0:00 हमसे क्या हो पाएगा? पर हम क्या कर सकते हैं? एकदम उसको पत्थर मार के भगा दो। कदम लड़खड़ाएंगे। लेकिन लड़खड़ा रहे हो वो कदम आप संभाल लीजिएगा। संभाल सकते हैं। है हम में इतना दम सब में होता है। छोटा मत अनुभव करना कभी। ये शब्द है ना मुझे बहुत प्यारा है। ठसक ऐसे ऐसे तन के खड़े रहना है। बाहर वाले लोगों को लगेगा कि घमंडी हो गए हो। वो यही कहेंगे कि यह तो अपने में चलते हैं। बहुत घमंडी हो गए हैं। अपने आप को तुर्रम खान समझते हैं। कहने दो तुम में इतनी समझ ही होती कि घमंड अलग चीज है और गरिमा दूसरी तो तुम कुछ और होते। हम पे आक्षेप नहीं कर रहे होते। हमारे साथ होते। जब भी लगेगा कोई मजबूरी आ रही है। कहेंगे कोशिश करके तो देखते हैं। अंजाम क्या निकलेगा हमें पता नहीं। प्रयास करने में भी कोई बंधन है? बोलिए। प्रयास
0:48 करेंगे। पूरी ईमानदारी से करेंगे ना। एक जिंदगी, एक दिल, एक सत्य, एक प्रेम। दूजा कोई नहीं। मैंने देखा है कई बार लोगों के पास ये तर्क होता है कि देखिए, यह सब कुछ करना तो आचार्य जी के लिए आसान था। वो आचार्य जी हैं। पर हम कहां कर सकते हैं? तो यह जो आप मजबूरी की बात कर रहे हैं ये जो कुतर्क है इससे कैसे देखिए कुछ भी आसान नहीं था। एकदम आसान नहीं था। एकदम भी आसान नहीं था। पता नहीं क्यों आपको अपने लिए बहाना बनाना है कि मैंने या किसी और ने कुछ कर लिया तो
1:35 वह उसके लिए आसान था और आपके लिए मुश्किल है क्योंकि आपकी मजबूरियां हैं और बंधन है और परिस्थितियां हैं। ये क्या बेकार का बहाना है? कुछ भी नहीं है। अभी जिन पिताजी की बात कर रहे हैं, वह एकदम ग्रामीण परिवेश से आते हैं। उनकी पुरानी कविताएं हैं। कुछ कविताओं में लिखा हुआ है कि दो दिन से खाना नहीं खाया है। वो ऐसी पृष्ठभूमि से आते हैं। अपने तमाम उन्होंने बंधनों के बीच ही सारी पढ़ाई पूरी करी। फिर अधिकारी भी बने। कोई पुश्तैनी जमीन जायदाद नहीं। कुछ नहीं
2:21 ऐसा। और जब आप एक ऐसे घर से आते हो तो जैसे आप बोला करते हो ना कि अरे मां-बाप की उम्मीदें हैं बहुत। वैसे ही वह उम्मीदें तो मुझसे भी रखते होंगे ना कि नहीं रखते होंगे। तो मेरे लिए आसान कहां से हो गया भाई? उनको भी लगता होगा कि जिस तरह की संपन्नता कभी नहीं देखी गई वैसी संपन्नता ये लड़का लेकर के आएगा। यूएस में किसी इन्वेस्टमेंट बैंक में चला जाएगा और साल के कई लाख डॉलर घर भेजा करेगा। हम तो आसान कहां से हो गया?
