगे। जैसे मान लो आपने जमीन खुदाई किया वहां पर आपको मिल गया पत्थर या मान लो वहां पर आपको मिल गया सिक्का क्या मिल गया सिक्का या मान लो आपको जमीन के नीचे मिल गया हड्डी क्या मिल गया हड्डी तो ये जो हड्डी है ये जो सिक्का है ये जो पत्थर है अगर इन सारी चीजों से देखिए जमीन के नीचे तो मिला लेकिन इन चीजों से किसी

27:04 सभ्यता के बारे में या किसी इतिहास के बारे में पता चला तो ही हम लोग इस चीज को पुरातत्व कहेंगे। तो जैसे मेसोपोटामिया की सभ्यता है इसके बारे में कैसे पता चला? भाई आज से 4000 साल 5000 साल पहले की बात कर रहे हैं। अब कोई इंसान जिंदा तो है नहीं जो हम लोगों को बताएगा कि हां एक मेसोपोटामिया की सभ्यता था। कोई तो जिन सब मर गया होगा भाई कोई जिंदा नहीं है। तो इसका मतलब ये जो मेसोपोटामिया की सभ्यता इसके बारे में कैसे पता चला? तो जब वहां पर खुदाई किया गया खुदाई करने के बाद जमीन के नीचे बहुत सारी चीजें मिली। लोग हैरान हो गए कि यार जमीन के नीचे ये सब चीज कहां से मिला? तो बहुत सारी चीजें मिली। उन चीजों से फिर पता चला कि यहां पर एक सभ्यता था जिसको मेसोपोटामिया कहते हैं और यही मेसोपोटामिया उन वो चीज जिससे मेसोपोटामिया के बारे में पता चला उन चीजों को पुरातत्व कहते हैं। तो पुरातत्व उन चीजों को कहते हैं। ठीक है? अब जो इन

27:51 चीजों से खोज करता है। मान लो जो वैज्ञानिक ये काम करता है। यह तो समझ में आ गया कि पुरातत्व किसे कहते हैं? तो प्यारे बच्चों पुरातत्व उन चीजों को कहते हैं जिनसे इतिहास के बारे में पता चला। ठीक? अब जो यह पता लगाया यानी जो वैज्ञानिक जो पुरातात्विक यह पता लगाया उसको कहा जाता है पुरातात्विक या पुरातद्विद। ठीक है? पुरातात्विक जो पता लगाने वाला है। समझ गए चीजों को? तो यहां पर देखो अब अब हम लोग पढ़ेंगे पुरातत्वीय खोज और उनका महत्व। यानी अब हम लोग देखेंगे कि ये जो मेसोपोटामिया की सभ्यता है जो दो नदी के बीच में था। एक आपका फरात नदी एक आपका दजला नदी। ये दो नदी है। ठीक है? तो दो नदी के बीच में जो जगह था ये मेसोपोटामिया इस जगह के बारे में कैसे पता चला? तो देखिए सबसे पहले इसकी जो खोज है ना वो 1840 के दशक में मेसोपोटामिया में

28:39 खुदाई शुरू हुई। उरू और मारी जैसे स्थलों पर वर्ष तक खुदाई चली। जैसे अगर हम बात करेंगे कि ये जो सिंधु घाटी सभ्यता है 12th क्लास में जब जाओगे तो एक सभ्यता पर हो गई सिंधु घाटी सभ्यता जिसको हड़प्पा सभ्यता कहते हैं। तो हड़प्पा सभ्यता के बारे में कहां से पता चला? एक जगह था प्यारे बच्चों जिस जगह का नाम है हड़प्पा। हड़प्पा से ही सबसे पहले हड़प्पा सभ्यता के बारे में पता चला और हड़प्पा सभ्यता का खोज कब हुआ था? 1921 में। तो उसी तरह से यहां पर है मेसोपोटामिया की सभ्यता। तो मेसोपोटामिया की सभ्यता जो है इसकी खोज कहां से हुई? तो दो शहर था। एक शहर का नाम था माड़ी। ध्यान से देखना। एक शहर का नाम था माड़ी। एक शहर का नाम था उरू। यहां पर है उरू। तो यह है आपका उरू। यह है आपका माड़ी। तो, यह दोनों शहर में क्या हुआ? खुदाई किया गया। खुदाई। जब यहां पर खुदाई हुआ ये दोनों शहर में तो बहुत सारी चीजें

29:26 मिला। बहुत दिनों तक खुदाई चला। कई सालों तक फिर यहां पर बहुत सारी चीजें मिला। इन्हीं चीजों से पता चला इस मेसोपोटामिया की सभ्यता के बारे में। तो खोजों की शुरुआत तो मेसोपोटामिया की खोज कब शुरू हुई? 1840 में। तो 1840 के दशक में मेसोपोटामिया में खुदाई शुरू हुई। और दो जगह एक जगह का नाम था उरू। एक जगह का नाम था माड़ी। ये दोनों जगह पर प्यारे बच्चों कई सालों तक खुदाई चली। ठीक? जब खुदाई चला तो खुदाई से बहुत सारी चीजें मिला वहां पर। जैसे जमीन के नीचे जब खुदाई किया गया तो खुदाई करने के बाद जेसीबी या बहुत सारी चीजों से खुदाई किया गया तो खुदाई करने के बाद जमीन के नीचे बहुत सारी इमारत बना हुआ था बिल्डिंग बना हुआ था जमीन के नीचे से बहुत सारी मूर्ति मिला बहुत सारा आभूषण मिला आभूषण कहते हैं जेवर जैसे लड़की लोग क्या पहनती है गहना जेवर जेवरात ज्वेलरी

