Mudda Aapka: सतत पर्यटन: विकसित भारत की नींव | 29 September, 2025

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संक्षिप्त सारांश

यह कार्यक्रम विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पर्यटन और सतत परिवर्तन, विकास और विरासत पर केंद्रित है। इसमें भारत के पर्यटन क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक एकता में भूमिका पर चर्चा की गई है। विशेषज्ञों ने पर्यटन क्षेत्र में वृद्धि, चुनौतियों और अवसरों पर अपने विचार व्यक्त किए, जिसमें बुनियादी ढांचे का विकास, सुरक्षा, स्वच्छता और कौशल विकास शामिल हैं।

  • भारत पर्यटन के माध्यम से आर्थिक समृद्धि और वैश्विक एकता को बढ़ावा दे रहा है।
  • पर्यटन क्षेत्र में सुधार के लिए बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और स्वच्छता पर ध्यान देना आवश्यक है।
  • भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति है।

परिचय: विश्व पर्यटन दिवस और भारत

कार्यक्रम की शुरुआत 27 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व पर्यटन दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए होती है। इस वर्ष की थीम "पर्यटन और सतत परिवर्तन" है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास और विरासत के एजेंडे को दर्शाती है। भारत पर्यटन के माध्यम से आर्थिक समृद्धि और वैश्विक एकता को बढ़ावा दे रहा है।

भारत में पर्यटन की वर्तमान स्थिति

भारत अपनी विरासत और धरोहरों के लिए विश्व भर में जाना जाता है। 2025 का विषय धरोहर और विरासत को संरक्षित करने और दीर्घकालिक रूप से बनाए रखने पर केंद्रित है। भारत में सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक धरोहरें हैं, जो पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हैं। "विरासत भी, विकास भी" का नारा इस बात पर जोर देता है कि विरासत का विकास पर्यटन के विकास को बढ़ावा देगा।

पर्यटन क्षेत्र में वृद्धि और चुनौतियाँ

भारत के पर्यटन क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, लेकिन 2020 के आंकड़े अभी तक प्राप्त नहीं किए जा सके हैं। घरेलू पर्यटन बढ़ रहा है, जिससे स्मारकों और अन्य स्थलों पर भीड़ बढ़ रही है। स्मारकों को साफ और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाए रखने की आवश्यकता है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसे और अधिक आकर्षण बनाने की जरूरत है।

आर्थिक और वैश्विक प्रभाव

भारतीय पर्यटन क्षेत्र का आर्थिक और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव है। भारत में पर्यटन की विविधता और सांस्कृतिक विरासत अद्वितीय है। सर्विस प्रोवाइडर, सुरक्षा और पहुंच में सुधार की आवश्यकता है। पर्यटन से भारत की जीडीपी को 10% तक बढ़ाने का लक्ष्य है, जिसके लिए पर्यटन सेवाओं को बेहतर बनाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता है। सफाई, सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता है।

राज्यों की भूमिका और चुनौतियाँ

राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी समस्याएं लगभग एक जैसी हैं। कुछ राज्यों में पर्यटन से आय का स्रोत बन सकता है। हर 100 किलोमीटर में विभिन्न आकर्षण हैं, जिनके लिए नए सर्किट बनाने और उचित सुविधाएं प्रदान करने की आवश्यकता है। प्रशिक्षित पर्यटन पेशेवरों और कौशल विकास प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

आर्थिक योगदान और सरकारी पहल

2025-26 के बजट में पर्यटन के लिए 2541.6 करोड़ का आवंटन किया गया है। पर्यटन क्षेत्र ने आर्थिक दृष्टि से और रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत की जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र का योगदान 5.2% है, और रोजगार में 13.34% का योगदान है। सरकार हेरिटेज सर्किट, हिमालयन सर्किट, ट्राइबल सर्किट, कोस्टल सर्किट और रामायण सर्किट जैसी योजनाएं चला रही है।

स्थानीय पर्यटन और भविष्य की योजनाएं

स्थानीय पर्यटन फल-फूल रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है। पर्यटन मंत्रालय निजी क्षेत्र को योजनाओं से समर्थन दे रहा है। स्वदेश दर्शन 2.0 और सासकी जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं, जो राज्य सरकारों को ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करती हैं। राज्य सरकारें सतत पर्यटन नीतियों को बढ़ावा दे रही हैं। 2022 की नीति में सतत और सुलभ पर्यटन पर जोर दिया गया है।

जीएसटी और होटल उद्योग

जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% करने से होटल उद्योग को राहत मिली है, लेकिन यह केवल ₹5000 से नीचे वालों के लिए है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए भारत सरकार को प्रचार करना चाहिए। शादियों और सम्मेलनों के बिना होटलों को बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसे और अधिक मैन-मेड स्मारक तैयार करने की आवश्यकता है।