3:10 फिर कोई चीज ना मिली हो जिंदगी में तो वहां फिर भी आसान होता है। मिली ही नहीं। उसका ना मिलना ही फैसला हो गया। फैसला हो गया ना? पर जो चीज मिल गई है उसका ना मिलना फिर चुनाव होता है। ठीक। कोई चीज आपको मिली ही नहीं। तो फैसला हो गया। पर मिली हुई चीज को छोड़ना एक चुनाव होता है और उस चुनाव में दर्द होता है। मेरे भी दोस्त यार हैं, परिवार है। और मैं भी कोई आसमान से नहीं उतरा हूं। साधारण मिट्टी का पुतला हूं। मेरे भीतर भी
3:56 कई तरह के संशय उठते थे। कुछ स्पष्टता नहीं थी। क्या होगा क्या नहीं होगा चलते रहे चलते रहें देखिए मुझको लेकर के बहाना मत बनाइए कि इस आदमी के लिए आसान था इसलिए अलग चल लिया हमारे लिए आसान नहीं है नहीं चलेंगे मुझे बहाना मत बनाइए बल्कि अगर आपको मेरा इस्तेमाल ही करना है तो मेरी कहानी को सहारा बना लीजिए मेरी कहानी हर उस आदमी के लिए सहारा बन सकती है जो अलग चलना चाहता है पर संशय से घिरा हुआ है और मैं हर तरीके से अलग चला हूं और उन्हीं परिस्थितियों में होते हुए अलग
4:42 चला हूं जिन परिस्थितियों में आप सब हैं तो कोई बहानेबाजी इसमें नहीं चल सकती ना खानदानी रही हूं ना कोई और व्यवस्था है ना मैं किसी परंपरा की पीठ पर बैठा हुआ हूं। ना अपने ऊपर मैंने कोई गॉड फादर कभी स्वीकार करा। ना किसी राजनेता से या राजनैतिक विचारधारा से संबद्ध हूं। कोई नहीं है मेरा। एकदम कोई नहीं। ना धर्म के क्षेत्र में कोई मेरा है ना समाज में है ना राजनीति में है ना मेरे
5:27 पीछे कोई फंडिंग लगी हुई है कुछ नहीं अकेला खड़ा हूं जैसे अभी आपके सामने बिल्कुल ऐसे ही खड़ा हूं और कृपा करके कोई कल्पना कोई कहानी मत बना लीजिएगा कि किसी ना किसी का तो इनको समर्थन मिला होगा एकदम किसी का नहीं और मैं गर्व अनुभव करता हूं यह कहने में कि मैंने सहारा दिया है जब कुछ नहीं था मेरे पास तब भी सहारा दे रहा था। आप भी दे सकते हैं। बहुत साल पहले इसको अंग्रेजी में मैंने ऐसे बोला था गिव गिव एंड गिव एंड गिव फ्रॉम एम्प्टी पॉकेट्स। जब जेब खाली हो ना तब देने में और मजा आता है। और मजेदार बात
6:14 यह है कि तब देते जाओ तो पता चलता है अरे जेब में अभी और है। अपने ही छुपे हुए कोष फिर खुल जाते हैं। अपने आप को निर्बल या निर्धन मत मानिए। आपके पास बहुत कुछ है। देना शुरू करिए ना। चलना शुरू करिए। आपकी ताकत अपने आप खुलेगी। वक्त की बात है। अभी कह रहा था कोई नहीं है साथ में। अगर कोई साथ में है तो आप लोग हैं। और आप लोग भी बस साथ बने रहे और एक झुंड बन जाए, एक समुदाय बन जाए। ऐसी मेरी
6:59 बिल्कुल इच्छा नहीं है। बल्कि मैं चाहता हूं कि हमारे संबंध पर एक कड़ी शर्त रहे। और वो शर्त यह है कि जब तक आप प्रयासरत हैं कि आप उठते रह जीवन में बेहतर होते रह और जब तक मैं उस प्रयास में सहयोगी हो पा रहा हूं तब तक हमारा आपका रिश्ता रहे। जिस दिन आप ऐसे हो जाए कि कहें कि हमें तो बस सुनना है, करना कुछ नहीं। हमें तो बस किताब पढ़नी है, वीडियो देखना है, जीना कुछ नहीं। उस दिन मैं आपको अपने आप से दूर कर दूं। और जिस दिन मैं ऐसा हो जाऊं कि मेरे माध्यम से आपकी चेतना को आपकी मुक्ति को कोई लाभ होना बंद हो जाए उस दिन आप मुझे दूर कर दीजिएगा।
