Mudda Aapka मुद्दा आपका: भारत-ब्रिटेन: रिश्तों में नई मजबूती | India-UK Relations: Gain New Strength

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संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में भारत और ब्रिटेन के संबंधों में आई नई मजबूती और ऊर्जा पर चर्चा की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की मुलाकात, व्यापार समझौते, विज़न 2035 रोड मैप, और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

  • भारत और यूके के बीच मजबूत संबंध लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन के मूल्यों पर आधारित हैं।
  • दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते से रोजगार बढ़ने और आर्थिक प्रगति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

परिचय: भारत-ब्रिटेन संबंधों में नई मजबूती

संसद टीवी पर 'मुद्दा आपका' कार्यक्रम में भारत और ब्रिटेन के संबंधों पर चर्चा की गई। हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भारत दौरा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया जिसमें संबंधों को मजबूत करने और व्यापार, रक्षा, जलवायु, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई।

अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य और भारत-ब्रिटेन संबंधों का महत्व

अंतर्राष्ट्रीय स्थिति में डब्ल्यूटीओ का महत्व कम होने और अमेरिका द्वारा टैरिफ का अधिक उपयोग करने के कारण, भारत और ब्रिटेन जैसे देशों का साथ आना महत्वपूर्ण है। ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है, इसलिए भारत के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाना उसके लिए आवश्यक है। भारत को भी नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश है, इसलिए यह दौरा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

व्यापार समझौते का विश्लेषण

प्रधानमंत्री स्टारमर चाहते हैं कि भारत के साथ व्यापार समझौता (सीटा) जल्दी लागू हो ताकि यूके में रोजगार और आय बढ़ सके। यूके की अर्थव्यवस्था कोरोना के बाद स्थिर नहीं हो पाई है और उसका चालू खाता घाटा बढ़ रहा है। अमेरिकी टैरिफ युद्ध और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ऊर्जा संकट ने भी यूके की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत के प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र के लिए परमाणु ऊर्जा खोल दी है, जिसमें यूके सहयोग कर सकता है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग

भारत और ब्रिटेन के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। भारत चाहता है कि इस क्षेत्र में नेविगेशन स्वतंत्र और खुला रहे, जिसका चीन विरोध कर सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा में शांति स्थापित करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। भारत चाहता है कि दोनों युद्ध कूटनीतिक तरीके से समाप्त हों।

विज़न 2035: भविष्य की रणनीति

विज़न 2035 का उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को संरचित तरीके से आगे बढ़ाना है। इसमें आर्थिक, व्यापार, निवेश, राजनीतिक, सुरक्षा, शिक्षा और वीजा संबंधित मुद्दों पर सहयोग शामिल है। यूके की यूनिवर्सिटीज भारत में अपनी शाखाएं खोलेंगी, जिससे भारतीय छात्रों को कम खर्च में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

शिक्षा, टैलेंट और टेक्नोलॉजी में सहयोग

यूके के वाइस चांसलर भारत के साथ शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने आए हैं। यूके की यूनिवर्सिटीज में विदेशी छात्रों की संख्या में कमी आई है, इसलिए वे भारत में निवेश करना चाहते हैं। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 सत्य, निष्ठा, समाज, रचनात्मकता और नैतिकता पर जोर देती है, जिसे यूके के शिक्षा सिस्टम को अपनाने की आवश्यकता है।

रक्षा सौदे और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा

भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। भारत को हल्की मल्टी रोल मिसाइल देने पर सहमति बनी है। ब्रह्मोस मिसाइल की तरह, दोनों देश मिलकर उन्नत तकनीकों का विकास कर सकते हैं। जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने बहुत काम किया है। भारत चाहता है कि यूके के साथ मिलकर ग्रीन एनर्जी और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी पर काम किया जाए।

यूएनएससी में भारत की सदस्यता और अन्य मुद्दे

ब्रिटेन ने यूएनएससी में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया है। भारत ग्लोबल साउथ की एक विश्वसनीय आवाज बन चुका है और उसने कोरोना काल में दुनिया को सहयोग दिया है। यूके को भारत के खिलाफ आतंकवादियों पर कार्रवाई करनी चाहिए और आर्थिक अपराधियों को भारत को सौंपना चाहिए। भारत रूस से सस्ता तेल लेकर नाटो देशों को सप्लाई कर रहा है, जिससे उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

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Transcript

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0:00 [संगीत] नमस्कार स्वागत है आपका संसद टीवी पर। मैं हूं मनोज वर्मा और आप देख रहे हैं हमारा खास कार्यक्रम मुद्दा आपका। आज हम बात करेंगे भारत ब्रिटेन रिश्तों में नई मजबूती की, नई ऊर्जा की। इस मुद्दे पर बात इसलिए क्योंकि भारत के दौरे पर आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुंबई में मुलाकात की है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की यह पहली भारत यात्रा है। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने एक संयुक्त बयान में भी जारी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि

0:45 दोनों देशों के बीच संबंधों की नींव में लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हुए व्यापार समझौते से रोजगार बढ़ेगा। दोनों नेताओं के बीच विज़न 2035 रोड मैप के तहत भारत ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा, जलवायु, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार विमर्श हुआ। इसलिए मुद्दा आपका में आज हम बात भारत, ब्रिटेन रिश्तों की करेंगे। हमारे साथ खास मेहमान जुड़े हुए हैं। फॉर्मर एंबेसडर योगेश गुप्ता जी हमारे साथ जुड़े हैं। योगेश जी आपका स्वागत है संसद टीवी पर। साथ ही हम बात करेंगे सेवानिवृत्त मेजर जनरल ध्रुव सी कटो जी से जो डायरेक्टर हैं इंडिया फाउंडेशन के। ध्रुव जी आपका भी स्वागत है

1:31 संसद टीवी पर और हमारे साथ जुड़े हुए हैं डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल जी जो प्रोफेसर हैं डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ से। डॉ. मनोज जी आपका भी स्वागत है संसद टीवी पर। हम इस चर्चा की शुरुआत करें। उससे पहले आइए सुनते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ब्रिटेन के साथ रिश्तों को लेकर क्या कहा। भारत और यूके नेचुरल पार्टनर्स है। हमारे संबंधों की नींव में डेमोक्रेसी, फ्रीडम और रूल ऑफ लॉ जैसे मूल्यों में साझा विश्वास है। मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत और यूके के बीच ये बढ़ती हुई साझेदारी

2:18 ग्लोबल स्टेबिलिटी और आर्थिक प्रगति का एक आधार महत्वपूर्ण आधार बनी रही है। आज की बैठक में हमने इंडोपेसिफिक वेस्ट एशिया में शांति और स्थिरता और यूक्रेन में चल रहे संघर्ष पर भी विचार साझा किए। यूक्रेन कॉन्फ्लिक्ट और गांजा के मुद्दे पर भारत डायलॉग और डिप्लोमेसी से शांति की बहाले के सभी प्रयासों का समर्थन करता है। हम इंडोपेसिफिक क्षेत्र में मेरिटाइम सिक्योरिटी कोपरेशन बढ़ाने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

3:04 रे ब्रिटिश मी टू इंडिया दिस वी हैड गेट बिग प्लेन टूवल ओवर देने साइज बिनेसे बट आल्सो लीडर्स एजुकेशन समय एंड स्पोर्ट एंड द आर्ट्स एस आई से लार्जेस्ट ट्रेड डेलीगेशन फॉर अ डेड सो प्राइम मिनिस्टर डेस्टिनेशन टू बी इंडिया लेटर टुडे प्राइम मिनिस्टर सीओ

3:52 डायरेक्ट रियल रूम दिसवल लाइफ इट्री ऑलरेडी रीच जाहिर तौर पे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की भारत यात्रा को खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहली भारत यात्रा है ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की। योगेश गुप्ता जी मैं आपसे जानना चाहूंगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की स्टारमर की जो यात्रा है भारत की उसको आप कैसे देखते हैं? अंतरराष्ट्रीय जो परिस्थितियां हैं उसमें यह दौरा क्यों महत्वपूर्ण हो जाता है? भारत और ब्रिटेन के संबंधों को कैसे देख रहे हैं आप? नहीं ये बहुत इंपॉर्टेंट विजिट है और उसके

4:37 कई कारण है। एक कारण तो यह है कि जो आज की इंटरनेशनल सिचुएशन है, अंतरराष्ट्रीय स्थिति है उसमें देखिए ये डब्ल्यूटीओ का महत्व जो है वो थोड़ा कम हो रहा है जब से अमेरिका ने उनको अपना कोऑपरेशन देना बंद किया है और इसके साथ साथ जो है वो काफी कंट्रीज जो है अब रीजनल या बटरल ट्रेड एग्रीमेंट्स वगैरह जो है उसकी तरफ जा रहे हैं। दूसरी बात ये है कि अमेरिका में जो नए राष्ट्रपति आए हैं डोनाल्ड ट्रंप साहब उन्होंने जो है वो टेरिफ का यूज़ बहुत ज्यादा शुरू कर दिया है। हर चीज में जो है वो चाहे वो ट्रेड का मुद्दा हो या कोई पिटिकल मुद्दा हो या कोई सिक्योरिटी रिलेटेड मुद्दा हो हर चीज को वो एक टेरिफ

5:26 की दृष्टि से नॉन टेरिफ बैरियर और टेरिफ बैरियर्स की दृष्टि से वो उसको सुलझाना चाह रहे हैं जो कि एक बहुत गलत बात है और जिसके कि एक बहुत जिसे कहते हैं डेंजरस और एडवर्स रिजल्ट्स निकलेंगे कुछ महीनों के बाद में तो ऐसी स्थिति इसी में जो है जब दो बड़े मेजर कंट्रीज जो है जैसे इंडिया और यूके जो है जी वो साथ आते हैं और कहते हैं कि नहीं भाई हमें जो ट्रेड एग्रीमेंट वगैरह है जो हमारे यूजुअल मीन्स है उनके साथ मिलकर जो है आपस बातचीत करके जो है इन चीजों के लिए एक समाधान निकालना चाहिए तो वो बहुत इंपॉर्टेंट बात है उससे अमेरिका को भी जाता है और जो इस प्रवृत्ति के लोग हैं

