0:08 चलिए आगे देखते हैं। कल जो देखे थे कोई समस्या उसमें कल का क्लियर है? तो अगर गर्म जगह है, तापमान अधिक है तो वायुदाब कैसा होगा? कम होगा। निम्न होगा और यदि ठंडी जगह है, तापमान कम है तो वायुदाब हवाएं हमेशा कहां से कहां चलेंग? उच्च वायुदाब से निम्न क्लियर है? कारण ठीक। आगे देखते हैं। कटिबंधों को देखे थे।
1:29 स्ट्रक्चर याद है ना? भूमध्य रेखा के पास 10 डिग्री उत्तर से 10 डिग्री दक्षिण कौन सा कटिबंध? उष्ण कटिबंध। ट्रॉपिकल जोन। ठीक। फिर ये कौन सा कटिबंध है? उपोष्ण कटिबंध और यह कितना डिग्री से कितना डिग्री 30 डिग्री से 35 डिग्री ये कौन सा कटिबंध और क्या बोलते हैं उपध्रुवीय
2:18 स्थितोष्ण या उप ध्रुवीय कटिबंध और ये कितना डिग्री कितना 65 से 70 सेम सेम नीचे भी रहेगा। तो यह भी है आपका उपोष्ण कटिबंध कितना डिग्री? 30 से 35 डिग्री। और वैसे ही उपध्रुवीय या शीतोष्ण कटिबंध कितना डिग्री आपका? 65 से 70 डिग्री। और ध्रुवों पर रहता है क्या? ध्रुवीय या शीत कटिबंध।
3:09 ध्रुवी या शीत कटिबंध। ठीक। अब जो उष्णकटिबंध है, उष्णकटिबंध हम समझे थे। उष्णकटिबंध कहने का मतलब यहां पर तापमान अधिक है कि कम है? उष्णकटिबंध वह क्षेत्र है भूमध्य रेखा के पास का जहां साल भर सूरज की किरणें सीधी पड़ती है। इसीलिए साल भर यहां तापमान क्या होता है? अधिक। इसीलिए साल भर वायुदाब क्या होगा? तो यहां पर जो बेल्ट बनती है कैसी बनती है? लो प्रेशर बेल्ट। फिर अल्टरनेट चलाना है। बताया था। इसके ऊपर क्या बनेगा? हाई प्रेशर बेल्ट। और यहां भी हाई प्रेशर। फिर क्या बनेगा? लो प्रेशर बेल्ट। तो फिर से लो प्रेशर
3:55 बेल्ट और यहां तापमान बहुत कम है। इसीलिए क्या है? हाई प्रेशर बेल्ट। ये दोनों का कारण तापमान नहीं है। क्या है? उसको हम समझेंगे आगे। बाकी प्रेशर बेल्ट याद रहेगा। ठीक? फिर हवा चलाते हैं। हवाएं कहां से कहां चलती है? उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब। तो हवाएं उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलना चाहिए। इसलिए हवा उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब चलती ऐसे और यह वाली हवा भी उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब चलती लेकिन हवा सीधे-सीधे नहीं चलती है। अपने दाएं या बाएं मुड़ जाती है। जिसके लिए कल कौन सा नियम बताया था? फेरल का नियम क्या कहता है? उत्तरी गोलार्ध की पवनें कहां मुड़ेंग?
4:41 अपने दाएं राइट साइड मुड़ेगी और दक्षिणी गोलार्ध की पवनें बाएं मुड़ जाती है। ठीक? तो यह पवनों को सीधा सीधा इस प्रकार चलना चाहिए। उच्च वायुदाब से निम्न, उच्च से निम्न और उच्च से निम्न। लेकिन उत्तरी गोलार्ध में यह अपने दाएं मुड़ जाएंगी। तो उत्तरी गोलार्ध में दाएं मुड़ेंग तो पवनें कुछ इस प्रकार से चलेंगी। उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर। ठीक? यह पवनें चलेंगी। अब वैसे ही दक्षिणी गोलार्ध की पवनें अपने बाएं लेफ्ट मुड़ जाएंगी। तो ये भी ऐसे चलेंगी। उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर समझ में आ रहा है पवनें कैसे चल रही हैं? अब यह जो ग्रीन कलर की पवनें मैं बनाया हूं तो मैं आपको पवनों के प्रकार में
5:28 स्थाई पवनें लिखवाया था। तो यह जो ग्रीन कलर की पवन है जो उपोष्ण कटिबंध के उच्च वायुदाब से उष्ण कटिबंध के निम्न वायुदाब की ओर चल रही है। इन्हें ही हम कहते हैं व्यापारिक पवनें। ठीक है? तो जो यह उपोष्ण और उष्ण के बीच चलेगी दोनों गोलार्ध में उनको हम क्या कहेंगे? व्यापारिक। समझ में आ रहा है? व्यापारिक पवनें। ठीक? वैसे ही यह पवनें जो उपोष्ण से शीतोष्ण सीधासीधा चलना चाहिए। लेकिन यह अपने उत्तरी गोलार्ध में दाएं मुड़ जाएंगी। मतलब यह पवनें कुछ इस प्रकार से चलेंगी। सेम जो दक्षिणी गोलार्ध की पवनें हैं, यह सीधा-सीधा चलना चाहिए। लेकिन यह अपने बाएं मुड़ जाएंगी। यानी इन पवनों की दिशा कुछ
