0:00 बहुत लोग खासतौर पे हिंदू धर्मावलंबी ये सिद्ध करने की कोशिश में लगे रहते हैं कि रामायण और महाभारत सच्ची घटनाएं [संगीत] हैं। अरे भाई जिन्होंने हमें रामायण और महाभारत दी उन्हें अगर यही साबित करना होता तो कम से कम यह तो बता देते कि यह सब कुछ रामों के और कृष्णों के ना तो जन्म के ना ही मृत्यु के वर्ष कहीं भी अंकित संचित किए गए। इस बात का कोई लेख ही नहीं रखा गया कि यह कब पैदा हुए, कब कहां गए, कब क्या किया, कब क्या किया। कहीं बताना भी पड़ा कि वर्ष चल रहे हैं या कोई अंतराल कोई अवधि बीत रही है तो उस बात को काव्यात्मक तरीके से बता दिया। लेकिन कभी साफ-साफ नहीं बताया गया। साफ-साफ नहीं बताया गया। उसके पीछे एक बड़ी ऊंची बड़ी
0:46 सुंदर वजह है। वो पकड़ो। इस बात से कोई इंकार नहीं कर रहा कि वह निश्चित रूप से ऐतिहासिक पात्र [संगीत] थे कि मनुष्य रूप में वो निश्चित रूप से धरती पर विचरण करते थे कि श्री राम और श्री कृष्ण का निश्चित रूप से कभी ना कभी जन्म हुआ था मनुष्य योनि में उनकी भी देह के तौर पर मृत्यु हुई थी। अवसान हुआ था। यह बात निश्चित रूप से है। [संगीत] रामायण का महत्व इसमें नहीं है कि पुष्पक विमान वास्तव में उड़ता था कि नहीं उड़ता था। रामायण का महत्व रामायण और महाभारत तथ्यों से ऊपर की बातें हैं। बहुत लोग खासतौर पे हिंदू धर्मावलंबी यह
1:33 सिद्ध करने की कोशिश में लगे रहते हैं कि रामायण और महाभारत सच्ची घटनाएं हैं। अरे भाई, जिन्होंने हमें रामायण और महाभारत दी, उन्हें अगर यही साबित करना होता कि यह घटनाएं यथार्थ हैं। इन घटनाओं में कोई तथ्य है तो कम से कम यह तो बता देते कि यह सब कुछ किस शताब्दी में हुआ। किस वर्ष में हुआ और भारत का गणित सदा से ही मजबूत रहा है। ऐसा नहीं है कि घड़ी में हमें समय देखना नहीं आता था या हमारे पास कैलेंडर नहीं था जिसमें हम
2:20 माह या वर्ष देख पाए। निश्चित रूप से इस बात की गणना भी की जा सकती थी और इस बात का साफ-साफ इतिहास में उल्लेख भी किया जा सकता था कि किस वर्ष में राम या कृष्ण पैदा हुए नहीं किया गया क्योंकि इस बात को अमत माना गया ये बच्चों की बातें कौन इन बातों में पड़े कि यह कब पैदा हुए कब मरे क्योंकि क्योंकि वह कब पैदा हुए कब मरे यह बात तो उनको साधारण भौतिक मनुष्य बना देगी ना भाई जीता कौन है मरता कौन है एक साधारण देहधारी जीता है, मरता है। तो रामों के और कृष्णों के ना तो जन्म के ना ही मृत्यु के वर्ष कहीं
3:06 भी अंकित संचित किए गए। इस बात का कोई लेख ही नहीं रखा गया कि यह कब पैदा हुए, कब कहां गए, कब क्या किया, कब क्या किया। कहीं बताना भी पड़ा कि वर्ष चल रहे हैं या कोई अंतराल कोई अवधि बीत रही है तो उस बात को काव्यात्मक तरीके से बता दिया। लेकिन कभी साफ-साफ नहीं बताया गया। साफ-साफ नहीं बताया गया। उसके पीछे एक बड़ी ऊंची बड़ी सुंदर वजह है। वो पकड़ो। वजह यह है कि जिनकी बात हो रही है वह वह लोग हैं जो समय की सीमा से तुमको बाहर ले जाने वाले हैं। उनका काम है कि वह तुमको कालातीत कुछ लाकर दे दे। एक सामान्य आदमी अपना पूरा जीवन समय के