6:12 उनको भी जाता है कि जो वो लोग कर रहे हैं वो वो गलत है और जैसे कि अभी इन्होंने बताया प्रधानमंत्री स्टारवर ने ये बहुत बड़ा डेलगेशन वो लेके आए हैं तीन महीने के बाद जुलाई में अभी हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी गए थे यूके में तीन महीने के बाद इस तरह का इतना बड़ा विजिट होना जो है बहुत अनयूल बात है और उसका कारण देखिए ये है कि ब्रेक्सिट के बाद से जो है ब्रिटेन की जो इकॉनमी है उसकी स्थिति बहुत कमजोर रही है जी इकॉनमी या तो ग्रो ही नहीं कर रही है। नेगेटिव ग्रोथ कर रही है या 1% चैलेंज 1% ग्रोथ हो रही है। और हमें भारत में भी जो है देखिए जब ये जब से ये टेरिफ वगैरह इन्होंने लगाने शुरू किए हैं राष्ट्रपति

6:58 ट्रंप ने तो हमें भी जरूरत है कि भाई हम नए जो है ट्रेड पार्टनर्स की तरफ निगाह करें और जो एकिस्टिंग पार्टनर्स है उनके साथ मिलकर अपना व्यापार बढ़ाएं। जी। तो व्यापार की दृष्टि से, इन्वेस्टमेंट्स की दृष्टि से ये बहुत इंपॉर्टेंट विजिट है और उसके अलावा देखिए हमारे बहुत सारे पॉलिटिकल और सिक्योरिटी इश्यूज है जो भारत और ब्रिटेन के बीच में बहुत्ट जी बिल्कुल योगेश जी मैं वहां पर जी इन मुद्दों पर भी चर्चा करूंगा लेकिन जो आपने बात कही है जिस तरह से मुद्दा दोनों देशों के बीच ट्रेड का मुद्दा एक बड़ा मुद्दा उभर के सामने आया है। डॉ. मनोज मैं आपसे समझना चाहूंगा इस मुद्दे को क्योंकि दोनों देशों ने हाल ही में एक बड़ा व्यापार समझौता किया था। 3 महीने

7:43 पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ब्रिटेन गए थे और उस समय जिस तरह से व्यापार समझौता हुआ उसको आप कैसे देखते हैं? क्योंकि अभी जो भारत ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भारत आए हैं। एक बड़ी टीम के साथ वो भारत आए हैं। आप कैसे देखते हैं इस समझौते को? देखिए मनोज जी जो आज यह डायलॉग हुआ है जो बातचीत हुई है यह बेसिकली प्राइम मिनिस्टर स्टारमर की एक अपनी कह लीजिए कि थोड़ा सा आकांक्षा ये है कि जल्दी से जो सीटा है वो इंप्लीमेंट हो क्योंकि उन्होंने यहां आने के पहले ही एक चीज ये कही थी कि कहीं ऐसा ना हो कि ये पेपर पर रह जाए और इसके होने से यूके में जॉब क्रिएशन

8:30 होगा इनकम की कुछ गुंजाइश बढ़ेगी और अगर यूके की इकॉनमी जैसे योगेश जी बता रहे थे यूके की इकॉनमी अभी स्टेबल नहीं हो पाई है कोरोना के बाद से और फ्यूचर भी इनका बहुत अच्छा दिख नहीं रहा है और दूसरा इनका करंट अकाउंट डेफिसिट लगातार बढ़ रहा है अनलाइक इंडिया मैं कह सकता हूं कि उनका बढ़ रहा है। अनइंप्लॉयमेंट बढ़ रहा है। तीसरा सबसे बड़ी चीज क्या है कि जो अमेरिकन प्रेसिडेंट ट्रंप ने टेरिफ वार किया है उससे ना केवल नाटो पूरा परेशान है यूरोपियन यूनियन परेशान है यूके भी बहुत बुरी हद तक परेशान है। तीसरा जो रशिया का युद्ध चल रहा है उसका जो एनर्जी क्राइसिस है वो कहीं ना कहीं इनकी इकॉनमी पर भारी

9:16 पड़ता हुआ दिखाई पड़ रहा है। ऐसे में उसको लगता है इन्होंने एक चीज बहुत अच्छी बात कही। वो ये कहा कि भारत को अब हम इग्नोर नहीं कर सकते क्योंकि बहुत तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। हमें उसके साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहिए। यानी कि इस पूरे उसमें प्रकरण में देखते हैं तो प्राइम मिनिस्टर स्टारमर इसको बहुत अहम मानते हैं। प्राइम मिनिस्टर मोदी भी इसको अहम मानते हैं। लेकिन एक और भी चीज है कि अगले कुछ वर्षों में यूके और इंडिया के बीच का जो व्यापार है उसमें भी काफी परिवर्तन ये सीटा के अलावा भी मैं कह रहा हूं अगर सीटा नहीं भी होता तो बहुत व्यापक परिवर्तन होता जो यूके के फेवर में

10:03 नहीं रहता। इसलिए इसको आगे बढ़ने की आवश्यकता है। जैसे ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज की हालत बहुत अच्छी नहीं। अब वो इनकम जनरेटिंग नहीं रहे। इसीलिए भारत की डेमोग्राफी का फायदा उठाने के लिए यहां पर निवेश करके कैंपस खोलना चाहिए। एक कैंपस साउथ हैंटन यूनिवर्सिटी का गुड़गांव में प्रारंभ हो चुका है। पहला बैच वहां पर चल रहा है। तो इस प्रकार से देखते हैं। तो दूसरा जो प्रधानमंत्री मोदी जी ने जो काम किया है वो बड़ा इंपॉर्टेंट आज का मैसेज है। मुझे लगता है कि सबसे बड़ा हाईलाइट क्योंकि बाकी चीजों की चर्चा तो हम कर ही रहे थे। उन्होंने प्राइवेट सेक्टर के लिए न्यूक्लियर एनर्जी भारत में खोल दिया है और उसका कोलबोरेशन उन्होंने कहा है यूके से आप उसमें चाहे तो सहयोग कर सकते हैं।

