0:00 झाल फोटो गुड मॉर्निंग टू ऑल ऑफ यू व कंसेप्ट YouTube चैनल पर आप सभी का स्वागत है आज के हमारी क्लास है प्रस्तावना पर प्रस्तावना हमारे संविधान का वह भाग है जिसमें पूरे संविधान का सार निकाल कर के लिख दिया गया है देखिए हमारे जो संविधान सभा के सदस्य थे वह बहुत ही इंटलेक्चुअल थे बहुत ही बुद्धिजीवी थे यह हम सब जानते हैं और इसका एक बहुत अच्छा प्रमाण है हमारी प्रस्तावना कि पूरे संविधान के
0:47 लोगों का निचोड़ निकाल करके निकाल कर के सिर्फ 15 से 20 दिनों में लिख दिया भारत के बारे में जानना चाहिए वह व्यक्ति जैसे कभी भारत नहीं हो उसमें संविधान में पड़ा हो लेकिन यह सिर्फ हमारे प्रस्तावना को पढ़ लें तो उसे एक मोटा मोटी हमारे है अपने बारे में लग जाएगा तो इतनी खूबसूरत है हमारी प्रस्तावना संविधान भी हमारा बहुत खूबसूरत है लेकिन प्रस्तावना की तो देखिए बात ही कुछ और है सिर्फ 15 बीच शब्द है 10 12 लाइन है और इसी के माध्यम से हमारे देश के बारे में एक मोटा मोटी एक रवा इडली अलग जाता है कि हमारा देश किस
1:33 तरह से कार्य करता है कैसी हमारी शासन प्रणाली है कौन से हमारे मूल अधिकार दिए गए हैं तो इन सब बातों का एक अंदाजा एक आईडिया लग जाता है प्रस्तावना को पढ़ने से चली प्रस्तावना शुरू करते हैं सबसे पहले हम देखेंगे प्रस्तावना की उत्पत्ति अ है या प्रस्तावना अस्तित्व मे कैसे आई प्रस्तावना की उत्पत्ति या उद्धव को थे 13th december 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा के सामने उद्देश्य प्रस्ताव रखा था और उसी उद्देश्य प्रस्ताव से निकली है हमारी प्रस्तावना इसीलिए प्रस्तावना उद्देशिका भी कहते हैं
2:19 प्रस्तावना या प्रिएंबल का एक नाम इसीलिए उद्देशिका भी तो अभी हमने देखा इसका उद्भव अब हम देखेंगे इसके तत्व की प्रस्तावना के तत्व आखिर कौन से वह एलिमेंट हैं जिनसे मिलकर के प्रस्ताव न बने कि आप अपने आस-पास जितनी भी चीजों को देख पा रहे हैं जितनी भी फिजिकल गुड से वह सभी किसी ना किसी एलिमेंट से मिलकर बनी है जैसे अगर मैं एग्जांपल दूं कि जैसे चाय कि क्या तत्व हैं या चाय स्किन एलिमेंट से बनती है तो आप बताते हैं पानी चाय पत्ती दूध और चीनी इनको डालने से हमारी चाय बन जाती है तो यह चारों क्या है चाय के एलिमेंट है ठीक इसी तरह से हमारी
3:07 प्रस्तावना के वह कौन से तत्व हैं जिनसे मिलकर के प्रस्तावना बनी है क्योंकि बहुत बार एग्जाम में क्वेश्चन पूछ लिया जाता है कि कौन-कौन से तत्व हमारी प्रस्तावना में है और हमें लगता है कि पूरी प्रस्ताव तो हमें याद थी फिर तत्व कैसे छूट गए और हमें वह क्वेश्चन क्यों नहीं आया कि वह कौन से तत्व हैं हैं तो देखिए आज के क्लास का हमारा टारगेट है कि प्रस्तावना के इन शब्दों में अर्थ तो जाने ही जानेंगे जो यह सब है यह लाइन है इनका क्या अर्थ है वह तो डेफिनेटली जाएंगे इसके अलावा हमारे संविधान निर्माताओं ने इस इंटेंशन किस भावना किस्मों को ले करके प्रस्तावना और
3:53 संविधान का निर्माण किया था आज हम वह भी जाएंगे तो सबसे पहले हमने देखा प्रस्तावना का उद्भव कैसे हुआ है उद्देश्य प्रस्ताव से अब हम देख रहे हैं प्रस्तावना के तत्व है यह देखिए प्रस्तावना के तत्व में पहला तत्व है कि संविधान को अधिकार देने का स्रोत कि संविधान को अधिकार देने का स्रोत वह कौन सा छोड़ है जो हमारे संविधान को अधिकार देता है अजय को
4:46 यह देखिए सब यह हमारा पहला तत्व हैं संविधान को अधिकार देने का स्रोत तो हम भारत के लोग हम भारत के लोग वह Bigg Boss है वह स्रोत है जो हमारे संविधान को अधिकार देते हैं ऊर्जा देते हैं तो हम भारत के लोग हमारी प्रस्तावना का पहला ही शब्द है हम भारत के लोग देखे प्रस्तावना में लिख या एक-एक शब्द बहुत इंपोर्टेंट है और बहुत भावनाओं के साथ इन शब्दों को लिखा है क्योंकि संविधान निर्माता जब संविधान बना रहे थे तो हमने दोस्तों सालों की गुलामी से तो आजाद जी पाई थी उससे पहले हमारे देश में राजतंत्र चल रहा था तो आप
5:32 उनकी विडंबना समझिए कि कितना रोशन के मन में था उसे दूर करने के लिए सबसे पहला शब्द क्या लिखा है हम भारत के लोग यानी लोगों को सबसे ज्यादा महत्व देना है यही हमारे संविधान की सबसे तेज खूबसूरती है कि हमने सबसे ज्यादा महत्व लोगों को दिया है भारत के नागरिकों को दिया है और उन्हीं के लिए संविधान बनाया गया है तो उस गुलामी से उस मोना कि राजतंत्र से आजादी मिलने पर जब संविधान और प्रस्तावना बनाई जा रही थी उस समय देखिए पहला शब्द जोड़ा गया है हम भारत के लोग जो कि बहुत खूबसूरत शब्द है और यहां पर इस प्रस्तावना के एंड आते-आते आपको यह महसूस होगा कि यह हम भारत के
6:18 लोगों की क्या ताकत है तो पहला सोर्स जो है वह याद रखना है पहला एलिमेंट हमारा है संविधान को अधिकार देने का स्रोत और वह स्रोत है हम भारत के लोग हम भारत के नागरिक हम है वह स्रोत अब देखिए दूसरा तत्व देखते हैं और दूसरा तत्व है भारतीय राज्य की प्रकृति को कि भारतीय राज्य की प्रकृति अ है अब इसे हमें पता चलता है कि हमारे देश का नेचर कैसा है यह हमारा दूसरा एलिमेंट है दूसरा तत्व है लेकिन भारत को एक
7:04 संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए यह पांच जो शब्द है संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य यह पांच वह शब्द है जो हमें हमारे देश का नेचर प्रकृति को बताते हैं जैसे आप सभी लोग यह कहते हैं कि मेरे आस पास जितने भी लोग हैं जैसे मम्मी उनका नेचर कैसा है तो आप लोग बताते हैं जनरली कि पापा ऐसे स्वभाव के हैं मम्मी ऐसे स्वभाव की है मेरे भाई का नेचर ऐसा है तो आज की क्लास के बाद आप यह भी बता पाएंगे कि हमारे देश का नेचर कैसा है हमारे भारत राज्य की
7:50 प्रकृति कैसी है यह हमारा दूसरा तत्व है और इस तत्व के लिए हमें पांच शब्दों का अर्थ जानना है जिससे हमें पता चले कि कैसा नेचर कैसे प्रकृति है हमारे देश की तो देखिए सबसे पहला शब्द इसमें है संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न अ कि अब क्योंकि इस भावना को लगातार आप अपने दिमाग में रखिए कि राजतंत्र और गुलामी से आजादी मिलने के बाद संविधान निर्माता किन शब्दों का चयन करेंगे तो वह बहुत अच्छे से आप समझ पाएंगे पहला शब्द हम भारत के लोग दूसरा शब्द संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न यह हमें हमारा फास्ट बता रहा है यह वाला शब्द जोड़ने का मतलब है कि हमारा पास गुलामी
8:36 वाला रहा था जैसे अगर प्रेसिडेंट के सिनेरियो में मैं आप से पूछो कि वर्तमान में आपको सबसे पहले अपने जीवन में क्या चाहिए तो 99.99% लोगों का आंसर होगा एक गवर्नमेंट जॉब क्योंकि आप बेरोजगारी से त्रस्त हो चुके हैं परेशान हो चुके हैं बिल्कुल ना का चुके हैं ठीक उसी तरह हमारे भारत की जनता भी गुलामी से बिल्कुल त्रस्त हो चुकी थी तो संविधान निर्माताओं ने शब्द जोड़ा है प्रस्तावना में संपूर्ण तत्व संपन्न भारत पर आंतरिक और बाह्य निर्णय लेने में अब किसी ताकत का ना दबाव होगा ना हम किसी के अधीन है हम बिलकुल स्वतंत्र है अपने
9:22 निर्णय लेने के लिए भारत देश संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न वाला देस है अपने निर्णय स्वयं ले सकता है और खुद पर ही डिपेंड है ना हम किसी के दबाव में है ना किसी के नियंत्रण में है संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न का यही मतलब है कि भारत अपने आंतरिक और बाह्य मामलों में निर्णय लेने के लिए बिल्कुल स्वतंत्र है तो यह दूसरा शब्द अब देखिए समाजवादी कि हमने समाजवादी शब्द अपनाया है हमारी प्रस्तावना में लिखा है यह समाजवादी शब्द कार्ल मार्क्स की देन है यह कार्ल मार्क्स की विचारधारा है समाजवाद और देख कार्ल मार्क्स की जो विचारधारा में समाजवाद है वह वर्ग संघर्ष पर आधारित है उसमें एक
