0:07 [संगीत] नमस्कार आप देख रहे हैं संसद टीवी। आपके साथ मैं हूं प्रांजलि सिंह। स्पेस विज़ 2047 भारत का ब्रह्मांड विजय। कभी हम दूसरों के रॉकेट पर निर्भर थे। लेकिन आज
0:54 दुनिया हमारे लॉन्चपड्स की कतार में खड़ी है। साल 2024-25 यह वह साल है जब भारत ने सिर्फ उपग्रह नहीं छोड़े बल्कि अंतरिक्ष में अपना भविष्य भी लिखा है। डॉकिंग के मास्टर क्लास से लेकर अंतरिक्ष में उगी पहली पत्तियों तक। आज हम आपको दिखाएंगे कि कैसे भारत 2047 तक स्पेस सुपर पावर बनने की राह पर रॉकेट की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। भारत एक ऐसा देश जिसने कभी अंतरिक्ष की दुनिया में पहले कदम रखने के लिए दूसरों की ओर देखा था। लेकिन आज वही भारत अंतरिक्ष तकनीक का नेतृत्व कर रहा है। नई ऊंचाइयों को छू रहा है और दुनिया को अपनी
1:41 क्षमता का एहसास करा रहा है। इंडिया हैज़ डन इट इंडिया इंडिया [संगीत] इंडिया इंडियन साल 2024 और 2025 भारतीय अंतरिक्ष इतिहास के ऐसे अध्याय बने जहां आत्मनिर्भरता केवल एक नारा नहीं बल्कि हर मिशन हर प्रयोग और हर सफलता में साकार होती दिखाई दी। यह कहानी है डॉकिंग से लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग तक, मानव अंतरिक्ष उड़ान से लेकर बीजों के अंतरिक्ष में अंकुरण तक। कहानी उस भारत की जो स्पेस विज़ 2047 की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
2:29 अक्सर कहा जाता है कि नामुमकिन कुछ भी नहीं और इस उपलब्धि ने इसे साबित भी कर दिया है। सोचिए जमीन से हजारों किलोमीटर ऊपर अद्भुत रफ्तार के [संगीत] बीच जब दो मशीनें एक दूसरे के साथ जुड़ती हैं तो यह सिर्फ इंजीनियरिंग नहीं बल्कि एक चमत्कार [संगीत] के जैसा लगता है। यह सफलता हमारे आने वाले कल की नींव है। इसी के दम पर हम वहां अपना स्थाई ठिकाना बनाने के दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। जहां कभी पहुंचना भी एक सपना था। क्या है पूरा सिस्टम? आइए जानते हैं। [संगीत] 30 दिसंबर 2024 श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड से पीएसएलवी C6 ने उड़ान भरी। इस उड़ान के
3:17 साथ अंतरिक्ष में पहुंचा एक ऐसा प्रयोग जिसने भारत को उन चुनिंदा देशों की पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया जो स्पेस [संगीत] डॉकिंग तकनीक में सक्षम है। स्मार्ट डेक्स मिशन दो उपग्रह जो पहले अलग-अलग अंतरिक्ष में तैरते रहे। फिर धीरे-धीरे एक दूसरे के करीब आए और 16 जनवरी 2025 को [संगीत] अंतरिक्ष में पहली बार भारत ने डॉकिंग की सफलता दर्ज की। यह केवल दो उपग्रहों का जुड़ना नहीं था। यह भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन, लंबे मानव मिशन और गहरे अंतरिक्ष अभियानों की नींव थी। [संगीत] अप्रैल 2025 में दोनों उपग्रहों ने फिर से
