0:00 हे दोस्तों, इनसे मिलो। इनका नाम है अर्जुन। अर्जुन एक बहुत ही ग्रेट ग्राफिक डिजाइनर है। जिनका काम उनके बॉस को, क्लाइंट्स को, हर एक जन को बहुत पसंद आता है। कई बार अर्जुन के दोस्तों ने उनको यह सजेस्ट किया कि यार तू इतना अच्छा काम करता है। तुझे खुद का कुछ करना चाहिए। और एक दिन फाइनली अर्जुन डिसाइड करता है कि हां अब बहुत हो गया। मुझे खुद का मालिक बनना है और मैं किसी के लिए काम नहीं करूंगा। खुद से अपनी एजेंसी चालू करूंगा। और यह सोच के साथ वो अपना खुद का बिज़नेस स्टार्ट करता है। ताकि उसको ज्यादा फ्रीडम मिल सके, ज्यादा पैसा मिल सके। ऑब्वियसली स्टार्टिंग में उसे डर लगता है बट वह एक लीप ऑफ फेथ लेकर जॉब छोड़ता है और बिजनेस स्टार्ट करता है। स्टार्टिंग में बूम तीन-चार अच्छे क्लाइंट्स उसे मिल भी जाते हैं जिसकी वजह से उसे पहले से ज्यादा पैसे आने का कमिटमेंट मिल गया होता है और चीजें अच्छी जाने लगती है। बट 18 महीने बाद अर्जुन की लाइफ कुछ ऐसे चल रही होती है। रात के 3:00 बजे वो लेट नाइट काम कर रहा होता है क्योंकि क्लाइंट का प्रेशर आया होता है। इसके कुछ टाइम पहले उसने वह सारे
0:53 बर्थडेज जो वह पहले बहुत अच्छे से सेलिब्रेट करता था वह भी मिस कर दिए। उसकी हेल्थ डिटोरिएट होने लगती है क्योंकि इतना स्ट्रेस और वर्क लोड उसके ऊपर आ गया होता है और सबसे बुरी बात डिजाइनिंग जो पहले उसके दिल से बहुत करीब थी वो उसे हेट करने लगता है और यह सिर्फ अर्जुन की कहानी नहीं है। कई सारे लोग इसी सोच के साथ बिजनेस स्टार्ट करते हैं कि वो बिजनेस स्टार्ट करेंगे तो ज्यादा पैसे कमाएंगे ज्यादा फ्रीडम मिलेगी। बट रियल स्टैटिस्टिक्स यह बताती है कि जो लोग भी नया बिजनेस स्टार्ट करते हैं पहले साल में ही 20% बिजनेस फेल हो जाते हैं। 5 साल में 50% बिजनेस फेल हो जाते हैं। और इंडिया का डाटा बताता है कि 94% बिज़नेस जो सर्वाइव भी करते हैं, चालू रहते हैं वो कभी भी बड़े बिजनेस में कन्वर्ट नहीं हो पाते हैं। बड़ा पैसा नहीं बना पाते हैं। क्यों? इसलिए नहीं क्योंकि उनके अंदर स्किल्स की कमी है, टैलेंट की कमी है, किस्मत की कमी है या वो डिर्व नहीं करते। बात सिर्फ इतनी है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मैक्सिमम लोग अर्जुन की तरह ही गलत काम कर रहे होते हैं जो उन्हें
1:42 करना ही नहीं चाहिए और वो एक ऐसे ट्रैप में फंस जाते हैं जहां उन्हें फ्रीडम नहीं मिलती लेकिन उनका बिजनेस उन्हें सबसे बड़ा नौकर जरूर बना देता है। अगर आप भी थोड़ा बहुत इस सिचुएशन में हो जहां आप बिजनेस में फ्रस्ट्रेटेड हो गए हो या फिर अगर आप चाहते हो फ्यूचर में आपके साथ ऐसा कुछ ना हो तो आने वाले 10 मिनट गौर से सुनना समझना या आपका बहुत सारा टाइम बचाने में पैसा कमाने में आपको हेल्प करेगा। आज के इस वीडियो में मैं आपको बताऊंगा तीन सबसे बड़े ट्रैप्स