10:10 सर्वहारा वर्ग एक बुर्जुआ वर्ग यानी एक अमीर वर्ग और गरीब वर्ग के बीच में संघर्ष को बताया गया है लेकिन हमारे देश में हमारे भारत में जो समाजवादी शब्द हमने लिया है उसमें कहीं से कहीं तक वर्ग संघर्ष नहीं है हमारा आपसी भाईचारे से समाज के हित में किया गया काम है हमारा जो समाजवाद है वह भाई चारे के साथ है ना कि वर्ग-संघर्ष वाला है और एक बात और समाजवादी शब्द के लिए याद रखना कि समाजवादी शब्द हमारे मूल संविधान में नहीं था 42 वां संविधान संशोधन 1976 कि इसके द्वारा यह शब्द जोड़ा गया है समाजवादी दूसरा शब्द पंथनिरपेक्ष और एक
10:58 तीसरा शब्द अखंडता इन तीनों शब्दों को 42वें संविधान संशोधन के द्वारा 1975 में जोड़ा गया था इंदिरा गांधी की सरकार थी देखिए 1973 से पहले प्रस्तावना को संविधान का भाग नहीं माना जा रहा था क्योंकि जब हम भारत के मुख्य मुकेश देखेंगे उनमें हमें पता चलता है कि बेरुबारी वाले मामले में 1968 में न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है 1978 केसवानंद भारती मामले में न्यायालय ने कहा अपना पूरा विचार बदल करके फिर निर्णय दिया और कहा की प्रस्तावना हमारे
11:44 संविधान का भाग है बहुत मुख्य भाग है और इसमें संशोधन भी किया जा सकता कि मैं ठीक उसी तरह से संशोधन किया जा सकता है जैसे बाकी के संविधान में किया जा सकता है तो जैसे ही 1973 में यह वर्ड एकता या सुप्रीम कोर्ट का और इंदिरा गांधी को पता चला कि अच्छा प्रस्तावना में भी संशोधन किया जा सकता है तो देर किस बात की कर दो संशोधन और देखिए 1978 में संशोधन किया गया और याद रखना प्रस्तावना में आज तक एक ही बार संशोधन हुआ है क्योंकि ऐसा सिर्फ इंदिरा गांधी ही कर सकती थी तो सिर्फ एक बार अमेंडमेंट हुआ है प्रस्तावना में वह 42 माथा 1976 में हुआ और तीन शब्द इसके
12:29 माध्यम से जुड़े गए समाजवादी पंथनिरपेक्ष और अखंडता बहुत बार क्वेश्चन के रूप में क्वेश्चन पूछ लिया जाता है यह फैक्ट पूछ लिया जाता है कि कौन से शब्दों को जोड़ा गया था या कौन से शब्द हमारी मूल प्रस्तावना में नहीं थे चलिए समाजवादी हमने देखा कि हमारा जो समाजवादी शब्द है जो हमने लिया है इसका अर्थ है पूरे समाज के हित से अगर हम समाजवादी शब्द को इकोनॉमिक्स के कंटेस्ट में देखते हैं तो हम उत्पादन और वितरण को देखते हैं कि समाजवादी में समाजवाद में उत्पादन और वितरण के संसाधनों पर नियंत्रण राज्य का होता है पूरी तरह से और इसके ठीक
13:15 विपरीत पूंजीवाद में उत्पादन और वितरण के संसाधनों पर किसी का नियंत्रण में होकर के बाजार के हवाले उन्हें छोड़ दिया जाता है तो वह समाजवाद तो हम पढेंगे इकोनॉमिक्स के अंदर सब्जेक्ट में लेकिन प्रस्तावना में हमारे संविधान में जो समाजवादी शब्द लिया है वह है आपसी भाईचारे के द्वारा पूरे समाज के हित के संदर्भ में क्योंकि देखिए पूरी तरह से हम समाजवादी नहीं है हमने लिबरलाइजेशन प्राइवेटाइजेशन एंड ग्लोबलाइजेशन को अपना लिया है तो इसलिए हम पूरी तरह तो समाजवादी नहीं है है लेकिन इसमें शब्द में भावना निहित है वह पूरे समाज का हित अगला शब्द देखते पंथ निरपेक्ष अ
14:01 को पंथनिरपेक्ष का शब्द हमारे सरकार ने यह हमारे संविधान निर्माताओं ने पॉजिटिव सेंस में लिया है पॉजिटिव सेंस में कैसे लिया है कि पंथनिरपेक्ष और धर्मनिरपेक्ष दोनों अलग-अलग इन्हें कभी भी एक मत समझना आप धर्मनिरपेक्ष बहुत ही संकीर्ण शब्द है उसके जो अवधारणा है वह बहुत संकीर्ण है लेकिन इसका एरिया पंथनिरपेक्ष का एरिया ग्रिड पंथनिरपेक्ष का मतलब है हमारे राज्य का कोई धर्म नहीं होगा लेकिन इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि हमारा राज्य नास्तिक है हमारा देश नास्तिक है यह मतलब नहीं है यहां पर हमारे राज्य का कोई धर्म नहीं
14:47 होगा इसका मतलब है कि हमारा राज्य हमारा देश सभी धर्मों का सम्मान करेगा सर्व धर्म समभाव वाली भावना से राज्य कार्य करेगा तो देखिए इसका कलर पंथनिरपेक्ष अच्छा-अच्छा एग्जांपल अगर हम वर्तमान की ही सिचुएशन का देखें तो जब फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान भारत पहुंचा था तो उसके लिए हमारे रक्षा मंत्री राजनाथ ने चारों ही बड़े धर्म के लोगों को बुलाया हुआ था चारों ही बड़े धर्म के रिप्रजेंटेटिव को बुलाया हुआ था जैसे हिंदू धर्म के लिए पुजारी को बुलाया हुआ था इसके अलावा अगर इसाई या क्रिश्चियन धर्म को देखें तो फादर या पादरी को बुलाया हुआ था सिख धर्म के लिए ग्रंथि जिसे कहते
15:33 हैं गुरु या ग्रंथि उनको बुलाया हुआ था और मुस्लिम धर्म के रिप्रेजेंटेड मौलवी को बुलाया हुआ था तो इससे हमें और भी क्लियर पता चल जाता है कि हमारा जो यह हमारा देश किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं देता किसी एक धर्म को प्रमोट नहीं करता किसी एक धर्म को नहीं मानता बल्कि सभी धर्मों का सम्मान करता है सभी धर्मों का आदर करता है तो इसलिए कि जो पंथनिरपेक्ष शब्द है वह नेगेटिव सेंटेंस वाला नहीं है इसका मतलब है कि हमारा जो यह हमारा देश सभी धर्मों को अपनाता है उनका सम्मान करता है और इसीलिए तो यह शब्द यह पांचों शब्द बता रहे हैं हमारे देश के नेचर को कि हमारा भारत
16:20 जो है वह किस नेचर का है तो हमारे भारत का नेचर है कि वह सभी धर्मों का सम्मान करता है पूरे समाज का हित चाहता है इसके अलावा संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न सारे निर्णय स्वयं लेता है बिना किसी दबाव के अब देखिए अगला शब्द है लोकतंत्रात्मक यह तो प्रस्तावना में लिखना बनता ही था संविधान निर्माताओं के द्वारा क्योंकि इसी का तो प्रयास पिछले दो सालों से हम कर रहे थे लगातार तो देखिए लोकतंत्रात्मक इब्राहिम लिंकन की वह लाइन सबसे ज्यादा प्यारी हैं जनता का जनता के द्वारा जनता के लिए किया गया शासन लोकतंत्र है तो हमारे यहां भी जन हंसासन है लोगों के द्वारा सरकार चुनी जाती है तो हमारा क्या
17:05 है भारत लोकतंत्र है डेमोक्रेसी को हमने अपनाया है अगला शब्द है गणराज्य के लोगों का तंत्र बता दिया उसके बावजूद जोड़ा है गणराज्य रिपब्लिक इसको जोड़ना उचित समझा उन्होंने क्योंकि संविधान निर्माता कोई दुविधा नहीं चाहते थे किसी भी तरीके का कंफ्यूजन नहीं चाहते थे तो लोकतंत्र है उसके साथी गणराज्य ने जोड़ा ताकि यह क्लियर हो सके कि हमारा कोई भी पद वंशानुगत नहीं हमारे देश का सबसे बड़ा पद सबसे प्रमुख पद राष्ट्रपति का पद पर निर्वाचित वंशानुगत नहीं तो इस बात को
17:50 नियुक्ति तरह ही चलती डेमोक्रेसी और साथ में चाहिए ऐसा हमारे देश में हमारे देश में लोग व्रत मक्खन राज्य है भारत तो भारत में जनता का शासन है और कोई भी पद यहां पर वंशानुगत नहीं है तो यह गणराज्य का अर्थ हुआ अब हम यहां पर इन शब्दों के माध्यम से देख लिया कि हमारे देश की हमारे भारत ने प्रकृति कैसी है अब हम बात करते हैं तीसरे तत्व तत्व कि भारत के संविधान को बनाने का उद्देश्य संविधान निर्माताओं के मन में उनके मन-मस्तिष्क में ऐसे कौन से उद्देश्य थे
18:38 मोटिव था कि संविधान बनाया गया तो तीसरा तत्व यह उद्देश्य कि संविधान को बनाने का उद्देश्य पर पंच यह हमारा तीसरा एलिमेंट है अब देखिए इस एलिमेंट उद्देश्य को कहा समझाया गया है उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढ़ाने के लिए
