0:07 [संगीत] नमस्कार आप देख रहे हैं संसद टीवी। आपके साथ मैं हूं प्रांजलि सिंह। कहा जाता है कि जब गांव मजबूत होते हैं तभी देश भी मजबूत होता है और आज ग्रामीण भारत की कहानी एक नए मोड़ पर खड़ी है। दो दशकों तक रोजगार की सुरक्षा देने वाली व्यवस्था अब बदल चुकी है। एक नया कानून, एक नई सोच और विकास से जुड़ी नई दिशा। क्या यह बदलाव सिर्फ कागजों तक रहेगा या गांव की तकदीर सचमुच बदलेगी? आज हम बात करेंगे उसी बड़े परिवर्तन की जो ग्रामीण भारत का भविष्य तय
0:53 कर सकता है। [संगीत] [संगीत] दो दशक से अधिक समय तक देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों को रोजगार [संगीत] की गारंटी देने वाला महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम [संगीत]
1:40 यानी मनरेगा अब एक नए रूप में बदल चुका है। संसद ने दिसंबर 2025 में विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण अधिनियम [संगीत] जिसे संक्षेप में वीबी जी राम जी एक्ट कहा जा रहा है को पारित किया। यह केवल नाम का परिवर्तन नहीं है [संगीत] बल्कि ग्रामीण रोजगार की संरचना, प्राथमिकता और दृष्टिकोण में एक व्यापक बदलाव का संकेत है। विकसित भारत के लिए विकसित गांव के निर्माण का बिल है। जिसमें 100 दिन जो रोजगार की गारंटी थी वह बढ़ा के 125 दिन कर दी गई है। हम रोजगार भी देंगे और 100
2:28 से बढ़ा के 125 दिन लेकिन केवल रोजगार नहीं जो महात्मा गांधी जी का सपना था स्वावलंबी गांव वो स्वावलंबी स्वयंपूर्ण विकसित गरीबी मुक्त और रोजगार युक्त गांव बनाने का यह बिल है। मैं निवेदन करता हूं कि इस पर चर्चा कराई जाए। ग्रामीण भारत को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। रोजगार गारंटी की पुरानी व्यवस्था की जगह अब एक नया ढांचा लागू किया गया है। जिसका उद्देश्य सिर्फ काम देना नहीं बल्कि विकास को गति देना बताया जा रहा है। क्या यह बदलाव जमीनी हकीकत बदल पाएगा या फिर नई चुनौतियां खड़ी करेगा? यह भी एक बड़ा सवाल
3:15 है। सरकार का दावा है कि यह कानून विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम है। जहां ग्रामीण भारत केवल जीविका पर निर्भर ना रहे बल्कि टिकाऊ परिसंपत्ति और आधुनिक अवसरचना के निर्माण में सक्रिय भागीदार बने। मनरेगा साल 2005 में एक अधिकार आधारित कानून के रूप में अस्तित्व में आया था। इसका मूल उद्देश्य था कि हर ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 100 दिन का अकुशल श्रम आधारित रोजगार मिले और यदि 15 दिनों के भीतर काम ना मिले तो बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। यह कानून
4:02 ग्रामीण सुरक्षा कवच के रूप में उभरा और आर्थिक संकट, सूखा, महामारी या मंदी के समय लाखों परिवारों के लिए जीवन रेखा बन गया। लेकिन समय के साथ इसके क्रियान्वयन, भुगतान में देरी, परिसंपत्ति की गुणवत्ता और वित्तीय बोझ जैसे मुद्दों पर [संगीत] बहस भी तेज हुई। ऐसी परिस्थिति में सरकार ने व्यापक समीक्षा के बाद एक नए ढांचे की घोषणा की। ग्रामीण विकास और रोजगार को लेके एक नहीं अनेकों योजनाएं आई। उनकी श्रंखला है। 1961 62 से ऐसी योजनाएं आ रही है। एक योजना आई कुछ दिन चली बदल गई। उसकी जगह दूसरी आई तीसरी आई।
