NEET 2026 - Cell Structure and Function || Day 1 || Vipin Sharma

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो सेल बायोलॉजी के तीन अध्यायों - 'सेल: द यूनिट ऑफ लाइफ', 'सेल साइकिल एंड सेल डिवीजन', और 'बायो मॉलिक्यूल्स' पर केंद्रित है। डॉ. विपिन कुमार शर्मा इन अध्यायों को विस्तृत तरीके से कवर करने का वादा करते हैं, जिसमें एनसीईआरटी की लाइनों का विश्लेषण और महत्वपूर्ण प्रश्नों और अवधारणाओं पर जोर दिया जाएगा। वह छात्रों को सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपने दवा के समय की याद दिलाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, बाकी सब कुछ उन पर छोड़ने के लिए कहते हैं।

मुख्य बातें:

  • सेल बायोलॉजी के तीन अध्यायों का विस्तृत कवरेज।
  • एनसीईआरटी की लाइनों और महत्वपूर्ण अवधारणाओं का विश्लेषण।
  • छात्रों की सक्रिय भागीदारी और समय पर दवा लेने की याद दिलाना।

परिचय

डॉ. विपिन कुमार शर्मा फिजिक्स वाला प्लेटफॉर्म पर सभी का स्वागत करते हैं और बताते हैं कि आज के सत्र में सेल बायोलॉजी के तीन अध्यायों को कवर किया जाएगा: सेल द यूनिट ऑफ लाइफ, सेल साइकिल एंड सेल डिवीजन, और बायो मॉलिक्यूल्स। वह इन अध्यायों को एक विशेष क्रम में पढ़ाने और एनसीईआरटी की प्रत्येक पंक्ति और सारांश का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करने का वादा करते हैं। उनका लक्ष्य छात्रों की सभी समस्याओं का अंत-से-अंत समाधान प्रदान करना है, यह सुनिश्चित करना है कि नीट में यहां से कोई भी प्रश्न छूटे नहीं।

छात्रों की जिम्मेदारियां

डॉ. शर्मा छात्रों को दो जिम्मेदारियां सौंपते हैं: उन्हें छोड़कर नहीं जाना और उन्हें अपनी दवा के समय की याद दिलाना। वह बताते हैं कि सत्र लंबा होगा और उन्हें रात में अंधेरे से डर लगता है, इसलिए उन्हें साथ रहने की आवश्यकता है। उन्हें चैट सेक्शन में लाल दिल भेजकर या कोई अन्य संकेत देकर रात 10 बजे और बायो मॉलिक्यूल्स के आधे होने पर अपनी दवा के समय की याद दिलाने के लिए कहा जाता है। वह छात्रों से अनुरोध करते हैं कि वे कम नखरे करें और उन पर विश्वास रखें कि वे उन्हें पढ़ाएंगे और सब कुछ याद कराएंगे। सत्र के अंत में टॉपर्स नोट्स और डीपीपी उपलब्ध होंगे।

सत्र की शुरुआत और टेलीग्राम चैनल की जानकारी

डॉ. शर्मा बताते हैं कि कक्षाएं प्रतिदिन शाम 5:00 बजे शुरू होंगी और कम से कम 8 घंटे चलेंगी, जो सुबह 1:00, 2:00 या 3:00 बजे तक जा सकती हैं। छात्रों को कक्षा के बाद नोट्स से रिवीजन करने और प्रश्न और टेस्ट हल करने के लिए कहा जाता है। वह यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह यात्रा केवल 10 दिनों की नहीं है, बल्कि परीक्षा तक जारी रहेगी। सभी सामग्री टेलीग्राम चैनल और पीडब्ल्यू ऐप पर उपलब्ध होगी। वह 'सेल द यूनिट ऑफ लाइफ' पर चर्चा शुरू करते हैं और पूछते हैं कि क्या सभी को पता है कि सेल क्या होता है।

सेल: जीवन की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई

सेल को जीवन की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई के रूप में परिभाषित किया गया है। जीवित रहने के लिए कम से कम एक सेल का होना आवश्यक है। एक सेल से कम कुछ भी स्वतंत्र जीवन सुनिश्चित नहीं कर सकता। एककोशिकीय जीवों में एक सेल होता है, जैसे बैक्टीरिया, अमीबा, क्लोरेला और पैरामीशियम। बहुकोशिकीय जीवों में एक से अधिक सेल होते हैं, जैसे पौधे, मनुष्य और कई जानवर। मानव शरीर में अरबों सेल होते हैं, जिनमें 200 विभिन्न प्रकार के सेल होते हैं। सेल संरचनात्मक इकाई है जो शरीर का ढांचा बनाती है और कार्यात्मक इकाई है क्योंकि सभी कार्य सेल में होते हैं।

एककोशिकीय जीवों की क्षमताएं और सेल की परिभाषा

एककोशिकीय जीवों में स्वतंत्र अस्तित्व और जीवन के सभी आवश्यक कार्यों को करने की क्षमता होती है। वे नाइट्रोजन फिक्सेशन जैसे कार्य कर सकते हैं, जो बहुकोशिकीय जीव नहीं कर सकते। सेल की उपस्थिति जीवित जीवों की परिभाषित विशेषता है। यदि सेल है, तो आप अपने आप को जीवित कह सकते हैं।

सेल की खोज और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का विकास

रॉबर्ट हुक ने 1665 में मृत कॉर्क सेल की खोज की और सेल शब्द दिया। एंटोन वैन ल्यूवेनहॉक ने 1674 में पहली बार जीवित सेल की खोज की। रॉबर्ट ब्राउन ने 1831 में नाभिक की खोज की। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के विकास ने 1950 के दशक में सेल की संरचना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने में मदद की। जॉर्ज पैलेड ने 1953 में राइबोसोम की खोज की। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी ने एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम और सेल झिल्ली मॉडल की संरचना को देखने में भी मदद की।

सेल सिद्धांत और श्लेडेन और श्वान का योगदान

सेल सिद्धांत सभी जीवों को एकीकृत करता है। श्लेडेन (1838) ने कहा कि सभी पौधे विभिन्न प्रकार के सेल से बने होते हैं जो विभिन्न ऊतक बनाते हैं। श्वान (1839) ने पाया कि जंतु सेल में प्लाज्मा झिल्ली होती है और पौधों में सेल झिल्ली के अलावा सेल भित्ति भी होती है। श्वान ने परिकल्पना दी कि सभी पौधे और जानवर सेल और सेल उत्पादों से बने होते हैं। श्लेडेन और श्वान ने मिलकर सेल सिद्धांत तैयार किया, जिसमें कहा गया कि सभी जीवित जीव सेल या सेल उत्पादों से बने होते हैं।

रुडोल्फ विरचो का योगदान और सेल सिद्धांत का समापन

श्लेडेन और श्वान यह नहीं बता पाए कि नए सेल कैसे बनते हैं। रुडोल्फ विरचो ने 1855 में कहा कि नए सेल पूर्व-विद्यमान सेल से बनते हैं (ओम्निस सेलुला ई सेलुला)। इस प्रकार सेल सिद्धांत को अंतिम रूप दिया गया। वायरस सेल सिद्धांत का अपवाद है क्योंकि इसमें सेल नहीं होता है और यह जीवित नहीं है।

सेल का अवलोकन और बुनियादी घटक

एक सामान्य सेल में दो चीजें होती हैं: झिल्ली और साइटोप्लाज्म। सेल झिल्ली सभी सेलों में सार्वभौमिक है। इसे प्लाज्मा झिल्ली या प्लाज्मोलेमा भी कहा जाता है। साइटोप्लाज्म भी सभी सेलों में सार्वभौमिक है। पादप सेलों में सेल झिल्ली के बाहर एक सेल भित्ति भी होती है। यूकेरियोटिक सेलों में एक नाभिक होता है जिसमें क्रोमोसोम होते हैं, जिनमें डीएनए होता है। डीएनए आनुवंशिक सामग्री है जो सेल को नियंत्रित करती है। नाभिक को सेल का मस्तिष्क कहा जाता है।

सेल झिल्ली, साइटोप्लाज्म और सेलुलर गतिविधियां

सेल झिल्ली को प्लाज्मा झिल्ली या प्लाज्मोलेमा भी कहा जाता है, जो सभी सेलों में सार्वभौमिक है। सेल की मात्रा साइटोप्लाज्म द्वारा भरी जाती है, जो प्रकृति में अर्ध-तरल होता है। साइटोप्लाज्म सेलुलर गतिविधियों का मुख्य क्षेत्र है, जहां सभी चयापचय प्रतिक्रियाएं होती हैं। सेल को जीवित रखने के लिए ये प्रतिक्रियाएं आवश्यक हैं। डीएनए से आरएनए बनता है, और आरएनए से प्रोटीन बनता है, जो सेल में कार्य करता है।

यूकेरियोटिक और प्रोकैरियोटिक सेलों के बीच अंतर

यूकेरियोटिक सेलों में एक अच्छी तरह से परिभाषित नाभिक होता है, जबकि प्रोकैरियोटिक सेलों में नहीं होता है। यूकेरियोटिक सेलों में झिल्ली-बद्ध ऑर्गेनेल होते हैं, जबकि प्रोकैरियोटिक सेलों में नहीं होते हैं। प्रोकैरियोटिक सेलों में केवल राइबोसोम होते हैं। सेंट्रोसोम केवल जंतु सेलों में पाए जाते हैं। यूकेरियोटिक सेलों में 80S राइबोसोम होते हैं, जबकि प्रोकैरियोटिक सेलों में 70S राइबोसोम होते हैं। राइबोसोम, सेल झिल्ली और साइटोप्लाज्म सभी सेलों में सार्वभौमिक हैं।

ओम्निस सेलुला ई सेलुला की अवधारणा पर पीवाईक्यू और यूकेरियोटिक और प्रोकैरियोटिक सेलों के बीच अंतर

ओम्निस सेलुला ई सेलुला की अवधारणा, जिसका अर्थ है कि नए सेल पूर्व-विद्यमान सेलों से बनते हैं, रुडोल्फ विरचो द्वारा दी गई थी। यूकेरियोटिक सेलों में एक अच्छी तरह से परिभाषित नाभिक होता है, जबकि प्रोकैरियोटिक सेलों में नहीं होता है। यूकेरियोटिक सेलों में झिल्ली-बद्ध ऑर्गेनेल होते हैं, जबकि प्रोकैरियोटिक सेलों में नहीं होते हैं। प्रोकैरियोटिक सेलों में 70S राइबोसोम होते हैं, जबकि यूकेरियोटिक सेलों में 80S और 70S दोनों होते हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल संरचना और विशेषताएँ

प्रोकैरियोटिक सेलों में 70S राइबोसोम होते हैं, जिनमें 50S और 30S सबयूनिट होते हैं। यूकेरियोटिक सेलों में 80S राइबोसोम होते हैं, जिनमें 60S और 40S सबयूनिट होते हैं। 70S राइबोसोम प्रोकैरियोट्स, माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट में पाए जाते हैं, जबकि 80S राइबोसोम यूकेरियोटिक सेलों के साइटोप्लाज्म में पाए जाते हैं। सेडिमेंटेशन गुणांक वजन नहीं है, बल्कि घनत्व और आकार का अप्रत्यक्ष माप है।

पादप और जंतु सेलों के बीच अंतर

पादप और जंतु सेलों के बीच अंतर को सीसीसी से याद किया जा सकता है: सेल भित्ति (पादपों में मौजूद, जंतुओं में अनुपस्थित), क्लोरोप्लास्ट (पादपों में मौजूद, जंतुओं में अनुपस्थित), सेंट्रल रिक्तिका (पादपों में मौजूद, जंतुओं में अनुपस्थित), सेंट्रोसोम (जंतुओं में मौजूद, पादपों में अनुपस्थित) और कोलेस्ट्रॉल (जंतुओं में मौजूद, पादपों में अनुपस्थित)।

सेलों का आकार, आकृति और गतिविधियाँ

सेलों का आकार, आकृति और गतिविधियाँ बहुत भिन्न होती हैं। लाल रक्त सेलों का व्यास 7 माइक्रोमीटर होता है, जबकि तंत्रिका सेल 1 मीटर तक लंबे हो सकते हैं। श्वेत रक्त सेल अमीबा के आकार के होते हैं, और स्तंभकार सेल लंबे और संकीर्ण होते हैं। सेल का आकार उसके कार्य के अनुसार बदलता रहता है। माइकोप्लाज्मा सबसे छोटा सेल है, जिसकी लंबाई 0.3 माइक्रोमीटर होती है, जबकि ऑस्ट्रिच का अंडा सबसे बड़ा अलग-थलग सेल है।

पीपीएलओ का आकार और सेल आकार पर पीवाईक्यू

पीपीएलओ (प्लुरो निमोनिया जैसे जीव) का आकार 0.1 माइक्रोमीटर है। सबसे छोटा जीवित सेल माइकोप्लाज्मा है। सेल का आकार उसके कार्य के अनुसार बदलता रहता है।

प्रोकैरियोटिक सेलों का अवलोकन

प्रोकैरियोटिक सेलों में बैक्टीरिया, सायनोबैक्टीरिया और माइकोप्लाज्मा शामिल हैं। वे आम तौर पर आकार में छोटे होते हैं और यूकेरियोटिक सेलों की तुलना में अधिक तेजी से विभाजित होते हैं। प्रोकैरियोटिक सेलों में सेल झिल्ली और सेल भित्ति होती है, लेकिन माइकोप्लाज्मा इसका अपवाद है क्योंकि इसमें सेल भित्ति नहीं होती है। माइकोप्लाज्मा को प्लियोमॉर्फिक भी कहा जाता है क्योंकि यह अपना आकार बदल सकता है।

प्रोकैरियोटिक सेल संरचना और घटक

प्रोकैरियोटिक सेल में सेल झिल्ली, सेल भित्ति, न्यूक्लियोइड (जीनोमिक डीएनए), प्लाज्मिड, राइबोसोम और समावेशी निकाय होते हैं। सेल झिल्ली लचीली होती है, जबकि सेल भित्ति कठोर होती है। न्यूक्लियोइड में डबल-स्ट्रैंडेड गोलाकार डीएनए होता है, जिसे पॉलीमाइन प्रोटीन द्वारा स्थिर किया जाता है। प्लाज्मिड छोटे, अतिरिक्त क्रोमोसोमल डीएनए अणु होते हैं जो स्वतंत्र रूप से प्रतिकृति बना सकते हैं और एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीन ले जा सकते हैं। राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण के लिए जिम्मेदार होते हैं।

प्रोकैरियोटिक सेलों में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं। फ्लैजिला गतिशीलता में मदद करता है, जबकि फिमब्रे संलग्नक में मदद करता है।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और कोशिका झिल्ली

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है और अंदर की ओर मुड़कर मेसोसोम बनाती है। जंतु सेलों में, सेल झिल्ली परिसीमन संरचना होती है, जबकि पादप सेलों में, सेल भित्ति परिसीमन संरचना होती है। यूकेरियोटिक सेलों में झिल्ली-बद्ध ऑर्गेनेल होते हैं, जबकि प्रोकैरियोटिक सेलों में नहीं होते हैं।

प्रोकैरियोटिक और यूकेरियोटिक सेलों में ऑर्गेनेल और राइबोसोम

यूकेरियोटिक सेलों में झिल्ली-बद्ध ऑर्गेनेल होते हैं, जबकि प्रोकैरियोटिक सेलों में नहीं होते हैं। प्रोकैरियोट्स में केवल राइबोसोम पाए जाते हैं क्योंकि वे झिल्ली-रहित होते हैं। सेंट्रोसोम भी झिल्ली-रहित होते हैं लेकिन केवल जंतु सेलों में पाए जाते हैं। यूकेरियोट्स में 80S राइबोसोम होते हैं, जबकि प्रोकैरियोट्स में 70S राइबोसोम होते हैं।

ओम्निस सेलुला ई सेलुला और प्रोकैरियोटिक सेल आकार पर पीवाईक्यू

ओम्निस सेलुला ई सेलुला की अवधारणा रुडोल्फ विरचो ने दी थी। पीपीएलओ का आकार 0.1 माइक्रोमीटर है।