6:16 इस प्रकार से रहेगी। तो यह उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध की पवनें जो उपोष्ण कटिबंध और शीतोष्ण कटिबंध के बीच चल रही है। ये नीली वाली इन्हें ही हम कहते हैं पछुआ पवनें। दूसरा पवन लिखे थे पछुआ पवन। और सेम यह आपका जो ध्रुवीय कटिबंध से उपध्रुवी की ओर जो पवनें चल रही है यह भी अपने दाएं और नीचे वाली बाएं मुड़ेंग। तो जब यह अपनी दिशाएं बदलेंग तो यह कुछ इस प्रकार से चलेंग और नीचे वाली कैसे चलेंग? कुछ इस प्रकार से चलेंग। तो ध्रुवों के उच्च ध्रुवों के उच्च वायुदाब के क्षेत्र से यहां निम्न वायुदाब के क्षेत्र की ओर चलने वाली जो पवन है या शीत कटिबंध से शीतोष्ण कटिबंध के बीच चलने वाली पवनें
7:01 हैं। इसे ही हम क्या कहते हैं? ध्रुवीय पवनें। तीनों स्थाई पवन क्लियर है। कहां-कहां चल रही है? स्थाई पवन से कहां चलती है? कहां के वायुदाब से कहां के वायुदाब की ओर चलती है? और उनकी दिशा क्या होती है? यह सीधा क्वेश्चन परीक्षा में बनता है। अब दिशा की हम बात करें जैसे कि यह हमारी व्यापारिक पवन है। तो व्यापारिक पवन व्यापारिक पवन की दिशा उत्तरी गोलार्ध में कहां से आती दिख रही है? दिशा तो पता है ना? उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम तो किधर से आते दिख रही है? उत्तर पूर्व और कहां जाती दिख रही है? दक्षिण पश्चिम। तो यही हमको याद रखना है। चित्र से ही सारा चीज याद रहेगा कि उत्तरी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें उत्तर पूर्व
7:47 से कहां चलती है? दक्षिण पश्चिम। लेकिन दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें कहां से चल रही है? दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम। ठीक?कि ये दोनों की शुरुआत लगभग पूर्व से हो रही है। यह भी कहां से हो रही है? उत्तर पूर्व। यह भी कहां से हो रही है? दक्षिण पूर्व। इसीलिए इन्हें पूर्वी पवनें भी कहते हैं। क्लियर हो रहा है? सेम आपका पछवा पवनें किस दिशा से चल रही है? दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व उत्तरी गोलार्ध में और दक्षिणी गोलार्ध में उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व। तो यह पवनेंकि दोनों लगभग पश्चिम से चल रही है। यह दक्षिण पश्चिम से चल रही है और यह उत्तर पश्चिम तो दोनों लगभग पश्चिम से चल रही है। तो पश्चिम शब्द से ही वो पछुआ शब्द
8:34 बना है। तो पश्चिमी पवनें या पछुआ पवनें इन्हें हम कहेंगे। और सेम जो ध्रुवीय पवनें हैं ये भी कहां से कहां चल रही है? उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम। उत्तरी गोलार्ध में। और दक्षिणी गोलार्ध में कहां? दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम। ध्यान रहेगा। तो स्थाई पवनों में इतने ही फैक्ट पूछे जाते हैं। ध्यान रहेगा हेडिंग डाल लीजिए। पहला व्यापारिक पवन और यह एग्जैक्ट चित्र याद रखेंगे अब बना भी लेंगे। व्यापारिक पवनें ट्रेड विंड
9:22 चित्र बना लो पहले
11:05 हेडिंग डालेंगे स्थाई पवन है ना स्थाई पने परमानेंट विंड
12:17 बन गया। लिखिए व्यापारिक पवनों में बीचबीच में बनाते रहना फिर देखिए व्यापारिक पवनों में यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में
13:05 नॉर्थन एंड साउथर्न हेमिस्फयर में यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में उपोष्ण कटिबंध के सब ट्रॉपिकल जोन उच्च वायुदाब के क्षेत्र से उष्ण कटिबंध के
13:55 निम्न वायु दाब के क्षेत्र की ओर चलने वाले स्थाई पवनें हैं। ठीक। अगला लाइन पूर्व दिशा से चलने के कारण
14:48 इन्हें पूर्वी पवन भी कहते हैं। ठीक अगला लाइन उत्तरी गोलार्ध में इनकी दिशा उत्तरी गोलार्ध में इनकी दिशा उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम
15:39 तथा दक्षिणी गोलार्ध में इनकी दिशा दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम होती है। ठीक। तो, यह है आपके व्यापारिक पवन। स्थाई पवन क्यों कह रहे हैं इनको? क्योंकि यह सभी पवनें लगभग साल भर चलती रहती है। इसीलिए
16:26 इन्हें क्या कहा जा रहा है? स्थाई पवनें। ठीक है? अब स्थाई पवन में दूसरा पछवा पवन। पछुआ या पश्चिमी पवन वेस्टलीज व्यापारिक पवन को व्यापारिक पवन क्यों कह रहे हैं? यह पता है कि नहीं? या अंदाजा लगाइए तो क्या अंदाजा लगेगा?