30:12 ये सब झुमका ये सब जो पहनते हो ना जी ये सब को जेवर कहा गया इसी को कहते हैं आभूषण उसके बाद कब्र मिला बहुत सारे लोगों का कब्र बना हुआ था जमीन के नीचे आखिर ये किन लोगों का कब्र था? बहुत सारा औजार मिला जमीन के नीचे। बहुत सारी मुद्रा मिला। मुद्रा मतलब सिक्का मिला। हजारों लिखित दस्तावेज, बहुत सारी चीजें मिला जो लिखा हुआ था। तो आखिर जमीन के नीचे जब यहां पर दो जगह एक जगह का नाम था माड़ी। क्या जगह का नाम था? मारी। एक जगह का नाम था उरू। ये दोनों जगह पर कई सालों तक खुदाई चला। खुदाई चलने के बाद बहुत सारी चीजें मिली। तो सवाल उठा कि आखिर ये दोनों जगह पर ये सामान आए कहां से? मारी और उरुक ये दोनों जगह पर यह सामान आए कहां से? तब फिर लोग धीरे-धीरे मेसोपोटामिया की सभ्यता के बारे में समझने लगे। यूरोप वासियों के लिए

30:58 महत्व आखिर जो यूरोप के लोग थे वो आखिर क्यों इतना महत्व देते थे? क्यों आखिर खोज किया मेसोपोटामिया का? तो देखिए ईसाई लोगों का एक किताब है बाइबल। बाइबल का दो भाग है। जब शुरू शुरू में बाइबल किताब था उसको कहा जाता था ओल्ड टेस्टामेंट। लेकिन अभी बहुत सारी चीजें बाइबल का बदल दिया गया है। तो बात कर रहे हैं ओल्ड टेस्टामेंट का। तो बाइबल का एक पुराना जो ओल्ड टेस्टामेंट वाला भाग है वहां पर मेसोपोटामिया का उल्लेख है। जी हां यानी ईसाई लोगों का कहना है कि उनकी जो बाइबल किताब है उन किताबों में मेसोपोटामिया के बारे में दिया गया है। तो अब वो लोग तो भाई चाहेगा ही कि आखिर हम लोगों के धार्मिक किताब में मान लीजिए आपके धर्म की किताब में अगर किसी के बारे में दिया होगा तो आप खोजोगे ना। जैसे मान लो गीता में किसी जगह के बारे में दिया होगा या कुरान में किसी जगह के बारे में दिया होगा तो हम

31:44 लोग क्या करेंगे? जा के खोजेंगे ना कि देखें क्या दिया हुआ है। तो उसी तरह से बाइबल का जो ओल्ड टेस्टामेंट है यहां पर मेसोपोटामिया के बारे में इस सभ्यता के बारे में कई सारी बातें लिखी हुई है। उनके बाद एक किताब है बुक ऑफ जेनेसिस। बुक ऑफ जेनेसिस यहां पर जो है इस किताब में जो है सुमेर नाम का एक शहर के बारे में कहा गया है। अब कहा ये सुमेर नाम का शहर आखिर कहां पर है? तब पता चला कि मेसोपोटामिया का ही एक शहर का नाम है सुमेर। मेसोपोटामिया के एक शहर का नाम है सुमेर। तो बुक ऑफ जेनेसिस ये भी ईसाई की किताब है। इस ये जो बुक ऑफ जेनेसिस है ना ये आखिर बाइबल का ही एक भाग है। तो बुक ऑफ जेनेसिस में भी लिखा हुआ है सुमेर के बारे में और बाइबल का ओल्ड टेस्टामेंट में भी लिखा हुआ है मेसोपोटामिया के बारे में। तो जो ईसाई लोग थे वो कहा कि अच्छा मेसोपोटामिया का नाम का कोई ना कोई तो जगह है। फिर उन लोगों ने

32:30 क्या किया जो यूरोपीय विद्वान है उन्होंने अपने पूर्वजों की भूमि अब वो लोग कहा कि अच्छा इसका मतलब ये जो मेसोपोटामिया है ये जो सुमेर शहर है ये सभी क्या है? यह सभी ईसाई लोगों का जमीन है। यह हमारे पूर्वज का जमीन है। वो खुदाई से बाइबल की कहानियों को प्रमाणित करना चाहते थे। और वो क्या चाहते थे कि जो बाइबल में जो सब चीज लिखा हुआ है वो सब चीज सच हो। इसके लिए उन्होंने मेसोपोटामिया में और खुदाई करवाया। समझ गए बात? तो अगर पूछेगा कि बताइए यूरोप वासी जो लोग हैं उनके लिए आखिर ये इतना महत्व क्यों था? आखिर वो लोग मेसोपोटामिया को लेकर इतना दिलचस्पी क्यों लेता था? तो इसीलिए लेता था क्योंकि उनकी जो किताब थी बाइबल वहां पर मेसोपोटामिया के बारे में लिखा हुआ था और वो लोग चाहते थे कि जो हमारी किताब में लिखा हुआ है वो दुनिया को दिखाएंगे कि ये सच है। इसीलिए उन लोगों ने और खुदाई करवाया मेसोपोटामिया

33:16 का ताकि लोगों को सच पता चले। तो महत्वपूर्ण खुदाई अभियान 1873 में ब्रिटिश अखबार ने ब्रिटिश म्यूजियम के अभियान को धन दिया यानी पैसा दिया ताकि बाइबल की जल प्रलय कथा से जुड़ी पट्टिका खोजी जा सके। और फिर ब्रिटिश अखबार जो है ब्रिटिश म्यूजियम को पैसा दिया और भी है ना यानी कहने का मतलब और ज्यादा पैसा वगैरह खर्च किया ताकि मेसोपोटामिया की और खुदाई हो और सारी चीजें मिले जिससे कि जो भी बाइबल में दिया हुआ है वो सब चीज सच साबित हो। समझ गए? अब प्यारे बच्चों ये चीज आप समझ गए कि आखिर इसकी जो खोज है वो क्यों शुरू हुई थी। अब आगे बात करते हैं पुरातात्वीय दृष्टिकोण में परिवर्तन। अब पुरातात्वय दृष्टिकोण में परिवर्तन का मतलब हुआ कि पहले के लोग जब खोज करते थे वो कैसे सोचते थे? अभी के जो लोग खोज करते हैं वो कैसे सोचते हैं? मान लीजिए आज से हजारों साल