10:49 यानी कि भारत उनको बता रहा है कि आप यहां पर अवसर ले सकते हैं। हमारे पास चॉइसेस हैं। तो भारत लगातार आगे बढ़ रहा है और जिस प्रकार से फिनटेक की आज शोकेसिंग हुई है और जिस प्रकार से ट्रेड वॉल्यूम बढ़ाने की बात है और जिस प्रकार से भारत अपने लेबर इंटेंसिव प्रोडक्ट्स को और तेजी से यूके में भेजेगा और ध्यान रखिएगा यूके में जब वो अपने प्रोडक्ट्स को भेजता है तो आसपास के यूरोपियन कंट्रीज में भी वो आसानी से पहुंच बना लेता है। तो इसलिए मुझे लगता है कि इस स्थिति का लाभ दोनों कंट्रीज उठाना चाहेंगे उठाना भी चाहिए। लेकिन भारत की एक विशेषता ये है कि दूर की सोच करके अपना काम करते हैं और डेमोक्रेफी

11:37 डेमोक्रेसी जो प्रधानमंत्री जी कहते हैं इन दोनों को ध्यान में रख के ये काम करते हैं और जो आज प्राइम मिनिस्टर स्टार जो सवा लोगों का डेलीगेशन लेकर आए हैं जो योगेश जी भी जिस पर हाईलाइट कर रहे हैं मुझे लगता है बिटवीन द लाइंस इसको बहुत समझने की आवश्यकता है कि उनकी इकॉनमी को बहुत बड़ा कहीं ना कहीं से बूस्ट मैंने मैंने इसीलिए मुद्दा उठाया कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री जो एक बड़ी टीम के साथ भारत आए हैं। जाहिर तौर पे जो व्यापार समझौता है दोनों देशों के बीच में वो बहुत महत्वपूर्ण है। खासतौर से जो अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां हैं ब्रिटेन को इस बात का एहसास है कि भारत तेजी से बढ़ती हुई एक मजबूत अर्थव्यवस्था है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जिस तरह से दोनों देशों को एक दिशा दे रहे हैं लोकतंत्र के आधार पर वह भी अपने में एक

12:24 महत्वपूर्ण पहलू है। लेकिन ध्रुव जी मैं आपसे जानना चाहूंगा क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी रखा कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में ब्रिटेन के साथ समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इस मुद्दे को आप कैसे देखते हैं? क्योंकि डिफेंस का मुद्दा और खासतौर से समुद्री सुरक्षा का मुद्दा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उभर के सामने आया है। धन्यवाद मनोज जी। देखिए सिक्योरिटी के बारे में प्रधानमंत्री जी ने दो बातें कही। एक तो इंडोपेसिफिक का जिक्र किया और दूसरा ये जो दो युद्ध हो रहे हैं एक रूस और यूक्रेन के बीच में और दूसरा गाजा में इनका भी जिक्र किया। मैं दोनों का मैं थोड़ी सी बात करना चाहता हूं। देखिए जहां तक इंडोपेसिफिक की बात है पूरे

13:12 हिंद महासागर की भी बात है यहां पर जो पूरी दुनिया की जो ट्रेड जाती है वो यहां से जाती है और भारत ने जो अपना रुख रखा है कि फ्री एंड ओपन नेविगेशन ये कुछ देश हैं जो इसको इसका विरोध कर सकते हैं। खास करके मैं एक ही देश कहता हूं जो चीन इसका ओपोनेंट बन सकता है। और यहां पर जो भारत के जो जियो स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट है वह अमेरिका से और यूरोप से एक साथ मिल जाते हैं। तो इसीलिए यहां पर जो कोऑपरेशन का मुद्दा है ब्रिटेन के साथ क्योंकि ब्रिटेन के पास भी एक स्ट्रांग नेवी है। फ्रांस के पास एक स्ट्रांग नेवी है और अमेरिका के पास एक स्ट्रांग नेवी है। बेशक यूरोप की नेवी इसमें इस इलाके में नहीं है। थोड़ी सी फ्रांस की है। लेकिन यहां पर

13:59 जो जो हिंद महासागर में और इंडोपेसिफिक में अगर आप पूरा रीजन ले तो मैं समझता हूं एक ये बड़ा कोऑपरेशन का एक सिक्योरिटी कोऑपरेशन का मुद्दा बन सकता है जिससे कि जो प्रधानमंत्री का मुद्दा है फ्री एंड ओपन नेविगेशन वो कायम रहे ये तो एक है। दूसरा मैं समझता हूं जो बहुत जरूरी बात है वो है रूस और यूक्रेन के बीच में युद्ध। अभी यहां पर जो जो स्थान दिया है जो भारत ने अपना स्टैंड दिया है और जो ब्रिटेन का स्टैंड है ये बिल्कुल अलग है क्योंकि ब्रिटेन ने अपना पूरा जोर यूक्रेन के पीछे लगाया है और ये युद्ध पहले बंद हो सकता था लेकिन ब्रिटेन ने उसको थोड़ा आगे बढ़ा दिया है जिससे कि वो अभी तक भी चल रहा है। तो ब्रिटेन और लेकिन अगर आप देख देखी जाए तो