7:46 ये हमारा रिश्ता होना चाहिए और इस रिश्ते में ये कड़ी शर्त होनी चाहिए। ठीक है ना? ये भी नहीं है कि चलो कोई बात नहीं अकेले चले थे पर अब तो बहुत लोग साथ हैं ना साथ वगैरह क्या होता है? इंसान साथ के लिए थोड़ी पैदा होता है। बात आ रही है समझ में? रखनी है ये शर्त। मैं अपना चेहरा आपको तभी दिखाऊं जब मुझे पता हो कि आपके सामने खड़ा होना मैंने अर्जित करा है जब मुझे पता हो कि परिस्थितियों का
8:32 सामना करके आपके सामने आया हूं कि बीते हुए दिन में पूरी मेहनत करी है मैंने और काम के साथ इंसाफ किया है और इस बूते पर आपके सामने खड़ा हूं। मुझे पता हो तो ही मैं आपके सामने खड़ा हूं और आप भी मेरे सामने तभी आए जब आप कह पाए कि जिसके साथ हैं कम से कम थोड़े बहुत उसके जैसे हो रहे हैं। ये शर्त ठीक है कि नहीं है? या आप मेरे लिए गौरव का साधन है और मैं आपके लिए मनोरंजन का और बड़ी हम भीड़ इकट्ठा कर सकते हैं चाहे तो। और फिर ऐसे छाती गौरव इतने बड़े हो गए भाई और जब आप बड़े हो
9:19 जाते हो तो कई तरह के लाभ मिलने लग जाते हैं। आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक लाभ लेने शुरू कर दो। यह करूं मैं? कैसा लगेगा आपको? अगर मैं आपको अपने लिए बस गौरव का साधन बना लूं। तो बोलिए। बोलिए कैसा लगेगा और मुझे कैसा लगेगा अगर मैं आपके लिए बस मनोरंजन का साधन बन जाऊं तो बोलिए ना आपको मेरे लिए साधन बनना है ना मुझे आपके लिए
10:06 प्रेम में एक दूसरे के लिए मनोरंजन का या गौरव का या इच्छा पूर्ति का साधन नहीं बनते ना नहीं बनते ना प्रेम का क्या अर्थ होता है प्रेम माने क्या होता है एक दूसरे का हाथ इसलिए पकड़ा है क्योंकि हाथ अगर थामे रहेंगे तो ज्यादा दूर तक चल पाएंगे और ज्यादा ऊंचे उठ पाएंगे। शर्त है उस शर्त के बिना कुछ नहीं। बात आ रही है समझ में मेरे लिए आसान नहीं था
10:54 आपकी तरह बिल्कुल इंसान हूं एकदम आपकी तरह और आपको भरोसा दिला रहा हूं जितने भी दिन जिऊंगा मैं कभी नहीं बोलने जा रहा है कि मुझ में कोई दिव्यता है अनूठापन है निराला हूं अलग हूं अद्भुत हूं इनलाइटेंड हूं अवतार हूं यह मैं कहिए तो लिख करके के दे दूं। जैसे आज बोल रहा हूं मिट्टी का पुतला हूं। ठीक आपकी तरह वैसे ही जो सच्ची बात है वो बदल कैसे जाएगी यार? आगे दूसरी बात कैसे बोल सकता हूं? तो यह समझ लीजिए कि पहले भी आसान नहीं था। एक तरह की चुनौतियां थी। आज भी आसान नहीं है। आज चुनौती यह है कि मैं अपने आप को उन्हीं के जैसा घोषित कर दूं जो समाज में और धर्म में नेता बनकर घूम रहे हैं। अब प्रयास करने लगूं कि मैं भी
11:40 उन्हीं की बिरादरी में जाकर बैठ जाऊं। और वो प्रलोभन तो लगातार मौजूद ही है ना कि नहीं मौजूद है। आते हैं इधर-उधर से न्योते आमंत्रण। आप हमारे साथ अब बैठना शुरू कर दीजिए। आप क्यों नहीं हमारे दल में शामिल हो जाते? और मैं अगर वैसा करने लग जाऊं तो आपके किसी काम का नहीं बचूंगा। जब मैं किसी दल में शामिल होने से इंकार कर रहा हूं तो आपकी दलगत निष्ठा क्यों है? बताइए। आप कैसे राजनीतिक हस्तियों के दीवाने हुए बैठे हैं?
