Learn All Rivers of India through 3D Animation Drainage & Catchment UPSC IAS & Competitive Exams

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भारत की नदी प्रणाली का विस्तृत अवलोकन प्रदान करता है, जिसमें हिमालय और प्रायद्वीपीय नदियों को शामिल किया गया है। यह नदियों के वर्गीकरण, उनके उद्गम स्थलों, मार्ग, सहायक नदियों और महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं पर प्रकाश डालता है। वीडियो में सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी प्रणालियों के साथ-साथ लूनी, साबरमती, नर्मदा, तापी जैसी प्रायद्वीपीय नदियों और गोदावरी, कृष्णा, कावेरी जैसी पूर्वी तट की नदियों को शामिल किया गया है।

  • नदियों की परिभाषा और वर्गीकरण
  • हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदी प्रणालियों का विवरण
  • प्रमुख नदियों के उद्गम स्थल, मार्ग और सहायक नदियाँ
  • महत्वपूर्ण जल परियोजनाएँ और नदी विवाद

परिचय: भारत की नदी प्रणाली

नदी एक प्राकृतिक जल धारा है जो सतह पर बहती है, जिसका स्रोत आमतौर पर झील, ग्लेशियर, झरना या वर्षा जल होता है, और यह नदी सामान्यतः किसी दूसरी नदी, झील या समुद्र में गिरती है। एक बड़ी नदी में कई छोटी-बड़ी नदियाँ आकर गिरती हैं, जिन्हें सहायक नदियाँ कहते हैं। नदी के स्रोत से लेकर उसके सिंक तक के क्षेत्र और उसकी सहायक और वितरिकाओं के क्षेत्र को ड्रेनेज बेसिन या रिवर बेसिन कहा जाता है। भारत में 12 मेजर बेसिन हैं। भारत में नदियों को उनके स्रोत के अनुसार हिमालयी नदी प्रणाली और प्रायद्वीपीय नदी प्रणाली के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, उन्हें अरब सागर में गिरने वाली नदियों और बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है। नदियों को बारहमासी और गैर-बारहमासी नदियों के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है, बारहमासी नदियों में पूरे वर्ष पानी का अच्छा प्रवाह बना रहता है, जबकि गैर-बारहमासी नदियाँ ज्यादातर वर्षा पर निर्भर होती हैं।

सिंधु नदी प्रणाली

सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत में कैलाश पर्वतमाला में मानसरोवर झील से होता है। इसकी कुल लंबाई 3120 कि.मी. है। तिब्बत में इसे सेंगी सेंगपो के नाम से जाना जाता है। भारत में यह नदी डेमचोक से प्रवेश करती है और लेह से होकर गुजरती है। लेह के बाद इसका संगम जांस्कर नदी से होता है। सिंधु नदी पर नीमू बास्को हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट बनाया गया है। इसके बाद यह नदी एलओसी पार करके पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रवेश करती है, जहाँ श्योक नदी से इसका संगम होता है। सिंधु नदी पाकिस्तान के पंजाब के मैदानों में प्रवेश करने से पहले तरबेला बांध से गुजरती है। मिठानकोट में यह झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का पानी प्राप्त करती है, जिसे पंचनद कहा जाता है।

सिंधु की सहायक नदियाँ: झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज

झेलम नदी का उद्गम पीर पंजाल पर्वतमाला के आधार पर स्थित वेरीनाग से होता है। यह श्रीनगर से होकर बहती है और वुलर झील में गिरती है। झेलम नदी पर मंगला बांध बनाया गया है। चेनाब नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश के लाहौल क्षेत्र से होता है। चंद्रा और भागा नदियों के संगम से यह नदी बनती है। चेनाब नदी पर रतले हाइड्रोइलेक्ट्रिक रन ऑफ द रिवर डैम बनाया जा रहा है। रावी नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश के बाराबंगल से होता है। इस नदी पर चमेरा बांध बनाया गया है। ब्यास नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के पास ब्यास कुंड से होता है। इस नदी पर पोंग बांध बनाया गया है, जिसे महाराणा प्रताप सागर बांध के नाम से भी जाना जाता है। सतलुज नदी का उद्गम तिब्बत में मानसरोवर झील के पास स्थित राक्षस ताल से होता है। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में शिपकी ला से यह नदी भारत में प्रवेश करती है। इस नदी पर भाखड़ा नांगल बांध बनाया गया है।

सिंधु जल समझौता

सिंधु और उसकी सहायक नदियों का पानी सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजित है। इस संधि को 1960 में विश्व बैंक ने करवाया था। संधि के अनुसार, पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया है, जबकि पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) का पानी भारत को आवंटित किया गया है।

गंगा नदी प्रणाली

गंगा नदी की कुल लंबाई 2510 कि.मी. है। इस नदी का उद्गम भागीरथी के रूप में गंगोत्री ग्लेशियर से होता है। देवप्रयाग में अलकनंदा से संगम के बाद इस नदी को गंगा कहा जाता है। अलकनंदा नदी का उद्गम सतोपंथ ग्लेशियर से होता है। देवप्रयाग से गंगा ऋषिकेश और हरिद्वार पहुंचती है। हरिद्वार के बाद यह नदी उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है। प्रयाग में यमुना नदी गंगा से मिलती है। इसके बाद गंगा बिहार में प्रवेश करती है और पटना से पहले सोन नदी से मिलती है। कुरसेला में गंगा का संगम कोसी नदी से होता है। इसके बाद यह नदी पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है। बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद गंगा को पद्मा कहा जाता है।

गंगा की सहायक नदियाँ: यमुना, चंबल, बेतवा, केन, सोन, दामोदर, घाघरा, गंडक, कोसी और महानंदा

यमुना नदी गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है। इसका उद्गम यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है। यह नदी दिल्ली से होकर बहती है और प्रयाग में गंगा से मिलती है। चंबल, सिंध, बेतवा और केन यमुना की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। सोन नदी गंगा की दूसरी सबसे बड़ी दक्षिण तट की सहायक नदी है। इसका उद्गम अमरकंटक से होता है। दामोदर नदी हुगली की सहायक नदी है। इसे एक समय पर बंगाल का शोक कहा जाता था। घाघरा नदी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। तिब्बत में इसे मापछा छंगो कहा जाता है। नेपाल में इसे करनाली कहा जाता है। गंडक नदी को नेपाल में गंडकी के नाम से भी जाना जाता है। कोसी नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। महानंदा नदी गंगा की एक कम ज्ञात सहायक नदी है।

ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली

ब्रह्मपुत्र नदी को पांच से ज्यादा अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसकी लंबाई 2900 कि.मी. है। यह नदी तिब्बत में कैलाश पर्वतमाला में मानसरोवर झील के पूर्व में स्थित चेमायुंगदुंग ग्लेशियर से निकलती है। तिब्बत में इसे यारलुंग त्संगपो कहा जाता है। अरुणाचल प्रदेश में इसे सियांग या दिहांग कहा जाता है। असम में इसे ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है। बांग्लादेश में इसे जमुना कहा जाता है।

ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ: सुबनसिरी, तीस्ता और मेघना

सुबनसिरी नदी भारत में ब्रह्मपुत्र की सबसे बड़ी सहायक नदी है। तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद का कारण है। मेघना नदी की शुरुआत भारत से होती है। नागालैंड और मणिपुर के बॉर्डर पर लोकेटेड लियाई खुलन विलेज से इस रिवर का उद्गमन होता है।

प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ: लूनी, साबरमती, माही, नर्मदा और तापी

लूनी नदी समुद्र तक अपनी यात्रा पूरी नहीं कर पाती है। इसका उद्गम अजमेर के पास अरावली पहाड़ियों से होता है। साबरमती नदी का उद्गम राजस्थान में उदयपुर जिले की अरावली पहाड़ियों से होता है। माही नदी का उद्गम मध्य प्रदेश में विंध्याचल पर्वत से होता है। नर्मदा नदी का उद्गम मध्य प्रदेश में अमरकंटक से होता है। तापी नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के मुल्ताई से होता है।

गोवा और केरल की नदियाँ: मांडोवी, जुआरी, भरतपुझा, पेरियार और पंबा

गोवा में मांडोवी और जुआरी दो महत्वपूर्ण नदियाँ हैं। केरल में 44 प्रमुख नदियाँ हैं। भरतपुझा, पेरियार और पंबा केरल की जीवन रेखा कही जाती हैं।

पूर्वी तट की नदियाँ: सुवर्णरेखा, बैतरणी, ब्राह्मणी, महानदी, रुशिकुल्या, वंशधारा, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी

सुवर्णरेखा नदी का उद्गम पिसका, झारखंड से होता है। बैतरणी नदी का उद्गम पूर्वी घाट के गुप्तगंगा पहाड़ियों से होता है। ब्राह्मणी नदी का उद्गम झारखंड से आती हुई शंख और साउथ कोयल रिवर के संगम से होता है। महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के सिहावा से होता है। रुशिकुल्या नदी का उद्गम पूर्वी घाट से होता है। वंशधारा नदी का उद्गम उड़ीसा के कालाहांडी से होता है। गोदावरी नदी का उद्गम नासिक के पास त्र्यंबकेश्वर से होता है। कृष्णा नदी का उद्गम महाबलेश्वर से होता है। कावेरी नदी का उद्गम पश्चिमी घाट के ब्रह्मगिरी रेंज में स्थित तालकावेरी से होता है।

कृष्णा और कावेरी के बीच की नदियाँ: पेन्नार, पल्लार और पोन्नियार

कृष्णा और कावेरी के बीच तीन नदियाँ हैं: पेन्नार, पल्लार और पोन्नियार। इन तीनों नदियों का उद्गम नंदी हिल्स से होता है।