4:05 डॉकिंग की। इस बार वह सिर्फ जुड़े नहीं उन्होंने एक दूसरे के साथ ऊर्जा भी साझा की। पावर ट्रांसफर अंतरिक्ष में नियंत्रण का एक नया अध्याय। जब उपग्रह अंतरिक्ष में जुड़ रहे थे। उसी समय भारत अंतरिक्ष में जीवन के रहस्यों को भी टटोल रहा था। जब दो स्पेसक्राफ्ट धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर लगभग [संगीत] 28,000 किमी/ घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के चारों ओर घूम रहे होते हैं और फिर भी वो धीरे-धीरे पास आकर बिना टकराए बिल्कुल सही एंगल और स्पीड पर आपस में जुड़ जाते हैं तो इस प्रक्रिया को डॉकिंग कहते हैं। [संगीत]
4:56 डॉकिंग क्यों जरूरी होती है? डॉकिंग अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद अहम है। क्योंकि इसके जरिए अंतरिक्ष स्टेशन बनाए जाते हैं। अंतरिक्ष यात्रियों का आना जाना संभव होता है। ईंधन या बिजली का आदानप्रदान किया जाता है। लंबे समय के मानव मिशन पूरे किए जाते हैं। भविष्य में चंद्रमा और मंगल मिशन संभव बनते हैं। भारत के लिए डॉकिंग क्यों है खास? [संगीत] स्मार्ट डेक्स मिशन के जरिए भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास स्वदेशी डॉकिंग तकनीक है। यह तकनीक आगे चलकर भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, गगनयान के बाद मानव मिशन, डीप स्पेस मिशन के लिए
5:44 बेहद जरूरी होगी। स्पेस में भारत की शक्ति सीमित ना रहे और इसका लाभ भी केवल भारत के लोगों तक ही सीमित ना हो। यह हमारा मिशन भी है। हमारा विज़ भी है। स्पेस टेक्नोलॉजी भारत की उदार सोच वाली स्पेस डिप्लोमेसी की नई परिभाषा को गढ़ रही है। नई संभावनाओं को जन्म दे रही है। इसका लाभ कई अफ्रीकन देशों को कई अन्य छोटे देशों को हो रहा है। ऐसे
6:30 60 से ज्यादा विकासशील देश हैं जिनके साथ भारत अपनी स्पेस साइंस को साझा कर रहा है। साउथ एशिया सेटेलाइट इसका एक प्रभावी उदाहरण है [संगीत] अंतरिक्ष जीवन में क्रॉप्स मिशन। [संगीत] क्या अंतरिक्ष में पौधे उग सकते हैं? इसरो ने इस सवाल का जवाब क्रॉप्स वन मिशन से दिया। पीओईएम4 यानी पोएम फोर प्लेटफार्म पर कुछ बीज अंतरिक्ष में भेजे गए। धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर माइक्रो ग्रेविटी में वैज्ञानिक देखना चाहते थे कि क्या जीवन
7:17 वहां भी पनप सकता है। पानी डाला गया। घंटों बाद कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ा और फिर अंकुर फूट [संगीत] पड़े। पांचवें दिन दो पत्तियां उगाई। अंतरिक्ष में जीवन की यह पहली मुस्कान भारत को चंद्रमा और मंगल की और और आत्मविश्वास से देखने की ताकत दे रही है। क्रॉप्स मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष से सेटेलाइट के जरिए फसलों की निगरानी उनकी सेहत का आकलन बुवाई से कटाई तक की स्थिति और सूखा बाढ़ या कीट जैसे जोखिमों की समय रहते पहचान करना
8:03 यह मिशन किसानों नीति निर्माताओं और सरकार को सटीक डाटा के आधार पर फैसले लेने में मदद करता है। क्रॉप्स मिशन क्यों है अहम? क्रॉप्स मिशन अंतरिक्ष से खेती पर नजर। फसल उत्पादन का सही अनुमान। किसानों को समय पर चेतावनी। खाद्य सुरक्षा को मजबूती। कृषि क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल। आदित्य एल1 सूर्य के रहस्यों से पर्दा। इसी आत्मविश्वास के साथ भारत सूर्य की ओर भी देख रहा था। आदित्य एल1 भारत का पहला