प्रोकैरियोटिक सेल आकार और व्यवस्था

प्रोकैरियोटिक सेलों में चार मुख्य आकार होते हैं: कोकस (गोलाकार), बेसिलस (छड़ के आकार का), विब्रियो (अल्पविराम के आकार का) और स्पाइरिलम (सर्पिल)। कोकस एककोशिकीय (मोनोकोकस), द्विककोशिकीय (डिप्लोकोकस), स्ट्रेप्टोकोकस (श्रृंखला) या स्टैफिलोकोकस (गुच्छा) हो सकता है। बेसिलस में एंडोस्पोर हो सकता है।

ओम्निस सेलुला ई सेलुला और पीपीएलओ आकार पर पीवाईक्यू

ओम्निस सेलुला ई सेलुला की अवधारणा रुडोल्फ विरचो ने दी थी। पीपीएलओ का आकार 0.1 माइक्रोमीटर है।

प्रोकैरियोटिक सेल आकार और व्यवस्था

प्रोकैरियोटिक सेलों में चार मुख्य आकार होते हैं: कोकस (गोलाकार), बेसिलस (छड़ के आकार का), विब्रियो (अल्पविराम के आकार का) और स्पाइरिलम (सर्पिल)। कोकस एककोशिकीय (मोनोकोकस), द्विककोशिकीय (डिप्लोकोकस), स्ट्रेप्टोकोकस (श्रृंखला) या स्टैफिलोकोकस (गुच्छा) हो सकता है। बेसिलस में एंडोस्पोर हो सकता है।

ओम्निस सेलुला ई सेलुला और पीपीएलओ आकार पर पीवाईक्यू

ओम्निस सेलुला ई सेलुला की अवधारणा रुडोल्फ विरचो ने दी थी। पीपीएलओ का आकार 0.1 माइक्रोमीटर है।

प्रोकैरियोटिक सेल आकार और व्यवस्था

प्रोकैरियोटिक सेलों में चार मुख्य आकार होते हैं: कोकस (गोलाकार), बेसिलस (छड़ के आकार का), विब्रियो (अल्पविराम के आकार का) और स्पाइरिलम (सर्पिल)। कोकस एककोशिकीय (मोनोकोकस), द्विककोशिकीय (डिप्लोकोकस), स्ट्रेप्टोकोकस (श्रृंखला) या स्टैफिलोकोकस (गुच्छा) हो सकता है। बेसिलस में एंडोस्पोर हो सकता है।

प्रोकैरियोटिक सेल संरचना और कार्य

प्रोकैरियोटिक सेल में सेल झिल्ली, सेल भित्ति और साइटोप्लाज्म होता है। सेल झिल्ली एक बाहरी परत है जो सेल को घेरती है और पदार्थों के अंदर और बाहर जाने को नियंत्रित करती है। सेल भित्ति सेल झिल्ली के बाहर स्थित होती है और सेल को आकार और समर्थन प्रदान करती है। साइटोप्लाज्म एक जेल जैसा पदार्थ है जो सेल के अंदर की जगह को भरता है और इसमें आनुवंशिक सामग्री और राइबोसोम होते हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल आनुवंशिक सामग्री और संरचनाएं

प्रोकैरियोटिक सेल में आनुवंशिक सामग्री, डीएनए, एक क्षेत्र में स्थित होती है जिसे न्यूक्लियोइड कहा जाता है, जो झिल्ली से घिरा नहीं होता है। डीएनए गोलाकार होता है और इसमें हिस्टोन प्रोटीन नहीं होता है। प्रोकैरियोटिक सेलों में प्लाज्मिड भी होते हैं, जो छोटे, गोलाकार डीएनए अणु होते हैं जो एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीन ले जा सकते हैं। प्रोकैरियोटिक सेलों में राइबोसोम भी होते हैं, जो प्रोटीन संश्लेषण के लिए जिम्मेदार होते हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल सतह संरचनाएं और कार्य

प्रोकैरियोटिक सेलों में फ्लैजिला, फिमब्रे और पिलाई जैसी सतह संरचनाएं भी होती हैं। फ्लैजिला लंबे, चाबुक जैसे उपांग होते हैं जो गतिशीलता के लिए उपयोग किए जाते हैं। फिमब्रे छोटे, बाल जैसे उपांग होते हैं जो सतहों से जुड़ने के लिए उपयोग किए जाते हैं। पिलाई लंबे, ट्यूब जैसे उपांग होते हैं जो एक सेल से दूसरे सेल में आनुवंशिक सामग्री को स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

प्रोकैरियोटिक सेलों को उनकी सेल भित्ति की संरचना के आधार पर ग्राम-पॉजिटिव या ग्राम-नेगेटिव के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। ग्राम-पॉजिटिव सेलों में एक मोटी पेप्टिडोग्लाइकन परत होती है जो क्रिस्टल वायलेट डाई को बरकरार रखती है, जिससे वे माइक्रोस्कोप के नीचे बैंगनी दिखाई देते हैं। ग्राम-नेगेटिव सेलों में एक पतली पेप्टिडोग्लाइकन परत होती है जो क्रिस्टल वायलेट डाई को बरकरार नहीं रखती है, इसलिए उन्हें काउंटरस्टेन से रंगा जाता है और माइक्रोस्कोप के नीचे गुलाबी दिखाई देते हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग

सेल भित्ति कठोर होती है और माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित होती है। आर्किया में सेल भित्ति स्यूडोम्यूरिन से बनी होती है, जबकि यू बैक्टीरिया में म्यूरिन या पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है। सेल झिल्ली लचीली होती है, इसलिए यह अंदर की ओर मुड़कर ट्युब्यूल, वेसा और लैमली बनाती है।

प्रोकैरियोटिक सेल में मेसोसोम और अन्य संरचनाएं

मेसोसोम सेल झिल्ली के विस्तार हैं जो डीएनए प्रतिकृति और वितरण में मदद करते हैं। क्रोमैटोफोर में प्रकाश संश्लेषण के लिए वर्णक होते हैं। समावेशी निकायों में भंडारण के लिए विभिन्न पदार्थ होते हैं। गैस रिक्तिकाएं नीले-हरे और बैंगनी हरे बैक्टीरिया को उत्प्लावकता प्रदान करती हैं।

[प्रोकैरियोटिक सेल भित्ति और ग्राम स्टेनिंग](https://www.youtube.com/watch?v=Qbg54zDKBck&t=63

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Transcript

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0:06 सो हेलो एवरीवन कैसे हैं आप सब लोग? आई होप ईच एंड एवरीवन ऑफ़ यू इज़ डूइंग अब्सोलुटली गुड। माय नेम इज डॉ. विपिन कुमार शर्मा एंड मैं आप सभी लोगों का तहे दिल से स्वागत करता हूं हमारे इस प्लेटफार्म फिजिक्स वाला के ऊपर। अगर आप सभी लोग मुझे ठीक तरीके से देख पा रहे हैं, सुन पा रहे हैं, देन गिव मी अ बिग फैट थम्स अप और अ बिग रेड हार्ट इन द चैट सेक्शन। सो दैट वी कैन स्टार्ट टुडेज़ वंडरफुल सेशन अप। जहां पर हम कंप्लीट सेल बायोलॉजी के चीथड़े उड़ाने वाले हैं आज। देयर आर थ्री डिफरेंट चैप्टर्स इन सेल बायोलॉजी यूनिट। और तीनों चैप्टर को हम एक पर्टिकुलर सीक्वेंस में पढ़ रहे होंगे। वी आर गोइंग टू स्टार्ट आवर डिस्कशन विद द चैप्टर सेल द यूनिट ऑफ लाइफ। फिर हम लोग बढ़ेंगे सेल साइकिल एंड सेल डिवीज़न की तरफ। एंड देन हम लोग बढ़ेंगे ज़ूलॉजी के एक बहुत बड़े चैप्टर की तरफ जिसका नाम है मिस्टर बायो मॉलिक्यूल्स। इन तीनों चैप्टर को हम काफी क्वेश्चन काफी सारे कांसेप्ट्स के साथ क्रैक कर रहे होंगे। एनसीईआरटी की एक-एक लाइन एनसीईआरटी के समरी का कंप्लीट

0:51 डिटेल्ड एनालिसिस आपको यहां मिल रहा होगा। दिस इज़ गोइंग टू बी एन एंड टू एंड सॉल्यूशन फॉर ऑल योर प्रॉब्लम्स। ऐसा कोई सवाल नहीं होगा जो आपका नीट में यहां से ना बन रहा हो। क्योंकि मैं वॉइड नहीं छोड़ने वाला। दिस इज़ माय रिस्पांसिबिलिटी एज अ टीचर कि मैं सारी की सारी चीजें आपको यहां पर दे दूं। एक कंप्लीट रिसोर्स दे दूं। आपको नोट्स प्रोवाइड कर दूं। आपको अच्छे-अच्छे क्वेश्चंस दे दूं। अच्छे-अच्छे क्वेश्चन क्लास में करा दूं। सारी बातें क्लास में समझा दूं। सारी बातें क्लास में याद करा दूं। ये मेरी रिस्पांसिबिलिटी है। आपकी रिस्पांसिबिलिटी सिर्फ दो हैं। क्या है दो रिस्पांसिबिलिटीज़? अभी बताता हूं। गौर से सुनिएगा। सबसे पहली रिस्पांसिबिलिटी आपकी यह है कि मुझे छोड़ के नहीं जाना है। जो लोग मुझसे पढ़ते हैं पहले से उन्हें पता है कि मुझे अंधेरे में डर लगता है बहुत। है ना? अब शाम के 5:00 बजे हैं। जाहिर सी बात है 8 9 10 घंटे से पहले क्लास खत्म होगी नहीं। तो रात हो जाएगी। अंधेरा हो जाएगा। तो तुम अपने भाई को छोड़ के नहीं

1:37 भाग सकते। कंडीशन नंबर वन। और अगर आप नहीं भागे तो आपको यह पूरी सेल बायोलॉजी मैं सिखा दूंगा। यह मैं आपसे वादा कर रहा हूं। यह मैं दावा कर रहा हूं। आराम से बैठे सारी चीजें हम लोग निकाल ले जाएंगे। तो कंडीशन नंबर वन है कि आपको मुझे छोड़ के नहीं जाना है। दूसरी कंडीशन यह है आपको मुझे मेरे दवाई का टाइम याद दिलाते रहना है। जब 10:00 बजेंगे तो आप मेरे को एक बार बता दीजिएगा चैट सेक्शन में एक बार उड़ा दीजिएगा लाल कलर के दिल या कोई इंडिकेशन दे दीजिएगा जिससे आई कैन हैव माय मेडिसिन जब हम लोग बायो मॉलिक्यूल्स आधा कर चुके होंगे थोड़ा सा हम लोग लगभग 225 स्लाइड के आसपास पहुंच चुके होंगे एक और दवाई है जो सोने से थोड़ा टाइम पहले खानी होती है तो उसमें क्योंकि अदरवाइज बहुत हाई डोस है तो मैं क्लास के बीच में ना सो जाऊं इसीलिए उस टाइम पर तो ये दो टाइम आपको मुझे याद दिलाने हैं। बस ये दो चीजें आपको करनी है। मेरे साथ बैठे रहना है और मेरी दवाई का टाइम मुझे याद दिलाते रहना है और कुछ नहीं

2:24 करना बाकी सब मुझ पे छोड़ दो और मेरे दोस्त अब आपको नखरे थोड़े कम करने हैं। मैं एज अ बड़ा भाई आपके साथ बहुत दिल खोल के बात करता हूं हमेशा। ये नहीं सर ये कर दो वो कर दो ऐसे पढ़ाओ वैसे पढ़ाओ भाई पढ़ाना मेरी जिम्मेदारी है। क्लास में सारा कंटेंट याद कराना मेरी जिम्मेदारी है। वो मुझके मेरे ऊपर छोड़ दिया जाए। मेरे मुझे यू नो उस चीज में लिबर्टी दे दो। आपको टॉपर्स नोट्स आराम से जैसे ही यह सेशन खत्म होगा अपने घर पहुंचने से पहले आपके हाथ में नोट्स होंगे। आपके हाथ में डीपीपीस होंगी। जितने क्वेश्चन यहां करा रहा हूं एंपल हैं। बस मेरे साथ-साथ चीजें समझते चले जाओ। पढ़ते चले जाओ। उसके अलावा आपको कुछ नहीं करना है। इतनी बातें सबको समझ में आ रही हैं? यस। एक बार फटाफट बताइए। इतनी बातें सबको समझ में आ रही हैं? क्या हम इस सेशन को शुरू करने के लिए तैयार हैं? क्या हमारे अंदर ज़ील पूरी है? क्या हम लोग इस बार क्रैक करके दिखाएंगे

3:11 नीट को? क्या ये 10 दिन आप मेरे नाम करने वाले हैं? अगर यस एक और बार लाल कलर के दिल छोड़ दीजिए। ब्रेक अगर आपको लेना है बीच में। काफी सारे स्टूडेंट्स कह रहे थे कि सर हमें ब्रेक चाहिए तो आप ले के ब्रेक और बाद में मुझे 2x पे कैच कर सकते हैं। तो जब आप ब्रेक लेंगे उस टाइम पर मैं थोड़ा सा स्लो पढ़ा दूंगा या क्वेश्चन सॉल्व करा दूंगा जिससे आपका नुकसान ना हो। यस टेंशन मत लीजिए। ऑलराइट एवरीवन। ऑलराइट। ऑलराइट। लेट्स स्टार्ट दिस सेशन। लेट्स स्टार्ट दिस ब्यूटीफुल सेशन विद द डिस्कशन ऑफ चैप्टर। सेल द यूनिट ऑफ़ लाइफ। यहां पर आपको नोट्स मिलने वाले हैं PW की ऐप के ऊपर एज़ वेल ऐज़ आपको नोट्स मिल जाएंगे इस Telegram चैनल के ऊपर। अभी जाइन करने की ज़रूरत नहीं है। जब यह सेशन एंड होगा उस टाइम पर इस क्यूआर को स्कैन करके या विपिन सर के जारविस नाम से हमारा Telegram चैनल है। वहां पर आप कनेक्ट कर सकते हैं। सारी चीजें एंड टू एंड आपको वहां पे लेक्चर के बाद मिल जाया करेंगी। चाहे वो लेक्चर नोट्स हो, चाहे वो मेरी

3:58 स्लाइड्स हो, चाहे वो आपके डीपीपी के क्वेश्चंस हो, चाहे वो आपके टेस्ट हो। सारी चीजें आपको यहां पर मिल जाएंगी और पीडब्ल्यू के एप्लीकेशन के ऊपर भी जहां से आपका मन है वहां से आप कंटेंट बटोर सकते हैं, जुटा सकते हैं। पहला चैप्टर स्टार्ट करते हैं मेरे भाई सेल द यूनिट ऑफ लाइफ एंड वी आर गोइंग टू स्टार्ट फ्रॉम एन एब्सोल्यूट बेसिक लेवल। कई स्टूडेंट्स का ये डाउट था कि क्या सर हम अगर ज़ीरो पे बैठे हैं तो क्या हम इस सीरीज से अपना काम स्टार्ट कर सकते हैं? बिल्कुल स्टार्ट कर सकते हो। आपको बस मल्टीपल रिवीज़ंस देने होंगे। आपको बस थोड़ी सी एक्स्ट्रा मेहनत करनी होगी। वो आपको पता है। देखो अगर आप जीरो पे ल कर रहे हो अभी तो जाहिर सी बात है बाकी बच्चों से आपको ज्यादा काम करना ही पड़ेगा। उसका कोई दूसरा अल्टरनेटिव नहीं है। सो इट इज़ेंट कि आप ये समझें कि आपको एक्स्ट्रा एफर्ट खुद से भी डालने होंगे। मैं आपको यहां पर जो कंटेंट पढ़ाऊंगा वो जब तक आप समझ नहीं जाएंगे तब

4:43 तक मैं आगे नहीं बढ़ने वाला। चाहे ये सेशन 12 घंटे का ही क्यों ना हो जाए। 8 घंटे की जगह 10 घंटे का हो जाए। 10 घंटे की जगह 12 घंटे का हो जाए। जब तक सारी जनता जब तक समस्त समाज जविस समाज यह नहीं कह देगा कि सर हमें सारी बातें समझ में आ गई तब तक मैं आगे नहीं बढ़ने वाला। आई विल रिपीट थिंग्स। जब 10 12 15 स्लाइड्स हो जाएंगी मैं बार-बार रिपीट करते हुए चलूंगा। हर स्लाइड के बाद भी मैं स्लाइड के सारे कंटेंट को कंसोलिडेट करता हुआ चलूंगा। आपको चीजें जेन्युइनली याद हो जाएंगी। आपका टाइम टेबल क्या होना चाहिए? गौर से सुनिए। आपका टाइम टेबल क्या होना चाहिए? सबसे पहले हम लोग शुरू करेंगे हमारे सेशन को डेली 5:00 pm। अगर डेली 5:00 pm आपने सेशन स्टार्ट किया मिनिमम 8 घंटे का तो सेशन होगा ही होगा। मिनिमम टू मिनिमम मैं बता रहा हूं। उससे ऊपर भी जा सकता है। तो जाहिर सी बात है

