0:11 आप सब को जय मसीह की। भजन 106 मेरे साथ निकाल लीजिए। भजन 106 और हम लोग इस पर मनन करेंगे और देखेंगे परमेश्वर हमसे किस रीती से अपने वचन के द्वारा बात करता हैं। भजन 106 यहां पर इससे पहले हम लोग भजन में जाएं। अह मेरे पास कुछ प्रश्न है आपके लिए और इससे पहले हम उस पे हम उस पर विचार कर सकते हैं। जब हम भजन के बारे में सोच रहे हैं तो अच्छा आप सोच प्रश्न है कि हम क्या सोचते हैं कि लोग पाप क्यों करते हैं? आप क्या सोचते हैं कि लोग पाप क्यों करते हैं? या मैं और आप पाप क्यों करते हैं? हो सकता है हमारे पास अलग-अलग कारण हो सकते हैं। लेकिन शायद कहीं ना कहीं हम सब लोग इस बात पर सहमत होंगे कि जब लोग पाप
0:56 कर रहे हैं तो लोग सोचते हैं कि कहीं ना कहीं हमारा कुछ फायदा हो जाएगा या हमें कुछ ऐसा मिलेगा जो शायद सही काम करने से नहीं मिलेगा। हमें कुछ लाभ मिलेगा। आनंद मिलेगा शायद संतुष्टि मिलेगी। या तो सोचिए लाइक जब लोग चोरी करते हैं तो सोचते हैं शायद इससे हम धनी हो सकते हैं। यह एक सही यह एक सरल तरीका है शॉर्टकट है कि हम इससे सरल हम इससे धनी हो जाएंगे। ये लोग व्यभिचार करते हैं वासना में लीन रहते हैं। सोचते हैं ये शायद शॉर्टकट है कि इससे हमारी शारीरिक इच्छाएं पूरी हो जाएंगी। ये लोग झूठ बोलते हैं। वो सोचते हैं कि शायद इससे हम खुद को बचा सकते हैं। खुद को अच्छा दिखा सकते हैं। या जो घमंड करते हैं वो सोचते हैं कि इससे हम कुछ साबित करें कि हम भी तो कुछ हैं। लेकिन हम सब जानते हैं कि जब पाप में हम
1:42 लिप्त रहते हैं पाप हमको खोखला करके छोड़ता है। और बहुत बार जब हम पाप में रहते हैं शायद किसी बड़े पाप में फंस जाते हैं तो फिर हम सोचते हैं कि पता नहीं मुझे क्षमा मिलेगी या नहीं मिलेगी। मैं या विश्वासी होने के नाते हम सोचते हैं मैं यह पाप में फंसा हुआ हूं। बार-बार एक ही पाप करता हूं। पता नहीं प्रभु जी आप मुझे क्षमा करेंगे नहीं करेंगे। हो सकता है हम सोचे क्या मेरे पाप जो इतने बड़े हैं घोर हैं क्या वास्तव में मुझे इनसे क्षमा मिल सकती है आज का जो भजन है वह हमको इन दो मोटे-मोटे प्रश्नों का उत्तर दे रहे हैं कि पाप हमको आनंद नहीं प्रदान करेगा और पाप कभी हमारा इतना बड़ा नहीं होगा कि प्रभु जी की दया उसके लिए कम पड़ जाए तो आइए मेरे साथ में देखिए भजन
2:27 106 जो एक मोटी बात हम इस भजन में देखेंगे वो यह है विश्वासियों करुणा में परमेश्वर के निकट पश्चातापी मन के साथ आओ क्योंकि केवल उसी में सच्चा आनंद और संतोष है। विश्वासियों करुणा में परमेश्वर के निकट पश्चातापी मन के साथ आओ क्योंकि उसी में सच्चा आनंद और संतोष है। तो ये जो प्रभु जी के पास आना है जो निकट आना है जिससे कि हमको संतोष और सच्चा आनंद प्रदान प्राप्त हो। ये दिखाई कैसे देगा? निकट आने का अर्थ क्या है? इस खंड को हम तीन भागों में बांट सकते हैं और जो हमको इस प्रश्न का उत्तर देने में सहायता करेंगे कि निकट आने का अर्थ क्या है? तो पहली बात एक पद से लेकर तीन पद में हम स्तुति के साथ परमेश्वर के पास आएंगे। कैसे हमको मिलेगा सच्चा आनंद और सच्चा
3:13 संतोष हम प्रभु जी के पास स्तुति करते हुए आएंगे। प्रशंसा करते हुए आएंगे। दूसरी बात जो चार पद से 46 पद तक है और यह जैसा कि आप देख सकते हैं यह बड़ा खंड है बड़ा भाग है जिसमें हमको पता चलेगा कि हम प्रार्थना एवं पापों के अंगीकार के द्वारा प्रभु जी के पास आएंगे। हम प्रभु जी के पास आएंगे सच्चा आनंद सच्चा संतोष प्राप्त करने के लिए वो होगा प्रार्थना एवं पापों के अंगीकार करने के द्वारा चार पद से 46 पद तक एंड देन हम बीच में इसको देखेंगे कि कैसे हम छोटे-छोटे खंडों में हम कैसे बाद में देखेंगे कि कैसे डिवाइडेड है। एंड देन जो तीसरा जो मुख्य बात है तीसरी बात जो तीसरा पॉइंट है वो है 47 और 48 पद बचे हुए लास्ट के दो पद जो हमें दिखाते हैं कि हम प्रभु जी से गुहार लगाएंगे। अगर हमको सच्चा आनंद चाहिए, प्रभु जी के पास आना
4:00 है, उसका मतलब होगा कि हम प्रभु जी से गुहार लगाएंगे। तो अब देखिए आइए मेरे साथ में भजन 106 तो जैसा कि अन्य भजनों में लिखा होता है ऊपर छोटे-छोटे शब्दों में सुपरस्क्रिप्ट लिखी होती है कि जो हमको शायद बताती है कि किसने लिखा है कभी-कभी बताया जाता है कि यह भजन उस उसके द्वारा पता चलता है कि यह भजन किस समय का है किस इसकी पृष्ठभूमि या इसका बैकग्राउंड क्या है? लेकिन हमको यहां पर कुछ ऐसा नहीं मिलता है। लेकिन अगर हम पूरे खंड को पूरे भजन को अगर हम ध्यान में रखें तो हमको कैसा प्रतीत होता है कि यह जो भजन है इसमें स्तुति एवं विलाप की बात हो रही है। क्षमा एवं छुटकारे की प्रार्थना है। इसमें दिखाई देती हैं और बैकग्राउंड के तौर पर हम देख सकते हैं कि यह जो भजन है संभवत ऐसा लगता है कि शायद ये उस समय का भजन है जब परमेश्वर के लोग इजराइल लोग परमेश्वर