8:49 सौर मिशन जनवरी 2025 में इसके वैज्ञानिक डाटा को देश और दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए जारी किया गया। सूर्य की सतह, उसका वातावरण और अंतरिक्ष में बहने वाले कणों की गतिविधियां। यह डाटा ना केवल सौर तूफानों की समझ बढ़ाता है बल्कि पृथ्वी की सुरक्षा के लिए भी अहम है। भारत अब केवल अंतरिक्ष देख नहीं रहा। अंतरिक्ष को समझ रहा है। आदित्य एल1 मिशन के जरिए भारत ने सूर्य की ओर अपनी वैज्ञानिक दृष्टि बढ़ाई है। यह यान पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर एल1 बिंदु पर स्थित रहकर लगातार सूर्य का अध्ययन करता
9:35 है। इस खास स्थान से आदित्य एल1 बिना किसी रुकावट के सूर्य की सतह, कोरोना, सौर्य तूफानों और सौर हवाओं पर नजर रखता है। इस मिशन का उद्देश्य है सूर्य की गतिविधियों को समझना जो सीधे तौर पर सेटेलाइट, [संगीत] संचार प्रणाली, बिजली ग्रिड और अंतरिक्ष मौसम को प्रभावित करती हैं। क्यों अहम है आदित्य एल1? मिशन आदित्य एल1 सूरत से सीधा संवाद सौर तूफानों की समय पर जानकारी सेटेलाइट और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा अंतरिक्ष मौसम की सटीक भविष्यवाणी भारत की सौर विज्ञान में वैश्विक पहचान
10:22 [संगीत] इसरो का 100वां ल्च 29 जनवरी 2025 श्री हरिकोटा से इसरो का 100वां और ल्च जीएसएलवी F15 ने एनवीएस2 उपग्रह को कक्षा में पहुंचाया। तकनीकी चुनौती आई लेकिन सीख और पारदर्शिता के साथ इसरो आगे बढ़ा। [संगीत] इसी दौरान सरकार ने तीसरे लॉन्चपड को मंजूरी दी। मतलब भविष्य के भारी रॉकेट, मानव अंतरिक्ष मिशन और बढ़ती लॉन्च क्षमता। भारत का स्पेस पोर्ट अब और भी सशक्त बन रहा है। यह सिर्फ एक रॉकेट का प्रक्षेपण नहीं था बल्कि दशकों की वैज्ञानिक तपस्या,
11:08 आत्मनिर्भर तकनीक और विश्वसनीयता की उड़ान थी। श्री हरिकोटा से उठी यह गिनती भारत को उन चुनिंदा देशों की पंक्ति में ले आई जिनकी अंतरिक्ष क्षमताओं पर पूरी दुनिया भरोसा करती है। [संगीत] सो ल्च यानी विज्ञान संकल्प और राष्ट्रीय गौरव का संगम क्यों खास है इसरो का 100वां ल्च [संगीत] शून्य से शतक तक इसरो का अंतरिक्ष सफर भारत की लगातार और भरोसेमंद लांच क्षमता पीएसएलवी जीएसएलवी एलवीएम3 की सफलता की पुष्टि कमलागत उच्च सटीकता का
11:55 वैश्विक मॉडल आत्मनिर्भर भारत की अंतरिक्ष शक्ति पीओईएम4 और स्टार्टअप की उड़ान पीएसएलवी का चौथा चरण अब केवल रॉकेट नहीं एक स्पेस लैब है। पीओईएम4 एक चलता फिरता अंतरिक्ष प्रयोगशाला 24 पेलोड छात्रों के प्रयोग स्टार्टअप्स के इनोवेशन एआई मॉडल्स [संगीत] और ग्रीन प्रोपल्शन 1000 ऑर्बिट पूरे कर दिए हैं पीओईएम4 ने दिखाया कि अंतरिक्ष अब सिर्फ सरकारी नहीं सामूहिक प्रयास बन चुका है। यह प्लेटफार्म भारत के स्टार्टअप और छात्रों के लिए अंतरिक्ष का द्वार खोल रहा है। भारत का युवा
12:42 देश हित को सर्वोपरि रखकर चलता है। वो हर अवसर का सही इस्तेमाल करता है। जब सरकार ने स्पेस सेक्टर को ओपन किया तो देश के युवा और खासकर हमारे जेएनजी यूथ इसका भरपूर फायदा उठाने के लिए आगे आ गए। आज भारत के 300 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स भारत के स्पेस फ्यूचर को नई उम्मीदें दे
