0:01 हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो नमस्कार आदाब गुड इवनिंग दोस्तों आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है और आप सभी के साथ दोस्तों हम लोग क्या करेंगे अपने प्यारे से नए चैप्टर को स्टार्ट करने वाले हैं है ना तो सारे बच्चों का बहुत-बहुत स्वागत और बहुत अच्छे तरीके से दोस्तों हम लोग क्या करेंगे अपनी आज के इस क्लास को आप सभी के समक्ष पेश कर देंगे गुड इवनिंग गुड इवनिंग गुड इवनिंग दोस्तों बहुत-बहुत स्वागत है आप सभी का उम्मीद कर रहे हैं कि आप सभी बच्चों तक हमारी आवाज बिल्कुल सही तरीके से पहुंच रही है और हर एक प्यारा बच्चा हर एक प्यारा दोस्त हर एक प्यारा साथी हमें बहुत अच्छे तरीके से सुन पा रहा है गुड इवनिंग गुड इवनिंग गुड इवनिंग सर राम राम सर सलाम वालेकुम सर वालेकुम सलाम सर जी आप कैसे हैं मैं एकदम बढ़िया हूं सर जी राधे-राधे सर जी नमस्ते हर एक प्यारे बच्चे का हर एक प्यारे दोस्त का हर एक प्यारे साथी का बहुत-बहुत प्यार भरा स्वागत है रात के बजने लगे हैं 8:30 और आप सभी के साथ
0:48 दोस्तों हम लोग क्या करेंगे अपनी आज के इस क्लास में एक बहुत ही जबरदस्त अध्याय को आप सभी के साथ डिस्कस करने के लिए आ गए हैं और दिव्या जी हमारे साथ हैं तस्क जी हमारे साथ हैं आदित्य हमारे साथ है प्रियांशु रौनक मिस पाय प्रतीक कार्तिक अलोन उसी के साथ है प्रियांशु कुमारी हैं प्रियांशु कुमारी तो हर एक दोस्त का हर एक साथी का बहुत-बहुत स्वागत है उम्मीद करते हैं दोस्तों कि हम लोग अपनी आज की इस क्लास को आप सभी के साथ जितने जोश के साथ करने के लिए तैयार हैं आप भी उसको उतने अच्छे तरीके से समझने के लिए तैयार है जैसा हम लोगों ने आप सभी से पूछा था कल की क्लास के अंतर्गत कि आप लोग कौन से चैप्टर को कराना चाहते हैं और कल के साथ-साथ इस चैप्टर की ना बहुत दिनों से हमें डिमांड दिख रही थी जिसको हम लोग कहते हैं वन समाज और जीव संसाधन है ना वन और वन्य जीव संसाधन यह हमारा इस पूरे चैप्टर का नाम है
1:35 और इस पूरे चैप्टर के अंदर ना दोस्तों हमें बहुत सारी मजेदार बातें जानने को मिलेंगी ठीक है अब ये चैप्टर का नाम क्या है बेटा चैप्टर का नाम देख लेते हैं वन और वन्य जीव संसाधन ये हमारे चैप्टर का नाम है और यह वाला चैप्टर हमें कहां देखने को मिलता है दोस्तों कि आपकी जो ज्योग्राफी या फिर जिसको हम लोग भूगोल कहते हैं ना वहां पर हमारा ये अध्याय मौजूद है अब चाहे आप यूपी बोर्ड के हो बिहार बोर्ड के हो एमपी बोर्ड के हो राजस्थान बोर्ड के हो छत्तीसगढ़ बोर्ड के हो हिमाचल प्रदेश बोर्ड के हो या फिर आप हो हरियाणा बोर्ड के या फिर उसी के साथ-साथ सीबीएससी बोर्ड के हो या फिर आप रशिया बोर्ड के हो यूक्रेन बोर्ड के हो अमेरिका बोर्ड के हो जापान बोर्ड के हो या फिर आप देखते हो जिंबाब्वे बोर्ड के हो आप किसी भी बोर्ड के स्टूडेंट हो आप सभी के बोर्ड्स के अंदर हमारा यह चैप्टर हमें देखने को मिल रहा है जिसका नाम है वन्य और वन्य जीव संसाधन और
2:20 इस चैप्टर की ना हम लोग क्या करेंगे दोस्तों आप सभी के साथ बहुत जबरदस्त तरीके से चीजों को डिस्कस करते चलेंगे है ना आवाज बिल्कुल सही है बेटा आपको अपनी तरफ से आवाज को बढ़ाना होगा क्योंकि हमारी तरफ से आवाज बिल्कुल सही है सनातन है ना सनातन वाल्हा करके जो ये बच्चा है हमारी तरफ से आवाज बिल्कुल सही है और इस चैप्टर को डिस्कस करेंगे बहुत महत्त्वपूर्ण चैप्टर होने वाला है और उस चैप्टर की सारी बारीकी को हम लोग एक-एक कर कर आपके सामने रखेंगे बस करना क्या है क्या आपको ना बहुत अच्छे तरीके से अपने इस पहरे से चैप्टर को शुरुआत से लेकर आखिर तक समझना होगा मुश्किल से एक घंटे के अंदर हमारा ये पूरा चैप्टर कंप्लीट हो जाएगा और बहुत सारी बातें आपको चैप्टर के संदर्भ में जानने को सीखने को पढ़ने को देखने को मिलने वाली हैं ठीक है स्टार्ट करते हैं और किसी भी तरीके का कोई भी कंफ्यूजन आपके सामने बिल्कुल भी रहने ही नहीं देते हैं स्टार्ट कर रहे हैं बेटा वन और वन्य जीव संसाधन
3:08 भूगोल ज्योग्राफी के अंतर्गत हमें ये चैप्टर देखने को मिल रहा है हमारे सारे बोर्ड्स के अंदर ये चैप्टर हमें देखने को मिलता है और इसकी सारी कहानी को हम लोग पढ़ते चलेंगे ठीक है सबसे पहले आपके सामने एक शब्द रखा गया है जिसे हम लोग वन कह रहे हैं वन का मतलब क्या है बेटा वन को मतलब हम लोग जंगल के तरीके से भी जानते हैं और वन्य जीव संसाधन का मतलब कि जंगल में रहने वाले जो हमारे जीव हैं या फिर जंगल में रहने वाले हमारे जानवर होते हैं उसी से संबंधित हमारा ये पूरा का पूरा अध्याय हमारे सामने यहां पर रखा जा रहा है अब आप लोग अगर चाहते हैं कि हम लोग अपने प्यारे से चैप्टर को स्टार्ट करें तो उसके लिए आपको एक चीज करनी पड़ेगी क्या मेरे को भैया जल्दी से तुम लोग क्या करो दोस्तों कि वो जो हमारी फायर वाली इमोजी है वो आप लोग शेयर करेंगे एंड देन वी विल बिगिन एक बार जल्दी से आप लोग हमारे साथ है ना क्या करेंगे अपने आज के इस चैप्टर को स्टार्ट कराने के लिए फायर वाली इमोजी हमारे साथ शेयर करेंगे और फिर झम झमाझम तरीके से हम
3:53 लोग आप सभी के साथ अपने इस प्यारे से चैप्टर को स्टार्ट कर देंगे बड़ा मजेदार चैप्टर है जिसे कहा जा रहा है वन एव वन अन्य जीव संसाधन और इस चैप्टर के अंतर्गत हम लोग आपके साथ अपने आज के इस लेक्चर को स्टार्ट करेंगे लेकिन मेरे को फायर वाली इमोजी एक बार आप लोग जल्दी से शेयर कर दीजिए बहुत बढ़िया आजम रजा साहब आपका नाम ले लिया गया चलो स्टार्ट करते हैं बेटा अब यहां पर ना हम लोग सबसे पहले आपके सामने एक वर्ड को प्रस्तुत कर रहे हैं जिसे कहा जा रहा है जैव विविधता अब ये जैव विविधता का मतलब क्या है सबसे पहले आपको यही समझना होगा आप सभी लोग इस शब्द के बारे में जानते हैं जिसको हम लोग कह रहे हैं विविधता इसका मतलब क्या होता है बेटा इसका मतलब होता होता है अलग-अलग होना विविधता का मतलब क्या है अलग-अलग होना तुम अपनी क्लास में ही देखो तुम्हारी क्लास के अंदर कोई लंबी हाइट का होगा कोई छोटी हाइट का होगा कोई थोड़ा आप देखते हैं कि हैवी होगा कोई इतना
4:39 पतला होगा कोई तेज बुद्धि वाला होगा कोई हल्की बुद्धि यानी कि मन बुद्धि के तरीके से होगा कोई अच्छा बोलता होगा कोई घबरा घबरा के बोलता होगा हर एक क्लास में मौजूद जो हमारे बच्चे हैं वो एक दूसरे से भिन्न-भिन्न है ऐसे ही देश के अंतर्गत अगर हम लोग देखें तो हमें क्या देखने को मिलता है हमें अलग-अलग धर्म अलग-अलग जाति अलग-अलग भाषा के लोग देखते हैं ऐसे ही अगर हम लोग अपने जंगलों को देखने की कोशिश कर जंगलों के अंदर भी हमें विविधता देखने को मिलती है या फिर हम लोग कह सकते हैं कि हमें अलग-अलग तरीके के पेड़ या फिर अलग-अलग तरीके के जानवर देखने को मिलते हैं और किसी भी इलाके के अंदर किसी भी क्षेत्र के अंदर जितने ज्यादा हमें क्या देखने को मिलते हैं दोस्तों कि जंगली जंगली जंगली जानवर या फिर हमें जो हमारे पादप होते हैं या फिर जो हमें पेड़-पौधे देखने को मिलते हैं जितने ज्यादा अलग-अलग आपके पास आप देखते हैं कि जानवर हैं जितने ज्यादा आपके पास अलग-अलग आप देखते हैं दोस्तों कि पेड़-पौधे हैं इसी को हम लोग
5:25 जैव विविधता कहते हैं जैव का मतलब है जानवर विविधता का मतलब क्या है दोस्तों कि अलग होना भिन्न-भिन्न प्रकार के जानवरों का भिन्न-भिन्न प्रकार के आपके पास क्या है पेड़ों का होना जंगलों का होना इसी को हम लोग जैव विविधता कहते हैं जितनी ज्यादा जैव विविधता होगी जितनी ज्यादा हमारे पास ज्यादा से ज्यादा जानवर होंगे ज्यादा से ज्यादा हमारे पास पेड़ पौधे होंगे उतना ही आप देखते हैं दोस्तों कि उतनी ही आप क्या कर पाएंगे अपने पर्यावरण में संतुलन बना पाएंगे तो भारत के संदर्भ में पूरे भारत को अगर आप देखें उत्तर से लेकर दक्षिण तक पूर्व से लेकर पश्चिम तक तो आपको बहुत सारे भिन्न-भिन्न प्रकार के जानवर देखने को मिलते हैं अलग-अलग प्रकार के आपको क्या देखने को मिलते हैं पेड़-पौधे ज ज कश्मीर के अंदर अलग तरीके की हमारी क्या है दोस्तों कि हमें पादप देखने को मिलेगा और इस हिस्से में हमारे पास अलग तरीके के पेड़-पौधे हैं इस तरीके के इस हिस्से में हमारे पास अलग प्रकार के जानवर हैं यहां पर हमें अलग प्रकार के क्या मिलते हैं