5:28 आपका ये जो सेशन है ये 1 am तक भी जा सकता है। 2 am तक भी जा सकता है। 3:00 am तक भी जा सकता है। कितने बजे तक भी ये सेशन जाएगा। सो ऑन एंड सो फोर्थ डिपेंडिंग अपॉन क्लासेस। ओके? यह आपको चीजें देखनी है एक बार। करेक्ट? तो, यहां पर 3:00 am तक भी आपका सेशन जा सकता है। ठीक है? आप इसके बाद सो जाओ भाई। मस्त बिंदास चद्दर तानो सो जाओ। सोने के बाद सुबह उठो। 9 घंटे की नींद पूरी करो। 8 घंटे की, 6 घंटे की। ओके। थोड़ा सा कुछ टेक्निकल इशू है। बस एक सेकंड मुझे दे दीजिए। है ना? करेक्ट हो रहा है। बफर चल रहा है। आप में से कई

6:15 लोगों का बफरिंग चल रहा है। इसीलिए मैं थोड़ा सा साइड हट गया हूं। यस। एक सेकंड बस। यस। चलिए। सो डेली शाम को 5:00 बजे हमारी क्लास स्टार्ट होगी। सुबह हम लोग समझ लीजिए 1:00 बजे सो रहे हैं, 2:00 बजे सो रहे हैं, 3:00 बजे जितने भी बजे आपकी क्लास खत्म हो रही है, सो जाओ चुपचाप चद्दर तान के। उसके बाद जब आप उठेंगे लेट से आप 12 नून पर उठे 12:00 बजे उठ गए। 12:00 बजे उठते ही मैं आपको जो नोट्स प्रोवाइड कर चुका होगा उन नोट्स से आप एक बार रिवीजन कर रहे होंगे और मैं आपको डीपीपी जो प्रोवाइड कर रहा हूं क्वेश्चन एंड टेस्ट जो प्रोवाइड कर रहा हूं वो आप सॉल्व कर रहे होंगे और फिर तैयार होकर दोबारा से पहुंच जाएंगे अगले दिन 5:00 pm की क्लास में ये आपको कर ले जाना है। इतना भी आप कर ले गए यू आर मोर देन डन फॉर योर एग्जामिनेशन। ठीक है? इसी का बार-बार बार-बार रिवीजन करते रहना है। रिवीजन का

7:00 प्लान मैं आपके साथ शेयर करता रहूंगा। हाथ पकड़ के चलूंगा आपका जब तक आपका नीट का पेपर नहीं हो जाता। दिस जर्नी इज नॉट ऑफ दी 10 डेज ओनली। ऐसा नहीं है 10 दिन के बाद मैं कहीं गायब हो जाऊंगा, कहीं लुप्त हो जाऊंगा। ऐसा नहीं है। जाहिर सी बात है जब तक आपका पेपर नहीं हो जाता कंप्लीट तब तक हम साथ खड़े रहेंगे। इत्मीनान से आपकी तैयारी करते रहेंगे। सारी चीजें आपको टेलीग्राम पर मिल जाएंगी। अब मेरे भाई बिंदास तरीके से हम लोग स्टार्ट कर देते हैं हमारे डिस्कशन ऑफ सेल द यूनिट ऑफ़ लाइफ। सबसे पहले मुझे यह बताइए क्या सभी को पता है कि सेल क्या होता है? एकदम जीरो लेवल से हम अपनी तैयारी को स्टार्ट करने वाले हैं। क्या मेरे सभी भाइयों को पता है? सभी लोगों को पता है कि सेल क्या होता है? सेल जो है इसको हम क्या कहते हैं? अगर एक जनरल डेफिनेशन की मैं बात करूं, हम एक बार अपने पिताजी का नाम भूल सकते हैं। एक बार घर का पता भूल सकते हैं। एक बार मेरे भाई क्रश की याद आनी भी बंद हो सकती है। पर यह नहीं भूल सकते कि सेल इज द स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल यूनिट ऑफ लाइफ। हर

7:48 बायोलॉजिस्ट का बस चले तो ये लाइन हमारे हाथों पे गुदवा ली होती हमने। अगर हमारा बस चलता, मम्मी पापा अगर टैटू बनवाने देते इस बात का, तो सबसे पहला टैटू हम यही बनवाते। माइटोकांड्रिया इज़ द पावर हाउस ऑफ़ द सेल। ब्रायोफाइट्स आर द एफीबियन ऑफ़ प्लांट किंगडम। सेल इज द स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल यूनिट ऑफ लाइफ। एटीपी का फुल फॉर्म। ये सारी चीजें इन पे हमारा अधिकार है। बीइंग अ बायोलॉजिस्ट। हम ओन करते हैं इन चीजों को। तो जाहिर सी बात है सेल को हम लोग क्या कहते हैं? सेल को गुरुदेव हम लोग कहते हैं द स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल यूनिट ऑफ लाइफ। तो स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल यूनिट का लाइफ का क्या मतलब है? आराम से देखिए। इट इज फंडामेंटल स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल यूनिट ऑफ लाइफ। यानी अगर आपको अपने आप को जिंदा कहलवाना है। अगर आप अपने आप को जिंदा घोषित करना चाहते हैं तो आपके पास क्या होना चाहिए? मिनिमम एक सेल होना चाहिए। एनसीईआरटी में एक बहुत प्यारी लाइन

8:34 लिखी हुई है। उस लाइन को गौर से देखिए। एनसीईआरटी की लाइन कहती है एनीथिंग लेस देन अ कंप्लीट सेल। अगर एक कंप्लीट सेल से छोटा कुछ भी है। एक कंप्लीट सेल से कम कुछ भी है तो इट कैन नॉट एनश्योर इंडिपेंडेंट लिविंग। तो हम उसे लिविंग नहीं कह सकते। वो इंडिपेंडेंटली अपनी लाइफ को सस्टेन नहीं कर सकता। अगर अपने आप को जिंदा कहलवाना चाहते हो आप तो आपके पास मिनिमम एक सेल होना चाहिए। और ऐसे ऑर्गेनिज्म्स जिनकी बॉडी में मिनिमम एक सेल होता है उन्हें हम यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म्स कहते हैं। यून का मतलब होता है मेरे दोस्त वन एंड सेल्यूलर में सेल शब्द आ रहा है। यानी ऐसे ऑर्गेनिज्म जिनमें सिंगल सेल होता है। क्या आप मुझे कोई एग्जांपल बता सकते हैं? गुरु जी हम एग्जांपल बता सकते हैं। एग्जांपल है बैक्टीरिया। दुनिया के सारे के सारे प्रोकैरियोट्स यूनिसेल्यूलर होते

9:21 हैं। एग्जांपल है अमीबा। यह आपका यूनिसेल्यूलर है। एग्जांपल है क्लोरेला। ये आपका यूनिसेल्यूलर है। एग्जांपल है पैरामीशियम। ये आपका यूनिसेल्यूलर है। क्या ये कुछ एग्जांपल हैं यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म्स के? बिल्कुल गुरुदेव। इसमें हमें कोई भी दिक्कत, कोई पंगा दंगा नहीं है। सेकंड इंपॉर्टेंट थिंग इज़ मल्टीसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म्स। यानी कई ऐसे ऑर्गेनिज्म्स हैं जिनकी बॉडी में एक से ज्यादा सेल होते हैं। मल्टी यानी बहुत सारे तो एक से ज्यादा अगर सेल हैं मोर देन वन सेल्स अगर यहां पर हैं तो आप इस ऑर्गेनिज्म को मल्टीसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म कहेंगे। फॉर एग्जांपल मेरे दोस्त फॉर एग्जांपल हम लोग गुरुदेव ह्यूमंस ह्यूमंस की बॉडी में कितने सेल्स हैं? ट्रिलियंस ऑफ सेल्स हैं। बिलियंस एंड ट्रिलियंस ऑफ सेल्स हैं मेरे दोस्त।

10:07 ट्रिलियंस ऑफ सेल्स हैं। और ट्रिलियंस ऑफ सेल्स तो छोड़ो मेरे भाई। अगर ह्यूमन की आप बात करें तो 200 डिफरेंट टाइप के सेल हैं। अलग-अलग टाइप के सेल होते हैं। तो 200 अलग-अलग टाइप्स के सेल देखने को मिल रहे हैं। इतनी ज्यादा कॉम्प्लेक्स है हमारी बॉडी कि ट्रिलियंस ऑफ सेल्स हैं और 200 अलग-अलग डिफरेंट टाइप के सेल हैं। तो ऑर्गेनिज्म मल्टीसेल्यूलर भी हो सकते हैं जिनकी बॉडी में एक से ज्यादा सेल हैं। जैसे कि प्लांट्स, जैसे कि ह्यूमन बीइंग्स और एनिमल्स भी हैं कई सारे। वो आपके मल्टीसेल्यूलर हैं। यूनिसेल्यूलर मतलब ऐसे ऑर्गेनिज्म जिनमें सिर्फ एक ही सेल है। यही उस ऑर्गेनिज्म की कंप्लीट बॉडी तैयार कर रहा है। चाहे बैक्टीरिया कह लो, अमीबा कह लो, क्लोरेला कह लो, पैरामीशियम कह लो, कुछ भी कह लो। यानी जिंदा रहने के लिए तेरी कसम एक सेल जरूरी है सनम। कम से कम उससे ज्यादा है तो बहुत अच्छी बात है। तो

10:53 सेल जो है फंडामेंटल, स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल यूनिट है लाइफ की। तो लिविंग अगर अपने आप को कहलाना है, अगर आप कहना चाहते हो कि आपके अंदर लाइफ है तो सेल चाहिए। एंड सेल क्या करता है? स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल यूनिट है। स्ट्रक्चरल यूनिट यानी ये आपके पूरी की पूरी बॉडी का जो सेल है, यह फ्रेम तैयार करेगा। मेरी बॉडी मैंने कहा ट्रिलियंस ऑफ सेल्स की बनी हुई है। एक सेल ट्रिलियंस ऑफ टाइम अपने आप को रिपीट करके मेरी बॉडी बना रहा है। मेरी बेसिक यूनिट क्या है? जिसने रिपीट होकर मेरी पूरी बॉडी के ढांचे को तैयार किया है। फ्रेम को तैयार किया है। दैट इज अ सेल। जैसे अगर एक घर है, बहुत बड़ा घर है, उस घर को बनाने में 1 लाख ईंटें लगी हैं। तो बेसिक यूनिट क्या है उस घर को बनाने की? सर, एक ईंट हमने एक ईंट से शुरुआत की और ऐसी लाखों ईंटें लगा के

11:39 हमने उस घर को तैयार किया है। तो एक ईंट क्या हो गई? बेसिक इकाई हो गई। बेसिक यूनिट हो गई। उसको लाखों बार जब हम रिपीट करेंगे तो आपका बंगला खड़ा हो जाएगा। सिमिलरली एक सेल जो है वो लाइफ की बेसिक यूनिट है। इसको जब हम बिलियंस एंड ट्रिलियंस बार रिपीट करेंगे तो ह्यूमंस की पूरी बॉडी तैयार हो जाएगी। तो हमारी बॉडी का स्ट्रक्चर किसने बनाया? हमारे बॉडी का स्ट्रक्चर किसने बनाया? सेल्स ने बनाया रिपीट होकर। और हमारी बॉडी में फंक्शन कौन कर रहा है? हमारी बॉडी में काम कौन कर रहा है? ये भी सारे के सारे काम सेल्स में ही हो रहे हैं। जैसे यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म की अगर आप बात करें तो बैक्टीरिया है। यूनिसेल्यूलर है। तो जाहिर सी बात है बैक्टीरिया के जितने भी काम है वो उसके सेल में ही तो हो रहे हैं। तो उसकी बॉडी में जो सेल है वो उसकी फंक्शनल यूनिट भी तो हुई। बैक्टीरिया कितने काम करता है यार? नाइट्रोजन फिक्सेशन करता है। बैक्टीरिया अपनी एनर्जी भी बनाता है। बैक्टीरिया खाना भी जुटाता है खुद के लिए।

12:26 अलग-अलग जुगाड़ लगाता है कि वो जिंदा रह सके और बेहतर हो सके वक्त के साथ और फुचुक करके डिवाइड भी हो जाता है। अपनी डॉटर बैक्टीरिया भी बनाता रहता है। सारे फंक्शनंस करता रहता है एक सेल के अंदर ही। यानी उस सेल में कंप्लीट फंक्शनैलिटी भी है। करेक्ट? सारी की सारी फंक्शनैलिटी है उसके अंदर। सो दैट्स व्हाई इट इज वेरी वेरीेंट कि आप यहां पर देखें कि मल्टीसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म वो हैं जिनमें कई सारे सेल हैं। यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म वो हैं जिनमें एक सेल है। सिर्फ ये हमने यहां पर देखा। सेल की डेफिनेशन हमने पढ़ी। दिस इज अ वेरीेंट लाइन। आराम से देखना मेरे भाई। आराम से देखना। सेल की प्रेजेंस इज द डिफाइनिंग फीचर ऑफ लिविंग ऑर्गेनिज्म्स। ये बात मैं आपको कल भी रिपीट करवाऊंगा। क्योंकि कल हम पढ़ेंगे हमारा जो पहला चैप्टर है चैप्टर द लिविंग वर्ल्ड। वहां हम कैरेक्टरिस्टिक फीचर्स और डिफाइनिंग फीचर्स के बीच में डिफरेंस कर रहे होते हैं। वहां मैं आपको बताऊंगा अगर

13:14 आप अपने आप को जिंदा कहलवाना चाहते हैं। अगर यह पेन जिंदा नहीं है और मैं आपके सामने जीवित खड़ा हूं तो मेरे अंदर कुछ ऐसा है जो इस पेन के पास नहीं है। ये पेन मेटाबॉलाइज नहीं कर सकता। यह मेटाबॉलिज्म नहीं कंटेन करता। मैं मेटाबॉलिज्म कंटेन करता हूं। इस पेन में लिविंग सेल्स नहीं है। मेरे पास लिविंग सेल्स हैं। ये पेन रिएक्शंस नहीं दिखा सकता है अपनी बॉडी के अंदर। मैं दिखा सकता हूं। और ये जो पेन है इसके पास सोचने समझने की शक्ति नहीं है। कॉन्शियसनेस की पावर नहीं है। मेरे पास कॉन्शियसनेस है। तो जाहिर सी बात है मैं कुछ ऐसे फीचर्स की बात कर रहा हूं यहां पर जिनका जीवित ऑर्गेनिज्म्स में होना कंपलसरी है। एंड वन सच थिंग इज द प्रेजेंस ऑफ़ सेल। अगर सेल है तो आप जिंदा कह सकते हो अपने आपको। तो दिस इज़ डिफाइनिंग फीचर ऑफ़ लिविंग ऑर्गेनिज़्म। ऐसे कई फीचर हैं। सेल उनमें से एक है। ओके। एक सेकंड बस।

13:59 यस। यस। सही नहीं है तो एक 5 सेकंड लगेगा उसको अपडेट होने में क्योंकि वो कट आएगा। ओके ठीक है। यस यार कैसे लोग हो तुम? क्या कर दिया है तुमने ऐसा? यार कैसे लोग हो तुम? क्या कर दिया है तुमने ऐसा? मैं भी देखूं YouTube पर कि क्या बवाल काट दिया है भाई तुमने। बाप रे 1 लाख वाचिंग चली गई है। तभी तभी तभी कैसे हो भाई? चलो चलो बस 5 सेकंड का टाइम और मैं टीम से कंफर्म कर लेता हूं। उसके बाद नहीं रुकने देंगे क्लास। डोंट वरी। है ना?