13:28 रहे हैं। और इसमें भी खास यह कि हमारे अधिकार और हमारे अधिकतर स्पेस स्टार्टअप्स इसकी शुरुआत बहुत छोटी टीम से हुई है। और मुझे इन सबको पिछले पांच छ साल में लगातार मिलने का अवसर मिला है। कभी दो लोग कभी पांच साथी कभी एक छोटा सा किराए का कमरा टीम छोटी थी संसाधन सीमित थे लेकिन
14:15 इरादे नई बुलंदी छूने के हैं। मेक इन इंडिया टेक्नोलॉजी मार्च 2025 भारत ने अंतरिक्ष तकनीक में एक और आत्मनिर्भर छलांग लगाई। पहले स्वदेशी 32 बिट एक प्रोसेसर 32 बिट माइक्रोपर विकसित किए गए। पूरी तरह स्वदेशी लॉन्च व्हीकल और सेटेलाइट्स के लिए तैयार। साथ ही 1000 घंटे का प्लाज्मा थ्रस्टर लाइफ टेस्ट इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन कम ईंधन ज्यादा क्षमता यह आत्मनिर्भरता की असली तस्वीर है। भविष्य के सेटेलाइट्स का रास्ता साफ यह सिर्फ चिप्स नहीं है। यह भारत की तकनीकी आजादी की मोर है।
15:02 भारत का गौरव तब और बढ़ा जब जून 2025 में हमारे गगन यात्री शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने अपना जो अनुभव पूरी दुनिया के सामने रखा वो भारत के लिए गौरव का दिन था। हमारी सोच और हमारा लक्ष्य दोनों सफलता की ओर काफी तेजी से बढ़ चुके हैं। [संगीत] मैंने जब आपको होमवर्क कहा था तो उसका क्या प्रोजेक्ट हुआ है? और आपसे बात करते वक्त [संगीत] सर पीछे जो मेरे तिरंगा लगाया था ये तिरंगा है। और आपका मूंग और मेथी का बहुत है। बहुत अच्छा है सर। [संगीत] मेरे ही क्रूमेट जो मेरे साथ थे
15:48 साइन करवा के लिख के लेके गए हैं कि जब भी आपका गगन यहां जाएगा आप हमें इनवाइट करेंगे और लॉन्च के लिए जल्दी से जल्दी हमें आपके व्हीकल में बैठ के जाना है। [संगीत] मानव अंतरिक्ष उड़ान भारत का गर्व। 2025 का सबसे भावात्मक क्षण जून में आया जब भारत का बेटा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचा। गगन यात्री शुभांशु शुक्ला 18 दिन अंतरिक्ष में वैज्ञानिक प्रयोग वीडियो तस्वीरें और करोड़ों भारतीयों की उम्मीदें प्रधानमंत्री से संवाद बच्चों से बातचीत और अंतरिक्ष में लहराता तिरंगा यह सिर्फ एक मिशन नहीं था। यह पूरे देश का सपना था।
16:34 सुभांशु नमस्कार। आप आज मातृ भूमि से नमस्कार भारत भूमि से सबसे दूर है लेकिन भारतवासियों के दिलों के सबसे करीब है। आपके नाम में भी शुभ है और आपकी यात्रा नए युग का शुभ आरंभ भी है। इस समय बात हम दोनों कर रहे हैं लेकिन मेरे साथ 140 करोड़ भारतवासियों की भावनाएं भी हैं।
17:22 मेरी आवाज में सभी भारतीयों का उत्साह और उमंग शामिल है। अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराने के लिए मैं आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मैं ज्यादा समय नहीं ले रहा हूं तो सबसे पहले तो यह बताइए वहां सब कुशल मंगल है। आपकी तबीयत ठीक है? जी प्रधानमंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद। आपकी विशेस का और 140 करोड़ मेरे देशवासियों की विशेस का मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं। सुरक्षित हूं। आप सबके आशीर्वाद