17:14 जहाजों को ले जाते थे। हां वही है और कुछ नहीं है। क्योंकि पहले ऐतिहासिक काल के टाइम में भूमध्य सागर का क्षेत्र ही सर्वाधिक जैव विविधता का क्षेत्र है। यानी ज्यादातर लोग यहीं आसपास रह रहे होंगे और व्यापार करने के लिए यहीं आसपास घूम रहे थे। तो इसीलिए क्योंकि व्यापार करने के लिए इन पवनों का उपयोग होता रहा। इसीलिए क्या नाम पड़ गया? व्यापारिक। ठीक है तो उसको ऐसा लिखने की जरूरत नहीं है। वो नाम से समझना है। पछुआ या पश्चिमी पवन देखिए यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में
18:09 उपोष्ण कटिबंध के उच्च वायु दाब के क्षेत्र से शीतोष्ण कटिबंध के निम्न वायुदाब के क्षेत्र की ओर चलने वाली स्थाई पवनें हैं।
18:58 फिर से बोल दे रहा हूं। गड़बड़ नहीं लिखेंगे। यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में मतलब दोनों में चल रही है। उपोष्ण कटिबंध के उच्च वायुदाब के क्षेत्र से शीतोष्ण कटिबंध के निम्न वायुदाब के क्षेत्र की ओर चलने वाली स्थाई पवनें हैं। क्लियर? इसीलिए चित्र याद रहेगा तो चित्र ही हम लिख रहे हैं। तो चित्र याद रहना ज्यादा सबसे जरूरी है। ठीक? अगला लाइन लिखिए। उत्तरी गोलार्ध में उत्तरी गोलार्ध में इनकी दिशा
19:44 दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व तथा दक्षिणी गोलार्ध में इनकी दिशा उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व होती। उत्तरी गोलार्ध में इनकी दिशा दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व तथा दक्षिणी गोलार्ध में इनकी दिशा
20:32 उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व होती है। अगला लाइन पश्चिम दिशा से चलने के कारण ही पश्चिम दिशा से चलने के कारण ही इसका नामकरण किया गया है।
21:23 ठीक फिर तीसरा ध्रुवीय पवनें पोलर विंड्स देखें यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में ध्रुवों के उच्च वायुदाब के क्षेत्र से
22:23 शीतोष्ण कटिबंध के निम्न वायु दाब के क्षेत्र की ओर चलने वाली स्थाई पवनें हैं। इनकी दिशा उत्तरी गोलार्ध में
23:12 इनकी दिशा उत्तरी गोलार्ध में उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम तथा दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम होती है। दिशा
23:57 इनकी दिशाएं उत्तरी गोलार्ध में दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम एवं दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम ध्यान रहेगा। तो इसीलिए चित्र याद रहेगा तो यह सारी चीजें याद रहेंग और यही जो है परीक्षा में क्वेश्चन के रूप में बनता है। व्यापारिक पवनों के संबंध में सत्य कथन कौन-कौन से हैं? ऐसा ही पूछेगा। तो व्यापारिक पवन सत्य कथन क्या है? ये उपोष्ण और उष्ण कटिबंध के बीच चलेगी। कहां से कहां? उपोष्ण से कहां आएगी? उष्ण आएगी। क्योंकि उपोष्ण में क्या है? उच्च वायुदाब और उष्ण में क्या है? निम्न वायुदाब। दिशा कौन सी रहेगी? उत्तरी गोलार्ध में अलग रहेगी और
24:43 दक्षिणी गोलार्ध में अलग। उत्तरी गोलार्ध में उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम। ध्यान रहेगा तो ये जो तीन चार फैक्ट लिखा हुआ है वही उनकी परिभाषा भी है और वही उन्हीं से संबंधित प्रश्न बनेगा। तो ये तीन स्थाई पवन में कोई समस्या क्लियर है तीनों स्थाई पवन। ठीक? अब इसके बाद चौथी स्थाई पवन में आते हैं जो ज्यादा काम की है और इंटरेस्टिंग है। अब यहां स्थाई पवन को यदि आप ध्यान देंगे तो यह जो व्यापारिक पवन है यह 30 डिग्री
25:29 है। भारत की स्थिति लगभग मान सकता हूं मैं कुछ इस प्रकार की होगी। अंदाजा मान सकते हैं भारत इसको समझ ले भारत है। राइट? तो भारत की यदि हम बात करें तो भारत में जब मानसून का आगमन होता है। ठीक है? तो मानसून का आगमन कौन सी दिशा से होता है? कौन सा आगमन? कहां से होता है? दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व। तो भारत पूरे भारत में मानसून कहां से आता है? दक्षिण पश्चिम दिशा से ही आता है। यानी भारत में जो मानसून की दिशा है वो यह है। क्लियर? दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व। लेकिन यहां जो चलने वाली पवन है वो कहां से कहां चलती है? उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम। ठीक?
