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0:03 नमस्ते मेरे साथ प्रोफेसर अरुण कुमार प्रोफेसर साहब को मैं उधर थोड़ा इसलिए नहीं वो किया क्योंकि प्रोफेसर साहब व्यस्त थे आईएमएफ के ने कुछ कुछ अपनी जो रेटिंग है उसमें भारत को नीचे किया था और उसके बाद ये व्यस्तता मैं समझ सकता था साहब पहली चीज तो मैं समझने की दृष्टि से जो आपके बहुत से इंटरव्यूज आए हैं मैं देख रहा हूं फॉलो कर रहा हूं और आप का कहना यह है कि जो भारत की जो रियल जीडीपी है आंकड़ों का हेल पे छोड़ दीजिए वो जो अभी दिखाया जा रहा है उससे 48% कम है और आईएमएफ की बात ये दोनों को जरा जोड़ के एक बार हम हमारे दर्शकों को ये समझा दीजिए कि ये जीडीपी का एक एक सूचकांक है वो भी अगर आपको पता लगेगा कि वो ठीक नहीं है तो इस
0:49 पे जरा एक आपकी टिप्पणी चाहिए। तो देखिए जो आईएमएफ ने कहा है उसने कहा कि जो भारतीय जो अर्थव्यवस्था का जो डाटा आता है नेशनल काउंट स्टैटिस्टिक्स से जीडीपी के बारे में वो विश्वसनीयता कम है तो वो जो लगातार आप कहते नहीं मैं इसलिए दर्शकों को कह दूं कि जो आप एक स्टैंड मैं जब कम से कम आपके साथ पिछले पांच वर्षों से जब भी कर रहा हूं तो आपका बार-बार यही कहना होता है कि भ डाटा तो ठीक करो। जी हां तो विश्वसनीयता कम होने का मतलब है कि वो देर आए दुरुस्त आए क्योंकि पिछले साल भी उन्होंने यही सी ग्रेड दिया था लेकिन उस समय ये बात ज्यादा खुल के नहीं आई इधर क्योंकि हिंदू के अखबार में वो बात छप गई तो सब जगह वो पकड़ लिया और फिर जो 8.2% का रेट ऑफ ग्रोथ दिखा दिया क्वार्टर टू में तो दोनों एक साथ ही एक ही दिन पे आए तो
1:36 इसलिए उस पर ज्यादा चर्चा हो गई। वजह ये है कि उन्होंने जो अपने एनालिसिस में किया उनकी टीम आती है हर साल और उनका एक होता है कि वो इकॉनमी को रिव्यू करते हैं जो इकोनमिक मिनिस्ट्री है उनके साथ आरबीआई के साथ मिलके तो रिव्यू करते हैं कि डाटा कैसा है और कितना है ग्रोथ वगैरह है तो उन्होंने कहा कि देखो हम बाकी डाटा तो नहीं ले सकते पर हम ये कह सकते हैं कि विश्वसनीयता कम है और उसके पीछे उन्होंने वजह गिनाई एक तो उन्होंने वजह गिनाई कि हम 2011-12 के डेटा के आधार पे बेस के आधार आधार पे अपना डाटा कैलकुलेट कर रहे हैं। जबकि 2011-12 की तो बहुत पुरानी हो गई है। 2021 के आधार पर करना चाहिए था। फिर उन्होंने और भी ऐसे बताया कि जो कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स का है बेस है वो भी 2011-12 का है। उसके बाद तो बहुत तब्दीली
2:23 आ गई है। तो कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स भी सही नहीं है। उसको भी बदलना चाहिए। फिर उन्होंने ये कहा कि इसमें जो डिस्क्रिपेंसी बहुत आती है क्योंकि जो हमारा जीडीपी होता है उसको दो तरह से हम कैलकुलेट करते हैं। एक तो प्रोडक्शन एप्रोच होती है और एक एक्सपेंडिचर अप्रोच होती है। तो इन दोनों के बीच में तालमेल नहीं है। तो इस तरह से उन्होंने कई चीजें गिनाई कि स्टेट्स का और जो लोकल बॉडीज का डाटा 2019 के बाद में कंसोलिडेटेड डाटा नहीं आया वगैरह वगैरह उन्होंने बताया। तो इस सब से वो कह रहे हैं कि विश्वसनीयता कम है। यानी कि मतलब जो अभी डाटा दिया जा रहा है उस पर विश्वास करके और जो सर्वेस वो करते हैं पॉलिसी परपस के लिए वो पूरी तरह से सही नहीं है। तो ये जो उन्होंने कहा है इसको हमें समझना पड़ेगा कि ये क्या है। तो