3:52 भीतर बिताता है। अवतार वह है जो अपना जीवन इस तरह बिताता है कि वो स्वयं भी समय से बाहर खड़ा है और तुमको भी समय से बाहर ले जाए। समय से बाहर ले जाए माने क्या? समय का मतलब है परिवर्तन। समय से बाहर खड़े होने का मतलब हुआ कि वह कुछ ऐसा पा लेता है जो अपरिवर्तनीय है जो बदल नहीं सकता। क्योंकि वह समय से बाहर खड़ा है। तो इसीलिए उसके जीने और मरने के समय का निर्धारण नहीं किया गया। वह बात बचकानी हो जाती कि एक और तो हम कह रहे हैं कि ये जो हैं ये कालजई हैं। ये कालातीत हैं। ये अकाल मूर्ति हैं। और उसकी बात हम बताएं कि इनका जन्म हुआ था फलाने वर्ष में। तो वो बात हास्यास्पद हो
4:39 जाती। तो इसलिए नहीं बताया गया। लेकिन आजकल हम पुरजोर साबित करने में लगे हुए हैं कि नहीं साहब इस सन में पैदा हुए थे। यहां रहते थे। इस नदी किनारे खेले खाए थे। इस जगह उनका महल था और यह सारी बातें इस बात से कोई इंकार नहीं कर रहा कि वो निश्चित रूप से ऐतिहासिक पात्र थे। कि मनुष्य रूप में वह निश्चित रूप से धरती पर विचरण करते थे कि श्री राम और श्री कृष्ण का निश्चित रूप से कभी ना कभी जन्म हुआ था मनुष्य योनि में और यह भी कि उन्होंने समाधि भी ग्रहण करी थी। उनकी भी
5:24 देह के तौर पर मृत्यु हुई थी। अवसान हुआ था। ये बात निश्चित रूप से है। रामायण और महाभारत कोई कपोल कल्पनाएं नहीं है कि किसी ने यूं ही बैठे-बैठे सपना लिया और लिख दिया। तो ये ऐतिहासिक चरित्र निश्चित रूप से थे। राम भी, कृष्ण भी और तमाम जो पात्र हैं, जिनको अवतार माना गया है, वो सब भी, वह ऐतिहासिक चरित्र निश्चित रूप से थे। लेकिन, मुद्दे की बात यह नहीं है कि वो ऐतिहासिक थे कि नहीं थे। मुद्दे की बात यह बिल्कुल नहीं है कि वो किस समय थे, किस समय नहीं थे। मुद्दे की बात है कि उन्होंने जो सीख दी है वो तुमको समय से पार ले जाती है। असली बात को पकड़ो। वो किस समय थे यह मत पूछो क्योंकि यह प्रश्न महत्वहीन है। असली
6:09 प्रश्न यह है कि उनकी सीख को जानकर उनकी सीख पर अमल करके तुम खुद भी समय से बाहर निकले या नहीं निकले। तुम्हें भी कुछ ऐसा मिला कि नहीं मिला जो नित्य और अविनाशी है। जो कुछ भी समय में है उसका तो विनाश हो जाता है ना। जो समयातीत [गला साफ़ करने की आवाज़] है मात्र वही अविनाशी है। तो श्री राम के योग वाशिष्ट से श्री कृष्ण श्रीमद् भगवत गीता से तुम्हें कुछ ऐसा मिला या नहीं मिला जो अपरिवर्तनीय कालातीत और अविनाशी है। अगर तुम्हें मिला तब तो तुमने रामों और कृष्णों से कुछ सीखा कुछ जाना और अगर तुम उनको ऐतिहासिक चरित्र ही बनाते रह
