0:00 [संगीत] नमस्कार आप देख रहे हैं सक्षम भारत। आपके साथ मैं हूं प्रांजलि सिंह। भारत की सुरक्षा और रणनीति अब केवल जमीनी सीमा तक सीमित नहीं रह गई है। 21वीं सदी में समुद्र वैश्विक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। जहां व्यापार, ऊर्जा, आपूर्ति
0:46 और रणनीतिक प्रभाव का नियंत्रण तय होता है। हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में से एक है और इसी महासागर के बीच मौजूद है अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जो कि भारत को एक बहुत बड़ी रणनीतिक बढ़त भी देता है। इन्हीं द्वीपों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान पर मौजूद है ग्रेट निकोबार जो आने वाले समय में भारत की समुद्री सुरक्षा, निगरानी क्षमता और वैश्विक प्रभाव का मजबूत आधार बन सकता है। आज चर्चा इसी पर [संगीत]
1:34 ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की एकत्वाकांक्षी योजना है जिसे देश के [संगीत] आर्थिक विकास, रणनीतिक मजबूती और वैश्विक कनेक्टिविटी को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। [संगीत] यह परियोजना अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर विकसित की जा रही है जो भौगोलिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान [संगीत] है। यह प्रोजेक्ट केवल विकास तक सीमित नहीं है बल्कि इसका गहरा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से भी है। हिंद महासागर के प्रमुख समुद्री मार्गों के पास स्थित होने के कारण यह क्षेत्र भारत को समुद्री गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखने और अपनी रक्षा [संगीत] क्षमताओं को मजबूत करने का अवसर देता है। यह भारत की
2:19 क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिति को भी सशक्त बनाता है। यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर [संगीत] योजना नहीं है बल्कि इसमें शामिल हैं। एक इंटरनेशनल ट्रांस शिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट टाउनशिप डेवलपमेंट और मजबूत डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर। इस प्रोजेक्ट को समझना जरूरी है। ये ग्रेट निकोबार आइलैंड जो प्रोजेक्ट है ये नीति आयोग ने 21 में इनिशिएट किया था। आई थिंक 72000 करोड़ प्रोजेक्ट है। इसके अंतर्गत एक इंटरनेशनल कंटेनर यू नो इंटरनेशनल पोर्ट होगा विद कंटेनर ट्रांसिपेंट कैपेबिलिटी। एक ड्यूल यूज़ एयर फील्ड होगी। ग्रीन फील्ड डेवलपमेंट। एक एक टाउनशिप डेवलप होगी और एक गैस एंड सोलर प्लांट डेवलप होगा। लोकल डेवलपमेंट के लिए बहुत जरूरी है। तो जब से
3:06 मेरे को याद है पिछले दो दशकों से हम ऑलमोस्ट बोल रहे हैं कि वहां पे बहुत स्ट्रेटेजिकली इंपॉर्टेंट है कि हम अपना फुटप्रिंट मिलिटरली एज अ स्ट्रेटेजिक प्लेस उसको बढ़ाएं। तो फ्रॉम डिफेंस एंड स्ट्रेटेजिक पर्सपेक्टिव वहां पर ये डेवलपमेंट होना तो बहुत जरूरी है। बिकॉज़ वहां पास में मलाका स्टेट्स हैं। वहां द काइंड ऑफ़ डोमिनेंस ओवर सी रूट्स द काइंड ऑफ़ मॉनिटरिंग दैट इज़ रिक्वायर्ड। अ सो ये समझना जरूरी है ये प्रोजेक्ट क्या है एंड जहां तक आपने बोला कि ये सडनली ये इशू आया है कि यहां पे ट्रीज कट रहे हैं एंड ट्राइबल डेवलपमेंट हो रहा है ओवरऑल इंडिया की स्ट्रेटेजिक नीड्स को समझना जरूरी है एंड लोकल एरिया की डेवलपमेंट नीड्स को समझना जरूरी है। इट्स स्ट्रेटेजिकली वेरीेंट इट्स वेरीेंट एज़ द इकोनमिक डेवलपमेंट रेमिफिकेशन फॉर फॉर द होल ऑफ़