3:08 उसके लिए हमें जो जीडीपी के ही ऊपर देखना पड़ेगा। जीडीपी जो हमारा 2011-12 के बेस पे जो बनाया था वो 2015 में अनाउंस किया था जबकि एनडीए की सरकार आ गई थी। हालांकि काम उस पर शुरू हो गया था यूपीए की सरकार के दौरान पर अनाउंस हुआ 2015 में तो उसमें क्योंकि ये दिख रहा था कि जो बैक सीरीज है यानी कि 2011-1 के पहले क्या हुआ वो सीरीज नहीं दी गई थी तो सब लोगों ने कहा कि भ फिर हम कंपैरिजन कैसे करेंगे अगर हमारे पास 2011-1 के पहले की सीरीज नहीं है तो पुरानी सीरीज और नई सीरीज के बीच में तालमेल क्या है वो कैसे हम करेंगे तो इसलिए वो सीरीज देना जरूरी है तो सरकार ने क्या किया कि उन्होंने कहा कि हमने एमसीए 21 डेटाबेस जो इस्तेमाल की है अब उसको हमारे बैक सीरीज स्टेबल नहीं थी। अब
3:54 स्टेबल नहीं होने का क्या मतलब है ये भी नहीं समझ में आया। तो सरकार ने फिर कहा कि अच्छा एक कमेट को जो टास्क दिया उस कमेटी ने जब उसको किया कैलकुलेट तो पाया कि जो यूपीए के दौरान रेट ऑफ ग्रोथ ज्यादा था बनिस्बत एनडीए के दौरान। तो ये ये उन्होंने एक्सेप्ट नहीं किया। उन्होंने कहा नहीं नहीं हम ये फाइंडिंग एक्सेप्ट नहीं करते कि जो अभी ये सीरीज बनाई है इस कमेट ने। फिर उन्होंने नीति आयोग को कहा कि नीति आयोग ये काम करें। तो नीति आयोग ने जो किया तो उन्होंने दिखा दिया कि एनडीए के दौरान यूपीए से ज्यादा तेज ग्रोथ हुई उसको एक्सेप्ट कर लिया। जबकि ये काम नीति आयोग का नहीं है। ये स्टैटिस्टिकल ऑर्गेनाइजेशन का काम है कि वो डेटा सीरीज जारी करें। पर लेकिन क्योंकि उनको मैनपुलेट करना था तो उन्होंने जो यहां पे नीति आयोग से मैनपुलेट करा लिया। लेकिन बात वहां नहीं
4:41 रुकी जो पूर्व जो चीफ इकोनमिक एडवाइजर सुब्रमण्यम उन्होंने जो एनालिसिस करके बताया कि इसमें ढाई से तीन% जो है ज्यादा ग्रोथ दिखाई जा रही है। यानी ढाई से तीन% रेट ऑफ ग्रोथ कम है। तो उसको भी सरकार ने एक्सेप्ट नहीं किया। उसके खिलाफ काफी हुआ। लेकिन उसके बाद ये परेशानी आई कि नोटबंदी के दौरान जो आपकी शेल कंपनीज थी तो 18 लाख कंपनियों में से 3 लाख कंपनियों को शेल कंपनी घोषित करके निकाल दिया। तब उससे जीडीपी पे असर पड़ना चाहिए था। क्योंकि जो वो आंकड़े दिखा रहे थे वो तो हट गए। अब जब वो आंकड़े हट गए तो जीडीपी गिर जाना चाहिए था लेकिन जीडीपी पे कोई असर नहीं पड़ा। फिर उसके अगले बाद कुछ ही महीनों बाद ये पता लगा कि 35% जो कंपनियां है वो उस पते पे नहीं है या वो काम नहीं कर रही जो उन्होंने घोषित किया। यानी कि बार-बार जो
5:28 जीडीपी की सीरीज 2011 12 की थी उसकी विश्वसनीयता पे बार-बार जो सवालिया निशान उठा और जबकि मैं हर बार बोलता था कि काले धन की अर्थव्यवस्था तो इसमें है ही नहीं तो इसकी विश्वसनीयता कैसे हो सकती है तो चलिए काले धन की अर्थव्यवस्था को छोड़ दीजिए जो सफेद अर्थव्यवस्था का जो आकलन है उसी पर परेशानी थी तो ये जो बात है ये एक अतिरिक्त बात है और उसके पीछे वजह क्या है वजह ये है कि हमारे जो असंगित क्षेत्र है वो गिरावट पे है हमारा जो नोटबंदी ने उस पे असर किया। फिर जो जीएसटी के जो गलत जीएसटी हमने लागू कर दिया उसका असर हुआ। फिर अगले साल नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी से क्राइसिस हुआ। आईएलएफएस वगैरह जब फेल हुए तो उसका असर पड़ा हमारे जो अर्थव्यवस्था पे उसके बाद फिर पेंडेमिक आ गया तो उसका असर पड़ा। यानी चार बड़े झटके
6:14 लगे। तो ये झटों ने असंगित क्षेत्र को ज्यादा धराशाई किया। संघ क्षेत्र पे उतना असर नहीं हुआ। तो जो हमारा जो डाटा होता है तो वो असंग क्षेत्र का तो आता नहीं है। तो हम मान लेते हैं कि असंग क्षेत्र उसी रफ्तार से बढ़ रहा है जैसे कि संघ क्षेत्र बढ़ रहा है। पर असंगित क्षेत्र तो गिरावट पे था। तो आपने गिरते हुए सेक्टर को एक बढ़ते हुए सेक्टर से आपने रिप्रेजेंट कर दिया। यानी कि अगर 6.5% की ग्रोथ है तो आप यह कहें कि असंग क्षेत्र भी 6.5% बढ़ रहा है। संघर्ष क्षेत्र भी 6.5% बढ़ रहा है तो गलत है। तो हुआ क्या था कि जैसे बाकी ट्रेड सेक्टर ले लीजिए तो ट्रेड में क्या हुआ है कि जो डिमांड है वो चली गई है ई कॉमर्स और मॉल्स की तरफ और जो बगल का स्टोर है उस हम लोग कम जा रहे हैं। तो वहां पे गिरावट है और यह बढ़ रहा है 202