34:02 पहले या कई सौ साल पहले जब किसी सभ्यता की खोज होती थी तो वो लोग कैसे सोचते थे और मान लो आज आप खोजने के लिए जाइएगा किसी चीज को तो आप कैसे सोचिएगा ये दोनों में अंतर देखते हैं देख ध्यान से देखिएगा पहले यानी प्रारंभिक दृष्टिकोण खुदाई का मकसद था बाइबल की कहानियों को सही साबित करना यानी पहले जो लोग खुदाई करता था क्यों करता था इसीलिए करता था ताकि बाइबल में जो चीज लिखा हुआ है वो सब चीज सच साबित हो इसीलिए लोग पहले खुदाई करता था यानी इसीलिए लोग इतिहास के बारे में पता लगाता था कि भाई बाइबल में ये सब चीज लिखा हुआ है। मेरी किताब में अगर हम प्रूफ कर दिए तो हमारा धर्म सच्चा हो जाएगा। बाइबल सच्चा हो जाएगा। उसके बाद अब खुदाई क्यों करता है? तो अब खुदाई का मकसद होता है सच्चाई को वैज्ञानिक तरीके से पता लगाना। यानी अब जो खुदाई करता है तो लोग वैज्ञानिक तरीके से सच्चाई का पता लगाता

34:48 है। लेकिन पहले क्या था कि बाइबल में बहुत सारी बात लिखा हुआ है। उनको सच साबित करना। इसीलिए लोग खुदाई करते थे। दूसरा ध्यान सिर्फ राजाओं, शासक और अमीर लोगों की चीजों पर था और पहले जो है लोग क्या करते थे? सिर्फ राजा पर ध्यान रखते थे कि कौन सा राजा था? है ना? कौन सा राजा था, कौन सा शासक था, कौन सा अमीर लोग था? इन लोगों पर ध्यान देते थे। खुदाई का मकसद सिर्फ इन लोगों को खोज करना था। लेकिन अब जो खोज किया जाता है या खुदाई किया जाता है, आम लोग जैसे किसान व्यापारी, उनके भी जीवन को समझा जाता है कि आम लोग कैसे रहते थे। अब जैसे पहले अगर खोज होता था तो पहले बाइबल में जो लिखा हुआ है कि भाई बाइबल में इस शहर बाइबल में एक शहर का नाम है सुमेर। सुमेर शहर का नाम लिखा है। चलो सुमेर शहर कहां है? देखो अच्छा ये सुमेर है। चलो खुदाई करो इसलिए चाहता था। फिर पहले सिर्फ राजा और शासक और इन लोगों के

35:33 बारे में पता लगाया जाता था। लेकिन अब क्या है? खुदाई का मकसद है वैज्ञानिक तरीके से सच्चाई पता लगाना। खुदाई का मकसद है जो आम लोग हैं इनके बारे में पता लगाना कि आम लोग ये सब लोग कैसे रहते थे? जीवन कैसे गुजारते थे। खुदाई के लिए तकनीकी बहुत सीमित थी। अब पहले क्या था कि खुदाई के लिए कोई टेक्नोलॉजी नहीं था। पहले जेसीबी नहीं था। पहले जमीन खोदने वाला बहुत सारे मशीनें नहीं थी। लेकिन आज के दिन बहुत सारी तकनीक है। बहुत सारी टेक्नोलॉजी है। बहुत सारी मशीनें खुदाई के लिए। समझ गए? तो पहले के लोग किस प्रकार सोचते थे किसी चीज के बारे में पता लगाने के लिए, इतिहास के बारे में पता लगाने के लिए और आज के लोग किस प्रकार सोचते हैं। पहले के लोग बाइबल को सच्चा चाहते थे। आज के लोग ये चाहते हैं। तो आसान भाषा में अगर आप समझोगे तो पहले के लोग सोचते थे कि खुदाई से बाइबल की कहानी सच होगी। अब लोग

36:19 सोचते हैं कि इतिहास की सच्चाई हमें जाननी है। चाहे वो बाइबल से मिले या ना मिले हमें सच्चाई जाननी है भाई। चाहे बाइबल में जो लिखा हुआ हो। पहले सिर्फ राजा रानी की चीजें ढूंढते थे। पहले सिर्फ राजा रानी की बात होती थी। राजा रानी की चीजों को ढूंढा जाता था। अब आम आदमी की चीजों पर भी ध्यान देते हैं कि आम आदमी कैसे रहता था। उनके बारे में भी पता लगाओ। पहले पुराने तरीके से खुदाई करते थे। पहले मशीन नहीं था तो पुराने तरीके से खोदे जाते थे। अब नए-नए मशीन आ गए हैं। अब जब नए-नए मशीन आ गए हैं तो मशीन से खुदाई करते हैं ताकि चीजों का पता लगाया जाए। तो इस तरह से प्यारे बच्चों पहले और आज में अंतर है। अब हम लोग प्यारे बच्चों देखते हैं मेसोपोटामिया की विशेषता यानी अपना जो मेसोपोटामिया सभ्यता है इनकी विशेषता के बारे में देखते हैं। तो देखिए यह आपका मेसोपोटामिया है। है ना? जैसे यह क्या है? मेसोपोटामिया की एक नदी है। जिस नदी का नाम क्या है? दजला नदी। और

37:06 यह नीचे वाला नदी है जिसको हम लोग क्या कहें? बताइए। फरात नदी दो नदी था दजला नदी फरात नदी और इन दोनों नदी के बीच का जो जगह था प्यारे बच्चों यह वाला जगह इसी को कहते थे हम लोग मेसोपोटामिया अब हम लोग बात करेंगे मेसोपोटामिया के विशेषता को लेकर के यानी मेसोपोटामिया के हर एक भाग के बारे में बात करेंगे जैसे ऊपर की साइड को क्या कहा जाता है जल्दी से बताओ ऊपर की साइड को कहा जाता है उत्तर तो इस साइड का बारे में बात करेंगे इस तरह से बांट दीजिए है ना ध्यान से देखिए तो ऊपर की साइड को उत्तर कहा जाता है इधर के साइड को पश्चिम कहा जाता ठीक है? हमने अभी बात किया पश्चिम। नीचे के साइड को क्या कहा जाता है? दक्षिण। इधर जो है इधर वाले साइड को क्या कहा जाता है? पूरब। ठीक है? तो अब हम लोग किसके बारे में बात करेंगे? पूर्वोत्तर भाग की बात करेंगे। आप कहोगे

