Nationalism in india (भारत में राष्ट्रवाद) Class 10 SST (सामाजिक विज्ञान) UP Board 2026 Hindi Medium

PW UP Board 9&10th www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो "भारत में राष्ट्रवाद" नामक अध्याय पर आधारित है, जो कक्षा 10वीं के इतिहास का एक महत्वपूर्ण भाग है। इसमें भारत की आजादी की कहानी, प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव, गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन, रोलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे विषयों को शामिल किया गया है। वीडियो का उद्देश्य छात्रों को इस अध्याय से संबंधित सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट रूप से समझाना है ताकि उन्हें परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिल सके।

  • प्रथम विश्व युद्ध और भारत पर इसका प्रभाव
  • गांधीजी के सत्याग्रह आंदोलन और उनका महत्व
  • रोलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड
  • खिलाफत और असहयोग आंदोलन
  • सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन
  • भारत की आजादी में विभिन्न लोगों और आंदोलनों का योगदान

परिचय

इस अध्याय में भारत में राष्ट्रवाद की भावना के विकास और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका पर चर्चा की जाएगी। यह अध्याय बताता है कि कैसे विभिन्न घटनाओं और आंदोलनों ने भारत को आजादी दिलाने में योगदान दिया।

अध्याय का अवलोकन

इस अध्याय में प्रथम विश्व युद्ध के कारण और प्रभाव, सत्याग्रह का अर्थ और गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन, रोलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत आंदोलन, असहयोग आंदोलन, गोलमेज सम्मेलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, राष्ट्रवाद की भावना, लोक कथाओं का महत्व, राष्ट्रीय ध्वज का महत्व, इतिहास की पुनर्व्याख्या, क्रिप्स प्रस्ताव और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

अंग्रेजों का आगमन और भारत में राष्ट्रवाद की शुरुआत

अंग्रेज 1600 में ईस्ट इंडिया कंपनी के रूप में भारत में व्यापार करने आए थे। उन्होंने "फूट डालो और शासन करो" की नीति अपनाई, जिससे भारत के लोग आपस में लड़ने लगे और अंग्रेज शासक बन गए। 1757 से 1947 तक भारत को लगभग 200 वर्षों तक गुलामी झेलनी पड़ी। इस अध्याय में भारत की आजादी की कहानी प्रथम विश्व युद्ध से शुरू होती है।

प्रथम विश्व युद्ध और भारत पर इसका प्रभाव

प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक चला। भारत उस समय अंग्रेजों का गुलाम था, इसलिए वह सीधे तौर पर युद्ध में शामिल नहीं था, लेकिन अंग्रेजों ने भारत को जबरदस्ती युद्ध में शामिल किया। युद्ध के कारण अंग्रेजों ने भारत में टैक्स बढ़ा दिए, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो गईं। अंग्रेजों ने भारतीयों को जबरदस्ती सेना में भर्ती किया। भारत में अकाल पड़ा और इन्फ्लुएंजा महामारी फैली, जिससे लाखों लोग मर गए। इन सब कारणों से भारत के लोगों में अंग्रेजों के प्रति गुस्सा बढ़ने लगा और राष्ट्रवाद की भावना पैदा हुई।

गांधी जी का आगमन और सत्याग्रह

गांधी जी 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत आए। उन्होंने भारत के लोगों की परेशानियों को समझा और सत्याग्रह का विचार प्रस्तुत किया। सत्याग्रह का मतलब है सच के रास्ते पर चलकर बिना हिंसा के आंदोलन करना। गांधी जी ने 1917 में चंपारण किसान आंदोलन, 1918 में खेड़ा किसान आंदोलन और 1918 में अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन किए।

चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा आंदोलन

चंपारण आंदोलन 1917 में बिहार में हुआ। यहां किसान नील की खेती से परेशान थे। गांधी जी ने किसानों के साथ मिलकर आंदोलन किया और अंग्रेजों को उनकी बात माननी पड़ी। अहमदाबाद आंदोलन 1918 में गुजरात में हुआ। यहां मजदूर प्लेग बीमारी से परेशान थे और 50% वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे। गांधी जी ने मजदूरों और मालिकों के बीच समझौता कराया और 35% वेतन वृद्धि करवाई। खेड़ा आंदोलन 1918 में गुजरात में हुआ। यहां किसानों की फसल खराब हो गई थी और वे लगान नहीं दे सकते थे। गांधी जी ने किसानों के साथ मिलकर आंदोलन किया और अंग्रेजों को लगान माफ करना पड़ा।

रोलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड

1919 में अंग्रेजों ने रोलेट एक्ट लागू किया, जिसके तहत वे किसी भी भारतीय को बिना मुकदमा चलाए 2 साल तक जेल में डाल सकते थे। गांधी जी ने इस कानून को काला कानून कहा और इसके विरोध में आंदोलन किया। 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवा दीं, जिसमें हजारों लोग मारे गए।

खिलाफत और असहयोग आंदोलन

1919 में मोहम्मद अली और शौकत अली ने खिलाफत आंदोलन शुरू किया, जिसका उद्देश्य तुर्की के खलीफा के पद को बचाना था। गांधी जी ने इस आंदोलन का समर्थन किया ताकि हिंदू और मुसलमानों के बीच एकता बढ़ सके। 1920 में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया, जिसका उद्देश्य अंग्रेजों का सहयोग न करना था। इस आंदोलन में लोगों ने सरकारी नौकरियां, स्कूल, कॉलेज और विदेशी सामान का बहिष्कार किया।

असहयोग आंदोलन का प्रभाव और विभिन्न समुदायों की भागीदारी

असहयोग आंदोलन शहरों में कमजोर पड़ गया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसने जोर पकड़ा। अवध में बाबा रामचंद्र ने किसानों को संगठित किया। आदिवासी किसानों ने अलूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में गोरिल्ला युद्ध किया। बागानों में काम करने वाले मजदूरों ने बागानों से भागकर अपने घरों की ओर प्रस्थान किया। 1922 में चौरी-चौरा की घटना के बाद गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन

असहयोग आंदोलन के बाद कांग्रेस में दो विचारधाराएं बनीं: कुछ नेता चुनाव लड़ना चाहते थे, जबकि कुछ आंदोलन करना चाहते थे। 1927 में अंग्रेजों ने साइमन कमीशन बनाया, जिसमें सभी सदस्य अंग्रेज थे। भारत के लोगों ने इसका विरोध किया। 1929 में लॉर्ड इरविन ने भारत को डोमिनियन स्टेटस देने की बात कही, लेकिन भारत के लोगों ने पूर्ण स्वराज की मांग की। 1930 में गांधी जी ने 11 मांगों के साथ लॉर्ड इरविन को एक पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद गांधी जी ने दांडी मार्च किया और नमक कानून तोड़ा। सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें लोगों ने अंग्रेजों के बनाए नियमों को मानने से इनकार कर दिया।

गोलमेज सम्मेलन और पूना समझौता

1931 में लॉर्ड इरविन ने गांधी जी को दिल्ली बुलाया और गांधी-इरविन समझौता हुआ। गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन रोक दिया और गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन गए। वहां पूर्ण स्वराज की बात नहीं मानी गई। 1932 में गांधी जी ने दोबारा सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया, लेकिन यह सफल नहीं हुआ। दलितों के लिए अलग चुनावी प्रक्रिया के मुद्दे पर गांधी जी और अंबेडकर जी के बीच मतभेद हुआ, जिसके बाद पूना समझौता हुआ।

राष्ट्रवाद की भावना और भारत छोड़ो आंदोलन

भारत के लोगों में देश प्रेम की भावना को पैदा करने के लिए अलग-अलग तरीकों को अपनाया गया, जैसे भारत माता की तस्वीर, वंदे मातरम गीत, कहानियां और राष्ट्रीय ध्वज। 1939 से 1945 तक दूसरा विश्व युद्ध चला। 1942 में अंग्रेजों ने क्रिप्स प्रस्ताव भेजा, जिसमें भारत को तोड़ने की बात की गई थी। इसके बाद गांधी जी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया और "करो या मरो" का नारा दिया। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ।

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Transcript

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0:27 हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो नमस्कार नमस्कार नमस्कार नमस्कार दोस्तों, आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है हमारी आज की इस क्लास में। उम्मीद करते हैं दोस्तों कि आप सभी लोग हमें देख पा रहे हैं। हमें सुन पा रहे हैं और आप तक हमारी आवाज ये बिल्कुल सही तरीके से पहुंच पा रही है। भैया गुड इवनिंग। गुड इवनिंग। गुड इवनिंग। गुड इवनिंग। गुड इवनिंग। अपने सारे दोस्तों का अपने सारे बच्चों का भैया यहां पर बहुत-बहुत स्वागत करते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों से इसमें नंबर ऑफ व्यूअर्स दिखा दे रहिए भैया। है ना? नहीं दिख पाएगा। हमें दिखाना चाह मैं देखना चाह रहा हूं ना। तो भारत के अलग-अलग राज्यों से, भारत के अलग-अलग शहरों से, भारत के अलग-अलग प्यारे क्षेत्रों से हमारे बहुत सारे बच्चे हमारे साथ जुड़े हुए हैं। तो अपने हर एक साथी का, अपने हर एक दोस्त का, अपने हर एक प्यारे बच्चे का भैया प्यार भरा स्वागत। उम्मीद करते हैं दोस्तों कि आप सभी लोग

1:13 हमें देख पा रहे हैं और आप सभी बच्चों तक हमारी आवाज बिल्कुल सही तरीके से पहुंच चुकी है। गुड इवनिंग वंशिका, गुड इवनिंग दुबे, गुड इवनिंग गीता जी। गुड इवनिंग विवेक जी गुड इवनिंग धरा ध्रुव और उसी के साथ-साथ सीमा जी हैं अब्दुल कादिर साहब हैं। शिख हमारे साथ हैं। आर्यन हमारे साथ हैं। मानवी कह रही हैं राधे-राधे। राम-राम जी सर जी गुड इवनिंग। गुड इवनिंग सर जी नमस्ते। सही है भैया। चलिए जय भीम। आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है दोस्तों। आप सभी के साथ हम लोग अपनी आज की क्लास को करेंगे। सर सलाम वालेकुम। वालेकुम सलाम। और अपने सारे के सारे बच्चों के साथ एक बहुत ही इंटरेस्टिंग, बहुत ही जबरदस्त और एक बहुत ही महत्वपूर्ण जो हमारा अध्याय है, उसकी कहानी को हम लोग यहां पर आपके सामने रखेंगे। बहुत प्यारा चैप्टर होगा और इस चैप्टर की सारी की सारी बिंदु और सारी की सारे जो हमारे अह कंफ्यूजन और पॉइंट्स

1:58 होंगे, उनको हम लोग आपके साथ अपनी आज की इस क्लास में क्लियर करते चलेंगे। और कोई भी डाउट आपके समक्ष बिल्कुल भी रहने नहीं देंगे। तो दोस्तों, बहुत सारी इंटरेस्टिंग चीजें होंगी। आप लोग क्या कर सकते हैं? आप लोग हमारे इस क्लास के लिंक को अपने दोस्तों के साथ, सहेलियों के साथ, सहेलों के साथ शेयर कर दें ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चे हमारे इस प्यारे से बैच के अंदर हमें आते हुए देखने को मिले। तो जिस चैप्टर का डिस्कशन करने के लिए हम लोग यहां पर मौजूद हुए हैं। जैसे कि आप सभी को पीछे दिख ही पा रहा है और आप लोग हमारे इस आप देखते हैं दोस्तों कि जो हमारी ये हेडिंग है उसमें देख ही पा रहे हैं। हमारे चैप्टर का नाम है भारत में राष्ट्रवाद। और इस चैप्टर को हम लोग कहां देखते हैं दोस्तों कि जो आपकी इतिहास की पाठ्य पुस्तक है ना वहां पर हमें ये चैप्टर देखने को मिलता है। तो चैप्टर का नाम है भारत में राष्ट्रवाद और ये वाला चैप्टर हमें इतिहास के अंदर देखने को मिलता है।

2:44 पिछली बार जो हमारी वीर बैच के अंदर क्लास हुई थी हमने आप लोगों से पूछा था कि आप कौन से बैच को कराना चाहते हैं और अधिकतर बच्चों की यही डिमांड थी कि सर हमारा जो प्यारा भारत में राष्ट्रवाद वाला जो अध्याय है उसको हम डिस्कस करना चाहेंगे। उस चैप्टर की पूरी कहानी को हम लोग समझना चाहेंगे। ठीक है? तो हमारे सामने ये चैप्टर मौजूद है। चैप्टर का नाम आपने देख ही लिया है। भारत में राष्ट्रवाद इतिहास के अंदर हमें ये देखने को मिलता है। आप भारत के किसी भी हिंदी माध्यम के स्टूडेंट हैं। चाहे आप यूपी बोर्ड के हैं, बिहार बोर्ड के हैं, झारखंड बोर्ड के हैं, राजस्थान बोर्ड के हैं या फिर आप देखते हैं दोस्तों, कि किसी भी हमारे हिंदी मीडियम के अह कक्षा 10वीं के स्टूडेंट हैंड हैं, तो आपके सामने ये चैप्टर मौजूद है और इस चैप्टर को हम लोग बहुत अच्छे तरीके से आपके साथ डिस्कस पढ़ेंगे, डिस्कस करेंगे। हमारे इस चैप्टर के अंदर आखिर हमें क्या-क्या चीजें जानने को, सीखने को और पढ़ने को मिलेंगी, उसको हम लोग समझने

