Rural Marketing Environment | Rural marketing environment in hindi | bcom

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो ग्रामीण विपणन वातावरण के बारे में है, जिसमें राजनीतिक, सामाजिक, तकनीकी, आर्थिक, भौतिक और नैतिक परिवर्तन शामिल हैं। यह वीडियो बताता है कि ये परिवर्तन ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसायों को कैसे प्रभावित करते हैं।

  • ग्रामीण विपणन वातावरण बाहरी वातावरण में मौजूद है।
  • सरकार का हस्तक्षेप, सामाजिक-सांस्कृतिक कारक, तकनीकी प्रगति, आर्थिक स्थितियां, भौतिक बुनियादी ढांचा और नैतिक प्रथाएं ग्रामीण विपणन को प्रभावित करती हैं।
  • व्यवसायों को दीर्घकालिक सफलता के लिए नैतिक मूल्यों का पालन करना चाहिए।

ग्रामीण विपणन वातावरण

ग्रामीण विपणन वातावरण में वे सभी बाहरी कारक शामिल हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में विपणन गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। इसमें राजनीतिक, सामाजिक, तकनीकी, आर्थिक, भौतिक और नैतिक परिवर्तन शामिल हैं।

1. राजनीतिक वातावरण

राजनीतिक वातावरण में सरकार का हस्तक्षेप, पंचायती राज प्रणाली और ग्रामीण उद्योगों की स्थिति शामिल है। अतीत में, उच्च जाति के लोगों का पंचायतों और गांवों पर नियंत्रण था। पंचायती राज प्रणाली शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि विकास जैसे क्षेत्रों में सरकारी विभागों के कामकाज को प्रभावित करती है।

2. सामाजिक वातावरण

सामाजिक वातावरण में ग्रामीण उपभोक्ताओं की जीवनशैली, प्राथमिकताएं और आदतें शामिल हैं। इसमें सामाजिक विज्ञान, मानव विज्ञान और मनोविज्ञान जैसे कारक शामिल हैं। ग्रामीण सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में धार्मिकता, सामाजिक रीति-रिवाज, जाति व्यवस्था, लिंग भेद, साक्षरता स्तर और सांस्कृतिक विविधता शामिल हैं।

3. तकनीकी वातावरण

तकनीकी वातावरण में विपणक द्वारा उपयोग किए जाने वाले नवीनतम विपणन उपकरण और रणनीतियाँ शामिल हैं। इसमें संचार और परिवहन के तरीकों में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में कम समय में वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन शामिल है। हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका तकनीकी परिवर्तनों के उदाहरण हैं। हरित क्रांति का उद्देश्य खाद्य आत्मनिर्भरता में सुधार करना था। श्वेत क्रांति का उद्देश्य दूध उत्पादन को बढ़ाना था। गैर-सरकारी संगठनों ने ग्रामीण क्षेत्रों को उन्नत सेवाएं प्रदान की हैं।

4. आर्थिक वातावरण

आर्थिक वातावरण में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता कल्याण और उचित मूल्य शामिल हैं। आत्मनिर्भर आर्थिक प्रणाली में, अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से किसानों पर निर्भर थी जिनकी अपनी जमीन थी। विशेषज्ञ जाति के लोग किसानों को सेवाएं प्रदान करते थे। शहरीकरण और प्रवासन अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। आय के स्रोत और पैटर्न आर्थिक परिवर्तनों को दर्शाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आय का प्राथमिक स्रोत कृषि है। किसानों की कोई नियमित आय नहीं होती है और वे मौसम पर निर्भर होते हैं।

5. भौतिक वातावरण

भौतिक वातावरण में ग्रामीण बाजारों में वस्तुओं और सेवाओं का भौतिक वितरण शामिल है। इसमें बुनियादी ढांचा विकास, भंडारण सुविधाएं, मशीनरी, उपकरण और भवन शामिल हैं। अच्छी सुविधाएं उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं और अधिक उपभोक्ताओं तक उत्पादों को उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।