12:27 आप तो दूर से उनके दीवाने हैं। मुझे तो बहुत पास से बुला रहे हैं। बोलो। और आपको फिर राजनेताओं का और अभिनेताओं का और बड़े उद्योगपतियों का, सेठों का और यही सब जो प्रभावशाली लोग हैं आपको उनका ही मुरीद होना है तो आप उन्हीं के साथ रहिए क्योंकि आप एक ऐसे आदमी के सामने खड़े हैं जो समाज में उतरा है उन प्रभावशाली लोगों के लिए नहीं आपके लिए।
13:14 और यह तो देखिए बेवफाई होती है जो प्यार में बिल्कुल बर्दाश्त करी जाती नहीं कि साहब हम तो आपको समर्पित हैं और आपने दिल कहीं और लगा रखा है चलता नहीं ना और आपने जहां दिल लगा रखा है वो हमारे पीछे हैं। और हम उनको घास नहीं डालते। और आप वहां जाकर के जी कर रहे हैं। यह नहीं चलेगा। ये बात भी मैं गौरव बताने के लिए नहीं कर रहा हूं। इसमें कोई गौरव की बात नहीं है। समाज तो जहां भीड़ देखता है, उसी को श्रेष्ठ मान
14:01 लेता है। ये तो जाहिर सी बात है होगा ही। मेरे साथ भी होगा और भी कहीं भीड़ हो वहां भी होगा। तो इसमें कोई गौरव की बात नहीं है। इसमें सावधानी की बात है। एक निष्ठा होनी चाहिए क्योंकि एक सत्य है। और वही एक सत्य है जो जीवन में नवीनता लाएगा। एक जिंदगी, एक दिल, एक सत्य, एक प्रेम। दूजा कोई नहीं। ठीक। हमने हर चीज को मल्टीपल बना रखा है। जहां देखो वहां तीसरा, पांचवा, 18वां पैदा कर रखा है। जिंदगियां हमें लगता है बहुत सारी हैं। हमारा ही तो दूसरा जन्म हो जाएगा। 100 बार समझाया आप जो है आपका नहीं
14:48 होगा। जिसका पुनर्जन्म होता है वो वस्तु दूसरी है। आप जो व्यक्तित्व है इसका कोई पुनर्जन्म नहीं होता। लेकिन एक जिंदगी यह बात भी हम नहीं मानते आसानी से। बार-बार बोलता हूं आपकी तो एक ही जिंदगी है। एक सत्य हम वो बात भी नहीं मानते। हम द्वैत में विश्वास रखते हैं। हम कहते हैं मैं भी सत्य हूं। संसार भी सत्य है। तो दो सत्य तो कम से कम है ही है। और एक तीसरा भी है। एक भगवान भी है वो भी सत्य है। तो दो का तीन भी बना देते हैं। चार पांच भी बना सकते हो मर्जी है। असंख्य सत्य बना लो। और मैं कह रहा हूं एक जिंदगी, एक सत्य,
15:35 एक निष्ठा। हिम्मत है। एक जिंदगी का मतलब होता है एक पल भी बर्बाद नहीं करना। दूसरी नहीं मिलेगी। एक जिंदगी का मतलब समझते हैं। सब तरह के विचलन और विक्षेप बाहर। समय ही नहीं है। एक जिंदगी है। बीता पल लौटता नहीं और आगे के पल पता नहीं कितने हैं। समय क्या है? क्या बोला था? भ्रम है भैया। नहीं पता। एक जिंदगी, एक सत्य, एक निष्ठा। अगर सत्य एक है तो पांच से मेरी निष्ठा कैसे हो
16:21 सकती है? पांच जगह दिल कैसे लगा सकता हूं? जब सच्चाई एक है तो बोलो कि लगाना है ऐसे को पसंद करोगे जो 70 जगह आशिकी करते फिरते हैं हां आपको मुझ पर फक्र रहे मुझे आप पर फक्र रहे अच्छी चलेगी ना जोड़ी हम आप निराश हो रहे हो मुझे देखें
