Mudda Aapka: VB-जी राम जी विधेयक | VB–G RAM G Bill, 2025 | 17 December, 2025

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो विकसित भारत जी-राम जी विधेयक 2025 पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देना है। विधेयक का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास करना, गरीबी को कम करना और आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना है। इस विधेयक में मनरेगा योजना में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाना, कृषि और ग्रामीण विकास के बीच संतुलन स्थापित करना, और महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और प्राथमिकता प्रदान करना शामिल है।

  • ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित
  • रोजगार गारंटी में वृद्धि
  • पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

परिचय

संसद टीवी पर मनोज वर्मा द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम में विकसित भारत जी-राम जी विधेयक पर चर्चा की गई। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में इस विधेयक को पेश किया, जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी देना है। सरकार का लक्ष्य केवल गरीब कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों का समग्र और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है, जिससे आत्मनिर्भर और विकसित गांवों की परिकल्पना को साकार किया जा सके।

विधेयक की आवश्यकता और उद्देश्य

जनार्दन सिंह सिगरीवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए संकल्पित है। चूंकि भारत एक गांव प्रधान देश है, इसलिए गांवों का विकास आवश्यक है। विकसित भारत जी-राम जी विधेयक, मनरेगा का उन्नत रूप है, जिसमें 100 दिनों की रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य गरीबी मुक्त और रोजगार युक्त गांव बनाना है, जिसके लिए सरकार ऑनलाइन भुगतान और समय पर काम न मिलने पर मुआवजे जैसे प्रावधानों के माध्यम से गांवों को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

ग्रामीण विकास और रोजगार पर दृष्टिकोण

डॉ. मुकेश महेश कौशिक ने कहा कि भारत की 66% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसलिए ग्रामीण विकास के बिना विकसित भारत का लक्ष्य अधूरा है। उन्होंने महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने मनरेगा योजना के इतिहास और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना और आधारिक संरचना का निर्माण करना शामिल है। उन्होंने बताया कि कैसे सरकार ने इस योजना के लिए आवंटन बढ़ाया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने में मदद मिली है।

विधेयक पर सवाल और सरकार का रुख

जनार्दन सिंह सिगरीवाल ने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार महात्मा गांधी का सम्मान करती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का भी विकास सुनिश्चित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य गांवों में बेरोजगारी को कम करना, रोजगार को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करना है।

मनरेगा से बेहतर जी-राम जी विधेयक

डॉ. महेश कौशिक ने स्पष्ट किया कि जी-राम जी विधेयक में महात्मा गांधी का नाम हटाया नहीं गया है, बल्कि यह "विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण" का संक्षिप्त रूप है। उन्होंने बताया कि यह विधेयक मनरेगा से बेहतर इसलिए है क्योंकि इसमें पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार को कम करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली (ईएफएमएस) के माध्यम से 100% भुगतान सुनिश्चित करने और संसाधनों के आवंटन में वृद्धि करने जैसे उपायों का उल्लेख किया। उन्होंने कार्य दिवसों की संख्या में वृद्धि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

कृषि और ग्रामीण मजदूरी में संतुलन

जनार्दन सिंह सिगरीवाल ने कहा कि यह विधेयक कृषि और ग्रामीण मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित करने पर जोर देता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की उपज बढ़ाने के लिए काम कर रही है और इस विधेयक के माध्यम से अकुशल युवाओं को रोजगार देने की गारंटी दे रही है। उन्होंने कहा कि कार्य दिवसों में वृद्धि से कृषि क्षेत्र में भी काम करने वाले बेरोजगार युवाओं को लाभ होगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।

अतिरिक्त सुरक्षा और प्राथमिकता

जनार्दन सिंह सिगरीवाल ने बताया कि इस विधेयक में महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और अनुसूचित जाति/जनजाति वर्गों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और प्राथमिकता का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह योजना गांव के हर बेरोजगार व्यक्ति को रोजगार की गारंटी देती है, जिससे घर, गांव, पंचायत, जिला, राज्य और अंततः देश का विकास होगा। उन्होंने विपक्ष से इस योजना को व्यापक दृष्टिकोण से देखने और समर्थन करने का आग्रह किया।

राज्यों की आर्थिक जिम्मेदारी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ

डॉ. महेश कौशिक ने कहा कि केंद्र सरकार इस योजना के लिए पर्याप्त धन आवंटित करेगी और राज्यों पर पूरी आर्थिक जिम्मेदारी नहीं डालेगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण आधारिक संरचना का संपूर्ण विकास किया जाएगा, जिससे किसानों और श्रमिकों को लाभ होगा। उन्होंने जन मनरेगा ऐप और नागरिक निगरानी जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया, जिनसे पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिक परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि विकसित भारत जी-राम जी विधेयक आत्मनिर्भर और विकसित गांव की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Transcript