6. नैतिक वातावरण

नैतिक वातावरण में व्यवसाय के नैतिकता शामिल हैं। यदि कोई व्यवसाय दीर्घकालिक सफलता चाहता है, तो उसे नैतिक मूल्यों का पालन करना चाहिए। उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। व्यवसायों को नैतिक मूल्यों का पालन करना चाहिए, अच्छे मानकीकृत उत्पाद देने चाहिए, गलत कीमतें नहीं लेनी चाहिए और गलत उत्पाद नहीं देने चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग निरक्षरता के कारण नैतिक मुद्दों से अधिक प्रभावित होते हैं।

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Transcript

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0:00 [संगीत] हेलो एवरीवन मैनेजमेंट मंत्रा के इस वीडियो में आप पढ़ेंगे रूरल मार्केटिंग एनवायरमेंट तो नेक्स्ट आप देखते हैं कौन-कौन से मार्केटिंग एनवायरमेंट होते हैं रूरल एरिया के लिए जिसमें फर्स्ट आता है पॉलिटिकल चेंजेज सेकंड है सोशल चेंजेज टेक्नोलॉजिकल चेंजेज इकोनॉमिक चेंजेज फिजिकल चेंजेज और एथिकल चेंजेज इनको डिटेल में देखने से पहले आप डिस्क्रिप्शन में रूरल मार्केटिंग से रिलेटेड डिफरेंट टॉपिक्स पर वीडियो देख सकते हैं और वीडियो अच्छा लगे तो प्लीज लाइक कीजिए चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और कमेंट कीजिए और किसी टॉपिक पे वीडियो चाहिए तो आप कमेंट कर सकते हैं तो बेसिकली हम इसका मीनिंग समझते हो फिर ये सारे फैक्टर्स या चेंजेज को डिटेल में फर्स्ट आता है रूरल मार्केटिंग

0:46 एनवायरमेंट जो सारी मार्केटिंग एजिस्ट करती है वो एक्सटर्नल एनवायरमेंट में होती है कोई भी बिजनेस या ऑर्गेनाइजेशन कैसे फंक्शनिंग करेगा कौन से वो फॉलोइंग फैक्टर्स को देखता है जो कि एनवायरमेंटल से रिलेटेड होते हैं ट्रेड प्रैक्टिसेस को देखते हैं जो जो कि रूरल मार्केटिंग को अफेक्ट करती है तो एनवायरमेंट आपको बताता है आपके सराउंडिंग्स को एक्सटर्नल ऑब्जेक्ट्स को जो कि आपको इन्फ्लुएंस करते हैं कि आप कैसे एजिस्ट करते हैं जो भी एनवायरमेंट है ऑर्गेनाइजेशन के अंदर ये सारे एग्रीगेट होते हैं सारी कंडीशन का इवेंट का जो कि आपको इन्फ्लुएंस करती है तो जब भी आप मार्केटिंग कर रहे हैं मतलब आप लोगों को प्रोडक्ट या सर्विसेस सेल कर रहे हो रूरल एरिया के लिए तो वो रूरल मार्केटिंग होता है तो वहां का एनवायरमेंट कैसे अफेक्ट करता है कौन-कौन से फैक्टर्स आपको अफेक्ट करते हैं वो हम इस वीडियो में देखने वाले हैं तो हमने ये देखा था रूरल मार्केटिंग एनवायरमेंट के फैक्टर्स जिसमें

1:33 सिक्स है पॉलिटिकल सोशल टेक्नोलॉजी इकोनॉमिक फिजिकल और एथिकल इनको डिटेल में देखते हैं फर्स्ट आता है पॉलिटिकल चेंजेज जो भी गवर्नमेंट है वो कितना इंटरवेंशन डालती है मतलब कितना ज्यादा इवॉल्व होती है ट्रेड या कॉमर्स की प्रैक्टिसेस में जो भी स्मॉल स्केल रूरल इंडस्ट्रीज है हम उनको देखेंगे बिजनेस यूनिट को देखेंगे कि वो कैसे उनकी कंडीशन अच्छी होते जा रही है और उन कौन सा फैक्टर्स है जो कि उनको को इन्फ्लुएंस करते हैं तो आपने देखा कि हिस्ट्री में अगर हम रूरल एरिया की बात करें तो आप इसमें देखते हैं कि हिस्ट्री है कि अपर कास के लोगों का कंट्रोल होता है पंचायत या विलेज प्रधान जो होते हैं ग्राम प्रधान जो होते हैं वो सबको कंट्रोल में रखते हैं और उनकी पावर चलती है नेक्स्ट आता है पंचायती राज का क्या