3:31 की कोशिश करते हैं। पढ़ेंगे तो हम कंप्लीट चैप्टर संपूर्ण अध्याय आपके साथ डिस्कस करेंगे। लेकिन इस चैप्टर के अंदर हमें क्या-क्या चीजें सीखने को मिलने वाली हैं या फिर ये चैप्टर हमें क्या-क्या बातें बताएगा उसको हम लोग यहां पर अच्छे तरीके से डिस्कस करते हैं। ठीक है? सबसे पहले जिस पॉइंट को हम लोग यहां पर देख रहे हैं बेटा हम लोग इस चैप्टर के अंदर प्रथम विश्व युद्ध की कहानी को आपके साथ डिस्कस करेंगे कि प्रथम विश्व युद्ध क्यों हुआ? कहां हुआ और कैसे हुआ? इस प्रथम विश्व युद्ध की जो पूरी की पूरी कहानी है और उसके जो पूरे के पूरे बिंदु है ना उसको हम लोग डिस्कस करेंगे। फिर हम लोग आप सभी के साथ सत्याग्रह का मतलब क्या होता है? इसको समझने की कोशिश करेंगे। फिर हम लोग गांधी जी के जरिए किए गए जो हमारे सत्याग्रह के आंदोलन हैं इनके बारे में जानकारी हासिल करेंगे। फिर हम लोग बात करेंगे रोलेक्ट एक्ट के बारे में कि ये क्या होता है? कहां आया? कैसे आया? कब आया? इसको

4:16 समझेंगे। फिर हम लोग बात करेंगे जलियांवाला बाग हत्याकांड के बारे में। हम डिस्कशन करेंगे भारत के अंदर किए गए एक बहुत ही महत्वपूर्ण आंदोलन जिसको खिलाफत आंदोलन कहा जाता है उसको समझेंगे। फिर हम लोग बात करेंगे आपके साथ असहयोग आंदोलन के बारे में। फिर हम लोग डिस्कशन करेंगे किसके बारे में बेटा? फिर हम लोग डिस्कशन करेंगे आप सभी के साथ गोलमेज सम्मेलन के बारे में। और इसी के साथ-साथ फिर हम लोग आपके साथ एक और हमारा बड़ा आंदोलन है जिसको हम लोग कहते हैं सविनय अविज्ञा आंदोलन। तो हम लोग सविनय अविज्ञा आंदोलन को देखेंगे और सविनय अभिज्ञ आंदोलन में भारत के किसान, व्यापारी, उद्योगपति क्या योगदान देते हैं, उसको देखेंगे और उसी के साथ-साथ ना हमारे कुछ और टॉपिक्स भी हैं। जैसे हम लोग ये देखेंगे कि इस सविन्य विज्ञान आंदोलन में महिलाओं की क्या

5:01 भूमिका थी? दलित भाइयों की क्या भूमिका थी? भारतीय मुसलमानों ने इसमें क्या योगदान दिया? फिर हम लोग डिस्कशन करेंगे आपके साथ कि राष्ट्रवाद की भावना क्या होती है? फिर हम लोग लोक कथाओं से क्या समझते हैं? वो देखेंगे। फिर भारत के राष्ट्रीय ध्वज के बारे में डिस्कशन करेंगे और इतिहास की पुनर्व्याख्या और फिर कृष प्रस्ताव और भारत का सबसे आखिरी आंदोलन जिसे भारत छोड़ो आंदोलन कहा जाता है। उसको हम लोग आपके साथ डिस्कस करेंगे। तो काफी इंटरेस्टिंग, काफी मजेदार और काफी महत्वपूर्ण आप देखते हैं दोस्तों। हमारा यह चैप्टर है। इस चैप्टर के अंदर हम लोग सारी की सारी बातों को आप सभी के सामने डिस्कस करेंगे। ध्यान से देखिएगा क्या? कि ये चैप्टर अगर आप लोग अपनी आज की इस क्लास के अंदर करते हैं तो आपके सामने इस चैप्टर से संबंधित कोई भी डाउट नहीं रहने वाला है और बहुत अच्छे तरीके से बहुत मजेदार तरीके

5:47 से आप इस चैप्टर की संपूर्ण कहानी को समझ लेंगे। ठीक है भैया? तो भैया ये तो हमारी आज की क्लास के सारे के सारे रहे पॉइंट्स और इन सारे पॉइंट्स को स्टार्ट करते हुए हम लोग अपनी आज की इस क्लास को स्टार्ट कर रहे हैं। एक बार जल्दी से आप सभी लोग हमें क्या देंगे दोस्तों? प्यारी सी फायर वाली इमोजी पेश कर देंगे। एंड देन वी विल बिगिन। हम लोग आपके साथ अपनी आज की इस क्लास को स्टार्ट कर देंगे। बच्चे कह रहे हैं कि सर भोजपुरिया में पढ़ा दीजिए ना। ऐ लल्ला कैसी बातें कर रहा है अजय? ये हमारा हिंदी भाषा वाला माध्यम है ना? तो हम इसको हिंदी में ही डिस्कस करेंगे ना लल्ला। चलिए एक बार जल्दी से आप सभी लोग हमारे साथ हमारी प्यारी सी फायर वाली इमोजी पेश करेंगे और फिर हम लोग आप सभी के साथ भारत की आजादी से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण सबसे प्यारा और सबसे जबरदस्त जो ये हमारा अध्याय है जो आपके पेपर के अंदर बहुत ज्यादा महत्वपूर्णता रखता है। इस चैप्टर की सारी कहानी को हम लोग आपके सामने रख

6:33 देंगे। बस करना क्या है? आपको हमारी इस क्लास को शुरुआत से लेकर आखिर तक देखना है। किसी भी तरीके का कोई डाउट शाउट आपके सामने नहीं रहेगा और बहुत सारी क्या करेंगे दोस्तों कि हम लोग आप सभी के साथ बहुत सारे जो हमारे पोल्स होंगे उनको भी डिस्कस करने वाले हैं। इन पोल्स के जरिए हम लोग चीजों को आपके सामने यहां पर बहुत अच्छे तरीके से रिवाइज भी करेंगे। आप क्या कर सकते हैं? आप हमारी इस क्लास के लिंक को अपने दोस्तों के साथ, सहेलियों के साथ, सहेलियों के साथ शेयर कर सकते हैं ताकि हमारा हर एक दोस्त ताकि हमारा हर एक बच्चा इस क्लास के अंदर जुड़कर अधिक से अधिक ज्ञान को हासिल कर सके। ठीक है, भैया? हमारे सारे बच्चे हो चुके हैं तैयार। हमारा चैप्टर भी हो गया है शुरू। और यहां से हम लोग आप सभी के साथ अपने इस चैप्टर की सारी की सारी कहानी को डिस्कस करना शुरू कर रहे हैं। सबसे पहले अगर हम लोग डिस्कस करें और सबसे पहले अगर हम लोग समझने की कोशिश करें। तो इस चैप्टर की कहानी स्टार्ट होती है दो महत्वपूर्ण आप

7:20 देखते हैं दोस्तों के किरदारों से। कौन-कौन से दो महत्वपूर्ण चीजें हैं? सबसे पहले हमें यहां पर देखना होगा दोस्तों। हम लोग यहां पर बात कर रहे हैं अंग्रेजों के बारे में। और अंग्रेजों को हम लोग कहां से आते हुए देखते हैं? अंग्रेजों को हम लोग आते हुए देखते हैं इंग्लैंड नामक देश से। है ना? अच्छा ये जो अंग्रेज लोग थे ये क्या करते हैं मेरे प्यारे बच्चे? इंग्लैंड के या फिर ये जो अंग्रेज लोग थे ये ना दुनिया भर के अंदर व्यापार करना शुरू करते हैं। और इन्हीं लोगों के द्वारा अंग्रेजों के द्वारा सन 1600 में एक कंपनी का निर्माण किया जाता है। अंग्रेजों ने एक कंपनी बनाई है सन 1600 के अंदर। और इस कंपनी को क्या बोला जाता है बेटा? इस कंपनी को हम लोग बोलते हैं ईस्ट इंडिया कंपनी। और ये जो ईस्ट इंडिया कंपनी थी ये भारत के अंदर क्या करने आती है दोस्तों? भारत के अंदर व्यापार करने आती है। और ये

8:07 जो ईस्ट इंडिया कंपनी के लोग थे जब ये भारत के अंदर व्यापार करने आते हैं इनकी आंखें खुली रह जाती हैं। भारत की जलवायु बहुत बढ़िया। भारत का मौसम बहुत बढ़िया। भारत के अंदर खेतीबाड़ी बहुत बढ़िया। भारत के अंदर आप देखते हैं कि नदियां बहुत सारी। उसी के साथ-साथ भारत के अंदर स्थलाकृतियां यानी कि हमारे यहां पर पर्वत भी हैं, पठार भी हैं, रेगिस्तान भी हैं। अंग्रेजों के यहां पर ये सब चीजें थी ही नहीं। और वो भारत के अंदर मौजूद ये सारी चीजें देखकर आश्चर्यचकित रह गए। और अंग्रेजों ने ना एक और चीज यहां पर देखी वो कि भारत के लोगों में क्या है दोस्तों कि भारत के लोगों में एकता की कमी बहुत ज्यादा नहीं थी। एकता की कमी देखने को मिल रही थी। भारत के लोगों में एकता नहीं थी। भारत के लोग मिलकर नहीं रहते थे। अंग्रेजों ने देखा कि भारतीय समाज टूटा हुआ है। भारत के लोग एकता में नहीं रहते

8:53 हैं। ये धर्म के नाम पर, जाति के नाम पर, भाषा के नाम पर, अलग-अलग राजाओं के नाम पर लड़ते रहते हैं। अंग्रेजों ने इसका फायदा उठाया और सन 1600 के अंदर बनाई गई जो ये ईस्ट इंडिया कंपनी थी जो भारत के अंदर क्या करने आई थी बेटा? जो भारत के अंदर व्यापार करने आई थी ना, इसने भारत के अंदर क्या किया? एक तरीके को इस्तेमाल किया जिसको हम लोग बोलते हैं फूट डालो शासन करो। फूट डालो शासन करो का मतलब क्या है कि भाई डिवाइड एंड रूल यानी कि एक राजा को दूसरे राजा से लड़वाया एक धर्म के लोगों को दूसरे धर्म के लोगों से लड़वाया एक जाति के लोगों को दूसरी जाति के लोगों से लड़वाया एक भाषा बोलने वाले लोगों को दूसरी भाषा बोलने वाले लोगों से लड़वाया भारत के लोग आपस में लड़े भारत के लोग आपस के अंदर मरे और अंग्रेजों ने इसका फायदा उठाया और अंग्रेजों ने भारत के अंदर अपने

9:39 आप को भारत का शासक बना लिया। भारत के लोग लड़ गए और अंग्रेजों ने इस बात का फायदा उठाकर भारत की गद्दी पर खुद को आसीन कर लिया। वो भारत के राजा बन बैठे, भारत के शासक बन बैठे। और अगर देखा जाए सन 1757 से लेकर सन 1757 से लेकर साल 1947 तक लगभग 200 सालों की गुलामी तक भारत को झेलनी पड़ी। भारत को 200 सालों के लिए आप देखते हैं दोस्तों कि गुलाम बना लिया गया। ये जो हमारा अध्याय है ये आपको बताता है भारत की आजादी की कहानी के बारे में। ये चैप्टर आपको बताता है कि भारत देश ने आजादी को कैसे हासिल किया। भारत देश की आजादी में वो कौन-कौन लोग आए जिन्होंने भारत को आजाद किया और भारत की आजादी में कौन-कौन से और महत्वपूर्ण आंदोलनों को हमने होते हुए

10:24 देखा उसको हम लोग यहां पर आपके सामने देख रहे हैं। अगर आप ध्यान से देखें क्या कि हम देखते हैं दोस्तों कि भारत के अंदर ये दो बड़ी सिचुएशन हमें आती हुई देखने को मिली और इसी कालखंड में अगर आप बहुत ही महत्वपूर्ण पॉइंट को देखें। क्या महत्वपूर्ण पॉइंट को देखें कि हमारी आजादी की कहानी सन 1757 से शुरू नहीं होगी। इसकी कहानी हमारे इस चैप्टर की कहानी शुरू होती है कब से बेटा? हमारे चैप्टर की कहानी शुरू होती है प्रथम विश्व युद्ध से। अब ये प्रथम विश्व युद्ध क्यों है? कब हुआ? कहां हुआ? इस प्रथम विश्व युद्ध की पूरे के पूरे बिंदुओं को हम लोग एक-एक कर कर आपके सामने यहां पर डिस्कस करना शुरू करते हैं। तो पीछे के यहां के सारे पॉइंट्स हमने समझ लिए। अंग्रेजों ने भारत को आना शुरू किया। भारत में आना शुरू किया। कंपनी बनाई जिसे ईस्ट इंडिया कंपनी कहा। फूट डालो शासन करो की नीति को अपनाया। भारत के लोग आपस में

11:10 लड़े और 200 से भी ज्यादा सालों तक भारत को गुलाम बना लिया गया। ये चैप्टर हमें बताता है कि भारत की आजादी की कहानी प्रथम विश्व युद्ध से स्टार्ट होती है इस चैप्टर के अंदर। ठीक है? अब यहां से हम लोग सबसे पहले आप सभी के साथ प्रथम विश्व युद्ध को समझने की कोशिश करेंगे कि ये प्रथम विश्व युद्ध होता क्यों है? और इस प्रथम विश्व युद्ध की कालखंड कब है या फिर ये कब से कब तक हमें होता हुआ देखने को मिला। है ना? अगर आप लोग ध्यान से देखिए कि जो हमारा यह प्रथम विश्व युद्ध है, इसकी शुरुआत साल 1914 से साल 1918 तक हमें होती हुई देखने को मिलती है। इसको प्रथम विश्व युद्ध इसलिए कहा जाता है क्योंकि दुनिया में ऐसा युद्ध कभी हुआ ही नहीं था। 4 सालों तक दुनिया भर के जो ताकतवर देश थे फोर इयर्स तक आप देखते हैं दोस्तों कि 4 वर्षों तक