37:51 सर पूर्वोत्तर भाग कौन सा हुआ? पूर्वोत्तर यानी पूर्व और उत्तर। पूर्व उत्तर कौन सा भाग हुआ? पूर्व और उत्तर। तो पूरब आपका उधर है। उत्तर आपका उधर है। यानी अब हम लोग बात करेंगे इस जगह के बारे में कि मेसोपोटामिया का यह वाला जो जगह है वो कैसा था? समझ गए? पूर्वोत्तर का मतलब ऊपर के साइड को उत्तर। इधर कहते हैं पश्चिम। इधर कहते हैं पूरब। नीचे के साइड को कहते हैं दक्षिण। तो आपको कहेंगे पूर्वोत्तर किसे? तो पूर्व उत्तर तो इधर हो गया पूरब। इधर हो गया उत्तर। तो पूर्वोत्तर जो है इधर वाला भाग हो गया। अगर हम कहेंगे पश्चिमोत्तर तो पश्चिम हो गया इधर। उत्तर हो गया उधर। तो पश्चिम और उत्तर किधर होगा? इधर वाला भाग। इधर हो जाएगा पश्चिम उत्तर। समझ गए आप? तो अब हम लोग यहां पर बात कर रहे हैं प्यारे बच्चों पूर्वोत्तर भाग का। यानी कि इस जगह के बारे में बात कर रहे हैं कि मेसोपोटामिया का जो यह वाला जगह है वो कैसा था? ध्यान से देखिएगा,

38:37 चीजों को समझिएगा। देखो, यहां चारों तरफ हरेभ-भरे मैदान थे। यानी इस जगह पे ना मेसोपोटामिया का जो यह वाला जगह है, यहां पर हर जगह हरे-भरे मैदान था। यहां बड़े-बड़े पहाड़ थे, पेड़-पौधे थे। बड़े-बड़े पहाड़ थे। समझिए बड़े-बड़े पहाड़ और पेड़-पौधे से ढका हुआ था। यानी पहाड़ों में भी पेड़-पौधा भरा हुआ था। यहां साफ और मीठे पानी के झरने थे। और यहां पर पानी का झरना भी था। साफ एकदम पानी का झरना और मीठा पानी था। एकदम पीने लायक। जंगली फूल खिलते थे और यहां पर जंगल वगैरह बहुत ज्यादा था। यहां पर अच्छी फसल होती थी बहुत ज्यादा और यहां पर बारिश भी बहुत ज्यादा होती थी जिसकी वजह से अच्छी फसल होता था। यहां 7000 से 6000 ईसा पूर्व के बीच खेती की शुरुआत हुई थी। तो पूछा जाएगा कि यहां खेती कब से होने लगी? तो 7000 से 6000 ईसा पूर्व के पहले। यानी

39:22 कहने का मतलब ईसा मसीह के पैदा होने के लगभग 6000 7000 साल पहले यहां पर खेती लोग करना शुरू कर दिया था। तो जल्दी से बताओ हम लोग किसके बारे में पढ़ रहे हैं? ये वाला भाग के बारे में। तो यहां जो है किस तरह का जगह था? सिर्फ हरेभरे मैदान था। देखो बारिश बहुत ज्यादा होती थी। अब जहां पर भी बारिश होता है ना तो वहां पर जंगल बहुत ज्यादा होता है। तो यहां का जो जगह है वो हरे-भरे मैदान था। यहां पर बड़े-बड़े पहाड़ थे। यहां पर पहाड़ों में भी जंगल भरा हुआ था। फिर यहां पर झरना भी था और वो पानी भी बहुत शुद्ध होता था और यहां पर पानी आसानी से मिल जाता था जिसकी वजह से लोग खेती करते थे और लगभग 6000 7000 साल ईसा पूर्व पहले लोग यहां पर खेती करना शुरू कर दिया था। तो यह है आपका पूर्वोत्तर भाग। अब हम लोग बात करते हैं उत्तरी भाग का। उत्तरी भाग मतलब हम लोग किसके बारे में बात कर रहे हैं? तो ध्यान से देखिएगा। उत्तरी यानी इस वाले भाग की

40:08 बात कर रहे हैं। उत्तरी उत्तरी मतलब ऊपर वाले भाग का ऊपर। ठीक? तो उत्तरी के बारे में बात करें तो उत्तरी दिशा में ऊंची जमीन पर घास के खुले मैदान थे। देखिए घास का मैदान को ही स्टेपी कहा गया। अगर ये शब्द आए स्टेपी तो स्टेपी का मतलब क्या? तो मेसोपोटामिया में एक जंगल था। घास का मैदान था जिसको कहा गया स्टेपी। घास का मैदान जिसको स्टेपी कहा गया। तो हम बोलेंगे कि जो बकरी है वो स्टेपी में चरने जाता था। तो इसका मतलब क्या हुआ? बकरी जो है घास का मैदान में चरने जाती थी। समझ गए? बकरी जाती थी जाता था नहीं। तो अब हम लोग उत्तरी भाग के बारे में पढ़ रहे हैं। तो उत्तर दिशा में ऊंची जमीन पर घास के खुले मैदान है। यानी इधर की बात करूं तो यहां पर भी घास वगैरह बहुत ज्यादा था। यहां लोग ज्यादातर पशुपालन करके आजीविका चलाते थे। और यहां के लोग ज्यादातर जानवर पालते थे। पशु जैसे गाय, बकरी ये सब पालते