19:26 नियुक्त जो कि हमारा उद्देश्य कि हमारे भारत में संविधान को बनाने का लागू करने का उद्देश्य क्या था हमारे संविधान निर्माताओं ने इसलिए संविधान का निर्माण किया और वह क्या चाहते थे भारत से यह अब हम समझते क्वी या पर पंच मोटिव क्या था तो देखिए पहला शब्द है उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय सबसे पहले बात उद्देश्य में की गई है न्याय की यह क्वेश्चन के रूप में पूछा जाए कि उद्देश्य कौन-कौन से थे प्रस्तावना में कौन-कौन से उद्देश्य लिखे गए तो आप उद्देश्य देख रहे हैं न्याय उसके बाद में
20:13 है स्वतंत्रता किन चीज़ों की स्वतंत्रता दी है वह भी हम देखेंगे लेकिन उद्देश्य क्या है न्याय देना कौन सा न्याय सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय उसके बाद स्वतंत्रता देना कौन थे का विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता इसके बाद उद्देश्य था प्रतिष्ठा और अवसर की समता तो तीसरा उद्देश्य है समता समानता स्थापित करना है कि यह सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता तो बनता है हमारा चौथा शब्द याद रखना अगर न्याय स्वतंत्रता समता बंधुता दे दिया जाए क्वेश्चन में और पूछा जाए कि यह
21:00 किसको इंडिकेट कर रहे हैं तो यह हमारी प्रस्तावना के उद्देश्य हैं हमारे संविधान के निर्माण का पर पंच है यह शब्द अब इन शब्दों को देखते हैं सबसे पहला है सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय है को देखें न्याय हम तीन तरीके के चाहते हैं और इन तीनों को इसे सीक्वेंस में याद रखना है सबसे पहले सामाजिक न्याय फिर आर्थिक न्याय फिर राजनीतिक व सामाजिक न्याय करने के पीछे उद्देश्य था कि हमारे समाज के सभी लोगों को बराबरी का दर्जा मिल सके क्योंकि जब तक संविधान नहीं बना था संविधान लागू नहीं हुआ था तब तक और हमारी कॉलोनी में कह सकते हम्म हम्म
21:48 तो उस समय भारत में सभी लोगों को समानता का दर्जा नहीं हर व्यक्ति को बराबर नहीं समझा जाता था और वोट देने का अधिकार भी सभी को नहीं था तो इसी लिए सबसे पहला सामाजिक न्याय सभी लोगों को बराबर समझा चाहे वह ऐसी से बिलोंग करते हो चाहे वह उचित स्वर्ण जातियां हो सभी को समान समझा जाएगा तो सबसे पहला सामाजिक न्याय दूसरा है आर्थिक न्याय आर्थिक न्याय कैसे होगा राजतंत्र में सारा अर्थव्यवस्था का मामला या पूरा जोश भरा व्यथा सिर्फ राजा का प्रजा को कोई अधिकार नहीं होते थे हम चाहते हैं आर्थिक न्याय
22:33 हो यहां पर यह तीनों ही शब्द डीपीएसपी में दिए गए हैं याद रखना तीनों ही शब्द डीपीएसपी का भाग है आर्टिकल 38th राज्य का यह कर्तव्य है कि वह सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय को निश्चित करें यह राज्य का कर्तव्य है तो यह भी क्वेश्चन बन सकता है इन शब्दों का अर्थ तो हम जानी रहे हैं यह भी क्वेश्चन बन सकता है कि सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय को प्रस्तावना के अलावा संविधान में कहां लिखा गया है तो आर्टिकल thirty-eight में यही बात लिखी गई है तो देखिए आर्थिक न्याय हमारा आर्टिकल थर्टी नाइन यह कहता है है कि राज्य का यह भी कर्तव्य होगा कि वह
23:20 आर्थिक गतिविधियों का या अर्थव्यवस्था का केंद्रीकरण ना होने दे यानि आर्थिक लाभ की सभी लोगों को मिलना चाहिए आर्थिक न्याय को भी सुनिश्चित करे राज यह राज्य का कर्तव्य है और हमारे संविधान निर्माताओं का यह उद्देश्य चल रहा था कि हमारे समाज में आर्थिक न्याय होना चाहिए तीसरा है राजनीतिज्ञ आए देखे राजनीतिक न्याय के अगर सिर्फ शब्द को हम समझे तो राजनीति में न्याय लेकिन इस की भावनाओं को समझें तो भावना यह कहती है कि राजनीतिक न्याय यानी प्रत्येक व्यक्ति को वोट देने का अधिकार और आप देखिए भारत में 18 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति किसी भी जाति वर्ग से संबंधित हों सभी को वोट देने
24:06 का अधिकार है एवं जेंडर भी इक्विटी है यहां पर ऐसा नहीं कि महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं है सभी को 18 वर्ष से ऊपर हर वर्ग हर ली क्विक व्यक्ति को वोट देने का अधिकार है तो यह क्या है राजनीतिक न्याय अगर इसे हम थोड़ा सा और विरोध में समझें तो देखिए जिस वर्ग का प्रतिनिधित्व राजनीति में नहीं है या बहुत कम है उसे आगे लाने के लिए आरक्षण की सुविधा इसी लिए पंचायतों के जो चुनाव होते हैं उन्हें तीस परसेंट आरक्षण किया गया है महिलाओं के लिए और यही आरक्षण लोकसभा में भी तीन लोकसभा में भी देने की बात चल रही है लेकिन वे तुच्छ राजनीति कह लीजिए या फिर हमारे
24:53 राजनेता नेताओं का इधर धानी नहीं है कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम चल रहा है या फिर हो सकता है कि वह इस चीज से घबरा रहे हो कि 33 पर सेंट महिलाएं लोकसभा में आ जाएंगे इस कारण जो भी हों अभी तक बिल पास नहीं हुआ है लेकिन हां पंचायतों के चुनाव में 35 परसेंट आरक्षण है महिलाओं के लिए चले यह बात फिर मैं इसलिए नहीं बता रही हूं कि मैं खुद एक फीमेल हूं मैं एक जनरल उसे बता रही हूं आपको कि राजनीतिक न्याय को अगर हम रोड सेंस में देखें तो इसका यह मतलब है और न्याय तभी इस शब्द को अगर हम देखें न्याय न्याय देने का सीधा-सीधा मतलब यह है कि कोई वर्ग या कोई जाति अगर पिछड़ गई तो उसे
25:40 उस रेस की दौड़ की लाइन तक लाने के लिए आरक्षण की सुविधा भी की जाए तभी तो न्याय स्थापित होगा एक वर्ग ऐसा था हमारी आजादी के समय जिसने संसाधनों का खूब उपयोग किया था एक वक्त ऐसा था जब संविधान बन रहा था एक वक्त ऐसा भी था जिसने कभी किसी संस्थान का यूज किया ही नहीं तो इसलिए नियुक्त करना पड़ेगा आरक्षण जैसी करनी पड़ेगी ताकि जो लाइन है वहां पर सभी लोग समान रूप से आकर खड़े हो सकते हैं जयपुर रैफर करने का कोई फायदा ही नहीं है उस बोर्ड में वह जातियां वह वर्ग फिर पिछड़ जाएंगे तो इसीलिए न्याय चाहिए न्याय
26:26 देना है यह उद्देश्य है इसीलिए इसके रोड से इसमें हम देखते हैं कि आरक्षण जैसी व्यवस्था भी की गई है पहली बार प्रस्तावना को इतने में पढ़ रहे होंगे अदरवाइज सिर्फ शब्दों के अर्थ तक ही सीमित रखते हैं आप लोग इसे चलिए अब हम बात करते हैं न्याय के बाद दूसरा उद्देश्य है स्वतंत्रता का विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता अगर पूछा जाए कि हमारे प्रस्तावना में स्वतंत्रता के कौन से शब्द है तो आपको इसी सीक्वेंस में याद रखना है विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता और देखिए इसीलिए इसको फंडामेंटल राइट बना दिया गया है हमने देखा
27:13 था आर्टिकल 151 तक जब हमने पड़ा था इस समय हमने देखा था विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है आर्टिकल 19 में और आर्टिकल 19 हमारा है मूल अधिकार इसके अलावा विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता तो यहां पर धर्म की स्वतंत्रता हमने देखा था आर्टिकल 25 से लेकर 28 तक यह भी हमारे मूल अधिकार धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार के तहत चार आर्टिकल हमने देखे थे 25 26 27 28 सोरेन को याद कैसे रखा जा सकता है कि हमारी धार्मिक स्वतंत्रता के 4 अनुच्छेद दिए गए हैं मूल अधिकारों में इसको याद रखने का सबसे बेस्ट वे है कि हमारे चार
28:00 मेजर रिलिजन है चार बड़े धर्म है जिनको हम कोई जुमला यह कोई लाइन कोड करते टाइम भी काम में लेते हैं जैसे हिंदू मुस्लिम सिख इसाई आपस में है भाई-भाई तो चार बड़े गर्म हमने देखा हिंदू मुस्लिम सिक्ख और इसाई है तो उसी तरह से धार्मिक स्वतंत्रता के भी 4 अनुच्छेद हैं हमारे 25 26 27 28 और यह बात हमारी प्रस्तावना में भी लिखी है क्या कि विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता है और यह हमारा मूल अधिकार दिए तो अगर लिंक करके भी पूछा जाए कि वह कौन से अधिकार है जो प्रस्तावना में भी लिखित है और मूल अधिकार में भी तो आपको यह शब्द ध्यान रखने