6:10 दोस्तों जानवर देखने को मिल जाते हैं है ना अब ये जैव विविधता आखिर हमारे लिए इतनी महत्त्वपूर्ण काहे को है इसको हम लोग यहां पर समझने की कोशिश करेंगे ये जो जैव विविधता है ना दोस्तों ये हम सभी के अस्तित्व के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है अब देखिए पूरा का पूरा जो हमारा मानव का अस्तित्व है ये जानवरों के ऊपर या फिर हमारे पर्यावरण के तुलन को बना बनाने के लिए टिका हुआ है है ना अगर आप ध्यान से सुने आप लोगों ने इस बात को जरूर ध्यान से सुना होगा कि छोटी-छोटी चिड़ियां होती हैं अगर आपने देखा होगा जो आपके घरों के आसपास हमें देखने को मिलती हैं और अगर इनकी हम देख रहे हैं कि दोस्तों ये जो हमारी छोटी-छोटी चिड़ियां हैं जिनको गौरैया कहा जाता है स्पैरोज इन्हें इंग्लिश में कहते हैं इनकी हमें हत्या होते हुए दिख रही है बड़े लेवल पर हम देखें कि ये मर रही हैं क्यों क्योंकि हमने हाई टेंशन तारों को लगा दिया है हमने अलग-अलग तरीके से अपने
6:56 आप देखते हैं दोस्तों कि बड़े लेवल पर हमारी जो अ दूर संचार के यंत्र हैं जो मोबाइल के कनेक्शंस होते हैं उसके लिए हमने टावर्स को लगाया जिससे ये जानवर हमें समाप्त होते हुए देख रहे हैं सर ये जानवर अगर मर भी जाएंगे तो क्या फर्क पड़ेगा ये हमारे पृथ्वी के बैलेंस को बनाए रखने में सबसे बड़ा योगदान दे रहे हैं हर एक छोटा से छोटा जानवर अगर हमारे पास हमने क्या कर दिया दोस्तों कि अगर मान लीजिए कि हमने जो शाकाहारी जानवर है उनको अलग कर दिया या फिर हमने अपने मांसाहारी जानवरों को अलग कर दिया और अब हम ये कहे कि शाकाहारी जानवरों को ना हम कुछ खिला देंगे मांस की जगह कुछ खिला देंगे तो ये जो जितने भी हमारे हिरन है बकरियां हैं इनको कुछ नहीं होगा जो हमारे जंगलों में रह रहने वाले हैं ऐसा नहीं होगा पर्यावरण पर ना आप देखते हैं दोस्तों कि हर एक चीज का एक तरीके से बैलेंस बनाया गया है शाकाहारी जानवरों का अस्तित्व मांसाहारी जानवरों पर टिका हुआ है है ना और हर एक इंसान क्या है
7:41 दूसरे की जरूरत को पूरा कर रहा है एक तरीके की फूड पाइप या फिर एक फूड चेन हमें दिखता है है ना और अगर शाकाहारी जानवरों को बड़े तौर पर आप देखते हैं दोस्तों कि संरक्षित रखा जाएगा इनकी जनसंख्या बढ़ जाएगी ये पूरे तौर पर हरियाली को खत्म कर सकते हैं है ना मानव के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए मानव के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए हमें उचित तरीके से पेड़-पौधे और भिन्न-भिन्न प्रकार के जानवरों की जरूरत है और इसी से आपका और हमारा सभी का जीवन बहुत ही सरलतम तरीके से हमें गुजरता हुआ देखने को मिलेगा अगर इनमें से एक भी जानवर एक भी चीज हमें कम होती हुई दिखी तो हमारे जीवन के लिए बहुत बड़ी परेशानी हो सकती है अब यहां पर एक शब्द आपके सामने पेश किया जा रहा है जिसे हम लोग कह रहे हैं वनस्पति जगत अब आप इसे वनस्पति जगत कह सकते हैं आप इसे क्या कह सकते हैं आप इसे पादप जगत के नाम से जान सकते हैं या फिर इसे वनस्पति जात के नाम से भी जाना जाता है तो अलग-अलग पाठ्य पुस्तकों में अलग-अलग तरीके से रखा जा रहा है बेसिकली हम लोग ये
8:29 समझने की की कोशिश कर रहे हैं अपने इस टॉपिक के अंदर कि हमारे प्यारे भारत के अंतर्गत कितने प्रकार के हमें पेड़-पौधे देखने को मिलते हैं क्या भारत में सिर्फ एक तरीके के पेड़ है जो लंबे से हैं क्या भारत में सिर्फ एक तरीके के हमें अ पेड़-पौधे देखने को मिलते हैं तो भारत के अंदर वनस्पतियां कितनी हैं भारत के अंतर्गत जैव विविधता यानी कि पेड़ों के मामले में भारत बहुत ही समृद्ध देश है क्यों क्योंकि भारत में ना लगभग 47000 के भी प्रकार से भिन्न-भिन्न प्रकार लगभग 47000 से भी ज्यादा अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधे हमें देखने को मिल जाते हैं और इनमें से तकरीबन जो 1500 के करीब हमारी वनस्पतियां हैं या फिर 1500 के करीब जो हमारे पेड़ हैं वो हमें लुप्त होते हुए या फिर समाप्त होते हुए देखने को मिल रहे हैं तो भारत आप क्या देख रहे हैं दोस्तों कि अ पेड़ों के मामले में बहुत ज्यादा समृद्ध है भारत के अंदर बड़ी संख्या में आपको पेड़-पौधे देखने को मिलते हैं 47000 के
9:16 करीब अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधे हैं बड़े हैं छोटे हैं नन्हे हैं मुन्ने हैं हरियाली वाले हैं काले नीले अलग-अलग रंगों के हैं और उसी के साथ-साथ इनमें से तकरीबन 1500 के करीब जो हमारी वनस्पतियां हैं वो हमें विलुप्त या फिर समाप्त होती हुई दिख रही हैं सर जानवरों के बारे में बताओ ना अगर भारत के अंदर हम लोग प्राणी जगत या फिर प्राणी जात की बात करें कि भारत के अंतर्गत जितने भी हमारे ये जानवर हैं ये हमें किस परिपेक्ष में देखने को मिल रहे हैं हमारे भारत के अंतर्गत आप देखें दोस्तों कि हमारे यहां पर हर प्रकार का जानवर आपको देखने को मिल जाएगा आप अगर देखें तो भारत में हमारे पास 21000 से भी ज्यादा क्या है अलग-अलग प्रकार की जानवर की प्रजातियां हैं 81000 से भी ज्यादा अलग-अलग जानवरों की प्रजातियां 81000 आप कल्पना नहीं कर सकते इसमें रेंगने वाले रेंगने वाले हमारे जानवर हैं दौड़ने वाले हमारे जानवर हैं भागने वाले वाले हमारे जानवर हैं है ना चार पैर वाले है ना इस
10:02 तरीके के जानवर हमें देखने को मिल रहे हैं दो पैर वाले हमारे जानवर हमें देखने को मिल रहे हैं तो वहीं पर देखा जाए दोस्तों कि भारत के अंदर जो हमारे बड़े स्तनधारी हैं यानी कि जो बड़े-बड़े जानवर हैं वो लगभग 79 के करीब हैं पक्षियों की प्रजातियां हमारे पास 84 हैं सरी सर्प सरी सर्प का मतलब जो रेंगने वाले हमारे जानवर होते हैं वो 15 के करीब हैं और जो जलचर है यानी कि जो पानी और जल दोनों पे रहते हैं वो आपको तीन के करीब दिखते हैं और इनकी ये हमें लुप्त होते हुए दिख रहे हैं जैसे हमारा आप देखते हैं कि मगरमच हुआ है ना ये हमें लुप्त होता हुआ भारत के संदर्भ में देखने को मिल रहा है तो भारत में जानवर बहुत हैं तकरीबन 81000 के करीब जानवर हैं बड़े जानवर 89 के करीब है 89 जातियां हैं उनकी पक्षियों के संदर्भ में 44 अलग-अलग जातियां हैं सरी सर्प यानी कि हमारे रेंगने वाले 15 प्रकार के अलग-अलग तरीके के हमारे रेंगने वाले हमें जानवर देखने को मिलते हैं अब ना एक अलग ही तरीके का क्या
10:48 हुआ दोस्तों कि हमारे सामने एक आंकड़ा प्रस्तुत किया गया अब तक हमने जैव विविधता क्या होती है वो देखा हमारे यहां पर कितने प्रकार के पेड़-पौधे हैं वो देखा हमारे यहां पर कितने प्रकार के जानवर हैं वो हमने देख अब यहां से कहानी बड़ी इंटरेस्टिंग होगी तो ध्यान से सुनिए क्या है कि हमारे सामने एक इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन है एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसे कहा जाता है इंटरनेशनल यूनियन फॉर दी कंजर्वेशन ऑफ नेचर शॉर्ट फॉर्म में क्या कहते हैं आई यू सी एन फुल फॉर्म क्या है बेटा इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर तो आईयूसीएन करके एक ऑर्गेनाइजेशन है ये एक एनजीओ टाइप का है जो दुनिया भर के अंतर्गत जितने भी जानवर हैं दुनिया में कितने जानवर हैं किस देश के अंतर्गत वो अगर ज्यादा है तो क्या-क्या उनके नाम है तो एक संगठन है जिसका नाम है आईयूसीएन और इस आईयूसीएन ने क्या किया
11:35 इसने ना भारत के अंतर्गत पाए जाने वाले जितने भी हमारे जानवर हैं उनको छह कैटेगरी के अंदर बांट दिया है तो आईयूसीएन ने क्या किया भारत के अंतर्गत जितने भी हमारे जानवर हैं उनको छह कैटेगरी के अंदर बांट दिया है इनमें से एक कहलाती है सामान्य जाति दूसरी कहलाती है संकट ग्रस्त जाति तीसरी कहलाती है सुबे जाति चौथी कहलाती है दुर्लभ जाति पांचवी कहलाती है स्थानिक जाति और छठवीं कहलाती है लुप्त जातियां तो आई यू सी करके ये जो संगठन है इसने भारत के अंतर्गत हमारे जितने भी जानवर है ना बहुत सारे जानवर हैं हमने देखा 81000 के करीब है इनको छह कैटेगरी के अंदर बांट दिया अब हम लोग एक-एक कर करर अपने सारी की सारी जो जानवरों की कैटेगरी है उनको समझने की कोशिश करेंगे और सबसे पहले यहां पर हम लोग क्या करेंगे दोस्तों आप सभी के साथ डिस्कशन करेंगे सामान्य जाति के बारे में किसके बारे में सामान्य जाति के बारे में हम लोग यहां पर डिस्कशन करने वाले हैं अब