कावेरी और वैगई नदियाँ

कावेरी नदी दक्षिण भारत की एकमात्र बारहमासी नदी है। वैगई नदी का उद्गम पश्चिमी घाट की वारू सनादु हिल से होता है।

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Transcript

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0:01 स्टडी आईक्यू आईएस आपका सिलेक्शन हमारा मिशन ड्रेनेज सिस्टम ऑफ इंडिया इस वीडियो में हम भारत की सभी रिवर्स को इन डिटेल कवर करेंगे। लेकिन शुरू करने से पहले जानते हैं कि एक रिवर यानी कि नदी होती क्या है? रिवर एक नेचुरल वाटर स्ट्रीम है जो सरफेस पर फ्लो करती है और जिसका सोर्स यूजुअली लेक, ग्लेशियर, वाटरफॉल या रेन वाटर होता है और यहां से बहकर यह नदी नॉर्मली किसी दूसरी रिवर, लेक या ओशन में जा गिरती है। एक मेजर रिवर में काफी सारी छोटी बड़ी नदियां आकर गिरती हैं। जिन्हें हम ट्रिब्यूटरी कहते हैं। और बहुत बार एक नदी कई ब्रांचेस में भी डिवाइड हो सकती है जिसे हम डिस्ट्रिब्यूटरी कहते हैं। फॉर एग्जांपल गंगा की ट्रिब्यूटरी है यमुना और

0:48 वेस्ट बंगाल में गंगा हुगली और पद्मा में डिवाइड हो जाती है। तो नदी के सोर्स से लेकर उसके सिंक तक के एरिया और उसके ट्रिब्यूटरीज और डिस्ट्रीब्यूटरीज के एरिया को ड्रेनेज बेसिन या रिवर बेसिन कहा जाता है। भारत में 12 मेजर बेसिंस हैं। जिनका टोटल एरिया 2000 स्क्वायर कि.मी. से ज्यादा है। वहीं 46 रिवर बेसिंस को मीडियम रिवर बेसिंस कहा जाता है। जिनका एरिया 2000 से लेकर 2000 स्क्वायर कि.मी. के बीच है। 1000 स्क्वायर किलोमीटर से कम के रिवर बेसिंस को माइनर रिवर बेसिन कहा जाता है। इंडिया में आप रिवर को उनके सोर्स के अकॉर्डिंग भी क्लासिफाई कर सकते हैं। जैसे कि हिमालयन रिवर सिस्टम्स और पेनसुलर रिवर सिस्टम्स। फॉर एग्जांपल गंगा हिमालयन रिवर सिस्टम का पार्ट है। वहीं नर्मदा पेनसुलर रिवर सिस्टम का पार्ट है। या फिर आप इन

1:33 रिवर्स को सिंक के अकॉर्डिंग क्लासिफाई कर सकते हैं। जैसे कि अरेबियन सी में ड्रेन होने वाली रिवर्स और बे ऑफ बंगाल में ड्रेन होने वाली रिवर्स। फॉर एग्जांपल नर्मदा इंडस अरेबियन सी में ड्रेन होती हैं। वहीं गंगा ब्रह्मपुत्र जैसी नदियां बे ऑफ़ बंगाल में जाकर गिरती हैं। साथ ही एक रिवर में वाटर फ्लो के अनुसार भी आप रिवर्स को क्लासिफाई कर सकते हैं। जैसे कि पेरिनियल रिवर्स और नॉन पेरीनियल रिवर्स। पेरिनियल रिवर्स में पूरे साल पानी का अच्छा फ्लो बना रहता है। यानी कि ये नदियां पूरी तरह से रेन वाटर पर डिपेंडेंट नहीं होती। फॉर एग्जांपल इंडस, यमुना, गंगा, कावेरी यह सभी पेरिनियल रिवर्स के एग्जांपल्स हैं। वहीं नॉन पेरिनियल रिवर्स अपने ज्यादातर फ्लो के लिए रेंज पर डिपेंडेंट होती हैं। यानी कि ड्राई सीजन में यह रिवर्स बहुत कम पानी कंटेन करती

2:20 हैं। तो दोस्तों, इस वीडियो में हम रिवर्स को हिमालयन ड्रेनेज और पेनिनसुलर ड्रेनेज के हिसाब से देखने वाले हैं। तो चलिए हिमालयन रिवर से शुरुआत करते हैं। हिमालयन रिवर्स को हम तीन मेजर रिवर सिस्टम्स में डिवाइड कर सकते हैं। इंडस, गंगा और ब्रह्मपुत्र। तो शुरू करते हैं इंडस रिवर सिस्टम से इंडस रिवर सिस्टम। सिंधु यानी कि इंडस का उद्गमन स्थल तिब्बत में कैलाश रेंज में मानसरोवर लेक है और यहां से अरेबियन सी तक इस रिवर की टोटल लेंथ 3120 कि.मी. है। यहां से यह नदी नॉर्थ वेस्टर्न दिशा में प्रस्थान करती है। तिब्बत में इसे सेंगी सेंगपो या सिंघी खंबन के नाम से जाना जाता है और तिब्बत में एक बड़ी ट्रिब्यूटरी गार सेंगपो इसमें आकर गिरती है। भारत में डेमच से एंटर करने के बाद यह

3:06 नदी लद्दाख की राजधानी लेह से होकर गुजरती है और लेह के बाद इंडस का संगम जांस्कार से होता है और यहां जांस्कार रिवर इंडस से ज्यादा पानी कैरी करती है। इस संगम के थोड़ा आगे अलची के पास इंडस पर नीमू बास्को हाइड्रोइिक पावर प्लांट कंस्ट्रक्टेड है जिसे नीमू डैम भी कहा जाता है और यह एक रन ऑफ द रिवर टाइप डैम है। इसके बाद इंडस लाइन ऑफ कंट्रोल यानी कि एलओसी क्रॉस करके पाकिस्तान ऑक्यूपाइड गिलगित बिलचिस्तान में एंटर करती है। जहां सियाचिन ग्लेशियर से आती हुई शियोंक रिवर से इसका संगम होता है। दोस्तों शियोक और इंडस मिलकर काराकोरम्स, लद्दाख एंड जांस्कार रेंजेस के बीच बाउंड्री क्रिएट करती हैं। शियोक और इंडस के नॉर्थ में

3:52 आपको काराकोरम रेंजेस देखने को मिलती हैं। शियोंक और इंडस के बीच में लद्दाख रेंजेस और इंडस के साउथ में जांस्कार रेंजेस जिसके बाद गिलगित में इंडस फोलियो बड़ी-छोटी नदियों का पानी प्राप्त करती है जिसमें से गिलगित रिवर मोस्ट इंपॉर्टेंट है। इसके आगे नंगा पर्वत से इंडस शार्प साउथ ओवर टर्न लेती है और इसके बाद पाकिस्तान में एंटर कर जाती है। पाकिस्तान के पंजाब प्लेेंस में एंटर करने से जस्ट पहले इस रिवर पर तरबेला डैम कंस्ट्रक्टेड है। नेक्स्ट इंडस का स्वात और काबुल रिवर से संगम होने के बाद एटॉक के पास गाजी से यह नदी पंजाब प्लेेंस में एंटर करती है। इसके आगे इंडस मिट्ठनकोट में इंडिया से आती हुई झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज का पानी प्राप्त करती हैं। और इन

4:38 सभी रिवर्स के कंबाइंड वॉटर्स को पंचनाड बोलते हैं। तो चलिए दोस्तों, पंजाब में इंडस की मेजर ट्रिब्यूटरीज पर नजर डालते हैं। झेलम रिवर। इस नदी का उद्गमन होता है पीर पंजाल रेंजेस के बेस पर लोकेटेड वेरीनाग से जो साउथ ईस्ट कश्मीर में लोकेटेड है। जहां से यह रिवर कश्मीर वैली में एंटर करती है और दो मेजर ट्रिब्यूटरीज का पानी रिसीव करती है। नेमली लिडर रिवर और वैशव रिवर। जिसके बाद अवंतीपुरा से होते हुए यह रिवर पहुंचती है श्रीनगर जहां कैनाल के थ्रू यह डल लीक से कनेक्टेड है। यहां कश्मीर वैली के रिलेटिवली प्लेन एरिया में झेलम अपने माउंटेनियस कोर्स के दौरान ही मियंडरिंग करना शुरू कर देती है। श्रीनगर के आगे कश्मीर वैली के नॉर्थ में यह रिवर वूलर लेक में जा गिरती है जो इंडिया की लार्जेस्ट फ्रेश वाटर लेक भी

5:25 है। वूलर लेक से निकलकर यह रिवर बारामुला से पीर पंजाल रेंजेस को कट करते हुए पहुंचती है उरी जिसके आगे यह रिवर एंटर करती है पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर में और मुजफराबाद में प्राप्त करती है नीलम रिवर के पानी को और नीलम रिवर पर भारत किशनगंगा हाइड्रोइिक पावर स्टेशन डेवलप कर रहा है। मुजफराबाद से साउथवर्ड टर्न लेकर यह रिवर पंजाब प्लेेंस का रुख करती है और मीरपुर सिटी के पास मंगला डैम इसी रिवर पर कंस्ट्रक्टेड है। जिसके बाद पंजाब प्लेेंस में जहां के पास झेलम का संगम चेनाब से होता है। हिस्टोरिकली झेलम रिवर के बैंक्स पर किंग पोरस और एलेक्जेंडर द क्रीट के बीच बैटल ऑफ हाइडस्पस लड़ी गई थी। और ग्रीक लैंग्वेज में झेलम को हाइडस्पस कहा