28:45 हैं इसके बाद देखिए प्रतिष्ठा और अवसर की समता अब बात आ गई है समता समानता या इक्विटी कि अ है अब देखिए प्रतिष्ठा और अवसर की समता अब हम बात कर रहे हैं इक्विटी की स्टेटस और अपॉर्चुनिटी की क्वालिटी की आर्टिकल 14 से लेकर 18 तक हमने देखा था आर्टिकल्स फॉर 28 तक मूल अधिकारों में समानता की बात की गई और हमने बहुत अच्छी तरीके से देखा था कि किस तरह की समानता हम हमारे संविधान में या संविधान के माध्यम से भारत में चाहते हैं तो देखिए यहां पर शब्द सिर्फ दो दिए हैं यह याद रखना कि से लेकर 18 तक तो बहुत
29:33 डिटेल में किया गया उन अधिकारों को समानता के लिए लेकिन यहां पर सिर्फ दो कप चीनी ली है जैसे हमने आर्टिकल ओं 130 सार्वजनिक स्थलों पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा या नहीं होना चाहिए यह मूल अधिकार हमारा कि किसी के भी साथ किसी भी पब्लिक प्लेस पर कोई तरीके का भेदभाव नहीं हो सकता फिर हमने देखा था प्रतिष्ठा की अगर बात करें तो आर्टिकल 18 रहता है उपाधियों का अंत और उपाधियों का अंत क्यों किया गया है वह हमने वहां पर बहुत डिटेल में देखा था कि किस तरह से अंग्रेज उपाधियां देख करके और हमारे भारतीयों के बीच में एक खाई का काम करते थे कि एक वर्ग
30:19 खुद को कसाब तथा या कम समझता था और दूसरा वर्ग इसे उपाधियां दी जाती थी वह खुद को उचित समझता था तो हमने इसी लिए आर्टिकल 18 समानता के तहत उपाधियों का अंत कर दिया है तो देखिए यहां पर दो बात है एक प्रतिष्ठा और अवसर की समता हमारे भारत का यह उद्देश्य है कि यहां के सभी व्यक्तियों को समानता होनी चाहिए स्टेट अपने भी और अपॉर्चुनिटी में भी उसमें किसी के साथ कोई भी भेदभाव नहीं होना चाहिए अब देखिए अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा हमने देखा था आर्टिकल 35a कि भारत देश के प्रत्येक व्यक्ति को यह
31:06 अधिकार है कि वह अपनी गरिमा अपनी डिग्निटी बनाए रखें और यह मूल अधिकार है हमारा तो देखिए यहां पर प्रस्तावना में भी इस बात को बहुत क्लियर नहीं लिख दिया है कि तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता देखिए आदमी को व्यक्ति को नागरिक को यह अधिकार है कि वह अपनी लाइफ डिग्निटी के साथ जिए इसके साथ ही राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता को बढ़ाने के लिए अब यह बाद देखिए सारी चीजें सिर्फ राज्य ही निभाते यह जरूरी नहीं कि जितने उद्देश्य है वह सारे ही प्राप्त करें जब तक भारत देश के नागरिक अपना कर्तव्य नहीं समझेंगे तब तक हमारा
31:53 संविधान चाहे कितना भी खूबसूरत लिख दें उसे वहां पर लग ही नहीं सकता तो हमारा भी कर्तव्य इस देश के नागरिक होने के नाते और हमारी भी कर्तव्य है और जैसे ही इंदिरा गांधी को यह बात पता चले कि संविधान में इतनी प्यारी चीजें लिख दी गई है और राज्य के इतने सारे कर्तव्य है डिप्टी एसपी के तहत और इतने मूल अधिकार दे दिए गए हैं नागरिकों को तो मूल कर्तव्य जोड़े जाने चाहिए देखिए यह काम इंदिरा गांधी का है याद रखना इसे 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से 1976 में ही हमारे मूल कर्तव्य जोड़े गए थे फंडामेंटल ड्यूटीज जोड़ी गई थी तो देखिए और इसी तीसरी फंडामेंटल ड्यूटी यह
32:39 कहती है है कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए यहां के नागरिक भी काम करें उनका भी यह कर्तव्य है कि वह राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखी तो देखिए हमने देखा था कि अखंडता शब्द भी इंदिरा गांधी के द्वारा या उस समय के गवर्नमेंट के द्वारा 1976 में 42 वें संविधान संशोधन के माध्यम से ही जोड़ा व्यास शब्द है तो देखिए यह हमारा तीसरा फंडामेंटल ड्यूटी है तीसरी फंडामेंटल ड्यूटी जो है वह यह कहती है कि राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखें इसके बाद देखिए सुनिश्चित करने
33:26 वाली बंधुता को बढ़ाने के लिए पांचवें फंडामेंटल ड्यूटी शिफ्ट फंडामेंटल ड्यूटी यह कहता है कि हमें भाई चारे के साथ बंधुत्व को बढ़ाते हुए इस भारत देश में रहना है हमें वह काम करने हैं इससे हमारे समाज में हमारे देश में भाईचारा बड़े तो देखिए बंधुत्व को बढ़ाने के लिए और यह सारे क्या थे हमारे उद्देश्य यह शब्द जो हमने अभी देखे हैं यहां से उसके समस्त नागरिकों को सबसे पहले अध्याय देना है उसके बाद स्वतंत्रता उसके बाद क्षमता और बंद होता है कि यह शब्द है हमारे उद्देश्य संविधान निर्माताओं का प्रपंच और इन्हें हमने डिटेल में देख लिया है अब देखिए लास्ट
34:13 एलिमेंट बचाए अभी तक हमारे तीन एलिमेंट कंप्लीट कर लिए हैं हमने इस प्रस्तावना में पहला एलिमेंट था कि संविधान को अधिकार देने का स्रोत क्या है दूसरा एलिमेंट हमने देखा हमारे देश का नेचर कैसा है भारत राज्य की प्रकृति कैसी है तीसरा हमने देखा कि संविधान निर्माताओं का उद्देश्य क्या है क्या उद्देश्य था तो देखिए यह वाली जो लाइनें हैं यह हमें हमारे संविधान निर्माताओं का उद्देश्य बताते है प्रपंच बताते हैं कि क्यों हमने संविधान को बनाया है अब लास्ट हमारा एलिमेंट बचा है जो है संविधान को लागू करने की तिथि थी कि यह चौथा तत्व है लागू करने की तिथि
35:01 संविधान निर्माताओं ने लिख दिया संविधान लागू करने की तिथि हो सकता कोई अनाड़ी व्यक्ति वर्तमान में यह कहते हैं कि संविधान भारत में लागू हो गया इस बात का प्रमाण मैं कैसे मान लूं कि भारत में संविधान का शासन है कि हमारे देश में सर्वोच्चता संविधान संविधान जितने भी आप देखते हैं जितनी भी संस्था ने सुप्रीम कोर्ट को अगर हम बात करें तो राष्ट्रपति का पद प्रधानमंत्री का पद यह सारे अधिकार प्राप्त करते हैं हमारे संविधान से तो सबसे ऊपर सर्वोच्चता सुपर में से किसकी है हमारे देश में संविधान
35:46 संविधान को ताकत दे रहा है कि संविधान में भारत के भूख हम यह ताकत दे रहे हैं यह ऊर्जा दे रहे हैं संविधान को कि तुम सुपरमेसी में हो सर्वोच्च को हमारे देश में तो देखिए यहां पर संविधान को लागू करने की तिथि के बारे में हम बात कर रहे थे कि यदि कोई कह दे कि कहां लिखा है कि संविधान लागू हो गया मुझे तो नहीं पता भारत में संविधान लागू हो गया है क्या तो देखिए हमारी प्रस्तावना में ही लिखा है कि संविधान लागू करने की तिथि क्या है अब देखिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1969 पास को इस
36:33 वीर मिट्टी मार्ग शुक्ला सप्तमी सितंबर 2006 में को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं अब यह हमारे संविधान के लागू होने की तिथि अब इस स्थिति से एक फैक्ट तो आप का हिस्ट्री का क्लियर होता है देखिए क्या है अच्छा चल रही है छब्बीस नवंबर 1969 जा सकी और यहां पर विक्रम संवत जो आया है वह है 2006 तो कैलकुलेशन करके यदि क्वेश्चन पेपर में पूछा जाए कि विक्रम संवत की शुरुआत कब से हुई थी और आपको प्रस्तावना याद है तो आप तुरंत कैलकुलेट करके निकाल सकते हैं कि 57 ईसा पूर्व से विक्रम संवत की शुरुआत हुई थी देखिए पॉलीटिकल साइंस और हिस्ट्री
37:20 दोनों को साथ-साथ पढ़ने का मजा इसीलिए है कि एक तो देखिए इससे आपको ना इस संविधान की प्रस्तावना की खूबसूरती का अहसास होता है जैसे इतिहास में हम जब राजतंत्र को पढ़ते हैं राजा का शासन तो देखते हैं कि किस तरह की कठोर नीतियां थी कैसे किसानों पर आम जनता पर शासक नियंत्रण करता था कठोर नीति अपनाता था किस तरह गुलामों का बाजार था तो इस स्वतंत्र भारत में रहने का जो असली मजा है वह आपको फील हो पाएगा जब आप इतिहास और हमारे संविधान प्रस्त डू इन सबको एक साथ लेकर पड़ते हैं तो तभी तो इस स्वतंत्रता का इस फ्रीडम का हमें अहसास होगा अच्छे से कि हम एक आजाद देश में जन्मे है इस चीज का कितना बेनिफिट हमें