7:00 30% तो अब 202 30% अगर आप वो बढ़ रहा है और उसको आप प्रोक्सी बना दे तो असंगित क्षेत्र के ट्रेड को दिखा रहा है तो गलत है वो तो 20% 30% नहीं बढ़ रहा वो तो गिरावट पे है मैंने आकलन किया कि हमारा जो असंगित क्षेत्र है वो 5 से 9% के बीच में उसमें गिरावट हो रही है नोटबंदी के समय और इसलिए जिसको आप 6% बढ़त दिखा रहे हैं वो एक्चुअली 5% गिरावट पे है यानी डाटा में 12% की कमी है। डाटा में जो संघ का डाटा है उसमें कम से कम 12% की परेशानी है। इसमें मतलब ये तो मैं छोड़ दिया कि संघ के डाटा में भी परेशानी है। लेकिन वो चलिए मान लिया वो डाटा है। लेकिन जो संघ क्षेत्र का है उसमें तो 12% की वो परेशानी है। तो अगर 12% आप जो वहां से उसको करेक्ट
7:46 करें तो फिर हमारा रेट ऑफ ग्रोथ जो सरकार कहती है 6 7% वो दो ढाईस ही है। और दो ढाई परस होने के हिसाब से तो आपको 4% उससे कम करना पड़ेगा। तो जो आप अगर 2016 से 4% कम कर देते हैं हर साल तो फिर हमारी अर्थव्यवस्था इस समय ढाई ट्रिलियन डॉलर की है ना कि 3.8 ट्रिलियन डॉलर की। तो ये मेरा मानना है कि चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं है और हम अभी सातवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है इटली के आगे। ये मेरा विशेष रहा है पिछले कुछ समय से और कितना सबूत ये मिठा है अगर आप देखें तो नोटबंदी के दौरान सबने देखा कि जब नवंबर में लागू किया गया नोटबंदी तो नवंबर दिसंबर जनवरी फरवरी मार्च ये पांच महीने अर्थव्यवस्था बहुत परेशानी में रही और गिरावट पे रही
8:31 मार्केट खाली हो गए उत्पादन कम हो गया तो नेगेटिव था तो यानी कि सरकार कहती है कि नहीं हमारा रेट ऑफ ग्रोथ 8% था तो 8% कैसे हो गया जबकि असंगष्ट गिरावट पर था। कृषि से जो सामान था सब्जी, फल, फूल वो सब मार्केट नहीं आ रहे थे। वो खेत में सर जा रहे थे। तो उन्होंने कृषि का भी रेट ऑफ ग्रोथ बढ़ा दिखा दिया। तो मेरा मानना है कि उस समय नेगेटिव ग्रोथ थी ना कि 8% की। उस समय भी करीब 10% का जो है फर्क था। तो इसी वजह से बार-बार कह रहा हूं कि इतना प्रूफ होते हुए भी और सरकार जो है अपनी मेथोडोलॉजी को रिवाइज नहीं कर रही थी और सिर्फ जैसे पुरानी मेथोडोलॉजी उसी के हिसाब से चल रही थी। तो इसीलिए मैं बार-बार कह रहा हूं कि हमारी अर्थव्यवस्था उतनी बड़ी नहीं है जितना कि वो सरकार कह रही है।
9:18 मैं प्रोफेसर साहब आऊं क्योंकि इस पर बहुत सी चीजें और है लेकिन मेरे पास एक एक आपसे मैं लेबर लॉस पे भी प्रश्न करना चाहता हूं। लेकिन उससे पहले एक मेरे मन में बहुत जिज्ञासा है। भारत और अमेरिका का ट्रेड जो है वो रिकिबेट हो रहा है। उसके बहुत से आयाम है। रशियन ऑयल हमने इंपोर्ट करना बंद कर दिया है। उधर सऊदी अरेबिया जाके इन्वेस्टमेंट की बात कर रहा है अमेरिका से वो बहुत से आयाम है। ऐसे में जो भारत और अमेरिका का ट्रेड है वो हिट हुआ है। उसके रिपगेशन अभी शायद तत्काल तो नहीं दिख रहे हैं। लेकिन आपको क्या लगता है कि अगले तीन से छ महीने के अंदर उसके कुछ असर भारत में पड़ेंगे। खास करके हमारे रोजगार को लेके हमारे जो ये जीडीपी की ग्रोथ है इसको