26:14 तो यही हमको मानसून में समझना है कि ऐसा क्या हो जाता है कि ये पवनों की दिशा सीधी उल्टी हो जाती है। मतलब जो उत्तर पूर्व से चलने वाली है वो पछवा पवनों की तरह चलने लगती है। तभी भारत में मानसून आता है। अगर नहीं चलती तो भारत में भारत में क्या? ये कर्क रेखा संबंधित दुनिया में जितने देश होते कहीं पर भी मानसून नहीं आता। ठीक? उसको समझेंगे अभी आगे जेट पवनों को समझते हैं। जेट पवनें महत्वपूर्ण है। जेट पवनों के कारण ही भारत की जलवायु विशेष रूप से प्रभावित होती है। जेड पवन ठीक है।
27:06 तो जेट पवनों का कहानी को एक बार समझ लेते हैं। जेट पवनें कैसी पवनें हैं? ठीक? तो जेड पवनें इस प्रकार की पवनें हैं जो सतह पर नहीं चलती। जितनी भी हम यहां स्थाई पवन लिखे सब कहां चल रही है? सतह पर ही चल रही है। जेड पवनें वह पवनें हैं जो क्षोभ मंडल स्ट्रेटोस्फीयर की अधिकतम ऊंचाई पर चल रही है। क्षोभ मंडल की अधिकतम ऊंचाई कहने का मतलब आपका लगभग 8 से 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर चल रही है। कहां चल रही है? क्लियर है? तो जेट पवनें वे पवनें हैं जो क्षोभ मंडल की अधिकतम ऊंचाई मतलब 8 से 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर चलती है। इनकी गति बहुत तीव्र होती है। औसतन ये 150 से 300 किलोमीटर
27:51 प्रति घंटा चलती है और ठंड के मौसम में तो लगभग 500 किलोमीटर प्रति घंटा तक चलने लगती है। इनकी दिशा हमेशा फिक्स होती है। यह पश्चिम से पूर्व की ओर ही चलती है। तीन कंडीशन क्लियर हुआ कि छ कि जेड पवनें कैसी पवनें हैं जो क्षोभ मंडल के अधिकतम ऊंचाई पर चलेगी। मतलब 8 से 12 कि.मी. की ऊंचाई पर चलेगी। दिशा हमेशा कहां से कहां होगी? पश्चिम से पूर्व की ओर होगी। और इनकी जो गति है लगभग 300 कि.मी. प्रति घंटा तक हो सकती है। क्लियर है यहां तक का कहानी? अब जेट पवनों की खोज कैसे हुई? इतनी तेज पवन है। कैसे पता चला? तो इसका कहानी कुछ इस प्रकार का है कि 1945 में अमेरिका के द्वारा जापान में परमाणु बम गिराया गया
28:38 था। सुने हैं सभी इसके बारे में? तो कहानी यह हुआ कि जेट पवन जैसी कोई पवन है। उसके पहले तक उसकी खोज चल रही थी लेकिन पवन की खोज हुई नहीं थी। अब उस समय के जो जेट प्लेन थे या हवाई जहाज थे वो ज्यादा ऊंचाई पर नहीं उड़ पाते थे क्योंकि उनकी क्षमता उतनी नहीं थी। आज की डेट में जो हवाई जहाज है वह क्षोभ मंडल में नहीं उड़ते हैं। वो आपके मान के चलिए लगभग ओजोन लेयर पर उड़ते हैं। यानी अधिक ऊंचाई पर उड़ते हैं। क्योंकि जितने भी आंधी तूफान वाली गतिविधि है वो कहां होती है? क्षोभ मंडल में ही होती। इसीलिए अभी यहां पर हवाई जहाज नहीं उड़ते। लेकिन जब हम 1945 की बात कर रहे हैं तो सारे हवाई जहाज कम ऊंचाई पर ही उड़ते थे। तो हुआ कुछ यह कि अमेरिका जब जापान में परमाणु बम गिराने गया तो वह 4
29:26 घंटे में पहुंचा उदाहरण के लिए लेकिन जब वो वहां से गिरा के वापस आ रहा था तो वापस आने में उसको आठ घंटा लग गया। तो जब बाद में रिसर्च किया गया कि जाते समय 4 घंटा लगा और आते समय इतना ज्यादा समय क्यों लग गया तो पता चला कि जब उन लोग जा रहे थे तो जाते समय किसी पवन के साथ चल रहे थे तो जिससे उनकी गति क्या हुई? बढ़ गई। लेकिन जब वापस आ रहे थे तो पवन के विपरीत दिशा में आ रहे थे जिससे उनकी गति क्या हो गई कम हो गई तो जाते समय जल्दी पहुंच गए आते समय समय लगाकि जेट प्लेन में बैठकर इस पवन का पहली बार एहसास हुआ इसीलिए इन पवनों का नाम क्या रख दिया गया जेट पवनें समझ में आ रहा है जेट पवनों की खोज कैसे हुई तो जेट पवनें कैसी पवनें हैं क्षोभ मंडल की