4:46 से दूर हैं। वो महसूस नहीं कर पा रहे हैं कि प्रभु जी की उपस्थिति उनके मध्य में है। तो यह शायद ऐसा लगता है कि शायद ये न्यायों के समय की घटना है जब वाचा के देश में रहते हुए ही इजराइल लोग बंधुहाई को महसूस कर रहे हैं। वो बार-बार चिल्ला रहे हैं। गुहार लगा रहे हैं। प्रभु जी से प्रभु जी छुड़ा लीजिए। यह हो सकता है उस समय की घटना हो या उस समय के बैकग्राउंड में लिखा गया हो या हो सकता है जब ये लोग अल्टीमेटली बंधुहाई में चले जाते हैं और वहां से यह लोग गुहार लगा रहे हैं कि प्रभु जी हमें छुड़ाइए हमें बचाइए हमें पुन स्थापित कीजिए तो शायद हमको इन दो बातों के बारे में सोच सकते हैं लेकिन जो मुख्य बात हमको यहां दिखाई देती है वो ये है कि भजनकार यहां पर अपने पापों का बखान कर रहा है वो अंगीकार कर रहा है वो प्रभु जी के पास आ रहे हैं तो देखिए पहले पद में तो यहां पर वो आरंभ करता है स्तुति के साथ
5:31 में प्रशंसा के साथ साथ में वो कहता है यहां की स्तुति करो। वो कह रहा है यहोवा का धन्यवाद करो क्योंकि वो भला है। तो जब वो अभी अभी वो जिसकी स्थिति ठीक नहीं है। लेकिन जब वो आ रहा है प्रभु जी के पास में वो प्रभु जी की ओर देखते हुए आ रहा है। वो अपनी परिस्थिति से आरंभ नहीं करता है। लेकिन वो प्रभु जी की ओर देखते हुए प्रभु जी के चरित्र को देखते हुए वो आरंभ करता है। वो कहता है परमेश्वर महान है। उसकी करुणा सदा की है। फिर देखिए दो पद में वो कह रहा है प्रभु जी के कामों का वर्णन कौन कर सकता है? तो उसको मालूम है कि अभी हो सकता है उसके काम नहीं दिखाई दे रहे हैं प्रभु जी के लेकिन उसको मालूम है कि प्रभु जी के काम अति अनगिनित हैं। उनका बखान नहीं किया जा सकता है। और तीन पद में वो कह रहा है क्या ही धन्य है वे जो न्याय पर चलते हैं। यहां जो शब्द धन्य लिखा हुआ है। इसका अनुवाद हम अगर इसको दूसरे शब्दों में
6:18 हम कहें तो इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि आनंदित या प्रसन्न। तो भजन का क्या कह रहा है। भजन क्या कह रहा है? आनंदित है वो जन जो न्याय पर चलता है जो धार्मिकता का आचरण करता है। अच्छा ये जो तीन पद है ये इस पूरे भजन में बहुत ही महत्वपूर्ण पद होगा जो पूरे भजन से हमको एक तरीके से विरोधाभास दिखाएगा। एक तुलना दिखाएगा कहेगा कि लोगों ने धार्मिकता का आचरण नहीं किया और इसलिए वो आनंदित नहीं रह पाए। आइए देखें चार पद से आगे जो भजनकार हैं वह अंगीकार और प्रार्थना कर रहा है। तो अगर हम जब चार पद से आगे तो हम चार और पांच पद में देखते हैं कि भजनकार प्रार्थना कर रहा है और वो कह रहा है प्रभु जी मुझे मुझे स्मरण कीजिए। उसको लग रहा है प्रभु जी दूर है। प्रभु जी ने त्याग दिया है। लेकिन प्रभु जी से कह रहा है प्रभु जी मुझे स्मरण कीजिए। अपनी दया के अनुसार और मेरी
7:06 सुधि लीजिए। अपनी प्रजा की सुधि लीजिए। और भजनकार का उद्देश्य है कि वह चाहता है कि प्रभु जी के लोग छूट जाए। प्रभु जी के लोग पुन स्थापित हो इसलिए वो कहता है कि मैं तेरे चुने हुए की समृद्धि को देख सकूं। उनके आनंद में मगन हो सकूं और उनकी महिमा के मैं सहभागी हो सकूं। तो भजन क्या कह रहा है प्रभु जी हमें छुड़ा लीजिए। हमें बचा लीजिए और आगे देखिए इस पदों में आगे कह रहा है कि प्रभु जी क्योंकि आप ही हमको छुड़ा सकते हैं। तो आगे के जो छह पद से लेकर के 46 पद तक हैं अगर हम इनको समझना चाहते हैं इनको समझने के लिए हम अह तीन स्थानों को याद रख सकते हैं जो हमारे समझने में सहायता करेंगे कि जो भजनकार पश्चाताप की बात कर रहा है। अंगीकार की बात कर रहा है तो उसके दिमाग में ऐसा लगता है कि तीन स्थान चल रहे हैं और उसके आधार
7:51 पर वो अंगीकार कर रहा है। देखिए एक पद से छह पद से सात पद से खास करके सात पद से 13 पद में वो उन घटनाओं का वर्णन कर रहा है जो मिस्र में हुई। मिस्र में कैसे विश्वासियों ने इजराइलियों ने पाप किया और फिर 13 पद से लेकर 33 पद में यहां पर वो बात कर रहा है। यह 13 पद से 33 पद में यह उन घटनाओं का वर्णन कर रहा है। उन पापों का वर्णन कर रहा है जो जंगल में हुए। इजराइल लोग जंगल की यात्रा में थे और 13 पद से 33 पद में वह उन्होंने कैसे अलग-अलग रीति से विद्रोह किया, बगावत की। यह उन पापों का वर्णन कर रहा है, अंगीकार कर रहा है उनका और फिर 34 पद से 46 पद में यहां पर हमको उन पापों का वर्णन दिखाया जा रहा है जो उन्होंने कनान देश में रहते हुए वाचा के देश में रहते हुए किया। तो यह पाप