11:56 दुनिया भर के जो ताकतवर देश थे वो एक दूसरे की जान के दुश्मन बने रहे। और इन सारे के सारे चार सालों में बहुत सारे सैनिकों की हमें मौत होती हुई देखने को मिली। इन बहुत सालों में हमें देखने को मिलता है दोस्तों कि बहुत सारे हथियारों का यूज़ किया गया। दुनिया भर के बहुत सारे देश हमें खत्म होते हुए देखने को मिले। तो प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत साल 1914 में हुई और इसका समापन साल 1918 में हमें होता हुआ देखने को मिला। अब आपके दिमाग में ये सवाल आ सकता है कि सर क्या हमारा प्यारा भारत प्रथम विश्व युद्ध के अंदर शामिल था? क्या हमारे प्यारे भारत की उपस्थिति प्रथम विश्व युद्ध के अंदर शामिल थी। चलिए उसको हम लोग यहां पर समझने की कोशिश करते हैं। है ना? प्रथम विश्व युद्ध के अंदर आप देखते हैं दोस्तों कि जो दुनिया भर के बहुत सारे देश थे वो दो समूहों के अंदर बट गए थे या फिर दो ग्रुप्स के अंदर बट गए

12:41 थे। एक ग्रुप को हम लोग क्या बोलते हैं बेटा? एक ग्रुप को हम लोग कहते हैं सेंट्रल पावर्स या फिर इसको हम लोग हिंदी के अंदर बोलते हैं केंद्रीय शक्तियां। ठीक है? एक ग्रुप ने अपना नाम रख लिया था केंद्रीय शक्तियां या फिर केंद्रीय शक्ति। और दूसरा जो ग्रुप था उसका नाम क्या हुआ करता था बेटा? जो दूसरा समूह था उसको हम लोग पुकारते हैं मित्र राष्ट्र या फिर इनको एक और नाम से भी जाना जाता है। इनको धुरी राष्ट्र कहा जाता है। तो प्रथम विश्व युद्ध का समय है। साल 1914 आ चुका है और साल 1914 में उस टाइम के दुनिया भर के जो ताकतवर देश थे वो आपस में लड़ बैठे। और दुनिया भर के ताकतवर देशों ने दो समूह बनाए। एक को केंद्रीय शक्तियां कहा गया और दूसरे को मित्र राष्ट्र या फिर धुरी राष्ट्र कहा गया। केंद्रीय शक्तियों के अंदर हमें देखने को मिलता है ऑटोमन एंपायर

13:28 या फिर जिसको हम लोग ऑटोमन साम्राज्य के नाम से जानते हैं। यह जो ऑटोमन साम्राज्य है इसको आज का कौन सा देश बुलाया जाता है बेटा? इस ऑटोमन साम्राज्य को हम लोग आज का तुर्की देश कहते हैं। है ना? तुर्की देश कहा जाता है। ऐसे ही ये जर्मनी एक देश हमें देखने को मिलता है यहां पर जो हमारे केंद्रीय शक्तियों के अंदर था। और ऐसे ही यहां पर हमें ऑस्ट्रिया हंगरी जो देश है ऑस्ट्रिया हंगरी साम्राज्य देखने को मिलता है। तो एक ग्रुप के अंदर ये तीन देश थे। दूसरी तरफ ब्रिटेन यानी कि अंग्रेज थे। यहां पर हमें फ्रांस देखने को मिला, रशिया देखने को मिला और इसी ग्रुप के अंदर हमें अमेरिका भी देखने को मिलता है। तो दुनिया भर के उस टाइम के जितने भी ताकतवर देश थे वो इन दो समूहों के अंदर बैठ चुके थे और प्रथम विश्व युद्ध के अंदर बड़ी संख्या में हमें मारकाट होती हुई देखने को मिली।

14:14 दुनिया के अंदर 90 लाख लोगों ने अपने जीवन को खो दिया। 1 लाख लोगों को कभी आपने अपने सामने देखा है? 1 लाख लोगों की भीड़ कभी आपने देखी है? आप देखेंगे तो आप हिल जाएंगे। अब उस 1 लाख की भीड़ को आप 90 लाख कर दो। हमारी आंखें उनको देखकर डर जाएंगी और दुनिया के अंदर 90 लाख लोगों की जान इस प्रथम विश्व युद्ध के अंदर चली गई थी। करोड़ों लोग इसके अंदर जख्मी हो गए थे। करोड़ों लोग इसके अंदर अपाहिज हो गए थे। विकलांग बन गए थे। अब यहां पर आपके दिमाग में एक सवाल आ सकता है कि सर हमारे चैप्टर का नाम तो भारत में राष्ट्रवाद है और यहां पर हम लोग डिस्कशन कर रहे हैं प्रथम विश्व युद्ध की। सर इसके अंदर भारत तो है ही नहीं। मेरे भाई ये जो प्रथम विश्व युद्ध हो रहा है ये साल 1914 में स्टार्ट होता है और साल 1918 में खत्म होता है। उस समय

15:02 पर हमारा प्यारा भारत क्या है बेटा? उस समय उस समय पर हमारा प्यारा भारत अंग्रेजों का गुलाम था। हम लोग अंग्रेजों के उपनिवेश थे। है ना? भारत जो था कैसा था? हमारा प्यारा भारत अंग्रेजों का गुलाम था या फिर अंग्रेजों का उपनिवेश था और भारत जो है ना प्रथम विश्व युद्ध में सीधे तरीके से शामिल नहीं था। है ना? अंग्रेज इस युद्ध के अंदर शामिल थे। आपको दिख रहा है बेटा अंग्रेज जो थे या फिर जो ब्रिटेन या फिर जो इंग्लैंड के लोग थे अंग्रेज इस युद्ध के अंदर शामिल थे। तो अंग्रेजों के शामिल होने की वजह से भारत को भी जबरदस्ती इस युद्ध के अंदर शामिल किया गया। और प्रथम विश्व युद्ध यही एक ऐसी सिचुएशन है जिसकी वजह से भारतीयों के दिल में अंग्रेजों के प्रति गुस्सा आना शुरू होता है और भारत के लोगों में राष्ट्रवाद पैदा होता है। यहां पर ये जो शब्द हमारे सामने रखा गया है राष्ट्रवाद इस शब्द के अर्थ को भी हमारे लिए जानना बहुत ज्यादा जरूरी

15:49 होगा। है ना? तो राष्ट्रवाद शब्द का मतलब क्या है मेरे प्यारे बच्चे? राष्ट्रवाद शब्द का मतलब है देश प्रेम या फिर इसको हम लोग एक और नाम से भी जान रहे हैं। इसको हम लोग देशभक्ति कह रहे हैं। हम ये देखेंगे कि प्रथम विश्व युद्ध के अंदर ना कुछ ऐसी घटनाएं घट जाएंगी कि जिससे भारत के लोगों में राष्ट्रवाद या फिर देश प्रेम पैदा होने लगेगा और भारत के लोग अंग्रेजों से कहेंगे ये धरती हमारी है भाई। इस धरती पर हम पैदा हुए हैं और इस धरती पर शासन करने का अधिकार भी हमारा है। भारत के लोग अंग्रेजों से आजादी की डिमांड प्रथम विश्व युद्ध के आसपास करने लग जाएंगे और उसी बिंदु को हम लोग यहां पर आपके सामने एक-एक कर डिस्कस करते हैं। सबसे पहली बात जो हमें ध्यान देने की है कि जो हमारा प्यारा भारत था वो प्रथम विश्व युद्ध में सीधे तौर पर शामिल था ही नहीं। हमारी तो लड़ाई

16:36 ही नहीं थी भाई। हमारी तो लड़ाई ही नहीं थी और हम तो इस युद्ध के अंदर शामिल थे ही नहीं। अंग्रेज शामिल थे और अंग्रेजों के शामिल होने की वजह से हमको भी इस युद्ध के अंदर अंग्रेजों के अंग्रेजों ने शामिल कर लिया क्योंकि अंग्रेज इस युद्ध में थे अंग्रेज हम पर राज कर रहे थे तो अंग्रेजों ने भी भारत को इस युद्ध के अंदर शामिल कर दिया। उसी के साथ-साथ जब भी लड़ाई लड़ी जाती है या फिर जब भी युद्ध होता है तो उस युद्ध के अंदर आपके खर्चे होते हैं। आपको हथियार खरीदने होते हैं। आपको सैनिकों को खाना खिलाना होता है। आपको बहुत सारे और इंतजाम करने होते हैं। अंग्रेजों को लड़ाई जीतनी थी। तो अंग्रेजों ने ना क्या किया दोस्तों कि अंग्रेजों ने इस लड़ाई को जीतने के लिए और अपने खर्चे को पूरा करने के लिए भारत के अंदर टैक्स को बढ़ा दिया। यानी कि भारत के लोगों से और पैसा छीनना शुरू कर दिया। भारत के लोगों को और लूटना शुरू कर दिया। पहले ही भारत के लोगों को

17:23 परेशान करते थे और अपनी इस लड़ाई को जीतने के लिए अंग्रेजों ने क्या किया बच्चे? अंग्रेजों ने अपनी इस लड़ाई को जीतने के लिए और अपने खजानों को भरने के लिए यहां पर एक शब्द रखा गया है राजस्व कि अंग्रेजों के खजानों को भरने के लिए भारत के अंदर क्या किया गया? भारत के अंदर बहुत सारे टैक्स को बढ़ाना शुरू कर दिया। यानी कि भारत के लोगों से ज्यादा पैसा लेना शुरू कर दिया। लड़ाई हमारी है ही नहीं। हम तो इस युद्ध के अंदर शामिल भी नहीं है और इसके अंदर इस लड़ाई को जीतने के लिए अंग्रेजों ने हमारे देश के लोगों से पैसा लेना शुरू कर दिया और भारत के लोगों में गुस्सा भरने लग गया है और भारत के लोग अंग्रेजों से क्या करना चाहते हैं? अपने आप को अलग करना चाहते हैं। भारत से अंग्रेजों को हटाने की एक अलग तरीके की चाहत भारत के लोगों में पैदा होने लगी। इसी के साथ-साथ जब अंग्रेजों ने भारत के अंदर सामान क्या करा बेटा कि पैसा ज्यादा

18:08 लेना शुरू कर दिया तो भारत में जो खानेपीने की चीजें हैं ना वो बहुत ज्यादा महंगी हो गई। इतनी महंगी हो गई। इतनी महंगी हो गई कि चीजों के दाम आपको दुगने होते हुए देखने को मिले कि अगर कोई चीज़ ₹10 की थी ₹20 की हो गई। अगर कोई चीज़ ₹100 की थी तो ₹200 की हो गई। ज्यादा टैक्स लेने की वजह से बड़ी संख्या के अंदर भारत के अंदर जो खाने-पीने का सामान था जो साधारण से साधारण चीजें थी आप देखते हैं दोस्तों कि वो बहुत ज्यादा महंगी हो गई और आम आदमी जो गरीब पब्लिक थी उनके लिए बेचारों के लिए कुछ रहा ही नहीं। गरीब जनता के दिल में अंग्रेजों के प्रति गुस्सा बड़ी संख्या में भर गया और भारत की जो एक गरीब जनता थी, आम आदमी थी, यह अंग्रेजों के प्रति बहुत ज्यादा गुस्सा हुई। इसी के साथ-साथ अंग्रेजों ने एक बहुत बड़ी और गलती करी क्या? कि भारत के लोगों को जबरदस्ती सेना में शामिल करना शुरू कर दिया। आपके सामने ये दोनों चित्र असली

18:54 चित्र हैं। ये प्रथम विश्व युद्ध के अंदर शामिल हुए वो हमारे सैनिक हैं जिनको जबरदस्ती अंग्रेजों ने शामिल किया। ये भारत के लोग थे। हमारे पूर्वज हुआ करते थे आपके और हमारे। और आप देखते हैं दोस्तों कि अंग्रेजों ने जबरदस्ती इनको अपनी सेना में शामिल किया और इनको यूरोप में ले गए और इनकी आप देखते हैं दोस्तों कि जाने चली गई। जबरदस्ती इनको शामिल करना शुरू किया और इसकी वजह से भी भारत के लोगों में बहुत ज्यादा गुस्सा अंग्रेजों के प्रति भरना शुरू हुआ कि जबरदस्ती अंग्रेज जो हैं वो भारत के लोगों को अपनी सेना में शामिल क्यों कर रहे हैं? क्योंकि ये लड़ाई तो हमारी है ही नहीं। ये तो अंग्रेजों की लड़ाई है। खुद लड़ो हमें क्यों लेके जा रहे हो? उसी के साथ-साथ इस समय में कि जब प्रथम विश्व युद्ध चल रहा है साल 1914 से साल 1918 के आसपास भारत के अंदर एक और बड़ी समस्या आई कि भैया हमारे पास फसल खराब हो गई यानी कि अकाल पड़ गया, पानी की

