Sidhu Calims on his wife Cancer treatment decoded - Dr Anshuman Kumar

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो कैंसर के इलाज में हल्दी और नीम जैसे प्राकृतिक उपचारों के उपयोग के बारे में फैली गलत सूचनाओं पर चर्चा करता है। यह स्पष्ट करता है कि ये चीजें सहायक हो सकती हैं, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा का विकल्प नहीं हैं। वीडियो में आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि रोगियों को सर्वोत्तम संभव देखभाल मिल सके।

  • प्राकृतिक उपचार सहायक हो सकते हैं, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा का विकल्प नहीं हैं।
  • आयुर्वेद और एलोपैथी को मिलकर काम करना चाहिए।
  • गलत सूचनाओं से सावधान रहें, खासकर सोशल मीडिया पर।

परिचय

वीडियो की शुरुआत इस बात से होती है कि कैसे कुछ लोग, जैसे कि नवजोत सिंह सिद्धू, कैंसर से ठीक होने के लिए अपनी जीवनशैली और आहार को श्रेय देते हैं, जिसमें हल्दी और नीम जैसे प्राकृतिक उपचार शामिल हैं। इससे यह गलत धारणा पैदा हो सकती है कि कैंसर को केवल इन चीजों से ठीक किया जा सकता है। डॉक्टर इस गलत सूचना के खिलाफ चेतावनी देते हैं।

प्राकृतिक उपचार: सहायक, लेकिन पर्याप्त नहीं

डॉक्टरों का कहना है कि हल्दी और इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसी चीजें कैंसर के इलाज में मदद कर सकती हैं। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन में ट्यूमर को दबाने वाले गुण होते हैं, और इंटरमिटेंट फास्टिंग कैंसर कोशिकाओं के विकास को कम कर सकती है। हालांकि, ये केवल सहायक उपचार हैं और पारंपरिक चिकित्सा, जैसे सर्जरी और कीमोथेरेपी, का विकल्प नहीं हैं।

आयुर्वेद बनाम एलोपैथी: सहयोग की आवश्यकता

डॉक्टर इस बात पर जोर देते हैं कि आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच कोई लड़ाई नहीं होनी चाहिए। दोनों पद्धतियों के अपने फायदे हैं, और उन्हें मिलकर काम करना चाहिए। आयुर्वेद हजारों साल पुरानी एक चिकित्सा पद्धति है, लेकिन इसे आधुनिक विज्ञान के साथ मिलकर विकसित करने की आवश्यकता है। भारत में छह प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां हैं, और डॉक्टरों को मिलकर रोगियों के लिए सर्वोत्तम समाधान खोजने चाहिए।

गलत सूचनाओं से सावधान रहें

डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि कुछ व्यापारी सोशल मीडिया पर गलत सूचनाएं फैला सकते हैं, यह दावा करते हुए कि उनके उत्पाद कैंसर को ठीक कर सकते हैं। लोगों को इन दावों से सावधान रहना चाहिए और केवल विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। विज्ञान हमेशा प्रमाण पर आधारित होता है, और किसी भी उपचार को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

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Transcript

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0:00 इलाज किया था उन्होंने भी यही कहा कि उन्होंने बहुत अच्छा अपना लाइफ स्टाइल और डायट मेंटेन किया इसकी वजह से रिकवरी में मदद मिली लेकिन इंटरप्रिटेशन इसका यह हो रहा है या सिद्धू के शब्द भी कई बार इसी तरह के सीधे-सीधे हैं जैसे लगता है कि हल्दी और नीम के पत्ते से कैंसर ठीक होता है इसलिए डॉक्टर्स ने चेताया है अब हम आपको अपने पैनल से मिलवा हैं हमारे साथ सीनियर ऑंकोलॉजिस्ट डॉक्टर अनसुमन कुमार हैं मैक्स अस्पताल के डायरेक्टर ऑंकोलॉजी डॉक्टर ददुल मंडल है और हिम्स अस्पताल के फाउंडर आज मनीष भी हमारे साथ हैं आपका बहुत-बहुत स्वागत है तीनों का डॉक्टर अनसुमन शुरुआत आपसे करते हैं यह जो घटना हुई है बिल्कुल साफ है इसमें ऐसी कुछ अनोखी बात नहीं है लेकिन कहीं ना कहीं यह मैसेज कन्वे हो रहा है चकि आजकल छोटे से

0:46 वीडियो क्लिप्स वायरल हो जाते हैं क्या असर इसका हो सकता है जी बिल्कुल मनोज साहब देखिए ऐसा है लोग आधी अधुरी बातें जो आपने सही कहा कि अटेंशन स्पैन इतना कम हो गया कि रियल फॉर्म में देखना चाहते वीडियो को देख के मान लेते फैक्ट है जबकि कन्वेंशनल ट्रीटमेंट सर्जरी कीमोथेरेपी जो भी होनी थी उसको होने के साथ साथ कुछ चीज जो कही गई है मॉडर्न साइंस भी उसको मानता है दूसरा ये लड़ाई कहीं आयुर्वेद वर्सेस एलोपैथ मॉडर्न मेडिसिन की नहीं होती है जहां से होता हल्दी प 53 हाइपर मिथाइलेशन को रिवर्स करता है ट्यूमर सेप प्रॉपर्टी ही एस्टेब्लिश है इंटरमिटेंट फास्टिंग या क टिंग विंडो कम करके बिल्कुल ठीक है शुगर इंसुलिन स्पाइक देता है कैंसर ग्रोथ को बढ़ाता है ये भी भी ठीक है लेकिन क्या ये