18:09 और प्यार की वजह से बहुत अच्छा लग रहा है। बहुत नया एक्सपीरियंस है यह और कहीं ना कहीं बहुत सारी चीजें ऐसी हो रही हैं जो दर्शाती हैं कि मैं और मेरे जैसे बहुत सारे लोग हमारे देश में और हमारा भारत किस दिशा में जा रहा है। शुभांशु शुक्ला भारत के उभरते हुए अंतरिक्ष यात्री और इसरो नासा के संयुक्त एग्जिम फोर मिशन के लिए चयनित [संगीत] भारतीय प्रतिनिधि। शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के अनुभवी फाइटर पायलट और अब भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा का नया चेहरा। [संगीत] आप लोग जब इतनी बड़ी यात्रा करके वापस पहुंचते हैं। जी सर। काफी कुछ चेंज फील होता होगा। जस्ट
18:56 मैं समझना चाहता हूं वो किस प्रकार से अनुभव करते हैं आप लोग। सर जब ऊपर भी जाते हैं तो वहां का जो वातावरण है, एनवायरमेंट है वो अलग है। ग्रेविटी नहीं है। आप चाहते हैं उसमें तो वो सिंगिंग अरेंजमेंट वैसा ही रहता है जो वैसा ही रहता है सर। और पूरे 23 24 घंटे उसमें निकालना पड़ता है। हां सर। लेकिन एक बार जब आप अंतरिक्ष में पहुंच जाते हैं तो आप सीट खोल के अपना हारनेस खोल के आप उसी कैप्सूल में आप मूव अराउंड आप जा सकते हैं। इधर-उधर चीजें कर सकते हैं। कितनी जगह है उसमें? बहुत तो नहीं है सर लेकिन थोड़ी बहुत है। मतलब आपका फाइटर जेट का कॉकट्स है उससे तो ज्यादा अच्छा है। उससे तो [हंसी] उससे तो ज्यादा अच्छा है। एग्जिम फोर मिशन के जरिए वो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने वाले भारतीय दल का हिस्सा थे। उनका चयन, कठोर
19:43 प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और अनुशासन की मिसाल है। शुभांशु शुक्ला भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान की अगली उड़ान का प्रतीक है। विज्ञान की सबसे बड़ी जीत तब होती है जब वह जीवन के बुनियादी सवालों का जवाब ढूंढ लेता है। क्या वहां भी जीवन पनप सकता है जहां वह जगह हमारे लिए अनुकूल नहीं है। हमारे वैज्ञानिकों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और शुरुआती नतीजों ने पूरी दुनिया को उम्मीद की एक नई किरण दी है। इसके साथ ही अब इसमें केवल सरकारी संस्थाएं ही नहीं बल्कि देश का युवा और निजी क्षेत्र भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। यह साझेदारी हमें उस मुकाम पर लेकर जा रही है जो आत्मनिर्भरता की सबसे
20:29 बड़ी मिसाल है। आइए जानते हैं अब इस खास मिशन के बारे में। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ग्लेक्स 2025 भारत की अंतरिक्ष पहचान अब वैश्विक मंच पर भी और मजबूत हुई है। दिल्ली में लेक्स 2025 35 से अधिक देश एक मंच और फिर एनआईएसएआर मिशन इसरो और नासा की संयुक्त उड़ान पूरी धरती पर नजर रखने वाला उपग्रह आपदाएं हो या पर्यावरण परिवर्तन यह मिशन मानवता के लिए है। निजी क्षेत्र भी इस यात्रा का अहम हिस्सा बन चुका है। पूरी धरती का हर मौसम हर दिन निगरानी यह साझेदारी विश्वास की मिसाल है। ग्लेक्स