19:42 कमी हुई और जो हमारी फसलें थी वो खराब हो गई। भोजन की कमी होते हुए देखने को मिली। देश की स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है इस टाइम पर। हमारे देश से अंग्रेज पैसा छीने जा रहे हैं, लूटे जा रहे हैं, टैक्स लिए जा रहे हैं। देश में महंगाई बढ़ चुकी है। देश के सैनिकों को, देश के नौजवानों को, गांव के इलाकों के लड़कों को जबरदस्ती सेनाओं में शामिल कर रहे हैं। और उसी के साथ-साथ हमारे देश के अंदर अब खाने की कमी भी हुई है क्योंकि हमारी फसलें हमें खराब होती हुई दिखी। और भाई यहां पर एक बहुत बड़ी और खतरनाक सिचुएशन आती है। क्या? हमारे देश के अंदर एक बड़ी महामारी आ जाती है जिसे हम लोग इनफ्लुएंजा महामारी कहते हैं। महामारी का मतलब जैसे अभी आप लोग परिचित होंगे कोरोना महामारी से कोविड आया था ना और कोविड के टाइम पर आप सभी को पता है दोस्तों कि हम सभी घर में थे। है ना? बहुत बड़ी खतरनाक बीमारी थी। ऐसी ही बीमारी कुछ उसी टाइम पर फैली थी और इस

20:28 बीमारी से भी भारत के अंदर आप देखते हैं दोस्तों कि लाखों लाख लोग मर जाते हैं। मगर अंग्रेज इस बीमारी से भारतीयों का कोई इलाज नहीं कराते। भाई अगर तुम हम पर राज कर रहे हो तो हमारे इलाज कराने की जिम्मेदारी भी तो तुम्हारी है। अगर तुम हमारे देश पर कब्जा करके बैठे हो और अगर हम बीमार हुए तो तुम्हारी जिम्मेदारी है इलाज कराने की। अंग्रेजों ने कोई ध्यान नहीं दिया। प्रथम विश्व युद्ध के समय अंग्रेजों ने भारत से टैक्स लूटा। भारत के लोगों से बहुत पैसा लिया। भारत के लोगों को जबरदस्ती सेना में शामिल किया। भारत के अंदर अकाल पड़ गया तो अंग्रेजों ने बिल्कुल भी यहां पर कोई खाने की व्यवस्था नहीं की। भारत के अंदर महामारी फैल गई तो अंग्रेजों ने कोई भी इलाज नहीं कराया और भारत में ज्यादा टैक्स लेने की वजह से हमें यहां पर महंगाई भी बढ़ती हुई दिखी। भारत के लोगों में जो गुस्सा था ना वो बढ़ने लग गया और भारत के लोगों में यहां पर देश प्रेम पैदा होने लग गया। भारत के

21:16 लोगों में यहां पर राष्ट्रवाद पैदा होने लग गया कि भैया अब बहुत हुआ। अब ये जो प्रथम विश्व युद्ध है ना इसने भारत के लोगों में कहीं ना कहीं आप देखते हैं दोस्तों कि देश प्रेम को पैदा कर दिया और भारत के लोग एक तरीके से ना अपने गुस्से को भरे पड़े अपने सब भारतीयों के दिल में अंग्रेजों के प्रति गुस्सा भरा पड़ा था और इस गुस्से को राह दिखाने वाला एक आदमी आता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं किसकी बेटा? हम यहां पर बात कर रहे हैं महात्मा गांधी जी की। महात्मा गांधी जी कहानी के अंदर आ रहे हैं। और महात्मा गांधी जी ये जो पूरा का पूरा गुस्सा है जो भारतीयों के दिल में भरा हुआ है। इस गुस्से को बहुत अच्छे तरीके से क्या करेंगे? संभालने की कोशिश करेंगे और भारतीयों के सामने बहुत सारी इंटरेस्टिंग बिंदु यहां पर हमें होता हुआ देखने को मिलता है। तो गांधी जी भारत कब आए? 9 जनवरी साल 1915

22:04 में गांधी जी भारत आते हैं। और गांधी जी जब भारत आए तो आपको कहां से दिखता है बेटा कि गांधी जी कहां से भारत आए? दक्षिण अफ्रीका से भारत आए। सर दक्षिण अफ्रीका गए ही क्यों थे गांधी जी? अरे भैया वकील थे वकालत करने गए थे। क्या करने गए थे? वकील थे। इनकी नौकरी वहां लगी थी तो वहां पर वकालत करने गए थे। अच्छा जैसे अंग्रेजों ने भारत को गुलाम बनाया हुआ था। वैसे ही दुनिया भर के सारे देशों पर अंग्रेजों का कब्जा था। दक्षिण अफ्रीका जहां पर अंग्रेज जहां पर गांधी जी काम करने गए थे साउथ अफ्रीका वहां पर भी अंग्रेजों का कब्जा था और वहां पर भी अंग्रेजों ने ना क्या करते थे दोस्तों कि वहां पर अंग्रेज रंगभेद की नीति करते थे। रंगभेद की नीति मतलब काले गोरे का अंतर करते थे। अंग्रेज बोलते थे कि यो यो वी आर वाइट पीपल एंड वी वुड बी नोइंग आवरसेल्व्स एस अ वाइट पीपल एंड वी

22:50 वुड बी कंस्ट्रक्टिंग आवरसेल्फ एस अ लीड ग्रुप। ऐसे बोलते थे। मैं वहां मौजूद था। अंग्रेज अपने आप को बोलते थे कि भैया अपन लोग सफेद चमड़ी के हैं। हम लोग गोरी चमड़ी के हैं और हम लोग ऊपर हैं। और भारत के लोग हुए, एशिया के लोग हुए, अफ्रीका के जो काले लोग हुए उनको बहुत ज्यादा परेशान करते थे। तो गांधी जी ने ना अफ्रीका के अंदर ही इस रंगभेद की नीति का विरोध किया था। फिलहाल गांधी जी साल 9 जनवरी 1915 को भारत आए। भारत में आने के बाद गांधी जी ने ये महसूस किया कि भारत के लोग परेशान हैं। और गांधी जी ने ना एक तरीके से एक तरकीब सोची। क्या सोची? गांधी जी ने एक बात प्रस्तुत की कि गांधी जी पूरे भारत का क्या करते हैं बेटा पूरे भारत का भ्रमण करते हैं। भ्रमण का मतलब क्या कि गांधी जी पूरे भारत के अंदर घूमते हैं। पूरे भारत के अंदर आप क्या करते हैं दोस्तों? घूमते

23:36 हैं और पूरे भारत में जाने के बाद गांधी जी को यह बात समझ में आती है कि भारत के लोगों में गुस्सा है। भारत के लोगों में अंग्रेजों के प्रति गुस्सा है और गांधी जी अब एक नया आईडिया पेश करते हैं जिसे सत्याग्रह कहा जाता है। इस सत्याग्रह का क्या है कि गांधी जी ना एक विचार पेश करते हैं। सत्याग्रह क्या है बेटा कि सत्याग्रह एक विचार है या फिर आप कह सकते हैं कि ये एक तरीके का आईडिया है। एक सोच है और इस सोच के अंदर गांधी जी क्या बोलते हैं? गांधी जी ये बोलते हैं कि अगर आप लड़ना चाह रहे हैं अगर आप लड़ना चाह रहे हैं तो आपको अपने दुश्मन को हराने के लिए क्या नहीं करना है? आपको अपने दुश्मन को हराने के लिए किसी भी तरीके से क्या नहीं करना दोस्तों कि किसी भी तरीके से हिंसा नहीं करनी है। है ना? तो अगर आप लड़ना चाहते हैं तो आपको हिंसा नहीं करनी है। अगर आप चाहते हैं कि आप जीतें। आप अपने दुश्मन को

24:21 हराना चाहते हैं तो आपको हिंसा करने की जरूरत नहीं है। यानी कि बंदूकें, तलवें उठाने की जरूरत नहीं है। बल्कि आप अहिंसा के मार्ग पर चलकर अहिंसा का मतलब क्या है? कि हम लोग आंदोलन करेंगे। भारत के लोग जमा होंगे। हम आंदोलन कर कर भारत के लोग क्या करेंगे? अपनी बातों को अंग्रेजों से मनवाएंगे। है ना? तो गांधी जी साल 1915 में भारत आए। भारत में आने के बाद गांधी जी ने सत्याग्रह की विचारधारा को रखा। सत्याग्रह का मतलब क्या है मेरे प्यारे बच्चे? सत्याग्रह का मतलब है सच का रास्ता। सत्याग्रह का मतलब क्या है? सच का रास्ता। भारत के लोग सच पर थे। अगर मैं आपसे पूछूं कि कौन लोग भारत के अंदर सच पर थे? क्या अंग्रेज सच्चे थे? नहीं सर, अंग्रेज तो झूठे थे। अंग्रेज तो भारत को लूट रहे थे। अंग्रेज तो भारत को कमजोर कर रहे थे। भारत के लोग सच पर थे। भारत के लोगों की ये जमीन थी। भारत के लोगों की ये धरती थी। यह हमारी जमीन थी। तो इसीलिए गांधी जी ने कहा कि अगर आपकी लड़ाई का

25:07 उद्देश्य सही है। अगर आप सच बात पर लड़ रहे हैं तो लड़ने के लिए हथियार उठाने की जरूरत नहीं है। आप आंदोलन कर कर क्या करेंगे? अपने देश को आजाद कराएंगे। और अब इसी बात को लेकर गांधी जी के जरिए आप देखते हैं दोस्तों कि हमारे तीन बड़े आंदोलन किए जाएंगे। साल 1917 का चंपारण का किसान आंदोलन, साल 1918 का खेर का किसान आंदोलन और साल 1918 में ही अहमदाबाद के मिल मजदूरों का आंदोलन। ध्यान से सुनिएगा कि आप लोगों की पाठ्यपुस्तक में साल 1916 लिखा हुआ है चंपारण के बारे में जो गलत है। उसको सही कर लीजिए। चंपारण का जो आंदोलन हुआ है वो साल 1917 में हुआ है और इस बिंदु को हम लोग यहां पर एक-एक कर कर आपके सामने समझने की कोशिश करते हैं। सबसे पहले अब ये जो हमारा चंपारण का किसान आंदोलन हो रहा है इस चंपारण के किसान

25:53 आंदोलन की पूरी की पूरी जो कहानी है ना उसको हम लोग एक-एक कर कर आपके सामने यहां पर पेश करना शुरू करते हैं। तो पूरा फोकस स्क्रीन पे रखिएगा। ठीक है बेटा? ध्यान से देखते हैं। ध्यान से देखिएगा कि अगर हम ध्यान से देखें तो ये हमारा पूरा का पूरा बिहार है और बिहार के अंदर आपको एक इलाका देखने को मिलता है या फिर एक क्षेत्र देखने को मिलता है जिसे हम लोग चंपारण कह रहे हैं। ये रहा बहुत खूबसूरत जगह है कभी जाइएगा। चंपारण के अंदर अगर आप देखें ना दोस्तों तो वहां पर एक आंदोलन शुरू होता है और इसमें गांधी जी को आमंत्रित किया जाता है और गांधी जी इस आंदोलन में जाते भी हैं और इस आंदोलन को सफल भी करते हैं। आखिर यहां पर परेशानी क्या थी? देखो ये जो चंपारण है ये बिहार के अंदर है और ये नेपाल से बहुत ज्यादा पास है। नेपाल और बिहार का जो बॉर्डर है बहुत पास है। वहीं पर हमारा चंपारण जिला देखने को मिलता है। चंपारण के अंदर ना नील की खेती हुआ करती है। अब ये नील की खेती क्या है? भाई नील

26:39 एक तरीके का ये आप देखते हैं दोस्तों कि ये पौधा होता है नील का और इससे ना हमें ये पदार्थ निकलता हुआ दिखता है। आज के टाइम पर हमें कपड़े रंगने के लिए हमारे पास डाई या फिर कलर होते हैं। जैसे ये जो कमीज है ये काले रंग में है क्योंकि इसको काले रंग में डाई किया गया है। आपने लाल पीले नीले गुलाबी हरे रंग की कमी कपड़े पहन रखे होंगे। है ना? तो कपड़ों को आज डाई किया जा सकता है। लेकिन पुराने समय में हमारे पास प्राकृतिक कलर होते थे। और नील जो था यह बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण कलर था जो कपड़ों को रंगने के लिए प्रयोग में लाया जाता था। और इसी को हम लोग नील कहते हैं। अब ये जो नील की खेती थी ना ये हमारे प्यारे नेपाल हमारे चंपारण में ही हुआ करती थी। नील की खेती करने की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अगर आपके पास नील का खेत है। मान लीजिए कि मेरे पास नील का खेत है और अगर मैंने नील के खेत अगर मैंने नील की

27:25 खेती की तो धीरे-धीरे मेरा जो खेत है वो कैसा हो जाता है? धीरे-धीरे मेरा खेत बंजर हो जाता है। और किसान लोग बहुत ज्यादा परेशान होते हैं। अंग्रेज बहुत चालाक अंग्रेज बोलते थे कि पूरी तुम्हारी जो खेत है ना उस पर तुम्हें क्या है नील की खेती करने की जरूरत नहीं है बल्कि अंग्रेज बोलते थे 85% जमीन पर जो उगाना है उगाओ 15% जमीन पर तुम्हें क्या करनी पड़ेगी तुम्हें नील की खेती करनी पड़ेगी और ये जो 15% जमीन पर अंग्रेज नील की खेती कराते थे इसी को बोलते थे तीन गठिया प्रणाली तीन गठिया प्रणाली क्या है अंग्रेज बोलते थे कि 15% जमीन पर तुम्हें नील की खेती करनी पड़ेगी नील की खेती अगर आप लगातार किसी जमीन पर करते रहते हैं तो जमीन अपनी उत्पादकता की क्षमता खो देती जमीन बंजर हो जाती है और हमारे किसान बहुत ज्यादा परेशान हो जाते हैं। अब होता क्या है? इसको हम लोग यहां पर अच्छे तरीके से डिस्कस करते हैं। सबसे पहले चंपारण के जो