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्थान

पिछले 7-8 वर्षों में पर्यटन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए कई पहल की गई हैं। कोरोना महामारी के दौरान स्पिरिचुअल टूरिज्म ने पर्यटन क्षेत्र को संभाला। डोमेस्टिक टूरिज्म और तीर्थ यात्राओं की प्रथा छोटे व्यवसायों को बनाए रखने में मदद करती है।

विश्व पर्यटन दिवस 2025 और भारत के अवसर

विश्व पर्यटन दिवस 2025 की थीम "पर्यटन और सतत परिवर्तन" है। भारत में सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरें हैं, जो पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हैं। कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन कार्यक्रम है। भारत अपनी विरासत को संभालने और विश्व के सामने प्रदर्शित करने में सक्षम है। जी20 में भारत ने विश्व के शक्तिशाली देशों को अपनी धरोहर दिखाई। भारत को अपने हेरिटेज टूरिज्म और सस्टेनेबिलिटी के प्रयासों का लाभ मिलेगा।

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Transcript

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0:00 [संगीत] नमस्कार स्वागत है आपका संसद टीवी पर। मैं हूं मनोज वर्मा और आप देख रहे हैं हमारा खास कार्यक्रम मुद्दा आपका। आज हम बात पर्यटन और सतत परिवर्तन की करेंगे। विकास और विरासत की की जाएगी। इस मुद्दे पर बात इसलिए क्योंकि दुनिया भर में 27 सितंबर का दिन विश्व पर्यटन दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व पर्यटन दिवस हर साल 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन की पहल पर मनाया जाता है। इस दिवस को पहली बार 1980 में मनाया गया था। 2025 की थीम पर्यटन और सतत परिवर्तन है।

0:46 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास और विरासत के एजेंडे को साकार करती है। यह मुद्दा उस भारत का है जो पर्यटन के जरिए ना केवल आर्थिक समृद्धि हासिल कर रहा है बल्कि वैश्विक एकता का संदेश भी दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों और सतत विकास के दृष्टिकोण ने भारत के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी है। भारत में पर्यटन एक प्रमुख आर्थिक क्षेत्र के रूप में उभर कर सामने आया है। भारत की जीडीपी, रोजगार और सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्थान में पर्यटन क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए मुद्दा आपका में आज हम बात विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर पर्यटन और सतत परिवर्तन की करेंगे। साथ ही विकास और विरासत की करेंगे। खास मेहमान हमारे साथ जुड़े हुए हैं। प्रोफेसर डॉ.

1:33 आलोक शर्मा जी हमारे साथ जुड़े हैं जो निदेशक हैं इंडियन इंस्टट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेज मैनेजमेंट जो भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है। आपका बहुत-बहुत स्वागत है संसद टीवी पर। आलोक जी साथ ही हम बात करेंगे विनोद ज्योतिषी जी से जो पूर्व सचिव हैं पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार के। विनोद जी आपका भी स्वागत है संसद टीवी पर। साथ ही हमारे साथ जुड़े हुए हैं राजीव मेहरा जी जो महासचिव हैं फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटिटी। आपका भी बहुत-बहुत स्वागत है राजीव जी संसद टीवी पर। शुरुआत विनोद जी मैं आपसे करूंगा क्योंकि मुद्दा 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस का है और जैसा आपने जानते हैं आप कि भारत की जो विकास और विरासत की यात्रा है,

2:19 जो पर्यटन और सतत परिवर्तन का मुद्दा है, इसको आप कैसे देखते हैं? अह देखिए अह भारतवर्ष अह अपने जो विरासत और धरोहरों के लिए पूरे विश्व भर में जाना जाता है और आज के जो वर्ल्ड टूरिज्म डे इस वर्ष के 2025 का जो विषय है वो विषय ही इस बात का है कि किस तरह से हम अपने धरोहर और विरासत को प्रिजर्व करें, कंजर्व करें और उसको इस प्रकार से सतत तरीके से उसको मेंटेन रखें दीर्घकालिक तरीके से ताकि हम जो उसका उपयोग यह वाली जो जनरेशन कर रही

3:05 है वो आगे भी आगे आने वाली जनरेशन भी उसी तरह से उसका उपभोग करती रहे औरकि भारतवर्ष में हमारा कल्चरल हेरिटेज चाहे वो रिलीजन हेरिटेज हो चाहे वो स्पिरिचुअल हेरिटेज हो चाहे नेचुरल हेरिटेज हो हम लोग हमारा चाहे इतिहास हो ये सारी जो हमारे जो टूरिज्म ऑफरिंग्स हैं ये विश्व भर में सबसे अधिक नोन है और इसी वजह से हम जो नारा लगाते हैं कि विरासत भी विकास भी और विरासत भी क्योंकि विरासत का विकास होगा तो पर्यटन का भी विकास होगा। विरासत की अगर सस्टेनेबल होगा उसको हम रखरखाव कर सकेंगे। उसको विकसित कर सकेंगे तो पर्यटन भी विकसित होगा क्योंकि पर्यटन के लिए हम इस