4:48 संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना। उसके बाद जवाहर रोजगार योजना और उसके बाद मनरेगा आई और मैं यह कहना चाहता हूं कि गरीब कल्याण यह भारतीय जनता पार्टी का संकल्प है। देश की अर्थव्यवस्था में गांव की भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में जब रोजगार और आजीविका से जुड़ा कानून बदला जाता है तो उसका असर करोड़ों परिवारों तक पहुंचता है। सरकार इसे सुधार बता रही है। जबकि कुछ राज्य इस पर सवाल भी उठा रहे हैं। तो क्या यह फैसला ग्रामीण आय बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होने जा रहा है? आइए जानते हैं इस खास रिपोर्ट में। वीवी जी राम जी एक्ट 2025 के तहत सबसे बड़ा बदलाव है रोजगार गारंटी के दिनों में वृद्धि [संगीत] का। अब प्रत्येक ग्रामीण
5:36 परिवार को साल में 125 दिनों के अकुशल श्रम की गारंटी दी जाएगी। यानी पहले के 100 दिनों की तुलना में 25 दिन अधिक। सरकार का कहना है कि यह कदम ग्रामीण आय में स्थिरता लाने और गरीबी उन्मूलन को तेज करने के लिए उठाया गया है। इस नए कानून की एक विशिष्ट और चर्चित विशेषता है। 60 दिनों का कृषि अवकाश है। यह अवकाश लगातार नहीं होगा बल्कि कृषि के लिए चरम बुवाई और कटाई सीजन के दौरान अधिसूचित किया जाएगा। इस प्रावधान का मकसद यह है कि जब बुवाई और कटाई जैसे अहम कृषि सीजन चल रहे हो तब ग्रामीण मजदूर सरकारी काम के बजाय खेतों
6:22 में उपलब्ध रहें ताकि खेती का काम प्रभावित ना हो और उत्पादन सुचारू रूप से चलता रहे। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को समय पर मजदूर मिलेंगे और श्रमिकों को भी कृषि कार्य से आय प्राप्त होगी। [संगीत] यानी दोनों पक्षों को फायदा होगा। इस योजना में वित्तीय व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। [संगीत] अब ज्यादातर राज्य में इस योजना का खर्च केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे। [संगीत] इसमें 60% पैसा केंद्र देगा और 40% राज्य सरकार देगी। पूर्वोत्तर और हिमालय राज्यों के लिए यह अनुपात अलग रखा गया है। वहां 90% खर्च केंद्र और 10% राज्य देगा। [संगीत] जिन केंद्र शासित प्रदेशों में
7:07 विधानसभा नहीं है वहां पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। इस व्यवस्था का मकसद है कि राज्य भी योजना में सक्रिय भागीदारी करें। लेकिन जिन राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर है उनके लिए 40% हिस्सा देना मुश्किल हो सकता है। अगर किसी परिवार को समय पर काम नहीं मिलता और बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता है तो उसका खर्च राज्य सरकार को ही उठाना होगा। [संगीत] इससे राज्यों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं। और माननीय अध्यक्ष जी महात्मा गांधी जी का पंडित दीनदयाल जी का
7:53 यह संकल्प था कि जो सबसे पीछे हैं जो सबसे नीचे है उनका कल्याण सबसे पहले किया जाए और हम केवल महात्मा गांधी जी को मानते नहीं है। हम महात्मा गांधी जी की भी मानते हैं और उन्हीं के विचारों पर आधारित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों पर आधारित गरीब कल्याण की कई योजनाएं यह सरकार मोदी जी के नेतृत्व में चला रही है और जहां तक मनरेगा का सवाल है माननीय अध्यक्ष जी कांग्रेस तो यूपीए तो केवल मनरेगा लेके आई थी लेकिन ₹13220 करोड़ यूपीए की सरकार ने मनरेगा पर खर्च