17:07 चित्त प्रसन्न हो जाए है ना आप कई बार लिख के भेजते हैं कि मन बहुत खिन्न था फिर तभी वीडियो का नोटिफिकेशन आ गया अब बढ़िया है कई लोग ऐसे भी कहते हैं कि आत्महत्या ही करने जा रहा था आपने बचा लिया अब मैं आपको बताना चाहता चाहता हूं। यह सारे विचार मुझे भी आते हैं। मैं किसकी ओर देखूं? तो हमारा रिश्ता ऐसा रहे कि मैं आपको देखूं और मेरा चित्त भी हर्षित हो जाए तो ठीक रहेगा ना। नहीं तो एक तरफा हो जाती है बातचीत। आप तो मुझे देखते हैं तो आपको प्रेरणा भी मिल जाती है, ऊर्जा भी मिल जाती है, उत्साह भी मिल जाता है। होता है ऐसा हां तो मेरे लिए भी तो आप होने चाहिए ना।
17:53 या मैं आपको देखूं और आप बिल्कुल वही जमाने की लाइन में लगे हुए हैं तो मुझे अच्छा लग रहा है या तब और लगेगा कि छोड़ो यार ऐसे क्या करना है जी के सच अनंत होता है। असीम होता है, अजय होता है, लेकिन प्रकृति में वह सदा अल्पमत में होता है। तो आप अगर एक ऊंची प्रेम भरी सही जिंदगी जिएंगे तो आप हमेशा अल्पमत में ही होंगे।
18:39 अल्पमत में रहने की तैयारी कर लीजिए। और अल्पमत में रहने को ही सामान्य मान लीजिए। 10 के बीच में आप अकेले रहेंगे। इस बात को आप अपना दुर्भाग्य भी मान सकते हैं। बोलो क्या मानना है? यह पक्का है कि 10 क्या 100 में आप अकेले रहोगे। इसको आप अपना अकेलापन भी मान सकते हैं और अपना अनूठापन भी। बोलो क्या मानना है? इतनी मुझे उम्मीद नहीं है कि यह दुनिया ऐसी हो जाएगी कि एक दिन 800 करोड़ में से 700 करोड़ सच्चाई के आशिक होंगे नहीं होने वाला हम जहां तक अपना जीवन काल देख सकते हैं आप तो अल्पमत में ही होंगे कभी 10 में एक कभी
19:25 हजार में एक उसको अपना अनूठापन मानिएगा वो अनूठापन है आपका ठीक वैसे जैसे शिखर पर चढ़ा होता है कोई तो अनूठा होता है ना और अकेला होता है वो अकेलापन अनूठापन है। आपके बच्चे होते हैं आप चाहते हैं कि वो कोई प्रवेश परीक्षा पास कर ले। है ना? और जो वहां पर सिलेक्शन रेशियो होता है वो ऐसे ही तो होता है। 1000 में से एक का चयन हुआ। ऐसा ही होता है ना? तो 1000 में एक निकला आपका बेटा, आपकी बेटी। यह बात सौभाग्य की होती है या दुर्भाग्य की? तो आपके बच्चे जब हजारों से अलग काम करें तो अनिवार्य रूप से यह मत मान लीजिएगा कि उन्होंने कुछ गलत ही करा है।
20:11 और आप भी जब पाएं कि सच का रास्ता आपको हजारों से अलग ले जा रहा है तो कुछ अनिष्ट नहीं घट रहा। कुछ बहुत अच्छा बहुत ऊंचा हो रहा है आपके साथ। समझ में आ रही है बात ये हम दो नावों पे एक साथ पांव रखकर नहीं चल पाएंगे और छूटेगी कौन सी नाव ये पहले से पता है जो बड़ी वाली नाव है आप उसी में सवार हो जाएंगे