10:03 ले प्रोफेसर ऐसा है कि ऑलरेडी असर क्योंकि कल के अखबार में खबर आई कि हमारा जो ट्रेड है अमेरिका से वो कम हो गया है और बाकी देशों से जैसे यूएई है ऐसे कुछ देश है उनसे ट्रेड बढ़ गया तो मेरा मानना है कि जो हमारा ट्रेड डायरेक्टली अमेरिका से होता था वो अब यूएई के थ्रू जा रहा है या वो और किसी देश के थ्रू जा रहा है क्योंकि क्योंकि उनसे ट्रेड बढ़ गया है और अमेरिका से घट गया है डायरेक्ट ट्रेड। तो इसलिए जो जितना असर होना था उतना असर नहीं पड़ा। अभी सोचा गया था कि करीब करीब 47 बिलियन डॉलर का जो ट्रेड है उस पे जो टेरिफ 50% जो लगाया है तो ये 47% का जो 47 बिलियन डॉलर का ट्रेड है वो कम हो जाएगा। तो वो उसका उतना असर
10:51 नहीं पड़ा है जितना कि पड़ना चाहिए था। लेकिन जो हमारे जो मैन्युफैक्चरर्स है जो प्रोड्यूसर्स है जो एक्सपोर्ट करते हैं उनकी प्रॉफिट मार्जिन पर तो असर जरूर पड़ा होगा क्योंकि जब एक इंटरमीडिएट आ गया कोई यूएई के थ्रू जा रहा है कोई अगर जो किसी और कंट्री के थ्रू जा रहा है तो वहां पर वो भी मार्जिन लेंगे और फिर क्योंकि अमेरिका में जो टेरिफ बढ़ा दिया है तो वहां पे जो है आपको अपने दाम थोड़े मॉडरेट करने पड़ेंगे नहीं तो आपका माल वहां बिकेगा नहीं तो इससे हमारे जो इंडस्ट्री है उसके ऊपर असर पड़ रहा है हमारे ट्रेड पे असर पड़ रहा एक्सपोर्ट पर असर पड़ रहा है और वो अपने को बचाने के लिए वर्कर्स की वेजेस को क्रश करेंगे। वर्कर्स की वेजेस दबाएंगे और ये जो लेबर कोड जो अभी एकदम से लागू किया है मेरा मानना है कि वो इसीलिए किया है जिससे कि जो बिजनेसमैन है वो फिर
11:38 लेबर के जो वेजेस को कम कर सके। वैसे ही अगर आप देखें तो जो हमारा संघर्ष क्षेत्र है उसमें लेबर का शेयर तो कम होता ही गया है क्योंकि वो अपना जो प्रॉफिट बढ़ा रहे हैं और वेजेस उतनी बढ़ नहीं रही है और जो हमारा असंगित क्षेत्र है वहां तो वैसे ही जो वर्कर को बहुत कम जो है आमदनी होती है और जैसे कि ईश्रम पोर्टल पर डाटा आया कि 90% जो है वो कह रहे हैं कि हम तो ₹100 से कम कमा रहे हैं तो उनका कितना स्क्वीज कर लेंगे आप है ना तो इसलिए ये जो परेशानी है हमारी अर्थव्यवस्था में क्योंकि लेबर इंटेंस सेक्टर्स है तो यहां पे रोजगारी पे असर पड़ेगा। हमारे जो मैन्युफैक्चरर्स सेलर्स है जो एक्सपोर्टर्स है उनके मार्जिन पे असर पड़ेगा। उससे हमारी वेजेस पे असर पड़ेगा। उससे हमारी डिमांड और कम हो जाएगी और डिमांड कम होने से
12:24 अर्थव्यवस्था में स्लो डाउन आएगा। लेकिन क्योंकि हमारा जो डाटा आता है जैसे मैं बार-बार कह रहा हूं वो डाटा तो संघर्ष क्षेत्र का आता है। तो इसलिए संघर्ष क्षेत्र पे उतना असर नहीं पड़ेगा जितना की असंग क्षेत्र पे पड़ेगा। तो इसलिए हमारा जो फॉर्मल जीडीपी है वो तो फिर भी दिखाएगा कि हमारी ग्रोथ चल रही है। लेकिन जो हमारा जो एक्चुअल में है वो जितना ऑर्गेनाइज सेक्टर बढ़ा होता है उतना अनऑर्गनाइज सेक्टर में गिरावट होती है। तो पहले तो अनऑर्गनाइज ऑर्गेनाइज एक साथ चलता था। लेकिन अब क्योंकि डिमांड शिफ्ट कर रही है अनऑर्गनाइज से ऑर्गेनाइज में तो इसलिए वहां पर जो है हमें वो दिख नहीं रहा है कि जो है एक्चुअली जीडीपी का ग्रोथ कम है। तो इसलिए अगर ऑर्गेनाइज सेक्टर उसी रफ्तार से बढ़ता रहे तो फिर इसका मतलब है कि अनऑर्गनाइज सेक्टर और भी गिरावट पे है। जी जी मैं साहब एक चीज और क्योंकि वो वो
13:11 मतलब मेरे लिए वो उत्तर बहुत आसान नहीं है समझना। जैसे सऊदी अरेबिया के हम इतनी दोस्ती कहते हैं कि हमारी बहुत दोस्ती है। हमारी गल्फ राज्यों से बहुत दोस्ती है। राष्ट्रों से इन्वेस्टमेंट जाके वो अमेरिका में करता है एक ट्रिलियन का। हमारे यहां इस तरह का कोई बड़ा इन्वेस्टमेंट किसी भी गल्फ कंट्री ने कमिट नहीं किया है। मैं इस पे एक आपसे एक टिप्पणी चाहूंगा कि जॉब क्रिएशन और इन्वेस्टमेंट डायरेक्टली रिलेटेड है। इसको क्यों हम कहां हमारी हमारी अर्थव्यवस्था की दिक्कत है कि हमारे फॉरेन पॉलिसी की दिक्कत है कि हमारी रक्षा हमारी दिक्कत कहां पे है? आपके हिसाब से अगर वन टू थ्री विदेश नीति, अर्थ नीति और रक्षा नीति इसको अगर वन टू थ्री में करें तो कहां पे दिक्कत है? देखिए जो सऊदी अरेबिया या कोई बाहर से