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0:02 [संगीत] नमस्कार स्वागत है आपका संसद टीवी पर। मैं हूं मनोज वर्मा और आप देख रहे हैं हमारा खास कार्यक्रम मुद्दा आपका। आज हम बात करेंगे विकसित भारत जी राम जी विधेयक की यानी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण की। इस मुद्दे पर बात इसलिए क्योंकि केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने लोकसभा में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण विधेयक 2025 पेश कर दिया। इस विधेयक के तहत हर ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों की मजदूरी यानी

0:49 रोजगार की वैधानिक गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। विधेयक को प्रस्तुत करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का संकल्प केवल गरीब कल्याण तक सीमित नहीं है बल्कि गांव का समग्र और संतुलित विकास सुनिश्चित करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक आत्मनिर्भर और विकसित गांव की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसलिए मुद्दा आपका में आज हम बात विकसित भारत जी राम जी विधेयक की करेंगे। इस विधेयक के प्रावधानों पर बात करेंगे। चर्चा करने के लिए दो खास मेहमान मेरे साथ जुड़े हुए हैं। सांसद जनार्दन सिंह सिगरीवाल जी हमारे साथ स्टूडियो में हैं। जनार्दन जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है संसद टीवी पर। साथ ही हम बात करेंगे डॉ. मुकेश महेश

1:36 कौशिक जी से जो दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ग्लोबल स्टडीज में उप निदेशक हैं। महेश जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है संसद टीवी पर। इस मुद्दे पर हम बात करें जो जी राम जी विधेयक है इसके प्रावधानों पर बात करें। आइए उससे पहले सुनते हैं शिवराज सिंह चौहान जी ने संसद में क्या कहा। महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं। और माननीय अध्यक्ष जी महात्मा गांधी जी का पंडित दीनदयाल जी का यह संकल्प था कि जो सबसे पीछे हैं जो सबसे नीचे हैं उनका कल्याण सबसे पहले किया जाए

2:22 और हम केवल महात्मा गांधी जी को मानते नहीं है। हम महात्मा गांधी जी की भी मानते हैं और उन्हीं के विचारों पर आधारित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों पर आधारित गरीब कल्याण की कई योजनाएं यह सरकार मोदी जी के नेतृत्व में चला रही है और जहां तक मनरेगा का सवाल है माननीय अध्यक्ष जी कांग्रेस तो यूपीए तो केवल मनरेगा लेके आई थी लेकिन ₹13220 करोड़ यूपीए की सरकार ने मनरेगा पर खर्च किए थे। हमने 853810 करोड़ गरीबों के कल्याण के लिए खर्च किए और इस योजना को और मजबूत करने की कोशिश

3:09 की। और आज भी माननीय अध्यक्ष महोदय, तकलीफ क्या है? 100 दिन की गारंटी के बजाय हम 125 दिन की गारंटी दे रहे हैं काम। 125 दिन की गारंटी देने का काम कर रहे हैं और केवल यह गारंटी खोरी नहीं है माननीय अध्यक्ष महोदय उसके लिए 1 लाख 51000 282 करोड़ से ज्यादा रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है। माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके पहले कई रोजगार की योजना आई। एक योजना का नाम था जवाहर रोजगार योजना। बाद में कांग्रेस ने ही जवाहर रोजगार

3:55 योजना का नाम बदल दिया। तो क्या पंडित जवाहरलाल नेहरू जी का अपमान हो गया? माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारा संकल्प है गरीब का कल्याण और इसमें उसी संकल्प को पूरा करने का हमने प्रयत्न किया है। ना केवल गरीब का कल्याण बल्कि उसके साथ गांव का संपूर्ण विकास जो महात्मा गांधी कहते थे। एक स्वयंपूर्ण गांव, एक स्वावलंबी गांव, एक विकसित गांव का निर्माण इसका प्रावधान इसमें किया गया है। ये पूरा बिल महात्मा गांधी जी की भावनाओं के अनुरूप है। रामराज की स्थापना के लिए है। जाहिर सी बात है विकसित भारत जी राम जी

4:42 विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी? और इस विधेयक के जो प्रावधान है वह किस तरह जो गरीब है उसका कल्याण करेंगे? जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था है उसको गति देने का काम करेंगे। क्या इसके पीछे उद्देश्य है सरकार का और क्यों इसको लेकर कुछ सवाल उठे वो भी हम समझने की कोशिश करेंगे। शुरुआत जनार्दन जी मैं आपसे करूंगा। विकसित भारत जी राम जी विधेयक लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इससे किस तरह का फायदा होगा? क्या प्रावधान है इस विधेयक के? देखिए मैं मैं आपको बताऊं कि यह हमारी नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में चल रही सरकार विकसित भारत और विकसित गांव की परिकल्पना के साथ चल रही है। माननीय प्रधानमंत्री जी का पूरा सोच है, संकल्प है कि हमें 2047 तक भारत