3:52 इंडिया एंड फॉर द लोकल रीजन एंड फॉर द डेवलपमेंट ऑफ द रीजन इटसेल्फ देखिए पूरा एक प्रोजेक्ट बन रहा है वो पूरा सिटी डेवलप होगी वहां पे कमर्शियल हब बनेगा जैसे मैंने बताया डी वाटर पोर्ट बनेगा वहां पे तो बहुत सारे बड़े-बड़े शिप आएंगे जब वहां शिप आएगा तो कंटेनर की सर्विसिंग शिप की सर्विसिंग भी हो सकती है आगे जाके कन ऑपरेटर चाहिए तो एंप्लॉयमेंट बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा वहां इसके अलावा एक एयरपोर्ट आएगा जब एयरपोर्ट आएगा तो धीरे-धीरे टूरिज्म बढ़ेगा। तो यह एंप्लॉयमेंट का एक बहुत बड़ा तरीका है जो लोगों को समझना चाहिए। इसको अपोज करने की जगह उसका समर्थन करना चाहिए। ग्रेट निकोबार की सबसे बड़ी ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति है। जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार भी गुजरता है। पूर्वी एशिया और पश्चिमी दुनिया के बीच यह समुद्री मार्ग
4:38 वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफ लाइन माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में मजबूत मौजूदगी भारत को समुद्री गतिविधि पर नजर रखने, रणनीतिक गतिविधि को ट्रैक करने और किसी भी चुनौती का तेजी से जवाब देने की क्षमता देती है। यही वजह है कि ग्रेट निकोबार को भारत का एक महत्वपूर्ण फैक्टर के तौर पर भी देखा जाता है। भारत की समुद्री सोच में [संगीत] बदलाव। आज का भारत केवल जमीनी सीमाओं तक सीमित सोच वाला देश नहीं है बल्कि अब उसकी रणनीति समुद्रों तक फैली हुई है। 21वीं सदी में वैश्विक ताकत वही देश बनते हैं जो समुद्री मार्गों पर अपनी पकड़ मजबूत रखते हैं। हिंद महासागर यह सिर्फ एक समुद्र
5:26 नहीं बल्कि दुनिया के सबसे [संगीत] व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है। हर दिन लाखों बैरल तेल, हजारों कंटेनर और वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन इसी रास्ते से गुजरती है और इसी महासागर के बीचों-बीच स्थित है अंडमान और निकोबार द्वीप समूह। यह द्वीप केवल भारत का हिस्सा नहीं बल्कि उसकी समुद्री [संगीत] सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। और इन्हीं द्वीपों में रणनीतिक तौर पर सबसे महत्वपूर्ण स्थान पर है ग्रेट [संगीत] निकोबार। निकोबार प्रोजेक्ट व्हाट वी कॉल इट हैज़ गॉट फोर कॉमोनेंट्स बेसिकली द कंटेनर ट्रांसिपमेंट पोर्ट देन देयर इज़ ए ड्यूल यूज सिविल एयर स्ट्रिप एंड ए 450 मेगावाट
6:14 पावर स्टेशन एंड ऑफ कोर्स ए कंप्लीट स्मॉल सिटी ऑफ कैटरिंग फॉर 1 लाख पीपल सो कॉस्टिंग अप्रोक्सिममेटली 81000 करोड़ मे बी 9 बिलियन डॉल इक्विवेलेंट सो, अ इंपॉर्टेंट प्रोजेक्ट व्हिच हैज़ ऑलरेडी बीन क्लीयर्ड अह बाय द अहम अह फ़ाइनेंस मिनिस्ट्री एज़ वेल ऐज़ द फॉरेस्ट क्लीयरेंसेस हैव बीन ऑल्सो टेकन अह एनजीटी हैज़ गिवेन द फॉरेस्ट एंड एनवायरनमेंटल अह क्लीयरन्सेस। एंड ओनली द कैबिनेट अप्रूवल इज़ अवेटेड बट द प्रोजेक्ट हैज़ बीन प्लांड एंड इट्स गोइंग अहेड। सो विद इन नेक्स्ट मे बी 30 इयर्स और सो इट इज प्लंड इन फोर फेजेस दिस विल बी
7:01 कंप्लीटेड मे बी इफ इट स्टार्ट्स नेक्स्ट ईयर सो वी आर नॉट हरिंग अप मे बी टुमारो और मे बी फाइव इयर्स और 10 इयर्स वी आर गोइंग टू मेक इट इन अ मैनर सो वी सी द इंपैक्ट इट्स स्ट्रेटेजिक इंपैक्ट इकोनॉमिक इंपैक्ट एंड द एनवायरमेंटल इंपैक्ट ये जगह जब डेवलप हो जाएगी दे जो हमारे जो पोर्ट डेवलप होगा यहां से जो हमारी मेरिटाइम पावर एंड रीच जो होगी होगी वो बढ़ेगी हमारी रीच फ्रॉम डोमिनेंस एंड मैरिटाइम एंड द एयर फ्रंट बहुत बढ़ेगी। ये 150 कि.मी. दूर है सिर्फ मलका स्टेट से। सिर्फ 150 कि.मी. तो हमारी एंड आप आप समझ रहे हैं इस इस मलका स्टेट से कितनी कितना सी रूट जाता है नियरली 30% चाइना की 75% नियरली एनर्जी