3:52 विरासत पर बहुत निर्भर करते हैं और यही इस वर्ष का जो विषय है बहुत ही सटीक विषय है और भारतवर्ष के लिए बहुत ज्यादा मैं समझता हूं कि ये रेलेवेंट है एप्लीकेबल है क्योंकि सबसे अधिक सस्टेनेबिलिटी की अगर आवश्यकता है किसी देश को तो वो है भारतवर्ष को और उस दिशा में हम लोग बहुत कुछ काम भी कर रहे हैं उस बारे में जो है फिर आगे इसके अलग-अलग पहलू हैं। जाहिर सी बात है जो पर्यटन की जब हम बात करते हैं, विकास और विरासत की बात करते हैं। भारत की जो आध्यात्मिक सांस्कृतिक चेतना है उसकी जब बात करते हैं तो उसके कई पहलू हैं उन पे हम चर्चा करेंगे। राजीव मेहरा जी लेकिन मैं आपसे जानना चाहूंगा कि भारत का जो पर्यटन क्षेत्र है वह अभूतपूर्व वृद्धि का साक्षी बना है। अगर 2021 की मैं बात करूं तो 15.27 लाख विदेशी पर्यटकों का आगमन

4:41 हुआ। जबकि 2024 में यह बढ़कर 99 52 लाख हो गया है। और अगर 2025 की बात की जाए अगस्त तक की तो 56 लाख का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। घरेलू पर्यटकों की बात की जाए तो 303.59 करोड़ तक की ये यात्राएं देश में उभर के सामने आई हैं। चिकित्सा पर्यटन की बात की जाए तो उसमें भी उछाल है। मेरा सवाल आपसे यह है कि पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है जो ना केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है बल्कि सांस्कृतिक आदान प्रदान और वैश्विक संपर्क का माध्यम भी बनता है। इस मुद्दे को आप कैसे देखते हैं आर्थिक दृष्टि से और सांस्कृतिक दृष्टि से? देखिए पहली बात तो जो फिगर्स आप दे रहे

5:26 हैं। इनमें हमारे पास बांग्लादेश और श्रीलंका से भी अराइवल्स हैं। टूरिस्ट नहीं आते। जी हकीकत में बात ये है कि जो 31 मार्च 2020 की फिगर एक्चुअल टू की जी वो अभी तक हम नहीं ला सकेशन से वो अभी बात करेंगे बाद में रीज़न ये है कि हमारे पास इतना कुछ दिखाने के लिए है और हमारे को कई जगह पर ओवर टूरिज्म भी हो रहा है क्योंकि हर एक जगह पे डोमेस्टिक टूरिज्म बहुत बढ़ता जा रहा है उसके वजह से भी चाहे आप मोन्यूमेंट्स देख लीजिए हमारे तो हमें मोनुमेंट्स को और भी क्लीन करना है, साफ करना है ताकि वो इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के बनते जाए।

6:13 कल्चर हमारे पास इतना कुछ है हमारे को दिखाने के लिए चाहे वो हमारे अपने देश के हो, चाहे वो फॉरेनर्स हो सबके लिए है। तो कुछ तो हमारे को और भी करना पड़ेगा। स्टचू ऑफ यूनिटी जैसी चीजें हमें और बनानी पड़ेगी। तीन चार पांच डिफरेंट पार्ट्स में बनानी पड़ेगी ताकि हम इस टूरिज्म को अगर बढ़ाना है हमने आगे और तो हमें जगह चाहिए दिखाने के लिए लोगों को और नईनई जगह देखनी है तो हमें इसके लिए बहुत काम करना पड़ेगा जैसे जूती साहब कह रहे हैं कि हमें बहुत सारा काम करना पड़ेगा कि हम ये चीजें डेवलप करें और हमारे पास जो विरासत है उसको हम बिल्कुल अच्छी तरह सस्टेन करें और उस उसको रखें ठीकठाक ताकि

7:01 लोग उसको भी देखें और उसको करें। जी बिल्कुल डॉक्टर आलोक शर्मा जी इस पहलू को मैं आपसे समझना चाहूंगा क्योंकि भारत के पर्यटन क्षेत्र ने अगर वैश्विक मंच पर प्रभाव की हम बात करते हैं तो उसका एक आर्थिक पहलू भी है। अह देश की अर्थव्यवस्था हमारी मजबूत है। तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और दूसरा पहलू इसका जो है वो वैश्विक प्रभाव का है। जो भारतीय पर्यटन क्षेत्र ने विदेशी जो पर्यटक हैं उनको प्रभावित किया है। आकर्षित किया है। इन दोनों पहलुओं को आप कैसे देखते हैं? सर अभी जैसे कि माननीय विनोद जी ने अभी रेफर किया कि हमारे पास जो टूरिज्म ऑफरिंग है जी उनमें जो विविधता है और सांस्कृतिक विरासत है उसका वो बेजोड़ है। वो कहीं पर इस लेवल पे हमें मिलती नहीं है। हमारे को चाहिए