जिसमें यूजुअली बिज़नेस ओनर्स फंस जाते हैं और उन ट्रैप्स से निकला कैसे जाए एक छह स्टेप का सिस्टम फॉलो करके और यह मैं आपको अपने मन से नहीं वन ऑफ माय फेवरेट बिज़नेस बुक की हेल्प से बताने वाला हूं। मैं यह भी बताऊंगा कि कैसे अर्जुन ने इसी बुक के प्रिंसिपल को अप्लाई करके अपनी लाइफ को टर्न अराउंड किया और एक ग्रेट सक्सेसफुल बिज़नेसमैन बना। प्लस अगर आप बिग बिज़नेस ओनर हो तो आपके लिए एक बहुत स्पेशल अनाउंसमेंट भी है जो आपको वीडियो के एंड में मैं बताऊंगा। आपके लिए बहुत काम की होगी। तो वीडियो को एंड तक जरूर देखना।
2:28 नाउ लेट्स स्टार्ट। 18 महीने बाद अर्जुन इस सिचुएशन में कैसे फंस गया? उसको समझते हैं चलो स्टार्टिंग से। और हर चीज की स्टार्टिंग होती है आपकी आइडेंटिटी और आपकी माइंडसेट से। एक बिजनेस को चलाने के लिए तीन लोगों की जरूरत पड़ती है या फिर तीन आइडेंटिटीज की जरूरत पड़ती है। क्या है वो तीन आइडेंटिटी? तीन पर्सनालिटी। वेल, पहली पर्सनैलिटी होती है विजनरी की। यह बिजनेसमैन के अंदर का वो पार्ट होता है जो बोलता है कि यार मैं दूसरों के लिए काम क्यों करूं? मुझे खुद की एजेंसी खोलनी चाहिए। मुझे एक एंपायर बनना चाहिए। मुझे करोड़पति बनना चाहिए। मेरे अंदर बहुत सारे लोग काम करें। यह होती है पहली पर्सनालिटी। पहला माइंडसेट। दूसरी पर्सनालिटी जो होती है वह होती है ऑपरेटर की, मैनेजर की। यह वो इंसान या फिर एक इंसान का वह पार्ट होता है जो बोलता है कि रुको रुको ये सब चीजें तो ठीक है होगी। लेकिन पहले यह बताओ कि हमारे पहला क्लाइंट कैसे मिलेगा? क्लाइंट से कैसे बात करना पड़ेगा? उसको ऑनबोर्डिंग का प्रोसेस कैसा होगा? टाइमलाइंस हम कैसे ट्रैक करेंगे? सारी चीजें ऑर्गेनाइज्ड कैसे रहेगी? और
3:18 थर्ड होता है द क्राफ्ट्समैन जिसे टेक्ननीशियन भी बोलते हैं। यह वो पार्ट होता है या वो इंसान होता है जो एक्चुअल काम कर रहा होता है। जैसे ड्राफिक डिजाइनिंग का काम है तो जो पर्सन डिजाइनिंग कर रहा है वो क्राफ्ट्समैन है, टेक्नशियन है। अब वैसे तो ये तीन लोग बिजनेस में होंगे तो बेस्ट है। लेकिन अगर एक इंसान अकेला भी है तो उसको इन तीन चीजों को हैंडल करना पड़ेगा। और कई बार जब ये हैंडल नहीं होते हैं तभी सारा केओस होना चालू होता है जो अर्जुन के साथ भी हुआ। क्योंकि कभी दिमाग ऐसे काम करता है कि यार मुझे तो बिज़नेस को बड़ा बनाना है। कभी दिमाग ऐसा काम करता है कि यार मुझे तो बिज़नेस को मैनेज करना आना चाहिए। चाहिए जो लोग ऑलरेडी है वो खुश नहीं है। और कई बार इन सारे चक्करों में जो क्राफ्ट जिसे पहले दिल से अर्जुन कर पा रहा था और क्योंकि फिर उसने मैनेज करना स्टार्ट किया विज़ंस देखना स्टार्ट किया इसलिए उसका क्राफ्टमैनशिप जो था जिसमें वो पहले दिल से काम कर पाता था। जॉब में 9 टू फाइव पूरे दिल से वही एक काम करता था। अब वो यहां पे तीन काम करने लग गया था। तीन लोगों के अलग-अलग काम करने लग गया था। और
