0:00 तो YouTube ने एक नया मोनेटाइजेशन सिस्टम लॉन्च किया है और भाई यह सिस्टम बिल्कुल तुम्हारे लिए लाइफ चेंजिंग हो सकता है। तुम्हारी जिंदगी बदल के रख सकता है क्योंकि अब तुम्हारी एक वीडियो सिर्फ एक बार नहीं बार-बार पैसा कमाएगी। मतलब एक ही वीडियो तुम्हें लगातार इनकम बना के देगी। मैं मजाक नहीं कर रहा और ना मैं YouTube मोनेटाइजेशन मतलब एड्स की बात कर रहा हूं यहां पर। यह कुछ और है। नील मोहन जो YouTube के करंट सीईओ हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले एक चीज बोली YouTube के इवेंट में जहां पर उन्होंने 30 नए YouTube अपडेट्स भी निकाले। पर उनमें से एक अपडेट एक ऐसा था जिसके बारे में कोई ज्यादा बात नहीं कर रहा है। लेकिन यही अपडेट यूर्स का पूरा पैसा कमाने का तरीका बदल के रख सकता है। अब तक YouTube पे सिर्फ तीन तरीके से पैसा कमाया जाता था। एडसेंस, स्पॉनसरशिप्स और एफिलिएट। लेकिन अब एक छोटा मोनेटाइजेशन
0:46 मॉडल और ऐड कर दिया गया है जो इन सबसे ज्यादा पावरफुल है। क्यों? क्योंकि एक वीडियो जो तुम्हारे 2 साल पहले बनाई गई थी जिसमें आज भी व्यूज आ रहे हैं वो अब तुम्हें दोबारा पैसा कमा के देगी और यही है एक YouTube का नया फीचर एक ऐसा फीचर जिससे यूर्स को हर पुरानी वीडियो से भी नई इनकम मिलेगी और यह कोई नॉर्मल अपडेट नहीं है। यह है स्पॉनसरशिप 2.0 और इसका असली नाम जो है वो है डायनामिक ब्रांड इंटीग्रेशन। अब तक YouTube पर स्पॉनसरशिप का तरीका सिंपल था। मतलब एक बार ब्रांड डील कर ली, वीडियो शूट कर ली, स्पॉन्सर का नाम, उसका लिंक यह सब वीडियो में डाल दिया। बस वो ब्रांड स्पॉनसरशिप हमारी उस वीडियो को का परमानेंट पार्ट बन जाता है वो ब्रांड जो भी हमने अपनी वीडियो के अंदर डाला वो परमानेंट रहेगा उस वीडियो में, हमारे चैनल पे। फिर चाहे भले वो जो ब्रांड हमने स्पॉनसरशिप करी थी, वो 6 महीने बाद
1:33 मार्केट से गायब हो गया हो ब्रांड या फिर उन्होंने अपनी वो प्रोडक्ट या फिर उनकी वो सर्विस बेचनी बंद कर दी हो। मगर हमारी वीडियो फिर भी व्यूज ला रही होती है। भले हम हमें उससे एक भी रुपए ना मिले। उससे कुछ फायदा नहीं मिल रहा ना ब्रांड को ना हमें। अब जरा सोच के देखो। तुमने मान लो 2 साल पहले 2023 में एक स्पॉन्सर्ड वीडियो बनाई और अब 2025 चल रहा है और वो वीडियो अभी भी हर महीने मान लो 2 से 4000 व्यूज ला रही है। पर पैसा उसमें से हमें मिल ही नहीं रहा है। लोग देख रहे हैं अपना टाइम स्पेंड कर रहे हैं। वॉच टाइम आ रहा है लेकिन ब्रांड स्पॉनसरशिप पुरानी थी। डील खत्म हो चुकी है और तुम्हारे पास उस वीडियो को मोनेटाइज करने का अब कोई नया तरीका नहीं है। ₹4 जो आ रहे हैं वो YouTube मोनेटाइजेशन से आ रहे हैं और यह प्रॉब्लम सिर्फ तुम्हारी नहीं है। यह हर एक यूट्यूबर के साथ होती आई है। चाहे उसके 10 सब्सक्राइबर्स हो चाहे 1 मिलियन सब्सक्राइबर्स हो। हमारी एवरग्रीन वीडियोस जो होती है उन पे स्पॉनसरशिप जो होती है उनका पैसा सिर्फ एक बार मिलता है। अब यह