7:48 सर्विस प्रोवाइडर सिक्योरिटी, एक्सेसबिलिटी, टूरिस्ट डेस्टिनेशन डेवलपमेंट प्रॉपर होना चाहिए। जिससे कि टूरिस्ट को अगर फैसिलिटी मिलेगी तो इनके नंबर्स और बढ़ेंगे। फिर जब नंबर्स बढ़ेंगे तो फिर हमें उस पर्टिकुलर जगह की कैरिंग कैपेसिटी और सस्टेनेबिलिटी देखनी पड़ेगी कि भ हम एक पर्टिकुलर रूट पर एक पर्टिकुलर टूरिस्ट प्लेस पर ओवर क्राउडिंग को अकोमोडेट कैसे करेंगे या फिर नहीं वो सस्टेनेबल समय के साथ उतनी ही उसकी वैल्यू बने रहे टूरिस्टिक जितनी कि एक शुरू में आकर्षण उसका बनता है। तो ये सारी चीजें बहुत मायने रखती है क्योंकि फॉरेन में फॉरेन के कंपैरिजंस में एक जो ग्राफ है हमारे अर्निंग्स का वो काफी महत्वपूर्ण है और अभी पोस्ट बजट सेशन में

8:34 माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी कहा कि हमको भारत की जीडीपी टूरिज्म के थ्रू 10 नंबर तक ले जानी है और ये बिल्कुल कोई ऐसा नहीं है कि ये डाटा ऐसे ही दे दिया गया है। ये काफी रिसर्च के बाद बताया गया है कि ये पहुंचे हैं हम कि अभी अगर हम पांच से छह के बीच में अगर जीडीपी में कहीं टूरिज्म क्षेत्र में तो यह 10 करेंगे तो मतलब 10 पे अगर इसको पहुंचाना है तो हमारी सारी टूरिज्म ऑफरिंग्स उनमें और सारी टूरिज्म से रिलेटेड जितनी भी सर्विज हैं उनको इन सबको बहुत रिफाइन करना पड़ेगा और एक नया अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म के जो बाजार है उसमें अपना एक विश्वास और बढ़ाना पड़ेगा। आकर्षण है लेकिन उनको रोकने के भी बहुत सारे ऐसे मुद्दे हैं। सफाई नहीं है हमारे यहां टूरिस्ट प्लेसेस पर। हमारे

9:19 यहां सिक्योरिटी की प्रॉब्लम है। एक्सेसबिलिटी, पार्किंग एरिया, फैसि पब्लिक फैसिलिटीज ये सारी चीजें सपोर्ट में टूरिस्ट को चाहिए। वो जहां जा रहा है वहां पे चार दिन बिता पाएगा क्या? प्रॉपर्ली जिसको जरूरत है उसके लेवल का उसके स्टैंडर्ड की फैसिलिटीज वहां है क्या? ये बहुत मायने रखती हैं। हमारे शहरों में प्रॉपर नंबर ऑफ पीपल्स को अकोमोडेट करने के लिए होटल्स भी सही स्टैंडर्ड के नहीं मिलते। कई ऐसी जगह हैं जहां पर टूरिज्म में अट्रैक्शन है पर अकोमोडेशन 3 घंटे दूर चलने के बाद मिलता है उनको प्रॉपर। इस तरह की काफी चीजें हैं जो अपना एक असर डाल रही हैं और ये अब जागरूकता आ रही है। इसमें काफी स्टडी भी हो रही है। टूरिज्म एजुकेशन में हम लोग प्रोफेशनल्स को भी उस तरह से ट्रेन कर रहे हैं जिससे कि वो आगे आने वाले चैलेंजेस को

10:07 जो आईआईटीएम के प्रोडक्ट्स हैं जिन्होंने टूरिज्म में डिग्री ली है पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं वो इन प्रोजेक्ट को जो जिन पे रिसर्च होनी चाहिए और फिर सॉल्यूशन निकालने चाहिए उनप वर्क कर रहे हैं और वो आगे निश्चित तौर पे एक पॉजिटिव इंपैक्ट डालेगा। जी आलोक जी मेरा सवाल आप ही से है क्योंकि आपने कुछ मुद्दे ऐसे उठाए जिसकी तरफ राजीव जी ने भी इशारा किया था कि बात सेफ्टी की है स्वच्छता की है होटल किस स्तर के हैं कैसे हैं इसका मुद्दा है सुरक्षा का मुद्दा है मैं आपसे जानना चाहता हूं जब हम बात पर्यटन की करते हैं वैश्विक मंच की करते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वैश्विक स्तर पर भारत के पर्यटन को अपने ढंग से बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया है। राज्यों की भूमिका को आप कैसे देखते हैं इस संदर्भ में? देखिए राज्यों की भूमिका जितने भी राज्यों