8:38 किए थे। हमने 853810 करोड़ गरीबों के कल्याण के लिए खर्च किए और इस योजना को और मजबूत करने की कोशिश की। [संगीत] इस कानून का एक बड़ा उद्देश्य यह है कि रोजगार को ऐसे कामों से जोड़ा जाए जो लंबे समय तक फायदा दें। अब सिर्फ अस्थाई काम करने के बजाय ऐसे प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया जाएगा जो गांव के विकास में स्थाई योगदान दें। सबसे [संगीत] महत्वपूर्ण बात यह है कि इस योजना के तहत चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। [संगीत] पानी की व्यवस्था को मजबूत करना, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण करना, लोगों की आजीविका बढ़ाने वाली संपत्ति बनाना और आपदा से
9:24 बचाव की तैयारी करना। यानी अब जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, सिंचाई, सामुदायिक भवन और बाढ़ से सुरक्षा जैसे काम प्राथमिकता में होंगे। सरकार इसे उत्पादक श्रम की दिशा में कदम बता रही है। [संगीत] यानी ऐसा काम जो भविष्य में भी फायदे। विकसित भारत के लिए विकसित गांव यह मोदी जी का संकल्प है। तो रोजगार और विकसित गांव विकसित भारत के लिए जहां रोजगार के लिए पहले 100 दिन की गारंटी थी। अब वह बढ़ा के 125 दिन की गई है।
10:15 और उसके लिए पर्याप्त धनराशि प्रस्तावित है। 1 लाख 51000 282 करोड़ से ज्यादा की राशि जिसमें केंद्र का हिस्सा 95000 करोड़ से ज्यादा है। हमने एक संपूर्ण योजना बनाई जिसमें विकसित गांव का स्वरूप क्या होगा और गांव का स्वरूप तय विकेंद्रित है। गांव के लोग करेंगे लेकिन गांव में क्या-क्या बनेगा? जल संरक्षण के काम जो बहुत जरूरी है। गांव में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्कूल हो, स्वास्थ्य केंद्र हो, आंगनबाड़ी का भवन हो,
11:02 आजीविका के काम हो, सड़कें हो, ड्रेनेज का सिस्टम हो, एक पूरी सूची है। मैं उसके विस्तार में नहीं जा रहा अभी। आजीविका से संबंधित अनेकों गतिविधियों के काम अलऊ किए गए हैं और प्राकृतिक आपदा में नुकसान कैसा रोका जाए तो रिटेनिंग वाल्व से लेकर ड्रेनेज के सिस्टम तक की व्यवस्था इसमें और एक और सुधार किया इसमें तय किया के जो फंड्स है उसका वितरण न्यायपूर्ण
11:47 होना चाहिए। अगर किसी सरपंच किसी पंचायत का सरपंच ज्यादा एक्टिव है वह ज्यादा धन ले जाता है। कोई कम एक्टिव है तो वहां ज्यादा विकास के काम और रोजगार की आवश्यकता होते हुए भी धन कम जाए। इसलिए तय किया कि ए बी सी तीन ग्रेडिंग बन जाए। जो कमबख विकसित और रोजगार की जहां जरूरत क्या है? ऐसी पंचायत एवरेज पंचायतें और जहां विकास बहुत हुआ है और रोजगार की जरूरत कम है वैसी पंचायत और इस ग्रेडिंग के आधार पर धन का वितरण हो। रोजगार की गारंटी सिर्फ आय का सवाल नहीं है बल्कि सामाजिक सुरक्षा का भी विषय है। महिलाओं की भागीदारी, प्रवासी मजदूरों की
12:34 वापसी और ग्रामीण युवाओं के अवसर इन सभी पर इस बदलाव का असर पड़ सकता है। तो क्या यह नई व्यवस्था सामाजिक संतुलन को भी बदलने का काम कर रहा है? आइए जानते हैं। इस कानून में तकनीक और पारदर्शिता को भी बहुत महत्व दिया गया है। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एआई आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। काम की निगरानी के लिए जीपीएस तकनीक होगी। एक डिजिटल डैशबोर्ड पर सारी जानकारी उपलब्ध होगी। ग्राम पंचायत स्तर पर हर हफ्ते काम और खर्च का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। इससे फर्जी