14:45 जब जब एक बार अगर ये युद्ध समाप्त हो जाएगा तब एनर्जी प्राइसेस जो है वो स्टेबलाइज हो जाएंगी जिसमें जिसमें ब्रिटेन को भी बहुत फायदा होगा। भारत को तो खैर फायदा होगा ही। तो भारत ये चाहता है कि किसी ना किसी प्रकार से ये युद्ध बंद हो जाए। एक डिप्लोमेटिक तरीके से समझौते से जो भी करना है लेकिन ये युद्ध बंद बंद होना चाहिए और जो भी दोनों देशों के बीच में डिफरेंसेस है वो बातचीत से हल हो जाए। अभी मुझे लगता है यह मौका है क्योंकि अभी डायरेक्ट बात होगी प्रधानमंत्री की और ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर स्टारमर के साथ और मुझे लगता है कि क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी जी का जो स्टैंडिंग है रूस के साथ और अमेरिका के साथ और और यूक्रेन के साथ वो एक इस प्रकार

15:31 के स्टेटमेंट्स है कि सब उनकी बात मानने को तैयार हो जाएंगे। तो मुझे लगता है कि जब ये दोनों लीडर अभी आपस में बात करेंगे तो कोई ना कोई नतीजा उसके ऊपर आगे बढ़ता जाएगा और आखिरी जहां तक गाजा की बात है डॉन्ड ट्रंप ने भी अपना पीस प्लान आगे पेश किया है। भारत ने उसका समर्थन किया है। वहां पर मुझे लगता है ब्रिटेन भी बीच में आके अगर सभी देश मिल जाए तो गाजा में भी मुझे लगता है एक शांति स्थिति हो सकती है। और इस प्रकार के अगर ये हॉटस्पॉट जो है एक बार अगर शांत हो जाए तो मुझे लगता है जो भारत के जो इकॉनमी के ऊपर जो हम जोर दे रहे हैं जैसे हमारे दोनों को ने इससे पहले बताया है इसको इसको ज्यादा रुख मिलेगा और ये भारत के लिए और बाकी देशों के लिए भी मुझे लगता है ये बहुत फायदेमंद होगा। जी

16:18 जाहिर तौर पे समुद्री सुरक्षा का मुद्दा डिफेंस का मुद्दा रक्षा का मुद्दा भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के साथ चर्चा में यह मुद्दा भी रहा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी बात चाहे यूक्रेन रशिया वार की हो या गाजा की बात हो शांति के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं वैश्विक शांति के लिए। इस दुनिया जानती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शांति प्रयासों को। लेकिन योगेश जी मैं आपसे जानना चाहता हूं एक महत्वपूर्ण मुद्दे को कि मोदी जी ने स्टारमर के साथ विज़ 2035 की घोषणा की है। विज़ 2035 क्या है? देखिए विज़ 2035 ये है कि हम किस तरह से जो है दोनों मुल्कों के जो संबंध है उनको किस तरह से स्ट्रक्चरर्ड वे में जो

17:03 है आगे ले जा सकते हैं। एक तरफ इकोनमिक इश्यूज है, ट्रेड के इश्यूज है, इन्वेस्टमेंट के इश्यूज है। हिस्टोरिकली देखिए ब्रिटेन के भारत में बहुत इन्वेस्टमेंट्स है। लेकिन अब जो स्थिति आ रही है अब भारत के इन्वेस्टमेंट जो है वहां पर बढ़ रहे हैं। कई हमारी भारतीय कंपनी जो है वो जाकर वहां पर इन्वेस्ट कर रही है। हम तो चाहेंगे कि ब्रिटेन के इन्वेस्टमेंट भी बढ़े तो दोनों मुल्कों के इन्वेस्टमेंट जो है अगर एक दूसरे में बढ़े तो उससे दोनों को फायदा होगा। इसी तरह से ट्रेड एग्रीमेंट हम लोगों ने जो साइन किया है उससे जो है दोनों मुल्कों का ट्रेड आपस में काफी बढ़ेगा। ड्यूटीज वगैरह कम काफी कम हो जाएगी। ट्रेड बैरियर्स वगैरह जो है बहुत कम हो जाएंगे। उसके अलावा फिर जो और हमारे पिटिकल इश्यूज है, सिक्योरिटी

17:49 इश्यूज है, एजुकेशनल इश्यूज है या वीजा रिलेटेड इश्यूज है, पीपल टू पीपल एक्सचेंजेस है। तो ये विज़ 2035 में ये है कि किस तरह से इन सब चीजों के ऊपर मिलकर जो है दोनों काम करें और इन सब क्षेत्र में जो है हम किस तरह से प्रगति करें जिससे कि एक जैसे एजुकेशन का इशू है। जी भारत के इतने सारे विद्यार्थी जो है अमेरिका में और मुल्कों में पढ़ते जा रहे हैं। जिस तरह की नीति जो है राष्ट्रपति ट्रंप अपना रहे हैं एक बड़ा नैरो एटीट्यूड जो है वीजाज के ऊपर या उन स्टूडेंट्स को काम करने के मुद्दे के ऊपर तो उससे थोड़ा सा बहुत निराशा हुई है हमारे बच्चों में स्टूडेंट्स में। तो अब जैसे हमने यूके के