13:56 फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट इंडिया आता है वो संघर्ष क्षेत्र में जाता है। तो उससे संघर्ष बढ़ता है। उससे आपका रोजगार बढ़ने वाला नहीं है क्योंकि वो बहुत ही ऑटोमेटेड होता है। बहुत ही आजकल एआई के चलते हुए तो और भी कम रोजगार उसमें पैदा होगा। तो इसलिए मेरा मानना है कि एफडीआई का आना या सऊदी अरेबिया से इन्वेस्टमेंट आने से हमारी अर्थव्यवस्था में जो अनइंप्लॉयमेंट की सिचुएशन है उस पर कोई बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है। हमें तो अपने असंगेत को आगे बढ़ाना है और सऊदी अरेबिया क्यों इस समय अमेरिका में इन्वेस्ट कर रहा है या जापान कर रहा है या यू कर रहा है क्योंकि ये सारे जो ट्रेड डील्स हुए हैं जो ट्रंप ने किए वो वन साइडेड ट्रेड डील्स है। उनमें सबसे कंसेशन ले रहे हैं। वो कनाडा से, यू से, जापान से, साउथ कोरिया से और भारत से भी वो
14:43 कंसेशन लेना चाह रहे हैं। तो इसलिए सऊदी अरेबिया हो या बाकी गल्फ कंट्रीज है वो बहुत बड़े-बड़े प्रॉमिस कर रहे हैं। जापान ने भी 550 बिलियन डॉलर का प्रॉमिस कर दिया। यू ने भी 600 बिलियन डॉलर का प्रॉमिस कर दिया। तो इसलिए ट्रंप कह रहे हैं कि हमें तो 17 ट्रिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट आ जाएगा इस तरह से। तो वो जो स्थिति है आज की जिसमें मल्टीलटरलिज्म खत्म हो गया है और ट्रंप एक राजा की तरह बिहेव कर रहे हैं। सिर्फ जो कंसेशन ले रहे हैं बटरली तो इस वजह से वो वहां जा रहे हैं। है ना? नहीं तो वो अगर आप देखें तो सऊदी अरेबिया वगैरह जो अरब कंट्री जो अमीर है वो आज एआई में बहुत इन्वेस्ट कर रहे हैं। वो चाहते हैं कि ऑयल के बाद उनका जो कंप्यूटरटर्स में और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में इसमें बढ़त हो जाए। उसके लिए अमेरिका उनको मदद करने को तैयार है
15:30 क्योंकि वो वहां पर इन्वेस्ट कर रहे हैं और ये यहां पर टेक्नोलॉजी क्योंकि जैसे एनवीडिया चिप्स है या जो एडवांस चिप्स है उसमें कोटा लगा दिया है कि जैसे कि मतलब किन कंट्रीज को मिलेगी ये चिप्स और किनको नहीं मिलेगी तो ये सब जो करते हुए तो सऊदी अरेबिया को कुछ जाता नहीं है। वो प्रॉमिस कर देंगे कि एक ट्रिलियन डॉलर पर एक ट्रिलियन डॉलर 10 साल में होगा या पांच साल में होगा कोई आज तो नहीं होगा ना ये कहना कि जापान 550 बिलियन डॉलर इन्वेस्ट कर देगा और उसका 90% जो प्रॉफिट है वो अमेरिका में ही इन्वेस्ट होगा तो जापान जब मतलब कोई आज थोड़ी ना 550 बिलियन डॉलर इन्वेस्ट करेगा वो तो अगले पांच साल में करेगा तो इसलिए ये जो ट्रंप साहब कहते हैं वो एक तरह से सब पर दबाव बना के ये सारी चीजें कर रहे हैं और इस समय क्योंकि उन्होंने सारे देशों को तोड़ लिया अगर सारे देश मिलके उनसे नेगोशिएट करते तो फिर
16:16 हम कंसेशन उनसे ले सकते थे और उनको बैक ऑफ करना होता। अब हमने क्या किया? हमने सोचा कि नहीं हमें अच्छे टर्म्स मिल जाएंगे तो हम अलग से नेगोशिएट करेंगे। तो जैसे भारत का भी था कि हमें चीन से अच्छे टर्म मिल जाएंगे तो हमारा एक्सपोर्ट बढ़ जाएगा चीन के एवज में। तो इसको बेगर नेबर पॉलिसी कहते हैं। तो सभी देशों ने बेगर नेबर पॉलिसी अडॉप करके अलग-अलग किया तो हर एक ही पिस गया उसमें। अगर हम डब्ल्यू टीओ माइनस अमेरिका कर लेते तो फिर ये स्थिति इतनी बुरी नहीं होती। पर क्योंकि दुनिया में कोई ऐसा गठबंधन नहीं है और चीन से लोग घबराते हैं क्योंकि सब देशों का जो एक्सपोर्ट है अमेरिका की तरफ वो कम होगा तो चीन के पास जो सरप्लस होगा वो बाकी देशों में बेचेगा। जैसे आज हमारा सरप्लस है क्योंकि हमारा अमेरिका से डायरेक्ट रेट