38:07 मिला है कितने प्यारे मूल अधिकार हमें दिए गए हैं और हम भाग पर हैं हमारे मूल कर्तव्यों को निभाने से तो देखिए जब फील ही नहीं है किसी बात का कि मूल अधिकार का फील है ना संविधान की कोई फीलिंग है ना हमारे प्रेम बल्कि कोई फीलिंग है तो हम कैसे कीसी ईनसान से एक्सपेक्टेशन कर सकते हैं कि वह अपनी फंडामेंटल ड्यूटी निभा तो इसीलिए संविधान को तो नॉर्मल अगर आपको नहीं देना संविधान की टो राइड फंडामेंटल ड्यूटीज इन तो पता होना चाहिए ऐसा मेरा मानना है चलिए देखते हैं कि छब्बीस नवंबर 1969 को हमारा संविधान बनकर तैयार हो गया
38:53 था और कोट 26 नवंबर को हम बनाते हैं विधि दिवस के रूप में वर्तमान में 26th नवंबर को हम विधि दिवस के रूप में मनाते हैं क्योंकि हमारा संविधान बंद करके तैयार हो गया था लेकिन हमने संविधान लागू किया 26जनवरी 1950 को इसके पीछे एक बड़ा कारण 1969 के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस का जो लाहौर अधिवेशन था उसमें जवाहरलाल नेहरू ने रावी नदी के तट पर खड़े होकर लाहौर में यह भाषण दिया कि छब्बीस जनवरी को हम हमारा स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे लेकिन क्योंकि हमें ब्रिटेन ने आजाद किया तो वह 15 अगस्त
39:40 को हमें आजादी दे दी गई वह हमारे नियंत्रण में नहीं थी उस तारीख पर हमारा नियंत्रण नहीं चला लेकिन संविधान को लागू करने की तिथि पर तो हमारा पूरा नियंत्रण था तो इसीलिए हमने उस डेट को चुना 26 जन अपनी को और 1950 से संविधान को लागू किया तो 26जनवरी डेट चूस-चूस कि यह भी पता चला कि यह सब विधि दिवस के रूप में सब्सक्राइब 2006 में को द्वारा शब्दों का महत्व जानना है अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित इसके बाद प्रस्तावना के हमारे सारे शब्द का अर्थ भी हमने समझ लिया महत्व लिए
40:26 सबसे पहले यहां पर घी का मतलब है जैसे हम अगर प्रैक्टिकल लाइफ में तो कहते हैं कि किसी ने चाइल्ड लिए सुष्मिता सेन ने दो बेटियों ऐड करने का मतलब है कि लिए अपने परिवार का हिस्सा मान लिया है डॉक्टर ने का मतलब है कि पूरी तरह से अब वह आपका हिस्सा है आपका परिवार तो हमने भी संविधान को अंगीकृत किया मतलब कि हमने संविधान को अपना लिया अपना मान लिया है हमारे परिवार का यानि हमारा हिस्सा है अब हमारा संविधान हमारे जीवन का
41:13 हिस्सा है हमारा उस स्थान है यह सब यहां पर डोंट का इसके बाद देखिए अधिनियमित अधिनियमित इनवेस्ट करना ज्यादा अच्छा अधिनियम अधिनियमित अब यहां पर हम भारत के लोग और इस संविधान को अधिनियमित कर रहे हैं यानी हम भारत के लोग यह मान रहे हैं कि हम अपना संचालन करेंगे इस संविधान के अनुसार संविधान के अधीन है और संविधान के अधीन रहते हुए हम खुद को नियमित कर रहे अधिनियमित का मतलब है कि हमारा संविधान हम पर लागू है हम उसी के अकॉर्डिंग काम करते हैं हमारे संविधान के अकोर्डिंग यह हमारा रेगुलेशन होता है हम
42:00 नियमित होते हैं तो यह अधिनियमित का अर्थ है अब देखिए आत्मार्पित यह सबसे ज्यादा प्यारा शब्द है आत्मार्पित हमने अपनी आत्मा को अर्पित कर दिया है हमारा संविधान से इससे पहले हमने अंगीकृत किया अपना लिया उसके बाद हमने खुद को अधीन माना संविधान के क्योंकि हम सभी संविधान के अधीन है या संविधान के सामने हम सभी बराबर हैं तो देखिए और अधीन रहते हुए हमने संविधान को खुद पर नियमित किया और तीसरा शब्द है कि हमने संविधान को आत्मार्पित किया है अपनी आत्मा को अर्पित कर दिया है क्योंकि देखिए आत्मा के लिए कहा जाता है आत्मा अजर है अमर है हम और आप एक जीवन में आते हैं फिर
42:48 मृत्यु होती है उसके बाद का क्या होता है पता नहीं लेकिन आत्मा अजर है अमर है और हमारा संविधान भी क्या है अजहर है और अमर है इसीलिए हमने उसे सॉल्व को आत्मा को अर्पित किया है ताकि वह संविधान हमेशा अजहर रह सके अमर रह सके तो यह बहुत ही प्यारा शब्द है इसके साथ हमारी प्रस्तावना कंप्लीट होती है और देखिए दो कि हमने आत्मा को अर्पित किया जो कि अजर है अमर है तो इसीलिए भारत के संविधान को लिविंग कॉन्स्टिट्यूशन जीवित संविधान कहा जाता है कि उसके पीछे का कारण तो यह है कि हमारे संविधान में लगातार संशोधन होते रहे हैं जिसके थ्रू संविधान ने खुद को हमेशा नया बनाए रखा है अगर संशोधन नहीं होते तो
43:36 संविधान वृक्ष संविधान के लाता लेकिन बहुत अच्छे संशोधन हुए हैं तरक्की की तरफ बढ़ने के लिए संशोधन हुए हैं हमारा देश एक तरक्की करें इसलिए संशोधन हुए तो वह बहुत अच्छे संशोधन इसीलिए हमारा संविधान जीवित संविधान है यह क्वेश्चन पूंछा जाए कि किस देश का संविधान लिविंग ट्यूशन संविधान है तो वह हमारा घाघरा संविधान संविधान संविधान है कि यह हमने प्रस्ताव न कंप्लीट पढ़ ली है आई हॉप आपको अच्छा लगा होगा आज की क्लास को पढ़कर के हम देखिए बहुत बार क्वेश्चन पूछा जाता है कि मूल अधिकारों को संविधान की आत्मा किसने कहा है या संविधान
44:24 की आत्मा मूल अधिकार है यह बात किसने कही है तो भीमराव अंबेडकर जी ने यह बात कही है लेकिन अगर एग्जामिनर आपको बुझाना चाहिए तो वह यह पूछ सकता है कि प्रस्तावना को आत्मा किसने कहा हमारे संविधान की प्रस्तावना को संविधान की आत्मा किसने कहा है तो ठाकुरदास भार्गव व्यक्ति हैं जिन्होंने प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहां है इसके बाद प्रस्तावना को पहचान पत्र की संज्ञा किसने दी है वो तो ए नेपाल की वाला ने संविधान की प्रस्तावना को पहचान पत्र की संज्ञा दी है
45:11 तीसरा है संविधान की जन्म कुंडली कॉन्स्टिट्यूशन का हॉरोस्कोप किसने कहा कि मून ने प्रस्तावना को हमारे कॉन्स्टिट्यूशन का होरोस्कोप कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी यह संविधान सभा के सदस्य भी थे तो देखिए यह तीनों के रूप में पूछा जा सकता है आप इन दिनों को याद रखना क्योंकि बार-बार मूल अधिकारों का क्वेश्चन पूछा जा चुका है बहुत बार पूछा जा चुका है तो अब कुछ नया भी पूछा जा सकता है अब हम करते हैं क्वेश्चन क्योंकि यह वह सेगमेंट है जहां से आपके एफेक्टेड में क्लियर होते हैं आपको कॉन्फिडेंस आता है कि हम मैंने प्रस्तावना पढ़ ली है मुझे प्रस्तावना याद है और उसकी भावनाएं भी पता
45:57 है उसका मोटे भी पता है तो देखिए अब करते हैं क्वेश्चंस और इन क्वेश्चन को लगाने से पहले तरफ प्रस्तावना को याद जरूर कर लेना यह मेरी हंबली रिक्वेस्ट है आप से की प्रस्तावना को याद जरूर कर लेना पुरुष या तो आपको हो ही गई होगी इस क्लास के माध्यम से और दूसरा फीलिंग उस और उन शब्दों का महत्व उनकी भावनाएं क्यों वह शब्द जोड़े गए यह तो आपके क्लियर हो गए हैं आज लेकिन प्रस्तावना को एक या दो बार याद करके किसी को सुना देना या खुद से लिख लेना ताकि अब क्वेश्चंस करके टाइम आपको कहीं से कहीं तक कोई प्रॉब्लम ना दें क्योंकि जो भावनाओं से या शब्दों पर क्वेश्चन पूछा जाएगा वह तो आप कर ले जाएंगे लेकिन अगर फैक्ट के
46:42 रूप में कि कौन सा शब्द पहले था कौन सा बाद में था तो वहां पर उपलब्ध सकते हैं अगर आपको प्रस्ताव न एडिटिव वर्ल्ड या नहीं तो चलिए पहला क्वेश्चन है भारत के संविधान के निर्माताओं का मत निम्नलिखित में से किसमें प्रतिबिंबित होता है तो हमने अभी देखा कि हमारी प्रस्तावना जिसे विदेशी का भी कहते हैं वह हमारे संविधान का आईना है उसमें हमारे संविधान निर्माताओं का मत प्रतिबिंबित होता है हमें दिखाई देता है बल्कि अगर यह कहा जाए कि मूल अधिकारों में क्यों नहीं दिखाई देता क्योंकि मूल अधिकार तो संविधान का एक भाग है पार्ट है यानी भाग-3 में मूल अधिकार दिए गए जबकि उद्देशिका हिस्सा अंत