4:07 इस चक्कर में फ्रीडम नहीं बल्कि वो खुद का ही बहुत बड़ा गुलाम बन गया। और यहीं पर देखो एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम आती है अर्जुन के अंदर और ज्यादातर बिजनेस ओनर्स के अंदर है ना जो सोलो एंटरप्रेन्यर्स स्टार्ट करते हैं यूजुअली उनके अंदर होता है सबसे डोमिनेटिंग क्राफ्ट्समैन 80% टाइम ये लोग डिजाइनिंग में देते हैं एक्चुअल काम करने में देते हैं 15% टाइम ये लोग केओस को मैनेज करते हैं क्लाइंट से बात करना उनके रिक्वायरमेंट्स को समझना ये सारी चीजें और 5% टाइम ही सिर्फ वो फ्यूचर की प्लानिंग करते हैं तो ये बनता है 80 15% रूल अब देखो यूजुअली लोग जो लोग फेल होते हैं ना वो लोग यही गलती करते हैं जिसका रिजल्ट क्या होता है अर्जुन जो की एक डिजाइनर था। वो बिजनेस ओनर बनने के बजाय एक्चुअल में अभी भी डिजाइनर है। बस उसके साथ-साथ उसने दो और या 10 एक्स ज्यादा काम अपने कंधे पर ले लिया है। जबकि सक्सेसफुल बिज़नेस ओनर इसके एग्जैक्ट अपोजिट होते हैं। वो 80% टाइम वो लोग फ्यूचर ग्रोथ के ऊपर काम करते हैं। 15% टाइम वो लोग मैनेज करते हैं और सिर्फ 5% टाइम अगर करने की जरूरत पड़ी तो
4:57 खुद करते हैं वरना वो भी नहीं करते हैं। इसलिए पहला लेसन यह समझो अगर आप अपने बिजनेस में सिर्फ टेक्नशियन बनकर रह जाओगे तो आप कभी ग्रो नहीं कर पाओगे। आपको या तो मैनेजर्स, विजनरी को हायर करना पड़ेगा, पार्टनरशिप करना पड़ेगा या खुद यह तीनों रोल को खुद अप्लाई करना पड़ेगा धीरे-धीरे। वह भी कैसे कर सकते हैं, वीडियो के एंड में मैं आपको बताऊंगा। बट आ जाओ उससे पहले अर्जुन के अगेंस्ट स्टोरी पे। अर्जुन ने जब अपना जॉब छोड़ के बिजनेस करना स्टार्ट किया तो वो तीन अलग-अलग ट्रैप्स में फंसा जिसमें मैक्सिमम बिज़नेस ओनर्स फंसते हैं। पहला ट्रैप था द कंफर्ट ज़ोन का ट्रैप। स्टार्टिंग के 6 महीने अर्जुन सब कुछ खुद कर रहा था जो उसे कंफर्टेबल लग रहा था। खुद ही डिजाइनिंग करना, क्लाइंट से बात करना, इनवॉइसेस जनरेट करना, उनसे कम्युनिकेट करना, पेमेंट्स लेना, हर एक चीज वो खुद कर रहा था और जिस वजह से हर एक चीज की क्वालिटी भी परफेक्ट थी, कंट्रोल था, एक तरीके का अलग सा कंफर्ट था। लेकिन इसमें प्रॉब्लम यह हो रही थी कि उसकी एनर्जी बहुत ज्यादा जा रही थी अलग-अलग काम करने में और वो कितना भी अपना 100% दे ले
5:48 वो ग्रो नहीं कर पा रहा था। कुछ दो-तीन क्लाइंट से ज्यादा हैंडल कर ही नहीं पा रहा था। जिस वजह से उसकी इनकम एक लेवल पे ही अटकी हुई थी। इनफैक्ट कई बार कम भी हो जा रही थी क्योंकि पेमेंट के इशूज़ आते थे कई बार। जब उसे पहले यह समझ में आया कि जब तक मैं सारे काम खुद करता रहूंगा तब तक मेरा बिजनेस नहीं बढ़ेगा। मैं आगे नहीं बढ़ पाऊंगा ना मुझे फ्रीडम मिलेगी। इसीलिए वो आता है ट्रैप नंबर टू पे। वो होता है द डेलीगेशन डिजास्टर। 