8:37 का जो इतिहास है, यह केवल इजराइल का इतिहास नहीं है। लेकिन यह मेरा और आपका इतिहास भी है। अगर हम देखेंगे हम अपने हृदय को जब जांचेंगे इस परमेश्वर के वचन के दर्पण में हम पाएंगे कि हम भी बहुत बार ऐसे ही विफल होते हैं। यद्यपि हम उस यात्रा में चल रहे हैं जो जिसमें हमको बुलाया गया है। तो आइए मेरे साथ देखें सात पद में यहां पर देखिए सात पद में वो आरंभ करता है। वो अंगीकार के साथ में आरंभ करता है। छह पद में देखिए यहां पर वो स्वयं को सम्मिलित कर रहा है। यदि भी वो बंधु भाई हो सकता है वो जिस भी क्षण में है लगता है कि वो स्वयं पाप नहीं कर रहा है लेकिन वो अपने आप को सम्मिलित कर रहा है। कह रहा है प्रभु जी हमने वैसे ही पाप किया है जैसे हमारे पूर्वजों ने पाप किया था और देखिए सात पद में सात और आठ पद में यहां पर वो उस घटना को स्मरण कर रहा है जो मिस्र में हुई। तो इसराइल लोग देखिए सात पद में क्या
9:23 कहता है ये? कहता है कि हमारे पूर्वजों ने मिस्र में तेरे आश्चर्य कर्मों को स्मरण नहीं किया। उन्होंने नहीं समझा। उन्होंने करुणा के कार्यों को स्मरण नहीं किया। उन्होंने विद्रोह किया। अच्छा आप देखिए प्रभु जी ने तो किन-किन कामों की ओर ये भजनकार कह रहे हैं कि इन्होंने स्मरण नहीं किया। आपको याद है परमेश्वर ने सबसे बड़े जो काम किए मिस्र में जो 10 महामारियां भेजी। इससे पहले इतिहास में कभी नहीं हुआ कि इतने बड़े-बड़े ओले गिरे कि सारी फसल सारे लोग तहस-नहस हो गए। इससे पहले कभी नहीं हुआ कि कई दिनों तक अंधकार छाया रहा। इससे पहले कभी नहीं हुआ कि बड़े-बड़े डांसों के झुंड आए कि लोग लोग जो है हाहाकार मच गया पूरे मिस्र में। इससे पहले कभी नहीं हुआ कि इतने सारे ढेर सारे पहलें एक ही रात में मर गए। और भजन का क्या कह
10:11 रहा है? भजन क्या कह रहा है? प्रभु जी ने इजराइलियों को छुड़ा करके लेकर आया मिस्र से। यह समुद्र के तट पर खड़े हुए हैं। इन्होंने अभी तुरंत-तुरंत देखा है कि प्रभु जी ने कितने अद्भुत काम किए थे। लेकिन ये सब भूल गए। आप अगर आप चाहे तो निर्गमन उसका 14 अध्याय उसके 11 12 पद को देखेंगे तो वहां पर जो इजराइल लोग हैं वह मूसा पर और हारून पर कुड़ा रहे हैं कह रहे हैं कि क्या मिस्र में कब्रें नहीं थी जो तो हमको यहां समुद्र पर बालू में मरने के लिए आए हो। सोचिए क्या इससे पहले वह बोलते उन्होंने सोचा भी नहीं वह क्या बोल रहे हैं। लेकिन देखें नौ पद में आठ और नौ पद में भजन क्या कह रहे हैं प्रभु जी ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। अपने नाम के निमित्त उसने उनको बचाया।
10:57 उसने अपने पराक्रम के काम को प्रकट किया। उसने लाल समुद्र को डांटा और वह दो भागों में विभाजित हो गया। देखिए यह है प्रभु जी की करुणा। उनकी विश्वास योगिता के आधार पर आधारित नहीं थी। यह थी प्रभु जी के चरित्र के ऊपर आधारित और देखिए 10 पद में क्या कह रहा है उन्होंने ना केवल उनको पार कराया लेकिन शत्रुओं को नाश कर दिया। कोई शत्रु उनको छू नहीं पाया लेकिन शत्रुओं को प्रभु जी ने 11 पद में देखिए एक भी नहीं बचा। सारे शत्रु वहां पानी में डूब कर लाल समुद्र में डूब कर के मर मिटे। और आप कल्पना कर सकते हैं। 12 पद में लिखा हुआ है और उन्होंने विश्वास किया तो जब वो पानी से उस लाल समुद्र से गुजर रहे होंगे। हो सकता है वो पानी को देख रहे होंगे कि पानी दीवार के समान उनके आस दोनों तरफ खड़ा हुआ है और वो जब गुजर रहे हैं तो वो समझ तो रहे हैं कि हां यहोवा परमेश्वर
11:44 बलशाली है वो ताकतवर है उसके जैसा कोई और नहीं है और वो उस समय के लिए गीत भी गा रहे हैं देखिए 12 पद में क्या कह रहे हैं उन्होंने उसकी स्तुति के गीत गाए और अगर आप देखेंगे निर्गमन 15 अध्याय मूसा का गीत वो सब लोग खुश थे सब लोग आनंदित हो गए तुरंत जब उन्होंने देखा प्रभु जी के प्रावधान को लेकिन आपको मालूम है आगे यह जो गाना था विश्वास रास्ता ज्यादा देर तक टिका नहीं। क्यों? उनका विश्वास क्यों नहीं टिका? और शायद यह हमको सोचने की आवश्यकता है। कितनी बार ऐसा होता है कि हमारा भरोसा प्रभु जी पर होता है। केवल हम उस समय ही भरोसा करते हैं जब सब कुछ ठीक चल रहा होता है। क्या मेरा और आपका भरोसा परिस्थिति पर आधारित है या परमेश्वर के चरित्र पर