10:53 की भूमिका है हमारे यहां वह लगभग उनकी समस्याएं एक सी रही है। कुछ एक राज्यों को अगर अपन कंसीडर ना करें लाइक जैसे राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश का एरिया है। इसमें हम लोग देखते हैं कि कई शहर ऐसे थे जिसमें हर आदमी टूरिज्म से एक अर्निंग का सोर्स बन सकता है। वो इस बात को जानता है, समझता है। उसके हिसाब से टूरिस्ट के साथ बिहेवियर करता है और कम्युनिकेट करता है और उस पे डिपेंडेंट अपनी सर्विसेज या बिनेस पैदा करता है। लेकिन हमारे यहां हर 100 किलोमीटर में टूरिस्ट टूरिज्म से रिलेटेड ऑफरिंग्स, क्वज़ंस, वाइल्ड लाइफ इस तरह के काफी ऐसे अट्रैक्शंस हैं जिनको कि हमको टूरिस्ट को अगर ला रहे हैं तो

11:38 प्रॉपर नए सर्किट्स बनाकर उनके टाइम टेबल के हिसाब से उनको प्रॉपर सर्विसेज या फैसिलिटीज प्रोवाइड करते हुए होम स्टे टाइप की एक्सरसाइजज़ करने के बाद उनको अकोमोडेशन अकोमोडेशन प्रोवाइड करते हुए इनके के एक सुरक्षित सर्किट्स बनाने हैं जिससे कि उसको वो फुल्ली अपने एक अच्छे एक्सपीरियंस को लेके यहां से जा पाए और फिर तभी और भी टूरिस्ट आएंगे। ये स्टेटस है और स्टेट्स की लगभग एक ही समस्याएं हैं मनोज जी मैं ये कहना चाह रहा था और उनको चाहिए सबसे पहले ट्रेंड एंड प्रोफेशनल्स टूरिज्म प्रोफेशनल्स चाहिए और टूरिज्म सर्विज को प्रोवाइड करने वाली ट्रेन जो स्किल्स है वो उनके लिए स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग्स चाहिए। ये गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के डायरेक्शन में आईआईटीएम भी

12:23 अपनी जगह कर रहा है। लेकिन तब भी यूथ में जिन लोगों को करना चाहिए उसमें उनमें अभी उस लेवल का इंटरेस्ट नहीं है। हमें एक ह्यूज नंबर चाहिए मैन पावर का ह्यूमन रिसोर्सेज का जो टूरिज्म में सर्विज प्रोवाइड कर पाए और इस पे काम जारी है। स्लो है थोड़ा। बिलकुल जाहिर सी बात है कि यूनियन बजट में 2025 26 का जो यूनियन बजट था उसमें पर्यटन के लिए 2541.6 करोड़ का आवंटन इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास को मजबूत करने के लिए किया गया था। केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया था। विनोद जी लेकिन मैं आपसे ये समझना चाहता हूं कि अगर देखा जाए तो भारत का जो पर्यटन क्षेत्र है उसने आर्थिक दृष्टि से और रोजगार की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया है पिछले 7 आठ वर्षों में।

13:10 अगर जैसा अभी आलोक जी कह रहे थे जीडीपी की बात की जाए तो भारत की जीडीपी में इस समय पर्यटन क्षेत्र का योगदान 5.2% का है। अगर रोजगार की बात मैं करूं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से तो 13.34% का योगदान है। आप इस मुद्दे को कैसे देखते हैं? देखिए मैं मैं थोड़ा सा एक पॉजिटिव नोट पे और ऑप्टिमिस्टिक नोट पे अपनी बात कहना चाहूंगा। जी अतुल जी ने कई सारी बातें कही। मैंकि मंत्रालय में रहा हूं। कई सारे कार्यक्रमों को चलाया है। तो मेरा ये मानना है कि अभी इन क्षेत्रों में सभी में बहुत बहुत तेजी से काम हो रहा है। अभी जैसे सर्किट्स की बात करी आज हमारे हेरिटेज सर्किट है, हिमालयन सर्किट है, ट्राइबल सर्किट है, कोस्टल है, रामायण

13:57 सर्किट ये सब व्यवस्थाएं हो चुकी हैं। जहां तक आपने कहा कि आर्थिक दृष्टि से किस तरह से आप देखिए कि जब हमारे यहां इनबाउंड टूरिज्म होता है तो आप देखिए जो फॉरेन एक्सचेंज अर्निंग्स आती है वो एक्सपोर्ट की तरह है। आज अगर भारत को विदेशी मुद्रा चाहिए तो टूरिज्म पर्यटन से अच्छा कोई दूसरा सोर्स नहीं है। जिसमें आपको अपनी तरफ से कोई इन्वेस्टमेंट विनियोजन नहीं करना पड़ता लेकिन आपके पास विदेशी मुद्रा आती है और इस दिशा में भले ही कुछ सालों में पहले कोविड की वजह से अब थोड़ा जिओपॉलिटिकल ऑर्डर थोड़ा सा जो है चेंज हो रहा है उसकी वजह से इनबाउंड टूरिज्म में इतनी शार्प वृद्धि नहीं हो रही जितनी कि डोमेस्टिक टूरिज्म में हो रही है। पर आप देखिए आपने शुरू में आंकड़े बताए