14:46 यस यस यस यस यस। जितनी बार रिपीट करना हो बता देना। जैसे 10 स्लाइड हो जाएंगी, 15 स्लाइड हो जाएंगी। बाद में पूरा रिपीट करते हुए चलेंगे। डोंट वरी। डोंट बोदर। खड़े हैं भाई यहां पर। अब पंगा ले ही लिया है तो इज्जत से लेंगे। डोंट वरी है ना टेंशन मत लो हैं हम लोग चलो मेरे भाई आइए तो जैसा मैंने आपको बताया पूरा रिपीट कर देता हूं सेल इज द स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल यूनिट ऑफ लाइफ यानी हमारी लाइफ जो है वो इसी की वजह से है। सेल की वजह से है। सिंपल भाषा में कहूं तो ये हमारी स्ट्रक्चरल यूनिट भी है। यानी हमारी पूरी बॉडी का ढांचा भी इसने बनाया है। हमारी पूरी बॉडी का स्ट्रक्चर भी सेल से ही बना है। और हमारी बॉडी में जो फंक्शन हो रहे हैं, जो रिएक्शनंस हो रहे हैं वो भी सेल के अंदर ही हो रहे हैं। ऐसे ऑर्गेनिज़्म जिनकी बॉडी में एक सेल होता है, सिर्फ उन्हें यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज़्म कहा जाता है। जैसे बैक्टीरिया।

15:32 ऐसे ऑर्गेनिज़्म जिनकी बॉडी में एक से ज्यादा सेल होते हैं, उन्हें मल्टीसेल्यूलर ऑर्गेनिज़्म कहा जाता है। जैसे कि हम यानी ह्यूमन बीइंग्स। अब मेरे भाई एक बात को बहुत गौर से सुनना। ओ मेरे मुन्ना गौर से सुनना। पहली बात तो ये जो तू TikTok TikTok चलती है। नहीं कह ना भाई। अभी यहां पे देखो यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म कुछ खतरनाक काम करते हैं। यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म में कुछ खतरनाक कैपेबिलिटीज़ होती हैं। क्या-क्या कैपेबिलिटीज़ होती हैं? गुरु जी बता दो ना। पहली कैपेबिलिटी है इंडिपेंडेंट एग्जिस्टेंस। भाई यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म जैसे कि बैक्टीरिया है। इसके एक ही सेल में इसकी पूरी बॉडी की ताकत है। क्योंकि इसकी पूरी बॉडी एक ही सेल की बनी हुई है। एक ही सेल में सब कुछ डाल दिया है भगवान ने तो जाहिर सी बात है वो एक सेल इंडिपेंडेंटली एग्जिस्ट कर सकता है। दूसरा इंपॉर्टेंट चीज परफॉर्मिंग ऑल द एसेंशियल फंक्शनंस ऑफ लाइफ। क्या ये दोनों बातें सेम ही हैं? अगर कोई ऑर्गेनिज्म कोई सेल

16:18 अपनी बॉडी में सारे के सारे एसेंशियल काम कर सकता है जिंदा रहने के लिए तो वो इंडिपेंडेंट रह लेगा ना। इसमें कौन सी रॉकेट साइंस है? दोनों बातें एक ही तो हैं। यस गुरु जी दोनों बातें एक ही हैं। इसीलिए यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म महान है। हम यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म को तुच्छ प्राणी समझते हैं। हम समझते हैं कि इनकी बॉडी में एक ही सेल है। इनके बस का कुछ ना है। लेकिन वो वो काम भी कर रहे हैं जो हम नहीं कर सकते। क्या आप में से कोई मुझे एक काम बता सकता है जो कोई प्रोकैरियोट कर सकता है और हम नहीं कर सकते। समस्त ब्रह्मांड के यूकैरियोट्स नहीं कर सकते। ना कोई प्रोटेस्ट कर सकता है, ना कोई फंगस कर सकता है, ना कोई प्लांट, ना कोई एनिमल। ऐसा एक काम जो सिर्फ यह चिंदी बैक्टीरिया कर सकता है। क्या ऐसा कोई काम है जो इस दुनिया को चलाने के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन फिर भी हमारे बस का नहीं है। यस यस गुरु जी ऐसा काम है। इसे हम कहते हैं नाइट्रोजन फिक्सेशन। इस दुनिया में जो

17:03 एटमॉस्फेयर है मेरे आसपास का जो वातावरण है यहां 78% नाइट्रोजन है। लेकिन फिर भी मैं इसको अपनी बॉडी में डायरेक्टली नहीं ले सकता। मैं जब सांस लेता हूं तो मेरे फेफड़ों में कौन सी हवा भरती है? गुरुजी ऑक्सीजन नाइट्रोजन नहीं भरती। क्यों? क्योंकि नाइट्रोजन को तोड़ना इतना आसान नहीं है। नाइट्रोजन कैसा दिखाई देता है गुरु जी? नाइट्रोजन ऐसा दिखाई देता है। n ट्रिपल बॉन्ड एन तीन कोवलेंट बॉन्ड है। दो नाइट्रोजन एटम्स के बीच में तीन कोवेलेंट बॉन्ड है। तोड़ने में जान निकल जाएगी। हमारी तो सच में ही निकल जाएगी। लेकिन बैक्टीरिया बड़े प्यार से इस एक-एक बॉन्ड को धीरे-धीरे ढीला करके तोड़ता है। और इस नाइट्रोजन को जो ये अलग हो गया है। इसको अलग-अलग नाइट्रोजन कंपाउंड्स में कन्वर्ट करता है। इसको अलग-अलग नाइट्रोजन कंपाउंड्स में कन्वर्ट करता है और प्लांट तक पहुंचाता है। फिर प्लांट को हम खाते हैं तो वो नाइट्रोजन हम में पहुंचता है। फिर हमें पीछे बैठकर के शेर देख रहा था।

17:48 शेरो शायरी कर रहा था। वो भी बैठ के देख रहा था कि हां बेटा पहले तू दाल चावल खा ले फिर तेरा मुरब्बा मैं बनाता हूं। तो हमें खा के शेर जो है वो नाइट्रोजन जुटा रहा होता है। यानी हमारे बस की नहीं है नाइट्रोजन फिक्सेशन करनी। ये दिखने में सिर्फ यूनिसेल्यूलर हैं। छोटे हैं चिंदी ऑर्गेनिज्म है। हमें लगता है इनकी कोई औकात नहीं है। लेकिन ये बहुत बड़े-बड़े काम, बहुत बड़े-बड़े कारनामे कर रहे होते हैं मेरे बंधु। इतनी बात समझ में आ गई? दुनिया में दो प्रकार के लिविंग ऑर्गेनिज्म्स। यूनिसेल्यूलर, मल्टीसेल्यूलर, यूनिसेल्यूलर की बॉडी में एक सेल, मल्टीसेल्यूलर की बॉडी में बहुत सारे सेल। यूनिसेल्यूलर ऑर्गेनिज्म की खास बात है कि वो अपने सारे के सारे काम एक ही सेल के अंदर कर सकते हैं। इसीलिए वो इंडिपेंडेंट एग्जिस्टेंस एनश्योर कर सकते हैं। इतनी बात समझ में आ गई तो मेरे भाई एक बार बता दो। आगे बढ़ते हैं अगली स्लाइड के चीचड़े उड़ाते हैं। आराम से देखिएगा। सेल किसने डिस्कवर किया? अगर कोई आपसे

18:34 बोले डेड सेल किसने डिस्कवर किया? या सिर्फ बोल दे सेल किसने डिस्कवर किया? तो उत्तर क्या आ जाएगा? रॉबर्ट हुक। रॉबर्ट हुक। इसका फेवरेट गाना था हाय हुक हाय हुक हाय हाय रॉबर्ट हुक नाम था भाई साहब का रॉबर्ट हुक साहब ने डेड कॉर्क सेल पहली बार देखा मरा हुआ कॉर्क सेल पहली बार देखा जो मधुमक्खी के छत्ते की तरह दिखाई देता था इन्होंने 1665 में ये कारनामा कर दिखाया दुनिया को इन पर बड़ा गर्व था बाद में इन्हें पता लगा कि इन्होंने यह जो आपका मधुमक्खी के छत्ते जैसा स्ट्रक्चर देखा है एक्चुअल में ये सेल वॉल है अंदर इनके के मसाला जो है वो खत्म हो चुका है। यानी ये लिविंग सेल नहीं है। ये खाली टुकड़े हैं। खाली खांचे हैं जिन्हें हम सेल वॉल कह रहे हैं। तो एक्चुअल में रॉबर्ट हुक साहब ने क्या

19:20 देखा? इन्होंने जो है यहां पर सेल वॉल देखी एक्चुअल में। तो हु रिपोर्टेड सेल वॉल फॉर द वेरी फर्स्ट टाइम। रॉबर्ट हुक साहब रिपोर्टेड सेल वॉल फॉर द वेरी फर्स्ट टाइम। सर अगर इन्होंने मरा हुआ मरेला सेल देखा तो पहली बार जिंदा सेल किसने देखा? आपका यहां पर एंटोन वन ल्यूवनहॉक साहब ने पहली बार जिंदा सेल देखा। इनको अलग-अलग जीवित मोटाइल सेल्स देखने की बहुत दिलचस्पी थी। तो ये अलग-अलग लेंसेस को एक के ऊपर एक लगा करके क्योंकि लेंसेस का मैग्नीिफिकेशन पावर बढ़ता है ना। समझ लीजिए मेरे पास एक लेंस है जिसका मैग्नीिफिकेशन पावर है 20x। एक और लेंस है जिसका मैग्नीिफिकेशन पावर है 40x। इन दोनों को ऊपर नीचे रख दूंगा मैं। तो टोटल मैग्नीफिकेशन कितनी हो जाएगी? एक बार लिख के बताइए चैट सेक्शन में। सर अगर एक लेंस किसी भी चीज को 20 गुना

20:06 बड़ा कर देता है और दूसरा लेंस उसी चीज को 40 गुना और बड़ा कर देता है तो टोटल कोई चीज कितनी बड़ी हो गई 20 * 40 यानी क्या 800 गुना बड़ी हो गई और 800 गुना बड़ी है तो आपके अकल के अंधे को भी दिख जाएगी। इन्होंने मोटाइल सेल्स जैसे स्पर्म सेल्स, प्रोटोजोअंस ये जो घूमी फ्री करने वाले सेल्स थे उनको देखा। कई सारे लिविंग सेल्स को इन्होंने देखा 1674 में यानी रॉबर्ट हुक साहब के लगभग 9 साल बाद। करेक्ट। इसके बाद आए रॉबर्ट ब्राउन साहब। रॉ रॉबर्ट हुक साहब ने सेल देखा डेड सेल। रॉबर्ट ब्राउन साहब ने खोज करी न्यूक्लियस की 1831 में। 1831 में। और धीरे-धीरे धीरे-धीरे सेल की गु्थी और सुलझती गई। सेल के बारे में हम और डिटेल में जानकारियां जुटाते चले गए। और मेरे दोस्त हम लोगों ने बहुत सारी

20:52 जानकारियां जुटाई ड्यू टू द एडवांसमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी। ये शब्द आप इस चैप्टर में तीन से चार बार पढ़ेंगे। कहां-कहां पढ़ेंगे मैं आपको अभी बता देता हूं। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी जो इलेक्ट्रॉन बीम्स का इस्तेमाल करती है जो कि लो वेवलेंथ की बीम्स होती हैं। लैम्ब्डा इनका कम होता है। इन इलेक्ट्रॉन बीम्स का इस्तेमाल करके 1950ज में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी बहुत प्रचंड हो गई थी 1950ज में। यानी 1950 से 1960 के बीच में इस दौरान आपकी कई सारी चीजें कई डिटेल्स आपको सेल की देखने को मिली। फॉर एग्जांपल सेल में सबसे छोटी चीज क्या है? सेल में सबसे छोटी चीज क्या है? अगर मैं आपसे स्मालेस्ट ऑर्गनेल का नाम पूछूं सेल की सबसे छोटी चीज आपको क्या लगता है क्या होगी? मैं आपको एक हिंट दे देता हूं अगर आपने पहले एनसीआरटी पढ़ी हुई है तो उसका साइज प्रोकैरियोट्स में होता है 15 से 20

21:39 नैनोमीटर नैनोमीटर माइक्रोमीटर में साइज होता है बैक्टीरिया का उससे भी हजार गुना छोटा एक बैक्टीरिया में भी हजारों राइबोसोम पाए जाते हैं। राइबोसोम सबसे छोटा है। राइबोसोम का स्ट्रक्चर भी हमें कब देखने को मिला था? जॉर्ज पैलेड साहब ने डिस्कवर किया था राइबोसोम को। 1953 में उसका स्ट्रक्चर देखा था। 1953 में 1953 में 1950 से 1960 के बीच में यानी ये जो आपका इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी है ये बहुत मददगार साबित होती है सेल की छोटी से छोटी डिटेल पता लगाने में भी। तो जॉर्ज पैलेट साहब ने इसी इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी की मदद से आपके राइबोसोम को देखा बहुत प्यारे तरीके से। सेल के अंदर पाया जाने वाला जो नेटवर्क है जिसे हम एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम कहते हैं।

22:24 इसका स्ट्रक्चर भी हमने देखा। इसके अलावा सेल मेंब्रेन का जो मॉडल है इसको बनाने में भी इसको देने में भी आपके इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी ने बहुत हेल्प की। तो इन सारी जगहों पर आपको इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी लिखी हुई दिखाई देती है एनसीईआरटी में। तो मैंने सारी चीजों को एक साथ ही आपको बता दिया है। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के आने के बाद यानी 1950 के बाद कोई रहस्य रहस्य नहीं रहा। सेल की छोटी से छोटी डिटेल आपको दिखाई देने लगी। क्योंकि इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी बहुत छोटी चीज को भी देख सकती है। करेक्ट? तो यहां पर आपने राइबोसोम भी देख डाला। तो स्ट्रक्चरल डिटेल्स जो है सेल की वो आपको पता लगने लगी इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी की एडवांसमेंट के बाद। अब दुनिया में अलग-अलग टाइप के सेल हैं। दुनिया में बहुत अलग-अलग टाइप के सेल हैं। प्रोटिस्ट सेल भी है, प्रोटोजोअन सेल भी है, आपका बैक्टीरियल सेल भी है, प्लांट सेल भी है, एनिमल सेल

23:11 भी है, फंगल सेल भी है। दुनिया में अलग-अलग प्रकार के भांति-भांति के ऑर्गेनिज्म्स, भांति-भांति के सेल। इन सबको इकट्ठा किसने किया? एक थ्योरी ने जिसका नाम है सेल थ्योरी। इस थ्योरी का नाम है सेल थ्योरी। यानी ऐसी थ्योरी जो दुनिया के सारे ऑर्गेनिज्म्स पर लागू होती है उसे हम सेल थ्योरी कहते हैं। तो इसने क्या किया? इट यूनिफाइड ऑल ऑर्गेनिज्म्स। इट यूनिफाइड ऑल ऑर्गेनिज्म्स। एक कहावत सुनी होगी ना आपने? बचपन में हिंदी में पढ़ाते थे। अनेकता में एकता है ना? हमारे देश में अलग-अलग प्रकार के लोग रहते हैं। है ना? अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, अलग-अलग खाना खाते हैं। लेकिन फिर भी सब एक हैं क्योंकि सब भारतीय हैं। इसी प्रकार से दुनिया में अलग-अलग प्रकार के ऑर्गेनिज्म हैं। लेकिन फिर भी सब एक हैं। क्यों? क्योंकि सब लोगों ने सेल थ्योरी को फॉलो किया हुआ है। अब ये सेल थ्योरी है

23:58 क्या? सेल थ्योरी दो साइंटिस्ट ने मिलकर के दी थी। पहले साइंटिस्ट का नाम है मिस्टर स्क्लेडन जो कि 1838 में अपनी रिसर्च कर रहे थे और दूसरे साइंटिस्ट का नाम है स्ान जो कि 1839 में अपनी रिसर्च कर रहे थे। ऑलमोस्ट सेम टाइम पर ही दोनों रिसर्च कर रहे थे। अब मुझे खुद बताइए ये जो स्वान है ये नाम आपने कहीं पर सुना हुआ है? सर स्वान सेल का नाम तो हमने न्यूरोलॉजी में सुना हुआ है। जब हम न्यूरॉन का स्ट्रक्चर पढ़ते हैं और न्यूरॉन का स्ट्रक्चर कहां पढ़ते हैं सर? जूलॉजी में पढ़ते हैं। यानी स्ान शब्द जूलॉजी से रिलेटेड है। तो ये जूलॉजिस्ट हैं। और जो बच गए ये आपके बॉटनिस्ट हैं। फूलपत्ती वाले मास्टर हैं। यस। तो स्क्लेडन साहब बॉटनिस्ट हैं। क्यों? क्योंकि स्ान का नाम तो हमने जूलॉजी में सुना हुआ है। सिंपल सी बात है। तो ये ज़लॉजिस्ट हो गए। ये बॉटनिस्ट हो गए। लगभग एक ही टाइम पे दोनों ने रिसर्च स्टार्ट की। 1838 1839 लगभग-लगभग आपका सेम सा ही