7:47 ट्रेड एनर्जी रूट यहां से है। तो इस पे हमारी एबिलिटी टू डोमिनेट एबिलिटी टू टू सिक्योर दिस ट्रेड रूट बहुत जरूरी है। एंड होम उसके बाद तो ये बात आज की तारीख में सबको समझना चाहिए जिसको पहले ना भी समझ हो। सो स्ट्रेटेजिकली बहुतेंस है। मैंने जिक्र किया था अंडमान निकोबार यू नो हमारी जो ट्राई सर्विसेस कमांड है हमने बहुत समय से बोला था कि हमारा यहां फुटप्रिंट बढ़ना चाहिए। हमारी एबिलिटी फॉर सर्लेंस बढ़नी चाहिए। हमारे रेडार्स नेटवर्क्स आपने देखा ये सब कितने जरूरी होते हैं जब ऑब सिंदूर हुआ एंड हमारी रीच बढ़नी चाहिए। इंडोपेसिफिक के ऊपर हमारी रीच यहां से बहुत जब हम होंगे बहुत बड़ी हो जाएगी। खाली क्वाड्स में पार्टिसिपेट करना जरूरी नहीं है। हमारी एबिलिटी टू रीच एंड डोमिनेट एंड एंड बी इफेक्टिव मिलिटरली
8:33 बहुत जरूरी है। तो ये जरूरी है। सो ये स्ट्रेटेजिकेंस है। ग्रेट [संगीत] निकोबार की भौगोलिक ताकत ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित है। यह मलक्का जलडमरू मध्य के बेहद करीब है। वह सक्रा समुद्री रास्ता जिससे होकर दुनिया के लगभग 40% व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। इसका मतलब है जो इस [संगीत] क्षेत्र पर नजर रखता है वो वैश्विक व्यापार की धड़कन को समझ सकता है। अगर इकोनॉमिक डेवलपमेंट से देखा जाए एक इंटरनेशनल जब पोर्ट आता है इस तरह की कॉन्टिनेंट डेवलपमेंट अभी जो हमारी डिपेंडेंस है कोलंबो पे सिंगापुर पोर्ट पे वो कम होगी। हमारी ओवरऑल अह जो यू नो
9:20 इकोनमिक डेवलपमेंट होगी फ्रॉम मैरिटाइम ट्रेड पॉइंट ऑफ व्यू बहुत होगी। हमारा ईज़ेड वहां कितना बड़ा है आप देखिए प्योर ईज़ेड एंड हमारी जो कॉन्टिनेंटल शेलफ है उससे रिलेटेड जो हमारी यू नो एसेट्स हैं। तो ओवरऑल हमारा वहां पे फुटप्रिंट बढ़ना एंड लोकली प्रेजेंट होना बहुत जरूरी है। उस एरिया के डेवलपमेंट के लिए भी जरूरी है। तो खाली ट्राइबल इंटरेस्ट इसी में थोड़ी ना है कि उनको वहीं पर छोड़ा जाए। उसको डेवलप करना जरूरी है। जब टाउनशिप बनेगी अभी 8000 के करीब हैं। 65 लाख के जाएंगे एबिलिटी वहां पे एक फॉर 450 मेगावाट पावर प्लांट आएगा वो भी गैस एंड सोलर बेस। सो ओवरऑल फ्यूचरिस्टिक अगर विज़न देखें जो हमारा मैरिटाइम विज़न है 2030 उससे अलाइंड है। अगर विकसित भारत हमें बनना है उसके लिए ये
10:06 एक बहुत ही बहुत अहम कदम था। गवर्नमेंट ने बहुत स्ट्रेटेजिकली एंड इकोनमिक डेवलपमेंट व्यू पॉइंट से इंफ्रास्ट्रक्चर व्यू पॉइंट से बहुत स्ट्रांग कदम उठाया है। यह स्थान भारत को एक अनोखी रणनीतिक बढ़त देता है। पूर्वी एशिया और पश्चिमी दुनिया के बीच कनेक्शन [संगीत] चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और आसियान देशों के समुद्री रास्तों पर निगरानी और किसी भी समुद्री गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता यानी ग्रेट निकोबार केवल एक द्वीप नहीं बल्कि एक स्ट्रेटेजिक ऑब्जरवेशन पोस्ट है। चाइना ओवर पीरियड ऑफ टाइम हैज़ बीन ट्राइंग टू व्हाट यू कॉल रेस्ट्रिक्ट इंडियास मूवमेंट मैरिटाइम मूवमेंट बाय
10:52 डेवलपिंग पोर्ट्स अराउंड आवर कंट्री कॉल्ड स्ट्रिंग ऑफ पर्स एंड एस अ नेशन व्हिच इज़ रेलेवेंट व्हिच हैज़ ओन सेल्फ रेस्पेक्ट व्हिच इट्स ओन कैपेबिलिटी हैज़ टू डिफेंड्स इट्स इंटरेस्टि इंटरेस्ट बिकॉज़ वी हैव टू गार्ड अबाउट 2.01 स्क्वायर किलोमीटर ऑफ इकोनमिक जोों आज के समय में समुद्री खतरे केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। यहां कई चुनौतियां हैं जो लगातार बढ़ रही हैं। इसके साथ ही हिंद महासागर में वैश्विक शक्ति के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी काफी तेज हो चुकी है। चीन