40:54 थे। क्योंकि यहां पर स्टेपी मैदान था, जंगल था यहां पर बहुत ज्यादा। इसलिए यहां के लोग क्या करते थे? अपना जो जिंदगी गुजारते थे पशुपालन करके यानी जानवरों को पाल के। बहुत सारे लोग गांव में आज भी गाय बकरी पालते हैं फिर उसको बेचते हैं। इससे पैसा आता है। सर्दियों की बारिश के बाद जानवरों के लिए यहां घास चारा मिल जाता था। और जब यहां पर बारिश होती थी प्यारे बच्चों तो बारिश होने के बाद जंगल होता है। बारिश होने के बाद ही घास होता है। तो बारिश होने के बाद घास होता था और यहां जानवरों को चारा यानी घास मिल जाता था। अब बात करते हैं पूर्वी भाग का। पूरब किधर है? जल्दी से बताओ। पूर्व की तरह तो इधर आपका उत्तर है इधर पश्चिम है तो इधर आपका पूरब है तो अब हम लोग बात कर रहे हैं इस भाग का यानी मेसोपोटामिया का इस जगह के बारे में बात कर रहे हैं तो मेसोपोटामिया का जो जगह है दजला नदी और उसकी सहायक नदियां ईरान की ओर जाने के लिए अच्छा

41:41 परिवहन का साधन था। आप अगर देखोगे ध्यान से तो दजला नदी किधर है? ऊपर के साइड यह आपका दजला नदी है। और जो नीचे वाला नदी है ये वाला जो नदी है इसको कहते हैं फ्रात नदी। इसको कहते हैं दजला नदी। तो जो दजला नदी है वो किधर था? पूरब तरफ था। और जो ये फरात नदी है ये उत्तर तरफ ये पश्चिम तरफ था अगर देखोगे तो इधर पूरब इधर पश्चिम तो दजला नदी पूरब इधर पश्चिम बाया तरफ पश्चिम दाहिना तरफ पूरब ठीक तो दजला नदी जो है पूछा गया कि जो दजला नदी है और उसकी दजला नदी के बाद भी और भी बहुत सारी नदी थी तो उन ये जो नदी है दजला नदी और उनकी सहायक नदी यानी दजला नदी के अगल-बगल की नदी को सहायक नदी कहा गया। तो ये सारी जो नदी है वो ईरान की ओर जाने के लिए अच्छा परिवहन का साधन था। आपको पता है पहले के जो लोग हैं आज भी लोग नदी से भी एक जगह से दूसरी

42:27 जगह जाते हैं। है ना? पानी जहाज से तो जिन लोगों को ईरान जाना होता था ईरान तो वो लोग दजला नदी से जाते थे। दजला नदी से बहुत ही कम समय में चले जाते थे और बहुत कम पैसे खर्च होते थे। तो याद रखिएगा जो पूर्वी भाग है यहां पर नदी था और नदी से लोग कहां जाते थे? ईरान जाते थे। अब बात करते हैं दक्षिणी भाग का। दक्षिणी भाग मतलब ऊपर के साइड को उत्तर कहते हैं। तो नीचे के साइड को क्या कहते हैं? दक्षिण। यानी अब हम लोग ये दक्षिणी भाग का बात कर रहे हैं। ठीक है? दक्षिणी भाग रेगिस्तानी इलाका था। देखिए उत्तरपूर्वी भाग में क्या था? सिर्फ जंगल ही जंगल था। सिर्फ बारिश ही बारिश होता था। पहाड़ ही पहाड़ था। खेती ही खेती करता था। लेकिन जो नीचे वाला भाग है प्यारे बच्चों ये सिर्फ रेगिस्तानी था। यहां पर कोई खेती नहीं होती थी। यहां पर रेगिस्तानी था। पूरा इलाका रेगिस्तानी था। यहां पर सबसे पहले लिखने की कला यानी

43:14 लेखन प्रणाली और शहरों की शुरुआत हुई। तो पूछा जाएगा मेसोपोटामिया का कौन सा जगह है जहां पर लिखने की शुरुआत हुई लिपि तो याद रखिएगा ये दक्षिणी भाग से ही लिखने की शुरुआत हुई थी और यहीं से प्यारे बच्चों शहर की भी शुरुआत यहीं से हुआ था और यहां उपजाऊ जमीन भी मिलती है और यहां पर कहीं-कहीं पे उपजाऊ जमीन भी है ऐसा नहीं समझना कि बिल्कुल नहीं है समझ गए स्टेप का मतलब मैदानी क्षेत्र याद रख लो शिवानी हां बिल्कुल स्टेप का मतलब मैदानी क्षेत्र यानी जंगल का मैदान था उसी को स्टेपी कहा सिंपली याद रखना। ठीक है? बहुत अच्छा। अब बात करते हैं तो यह प्यारे बच्चों, यह चार जगह का आप याद रखिएगा। पूछा जाता है कि मेसोपोटामिया के पूर्वोत्तर भाग की विशेषताएं बताइए। तो पूर्वोत्तर भाग की ये विशेषता है कि यहां सिर्फ चारों तरफ

43:59 हराभरा मैदान था। पेड़-पौधे, पहाड़ वगैरह सब कुछ था। बारिश होती थी, मीठा पानी, झरना था। जंगल के फूल खिलते थे, खेती होती थी। फिर उत्तरी भाग में जो है यहां पर भी घास का मैदान था। यहां लोग ज्यादातर पशुपालन करते थे। अपनी जिंदगी गुजारते थे और बारिश में यहां पर जंगल वगैरह होता था जो कि पशुओं के काम आता था। ठीक है? फिर हम लोग बात किए पूर्वी भाग के बारे में तो जो पूर्वी भाग था पूर्वी भाग ये आपका इधर वाला भाग को पूर्वी भाग कहते हैं। तो इधर आपका था दजला नदी। तो इन नदियों से क्या करते थे? लोग एक जगह से दूसरी जगह यानी ईरान वगैरह जाते थे। तो पूर्वी नदी जो थी अह मतलब यह जो दजला नदी है इन नदियों से एक जगह से दूसरी जगह जाया जाता था। और दजला नदी पूरब तरफ़ था। फिर बात की दक्षिण तरफ़। तो दक्षिण जो तरफ़ था प्यारे बच्चों यानी नीचे का जो साइड है, यह रेगिस्तानी इलाका था। लेकिन यहीं से लिखने की कला की सबसे पहले शुरुआत हुई। यहीं से दक्षिणी