47:28 हमारे संविधान का ना कि भाग-1 भाग-2 इस तरह से किसी भाग में है 22 मूल संविधान में जो 22 भाग थे उन्हें किसी में प्रस्तावना नहीं है प्रस्तावना का एक अलग ही भ्रष्ट है स्टार्टिंग में तो इसी लिए बेरोजगारी वाले मामले में प्रस्तावना को भांग नहीं माना था संविधान का लेकिन याद रखना 1973 से अब तक हमने संविधान की अभिन्न अंग या अभिन्न हिस्सा माना है प्रस्तावना को तो हमारे निर्माताओं का जो मत प्रतिबिंबित होता है उद्देशिका में होता है क्योंकि यह तो संविधान के भाग है जिनमें जैसे डिप्टी एसपी की बात करें तो सिर्फ राज्य के कर्तव्य बताई गई इससे हमें पूरे संविधान के बारे में पता नहीं चलता
48:14 ना ही सिर्फ मूल अधिकार पत्र लेने से यह पता चलता है कि हमारे देश में शासन प्रणाली कैसी है ना यह पता चलता है कि राज्य के कर्तव्य कैसे हैं जबकि उद्देशिका को पढ़ लेने से हमें सारा मामला समझ में आ जाता है पता चल जाता है कि हमारे संविधान ने नागरिकों को कैसे अधिकार दिए हैं शासन प्रणाली किस तरह से हम चाहते हैं हमारे देश का नेचर कैसा है इस उद्देश्य से संविधान बनाया गया यह सारे मत प्रतिबिंबित होते हैं दिखाई देते हैं इसमें उद्देशिका में तो आई हॉप आप बाकी के तीन ऑप्शंस में कंफ्यूज नहीं होंगे चलिए नेक्स्ट क्वेश्चन है भारतीय संविधान की उद्देशिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करना है
48:59 उद्देशिका को संविधान का भाग नहीं माना जाता यह शीघ्र उद्देशिका को तो भारत के संविधान का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा या भाग माना जाता है उद्देशिका विधायिका की शक्तियों को नियंत्रित करने का कार्य करती नहीं ऐसा हमने कहीं भी पूरे प्रस्तावना पढ़ते समय नहीं देखा कि प्रस्तावना में कहीं भी विधायिका का उल्लेख किया गया हो या उसको दी जाने वाली शक्तियों को नियंत्रित करना यह शक्ति प्रदान करना ऐसा कोई शब्द कोई लाइन हमने प्रस्तावना में नहीं देखी तो दूसरा कथन गलत है उद्देशिका उद्देश्य प्रस्ताव पर आधारित है जिसे पंडित नेहरू द्वारा प्रस्तुत किया गया था यह बिल्कुल
49:45 ठीक बात उद्देश्य कार्य प्रस्तावना का उद्भव ही इसी पंडित जवाहरलाल नेहरू के द्वारा प्रस्तुत किए गए उद्देश्य प्रस्ताव से हुआ था तो यह तीसरा सेंटेंस बिल्कुल ठीक है तो उसने पूछा है उपयुक्त कथनों में से कौन सा सचिव नहीं है तो पहला और दूसरा कथा यह सही नहीं है है नेक्स्ट क्वेश्चन भारतीय संविधान की प्रस्तावना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में कौन सा प्रमुख सही है अब यहां पर काम आती है प्रस्तावना याद की हुई सिर्फ शब्दों का अर्थ या महत्व भावनाएं समझ लेना एक हिस्सा है प्रस्ताव ला का दूसरा हिस्सा है प्रस्तावना कंठस्थ हो ना पूरी तरह से वर्ड टो वर्ड याद होना
50:32 तो देखिए हमने देखा था संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य यह सीक्वेंस था है और इन पांच सौ शब्दों से हमें पता चलता है हमारे देश का नेचर हमारे भारतीय राज्य की प्रकृति कैसी है नेक्स्ट क्वेश्चन प्रस्तावना में संविधान का क्या निहित है तो प्रस्तावना में संविधान का मूल दर्शन मोहित याद रखना संविधान की प्रस्तावना में प्रत्यक्ष लोकतंत्र यह गलत हमने प्रस्तावना में लोकतंत्रात्मक शब्द देखा था उसमें डिफाइन में था वहां पर कि प्रत्येक है या अप्रत्यक्ष लेकिन हमारे संविधान में यह लिखा गया है कि हमारा जो लोकतंत्र है वह प्रत्यक्ष लोकतंत्र है
51:19 कैसे शब्दों में नहीं इसकी भावनाओं को समझना कि कैसे हमारा लोकतंत्र से प्रत्येक है क्योंकि हम आधार हम जो भारत की जनता चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधि चुनकर भेजते हैं वह प्रतिनिधि कार्य करते हैं और व कार्यपालिका का हिस्सा होते हैं और वह कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाब दे मिलती है हमारे शासन में सीधी भागीदारी जनता की नहीं अप्रत्यक्ष रूप से भागीदारी तो इसीलिए भारत में अगर पूछ भी लिया जाए कि किस तरह का लोकतंत्र है तो भारत में प्रत्यक्ष लोकतंत्र है कि प्रत्यक्ष लोकतंत्र है स्विट्जरलैंड में भारत में प्रत्यक्ष लोकतंत्र है शायद आज ही आपको पता चला हो कि प्रत्यक्ष
52:07 लोकतंत्र नहीं है वह सकता है आज तक आप यह सोच रहे हो कि भारत में डायरेक्ट डेमोक्रेसी है या प्रत्यक्ष लोकतंत्र नहीं याद रखना भारत में प्रत्यक्ष लोकतंत्र है जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधि जा करके अपना कार्य करते हैं और वह प्रतिनिधि पीएम को चुनते हैं वह प्रतिनिधि हमारे राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं तो हमारा सीधी भागीदारी नहीं है दूसरा साम्यवादी स्वरूप इसका आंसर तो हमने देख लिया है लेकिन हम कोशिश करें कि बाकी के तीनों शब्दों को भी देख लें ताकि हमें कोई डाउट ना रहे साम्यवादी शुरू क्या होता है सरकार का जैसे इस एक्ज़ांपल है चीन चीन के अंदर साम्यवादी स्वरूप साम्यवादी के
52:52 अंदर यह समाजवाद का एक अगला स्टेप है साम्यवादी को मिनिमम साम्यवाद समाजवाद कि अगला स्टेप है और इसमें कहीं ना कहीं अराजकता का पुत्र रहता है तो इसलिए साम्यवादी को हम तो अच्छा नहीं मानते चीन है समय अवधि तो भारत का तो साम्यवादी स्वरूप नहीं है यह नास्तिक नास्तिक ने नाचते नास्तिक राज्य हमने देखा भारत ने पंथ निरपेक्षता को अपनाया है हमारी प्रस्तावना में शब्द लिखा है पंथनिरपेक्ष लेकिन हम नास्तिक नहीं नेगेटिव सेंटेंस में हमारा पंथनिरपेक्ष शब्द नहीं हमने पॉजिटिव सेंस में लिया है सभी धर्मों का सम्मान करना यह हमारा सेंस तो नास्तिक राज्य भारत नहीं है
53:39 याद रखना भारत सभी धर्मों का सम्मान करने वाला राज्य है है अब देखिए संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न शब्द का सही अर्थ कौन सा है यह क्या है संपूर्ण प्रभुत्व का अर्थ होता है आंतरिक और बाह्य मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति और यह हमारे संविधान निर्माताओं ने हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न तो ठीक शुरुआत में ही यह शब्द लिख दिया है जिसका अर्थ है आंतरिक और बाह्य मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति बिना किसी दबाव के बिना किसी नियंत्रण के अ कि अब अगला क्वेश्चन है भारत में लोकतंत्र का कौन सा स्वरूप प्रचलित है यह आ गया
54:27 क्वेश्चन के रूप में प्रत्यक्ष लोकतंत्र हमारे यहां प्रत्यक्ष लोकतंत्र नहीं है ना ही दोनों का मिश्रित रूप है हमारे यहां से प्रत्यक्ष लोकतंत्र है कि भारत के संविधान के संदर्भ में सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय का उल्लेख निम्नलिखित में से किन उपबंधों में हुआ है तो देखिए एक तो हम यह लाइन देखिए अभी प्रस्ताव लाया उद्देशिका में दूसरा मैंने बताया था आर्टिकल thirty-eight कि यह लाइन है बीजेपी का जो आर्टिकल 38th है उसमें ही लाइन लिखी गई है सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय और यह कर्तव्य है हमारे राज्य का हमारी सरकार का तो एक और तीन में मूल अधिकारों में यह लाइन नहीं है ना ही मूल
55:14 कर्तव्य में तो एक और तीन इसका राइट आंसर है संविधान सभा ने सर्वसम्मति से उद्देश्य प्रस्ताव कब पारित किया अब देखिए यहां पर कंफ्यूज हो सकते हो इस क्वेश्चन में है मैं तेरा दिसंबर 1946 को तो उद्देश्य प्रस्ताव रखा गया था संविधान सभा के सामने पारित हुआ था बाय जनवरी 1947 को तो यह दोनों ही डेट इंपोर्टेंट है क्वेश्चन को ढूंढते पढ़ना कि यदि पूछा जाता उद्देश्य प्रस्ताव को कब रखा गया था तो तेरा दिसंबर 1946 को अब पूछा क्या जा रहा है कब पारित किया गया था तो बाय जनवरी 1947 को पारित किया गया था एक डेट इसमें है 3 जून 1947