28:12 किसान थे ना वो क्या करते हैं बेटा? चंपारण के जो किसान थे वो खुद ही आंदोलन करते हैं। वो खुद ही एक तरीके से क्या करते हैं? आंदोलन करते हैं। लेकिन अंग्रेज चंपारण के किसानों को दबा देते हैं। उनको भगा देते हैं और उनको हटा देते हैं। खबर पहुंच चुकी थी चंपारण में कि भाई एक आदमी आया है दक्षिण अफ्रीका से। वो आदमी बोलता है कि अगर तुम सच के रास्ते पर हो तो तुम्हें अहिंसा को ले चलना होगा और अहिंसा के जरिए हम लोग अपनी बातों को मनवा सकते हैं। गांधी जी को चिट्ठी लिखी गई और बुलाया गया कि आप हमारी मदद के लिए आए। आप कहते हैं ना कि आप समस्या का निवारण करा सकते हैं। हम परेशान हैं। हमारी मदद कीजिए। गांधी जी पहुंचते हैं चंपारण और चंपारण में जाने के बाद वहां के लोगों से कहते हैं कि हम आंदोलन करेंगे। गांधी जी के पहुंचने से चंपारण के किसानों में जोश आता है और वहां पर आप देखते हैं दोस्तों

28:59 कि भारत के अंदर सबसे पहला आंदोलन होता है जिसे हम लोग चंपारण का किसान आंदोलन कहते हैं। अंग्रेजों पर प्रेशर पड़ता है। भारत के लोग शांतिप्रिय तरीके से आंदोलन करते हैं। बहुत लंबे दिनों तक ये आंदोलन चलता है और आखिर में अंग्रेजों को बातें माननी पड़ती हैं। और भारत के अंदर यह सबसे पहला सफल आंदोलन होता है। क्या हुआ कि भारत के अंदर यह हमारा सबसे पहला सफल आंदोलन गांधी जी ने किया। और गांधी जी के इस आंदोलन के बाद लोगों में यह विश्वास हुआ कि भाई गांधी जी में सच में कुछ बात तो है कि गांधी जी जो बात कह रहे हैं वो हुआ कि चंपारण के लोग इकट्ठा हुए और अपनी बातें उन्होंने अंग्रेजों से मनवा ली और गांधी जी का ये सबसे पहला सफल आंदोलन हमें यहां पर होता हुआ देखने को मिला। इसी के बाद चंपारण की सफलता के बाद हमें देखने को मिलता है कि साल 1918 का समय है और साल 1918 में ना जो अहमदाबाद का गुजरात शहर है

29:46 गुजरात में अहमदाबाद शहर है यहां पर बहुत सारी मिल हैं कपड़े की मिल मिल का मतलब होता है फैक्ट्रियां हैं और इन मिलों में भी आप देखते हैं दोस्तों कि एक बहुत बड़ी परेशानी होती है और गांधी जी यहां पर क्या करते हैं दोस्तों कि गांधी जी अहमदाबाद जाकर यहां के मजदूरों की मदद करने की कोशिश करते हैं। है ना? अब ये पूरा का पूरा सिचुएशन क्या है? इसको हम लोग यहां पर समझते हैं। देखिए गुजरात के अंदर एक शहर है जिसको हम लोग अहमदाबाद कह रहे हैं। साल 1918 का यहां पर हमें समय देखने को मिला। साल 1918 में गुजरात के शहर के अंदर एक बीमारी फैली जिसे प्लेग कहा जाता है। और ये प्लेग बीमारी कैसे फैलती है? यह प्लेग बीमारी चूहों के होने से फैल जाती है। जब बहुत सारे चूहे होते हैं, उनके होने से आप देखते हैं दोस्तों कि यह जो बीमारी है, प्लेग बीमारी ये हो जाती है। प्लेग बीमारी से बहुत सारे मजदूर बहुत

30:31 परेशान हुए अहमदाबाद के गुजरात के। मजदूरों ने अपने मालिकों से कहा कि भैया 50% पैसा बढ़ा के दो। मालिकों ने कहा कि हां भाई तुम्हारी बात तो सही है। तुम लोग परेशान हो। लेकिन 50% पैसा नहीं बढ़ा सकते। हम सिर्फ 20% पैसा बढ़ा सकते हैं। इस बात पर मजदूर कह रहे हैं कि नहीं नहीं हमको तो 50% पैसा चाहिए और जो फैक्ट्री मालिक है वो कहते हैं कि हम सिर्फ 20% पैसा बढ़ाएंगे। इस बात को लेकर आप देखते हैं दोस्तों कि अहमदाबाद में मजदूर हड़ताल करते हैं और मजदूर आंदोलन करते हैं। गांधी जी को बुलाया जाता है। गांधी जी पहुंच गए अहमदाबाद। ये वहीं का फोटो है आपके सामने रखा गया है। गांधी जी यहां पर गए और गांधी जी ने यहां पर मध्यस्था करने की बात की। मध्यस्था का मतलब कि गांधी जी ने कहा भाई आपकी भी बात सुन लेंगे। आपकी भी बात सुन लेंगे। चलो कुछ बीच का रास्ता निकाला जाए। गांधी जी यहां पर मध्यस्था करने की बात

31:16 करते हैं। गांधी जी के पहुंचने के बाद यहां पर डिसाइड होता है कि ना तो 50% पैसा मिलेगा जो मजदूर मांग रहे हैं और ना ही 20% पैसा मिलेगा जो फैक्ट्री मालिक दे रहे हैं। बल्कि 35% पैसा बढ़ाकर दिया जाए। और इस 35% को बढ़ाने के बाद आप देखते हैं दोस्तों कि यहां पर एक तरीके से ये दूसरा सफल आंदोलन था जो गांधी जी ने किया और इसके बाद गांधी जी की पॉपुलैरिटी और ज्यादा बढ़ गई। गांधी जी भारत के अंदर और मशहूर हो गए। यही वो आंदोलन था अहमदाबाद का आंदोलन जिसमें सबसे पहली बार गांधी जी ने भूख हड़ताल किया और इसी आंदोलन के अंदर आप देखते हैं दोस्तों कि इसी आंदोलन के अंदर गांधी जी ने बहुत बेहतरीन तरीके से इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। तो दोनों आंदोलनों को हमने देखा। चंपारण का आंदोलन भी देख लिया और उसी के साथ-साथ हमने आप सभी के साथ हमारा जो अहमदाबाद का आंदोलन

32:02 था उसकी पृष्ठभूमि को भी अच्छे तरीके से समझा। सर ये चंपारण कहां है? बिहार के अंदर है। अब यहां पर साल 1918 में एक और आंदोलन गांधी जी कर देते हैं। और ये जो आंदोलन आपको होता हुआ दिखता है वो गुजरात। ये भारत का नक्शा है। भारत के नक्शे में ये गुजरात है और गुजरात में ये नन्हा मुन्न्हा छोटा सा हमारा इलाका है जिसे हम लोग खेड़ा कहते हैं। है ना? अब गुजरात के अंदर जो हमारे ये खेड़ा के किसान हैं इनकी क्या परेशानी है? हम देखते हैं तो भैया गुजरात का साल 1918 का ही समय है और साल 1918 में गुजरात के अंदर आपको देखने को मिलता है कि खेड़ा नामक जगह है। है ना? खेड़ा नामक आपको जगह दिखती है। खेड़ा के जो किसान थे ना वो परेशान थे। किस बात से परेशान थे? खेड़ा के किसान इस बात से परेशान थे कि जो उनकी फसल थी ना वो खराब हो गई थी। उनको नुकसान हुआ था। और किसानों

32:49 ने कहा था कि भैया हम लगान नहीं दे सकते हैं। लगान का मतलब क्या है? लगान का मतलब होता है टैक्स या फिर आप क्या कह सकते हैं कि फसल पे लगने वाला जो टैक्स होता है या फिर कर होता है उसे लगान कहा जाता है। किसानों ने कहा खेड़ा के कि भाई हमारे पास अभी फसल नहीं है। हमें नुकसान हुआ है। हम बाद में तुमको पैसा दे देंगे। अंग्रेजों ने कहा कि नहीं भैया हमें मतलब नहीं है। तुम्हारे पास नुकसान हो फायदा हो हमें तो पूरा पैसा चाहिए। खेड़ा को किसानों को गुस्सा आ गया और किसानों ने कहा कि भैया हम तुम्हारे खिलाफ अब हड़ताल कर रहे हैं और हम तुम्हारे खिलाफ एक बहुत बड़ा आंदोलन कर रहे हैं और खेड़ा के किसानों ने क्या किया दोस्तों कि एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जिसे खेड़ा आंदोलन कहा गया और खेड़ा के किसानों ने गांधी जी को आमंत्रित किया कि आइए आप चंपारण गए थे अहमदाबाद गए थे हमारी भी मदद कीजिए गांधी जी पहुंचते हैं और

33:35 गांधी जी के पहुंचने से अंग्रेजों पर दबाव पड़ता है और अंग्रेज क्या कर लेते हैं अंग्रेजों को जो टैक्स मांग रहे थे पैसा मांग रहे थे वो छोड़ना पड़ता है और यह तीसरा सफल सफल आंदोलन गांधी जी के पहुंचने से हो जाता है। है ना? यह तीसरा सफल आंदोलन गांधी जी के पहुंचने से यहां पर होता है। है ना? तो किसान क्या करते हैं दोस्तों? के किसान को पूरी-पूरी छूट दी जाती है और इसी आंदोलन में सरदार पटेल और गांधी जी की मुलाकात होती है और सरदार पटेल गांधी जी उसके बाद से एक अच्छे मित्र बन जाते हैं। अब यहां तक तो हमने आप सभी के साथ गांधी जी और गांधी जी के आने के बाद भारत में किस तरीके से बेहतरीन बदलाव हो रहे हैं। भारत के लोगों में विश्वास आ रहा है कि अगर अपन लोग इकट्ठे रहेंगे तो शायद हम लोग अपनी बातें अंग्रेजों से मनवा सकते हैं और ऐसा हुआ भी चंपारण का आंदोलन हो, खेड़ा का आंदोलन हो, अहमदाबाद का आंदोलन हो। ये तीनों आंदोलन सफल हुए और अब भारत के लोगों में विश्वास आ चुका है। कुछ क्वेश्चंस करते हैं। सवाल है पेपर में आया

34:22 है और अच्छे तरीके से आप लोगों को अपने आंसर को देना है। भैया पोल-वोल तो होगा नहीं। ए बी सी डी करके आपको कमेंट्स में आंसर लिख देना होगा। ठीक है? ध्यान से हम लोग इसको देखते हैं। सवाल है कि प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत कब हुई है? चार ऑप्शंस आपके सामने हैं। जल्दी से आप सभी लोग अपने आंसर को यहां पर लिख देंगे। पोल होगा नहीं भैया। ए बी सी डी करके फटफट फटफट फटफट आपको कमेंट्स के अंदर अपने आंसर को लिखना है। जल्दी से बताइएगा। बहुत बेहतरीन तरीके से आप लोगों के क्वेश्चंस यहां पर हम लोग देख रहे हैं। तो प्रथम विश्व युद्ध की जो शुरुआत है ये साल 1914 के अंदर हमें होती हुई दिखी। हमारे हर एक बच्चे ने बिल्कुल बेहतरीन तरीके से अपने सही आंसर को हमारे सामने पेश किया। बहुत बढ़िया बच्चे, बहुत बढ़िया। अगला सवाल है पेपर में आया हुआ है कि गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत कब आए? चार ऑप्शंस आपके सामने हैं। जल्दी से आपको अपने सही आंसर को यहां पर बताना होगा। ठीक है? जल्दी से

35:07 आपको बताना होगा कि भारत के अंदर गांधी जी आगमन कब करते हैं? गांधी जी भारत के अंदर वापसी कब करते हैं? और चारों ऑप्शंस को देखते हुए आप लोग अपने सही आंसर यहां पर हमारे सामने बता रहे हैं। बहुत बढ़िया। तो गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत कब आते हैं? बच्चे? गांधी जी साल 1915 में आप देखते हैं कि भारत आते हैं और 9 जनवरी को गांधी जी भारत आते हैं। अगर डेट भी आपसे पूछ ली जाए तो। अगला मतलब सवाल आपके सामने पूछा जाता है कि सत्याग्रह का क्या अर्थ है? चार ऑप्शंस आपके सामने हैं। ए बी सी डी करके बता दीजिए। बहुत अच्छा सवाल है। है ना? और आप लोग बहुत अच्छे तरीके से अपने आंसर को दे रहे हैं कि सत्याग्रह का क्या अर्थ है? सत्य का रास्ता, जटिलता का रास्ता, किसानों का रास्ता या फिर मजदूरों का रास्ता। और बहुत प्यारे तरीके से आप सारे बच्चों के आंसर्स यहां पर हम लोग देख

35:55 पा रहे हैं। जल्दी बताइएगा। है ना? बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया बेटा। जल्दी बताइए। ए बी सी डी करके हमारे आंसर्स आ रहे हैं। सत्याग्रह का मतलब होता है मेरे प्यारे बच्चे सत्य का रास्ता यानी कि सच का रास्ता। बढ़ते हैं आगे। अगला सवाल है कि गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में भी अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह या फिर आंदोलन किए थे और वो वहां पर किस बात के खिलाफ विरोध कर रहे थे? वो रॉबर्ट मुगाबे करके एक आदमी था उसका विरोध कर रहे थे। माइक टाइससन का विरोध कर रहे थे जो बॉक्सिंग करते हैं। नेल्सन मंडेला जी का कर रहे थे या फिर रंगभेदी जो अंग्रेजों की सरकार थी उसका विरोध कर रहे थे। चार ऑप्शंस आपके सामने। जल्दी से आप बताइएगा कि यहां पर हमारा कौन सा ऑप्शन आपको बिल्कुल सही देखने को मिल रहा है। सर दिल्ली में बहुत तेज बारिश हो रही है। अच्छा हमें तो पता ही नहीं था। है ना? बहुत अच्छे तरीके से आपने अपने आंसर को दिया कि गांधी जी जब दक्षिण अफ्रीका गए