11:38 इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है और कई बंदरगाहों तक सैन्य ढांचों का विकास भी कर रहा है। ऐसे माहौल में भारत के लिए केवल निगरानी अब पर्याप्त नहीं है बल्कि एक मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और क्विक रिएक्शन भी काफी जरूरी है। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बदला हुआ समुद्री खतरा। आज के समय में खतरे केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। समुद्र में भी कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं। समुद्री डकैती यानी पायरेसी, अवैध तस्करी, ड्रग्स और हथियारों की आवाजाही और सबसे बड़ा भू
12:24 राजनीतिक प्रतिस्पर्धा। हिंद महासागर में कई बड़ी शक्तियां अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। विशेष रूप से चीन जो [संगीत] अपने स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति के तहत इस क्षेत्र में बंदरगाह और सैन्य ढांचे विकसित कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वो केवल निगरानी ही नहीं बल्कि सक्रिय नियंत्रण की क्षमता भी विकसित करें। यू सी व्हेनएवर देयर इज समथिंग व्हिच इज ऑफ ग्रेव्स स्ट्रेटेजिक एंड नेशनलेंस देन दीज़ एनवायरमेंटल कंसर्न्स दिस ट्राइबल डिस्प्लेस डिस्प्लेसमेंट कंसर्न्स दे बिकम सेकेंडरी एंड आई फील दैट दी लीडर ऑफ अपोजिशन शुड बी एबल टू सी इट बियोंड फ्रॉम
13:13 दी प्रिज्म ऑफ दी नेशनल रिक्वायरमेंट और दी स्ट्रटेजिक इंपोर्टेंस ऑफ क्रिएटिंग दिस काइंड ऑफ अ इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एसेट्स इन द ग्रेट निकोबार आइलैंड्स। एंड अह बिकॉज़ आई टोल्ड यू अर्लियर आल्सो दैट ओनली 1.8% ऑफ़ दैट फॉरेस्ट लैंड इज़ गोइंग टू बी डिस्टर्बड। व्हाइल 82% ऑफ़ दैट फॉरेस्ट विल इज़ गोइंग टू रिमेन एज़ वर्जिन एंड एज़ ओरिजिनल एज़ अर्लियर। अदरवाइज़ दी डेवलपमेंट विल शो बिकॉज़ दे विल बी अ टाउनशिप व्हिच विल कम अप। देयर विल बी अलाइड एसेट्स व्हिच विल बी अह कमिंग अप हियर। देयर विल बी अ नेवल एनक्लेव ऑर अ एयरफ़ोर्स एनक्लेव कमिंग अप अलोंग विथ दी पोर्ट एंड दी कंटेनर ट्रांसमेंट शिप। बट दैट एनवायरमेंटल कॉस्ट इज़ वेरी वेरी स्मॉल व्हेन वी लुक एट दी लार्जर पिक्चर। आल्सो लाइक आई टोल्ड यू दैट इफ वी हैव प्रेजेंस
14:00 परमानेंट प्रेजेंस देर इफ वी हैव अ ड्यूल यूज़्ड ग्रीन फील्ड एयर एयरपोर्ट ओर एयर फील्ड कंस्ट्रक्टर देयर देन आर सर्विलेंस एंड आर डोमिनेशन एंड आवर के कैपेसिटी एंड कैपेबिलिटी टू डोमिनेट दी सी लेंस इन दी इंडियन ओसियन रीजन एज़ आल्सो इन दी वेस्टर्न पेसिफिक विल इंप्रूव इंप्रूव्ड बाय लीव्स एंड बाउंड्स। सो वी मस्ट काउंटर दी चाइनीस स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल अ काइंड ऑफ़ अ एक्टिविटी व्हिच इज़ हैप्पेनिंग बिकॉज़ यू सी दे हैव इंटरेस्ट नाउ इन बांग्लादेश। दे हैव कोको आइलैंड्स वेयर दे आर डेवलपिंग अ नेवल बेस इन म्यानमार। दे आर डेवलपिंग देयर कैफू पोर्ट। देन दे आर इन इन अ देयर इज़ दिस क्राइस इस्थमस। वेयर दे आर ट्राइंग टू क्रिएट अ काइंड ऑफ़ अल्टरनेट रूट थ्रू
14:45 दी अस्थमस। अ एंड एंड ऑफ़ ऑफसेट दी मलक्का डलेमा। देन दे हैव हंबनटोटा अह इन श्रीलंका वेयर दे हैव दे आर क्रिएटिंग देयर नेवल प्रेजेंस एंड फर्दर टुवर्ड्स दी अरेबियन सी दे हैव इन ग्वादर एंड जुबोती क्लोज टू दी स्टेट ऑफ़ होरमूस। सो दिस स्ट्रिंग ऑफ पर्स व्हिच दे आर ट्राइंग टू क्रिएट दैट विल बी लार्जली नेगेटेड बाय आवर प्रेजेंस इन आवर ओन आइलैंड चेन एंड दिस इज ऑफ ग्रेट स्ट्रैटेजिक इंपोर्टेंस एट अ स्मॉल कॉस्ट ऑफ दी एनवायरमेंटल कंसर्न अंडमान निकोबार भारत का फॉरवर्ड डिफेंस बेस अंडमान और निकोबार [संगीत] द्वीप समूह को अक्सर भारत का फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस कहा जाता है। यहां से भारत दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकता है।