17:01 कम है तो हम बाकी देशों में बेच रहे हैं। तो मुझे डर है कि इससे टेरिफ वॉर शुरू हो जाएगी। मतलब हर एक देश दूसरे देश पर टेरिफ लगाएगा जिससे अपनी इंडस्ट्री को प्रोटेक्ट कर सके। तो ये जो अगर चीन और बाकी मिलके एक दूसरे को एश्योर करें कि देखो अमेरिका के साथ ट्रेड कम होगा हम आपस में ट्रेड बढ़ा लेते हैं पर एक दूसरे पर टेरिफ नहीं लगाएंगे और डंपिंग नहीं करेंगे। अगर इतना एश्योरेंस होता तो बाकी देश सब मिलकर कर सकते थे। तो इसलिए मेरा मानना है कि ये जो पिटिकल सिचुएशन है वो इसलिए गड़बड़ी हुई क्योंकि हमने कोई गठबंधन नहीं किया आपस में मिलके। चीन ने थोड़ी कोशिश की थी। उसने यू के साथ भी नेगोशिएट किया। भारत के भी लेटर लिखा। लेकिन हम सब बगर नेशन नेबर की पॉलिसी के चलते अलग-अलग ही नेगोशिएट करते रहे। चीन चीन खड़ा रहा कुछ समय तक लेकिन चीन को भी अंत में झुकना
17:48 पड़ा। कनाडा भी खड़ा रहा था अमेरिका के खिलाफ लेकिन उसको भी झुकना पड़ा क्योंकि हम सब एक साथ नहीं हो पाए। तो ये ग्लोबल जो अलायंस है वो बाकी देशों के बीच में हो नहीं पाया। इसकी वजह से सब दब गए। जी जी मैं साहब एक एक सवाल और है जिसका जिसका आंसर मेरे पास नहीं मिल रहा है। मैं थोड़ा बहुत स्टॉक मार्केट में थोड़ा निवेश करता हूं और उससे मतलब मैं पिछले 30 35 साल से कर रहा हूं तो उससे मेरा मुझे ऐसा लगता है कि मैं थोड़ा बहुत खर्चा उससे निकल आता हूं। एक अजीब सी चीज ये हो रही है कि जैसे अप्रैल महीने में जो बीएस था वो 74,000 पॉइंट पे था। सितंबर में वो 8,000 था। अब बीएस जो है वो है 86000 86000 पे घूम रहा है लेकिन जो मेरा निवेश
18:33 की वैल्यू है वो उससे कम हो गई है मतलब मेरा जो सितंबर में था या अप्रैल था उससे कम मेरी वैल्यू है तो ये कौन से शेयर बढ़ रहे हैं ये कैसे बढ़ रहा है ये भी कोई मैनपुलेशन है मैं उसको रीड नहीं कर पा रहा हूं लेकिन ये सारे और मैं सर मैं अकेला नहीं हूं मेरे जो दोस्त मित्र जो इसमें है छोटामोटा हम लोग करते हैं अपनी जो सेविंग है उसको लगता है कि वहां से थोड़ा एफडी से बेटर मिल जाएगा इसको उसको अगर आप कुछ एड्रेस कर पाए कि हमारे निवेश नहीं बढ़ रहे हैं। इंडेक्स भागा जा रहा है। देखिए ये दुनिया भर में ना इस समय आप देखेंगे तो अमेरिका में स्टॉक मार्केट बहुत तेजी से बढ़ा है। क्योंकि सात टेक्नोलॉजी कंपनीज है। वो टेक्नोलॉजी कंपनीज एकदम आगे भागी जा रही है क्योंकि आर्टिशियल इंटेलिजेंस का वहां पे बहुत
19:19 बड़ा वो हो गया है। तो जैसे डॉट में के समय हुआ था कि बड़ा एकदम से बबल बन गया था। तो ये जो टेक्नोलॉजी कंपनीज है इनका भी शायद एक बबल बन रहा है। पर लोग सर्टेन नहीं है कि एक्सजेक्टली हो क्या रहा है। पर जैसे एनवीडिया है वो आज दो साल पहले कुछ भी नहीं थी। आज वो रिचेस्ट कंपनी है। 5 ट्रिलियन डॉलर भारत के जीडीपी से भी उसका वैल्यू्यूएशन ज्यादा हो गया है। है ना? तो इसलिए जो क्योंकि ग्लोबलाइज वर्ल्ड है तो ग्लोबलाइज वर्ल्ड में सारे स्टॉक मार्केट ऊपर हो जाते हैं। एक साथ नीचे हो जाते हैं। तो क्योंकि अमेरिका में ये काफी उछाल हो रहा है तो उसका असर सारी दुनिया पे पड़ रहा है। लेकिन अगर आप देखें तो ये जो उछाल सेवन टेक कंपनी में है वो बाकी और कंपनीज में अमेरिका में नहीं है। इतना उछाल तो इसलिए एक तरह से गड़बड़ी हो रही है कि एक बबल क्रिएट हो रहा है ये सात आठ