14:43 और ये बहुत गर्व की बात है हम लोगों के लिए और जो माननीय प्रधानमंत्री जी बार-बार आहान करते हैं इस बात का कि पहले अपना देश को देखो तो वह उसके परिणाम सामने नजर आ रहे हैं। आज देखिए 303 करोड़ आपने खुद बताया ये आंकड़ा अगस्त हुई है। अभी चार महीने जो यहां के सीजन कहलाते हैं वो अभी रहते हैं और पिछले वर्ष ये आंकड़ा था 295 करोड़ का। जी आप देखिए चार महीने रहते हुए इसका मतलब यह हुआ कि जो हमारा जो स्थानीय पर्यटन है डोमेस्टिक टूरिज्म है यह जिस तरह से फल फूल रहा है जिस तरह से ये आगे बढ़ रहा है इसके अपने जो आर्थिक फायदे हैं वो अलग है इकॉनमी एक एक्शन में आ रही है जितनी ज्यादा टूरिज्म की व्यवज की विजिट्स होंगी चाहे वो विदेशी घूमे चाहे वो जो है अपना

15:30 देश का व्यक्ति घूमे उससे जो आर्थिक जो इंप्रूवमेंट होता है वो सबके लिए है औरकि हमारी हमारी अर्थव्यवस्था में जो पर्यटन है वो एमएसएम जो छोटे-छोटे काम करने वाले लोग हैं उनकी ज्यादा बहुत आयत है। लगभग 80% जो है वो एमएसएमस हैं। तो उनको जब भी डोमेस्टिक टूरिस्ट भी जब ज्यादा आता है तो उससे फायदा होता है। तो मैं कहना चाहूंगा कि प्राइवेट सेक्टर को मतलब बेसिकली फैसिलिटेट करना पॉलिसीज से और योजनाओं से ये भारत सरकार का मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म का काम है। अभी हाल ही में देखिए बड़े अच्छे प्रोजेक्ट्स निकाले हैं। स्वदेश दर्शन तो 2014 से चल रहा है। अब स्वदेश दर्शन 2.0 आया है चैलेंज बेस मॉडल पे और अब एक और सासकी करके आया। आपने राज्य सरकारों की बात करी।

16:19 पर्यटन मंत्रालय और भारत सरकार ने ये जो योजना बनाई है सासकी वाली इसका बेसिकली आदेश वो उद्देश्य ये है कि हम किस तरह से राज्य सरकारों को इंटरेस्ट फ्री लोन दें और ये 50 साल में रिटर्न होगा। तो उसकी परफॉर्मेंस भी बड़ी अच्छी रही है और पिछले दिनों में करीब 40 प्रोजेक्ट जो है वो 23 राज्यों को दिए गए हैं। तो यह इसके दीर्घकालीन जो है वो इसका असर होगा और राज्य सरकारों का जहां तक सवाल है मैं आपको बताऊं कि जितनी सस्टेनेबल टूरिज्म की फ्रेंडली पॉलिसीज भी राज्य सरकारें आप यूपी की देख लीजिए उत्तराखंड की देखिए आप देखेंगे कि उसमें मेन कोर ये है कि विकास हो ग्रोथ हो लेकिन साथ में सस्टेनेबिलिटी के साथ हो

17:04 जी तो जो भारतवर्ष में जो एक इनिशियल पॉलिसी भी 2022 की ड्राफ्ट बनी थी उसमें यह था कि भारत का पर्यटन बढ़ना चाहिए। लेकिन साथ में सस्टेनेबल टूरिज्म और रिससिबल टूरिज्म के साथ और मैं समझता हूं इस दिशा में हम लोग काफी आगे बढ़ रहे हैं। कुछ स्थानों पे तो ये स्थिति आ गई है कि ओवर टूरिज्म से हम लोग जो है डील कर रहे हैं। और जहां ओवर टूरिज्म आता है वहां सस्टेनेबिलिटी का रेलेवेंस उसकी उपयोगिता और ज्यादा बढ़ जाती है। तो मैं समझता हूं कि हम लोग हर दिशा में ग्रोथ भी कर रहे हैं हर क्षेत्र में। साथ में हम सस्टेनेबिलिटी का भी ध्यान रखें। जी बिल्कुल और यही वजह है कि सतत परिवर्तन के साथ ही विकसित भारत की नीव भारत रख रहा है अपने पर्यटन क्षेत्र के दृष्टि से।

17:50 राजीव जी मैं आपसे समझना चाहूंगा इस मुद्दे को क्योंकि अगर हम बात होटल इंडस्ट्री की करते हैं जब पर्यटन की बात करते हैं। जाहिर तौर पे जीएसटी में एक बड़ा बदलाव करके सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को होटल इंडस्ट्री क्षेत्र को भी एक बहुत बड़ी राहत देने का काम किया है। यात्रियों को बहुत बड़ी राहत देने का काम किया है। इस मुद्दे को आप कैसे देखते हैं? जीएसटी दर जो है वह 12% से घटाकर 5% कर दी गई है। आप कैसे देखते हैं इस मुद्दे को? देखिए पहली बात तो ये है कि ये अच्छा स्टेप था गवर्नमेंट का। मगर ₹5000 से नीचे वालों को इफेक्ट हुआ है। यह वहां पर 12 से 5% पे आया है। इस ऊपर तो 18% है। फूड पे भी 18% है। टूर ऑपरेटर्स में भी 5% है।