5:28 को विकसित भारत बनाएंगे। लेकिन हम गांव प्रधान देश हैं। हम गांव में हमारी आत्मा बस्ती है इस भारत की। हम गांव को जब तक विकसित नहीं करेंगे तब तक अपना देश विकसित संभव होना नहीं है। जी तो इसके लिए हमने इस प्रावधान को हमने लाया है कि विकसित भारत जी राम जी की यह एक हमने संकल्प लेकर के विधेयक लाया है जो पहले जिसको हम मनरेगा कहते थे। आज उसको विकसित भारत जी राम जी विधेयक 2025 लेकर के और इसके माध्यम से हमने देखिए एक तो पहले उस पहले मनरेगा में 100 दिन की गारंटी थी उसको हमने बढ़ा के 125 दिन गारंटी करने का काम किया। आज जो भी अकुशल जो हमारे गांव में रहने वाले युवा हैं

6:14 चाहे जो व्यक्ति हैं उनको 125 दिन की गारंटी होगी और इसके कई एक प्रावधान भी हमने बदला है। उस प्रावधान पर विस्तार से हम चर्चा करें कि कैसे ऑनलाइन उनको पेमेंट होगा। अगर 15 दिन अगर काम पर अगर वह उनको ना काम नहीं मिला तो सरकार को उनको पेमेंट करना पड़ेगा। यानी पूरे गांव को विकसित करना। हम गरीबी मुक्त गांव और फिर विकसित भारत के लिए हम संकल्पित हैं। गरीबी मुक्त अगर होगा गांव जी तो फिर रोजगार युक्त होगा। रोजगार युक्त होगा तभी गरीबी मुक्त होगा। तो इस काम को पूरा जोड़ करके हमने विकसित भारत जी राम जी विधेयक आज लोकसभा में जिस पर चर्चा चल रही है जिसको आपने पहले हमारे देश के माननीय कृषि मंत्री जी ने जिसको पेश करने

7:02 का काम किया है और बड़ी विस्तार से तो नहीं विस्तार से वह पूरे सदन में चर्चा होने के बाद उसकी चर्चा करेंगे। लेकिन उस पर उन्होंने चर्चाएं शुरू की है और देश के हमारे लोकसभा के अध्यक्ष जी ने भी कहा है कि अगर पूरे सदन में 300 की सदस्य संख्या अगर बरकरार रहेगी तो हम 10 घंटे तक चर्चा कराएंगे। उन्होंने विपक्ष की तरफ भी इशारा करते हुए कहा कि आप अपने सदस्यों को भी कहो कि सदन में उपस्थित रहें। वह सदस्य रह नहीं पाते हैं। सभी सदस्य रहें। चर्चा में एक हमें लगता है कि एक अच्छी चर्चा करें और चर्चा के बाद अगर उनको कुछ लगता है तो उसके जवाब सरकार देगी और सरकार के जवाब उनको सुने तो हमें लगता है कि उनको काफी संतुष्टि हो जाएगी कि हम भारत को विकसित करना चाहते हैं। गांव को

7:47 गरीबी मुक्त करना चाहते हैं। रोजगार युक्त करना चाहते हैं और विकसित भारत जब हम परिकल्पना है तो उसके पहले हम गांव को विकसित गांव बनाने के संदर्भ में हम आगे कदम उठाए हैं कि हम जी राम जी विकसित भारत इस काम को हम लेकर के आगे चलने का काम करेंगे। जी अह जर सी बात है मुद्दा गरीबी का है और देश के किसान का है। जो देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था है उसका मुद्दा है। खेतीहारी मजदूरों का मुद्दा है। गरीबी खासतौर से सरकार के मेन एजेंडे में है। इस विधेयक के जरिए सरकार चाहती है 125 दिन तक सबको ऐसे लोगों को जिनके पास कोई काम नहीं है उनको भी काम मिले। एक बड़ा बदलाव है। अह डॉ. महेश महेश कौशिक जी मैं आपसे जानना

8:33 चाहूंगा इस मुद्दे को क्योंकि मुद्दा गरीबी का है, रोजगार का है, कामकाज का है। सरकार 125 दिन तक काम देना चाहती है। यानी मनरेगा में बड़ा बदलाव करते हुए 100 दिन से ज्यादा 125 दिन का काम। आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं? जी। देखिए मनोज जी जैसा कि अभी सांसद महोदय ने भी कहा कि देश की आधे से अधिक आबादी अगर हम आंकड़ों के हिसाब से बात करें तो इस समय लगभग 66% पपुलेशन जो है वह ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। तो जब तक हम विकसित भारत 2047 जो विजन की बात करते हैं वह तब तक अधूरा है जब तक उसमें हम ग्रामीण क्षेत्र की