18:36 साथ मिलके ये तय किया है कि यूके की यूनिवर्सिटीज जो है वो भारत में आके अपनी ब्रांचेस खोलेंग तो उसमें देखिए दोनों मुल्क जो है आपस में कोऑपरेट कर सकते हैं। हमारे यहां काफी इंफ्रास्ट्रक्चर इसमें डेवलप हो रहा है और फिर जो है हमारे बच्चों को बाहर ज्यादा जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वो यही पे जो है वो पढ़ाई जो है कर सकते हैं। जो पैसे वो बाहर जाने पर खर्च करते थे वो यही पर खर्च यही पे मतलब भारत में ही रहकर और कम पैसों में उनकी पढ़ाई हो जाएगी और उसके बाद यहीं पर जो है अपने लिए वो नौकरियां वगैरह देख सकते हैं या जो और मुल्क है जहां पर हमारे भारत के लोगों की बहुत जरूरत है। जैसे जापान है, जर्मनी है, यूरोप के और मुल्क है वहां पर

19:22 जा सकते हैं। अफ्रीका में जा सकते हैं। तो देखिए इस सब इन सब कोपरेटिव मेजर से जो है नए एवन खुलेंगे हमारे दोनों मुल्कों के लिए और ये हमारे दोनों मुल्कों के लिए बहुत अच्छी बात है। जी बिल्कुल डॉक्टर मनोज जी मैं आपसे जानना चाहूंगा ये नौ विश्वविद्यालय जो खोलने की बात है शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम करना चाहते हैं। साथ ही बात टैलेंट और टेक्नोलॉजी की की जाए तो इस मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री जी ने खासा फोकस दिया है कि ब्रिटेन और भारत मिलकर टैलेंट और टेक्नोलॉजी की दिशा में महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं। महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। आप कैसे देखते हैं इन मुद्दों को? देखिए ये जिस प्रकार से सात वाइस चांसलर के साथ आए हैं प्राइम मिनिस्टर स्टारमर और

20:10 जो मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव यूके का रहा है वहां की यूनिवर्सिटीज का रहा है। वो ज्यादातर जो है फॉरेन स्टूडेंट जिसमें सबसे सर्वाधिक संख्या इंडियन स्टूडेंट्स की हुआ करती थी। वहां पर काफी कमी आई है। वो लोग अब कनाडा और इधर जा रहे हैं आपके यूएस तो उधर भी अब समस्या आ रही है पॉलिटिकल रीजंस के कारण और तमामों और जो अमेरिका की अपनी मागा की कुछ अनप्रिडिक्टेबल नीतियां हैं उनके कारण। तो यहां पर जो कैंपस खोल के निवेश करना चाह रहे हैं वो अपने प्रभुता को बनाने के लिए ये काम करना चाह रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यहां आ जरूर रहे हैं। लेकिन जिस प्रकार का हमारा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 है जो बहुत कुछ कहता है और जो

20:56 ब्रिटेन का एजुकेशन सिस्टम है जैसे एक मैं छोटा सा उदाहरण देता हूं। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी कहता है हम सत्य पर काम करेंगे और निष्ठा पर काम करेंगे। समाज को साथ लेकर के काम करेंगे। क्रिएटिविटी के साथ काम करेंगे। एथिकल काम करेंगे और ये सारी चीजें इनके एजुकेशन सिस्टम में नहीं है। तो उनको बहुत सी चीजें यहां से अडॉप करके जो आप टेक्नोलॉजी की बात कर रहे हैं। भारत बहुत एडवांस है इस एरिया में। तो जो उनके अब तक के अनुभव हैं और भारत का जो एस्पिरेशन है, भारत का जो अपना एथिकल पॉलिसी है, दोनों को क्लब करके यहां पर आएंगे तो मुझे लगता है शायद उनको इसमें कुछ सार्थक परिणाम नजर आएंगे।

21:43 जी बिल्कुल ध्रुव जी मैं आपसे जानना चाहूंगा रक्षा सौधों के बारे में। जाहिर तौर पर रक्षा को लेकर दोनों देशों के प्रधानमंत्रीियों के बीच बातचीत हुई है, चर्चा हुई है और ऐसी जानकारी भी है कि ब्रिटेन भारत को हल्की मल्टी रोल मिसाइल देने को तैयार है। इस मुद्दे पर आपका क्या कहना है? देखिए जहां तक डिफेंस कोऑपरेशन है, इस बार जिस प्रकार से बाकी देशों के साथ भारत का कोऑपरेशन रहा है, जैसे कि रूस के साथ है, अमेरिका के साथ है, फ्रांस और इजराइल के साथ। ब्रिटेन अभी तक उस उस दर्जे पर पहुंचा नहीं है। लेकिन ये कोऑपरेशन बहुत ज्यादा हो सकता है क्योंकि कई मुद्दे हैं जहां पर ब्रिटेन ब्रिटेन जो है वो आगे है और इसमें दूसरी बात है भारत भी बहुत आगे है। ये सिर्फ ये नहीं है कि ये एक तरफ़ा