21:18 2025 एक ऐसा वैश्विक मंच जहां अंतरिक्ष एजेंसियां वैज्ञानिक नीति निर्माता और निजी क्षेत्र एक साथ अंतरिक्ष अन्वेषण के अगले अध्याय पर [संगीत] चर्चा के लिए जुटे। चंद्रमा से मंगल तक मानव अंतरिक्ष उड़ान से लेकर निजी स्पेस सेक्टर की बढ़ती भूमिका तक गलेक्स 2025 ने सहयोग, नवाचार और साझा दृष्टि को केंद्र में रखा। इस सम्मेलन में भारत की बढ़ती अंतरिक्षता, आत्मनिर्भर तकनीक और वैश्विक साझेदारी को दुनिया ने नए भरोसे के साथ देखा। [संगीत] [संगीत] निजी क्षेत्र और भविष्य की तैयारी स्काई
22:04 रूट एयररोस्पेस का कलाम 1200 मोटर टेस्ट एसएसएलवी का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहले भारी ठोस ईंधन रॉकेट मोटर कलाम 1200 का सफल स्टैटिक टेस्ट पूरा किया। यह मोटर 11 मीटर लंबी और 1.7 मीटर व्यास वाली विक्रम वन लॉन्च वाहन का पहला चरण है। इसमें 30 टन प्रोपलेंट है और इसे भारत के सतीश धवन स्पेस सेंटर [संगीत] हरिकोटा में टेस्ट किया गया। इस सफलता से ना केवल भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग मजबूत हुआ बल्कि सरकार की नई स्पेस पॉलिसी 2023 के तहत उद्योग और नवाचार को बढ़ावा देने का संदेश भी गया। कलाम 1200
22:51 मोटर का यह टेस्ट देश को भविष्य के छोटे और तेज लॉन्च वाहनों के लिए तैयार करता है और भारत की अंतरिक्ष उड़ानों में नई गति को जोड़ता है। जब हम स्पेस रिफॉर्म्स की बात करते हैं तो हमारी एप्रोच चार पिलर्स पर आधारित है। पहला प्राइवेट सेक्टर को इनोवेशन की आजादी। दूसरा सरकार की एनेबलर के रूप में भूमिका। तीसरा भविष्य के लिए युवाओं को तैयार करना। और चौथा स्पेस सेक्टर को सामान्य मानवी की प्रगति
23:37 के संसाधन के रूप में देखना। इन चारों पिलर्स की बुनियाद अपने आप में असाधारण संभावनाओं के द्वार खोलती है। साथियों आप इस बात को भी मानेंगे कि पहले स्पेस सेक्टर का मतलब ही होता था सरकार। लेकिन हमने पहले इस माइंडसेट को बदला और फिर पेस सेक्टर में इनोवेशन किए। सरकार स्टार्टअप एक दूसरे से सहयोग और स्पेस का मंत्र दिया। यह नई सोच, नया मंत्र इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत के लिए अब यह लीनियर इनोवेशन
24:26 का समय नहीं है। कलाम 1200 मोटर टेस्ट के फायदे। निजी स्पेस सेक्टर को मजबूती स्काई रूट जैसी कंपनियों की क्षमता बढ़ी भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग में नई गति आई भारत की स्पेस ऑटोमनी ठोस ईंधन रॉकेट मोटर पूरी तरह देश में विकसित विदेशों पर निर्भरता कम विक्रम वन लॉन्च वाहन के लिए तैयारी पहला चरण सफल होने से पूरे रॉकेट के विकास और उड़ान परीक्षण में मदद छोटे और तेज लॉन्च मिशन संभव छोटे उपग्रह और मिशनों को जल्दी और कम लागत में लांच करने में सुविधा। नई स्पेस पॉलिसी 2023 का समर्थन। निजी उद्योगों को प्रोत्साहित करने और