12:22 यहां पर दोस्तों आप देखते हैं कि सामान्य जाति का मतलब क्या है सामान्य जाति के मतलब का है कि ऐसे जानवर ऐसे जानवरों को सामान्य जाति के अंतर्गत रखा जाता है इस कैटेगरी के अंतर्गत रखा जाता है जिनके जीवन पर कोई खतरा नहीं है इनकी संख्या बहुत सारी है जितने भी आपके पालतू जानवर हैं जैसे आपके गली मोहल्लों में आप जाओ आपको बहुत सारे कुत्ते दिखते हैं आपको बहुत सारी बिल्लियां दिखती हैं आपको बहुत सारे चूहे दिखते हैं ऐसे हमारे जानवर जिनकी संख्या बहुत सारी है और ये बहुत सारे हैं ये खत्म नहीं होने वाले जो सामान्य तौर पर हमें देखने को मिल जाते हैं अधिकतर हमारे पालतू जानवर जैसे कुत्ता हुआ बिल्ली हुआ आप देख रहे हैं दोस्तों कि तोता हुआ मैना हुई ये सारे के सारे जानवर जो हैं ये कैसे कहलाते हैं हमारे सामान्य जाति के जानवर कहलाते हैं तो हमने क्या देखा हमारे पास एक संगठन है जिसका नाम है आईयूसीएन और आईयूसीएन ने क्या किया दोस्तों कि हमारे सामने क्या पैदा किया है
13:07 एक तरीके से छह कैटेगरी बताई और इसमें सबसे पहले हमने सामान्य जाति के जो जानवर हैं उनके बारे में डिस्कशन किया सामान्य जाति का मतलब क्या है कि ऐसे हमारे जानवर जो सामान्य तौर पर हैं जो अभी उपस्थित है और उनके बारे में हमें वो अभी हमें खत्म होते हुए नहीं दिखे जितने भी पालतू जानवर हैं वो सामान्य जाति की कैटेगरी के अंतर्गत आते हैं अब हम लोग आगे बढ़ेंगे और यहां पर हम लोग क्या करेंगे आपके साथ डिस्कशन करना चाहेंगे कि किसके बारे में हम लोग डिस्कशन करना चाहेंगे संकटग्रस्त जाति अब ये संकटग्रस्त जाति क्या है और संकटग्रस्त जाति से संबंधित क्या-क्या पॉइंट हमारे सामने आए उससे पहले हम लोग क्या करेंगे दोस्तों मैं आप सभी से एक व्यक्ति का परिचय कराना चाहूंगा जी जी जी थोड़ा सा टाइम देते हैं सर दो मिनट है ना तो एक बहुत ही परम मित्र हैं मेरे और अभी-अभी वो आए हैं और हम अपेक्षा करते हैं
13:52 कि हम आपको उनसे मिला दें कि आप लोग उनसे मिल ले उनको थोड़ा सा मिल ले बातचीत कर ले है ना तो पूरे सर्वस के साथ बहुत ही इज्जत और एहतराम के साथ बड़े ही अदब के साथ बड़े ही प्यार के साथ हम लोग क्या करना चाहेंगे आपको आमंत्रित करना चाहेंगे एक व्यक्ति आएंगे आपसे मिलेंगे और हमारे मित्र हैं और काफी दूर से आए हैं और आपसे परिचय करना चाहेंगे ठीक है बुला लेते हैं आ जाइए सर आ जाइए आ जाइए आ जाइए सर आ जाइए आ जाइए ये संकटग्रस्त जाति से हैं जिनको हम बुला रहे हैं किनको बुला रहे हैं हमारे जो मित्र आपके सामने आ रहे हैं ये हमें कौन सी जाति से दिखते हैं ये जो हमारे मित्र हैं ये आपको संकटग्रस्त जाति से दिखते हैं कौन है भैया आ जाइए आ गए ये है चलो बच्चों को कुछ बोलो यह बोला हाय बोला दोबारा बोलो हमारे बच्चों को हाय देखो बहुत दूर से आए हैं नाम है इनका आप
14:38 देख पा रहे हैं चंपक तो मिस्टर चंपक इज माय फ्रेंड बहुत दूर से य आए हैं और आप सभी को हाय कह र हैं दोबारा बोलो हां ऐसे बोलते रहो लगातार ठीक है तो हमारे दोस्त हैं इनका नाम है चंपक और चंपक जो है आपको दिखता है दोस्तों कि बहुत दूर से आए हैं आपसे मिलने के लिए और ये आपको हाय कह रहे हैं चंपक का जो संबंध है ना दोस्तों आप क्या देखते हैं कि हमारे जो चंपक भाई साहब हैं इनका संबंध हमें कहां से दिख रहा है इनका संबंध आप देख पा रहे हैं कि जो हमारे चंपक भाई साहब है इनका संबंध हमें संकटग्रस्त श्रेणी से आता हुआ देखने को मिल रहा है संकटग्रस्त श्रेणी का मतलब क्या है कि हमारे देश के अंतर्गत सामान्य जाति के जानवर वो थे जो अभी है कभी खत्म नहीं होंगे अरे भैया बहुत सारे हैं चूहे बिल्ली जितने भी हमारे पालतू जानवर हैं ये खत्म नहीं होने वाले संकट ग्रस्त नाम से ही क्लियर है भैया हमारे
15:24 ऐसे जानवर इन इस कैटेगरी में उन जानवरों को रखा जाता है जो लुप्त हो रही हैं या फिर समाप्त हो र हैं जिन पर संकट बना हुआ है और इनको क्या हुआ है कि लोगों ने ना जानवर मनुष्य ने क्या किया इन जानवरों को या तो मारा है या फिर या फिर इनके लिए जो पर्यावरण की जो अवस्था थी वो सही नहीं है इनके जंगल खत्म हो गए तो ऐसे हमारे जानवर जिनकी संख्या बहुत तेजी से समाप्त हो रही है जो खत्म हो रहे हैं ऐसे जानवरों को हमने संकट ग्रह श्रेणी के अंतर्गत रखा है और आप देखें दोस्तों कि अगर हमने इन जानवरों को नहीं बचाया तो ये क्या हो जाएंगे ये लुप्त हो जाएंगे लुप्त का मतलब क्या है कि ये पृथ्वी पर दिखेंगे ही नहीं ये पूरे तौर पर समाप्त हो जाएंगे ऐसे हमारे जानवर जो पूरे तौर पर समाप्त होने के कगार पर है जो खत्म हो सकते हैं जिन पर खत्म होने का संकट बना हुआ है उनको हम लोग संकटग्रस्त श्रेणी में रखते हैं कौन-कौन से जानवर हैं ऐसे जैसे हमारा काला हिरण हुआ जैसे हमारा आप देखते हैं दोस्तों कि
16:11 मगरमच्छ हुआ जैसे कि आप देखते हैं दोस्तों कि हमारा भारतीय जंगली गधा हुआ उसी के साथ-साथ हमारा आप देखते हैं कि शेर जैसी पूंछ वाला बंदर हुआ तो ये जो हमारे चार प्रकार के आपको जानवर दिख रहे हैं इनको हम लोग संकट ग्रह श्रेणी में रखते हैं ये बहुत तेजी से खत्म हो रहे हैं अगर इनको नहीं बचाया तो यह जानवर पूरे तौर पर खत्म हो जाएंगे तीसरे तरीके के जो हमारे जानवर हमें देखने को मिल रहे हैं उनके बारे में भी हम लोग क्या करेंगे दोस्तों आप सभी के साथ डिस्कशन करेंगे और उसको भी हम लोग बहुत अच्छे तरीके से आपके समक्ष रखने की कोशिश करेंगे तो यहां पर तो मैंने आपको अपने प्यारे दोस्त से मिला दिया था जो था हमारा चंपक अब चंपक के बाद हम लोग आपको लेके चलेंगे आगे और चंपक से हम लोग आपको लेके चलेंगे अपने कुछ अलग कैटेगरी के जानवरों से मिलवाने के लिए यहां पर हम लोग आपके सामने क्या करेंगे अपने दो दोस्तों को मैं दोबारा बुलाना चाहूंगा ठीक है और मैं अपने
16:57 दो दोस्तों का परिचय आपको करा देता हूं इन दो दोस्तों का नाम है एक है ना एक मेरी महिला मित्र है और एक मेरा पुरुष मित्र है महिला मित्र का नाम है और पुरुष मित्र का नाम है आप देखते हैं कि चीकू आओ ना आजा आ गई आ गई डांस करके दिखाओ बल्ले बल्ले बल्ले बल्ले दोस्तों हमारे सामने यहां पर प्रस्तुत है हमारी प्यारी बहुत दूर से आई है और आप सभी को कर रही है क्या दोस्तों उछल उछल कर सलाम से आपका परिचय करा दिया गया है उसी के साथ-साथ दोस्तों तो है ही और हम लोग आप के सामने अपने चीकू को भी लेकर आए हैं ये देखो भैया चीकू तो भैया एकदम मदमस्त आदमी है एकदम बड़ा सा है जाइंट हमने अब तक सामान्य जाति के बारे में पढ़ा हमने अभी तक आप सभी के साथ डिस्कशन किया संकटग्रस्त जाति के बारे में और
17:43 संकटग्रस्त के अंतर्गत हमने अपने शेर जैसे पूंछ वाले बंदर जंगली गधा उसी के साथ-साथ काली हिर इसके बारे में जाना ये भारत के अंतर्गत हमारे सामने तीसरे प्रकार की कैटेगरी है जिसको हम लोग कह रहे हैं सुबे जाति और सुबे जाति के अंतर्गत हमें क्या देखने को मिलता है हमारी और उसी के साथ-साथ हमा हमारा चीकू देखने को मिलता है कौन-कौन इनको देखते हैं है ना एकएक कर कर इनके बारे में डिस्कशन कर लेते हैं ठीक है हाय चीकी हाय चीकू कैसे हो चकी बढ़िया हूं अच्छा सब बढ़िया है हां चलो बढ़ते हैं आगे ये हमारे भारत के अंतर्गत तीसरे प्रकार की जानवरों की कैटेगरी है जिसको हम लोग कह रहे हैं सुभेद्य सुभेदार समझने की कोशिश करते हैं देखो सुभदर्शनी संख्या कम हो रही है लेकिन इनकी