6:11 जाता है। एंड संस्कृत में वितासता। नेक्स्ट आइए बात करते हैं चेनाब रिवर की जिसका उद्गमन होता है हिमाचल प्रदेश के लाहल रीजन से। बाराछला पास के ईस्ट में चंद्रताल के पास से उद्गमन होता है चंद्रा रिवर का और इस पास के वेस्ट में सूर्यताल से उद्गमन होता है भागा रिवर का। और यह दोनों ही स्ट्रीम्स नेमली चंद्रा और भागा का संगम होता है तांडी में। जिसके बाद इस रिवर को चंद्रभागा या चेनाब कहा जाता है और संस्कृत में हम इस रिवर को असीकनी नाम से जानते हैं। आंडी से यह रिवर नॉर्थ वेस्टर्न डायरेक्शन में फ्लो करती है और हिमाचल के चंबा डिस्ट्रिक्ट के बाद एंटर करती है जम्मू कश्मीर के पदर में। यहां चेनाब रिवर पर हम रतली हाइड्रोइिक रन ऑफ द रिवर डैम कंस्ट्रक्ट कर रहे हैं। इसके आगे

6:58 किश्तवार और डोडा से होते हुए यह रिवर पहुंचती है रामबन और रामबन के पास ही बागलीहार डैम इसी रिवर पर कंस्ट्रक्टेड है। जिसके आगे सलाल डैम भी इसी रिवर पर लोकेटेड है। और सलाल डैम से थोड़ा सा आगे आपको देखने को मिलती है वो जगह जहां पर इंडिया के लार्जेस्ट लिथियम रिजर्व्स रिसेंटली खोजे गए हैं। जी हां, रियासी। नेक्स्ट यह रिवर अखनूर के पास से पाकिस्तान में एंटर कर जाती है। जहां पाकिस्तान के गुजरात से होते हुए यह रिवर जहांग में झेलम का पानी प्राप्त करती है। दोस्तों चेनाब की छोटी सी ट्रिब्यूटरी मुनववर तवी लाइन ऑफ कंट्रोल का स्टार्टिंग पॉइंट है। यानी कि मुनववर तवी के साउथ ईस्ट में आपको इंडिया पाकिस्तान के बीच इंटरनेशनल बॉर्डर देखने को मिलता है। और इसके नॉर्थ वेस्ट में एलओसी यानी कि लाइन

7:44 ऑफ कंट्रोल और इसके आगे अहमदपुर सियाल में सराय सिंधु के पास चेनाब का संगम होता है रावी रिवर से। तो चलिए नेक्स्ट बात करते हैं रावी रिवर की जिसका उद्गमन होता है हिमाचल प्रदेश के बाराबंगल से और यह रिवर भी नॉर्थ वेस्टर्न डायरेक्शन में मूव करते हुए पहुंचती है चंबा टाउन जिसके थोड़ा सा आगे चमेरा डैम इसी रिवर पर कंस्ट्रक्टेड है। इस डैम के थोड़ा सा आगे रावी रिवर हिमाचल और जम्मू कश्मीर का बॉर्डर डिमार्केट करती है और पहुंचती है जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के ट्राई पॉइंट पर। इसी बॉर्डर पर आपको रंजीत सागर डैम देखने को मिलती है और पंजाब के मधोपुर के पास से यह नदी 80 कि.मी. तक इंडिया पाकिस्तान का बॉर्डर डिमार्केट करती है और इसी बॉर्डर के अक्रॉस आपको करतारपुर साहिब

8:32 कॉरिडोर देखने को मिलता है। जो कॉरिडोर करतारपुर साहिब और डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे को कनेक्ट करता है और पाकिस्तान में लाहौर से होते हुए यह नदी अहमदपुर सियाल के पास सराय सिद्धू में चेनाब से जा मिलती है। दोस्तों रावी रिवर पर ही फेमस इंडस वैली सिविलाइजेशन का हड़प्पा टाउन लोकेटेड है और वैदिक टेक्स्ट्स में रावी रिवर को परूसनी बोला गया है। इंडस रिवर सिस्टम में नेक्स्ट रिवर है ब्यास जिसका उद्गमन होता है हिमाचल प्रदेश में रोहतांगला के पास ब्यास कुंड से जहां से यह रिवर मनाली कुल्लू मंडी डिस्ट्रिक्ट से होते हुए पहुंचती है कांगड़ा डिस्ट्रिक्ट में जहां इस रिवर पर पोंग डैम कंस्ट्रक्टेड है और पोंग डैम को महाराणा प्रताप सागर डैम के नाम से भी जाना जाता है और इस रिजवायर को रामसार

9:18 वेटलैंड की रिकॉग्निशन भी मिली हुई है जिसके बाद यह रिवर पंजाब में एंटर करती है और हरीिके में इसका संगम होता है सतलुज से दोस्तों ब्यास रिवर को संस्कृत में अरिजिका या फिर बिपाशा के नाम से जाना जाता है। तो दोस्तों चलिए बात करते हैं सतलुज रिवर की। सतलुज रिवर का उद्गमन तिब्बत में मानसरोवर लेक के पास लोकेटेड रक्षस्थल लेक से होता है और तिब्बत में इसी रिवर को लक्वैन सेंगबो कहा जाता है। हिमाचल के किन्नौर में लोकेटेड शिपकिला से यह रिवर इंडिया में एंटर करती है और ईस्टर्न डायरेक्शन में फ्लो करते हुए पहुंचती है छाबा जो हिमाचल की कैपिटल शिमला से लगभग 45 कि.मी. नॉर्थ में लोकेटेड है और छाबा में एक छोटी सी डैम सतलुज पर कंस्ट्रक्टेड है। जहां से शिमला को ड्रिंकिंग वाटर प्रोवाइड किया जाता है।

10:05 यहां से यह रिवर पहुंचती है बिलासपुर जिसके आगे भाकड़ा के पास इस नदी पर भाखड़ा नांगल डैम कंस्ट्रक्टेड है और इन डैम्स को हम गोविंद सागर डैम भी कहते हैं। और नांगल से यह रिवर पंजाब में एंटर कर जाती है और रूपनगर से होते हुए लुधियाना और लुधियाना से हरिके पहुंचती है। जहां सतलुज का संगम व्यास से होता है। दो स्थल हरीिके में हरिके पटन बर्ड सेंचुरी को रामसार साइट का रिकॉग्निशन मिला है और व्यास रिवर के साथ-साथ हरीिके में आपको इंडस रिवर डॉल्फिन भी देखने को मिलती है। हरीिके से ही इंदिरा गांधी कैनाल निकाली गई है जो राजस्थान के गंगानगर और बीकानेर को इरिगेट करती है। हरीिके के आगे सतलुज रिवर कस्तूर के पास पाकिस्तान में एंटर करती है और उच्च शरीफ में चेनाब से जा मिलती है।

10:51 जिसके बाद इस रिवर को पंचनाड कहा जाता है और पंचनाड का संगम इंडस से मिट्ठनकोट के पास होता है। जिसके बाद इंडस कराची के ईस्ट में डेल्टा के थ्रू अरेबियन सी में जा गिरती है। दोस्तों एक समय पर इंडस रिवर की एक डिस्ट्रीब्यूटरी रॉ ऑफ कच के थ्रू अरेबियन सी में जाकर गिरती थी। लेकिन 1819 के अर्थक्वेक के बाद यहां की लैंड एलिवेट हो गई। जिससे आज अल्लाह बंद नाम का एक एलिवेटेड एरिया क्रिएट हुआ। जिसके बाद इंडस की यह डिस्ट्रिब्यूटरी पाकिस्तान की तरफ डायवर्ट हो गई। आज इंडस और उसकी ट्रिब्यूटरीज का पानी इंडिया और पाकिस्तान के बीच इंडस वाटर ट्रीटी के तहत विभाजित है। इस ट्रीटी को 1960 में वर्ल्ड बैंक ने इंडिया और पाकिस्तान के बीच करवाया था। और

11:36 इस ट्रीटी के अकॉर्डिंग तीन वेस्टर्न रिवर्स का पानी नेमली इंडस, झेलम और चेनाब पाकिस्तान को एलोकेट किया गया है। वहीं ईस्टर्न रिवर्स नेमली रावी, ब्यास और सतलुज के वॉटर्स इंडिया को। अब यह सुनने में लगता है कि तीन रिवर पाकिस्तान की और तीन रिवर इंडिया की एकदम बराबर डिस्ट्रीब्यूशन है। लेकिन अगर हम वॉल्यूम ऑफ वाटर को देखें तो इंडस, झेलम और चेनाब 80% यानी कि 99 बिलियन मीटर क्यूब पानी कैरी करती है। और चेनाब इंडस की सबसे बड़ी ट्रिब्यूटरी भी है। वहीं रावी, ब्यास और सतलुज सिर्फ 20% यानी कि 41 बिलियन मीटर क्यूब पानी कैरी करती है। तो दोस्तों, यह बात होती है इंडस रिवर सिस्टम की। चलिए नेक्स्ट बात करते हैं गंगा रिवर सिस्टम की। गंगा जी की टोटल लेंथ 2510