18:36 इसमें कोई चेंज नहीं है। बस सिर्फ एक ये चेंज आने से क्या हुआ है कि कुछ तो फर्क पड़ेगा। जो जो हमारे टूरिस्ट मिडिल कैटेगरी के हैं उनको फर्क पड़ेगा इन होटल्स में जाने के लिए वहां ठहरने के लिए बट इंटरनेशनल टूरिस्ट जो आता है उसमें भी है काफी लोग बट वो लोग किस लिए है वो भी हमने बात चर्चा नहीं करी है भारत सरकार की बाहर कोई पब्लिसिटी नहीं है इस टाइम जब तक हम लोग पब्लिसिटी नहीं करेंगे बाहर जी तो हिंदुस्तानी नहीं आएगा लोग देखने के लिए। तो हमें वह काम करने हैं पहले तो और जैसे आपने कहा कि जब फॉरेन टूरिस्ट आएगा टूरिज्म बढ़ेगा तो

19:23 फॉरेन एक्सचेंज तो बढ़ेगी ही बढ़ेगी। एंप्लॉयमेंट इतनी बढ़ जाएगी कि हर एक जो स्टेट्स है हर एक जगह पे बढ़ेगी। इनडायरेक्ट और डायरेक्ट एंप्लॉयमेंट इतनी बढ़ जाएगी कि आप बता नहीं सकता हूं मैं आपको। बट उसके लिए हमें पूरा का पूरा काम करना है। हमने होटल के रेट भी कम कर दिए। चलिए 7% 12 से पांच 7% के करीब कम हो गए बिलो ₹7500 मतलब टूरिस्ट लेके तो आना है। जी अभी पोजीशन ये है कि अगर शादियां और कॉन्फ्रेंसेस नहीं हो और डोमेस्टिक टूरिज्म थोड़ा स्लो हो जाए या बाहर जाना शुरू हो जाए आउट ऑफ इंडिया तो होटल्स को सस्टेन करना ही मुश्किल हो

20:09 जाएगा। तो हमें सारा का सारा चीजें करनी है। पब्लिसिटी बहुत करनी है इंडिया के लिए। चाहे फॉरेन एक्सचेंज आए और एम्प्लॉयमेंट बढ़े और यहां पर अलग क्षेत्र सर्किट्स क्षेत्र मैन मेड मोनुमेंट्स जैसे स्टच्यू ऑफ यूनिटी है। ऐसे और चार पांच हमें तैयार करने पड़ेंगे। और स्टचू ऑफ यूनिटी एक ऐसा सक्सेस है भारत सरकार और गुजरात सरकार के लिए जो बाकी जगह भी हो सकता है। ह्यूज सक्सेस ये हुआ है। जी जी बिल्कुल इसीलिए हम बात विकास और विरासत की कर रहे हैं और जब बात विकास और विरासत की की जाती है तो देश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। वो चाहे राज्य सरकारें हो या पर्यटन

20:56 इंडस्ट्री से जुड़े जो भी लोग हैं जो भी इससे जुड़े हुए उद्यम हैं उन सबको योगदान अपना देना होगा। लेकिन आलोक जी मैं आपसे एक चीज समझना चाहता हूं। पिछले 7 आठ वर्षों में हमने देखा कि पर्यटन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए सरकार ने कई नई पहल की हैं। इस पहलू को आप कैसे देखते हैं कि भारत की जो सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत है वो कितनी बड़ी शक्ति है पर्यटन की दृष्टि से? माननीय मनोज जी आपने बहुत अच्छा प्रश्न किया है और मैं इसमें थोड़ा सा कोरोना टाइपिंग का रेफरेंस लेना चाहूंगा। एक बहुत बड़ा चैलेंज टूरिज्म बिजनेस और टूरिज्म सेक्टर में आया था। फ्लाइट्स बंद थी और उस समय मेरी एक कॉन्फ्रेंस में ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में किसी से बात हुई

21:42 बाहर तो उन्होंने खुद ये मेंशन किया कि हमारा जो भारतवर्ष है उसमें तीर्थटन स्पिरिचुअल टूरिज्म और जो डोमेस्टिक टूरिज्म है वो इतना पावरफुल है कि अगर इस तरह के जब संकट आते हैं विश्व स्तर पर तो हमारा डोमेस्टिक टूरिज्म और स्पिरिचुअल टूर टूरिज्म हमारे भारत के अपने टूरिज्म के जो इको जो कहना चाहिए इकोसिस्टम है उसको संभाल लेता है एक लेवल तक। तो ये एक बहुत बड़ी बात है कि हमारा जो डोमेस्टिक टूरिज्म और जो हमारा एक ट्रेडिशनल यात्राओं का एक प्रथा तीर्थ यात्राओं की जो प्रथा है स्पिरिचुअल टूरिज्म की जो प्रथा है वो इन सारी वो इतना बिजनेस दे देते हैं कि एक छोटे बिजनेस वाले जो इस