20:05 कंपनीज का। अगर ये आर्टियल इंटेलिजेंस वो डिलीवर नहीं करती है प्रॉफिटेबिलिटी कंपनियां का जो उसमें इन्वेस्ट कर रहे हैं तो फिर उसमें गिरावट आ सकती है। तो हमारी अर्थव्यवस्था में हुआ क्या है कि हम हम भी वो इंटरनेशनल मार्केट को फॉलो करते हैं हमारा लेकिन उसका हुआ ये था कि जब टेरिफ वगैरह लगे और ट्रंप आए तो उस समय सब जगह गिरावट आई क्योंकि सब जगह लगा कि ट्रेड डिस्टर्ब हो जाएगा। दुनिया में रिसेशन आ सकता है। लोग स्टफ्लेशन की बात कर रहे थे। मैं भी बात कर रहा था कि स्टफ्लेशन हो जाएगा। ऐसा हो जाएगा। लेकिन अमेरिका में वो आया नहीं रिसेशन या स्टकशन वहां पर दाम थोड़े बढ़े हैं लेकिन इतने नहीं बढ़े जितना कि सोचा गया था कि बढ़ जाएंगे और वहां पे क्योंकि इतना जबरदस्त इन्वेस्टमेंट हो रहा है ये आर्टिफल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी वगैरह में तो उसकी वजह से वहां पे जो अनइंप्लॉयमेंट है वो भी
20:53 इतना नहीं बढ़ा जितना कि सोचा गया था। दाम भी उतने नहीं बढ़े क्योंकि सारे देश अपने दामों को काट रहे हैं या पहले से ही सामान ले लिया था। तो इसलिए अभी तक वो हुआ नहीं है। तो हमारे यहां भी जो शुरू में लगा था कि बहुत ज्यादा असर होगा। है ना? उतना असर हमारे भी स्टॉक मार्केट पर पड़ा नहीं जितना कि सोचा गया था। तो इसीलिए जब वो असर नहीं हुआ और अमेरिका की अर्थव्यवस्था आगे जा रही है तो हमारा भी स्टॉक मार्केट आगे बढ़ने लगता है। अब उसमें कौन-कौन सी कंपनियां है, कहां पे किसने निवेश किया है उस पे निर्भर करेगा। क्योंकि एवरेज में बढ़ रहा है लेकिन जरूरी नहीं कि सभी में बढ़ रहा है। जैसे कि अमेरिका में जरूरी नहीं कि सभी एनवीडिया की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। तो स्टॉक मार्केट बढ़ रहा है लेकिन कुछ कंपनियां कम बढ़ रही है। कुछ ज्यादा बढ़ रही है। तो इसलिए मेरा मानना है कि भारत में भी यही है कि कुछ कंपनियां
21:38 है जो मतलब टेक्नोलॉजी के सेक्टर में है बाकी सेक्टर में है। वहां पर बढ़त हो सकती है। लेकिन बाकी सेक्टर में कम। अब जीएसटी लागू हुआ तो उससे हमारी ऑटोमोबाइल सेक्टर जीएसटी की कटौती जब हुई तो उससे हमारे ऑटोमे सेक्टर है, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर है उसमें मांग बढ़ गई तो वहां पर उछाल आया है। तो इस तरह से कुछ सेक्टर्स हैं जहां पे कि जो रिच लोग हैं जो मिडिल क्लास लोग हैं उनकी डिमांड ज्यादा होती है। वो सेक्टर्स बेटर करेंगे और जहां पे कि मास मार्केट है वहां पे नहीं क्योंकि वहां तो डिमांड जो असंगे से आती है। तो इसलिए एक डायवर्जेंट इफेक्ट रहेगा और सारी दुनिया में मुझे लगता है दिखेगा। जी प्रोफेसर साहब जो मैंने लास्ट के लिए आपके लिए रखा था मैं एक आपसे शेयर कर लूं। मैं जब हम सब
22:26 लोग 10 जर्नलिस्ट हम लोग अमेरिका गए तो वाशिंगटन में हम लोगों का बहुत इंटरेक्शन हुआ। उसमें कुछ रिपब्लिकन से भी हुआ और वो पढ़े लिखे रिपब्लिकन थे जो ट्रंप की हर चीज के लिए उनके पास एक वैलिड लॉजिकल आंसर था कि वो ऐसा क्यों कर रहा है? ऐसा क्यों कर रहा है? उसमें बहुत सी चीज थी। लेकिन जो मैं आपसे समझना चाह रहा हूं। उनसे हम लोगों का एक चीज ये था कि भाई मैंने उनसे कहा कि आपने सब कुछ किया। ठीक है अमेरिका को ट्रेड अपना देखना चाहिए। हर देश का अपना सेल्फ इंटरेस्ट होता है। आप ट्रेड में 200% लगाते 400% लगाते लेकिन आपने चीन भी रशिया से कर रहा था काम। यूरोप भी कर रहा था। गैस खरीद रहा था। आपने हमें सिंगल आउट करके केवल टेरिफ नहीं लगाया। आपने पेनल्टी भी लगाई और पेनल्टी आपने किसी के ऊपर नहीं लगाई। तो