12:24 कि.मी. है। इस नदी का उद्गमन होता है भागीरथी के रूप में गंगोत्री ग्लेशियर से और देवप्रयाग में अलकनंदा से संगम के बाद इस नदी को गंगा कहा जाता है और देवप्रयाग से पहले अलकनंदा और उसकी ट्रिब्यूटरीज पंचप्रयाग क्रिएट करती हैं। देवभूमि उत्तराखंड के सतोपथंत ग्लेशियर से अलकनंदा नदी का उद्गमन होता है। जहां से यह नदी पहुंचती है जोशीमठ जिसके पास विष्णुप्रयाग में अलकनंदा का संगम होता है भौली गंगा से जो नीति पास से उद्गमित होती है। जिसके 70 कि.मी. बाद अलकनंदा पहुंचती है नंदप्रयाग और यहां इनका संगम होता है नंदा घुंती ग्लेशियर से आती हुई नंदाकिनी से और यहां से 21 कि.मी. आगे कर्णप्रयाग में अलकनंदा

13:11 का संगम होता है पिंडारी ग्लेशियर से आती हुई पिंडार नदी से। जिसके 32 कि.मी. बाद अलकनंदा जी का संगम होता है मंदाकिनी नदी से जो केदारनाथ के पास चड़ा बाड़ी ग्लेशियर से उद्गमित होती है और यहां से 65 कि.मी. आगे देवप्रयाग में अलकनंदा जी का संगम होता है गंगोत्री से आती हुई भागीरथी नदी से और इस संगम के बाद हम इस कंबाइंड स्ट्रीम को गंगा कहते हैं। देवप्रयाग से गंगा जी पहुंचती है ऋषिकेश और ऋषिकेश से हरिद्वार। राजाजी नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व से फ्लो करते हुए यह रिवर हरिद्वार के बाद उत्तर प्रदेश में बिजनौर से एंटर करती है। उत्तर प्रदेश में बिजनौर से एंटर होने के बाद हरदोई में रामगंगा गंगा जी

13:56 में आकर गिरती है और प्रयाग में यमुना जी जिसके बाद कैथी के पास स्थित मार्कंडेय महादेव पर गंगा जी का संगम होता है गोमती से। इसके आगे गंगा जी बिहार में प्रवेश करती है और रेवालगंज में घाघरा नदी का संगम गंगा जी से होता है। इसके बाद पटना से थोड़ा सा पहले गंगा जी का संगम होता है अमरकंटक से आती हुई सोन रिवर से और यहां से थोड़ा सा आगे गंगा जी गंडक नदी का जल प्राप्त करती हैं। नेक्स्ट कुरसेला में गंगा जी का संगम होता है सोरो ऑफ बिहार कही जाने वाली कोसी नदी से। जिसके बाद यह नदी बिहार झारखंड के बॉर्डर पर फ्लो करते हुए वेस्ट बंगाल में एंटर करती हैं। और महानंदा नदी जिसे फुलहार भी कहा जाता है। यहां गंगा जी में आकर गिरती है। इसके आगे

14:42 वेस्ट बंगाल के फराखा में यहां से कैनाल के थ्रू पुगली रिवर में पानी डाइवर्ट किया जाता है और फ्रुगली गंगा जी की नेचुरल डिस्ट्रीब्यूटरी है जो गिरिया से गंगा जी से अलग होती है। बांग्लादेश में एंटर करने के बाद गंगा जी को पद्मा कहा जाता है। और यहीं ब्रह्मपुत्र और मेघना रिवर पद्मा में आके गिरती हैं। और वर्ल्ड का लार्जेस्ट डेल्टा सुंदरबंस क्रिएट करती हैं। वहीं हुगली नदी में अजय और दामोदर रिवर्स आकर गिरती हैं। तो चलिए दोस्तों अब गंगा जी की मेजर ट्रिब्यूटरीज के बारे में बात करते हैं। जिसमें से मोस्ट इंपॉर्टेंट है यमुना रिवर। गंगा जी की लॉन्गेस्ट ट्रिब्यूटरी और सेकंड लार्जेस्ट भी। जिसकी शुरुआत होती है उत्तराखंड में बंदर पंछ रि के पास लोकेटेड यमुनोत्री ग्लेशियर से। यहां से

15:27 यह रिवर पहुंचती है देहरादून के कलसी में जहां इसकी लार्जेस्ट ट्रिब्यूटरी टों्स इसे जॉइ करती है और कलसी तक टॉन्स रिवर हिमाचल एंड उत्तराखंड का बॉर्डर क्रिएट करती है। इसके बाद यह रिवर उत्तराखंड एंड हिमाचल प्रदेश का बॉर्डर क्रिएट करते हुए यूपी, हरियाणा और हिमाचल के बॉर्डर को डिफाइन करती है। और इसके बाद यमुना दिल्ली तक हरियाणा और यूपी का बॉर्डर डिफाइन करती है। और वजीराबाद से दिल्ली में एंटर करती है। जिसे साहिबी रिवर भी कहा जाता है। इसे पोल्यूट कर देता है। दिल्ली को क्रॉस करने के बाद फिर से यह रिवर हरियाणा एंड यूपी के बॉर्डर पर फ्लो करती है और हरियाणा के पलवल डिस्ट्रिक्ट के बाद पूरी तरह से यूपी में एंटर कर जाती है। मथुरा, आगरा, बटेश्वर जैसे टाउन से होते हुए यह रिवर

16:13 पहुंचती है छकारपुरा जहां यमुना और चंबल का संगम होता है। इसके बाद प्रयाग में यमुना जी का संगम गंगा जी से होता है। साथ ही चंबल, सिंध, बेतवा और किन यमुना की कुछ मेजर ट्रिब्यूटरीज है जो विंध्यास की नदन स्लोप से उद्गमित होती हैं। देखिए 1376 कि.मी. के साथ यमुना जी गंगा जी की इंडिया के अंदर लॉन्गेस्ट ट्रिब्यूटरी है। तो चलिए बात करते हैं यमुना की लॉन्गेस्ट ट्रिब्यूटरी चंबल की। 1224 कि.मी. लंबी चंबल रिवर की शुरुआत होती है मध्य प्रदेश के महू टाउन के पास से। यह रिवर विंध्यास के नदन स्लोप से ओरिजनेट होती है और नॉर्थ डायरेक्शन में मूव करती है एंड चित्तौड़गढ़ से राजस्थान में एंटर कर जाती है। राजस्थान में यह रिवर नॉर्थ ईस्टर्न

17:00 के डायरेक्शन में मूव करती है एंड राजस्थान एंड मध्य प्रदेश का बॉर्डर डिफाइन करती है और उसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का बॉर्डर डिफाइन करती है और यूपी के जलाऊंग के पास यमुना रिवर में जाकर गिरती है। कोटा और रावत जैसी सिटीज इस रिवर पर लोकेटेड हैं। दोस्तों शिप्रा, पार्वती और कालीसिंध चंबल की मेजर ट्रिब्यूटरीज़ हैं जो सभी विंध्यास की नदन स्लोप से आती हैं। साथ ही राजस्थान के अरावली से आती हुई बनास रिवर चंबल की एक और मेजर ट्रिब्यूटरी है। साथ ही गांधी सागर, इंदिरा सागर और जवाहर सागर डैम इसी रिवर पर मेजर डैम्स हैं। और क्रिटिकली एंडेंजर्ड घड़ियाल भी इसी नदी में पाया जाता है। यमुना के नेक्स्ट मेजर ट्रिब्यूटरी है बेतवा। 590 कि.मी. लॉन्ग

17:45 बेतवा रिवर का ओरिजिन विंध्यास की रदन स्लोप्स में मध्य प्रदेश के रायसेन में लोकेटेड है और नॉर्थ डायरेक्शन में मूव करते हुए विदिशा से होती हुई सांची पहुंचती है। और यूपी एमपी बॉर्डर पर इस नदी पर माटा टीला डैम लोकेटेड है। सेमी एरिड बुंदेलखंड प्लैट्यू से होते हुए यूपी के हमीरपुर के पास यह नदी यमुना में जा गिरती है। तो दोस्तों यमुना की नेक्स्ट मेजर ट्रिब्यूटरी है केन। 427 कि.मी. लॉन्ग केन रिवर की शुरुआत होती है विंध्यास की कैमूर रेंज से। इसके बाद यह रिवर पहुंचती है पन्ना टाइगर रिजर्व। एंड उसके बाद उत्तर प्रदेश में यह रिवर बांदा से एंटर करती है और चिला के पास यमुना में जा गिरती है। तो यमुना रिवर एंड उसकी ट्रिब्यूटरीज के बाद

18:31 चलिए वापस आते हैं गंगा रिवर पर। और गंगा जी की एक और मेजर साउथ बैंक ट्रिब्यूटरी है सोन। सोन रिवर गंगा जी की सेकंड लार्जेस्ट साउथ बैंक ट्रिब्यूटरी है। जिसका ओरिजिन छत्तीसगढ़ के सतपुरा हिल्स में लोकेटेड अमरकंटक में स्थित है और नर्मदा रिवर के ओरिजिन के काफी पास लोकेटेड है। छत्तीसगढ़ के पेंद्रा से यह रिवर मध्य प्रदेश के शाहडोल में एंटर करती है। जहां से रिवर एक शार्प ईस्ट ओवर टर्न लेती है और यहीं पर इस रिवर पर पान सागर डैम भी बनाई गई है। जिसके बाद यह रिवर सोनभद्रा डिस्ट्रिक्ट से उत्तर प्रदेश में एंटर कर जाती है और यहीं पर सोन रिवर का संगम रिहांड रिवर से होता है। दोस्तों यहां मैं आपको बता दूं कि रिहांड रिवर पर गोविंद वल्लभ पंत सागर डैम लोकेटेड है। कैमूर हिल्स के पैरेलल फ्लो करते हुए यह