6 महीने तक अर्जुन खूब स्ट्रगल करता है और उसे रियलाइज होता है कि अब मुझे किसी को हायर करने की जरूरत है। भले से पैसे देने पड़ेंगे लेकिन कोई एक बंदा तो होना चाहिए जो मेरी हेल्प करे। और यहां पे वो एक डिजाइनर को हायर करता है। यह सोच के करता है कि अब अब जो काम उसका हो रहा है, वह काम आधा-आधा बढ़ जाएगा। पर होता क्या है कि अर्जुन जो काम कर रहा होता है उसकी आधी क्वालिटी का काम भी वह इंसान नहीं कर पाता है। प्लस उस इंसान को मैनेज करने के लिए उसे और टाइम देना पड़ता है। उसकी मिस्टेक्स को सुधारने में और टाइम देना पड़ता है। जिससे उसके
6:35 दिमाग में कई बार यह थॉट आता है कि यार मुझे शायद हायर करना ही नहीं चाहिए था। मैं अकेले ही ठीक था। और यह है सेकंड ट्रैप जिसमें बिज़नेस ओनर्स फंसते हैं। जब वो काम डेलीगेट करने जाते हैं, किसी और को देते हैं, थोड़े वह कंफर्ट ज़ोन से बाहर जाते हैं। बट अभी भी उनको फ्रीडम नहीं मिलती। इनफैक्ट उनको और ज्यादा काम करना पड़ता है। क्यों? क्योंकि उनके पास सिस्टम्स नहीं होते हैं। और यही फेस करते-करते अर्जुन ने थर्ड ट्रैप भी फेस किया। द पर्सनालिटी बिज़नेस। क्योंकि अर्जुन ही क्लाइंट्स को क्लोज करता था। उनसे बातें करता था और लोगों को अर्जुन का काम पसंद था। तो यह अच्छी बात तो थी लेकिन यह प्रॉब्लम वाली बात भी थी क्योंकि हर क्लाइंट हमेशा यही बोलता था कि अर्जुन मुझे आपकी टीम मेंबर से नहीं मुझे आपसे ही बात करनी है। मुझे आपका ही डिज़ाइन चाहिए। मुझे और किसी का डिजाइन नहीं चाहिए क्योंकि उनका काम मुझे पसंद नहीं आता है। अभी अगर आपको सुन के लग रहा है कि हां यह तो बहुत अच्छी बात है तो यह एक्चुअली अच्छी बात नहीं है क्योंकि अगेन यह एक सीलिंग है। यह एक ट्रैप है। बिकॉज़ जब तक आप अकेले काम कर रहे हो और सबको आप ही
7:23 चाहिए तो आप तो अगेन आपके पास सिर्फ 24 घंटे ही है। और यही प्रॉब्लम अर्जुन को समझ में आई। अर्जुन स्केल नहीं कर पा रहा था हायर करने के बाद भी क्योंकि लोगों को सिर्फ उसकी जरूरत थी। कहां उसने सोचा था कि बिज़नेस स्टार्ट करके वो वेकेशंस पे जाएगा। बहुत अमीर बनेगा। लेकिन अब उसकी चटनी बन रही थी चारों तरफ से। क्योंकि अगेन उसने बिज़नेस नहीं बनाया था। उसने अपने नाम की एक बड़ी सी जॉब बना ली थी। ये तीनों ट्रैप्स ऑलमोस्ट हर बिजनेस ओनर्स फेस करता है। और इन तीन ट्रैप्स की वजह से यूजली जो स्मॉल बिनेसेस होते हैं, स्टार्ट करने वाले बिनेसेस होते हैं, उनमें से मैक्सिमम बिज़नेस फेल हो जाते हैं। जैसे आप डाटा में देख सकते हो। लेकिन तब ये सारे ट्रैप से अर्जुन जब जूझ ही रहा था तब फाइनली उसको एक किताब के बारे में पता चला। एक बिजनेस बुक जो किसी ने उसे रिकमेंड करी। उसने वो बुक पढ़ना स्टार्ट किया और जब उसने वो बुक पढ़ी तो उसको रियलाइज़ हुआ कि हां एक-एक चीज जो उस किताब में बोली गई थी वो उसके साथ हो रही थी। वो पर्सनालिटी वाली चीज, वो तीन ट्रैप्स जिसके अंदर वह खुद फंस चुका था।