44:46 मेसोपोटामिया के दक्षिणी भाग से ही लिखने कला की शुरुआत हुई। मेसोपोटामिया के दक्षिणी भाग से ही शहरी जीवन की शुरुआत हुई। और यहां पर उपजाऊ जमीन भी मिलता है। इस जगह पे उपजाऊ जमीन भी मिलता है कहीं-कहीं पे। मेसोपोटामिया में खेती की शुरुआत और विकास यानी मेसोपोटामिया में खेती की शुरुआत कैसे हुई? उनका विकास कैसे हुआ? तो देखिए बहुत पहले जब इंसान शिकार और फल तोड़कर जीवन बिताता था। तभी एक जगह थी मेसोपोटामिया। यानी उस समय के लोग पता है ना? पहले के लोग खेती करने तो जानते नहीं थे। तो लोग क्या करते थे? पेड़-पौधे में जो फल आता था, फल खा लेता था या जानवरों को मार के खाता था, शिकार करता था या फल खाता था क्योंकि उनको तो खाना बनाना ये सब कुछ आता ही नहीं था। खेती करना तो आता ही नहीं था। तो बहुत पहले जब इंसान शिकार करता था, फल तोड़कर खाता था। उसी समय मेसोपोटामिया का एक नाम का जगह था

45:31 जहां पर लोग खेती करने की शुरुआत कर दिया। तो बताइए खेती की शुरुआत भी सबसे पहले कहां पर हुई? मेसोपोटामिया में लगभग 7000 से 6000 साल ईसा पूर्व है। यानी ईसा मसीह के पैदा होने के 6000 साल से 7000 साल पहले की बात है। यहीं पर इंसानों ने धीरे-धीरे खेती करना शुरू किया। तो बताइए खेती करना शुरू कहां पर किया? मेसोपोटामिया में। कब? ईसा मसीह के पैदा होने के 6000 7000 साल पहले। लेकिन ये खेती आसान नहीं थी। दक्षिण मेसोपोटामिया बारिश बहुत कम होती थी। जमीन रेगिस्तानी थी। अब ये जो खेती करना है वो आसान नहीं था। क्योंकि ये आपका मेसोपोटामिया है। ठीक? अब ये जो दक्षिणी भाग है ये क्या है? रेगिस्तान है पूरा। यहां तो पूरा रेगिस्तान है। दक्षिणी भाग में। तो बताइए खेती करना क्या आसान बात है। कैसे भाई? बारिश ही नहीं है। बिना पानी का बिना बारिश का क्या खेती होता है? बिल्कुल नहीं

46:18 होता है। तो खेती करने की शुरुआत तो मेसोपोटामिया में इंसानों ने किया। लेकिन ये खेती करना आसान नहीं था। क्यों? क्योंकि दक्षिणी भाग रेगिस्तानी था। यहां पर बारिश बहुत कम होती थी। तो फिर लोग खेती कैसे करते थे? तो फिर लोग खेती कैसे करते थे? तो इसका उत्तर है नदियां। क्योंकि खेती करने के लिए क्या चाहिए? पानी चाहिए। पानी कहां से मिलेगा? नदी से मिलेगा। और हम सब जानते हैं दो नदी यहां पर है। एक आपका है दजला नदी, एक है फरात नदी। तो अब खेती कैसे करते थे? तो हर साल जब दजला नदी और फरात नदी में बार आती थी तो उनके साथ बहकर उपजाऊ मिट्टी आती और खेतों को ढक देती। अब जब आप देखोगे नदी के किनारे में अगर बहुत सारे लोग क्या करते पता है? जो लोग नदी के किनारे होते हैं वो क्या करता है? नदी के किनारे गड्ढा खोद

47:04 देता है और वह सारा मिट्टी को बेच देता है। फिर जब बार आता है ना वो सारा गड्ढा भर जाता है। क्योंकि जब बार का पानी जब बह रहा होता है जब बार आता है तो बार पानी के साथ बहुत सारी मिट्टी भी कट के चली जाती है और वो सारा मिट्टी गड्ढा में भर जाता है। तो उसी तरह से यहां जो था आपका मेसोपोटामिया दक्षिणी भाग ये रेगिस्तानी इलाका था। यहां पर कैसे खेती होगा? तो जब दजला नदी और फरात नदी इन दोनों नदी में जब बार आता था बार आती थी तो बार अपने साथ मिट्टी को भी लेकर आता था बार का पानी और वो मिट्टी पूरे इलाका में फैल जाता था जिसकी वजह से यहां पर बहुत ज्यादा खेती होता था जैसे गेहूं जौ की खेती मसूर की खेती ये सारी खेती यहां पर होती थी खास बात यह थी कि फरात नदी जब रेगिस्तान में

47:49 प्रवेश करती तो वो कई धाराओं में बट जाती और ये धाराएं प्राकृतिक रूप से नहरों की तरह काम करती थी। जैसे पहले के जमाने में लोग क्या करते थे पता है? जैसे मान लो यह नदी है। यह क्या है? यह नदी है। यह क्या है प्यारे बच्चों? यह नदी है। ठीक? अब मेरा खेत इस जगह पे है। इस जगह पे मेरा खेत यहां पर है। अब ये नदी का पानी को यहां ले आना है। कैसे लाएंगे? तो लोग क्या करते थे? नहर बनाते थे। नहर छोटा सा नाला की तरह होता था। थोड़ा नाला से बड़ा नहर बनाते थे। और नहर का पानी यहां आता था। फिर यहां का पानी को यहां देते थे। नहर कैसे? तो थोड़ा नाला खुदाई किया जाता था। इस तरह से थोड़ा सा नाला की तरह। तो खुदाई करके लोग पानी को नदी का पानी को यहां ले आते थे और फिर यहां पर खेतों में पानी देते थे। फिर खेती होती थी। तो उसी तरह से अगर हम बात करें यहां का यानी मेसोपोटामिया का तो मेसोपोटामिया में क्या