36:41 हैं और दक्षिण अफ्रीका में वहां की जो रंगभेदी सरकार थी जो गोरे कालों के बीच में डिफरेंसेस किया करती थी ना उसी के खिलाफ गांधी जी विरोध करते हैं। अगला सवाल। चंपारण आंदोलन का उद्घोष कब हुआ है? पेपर में साल 1916 लिखा है वो सही नहीं है। याद कर लीजिएगा। चंपारण आंदोलन का उद्घोष कब हुआ है? ये आपके सामने आप देखते हैं दोस्तों के चार ऑप्शंस हैं और जल्दी से आप सभी बच्चों को अपने सही आंसर को हमारे सामने बताना है। फटफट फटफट कर कर आप लोग अपने आंसर्स को दे रहे हैं। बता दीजिए बहुत ही जबरदस्त तरीके से आपके आंसर्स यहां पर हमारे सामने आने लग गए हैं। बहुत बढ़िया। तो यहां पर अगर हम लोग ध्यान से देखें। हमने देखा दोस्तों कि जो चंपारण का यह जो आंदोलन है, इसकी शुरुआत साल 1917 के अंदर हमें होती हुई दिखी। और ऑप्शन ए हमारा बिल्कुल सही है। अगला सवाल ये जो तीन कठिया प्रणाली रही थी मेरे भाई, ये किन पर

37:28 लागू हुआ करती थी? ये जो तीन कठिया प्रणाली थी, यह आखिर किन पर लागू होती थी? उद्योगपतियों पर, व्यापारियों पर, श्रमिकों पर या फिर किसानों पर? ये जो तीन गठिया प्रणाली थी, यह किन पर लगा करती थी? यह सवाल आपके सामने है और जल्दी से आप सभी लोग अपने सही आंसर को यहां पर हमारे सामने बताएंगे। बहुत अच्छे तरीके से आप लोगों के आंसर्स यहां पर हम लोग देख पा रहे हैं। बहुत बढ़िया बेटा। तो हमारी ये जो तीन कठिया प्रणाली है इसकी शुरुआत किसानों पर होती थी और किसानों से 15% जमीन पर नील की खेती कराने को ही हम लोग तीन कठिया प्रणाली के नाम से जाना करते हैं। अगला सवाल है और बहुत अच्छे तरीके से हम लोग इसको डिस्कस करेंगे कि चंपारण के आंदोलन में नेता कौन थे? किन्होंने उस चंपारण के आंदोलन को लीड किया था या फिर उसका नेतृत्व संभाला था? नेहरू जी, गांधी जी,

38:15 सुभाष चंद्र बोस साहब या फिर भगत सिंह जी? चार ऑप्शंस आपके सामने। चारों ऑप्शंस को देखिए और बता दीजिए कि यहां पर दिए गए ऑप्शंस में कौन सा आपको सही लगता है। फटफट फटफट जल्दी बताइए। जल्दी से बता दीजिए। बेहतरीन तरीके से हम लोगों ने अपने सारे बिंदुओं को एक-एक कर कर आपके सामने रख दिया। बहुत बढ़िया। टाइम कंप्लीट हुआ। तो अगर हम लोग देखें दोस्तों कि जो हमारा चंपारण था इसके अंदर गांधी जी पहुंचते हैं और गांधी जी के पहुंचने से ही यह जो आंदोलन था ये हमें बिल्कुल सही तरीके से आगे बढ़ता हुआ देखने को मिलता है। ठीक है? अगला सवाल गांधी जी का सबसे पहला किसान आंदोलन कौन सा रहा है? ये पूछा जा रहा है। साबरमती, दांडी, खेड़ा या फिर चंपारण? चार ऑप्शंस आपके सामने हैं। गांधी जी का सबसे पहला आंदोलन, सबसे पहला सफल आंदोलन कौन सा है? ये पूछा जा रहा है और जल्दी से आपको

39:01 अपने आंसर को यहां पर देना है। सर जी आप कक्षा 10वीं 11वीं में नहीं पढ़ाते नहीं 11वीं में नहीं 12वीं में पढ़ा रहे हैं। जल्दी बताइए। गांधी जी ने पहला किसान आंदोलन कब प्रारंभ किया? चारों ऑप्शंस को अपन लोग देख रहे हैं और जल्दी-जल्दी से आप सभी लोग अपने सही आंसर को बता रहे हैं। बहुत प्यारा सवाल है पेपर के संदर्भ में बहुत ज्यादा महत्वपूर्णता रखता है। तो हम लोग अगर देखें दोस्तों कि गांधी जी ने जो सबसे पहला अपना किसान आंदोलन किया वो चंपारण के अंदर किया है और जो ये सबसे पहला सफल आंदोलन कहा जाता है। एक और सवाल देखते हैं मेरे दोस्तों। पूछा जा रहा है कि जो खेड़ा का आंदोलन था वो किस चीज पर आधारित था? जो खेड़ा का आंदोलन था वो कौन लोग कर रहे थे? किसान, मजदूर, जमींदार या फिर इनमें से कोई भी नहीं। खेड़ा के अंदर जो साल 1918 में आंदोलन किया जाता है वो किन लोगों के जरिए किया जा रहा है? इस

39:46 आंसर को आपको हमारे सामने यहां पर पेश करना है। जल्दी से बता दीजिए। बहुत बेहतरीन तरीके से आंसर आ रहा है और हमारा हर बच्चा बहुत अच्छे तरीके से आंसर दे रहा है। तो जो खेड़ा का आंदोलन है वो विशेषकर हम देखें दोस्तों कि जो वहां के किसान थे ना उनके जरिए किया गया था और ऑप्शन ए हमारा यहां पर बिल्कुल सही हमें देखने को मिला। बहुत बढ़िया। तो यहां तक कि जो हमारी बातचीत थी उसको हम लोग समझ गए और हमने ये देखा कि हमारे प्यारे भारत देश के अंदर ना गांधी जी के आ जाने के बाद एक तरीके से विश्वास पैदा हो गया। भारत के लोग पहले अंग्रेजों से घबरा रहे थे। भारत के लोगों में प्रथम विश्व युद्ध में सिर्फ गुस्सा था। इस गुस्से को सही दिशा देने वाला आदमी आ चुका था और गांधी जी ने उस दिशा को बहुत अच्छे तरीके से आगे बढ़ाया। हमने चंपारण का आंदोलन किया। अंग्रेजों से अपनी बातें मनवाई। हमने अहमदाबाद का

40:33 आंदोलन किया। हमने फैक्ट्री मालिकों से अपनी बातें मनवाई। हमने खेड़ा का आंदोलन किया और अंग्रेजों से अपनी बातें मनवाई। भारतीयों के दिल में जो अंग्रेजों के प्रति डर था ना वो खत्म हो गया। और अंग्रेजों ने भी ये देखा कि भारत के लोग हमसे डरते नहीं है भाई। अंग्रेजों ने भी इस बात को नोटिस किया कि अंग्रेजों ने इस बात को महसूस कर लिया और नोटिस किया कि भारत के लोगों में जो डर था ना वो खत्म हो चुका है और भारत के लोग आंदोलन करते हैं। अपनी बातें मनवा लेते हैं। अंग्रेजों ने कहा कि कुछ करना पड़ेगा। टाइम आता है साल 1919 का। साल 1919 में अंग्रेज एक कानून बनाते हैं और इस कानून को क्या बोला जाता है? इस कानून को रोलेट एक्ट कहा जाता है। एक्ट का मतलब क्या होता है? एक्ट का मतलब होता है कानून। इस कानून में यह बात बोली जाती है कि भैया अगर अंग्रेजों को किसी भी भारतीय पर संदेह हुआ या फिर अंग्रेजों को

41:21 किसी भी भारतीय पर शक हुआ तो अंग्रेज सीधा आपको जेल में डाल देंगे। और कब तक के लिए डाल देंगे? सीधा आपको 2 साल तक के लिए जेल में डालने की बात इस कानून के तहत की गई थी जिसे रोलेट एक्ट कहा गया कि 2 साल तक के लिए आपको सीधा जेल में डाल दिया जाएगा और जब ये कानून लागू किया तो भारतीयों के दिल में गुस्सा आया पहले तो तुम लोग हमारे देश की जमीन पर रहते हो हमें गुलाम बनाकर रखते हो हमें अधिकार नहीं देते हो हम आंदोलन कर रहे हैं तो हमें एक कानून बनाकर तुम रोक रहे हो तो पूरे भारत के अंदर क्या किया जाता है दोस्तों कि गांधी जी इस कानून के विरुद्ध में क्या करते हैं आंदोलन करने की बात करते हैं और भारत के अंदर पूरे के पूरे भारत के जितने भी बड़े शहर थे वहां पर लोग क्या करते हैं दोस्तों कि इस रोलेक्ट एक्ट का विरोध करते हैं। अच्छा ये जो रोलेट कानून था इसको गांधी जी ने काला कानून भी कहा था। क्या बोला था

42:08 बेटा? ये जो हमारा रोलेट कानून था इसको गांधी जी के जरिए काला कानून भी बोला गया था। क्यों बोला था गांधी जी ने इसको काला कानून? काला जो रंग होता है ना यह एक शोक का रंग होता है। गम में डालने वाला रंग होता है। तो गांधी जी का ये मानना था कि जो ये कानून था ना ये भारत के लोगों को गम में ले जाने वाला कानून है और इसीलिए गांधी जी ने इसे काले कानून के नाम से संबोधित किया। ठीक है? अब यहां पर हम लोग जलियांवाला बाग हत्याकांड के बारे में डिस्कशन करेंगे कि पूरे भारत के अंदर लोग रोलेक्ट एक्ट का विरोध कर रहे हैं। और भारत के हर शहर के अंदर चाहे दिल्ली हो, चाहे पंजाब हो, चाहे गुजरात हो। हमारे हर शहर के अंदर आप देखते हैं दोस्तों कि हमें इसी तरीके का विरोध देखने को मिल रहा है और इसी विरोध से संबंधित जो हमारी चीजें हैं उसको हम लोग यहां पर अच्छे तरीके से आपके सामने रख रहे हैं। ठीक है तो यहां पर

42:55 जो हमारे ये बिंदु हैं इनको हम लोग एक-एक कर कर अच्छे तरीके से समझने की कोशिश करते हैं और आगे की कहानी को हम लोग डिस्कस करते हैं। ठीक है? ध्यान से देखिएगा। हुआ क्या कि भैया हमने ये देखा और बहुत अच्छे तरीके से हम लोग क्या करते हैं दोस्तों कि इस बात को देख रहे हैं कि भारत के अंदर रोलेट एक्ट या फिर ये जो कानून था जिसके तहत भारत के लोगों को जेल में डालने की बात थी इसको लागू किया गया और पूरे भारत के अंदर आप देखते हैं दोस्तों कि लोग हड़ताल कर रहे हैं यानी कि सड़कों पर आए हुए हैं। भारत के अंदर आप देखिए दोस्तों कि 10 अप्रैल 1919 की तारीख है। पंजाब का जो हमारा एक शहर है अमृतसर वहां पर बहुत सारे लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। और बहुत सारे लोगों ने क्या किया दोस्तों कि पुलिस पर गोलियां चला दी। और इसी वजह से अंग्रेजों ने उस पूरे शहर के अंदर क्या कर दिया? मार्शल लॉ लागू कर दिया। मार्शल लॉ का मतलब क्या है? कि उस पूरे शहर के अंदर कर्फ्यू लगा दिया। सर कर्फ्यू मेरे को समझ

43:42 में नहीं आता बताओ। अरे लॉकडाउन याद है? जब कोरोना आया था तो लॉकडाउन लगा दिया गया था। कुछ ऐसी ही कहानी आप देखते हैं दोस्तों कि जो हमारा ये पंजाब का हिस्सा था ना वहां पर कर्फ्यू लगा दिया गया था। और इस कर्फ्यू को लगाने की वजह क्या थी? इस कर्फ्यू को लगाने की वजह थी कि जो भारत के लोग हैं उनको विरोध करने का मौका नहीं मिला और पूरे के पूरे पंजाब को संभालने की जिम्मेदारी इस आदमी को दे दी थी जिसका नाम था जनरल डायर। अब क्या होता है इसकी कहानी को हम लोग आगे बढ़ाना शुरू करेंगे और अच्छे तरीके से यहां पर हम लोग समझते हैं। तारीख है 13 अप्रैल 1919। 13 अप्रैल 1919 का दिन है। उस दिन पंजाब के अंदर ना बैसाखी का त्यौहार मनाया जा रहा था। तो लोग बहुत अच्छी खुशी से बैसाखी का त्यौहार मना रहे चलो भैया बैसाखी का त्यौहार है और लोग रोलेट एक्ट का विरोध भी कर रहे थे।