12:29 आधारित है? आगे देखिए 12 पद में अब यह लोग जंगल अब लोग मिस्र से निकल आए हैं। लाल समुद्र को इन्होंने पार कर लिया है और अब यह लोग जंगल में हैं। 13 पद से आगे देखिए यहां पर अब यहां पर जो भजनकार हैं उसके पास शब्द नहीं है। वो एक के बाद एक घटना को वर्णन करता जाता है और कहीं-कहीं पर वो लग रहा है कि मिक्स कर दे रहा है। लेकिन वो यहां पर देखिए 13 पद से आगे यहां पर वो बता रहा है कि जंगल में कैसे इजराइल लोगों ने विद्रोह किया। कैसे उन्होंने पाप किया। तो देखिए 13 से 15 पद में यह उस घटना का वर्णन करता है जब कि जब यह तुरंत लाल समुद्र को इन्होंने पार किया है और तुरंत यह जो है इन्होंने कहा कि ठीक है छुटकारा तो हो गया लेकिन खाना खाना कहां है अगर आप और अगर हम जब हम देख रहे हैं तो ये बड़ी ही दुखद बात है। 15 अध्याय में उन्होंने
13:16 अभी गीत गाया। मूसा का सबसे फेमस गीत गाया उन्होंने निर्गमन 15 अध्याय में और 16 अध्याय में आते हुए अगर आप देखिए 16 अध्याय उसका अगर आप चाहे तो पढ़ सकते हैं। निर्गमन उसका 16 अध्याय और वहां पर वो कह रहे हैं पार तो हो गए हमको लोग लेकिन अह मिस्र में खाना अच्छा था। वहां हम तरबूज खाते थे। वहां हमारे पास लहसुन था वहां पर। वहां प्याज था प्याज। अब देखिए आदमी कितना अंधा हो गया है। वह उस बड़े छुटकारे को नहीं देख रहे हैं। लेकिन वह कह रहे हैं लहसुन नहीं है हमारे पास। हमको मिस्र की वो मछलियां याद आती हैं जो हम पेट भर के खाते थे। प्रभु जी ने कहा प्रभु जी ने उनकी 14 पद में देखिए प्रभु ने उनकी लालसा को पूरा किया। उनको
14:01 खाना दिया पेट भर के। लेकिन प्रभु जी ने उनको संतुष्टि नहीं दी। देखिए कह रहा है मरुस्थल में उन्होंने परखा। परमेश्वर ने उनकी मांग को पूरा किया लेकिन उनके प्राणों को सुखा दिया। अगर भरोसा नहीं है हो सकता है हमारे पास चीजें होंगी लेकिन प्रभु जी की संतुष्टि नहीं होगी। यही कह रहा है भजनकार हमसे देखिए उसके बाद में 16 से 18 पद में यहां भजनकार फिर से एक और घटना का वर्णन कर रहा है जो गिनती 15 अध्याय मिलती है और यहां पर भी उन्होंने प्रभु जी यहां पर जो इजराइल लोग हैं वह प्रभु जी के अभिषिक्त लोगों के विरोध में खड़े हो गए हैं और वह कह रहे हैं कि हमको भी ताकत चाहिए। तो इससे पहले वाले में उन्होंने अपनी इच्छा के ऊपर वो स्वेच्छाचारी बन गए। अपनी इच्छाओं की पूर्ति करना चाहते हैं। अपने पेट को खाली पालना चाहते हैं। लेकिन यहां पर इस दूसरे खंड में यहां पर वो ताकत
14:47 चाहते हैं। यहां पर वो लोग हैं जो शायद इजराइलों के साथ में खड़े हुए हैं। वो देख रहे हैं कि मूसा हारून का तो काफी रुतबा है। तो वो खड़े हो गए। वो कह रहे हैं हमारा भी तो रुतबा होना चाहिए। वो कह रहे हैं मूसा से कि खाली परमेश्वर तुम्हारे ही द्वारा बात कर सकता है। हम भी इजराइलली हैं। परमेश्वर कल से हमारे द्वारा बात करेगा। और फिर अगर आप घटनाओं पढ़ेंगे वह बहुत ही भयावह घटना है। परमेश्वर क्रोधित हो जाता है। जमीन फटती है और दातान और अभिराम दोनों का परिवार जिंदा दफन हो जाता है जमीन में। प्रभु जी का प्रकोप प्रभु जी से बगावत हमको और आपको विनाश की ओर ले जाएगी। पाप हमको संतुष्टि नहीं प्रदान करेगा। पाप हमको नाश कर देगा। देखिए 1923 पद में एक और बात को भजन का
15:34 यहां पर उित कर रहा है। यह उस घटना के वह घटना है जो निर्गमन उसका 33 32 और 33 अध्याय में पाई जाती है। इन्होंने बछड़े बनाया और आपको घटना याद होगी। अभी मूसा पर्वत पर था। 10 आज्ञाएं लेकर के आया। और इससे पहले कि मूसा नीचे आता। उन्होंने क्या कर दिया? उन्होंने एक नए ईश्वर का उद्घाटन कर लिया। एक नए ईश्वर का खोज कर लिया। आविष्कार कर लिया। उन्होंने एक खुद के हाथ से एक उन्होंने एक प्रतिमा बनाई। उन्होंने जीवित परमेश्वर को की महिमा को एक नश्वर मनुष्य में बदल के रख दिया। उन्होंने कहा और वहां पर बड़ी ही दुखद वाली घटना है। वहां पर हारून कहता है कि हे इजराइल देख तेरा परमेश्वर जो तुम्हें मिस्र से छुड़ा करके लेकर आया है। क्या ये
16:20 बछड़ा यह मूर्ति उनको छुड़ा करके लेकर आई थी? नहीं। परमेश्वर ने छुटकारा दिया था। भूल गए वह तुरंत तुरंत ही वह अपनी आंखों में उनको दिखाई नहीं दे रहा है। वह तुरंत इतने भुलक्कड़ हैं कि उन्होंने प्रभु जी की महिमा को एक नश्वर मनुष्य में एक नश्वर जंतु में बदल डाला। परमेश्वर का प्रकोप भड़का और परमेश्वर ने कहा मूसा हट मैं इन सारे लोगों को नाश कर दूंगा। लेकिन एक पवित्र जन की वजह से प्रजा संपूर्ण प्रजा नाश नहीं हुई। बहुत सारे लोग मारे गए। प्रभु जी का प्रकोप भड़का। प्रभु जी ने उन सबको घात किया जिन्होंने उस मूर्ति पूजा में जो सक्रिय रीति से भाग भागी थे। लेकिन प्रभु जी ने सारा प्रकोप उनके ऊपर नहीं उंडेला।