8:14 उस बुक से उसने एक बहुत प्यारा लेसन सीखा कि यू शुड वर्क ऑन योर बिजनेस नॉट इन योर बिजनेस। उसे समझ में आया कि प्रॉब्लम यह नहीं थी कि वो काम कर रहा था। प्रॉब्लम यह थी कि वो गलत काम पर फोकस कर रहा था। वहां से उसने एक फ्रेंचाइज़ माइंडसेट के बारे में सीखा। और यह वाली बात शायद आपने भी नोटिस करी होगी। McDonald दुनिया के सबसे अच्छे बर्गर्स नहीं बेचता है। आपने आई एम सो श्योर McDonald से अच्छे बर्गर्स कहीं और खाए होंगे। बट स्टिल McDonald आज वो आपके लोकल शॉप या दूसरे बर्गर स्टोर से बहुत ज्यादा पैसे कमा रहा है। क्यों? क्योंकि उन्होंने ऐसे सिस्टम्स क्रिएट करके रखे हैं कि अगर कुछ नए कॉलेज स्टूडेंट्स के बच्चे भी आते हैं तो वो उनको हायर करके अपने स्टोर पे बैठा सकते हैं और फिर भी उनका बिज़नेस चलता रहेगा और वो फोकस करते हैं सिर्फ ब्रांडिंग पे। जब अर्जुन को यह चीज समझ में आई कि हां फ्रेंचाइज़ माइंडसेट होना चाहिए। भले से मुझे फ्रेंचाइज मॉडल में का बिजनेस करना हो या ना करना हो। एटलीस्ट मेरे दिमाग में ऐसा तो होना चाहिए कि अगर मुझे मेरे बिजनेस को 10 एक्स करना है या 10 ऐसी
9:05 अलग-अलग बिनेसेस खोलने हैं, 500 खोलने हैं, कॉपीज बनानी है उनकी स्ट्रेंजर्स को देना है तो वो मैं कैसे दे पाऊंगा? और इसके लिए उसने एक मेंटल एक्सरसाइज करी। उसने इमेजिन किया कि अगर मुझे अपने बिजनेस को अगले साल तक अपने बिजनेस की 500 कॉपीज बनानी है तो क्या वो कर पाएगा? वेल आंसर उसे मिला ऑब्वियसली नहीं। उसने एक और क्वेश्चन अपने आप से पूछा कि अगर मैं 90 दिन के लिए बिजनेस करना बंद कर दूं तो क्या मेरे बिना यह बिजनेस चलेगा? पहले उसे आंसर मिला ऑब्वियसली नहीं। तब उसने डिसीजन लिया कि यह चीज बदलनी होगी क्योंकि उसने बिजनेस बुक से यही सीखा था कि आपका बिजनेस आपके बिना चलना चाहिए। तभी आप बिजनेस ओनर बन रहे हो वरना सिर्फ आप एक बड़े नौकर बन रहे हो। तो ये सारी प्रॉब्लम से लड़ने के लिए अर्जुन ने एक सिक्स स्टेप फ्रेमवर्क यूज़ किया। छह स्टेप का सिस्टम और यहीं से सारा मैजिक होना स्टार्ट हुआ। जहां पर अर्जुन बहुत स्ट्रगल कर रहा था। जब उसने यह सिस्टम छह स्टेप का सिस्टम अप्लाई करना स्टार्ट किया तो अगले 6 महीने में ही उसने अपनी रेवेन्यू को 10x बढ़ा दिया और लाइफ