13:19 जॉब कार्ड, नकली नाम और भुगतान में गड़बड़ी जैसी समस्या को कम करने की कोशिश की जाएगी। हालांकि जिन क्षेत्रों में इंटरनेट या डिजिटल सुविधा कमजोर है, वहां इसे लागू करना आसान नहीं होगा। मजदूरी भुगतान के मामले में नियम साफ है कि मजदूरों को हर हफ्ते या अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। अगर किसी परिवार को काम मांगने के 15 दिनों के अंदर काम नहीं दिया जाता तो उन्हें बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। यह प्रावधान पहले भी था। लेकिन अब तकनीकी निगरानी के कारण उम्मीद है कि भुगतान में देरी कम होगी। बेरोजगारी भत्ता देने के प्रावधान को
14:05 और पुख्ता किया गया और यह भी कहा गया कि 15 दिन के अंदर अगर मजदूरी नहीं मिलती तो 0.05% फिर अतिरिक्त रोज देना पड़ेगा देर से मजदूरी देने के लिए। कमजोर वर्गों का विशेष रूप से ध्यान रखा गया। अनुसूचित जाति जनजाति अन्य कमजोर वर्ग दिव्यांग बुजुर्ग और इसमें दिव्यांग बुजुर्ग उनके अलग गारंटी कार्ड बनेंगे। रोजगार गारंटी कार्ड अलग रंग के उनको कम काम पर भी ज्यादा मजदूरी मिलेगी।
15:00 गांव में समय पर मजदूरी मिलना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे स्थानीय बाजार और परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें सीधे जुड़ी होती हैं। विशेषज्ञ इस कानून को ग्रामीण रोजगार की दूसरी पीढ़ी का सुधार बता रहे हैं। पहले कानून का मुख्य जोर अधिकार आधारित रोजगार पर था। जबकि नया कानून काम की गुणवत्ता और उत्पादकता पर ज्यादा ध्यान देता है। इससे दो फायदे होंगे। लोगों को रोजगार मिलेगा और गांव में स्थाई विकास कार्य भी हो पाएंगे। राजनीतिक स्तर पर इस कानून को लेकर बहस जारी है। कुछ राज्यों का कहना है कि इससे राज्यों के अधिकार और ग्राम पंचायतों की स्वतंत्रता कम हो सकती है। वह मनरेगा को फिर से लागू करने की
15:45 मांग कर रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि यह कानून ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और विकास केंद्रित है। 86% किसान हमारे लघु हैं। सीमांत है। अभी मैकेशन नहीं हो पाया कि वह कृषि के कामों को मशीन से कर ले। तब खेती में भी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। तो वैसे समय के लिए अगर 60 दिन जो राज्य सरकार तय करे अगर यह व्यवस्था की गई है एक साथ नहीं अलग-अलग समय पर भी कि फिर 125 दिन की गारंटी रखते हुए कृषि के कार्यों में भी मजदूर जाएं।
16:32 अब इसके जो सारे प्रावधान फिर एक बात जिस जिसकी ये टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का विरोध करते हैं। क्यों? क्या पैसा भ्रष्टाचार की बलि चढ़ने दिया जाए? एक काम बार-बार कई बार हो जाते थे। एक बार मिट्टी खुदी, दूसरी बार डाल दी, तीसरी बार डाल दी। पीएम गतिशक्ति को जोड़ के यह कोशिश की गई है कि काम का डुप्लीकेशन ना हो। जहां काम हो रहा है वो जगह ठीक है कि नहीं यह देख ले नहीं तो एक बार पता चला कि बांध बनाने की स्टाफ डैडम बनाने की वजह बनी वहां पानी रुक ही नहीं सकता। तो पीएम गति शक्ति से जोड़कर आवश्यकता और
17:18 उपयोगिता और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके दुरुपयोग को रोकने की कोशिश एक और तथ्य प्रशासनिक व्यय बढ़ा के 6% से 9% किया गया है। इसमें लगभग 13000 करोड़ प्रशासनिक व्यवस्थाओं को ताकि रोजगार सहायक को वेतन ढंग से मिल सके। मैट को पेमेंट हो सके, इंजीनियर्स और बाकी टेक्निकल स्टाफ ढंग से रखा जा सके। मैं मानता हूं कि यह विकसित भारत के लिए विकसित गांव बनाने की और 125 दिन रोजगार की गारंटी देने वाली एक स्वयंपूर्ण गांव, एक विकसित गांव,