19:17 रिवर यूपी, बिहार और झारखंड के ट्राई पॉइंट पर पहुंचती है और उसके बाद बिहार झारखंड बॉर्डर पर फ्लो करती है। जहां से नॉर्थ कोयल रिवर इसमें आकर गिरती है। बिहार में यह रिवर भोजपुरी और माघ स्पीकिंग एरियाज को डिवाइड करती है और पटना के पास गंगा जी में जा गिरती है। दोस्तों सोन रिवर की टोटल लेंथ 784 कि.मी. है। तो चलिए नेक्स्ट रिवर पर आते हैं और यह रिवर है दामोदर जो गंगा जी की डिस्ट्रीब्यूटरी हुगली की ट्रिब्यूटरी है। 592 कि.मी. लंबी इस नदी का उद्गमन झारखंड में चूल्हा, पानी, लातेह से होता है। और वेस्ट बंगाल में यह नदी हुगली में जा गिरती है। बराकर, कोनार और जमुनिया दामोदर की मेजर ट्रिब्यूटरीज हैं। दामोदर को एक समय पर फ्लडिंग के चलते सोरो ऑफ बंगाल कहा

20:04 जाता था। लेकिन आज दामोदर वैली कॉरपोरेशन के तहत इस रिवर पर पंचेत डैम, माइथॉन डैम, तिलाया डैम और कुनार डैम कंस्ट्रक्ट की गई है। और इन डैम्स की वजह से सोरो ऑफ बंगाल के बजाय यह रिवर आज इस रीजन के लिए वरदान है। साथ ही बोकारो, बणपुर और दुर्गपुर स्टील प्लांट्स आपको इसी रिवर वैली में देखने को मिलते हैं। नेक्स्ट दोस्तों बात करते हैं गंगा जी की नॉर्थ बैंक ट्रिब्यूटरीज घाघरा की जिसको अलग-अलग नामों से जाना जाता है। 80 कि.मी. लॉन्ग घाघरा रिवर की शुरुआत होती है तिब्बत में मानसरोवर लेक के पास लोकेटेड मापछा छंगो ग्लेशियर से। जहां इस रिवर को मापछा सेंगपो कहा जाता है। नेपाल में एंटर करने के बाद इस रिवर को करनाली रिवर कहा जाता है। और नेपाल में यह रिवर

20:51 दो ब्रांचेस में डिवाइड हो जाती है। नेमली, गेरुआ और कोरियाला और इन दोनों ब्रांचेस के मिलन के बाद इस रिवर को इंडिया में घाघरा कहा जाता है। साथ ही घाघरा और शारदा रिवर के संगम के बाद अवध रीजन में इस रिवर को सरायू बोला जाता है। जो श्रीराम सिटी अयोध्या से भी निकलती है और 782 कि.मी. लॉन्ग राप्ती रिवर इसकी एक और मेजर ट्रिब्यूटरी है। बिहार के छपड़ा के पास घाघरा रिवर का संगम गंगा जी से होता है। और यह रिवर गंगा की लार्जेस्ट एंड सेकंड लॉन्गेस्ट ट्रिब्यूटरी है। घाघरा रिवर नेपाल के बरदिया नेशनल पार्क और इंडिया के कतरीनी घाट वाइल्ड लाइफफ़ सेंचुरी से निकलती है। और गैजेटिक डॉल्फिन की एक मेजर हैबिटट भी है। घाघरा की एक मेजर ट्रिब्यूटरी है शारदा, जिसे आप काली

21:38 या फिर महाकाली के नाम से भी जानते हैं। और दोस्तों, इंडिया और नेपाल के बीच शारदा रिवर के ओरिजिन को लेकर डिस्प्यूट है। इंडिया के अकॉर्डिंग शारदा रिवर की शुरुआत लिपुलेखिक पास से होती है। वहीं नेपाल के अकॉर्डिंग शारदा रिवर कालापानी रीजन के वेस्टर्न पॉइंट से शुरू होती है। यहां इस रिवर को काली या महाकाली रिवर कहा जाता है और इंडियन स्टेट उत्तराखंड और नेपाल के बीच यह रिवर बॉर्डर डिफाइन करती है। टनकपुर टाउन के पास यह रिवर प्लेेंस में एंटर करती है। यहीं शारदा रिजर्व इसी रिवर पर लोकेटेड है और प्लेेंस में इस रिवर को शारदा बोला जाता है। पीलीभीत डिस्ट्रिक्ट से यह रिवर इंडिया में एंटर करती है और पीलीभीत टाइगर रिजर्व से होते हुए बहराइच में घाघरा रिवर में जा गिरती है। नेक्स्ट आती है गंडक रिवर। तो चलिए दोस्तों नेक्स्ट बात करते हैं गंडक रिवर की जिसको

22:26 नेपाल में गंडकी के नाम से भी जाना जाता है। गंडक जिसे नरायनी रिवर भी कहा जाता है। नेपाल और तिब्बत के बॉर्डर पर मस्तंग रीजन के नुभाइन हिमल ग्लेशियर से ओरिजनेट होती है। इन हाई हिमालयज में इस रिवर को काली गंडक कहा जाता है और इसी रीजन में यह रिवर डीप कालीगंकी गॉर्ज क्रिएट करती है और कुछ सोर्सेस के अकॉर्डिंग यह वर्ल्ड का डीपेस्ट गॉर्ज भी है। इस गॉर्ज के एक तरफ धौलागिरी पीक लोकेटेड है और दूसरी तरफ अन्नपूर्णा वन। हिमाल्यास को क्रॉस करके यह रिवर इंडिया में यूपी के महाराजगंज से एंटर करती है। जहां इसे गंडक या नारायणी कहा जाता है। यूपी से यह रिवर बिहार के चंपारण में एंटर कर जाती है और पटना के पास हाजीपुर में गंगा जी से गंडक का मिलन हो जाता है। दोस्तों इसके अलावा वाल्मीकि

23:12 टाइगर रिजर्व की यह एक मेजर रिवर है और इंडिया नेपाल बॉर्डर पर यह रिवर एक मेगा फैन भी क्रिएट करती है। तो चलिए दोस्तों नेक्स्ट आते हैं कोसी रिवर पर। गंगा जी की एक मेजर ट्रिब्यूटरी जिसे सोरो ऑफ बिहार के नाम से भी जाना जाता है। कोसी रिवर को सप्तकोसी भी कहा जाता है क्योंकि यह रिवर सेवन मेजर ट्रिब्यूटरीज के संगम से बनती है और इनमें से कुछ ट्रिब्यूटरीज वर्ल्ड की हाईएस्ट पीक्स जैसे कि एवरेस्ट एंड कंचनजंगा के स्नो मेल्ट से बनती हैं। इन सात में से तीन मेजर ट्रिब्यूटरीज हैं अरुण रिवर, तामूर रिवर और सनकोसी रिवर। सनकोसी रिवर की शुरुआत तिब्बत में लोकेटेड सेंग जैगबो ग्लेशियर से होती है। जिसके बाद चार मेजर ट्रिब्यूटरीज सनकोसी को जॉइ करती हैं। नेमली दूधकोसी, तमाकोसी, बूटे

23:57 कोसी और इंद्रावती। और इन तीनों रिवर्स का संगम नेपाल के त्रिबेनी घाट पर होता है। जिसके बाद इसे सप्तकोशी या फिर सिंपली कोसी बोला जाता है। बिहार के डूबीहई से यह रिवर इंडिया में एंटर करती है और भागलपुर के पास गंगा जी में जा गिरती है। दोस्तों हाई हिमालय से छतरा गॉर्ज के थ्रू यह रिवर प्लेेंस में उतरती है और इस सडन एलिवेशन ड्रॉप और हाई सेडिमेंट लोड की वजह से यह रिवर इतनी अनस्टेबल है एंड अपना कोर्स चेंज करती रहती है। जिसकी वजह से नॉर्थ बिहार में हमें हर साल फ्लडिंग देखने को मिलती है। एंड इसीलिए इसे सोरो ऑफ बिहार भी कहा जाता है। तो चलिए दोस्तों नेक्स्ट आते हैं महानंदा रिवर पर। गंगाजी की एक लेसर नोन ट्रिब्यूटरी। महानंदा रिवर की शुरुआत होती है वेस्ट बंगाल के नदन पार्ट

24:43 में लोकेटेड पगलाछोड़ा फॉल्स से जो दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट का पार्ट है। यह रिवर सिलीगुड़ी टाउन से होते हुए निकलती है इंडिया के चिकनंस नेक से जिसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है और स्ट्रेटेजिकली यह रीजन इंडिया को नॉर्थ ईस्ट से कनेक्ट करता है। इसके बाद शॉर्ट डिस्टेंस के लिए यह रिवर इंडिया और बांग्लादेश का बॉर्डर डिफाइन करती है। एंड अगेन वेस्ट बंगाल में पूरी तरह से एंटर कर जाती है। वेस्ट बंगाल से यह रिवर बिहार के किशनगंज में एंटर करती है। जहां मेची रिवर से इसका संगम होता है। मेची रिवर नेपाल से आती है। एंड इंडिया नेपाल की ईस्टर्न बाउंड्री डिफाइन करती है। और किशनगंज के बाद इस कंबाइंड स्ट्रीम को फुलहार रिवर कहा जाता है। दोबारा से यह रिवर मालदा से वेस्ट बंगाल में एंटर करती है और वेस्ट बंगाल से बांग्लादेश में। जहां इसका संगम