22:29 होगा। अब जब भी जब भी कोऑपरेशन होगा डिफेंस के मुद्दे पर तो भारत भारत का भी इस पर काफी योगदान होगा और ब्रिटेन का भी इसमें योगदान हो सकता है। एक सिर्फ मैं छोटा मिसाल देता हूं। जैसे कि ब्रह्मोस मिसाइल जो है ये इसमें रूस का योगदान था और भारत का योगदान था और जब दोनों मिल गए तो एक ऐसी मिसाइल बनी जो दुनिया की नंबर वन मिसाइल है। तो मुझे लगता है कि इस प्रकार का कोऑपरेशन ये एिएशन सेक्टर में मिसाइल्स टेक्नोलॉजी में और जो भी खास करके एडवांस टेक्नोलॉजीस है। यहां पर भारत और भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच में यह हो सकता है जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा और खास करके ये ब्रिटेन के लिए भी ये बहुत फायदेमंद होगा। ये सिर्फ ये नहीं है कि उनकी तरफ से हमको टेक्नोलॉजी आ रही है और भारत की तरफ से

23:15 उनको कुछ नहीं है। इसमें जब हम ये डिफेंस कोपरेशन करेंगे तो भारत का योगदान भी होगा जिसके कि उनका डिफेंस इक्विपमेंट जो है उनमें भी बढ़ोतरी होगी और वहां से जो एडवांस टेक्नोलॉजी आएगी। ये मुझे लगता है कि हमारे हमारे डिफेंस सेक्टर को भी बहुत आगे बढ़ा सकता है। जी योगेश जी अगर बात जलवायु परिवर्तन की की जाए इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई है दोनों प्रधानमंत्रीियों के बीच। इस मुद्दे को आप कैसे देखते हैं? यहां पर भी जहां तक जलवायु की बात करते हैं तो बेसिकली जो हमारा जो शिप बिल्डिंग है इस समय पर भारत का ये इस समय पर मैं ये कह सकता हूं कि बहुत इसको बहुत आगे जाने की जरूरत है। बेशक इस समय पर भारत खुद अपने वॉशेस बना रहा है। सबमरीज बना रहा है।

24:02 एयरक्राफ्ट कैरियर भी बना बनने वाला है जो इंडजीनस है। तो ये सब भारत में हो रहा है। लेकिन कुछ प्रॉब्लम्स जो भारत के हैं अभी तक भी जो जो खास करके इंज में है एयरक्राफ्ट के लिए भी और समुद्री जहाजों के लिए भी। दूसरा जो जो समुद्र में जो कोपरेशन होगा वो दूसरा वो तो खैर ट्रेड रूट्स और सिक्योरिटी के तौर पर जैसे मैंने पहले जिक्र किया वहां पर भी होगा। तो ये कोऑपरेशन दोनों देशों के बीच में जी जाहिर तौर पे जाहिर तौर पे ध्रुव जी रक्षा रक्षा सौदे को लेकर सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच विचारों का आदानप्रदान हुआ है। लेकिन योगेश गुप्ता जी मैं आपसे जानना चाहता हूं जलवायु ऊर्जा का जो मुद्दा है जलवायु परिवर्तन का जो मुद्दा है वो भी एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है दोनों देशों के बीच।

24:48 हां देखिए क्लाइमेट चेंज और एनर्जी वगैरह के ऊपर तो है भारत ने बहुत काम किया है। यू नो रिन्यूएबल एनर्जी में कितनी कंपनीज है जो भारत में आगे आई है जिन्होंने सोलर एनर्जी पे काम किया है। आज की तारीख में देखिए हम दो पैसे ढाई पैसे पर यूनिट के दाम पर जो है अपनी सोलर एनर्जी बना रहे हैं। और कितनी कंपनीज भारत में जो है अब सोलर मॉड्यूल्स बना रही है। इसी तरह से विंड एनर्जी जो है उसके बारे में हमने बहुत तरक्की की है। तो हम चाहते हैं कि भाई जो भी हमने इस सब में प्रोग्रेस किया है और जो काम यूके ने किया है वो मिलकर जो है उसके बारे में हम बातचीत करें। किस तरह से हम कोपरेट कर सकते हैं। देखिए अमेरिका

25:35 का तो एक बड़ा नेगेटिव एटीट्यूड इस वक्त है राष्ट्रपति ट्रंप का इसके बारे में। वो तो क्लाइमेट चेंज को ही रिकग्नाइज नहीं करते। जी तो अमेरिका को तो हमें एक तरफ छोड़ना है लेकिन जो और मुल्क है जो बड़े मुल्क है जैसे यूके है या यूरोपियन यूनियन है या फिर और मुल्क है जैसे जापान वगरा है उनके साथ मिलकर ये हमारे लिए एक बहुत इंपॉर्टेंट एरिया है क्लाइमेट चेंज का और ग्रीन एनर्जी का जिसप हम साथ में मिलके काम करें किस तरह से हम नई टेक्नोलॉजीस जॉइंटली डेवलप कर सकते हैं उनको यूज कर सकते हैं उसके बाद न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी है उसके ऊपर जो है भारत में बहुत काम किया है। अब छोटे रिएक्टर्स की बात हो रही है कि छोटे-छोटे रिएक्टर्स जो है उनको इस्तेमाल करके जो है जो छोटे एरियाज है उनकी हम एनर्जी रिक्वायरमेंट हम मीट करें