6:55 गए तो फिर यह तुम्हारा अपना अहंकार मात्र है। तुम फिर बस यह कर रहे हो कि तुम श्री राम और श्री कृष्ण को भी सामान्य राजाओं की श्रेणी में खड़ा कर रहे हो। जो सामान्य राजा वगैरह होते हैं उनके जीने मरने के सब सवाल बिल्कुल हमें साफ-साफ पता होते हैं। उन्होंने कौन सी लड़ाई किस दिन लड़ी, किस सन में लड़ी सब पता होते हैं। वह कोई सामान्य राजा थोड़ी ही थे। उन्हें यूं ही अवतार नहीं बोला जाता। कोई विशेष कारण है। उस विशेष कारण को समझो। भारत में इतनी बुद्धि, इतना बोध हमेशा से था कि कुछ बातों के साथ समय का धागा ना जोड़ा जाए। इसलिए इन लोगों
7:41 के साथ समय का धागा नहीं जोड़ा गया। यह बार-बार पूछना कोई बुद्धिमानी की बात नहीं कि क्या रामायण महाभारत सत्य घटनाएं हैं? क्या पुष्पक विमान वास्तव में उड़ता था? अरे बाबा रामायण का महत्व इसमें नहीं है कि पुष्पक विमान वास्तव में उड़ता था कि नहीं उड़ता था। रामायण का महत्व राम के चरित्र में है। राम तुम्हारा चरित्र स्वयं ही काव्य है। कभी कोई बन जाए सहज संभाव्य है। अब राम का चरित्र तो तुमने गुना नहीं। तुम्हारी सारी ऊर्जा लग रही है इसी प्रश्न से उलझने में कि भारत और लंका के मध्य सेतु बना था कि नहीं बना था और हम उस सेतु को खोज के निकालेंगे। तुम्हारी सारी ऊर्जा लग रही है
8:27 यही पता करने में कि पुष्पक विमान कैसे उड़ता था और जो ये ब्रह्मास्त्र था ये किस ऊर्जा से काम करता था। यह प्रश्न ही महत्वहीन है। जो असली बात है वह यह है कि श्री राम का पूरा वृत्त तुम्हारे सामने है। तुम्हारे भीतर कुछ रामत्व उतरा या नहीं उतरा? रामत्व तुम्हारे भीतर एक ढेले का नहीं उतरा। लेकिन तुम लगे हुए हो रामसेतु की बात करने में। यह क्या पागलपन है? अरे मान लो वह सेतु है भी। मान लो तुमने वह पा भी लिया। उससे तुम्हारे जीवन पर क्या अंतर आ जाना है। अवतार इसलिए आते हैं कि उन्होंने पीछे जो अपने ऐतिहासिक अवशेष छोड़े हो तुम उनकी खुदाई करो। यह अवतार इसलिए आते हैं ताकि उनसे सीख ले कि तुम अपना जीवन परिवर्तित
9:12 करो। जीवन परिवर्तित करने में तुम्हारे अहंकार को कोई रुचि नहीं है। क्योंकि जीवन परिवर्तित करने में अहंकार को चोट लगती है। हां। ये कहने में कि मेरे धर्म के देवी देवता हैं। ये देखो इनके बारे में यह चीज निकली। इनके इस जगह अवशेष मिलते हैं। इनकी खुदाई में यह मिल गया। इनका फलाने देश में बड़ा भव्य मंदिर है। यह सब करने में अहंकार को बड़ा बल मिलता है। और बल क्या मिलता है? भाई मैं इस धर्म का मानने वाला हूं ना। मैं हिंदू हूं। मैं हिंदू हूं। तुम मेरे आराध्य को बड़ा होना ही चाहिए ना। तुम ये नहीं कह रहे हो। मेरा आराध्य बड़ा है। तुम अपने आराध्य को बड़ा बनाना चाहते हो क्योंकि वो तुम्हारा आराध्य है। अंतर को समझना। भाई मैं इतना बड़ा आदमी हूं।