22:27 सेक्टर से जुड़े हुए हैं वो अपने आप को सस्टेन करके एक बुरा वक्त आगे निकाल सकते हैं। जी बिल्कुल विनोद जी आखिरी सवाल मेरा आपसे है कि जब हम 2025 में बात कर रहे हैं और जिस तरह का आज विश्व पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है जो थीम है इसका आप उसे कैसे देखते हैं खासतौर से तब जब भारत के लिए एक अवसर के रूप में इस अवसर को देखा जा रहा है कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर और सतत पर्यटन की यात्रा को विश्व में प्रदर्शित करें जिस मुद्दे को राजीव जी ने उठाया आप कैसे देखते हैं इस मुद्दे को देखिए जो विश्व पर्यटन दिवस 2025 का जो जो थीम है आपने बताया टूरिज्म एंड सस्टेनेबल

23:12 ट्रांसफॉर्मेशन तो देश में हमारे देश में जो कल्चरल और रिलीजियस और नेचुरल हेरिटेज है मैंने आपको शुरू में भी बोला अगर आप एक टीटीसीआई टीटीआई इंडेक्स हो गया है जो वर्ल्ड इकोनमिक फोरम में रिलीज की जाती है उसमें हमारे कल कल्चरल हेरिटेज और नेचुरल हेरिटेज को सर्वोपरि सबसे अधिक नंबर मिलते हैं। और इसी वजह से भारत की श्रेणी अब 39 रैंक पे पहुंच गई है 136 नेशंस में से। तो मैं समझता हूं कि आज भारतवर्ष अपने जो विरासतें हैं आपने स्पिरिचुअल टूरिज्म का कहा। अभी देखिए कुंभ मेला जो हुआ वो अपने आप में विश्व का मैं समझता हूं आई वुड कॉल इट एस द ग्रेटेस्ट शो ऑन अर्थ। जी बिल्कुल। इससे बड़ा टूरिज्म इवेंट कह

24:00 लीजिए जो रिलीजियस टूरिज्म इवेंट है वो नहीं हो सकता और उससे जो भारत को जिस तरह का एक फिलिप मिला है एक जिसकी जिसका एक इमेज बनी है कि इतने बड़े पैमाने पर भी जहां करोड़ों लोग आ रहे हैं कुछ दिनों के स्पैन में और इतने अच्छे तरह से उसको जो है लोगों ने उसको किया ये अपने आप में इवेंट मैनेजमेंट का भी एक बहुत बड़ा उदाहरण है। तो मैं समझता हूं कि अगर हम इतने बड़े हेरिटेज के इवेंट को सस्टेनेबल तरीके से अगर कर सके तो आज भारत इस बात के लिए तैयार है कि हम किसी भी तरह से कोई कल्चरल हेरिटेज की कोई बात हो नेचुरल हेरिटेज को ना केवल संभालने में अब जो है जो है वो सक्षम है बल्कि उसको साथ में शोकेस विश्व के सामने जी20 में देखिए आप

24:45 ये 50 60 डेस्टिनेशन हमने विश्व के भी सबसे जो इकोनमिकली जो पावरफुल नेशंस है उनको हमने 60 युगों का जो है दर्शन कराया और बताया कि देखिए यह है हमारी धरोहर और उसका जो इंपैक्ट है वो चाहे म में हो चाहे वो टूरिस्ट के और ज्यादा आने का हो जैसे ही थोड़ा जो जिओपॉलिटिकल ऑर्डर थोड़ा सा इंप्रूव होता है मैं समझता हूं कि भारतवर्ष को अपने हेरिटेज टूरिज्म की और जो सस्टेनेबिलिटी की तरफ जो प्रयास है इसका उसको बहुत लाभ मिलेगा और बहुत भारी संख्या में लोग भारत में आना शुरू करेंगे। जी बिल्कुल बात चाहे कुंभ की हो या अयोध्या की हो भारत ने दुनिया भर में अपने पर्यटन की जो आध्यात्मिक सांस्कृतिक विरासत है उसकी छाप छोड़ी है। विश्व पर्यटन दिवस 2025 भारत के

25:33 लिए एक मंच है जहां वह अपनी सांस्कृतिक धरोहर और आर्थिक शक्ति को विश्व के सामने प्रदर्शित कर रहा है। राजीव जी आलोक जी विनोद जी आपने संसद टीवी से बात की। बहुत-बहुत शुक्रिया बहुत-बहुत धन्यवाद हमसे बात करने के लिए। तो आज इस कार्यक्रम में इतना ही मुझे दीजिए आज्ञा नमस्कार [संगीत] संसद टीवी के और भी प्रोग्राम्स देखने के लिए सब्सक्राइब करें हमारा YouTube चैनल और हां इन्हें लाइक और शेयर करना ना भूलें।

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