26:23 तो वो उसके ऊपर भी जो है मिलके ब्रिटेन के साथ काम कर सकते हैं। तो जैसे कि अभी कटो जी ने कहा देखिए यह सब एरियाज ऐसे हैं टेक्नोलॉजी के एरियाज कि जहां भारत ने बहुत प्रोग्रेस की है और हम इसके ऊपर अब काफी एक बड़ा एमफेसिस देने जा रहे हैं आने वाले सालों में और जो भी अच्छे मुल्क है एडवांस मुल्क है जहां पर इस तरह काम हो रहा है उनके साथ मिलकर काम करने में नेचुरली हमारा इंटरेस्ट है और जिससे कि दोनों तरफ दोनों साइड्स को फायदा हो जी बिलकुल डॉक्टर डॉक्टर मनोज जी अगर बात यूएसएसी की मैं करूं तो भारत की स्थाई सरसता का समर्थन देने का भी ब्रिटेन ने एक तरह से समर्थन किया है। समर्थन देने की

27:09 बात कही है। इस प्रकार का भी दोनों देशों के बीच बातचीत में यह मुद्दा भी उभर कर आया है। इसे आप कैसे देखते हैं? है और भारत जिस प्रकार से टेक्नोलॉजी में नए अपने इकोनॉमिक इंटरप्राइजेस में जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है जिस प्रकार से भारत ग्लोबल साउथ की एक क्रेडिबल आवाज विश्वसनीय और भरोसे वाली आवाज बन चुका है और जिस प्रकार से आज भारत की स्वीकारिता अपोजिट पार्टीज के बीच है विश्व में और भारत ने अपनी शांति को अपने लोकतंत्र को क्रेडिबिलिटी के साथ बार-बार दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है। कोरोना काल में जिस प्रकार से भारत ने दुनिया को सहयोग दिया है वो चाहे डेवलप्ड कंट्रीज हो, चाहे

27:55 ग्लोबल साउथ हो, चाहे ईस्ट के हो, चाहे वेस्ट के हो, सबको समान रूप से दिया है। तो ये भारत की क्रेडिबिलिटी स्थापित करता है। यदि आज यूके अगर सपोर्ट करता है यून यूएससी में भारत की अस्थाई सदस्यता की तो मुझे लगता है इससे ब्रिटेन का ही कहीं ना कहीं कद बड़ा होता हुआ दिखाई पड़ता है। क्योंकि प्रधानमंत्री जी बार-बार कह चुके हैं कि आज जिस प्रकार का यूनाइटेड नेशंस है या यूनेस है आज वो क्रेडिबिलिटी लूज कर रहा है। क्यों? क्योंकि जो सबसे बड़ी आवाज है जो सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन है दुनिया का उसको जब वहां पर जगह नहीं दी जा रही है तो यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या ये सार्थक भूमिका निभा पा रहा है? उत्तर

28:43 मिलता है कि नहीं निभा पा रहा है। तो ऐसे में अभी भी आप देखें जो जिस प्रकार की अभी यूनिए में डिस्कशन हुआ सारे राष्ट्रों ने यहां तक कि चीन भी उसको सपोर्ट करता हुआ दिखाई देता है कहीं ना कहीं। तो ऐसे में अगर स्टारमबर साहब इसको दे रहे हैं तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन दो चीजें और जी बहुत छोटी है लेकिन वो हमको बार-बार प्रिक करती है और आज का भारत कोई इस तरह का अंदर से अपने अंदर कोई रखना नहीं चाहेगा। पहला ये कि यूके अपने यहां से टेररिस्ट जो भारत के खिलाफ होता है उस पर क्रेडिबल एक्शन। मैं बार-बार एक्शन नहीं क्रेडिबल एक्शन ले और जो हमारे यहां के इकोनॉमिक ऑफेंडर्स हैं अगर इकोनॉमिक सहयोग बढ़ाना है तो उनको

29:29 क्रेडिबिलिटी के साथ उन पर भी कार्यवाही करनी होगी। क्यों? क्योंकि जो आज रणनीति है जैसे फिनटेक में आप देखते हैं इसी प्रकार से तमामों और क्षेत्रों में देखते हैं आईटी सेक्टर में देखते हैं तो भारत बहुत आगे निकल चुका है कौन सोच सकता था आज से कुछ वर्ष पहले कि भारत रूस से सस्ता तेल लेकर के सस्ते में यह नाटो कंट्रीज को यूरोपियन यूनियन को सप्लाई करके उनके यहां एनर्जी सिक्योरिटी देगा तो निश्चित तौर पर जब उनको एनर्जी सिक्योरिटी दे सकता है वैक्सीन सिक्योरिटी दे सकता है, फूड सिक्योरिटी दे सकता है। तो भारत को यदि यूएएससी में परमानेंट सीट मिलती है तो मुझे लगता है इससे विश्व का कल्याण ही होगा।

30:14 जी जाहिर तौर पे भारत ब्रिटेन रिश्तों को एक नई ऊंचाइयों दे रहे हैं। नई मजबूती दे रहे हैं। दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आ रही है। आप तीनों ने संसद टीवी से बात की। बहुत-बहुत शुक्रिया। बहुत-बहुत धन्यवाद संसद टीवी से बात करने के लिए। तो आज इस कार्यक्रम में इतना ही। मुझे दीजिए आज्ञा। नमस्कार। [संगीत]

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