18:03 रोजगार युक्त गांव, गरीबी मुक्त गांव बनाने की योजना है। जो प्रधानमंत्री जी का संकल्प है। [संगीत] ग्रामीण भारत की स्थिति आसान नहीं है। यहां अधिकतर लोग खेती पर निर्भर हैं। लेकिन खेती के अलावा रोजगार के मौके सीमित हैं। ऐसे में रोजगार गारंटी योजना केवल आय का जरिया नहीं बल्कि एक सुरक्षा कवच भी है। नया कानून इस सुरक्षा को बनाए रखते
18:50 हुए उसे विकास से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। असली सवाल यह है कि क्या यह संतुलन जमीन पर सही तरीके से काम कर पाएगा? अगर आर्थिक नजरिए से देखें तो 125 दिनों की गारंटी से ग्रामीण परिवार की आय बढ़ सकती है। यदि बनाए गए काम टिकाऊ और उपयोगी साबित होते हैं तो इससे [संगीत] खेती की पैदावार बढ़ सकती है। बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है और आपदा से नुकसान कम हो सकता है। यानी यह योजना सिर्फ मजदूरी देने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि गांव के विकास को भी गति देगी।
19:37 सामाजिक रूप से भी यह कानून अहम है। मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी काफी अधिक रही है। अगर नया कानून भी महिला को समान अवसर और सुरक्षित माहौल देता है तो इससे उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। तकनीकी इस्तेमाल से सामाजिक निगरानी भी बेहतर हो सकती है। लेकिन चुनौतियां भी मौजूद हैं। अतिरिक्त 25 दिनों के लिए पर्याप्त काम उपलब्ध कराना, समय पर पैसा जारी करना, राज्यों की आर्थिक क्षमता और कृषि अवकाश के दौरान आय का संतुलन यह सभी मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। अगर योजना और जमीन पर काम के बीच तालमेल नहीं बैठा तो इसके उद्देश्य पूरे नहीं हो पाएंगे। विकसित भारत 2047 का
20:23 सपना केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। इसमें गांवों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता शामिल है। वीजी जी राम जी एक्ट इसी दिशा में एक कदम है। इसका मकसद ग्रामीण श्रमिकों को देश के विकास कार्यों से जोड़ना है। अंत में यह कानून केवल एक बदलाव नहीं बल्कि सोच में परिवर्तन है। सवाल यह है कि क्या रोजगार गारंटी योजना सिर्फ मुश्किल समय में सहारा देने के लिए हो या उसे गांव के स्थाई विकास का साधन बनाया जा सकता है? आने वाले सालों में इसका जवाब गांवों की तस्वीर में दिखाई देगा। बेहतर सड़क में मजबूत जल संरचना में
21:12 और ग्रामीण परिवार की आय में यह नया अध्याय अवसर और चुनौती दोनों से भरा है। नीति बदल चुकी है। प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। अब नजरें जमीन पर पड़ने वाले असर पर टिकी है। अगर इरादे और क्रियान्वयन साथ चले तो यह बदलाव गांव में समृद्धि की नई इबारत भी लिख सकता है। लेकिन अगर तालमेल बिगड़ा तो उम्मीदें सवालों में बदल सकती हैं। ग्रामीण भारत के इस नए अध्याय का असली मूल्यांकन आने वाला समय जरूर करेगा। आज के लिए इतना ही। आप देखते रहिए संसद टीवी। नमस्कार।
22:00 [संगीत] टू वॉच मोर प्रोग्राम्स ऑफ सनसट टीवी सब्सक्राइब टू आवर YouTube चैनल एंड डोंट फॉरगेट टू लाइक एंड शेयर देम।