25:29 गंगा जी से फाइनली होता है। तो दोस्तों, यह होती है गंगा जी की सभी मेजर ट्रिब्यूटरीज। चलिए नेक्स्ट मूव ऑन करते हैं ब्रह्मपुत्र रिवर सिस्टम पर। ब्रह्मपुत्र रिवर को पांच से ज्यादा अलग-अलग नामों से जाना जाता है। 2900 कि.मी. लॉन्ग यह रिवर तिब्बत के कैलाश माउंटेन रेंजेस में मानसरोवर लेक के ईस्ट में लोकेटेड छेमा युंगदोंग अंगसी ग्लेशियर से उद्गमित होती है। और इस रिवर को तिब्बत में यारलंग सेंपो कहा जाता है। और हिमालयज की नमछ बारवा पीक से एक शार्प टर्न लेने के बाद यह नदी गैलिंग से अरुणाचल प्रदेश में एंटर कर जाती है। और अरुणाचल के माउंटेनियस टरेन में इस रिवर को सियांग या दिहांग कहा जाता है और पासी घाट से यह नदी प्लेेंस में एंटर करती है। जहां लोहित और तिबांग नदियां इसमें आकर मिलती हैं। जिसके

26:16 बाद आसाम में इसे ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है। डिब्रूगढ़ के बाद अरुणाचल नागालैंड से आती हुई तिहींग नदी इसमें गिरती है और इसके आगे ब्रह्मपुत्र का संगम सुबानसरी से होता है और सुबानसरी रिवर इंडिया में ब्रह्मपुत्र की लार्जेस्ट ट्रिब्यूटरी है और यहीं सुभान सीरी और ब्रह्मपुत्र के संगम पर वर्ल्ड का लार्जेस्ट रिवराइन आइलैंड मजौली क्रिएट हुआ है और साउथ से आती हुई धनशरी का संगम भी इसी एरिया के पास ब्रह्मपुत्र से होता है। इसके आगे हिमालय से आती हुई कामिंग, बेखी, मानस और पोतली ब्रह्मपुत्र में आकर गिरती हैं। आसाम के धुबड़ी के बाद ब्रह्मपुत्र बांग्लादेश में एंटर करती है और सिक्किम के जेनु ग्लेशियर से आती हुई

27:03 तीस्ता रिवर से संगम के बाद इसे जमुना जी हां, जमुना नाम से जाना जाता है। और इसके आगे जमुना और पद्मा के संगम के बाद यह नदी वर्ल्ड की सेकंड लार्जेस्ट नदी बन जाती है। और सुंदरबन डेल्टा के थ्रू बे ऑफ बंगाल में गिर जाती है। बांग्लादेश में यह रिवर दो ब्रांचेस में डिवाइड हो जाती है और एक ब्रांच गंगा यानी कि पद्मा से मर्ज होती है और दूसरी मेघना से। दोस्तों क्या आपको पता है कि बांग्लादेश की मेघना रिवर की शुरुआत इंडिया से होती है। नागालैंड और मणिपुर के बॉर्डर पर लोकेटेड लियाई खुलन विलेज जहां से इस रिवर का उद्गमन होता है और यहां इस रिवर को बराक बोला जाता है। मणिपुर मिजोरम बॉर्डर के पास से यह रिवर एक शार्प यूटर्न लेते हुए वेस्टवर्ड फ्लो करती है और आसाम के सिलचर से होते हुए

27:48 पहुंचती है बांग्लादेश। दोस्तों, बांग्लादेश में यह रिवर दो ब्रांचेस में डिवाइड हो जाती है। नदन ब्रांच को सूरमा और सदन ब्रांच को कुशियारा कहा जाता है। दोबारा से सूरमा और कुशियारा का संगम होता है और इस संगम के बाद इसे मेघना कहा जाता है जो जाके ब्रह्मपुत्र पद्मा की एक ब्रांच में गिरती है और गंगा ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्रिएट करती है। दोस्तों इसके अलावा इंडिया में यह रिवर नेविगेबल है और इसलिए 2016 में लखीपुर और भांगा के बीच इस रिवर को नेशनल वाटर वेसिंग्स भी डिक्लेअर किया गया है। तो चलिए नेक्स्ट बात करते हैं तीस्ता रिवर की जो इंडिया और बांग्लादेश के बीच में एक कॉन्स्टेंट डिस्प्यूट का रीजन है। देखिए तीस्ता रिवर की शुरुआत होती है नॉर्थ सिक्किम में लोकेटेड खांगसे ग्लेशियर और ज़ेमू ग्लेशियर से और इन्हीं ग्लेशियर के मेल्ट वाटर से बनती है सो लहमो लेक जो 620

28:37 मीटर्स की ऑल्टीट्यूड पर लोकेटेड है और इस लेक के बाद यह रिवर हाई हिमालयज को क्रॉस करते हुए पहुंचती है रैंकपो जहां रैंकपो रिवर तीस्ता को जॉइ करती है और यह कंबाइंड स्ट्रेन तीस्ता एंड वेस्ट बंगाल का बॉर्डर क्रिएट करती है। वेस्ट बंगाल के सिवोके से यह रिवर प्लेेंस में एंटर करती है और यहीं फेमस कोरोनेशन ब्रिज एंड सिवोके रेल ब्रिज लोकेटेड है जो नॉर्थ ईस्ट को रेस्ट ऑफ इंडिया से कनेक्ट करता है। नेक्स्ट यह रिवर चलपाईगुड़ी के बाद से बांग्लादेश में एंटर करती है एंड ब्रह्मपुत्र में जा गिरती है। दोस्तों 1787 तक यह रिवर गंगा जी की ट्रिब्यूटरी थी। लेकिन 1787 की फ्लड्स के बाद से इस रिवर ने अपना कोर्स चेंज किया एंड यह ब्रह्मपुत्र की ट्रिब्यूटरी बन गई। तो दोस्तों, यह होती है हिमालयन ड्रेनेज सिस्टम की सभी मेजर रिवर्स। नेक्स्ट चलिए मूव करते हैं

29:23 पेनसुलर ड्रेनेज पर। दोस्तों, क्या आपको पता है कि भारत में एक नदी ऐसी भी है जो समुद्र तक अपनी जर्नी कंप्लीट नहीं कर पाती है जिसका नाम है लूनी। 495 कि.मी. लॉन्ग लूनी। रिवर का उद्गमन होता है अजमेर के पास अरावली हिल्स से। यहां इस रिवर को सागरमती बोला जाता है और गोविंदगढ़ के आगे पुष्कर लेक से आती हुई सरस्वती रिवर से इसका संगम होता है। जिसके बाद इस रिवर को लूनी या फिर लवणवती कहा जाता है। दोस्तों अरावलीज के वेस्ट में लोकेटेड यह वन ऑफ द मेन रिवर्स है और इस रिवर का यूज एक्सटेंसिव इरीगेशन के लिए किया जाता है। बाड़मेर में लोकेटेड बलोत्रा तक यह रिवर फ्रेश वाटर कैरी करती है। लेकिन बलोतरा से इस रिवर में सेलाइन वाटर मिल जाता है। यानी कि यह रिवर सेलाइन यानी कि लवणता युक्त हो जाती है। एंड इसीलिए इसको लवणवती

30:09 या फिर लूनी कहा जाता है। बारमेर से यह रिवर गुजरात के पाटन में एंटर करती है और रन ऑफ कच्छ में यह रिवर इवापोरेट हो जाती है। एंड हेंस लूनी रिवर का ड्रेनेज सिस्टम क्लोज्ड है। यानी कि इसे हम एफीमेरल ड्रेनेज भी कहते हैं। दोस्तों, शैलो बेट में फ्लो करने की वजह से लूनी रिवर फ्लैश फ्लड्स के लिए भी फेमस है। 6 एंड 2010 में यह रीजन फ्लैश फ्लड्स एक्सपीरियंस भी कर चुका है। नेक्स्ट बात करते हैं वेस्ट इंडिया की चार मेजर रिवर्स की जो अरेबियन सी में जाकर गिरती हैं। जिसमें से पहली रिवर है 371 कि.मी. लंबी साबरमती रिवर। राजस्थान में उदयपुर डिस्ट्रिक्ट की अरावली पहाड़ियों में देवर लेक से उद्गमित होने वाली साबरमती गुजरात की कैपिटल गांधीनगर और फाइनेंशियल कैपिटल अहमदाबाद दोनों से होते हुए पहुंचती है

30:56 अरेबियन सी के वुल्फ ऑफ खंबत में एंड साथ में धरोही डैम इस रिवर पर एक मेजर डैम है। नेक्स्ट रिवर है माही। 583 कि.मी. लंबी यह नदी गुजरात की दूसरी महत्वपूर्ण नदी है जो मध्य प्रदेश में विंध्यास की रदन स्लोप्स में थार डिस्ट्रिक्ट की मिंडा विलेज से उद्गमित होती है और राजस्थान में एंटर करने के बाद फाइनली गुजरात में एंटर करती है और वडोदरा के पास अरेबियन सी में जा गिरती है। यह रिवर ट्रॉपिक ऑफ कैंसर को भी दो बार कट करती है और राजस्थान में बंसवाड़ा डैम इसी रिवर पर एक मेजर डैम है। तो दोस्तों, चलिए आते हैं नर्मदा रिवर पर जिसकी टोटल लेंथ 1312 कि.मी. है। यह नदी कंप्लीटली इंडिया में वेस्ट फ्लोइंग लॉन्गेस्ट रिवर है जिसका ओरिजिन मध्य प्रदेश में सतपुरास की अमरकंटक में लोकेटेड है। नर्मदा रिवर लार्जेस्ट वेस्ट