2:19 सिस्टम है कि कैसे आप गवर्नमेंट के डिपार्टमेंट्स को देखते हैं कैसे वो लोग काम कर रहे हैं एजुकेशन हेल्थ एग्रीकल्चर डेवलपमेंट के लिए और ये सारे के डेवलपमेंट को बताते हैं तो यह पॉलिटिकल चेंज को बताता है सेकंड आता है सोशल चेंज सोशल एनवायरमेंट में हम तीन फैक्टर्स देखते हैं सोशलॉजी फैक्टर जो कि रूरल कंज्यूमर की लाइफस्टाइल कैसी है उनके प्रेफरेंसेस कैसे हैं और उनकी हैबिट्स कैसी है मतलब उनकी क्या आदत है वो कैसे जीवनशैली है उनकी और वो किन चीजों को प्रायोरिटी या किन चीजों को पहले रखते हैं सेकंड आता है एंथ्रोपोलॉजी फैक्टर्स जो कि डिटरमाइंड करते हैं कि वहां का कल्चर कैसा है कंज्यूमर का रहने के तरीके कैसे हैं नेक्स्ट आता है साइकोलॉजिकल फैक्टर्स जिसमें हम देखते हैं कि लोगों की पर्सनल

3:04 इंडिविजुअली साइकोलॉजी कैसी है लोगों की कंज्यूमर की उनका एटीट्यूड उनका परसेप्शन उनका बिहेवियर उनकी पर्सनालिटी और उनका मेंटल सराउंडिंग्स तो ये सारी साइकोलॉजी फैक्टर्स को बताते हैं नेक्स्ट हम देखते हैं रूरल सोशो कल्चर सिनेरियो को जिसमें हम देखते हैं ज्यादा से ज्यादा लोग रिलीजियस होते हैं सोशल कस्टम को फॉलो करते हैं मतलब सोसाइटी के जो रीति रिवाज चले आ रहे हैं उनको फॉलो करते हैं कास्ट का सिस्टम हो होता है जेंडर डिस्क्रिमिनेशन चलता है लिटरेसी को हम देखते हैं कि लोग कितने एजुकेटेड हैं कितना उनका लेवल है नेक्स्ट कल्चरल डाइवर्सिटी को देखते हैं कि कितने डिफरेंट कल्चर के लोग उस पर्टिकुलर एरिया में रहते हैं वो कैसे ग्रुप इन्फ्लुएंस करते हैं बिहेवियर को तो ये सारे सोशल चेंजेज को बताते हैं नेक्स्ट आता है टेक्नोलॉजिकल चेंजेज टेक्नोलॉजी में क्या एडवांसमेंट हो

3:52 रहा है मार्केटर कैसे लेटेस्ट मार्केटिंग के टूल्स या स्ट्रेटेजी को यूज़ करते हैं कौन से मोड को देखते हैं कम्युनिकेशन या ट्रांसपोर्टेशन को कैसे इंप्रूव करते हैं गुड्स या सर्विसेस के प्रोडक्शन को रूरल एरिया में किसी शॉर्ट पीरियड के अंदर तो हम टेक्नोलॉजिकल चेंजेज मेनली तीन जो रिवोल्यूशन हुए थे उसके अकॉर्डिंग देखते हैं ग्रीन वाइट और इंट्रोडक्शन ऑफ नॉन गवर्नमेंट एजेंसीज एंड डेवलपमेंट सेक्टर इनको हम देखते हैं फर्स्ट आता है ग्रीन रिवोल्यूशन जो कि 1967 से 78 के बीच में आया था इसमें था कि आप इंप्रूव करें फूड के सेल्फ सफिशिएंट को लोगों खाद्य पदार्थ के लिए आत्मनिर्भर बनाना उसमें सुधार करना तो आप प्रोडक्शन को इंक्रीज करते हैं मशीनस का यूज करके कि ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रोथ हो सके मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स की और आपने प्रोडक्टिविटी को