44:27 पंजाब के अमृतसर में ना एक पार्क है, एक बाग है जिसको जलियांवाला बाग कहा जाता है। इस बाग में तीन तरफ से दीवारें आपको दिख रही हैं और एक तरफ से आने जाने का रास्ता हमें दिखता है। भीड़ इस बाग के अंदर जमा हुई हुई थी और यहां पर बैसाखी का त्यौहार मनाया जा रहा था। अचानक इस बाग के अंदर पुलिस आ जाती है या फिर अंग्रेजी सेना आ जाती है और यह अंग्रेजी सेना क्या करती है दोस्तों कि निहत्ते लोगों पर हमला करती है और ये जो जनरल डायर है ये ऑर्डर देता है क्या ये ऑर्डर देता है कि शूट कर दो गोलियां मार दो और इस भीड़ के अंदर बच्चे भी थे महिलाएं भी थी इसके अंदर हमारे बुजुर्ग भी थे इसके अंदर नौजवान भी थे है ना इसमें हमारे हर धर्म हर जाति हर भाषा के लोग शामिल थे उन सभी पर गोलियां चलवा दी गई और इस गोलाबारी में आप देखते हैं

45:13 दोस्तों कि लगभग भग अंग्रेजों के हिसाब से 800 लोगों की मौत हुई थी। भारतीयों के हिसाब से संख्या 10,000 से भी ज्यादा थी। ये जो लोग मरे इनकी गलती क्या थी? क्या ये कुछ गलत काम कर रहे थे? नहीं। ये तो वहां पर शांतिप्रिय तरीके से मौजूद थे। कुछ गलत काम भी नहीं कर रहे थे। कोई हथियार भी इनके खिलाफ इनके पास नहीं थे। सिर्फ अंग्रेजों ने ना भारतीयों में डर बनाने के लिए इस हत्याकांड को किया। और ये जो हत्याकांड हुआ जिसमें हमारे बहुत सारे लोग आपको मरते हुए देखने को मिले। इसके अंदर आप देखते हैं दोस्तों कि जो जनरल डायर था इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाती है। है ना कि यह जो पूरा का पूरा घटनाक्रम हुआ है इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनती है और उस कमेटी को हम लोग हंटर कमेटी के नाम से जानते हैं। ये हंटर कमेटी ये जांच करने के लिए बनाई गई थी या फिर हंटर समिति भी इसे बोला जाता है। जिसका मतलब था कि भैया चेक

45:58 करो कि जो ये पूरा का पूरा घटनाक्रम हुआ था इसकी जिम्मेदारी किसकी थी? तो जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ। और जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद अब भारतीयों के दिल में गुस्सा और ज्यादा भर चुका है। भारत के लोग अब बहुत ज्यादा गुस्सा हो चुके हैं कि हम विरोध करते हैं तो ये रोलेक्ट कानून लेकर आते हैं। हम रोलेक्ट कानून का विरोध करते हैं तो ये हम पर गोलियां चलाते हैं और हमको मारते हैं। भारत के अंदर भारत का हर नेता भारत के अंदर भारत का हर व्यक्ति, भारत के अंदर भारत का हर इंसान गुस्से में था। और इसी कालावधि में भारत के अंदर दो बड़े आंदोलन आपको शुरू होते हुए दिखेंगे। और इन दोनों आंदोलनों की जो पूरी-पूरी कहानी है, उसको हम लोग यहां पर एक-एक कर कर आपके सामने डिस्कस करना शुरू करेंगे। ठीक है? अब यहां पर हम लोग सबसे पहले आप सभी के साथ एक आंदोलन के बारे में डिस्कशन कर रहे हैं। और इस आंदोलन को हम लोग क्या जानते हैं

46:45 बेटा? इस आंदोलन को हम लोग कह रहे हैं खिलाफत आंदोलन। ठीक है? खिलाफत आंदोलन। अब सबसे पहले ये खिलाफत आंदोलन शुरू कब हो रहा है? इसको हम लोग समझने की कोशिश करें। इस खिलाफत आंदोलन साल 1919 के अंदर शुरू हुआ। और इस खिलाफत आंदोलन को शुरू करने वाले कौन लोग हैं? उनके बारे में भी डिस्कशन कर लेते हैं। इस आंदोलन को शुरू किया है दो भाइयों ने जिनको हम लोग अली बंधु के नाम से जानते हैं। बंधु का मतलब होता है ब्रदर्स। एक का नाम आप देखते हैं दोस्तों कि क्या है? एक का नाम है मोहम्मद अली और दूसरे का नाम है शौकत अली। तो ये दो भाई हैं मोहम्मद अली और शौकत अली। इन दोनों भाइयों ने भारत के अंदर यह जो खिलाफत आंदोलन है, यह शुरू किया। अब ये खिलाफत आंदोलन शुरू क्यों किया गया था? इसकी समझ के लिए हमें प्रथम विश्व युद्ध वाले बिंदु पर जाना होगा। देखो जब दुनिया

47:32 में प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था उस टाइम पर एक तरफ आपको ऑटोमन साम्राज्य या फिर तुर्की देश दिख रहा था और उस तरफ दूसरी तरफ हमारे पास अंग्रेज हुआ करते थे। अंग्रेजों का सबसे बड़ा दुश्मन ऑटोमन साम्राज्य था और ऑटोमन साम्राज्य का भी सबसे बड़ा दुश्मन अंग्रेज थे। प्रथम विश्व युद्ध साल 1918 में खत्म हुआ। और इसको इस लड़ाई को कौन जीत गए? इस लड़ाई को आप देखते हैं दोस्तों कि जो ये मित्र राष्ट्र थे या फिर जो धुरी राष्ट्र थे या फिर जो अंग्रेज थे वो जीत गए और अंग्रेजों ने इस लड़ाई को जीतने के बाद बोला कि भैया अब हम किसी को नहीं छोड़ेंगे। अंग्रेजों ने बोला कि जिनको हमने हराया है ना अब हम उन सारे देशों को तोड़ कर रख देंगे। अब हम उन सारे देशों को क्या कर देंगे? तबाह कर कर रख देंगे और उन देशों के सारे शासन व्यवस्था को समाप्त कर देंगे। अंग्रेजों की नजर

48:17 ऑटोबर साम्राज्य पर भी थी या फिर तुर्की भी थे। और तुर्की के अंदर एक आदमी रहा करते हैं जिनको खलीफा बोला जाता है। खलीफा कौन है? जैसे हमारे हर एक धर्म के अंदर सबसे बड़े धार्मिक नेता होते हैं। जैसे हमारे सनातन धर्म के अंदर हिंदू धर्म के अंदर शंकराचार्य होते हैं। जैसे हमारे ईसाई धर्म के अंदर आपको पोप देखने को मिलते हैं। ऐसे ही मुस्लिम धर्म का जो सबसे बड़ा धार्मिक नेता होता है उसको खलीफा कहा जाता है। और ये जो खलीफा भाई साहब थे ये तुर्की में रहते थे। अंग्रेजों ने कहा कि हम तुर्की देश को टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। और जो खलीफा का पद है ना वो भी समाप्त कर देंगे। जब यह वाली बात भारत पहुंची, जब यह वाली बात भारत पहुंची कि भैया अंग्रेज तुर्की को खत्म कर रहे हैं। तुर्की देश को तोड़ रहे हैं। कोई बात नहीं। लेकिन जब ये वाली बात भारत पहुंची कि खलीफा के पद को समाप्त किया जा रहा है।

49:02 तो भारत के लोगों में गुस्सा आया। और खलीफा के पद को बचाने के लिए आप क्या देखते हैं दोस्तों कि जो खलीफा जी थे, उनके पद को बचाने के लिए भारत के अंदर क्या किया गया? खिलाफत आंदोलन को शुरू किया गया। साल 1919 में मोहम्मद अली और शौकत अली ने। और इस आंदोलन को आप देखते हैं दोस्तों कि साल 1924 में समाप्त भी कर दिया गया था। यह आंदोलन जो समाप्त हुआ क्या यह एक सफल आंदोलन था? नहीं भाई ये एक असफल आंदोलन था। ये एक फेल आंदोलन था। क्यों? क्योंकि अंग्रेजों ने साल 1924 में खलीफा का पद समाप्त कर दिया था। अंग्रेजों ने तुर्की देश को भी तोड़ दिया और जो खलीफा का पद था ना उसे भी समाप्त कर दिया। तो जब खलीफा का पद ही नहीं रहा, जब खलीफा की पोस्ट ही नहीं रही, तो फिर खिलाफत आंदोलन को भी समाप्त किया गया। हां, गांधी जी का यह मानना था क्या? गांधी जी का यह मानना था कि भारत के मुसलमान जो इस खिलाफत

49:49 आंदोलन में जुड़े हुए हैं। अगर भारत के हिंदू भाई भी इसमें क्या करें? अगर इसमें भारत के हिंदू भाई भी जुड़ जाएं तो इसके जरिए हम हिंदू मुस्लिम एकता को जरूर कर सकते हैं। हिंदू और मुसलमानों को नजदीक ला सकते हैं। तो गांधी जी ने खिलाफत आंदोलन का पूरा-पूरा समर्थन किया था। अब इसी काल अवधि में भारत के अंदर ना आप देखते हैं दोस्तों कि एक और बड़े आंदोलन की शुरुआत होती हुई दिखती है और इस आंदोलन को हम लोग असहयोग आंदोलन के नाम से समझने की कोशिश करते हैं और ये असहयोग आंदोलन कब आया कैसे आया और इस असहयोग आंदोलन की पूरी की पूरी जो पृष्ठभूमि है उसे हम लोग यहां पर अच्छे तरीके से आपके सामने डिस्कस करने की पूरी कोशिश करते हैं। ठीक है चलिए तो ये हमारा खिलाफत आंदोलन था। कब शुरू हुआ? कैसे शुरू हुआ? और इस आंदोलन के संदर्भ में हमारे क्या बिंदु थे? उनको हमने एक-एक करके डिस्कस किया।

50:34 अब साल 1920 के आसपास का समय आ चुका है और साल 1920 के आसपास के समय में ना हमें कुछ और चीजें यहां पर आती हुई दिखती हैं। उनको भी हम लोग देखते हैं। सर जलियांवाला बाग हत्याकांड में सरदार उधम सिंह जी भी तो हां बिल्कुल। अब यहां पर हम लोग अच्छे तरीके से देखें कि ये जो हमारा असहयोग आंदोलन आपको देखने को मिलता है। है ना? यह भारत के अंदर शुरू किया जाएगा। और गांधी जी का ये मानना रहा था और गांधी जी के दिमाग में ये आईडिया बहुत पहले ही आ गया था। कब? कि साल 1909 में गांधी जी जब अफ्रीका के अंदर हुआ करते थे साउथ अफ्रीका में तो गांधी जी ने एक पुस्तक को लिख डाला और उसको हिंद स्वराज पुस्तक कहा जाता है। इस पुस्तक में गांधी जी ने बताया कि भारत के लोग अंग्रेजों का सहयोग करते हैं। हम अंग्रेजों की बातों को मानते हैं और इसीलिए अंग्रेज हम पर राज कर रहे हैं। अगर

51:20 मैं आपसे पूछूं कि भारत के अंदर किनकी संख्या ज्यादा थी अंग्रेजों की या फिर भारतीयों की? भाई अंग्रेज रहे होंगे मुश्किल से 50 60 हजार और भारत के लोग लाखों थे। तो ये चंद हजार लोगों ने लाखों लोगों पर शासन क्यों कराया था? क्योंकि हम अंग्रेजों की बातों को मान लेते थे। हम अंग्रेजों के साथ क्या करते थे? सहयोग करते थे। अंग्रेजों का सपोर्ट करते थे। अंग्रेज भारत के अंदर आए शासन कर लिया। अंग्रेजों ने कहा कि कल से तुम्हारी जमीन हमारी हुई। जी भाई साहब जैसा आप बोलोगे वैसा कर लेंगे। कल से तुम जंगल में नहीं जाओगे। तुम्हारे जंगल हमारे हुए। जी जी बिल्कुल सही बोल रहे हो। कल से नमक के ऊपर तुमको टैक्स देना होगा। जी जैसा आप बोलते हैं वैसा हम कर लेंगे। कल से तुम क्या करोगे? हमारी सेना में काम करोगे हमारे लिए। जी जी हम आपके साथ ही सारा काम करेंगे। तुम हमारे साथ ही व्यापार करोगे।

52:06 भारत के लोग अंग्रेजों की बातों को मानते रहे, अंग्रेजों के साथ सहयोग करते रहे। और इसीलिए आप देखते हैं दोस्तों कि गांधी जी का ये मानना था कि भारत को अंग्रेजों ने गुलाम बना लिया। क्योंकि हम अंग्रेजों की बातों को माने जा रहे थे। जो अंग्रेज कहते उस बात को हम लोग माने जा रहे थे और ये बिल्कुल गलत बात थी। है ना? आप क्या देखते हैं दोस्तों कि ये बात बिल्कुल गलत बात थी कि हम अंग्रेजों का सहयोग कर रहे थे। और इसीलिए अंग्रेजों ने क्या किया था? इसीलिए अंग्रेजों ने पूरे के पूरे भारत को आप देखते हैं दोस्तों कि गुलाम बना लिया था। तो गांधी जी ने ये बोला कि अगर भारत के लोग अंग्रेजों का सहयोग करना बंद कर दें एक साल के अंदर ही हमें स्वराज मिल जाएगा। स्वराज का मतलब कि हमारे देश के अंदर हमारा राज होगा, हमारा कब्जा होगा। और गांधी जी का ये मानना था कि अगर हम लोग अंग्रेजों का सहयोग करना बंद कर दें। उनके साथ किसी भी तरीके से कोई कांटेक्ट ना