20:58 एक तरफ है उनका इतना बड़ा टाइटेनिक और दूसरी तरफ है हमारी छोटी सी लाइफ बोट। टाइटेनिक और लाइफ बोट के आकार में क्या अनुपात होता है? 10,000 और एक या 1 लाख और एक। ऐसे ही कुछ। बस इतनी सी बात है कि एक डूबता है, एक बचता है। [प्रशंसा] अपने अकेलेपन से प्रेम करना सीखिए।
21:43 नहीं तो बार-बार यहां नहीं आ पाएंगे। बहुत अनुभव से बोल रहा हूं। दूसरे आपको खींच ले जाएंगे। अपने पाठकों, अपने श्रोताओं के साथ। क्या मैंने तो अपने व्यक्तिगत जीवन में भी इस अनुभव कर दर्द सहा है। जिन पर समाज की बहुत पकड़ होती है वो बहुत दूर तक मेरे साथ नहीं चल पाते।
22:28 सर आज बहुत कुछ है जो आपसे सुनते हैं। बहुत कुछ है जो आपसे सीखते हैं। पर कोई एक बात है जो आप चाहेंगे कि यहां मौजूद हर व्यक्ति उसे अपने साथ लेकर जाए और अंत तक याद रखें। छोटा मत अनुभव करना कभी। और ये चाहेंगे सब कि छोटा अनुभव करो। ये शब्द है ना मुझे बहुत प्यारा है। ठसक हम ऐसे ऐसे तन के खड़े रहना है। हां ये थोड़ा सा पीछे को फेंका रहे। [प्रशंसा]
23:38 जो चीज अवश्यभावी है उसकी तैयारी पहले से जहां हर चीज में मिला मिलावट है। जहां धर्म संस्कृति इनके नाम पर सिर्फ विक्षेप परोसा जा रहा है। वहां अगर आप एक सही साफ सुथरी जिंदगी जिओगे तो अल्पसंख्यक ही रहोगे। अपने आप को विश्व की सबसे छोटी माइनॉरिटी मानने की तैयारी कर लो। हम और उसको मालूम है क्या बोलते हैं?
24:23 उसको बोलते हैं सचेत व्यक्ति। वो एक की माइनॉरिटी होता है। ऐसा भी नहीं कि 10 12 लोग का एक झुंड है, एक दल है। एकदम अकेले अल्पसंख्यक हैं और इतने अकेले हैं। और जो इतना अकेला होता है उसको सब चले आते हैं दबाने के लिए। तो इतना अकेला होता है ना सब चाहते हैं उस पर चढ़ बैठे। किसी को हक नहीं देना है कि चढ़ बैठे। समाज के प्रति एक स्वस्थ अनादर का भाव रखो।
25:09 हेल्दी कंटेंप्ट। हेल्दी बोला है। यह नहीं कि जो मिला उसी को झाड़ दिया। वो रखना जरूरी है क्योंकि अपने आपको वरना बचा नहीं पाओगे। हर बच्चा एक संभावना लिए पैदा होता है। दुनिया उस संभावना को खा जाती है। दुनिया आपको भी खा जाएगी। दुनिया है ही इसीलिए कि इंसान को खा जाए। भरतहरी कह गए थे ना तुम नहीं खाते। दुनिया तुमको खाती है। तुम सोच रहे हो कि
25:57 तुम भोग को भोग रहे हो। भोग तुम्हें भोग रहा है। तुम नहीं खा रहे यहां पे। तुम पैदा हुए हो खाए जाने के लिए। यह दुनिया सबको खा जाती है। तैयार रहो नहीं खाए जाना है। गरिमा डिग्निटी क्या डिग्निटी ऐसी गरिमा जो दहाड़ती है बदतमीज गरिमा हम जिस बदतमीज़ी की बात कर रहा हूं वो अच्छी ही नहीं है वो आवश्यक है। साधारण बदतमीजी की बात नहीं कर रहा।