9:20 जनसंख्या को शामिल नहीं करते हैं। और चाहे यह महात्मा गांधी की बात हो या पंडित दीनदयाल उपाध्याय की बात हो, उनके अंतोदय के दर्शन की बात हो, अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक जब तक विकास के लाभ नहीं पहुंचते हैं, तब तक वह विकास अधूरा है। जी। और 2005 में जब डॉ. मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व वाली यूपीए गवर्नमेंट ने इस स्कीम को लांच किया था जिसको हम एमजी नरेगा के नाम से जानते हैं। महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005 जो कि सितंबर में आया था। तब भी इसमें महात्मा गांधी का नाम 2005 में नहीं था। यह हमारे ध्यान में रहना चाहिए कि जिस समय सितंबर में 2005 में यह एक्ट लाया गया था तब इसके साथ महात्मा

10:07 गांधी जी का नाम नहीं जुड़ा हुआ था। 2009 अक्टूबर में केंद्र सरकार ने इसके नाम में संशोधन करते हुए इसमें महात्मा गांधी जी का नाम जोड़ा। जी तो नाम महत्वपूर्ण नहीं है। उसका उद्देश्य महत्वपूर्ण है और उद्देश्य है ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करते हुए वहां पर मजबूत आधारिक संरचना का निर्माण करते हुए वहां के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना जिससे कि वह गरीबी से बाहर आ सके। जी और आरंभ में जैसा हम जानते हैं 100 दिनों के रोजगार की गारंटी इसमें दी गई थी और आरंभिक दौर में 11,000 करोड़ के लगभग सरकार में सरकार ने इसके लिए आवंटित किया था जो कि कोविड में नरेंद्र मोदी जी के

10:54 नेतृत्व वाली सरकार के अंतर्गत अधिकतम अपनी सीमा 111000 करोड़ के लगभग इसके लिए आवंटित किया गया था। जो पिछले वित्तीय वर्ष में देखें तो लगभग 86000 करोड़ के आसपास इसके लिए आवंटित किया गया है। तो मुझे लगता है कि जो गरीबी में रह रही जनसंख्या विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे लोग हैं उनको उससे बाहर लाने में इस योजना की भूमिका रही है और अब यह और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह अधिनियम लाया गया है। ऐसा लगता है। जी बिलकुल डॉ. महेश जी। अह दरअसल सरकार भी मानती है कि जो गा- ग्रामीण अर्थव्यवस्था है उसमें ऐसे लोग जिनके पास काम नहीं है या काम की कमी रहती है उनको सरकार 125 दिन तक काम देना चाहती है कि ताकि हर किसी को काम मिले।

11:40 आर्थिक दृष्टि से देश का आम आदमी मजबूत हो और गांव हमारे गरीबी मुक्त हो। लेकिन कुछ सवाल जनार्दन जी मैं आपसे समझना चाहूंगा। अह मैं पहले स्पष्ट कर दूं। सरकार ने भी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने भी कहा। सदन के अंदर कहा कि सरकार महात्मा गांधी जी का सम्मान करती है। लेकिन जैसा डॉक्टर महेश कौशिक जी ने कहा कि मुद्दा उद्देश्य का है। गांधी जी भी चाहते थे कि देश की अर्थव्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो। देश का गाब किसान जो है वो मजबूत हो। गरीबी मुक्त भारत बने और प्रधानमंत्री जी भी यही चाहते हैं। तो इस पे सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? देखिए सवाल तो यह मनगढ़ंत है। जैसे महेश जी अभी बता रहे थे कि इसका जब यह लंच हुआ मनरेगा

12:27 तो उस समय पूज्य महात्मा गांधी जी का नाम उसमें नहीं जुड़ा हुआ था। वह 2009 में उनके नाम को जोड़ने का काम किया गया। और आज जब हमें वास्तव में है कि उसका मुद्दा और उस मुद्दा जिस हम में विधेयक को लाए हैं चाहे जो योजना हम चला रहे हैं। उसका प्रभाव कहां पड़ रहा है। यह सबसे बड़ी बात है। महात्मा गांधी जी भी चाहते थे कि गांव में रामराज हो। महात्मा गांधी जी की आत्मा कहती थी कि गांव में रामराज हो। हमारी सरकार ने जी राम जी उस नाम में जोड़ दिया। विकसित भारत जी राम जी। महात्मा गांधी जी का हमेशा सोच था। दूसरी हमारे पूज्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी अंत्योदय एकात्म मानववाद दर्शन वह अंत्योदय वह अंतिम व्यक्ति खड़ा जो अंतिम पंक्ति में अंतिम व्यक्ति खड़ा है, उसका भी उदय होना चाहिए। उसका भी विकास होना चाहिए। तो यह हमें