18:30 संख्या ना बहुत तेजी से कम नहीं हो रही यानी कि ये जानवर कम तो हो रहे हैं लेकिन ये एकदम से खत्म नहीं हो रहे संकट ग्रस्त वाले तो बहुत तेजी के साथ खत्म हो रहे हैं अगर नहीं बचाया तो समाप्त हो जाएंगे सुबद्र कैटेगरी के अंतर्गत उन जानवरों को रखा जाता है जिनकी संख्या कम तो हो रही है लेकिन इनकी जो संख्या है कम होने की जो स्पीड है वो ज्यादा नहीं है ये धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं और अगर हमने इनको नहीं बचाया तो ये एक दिन संकटग्रस्त श्रेणी में आएंगे और उसके बाद फिर ये लुप्त हो जाएंगे तो ऐसे हमारे जानवर जिनकी संख्या घट तो रही है लेकिन तेजी से ये नहीं घट रही हैं इनके लिए जो जलवायु है वोह परिवर्तित हो रही है अगर इनको नहीं बचाया तो यह संकटग्रस्त श्रेणी में आ जाएंगे और उसके बाद ये समाप्त हो जाएंगे तो ऐसे जानवरों के जिनकी संख्या घट तो रही है लेकिन तेजी से नहीं घट रही उनको हम लोग संकट ग्रह श्रेणी में ना रखकर सुबे जती जाति में रखते हैं जैसे इसके अंतर्गत हमारी नीली
19:16 भेड़ है ऐसे ही हमारा एशियाई हाथी यानी कि हमारा चीकू ऐसे ही हमारी गंगा की डॉल्फिन यानी कि हमारी तो हमारा चीकू और उसी के साथ-साथ आप देखते हैं दोस्तों कि जो हमारे नीली भेड़ हैं ये सारे के सारे हमें सुवेद जाति के अंतर्गत दिखते हैं संख्या कम तो हो रही है लेकिन इनकी संख्या आप क्या देखते हैं दोस्तों कि एकदम से आपको कम होते हुए देखने को नहीं मिलती अब बढ़ेंगे आगे यहां पर हमारे सामने दोस्तों एक और प्रकार की कैटेगरी है जिसको कहा जा रहा है दुर्लभ प्रजाति सर यह कौन से बोर्ड का है जापान बोर्ड का है जापान ठीक है पूछा जा रहा है दोस्तों कि यहां पर दुर्लभ जाति का मतलब क्या है इसको हम लोग यहां पर समझने की कोशिश करते हैं और हर बिंदु को बहुत अच्छे तरीके से आपके सामने पेश करते हैं अब दुर्लभ जाति का मतलब क्या है आपने शब्द को जरूर सुना होगा जिसे कहा जाता है दुर्लभ है ना आपने जरूर इस शब्द
20:01 को सुना होगा जिसे कहा जाता है दुर्लभ दुर्लभ का मतलब क्या है दोस्तों आपने सुना होगा ये बहुत दुर्लभ मोती है यह बहुत दुर्लभ कपड़ा है यह बहुत दुर्लभ जगह है दुर्लभ का मतलब जो चीज हमें कम देखने को मिलती है है ना यानी के दुर्लभ का मतलब होता है कि ऐसे हमारे जानवर जिनको आप लोग क्या देखते हैं दोस्तों कि जिनको ईश्वर के जरिए बहुत कम ही बनाया गया ऐसे जानवर जिनको प्रकृति के जरिए बहुत जिनकी संख्या ही हमेशा से कम रही है यानी कि बनाने वाले ने कि प्रकृति ने ईश्वर ने इनको बहुत कम ही बनाया है ये कम है ये दुर्लभ है ये बहुत कम देखने को मिलते हैं इस कैटेगरी में भारत के अंतर्गत ऐसे जानवरों को रखा जाता है जिनकी संख्या शुरू से ही कम है यानी कि बनाने वाले ने इनको बहुत कम बनाया है और इन जानवरों पर भी खतरा आ रहा है अगर इनको नहीं बचाया तो ये भी संकटग्रस्त श्रेणी में चले जाएंगे जैसे हमारा भूरा
20:47 भाली जैसे हमारा एशियाई भैसा जैसे हमारी रेगिस्तान की लोमड़ी जो शायद आप में से पहले कभी ने किसी ने ना देखी हो और हमारा हॉर्नबिल तो ये सारे के सारे जो हमारे जानवर हैं ये हमारे दुर्लभ जा के जानवर होते हैं जिनकी संख्या कम है और अगर हमने इनको नहीं बचाया तो यह एक दिन संकट ग्रस्त श्रेणी के अंतर्गत चले जाएंगे अब यहां पर ना मैंने आपके सामने दो चित्र रखे हैं अब इन दो चित्रों के बारे में भी हम लोग डिस्कशन करते हैं और इनको बहुत अच्छे तरीके से आपके सामने रखना शुरू कर देते हैं ठीक है चलो एक-एक कर कर इनके बारे में डिस्कशन करते हैं ये जो है बेटा आपके हिसाब से ये क्या है एक बार कमेंट करके आपको बताना है जल्दी से बताइएगा कि आपके हिसाब से यहां पर ये जो आदमी बैठा आदमी कह रहे हैं यहां पर ये जो बैठा है हमारा पक्षी ये क्या है ये क्या चीज है ये ये यह मोर है यह क्या है जल्दी से बताइएगा देखते हैं कि कौन बच्चा अपने आंसर को यहां पर
21:32 हमारे सामने पेश करेगा मोटिवेशन तुल साहब बहुत-बहुत शुक्रिया आपका एक बार जरा जल्दी से बताइए बेटा कि ये जो यहां पर हमारा पक्षी बैठा हुआ है ये आखिर क्या है इसका नाम क्या है क्या आपने इस पक्षी को पहली बार देखा है या इससे पहले भी आप देख चुके हैं एक बार आपको बताना है ओ हो हो किशन कुमार ने बड़ा अच्छा आंसर दिया है भैया और बच्चों के भी आंसर को जानते सर जी आई थिंक सो इट इज पिजन सर चलो एक बार देख लेते हैं है ना हमने आपसे पूछा कि ये किस तरीके का पक्षी है और अगर हम लोग देखें ना दोस्तों तो ये कबूतर है हैं सर ये कबूतर है सर हमने तो कभी नहीं देखा यह कबूतर बेटा ये कबूतर ही है और उसी के साथ-साथ दोस्तों अगर डिस्कशन करें कि ये क्या है तो यहां पर अगर आप लोग देख पा रहे हैं दोस्तों कि ये सूअर है है ना जिसको हम लोग पिग कहते हैं है ना सूअर सर इस तरीके का तो सूअर हमने देखा ही नहीं हमारे यहां तो अलग तरीके का होता है और हमारे यहां पर तो
22:18 कबूतर भी अलग तरीके का होता है ये भारत के अंतर्गत हमारी चौथे तरीके की जानवरों की कैटेगरी है जिसे कहा जाता है स्थानिक जाति स्थानिक जातियों के अंतर्गत हम ऐसे जानवरों को रखते हैं जो किसी एक भूमि के अंतर्गत ही ऐसे जानवर जो सिर्फ एक ही इलाके में दिखते हैं बाकी दुनिया में कहीं नहीं दिखेंगे जैसे यह जो कबूतर है इसका नाम है आप क्या देखते हैं निकोबारी कबूतर ये भारत के अंदर निकोबार के अंदर ही दिखेगा जो हमारा निकोबार द्वीप समूह है वहीं पर दिखता है ये दुनिया में कहीं और नहीं मिलेगा ऐसे ही ये जो हमारा क्या है सूअर है इसे कहा जाता है अंडमानी जंगली सूअर ये अंडमान के अंतर्गत ही हमें देखने को मिलता है और ऐसे ही हमारा अंडमानी टील करके एक जानवर होता है वो भी हमें अंडमान के अंदर ही देखने को मिलता है तो ऐसे जानवर जो किसी एक इलाके की भूमि के अंतर्गत ही बसे होते हैं और वहीं पर मिलते हैं उनको स्थानिक जाति के नाम से जाना जाता है और ऐसे ही हमारा एक और है इसको
23:04 क्या नाम से जाना जाता है क्या आप लोग बता सकते हैं ये जो हमारा जानवर है बेटा इसको हम लोग अरुणाचल प्रदेश के अंतर्गत देखते हैं दिखने में आपको ये सांड जैसा दिख रहा होगा लेकिन इसका नाम एक बहुत ही रोचक है बड़ा ही फनी नाम है और इसको कहा जाता है मिथुन कोई शक कोई शक कोई शक ग्रैंड सलूट देते हैं ये है ना तो ये है हमारा मिथुन और मिथुन जो है दोस्तों आप देखते हैं कि हमें कहां देखने को मिलता है ये सिर्फ अरुणाचल प्रदेश के अंदर जगत देखने को मिलेगा है ना तो मिथुन अरुणाचल प्रदेश का हुआ उसी के साथ-साथ आप देखते हैं कि अंडमान से अंडमानी जंगली सूअर निकोबारी कबूतर ये सारे जानवर हमें स्थानिक जातियों के अंतर्गत आते हुए देखने को मिलते हैं अब यहां तक हमने आपके साथ अपनी पांच कैटेगरी को देख लिया है हमारा एक कैटेगरी आपके सामने बचना बाकी है उसको हम लोग अब यहां पर डिस्कस करेंगे उसके लिए आपको जो वो लाइक का बटन दिख रहा है आपसे कह रहा हूं
23:49 वो देखो साइड में लाइक का बटन है एक बार जल्दी से जितने बच्चे अभी हमारे साथ उपस्थित हैं उतने तो लाइक हमारे साथ होने चाहिए और फिर हम लोग अपनी आगे की कहानी को प्रस्तुत करेंगे ठीक है फट से जितने साथी हमारे साथ अभी जुड़े हुए हैं आप सभी लोग फट फटाफट कर कर क्या करेंगे इस पर डिस्कस करेंगे इसका नाम है बेटा मिथुन है ना मिथुन है ना मिथुन यह हमारा मिथुन है अरुणाचल प्रदेश से आता है और वहीं पर यह हमें देखने को मिलता है एक बार जल्दी से वो जो लाइक का बटन है जो साइड में आपको दिख रहा है चैट बॉक्स में नहीं रियल वाला जो लाइक का बटन है उसको आप तोड़ दो फोड़ दो फट से उस पर क्लिक करो और फिर हम लोग अब आगे बढ़ना शुरू करेंगे जल्दी से सर सर जल्दी से बहुत बढ़िया और बहुत जबरदस्त तरीके से आप लोगों ने अपने आंसर्स को यहां तक हमारे सामने रखा है और लाइक का हमारा जो स्तर है वो भी आपको धीरे-धीरे बढ़ता हुआ दिख रहा