2:20 प्रॉब्लम YouTube को भी दिखने लगी है। क्योंकि YouTube भी चाहता है कि यूर्स और ब्रांड्स दोनों लॉन्ग टर्म दोनों को लॉन्ग टर्म फायदा हो और दोनों मिलके एक साथ में काम करें और पैसा कमाएं। तो बेसिकली अब YouTube कह रहा है कि एक वीडियो एक बार नहीं बार-बार पैसा कमा सकती है। मतलब वह वीडियो जो तुमने 6 महीने पहले अपलोड की थी और अभी भी चल रही है। उसमें अब तुम नया स्पॉन्सर लगा सकते हो। नया ब्रांड लगा सकते हो। अब जरा सोच के देखो। पहले तुम्हें हर ब्रांड डील के लिए एक नई वीडियो बनानी पड़ती थी। अब YouTube खुद तुम्हारे पुराने वीडियो में वो नया ब्रांड, नया स्पॉन्सर डाल देगा। और यह सब बिना वीडियो को कोई टच किए तो नया स्पॉन्सर, नया ऐड और सेम पुरानी वीडियो। बस इसी सिस्टम को YouTube ने नाम दिया है डायनेमिक ब्रांड इंटीग्रेशन। या सिंपल शब्दों में बताएं तो स्पॉनसरशिप 2.0. अब वीडियो एक बार नहीं वीडियो बार-बार पैसा
3:07 कमाएगी। अब ये सब सुनके तुम सोच रहे होंगे ये चीज होगी कैसे? काम कैसे करेगी? देखो सिंपल सा तरीका है। पहले जब भी कोई स्पॉनसरशिप करता था तो वो ब्रांड का पार्ट वीडियो के अंदर शूट करते वक्त लगाना पड़ता था। अपने को मिड में लगा दो, एंड में लगा दो, जहां पर मर्जी। स्पॉनसर का नाम, ऑफर, लिंक सब कुछ हमें एडिटिंग के अंदर डालना पड़ता था एडिटिंग के वक्त। पर अब YouTube कह रहा है ऐड सीधा वीडियो के अंदर नहीं डालने हैं। अब ऐड सिर्फ हमको डालने हैं YouTube के सिस्टम के अंदर। मतलब तुम अपनी वीडियो को नॉर्मल अपलोड करो। नॉर्मल शूट करो। ब्रांड को डालो ही मत वहां पर। फिर YouTube स्टूडियो के अंदर एक स्पॉट सेलेक्ट करो जो वीडियो का पार्ट होगा। जहां तुम्हें लगता है स्पॉन्सर का पार्ट लगाना है जो परफेक्ट पार्ट है। जहां जिस जगह परफेक्ट रहेगा उस जगह अपने आप स्पॉनसर का पार्ट लगा दो। बस दैट्स इट। हटाना हो हटा दो। दूसरा स्पॉनसर लगाना हो दूसरा स्पॉनसर लगा दो। तो यह चीज ऐसे काम करेगी।
3:53 और इसके अंदर सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कल वो ब्रांड बंद हो गया या उनका वो प्रोडक्ट या सर्विस खत्म या ऑफर खत्म हो गया जो तुमने प्रमोट करा था तो YouTube उस जगह पे तुम खुद से मैनुअली या फिर नया स्पोंसर डाल सकते हो। अब यहां पर मैं तुम्हें अपना एग्जांपल बताता हूं। मैंने इन वीडियो ब्रांड के साथ कोलैबोरेशन किया था। बहुत सारे वीडियोस मैंने मैंने उनके साथ कोलैबोरेशन किया था। उनको इंटीग्रेट किया था। उन वीडियोस में आज भी बहुत सारे व्यूज आते हैं। मगर अब इन