13:12 लगता है कि जो विकसित भारत 2047 में होने के संकल्प हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने लिया है। उसके लिए हमें गांव को विकसित करना होगा और यह योजना जो है विकसित भारत जी राम जी जो यह आया है मनरेगा के जगह पर उसमें बहुत सारे ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि गांव में कोई बेरोजगार ना रह जाए। जो बेरोजगार रह कर करके इधर-उधर अपना समय बिताता है तो उसको रोजगार में जुड़ेगा। रोजगार में जुड़ेगा तो उसको आमदनी होगी। फिर गांव का विकास होगा। उसके घर का विकास परिवार का विकास होगा तो गांव का विकास होगा और गांव का जब विकास होगा तो फिर देश का विकास होगा। तो फिर हमारे देश के प्रधानमंत्री जी का जो संकल्प है आत्मनिर्भर भारत गांव भी आत्मनिर्भर होगा। जब रोजगार जब मिलेगा रोजगार जब युक्त गांव

13:59 होगा तब फिर हमें लगता है कि गरीबी मुक्त गांव होगा। गरीबी मुक्ति के लिए रोजगार युक्त गांव करना पड़ेगा। और यह हमें लगता है कि विधेयक जो है शत प्रतिशत जी राम जी यह भगवान राम की भी कृपा होगी तो गांव पूर्ण रूपेण ना विकसित होंगे जो देश के हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी का संकल्प है जो पूज्य महात्मा गांधी जी जो पूज्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के सपने जो अधूरे हैं उसको पूरा करने का संकल्प लेकर के हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी चल रहे हैं कि विकसित गांव करो देश को विकसित करना है। इसलिए यह विधेयक जो है काफी सटीक है। सही समय पर है। सही निर्णय है। और यही प्रधानमंत्री जी का सोच है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और

14:47 सबका प्रयास। सबका प्रयास वहां से शुरू होगा और फिर गांव विकसित गांव होगा। जनार्दन जी ये बात ठीक है कि महात्मा गांधी जी भी रामराज चाहते थे देश में और ऐसी कल्पना हर किसी महापुरुष की रही है कि देश में रामराज आए। आपकी सरकार विकसित भारत जी राम जी के जरिए देश की जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था है, देश का जो ग्रा जो गरीब है उसको आर्थिक दृष्टि से मजबूत करना चाहती है। रोजगार देना चाहती है। लेकिन एक सवाल अगर विपक्ष के सदस्यों को कुछ आपत्ति है तो वो क्या महात्मा गांधी जी का नाम हटने से है या राम जी का नाम आने से है? देखिए अगर हमने अभी आपने सुना भी कि पहले भी उन लोगों ने महात्मा गांधी जी का नाम नहीं रखा था। 2009 में जब चुनाव था मुझे लगता है कि इस पर थोड़ा ज्यादा हो जाएगा।

15:33 वह चर्चा में सारी बातें आएगी पक्ष और विपक्ष से उनको भी यह बात क्यों इस नाम से उनको बैर है क्यों इस नाम से उनको इतराज है यह बात सही आती है और क्यों जो नाम पहले मनरेगा था मनरेगा पर वो सटीक है। मनरेगा का जो उद्देश्य क्या था उसको तो आपने पूरा नहीं किया। जी अब उनकी सरकार थी तो कितना उन्होंने धन दिया काम उन्होंने धन कितना दिया उसके लिए मनरेगा के लिए और वह धन का उपयोग कितना हुआ हम तो उसमें सटीक कर रहे हैं कि कोई भी जो माने अकुशल माने युवा है जो काम करना चाहता है उसको हम गांव में काम देंगे तो गांव में काम भी होगा गांव के इंफ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ेंगे गांव विकसित भी होगा और उनको रोजगार भी मिलेगा तो रोजगार मिलेगा तो दो चीजें तो सीधे दिख रही है ना गांव का विकसित होना और रोजगार

16:20 मिलेगा तो वस्तु स्वावलंबी होना आत्मनिर्भर गांव भी होगा आत्मनिर्भर व्यक्ति भी होगा तो भारत भी आत्मनिर्भर होगा और विकसित भारत भी होगा इसमें जोड़ने का क्योंकि हम तो माने फिर मैं दोहराना चाहता हूं कि गांव प्रधान देश भारत है। हम शहर प्रधान देश नहीं है। आज लेकिन गांव में भी शहरों के जैसा सुविधा देश के प्रधानमंत्री ने पहुंचाया है वहां। और यह जी राम जी जो विधेयक है उसको और सटीक करेगा और पूरा करेगा और मजबूत करेगा जो सबका साथ सबका विकास का जो संकल्प प्रधानमंत्री जी का है वो पूरा करेगा जी डॉक्टर महेश कौशिक जी मैं आपसे जानना चाहता हूं बात रोजगार की है। बात काम देने की है। उद्देश्य यही है कि देश का जो गरीब व्यक्ति है उसे अधिक दिन तक काम मिले।

17:05 यानी 100 से ज्यादा 125 दिन तक उसे काम मिले। सरकार इसकी गारंटी दे रही है। मैं यह समझना आपसे चाहता हूं कि मनरेगा से बेहतर जो सरकार का नया विधेयक है विकसित भारत जी राम जी यह क्यों बेहतर है? आपको आप कैसे देखते हैं इस विधेयक को? जी देखिए जैसे कि अभी आप बात भी कर रहे थे और जो नाम है वो नाम भी अगर हम देखें तो पहले जो गांधी जी के नाम पर जो योजना थी वो ऐसा नहीं है कि अब श्री राम के नाम पर उस योजना को कर दिया गया है। जो नया विधेयक है वह एक्चुअली विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण

17:53 ये पूरा नाम है। तो अगर हम देखें तो रोजगार एंड आजीविका मिशन जिसका कि अगर शॉर्ट फॉर्म आप देखें तो वो राम बनता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि गांधी जी का नाम हटाकर के उसकी जगह पर आपने श्री राम के नाम पर उस योजना को किया है। तो यह बिल्कुल भी भ्रम नहीं होना चाहिए। जब हम जी राम जी नाम बोलते हैं तो कभी-कभी यह भ्रम होता है कि महात्मा गांधी का नाम इस योजना से हटाकर उनकी जगह पर इस योजना को राम जी के नाम पर कर दिया गया है। जी तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यह स्पष्ट मुझे लगता है कि सबको दर्शकों को भी रहना चाहिए। दूसरी बात यह है कि यह कैसे श्रेष्ठ है? कैसे श्रेष्ठ है पिछली योजना से या इसमें ऐसा क्या प्रावधान किया गया

18:38 है कि जिसके कारण से इसमें और अच्छा होने की संभावनाएं बनती हैं। देखिए जहां तक प्रधानमंत्री जी ने 2014 में जब अपने संसद के भाषण में इसका जिक्र किया था तो उन्होंने कहा था कि यह पिछली जो सरकारें हैं उसकी जो नाकामियां हैं उसके ताबूत की तरह से है। और उन्होंने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि उन्होंने कहा था कि इस योजना में सबसे अधिक भ्रष्टाचार हुआ है। तो इस योजना के अंतर्गत अब जो नई ये जी राम जी के नाम से जो अब विधेयक आया है। इसमें सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पारदर्शिता बढ़ाई जाए। अब वो पारदर्शिता कैसे बढ़ेगी? 2013-14 तक जो डायरेक्ट पेमेंट है इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के माध्यम से जिसको

19:24 हम फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम कहते हैं। इलेक्ट्रॉनिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम ईएफएमएस उसके माध्यम से केवल 37% भुगतान होता था। जिसको कि अब बढ़ा के 100% तक ले जाने का प्रयास किया जाने की इस योजना के इस प्रावधान में विधेयक में प्रावधान करने का विचार है कि सारा पेमेंट जब डायरेक्ट इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से होगा तो जो बीच में लीकेजेस है जो भ्रष्टाचार उसको मिनिमाइज किया जा सकता है। दूसरी बात इसके लिए रिसोर्सेज उपलब्ध कराने की है। जैसा कि अभी सांसद महोदय भी कह रहे थे। पहले जो इसके लिए अगर हम 20056 जब से ये योजना शुरू हुई थी उससे लेकर के 2013-14 तक का अगर समय देखते हैं तो इसके लिए ₹13220

20:10 करोड़ आवंटित कुल रूप में लेकिन 2014 के बाद जब नई सरकार आई तो तब से लेकर के अगर हम 24-225 के बीच तक देखें तो 781302 करोड़ इस योजना के लिए आवंटित हुए जो कि उसी पिछले पिछले दशक की तुलना में इस नए दशक में लगभग चार गुना ज्यादा फंड्स उसके लिए रखे गए। तो ये एक बड़ा उसकी उपलब्धि मानी जा सकती है। ठीक इसी प्रकार से 1660 करोड़ जो कार्य दिवस है उसका सृजन पिछले 10 वर्षों यानी 20056 से लेकर 134 के बीच में हुआ। लेकिन 2013-14 के बाद 1415 से लेकर के 24-25 के बीच में हम इसको डबल कर दें 1660 को तो लगभग 3200 बैठता है तो 329

20:59 कार्य दिवस का रोजगार का सृजन इस योजना के अंतर्गत किया गया। तो यह प्रभाव है कि इस योजना को कैसे और अधिक प्रभावी बनाया जाए। कैसे और अधिक भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए। कैसे इसको और विकसित भारत 2047 के विज़न से कनेक्ट किया जाए यह प्रावधान इस विधेयक में किए गए हैं जो इसे एक नया स्वरूप प्रदान कर जाहिर सी बात है समाज में जो समाज की अंतिम पंक्ति में व्यक्ति खड़ा है जिसके पास काम नहीं है सरकार उसे गारंटी के साथ काम देना इस विधेयक के जरिए चाह रही है लेकिन कई बदलाव भी इसमें किए जा रहे हैं ताकि एक इसमें समन्वय रहे संतुलन रहे जनार्दन जी मैं आपसे समझना चाहता हूं उस मुद्दे को क्योंकि जो विकसित भारत जी राम जी विधेयक है कृषि और ग्रामीण मजदूरी के