24:35 है जितने बच्चे उतना सामान्य होगा तब हम लोग फिर आगे बढ़ना शुरू करेंगे है ना तभी तो मजा आएगा दोस्तों है ना जल्दी से आप लोग लाइक के बटन को बढ़ा दें और फिर हम लोग फट फटाफट करके आगे बढ़ना अब शुरू करते हैं बहुत जबरदस्त ठीक है तो अब तक हमने आप सभी के साथ पांच तरीके के जो हमारी कैटेगरी थे उसको पढ़ लिया है हमने क्या-क्या देखा बेटा अब तक हमने इन पांचों कैटेगरी को बहुत अच्छे तरीके से पढ़ा है हमने सामान्य जाति के बारे में पढ़ा संकटग्रस्त जाति के बारे में पढ़ा सुभे जाति के बारे में पढ़ा दुर्लभ जाति के बारे में पढ़ा और स्थानिक जाति के बारे में पढ़ा अब ना हम लोग आप सभी को डिस्कशन करने वाले हैं आप सभी के साथ किसके बारे में हम लोग आप सभी के साथ डिस्कशन करेंगे हमारी जो एक और प्रकार की कैटेगरी है जिसको हम लोग किस नाम से जानते हैं दोस्तों जिसको हम लोग कहते हैं लुप्त कैटेगरी के नाम से अब ये जो हमारा लुप्त वाला पूरा का पूरा है इसको हम लोग एक-एक कर कर आपके सामने रखते चलेंगे और किसी
25:22 तरीके का कोई कंफ्यूजन बिल्कुल भी नहीं आने देंगे ठीक है चलो स्टार्ट कर रहे हैं है ना अब आपके सामने क्या करेंगे दोस्तों कि यहां पर हम लोग अपने नेक्स्ट बिंदु को आपके सामने स्टार्ट करने वाले हैं लुप्त कैटेगरी के बारे में लुप्त ये जो हमारी जातियां है ये क्या है सबसे पहले शब्द आपके सामने रखा जा रहा है जिसे लुप्त कहा जा रहा है अब मैं आप सभी से एक और व्यक्ति को या फिर एक हमारा मित्र है बहुत दूर से आया है उससे आपका परिचय कराना चाहूंगा यह रहा आजा आजा ना आता नहीं है तू नाटी बॉय आजा आजा मेरे दोस्त आजा ठीक है यह हमारा प्यारा दोस्त है दोस्तों बहुत दूर से आया है और देखो कैसे ठुमक ठुमक के चलता है हमारा प्यारा दोस्त है ना अच्छा ये जो है अगर मैं आपसे पूछूं कि इसका नाम क्या है क्या आप मुझे बता सकते हैं कि इस प्यारे से अ जानवर का नाम क्या है इसके बारे में
26:10 मैं आपसे जानना चाहूंगा कि आपके हिसाब से इसका नाम क्या है एक बार आप लोग जल्दी से बताएंगे ठीक है जल्दी बताइएगा दोस्तों है ना एक बार जल्दी से आप लोग बताएंगे कि इस इस इस प्यारे से जानवर का नाम क्या है जो बहुत ही ठुमक ठुमक के चल रहा है ये देखो कैसे स्टाइल से चल रहा है ये कहीं से इसकी पूंछ एकदम से लहरा रही है भैया एकदम से बादशाहों की तरह चल रहा है क्या है इसका नाम बहुत बढ़िया चीता चीता चीता चीता चीता देखो इसको हम लोग चीता कह रहे हैं दोस्तों और मैं आपको बताना चाहूंगा कि ये जो हमारा प्यारा सा चीता है ये कैसा चीता है बेटा कि ये दुनिया में अब एजिस्ट ही नहीं करता हैं दुनिया में नहीं है भाई दुनिया में तो है लेकिन हमारे प्यारे भारत के अंतर्गत है ही नहीं ये जो चीता है जो मैंने आपसे कहा कि बहुत दूर से आया है ये अफ्रीका का चीता
26:55 है जिसका वीडियो मैंने आपके सामने अभी प्ले किया था ये अफ्रीका का चीता है भारत के अंदर ना चीते लुप्त हो चुके हैं भारत से चीते समाप्त हो चुके हैं भारत के अंतर्गत चीते है ही नहीं इनका शिकार कर कर कर हमने खत्म कर दिया ये जो फोटो आपके सामने है ये अफ्रीका के चीते का यहां रखा गया है लुप्त कैटेगरी के अंतर्गत लुप्त जाति के अंतर्गत हम लोग ऐसे जानवरों को रखते हैं जो आपको कैसे दिखते हैं दोस्तों कि जो अब अपने मूल स्थान पर दिखते ही नहीं है यानी कि अब इनका अस्तित्व है ही नहीं ये समाप्त हो गए जानवरों को ऐसे जानवर जिनको मार दिया गया जिनको आप देखते हैं कि मनुष्यों के द्वारा समाप्त कर दिया गया उनको उनको हम लोग लुप्त जाति के अंतर्गत रखते हैं जैसे आपने कभी नहीं देखी होगी इस तरीके के जानवर जिसको कहा जाता है गुलाबी सिर वाली बत्तक है ही नहीं भाई खत्म हो गई समाप्त कर दी लोगों ने शिकार कर कर के खत्म कर दिया तो हमारी गुलाबी सिर वाली बत्तक हुई और हमारा एशियाई चीता हुआ भारत
27:42 का ये जो हमारा चीता है ये भी अब आपको समाप्त होता हुआ दिख रहा है तो ऐसे जानवर जो अब है ही नहीं जिनको खत्म कर दिया गया है इनको हम लोग लुप्त जाति के अंतर्गत देखते हैं ठीक है तो यहां तक हमने आप सभी के साथ जो हमारे ये प्यारे-प्यारे क्वेश्चंस रहे थे उनको एक-एक कर कर और इन सारे सारे बिंदुओं को हमने डिस्कस किया अब ना हम लोग आपके साथ कुछ क्या करेंगे बेटा क्वेश्चंस करेंगे पोल वाले ठीक है कुछ क्वेश्चंस करेंगे आपके साथ बहुत सारे हमारे पोल करके और फिर आपको आगे की चीजों को डिस्कस करते हैं सर ये कौन से बोर्ड का है अनिश पूछ रहे हैं बेटा ये सारे बोर्ड्स का है क्लास के स्टार्टिंग में बताया था हर बोर्ड के अंदर ये चैप्टर मौजूद है अब यहां पर हमारे सामने एक पॉइंट है बेटा एक क्वेश्चन आपके सामने रखा जा रहा है पूछा जा रहा है कि नीली भेड़ एशियाई हाथी और गंगा की डॉल्फिन कौन सी कैटेगरी के अंतर्गत आएगा कमजोर जाति दुर्लभ जाति स्थानिक जाति या फिर आप देखते हैं कि विलुप्त जाति चार ऑप्शन आपके सामने हैं और
28:29 आपको जल्दी से क्या करना है दोस्तों कि अपने सही आंसर को हमारे सामने पेश करना है ठीक है हां तो चार ऑप्शंस आपके सामने रखे गए हैं अच्छा ध्यान से सुनिए बेटा कि जो हमारी कमजोर जाति है इसको हम लोग सुभेदार के नाम से भी इसको पुकारा जाता है तो आपको जल्दी से क्या करना है अपने सही आंसर को हमारे सामने पेश करना है और देखते हैं कि कौन दोस्त अपने आंसर को हमारे सामने यहां पर सबसे पहले पेश करने वाला है कि जो हमारी नीली भेड़ है एशियाई हाथी है गंगा की डॉल्फिन है यह कौन सी कैटेगरी के अंतर्गत आएगा कमजोर प्रजाति हैं यानी कि सुबे जाति में इनकी संख्या कमजोर हो रही है लेकिन ज्यादा तेजी से नहीं दुर्लभ स्थानिक या फिर विलुप्त होने वाली प्रजाती चार ऑप्शंस आपके ना सामने हैं और फट फटाफट कर कर आपको अपने आंसर को हमारे सामने पेश करना है बता दीजिए बेटा बहुत जबरदस्त तरीके से आप लोगों का
29:15 यहां पर आंसर हमारे सामने आ रहा है और बहुत अच्छे तरीके से आप लोगों के आंसर को हमने देखा देखिए हमारी नीली भेड़ हुई हमारा एशियाई हाथी हुआ यानी कि हमारी आप देखते हैं कि हमारा चीकू गंगा की डॉल्फिन और हमारी एशियाई ती और लीली भेड़ यह सारे के सारे ना इनकी संख्या कम तो हो रही है लेकिन बहुत तेजी से कम नहीं हो रही ऐसे हमारे जानवर जिनकी संख्या कम तो हो रही है लेकिन बहुत तेजी से कम नहीं होती उनको सुभेदार या कमजोर प्रजाति के अंतर्गत रखा जाता है ऑप्शन ए अपन का बिल्कुल सही है और अगर देखा जाए ना तो 26 पर बच्चों ने बिल्कुल सही आंसर हमारे सामने पेश किया है ठीक है ये रहे हमारे प्यारे बच्चे जिन्होंने बिल्कुल सही आंसर पेश किया है बढ़ेंगे आगे आपके सामने अगला सवाल पेश किया जाएगा पूछा जा रहा है कि जो हमारा एशियाई चीता है और गुलाबी सिर वाली बत्तक है ये किस तरीके के उदाहरण है यह स्थानिक
30:02 प्रजाति में आएंगे यह विलुप्त या फिर लुप्त प्रजाति में आएंगे दुर्लभ प्रजाति में आएंगे या फिर कमजोर प्रजाति में आएंगे चार ऑप्शंस आपके सामने हैं और फट से बेटा आपको अपने आंसर को हमारे सामने पेश करना है अच्छा सवाल है जल्दी से अपने दिमाग के घोड़े दौड़ा हो और सही आंसर को आप लोग हमारे सामने पेश करो जल्दी से बताइएगा बेटा बहुत अच्छे तरीके से आपको अपने आंसर को हमारे सामने यहां पर रख देना है कि एशियाई चीता और गुलाबी सिर वाली बत्तक ड के उदाहरण है स्थानिक प्रजाति विलुप्त प्रजाति दुर्लभ प्रजाति या फिर हमारी कमजोर प्रजातियां जल्दी बताइएगा बहुत जबरदस्त तरीके से आप लोगों के आंसर्स हमारे सामने यहां पर रखे जा रहे हैं और टाइम होता है बेटा कंप्लीट तो हमारा ये जो एशियाई चीता हुआ उसी के साथ-साथ गुलाबी सिर वाली बत्तक हुई ये सारे के सारे हमारे विलुप्त प्रजाति या फिर लुप्त प्रजाति में आएंगे अब ये है ही
30:47 नहीं खत्म हो गए इनका अस्तित्व भी समाप्त हो गया है ही नहीं अब भारत में ऑप्शन बी हमारा बिल्कुल सही है और अराउंड अगर देखें दोस्तों तो हमारे 90 पर दोस्तों ने बिल्कुल सही आंसर दिया है बहुत बढ़िया बढ़ेंगे आगे कुछ हमारे और सवाल होंगे उसका आंसर आपको पेश करना है पूछा जा रहा है कि डैश स्थानिक प्रजाति का उ इनमें से कौन सा जानवर है जो स्थानिक प्रजाति यानी कि एक ही स्थान पर मिलता है गुलाबी सिर वाली बत्तक एशियाई चीता एशियाई भैसा या फिर निकोबारी कबूतर चार ऑप्शंस आपके सामने हैं और जल्दी से आपको अपने सही आंसर को हमारे सामने यहां पर पेश कर देना है कि इनमें से वो कौन सा जानवर है जो सिर्फ एक स्थान विशेष में आपको मिलेगा चार ऑप्शंस आपके सामने हैं और फट फटाफट करकर आपको अपने सही आंसर को हमारे सामने रख देना है बताइए बेटा बहुत जबरदस्त तरीके से आप लोगों के आंसर्स यहां पर हमारे सामने आ रहे हैं बता