30:11 अधिकतम ऊंचाई पर दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर गति 300 किलोमीटर मीटर प्रति घंटा से चलने वाली एक तीव्र पवनें है। समझ में आ रहा है? जेट पवन? अब जेट पवन चलती कहां है? तो जेट पवनें जो है यह उपोष्ण और शीतोष्ण कटिबंध में सरपीलाकार आकृति में चलती है। समझ में आ रहा है? कैसे चल रही है? यह उपोष्ण और शीतोष्ण कटिबंध में चलेगी और सीधी-सीधी नहीं चलेगी। विसर्प की आकृति में चलेगी। स्पायरल में चलेगी। और दिशा हमेशा कहां से कहां होगी? पश्चिम से पूर्व की ओर। तो यह है आपकी जेट पवनें। जेट पवनों को समझने में समस्या क्लियर है? जेट पवनें लिखिए जेट पवनों को।
31:00 यह जेट पवनें इतनी ज्यादा जलवायु को प्रभावित करती है कि इन्हीं जेट पवनों के कारण ही हमारे यहां उत्तर भारत में शीत ऋतु में वर्षा होती है। इन्हीं जट पवनों के कारण ही पूरे हिमालय के क्षेत्र में बर्फबारी संभव हो पाती है। नहीं तो बर्फबारी नहीं होती। इन्हीं जट पवनों के कारण ही पश्चिम बंगाल के क्षेत्र में एक तूफान आता है जिसका नाम है काल बैसाखी। सुने हैं इनका नाम? इन्हीं जट पवनों के कारण ही राजस्थान और उत्तर भारत के क्षेत्र में शीत लहर चलती है और गेहूं के लिए हल्की वर्षा होती है जो गेहूं के फसल के लिए सर्वोत्तम सिद्ध होती है। इन्हीं जेट पवनों के कारण ही पश्चिमी विक्षोभ आता है और जिसके कारण उत्तरी छत्तीसगढ़ में भी वर्षा होती है और यही जेट पवन थोड़ा सा इस
31:48 साल खिसक गई है। जिसके कारण अभी आगे हम पढ़ेंगे इसको जिसके कारण अप्रैल महीने में भी ओले पड़े हैं और बिलासपुर तक में अप्रैल के फर्स्ट वीक में वर्षा हुई है। अप्रैल में वर्षा होती रही है क्या कभी? वो तो फरवरी के बाद से ही गर्मी का आतंक शुरू हो जाता है। लेकिन इस साल गर्मी लेट पड़ी है। उसका कारण क्या है? जेट पवन पिछले साल खबर में सुने हैं बहुत ज्यादा बादल फटा है। आपका उत्तराखंड में हिमाचल प्रदेश में जम्मू कश्मीर में धराली धराली गांव याद है? सुने पूरा गांव साफ हो गया। उसके अलावा आपका किश्तवर जम्मू कश्मीर में गांव साफ हो गया। 45 46 लोग मर गए। तो पिछले साल अत्याधिक वर्षा और बादल फटने के दो महत्वपूर्ण कारण थे। एक विशेष ठंडी जलधारा है लानिना। सुने हैं नाम कोई पढ़ेंगे उसको अभी समझ में आएगा। और दूसरा
32:35 कारण था यही जेड पवनें पश्चिमी विक्षोभ को लेकर के आ गई अगस्त में जो कि कभी नहीं आता है। 100 साल में पहली बार ऐसा हुआ था। इसलिए पिछले साल अत्याधिक वर्षा हुई थी। तो पिछले साल अत्याधिक क्यों हुई? इस साल गर्मी में क्यों हो गई? एक-ए पॉइंट आपको क्लियर होंगे। लेकिन हमको बेसिक से जानना है। तो पहले जेट पवन का सिद्धांत समझ लेते हैं। क्लियर है? जेट पवन ठीक लिखिए जेट पवन है। यह क्षोभ मंडल
33:26 यह क्षोभ मंडल इंग्लिश में ट्रोपोस्फीयर की अधिकतम ऊंचाई यह क्षोभमंडल ट्रोपोस्फीयर की अधिकतम ऊंचाई ब्रैकेट में लिख 8 से 12 किलोमीटर में पश्चिम से पूर्व की ओर अत्याधिक तीव्र गति से चलने वाली
34:17 स्थाई पवनें हैं। इनकी औसत गति 150 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा इनकी औसत गति 150 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा तथा अधिकतम 500 किलोमीटर प्रति घंटा
35:06 तक हो सकती है। ठीक। यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में उपोष्ण एवं शीतोष्ण कटिबंध के ऊपर
35:57 विसर्प की आकृति में स्पाइरल विसर्प की आकृति में चलने वाली स्थाई पौने हैं। अपने चित्र में इसको बना लिए रहना और इसमें उत्तर और दक्षिण में अलग नहीं होगा ना दिशा दोनों में कहां से कहां है?