26:47 ये सर है। ये सिर्फ सत्य के सामने झुकता है। क्या? और अगर 50 जगह झुकता है उसके बाद सत्य के सामने झुकता है तो भला है कि सत्य के सामने भी ना झुके। बिका हुआ सर। सत्य के सामने सर झुकाने का महत्व सिर्फ तभी है जब वह सर कहीं और ना झुका हो। कहीं झुकना नहीं चाहिए। वो गरिमा वो ठसक बनी रहे। सर झुके नहीं और हाथ फैले नहीं। याचक नहीं बनना है। भिखारी नहीं है हम।
27:32 सहारा दे देंगे मांगेंगे नहीं और खूब सहारा देंगे। किसी को सहारा देने में अपना नुकसान होता हो तो और देंगे सहारा। तभी तो मजा है ना। देखिए तो कितनी चोट झेल सकते हैं। जिसको सहारा दे रहे हो वही पलट करके मारे हमें तो भी उसको देंगे सहारा। देखें तो दिल कितना बड़ा है। आ रही बात समझ में? सच्चाई का सिपाही
28:19 संसार के दर पे भिखारी थोड़ ही बनेगा या बनेगा? हटो। हटो तुम। यह भाव रहता है फिर। प्रेम में तो सब कुछ अर्पित कर देंगे। पर जहां डर है, जहां लालच है, जहां धमकी है, जहां दबाव है, वहां हमसे बस उपेक्षा और अनादर ही पाओगे। ठीक है ना यह? और कभी भी यह भाव उठेगा अगर कि यह तो हारी
29:05 हुई चीज है। सामने वाला पक्ष बहुत बलवान है। हम छोटे हैं। कमजोर हैं। ऐसी भावना को क्या करना है? दूर हट छू। सबसे बड़ा दोष है कमजोरी। अहम वृत्ति को ऐसे भी परिभाषित कर सकते हो। अपने भीतर का वह भाव जो कहता है कि हम संकुचित हैं, सीमित हैं, क्षुद्र है, संकीर्ण हैं। उसे अहमवृत्ति कहते हैं। अपने ही भीतर की संकीर्णता को अहवृत्ति कहते हैं। जब भी ऐसा भाव आए, हमसे क्या हो पाएगा? पर हम क्या कर सकते हैं? एकदम उसको पत्थर मार के भगा दो।
29:50 पढ़ेंगे तो ऊंचे से ऊंचा पढ़ेंगे। देखेंगे तो ऊंचे से ऊंचा देखेंगे। घटिया साहित्य नहीं पढ़ेंगे। घटिया संगति नहीं करेंगे। घटिया जीवन नहीं जिएंगे। घटिया नौकरी नहीं करेंगे। घटिया पेशा भी नहीं अपनाएंगे। और हम सब जानते हैं कि घटिया किसको कहते हैं। कम से कम अगर मेरे साथ रहे हैं आप तो आप भली-भांति जानते हैं घटिया किसको कहते हैं। जानते हुए भी अगर घटिया काम करा तो अपने आप को माफ नहीं करेंगे। ठीक है ना? और फिर तन कर जिएंगे।
30:37 क्योंकि पता है कीमत चुकाई है। खोखला घमंड नहीं कर रहे। ठोस गरिमा है। गरिमा और घमंड में अंतर होता है ना। हां। बाहर वाले लोगों को लगेगा कि घमंडी हो गए हो। वो यही कहेंगे कि ये तो अपने में चलते हैं। बहुत घमंडी हो गए हैं। अपने आप को तुर्रम खान समझते हैं। कहने दो। तुम में इतनी समझ ही होती कि घमंड अलग चीज है और गरिमा दूसरी। तो तुम कुछ और होते। हम पर आक्षेप नहीं कर रहे होते। हमारे साथ होते।