9:55 में पहली बार छुट्टी भी लिया। कैसे? वेल छह स्टेप फॉलो करके जिसमें से पहला स्टेप था द ब्रेन डम। अर्जुन ने क्या किया कि दो हफ्ते तक यह ट्रैक करना स्टार्ट किया। हर एक काम जो वो कर रहा था। जैसे फॉर एग्जांपल 9:00 बजे क्लाइंट कॉल, 10:00 बजे लोगो डिजाइन करना, 2:00 बजे इनवॉइस भेजना, 4:00 बजे वापस से क्लाइंट के साथ कॉल पर जाना, 6:00 बजे पोस्ट करना। हर एक चीज जो वो काम कर रहा था उसने एक-एक करके उसको लिखना स्टार्ट किया और उसको विद इन फ्यू डेज समझ में आ गया कि वो 60 से ज्यादा अलग-अलग काम कर रहा था छोटे-छोटे। नो वंडर वो इतना स्ट्रेस फील कर रहा था। ऐसे ही कुछ आप भी कर सकते हो। अगर आप बिजनेस ओनर हो तो एक-एक करके लिखना स्टार्ट करो। और एटलीस्ट कुछ हफ्ते तक आप क्या-क्या एग्जैक्ट काम कर रहे हो आज के टाइम पे। और फिर आ जाओ स्टेप नंबर टू पे। यूज़ द 80020-20 प्रिंसिपल। अर्जुन ने फिर इस लिस्ट देखा और अपने आप से एक क्वेश्चन पूछा कि कौन से ऐसे 20% काम है जो मुझे 80% रिजल्ट्स दे रहे हैं। और जब उसने इसके बारे में अच्छे से सोचा तो डायरेक्ट आंसर तो नहीं मिले बट थोड़ा टाइम इन्वेस्ट करने
10:49 के बाद उसे समझ में आया कि क्लाइंट से स्ट्रेटजी कॉल करना, हाई लेवल के क्रिएटिव डिसीजंस लेना, टीम ग्रोथ पे फोकस करना यह वो काम थे जिसकी वजह से उसे मैक्सिमम सेल्स और ग्रोथ मिल रही थी। और बाकी 80% काम का क्या करना है? वेल, उसने उन बाकी 80% काम को धीरे-धीरे दूसरों को देना स्टार्ट किया। उसको सर्कल मारा और वापस अपने आप से क्वेश्चन पूछा। क्या यह काम मेरे बिना भी हो सकता है? अगर हां, तो चलो डेलीगेट करें। और फिर आया वो थर्ड स्टेप पे डॉक्यूमेंट लाइक अ टीचर। अर्जुन ने एक सिंपल टास्क चूज़ किया। जैसे कि क्लाइंट ऑनबोर्डिंग प्रोसेस। और उसने Google डॉक खोल के उसमें लिखना स्टार्ट किया स्टेप बाय स्टेप कि क्लाइंट ऑनबोर्ड करने के लिए वो क्या-क्या करता है। जैसे स्टेप नंबर वन क्लाइंट से एक फॉर्म भरवाता है। स्टेप नंबर टू उनको एक वेलकम ईमेल भेजता है। स्टेप नंबर थ्री उनके साथ एक मीटिंग स्केेड्यूल करता है। ऐसे एक-एक करके उसने स्टेप्स लिख डाले और जितना हो सकता है उतना डिटेल में पिक्चर्स के साथ स्क्रीनशॉट्स के साथ उसने वो चीज को बनाया। और फिर आ गया वो स्टेप नंबर फोर पे
11:40 टेस्ट एंड रिफाइन। उसने एक ऐसा डॉक्यूमेंट क्रिएट किया और फिर वो उसने डॉक्यूमेंट अपने एंप्लई को दिया जूनियर डिजाइनर को दिया और उसको फॉलो करने बोला। और जब उसने फॉलो किया तो उसे पता चला कि हां अभी भी बहुत सारे मिस्टेक्स हो रहे हैं, प्रॉब्लम्स हो रहे हैं। तो उसने उसको वापस से इंप्रोवाइज करना चालू किया डॉक्यूमेंट को जैसा उसके जूनियर ने फीडबैक दिया। और फिर वो आया स्टेप नंबर फाइव पे। उसने डिसाइड किया कि जैसे उसने ऑनबोर्डिंग के लिए एक डॉक्यूमेंट क्रिएट किया है। वो ऐसी और भी जितने भी काम वो कर रहा है वो सबके लिए एक-एक डॉक्यूमेंट क्रिएट करेगा। जैसे डिजाइन वर्क फ्लो, रिवीजन रिक्वेस्ट, इनवॉइस जनरेशन, सोशल मीडिया पोस्टिंग, टीम मीटिंग्स हर एक चीज के लिए उसने एक बिज़नेस प्लेबुक बनानी चालू करी। यह प्रोसेस बहुत ही स्लो था, बहुत ही टायरिंग था। बहुत ही बोरिंग था और कई बार ऐसा लगता था कि नहीं करना चाहिए बट फिर भी उसने मेक श्योर किया कि वो 6 महीने तक एटलीस्ट ये चीज करेगा चाहे कुछ भी हो जाए और 6 महीने तक उसने ये चीज करी जिसकी वजह से 24 ऐसे डॉक्यूमेंट्स