36:43 पश्चिम से पूर्व की ओर ही है। ठीक? पृथ्वी की घूर्णन की जो दिशा है वो भी कहां से कहां होती है? पश्चिम से पूर्व। तो जेट पवनों की भी दिशा क्या है? पश्चिम से पूर्व। याद रखना है लिंक करके। तो यह सब है स्थाई पवनें। स्थाई पवनों में कोई समस्या हम जेट पवनें कहां कहां? जेट पवनों का फंडा ये है। कल हवा चलना मैं आपको बताया था। हवा कैसे चलती है? ठीक है। बना रहे हैं इसको हटा दूं। तो हवा चलने का जो सिंपल फंडा है वही हमारा यह आपका गर्म क्षेत्र हो गया और यह ठंडा क्षेत्र याद है ना
37:30 अब गर्म क्षेत्र है तो तापमान अधिक है हवा गर्म होकर क्या है ऊपर उठ रही है ठंडा क्षेत्र है तापमान कम है हवा भारी होकर नीचे दब रही है इसीलिए इसको हम निम्न वायुदाब कहते हैं और इसे उच्च वायु क्लियर है तो जब गर्म हवा ऊपर उड़ती है तो उसका स्थान लेने के लिए ठंडी ठंडी हवा आ जाती है जमीन के पास। लेकिन जब ऊंचाई में हम जाते जाते हैं तो ऊंचाई के साथ तापमान क्या होता है? कम। तो फिर यह गर्म वाली ठंडी होती है और किसका स्थान लेने के लिए आगे बढ़ती है? ठंडी हवा का स्थान लेने के लिए। तो यह जो ऊपर में चलने वाली पवन है, यह तो हम किसी एक जगह की बात कर रहे हैं ना। पूरे दुनिया में ऐसी पवनें ऊपर उठ रही है और आगे जाकर नीचे दब रही हैं। तो ऊपर में एक अलग से पवनों की पवनों का एक समझ
38:18 लो ग्रुप चलने लगता है। और यही पवन क्या बनती है फिर? जेट पवन। समझ में आ रहा है? जेट पवन कैसे बन रही है? क्योंकि हर पवन जो गर्म होकर ऊपर उठ रही है वो कभी ना कभी ठंडी होगी और ठंडी होकर नीचे जाएगी और नीचे कहां जाएगी? जहां नीचे ठंडी वाली खाली हुई है। तो इस प्रकार से पवनों का एक ग्रुप पश्चिम से पूर्व की ओर ही एक अलग दिशा में चलने लगता है। वही पवन क्या कहला रही है? जेड। समझ में आ रहा है? जेट पवन कैसे बन रहा है? ठीक। तो ये सब स्थाई पवन है। कोई समस्या स्थाई पवन में? क्लियर है यहां तक का कहानी? अब अस्थाई पवन में आते हैं। अच्छा अस्थाई पवन के पहले कुछ और चीजें हम जान लेते हैं। जैसे
39:06 अब जो हम वह देखे थे उपोष्ण कटिबंध और शीतोष्ण कटिबंध में जो दाब की स्थिति है वह अलग होती है जिसका कारण बाद में समझेंगे बोला था ठीक अब शॉर्ट में बनाएंगे क्षेत्र को। तो ये वाला क्षेत्र आपका क्या है? उष्णक कटिबंध है। यह वाला क्या है? उष्ण कटिबंध है। और ये वाला क्या है? आपका शीतोष्ण कटिबंध
39:55 है और यह वाला क्या है? शीत कटिबंध। ठीक? प्रेशर बेल्ट आपको अब याद हो चुका है। बीच वाला कौन सा है? लो प्रेशर बेल्ट, फिर हाई प्रेशर बेल्ट, फिर इधर भी हाई प्रेशर बेल्ट, लो प्रेशर बेल्ट, इधर भी हाई प्रेशर और इधर भी हाई प्रेशर। ठीक है? हवाएं चलाना आपको क्लियर है। अब हाई प्रेशर से लो प्रेशर यह व्यापारिक पवन है। ठीक? वैसे ही यह आपकी कौन सी पवन है? पछुआ पवन है। और यह आपकी कौन सी पवन है?
40:41 ध्रुवीय पवन। क्लियर है यहां तक का कहानी? ठीक। अब यहां पर समझना है थोड़ा सा और कहानी कि होता क्या है? यह वाला हिस्सा आपका लो प्रेशर बेल्ट है। ठीक? यानी चारों ओर से पवनें क्या है? यहां पर आ रही है। यह वाला हाई प्रेशर बेल्ट है। मतलब चारों ओर से पवनें यहां पर आकर दब रही है। नीचे जा रही है। इसीलिए क्या है? ये हाई प्रेशर इसको कहा जा रहा है। अब यहां हाई प्रेशर बना क्यों है? यही हमको समझना है। मैं आपको बताया था। इसका कारण ताप नहीं है। तो होता क्या है कि अभी आप बस यह समझिए कि यह वाला जो हाई प्रेशर है, इसका कारण तो क्लियर है। यहां हाई प्रेशर क्यों है? क्योंकि तापमान क्या है? बहुत कम है। और यहां लो प्रेशर क्यों है? क्योंकि तापमान क्या है? बहुत अधिक है। यहां तक कहानी
41:27 क्लियर है। अब होता यह है। यहां से शुरू करते हैं। यहां तापमान बहुत ज्यादा कम है। जिसके कारण क्या होता है? प्रेशर अधिक होता है। प्रेशर अधिक होगा तो हवा नीचे दबेगी कि ऊपर उठेगी? नीचे दबेगी। अब हवा क्या होती है? यहां पर आकर नीचे दबती है। ठीक? हाई प्रेशर से हवा निकलती है और यहां पर नीचे दबते हुए एक स्थान पर यानी इस क्षेत्र पर पहुंच रही है। और यहां पर हमारा पहले ही क्या था? लो प्रेशर बेल्ट बना हुआ था। ठीक?