17:07 प्रभु जी क्रोध करने में धीमे हैं। प्रभु जी क्रोध करने में वो धीमे हैं। यही उनका चरित्र है। वो नहीं चाहते थे कि सारे लोग नाश हो। लेकिन लोग बार-बार बगावत कर रहे हैं। देखिए अगला 24 पद से 27 पद में यहां पर भजनकार हमें एक और घटना को स्मरण दिला रहे हैं। जो कि जो कि जंगल के समय में ही अभी ये इजराइल लोग जा रहे हैं वाचा के देश में और परमेश्वर ने कहा जाओ तुम अगर अगर आप इस घटना को पढ़ना चाहते हैं गिनती 13 अध्याय में मिलेगी। गिनती अध्याय उसके 30 पद से खास करके 14 पद को यहां पर उद्रित किया गया है। जहां पर उनका बलवा दिखाया जा रहा है। तो 12 लोग, 12 इजरायल के 12 गोत्र 12 गोत्रों में से एक-एक व्यक्ति को चुना गया है और उनको भेजा गया है कि तुम जाओ वहां के जो कनान देश है वहां के जा देशों की जांच पड़ताल करो। देखो वहां पर लोग
17:52 कैसे हैं। और वहां से जब 12 लोग वापस आते हैं तो उनके अब वो यहां पर इजराइलों के सामने खड़े हुए हैं और इजराइलों के सामने बता रहे हैं कि देश तो बहुत बढ़िया है। वहां दूध और नदी की धाराएं बह रही हैं। वहां पर फल फ्रूट बहुत अच्छे हैं। वहां पर अंगूर का एक गुच्छा लेकर के आए हैं। दो लोग लाठी पर टांग करके लेकर के आए हैं। तो देश में कोई कमी नहीं है। लेकिन और वहां पर जब दो लोग हैं यहोशु और काल कैलेब वो लोग कहते हैं परमेश्वर हमको इनके इनको हमारे हाथों में दे देगा। आओ हम चढ़ाई करें और इस देश को अपने लिए ले लें क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ में है। लेकिन 10 लोग उनको दो को चुप कर देते हैं। कहते हैं चुप चुप चुप। वो कहते हैं यहां पर जो लोग हैं यह दानव के समान है। यह अनाकवंशी हैं। इनके सामने
18:37 हम लोग टिड्डी के समान है। हमारी चलेगी नहीं। हम सब हार जाएंगे। और वहां पर अगर आप उसके 14 अध्याय गिनती 14 अध्याय में पढ़ेंगे सब उस रात पूरी प्रजा हाहाकार करके रोती है। फूट-फूट कर रोने लगती है। वो कहती है ये मूसा ये परमेश्वर हमको जंगल में मार डालने के लिए ले के आ गए हैं। उन्होंने परमेश्वर के बड़े और बड़े और भयंकर कर्मों को देखा। वो तुरंत भूल गया। वो कह रहे हैं परमेश्वर हमको जंगल में मार डालने के लिए लेकर आ गया है। वो विश्वास नहीं कर रहे हैं। तुरंत उनका विश्वास जाता रहा। पल भर में उनका विश्वास क्षीण हो गया। उन्होंने परमेश्वर के प्रावधान पर विश्वास नहीं किया। वह कुड़ाए। वो प्रभु जी के ऊपर बड़बड़ाए और प्रभु जी लेकिन फिर भी वहां पर उनको कहते
19:24 हैं कि वो उनको तुरंत नाश नहीं करते हैं। लेकिन प्रभु जी उनसे कहते हैं मैं तुमको बिखेर दूंगा। देखिए 26 पद में 25 और 26 पद में वह कुड़गड़ाते हैं। उन्होंने यहोवा की बात नहीं मानी। परमेश्वर ने कहा मैं तुमको जंगल में गिरा दूंगा और मैं तुमको अन्य जाति में बिखेर दूंगा और शायद यही वो क्षण है जब भजनकार लिख रहा है और वो स्मरण कर रहा है प्रभु जी ने कहा था और प्रभु जी ने किया है लेकिन फिर भी वह भजनकार इसी यहोवा परमेश्वर के पास आ रहे हैं। 28 पद से देखिए अब यहां पर भजनकार एक और घटना का वर्णन कर रहा है। यहां पर वो व्यभिचार और मूर्ति पूजा के पाप के को उद्ध्रित कर रहा है। अगर आप इसको पढ़ना चाहते हैं तो आप यह गिनती 25 अध्याय मिलेगा और यहां पर वह घटना है जब आपको याद
20:12 होगा अगर आप 24 25 अध्याय पढ़ेंगे तो यहां पर बिलाम जो परमेश्वर के लोगों को श्राप देने के लिए आया था। बिलाम और उस गधी की कहानी बहुत सारे लोगों को हो सकता है आपको पता हो याद हो और यहां पर जो बालाक राजा है जो मुआब देश का राजा है वो आता है वो कहता है कि आओ तुम बिलाम तुम आओ और मेरी ओर से यह जो परमेश्वर के लोग हैं इनको श्राप दो और वहां पर अगर आप 25 अध्याय में देख 24 23 24 अध्याय में बिलाम परमेश्वर के लोगों को श्राप नहीं देता है क्योंकि परमेश्वर ने उसको मना किया लेकिन बिलाम ऐसा लगता है कि शायद बिलाम बलाक राजा को यह सलाह देकर गया कि अगर तुम सुंदर स्त्रियों को इजराइलियों के मध्य में भेजोगे तो एक संभावना है कि यह लोग मूर्ति पूजा में सम्मिलित हो जाएंगे। तो एक संभावना है कि लोग नाश हो जाए क्योंकि इनका यहोवा परमेश्वर पवित्र है। अगर आप
20:58 गिनती उसका 25 अध्याय एक से तीन पद में पढ़ेंगे तो यहां पर देखेंगे कि यहां पर लोग मूर्ति पूजा में लिप्त हो गए। उन्होंने बाल पोर की मूर्तियों के सामने मुर्दों को चढ़ाए गए चढ़ावों को खाया है। देखिए यहां पर 30 28 और 29 पद में उन्होंने परमेश्वर के प्रकोप को भड़काया और महामारी उनमें फूट पड़ी। पाप ने उनको अंधा कर दिया। वो गए थे यह सोच कर के कि हमारी शारीरिक इच्छा पूरी हो जाएगी। लेकिन प्रभु जी का प्रकोप भड़का। संतुष्टि की जगह उनके ऊपर परमेश्वर का प्रकोप आया। और फिर देखिए 30 23 और 31 पद में यहां पर वह वर्णन है जो पिनहास परमेश्वर का जो एक और इजराइली जो वहां पर वो जब वो देखता है कि एक इजराइली मुआबिन