12:27 क्रिएट हुए जिसने उसके बिजनेस को आप बोल सकते हो सिस्टमाइज करना चालू किया और फिर उसने सबसेेंट चीज करी स्टेप नंबर सिक्स हायर फॉर द सिस्टम नॉट फॉर द हीरोज़। यूजुअली बिज़नेस ओनर्स के साथ ये प्रॉब्लम होती है जो अर्जुन के साथ भी हो रही थी कि वो अपने बिज़नेस का हीरो बनके रह गया था और हर कोई उसके ऊपर ही फोकस कर रहा था। लेकिन उसने अब ऐसा सिस्टम क्रिएट कर दिया था जिसकी वजह से वो अगर नौ सीखे को भी ले आता और सिर्फ उसको यह एक डॉक्यूमेंट फॉलो करने बोलता स्टेप बाय स्टेप तो वो नौ सीखियां भी उसके लेवल का काम करने लग गया था। एग्जैक्टली नॉट उसकी तरह बट काम चलाओ। छह और महीने उसने इसके ऊपर ही काम किया और यहीं से उसको वो एक्चुअल पहली बार वो फ्रीडम अचीव हुई। पहली बार वो लाइफ में आया। उसने एक हफ्ते की छुट्टी ली और वह जा पाया। जहां पे दो-तीन जो उसके अंडर काम कर रहे थे उन लोगों ने उसके काम को हैंडल कर लिया और वह बिना फिक्र के उसने बिज़नेस करना स्टार्ट किया। यह बातें मैंने आपको यह अमेजिंग बुक ई रिविजिटेड बाय माइकल जबर इस बुक से बताई है। इस बुक में ऐसी कई
13:17 सारी और डिटेल में बातें हैं। देखो अगर मैं आपको बताऊं तो इस बुक में अगर पेजेस की बात करूं तो इस बुक में अराउंड 660 पेज की ये बुक है और मैंने आपको जो बातें बता पाई है वैसे तो मैंने हाईलाइट बातें जितनी हो सकती थी बेस्ट बेस्ट बातें आपको पता ही है मेरे हिसाब से जो बेस्ट है। लेकिन सिर्फ वो बेस्ट बातों से काम नहीं होगा। अगर आपको सच में बिज़नेस में इंटरेस्ट है। सच में आप अच्छे बिज़नेस ओनर बनना चाहते हो तो एक बार इस बुक को आपको जरूर पढ़नी चाहिए। लेकिन अगर आप किसी रीज़न के जैसे नहीं पढ़ सकते हो। वो बुक उठाते ही बोर होता है आपको और आप पूरी बुक पढ़ना आपको पता है आप पूरी बुक खरीद भी लोगे तो पढ़ नहीं पाते हो तो कोई बात नहीं हमने आपके बिहाफ में इस पूरी बुक को चैप्टर बाय चैप्टर पढ़ा उसमें चैप्टर में से जो सबसे सबसे बेस्ट अच्छे लेसंस हैं स्टेप बाय स्टेप उनकी समरी बनाई उसको ऑडियो रिकॉर्ड करवाया और उसके एनिमेशन क्रिएट करके ये पूरी बुक मैंने एक वीडियो फॉर्मेट में आपके लिए बना दी है ताकि आप इस बुक को आराम से देखते हुए जस्ट लाइक अf सीरीज जैसे आप देखते हो वैसे ही देखतेदेखते इस