21:47 बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा पर जोर देता है। कृषि कैलेंडर के अनुसार जो योजना है वो बनाई जा रही है। बनाई जाएगी। इसे आप कैसे देखते हैं? देखिए सही मायने में है। देखिए हम में कृषि प्रधान देश भी हैं। किसानों के उपज बढ़े इसके लिए कृषि विभाग या सरकार रात दिन एक कर कर के काम कर रही है उसमें और उसका लाभ भी मिल रहा है। और फिर इसमें जब हमें यह जो आजीविका को जोड़ रहे हैं। इसमें अकुशल जो हमारे युवा हैं उसको रोजगार देने की हम बात कर रहे हैं और रोजगार की गारंटी हम कर रहे हैं। और यह जैसे बात अभी दिनेश जी बता रहे थे कि अगर हम उसको कार्य दिवस अगर जोड़ें तो 25 दिन और बढ़ रहा है। माने एक माह लगभग और उसके 1 साल 25 दिन 1 साल 25 दिन बढ़ इसको अगर

22:35 हम जोड़ेंगे साल भर में तो जितने युगों को करोड़ों बेरोजगार लोगों को काम मिलेगा तो वह कितने घंटे और बढ़ेंगे और इससे हमें लगता है कि कृषि भी बढ़ेगी। कृषि का भी पैदावार उसमें बढ़ेगा और कृषि के क्षेत्र में भी काम करने वाले हमारे जो बेरोजगार युवा हैं उस क्षेत्र में भी काम करेंगे तो उसको भी वहां कहीं ना कहीं से उसकी गारंटी होगी। रोजगार की गारंटी होगी। स्वयं के भी अपने भी खेतीबाड़ी करेंगे। उसमें भी उनके आय बढ़ेंगे। तो इसका लाभ हमें लगता है कि इस विधेयक के माध्यम से भी होगा। कृषि और ग्रामीण विकास कृषि और ग्राम के विकास को एक साथ हम जोड़ कर करके अगर उसको हम देखेंगे तो कृषि का भी उपज बढ़ेगा और गांव का भी विकास उसमें उसमें सम्मिलित होगा क्योंकि गांव को समृद्ध बनाना है तो गांव के एक-एक युवाओं को रोजगार से हमें जोड़ना

23:20 पड़ेगा और जिसकी गारंटी हमें लगता है कि यह जो अपना जो विधेयक जो है वह विकसित भारत जो जी राम जी जो विधेयक है उसको परिपूर्ण करने का काम करेगा और बड़ी सोच समझ के सरकार ने इस योजना को लाई है और देश के प्रधानमंत्री जी ने जब मोहर किसी भी योजना पर लगाते हैं तो उनको सबसे पहले गांव दिखता है। गांव का गरीब किसान मजदूर देखता है और देश देखता है कि देश कैसे हमारा विकसित होगा और इस योजना से देश के लोगों को कैसे फायदा होगा जिसमें गांव और गरीब दोनों कैसे उन्नत होंगे विकसित होंगे या उनके मानसिकता में रहती है जिसको पूरा करने का काम यह विधेयक करेगा बिल्कुल जनार्दन जी अगर इस विधेयक की हम बात कर रहे हैं विकसित भारत जी राम जी विधेयक में महिलाओं बुजुर्गों दिव्यांगों तथा अनुसूचित जाति और जनजाति वर्गों के

24:08 लिए अतिरिक्त सुरक्षा और प्राथमिकता का प्रावधान किया गया है। इस पहलू को आप कैसे देख रहे हैं? देखिए सही है। आप सही बात मैंने आप ध्यान लगाया विनोद जी ने कि इसमें महिलाएं भी हमारी बहनें भी बेरोजगार रहती है तो उनको भी इसमें गारंटी है। हमारे युवा के साथ दिव्यांग भाई भी रहते हैं जो दिव्यांग स्तर पर ही रह के उसके अनुसार रोजगार वहां अगर शुरू किया जाए तो रोजगार वह कर सकते हैं। काम वह कर सकते हैं। तो उनमें कोई भी नहीं रहेगा। जो जुआ है जो काम करना चाहता है वह चाहे वह दिव्यांग भी अगर है हमारी बहनें भी हैं वो किसी भी जाति संप्रदाय को हो मैं जाति संप्रदाय से जोड़कर के इसको नहीं देख रहा हूं इसको गांव के कोई भी बेरोजगार अगर हो दिव्यांग भाई से लेकर के बहन कोई समाज का लोग हो तो उसको रोजगार की गारंटी यह योजना दे रहा है और सब जब काम