42:13 तो हाई प्रेशर बेल्ट से हवा नीचे दबेगी। अब नीचे दब के जमीन में तो नहीं घुस जाएगी। जमीन में टकराने के बाद कहीं ना कहीं आगे बढ़ेगी। तो अभी बस इमेजिन करना है कि ये इधर नीचे दक्षिण की तरफ आगे बढ़ रही है। इमेजिन हो रहा है कहानी। ठीक? उसी प्रकार क्या होता है? अभी यहां हाई प्रेशर है। समझ लेना। तो हाई प्रेशर है तो हवा यहां भी क्या होगी? नीचे दबेगी। तो यह भी हवा नीचे दब के इधर ऊपर की तरफ चल देती है। और सेम हवा यहां से भी दब के कहां चल देती है? नीचे की तरफ चल देती है। ये हवा क्लियर हो रहा है? नीचे की तरफ जा रही है। सेम यहां पर आपका निम्न वायुदाब का क्षेत्र है। तो निम्न वायुदाब का क्षेत्र है। मतलब हवा क्या होगी? ऊपर उठेगी। क्योंकि निम्न वायुदाब का क्षेत्र है। तो
42:58 यहां से हवा जो है वह ऊपर उठती है। यह भी निम्न वायुदाब का क्षेत्र है। मतलब यहां से भी हवा क्या होगी? ऊपर उठेगी। कुछ ऊपर की तरफ उठेगी और कुछ नीचे की तरफ उठेगी। इतना कहानी क्लियर है। ठीक? अब फिर से ध्यान देना है। उच्च वायुदाब का क्षेत्र है यानी हवा नीचे दब कर आगे बढ़ रही है। उच्च वायुदाब का क्षेत्र है। हवा नीचे दब कर आगे बढ़ रही है। उच्च वायुदाब का क्षेत्र है। हवा नीचे दब कर आगे बढ़ रही है। निम्न वायुदाब का क्षेत्र है। हवा यहां से क्या? हल्की होकर ऊपर उठ रही है। कुछ हिस्सा ऊपर जा रहा है। कुछ हिस्सा नीचे जा रहा है। ठीक? सेम यहां पर भी निम्न वायुदाब का क्षेत्र है। तो हवा हल्की होकर ऊपर उठ रही है। कुछ ऊपर की तरफ और कुछ नीचे की तरफ। यहां तक कहानी क्लियर है? तो होता क्या है कि किक क्योंकि हवा यहां से ऊपर उठती है और यह वाली भी हवा
43:46 ऊपर उठती है। ऊपर उठकर यह दोनों हवाएं चांद तक तो नहीं पहुंच जाएगी। पृथ्वी पर ही घूम फिर के उनको वापस आना है। तो यह 30 से 35 डिग्री का एक ऐसा क्षेत्र होता है जहां यह दोनों हवाएं कौन सी हवाएं? जो शीतोष्ण कटिबंध से ऊपर उठी थी और उष्ण कटिबंध से ऊपर उठी थी। ये दोनों हवाएं एक साथ आकर कहां पर दबती है? 30 से 35 डिग्री पर अपने आप आकर दबने लगती है। क्योंकि हवाएं एक साथ यहां दब रही है। इसीलिए कौन सा वायुदाब बनेगा? उच्च वायुदाब का क्षेत्र बनता है। कारण समझ में आ रहा है? तो इसका कारण ताप नहीं है। कारण क्या है? उत्तर एवं दक्षिण दोनों ओर से पवनें आकर दब रही हैं।कि पवनें बहुत ज्यादा दब रही
44:32 है। इसीलिए यहां पर क्या बनता है? उच्च वायुदाब का क्षेत्र। क्लियर? अब यह पवनें यहां पर आकर दबी हैं। अब दबने के बाद यह किसी दिशा में तोंगी ही। दबने के बाद जमीन के अंदर तो घुसेंग नहीं। तो कुछ हिस्सा इसका ऊपर चल देता है। कुछ हिस्सा नीचे जाता है। सेम यहां पर ठंडा क्षेत्र है, उच्च वायुदाब है। वहां से भी पवनें नीचे दब कर नीचे की ओर बढ़ रही है। अब जब ये दोनों पवनें किसी स्थान पर एग्जैक्ट नहीं। किसी स्थान पर यह ध्रुव से आने वाली पवन और यहां उच्च वायुदाब के कारण आने वाली पवन जब एक दूसरे से मिलेंग तो मर्ज होकर गायब हो जाएंगी क्या? वो भी कहीं ना कहीं फिर ऊपर उठेंग। तो जब यह पवनें दोनों तरफ से आती है और इस प्रकार ऊपर उठने लगती है तो पवनों का ऊपर उठना ही क्या कहलाता है? उच्च वायुदाब कि निम्न वायुदाब निम्न
45:19 वायुदाब। इसीलिए यहां पर निम्न वायुदाब का क्षेत्र निर्मित होता है। समझ में आ रहा है? कारण यहां का भी कारण ताप है। यहां का भी कारण ताप है। यहां तापमान अधिक है। इसीलिए क्या है? निम्न वायुदाब। यहां तापमान कम है। इसीलिए क्या है? उच्च वायुदाब। यहां चारों तरफ से पवनें आकर दबने लगती है। इसीलिए क्या बन जाता है? उच्च वायुदाब। यहां चारों तरफ से पवनें आकर ऊपर उठने लगती है। इसीलिए क्या बन जाता है? निम्न वायुदाब। कारण समझ में आया? ध्यान रहेगा। अब इस प्रकार यह पवनें यह ऊपर उठी। फिर उसके बाद यह हाई प्रेशर में नीचे दबी। यह पवनें हाई प्रेशर में नीचे दबी और लो प्रेशर में ऊपर उठी। तो यहां पर एक सेल बनता है। वायु परिसंचण कोष