15:33 अपनी नौसेना और वायु सेना को तेजी से तैनात कर सकता है और समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। लेकिन अब तक इस क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित रहा है। यही वो कमी [संगीत] है जिसे ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट दूर करने जा रहा है। दिस इज द लार्जर डिटेल्ड एंड इट हैज़ गॉट स्ट्रेटेजिक एंड इकोनॉमिक इंप्लिकेशंस। अह इंडिया हैज़ ऑलवेज बीन ऑन द यू नो पेरीफरी ऑफ बोथ इनफैक्ट दिस डोमेनस बट मेकिंग ए बेस इन निकोबार विल नॉट ओनली कंट्रोल चाइनीस असशंस एज वी कॉल पर्ल ऑफ स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल्स व्हाट ही हैज़ क्रिएटेड ग्रेजुअली
16:19 थ्रू गवादार और थ्रू हमंबनटोटा चिटागोंग एंड कॉक प्यू इन म्यानमार। सो दिस विल बी काउंटरवेट टू दिस स्ट्रिंग ऑफ पल्स स्ट्रेटजी व्हाट चाइना हैज़ बीन डेवलपिंग ओवर लास्ट टू थ्री डिकेड्स और सो ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट डिफेंस विज़ ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को अक्सर केवल आर्थिक परियोजना के रूप में देखा जाता है। लेकिन इसका [संगीत] सबसे महत्वपूर्ण पहलू है राष्ट्रीय सुरक्षा। यह परियोजना भारत को एक ऐसा [संगीत] प्लेटफार्म देती है जहां से वह समुद्री निगरानी को मजबूत कर सकता है। सैन्य तैनाती को तेज और प्रभावी कर सकता है और हिंद महासागर क्षेत्र में [संगीत] अपनी उपस्थिति को स्थाई बना सकता
17:06 है। ट्रांस शिपमेंट पोर्ट का डिफेंस रोड। इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा है इंटरनेशनल ट्रांस शिपमेंट पोर्ट। पहली नजर में यह व्यापार के लिए लगता [संगीत] है। लेकिन रणनीतिक रूप से यह एक ड्यूल यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसका मतलब जहां एक तरफ यह व्यापारिक जहाजों के लिए होगा। वहीं दूसरी तरफ नौसेना के जहाजों [संगीत] के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट भी देगा। यानी ड्यूल यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर। जहाजों की रिफ्यूलिंग, मरम्मत और त्वरित तैनाती। इससे भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इंडियास मेरिटाइम ट्रेड इज़ अप्रोक्समेटली 21 टू 22
17:52 टीईयूस द 20 फीट इक्विवेलेंट यूनिट्स इन द टर्म्स ऑफ कंटेनर्स। अह सो आउट ऑफ दैट 75% ऑफ़ दिस ट्रेड और द शिपमेंट इज़ डन थ्रू द फॉरेन पोर्ट्स। समथिंग लाइक सिंगापुर और कलांग पोर्ट और हमंबनटोटा कोलंबो सो दैट कॉस्ट अस हेवीली इन टर्म्स ऑफ़ मनी एंड आल्सो इन टर्म्स ऑफ़ डिलेज़ इट कॉज़ज़ डिले ऑफ़ थ्री टू सेवन डेज़ व्हेन वी यूज़ फॉरेन पोर्ट्स फॉर आवर मेरीटाइम ट्रेड। सो दिस पोर्ट वंस इट इज ट्रांसशिपेंट पोर्ट व्हेन इट इज डेवलप्ड इट विल कैटर फॉर 16 मिलियन टीयूस दैट इज ह्यूज एंड दैट विल यू नो ब्रिज द गैप ऑफ
18:38 75% व्हाट वी आर यूजिंग द फॉरेन पोर्ट्स सो दैट 16 मिलियन टीयूस विल टेक केटर फॉर दैट अ गैप सो दैट एंड सेकंडली दिस इज़ सिंग ऑन द ट्रेड रूट्स मेरिटाइम ट्रेड रूट्स सो देयर इज़ नो इट्स अ जीरो डेविएशन पोर्ट एक्चुअली यू डोंट डोंट हैव टू इंटीग्रेट इंटू द स्लॉट एंड टेक अ लार्जर डिस्टेंस इट इज़ जस्ट देयर एंड इट विल आल्सो गिव अस लॉट ऑफ रिपेयर फैसिलिटीज लॉट ऑफ़ स्टोरेज फैसिलिटीज़ एंड फॉरेन एनी कंट्रीज व्हिच आर पासिंग थ्रू दिस दे कैन यूज़ दिस व्हिच विल आल्सो गिव अस अ लॉट ऑफ़ रेवेन्यू। सो दिस इज़ गोइंग टू बी अ मेजर इकोनॉमिक डिविडेंड टू इंडिया एयरपोर्ट। हवाई सुरक्षा की नई
19:25 ताकत ग्रेट निकोबार में बनने वाला एयरपोर्ट केवल नागरिक उड्डयन के लिए नहीं होगा। यह भारत को देगा लंबी दूरी के सैन्य विमानों की तैनाती। निगरानी विमान [संगीत] यानी सर्लेंस एयरक्राफ्ट का संचालन और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया की क्षमता। इसका सीधा मतलब है भारत अब हवा से भी इस पूरे क्षेत्र पर नजर रख सकेगा। मल्टीडोमेन डिफेंस स्ट्रेंथ। आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं है। अब यह मल्टीडोमेन वॉारफेयर बन चुका है। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत को वो क्षमता देता है कि वह समुद्र यानी नेवी, हवा यानी एयरफोर्स