21:46 स्त्री को परमेश्वर की छावनी में लेकर आ गया है और संपूर्ण इजराइल शायद ऐसा लग रहा है कि संपूर्ण इजराइल देख रहा है लेकिन किसी ने चू तक नहीं करी और वो खड़ा होता है और वो वो जो परमेश्वर की छावनी में आकर के वहां व्यभचार कर रहे हैं वो एक ही भाले से उन दोनों को मार डालता है और परमेश्वर जब उस घटना को देखता है तो परमेश्वर कहता है कि यह इसकी पीढ़ी दर पीढ़ी उसके लिए धार्मिकता गिना जाएगा। उसके अंदर परमेश्वर के लिए जलन है। वो परमेश्वर के लिए जोश है क्योंकि वो पवित्रता का खोजी है। वह विश्वास करता है इस यहोवा परमेश्वर पर। और इसलिए परमेश्वर कहता है कि सदा सर्वदा के लिए वह उसके लिए धार्मिकता गिना जाएगा। तो जब हम इन सारी घटनाओं को देख रहे हैं तो हम क्या देख रहे हैं? हम देख रहे हैं कि यहां पर पाप मनुष्य को खोखला और
22:33 परमेश्वर के सम्मुख कलंकित छोड़ता है। शायद लग तो रहा था ऐसा कि अगर यह यह पा लेंगे तो संतुष्टि मिलेगी। लेकिन उनको संतुष्टि नहीं। उनको केवल और केवल खोखलापन केवल और केवल प्रकोप केवल और केवल दंड मिला है। और अगर आप अगर यहां पर देखिए भजनकार जब पापों का अंगीकार कर रहा है तो भजनकार एक यहां पर पाप के गंभीरता को दिखा रहा है। तो शायद ऐसा लग रहा है कि अभी वो अगर आप मिस्र वाली घटना में ऐसा लगता है कि वो लोग परमेश्वर के सम्मुख कुड़कुड़ा रहे थे। एंड देन उसके बाद में जब वो लोग जंगल में आ गए हैं तो ऐसा लग रहा है कि अभी वह कुड़ा रहे हैं, विद्रोह कर रहे हैं। शायद परमेश्वर के पास वापस आ रहे हैं। लेकिन अब जो घटना है जो 34 पद से आगे अगर हम देखेंगे यहां पर यहां पर 34 पद में अब ये लोग ऐसा लगता है कि वाचा के देश में आ गए हैं। लेकिन अब जो स्थिति है सबसे
23:20 ज्यादा भीषण हो गई है। देखिए 34 पद में 34 पद में अब ये लोग वाचा में के देश में आ गए हैं। लेकिन यहां पर देखिए परमेश्वर ने कहा था कि तुम उन दुष्टों को नाश कर देना। किसी को छोड़ना नहीं। लेकिन इन्होंने 35 में देखिए क्या किया। उन्होंने वरन उन्होंने उन्हीं जातियों से हिलमिलकर उनके रीति व्यवहारों को सीख लिया। वो यहां पर बजाय इनके उनको नाश करने के उनके साथ संबंध स्थापित करने लगे। यहां पर देखिए फिर उसके बाद में अगर आप यहां देखिए यह जो लिखा हुआ है 36 और 37 36 37 38 पद यहां पर सबसे ज्यादा इतिहास के इजराइल के इतिहास के सबसे ज्यादा घोर काले समय का वर्णन किया गया है। 37 पद में उन्होंने अपने बेटे बेटियों तक
24:06 को पिशाचों के लिए बलिदान कर दिया। अगर आप दूसरा राजा उसका 17 अध्याय पढ़ेंगे वहां पर इजराइल का वर्णन किया गया है। और वहां पर वो लोग इजराइल में रहते हुए इजराइल के परमेश्वर को छोड़कर के वो देवी देवताओं में लिप्त हो गए हैं और वो अपने बच्चों तक को होम बलि करके चढ़ा रहे हैं। और वही चीज अगर आप दूसरा राजा उसके 21 और 22 अध्याय में पढ़ेंगे वहां मनुष्य राजा है। उसने अपने खुद के पुत्र को होम करके चढ़ाया। यह है काला इतिहास। यह है पाप का कड़वा फल। वो सोच रहे हैं कि यहोवा परमेश्वर में तो हमको सब कुछ नहीं मिल रहा है लगता है। लेकिन शायद इसमें हमको संतुष्टि मिल जाएगी। शायद यह मूर्ति, शायद यह ईश्वर, शायद यह देवता हमारी इच्छाओं को पूरी कर देगा।
24:51 और इसलिए परमेश्वर देखिए 39 पद में और 40 पद में परमेश्वर देख रहा है उनको वो कह रहा है, वह वैभिचारी बन गए हैं और परमेश्वर को उनसे घृणा है। पाप हमको और आपको संतुष्टि नहीं प्रदान करेगा। पाप हमको और आपको परमेश्वर से दूर लेकर के जाएगा। जो जिस चीज में उन्होंने सोचा था कि हमको शायद इस चीज में हमको संतुष्टि प्रदान होगी उसने उनको खोखला करके छोड़ा। लेकिन देखिए 33 पद में अगर सोचिए अगर मुझे और आपको इजराइल का इतिहास ना पता हो जब हम इस स्थिति पर खड़े हैं कि लोग इतना विद्रोह कर रहे हैं कि लोगों ने परमेश्वर को ही त्याग दिया तो सोचिए मैं और आप क्या सोचते हैं कि कल्पना क्या करते हैं? परमेश्वर का प्रति उत्तर कैसा होगा? हम सोचते हैं शायद अब तो गए यह काम से अब