वीडियो अपना वीडियो एडिटर वाला फीचर नहीं चलाता। उसकी बजाय वो एi वीडियो जनरेशन पे शिफ्ट हो गया। तो मैं वहां पे किसी और ऑनलाइन वीडियो एडिटर ब्रांड के साथ कोलैब कर सकता हूं। Cवा हो गया, वीड हो गया। ऐसे बहुत सारे ब्रांड्स हैं जिनको मैं अप्रोच कर सकता हूं कि भाई यह मेरी वीडियो है। यह महीने में इतने व्यूज लाके दे रही है। आप एनालिटिक्स देख सकते हो और इससे आपको यह बेनिफिट हो सकता है। तो डेफिनेटली वहां पर बहुत सारे ब्रांड्स मुझे ऐसे मिल जाएंगे
4:39 जो उस वीडियो के साथ कोलैबोरेशन करना चाहेंगे और मुझे अप्रट पे भी करेंगे उनको इंटीग्रेट करने का। क्यों करेंगे? क्योंकि वो वीडियो एवर ग्रीन है। आज 1 लाख पे है, कल 2 लाख पे होगी, 3 लाख पे होगी, 4 लाख व्यू में होगी। तो ऐसे हम मल्टीपल ब्रांड्स बदल सकते हैं। महीने की कोलैबोरेशन, 6 महीने की कोलैबोरेशन, इतने इंप्रेशन, इतने व्यूज की कोलैबोरेशन ये चीजें होने वाली है। इसमें वैसे ब्रांड का भी फायदा है और हमारा भी फायदा है। क्योंकि जो मैंने पुराने वीडियोस ब्रांड के साथ किए थे, इन वीडियो के साथ किए थे, उनसे पैसा लिया था और अब नए ब्रांड से भी पैसा लूंगा और ऐसा मैं हर वीडियो के साथ कर सकता हूं। यानी सेम वीडियो, नया स्पॉन्सर और ज्यादा इनकम। बिल्कुल वैसे ही जैसे टीवी चैनल पे एड्स बदलते रहते हैं वैसे ही हमारी वीडियो में अब एडवरटाइजर्स बदलते रहेंगे और हमारा बैंक बैलेंस भी बढ़ता रहेगा और यह सब कुछ YouTube स्टूडियो से करा जा सकता है। यह फीचर
5:25 यूर्स को प्योर पैसिव इनकम देने वाला है। एक बार वीडियो अपलोड करो और उसे बार-बार मोनेटाइज करो। सोच के देखो एक ब्रांड तुम्हें एक वीडियो के लिए ₹30,000 देता है ₹00 अब वही वीडियो अगर 3 महीने या हर महीने तुम नए स्पोंसर उस वीडियो के अंदर डालते हो तो वही एक वीडियो तुम्हें ₹00 बार-बार कमा के दे सकती है 6 महीने में हर महीने में डिपेंड करता है इंप्रेशन रीच और व्यूज के ऊपर या फिर तुम ब्रांड के साथ क्या डील कर रहे हो किस बेसिस पे कर रहे हो इस तरीके को तुम लोग ऐसे सोच सकते हो कि तुमने एक प्रॉपर्टी बनाई हो और अब वो रेंट पे चढ़ गई हर महीने सिर्फ इनकम आ रही है और तुम्हें कुछ बिना कुछ नया काम कराने की जरूरत नहीं पड़ रही है। पैसा आ ही रहा है बस। और यह तरीका ब्रांड और यूट्यूबर के रिलेशनशिप को भी बदल के रख देगा। अब ब्रांड्स उन यूटर्स को पैसा देंगे जिनकी