20:10 और डिजिटल निगरानी यानी सर्ेलेंस सिस्टम्स तीनों को एक साथ जोड़ सके। फिक रिस्पांस [संगीत] कैपेबिलिटी। किसी भी खतरे का सामना करने में सबसे महत्वपूर्ण [संगीत] होता है समय। ग्रेट निकोबार में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर [संगीत] होने का मतलब है तेजी से सैनिकों की तैनाती, हथियारों और उपकरणों की आपूर्ति [संगीत] और तुरंत जवाब देने की क्षमता। यानी भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं [संगीत] देगा बल्कि पहले से तैयार रहेगा। समुद्री निगरानी और इंटेलिजेंस इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत अपनी समुद्री निगरानी प्रणाली को और मजबूत कर सकता है। रडार नेटवर्क,
20:55 सेटेलाइट [संगीत] लिंक और इंटेलिजेंस सिस्टम इन सब के जरिए भारत हर जहाज की गतिविधि पर नजर रख सकता है। संदिग्ध गतिविधियों को पहचान सकता है और समय रहते कारवाई कर सकता है। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का सबसे अहम पहलू है राष्ट्रीय सुरक्षा। इस परियोजना के तहत बनने वाला इंटरनेशनल पोर्ट केवल व्यापारिक गतिविधि तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह भारतीय नौसेना के लिए भी एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक बेस साबित होगा। यहां जहाजों के लिए कई सुविधा मौजूद रहेंगी। इसके साथ ही बनने वाला एयरपोर्ट भारत को लंबी दूरी के सैन्य विमान और निगरानी विमान की तैनाती की क्षमता भी देगा। इसका मतलब है कि भारत
21:43 समुद्र और हवा दोनों से इस पूरे क्षेत्र पर अपनी मजबूत निगरानी रखेगा। आधुनिक युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत को यह ताकत देता है कि वह अपनी समुद्री निगरानी प्रणाली को और मजबूत कर सके। रडार नेटवर्क हो, सेटेलाइट लिंक हो, इसके जरिए भारत समुद्री गतिविधि पर अपनी नजर बना करके रखेगा और संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पहचान करेगा और जरूरत पड़ने पर कारवाई भी आने वाले समय में जल्द से जल्द हो सकेगी। चीन के संदर्भ में रणनीतिक महत्व। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियां भारत के लिए एक बड़ा चिंता का कारण रही हैं। ग्रेट निकोबार की भौगोलिक स्थिति भारत को
22:31 यह क्षमता देती है कि वो [संगीत] मलक्का स्टेट पर नजर रख सके। चीनी जहाजों की गतिविधियों को ट्रैक कर सके और जरूरत पड़ने पर रणनीतिक दबाव बना सके। [संगीत] इसे अक्सर मलक का डलेमा भी कहा जाता है। जहां यह रास्ता किसी भी देश के लिए बेहद संवेदनशील बन जाता है। वी ऑल हैव बीन अफेक्टेड एंड फॉलोइंग द मिडिल ईस्ट क्राइसिस और द कॉन्फ्लिक्ट वेयर द स्टेट ऑफ़ हॉर्मस हैज़ बिकम द कंसर्न फॉर नॉट ओनली फॉर द वॉरिंग नेशंस बट आल्सो फॉर द कंप्लीट वर्ल्ड। एज द ऑयल पाससेस थ्रू दैट 20% ऑफ द ऑयल ऑफ द ग्लोबल कंसमशन पाससेस थ्रू दैट। सो इन द सेम कॉन्टेक्स्ट इफ यू सी मालाका स्टेट 30% ऑफ द ग्लोबल
23:19 ट्रेड पासेस थ्रू दिस एंड 60% ऑफ चाइनीस ऑयल पाससेस थ्रू दिस। सो इट इज़ वेरीेंट एंड इट इज़ अ हॉटस्पॉट इन द फ्यूचर इफ एनीथिंग हैपेंस इन साउथ चाइना सी और मे बी ताइवान क्राइसिस। मलक्का विल गेन अ वेरी इंपॉर्टेंट स्पेस टू लुक एट एंड देयर कैन बी डिसरप्शंस इन दिस रीजन बिकॉज़ ऑल द सी लेंस पास थ्रू मलाका इन दैट कॉन्टेक्स्ट आई हैव रिटेन अबाउट द फोकस टू द चोक पॉइंट व्हाट मलका इज़ एंड हाउ वी कैन बीइंग इन निकोबार आइलैंड्स ग्रेट निकोबार कंट्रोल और मे बी डिनाई इफ दैट काइंड ऑफ़ अ सिचुएशन हैपेंस स्टेट ऑफ़ मलाका से खासकर कर चीन का तो बहुत बड़ा ट्रेड व्यापार उसी जगह से होता