1:32 सिर्फ यही एक एस्टेब्लिश ट्रीटमेंट हो सकता है जवाब है नहीं जैसे सिर्फ क्या मॉडर्न मेडिसिन की सारी चीजें अगर हम कर दें और कैंसर 100% क्योर हो जाए जवाब है नहीं तो हमें बाकी चीजों को व्यवस्था करके बैलेंस करके दूसरा विज्ञान हर समय प्रत्यक्ष और प्रमाण प चलता है उसको डॉक्यूमेंट करके करें तो इसमें अगर सिद्धु की पूरी बातों को अगर मिलाए तो बिल्कुल ठीक है कि इसके साथ-साथ इन्होंने ये किया जिससे रिकवरी बेहतर होती है ट्रीटमेंट का साइड इफेक्ट कम होता है रिलैक्स का चांस कम होता है इसमें कोई दो मत नहीं है लेकिन पब्लिक गुमराह ऐसी हुई है जैसे लग रहा है सिर्फ हल्दी नीम के पत्ते से इनका कैंसर का इलाज हुआ य ठीक हो ग इसमें क्या होगा कि जो व्यापारी टाइप के लोग होते हैं जो इस तरह का व्यापार कर रहे हैं वो य पर

2:19 वीडियो बनाकर वायरल करेंगे देखो यही इलाज तो मैं करता हूं और इससे बकुल बीमारी ठीक हो रही है लोग गुमराह होते हैं कोविड के टाइम में भी आपने देखा ही था किस तरह से गुमराह किया गया था लोगों को इसलिए विज्ञान प्रत्यक्ष प्रमाण पर चलता है प्रत्यक्ष प्रमाण हर समय उपलब्ध है इसको भी देखेंगे तो बिल्कुल सिद्धू के कंप्लीट ट्रीटमेंट को देखेंगे तो कन्वेंशनल ट्रीटमेंट के साथ साथ इसका सप्लीमेंटेशन किया गया है जी सपोर्ट है यह एक तरीके का सपोर्ट है अच्छा है और लेकिन सिद्धू ने बड़ी ईमानदारी से यह भी कहा कि बहुत रिसर्च करके उन्होंने यह निकाला कि कुछ डॉक्टरों से राय भी ली उनके डॉक्टर का भी बयान है जिस डॉक्टर ने बयान है वो भी कह रहे इससे हेल्प हुआ उनको

3:05 हेल्प हुआ लेकिन यह इलाज है यह नहीं कहा डॉक्टर ने ना ही सिद्धू ने कहा है डॉक्टर ड एक मिनट एक मिनट आचार्य मनीष एक मिनट डॉक्टर अनसुमन जो बात कह रहे हैं डॉक्टर मनीष कि वह 100% नहीं है तो इसलिए आयुर्वेद से इलाज किया जाना चाहिए या कर सकते हैं मेरा मकद की हेल्प होनी चाहिए ठीक है ठीक है उनका उनका कमेंट लेने दीजिए डॉक्ट अनसुमन जी इसको वि साब क्लियर करते चलते हैं सबसे पहली बात कि आयुर्वेद एलोपैथ की लड़ाई ये नहीं है बिल्कुल य ऐसी लड़ाई नहीं है दूसरी बात कि मॉडर्न मेडिसिन 462 बीसी में हिप्पोक्रेट ने पपरा इज किया लेकिन भारत का हर चिकित्सक चाहे

3:52 मॉडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस कर आयु हम धनवंत्री चरक और सुसत के ही वंशज है विधा हमारी प्रैक्टिस की जो हो अब बताइए कि 10000 साल पुरानी विधा हमारी हिंदुस्तान की आयुर्वेद इनी प्रसिद्धि क्यों नहीं पाई इसी कारण सुस साहब 136 औजार सर्जरी के छोड़ के गए उससे आगे कुछ नहीं डेवलप हुआ दूसरा हमने रिपस बल नहीं बनाया मतलब आयुर्वेद को वर्ल्ड वाइड में पॉपुलर कैसे करें ताकि जब जब तक हम रिसर्च एविडेंस साइंस नहीं देंगे तब तक नहीं होगा तो इसके लिए जरूरी है भारत में छह पद्धति इलाज की है मॉडर्न मेडिसिन आयुर्वेद होम्योपैथ यूनानी सिद्धा नेचरोपैथ डॉक्टरों को होलिस्टिक साथ बैठे सब अपने गगो को खत्म करें और मिलके ये देखे समाधान कैसे बन सकता है दिक्कत यही

4:38 हो रही है कि स्पेशलाइजेशन के बिना आयुर्वेद में आचार्य मनिष को ये सोचना चाहिए आयुर्वेद का क्लेम बिना पढ़ा लिखा व्यापारी जैसा आदमी करता है तो ये क्यों नहीं ऑब्जेक्ट करते उस बात को ब्रिज कोर्स जब गवर्नमेंट चलाती है कि बीएमएस की डिग्री करके छ में बिज कोर्स करके तुम पैरामल लिखो ऑब्जेक्ट करना चाहिए दोनों को मिलने की जरूरत है जुगल बद की जरूरत है ले अलग-अलग कोई साइंस मेडिकल साइंस नहीं काम क्योंकि ह्यूमन बॉडी नॉट मेड बाय ह्यूमन ये नेचर ने बनाया है इसको ठीक कर जी एगजैक्टली सिद्धू ने जो कहा है और जो सिद्धू ने किया है वो यही किया है एटली य किया है दोनों के तालमेल का से बेहतर इस्तेमाल से फायदा हो सकता है ऐसा उन्होंने कहा है डॉक्टर मंडल आप कुछ ऐड करना चाहते हैं लेकिन हम यहां एक छोटे से

5:23 ब्रेक के लिए रुक रहे हैं ब्रेक के बाद डॉक्टर

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