14:04 पूरी बुक को खत्म कर सको इन अराउंड वन ऑवर 1 घंटे के अंदर आप यह बुक की पूरी अच्छी बातों को अब्सॉर्ब कर सकते हो, सीख सकते हो। वैसे अगर आप यह बुक को सिर्फ खरीदने जाओगे तो ही आपको कई ₹100 की बुक मिलती है। ऑडियो बुक लेने जाओगे तो भी वीडियो बुक तो आपको कहीं नहीं मिलेगी। हमको वीडियो फॉर्मेट में बनाने में काफी खर्चा हुआ। लेकिन हां इस खर्चे की वजह से ये हो गया कि आपका काम आसान हो गया। आप आराम से इस बुक की सारी बातें सीख सकते हो। और सच बोल रहा हूं यह बुक की बातें इतनी वैल्यूुएबल है कि इससे आप करोड़पति बन सकते हो। करोड़पति नहीं चलो लखपति भी बन सकते हो तो भी इस बुक की बातें ₹1000 की वर्थ तो है। लेकिन हां ये सारी बातें ₹1000 में भी नहीं। अगर आपको इस बुक का एक्सेस चाहिए और एक बोनस भी चाहिए जिसके बारे में अभी बात करूंगा तो अभी आप नीचे जाके हमारे समरी बोर्ड हमारी वेबसाइट है जिसके अंदर मैंने यह बुक को वीडियो फॉर्मेट में अपलोड करके रखा है डिटेल्ड समरी में 1 घंटे के ऊपर की समरी है जिसमें डिटेल में आप इस बुक के सारी इंटरेस्टिंग बातें सीख सकते हो देखो वैसे तो बुक पढ़ना
14:51 सबसे बड़ी बात है जैसे हैरीपॉटर की भी बुक पढ़ना बहुत सबसे अच्छा होगा लेकिन नहीं पढ़ सकते हो तो चलो उसको मूवी में भी देख लोगे तो भी आपको समझ में आ जाएगा हैरीपॉटर में क्या है वैसे ही यह बुक पढ़ना सबसे बेस्ट ऑप्शन है उसकी भी लिंक मैं नीचे दे दूंगा लेकिन अगर आप नहीं पढ़ सकते हो आपको पता है तो एट एटलीस्ट वीडियो फॉर्मेट में देख के इस इस बुक की बातें सीख लो। आपको पता है यह वाली बुक भी हमने ₹10000 में बेची है वीडियो बुक्स। लेकिन अभी के लिए हमने 90% ऑफ रखा है आप लोगों के लिए। सिर्फ ₹99 में यह वाली बुक और इसकी तरह ही और 65 प्लस अमेजिंग बुक्स का कलेक्शन जो मैंने पर्सनली क्यूरेट करके बनाया है। वन ऑफ़ माय फेवरेट बुक्स उसके अंदर है सारी बिज़नेस की कम्युनिकेशन की। वो सारी बुक आपको वीडियो फॉर्मेट में एक सीरीज की तरह देख सकते हो। वो सब्सक्रिप्शन लेके सिर्फ ₹99 का सब्सक्रिप्शन है। तो अभी जाओ जाके आप वहां से नीचे से जाके सब्सक्रिप्शन ले सकते हो। और इंटरेस्टिंग बात यह है कि अगर आप लोग अभी लेते हो तो स्टार्टिंग के 500 लोगों के लिए मैं एक स्पेशल लाइव भी करने
15:37 वाला हूं। मैं लाइव आकर आप लोगों के साथ बात करने वाला हूं और आपको बताने वाला हूं कि कैसे आप इस बुक की बातें ईथ रिविजिटेड की बातें एआई का यूज करके कंटेंट का यूज करके एक्चुअल में आज अप्लाई कर सकते हो। कैसे मैं इन सारी बातों को आज अपनी लाइफ में अप्लाई कर रहा हूं। इनफैक्ट मैं एक इवेंट भी करने वाला हूं। फिजिकल इवेंट कैन कंटेंट कैसे बना सके एआई की हेल्प से और न्यूरो साइंस अपने माइंडसेट को अच्छा रखते हुए। तो ये तीनों चीजें का एक इवेंट होने वाला है। वो इवेंट में भी क्या होगा आपको उस फ्री वर्कशॉप में मैं डिटेल में बता दूंगा। ठीक है ना? बट हां उसके लिए आपको ये ₹99 का सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा। नीचे दिया हुआ लिंक है। वहां से जाकर रजिस्टर कर लो। इससे पहले कि सीट्स सारी फुल हो जाए। अभी के लिए इतना ही। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। बाई बाय।