31:43 फ्लोइंग रिवर और मध्य प्रदेश की लार्जेस्ट रिवर है। जिसकी शुरुआत होती है अनूपपुर में लोकेटेड सतपुरास के अमरकंटक प्लैट्यू से। जिसके बाद यह रिवर कपिलधारा वॉटरफॉल्स क्रिएट करती है। विंध्यास एंड सतपुरास के बीच रिफ्ट वैली में फ्लो करते हुए जबलपुर के पास यह रिवर क्रिएट करती है धुआंधार वॉटरफॉल्स को जिसके बाद वेस्टर्न डायरेक्शन में फ्लो करते हुए यह रिवर पहुंचती है ओमकारेश्वर जो 12 में से एक मेजर ज्योतिर्लिंग है और इसके पास इंदिरासागर डैम नर्मदा पर बनाई गई है। ओमकारेश्वर से लगभग 180 कि.मी. बाद नर्मदा महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बॉर्डर पर फ्लो करते हुए गुजरात में एंटर करती है और शूलपानेश्वर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की यह मेजर रिवर है। जहां इस रिवर पर सरदार सरोवर डैम क्रिएटेड है और इसी डैम के एक

32:29 आइलैंड साधु बेट पर इंडिया के पहले मिनिस्टर वल्लभ भाई पटेल का वर्ल्ड का टॉलेस्ट स्टैच्यू स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाया गया है। जिसके बाद यह रिवर बरउच के पास से एक एस्टोरी के थ्रू गुल्फ ऑफ खंबत में जागृति है। और इसी ए्चुरी में पेट्रोलियम रिच आइलैंड आलिया बेड भी लोकेटेड है। नेक्स्ट दोस्तों आते हैं तापी रिवर पर जिसे तापी भी कहा जाता है और इस रिवर की टोटल लेंथ 724 कि.मी. है। यह रिवर नर्मदा के साउथ में लोकेटेड है और ओरिजिनेट होती है सतपुरास माउंटेंस में लोकेटेड मध्य प्रदेश के मुलताई से। जिसके बाद यह रिवर पारसधो वॉटरफॉल क्रिएट करती है। मध्य प्रदेश से फ्लो करते हुए यह रिवर अब महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का बॉर्डर क्रिएट करती है और महाराष्ट्र में एंटर कर जाती है। महाराष्ट्र में फ्लो करने के बाद यह रिवर गुजरात में एंटर करती है और

33:15 गुजरात में ही इस रिवर पर टुकाई डैम बनाई गई है और इस डैम के बाद यह रिवर सूरत से होते हुए अरेबियन सी में जा गिरती है। इसी रिवर की ऐ फेमस डुमास बीच लोकेटेड है और इसी ऐरी में आपको हज़रा मैनग्रोव्स भी देखने को मिलते हैं। तो चलिए दोस्तों नेक्स्ट बात करते हैं गोवा की जहां दो इंपॉर्टेंट रिवर्स लोकेटेड हैं मांडोवी और जुआ। यह दोनों ही रिवर्स वेस्टर्न घाट से उद्गमित होती हैं। इसके बाद और थोड़ा सा साउथ में आते हैं और बात करते हैं केरला की जहां 44 मेजर रिवर्स हैं। लेकिन इन 44 में से तीन रिवर्स ऐसी हैं केरला की लाइफ लाइन कही जाती हैं। पहली है 209 कि.मी. लंबी भारतपुरजा रिवर जिसकी शुरुआत होती है वेस्टर्न घाट्स के अन्नामलाई हिल्स से जहां से यह रिवर वेस्टर्न घाट्स के पालाघाट पलक्कड़ गैप से होते हुए लेके सी

34:01 में जा गिरती है। सेकंड है 244 कि.मी. लंबी केरला की हार्ट एंड सोल कही जाने वाली पेरियार रिवर जिसकी शुरुआत होती है वेस्टर्न घाट्स के थुक्कम पट्टी माला से जो पेरियार टाइगर रिजर्व में लोकेटेड है। यहां से यह रिवर केरला के प्लेन से फ्लो करते हुए वेमनांड लेक में जा गिरती है और इदुकी डैम इसी रिवर पर एक मेजर डैम है। थर्ड रिवर है पंबा जिसकी टोटल लेंथ 1176 कि.मी. की है जिसे दक्षिण भागीरथी भी कहा जाता है और इसका उद्गमन वेस्टर्न घाट्स की पूला छछू माला से होता है। जहां से यह रिवर केरला के कोस्टल प्लेन से होते हुए वेनांड लेक में जा गिरती है। साबरीमाला टेंपल जो कुछ सालों पहले वुमेन एंट्री को लेकर काफी ज्यादा न्यूज़ में था। इसी पावन रिवर के बैंक्स पर लोकेटेड है। अब मालाबार कोस्ट से आते हैं ईस्ट कोस्ट पर और बात

34:48 करते हैं 395 कि.मी. लंबी सुवर्णरेखा रिवर की जिसकी शुरुआत होती है पिसका झारखंड से जहां से रिवर वेस्ट बंगाल में एंटर करती है। एंड फिर ओसा के थ्रू वे ऑफ़ बंगाल में जा गिरती है। इसके बाद बात करते हैं नेक्स्ट रिवर बैतरनी की जिसकी टोटल लेंथ 360 कि.मी. है। एंड इसका उद्गमन होता है ईस्टर्न घाट्स के गुप्तगंगा हिल्स से जहां से यह रिवर भीक कनिका के पास बे ऑफ़ बंगाल में जा गिरती है। नेक्स्ट रिवर है 480 कि.मी. लंबी ब्राहणी रिवर जो झारखंड से आती हुई शंख और साउथ कोयल रिवर के संगम से बनती है और उड़ीसा से फ्लो करते हुए भीकनिका के पास बे ऑफ बंगाल में जा गिरती है। नेक्स्ट है 858 कि.मी. लंबी महानदी। उड़ीसा की लार्जेस्ट रिवर जिसकी शुरुआत

35:35 होती है छत्तीसगढ़ के सिहावा से और उड़ीसा से फ्लो करते हुए लार्ज डेल्टा के थ्रू यह रिवर बे ऑफ बंगाल में जा गिरती है। दोस्तों महानदी रिवर की ही एक डिस्ट्रिब्यूटरी है दया रिवर जो जाकर चिलका लेख में गिरती है। साथ ही हसदेव और सेवनाथ महानदी की मेजर ट्रिब्यूटरीज हैं। तो दोस्तों चलिए नेक्स्ट बात करते हैं 165 कि.मी. लंबी रुष पुलिया की जिसकी शुरुआत होती है ईस्टर्न घाट से और गंजम डिस्ट्रिक्ट से यह रिवर बे ऑफ़ बंगाल में जा गिरती है। नेक्स्ट है 254 कि.मी. लंबी बमसधरा जिसकी शुरुआत होती है उड़ीसा के कालाहांडी से और मेजरली उड़ीसा में फ्लो करने के बाद यह रिवर आंध्र प्रदेश में एंटर कर जाती है और कलिंगापटम में वे ऑफ बंगाल में जा गिरती है। तो दोस्तों उड़ीसा

36:20 के बाद थोड़ा सा साउथ मूव करते हैं। और अब बात करते हैं कंप्लीटली इंडिया में फ्लो करने वाली लॉन्गेस्ट रिवर की जिसका नाम है गोदावरी। 1465 कि.मी. लॉन्ग गोदावरी जिसे दक्षिण गंगा भी कहा जाता है। इसका उद्गमन स्थल वेस्टर्न घाट्स के शियादरीज में नासिक के पास त्रियंबकेश्वर में लोकेटेड है। वेस्टर्न घाट्स में गंगापुर और सोमेश्वर वाटरफॉल्स का निर्माण करते हुए यह रिवर पहुंचती है पैठान और यहीं इस रिवर पर जायकवाड़ी डैम लोकेटेड है। जिसके बाद गोदावरी का संगम पूर्णा रिवर से होता है। और इसके आगे तेलंगाना में एंटर करने के बाद गोदावरी का संगम होता है बालाघाट रेंजेस से आती हुई मंजरा रिवर से और तेलंगाना में इस रिवर पर श्रीराम सागर डैम

37:06 लोकेटेड है। जिसके बाद यह रिवर पहुंचती है तेलंगाना महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के ट्राई पॉइंट पर जहां परहिता रिवर इसमें आकर मिलती है जो सतपुड़ा से आती हुई वाई गंगा और वर्धा के संगम से बनती है और इस ट्राई पॉइंट पर ही कालेश्वरम डैम अंडर कंस्ट्रक्शन है। इसके आगे उड़ीसा और छत्तीसगढ़ से आती हुई इंद्रावती रिवर से गोदावरी का संगम हो जाता है। जिसके बाद यह रिवर आंध्रा में एंटर करती है और यहां इस पर पोलावरम डैम कंस्ट्रक्टेड है और इसके बाद डेल्टा के थ्रू यह रिवर बे ऑफ बंगाल में जाकर गिरती है। तो दोस्तों उड़ीसा के बाद थोड़ा सा साउथ मूव करते हैं और अब बात करते हैं कंप्लीटली इंडिया में फ्लो करने वाली लॉन्गेस्ट रिवर की। इसका नाम है गोदावरी। 1465 कि.मी. लॉन्ग गोदावरी जिसे

37:54 दक्षिण गंगा भी कहा जाता है। इसका उद्गमन स्थल वेस्टर्न घाट्स के शियादरीज में नासिक के पास त्रियंबकेश्वर में लोकेटेड है। वेस्टर्न घाट्स में गंगापुर और सोमेश्वर वाटरफॉल्स का निर्माण करते हुए यह रिवर पहुंचती है पैठान। और यहीं इस रिवर पर चायवाड़ी डैम लोकेटेड है। जिसके बाद गोदावरी का संगम पूर्णा रिवर से होता है। और इसके आगे तेलंगाना में एंटर करने के बाद गोदावरी का संगम होता है बालाघाट रेंजेस से आती हुई मंजरा रिवर से और तेलंगाना में इस रिवर पर श्रीराम सागर डैम लोकेटेड है। जिसके बाद यह रिवर पहुंचती है तेलंगाना महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के ट्राई पॉइंट पर जहां पर हिता रिवर इसमें आके मिलती है। तो सपुरा से आती हुई वाई गंगा और वर्धा के संगम से बनती है और इस