56:02 इस डेट को देख लेते हैं माउंटबेटन ने इस डेट को 3G 1947 को भारत और पाकिस्तान के विभाजन का खाका प्रस्तुत किया था जो दुख भरी घड़ी हमारी थी वह 3 जून 1947 इसी दिन विभाजन का खाका प्रस्तुत किया गया था अब एक प्लेट है छब्बीस नवंबर 1969 पास प्रस्तावना को डिटेल में अभी जब हम पढ़ रहे थे तब हमने इस दिन को हम विधि दिवस के रूप में मनाते हैं और छब्बीस नवंबर 1999 वो डेट है जिस दिन हमारा संविधान बंद करके तैयार हो गया था और चौबीस जनवरी को एक फॉर्मल मीटिंग हुई जिसने संविधान पर 284 सदस्यों ने अपने हस्ताक्षर किए थे और
56:48 छब्बीस जनवरी को हमने इसे लागू किया था आप भी जब कभी वे क्वेश्चंस लगाओ या अपने सेट सॉल्व करो तो उस समय चारों ऑप्शन को हमेशा देख लिया करो रिकार्ड कर लिया करो उससे लाइक कॉन्फिडेंस आता है अब अगला क्वेश्चन है भारतीय संविधान की प्रस्तावना संशोधित संस्करण है इसका संशोधित संस्करण है उद्देश्य प्रस्ताव का जो कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के द्वारा रखा गया था और अभी हमने देखा तेरा दिसंबर 1946 को रखा गया था और 22 जनवरी 1947 को पारित हुआ था इसके अलावा भी यह देख लेते हैं नेहरू रिपोर्ट क्या है यह नेहरू रिपोर्ट है
57:34 1928 कि अ में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारत ने संविधान का एक प्रारूप या एक खाका तैयार किया था 1928 में लेकिन वह क्यों प्रस्तुत नहीं हो पाया या क्यों लागू नहीं हो पाया क्योंकि ब्रिटेन की संसद ने उसे नकार दिया था रिजेक्ट कर दिया था और देख क्योंकि 1928 में हम स्वतंत्र नहीं थे तो इसलिए हम वह नहीं मान पाते वह संविधान हम पर लागू नहीं हो पाया तो नेहरू रिपोर्ट उसी को कहते हैं एक है अगस्त प्रस्ताव याद रखना नेहरू रिपोर्ट अगस्त प्रस्ताव उद्देश्य प्रस्ताव इन तीनों का ही संबंधित संविधान से है लेकिन नेहरू रिपोर्ट और अगस्त प्रस्ताव यह हमारे लिए नहीं मायने
58:21 रखते या कम मायने रखती है क्योंकि इनसे हमारा संविधान नहीं बना हमारा संविधान बना है उद्देश्य प्रस्ताव से प्रस्तावना बनी है और हमारे संविधान के निर्माण की प्रक्रिया में जो आया है वह है उद्देश्य प्रस्ताव वह दोनों पहले के थे जिम कि हमने नहीं माना पहले भैरव रिपोर्ट को ब्रिटेन की संसद ने नहीं माना और अगस्त प्रस्ताव को हमने नहीं माना क्योंकि अगर प्रस्ताव देखिए आठ अगस्त 1940 को वाइसराय लार्ड लिनलिथगो को कि इससे आपको उस समय का वॉयसराय भी याद हो जाएगा देखिए आठ अगस्त 1940 को वाइफ इन लोगों ने एक अगस्त प्रस्ताव प्रस्तुत किया था हमारे लोगों के सामने लेकिन हमने इसे रिजेक्ट कर
59:09 दिया क्योंकि इसमें भारत को डोमिनियन स्टेटस देने का दर्जा मिल रहा था या भारत को डोमिनियन स्टेट बना रहे थे और इसमें लिखा गया था इस अगस्त प्रस्ताव में कि भारत का जो संविधान बनेगा उसमें मुख्य भारतीय लोग होंगे तो इस बात पर हम अड़ गए कि मुख्य भारतीयों का क्या मतलब है यानी इसमें और कहीं ना कहीं विदेश ब्रिटेन के जो लोग हैं वह भी शामिल होंगे तो यह हमारा पूर्ण थे भारतीयों के द्वारा बनाया गया संविधान तो नहीं होगा तो इसमें बाकी तीन क्लोज और भी थे कुल मिलाकर 5 बातें थी इस अगस्त प्रस्ताव में जो कि हमें मंजूर नहीं थी तो इसलिए हमने सदस्य प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया और एक चीज देखिए इस समय में किस काल
59:54 अपने अगस्त प्रस्ताव रखा गया था जब विश्व युद्ध चल रहा था 9039 सेकंड वर्ल्ड वॉर स्टार्ट हो गया था और शुरुआती दौर में जर्मनी बहुत लेट कर रहा था और ब्रिटेन की हालत बहुत खस्ता और रखी थी 1914 वाले समय तक तो देखिए इसलिए भारत में कहीं कोई उपद्रव ना हो जाए भारत कहीं स्वतंत्रता के लिए बहुत ज्यादा आंदोलन ना करने लग जाए और ब्रिटेन को यह भी डर था कि यह कॉलोनी के रूप में हमसे छूट ना जाए हमारे हाथों से निकल ना जाए भारत तो इसलिए वह ना भारतीयों को कहीं ना कहीं लॉलीपॉप देने का काम कर रहे थे लेकिन हम भी कोई कम नहीं है हम इस बात को इस चाल को तो हम समझ गए थे और हमने अगस्त प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया था तो
1:00:40 यह था अगस्त प्रस्ताव हमारा क्वेश्चन था कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना संशोधित संस्करण किसका है तो वह आंसर है उद्देश्य प्रस्ताव का अगला क्वेश्चन देखिए भारती आधार के प्रस्तावना में निम्नलिखित में से किन स्वतंत्रताओं का उल्लेख यहां पर फिर से काम आता है कि आपने सीक्वेंस प्योर की है यह नहीं कि स्वतंत्रता हमने धर्म की स्वतंत्रता आर्थिक न्याय आर्थिक स्वतंत्रता की बात नहीं किया आर्थिक न्याय की बात की राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं है राजनीतिक न्याय की बात इसके अलावा अवसर पर स्वतंत्रता बिल्कुल
1:01:27 ठीक की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता की बात की गई तो यह गलत विचार की स्वतंत्रता बिल्कुल सीक्वेंस स्वतंत्रता का क्या था विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता विचार की स्वतंत्रता धर्म की स्वतंत्रता तो एक और सब्सक्राइब प्रतिष्ठा और स्वर की समता की बात की गई है ना कि स्वतंत्रता की तो इसलिए वर्ड टो वर्ड आपको याद करने है प्रस्तावना अ है अबे करें निम्नलिखित में से कौन से शब्द 42 वें संविधान संशोधन से पहले भी प्रस्तावना में थे यानी हमारे जो मूल
1:02:14 प्रस्ताव थी उसमें भी थे तो देखिए एकता और लोकतंत्रात्मक यह दोनों शब्द हमारे मूल प्रस्तावना में थे क्योंकि समाजवादी और पंथनिरपेक्ष इन दोनों शब्दों को 1976 के अंदर 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया है तो इसका आंसर हो जाएगा तीन और चार यह धुंध और करेक्ट आंसर है निम्नलिखित को संविधान की प्रस्तावना में अंतर्निहित क्रम अनुसार व्यवस्थित करना है तो देखिए यह क्रम अनुसार व्यवस्थित हो पाएंगे जब हम प्रस्तावना वर्ड टो वर्ड याद हो तो सबसे पहले हमने बात की थी न्याय है
1:03:00 कि सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय उसके बाद बात की थी स्वतंत्रता की कौन सी स्वतंत्रता विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता उसके बाद बात की थी प्रतिष्ठा और अवसर की समता और फिर लास्ट में वर्धा मारा बंधुत्व तो आंसर हो जाएगा बी सबसे पहले न्याय फिर स्वतंत्रता और समता और फिर बंधुत्व यह सीक्वेंस था कि भारत के संविधान की उद्देशिका के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है कौन सा कथन सही नहीं है देश का संविधान का एक अंश है बिल्कुल यह बात तो एकदम ठीक है इसमें संविधान के उद्देश्य का
1:03:48 उल्लेख है बिल्कुल 1975 में उद्देशिका में समाजवादी शब्द जोड़ा गया था बिल्कुल जुड़े थे समाजवादी पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द पधा का एक संस्था ने यह बात गलत तो नहीं बताना था पंथनिरपेक्ष को भी के साथ जोड़ा गया था अगला क्वेश्चन है भारत के संविधान की उद्देशिका के बारे में कौन-सा कथन सही उप अधीक्षक ए कि यह बात बिल्कुल ठीक है और यहां पर इसीलिए मैंने कहा क्वेश्चंस करने
1:04:34 का फायदा बहुत है यहां पर यह जो स्टेटमेंट है उद्देशिका श्रम न्यायालय में परिवर्तनीय नहीं है यह ठीक बात है कैसे डीपीएसपी और प्रस्तावना प्रस्तावना उद्देशिका तो डिप्टी एसपी और प्रस्तावना दोनों ही न्यायालय में चुनौती योग्य नहीं इन्हें कभी भी कोई व्यक्ति न्यायलय में जा करके सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में जा करके चुनौती नहीं दे सकता और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट भी इन्हें बाध्यकारी रूप से लागू नहीं करवा सकती हैं ना ही डिप्टी एसपी को बंधक बना सकती है न्यायालय और ना ही प्रस्तावना को यह दोनों हमारे संविधान के वह भाग है जिनको कभी चुनौती नहीं दी जा सकती क्योंकि भावनाएं