48:35 हुआ पता है? ये जो फरात नदी था यानी जो ये नीचे का नदी था फरात नदी ये नदी जब रेगिस्तान में आता था जब बार पानी आता था तो थोड़ा-थोड़ा रेगिस्तान में आ जाता था। अब रेगिस्तान में क्या होता था? कई सारे नहर बन जाते थे। प्राकृतिक नहर अपने आप बन जाते थे। लोग बनाते नहीं थे। तो कई सारे नहर अपने आप बन जाते थे। प्राकृतिक नहर जिनको कहा गया और ये बिल्कुल लोग इन्हीं से सिंचाई करते थे और खेतों को सींचते थे। खेतों को सींचना मतलब खेतों को पानी देना सींचना सिंचाई करना। समझ गए? तो यहां के लोगों को पानी कैसे? पहले तो बाढ़ आती थी दजला और फरात नदी में तो बार पानी अपने साथ उपजाऊ मिट्टी लेके आते थे। जिसकी वजह से यहां पर गेहूं, जौ, मसूर की खेती आसानी से हो जाती थी। तो आप देखोगे जहां पर भी नदी है ना तो नदी के बगल वाला जो जगह होता है वहां पर ज्यादातर गेहूं की खेती होता

49:21 है। जौ की खेती होता है। आप देखोगे अभी भी गांव वगैरह में कहीं पे अगर नदी है तो नदी के बगल में देखना ज्यादातर लोग जौ, गेहूं और मसूर की खेती करते हैं। यहां के लोग भी उसकी खेती करते थे और फरात नदी में जब बार आती थी तो वो क्या होता था? अलग-अलग नहर बन जाता था और प्राकृतिक नहर और वो नहर से लोग पानी देते थे खेतों को। ठीक है? अब देखिए संथा संसाधनों का उपयोग कैसे करते थे। तो खेती के साथ-साथ लोग अन्य काम भी करते थे। मेसोपोटामिया के जो लोग हैं वो सिर्फ किसान नहीं थे। याद रखना मेसोपोटामिया के लोग सिर्फ खेती नहीं करते थे बल्कि खेती के साथ-साथ वो और भी काम करते थे जो जीवन को आसान बनाते थे। क्या-क्या काम करते थे? जैसे पशुपालन करते थे। जो उत्तरी भाग के लोग हैं वो लोग जानवर पालते थे क्योंकि स्टेपी मैदान था। बहुत ज्यादा घास था। है ना? तो देखिए तो ये लोग जो है मेसोपोटेमिया के जो लोग हैं

50:08 वो सिर्फ खेती नहीं करते थे। खेती के साथ-साथ भी बहुत सारा काम करते थे। जैसे पशुपालन, भेड़ बकरी चलाना। क्यों? क्योंकि प्यारे बच्चों वहां पर स्टेपी मैदान था। बहुत ज्यादा जंगल था। पूर्वोत्तरी भाग में भी बहुत ज्यादा जंगल था। ठीक है? तो अब पशुपालन करते थे, जानवर पालते थे तो इससे क्या फायदा होता था? इससे मांस है ना उसको काट करके बेचते थे। मांस बेचता था। उनका दूध निकाल करके बेचता था। उनके बाद ऊन। ऊन भी बनता था। भेर के भेर से ऊन बनता है। तो ऊन को भी बेचता था। दूध को भी बेचता था। मांस को भी बेचता था। तो यह सारा फायदा होता था। व्यापार करता था। फिर वहां के लोग मछली भी पकड़ते थे। सिर्फ खेती नहीं करते थे। मछली भी पकड़ते थे। मछली नदियों से मिल जाता था और यह लोग खाते थे। भोजन का मुख्य स्रोत था। कुछ लोग मछली पकड़ के बेचते भी थे। फिर वहां के लोग खजूर के पेड़ भी लगाते थे। दक्षिणी क्षेत्र के लोग

50:55 खजूर के पेड़ भी लगाते थे और ये गर्मियों में मीठे खजूर निकलता था वहां पर गर्मी में और लोग खजूर शौक से खाते थे। तो इन कामों से लोगों को खाने के लिए भोजन पहनने के लिए ऊन और गर्मियों में ताजगी देने वाले खजूर मिल जाते थे। तो याद रखना मेसोपोटामिया बहुत बहुत ज्यादा आगे था भाई। याद रखना वो सिर्फ खेती नहीं करता था। खेती के साथ पशुपालन, मछली पकड़ना, खजूर का पेड़ ये सारा चीज भी वहां पर था। ये भी संसाधन था और इससे भी उन लोगों को फायदा होता था। अब बात करते हैं दक्षिणी मेसोपोटामिया की विशेषता के बारे में। दक्षिणी मेसोपोटामिया मतलब जैसे ऊपर की साइड को क्या कहते हैं? उत्तर। तो उधर हो गया उत्तर और नीचे हो गया दक्षिणी। और इधर हो गया पश्चिम, इधर हो गया पूरब। तो अब हम लोग बात कर रहे हैं दक्षिणी मेसोपोटाम में। यानी नीचे वाला का बात कर रहे हैं।

51:41 नीचे वाला भाग का बात कर रहे हैं। ठीक है? दक्षिणी मेसोपोटामिया को उस समय दुनिया की सबसे उपजाऊ भूमि माना जाता था। अब बताइए यहां पर क्या है? यहां पर क्या है? रेगिस्तान की तरह यहां पर जमीन है। लेकिन इसी जमीन को उपजाऊ जमीन भी कहा जाता था। क्यों? क्योंकि यहां पर ये दो नदी थी दजला नदी और फरात नदी। और इन दोनों नदी में उपजाऊ मिट्टी साथ में लेकर आते थे ये दोनों नदी बार के टाइम। और फिर फरात नदी की वजह से बहुत सारे नहर अपने आप बन जाते थे। है ना? तो दक्षिणी मेसोपोटामिया को उस समय दुनिया की सबसे उपजाऊ जमीन कहा जाता था। बताइए दुनिया की सबसे उपजाऊ यानी कहा जाता है कि ये जो दक्षिणी भाग है यहां पर सबसे ज्यादा खेती होता था उस टाइम पे दुनिया में। तो दक्षिणी मेसोपोटामिया का जो है दक्षिणी मेसोपोटामिया को उस समय दुनिया की सबसे उपजाऊ भूमि माना जाता था।