24:44 टाइम है। दोनों के दोनों जर्मनी के हैं। स्क्लेडन साहब पहले भी जर्मनी के थे। लेकिन एनसीईआरटी में स्ान साहब को पहले जर्मनी का नहीं माना गया था। ब्रिटिश माना गया था। अभी पिछली साल ही हमारे एनसीईआरटी लिखने वाले लेखकों ने इनको ब्रिटिश साम्राज्य से बाहर करवाया है। इंग्लैंड से लातें खिलवाकर बाहर निकाली हैं। जिससे कि इनको जर्मनी का बनाया जा सके। पता नहीं क्यों ऐसा हुआ कि किसी को ध्यान ही नहीं रहा कि ये किस देश के रहने वाले हैं। किसी को ध्यान नहीं था। अब तक तो स्वान साहब जो है इनकी आत्मा को शांति भी मिल गई होगी क्योंकि बहुत पुराने साइंटिस्ट हैं। बहुत बड़े साइंटिस्ट हैं। बहुत विद्वान थे। लेकिन इन्हें भी नहीं पता था कि इनकी मौत के बाद इनके साथ ऐसा खेल खेला जाएगा कि कोई इन्हें ब्रिटिश बुलाएगा, कोई इन्हें जर्मन बुलाएगा। और अचानक से सन 204 में किसी का माथा फिरेगा और इनकी नेशनलिटी को ही चेंज कर दिया जाएगा। इनका पुराना पासपोर्ट ढूंढ करके उस पे अलग से ठप्पा

25:30 लगाया गया है कि तुम ब्रिटिश नहीं हो। तुम्हें दुगना लगा नहीं देना पड़ेगा। तुम्हें अलग से जो है एक थप्पा मार के पासपोर्ट मिला है जिस पे जर्मन पीपल लिखवाया गया है। तो यहां पर दोनों ही जर्मनी के हो गए तो यह भी याद करने की जरूरत नहीं है मेरे दोस्त। अब ये जो स्क्लेडन साहब है बॉटनिस्ट हैं। नाम ही है बॉटनिस्ट। तो बॉटनिस्ट किस पे रिसर्च करते हैं? गुरुजी प्लांट पे रिसर्च करते हैं। तो इन्होंने कई सारे प्लांट्स को देखा। बहुत प्यार से देखा। घूरा प्लांट्स ने पुलिस केस कर दिया। इतना घूरा इन्होंने प्लांट्स को। और प्लांट को देख के इन्होंने कहा कि ऑल प्लांट्स आर फॉर्म्ड अप ऑफ डिफरेंट टाइप ऑफ सेल्स। हर प्लांट जो है वह अलग-अलग टाइप के सेल्स का मिलकर के बना होता है। एंड यह जो डिफरेंट टाइप के सेल्स हैं दे फॉर्म डिफरेंट टिश्यूज़।

26:15 अलग-अलग टाइप के सेल्स जो हैं ये मिलकर के अलग-अलग टिश्यूज़ बनाते हैं। ये तो हमें पहले से पता है। जैसे प्लांट में अलग-अलग टिश्यू होते हैं। मेरिस्टेमैटिक टिश्यू जो सेल डिवीजन कर सकते हैं। परमानेंट टिश्यू जो सेल डिवीज़न नहीं कर सकते। अलग-अलग टिश्यू हैं। सिंपल टिश्यू हैं, कॉम्प्लेक्स टिश्यू हैं। बहुत अलग-अलग टाइप के टिश्यू हैं। तो यहां पर बॉटनिस्ट बाबू ने क्या किया? प्लांट पे रिसर्च करी। और जो आपके ज़लॉजिस्ट बाबू हैं, इन्होंने क्या किया? इन्होंने पहले एनिमल पे रिसर्च करी। इन्होंने कहा मैं एनिमल पे रिसर्च करूंगा। एनिमल पे रिसर्च करके इन्होंने ये देखा कि एनिमल सेल के ऊपर तो एक लेयर होती है मेरे भाई जिसको हम लोग क्या कहते हैं? प्लाज्मा मेंब्रेन कहते हैं। इसे हम प्यार से सेल मेंब्रेन भी कहते हैं। ये इन्होंने पाया कि जो एनिमल सेल है इसके ऊपर एक लेयर है जिसका नाम है सेल मेंब्रेन। यह खुश हो गए कि यार एनिमल सेल के ऊपर तो एक कोट है, सेल मेंब्रेन है। मैं यह देखना चाहता हूं

27:00 मेरे मन की जिज्ञासा बढ़ गई है। वैसे तो मैं एक बॉटनिस्ट नहीं हूं। मैं अपने भाई स्क्लेडन के पेट पे लात नहीं मारना चाहता। पर मैं यह भी जानना चाहता हूं कि क्या प्लांट में भी ये लेयर होती है या नहीं। तो इसने प्लांट पे भी रिसर्च कर डाली। और जब प्लांट में भाई ने रिसर्च कर डाली तो इन्होंने देखा कि प्लांट में सेल मेंब्रेन तो है ही। लेकिन सेल मेंब्रेन के ऊपर एक और लेयर देखने को मिल रही है। दैट इज अ सेल वॉल। अंबूजा सीमेंट की बनी हुई सेल वॉल भी देखने को मिल रही है। जिसको देख के हमारे स्ान साहब और खुश हो गए कि यार मुझे तो लगा कि प्लांट में एक आधी चीज कम ही पाई जाएगी। चल फिर नहीं सकते। एक जगह पे खड़े रहते हैं। कमजोर समझा जा रहा था प्लांट को। प्लांट समाज की इज्जत जो है हवा में उछाली जा रही थी। लेकिन जब स्वान साहब ने देखा कि यार एनिमल से कोई ना कोई चीज फालतू ही लेके बैठा है प्लांट। ज्यादा एडवांस है। तो हमें पता लगा कि सेल वॉल यहां पर पाई जा रही है। तो इन्होंने पहली

27:46 बार सेल मेंब्रेन को खोजा। सेल वॉल को क्यों नहीं? बताइए एक बार। बताइए सेल वॉल का खोजने का क्रेडिट यहां पर हमने स्ान साहब को क्यों नहीं दिया? अभी-अभी थोड़ी देर पहले पढ़ाया था। भाई ये जो आपके सेल वॉल थे ये जो खाली-खाली खांचे थे ये तो हमारे रॉबर्ट हुक साहब ने ही देख लिए थे। तो आपके रॉबर्ट हुक साहब को क्रेडिट मिलेगा ना। सेल वॉल देखने का। तो सेल मेंब्रेन को देखने का जो क्रेडिट है वो आपके स्ान साहब को मिलेगा। तो ऊपर नीचे का लिंक कर करके पढ़ना होता है मेरे दोस्त। यस। तो इन्होंने सेल मेंब्रेन को रिपोर्ट किया यानी प्लाज्मा मेंब्रेन को रिपोर्ट किया फॉर द फर्स्ट टाइम और इन्होंने एक हाइपोथेसिस दी। हाइपोथेसिस यानी इनके मन में एक बात आई। इन्होंने वो बात कह डाली। इन्होंने दिल की बात कह डाली। क्या बात कही इन्होंने? इन्होंने कहा कि भैया मैंने जितने भी प्लांट्स देखे और एनिमल्स देखे

28:33 वो सारे प्लांट्स और एनिमल्स सेल्स या सेल्स के प्रोडक्ट से मिलकर बने हैं। तो इन्होंने कहा ऑल प्लांट्स एंड एनिमल्स ऑल प्लांट्स एंड एनिमल्स आर फॉर्म ऑफ सेल्स एंड प्रोडक्ट्स ऑफ सेल्स। प्रोडक्ट्स ऑफ सेल्स। यह हाइपोथेसिस किन्होंने दी? अकेले स्वान साहब ने दी। फिर स्क्लेडन साहब ने आया और स्क्लेडन साहब आए और कहा कि भाई दोस्ती कर लो मुझसे। दोनों भाई इस हाइपोथेसिस को थ्योरी में कन्वर्ट कर देते हैं। हाइपोथेसिस और थ्योरी में क्या फर्क है? हाइपोथेसिस मतलब अभी इसका एक्सपेरिमेंटल प्रूफ मिला नहीं है। सिर्फ एक साइंटिस्ट ने अपनी लिमिटेड रिसर्च के हिसाब से ये बताया है। जितने

29:19 प्लांट और एनिमल स्ान साहब ने देखे उस हिसाब से उन्होंने बताया कि हर प्लांट और एनिमल जो अभी तक मैंने देखा है वो सेल्स का मिलकर बना है। जरूरी नहीं दुनिया का हर ऑर्गेनिज्म सेल्स का मिलकर बना हो। अभी इस बात की पुष्टि ये नहीं करते। तो स्क्लेडन साहब ने कहा दोनों भाई साथ में कोलैबोरेट करते हैं। मिलकर इस बात का पता लगाते हैं कि क्या दुनिया के हर ऑर्गेनिज्म में सेल पाया जाता है? हर लिविंग ऑर्गेनिज्म क्या सेल का बना हुआ है? लेट्स अंडरस्टैंड दैट वेरी वेल। तो दोनों भाइयों ने मिलकर क्या दिया? दोनों भाइयों ने बोथ स्क्लेडन और स्ान दोनों ने मिलकर के फॉर्मुलेट करी सेल थ्योरी और इन्होंने कहा सेल थ्योरी के अंतर्गत दो बातें कही कि दुनिया के जितने भी लिविंग ऑर्गेनिज्म हैं प्लांट्स, एनिमल्स, बैक्टीरिया दुनिया का कोई भी लिविंग ऑर्गेनिज्म है, इनकी बॉडी सेल्स की बनी हुई है और सेल के प्रोडक्ट्स की बनी हुई है। यानी सेल जब रिएक्शन करते हैं तो अलग-अलग प्रोडक्ट बनते हैं। उनकी मिलकर

30:04 बनी हुई है। ठीक है? दूसरे इंपॉर्टेंट चीज जो है यहां पर स्क्लेडन और स्ान नहीं डिकोड कर पाए खुद से वो यह है कि नए सेल बने कैसे? हमारी बॉडी ट्रिलियंस ऑफ सेल्स की मिलकर बनी हुई है। लेकिन जब हम छोटे थे तो हमारी बॉडी में एक ही सेल था ना ज़ाइगोट था। क्या दुनिया का हर सेक्सुअली रिप्रोड्यूसिंग ऑर्गेनिज्म पहले एक ज़ाइगोट था। यस सर। मेल गेमिट और फीमेल गेमिट का फ्यूज़ हुआ। एक ज़ाइगोट बन गया। इस ज़ाइगोट के डिवीज़न से आपके हजारों लाखों करोड़ों सेल बनते चले गए। तो क्या पहले हम भी एक ज़ाइगोट थे? यस। मदर से आया ओवम। फादर साहब का आया स्पर्म। दोनों की फर्टिलाइजेशन हुई एंड एक जागोट तैयार हुआ। इस एक सेल वाले जागोट ने डिवाइड करके दो सेल बनाए। दो से चार सेल बने। आठ सेल बने। 16 32 64 128 256 512, 1024, 2048 ऐसे करते-करते सेल हम

30:50 बनाते चले गए। एंड अल्टीमेटली पूरा सेल्स का एक मास बन गया, गुच्छा बन गया। तो यहां पर स्क्लेडन और स्ान ने ये तो बताया कि हमारी बॉडीज सेल की बनी हुई हैं। दुनिया के हर ऑर्गेनिज्म में सेल पाया जाएगा। इन्होंने यह नहीं बताया कि नए सेल आ कहां से रहे हैं। इसीलिए एक और महानुभाव की जरूरत पड़ी जिनका नाम था सर रुडोल्फ विरको। उन्होंने 1855 में एक बात कह डाली। रुडोल्फ विरको ने 1855 में एक बात कह डाली। सेल थ्योरी को फाइनल शेप दे डाली। और इन्होंने जो बात कही वो है ओमनिस सेलुला ईसेल्यूल। सेलुला ईसेलुला का मतलब सेल से ही सेल बनता है। नए सेल पुराने सेल्स के डिवीजन से ही बनते हैं। तो इन्होंने सेल थ्योरी को एक फाइनल शेप दे डाली। तो ये वाली बात भी हमने सेल थ्योरी

31:37 में ऐड कर डाली कि नए जो सेल हैं ये प्री एकिस्टिंग सेल से ही मिलकर के तैयार होते हैं। ओमनिस सेलुला ईसेल्यूलरा। सेल से ही सेल बनता है। ये हमने जाना। तो फाइनल जो सेल थ्योरी है उसका क्रेडिट किसे दिया जाता है? इनिशियली सेल थ्योरी किन्होंने दी? स्क्लेडन एंड स्ान ने। दोनों भाइयों ने मिलकर। दो भाई दो तबाही बाद में तीसरा तबाही भाई भी आया जिनका नाम था रुडोल्फ वर्को उन्होंने फ़ाइनल शेप दी सेल थ्योरी को तो यह पूछा जाए कि फ़ाइनल शेप फाइनल फॉर्म किसने दिया सेल थ्योरी को रुडोल्फरको साहब ने दिया 1855 में ओमनी सेल्यूल ईसेलुला बोल कर के इन्होंने सेल थ्योरी को फाइनल शेप दे डाली| ये बात आपको समझ में आई या नहीं? इतनी बात मुझे बता दीजिए। पूरी स्लाइड को समराइज़ कर देता हूं। मेरे भाई दुनिया में अलग-अलग प्रकार के सेल हैं। सभी सेल को एक जैसा स्वरूप देने का काम किसका है? सभी सेल्स को

32:23 यूनाइट करने का काम किसका है? कि एक ऐसा रूल मैं बना दूं जो हर सेल फॉलो करे। दैट इज सेल थ्योरी। तो स्क्लेडन साहब ने 1838 में अपने एक्सपेरिमेंट स्टार्ट किए प्लांट पे और इन्होंने बताया अलग-अलग प्लांट्स को देख के कि अलग-अलग प्लांट्स डिफरेंट सेल से मिलकर बनते हैं और वो डिफरेंट सेल्स डिफरेंट टिश्यूज़ बना रहे होते हैं। 1839 में यानी लगभग सेम सेम टाइम पर स्ान साहब ने पहले एनिमल्स पे रिसर्च करी और देखा कि एनिमल के सेल के ऊपर एक लेयर होती है जिसे सेल मेंब्रेन कहा। और इन्होंने प्लांट्स पे भी रिसर्च करी और देखा कि प्लांट में सेल मेंब्रेन के ऊपर एक और लेयर है जिसे हम सेल वॉल कह रहे हैं। और इन्होंने उसके बाद एक हाइपोथेसिस दी डाली कि जितने मैंने प्लांट और एनिमल देखे हैं उनमें तो मैंने ये जरूर पाया है कि भैया जितने भी प्लांट और एनिमल मैंने देखे हैं वो सेल्स के बने हुए हैं। सेल्स के प्रोडक्ट से मिलकर बने हुए हैं। तो स्क्लेटन और स्वान साहब ने साथ मिलकर सोचा कि यार दुनिया के जितने भी ऑर्गेनिज्म्स हम देख सकते हैं। उनमें वैलिडेट करने की कोशिश करते हैं कि क्या सेल दुनिया के हर लिविंग ऑर्गेनिज्म का एक