31:25 एक-एक चीज में चुनाव करेंगे ना। क्या कपड़ा पहन रहे हैं? क्या खाना खा रहे हैं? कहां रह रहे हैं? कौन सी किताबें पढ़ रहे हैं? कौन सा चैनल देख रहे हैं? किन लोगों का समर्थन कर रहे हैं? किनका विरोध कर रहे हैं? कर सकते हैं कि नहीं कर सकते हैं? और जब करेंगे तो है ताकतें जो विरोध करेंगी उनको झेलेंगे ना। हां, झेलेंगे। और जब झेलेंगे तो पता चलेगा अरे तो झेल सकते थे। इतना भी मुश्किल नहीं था। चोट लगी लेकिन बर्दाश्त कर सकते थे। पहले भी बर्दाश्त कर सकते थे आज तक क्यों नहीं बर्दाश्त किया चोट लगी दर्द हुआ और जब लगती है चोट तो तिलमिलाता है आदमी तिलमिलाएंगे आप एक बार को कदम लड़खड़ाएंगे
32:13 लेकिन लड़खड़ा रहे हो वो कदम आप संभाल लीजिएगा संभाल सकते हैं है हम में इतना दम सब में होता है हमारे पुरखे हमारे पूज्य हमारे प्रेम में ही हमें बताया गया है ना कि अमृत की औलाद हो तुम। तुम इतनी आसानी से कैसे लड़खड़ा सकते हो? ऋषियों ने वो बात सिर्फ अपने लिए नहीं बोली थी। हम सबके लिए बोली थी ना। अमृतस्य पुत्र
33:02 करेंगे प्रयोग हर बार जब भी लगेगा कोई मजबूरी आ रही है कहेंगे कोशिश करके तो देखते हैं अंजाम क्या निकलेगा हमें पता नहीं प्रयास करने में भी कोई बंधन है परिणाम पर हमारा बस नहीं क्या प्रयास भी हमारे हाथ में नहीं बोलिए प्रयास करेंगे पूरी ईमानदारी से करेंगे ना हां एक बार भी अर्जुन को नहीं कहा कि तुम जीतोगे लेकिन बार-बार कहा कर्म पर अधिकार है कर्म से कैसे पीछे हट रहे हो कौन सा कर्म निष्काम कर्म जो कहां से आता है अपने भीतर के अंधेरे को जानने से और लड़ने
33:48 से आता है। जानेंगे कि हमारे ही भीतर हमारा दुश्मन है। उससे लड़ लिए तो बाहर के दुश्मन है। क्या दम है इनमें? गीता उतरेगी एक-एक पल में पक्का नहीं। पर प्रयास तो करेंगे। करेंगे ना? करेंगे। नैन्यम ना पलायनम। ना हम छोटे हैं ना हम मैदान छोड़कर भागते हैं।
34:37 चोट लगती है चोट सहते हैं। मौत आती है मौत सहते हैं। मौत भी कोई हमें पहली बार आ रही है क्या? मौत भी बहुत पुरानी है। नया तो वह जीवन है जिसके लिए प्रयास कर रहे हैं। हजार बार पहले मरे एक बार और मर लेंगे पर नए जीवन के लिए प्रयास तो करेंगे ना। करेंगे ना? ये बात बिल्कुल अधूरी छोड़कर जा रहा हूं क्योंकि बात कभी पूरी नहीं होती। पूरा तो जिंदगी को ही होना होता है।
35:24 जिंदगी को आपको पूरा करना है। हां। कभी बिल्कुल आस टूटने लगे, भरोसा मिटने लगे। लगे कि घुटने टेक ही दें और बाकी सब उपाय काम ना आ रहे हो तो एक उपाय यह और कर लीजिएगा याद कर लीजिएगा कि एक व्यक्ति है जो कम से कम अभी घुटने नहीं टेक रहा है।
36:11 आप अगर अकेले भी हैं तो एक और व्यक्ति भी है जो अकेला है। दो अगर अकेले हो तो अकेले तो नहीं कहलाते। हम्म जो संघर्ष आपका है वही मेरा भी है। ना आपको सर झुकाना है ना मुझे। ना आपको घुटने टेकने हैं ना मुझे। और चलेंगे तो साथ, बढ़ेंगे तो साथ। समझ में आ रही है बात?
36:59 [प्रशंसा] [संगीत] हम्म [संगीत]