25:11 स्पेस इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा। टेक्नोलॉजी और नवाचार में प्रगति। लंबी और भारी ठोस मोटर का निर्माण। प्रोपलेंट मैनेजमेंट और टेस्टिंग में अनुभव। भविष्य के मिशनों के लिए आत्मनिर्भरता। भारत के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट। भारत के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट गगन यान और अन्य अंतरिक्ष मिशनों में योगदान स्पेस एनालॉग मिशन स्पेस एनालॉग मिशन होप लद्दाख धरती पर मंगल या चंद्रमा जैसी परिस्थितियों में अंतरिक्ष यात्रियों और वैज्ञानिकों को तैयार करना यही है स्पेस एनालॉग मिशन का उद्देश्य। भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए टीएसओ कार वैली लद्दाख
25:57 में होप मिशन आयोजित किया। यह जगह अपनी कठोर जलवायु, कम वायुमंडलीय दबाव और ठंडी परिस्थितियों के लिए जानी जाती है। जैसे किसी मंगल मिशन के लिए असली प्रशिक्षण स्थल हो। इस मिशन में चुने गए दो क्रू मेंबर्स 10 दिन तक इस विशेष हैबिटेट और यूटिलिटी मॉड्यूल में रहे। इस दौरान उन्होंने शारीरिक, मानसिक और जैविक परीक्षण पूरे किए। माइक्रोबियल नमूने एकत्रित किए और प्लेटरी सरफेस ऑपरेशंस का अभ्यास किया। इस अनुभव से इसरो को भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए क्रू हेल्थ ऑपरेशंस और टेक्नोलॉजी का मूल्यवान डाटा मिला। स्मार्ट डेक से गगन यान तक
26:44 क्रॉप से एनआईएसएआर तक भारत अंतरिक्ष में अपना भविष्य लिख रहा है। और जब इतिहास इस दौर को याद करेगा तो कहेगा यहीं से शुरू हुआ भारत का स्वर्णिम अंतरिक्ष युग। भारत अंतरिक्ष में केवल पहुंच नहीं बना रहा बल्कि भविष्य लिख रहा है। यही है नया भारत। आत्मनिर्भर भारत। अंतरिक्ष में अग्रणी भारत। स्पेस सेक्टर में एक के बाद एक नए माइलस्टोन गणना यह भारत और भारत के वैज्ञानिकों का स्वभाव बन गया है। 2 साल पहले ही भारत पहला ऐसा देश बना था
27:31 जिसने चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने का इतिहास रचा। हम स्पेस में डॉकिंग अनडॉकिंग की क्षमता रखने वाले दुनिया के चौथे देश भी बन गए हैं। आज भारत सेमी क्रायोजेनिक इंजन और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन जैसी ब्रेक थ्रू टेक्नोलॉजी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही आप सब वैज्ञानिकों की मेहनत से भारत गगन यान की उड़ान भी भरेगा और आने वाले समय में भारत अपना स्पेस
28:21 स्टेशन भी बनाएगा। अभी हम मून और मार्स तक पहुंचे हैं। अब हमें गहरे अंतरिक्ष में उन हिस्सों में भी झोंकना है। जहां मानवता के भविष्य के लिए कई जरूरी रहस्य छिपे हैं। [संगीत] चाहे स्पेस से सूर्य की निगरानी हो या
29:07 हमारे जांबाज नायकों का सातवें आसमान तक का सफर। हर एक कदम हमें एक बड़े लक्ष्य की ओर ले जा रहा है। साल 2047 का जो रोड मैप तैयार किया गया है, उसकी गूंज अब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। यह नए भारत का वो आत्मविश्वास है जो अब रुकने वाला नहीं है। आज के लिए इतना ही। आप देखते रहिए संसद टीवी। नमस्कार। [संगीत] संसद टीवी के और भी प्रोग्राम्स देखने के लिए सब्सक्राइब करें हमारा YouTube चैनल और हां इन्हें लाइक और शेयर करना ना
29:53 भूलें।