46:07 पूरा दिख रहा है। सर्कल यहां पर क्रिएट हो रहा है। इसका नाम बस याद रखना है। यह वाले कोष को कहते हैं ध्रुवीय कोष। यह वाले कोष को कहते हैं फेरल कोष। और यह वाले कोष को कहेंगे हेडली कोष। ध्यान रहेगा इसको फेरल ढूंढा इसीलिए फेरल इसको हेडली ढूंढा इसीलिए हेडली और इसके बारे में सबको एक साथ पता चला। क्या नाम रख दिए? ध्रुवी ध्यान रहेगा। समझ में आया? तीनों कोष दोनों का कारण छोटा सा चित्र बनाओ इस कोश का। कोश में एरो सही सही रखना। एरो मैं और क्लियर कर देता हूं।
46:56 यह पूरा एक सर्कल बन रहा है। फिर ये ये ये पूरा एक सर्कल बन रहा है। फिर ये ये पूरा एक सर्कल बन रहा है। वायु परिसंचरण कोष
47:42 एयर सर्कुलेशन सेल ठीक पहला रहेगा आपका हेडली हेडली कोस या हेडली सेल ठीक उष्ण कटिबंध और उपोष्ण कटिबंध के मध्य रहेगा। फिर दूसरा रहेगा फेरल सेल फेरल कोश।
48:35 यह उपोष्ण और शीतोष्ण कटिबंध के मध्य रहेगा और तीसरा रहेगा ध्रुवीय कोश। इतना ही इसमें बस याद रखना है ना ध्रुवीय कोष यह शीतोष्ण और शीत कटिबंध के मध्य रहेगा। और कोष कैसे बन रहा है वो आपको चित्र से क्लियर है। कोष
49:22 कैसे बन रहा है? क्लियर है ना? ठीक। बस इसके नाम से यही क्वेश्चन बन सकता है कि वह कहां है। दोनों में होता है ना उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध सेम यहां पर बन जाएगा फिर से हेडली। फिर यहां फिर से क्या बन जाएगा? पेरल और फिर यहां फिर से क्या बन जाएगा? ध्रुवी दोनों तरफ रहेगा ना। मैं एक ही तरफ बनाया हूं। अभी लिख लेना है। डाउट ना रहे। उत्तरी एवं दक्षिणी दोनों गोलार्ध में तो छोटा सा चित्र बना लेना और इसे नोट करके लिख लेना। वायु परिसंचण कोष तीन प्रकार के होते हैं। तीन जगह में रहेंगे। हेडली कोष रहेगा
50:10 उष्णकटिबंध और उपोष्ण कटिबंध के मध्य जैसा दिख रहा है। फेरल कोष रहेगा उपोष्ण और शीतोष्ण कटिबंध के मध्य। अध्रुवी कोष रहेगा शीतोष्ण और शीत कटिबंध के मध्य। दोनों उत्तरी दक्षिणी दोनों गोलार्ध में रहे।
52:22 आगे लिखना हो गया लिखना अब ये जो कारण उस समय लिखना छूट गया था इनके बेल्ट बनने का लिखिए यही स्टार बना के इसी के नीचे लिखिए स्टार बनाकर उपोष्ण कटिबंध में उपोष्ण कटिबंध सब ट्रॉपिकल जोन
53:11 उपोष्ण कटिबंध में उत्तर एवं दक्षिण दोनों ओर से उपोष्ण कटिबंध में उत्तर एवं दक्षिण दोनों दोनों ओर से पवनें आकर दबती हैं। जिसके कारण यहां उच्च वायुदाब का क्षेत्र निर्मित
53:56 होता है। उपोष्ण कटिबंध में उत्तर एवं दक्षिण दोनों ओर से पवनें आकर दबती हैं या नीचे दबती हैं जिसके कारण यहां उच्च वायु दाब का क्षेत्र निर्मित होता है। क्लियर सेम लिखिए दूसरा लाइन स्टार बना के शीतोष्ण कटिबंध में शीतोष्ण या टेंपरेट सिदोष्ण कटिबंध में उत्तर एवं दक्षिण की पवनें
54:44 उत्तर एवं दक्षिण की पवनें आकर ऊपर उठने लगती हैं। जिसके कारण यहां निम्न वायु दाब का क्षेत्र निर्मित होता है। ठीक तो इसीलिए याद रखना है इसका कारण। तो
55:29 अभी सभी दाब का कारण क्लियर है। यहां पर निम्न वायुदाब की पीटी क्यों है? क्योंकि तापमान अधिक है। यहां पर उच्च वायुदाब क्यों है? क्योंकि चारों तरफ से हवा आकर दब रही है। इसीलिए उच्च वायुदाब यहां निम्न वायुदाब क्यों है? चारों तरफ से हवा आकर उठ रही है। और यहां पर उच्च वायुदाब क्यों है? क्योंकि तापमान बहुत कम है। ध्यान रहेगा। ठीक? चलो आज के लिए मैं इतना ही रखता हूं। यहां तक कोई समस्या? कल हम शुरू करेंगे अस्थाई पवन। अस्थाई पवन में सबसे पहले रहेगा मानसून। तो पानी कैसे गिरता है, क्यों गिरता है? सब कल से जानना शुरू करते हैं।
56:14 यह याद रहना चाहिए। कला के पहले मैं चित्र बनवाऊंगा ना सारी पवनों का। हां