33:09 हिस्सा है। और इन्होंने पाया यस अगर जिंदा रहना है तो सेल होना आवश्यक है। उन्होंने देखा। उन्होंने पाया कि दुनिया के सारे ऑर्गेनिज्म सेल्स या सेल के प्रोडक्ट से मिलकर बने हुए हैं। इसे हमने सेल थ्योरी कहा। कुछ कमियां यहां रह गई। जैसे स्क्लेडन और स्वान ये नहीं बता पाए कि नए सेल्स कहां से आ रहे हैं। तो विरको साहब ने बीच में आकर के छलांग मारी और 1855 में एक बात कह डाली ओमनिस सेलुला ईसेल्यूलला यानी नए सेल पुराने सेल्स से ही आपके तैयार हो रहे होते हैं। सेल थ्योरी कंप्लीट हो गई। इसे फाइनल शेप मिल गई। वायरस यहां पर सेल थ्योरी का एक्सेप्शन होता है। वायरस सेल थ्योरी का एक्सेप्शन होता है। वायरस सेल थ्योरी को फॉलो नहीं करता। क्यों नहीं करता? क्योंकि वायरस लिविंग नहीं है। अगर मेरे पेन पे इस टाइम पर कोरोना वायरस बैठा है। एचआईवी वायरस बैठा है, मेरा कुछ नहीं उखाड़ सकता। क्यों? क्योंकि मेरी बॉडी के बाहर दिस

33:55 वायरस इज एन इनर्ट क्रिस्टलाइज्ड स्ट्रक्चर। यानी जैसे एक नमक के दाने की जो हैसियत है, एक चीनी के क्रिस्टल की जो हैसियत है, वही इस वायरस की हैसियत है। यह कुछ भी नहीं है मेरी बॉडी के बाहर। जब यह मेरी बॉडी के अंदर आ जाएगा, जब यह मेरे किसी सेल में घुस जाएगा, तब यह मेरी सेल की मशीनरी को ओवरटेक कर लेगा, मेरे सेल की मशीनरी को हाईजैक कर लेगा, मेरे सेल पर कब्जा कर लेगा। तब जाके यह कुछ करने लायक बनेगा। खुद का सेल इसके पास नहीं है। और मैंने पहली लाइन में ही यह बताया था सेल इज द स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल यूनिट ऑफ लाइफ। जिंदा रहना है तो खुद का सेल होना चाहिए। इसके पास खुद का कुछ भी नहीं है वायरस के पास। तो इसमें सेल थ्योरी लागू ही नहीं होती। क्योंकि मेरे भाई इसके पास सेल है ही नहीं। तो लागू कहां से हो गया? यस। बेसिक बातें हमने यहां पर देख ली हैं। सेल थ्योरी से संबंधित भी। अब देखिए सेम सेम बातें हैं। एक बार रिवीजन हो जाएगा।

34:41 आराम आराम से देखिए। 1665 में पहला डेड सेल डिस्कवर किया गया जो कि किन्होंने किया आपके रॉबर्ट हुक साहब ने। और टर्म सेल भी इन्होंने दी। ये जो खाली कंपार्टमेंट थे इन्होंने जो सेल वॉल्स नोटिस की। ये जो खाली कंपार्टमेंट थे इन एम्प्टी कंपार्टमेंट को हम लोग प्यार से क्या कहते हैं? सेलुला कहते हैं। तो यहीं से आपकी सेल टर्म निकली थी। तो कोई पूछे कि टर्म सेल किन्होंने दी? रॉबर्ट हुक साहब ने दी 1674 में यानी उनके 9 साल बाद एनिमल सेल्स को यानी मोटाइल सेल्स को ऑब्जर्व किया पहली बार किन्होंने? एंटोन वन ल्यूवेनहॉक साहब ने पहली बार लिविंग सेल को देखा। लिविंग सेल को देखने का क्रेडिट इनको गया। 1831 में रॉबर्ट ब्राउन साहब ने न्यूक्लियस की डिस्कवरी करी। 1838 में कई सारे प्लांट्स को ऑब्जर्व किया और कहा कि अलग-अलग प्लांट्स अलग-अलग सेल्स के

35:28 मिलकर बने होते हैं और वो कंस्टीट्यूट कर रहे होते हैं नए-नए टिश्यूज़ को, डिफरेंट टिश्यूज़ को। ये बात स्क्लेडन साहब ने कही। 1839 में स्ान साहब आए। इन्होंने पहले अलग-अलग एनिमल सेल्स को देखा और कहा कि भैया इनमें एक लेयर पाई जाती है जिसका नाम है प्लाज्मा मेंब्रेन। और इन्होंने फिर कई प्लांट सेल्स को देखा और कहा कि प्लांट सेल का एक स्पेशल फीचर है जिसका नाम है सेल वॉल। और इन्होंने हाइपोथेसिस दे डाली कि जितने प्लांट और एनिमल मैंने देखे हैं उनमें आपकी सेल की प्रेजेंस है। 1855 में ओमनी सेलुला ईसेलुला कह कर भाग गए कौन? आपके रुडोल्फ वेरको साहब। और सबको हक्का-बक्का छोड़ दिया। भौचक्का छोड़ दिया। यह आपकी बात है रुडोल्फ बेरको साहब की। करेक्ट है? इतनी बातें सबको समझ में आ गई? यहां तक की बातें सभी को समझ में आई? यस और नो एक बार बता दीजिए जिससे हम आगे

36:16 बढ़ सकें। करेक्ट एकदम करेक्ट है गुरु जी। यार फास्टास्ट स्लो स्लो ऐसा मत करो। मैं उन बच्चों के लिए पढ़ा रहा हूं जो एकदम बेसिक लेवल से तैयारी करने आए हैं। और आप अगर रिवीजन करने आए हो तो आप वैसे भी 2x पे देख सकते हो। मैंने जो प्रॉमिस किया है कि एकदम फंडामेंटल लेवल से तैयारी होगी। मैं अपने वादे पर अडिग हूं। देखो जितना मैंने बोला था उतना करा ले जाऊंगा मैं आज आराम से। है ना? इज्जत से बैठकर के सुनो। क्योंकि बेसिक कांसेप्ट जब क्लियर होते हैं तो आगे टाइम नहीं लग रहा होता मेरी जान। आगे चीजें हल्की लगती हैं। फिर जैसे आज मैं आपको जब न्यूक्लियस पढ़ाऊंगा, क्रोमोजोम पढ़ाऊंगा, क्रोमोजोम के टाइप पढ़ाऊंगा, तो सेम चीज पे मैं टाइम पास क्यों करूंगा? सेल साइकिल और सेल डिवीज़न चैप्टर में। भागेंगी ना चीजें? बहुत आसान लगेंगी। क्योंकि सेम-सेम टॉपिक रिपीट होगा। यस। आज जब मैं आपको बता चुका हूं सेल के बारे में

37:01 सारी कहानी। तो कल जब मैं लिविंग वर्ल्ड पढ़ाऊंगा तो मैं सेल की डिस्कशन क्यों करूंगा? जब आज मैं आपको सेल वाल बता दूंगा कि दुनिया के सारे प्राणियों में कैसी दिखाई देती है। तो कल जब मैं आपको प्लांट किंगडम पढ़ाऊंगा, बायोलॉजिकल क्लासिफिकेशन पढ़ाऊंगा, तो मैं उस चीज पे अपना टाइम क्यों दूंगा? बेसिक कांसेप्ट जब क्लियर होते हैं, तो आगे चीजें आसान हो जाती हैं। आगे के चैप्टर्स छोटे नजर आएंगे आपको बाय डिफ़ॉल्ट। है ना? तो बिंदास पढ़ते रहो। कोई दिक्कत नहीं। आओ मेरे भाई, अगली चीज़ मैं आपको दिखाता हूं। अगली चीज़ है ओवरव्यू ऑफ़ अ सेल। यानी एक जनरल सेल। एक जनरल सेल। अगर दुनिया में मैं कोई भी सेल बना दूं तो उस सेल में मेरे को क्या-क्या देखने को मिलेगा? यह मैं आपको यहां पर भी दिखाना चाह रहा हूं। यहां पर भी समझाना चाह रहा हूं। गौर से सुनना। अगर कोई मुझे कोई कहे भाई कि एक सेल बना दो ना गुरुजी प्लीज एक सेल बना दो। मैं कहूंगा नहीं यार मुझे बड़ी शर्म आती है। पब्लिक में सेल बनाने में मुझे बहुत ऐसा धक-धक करता है मेरा

37:48 दिल। तो बोलोगे नहीं सर प्लीज बना दो। मैं भी फिर थोड़ा भाव खाऊंगा। नहीं यार मैं सेल नहीं बना सकता। यह मेरी कलाकारी है दोस्त। मैंने बचपन से सेल बनाना सीखा है बहुत मेहनत करके। तो मैं तुम्हें फ्री में नहीं बता सकता कि कैसे सेल बनता है। तुम मेरी कला को कॉपी कर लोगे। फिर तुम कहोगे सर प्लीज सर रिक्वेस्ट सर एक बार सेल बना दो। छोटा सेल बना दो सर। एकदम चिंदी बेसिक लेवल का सेल बना दो। तो मैं क्या बनाऊंगा? मैं बोलूंगा चलो यार ये बना दिया तुम्हारा दिल रखने के लिए। अब तुम बोलोगे यार गुरुजी सेल तो बना दिया है आपने। अब ये जो दुनिया का सबसे चिंदी सेल बनाया है इससे आसान तो मैं कुछ नहीं बना सकता। इतनी तो मेहनत मुझे कम से कम करनी पड़ेगी। अगर मैं दुनिया का सबसे खत्म सेल भी बनाता हूं तो भी मैंने दो चीजें बना ही दी। पहली चीज यह मेंब्रेन और दूसरी चीज यह अंदर का मसाला दैट इज साइटोप्लाज्म। साइटो का मतलब

38:35 सेल। प्लाज्मा का मतलब अंदर का पानी। यानी मेरे भाई आप एक बाउंड्री तो कम से कम बनाओगे सेल बनाते टाइम। ये सेल मेंब्रेन होती है। और अंदर आप जो इलाका बनाओगे ये काला-काला इलाका तुरू तुरुरू। ये क्या है मेरे दोस्त? ये आपका साइटोप्लाज्म कहलाता है। यानी दुनिया का ऐसा कोई सेल नहीं। देयर इज नो एक्सेप्शन। पूरी दुनिया में ऐसा कोई भी सेल नहीं है जिसके पास सेल मेंब्रेन और ये साइटोप्लाज्म ना हो। दीज़ आर यूनिवर्सल चीजें। यानी ये जो सेल मेंब्रेन है इट इज़ यूनिवर्सल इन ऑल सेल्स। इसे सेल मेंब्रेन कह लो, प्लाज्मा मेंब्रेन कह लो या प्लाज्मो लेमा कह लो। लेमा का मतलब भी क्या होता है? मेंब्रेन होता है। तो प्लाज्मा मेंब्रेन को ही आप प्लाज्मो लेमा कह सकते हो। एंड मेरे दोस्त यहां पर आपको क्या देखने को मिल रहा है? साइटोप्लाज्म। ये जो साइटोप्लाज्म है ये भी आपका क्या है? यूनिवर्सल है इन ऑल

39:21 सेल्स। ये भी सारे सेल्स के अंदर यूनिवर्सल देखने को मिलता है। गुरु जी ये दो चीजें तो हमें पता लग गई। ये दो चीजें तो हमको समझ में आ गई। और कई चीजें बता दो गुरु जी। आपके मुंह से हम कई सारी बातें सुनना चाहते हैं। उसी के लिए हम आए हैं भीड़ में इकट्ठा हो के। अभी बताता हूं मेरे भाई। समझ लीजिए मैं यहां पर एक प्लांट सेल ले रहा हूं। तो प्लांट सेल में अंदर वाली ये जो लेयर है पीली पीली इसको मैंने क्या कह दिया? सेल मेंब्रेन कह दिया। गुरु जी ये दुनिया के हर सेल में पाई जाती है क्या? हर सेल में पाई जाती है। इसीलिए इसको यूनिवर्सल कहा हमने। इसके बाहर जो आपकी लेयर है इसको हमने कह दिया सेल वॉल और वॉल किसकी बनती है मेरे भाई अंबूजा सीमेंट की बनती है मेरे भाई मेरे कमरे की जो दीवार है क्या मैं इसको खिसका करके और बड़ा और छोटा कर सकता हूं अपनी ताकत से गुरु जी आप कुछ भी कर सकते हो लेकिन अभी अपनी तबीयत थोड़ी हल्की चल रही है वरना एक धक्के में तुम्हें पता है मैं

40:06 ये बिल्डिंग खिसका करके दूसरी जगह पहुंचा देता लेकिन मेरे दोस्त ये जो दीवार है बड़ी टाइट होती है रिजिड होती है इसीलिए इसका नाम है सेल वॉल कोई भी नाम रखा जाता है तो मेरे भाई कुछ सोच समझ के रखा जाता है बायोलॉजी में तो यहां यहां पर अगर हम इस बाहर वाली लेयर को सेल वॉल कह रहे हैं तो इसका नाम वॉल क्यों है? क्योंकि ये रिजिड है। एक बार अगर ये पक गई अगर सेल वॉल कच्ची है तो मेरे दोस्त सेल बड़ा हो सकता है। छोटा हो सकता है। कोई दिक्कत नहीं है। सेल में डिवीजन हो सकती है। यानी छोटा हो गया। एक सेल को थुचुक करके दो सेल में डिवाइड कर दिया तो सेल के दो छोटे-छोटे टुकड़े हो गए। सेल बड़ा हो गया, ग्रो कर रहा है। ऐसा भी हो सकता है। अगर सेल वॉल कच्ची है तो। अगर सेल वॉल पक गई मेरे भाई। अगर सेल वॉल पक गई एक टाइम पर मैच्योर हो गई फिर कुछ नहीं हो सकता यह रिजिड हो जाती है अंबूजा सीमेंट की बनती

40:53 है यानी यह एक सेल को स्ट्रक्चर और शेप प्रोवाइड कर रही होती है उसके बाद कुछ नहीं हो सकता सेल का तो इसीलिए हम कहते हैं कि जो सेल वॉल है ये सेल को बस्ट होने से फटने से और कोलैप्स होने से सिकुड़ने से बचाती है क्योंकि एक दीवार का काम करती है जब सेल मैच्योर हो जाता है तो उसके बाद सेल अपनी शेप साइज में कोई परिवर्तन नहीं कर सकता दिस इज सेल वॉल क्या ये सेल वॉल प्लांट सेल में पाई जा रही रही थी गुरु जी बिल्कुल पाई जा रही थी। क्या ये सेल वॉल एनिमल सेल में पाई जा रही थी? नहीं पाई जा रही थी। तो ये अगर सेल मैं बोलूं प्लांट सेल होगा या एनिमल सेल? तो आंसर क्या होगा? आप लिख के बताइए एक बार। अगर मैं आपसे पूछूं कि ये दो में से एक सेल है या तो प्लांट सेल या एनिमल सेल? दो में से एक ही हो सकता है। तो बताइए कौन सा सेल है? आप कहेंगे गुरु जी दो में से एक ही चुनना है तो हम प्लांट सेल बोलेंगे क्योंकि एनिमल सेल में सेल वॉल नहीं होती। यहां आपका प्लांट सेल होगा तभी आपकी रिजिड सेल

41:40 वॉल देखने को मिल रही है। करेक्ट है? एकदम करेक्ट है गुरुदेव। ये बात हमको समझ में आ गई। ये बात हमको पता लग गई। अब दुनिया के सेल्स जो हैं यूकैरियोटिक सेल्स यूकैरियोटिक यू मतलब ट्रू यानी सच्चा कैरिओन मतलब न्यूक्लियस। सच्चा न्यूक्लियस जिन सेल्स में पाया जाता है उन्हें यूकैरियोटिक सेल्स कहा जाता है। अगर ये एक यूकैरियोटिक सेल है तो इसमें न्यूक्लियस पाया जाएगा। मेंब्रेन बाउंड न्यूक्लियस पाया जाएगा जिसमें छोटे-छोटे छेद होंगे। छोटे-छोटे छेदों से समान न्यूक्लियस से साइटोप्लाज्म में भी आ सकता है। छोटे-छोटे छेदों से समान साइटोप्लाज्म से न्यूक्लियस में भी जा सकता है। यानी ये एक गेट है। ये एक द्वार है जिससे सामान आर-पार हो सकता है। बाहर से अंदर और अंदर से बाहर जा सकता है। इन न्यूक्लियस की छेदों को हम लोग कहते हैं न्यूक्लियर पोर। तो यहां पर आपका वेल डिफाइंड न्यूक्लियस देखने को मिल रहा