24:55 हम करेंगे जब घर से लेकर के बाहर तक कोई भी बेरोजगार नहीं रहेगा तब फिर घर भी विकसित हो जाएगा एक-एक गांव का घर विकसित होगा तो गांव विकसित विकसित हो जाएगा और गांव जैसे विकसित हो जाएगा तो मेरा पंचायत, मेरा प्रखंड, मेरा जिला, मेरा राज्य विकसित होगा और जैसे सभी हमारे देश के राज्य विकसित होंगे, देश विकसित होगा। देश को कोई विकसित होने से नहीं रोक सकता है। एक छोटी समझ नहीं है। मैं विपक्ष के अपने साथियों को भी कहूंगा कि इसको व्यापक स्तर पर आप देखिए। आप छोटी संकुचित भावना में मत देखिए। हर बात पर विरोध के लिए विरोध मत करिए। जिसकी भावना बड़ा करिए और बड़े भावना से देखिएगा तो आपको लगेगा कि सही मायने में माननीय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इस योजना को लाकर के गांव को विकसित करने की परिकल्पना जो उन्होंने किया है। हम देश को विकसित करने

25:41 के साथ इस गांव को भी विकसित करेंगे और गांव के एक-एक लोगों को रोजगार से जोड़ेंगे यानी रोजगार युक्त और गरीबी मुक्त गांव की यह परिकल्पना को पूर्ण करने का काम करेगी। यह मैं आपको बता जी बिल्कुल डॉक्टर महेश जी मैं आपसे जानना चाहता हूं क्या राज्यों पर जो आर्थिक जिम्मेदारी इस विधेयक के माध्यम से आने वाली है क्योंकि अभी तक मनरेगा में सारा पैसा केंद्र सरकार दे रही थी इस पहलू को आप कैसे देखते हैं जो राज्यों की भागीदारी बढ़ेगी इसमें उससे क्या लाभ होगा साथ ही नई जो प्रावधान है उससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे लाभ पहुंचेगा जी सबसे बड़ी बात तो यह है कि केंद्र केंद्र सरकार इसके अंतर्गत ऐसा नहीं है कि पूरा का पूरा जो फंड की व्यवस्था है यानी

26:28 रिसोर्स मैनेजमेंट है वो पूरी तरह से राज्यों पर डालने वाली है। सरकार ने यह भी प्रयास किया है कि आने वाले विधेयक इस विधेयक के अंतर्गत जो है वह ज्यादा जो फंड्स है वह एलोकेट करेगी इस स्कीम के लिए जिससे कि अधिक से अधिक लोगों को इससे लाभान्वित किया जा सके। दूसरी बात यह है कि इसके अंतर्गत केवल पहले यह माना जाता था कि केवल सड़क निर्माण जैसे कार्य ही जो है वह इस योजना के अंतर्गत लोगों से करवाए जाएंगे। लेकिन अब उसका दायरा बहुत बढ़ाया गया है कि इसमें कौन-कौन से कार्य जो है वो शामिल किए जाएंगे। तो ग्रामीण आधारिक संरचना का संपूर्ण विकास इस योजना का लक्ष्य रखा गया है कि जो ग्रामीण आधारिक संरचना है हमारी उसमें किसानों को जिनजिन

27:14 चीजों की आवश्यकता होती है वे सभी सुविधाएं जो हैं वे इन लोगों के माध्यम से जिनको इस योजना के अंतर्गत रोजगार प्रदान किया जाएगा वे सब आधारिक संरचना की आवश्यकताएं इसके माध्यम से पूरी हो सके जिससे कि ग्रामीण क्षेत्रों का संपूर्ण विकास हो सके जब ग्रामीण क्षेत्रों का संपूर्ण विकास होगा तो निश्चित रूप से वहां के किसान वहां के श्रमिक इससे लाभान्वित होंगे। उनकी प्रति व्यक्ति आय वह भी बढ़ेगी जिससे कि ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की जो क्रिय शक्ति है वह भी बढ़ेगी और जब क्रिय शक्ति बढ़ेगी आजीविका बढ़ेगी तो निश्चित रूप से जो ग्रामीण क्षेत्रों का विकास है वह पहले से बेहतर होगा। दूसरी बात इस स्कीम के लिए और पारदर्शिता बढ़े और अधिक यह प्रभावी बने

28:00 इसके लिए जन मनरेगा ऐप नागरिक निगरानी ऐसे भी प्रावधान इस विधेयक के अंतर्गत किए गए जिससे कि अधिक से अधिक परिसंपत्तियों का निर्माण हो सके। जी बिलकुल बिलकुल बिल्कुल महेश जी और यही वजह है कि विकसित भारत जी राम जी विधेयक आत्मनिर्भर और विकसित गांव की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जनार्दन जी आपने हमसे बात की संसद टीवी से बात की बहुत-बहुत धन्यवाद आपका माध्यम से पूरे डॉक्टर महेश जी आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद संसद टीवी से बात करने के लिए तो आज इस कार्यक्रम में इतना ही मुझे दीजिए आज्ञा नमस्कार

28:47 [संगीत] संसद टीवी के और भी प्रोग्राम्स देखने के लिए सब्सक्राइब करें हमारा YouTube चैनल और हां इन्हें लाइक और शेयर करना ना भूलें।

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