24:04 है। इसके अलावा भारत के पास डीप वाटर पोर्ट नहीं है। उसकी वजह से हमारा बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। रेवेन्यू नुकसान हो रहा है हमारा। और एक बार यदि ये पोर्ट एक बार यह डेवलप हो गया ग्रेट निकोबार तो कमर्शियल के साथ-साथ वहां मिलिट्री डोमिनेंस भी हमारी बढ़ जाएगी। वहां का डेवलपमेंट होगा। एंप्लॉयमेंट जनरेट होगा। इसके अलावा मिलिट्री डोमिनेंस होगी तो आसपास हम सर्विलेंस कर सकते हैं। कौन सा शिप कहां जा रहा है उसके ट्रांसमीटर रिसीवर देख के हम पता कर सकते हैं कि क्या हो रहा है। और यदि जरूरत पड़ी कभी जरूरत पड़ी तो हम उस एरिया को ब्लॉक भी कर सकते हैं। आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता डिफेंस केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। आपदा के समय भी सेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण
24:51 होती है। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के जरिए प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में तेजी से राहत पहुंचाई [संगीत] जा सकेगी। पड़ोसी देशों की मदद की जा सकेगी और भारत क्षेत्रीय नेतृत्व की भूमिका निभा सकेगा। लॉन्ग टर्म स्ट्रेटेजिक विज़ यह प्रोजेक्ट केवल आज के लिए नहीं है बल्कि आने वाले दशकों के लिए तैयार किया गया है। भारत का लक्ष्य है हिंद महासागर में स्थाई उपस्थिति, वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में पहचान और अपने हितों की रक्षा। लेकिन जहां तक मेरी समझ है इस प्रोजेक्ट से भारत का डोमिनेंस ऑफ सीरिया में बहुत बढ़ जाएगा। ऑलरेडी हमने एक ट्राई सर्विस कमांड जो है वो पोर्ट ब्लेयर में इस्टैब्लिश कर चुके हैं और मिलिट्री की एक्सरसाइज वहां
25:37 होती रहती है। कार निकोबार हमारा एयरफोर्स का एक बेस है। ये ग्रेट निकोबार में भी कमर्शियल एक्टिविटी प्लस मिलिट्री एक्टिविटी दोनों को बहुत बढ़ावा मिलेगा और आसपास जो भी एक्टिविटी हो रही है सर्िलेंस हमारा बढ़ जाएगा। सर्विलेंस बढ़ने से जो है हम निगाह हमारी बहुत तेज हो जाएगी। कौन सा शिप कहां से जा रहा है और क्या लेके जा रहा है? तो इससे जिस देश को दिक्कत होगी तो वह तो आवाज उठाएंगे ही। चुनौती और संतुलन। हालांकि यह प्रोजेक्ट रणनीतिक [संगीत] रूप से बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। सबसे बड़ी चुनौती है विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन। [संगीत] भारत के सामने यह जिम्मेदारी है कि सुरक्षा को मजबूत करते हुए प्रकृति और
26:23 स्थानीय समुदायों का भी संरक्षण किया जाए। भारत की समुद्री ताकत का भविष्य। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर योजना नहीं है। यह भारत की बदलती सोच का [संगीत] प्रतीक है। एक ऐसा भारत जो अब केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करता बल्कि [संगीत] अपने हितों को वैश्विक स्तर पर सुरक्षित करता है। लॉन्ग टर्म विज़न देखें, स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट देखें, हमारी इकोनमिक डेवलपमेंट इंटरेस्ट देखें, तो ये तो बहुत जरूरी है। अब होरमोस में आप देख ही रहे हैं क्या हुआ। ईरान ने क्या किया एंड उसके बाद जो ब्लॉकेड किया यूएस ने उसके क्या इंप्लिकेशंस हैं। एंड हमें दोनों से लेसंस लेना चाहिए। एंड हमें हमें दोनों कैपेबिलिटी वहां पे इस तरह की कैपेबिलिटी डेवलपमेंट से हमारी एबिलिटीज इस तरफ में बढ़ती हैं। एंड हमारा आने वाले समय में