6:11 वीडियोस ऑलरेडी चल रही हैं। मतलब जिनकी वीडियो पे ऑडियंस ज्यादा इंगेज्ड है, व्यूज कंसिस्टेंट है, उन्हीं वीडियोस पे ब्रांड डायनेमिक डील्स करेंगे और जरूरी नहीं है बड़े यूटर्स के साथ भी करें। यहां पे फायदा सबसे ज्यादा छोटे यूटर्स को मिलेगा क्योंकि अब तुम्हें हर बार नया स्पॉनसर ढूंढने की जरूरत नहीं है। तुम्हारे पुराने वीडियोस ही तुम्हारा ब्रांड पोर्टफोलियो बन सकते हैं। पुराना कोई वीडियो है। ठीक है? है उसमें व्यूज अच्छे आ रहे हैं। ब्रांड को रीच आउट करो। मैं इस वीडियो पे डालूंगा। दैट्स ऑल। लेकिन अब ये सब चीज सुनने के बाद तुम्हारा अगला सवाल होगा यह फीचर कब आ रहा है? तो YouTube ने इस फीचर का टेस्टिंग फेस शुरू कर दिया है। लेकिन फुल रोल आउट अभी 2026 तक होगा। मतलब अभी तुम्हारे पास टाइम है। यह गोल्डन टाइम है। ऐसे साल जिसमें तुम वीडियोस तैयार कर सकते हो। ऐसे एयरन वीडियोस तैयार कर सकते हो जो कल YouTube के डायनेमिक स्पॉनशिप फीचर के थ्रू हर महीने नए-नए स्पॉनसरशिप उठाए। नए-नए
6:57 ब्रांड्स के साथ डील करें। सोच के देखो जब ये फीचर लाइव होगा आएगा YouTube ब्रांड से बोलेगा हमारे प्लेटफार्म पे ये सारी वीडियोस हैं जिन पे अच्छी इंगेजमेंट आ रही है अच्छे व्यूज आ रहे हैं इनके साथ कोलैबोरेट कर सकते हो इनमें से कोई भी चूज़ कर लो और जिन यूटर्स के पास वो वीडियोस रेडी होंगी वो सबसे पहले कमाएंगे यानी अभी से अगर तुमने 100 200 या 300 सॉलिड वीडियोस बना ली जो 26 तक YouTube पे चल रही हो मतलब एक कंसिस्टेंट व्यूज ला रही हो तो YouTube तुम्हें खुद पैसा देगा। बाकी अभी जितने यूट्यूबर्स सो रहे हैं वह 2 साल बाद फिर से बोलेंगे काश तब YouTube स्टार्ट कर दिया होता। तो सिंपल सी बात अब यह है कि 2026 तक YouTube एक डायनेमिक स्पॉनशिप मार्केट प्लेस बनने वाला है और तुम्हें बस एक काम करना है। आज से अपनी वीडियोस को एक इन्वेस्टमेंट की तरह ट्रीट करना है। यह सिर्फ तुम्हारे लिए वीडियो
7:43 नहीं होनी चाहिए। घर होना चाहिए जो तुम आज बना रहे हो और कल इससे तुम्हें रेंट मिलने वाला है। तो अब तुम्हें समझ आ गया होगा कि YouTube अब सिर्फ व्यूज और एडसेंस का खेल नहीं रहा। ये अब एक प्रॉपर बिजनेस प्लेटफार्म बन चुका है। बनने जा रहा है। और अगर तुम आज से अपने कंटेंट को सीरियसली बिल्ड करते हो तो जब ये फीचर प्रॉपर तरीके से आएगा YouTube पे तो तुम्हारे वीडियोस पे ब्रांड्स की लाइन लग जाएंगी। लेकिन एक सवाल अभी भी सबके दिमाग में है। ब्रांड डील्स मिलती कैसे? स्पेशली तब जब हमारा चैनल छोटा हो, स्माल चैनल हो। क्योंकि अगर तुम डायनेमिक ब्रांड इंटीग्रेशन का आगे जाके पूरा फायदा लेना चाहते हो तो पहले तुम्हें यह भी समझना हो कि YouTube पे ब्रांड डील्स मिलती कैसे है? कैसे स्पॉनसरशिप मिलेगी? इसलिए मैंने एक ये डेडिकेटेड वीडियो बनाई है हाउ टू गेट ब्रांड डील्स हाउ टू गेट स्पॉनसरशिप ऑन YouTube विद स्मॉल चैनल। इसमें मैंने
8:29 स्टेप बाय स्टेप बताया है कि कैसे तुम्हें अपनी पहली स्पॉनसरशिप मिल सकती है। कैसे ब्रांड्स ढूंढने हैं और कैसे उनके साथ डील करनी है। तो अभी क्लिक करो और तैयारी शुरू करो। [संगीत]