31:36 दीजिए चलिए और हर एक बच्चे ने बहुत अच्छे तरीके से अपने रिस्पांस को हमारे सामने रखा है तो अगर हम लोग देखें दोस्तों कि जो हमारे स्थानिक प्रजाति के हमारे जितने भी जानवर हैं वो कौन से हैं जो एक स्थान विशेष में होते हैं जैसे हमारा निकोबारी कबूतर सिर्फ निकोबार में मिलेगा ऑप्शन डी अपन का बिल्कुल यहां पर सही ऑप्शन बन रहा है और देखा जाए तो अराउंड 81 पर दोस्तों ने बिल्कुल सही आंसर पेश किया है बढ़ते हैं अगला सवाल आपको देखते हैं पूछा जा रहा है दोस्तों कि वो हमारी प्रजातियां जो विलुप्त होने के खतरे पर हैं है ना अ अब आपको यहां पर एक और मैं ऑप्शन लिख देता हूं जिसको कहा जा रहा है संकटग्रस्त ठीक है ऐसी हमारी प्रजातियां जो खत्म होने वाली है अगर नहीं बचाए तो एकदम खत्म है उनको क्या कहेंगे लुप्त आय प्रजातियां या संकटग्रस्त प्रजाति दुर्लभ प्रजाति
32:21 विलुप्त प्रजाति या फिर स्थानिक प्रजाति खत्म नहीं हुई है लेकिन बहुत तेजी से खत्म हो रही है अगर इनको नहीं बचाया ऐसे जानवरों को तो ये खत्म है भैया बिल्कुल समाप्त हो जाएंगे कौन सी कैटेगरी में आएगा इसका आंसर आपको पेश कर देना है और बहुत जबरदस्त तरीके से दोस्तों आपके आंसर्स और आपके रिस्पांसस हमारे सामने यहां पर आ रहे हैं बहुत बढ़िया बेटा चलिए तो यहां पर हमारा जो पॉइंट है वह बहुत अच्छे तरीके से रखा गया और हमारे हर एक साथी ने हमारे हर एक बच्चे ने हमारे हर एक दोस्त ने बहुत अच्छे तरीके से अपने सारे पॉइंट्स को पढ़ा डिस्कस कर लेते हैं कि ऐसे हमारे जानवर जो बहुत तेजी से खत्म हो रहे हैं अगर उनको नहीं बचाया तो एक दिन खत्म हो जाएंगे उनको हम लोग लुप्त है प्रजाति या फिर संकटग्रस्त श्रेणी के अंतर्गत रखते हैं ऑप्शन ए यहां पर हमारा बिल्कुल सही है और अगर देखा जाए तो हमारे
33:08 लगभग 83 पर दोस्तों ने बिल्कुल सही आंसर दिया है ठीक है बेटा चलिए बढ़ते हैं आगे अगला सवाल आपके सामने आएगा उसका आंसर आपको देना है और किसी तरीके का कोई कंफ्यूजन अब हम लोग आपके सामने आने ही नहीं देंगे ठीक है बढ़ाते हैं आगे यहां तक के पॉइंट्स क्लियर किसी तरीके का कोई कंफ्यूजन अपने बच्चों के सामने हमने नहीं रखा है अब तक हमने भारत के अंतर्गत जानवरों को किस तरीके से बांटा गया है भारत में जैव विविधता हमें देखने को मिलती है वह देखा भारत में कितने जानवर हैं हमने 81000 के करीब देखे भारत में कितने पेड़ हैं उनके बारे में हमने पढ़ा और इन कैटेगरी क्या-क्या है कौन-कौन से जानवर आते हैं उनके क्या-क्या नाम है उनको हमने जाना अब ना हम लोग क्या बेटा ये कौन सा चैप्टर है एक बच्चा पूछ रहा है बेटा इस चैप्टर का नाम है भूगोल और सामाजिक अध्ययन के अंतर्गत आपको ये देखने को मिल रहा है ठीक है अब यहां पर हमारे सामने एक नया बिंदु है जिसे कहा जा रहा है
33:54 वनों को नुकसान पहुंचाना कि मनुष्य है ना एक लालची स्वा स् स्व स्वभाव का आप देखते हैं कि प्राणी है आप और हम सभी लालच के अंतर्गत पैदा हुए हैं हमारी आप देखते हैं फितरत के अंदर ही लालच है अगर आपके पास आप देखें दोस्तों कि एक घर है ना आपके अंदर लालच होगा आपके अंदर आप देखते हैं कि ख्वाहिश होगी एक और घर हो अगर आपके पास दो घर है तो मेरे घर पास बड़ा घर हो आपके पास बड़ा घर है तो मेरे पास और बड़ा घर हो हमारे स्वाभाव के अंदर ही मानव के स्वभाव के अंदर ही हमें लालच देखने को मिलता है और जो व्यक्ति अपने लालच को कंट्रोल कर लेता है वो महापुरुष कहलाता है उसे ही हम लोग संत स्वामी कहते हैं अब मनुष्य ने ना अपने लालच की वजह से जंगलों को नुकसान पहुंचाना शुरू किया लकड़ी चाहिए थी घर बनाने के लिए जंगल को काट दिया हमें क्या था दोस्तों कि शहर को बसाना था जंगलों को
34:40 काट दिया हमें क्या था दोस्तों कि पेड़ की लकड़ियों को और हमने जंगलों से बहुत सारे संसाधनों को अपने लालच के लिए इस्तेमाल किया और जंगलों से बहुत सारी चीजें हमने निकाली जैसे जंगल की लकड़ी को काटा जंगल से हमने रबड़ को हासिल किया जंगल की से हमने अपनी प्राकृतिक दवाइयों को बनाया जिसे हम जड़ बूटिया दवाइयां कहते हैं और इसकी वजह से हमारे जंगलों को बहुत नुकसान हुआ अंग्रेजों के काल में रेलवे की जो पटरी बिष्ट थी वो लकड़ी की बिष्ट थी तो अंग्रेजों ने रेलवे लाइन को बिछाने के लिए जंगलों को काट दिया और रेलवे को साथ-साथ हम देखते हैं दोस्तों जो झूम की खेती होती है झूम खेती मतलब आग लगाकर जो खेती की जाती है ना उससे भी हमारे जंगलों को बहुत बड़े तौर पर नुकसान होता है और जब हम किसी नदी के पास क्या करते हैं दोस्तों कि नदी के पास बांध बनाते हैं जिसे हम लोग बहु उद्देश्य परियोजना के नाम से भी जानते हैं उस टाइम भी हम लोग जंगलों को प्रभावित कर देते हैं बहुत बार जंगलों के अंदर आप
35:26 देखते हैं दो दोस्तो की खनन किया जाता है संसाधनों को निकालने के लिए पेड़ों को काट दिया जाता है पेड़ थे यहां पर काट दिए और इससे भी हमारे जंगल हमें समाप्त होते हुए देखने को मिल रहे हैं हमारे कुछ और कारण है कि जैव विविधता जो है जो हमारे जंगलों की संख्या है या फिर जो हमारे जानवरों की संख्या है वो आप धीरे-धीरे कम होते हुए देख रहे हैं इसके पीछे कारण यह है कि मनुष्य क्या कर रहे हैं जानवरों का शिकार कर रहे हैं आप देख पा रहे हैं जंगल के अंदर हमें आग लगते हुए दिखती है और बड़े-बड़े तौर पर लोग उसके अंदर जानवर उसके अंदर मर जाते हैं जंगलों की कटाई की जा रही है और पर्यावरण के अंदर अब प्रदूषण हो गया इस वजह से भी हमारे जानवर अब उतने नहीं दिखते जितने पहले अलग-अलग प्रकार के हमें देखने को मिल जाया करते थे अब देखिए हमें क्या करना है दोस्तों कि यहां पर हम लोग डिस्कशन करेंगे कि भारत के अंदर वन और वन्यजीव का संरक्षण कि हमारे पास जंगल हैं और इन जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी कहीं ना कहीं भारत की सरकार की और उसी के
36:13 साथ-साथ भारत के लोगों की भी है आपकी और हमारी हम सभी की है इसीलिए हम लोग क्या देखते हैं दोस्तों कि भारत के अंदर ना पेड़ पौधों और अपने जंग जंगलों को बचाए रखने के लिए भारत के अंतर्गत क्या किया भारत की सरकार ने बहुत बड़े तौर पर बहुत सारे कानूनों को बनाया जिसके तहत हम अपने जंगलों को और जंगलों के अंदर मौजूद हमारे जानवरों को हम लोग संरक्षित रख सकें इसके लिए इस भारत की सरकार ने साल 1972 में एक कानून बनाया जिसे कहा जाता है वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम ध्यान से सुनिए बहुत अच्छा सवाल है पेपर में आता है भारत की सरकार ने भारत के जंगलों को और भारत के जंगलों में रहने वाले जानवरों को बचाने के लिए वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम यानी कि अधिनियम का मतलब होता है कानून साल 1972 में बनाया इस कानून के तहत भारत की सरकार ने जंगल में रहने वाले सारे जंगली जानवर सारे पक्षियों और सारे पौधों को संरक्षण दिया कि भैया अब ये सरकार की संपत्ति है
36:59 और इस कानून के तहत ये कह दिया कि जो हमारी दुर्लभ कैटेगरी और संकटग्रस्त श्रेणी में आने वाले जानवर हैं अगर किसी ने इनका शिकार कर दिया तो उन परे बहुत प्रतिबंध लगेगा है ना और सरकार क्या करती है हर हर साल सरकार जितने भी जानवर हैं उनकी पूरी लिस्ट निकालती है ताकि लोगों को पता चलता रहे कि कितने जानवर हमारे पास सुरक्षित हैं कितने जानवर अभी हमने ज्यादा अपने यहां पर उनको बचाना शुरू किया है अगर आप क्या करें दोस्तों कि संकटग्रस्त या फिर दुर्लभ जाति के जानवरों को मार दें उनका शिकार कर लें तो आपको न से 10 साल तक की आप देखते हैं सजा हो सकती है मैक्सिमम या फिर आपको ₹ लाख तक का जुर्माना देना पड़ सकता है भारत की सरकार ने जानवरों को बचाने के लिए कुछ इस तरीके के कानूनों को निर्मित किया उसी के साथ-साथ भारत के अंतर्गत क्या किया गया कि हमने ना कुछ जानवरों को खुद संरक्षित दिया उनको बचाया जैसे एक सींग वाला जो हमारा गेंडा है इनका शिकार होता था इनकी आप देखते हैं दोस्तों