25:38 कुछ नहीं हो सकता है। स्वयं परमेश्वर को उन्होंने ठुकरा दिया। लेकिन देखिए 43 पद में यह हमारी हमारी सोच के विपरीत है। कह रहा है वो उन्हें बार-बार छुड़ाता था। आई मीन इससे ज्यादा और इससे ज्यादा और कोई दूसरा ईश्वर और ऐसा हो नहीं सकता है। जो इतना अधिक धैर्यवान है जो इतनी अधिक दया कर सकता है। भजन क्या कह रहा है? देखो तो इतिहास को भजन क्या कह रहा है वह परमेश्वर बार-बार उनके ऊपर दया कर रहा है। वह विद्रोह पूर्ण युक्ति कर रहे हैं। वह अपने अधर्म में डूबते गए। लेकिन 44 पद में जब जब उन्होंने उसका चिल्लाना सुना उसने चिल्लाना सुना। उन्होंने उसके संकट पर दृष्टि की। वो अपनी वाचा को भूला नहीं। आपको याद है 105 भजन 105 में भजन 105 में परमेश्वर के वो सारी विश्वासियों किताब को
26:25 दिखाया गया जो परमेश्वर ने इजराइल से बांधी। परमेश्वर ने इब्राहिम से शुरू की। इजराइल के द्वारा बांधी और पूरी की। लेकिन यहां देखिए भजन 106 में इजराइल पूरी रीति से विफल हो गया लेकिन परमेश्वर विश्वास योग्य है। 45 पद में वो अपनी वाचा को उसने स्मरण रखा और उसने फिर भी अपनी अपार करुणा के अनुसार उन पर तरस खाया। यह है यहोवा परमेश्वर। भजन क्या कह रहा है? आओ इस यहोवा परमेश्वर के पास। यह तुम्हारे पापों को क्षमा करेगा। देखो ये इतिहास देखो। इससे ज्यादा और मैं और आप क्या पाप कर सकते हैं? इससे ज्यादा घोर पाप और क्या हो सकता है? वो कह रहा है अगर तुम पश्चाताप करोगे इस परमेश्वर के पास आओगे। यह परमेश्वर क्षमा करेगा। पाप मुझे और आपको खोखला करके छोड़ेगा। देखिए इसलिए भजनकार
27:12 47 पद में वो आरंभ करता है। वो गुहार लगा रहा है। कह रहा है क्योंकि प्रभु जी आप दयालु हैं इसलिए मैं आपके पास आया हूं और प्रभु जी आप छुड़ा लीजिए। भजनकार के पास जब भजनकार देख रहा है भजनकार के पास एक इतिहास है वह देख सकता है प्रभु जी की दया प्रभु जी की विश्वास और गीता लेकिन हम और आप मेरे और आपके प्रति प्रभु जी ने उत्तम दया दिखाई है देखिए जो 45 पद में वो कह रहा है उसके निमित्त अपनी वाचा को स्मरण किया और अगर हम जब नए नियम में आएंगे हम नए नियम में अगर लुका एक अध्याय देखें वहां पर यीशु मसीह के जन्म का विवरण जब मरियम को पता चलता है कि यीशु मसीह का जन्म होने वाला है। मरियम एलिश से बात करते हुए कहती है कि परमेश्वर ने हमारी और आपकी सुधि ली है।
27:57 उसने अपनी वाचा को जो उसने अपने पूर्वजों से बांधी थी जो हमारे पूर्वजों से बांधी थी उसने उसको पूरा किया है। यीशु मसीह वो स्वयं जो परमेश्वर है वो देहधारी हो करके संसार में आ गया। उसके द्वारा मुझसे उसने अपने लहू के द्वारा मुझसे और आपसे एक नई वाचा बांधी है। यीशु मसीह हमारा उत्तम महायाजक। यीशु मसीह हमारा उत्तम मध्यस्थ यह मूसा से भी ज्यादा उत्तम है क्योंकि यह हमारे और आपके लिए अभी भी विनती कर रहा है स्वर्ग में। यह पिनहास से ज्यादा उत्तम मध्यस्थ है हमारे पास जिसने किसी दूसरे का लहू नहीं बहाया। इसने खुद का लहू बहाया। इसने क्रूस पर अपनी जान दे दी। और जो विधियों का अभिलेख जो मेरे और आपके विरोध में था उसने उस क्रूस पर उसने ठोक दिया और
28:42 उसने विधियों का अभिलेख वो हटा दिया हमारे सामने से और हमको और आपको एक पवित्र प्रजा करके ठहरा दिया। और अब जब प्रभु जी हमको देखते हैं तो यदि भी हो सकता है हमारे बहुत सारे पाप हो हमारे असंख्य पाप हो तो प्रभु जी हमसे घृणा नहीं करते हैं क्योंकि हमारे पास और आपके पास यीशु मसीह की धार्मिकता है और इसीलिए अब हम जब यीशु यीशु मसीह के पास आएंगे पश्चाताप करेंगे हमारे पास आश्वासन है और इसी बात को अगर हम नए नियम में अलग-अलग खंडों में पाएंगे खासकर अगर आप पहला यूना एक अध्याय नौ पद जो कि आशा है मेरी आप सब लोग जानते हैं पहला यूना एक अध्याय आठ और नौ पद क्या कहता है यदि हम अपने पाप पापों को मान लें। उस यीशु मसीह के कारण मेरे और आपके पास यह आश्वासन है कि यदि हम हम अपने पापों को मान लेंगे तो वो हमारे पापों को
29:28 क्षमा करने में विश्वास योग्य और धर्मी है। तो आइए इस प्रभु जी के पास आइए इसकी दया को तो देखिए। इसमें आपको और मुझे सच्चा आनंद प्रदान होगा। इसमें मुझे और आपको सच्ची संतुष्टि सच्चा संतोष इसमें प्राप्त होगा। पाप हो सकता है वायदे तो बहुत करेगा लेकिन पाप हमको खोखला करके छोड़ेगा। वो दीमक के समान हमको खा जाएगा और अंत में हम खोखले बचेंगे। वो हमको कैंसर के समान सड़ा देगा और अंत में हमको मृत्यु ही मिलेगी। लेकिन भजनकार यहां पर यहीं पर नहीं रुका है। वो कह रहा है प्रभु जी हमें छुड़ाइए। 47 पद में कहता है प्रभु जी हमें छुड़ाइए और यही नई वाचा के लोग होने के नाते हमारी और आपकी प्रार्थना है कि प्रभु जी हम जिस पाप से लड़ रहे हैं जो एक आत्म युद्ध में