27:10 मेन एडवर्सरी चाइना है। उसको देखते हुए उस उसकी मेरिटाइम पावर जिस तरह से बढ़ रही है उसको देखते हुए मलका स्टेट्स की जोेंस है उसको देखते हुए ये तो एक बहुत ही अहम कदम है। इसमें तो सबको होल हार्टेड सपोर्ट देनी चाहिए। एंड एंड एंड ये भी धारणा गलत है कि इसमें ट्राइबल इंटरेस्ट यू नो नहीं देखे जा रहे या यू नो डिफॉरेस्टेशन हो रहा है। ऑफ कोर्स बट ओवरऑल कितना हो रहा है? मिनिस्टर ने ऑलरेडी स्टेटमेंट दिया है 1.78% के करीब जा रहा है सिर्फ एंड वो भी डिफॉरेस्टेशन कहीं होगा। ट्राइबल इंटरेस्ट के सारे देखे गए हैं। यू नो ओवर द इयर्स सारी स्टचटरी बॉडीज एंड जितने भी इसमें होमवर्क किया गया है वो पूरी पूरी तरह से किया गया है। सो सारी क्लीयरेंसेस ट्राइबल
27:55 इंटरेस्ट हैव बीन अपरमोस्ट वो सब इंटरेस्ट लिए जा रहे हैं। इसीलिए इस तरह के जब स्टेटमेंट्स आती है वो जो लोगों को गुमराह हो सकते हैं उससे बचना चाहिए। मेरे ख्याल से इंडिया के लिए यह एक बहुत ही इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट है। भारत सरकार जो भी प्रोजेक्ट बनाती है वो सब तरह के एक्सपर्ट से ओपिनियन लेके वो प्रोजेक्ट बनता है। वो एक दिन में प्रोजेक्ट नहीं बन जाता। जितने भी टाइप के एक्सपर्ट होते हैं डिफेंस के एक्सपर्ट हो गए। कमर्शियलाइज फील्ड के एक्सपर्ट हो गए। फाइनेंस के एक्सपर्ट हो गए। वहां के जो लोकल जनजातियां हैं उनके रिप्रेजेंटेटिव हो गए। वहां के जो लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के लोग हैं उनके रिप्रेजेंटेटिव हो गए। इन सबसे बातचीत करने के बाद ही एक प्रोजेक्ट सामने आता है। तो मुझे ऐसा लगता नहीं है
28:40 कि वहां के लोगों को इग्नोर किया गया होगा और इस प्रोजेक्ट को नहीं देखा गया। इस प्रोजेक्ट में सबकी ओपिनियन ली गई होगी और जो बेस्ट तरीका निकला होगा वो इस प्रोजेक्ट के माध्यम से आएगा। अंडमान और निकोबार द्वीप [संगीत] अब सिर्फ भौगोलिक क्षेत्र नहीं रहे बल्कि भारत के समुद्री सुरक्षा के सबसे मजबूत स्तंभ बन चुके हैं और ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट उसी स्तंभ को और मजबूत करने की [संगीत] दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम है। आने वाले समय में यही परियोजना तय करेगी कि भारत हिंद महासागर में केवल [संगीत] मौजूद रहेगा या एक प्रभावशाली शक्ति बनकर उभरेगा। को इन प्रोजेक्ट से दिक्कत होगी।
29:26 वो तो जाहिर है कि उनको वो अपना आवाज उठाएंगे कि और कोशिश भी करेंगे कि ये प्रोजेक्ट ना हो पाए तो बहुत सब तरीके की अपनाएंगे वो। हो सकता है भारत में भी उनके कुछ प्रतिनिधि हो जो छुपे तरीके से काम करते हो उनको भी उकसाएंगे। तो हम भारतवासियों को यह ध्यान में रखना है कि इस तरह की बातों में हमको नहीं फंसना है। जो भारत के हित में जो बात है हमको वही बात करनी चाहिए। [संगीत] ग्रेट निकोबार आज केवल एक द्वीप का नाम नहीं रह गया है बल्कि यह भारत की भविष्य की समुद्री रणनीति का केंद्र भी बनता जा
30:14 रहा है। बदलते वैश्विक माहौल में जहां समुद्री ताकत ही आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव को तय कर रही है, वहां भारत भी अब अपनी मौजूदगी को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर चुका है। यह प्रोजेक्ट केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं है बल्कि आने वाले समय के लिए भारत की सुरक्षा, सोच, रणनीतिक आत्मविश्वास और वैश्विक भूमिका का संकेत भी है। हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियों के बीच ग्रेट निकोबार भारत को वो बढ़त दे सकता है जो उसे केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि एक मजबूत समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करें। आज के लिए इतना ही। आप देखते रहिए संसद टीवी। जय हिंद। [संगीत]
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