42:26 है मेरे भाई। वेल डिफाइंड न्यूक्लियस देखने को मिल रहा है। इस न्यूक्लियस के अंदर होते हैं क्रोमोजोम। और इन क्रोमोजोम में पैक्ड होता है हमारा जेनेटिक मटेरियल यानी डीएनए। यानी सेल में होता है न्यूक्लियस। सेल में होता है न्यूक्लियस। न्यूक्लियस में होते हैं क्रोमोजोम। न्यूक्लियस में होते हैं क्रोमोजोम। और क्रोमोजोम में पाया जाता है यह पीला पीला क्या? आपका डीएनए जो यहां पर मैंने बता रखा है जो कि हमारा जेनेटिक मटेरियल होता है। यही हमारी बॉडी का ऐसा मटेरियल है। ऐसा केमिकल है जो पूरे सेल से काम करवा रहा है। राजा वाली मेंटालिटी है इसकी। यही सारा काम कराता है। बैठ के हुकुम चलाता है। राजगद्दी कौन तोड़ रहा है? कौन बैठा है राजा वाले सिंहासन पर? डीएनए। काम कौन करता है? डार्क हॉर्स कौन है? वर्क हॉर्स कौन है? हर जगह काम करता हुआ कौन दिखाई

43:11 देगा? प्रोटीन। लेकिन मेरे भाई एक्चुअल में वो काम करा कौन रहा है? हुकुम कौन चला रहा है? गद्दी पे कौन है? डीएनए। इसीलिए इसे जेनेटिक मटेरियल कहा। जेनेटिक मटेरियल यानी वो मटेरियल। वो मॉलिक्यूल जिसका राज चले। दैट इज डीएनए। और जो काम करे भाग-भाग कर दौड़ भाग करे वह है आपका प्रोटीन। बहन की शादी में छोटा भाई है प्रोटीन भाग-भाग कर कुर्सी लगाना। फूफा को स्टेशन पे से लेके आना। फूफा जी के नखरे झेलना। उनको पेप्सी का कैन भी खोल खोल के देना। खुद से फूफा जी हाथ भी नहीं हिलाएंगे। यह है डार्क हॉर्स। वर्क हॉर्स काम करने वाला। कामकाजी बंदा प्रोटीन। बहन का सिर्फ मुंह हिल रहा है। मेकअप कर रखा है इतना सारा। सिर्फ मुंह हिल रहा है। वो भी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे करके धीरे-धीरे इंस्ट्रक्शंस आ रहे हैं। वरना मुंह पे जो बिड़ला वाइट पुट्टी लगी है वो यहां यहां तक

43:58 निशान फैल जाएगा। आपने देखा होगा आपकी कोई बड़ी बहन है तो आपको आईडिया होगा। शादी ब्याह में जब मेकअप कराया जाता है तो बहुत ज्यादा मुंह नहीं खोलते। उनको मना किया जाता है। कि ये जो इतना बड़ा आपके मुंह पे जो ऐसे-ऐसे करके हमने पेंट पुट्टी किया है। अगर आप ज्यादा मुंह फाड़ेंगी तो जो है पूरा मेकअप ऊपर नीचे हो जाएगा। यह जो मुखौटा है यह उतर जाएगा। तो इससे बढ़िया कम बोले तो जो सिर्फ राज चला रहा है, बातें कर रहा है बड़ी-बड़ी वो है डीएनए। जो कामकाज कर रहा है सच में वो है मेरे भाई आपका प्रोटीन। वर्क हॉर्स जो है वो है प्रोटीन। तो जेनेटिक मटेरियल कहां पाया गया? सेल में है डीए। सेल में है न्यूक्लियस। न्यूक्लियस में क्रोमोजोम। क्रोमोजोम में डीएनए। ठीक है? अब ये जो न्यूक्लियस है इसे हम क्या कहते हैं? ब्रेन ऑफ द सेल कहते हैं। क्योंकि मेन जो मटेरियल है जो सेल को कंट्रोल कर रहा है वो यहीं पाया जा रहा है। इसे आप सेल का दिमाग कहते हैं। ब्रेन ऑफ द सेल। है ना?

44:46 देखा सेल के पास भी दिमाग है। तुम ही अच्छे लोग हो। सेल के पास दिमाग है। तुम्हारे पास भी दिमाग है। मैं तो ये कह रहा था। इसे डेंस मेंब्रेन बाउंड स्ट्रक्चर कहा जाता है। गाढ़ा सा स्ट्रक्चर है। सबसे मेन स्ट्रक्चर है। दिमाग है। गाढ़ा सा स्ट्रक्चर है। डेंस मेंब्रेन बाउंड स्ट्रक्चर यूकैरियोटिक सेल में पाया जाता है। इसे न्यूक्लियस कहा। न्यूक्लियस को ब्रेन ऑफ सेल भी कहते हैं। इसके अंदर क्रोमोजोम पाए जाते हैं। नाम में घुस जाओ खोपड़ी पे नारियल का तेल लगा के। क्रोमो का मतलब क्या हो गया? क्रोमा का मतलब होता है हर जगह कलर। यानी इस पे हम कलर डाल सकते हैं। यानी इस क्रोमोजोम को देखने के लिए हम इस पे स्पेसिफिक कलर की डाई डाल सकते हैं। तो इसे क्रोमो कहा। यह डाई को उठा लेता है। और सोम का मतलब होता है स्ट्रक्चर यानी बॉडी। ऐसी बॉडी, ऐसा स्ट्रक्चर जो कलर के साथ खेल जाए, जो कलर को अपना ले, अपना बना ले, उसे हम क्या

45:32 कहते हैं? क्रोमा कहते हैं। क्रोमासोम यानी कलर वाली डाई अपने ऊपर ले लेता है। तो यह न्यूक्लियस में पाया जाता है। और इस क्रोमोजोम में पैक्ड होता है क्या? जेनेटिक मटेरियल। आपके अंदर कितने क्रोमोजोम है? एक बार बता दीजिए चैट सेक्शन के अंदर लिख करके। लेकिन सवाल यह है पहला सवाल कि आप मुझे बताएंगे नंबर ऑफ क्रोमोजोम इन डिप्लॉयड सेल इन नॉर्मल सेल और नंबर ऑफ क्रोमोजोम इन हैप्लॉयड सेल। एक सीक्वेंस में आंसर बताइए। भाई अगर आप अपने डिप्लॉयड सेल की बात करें। जैसे चीख सेल है, गाल का सेल है, आंख का सेल है, लीवर का सेल है, किडनी का सेल है, फेफड़े का सेल है, पैंकक्रियाज का सेल है, इंटेस्टाइन का सेल है। आपकी बॉडी के अधिकतर सेल्स डिप्लॉयड है। लेकिन आपका जो स्पर्म सेल है, ओवम सेल है, जो गेमिट है, वो आपका हैप्लॉयड है। तो यहां 46 क्रोमोजोम हो गए। 23 मम्मी ने दिए, 23

46:18 पापा ने और यहां आपके सिर्फ 23 क्रोमोजोम है। आज हम इनके बारे में भी पढ़ेंगे। जब हम सेल साइकिल, सेल डिवीजन चैप्टर की बात कर रहे होंगे। तो इसके बारे में और डिटेल में बात हो रही होगी। अब देखिए सेल मेंब्रेन को प्लाज्मा मेंब्रेन या प्लाज्मोलेमा कहा जो यूनिवर्सल है। सेल वाल बाहर वाली है रिजिड। साइटोप्लाज्म जो है यह ऑक्यूुपाई करता है वॉल्यूम ऑफ द सेल। क्या बात हो गई सर जी? मेरे भाई समझ लीजिए इस कमरे में कुछ भी नहीं है। तो क्या एक्चुअल में कुछ भी नहीं है सर? कुछ तो है। हवा है। जहां इस कमरे में कुछ भी नहीं है। आई एम नॉट स्टैंडिंग इन वैक्यूम। इस कमरे में जहां कुछ भी नहीं है वहां एटमॉस्फेयर तो है। हवा तो है। इसी प्रकार से एक सेल में जहां कुछ भी नहीं है वहां काला-काला स्पेस तुरु तुरु जो है ये आपका क्या है? साइटोप्लाज्म है। ये आपका क्या है? साइटोप्लाज्म है। और साइटोप्लाज्म में प्लाज्म का मतलब क्या

47:05 होता है? प्लाज्मा का मतलब हमेशा होता है पानी यानी वाटर। और वाटर ही वो मीडियम है जिसमें आपके सेल के सारे के सारे रिएक्शंस हो रहे होते हैं। तो इसे हम कहते हैं मेन एरीना फॉर सेलुलर एक्टिविटीज। पानी में ही हमारे सारे के सारे सेल के काम होते हैं। तो सेलर एक्टिविटीज कहां होंगी? साइटोप्लाज्म वाले इलाके में होंगी। और इन एक्टिविटीज की वजह से ही टाइगर जिंदा है। मेटाबॉलिक रिएक्शंस यहीं होती हैं। यानी हमारे सेल को लिविंग स्टेट में रखने का काम किसका है? टाइगर जिंदा किस वजह से है? इन्हीं साइटोप्लाज्म में होने वाली रिएक्शनंस की वजह से है। आज ही मैं आपको बायो मॉलिक्यूल पढ़ाऊंगा और बायो मॉलिक्यूल में मैं आपको यह बात बताऊंगा कि जैसे ही आपकी बॉडी में मेटाबॉलिक रिएक्शंस होना बंद हो जाती हैं, आपका खेल खत्म। गायब इस दुनिया से टाटा बाय-ब कोई नहीं बचा सकता आपको। आप जिंदा ही हो

47:50 मेटाबॉलिज्म की वजह से। आपके सेल में काम होना बंद हो जाएगा। मशीनरी ठप हो जाएगी। रिएक्शंस होना बंद हो जाएंगे। यू विल गो इन अ स्टेडी स्टेट। हम हमेशा कहते हैं हमें शांति की तलाश है। पीस की तलाश है। लेकिन अगर आपकी बॉडी पीस में आ गई तो आपके पीस पीस हो जाएंगे। मेरे भाई अगर आप स्टेडी स्टेट में चले गए, इक्विलिब्रियम में चले गए, केमिस्ट्री में देखो इक्विलिब्रियम कितनी बढ़िया चीज है। दो चैप्टर लगते हैं। केमिकल इक्विलिब्रियम, आयनिक इक्विलिब्रियम। इक्विलिब्रियम के बारे में पढ़ते हैं। कितना प्यारा स्टेट है। वाह। हर चीज को इक्विलिब्रियम में जाना चाहिए। अगर तुम इक्विलिब्रियम में चले गए तो तुम्हारी बैंड बज जाएगी। है ना? 12वीं क्लास के बाद सीधा 13वीं हो जाएगी। इसीलिए हमें इक्विलिब्रियम में नहीं जाना होता। इसीलिए हम लोग रोटी पानी खाते हैं। इसीलिए हम अपनी बॉडी को एनर्जी देते हैं। जिससे कि हम लोग लगातार निरंतर मेहनत कर

48:36 सके, काम कर सके। हमारी बॉडी में ऊर्जा आ सके और हम लोग कहीं ना कहीं लगे रहें, व्यस्त रहें, कुछ ना कुछ करते रहें। अगर हम स्टेडी स्टेट में सो गए तो मेरे भाई उठाने वाला कोई नहीं होगा। यमराज जी का भैंसा हमें साक्षात हमारी आंखों के सामने दिख जाएगा। रूह कांप उठेगी सबकी। और ये जो आपका मटेरियल है, ये सेमीफ्लूइड होता है। दुनिया के हर सेल में सेमी फ्लूइड होता है। सेमीफ्लूइड क्यों? क्योंकि ये आपका पानी लेकर बैठा हुआ है। तो फ्लूइड तो है। अब इस सेल में अलग-अलग चीजें भी तो होंगी। ये खाली थोड़ी है पूरा स्पेस। जैसे यूकैरियोटिक सेल है तो एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम भी है, गोलजी भी है, राइबोसोम भी पड़े हुए हैं, परोक्सिसोम भी पड़ा हुआ है, माइटोकांड्रिया भी है, क्लोरोप्लास्ट भी है। कितनी सारी चीजें हैं। तो ये प्रॉपर फ्लूइड नहीं है। इसमें बीच-बीच में और भी मटेरियल है। तो ये सेमीफ्लूइड हो जाता है। तो साइटोप्लाज्म पूरे सेल की वॉल्यूम को

49:21 ऑक्यूुपाई करता है। जहां कुछ नहीं है वहां साइटोप्लाज्म है। यह आपका सेमीफ्लूइड होता है। यह आपका आपके सेल को जिंदा रखता है। क्योंकि यहीं इस पानी में सारे के सारे मेटाबॉलिक रिएक्शनंस हो रहे होते हैं। इसीलिए इसे मेन एरीना ऑफ सेल्यूलर एक्टिविटीज कहा जाता है। इतनी बातें मेरे भाई तुम्हें समझ में आ गई तो मुझे बता दो ना एक बार जिससे कि हम लोग आगे बढ़ सकें। क्या यह बात एक बेसिक सेल के बारे में आपको समझ में आ गई है? मैंने एक जनरल सेल उठाया है। कुछ नहीं कहा। मैंने सिर्फ आपको मतलब बताया है चीजों का कि साइटोप्लाज्म क्या है? सेल वॉल क्या है? सेल मेंब्रेन क्या है? न्यूक्लियस क्या है? क्रोमोसोम क्या है? डीएनए क्या है? एक और चीज आपको पता होगी। बचपन से पता होती है सबको। डीएनए से आरएनए बनता है। डीएनए से आरएनए बनता है। इसे हम क्या कहते हैं प्रोसेस को? ट्रांसक्रिप्शन कहते हैं गुरु जी। ट्रांसक्रिप्शन कहते हैं। और मेरे भाई इस आरएनए से जब आपका प्रोटीन बनता है तो इसे ट्रांसलेशन कहते हैं। और

50:09 यह प्रोटीन आपकी बॉडी में काम करता है। यह वर्क हॉर्स होता है। यानी जेनेटिक मटेरियल है डीएनए। डीएनए को अगर सेल्स में काम कराना है तो किससे कराएंगे? प्रोटीन से कराएंगे। तो प्रोटीन बनाने के लिए पूरा पाथ फॉलो होगा। डीएनए से पहले आरएनए बनेगा। आरएनए से फिर प्रोटीन बनेगा। यह आपने देखा। यह आपने जाना। बात समझ में आई? तो ओ ओ जाने जाना। मुझे यहां पर बता दो ना जिससे हम आगे बढ़ पाए। यस बहुत शानदार वेरी गुड वेरी वेल डन छोटी-मोटी बातें यहां पर हम कर लेते हैं सेल के बारे में जो हमने पढ़ ली है ऑलमोस्ट वही बातें हैं। एक बार मोटा-मोटा देख लेते हैं। फिर डायग्राम से भी इन चीजों को समझेंगे। देखिए आपका एक सेल है। अब सेल में अगर वेल डिफाइंड न्यूक्लियस पाया जा रहा है। अच्छा सच्चा न्यूक्लियस पाया जा रहा है। तो ये सेल हो जाएगा यूकैरियोटिक। यू का मतलब होता है ट्रू। सच्चा

50:55 कैरिओन का मतलब होता है न्यूक्लियस। अगर अच्छा सच्चा न्यूक्लियस है, वेल डिफाइंड, वेल डेवलप्ड न्यूक्लियस है, ट्रू न्यूक्लियस है यानी न्यूक्लियस की मेंब्रेन पाई जा रही हैं यानी एनवेलप पाया जा रहा है, मेंब्रेन पाई जा रही है तो आप इसे कहेंगे ट्रू न्यूक्लियस। तो ये यूकैरियोटिक सेल है। अगर मेरे भाई यहां पर आपका न्यूक्लियर मेंब्रेन नहीं पाई जा रही तो आप कहेंगे प्रोकैरियोटिक सेल। प्रो का मतलब होता है प्रिमिटिव यानी पिछड़ा हुआ यानी लोअर लेवल का। तो ये आपका प्रिमिटिव सेल हो जाएगा। करेक्ट है जी। एकदम करेक्ट है। तो प्रिमिटिव सेल जो है प्रोकैरियोटिक सेल इसमें पिछड़ा हुआ न्यूक्लियस है। यानी कि वेल डिफाइंड न्यूक्लियस नहीं है। मेंब्रेन मेंब्रेन नहीं है। डीएनए खुला पड़ा हुआ है। कोई मेंब्रेन नहीं और यहां मेंब्रेन देखने को मिल रही हैं। तो न्यूक्लियस क्या है? डेंस मेंब्रेन बाउंड