37:46 कि इनकी ट्रंक के लिए इनकी जो ये हन होता है इसके लिए तो इनको सुरक्षित किया गया हमने अपने जंगली हाथी को सुरक्षित किया हमारा ये जो घड़ियाल होता है मगरमच्छ जो होता है बेटा उसका मुंह चौड़ा होता है घड़ियाल का लंबा होता है आप देखिए तो घड़ियाल को बचाने की कोशिश की और जो हमारा ड्रैगन फ्लाई है है ना ये जो हमारा कीट पतंग है इसको भी भारत की सरकार ने इस कानून के तहत संरक्षण दिया ताकि इनको अच्छे तरीके से बताया जा सके अब यहां तक तो हमने इस बिंदु को अच्छे तरीके से देखा उसी के साथ साथ भारत में साल 1972 में संसद में ये कानून पास हो गया कि हमें वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम लेकर आना है और इसके अंतर्गत हमें क्या करना है हमें ना अपने अभ्यारण बनाने है कि सरकार क्या करेगी जंगलों में ही जानवरों को रखने के लिए कुछ ऐसी जगह बनाएगी जहां इंसान अगर जाएं तो संभल कर जाएं और जानवरों को परेशान ना करें और इसके लिए बहुत सारे अभ्यारण या फिर हमने रिजर्व पॉइंट बनाए
38:32 जहां पर जंगलों को और जंगल के जानवरों को सुरक्षित रखा जाए हमने अलग-अलग प्रकार की स्कीमों को चलाया भारत की सरकार ने अपने अलग-अलग जानवरों को बचाए रखने के लिए अलग-अलग प्रकार की जो तरकीबें थी उसे बचाया भारत के अंदर ना जो बाग है जो हमारा आप देखते हैं बाग टाइगर है इसको बचाने के लिए बाग परियोजना शुरू की शेरों को बचाने के लिए गिर सिंह परियोजना शुरू की कस्तूरी मृग जो कस्तूरी नामक हमारी हिरन होती है इसके लिए कस्तूरी मृग पर परियोजना मणिपुर के अंदर थमिल परियोजना शुरू की गई ंगल नामक एक हिरन होता है जो कश्मीर में होता है उसके लिए ंगल परियोजना और मगरमच्छों को बचाने के लिए मगर परियोजना को स्टार्ट किया गया अब भारत के अंतर्गत हम लोग डिस्कशन करेंगे अपनी बाग परियोजना के बारे में भारत के अंदर प्रोजेक्ट टाइगर शुरू किया गया और यह जो टाइगर है ना दोस्तों भारत में बहुत बड़ी संख्या में देखने को
39:17 मिलते थे कितने 20वीं सदी की शता शुरुआत में यानी कि अगर आप देखें कि सन 1900 की बात हो रही है उस टाइम तक भारत में 55000 के करीब थे बाग फिर आप देखें दोस्तों 73 साल बाद इनकी संख्या मात्र 1827 रह गई सर कहां चले गए इनका शिकार किया गया इन जानवरों का विशेषकर बागों का आप देखते हैं टाइगर्स का बहुत शिकार किया गया इनकी हड्डियों को आप देखते हैं दोस्तों शिकारी निकाल के ले जाते थे क्योंकि उससे दवाइयां बना करती थी और लोगों ने ना इनकी खाल को निकालकर इसका व्यापार करना शुरू किया और अंग्रेजों के काल में या फिर राजाओं के टाइम पर क्या हुआ करता था कि लोग अपने शौक के लिए क्या किया करते थे इन जानवरों को मारा करते थे तो बहुत बड़े तौर पर आप देखते हैं कि जो हमारे जो जानवर थे उनको मारा गया विशेषकर जो हमारा बाग था उसका शिकार किया गया अब एक और बड़ी वजह है कि जो बाग थे ना बाग उनके लिए जो खाना था वह
40:05 खत्म होने लगा और इसीलिए बाग जंगल छोड़कर शहरों में आते तब भी लोग इनको मार रहे थे तो बहुत बड़ी समस्या यहां पर थी मात्र आप देखते हैं कि 1973 में हमारे पास कितने बाग थे बेटा 1827 बाग थे कहां पर 55000 हुआ करते थे फिर क्या हुआ भारत की सरकार ने क्या किया दोस्तों कि बाग परियोजना 1 अप्रैल 1973 को स्टार्ट की और इसके तहत हमने सबसे पहले उत्तराखंड का जो हमारा इलाका का है उसमें जो जंगल है उसे जिम कर्बिट पार्क के नाम से स्थापित किया कि यहां के इस जंगल को हम जिम कर्बिट पार्क कहेंगे और इसके अंतर्गत हमने क्या किया दोस्तों कि यहां पर जंगल के अंदर बागों को संरक्षण देना शुरू किया 2006 में भारत के अंदर बागों की संख्या 1411 हुई 2014 में ये संख्या 2226 हुई 2019 में ये संख्या आप देखते हैं दोस्तों कि कितनी हो गई आप देख पा रहे हैं कि 2959
40:51 हुई कहां पर हमारे पास 1557 थे और मेहनत कर कर कर जानवरों को संरक्षित कर कर बागों को बचा कर हमारे पास आप देखते हैं दोस्तों कि 2963 तकरीबन 3000 के करीब हमारे जानवर हमें देखने को मिल रहे हैं तो यह तो हमने अपने जानवरों को बचाने के संदर्भ में काम करते हुए देखा फिर ना हमने अपने क्या किया दोस्तों कि आप देखते हैं कि हमारे जो वन है या फिर जो हमारे जंगल है इनको भी संरक्षण देना शुरू किया और भारत की सरकार ने जंगलों को तीन कैटेगरी के अंतर्गत आप देखते हैं कि डिवाइड किया सबसे पहले कहलाते हैं आरक्षित वन या फिर जिनको सुरक्षित वन या फिर रिजर्व फॉरेस्ट के नाम से भी जाना जाता है दूसरे कहलाते हैं संरक्षित वन या फिर रक्षित वन या फिर जिनको प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट के नाम से जानते हैं और तीसरे कहलाते हैं अवर्गीकृत वन या फिर अनक्लासिफाइड फॉरेस्ट इसके अंतर्गत देखते हैं सबसे पहले भारत की
41:36 सरकार ने कहा कि आरक्षित जंगल नाम सेही स्पष्ट सुरक्षित जंगल हैं ये इनके अंतर्गत कोई भी अपने जानवर को लेकर नहीं जाएगा हमारे देश में जितने भी जंगल हैं उनका तकरीबन 53 प्र जो भाग है वो आरक्षित जंगलों का है क्योंकि इन जंगलों में बहुत मूल्यवान हमारे पास क्या है दोस्तों कि आप देखते हैं कि पेड़-पौधे हैं इसीलिए इन जंगलों में जाने पर प्रतिबंध है और इन जंगलों में जाकर कोई भी संसाधन को निकालने पर प्रतिबंध है जैसे मध्य प्रदेश पश्चिम बंगाल और केरल और महाराष्ट्र ये हमारे वो राज्य हैं जहां पर आपको आरक्षित जंगल देखने को मिलते हैं फिर हमारे यहां पर दूसरे प्रकार के जंगल है जिन्हें रक्षित या फिर संरक्षित जंगल कहा जाता है देश में टोटल 29 प्र जंगल इस प्रकार के हमें देखने को मिलते हैं जिन्हें हम लोग रक्षित जंगल की कैटेगरी में रखते हैं इसमें आप जा सकते हैं मगर कुछ शर्तों के साथ सरकार से कुछ अनुमति आपको लेनी होगी और सबसे बड़ी बात
42:22 है कि आप जंगल में आग नहीं लगाएंगे आप जंगल के जानवरों को परेशान नहीं करेंगे तो आज्ञा लेकर आप जा सकते हैं जैसे यहां पर हमारे जो जंगल हैं वोह हिमाचल प्रदेश में पंजाब में और हरियाणा में देखने को मिलते हैं तीसरे प्रकार के हैं हमारे अवर्गीकृत जंगल यानी कि सरकार ने इनको किसी कैटेगरी में नहीं रखा ये हमारे वो जंगल है जो हमारे शहर के आसपास हमें देखने को मिल जाते हैं इनको अवर्गीकृत जंगल कहा जाता है आप इन जंगलों में जाकर पेड़ों को काट सकते हैं अपने जानवरों को चरा सकते हैं सरकार ने इन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है तो देश में हमारे पास ये तीन तरीके के जानवरों की कैटेगरी देखने को मिली अब तक हमने जो देखा ना दोस्तों इसके अंतर्गत अब तक हमने जो भी बिंदु देखे उसमें हमने देखा सरकार क्या कर रही है सरकार ने बाग परियोजना को बनाया सरकार ने आप देखते हैं दोस्तों कि अलग-अलग तरीके से जानवरों को बचाने के लिए कैटेगरी बनाई और उसी के साथ-साथ हमने देखा कि जंगलों की अलग-अलग कैटेगरी को निर्धारित कर दिया सर ये रेड
43:09 डेटा बुक क्या होती है रेड डेटा बुक आप देखते हैं कि एक बुक है जिसके अंतर्गत दुनिया भर के अंतर्गत मौजूद जो जानवर हैं वो लुप्त हो रहे हैं या नहीं हो रहे उनके बारे में जानकारी लॉन्च की जाती है सवाल है दोस्तों कि जो समुदाय अब भारत के अंतर्गत ना सरकार ने कहा कि क्या काम किया वो तो देख लिया भारत के साथ-साथ हमारे समुदाय के लोग भारत के लोगों ने भी अपने जंगल और जानवरों को बचाने की पूरी-पूरी कोशिश की है चलिए एक-एक कर कर उसको डिस्कस करने की कोशिश करते हैं भारत के अंतर्गत अगर आप लोग देखें सबसे पहले हमें देखने को मिलता है कि एक जगह है जिसे कहा जाता है राजस्थान और राजस्थान के अंतर्गत सरिस्का बाग अभ्यारण बनाया गया ये लोगों ने बनाया खुद गांव के लोगों ने बनाया तो गांव के अंतर्गत आप देखते हैं कि वहां पर खनन नहीं होगा उस काम को रुकाया गया उसी के साथ-साथ राजस्थान के अलवर जिले में आप देखते हैं तकरीबन 2 20000 हेक्टेयर जमीन जो है उसको भैरो डार्क सेंचरी के नाम से रख दी कि यहां पर बागबाग रहते हैं जानवर रहते हैं