52:28 यहां के खेतों में भरपूर अनाज उगता था। पर इसकी एक कीमत भी थी। वर्षा बहुत कम होती थी। जमीन तो बहुत उपजाऊ था। खजूर वगैरह बहुत ज्यादा होता था लेकिन हमेशा नहीं होता था। क्योंकि हमेशा जमीन में जान नहीं रहता था। भाई खेती हमेशा कहां होगा? जहां कि जमीन में जान होगा। बताइए आप खेती करिएगा। जमीन में ताकतें नहीं रहेगा तो क्या खेती होगा? नहीं होगा। तो जमीन में जान होना चाहिए। नहीं तो पानी होना चाहिए। अब यहां पर जब बार आता था बार के बाद ही यहां पर खेती होता था। लेकिन सबसे ज्यादा होता था जब भी होता था। तो कहा गया कि दक्षिणी मेसोपोटामिया को उस समय दुनिया की सबसे उपजाऊ भूमि माना जाता है। यहां के खेतों में भरपूर अनाज उगता था इस जगह पे और इसकी एक कीमत थी कि वर्षा यहां पर बहुत कम होती थी। इसलिए लोगों को खेती के लिए पूरी तरह नहरों और नदियों पर निर्भर रहना

53:14 पड़ता था। पूछा जाएगा कि यहां के लोग आखिर सबसे ज्यादा अगर उपजाऊ जमीन है तो यहां तो हमेशा खेती करना चाहिए। फिर यहां के लोग हमेशा खेती क्यों नहीं करते थे? क्योंकि यहां पर वर्षा बहुत कम होती थी। अब लोग नहरों से सिंचाई करते थे। नदियों से सिंचाई करते थे। नहर में हमेशा पानी रहता ही नहीं था। नदी में हमेशा पानी रहता ही नहीं था। तो कहां से खेती करेगा? इसीलिए इसके साथ-साथ लोग पशुपालन और मछली पकड़ने का भी काम करते थे। इससे उनकी आजीविका चलती थी और व्यापार भी होता था। तो अगर सिर्फ खेती के भरोसे रहता अगर सिर्फ खेती करता तो खेती तो हमेशा चलता नहीं था इस जगह पे। तो लोग इसके साथ-साथ क्या करते थे? पशुपालन करते थे, जानवर वगैरह पालते थे, भेड़ बकरी पालते थे, बेचते थे, मछली पकड़ते थे, बेचते थे और व्यापार करते थे। इस तरह से प्यारे बच्चों यहां के लोग करते थे। ठीक है? तो आज हम लोग यहीं तक रहने

53:59 देते हैं। उम्मीद करते हैं यह क्लास आपको बहुत अच्छी लगी होगी। अगर प्यारे बच्चों सच में आपको बहुत अच्छी लगी है तो प्लीज चैनल को सब्सक्राइब कर देना। ऐसे ही आपको हम लोग यहां पर पढ़ाते हैं तनु क्लासेस में जो कि सबसे बड़ा चैनल है पूरे आर्ट्स का। प्यारे बच्चों 11th क्लास जो है ना लगभग हम लोग पूरा फ्री पढ़ाएंगे आपको YouTube में। तो आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन अगर कोई बच्चा है जो पीडीएफ और टेस्ट लेना चाहते हैं। है ना? कोई बच्चा है जो चाहते हैं कि सर हम YouTube में क्लास नहीं करेंगे। हम ऐप में क्लास करेंगे। हमको पीडीएफ भी दे दीजिए। हमको टेस्ट भी दे दीजिए। तो इसके लिए प्यारे बच्चों आप तनु classes ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कर लेना। ठीक है ना? बहुत सारे बच्चे होंगे ना जो मतलब चाहते हैं कि सर हम पीडीएफ लेना चाहते हैं, टेस्ट लेना चाहते हैं, नोट्स लेना चाहते हैं या हमको क्लास YouTube में नहीं एप्लीकेशन में करना है। तो ऐप का नाम है तनु क्लासेस। इस ऐप को प्ले स्टोर से

54:45 डाउनलोड कर लेना। वहां पर आपको पीडीएफ मिल जाएगा। क्या पीडीएफ टेस्ट ये सब चीज का बहुत ज्यादा फीस है? नहीं। सिर्फ 399 में ऑल सब्जेक्ट का एक सब्जेक्ट नहीं 399 में 11th क्लास का सारा सब्जेक्ट का पीडीएफ नोट्स टेस्ट जितना भी चीज है मिल जाएगा। यहां तक कि क्लास भी आपको वहां मिलेगा। तो अगर आपके पास थोड़ी बहुत पैसे हैं तो आप ले सकते हैं। नहीं तो आप YouTube में देख लीजिए। बाकी जब आप 12th क्लास में आ जाइएगा ना तो फिर 12th क्लास में जो पूरा पढ़ाई है हम लोग ऐप में ही लेते हैं। YouTube में नहीं। क्यों? क्योंकि प्यारे बच्चों बढ़िया से पढ़ाना होता है और बहुत सारी चीजें टेस्ट पीडीएफ होमवर्क बहुत सारी चीजें देनी होती है और YouTube में तो सब पॉसिबल नहीं है। बाकी अगर कोई जानकारी चाहिए तो यह नंबर है हम लोगों का आप लोग सेव कर लेना है ना 87 0 96 10975

55:30 ठीक है ये नंबर नोट कर लेना 87096 10975 ये नंबर है इसको नोट कर लेना कोई भी दिक्कत हो आप आराम से पूछ लेना ठीक है उम्मीद करते हैं आज की क्लास आपको बहुत अच्छी लगी होगी आज हम लोग यहीं तक रहने देते हैं फिर जो कल है शहरों का विकास से शुरू करेंगे और यह चैप्टर याद रखना बहुत इंपॉर्टेंट है और अगर आप हिस्ट्री अभी से पढ़ना शुरू करोगे तो 12th क्लास में आपको मजा आ जाएगा क्योंकि बहुत सारी चीजें हैं जो 11th क्लास का ही 12th में आता है। ठीक है? थैंक यू सो मच प्यारे बच्चों। मिलेंगे अगली क्लास में। ऐसे ही हंसते रहो, मुस्कुराते रहो, पढ़ाई करते रहो। ऑल द वेरी बेस्ट। बाय बाय।

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