1:05:19 अंतर्निहित जब हमने आर्टिकल एक सेकेंड तक उड़ डिटेल में पड़ा था तब हमने देखा कि डिप्टी एसपी क्यों कोई व्यक्ति सुप्रीम लिए हाई कोर्ट नहीं जा सकता क्यों उसे चुनौती नहीं दी जा सकती और क्यों कोई भी कोर्ट कोई भी न्यायालय ने उसे बंधक रूप से लागू नहीं करवा सकता यह दोनों चीज़ें हमने देखी थी तो डिप्टी एसपी की तरह की प्रस्तावना को भी उद्देशिका या प्रस्तावना के लीजिए इसे भी न्यायलय में प्रवर्तनीय नहीं है यह तो यह कथन बिल्कुल सही दूसरा उद्देशिका उद्देश्यों को बताती है जिन्हें संविधान स्थापित करना और आगे बढ़ाना चाहता है बिल्कुल ठीक बातें क्योंकि हमने देखा कि संविधान निर्माताओं की भावनाएं उनकी
1:06:07 फीलिंग्स उनके परपज ही तो है प्रस्तावना के अंदर उद्देशिका उस रात को इंगित करती है जहां से संविधान अपना प्राधिकार प्राप्त करता है यह बात भी बिल्कुल ठीक है उद्देशिका उस स्रोत को बताती है बिल्कुल हमने पहला शब्द ही यही देखा हम भारत के लोग हम ही हैं जो संविधान को अधिकार प्रदान करते हैं हम ही लोग हैं जो संविधान की एनर्जी का शोर से तो इसीलिए उद्देशिका उस स्रोत को बिल्कुल उद्धृत किया है हम भारत के लोग हम ही वह शख्स है जो संविधान को ऊर्जा देते हैं शक्ति देते हैं तो यह लाइन तो बिल्कुल आप अपने दिमाग में एकदम फिट कर लो कि स्रोत क्या है हम भारत के
1:06:53 लोग हैं जहां से संविधान अपना प्राधिकार प्राप्त करता है तो इसमें तीनों ही कथा बिल्कुल ठीक है है अब देखिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना में किस का उल्लेख है तो प्रतिष्ठा की समानता है अवसर की समानता है लेकिन विचारों की समानता नहीं विचारों की स्वतंत्रता है है तो इसमें आंसर हो जाएगा एक और दोनों सही हैं एक में निम्नलिखित उद्देश्यों में से कौन-सा एक भारत के संविधान की उद्देशिका में संख्या समाहित नहीं है तो विचारों की स्वतंत्रता बिल्कुल समाहित है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी समाहित है लेकिन आर्थिक
1:07:40 स्वतंत्रता नहीं आर्थिक न्याय है है और विश्वास की स्वतंत्रता यह भी बिल्कुल ठीक है तो समाहित किया नहीं है आर्थिक स्वतंत्रता कहीं से कहीं तक यह शब्द समाहित नहीं है आर्थिक न्याय जो शब्द है वह समाहित है भारत के संविधान की उद्देशिका अपने नागरिकों को निम्नलिखित में से किस प्रकार का न्याय प्रदान करती है हमने देखा सबसे पहले सामाजिक फिर आर्थिक फिर राजनीति तीन तरह के न्याय प्रदान करती है सामाजिक मनोवैज्ञानिक कहीं से कहीं तक कोई शब्द हमारी पूरी प्रस्तावना में नहीं आर्थिक और राजनीतिक न्याय तो 13 और चार करें है
1:08:27 के 42 वें संविधान संशोधन अधिनियम ने 1975 में पहली बार प्रस्तावना में संशोधन किया और कुछ शब्द जोड़े यह बिल्कुल ठीक बात है और अभी तक मात्र एक ही बार संशोधन हुआ है और वह इंदिरा गांधी ने किया था और वह ऐसा कर ही सकती थी हमने देखा तो इस कार्यक्रम देखना है तो सबसे पहला शब्द है समाजवादी फिर है पंथनिरपेक्ष और फिर है अखंडता को कि अब निम्नलिखित कथनों पर विचार करना है प्रस्तावना भारत के संविधान का एक अभिन्न अंग है बिल्कुल है और यदि क्वेश्चन में पूछ लिया जाए कि प्रस्तावना अभिन्न अंग है यह कब कहा गया तो सुप्रीम कोर्ट ने
1:09:14 1973 के अपने वर्डिक्ट में जो केशवानंद भारती मामला था उसमें निर्णय देते समय यह कहा था कि प्रस्तावना भारत के संविधान का एक अभिन्न अंग है और यदि पूछा जाए कि वह कौन सा संशोधन या कौन सा मामला था भारत का जिसमें यह कहा गया कि प्रस्तावना भाग नहीं है तो 1968 का बेवकूफ बड़ी वाला मामला जिसमें यह कहा गया कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है तो दोनों ही मामले लेकिन इस बात की टेंशन मत लो कि इन दोनों मामलों को पढ़ाने हमने क्योंकि हम जितने भी इंपोर्टेंट वाद हुए हैं भारत में तो उनको हम डेफिनेटली डिस्कस करेंगे कम से कम 15 जो वाद है उनको तो डे अपने देखने वाले हैं
1:10:00 अगला स्टेटमेंट है प्रस्तावना के अनुसार विधायिका अपनी शक्तियों का उपयोग करने के लिए बाध्य है ने ऐसी कोई भी बात हमने पूरी प्रस्तावना में नहीं पड़ी जहां पर विधायिका या संसद या किसी शक्ति का उपयोग करना या नियंत्रण करना ऐसे ना तो कोई भावना ना ही कोई बात हमारे सामने आई तो यह दूसरा कथन बिल्कुल गलत है केवल पहला कथन सही है भारतीय संविधान की प्रस्तावना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करना है यह संविधान सभा द्वारा अंगीकार किए गए उद्देश्य प्रस्ताव पर आधारित है बिल्कुल सबसे पहले संविधान सभा यही तो काम कर रही थी ना कि उद्देश्य प्रस्ताव रखा गया फिर उस पर विचार-विमर्श किया गया फिर
1:10:46 उसे पारित किया गया तो पारित किया गया यानी अंगीकार किया गया स्वीकार किया गया बिल्कुल 42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा प्रस्तावना में टी अपने शब्द समाजवादी पंथनिरपेक्ष और अखंडता शामिल किए गए हम बिलकुल यह बात भी ठीक है तो कथन एक और दोनों ही सही हैं कि अब फिर से विचार करना है हमें तो करते हैं विचार भारतीय संविधान पंथ निरपेक्षता की सकारात्मक अवधारणा को मूर्त रूप दे देता है बिल्कुल इसमें तो हमने राहिल वाला एग्जाम पर भी देखा है कि पंथ निरपेक्षता को किस तरह हमने पॉजिटिव सेंस में लिया है और इसका एक अभी रिसेंट एग्जांपल हमने देखा
1:11:33 कि हमारा राज्य सभी धर्मों का सम्मान करता है इसके बाद भारतीय संविधान लोकतांत्रिक और साम्यवादी दोनों प्रकार के समाजवाद का प्रावधान करता है नहीं यह गलत स्टेटमेंट है भारत लोकतांत्रिक समाजवाद का जरूर प्रावधान करता है लेकिन साम्यवादी और लोकतांत्रिक दोनों का मिश्रित नहीं है देखिए साम्यवादी शब्द इससे पहले भी आया था मैंने बताया कि साम्यवादी कम्युनिज्म अराजकता का पुट है उसमें अराजकता है लेकिन हमारे भारत के पूरे संविधान में पूरी प्रस्तावना में कोई अशद नहीं है जिससे संघर्ष का पता चलता हो वर्गों में आपस में संघर्ष सुनने हमारा संविधान इतना प्यारा
1:12:19 इतना खूबसूरत है कि इसमें बंधुत्व की बात इसमें सब लोगों के हित की बात यह सब बातें निहित ना कहीं कोई अराजकता कोई संघर्ष नहीं और साम्यवादी चीन याद रखोगे तो आपके लिए बहुत अच्छे से इसका अर्थ समझना बहुत आसान हो जाएगा बहुत अच्छे से समझ चीन में साम्यवादी को कर रखा है तो चीन की तरह काम करता है वह हम सब जानते हैं भारत लोकतांत्रिक समाजवाद को मानता है यह याद रखना तो दूसरा गलत इसका आंसर है 126 नवंबर 1969 पास को अंगीकृत भारतीय संविधान की प्रस्तावना में मूल रूप से
1:13:06 भारत को निम्न रूप में वर्णित किया गया है यह पूछना चाह रहा है कि हमारी जो प्रस्तावना मूल प्रस्ताव थी उसमें कौन कौन से शब्द थे तो हमें याद है कि 1976 में आज तक एक ही बार संशोधन हुआ है और उसमें तीन शब्द जोड़े गए थे समाजवादी पंथनिरपेक्ष और अखंडता तो देखिए इन शब्दों को हटा दो यहां से समाजवादी को हटा दो धर्म निरपेक्ष को हटा दो तो बचा क्या संप्रभु और लोकतांत्रिक बिल्कुल यह हमारी मूल प्रस्तावना में थे तो आंसर हो जाएगा एक और दो कि यह हमारा प्रस्तावना का चैप्टर कंप्लीट हुआ और इसके हमने क्वेश्चंस में लगा लिए हैं आई हॉप आपको प्रस्तावना कि आज वाले क्लास अच्छी लगी होगी और अगला जो हमारा
1:13:53 टॉपिक रहेगा कॉन्स्टिट्यूशन में वह हम वाद पर करेंगे जितने भी मामले जो न्यायलय में पहुंचे और न्यायलय ने बहुत बड़े वर्डिक्ट उसमे दिए उनको हम डिस्कस करेंगे तो चलिए तब तक के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आप सभी को जय हिंद जय भारत जय