4:38 इंक्रीज किया एंप्लॉयमेंट को क्रिएट किया लोगों के स्टैंडर्ड को चेंज किया इसके थ्रू मतलब आप इसमें ग्रीन पे बात की जाए तो आपने इसमें एग्रीकल्चर पे मेनली फोकस किया नेक्स्ट आता है वाइट रिवोल्यूशन इसका एम था कि सेल्फ सफिशिएंट मिल्क प्रोडक्ट को गवर्नमेंट से लिंक किया गया गवर्नमेंट ने डेवलप किया कि रूरल प्रोड्यूसर्स को अर्बन कंज्यूमर्स तक प हो जाए ज्यादा से ज्यादा वो मिल्क का प्रोडक्शन करना उसकी फॉर्मिंग करना तो इसके लिए मिल्क के प्रोडक्शन को बहुत इंक्रीज किया गया फाइव फोल्ड्स में 1950 से 2001 तक इसमें मेनली जो एरियाज अफेक्ट करते थे वो थे गुजरात पंजाब हरियाणा और यूपी य वाइट रिवोल्यूशन मतलब आप मिल्क के लिए ज्यादा से ज्यादा आपने प्रोडक्शन किया नेक्स्ट आता है एनजीओ मूवमेंट इन्होंने बहुत सारी सर्विसेस जो

5:23 कि अपग्रेडेड या अपडेटेड सर्विसेस रूरल सेक्टर्स को प्रोवाइड की जो कि हेल्प करती है कि कैसे आप अच्छी टेक्नोलॉजिकल असिस्टेंट प्रोवाइड कर सकते हैं कैसे अच्छे हेल्थ या चाइल्ड केयर सर्विसेस दे सकते हैं एजुकेशन या ट्रेनिंग अपॉर्चुनिटी प्रोवाइड कर सकते हैं और कैसे आप इन सारे सेक्टर्स का डेवलपमेंट करते हैं नेक्स्ट आता है इकोनॉमिक चेंजेज जो भी मार्केटर है उसको देखना है कि इकोनॉमी से रिलेटेड मतलब कौन सा फैक्टर्स है हेल्दी कंपटीशन होना चाहिए कंज्यूमर का वेलफेयर होना चाहिए आप सही प्राइसेस में रूरल मार्केट को चीजें प्रोवाइड करवाएं तो सेल्फ सफिशिएंट इकोन इमी सिस्टम में आपने देखा कि जो भी किसान हैं जिनकी खुद की जमीन है मेनली उन परे इकोनॉमी डिपेंड थी जो भी स्पेशलिस्ट कास्ट के लोग थे वो वो क्या सर्विसेस फार्मर्स

6:09 या किसानों को प्रोवाइड करते थे वो मेनली इंपॉर्टेंट था नेक्स्ट आता है कि क्या सिस्टम थे जिससे कि अर्बनाइजेशन होते जा रहा था लोग ज्यादा से ज्यादा रूरल एरिया को छोड़ के माइग्रेशन होके शहर में जाते जा रहे थे नेक्स्ट आता है कि क्या-क्या सोर्सेस और क्या पैटर्न है इनकम का जिससे कि हमारी इकोनॉमी में चेंजेज को पता चलता है कि इकोनॉमी कितनी ग्रोथ हो रही है उसका कितना डेवलपमेंट हो रहा है तो रूरल एरिया में प्राइमरी सोर्सेस होता है एग्रीकल्चर कि वो खेती से या कृषि से ही ज्यादा से ज्यादा इनकम कमाते हैं उनकी कोई रेगुलर इनकम नहीं होती वो पूरा मौसम पे या सीजन टी पे बेस्ड होते हैं नेक्स्ट आता है कि सिर्फ उनको कैश तब मिलता है जब उनकी फसल आती है मार्केटर को देखना है कि उनको कब इनकम होगी और कब उनको देनी है नेक्स्ट आता है कि क्या क्रॉप का पैटर्न है मतलब वो