51:40 स्ट्रक्चर है। डेंस स्ट्रक्चर गाढ़ा स्ट्रक्चर जो क्रोमोजोम कंटेन करता है और इस क्रोमोजोम में डीएनए पाया जाता है। यह हम देख चुके हैं। इतनी बातें हमें पहले से पता है। साइटोप्लाज्म वो मेन इलाका है जिसमें सेलुलर एक्टिविटीज हो रही होती हैं। यह सेमीफ्लूइड है नेचर में। जहां सेल में कुछ भी नहीं है वहां साइटोप्लाज्म है। तो यह वॉल्यूम ऑक्यूुपाई करता है। यह बात भी गुरु जी हम देख चुके हैं। सेल मेंब्रेन जो है यह सेल की एक आउटर लेयर होती है जो यूनिवर्सल है। और अगर आप बात करें सेल वॉल की तो ये सेल मेंब्रेन के भी बाहर की साइड देखने को मिलती है जो प्लांट सेल में पाई जा रही होती है और एनिमल सेल में एब्सेंट होती है। अब एनसीईआरटी में एक बात लिखी है। गौर से सुनना। ओ मेरे मुन्ना गौर से सुनना। अगर मेरे भाई यहां पर एनिमल सेल में सेल मेंब्रेन ही पाई जा रही है। सेल वॉल एब्सेंट है तो सबसे बाहर वाली लेयर का

52:25 नाम क्या है? गुरु जी सबसे बाहर वाली सेल की जो लेयर है उसका नाम है सेल मेंब्रेन। सेल वॉल तो है नहीं। तो सेल मेंब्रेन ही ऐसा स्ट्रक्चर है जो पूरे सेल की बाउंड्री बना रही है। यानी पूरे सेल की लिमिट तय कर रही है। इट इज द मेन डीलिमिटिंग स्ट्रक्चर। यानी यही सेल की लिमिट सेट करती है कि सेल की बाउंड्री कहां तक है। तो सेल मेंब्रेन इज द डीलिमिटिंग स्ट्रक्चर इन केस ऑफ एनिमल सेल। जबकि प्लांट सेल की अगर आप बात करें तो प्लांट सेल में आपका सेल मेंब्रेन के ऊपर सेल वॉल भी है। तो डीलिमिटिंग स्ट्रक्चर कौन सा हुआ? जो मेन बाउंड्री सेट कर रहा है। सबसे बाहर वाली बाउंड्री कौन है? सेल वॉल। जबकि एनिमल में कौन है? सेल मेंब्रेन है। बेसिक लेवल से बात कर रहे हैं सारी। जीरो लेवल से। यस। ऑर्गनेल्स। ऑर्गनेल्स यानी जो आपके वेल डिफाइंड न्यूक्लियस वाले सेल्स

53:11 होते हैं ना यूकैरियोटिक सेल इनमें मेंब्रेन बाउंड और भी चीजें पाई जाती हैं जिनकी खुद की मेंब्रेन होती है। यानी ये कंप्लीट सेल मेंब्रेन तो है ही। सेल के अंदर भी छोटी-छोटी कई सारी चीजें हैं जिनकी खुद की मेंब्रेन अलग से भी है। इन्हें मेंब्रेन बाउंड ऑर्गनेल्स कहा जाता है। तो यहां पर मेरे दोस्त ये मेंब्रेन बाउंड ऑर्गनेल्स कहां पाई जाती हैं? यूकैरियोटिक सेल्स में पाई जाती हैं। मेंब्रेन बाउंड न्यूक्लियस और मेंब्रेन बाउंड ऑर्गनेल्स पाई जाती हैं। जबकि प्रोकैरियोटिक सेल में ना मेंब्रेन बाउंड न्यूक्लियस पाया जाता है ना मेंब्रेन बाउंड ऑर्गनेल्स पाई जाती हैं। तो यहां प्रोकैरियोट में एक भी मेंब्रेन बाउंड ऑर्गनेल नहीं पाई जाती। तो गुरुजी क्या पाया जाता है? कुछ और तो मिलना चाहिए ना। तो यहां मिलता है सिर्फ और सिर्फ राइबोसोम। मेरी जान मेरी पहचान राइबोसोम। और वह भी किस प्रकार का? 70s। इसके बारे

53:58 में बात करेंगे अभी एक दो स्लाइड के बाद। 70s यानी 70s राइबोजोम यहां पर देखने को मिलता है मेरे भाई। प्रोकैरियोट मेंब्रेन बाउंड चीजें तो पाई नहीं जा सकती। तो राइबोजोम मिलता है। क्यों? क्योंकि राइबोसोम पे कोई मेंब्रेन है ही नहीं। इसके अलावा एक और चीज है आपकी जो कि पाई जाती है मेंब्रेनलेस फॉर्म में। इसको हम क्या कहते हैं? सेंट्रियोल और सेंट्रोसोम। तो सेंट्रियोल और सेंट्रोसोम जो हैं ये आपके कहां पाए जाते हैं? सिर्फ और सिर्फ एनिमल सेल में पाए जाते हैं। एनिमल की सेल डिवीजन में हेल्प करते हैं। ना ये प्लांट सेल में मिलेंगे ना ये प्रोकैरियोट में मिलेंगे। सेंट्रोसोम जो है सिर्फ एनिमल सेल में पाया जाता है। ओनली इन एनिमल सेल्स। लिख लीजिए। ओनली इन एनिमल सेल्स ये नोट्स में दे दूंगा। याद कर लो अभी के लिए। सुनते जाओ। एनसीईआरटी में सारी चीजें हैं। देखते जाओ।

54:44 सिर्फ एनिमल सेल्स में ही आपको सेंट्रोसोम देखने को मिलता है। राइबोसोम दुनिया के हर सेल में आपको देखने को मिलेगा। तो यूनिवर्सल तीसरी चीज हो गई है। पहली दो यूनिवर्सल चीजों के नाम बताइए जो दुनिया के हर सेल में देखने को मिलेंगी। सर सेल मेंब्रेन के बिना काम नहीं चलेगा किसी का भी तो सेल मेंब्रेन। सेल मेंब्रेन के अंदर जो इलाका है उसे साइटोप्लाज्म कहेंगे। इसके बिना काम नहीं चलेगा। तो साइटोप्लाज्म और तीसरी चीज मेरे भाई अब क्या हो गई? राइबोसोम। क्योंकि राइबोसोम पे कोई मेंब्रेन नहीं है। तो ये यूकैरियोटिक सेल में मिल सकता है। प्रोकैरियोटिक में भी मिल सकता है। सेंट्रोसोम यूनिवर्सल नहीं है। ये सिर्फ एनिमल सेल में मिलेगा और किसी सेल में आपको नहीं देखने को मिलेगा। तो ये दोनों ही मेंब्रेनलेस हैं। सेंट्रोसोम भी मेंब्रेनलेस है और राइबोसोम भी मेंब्रेनलेस है। पर राइबोसोम हर सेल में पाया जा सकता है। इट इज़ यूनिवर्सल काइंड ऑफ यूनिवर्सल। इसीलिए इसको भी यूनिवर्सल ऑर्गनेल कहा

55:31 जाता है। एंड आपका जो सेंट्रोसोम है ये आपका सिर्फ एनिमल सेल में पाया जा रहा होगा। राइबोसोम जो यूकैरियोट्स में मिलते हैं कैसे होते हैं? 80s होते हैं। 70s भी मिलते हैं, 80s भी मिलते हैं जो यहां के लिए स्पेसिफिक हैं। एकदम स्पेशल हैं। एटीएस सिर्फ और सिर्फ़ यूकैरियोट्स में देखने को मिलते हैं। इतनी बात समझ में आई? मोटा-मोटा ये सारी बातें हम लोग कर चुके हैं, दोस्त। ये बात हमें पहले से पता थी। ये बात हमें पहले से पता थी। ये बात हमें पहले से पता थी। ये बात हमें पहले से पता थी। हमने एक बात देखी है कि प्रोकैरियोटिक सेल मेंब्रेन बाउंड ऑर्गनेल्स नहीं होती। यूकैरियोटिक सेल मेंब्रेन बाउंड ऑर्गनेल्स जैसे कि एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम जिसके बारे में आज आप पढ़ोगे। गोल्जी कॉम्प्लेक्स, वैक्यूल, लाइसोसोम और ऑक्सक्सिसोम ये पाई जाती हैं। ठीक है? प्रोकैरियोट्स में एक ही आपकी ऑर्गनेल मिल सकती है। दैट इज राइबोसोम। क्योंकि वो

56:17 मेंब्रेन लेस है। वाली तो एक भी नहीं मिलेगी प्रोकैरियोट में। मेंब्रेन लेस है राइबोसोम। वो आपको प्रोकैरियोटिक सेल में देखने को मिल जाएगी। उसके अलावा नहीं मिलेगी। कोई और ऑर्गनेल सिर्फ राइबोसोम ही मिल सकती है। और मेरे भाई यहां पर सेंट्रोसोम जो है यह मेरे भाई आपका सिर्फ एनिमल सेल में मिलता है। है यह भी मेंब्रेनलेस लेकिन ये सिर्फ एनिमल सेल में मिलेगा। एनिमल सेल की सेल डिवीजन में हेल्प करेगा। ये मैं आज आपको सिखाऊंगा कैसे हेल्प कर रहा होता है। इतनी बातें सबको समझ में आनी चाहिए। करेक्ट? आओ मेरे भाई। आगे बढ़ते हैं। अगली स्लाइड की तरफ हम लोग प्रस्थान करते हैं। आइए क्वेश्चन सॉल्व करिए। अभी तक जो पढ़ा है इससे पीवाई में जो क्वेश्चन आए हैं उनको हम सॉल्व कर लेते हैं। एक बार क्वेश्चन सॉल्व कर लेते हैं। यह वाला है ना पोल कैसे लगता है भाई? टच नहीं हो रहा है। कोई बात नहीं। आ जाओ सीधा-सीधा सॉल्व करते हैं। द कांसेप्ट ऑफ ओमनिस

57:04 सेलुला ईसेल्यूलर। ओमनिस सेलुला ईसेल्यूलर पुराने सेल से ही नया सेल बनता है। ये बात किन्होंने कही? सुनते ही समझ में आ जाना चाहिए। रुडोल्फ बिरको साहब ने कही। कोई और है ही नहीं। और कब कही? डेट अगर याद करनी है तो 1855 में कही। स्क्लेडन साहब ने 1838 में एक्सपेरिमेंट किए। स्वान साहब ने 1839 में एक्सपेरिमेंट किए। स्क्लेडन साहब ने प्लांट पर एक्सपेरिमेंट किए। स्वान साहब ने पहले एनिमल्स पर फिर प्लांट पर एक्सपेरिमेंट किए। रुडोल्फ विको साहब ने ओमनी सेलुला ईसेलुला कहा 1855 में। और एरिस्टोटल साहब पापा हैं। पापा ओ इन द चैट बायोलॉजी के पापा हैं। ज़ूलॉजी के पापा हैं। मॉडर्न एम्ब्रियोलॉजी के पापा हैं। ड्रामा भी ये जानते थे। उसके अलावा फिलॉसफर भी थे। बहुत बड़े फिलॉसफर थे। हिंदी में एरिस्टोटल साहब का नाम जो है अरस्तु है। आपने कहीं ना कहीं सुना होगा। बहुत बड़ी फिलॉसोफी की भी किताबें इन्होंने लिखी हुई हैं। खूब ज्ञानी आज भी माने जाते थे अपने टाइम के। आज भी माने

57:50 जाते हैं। यस। यह है हमारा पीवाईक्यू जो कि हम लोगों ने देखा। आगे और भी टॉपिक वाइज चीजें हम लोग देखते रहेंगे। अब सेम चीज को यहां पर देखो। कुछ बातें हम लोग पढ़ चुके हैं। उन्हीं बातों को हमको रिपीट करना है। देखिए प्रोकैरियोटिक सेल्स दो प्रकार के होते हैं। डिपेंडिंग अपॉन उनमें वेल डिफाइंड न्यूक्लियस पाया जा रहा है या नहीं। अगर वेल डिफाइंड न्यूक्लियस पाया जा रहा है। यू मतलब ट्रू यानी वेल डिफाइंड यानी जिस पर न्यूक्लियर एनवेलप हो। अगर वेल डिफाइंड न्यूक्लियस पाया जा रहा है तो यूकैरियोटिक सेल। अगर वेल डिफाइंड न्यूक्लियस नहीं पाया जा रहा है तो आपका क्या हो जाएगा? प्रोकैरियोटिक सेल। तो यहां पर न्यूक्लियर एनवेलप या न्यूक्लियर मेंब्रेन आपकी एब्सेंट होती है प्रोकैरियोटिक सेल में। वेल डिफाइंड न्यूक्लियस यानी आपका एब्सेंट होगा। अभी थोड़ी देर पहले बताया था मेंब्रेन बाउंड ऑर्गनेल्स आपकी एब्सेंट होंगी। यहां पर

58:38 सिर्फ राइबोसोम पाया जा सकता है क्योंकि राइबोसोम एक ऐसी ऑर्गनेल है जिस पे मेंब्रेन नहीं होती। तो ये आपकी प्रोकैरियोटिक, यूकैरियोटिक हर सेल में पाई जाती है। इसीलिए इसको यूनिवर्सल ऑर्गनेल हम लोगों ने कह दिया। सिमिलरली मैंने आपको बताया था सेंट्रोसोम भी एक ऐसी चीज है जिस पे मेंब्रेन नहीं होती। दिस इज़ आल्सो मेंब्रेनलेस। लेकिन ये सिर्फ और सिर्फ एनिमल सेल में पाई जाती है। उनके सेल डिवीजन में हेल्प करती है। प्लांट में या प्रोकैरियोट में नहीं पाई जाती। ये भी आपका स्पेशल पॉइंट है जो हमने देखा। दूसरा इंपॉर्टेंट चीज यहां पर अगर आप देखें यूकैरियोटिक सेल में तो यू का मतलब होता है ट्रू कैरिओन मतलब न्यूक्लियस तो यहां वेल डिफाइंड न्यूक्लियस पाया जाएगा यानी न्यूक्लियर एनवेलप यहां पर पाया जाएगा मेंब्रेन बाउंड ऑर्गनेल्स यानी एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम गोल्जी कॉम्प्लेक्स माइटोककांड्रिया क्लोरोप्लास्ट पेरोक्सिसोम ये सारी चीजें देखने को मिल रही होंगी ठीक है अब मेरे

59:24 भाई द मोस्टेंट थिंग आगे इसको और डिटेल में पढ़ेंगे आज के ही सेशन में तीन चार पांच स्लाइड छोड़ के एक और चीज है जो मैं आपको बता देता हूं मैंने आपको बताया यहां पर इस स्लाइड में कि आपके जो प्रोकैरियोट्स हैं इनमें 70s राइबोजोम पाया जाता है। और जो यूकैरियोट्स हैं इनमें 80s और 70s दोनों पाए जाते हैं। तो ये कहां-कहां मिलेंगे? थोड़ा गौर से देखना। आराम से समझिए। ये आपके 70s राइबोजोम जो है प्रोकैरियोट्स में देखने को मिलेंगे। ठीक है? और 70s राइबोसोम की दो सब यूनिट्स होती हैं। यानी राइबोजोम दो टुकड़ों का मिलकर बना होता है। एक बड़ा टुकड़ा जिसे लार्जर सब यूनिट कहा। एक छोटा टुकड़ा जैसे स्मॉलर सब यूनिट कहा है। ये दोनों साथ में फिट हो के एक कंप्लीट राइबोसोम बनाते हैं। तो जो 70s टुकड़ा है, है ना? ये एक्चुअल में क्या होता है? 50s + 30s होता है। तो

1:00:11 सेवन क्या है? एक ऑड नंबर है। सेवन क्या है? एक ऑड नंबर है। तो इसके जो सब यूनिट्स होंगी ये भी क्या होंगी? ऑड नंबर होंगी। दैट इज आपकी 5 और 3 50 और 30 ये भी आपका 70 को अगर आप देखोगे तो 50 और 30 आपका 5 और थ्री दोनों ऑड नंबर हैं। ऐसे याद कर सकते हो आराम से। ऐसे याद

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