38:40 ट्राई पॉइंट पर ही कालेश्वरम डैम अंडर कंस्ट्रक्शन है। इसके आगे उड़ीसा और छत्तीसगढ़ से आती हुई इंद्रावती रिवर से गोदावरी का संगम हो जाता है। जिसके बाद यह रिवर आंध्रा में एंटर करती है और यहां इस पर कोलावरम डैम कंस्ट्रक्टेड है और इसके बाद डेल्टा के थ्रू यह रिवर बे ऑफ बंगाल में जाकर गिरती है। चलिए दोस्तों नेक्स्ट मूव करते हैं कृष्णा रिवर सिस्टम पर। 1400 कि.मी. लॉन्ग कृष्णा रिवर कर्नाटका की लाइफ लाइन कही जाती है और इस रिवर का उद्गमन होता है महाराष्ट्र के सतारा डिस्ट्रिक्ट में वेस्टर्न घाट्स में लोकेटेड महाबलेश्वर से जहां से यह रिवर ईस्टर्न डायरेक्शन में फ्लो करती है और यहीं इन पहाड़ियों में कृष्णा रिवर पर सीनिक ठोंगम डैम क्रिएटेड है। सतारा के बाद कृष्णा का संगम कोयना रिवर से होता है

39:27 और सांगली के बाद यह रिवर कर्नाटका में एंट्री कर जाती है और कर्नाटका में इस रिवर के ऊपर अलमाती डैम कंस्ट्रक्टेड है जिसके बाद कृष्णा का संगम माल प्रभा से होता है और इस संगम के बाद इस रिवर पर बसावा सागर डैम कंस्ट्रक्टेड है जिसके बाद कृष्णा पहुंचती है कर्नाटिका तेलंगाना बॉर्डर पर जहां इसका संगम महाराष्ट्र के भीम शंकर से आती हुई इसकी लॉन्गेस्ट ट्रिब्यूटरी भीमा से होता है और इस संगम संगम के 112 कि.मी. बाद कृष्णा का संगम होता है तुंगभद्रा से। दोस्तों इस संगम पर श्री सलीम डैम कंस्ट्रक्टेड है जो तेलंगाना आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर लोकेटेड है। इसके बाद इस बॉर्डर पर थ्रो करते हुए इस रिवर पर नागा अर्जुन सागर डैम कंस्ट्रक्टेड है। जिसके बाद यह रिवर कंप्लीटली आंध्र प्रदेश में एंटर कर जाती

40:13 है और विजयवाड़ा से होते हुए बे ऑफ बंगाल में जा गिरती है। तो चलिए दोस्तों नेक्स्ट बात करते हैं कृष्णा रिवर की ट्रिब्यूटरी तुंगाभद्रा की जो कृष्णा के साथ कर्नाटका की लाइफ लाइन कही जाती है और इस नदी का उद्गमन शिमोगा डिस्ट्रिक्ट के कोदली में टंगा और भद्रा नदियों के संगम पर होता है। टंगा रिवर की शुरुआत होती है वेस्टर्न घाट्स के गंगमूल हिल से जो चिकल कर्नाटका में लोकेटेड है। व भद्रा नदी का उद्गमन वेस्टर्न घाट्स के गंगमूल से ही होता है। लेकिन दोनों रिवर्स अलग-अलग डायरेक्शंस में फ्लो करती हैं और इन दोनों ही स्ट्रीम्स के कुडली में संगम के बाद इस कंबाइंड स्ट्रीम को टंगा भद्रा कहा जाता है। जिसके बाद यह नदी पहुंचती है हम्पी जहां फेमस वीरू पक्षा टेंपल इस रिवर को ओवरलुक करता है एंड यूनेस्को वर्ल्ड

40:59 हेरिटेज साइट भी है। फिर उसके बाद यह रिवर पहुंचती है कर्नाटका तेलंगाना बॉर्डर पर जहां इस रिवर की डायरेक्शन ईस्टर्नली हो जाती है। एंड तेलंगाना आंध्रा बॉर्डर पर इसका संगम कृष्णा रिवर से हो जाता है। जहां श्री सलीम डैम कंस्ट्रक्ट की गई है। हम्पी के वीरभक्षा टेंपल के साथ-साथ इस पावन नदी पर श्री श्रृंगेरनी, शरदांबा टेंपल, पंपाती टेंपल, हरि हरेश्वर टेंपल भी लोकेटेड है। अच्छा नेक्स्ट बात करते हैं कृष्णा और कावेरी के बीच तीन नदियों की और इन तीनों रिवर्स का उद्गमन होता है नंदी हिल्स से। जहां से ये तीनों रिवर्स वे ऑफ बंगाल की तरफ मूव करती हैं। इन रिवर्स को हम इनके इनिशियल दो लेटर्स के नाम से याद कर सकते हैं। पी पाो पी यानी कि पेन्नार रिवर जिसे पेनूरू या पिनाकनी

41:45 भी कहा जाता है। कर्नाटका के नंदी हिल से यह रिवर नदरली डायरेक्शन में फ्लो करती है और आंध्रा में एंटर कर जाती है और जरुूथला रामपुरम से ईस्ट वअ टर्न लेती है। जहां इस रिवर पर एमपीआर डैम भी कंस्ट्रक्टेड है। यहां से यह रिवर पहुंचती है कड़प्पा और फिर नेल्लोर। जिसके बाद ऐुरी के थ्रू यह रिवर बे ऑफ बंगाल में जा गिरती है। नेक्स्ट नंदी हिल से निकलने वाली दूसरी रिवर है पा यानी कि पल्लार रिवर जो ईस्टर्न डायरेक्शन में फ्लो करती है एंड कर्नाटका से आंध्र प्रदेश एंड देन तमिलनाडु में एंटर कर जाती है। तमिलनाडु में यह रिवर बेंलोर एंड कांचीपुरम से होते हुए बे ऑफ बंगाल में एचुरी के थ्रू जा गिरती है। इसके आगे बात करते हैं नंदी हिल से उद्गमित होने वाली थर्ड रिवर की पोनियार जिसे साउथ पेनार या थेनी पेनार

42:31 कहा जाता है जो कर्नाटका से डायरेक्टली तमिलनाडु में एंटर करती है और तमिलनाडु पुडुचेरी के बॉर्डर के पास से बे ऑफ बंगाल में जा गिरती है। तो दोस्तों अब नेक्स्ट बात करते हैं साउथ इंडिया की एकमात्र पेरिनियल रिवर की कावेरी। दोस्तों कावेरी रिवर साउथ वेस्ट और नॉर्थ ईस्ट दोनों मॉनसून से वाटर रिसीव करती है और इसीलिए यह रिवर पेरिनियल है। कही जाने वाली यह रिवर की शुरुआत होती है कर्नाटका में लोकेटेड वेस्टर्न घाट्स की भ्रमगिरी रेंज में एक ताल से जिसे ताल कावेरी कहा जाता है। इंडिया की यह एकमात्र रेनफेड रिवर है जो पेरिनियल है। यानी कि इसमें पानी का फ्लो हमेशा बना रहता है। जिसका रीजन यह है कि कावेरी रिवर का बेसिन साउथ वेस्ट और नॉर्थ ईस्ट मसून दोनों की रेनफॉल रिसीव करता है। यहां से यह रिवर ईस्टर्न डायरेक्शन में मूव करती है और मैसूर के

43:18 पास सिरंगीपट्टनम और शिवासमुद्रम आइलैंड के निर्माण करती है और यहीं इस रिवर पर शिवासमुद्रम फॉल्ट्स भी लोकेटेड है। धर्मपुरी डिस्ट्रिक्ट से तमिलनाडु में एंटर करने के बाद इस रिवर की डायरेक्शन साउथ ईस्ट रेडी हो जाती है और तमिलनाडु में यह रिवर श्रीरंगम आइलैंड का निर्माण करती है। दोस्तों, कृष्णा राजासागर डैम और मित्तूर डैम इसी रिवर पर मेजर डैम्स हैं। और हेमावती, अर्कावती, कावेनी, भवानी और अमरावती इस रिवर की मेजर ट्रिब्यूटरीज। दोस्तों कावेरी रिवर के वाटर डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर तमिलनाडु, कर्नाटक और पोंडीचेरी के बीच में डिस्प्यूट है। कावेरी के नीचे बात करते हैं वगई रिवर की जो 258 कि.मी. लॉन्ग है। इस रिवर का उद्गमन वेस्टर्न घाट्स की वारू सनादु हिल से होता है। इसके बाद यह रिवर रामनाथपुरम

44:05 के पास से पाक बे में जा गिरती है। तो दोस्तों, इसके साथ कंप्लीट होती है इंडिया का ड्रेनेज सिस्टम जहां पर हमने इंडिया की सभी मेजर रिवर्स के बारे में बात कर ली है। मैं आशा करता हूं कि आपको यह सेशन बहुत अच्छा लगा होगा। इस वीडियो को लाइक जरूर करें और अगर आप इस वीडियो को करते हैं 20,000 लाइक्स तो हम नेक्स्ट बात करने वाले हैं माउंटेन रेंजेस ऑफ इंडिया की। स्टडी आईक्यू आईएस आपका सिलेक्शन हमारा मिशन।

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