9:58 तो मेरे देवता छोटे कैसे हो सकते हैं? और अगर मेरे देवता छोटे साबित हो गए तो फिर मैं बड़ा आदमी नहीं कहला पाऊंगा ना। अहंकार इस तर्क पर चलता है। कहता है मैं मेरे जैसे महान आदमी का देश तो बहुत महान होगा ही होगा ना। तो फिर मैं बोलूंगा मेरा देश महान है। इसलिए नहीं तुम ये बोल रहे हो क्योंकि तुम्हें देश से वास्तव में कोई सम्मान या प्रेम है। इसलिए बोल रहे हो कि तुम उस देश के वासी हो। तुम कह रहे हो मेरे जैसे बड़े आदमी का देश छोटा कैसे हो सकता है? मेरे जैसे महान हिंदू का आराध्य छोटा कैसे हो सकता है? राम और कृष्ण भी तुम्हें देखेंगे तो हंस पड़ेंगे। कहेंगे वाह रे हम अवतरित होकर के आ गए। हम बैकुंठ छोड़कर के पृथ्वी पर आ गए तुमको कुछ बातें समझाने के लिए। लेकिन वाह
10:45 रे अनाड़ी तुम वो बातें समझे नहीं। हम तुम इन्हीं प्रश्नों में उलझे हुए हो कि कौन सा देश कहां था? कितने किलोमीटर दूरी नापी बाण वास्तव में थे कि नहीं थे कोई अभी आया था वो बता रहा था कि देखिए ये इतनी जो बातचीत होती थी इतनी दूर-दूर लोग बिखरे हुए थे निश्चित रूप से जंगल में वाईफाई था और यह तो हमारी अनमोल पुरातन भारतीय संस्कृति है। जंगल में वाईफाई ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता। मैं फिर पूछ रहा हूं तुमसे। तुमने श्री राम से त्याग सीखा?
11:34 तुमने श्री राम से समभाव सीखा। तुमने श्री राम से प्रत्याहार सीखा और समर्पण सीखा। बोलो यह सब तुमने उनसे नहीं सीखा। तुमने ना उनसे मर्यादा सीखी, ना उनसे कर्तव्यशीलता सीखी। तुम बस लगे हुए हो अपने अहंकार के पीछे राम का भी नाम बदनाम करने में। तुमने श्री कृष्ण से गीता सीखी निष्काम कर्म सीखा। बताओ जरा मुझे क्षेत्रज विभाग समझाना
12:21 विभूति योग समझाना विकर्म अकर्म में अंतर क्या है समझाना यह सब नहीं सीख रहे श्री कृष्ण से जो उनकी अमूल्य कालातीत देन है उससे तुम कोई संबंध ही नहीं रखना चाहते हां इधर-उधर की ऐसी बातें हैं जो अपेक्षितया महत्वहीन है उनसे उलझे हुए हो स्वयं श्री कृष्ण को यह बात ना पसंद आए आपको खुशी होगी इस नाते जो हमारी अपनी ऐप है जिसमें हमारे गीता और बाकी सब कार्यक्रम चलते हैं। [संगीत] यहां पर बुद्ध हैं, गीता है, उपनिषद है, अष्टावक्र हैं। यह मुझे मिले, मेरी जिंदगी बदली। यह
13:06 तुम्हें मिलेंगे तुम्हारी जिंदगी भी बदलेगी। सच पूछिए तो मतलब लाखों नहीं तो कम से कम हजारों जिंदगियां तो हैं जो बिल्कुल बदली हैं। 2 लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ जुड़े आचार्य प्रशांत [संगीत] ऐप पर। पहला महीना बिल्कुल फ्री गीता मिशन का पूरा एक्सेस। ऐप पर आपको मिलेंगे नियमित लाइव सत्र। हर दिन आचार्य प्रशांत के विशेष संवाद। गीता कम्युनिटी का एक्सेस, गीता परीक्षा, चयनित समाचार, ऑडियो बुक्स, कोर्ट्स और भी बहुत कुछ। Google Play स्टोर या Apple ऐप स्टोर पर आचार्य प्रशांत सर्च करें और अभी डाउनलोड करें। [संगीत]