6:56 कैसे खैती करते हैं कैसे कैश का सरप्लस होता है मतलब उन से टाइम पर उनको कैश मिलता है जब कि फसलें काटी जाएगी बेची जाएगी उस टाइम पे उनके पास कैश होता है नेक्स्ट आता है कैश फ्लो का क्या सिस्टम है उनके पास कोई स्टेबल सिस्टम नहीं होता कि उनके पास हमेशा इनकम आती रहे हमेशा कैश है वो सिर्फ छ महीने या चार महीने अगर वो तीन खेती करते हैं तो उनके पास चार महीने में इनकम होती है दो करते हैं तो छ महीने में इनकम होती है तो वो उसी पे पूरा डिपेंड होता है उनका कैश फ्लो ईयरली में टू या थ्री टाइम्स ही होता है और रेमिटेंस फ्रॉम आउटसाइड कि उनके पास क्या बाहर इनकम आ र है तो ये कुछ सोर्सेस है जिनसे उनके इकोनॉमिक फैक्टर्स या इकोनॉमिक चेंजेज को हम जान सकते हैं नेक्स्ट आता है फिजिकल चेंजेज या अनादर एसेंशियल फैक्टर से कि आप जब भी फिजिकली डिस्ट्रीब्यूशन कर रहे हैं गुड्स एंड सर्विसेस का रूरल मार्केट में

7:43 तो आप कैसे डेवलपमेंट को देखते हैं वहां पे कितना डेवलपमेंट हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी को लेके कि वहां पे स्टोरेज की प्रॉपर फैसिलिटी हो आपको जो मशीनस इक्विपमेंट्स चाहिए बिल्डिंग्स चाहिए वो प्रॉपर तरीके से वहां पे अवेलेबल होना चाहिए तो ये कंज्यूमर के लिए ब बहुत इंपोर्टेंट होता है कि वो अगर कहीं पे अच्छी फैसिलिटी होगी तो वो ज्यादा कंज्यूमर्स तक अच्छे प्रोडक्ट अवेलेबल करवा सकते हैं नेक्स्ट आता है एथिकल चेंजेज जो भी बिजनेस के एथिक्स है अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस लॉन्ग टर्म तक सक्सेसफुल रहे तो आपको जो भी मोरल वैल्यूज होती हैं क्या राइट है क्या रॉन्ग है तो आपको ध्यान रखना है कि कंज्यूमर बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है आपके प्रोडक्ट को लेके तो बनस को एथिकल वैल्यूज को फॉलो करना होगा उनको जनरेट करना होगा उनको अच्छे स्टैंड आइज प्रोडक्ट देने

8:29 होंगे गलत प्राइस चार्ज ना करें गलत प्रोडक्ट ना दें उनको ये सारी चीजों का ध्यान रखना है वरना यह बाद में प्रॉब्लम्स को क्रिएट करती है कि आप सही स्टैंडर्ड के अकॉर्डिंग या क्वालिटी के अकॉर्डिंग प्रोडक्ट नहीं दे रहे हैं मिलावट वाला दे रहे हैं उनका शोषण कर रहे हैं तो ये कुछ एथिकल इश्यूज होते हैं किसी भी बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन के तो रूरल एरिया में मेनली लोग ज्यादा अफेक्ट होते हैं इससे क्योंकि वो इलिटरेट होते हैं उनको नॉलेज नहीं होता है तो आपको ध्यान रखना है कि अगर आप लॉन्ग टर्म सक्सेस चाहते हैं तो आप बिजनेस एथिक्स को फॉलो करें तो इस वीडियो में आपने देखा रूरल मार्केटिंग एनवायरमेंट जिसमें हमने देखा पॉलिटिकल चेंज सोशल चेंज टेक्नोलॉजिकल चेंज इकोनॉमिक फिजिकल और एथिकल वीडियो अच्छा लगे तो प्लीज लाइक कीजिए चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और कमेंट कीजिए और किसी टॉपिक पे वीडियो चाहिए तो आप कमेंट कर सकते हैं थैंक यू

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