52:51 बनाएं तो अंग्रेजों के पास कोई रास्ता ही नहीं रहेगा और अंग्रेजों को भारत को छोड़ना पड़ जाएगा। और भारत को आप देखते हैं दोस्तों कि हमें आजादी मिलते हुए देखने को मिलेगी। अब इस आंदोलन के अंदर क्या-क्या पृष्ठभूमियां और क्या-क्या बिंदु और क्या-क्या चीजें होते हुए देखने को मिल रही हैं उनको हम लोग एक-एक कर कर आपके सामने यहां पर देखते हैं और असहयोग आंदोलन के सारे के सारे जो बिंदु हैं ना उनको हम लोग यहां पर एक-एक कर कर समझने की शुरुआत कर लेते हैं। तो असहयोग आंदोलन जो है उस पूरे के पूरे बिंदु को हम लोग यहां पर आपके सामने रख रहे हैं। ठीक है बेटा? चलिए, तो यह हमारा भारत का एक बहुत बड़ा आंदोलन है जिसकी शुरुआत हमें होती हुई देखने को मिल रही है और इसकी शुरुआत साल 1920 में हमें होती हुई देखने को मिलती है। इस आंदोलन में सबसे पहली बात ये की जाती है कि भारत के जो शहरों में रहने

53:37 वाले लोग थे, वो इस आंदोलन के लिए कुछ अलग तरीके से अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। शहरों में जो रहने वाले लोग थे, जो अंग्रेजों के लिए नौकरियां करा करते थे, उन्होंने अपनी नौकरियों को छोड़ दिया। जो अंग्रेजी सेना में काम करते थे, उन्होंने अंग्रेजी सेना को छोड़ दिया। जो अंग्रेजी पुलिस में काम करते थे उन्होंने अंग्रेजी पुलिस के लिए काम करना बंद कर दिया। जो अंग्रेजों की वकालत करते थे उन्होंने अंग्रेजी वकील थे उन्होंने अंग्रेजों के लिए वकालत करनी है ना जो करनी बंद कर दी। जो हमारे टीचर्स थे जो अंग्रेज कॉलेज में पढ़ाते थे उन्होंने पढ़ाना छोड़ दिया और जो हमारे छात्र थे है ना जो हमारे स्टूडेंट्स अंग्रेजी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में पढ़ते थे उन्होंने स्कूल में पढ़ते थे उन्होंने पढ़ना छोड़ दिया। तो हर एक तरीके से शहर के लोगों ने सहयोग करना बंद किया। लेकिन आप देखते हैं दोस्तों कि जो यह सहयोग था यह धीरे-धीरे क्या हो जाता है

54:22 दोस्तों? यह धीरे-धीरे हमें कमजोर होता हुआ दिखता है। कब कमजोर होता हुआ दिखता है? कि शहर के अंदर ये आंदोलन कमजोर होता है। साल 1921 तक आते-आते ये आंदोलन कमजोर होता है। और उसी के साथ-साथ जो हमारे व्यापारी लोग थे उन्होंने अंग्रेजों से व्यापार करना भी बंद कर दिया। है ना? ये सारी चीजें हुई। अब हुआ क्या कि भारत के लोगों ने अंग्रेजों से सहयोग करना बंद कर दिया, बिनेस करना बंद कर दिया। हर चीज करनी बंद कर दी। इसी के साथ-साथ अगर आप देखें कि अब जो आदमी क्या है दोस्तों कि टीचर है उसने नौकरी छोड़ दी मगर उसे अपने परिवार को पालना है उसे अपनी जरूरतों को पूरा करना है और कब तक ये आंदोलन चलेगा पता ही नहीं था तो एक साल तक इस आंदोलन में शामिल होने के बाद भारत के जो टीचर्स थे उन्हें ना चाहते हुए भी क्या करना पड़ा यूनिवर्सिटीज को ज्वाइन करना पड़ा ताकि वो अपने परिवार को पाल सकें। भारत के अंदर उतनी अच्छी यूनिवर्सिटीज नहीं थी। हमारे

55:07 देश के अंदर उतने अच्छे कॉलेज नहीं थे भारतीयों के कि जहां पर हमारे बच्चे पढ़ सकते थे। तो ना चाहते हुए भी भारत के छात्रों ने क्या किया? दोबारा से अंग्रेजी कॉलेज में जाना शुरू किया। पुलिस की नौकरी भी दोबारा ज्वाइन की गई। सेना की नौकरी भी दोबारा ज्वाइन की गई और ये धीरे-धीरे जो आंदोलन था ये कमजोर हुआ। उसी के साथ-साथ भारत का जो सामान बिकता था, भारत के अंदर जो हमारी खादी कपड़े बिकते थे ना वो थोड़े महंगे हुआ करते थे। और अंग्रेजी जो कपड़ा था वो बहुत ज्यादा सस्ता हुआ करता था। भारतीय कपड़ा महंगा था और अंग्रेजी कपड़ा सस्ता था। तो भारत की गरीब जनता चाहती तो थी कि हम अंग्रेजी कपड़े को ना खरीदें लेकिन वो महंगा था। तो ना चाहते हुए भी आप देखते हैं भारत के लोग चाहते थे कि हम खादी के कपड़े को खरीदें लेकिन खादी महंगी थी देश का कपड़ा महंगा था तो अंग्रेजी कपड़े को हमने खरीदा जिससे ये आंदोलन हमें शहर के अंदर कमजोर होता हुआ देखने को मिला। इसी के साथ-साथ हमें कुछ और चीजें

55:54 भी होते हुए देखने को मिलती हैं। क्या? हम यहां पर देखते हैं दोस्तों कि यह जो आंदोलन था ना यह इसी वजह से बड़ी संख्या में हमें कमजोर होता हुआ दिखा कि जो शिक्षक थे और जो छात्र थे वह दोबारा कॉलेज जाना पड़ गया उनको। उसी के साथ-साथ हमें देखने को मिलता है दोस्तों कि जो वकील थे वो भी अपने काम पर लौटे और शहरों के अंदर ये आंदोलन जो बहुत तेजी के साथ फैला था धीरे-धीरे सुस्ती या फिर कमजोरी में हमें जाता हुआ देखने को मिला। तो शहर के अंदर ये आंदोलन किस तरीके से रहा और इस आंदोलन की पूरी की पूरी कहानी क्या रही? इसको हमने आपके सामने यहां पर रख दिया। इसी के साथ-साथ अगर आप ध्यान से देखें तो आपको एक चीज देखने को मिलती है और वह क्या है कि हमारे देश के अंदर ना हमारे जो किसान भाई थे वो इस आंदोलन से क्या समझते हैं और किसान भाइयों के लिए ये आंदोलन किस तरीके से था उसको समझते हैं। यूपी के अंदर एक जगह है जिसको हम लोग अवध कहते हैं। अवध के

56:40 अंदर एक आदमी रहा करते थे जिनको बाबा रामचंद्र कहा जाता था। और बाबा रामचंद्र जी जो थे वो एक तरीके से क्या थे बेटा कि पहले एक सन्यासी थे। है ना? बाद में एक सन्यासी बनते। पहले एक मजदूर हुआ करते है ना? तो ये बाबा रामचंद्र जी है। ये अवध यूपी का जो इलाका है वहां पर हुआ करते थे। और आप देखते हैं दोस्तों कि ये एक क्या थे? एक मजदूर थे जो फिजी देश में काम करते थे। फिर वापस अवध में आकर ये एक सन्यासी बन जाते हैं। अवध के किसान बहुत ज्यादा परेशान थे। किस बात से परेशान थे? अवध के किसान परेशान थे मालगुजारी से कि कितना जितना पैसा तय होता है उतना पैसा मिलता ही नहीं है या फिर उनसे बिना पैसे के काम कराया जाता है। तो भारत के अंदर जो अंग्रेज लोग थे या फिर भारत के अंदर जो बहुत सारे हमारे बड़े-बड़े जमींदार थे भारतीय जमींदार वो अवध के किसानों को लूट

57:26 रहे थे। काम कराते थे मगर पैसा नहीं देते थे। साल 1920 में जवाहरलाल नेहरू जी को यह बात पता चली और नेहरू जी अवध के गांव में जाते हैं और वहां के किसानों की क्या करते हैं? में नेहरू जी समस्या को सुनने की कोशिश करते हैं और अक्टूबर के महीने में साल 1920 में एक किसान सभा आयोजित की जाती है जिसे अवध किसान सभा कहा जाता है। इस अवध किसान सभा में ये बात रखी जाती है जिसमें नेहरू जी भी हैं, बाबा रामचंद्र जी भी हैं कि नेहरू जी कहते हैं कि आप परेशान हैं। आप अपने आंदोलन को देश के सबसे बड़े आंदोलन असहयोग आंदोलन के साथ जोड़ दीजिए। और जितने भी अवध के ये किसान थे ये सारे के सारे किसान क्या करते हैं? ये अवध के सारे के सारे किसान गांधी जी और उसी के साथ-साथ नेहरू जी के साथ मिलकर ये जो हमारा असहयोग आंदोलन था ना उसके साथ जुड़

58:12 जाते हैं। अब इसी कालखंड में अगर हम लोग ध्यान से देखें। है ना? इसी कालखंड में अगर हम लोग ध्यान से देखें तो हमें हमारे जो आदिवासी किसान थे वो किस तरीके से थे उनके बारे में भी हम लोग डिस्कशन कर लेते हैं। अब आदिवासी किसानों के संदर्भ में कि जो हमारे आदिवासी हैं जो जंगल में रहते हैं। इनके अंदर एक बहुत बड़े आदमी रहे हैं। जिनको क्या बोला जाता है बेटा? जिनको हम लोग बोलते हैं अलूरी सीता राम राजू। तो अलूरी सीताराम राजू करके एक आदमी हैं जो आपको दिखते हैं कहां ये उनका चित्र है। और जो आरआरआर मूवी आपने देखी होगी। है ना? उस आरआरआर मूवी में रामचरण ने जो कैरेक्टर अदा किया था वो अलूरी सीताराम राजू जी का ही था। अलूरी सीता राम राजा जी साल 1922 में एक आंदोलन शुरू करते हैं जिसे रमा आंदोलन कहा जाता है। इनका मानना था कि हम

59:00 अंग्रेजों से ना लड़कर क्या करेंगे? अंग्रेजों से लड़कर अपने देश को आजाद कराएंगे। और जब भारत के अंदर असहयोग आंदोलन चल रहा था, जब भारत के अंदर असहयोग आंदोलन चल रहा था, उसी टाइम पर अलूरी सीताराम राजू जी हथियार उठाकर अंग्रेजों से लड़ रहे थे। अंग्रेजों ने इनको पकड़ा और उसी के साथ-साथ आप देखते हैं दोस्तों कि इनको फांसी दे दी गई थी। और बहुत समय तक आप देखते हैं दोस्तों कि फिर ये आंध्र प्रदेश के अंदर रहा करते थे और वहां के अंदर ये बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो गए थे। अच्छा ये जो हमारे आदिवासी किसान थे इन लोगों का यह मानना था और यह गांधी जी की विचारधारा से पूरे तौर पर सहमत नहीं थे। इन लोगों का यह मानना था हमारे जो ये आदिवासी लोग थे इनके लिए आजादी स्वराज का मतलब कि इन लोगों के लिए आजादी यही थी कि इनको इनके जंगलों में जाने की आजादी मिल जाए और ये अपने जानवरों को चरा सकें और अपने फल फूल जो हैं जानवरों से पेड़ों से

59:47 हासिल कर सकें। और इसी वजह से ये जो हमारे आदिवासी लोग थे ये क्या करते हैं बेटा? ये ना विद्रोह हो जाते हैं। विद्रोही हिंसक आंदोलन करना शुरू करते हैं। और ये गोरिल्ला युद्ध करते हैं। गोरिल्ला युद्ध का मतलब कि छुप कर अटैक करते थे अंग्रेजों पर और उसके जरिए क्या करते थे? पूरे-पूरे तौर पर जीत को हासिल करने की कोशिश करते थे। अब ये जो आदिवासी लोग रहे इन लोगों ने क्या किया दोस्तों कि अंग्रेजों के साथ अटैक किया। जब पूरे देश में आंदोलन चल रहा है तो जो हमारे असहयोग आंदोलन के लोग थे ये हमले कर कर अंग्रेजों से लड़ रहे थे और अंग्रेजों ने इनके ऊपर भी बहुत सारे हमले किए थे। यह गोरिल्ला वॉर। गोरिल्ला वॉर का मतलब जैसे पेड़ हैं छुप कर आते हमला करते और फिर छिप जाते। इस तरीके की गोरिल्ला लड़ाईयां हमारे असहयोग आंदोलन के अंदर आदिवासी लोग कर रहे थे। इसी कालखंड में हमारे बागान में काम करने वाले मजदूर थे। बाघ समझते हैं आप बाघ जिसमें जैसे हमारे

1:00:33 फलों के बाग होते हैं। है ना? ऐसे ही कॉफी चाय के भी बाग होते हैं और उसमें हमारे बहुत सारे मजदूर हुआ करते थे। अंग्रेजों ने साल 1859 में एक कानून बनाया और ये बोल दिया कि अगर कोई भी भारत का मजदूर अंग्रेजों के बाग में काम करने आ गया तो अब वो जिंदगी भर बाग में ही रहेगा। का घर नहीं जा सकता और इनको घर जाने की इजाजत नहीं दी गई। इस बात से भारत के जो मजदूर थे वो बहुत परेशान थे और जब यह खबर फैली साल 1920 में कि भैया देश में असहयोग आंदोलन शुरू हो रहा है तो हमारे इन बेचार मजदूरों के लिए आजादी यही थी कि बस ये घर भाग जाए अपने घर चले जाएं। और ये सभी लोग क्या करते हैं? ये सभी लोग बागों से

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