30:15 है प्रभु जी हमें इस पाप पर विजय दिलाइए और हम खाली अभी यहीं के लिए नहीं देख रहे हैं हम यहीं के लिए प्रार्थना नहीं कर रहे हैं। हम देख रहे हैं उस आने वाले संसार की ओर उस आने वाले जगत की ओर नई सृष्टि की ओर जहां पर पाप नहीं होगा। जहां मैं और आप परमेश्वर के साथ उसकी आराधना कर रहे होंगे जहां मैं और आप उसकी स्तुति कर रहे होंगे बिना किसी बाधा के बिना किसी पाप के प्रभाव के और हम उसकी ओर देख रहे हैं क्योंकि यीशु मसीह के द्वारा हमारे पास यह उत्तम आशा है वो लोग बंधवाई में वो लोग वाचा के देश में गए पाप में लिप्त हो गए बंधवाई में चले गए लेकिन मेरे पास आपके पास उस उत्तम सृष्टि में नई सृष्टि में जाने का अवसर है जहां पाप नहीं होगा जहां
31:00 पाप की प्रभुता नहीं होगी और यह हमको और आपको आनंद प्रदान करता है। इसमें हमको इसलिए हम प्रभु जी के पास आए और कहे प्रभु जी हमें आप बल प्रदान कीजिए कि हम आपको प्रसन्न करने वाला जीवन जी सकें। तो व्यवहारिक रीति से दो-तीन बातें जो हम अपने जीवन के लिए देख सकते हैं जब हम तो अभी हम देख रहे हैं उस आने वाले जगत की ओर, नई सृष्टि की ओर, लेकिन जब हम अभी जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो हमारा जीवन कैसा होना चाहिए? शायद कुछ व्यवहारिक प्रश्न जो हम अपने आप से पूछ सकते हैं शायद एक दूसरे से हम बातचीत कर सकते हैं जिनके बारे में वह यह हैं। क्या मैं और आप कहीं पाप में जीवन व्यतीत्व नहीं कर रहे हैं शायद हम सोच रहे हैं कि मैं पाप को कंट्रोल में कर लूंगा या मैं सोच रहा हूं कि शायद हम और आप सोच रहे हैं कि यह पाप यह मुझे आनंद प्रदान करेगा। इतिहास को
31:46 देखिए यह संपूर्ण भजन देखिए। पाप मुझे और आपको आनंद प्रदान नहीं करेगा। केवल यीशु मसीह ही हमें और आपको आनंद प्रदान कर सकते हैं। दूसरा प्रश्न क्या मैं और आप पाप अंगीकार को गंभीरता से लेते हैं। प्रभु की दया से हम लोग हर रविवार जब जब हम लोग मिलते हैं हम लोग पाप अंगीकार की प्रार्थना करते हैं। और जब पाप अंगार की प्रार्थना होती हैं जैसे ही आंखें बंद होती हैं। आप कहां आप क्या सोच रहे होते हैं उस समय? क्या हम अपनी दुनिया में खो जाते हैं? क्या हम वास्तव में प्रभु जी के सामने अपने हृदय को उंडेल देते हैं। अपने हृदय में पापों के ऊपर मनन करते हैं। कहते हैं प्रभु जी हमें क्षमा कीजिए। तीसरा प्रश्न क्या मैं और आप परमेश्वर के उपकारों को स्मरण रखते हैं? संपूर्ण इजराइल इस बात में इस बात के द्वारा विफल
32:31 हो गया। इस बात के कारण विफल हो गया। उनको मालूम तो था कि क्या हुआ है? क्या किया है प्रभु जी ने? लेकिन वह बार-बार भूल गए। क्या मैं और आप परमेश्वर के उपकारों को स्मरण करते हैं या हम कुड़कुड़ाते रहते हैं। चौथा प्रश्न क्या मैं और आप परमेश्वर के चुनू की आत्मिक वृद्धि के लिए कार्य कर रहे हैं? भजन क्या कहता है प्रभु जी हमें छुड़ा लीजिए ताकि मैं परमेश्वर आपके चुने हुए की समृद्धि को देख सकूं। मेरी आपकी लालसा क्या है? शायद एक तरीका हो सकता है कि हम प्रभु जी के लोगों की सुधि ले सकते हैं। चुने हुए की समृद्धि को देख सकते हैं। वो है कि हम कलीसियाई वाचा को पढ़ें। जो हमारे हमारी कलीसिया की वाचा है। अच्छा हुआ कि मैं और आप पारिवारिक
33:16 रीती से शायद आप किसी घर में विजिट कर रहे हैं वहां जाएं और अपने आपको स्मरण दिलाएं कि मैंने क्या वाचा बांधी थी एक दूसरे विश्वासी से ताकि मैं और आप एक दूसरे को स्मरण दिलाएं प्रभु जी के कार्यों के बारे में और जो हमने प्रतिज्ञा की थी उसके बारे में स्मरण कीजिए जब जब हम प्रभु भोजन में मिलते हैं यह है नई वाचा का चिन्ह प्रभु भोज का समय उसको स्मरण कीजिए प्रभु जी के उस बड़े काम को उस उद्धार के काम को जो केवल और केवल प्रभु जी कर सकते थे। इससे मतलब नहीं है कि हमारे जीवन में अभी क्या चल रहा है। खाना भोजन हमारे पास कितना सुख सुविधाएं हैं। वह सब कुछ है प्रभु का धन्यवाद हो नहीं है फिर भी प्रभु का धन्यवाद हो। लेकिन जो सबसे बड़ा काम प्रभु जी ने कर दिया वो है हमारे क्रूस पर क्रूस पर हमारे लिए उद्धार का काम और प्रभु भोज
34:02 उसी का स्मरण दिलाना है। तो आइए हम एक दूसरे को स्मरण दिलाएं। एक दूसरे से कहें आओ इस परमेश्वर यहोवा के पास इसमें सच्चा आनंद होगा। पाप और विद्रोह दंड लेकर के आएंगे। केवल परमेश्वर में ही सच्चा आनंद और संतोष है। इसलिए परमेश्वर के निकट आइए क्योंकि घोर पाप के मध्य घोर पाप के मध्य परमेश्वर की असीम दया हमारे लिए उपलब्ध है। घोर पाप के मध्य परमेश्वर की असीम दया मेरे और आपके लिए उपलब्ध है। आइए हम इस परमेश्वर के पास आए। उसकी आराधना स्तुति करें। आइए प्रार्थना करें।