43:56 यहां पर रहेंगे कोई बाहर से आकर यहां पर खुदाई नहीं कर सकता और इस इलाके में खुद लोगों ने शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया कि लोग खुद पर्यावरण को बचाने की पूरे पूरे तौर पर कोशिश कर रहे हैं इसी के साथ उत्तराखंड के अंदर हमें दिखता है दोस्तों चिपको आंदोलन ये क्या है उसे आगे देखेंगे उत्तराखंड के टिहरी क्षेत्र में आपको क्या दिखता है दोस्तों कि वहां पर बीज बचाव आंदोलन दिखा के लोग क्या कर रहे हैं कि लोग ना प्राकृतिक तौर पर जो बीज होते हैं उसके जरिए क्या करेंगे अपनी फसल को गाएंगे जो आपके और हमारे सारे उत्पादन के लिए बहुत अच्छी होगी जिससे उत्पादन भी बढ़ेगा राजस्थान के अंदर आपको विश्नोई समुदाय है और विश्नोई समुदाय जानवरों से बहुत प्रेम करता है इन्होंने क्या किया हुआ है काला हिरन हुआ नील गाय हुई चिंकारा हुआ मोर हुआ इनका संरक्षण किया हुआ है तो ये इन जानवरों को अपने परिवार के तौर पर पालते हैं और इनको संरक्षण आप देखते हैं कि विश्नोई समुदाय की तरफ से मिला हुआ है इसी
44:43 के साथ भारत के अंतर्गत हमारे अलग-अलग रीति-रिवाज हैं भारत के सनातन धर्म या फिर हिंदू धर्म के अंदर आपको देखने को मिलता है कि हमारे बहुत सारे रीति-रिवाज हैं जो जो हमारे प्रकृति से ही जुड़े हुए हैं जैसे आप देखते हैं दोस्तों कि लोग पेड़ों की पूजा करते हैं है ना बगत तुलसी को अपने घरों में लगाते हैं इमली के पेड़ों की पूजा करते हैं जो यह बताता है कि भारत के अंदर प्रकृति का बहुत सम्मान किया जाता है अब भारत में आंदोलन हुआ है एक बहुत बड़ा जिसे चिपको आंदोलन कहा जाता है चिपको आंदोलन क्या है कि वर्तमान समय में जो हमारा यूपी है साल 1973 में है ना आप देखें दोस्तों कि वर्तमान समय में जो हमारा उत्तराखंड है साल 1973 में उत्तराखंड यूपी के अंतर्गत ही हुआ करता था और वहां पर एक चमोली जिला है 26 मार्च साल 1973 को ना चमोली जिले के अंदर जितने भी जंगल थे उन सारे जंगलों को सरकार ने कहा कि हम एक प्राइवेट कंपनी को दे रहे हैं
45:29 पेड़ पेड़ काट दिए जाएंगे जब ये खबर जंगल के लोगों को पता चली और किसानों को पता चली तो उन लोगों ने अपने पेड़ों को बचाना शुरू किया क्योंकि पेड़ों से उनकी सारी जीवन थी उससे उनको पेड़ पौधे पेड़ों से ही उनको फल मिलते फूल मिलते सारा जीवन पेड़ों से ही था और यहां पर चिपको आंदोलन शुरू हुआ चिपको आंदोलन के अंतर्गत क्या किया गया जो महिलाएं थी वो पेड़ों से चिपक गई और उन्होंने ये कहा कि जब तक ये सरकारी अधिकारी अगर पेड़ को काटना चाहेंगे तो उनको हमको क्या करना पड़ेगा हमें काटना होगा और बड़े तौर पर आप देखते हैं कि 2024 से है ना 2400 से भी ज्यादा पेड़ों को इन लोगों ने बचा लिया तीन चार दिन तक ये पेड़ों से चिपके रहे थे इसके अंतर्गत महिलाएं भी थी बच्चे भी थे सब लोग इसके अंदर हमें शामिल थे और इसमें एक बहुत फेमस महिला थी जिनका नाम था गौरा देवी इन्होंने क्या किया था दोस्तों गौरा देवी जी ने आप देख पा रहे हैं गौरा देवी जी ने इस आंदोलन में महिलाओं को जोड़ा था कुछ और प्रसिद्ध इसके अंदर आपको नेता दिखते हैं जैसे
46:15 सुंदरलाल बहुगुणा आप देख पा रहे हैं सुंदरलाल बहुगुणा चांडी प्रसाद भट्ट है ना ये कुछ फेमस लोग रहे थे जिन्होंने इस चिपको आंदोलन को बड़े तौर पर शुरू किया क्योंकि लोग इस इस अ आंदोलन में पेड़ से चिपक रहे थे इसीलिए इस आंदोलन का नाम चिपको आंदोलन रख दिया गया अब यहां पर हम लोग क्या करेंगे बेटा आप सभी के साथ जो अपने हमने आज के पॉइंट्स अभी तक डिस्कस किए हैं इनके कुछ क्वेश्चन आंसर्स को डिस्कस करने की कोशिश करते हैं पूछा जा रहा है दोस्तों कि भारत के अंदर यह जो हमारा वन्यजीव सुरक्षा कानून है भारत की सरकार की तरफ से कब बनाया गया ऑप्शंस है आपके सामने चार और जल्दी से आपको अपना ऑप्शन हमारे सामने पेश करना है ठीक है जल्दी बताइए फातिमा जहरा जी कह रही हैं हाय फातिमा एंड तजिया क्या बात है भैया जल्दी बताइए बेटा
47:07 और बहुत जबरदस्त तरीके से दोस्तों आप लोगों के आंसर्स हमारे सामने आ रहे हैं वन्य जीव सुरक्षा कानून भारत के अंतर्गत आप देखते हैं कि कब बनाया गया इसे साल 1972 में बनाया गया है ऑप्शन सी हमारा बिल्कुल यहां पर उपरोक्त बन रहा है अराउंड 95 पर दोस्तों ने बिल्कुल सही आंसर हमारे समक्ष रखा है अगला सवाल आपके सामने इसका आंसर आपको देना है पूछा जा रहा है दोस्तों कि जो चिपको आंदोलन है चिपको आंदोलन इससे कौन जुड़ा हुआ है मेनका गांधी अरविंद्र घोष सुंदरलाल बहुगुणा या फिर इनमें से कोई भी नहीं चारों ऑप्शंस को देखते हुए जल्दी से आपको अपने सही आंसर को हमारे सामने पेश करना है बताइए बेटा और बहुत जबरदस्त तरीके से आप लोगों
47:52 को अपने आंसर पेश किए जा रहे हैं चिपको आंदोलन निम्नलिखित में से किस चीज से संबंधित है यह हम देखते हैं मेनका गांधी अरविंद घोष सुंदरलाल बहुगुणा या फिर इनमें से कोई भी नहीं टाइम हमारा दोस्तों कंप्लीट हुआ तो अगर देखा जाए कि जो हमाराय चिपको आंदोलन है ये सीधे तौर पर संबंधित है सुंदरलाल बहुगुणा जी से जो चिपको आंदोलन के प्रसिद्ध नेता र हैं ऑप्शन सी हमारा बिल्कुल सही है 96 पर बच्चों ने बिल्कुल सही आंसर दिया है बढ़ेंगे आगे एक और हमारा सवाल है पूछा जा रहा है कि भारत में जो हमारा एक सूंड वाला जो हमारा गेंडा है व भारत में कहां पर उसको बचाने की वो काजीरंगा नेशनल पार्क बनाया गया वो कहां पर है काजीरंगा नेशनल पार्क उत्तराखंड में है हिमाचल में है जम्मू कश्मीर में है या फिर असम के अंदर आपको देखने को मिल रहा
48:43 है बिलाल सर आपका घर कहां पर है मेरा घर बेटा अभी जैसे ये हमारा स्टूडियो है पीछे एक गली फिर एक गली के पीछे एक और गली एक बड़ा सा पीपल का पेड़ उस पपल पीपल के पेड़ के आगे एक बहुत बड़ा आप देखते हैं दोस्तों की एक भूतिया महल उसी भूतिया महल के अंदर हम रहते हैं दिल्ली में रहते हैं बेटा जल्दी से बताइएगा है ना चलिए टाइम होता है कंप्लीट पूछा जा रहा था दोस्तों कि काजीरंगा नेशनल पार्क हमारा कहां पर है तो हमारे जो गेंडा होता है उसको बचाने के लिए इसको बनाया गया और हमारा ऑप्शन डी आसाम इज द राइट ऑप्शन और देखें दोस्तों तो अराउंड हमारे 13 पर बच्चों ने ही बिल्कुल सही आंसर दिया है अरे भैया यह रहे वो हमारे प्यारे बच्चे
49:29 बहुत बढ़िया चलिए और उसी के साथ हमारी ये जो आज की क्लास है दोस्तों आप देखते हैं कि वो पूरे पूरे तौर पर समाप्त हो रही है और उम्मीद करते हैं दोस्तों कि जो हमारे सारे के सारे बिंदु रहे आपको अच्छे तरीके से समझ में आए हुए होंगे अपनी आज के इस चैप्टर को हम लोग अब समापन की ओर लेके जा रहे हैं अब क्या करते हैं बेटा अपनी क्लास को हम लोग समाप्त कर देते हैं उम्मीद करते हैं कि आपको सारी बातें समझ में आई होंगी इस चैप्टर से संबंधित आज की क्लास के जो हमारे टॉप 10 बच्चे हैं उनसे मिल लेते हैं ये रहे हमारे कैप्टन अफनान खान ओजस्वी सोनी अकरम सुरजीत सिंह नकुल प्रो मुनि देवी नीरज नयन मिश्रा किशोरी विश्वकर्मा प्रिंस शुक्ला यह हमारे टॉप 10 बच्चे हैं भैया मुबारका जी मुबारका लख लख वधाइया जी लख लख बधाइयां अरे भैया क्या बात है बहुत
50:15 बढ़िया बेटा चलिए तो यह तो हमारी आज की क्लास रही और आज की क्लास से रिलेटेड सारे के सारे बिंदु रहे अब हमारी जो आज की क्लास है हम लोग इसको समाप्त कर रहे हैं अब आप अगली क्लास जो होगी उसमें कौन सा चैप्टर कराना चाह र हैं है ना उसको आप लोग क्या करेंगे बेटा उसको आप लोग जरूर इस क्लास के खत्म होने के बाद जो कमेंट सेक्शन होगा उसमें लिख दीजिएगा जिस चैप्टर की सबसे ज्यादा डिमांड होगी उस चैप्टर को हम लोग आपके सामने पेश करेंगे जैसे आपने इस चैप्टर की डिमांड करी थी तो आपके सामने रखा गया आप लोगों का हमारे साथ जुड़े रहने के लिए दोस्तों बहुत-बहुत शुक्रिया उम्मीद करते हैं कि आप लोगों तक हर एक चीज बहुत अच्छे तरीके से समझ में आई होगी और अब आप लोगों से क्या करते हैं अ लेते हैं विदा अगली क्लास हमारी मंडे को होने वाली है और उसके अंतर्गत हम लोग अपने अगले बिंदु को आपके सामने देखेंगे ठीक आपका हमारे साथ बने रहने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया जय हिंद धन