23:11 ये जो आपने हम लोगों के साथ एक किया है तो वी एस एन इंडियन मैं कोई इकोनॉमिस्ट नहीं हूं लेकिन मुझे ये भाएगा नहीं मैं भूलूंगा नहीं तो उनका आंसर मैं इसलिए आपसे पूछ रहा हूं कि मैं एक रिएक्शन चाहूंगा उन्होंने कहा देखिए एक चीज समझिए जो चीन था उसने जब इंपोर्ट किया यूएस रूस से तो उसने अपने लोगों को सस्ता तेल दिया जब यूरोप था उसने जब गैस इंपोर्ट की तो उसने अपने लोगों को पास ऑन किया वो लेकिन आप अकेली कंट्री थे कि आपने रूस से इंपोर्ट इंपोर्ट किया और पूरा एक्सपोर्ट किया और उससे जो डॉलर मिले उससे आपने रूस में दिया जिससे वो लड़ाई लड़ रहा है। तो दो चीजें आपने अपने लोगों को कहीं कोई राहत नहीं दी। अगर आप राहत दे रहे होते तो शायद अमेरिका के लिए भी मुश्किल होता इस तरह का पेनाल्टी लगाना। हमने इसलिए किया
23:56 और उसने कहा जब आप बिनेस कर रहे थे तो हम भी कर। मैं इस पे एक छोटा रिएक्शन चाहूंगा। वो बहुत बिल्कुल क्लियर है कि उन्होंने हमारे ऊपर पेनल्टी क्यों लगाई? अरुण भाई देखिए उन्होंने पेनल्टी इसलिए लगाई क्योंकि हम उनकी बात सुन नहीं रहे थे। चीन भी नहीं सुन रहा था लेकिन चीन की स्थिति अलग है क्योंकि चीन पर बहुत निर्भर है वो बल्कि कई चीजें जो चीन से इंपोर्ट होती है उस पेनल्टी उन्होंने लगाया टेरिफ और तुरंत उसके बाद विड्र कर लिया था क्योंकि वो चीजें वहां पर अमेरिका में बनाई नहीं जा सकती है तो चीन की स्थिति अलग है हम बहुत कमजोर है चीन एक बहुत स्ट्रांग नेशन के रूप में उभर के आया है तो इसलिए वो हमें दबा रहे हैं और वो दबा रहे हैं क्योंकि वो चाहते हैं कि हम अपना कृषि का मार्केट खोल दें और हम अपना जो रशिया से ट्रेड वगैरह कम कर दें दोनों चीजें हम नहीं कर सकते। ये कहना कि हमारी कंपनियां वहां पर प्रॉफिट कमा रही थी और
24:42 इसलिए जब वो हुआ तो वो जो डॉलर की जो बात कह रहे हैं कि हमने वो डॉलर रशिया को सप्लाई किए तो जो भी वहां से इंपोर्ट करेगा वो डॉलर सप्लाई करेगा तो ऐसा नहीं कि चीन नहीं दे रहा है सिर्फ भारत दे रहा है। तो ये सारी चीजें बेकार है। जो असली बात है कि ट्रंप चाहता है कि जो वो चाहता है वो हो और उसके लिए भारत का कृषि मार्केट खोलना उसके लिए अहम है और वो हम कर नहीं सकते। वो रेड लाइन है हमारी। रूस के साथ ट्रेड हम कम इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि हमारा वो स्ट्रेटेजिक पार्टनर है। हमारी जो डिफेंस का अभी भी 40% वहां से है और उसमें क्रिटिकल चीजें हैं। जैसे S400 मिसाइल है, Suko एयरक्राफ्ट है, ब्राहमोस मिसाइल है। ये सारी चीजें बहुत क्रिटिकल है। अगर हम वहां से ट्रेड वगैरह कम कर दे और कल वो हमें वो सप्लाई करना कम कर दे
25:28 उसके स्पेयर पार्ट्स वगैरह तो हमारी बहुत बड़ी परेशानी हो जाएगी डिफेंस में। तो इसलिए हम रूस से नहीं कम कर सकते। तो ये दो जो चीजें हैं इसको हम जो है ट्रंप को नहीं कर सकते हैं। तो ऑयल को हम कम कर दिया बाकी जगह से पर जो डिफेंस सप्लाई वगैरह है उससे हम अपने रूस से रिश्ते कम नहीं कर सकते हैं और वो हमारा एक स्ट्रेटजिक पार्टनर रहा है और वो स्ट्रेटफस्ट रहा है। उसने कभी इस तरह से हमें नहीं दबाया जैसे अमेरिका ने या वेस्ट ने हमें दबाया अलग-अलग समय पे। तो इसलिए जो स्ट्रेटजिकली अगर देखा जाए तो वो हम नहीं कर सकते जो अमेरिका चाहता है क्योंकि हमारी स्थिति टेक्नोलॉजी में बहुत कमजोर है। हम तीन तगड़ी के बीच में फंसे हुए हैं। रूस, चीन और अमेरिका इन तीनों के बीच में हम फसे हैं क्योंकि अब बहुत सारा हमारा इक्विपमेंट अमेरिका से आ गया है। डिफेंस
26:15 इक्विपमेंट तो हम उसको नहीं डिस्प्लीस कर सकते। उससे तो बल्कि हम और कोशिश कर रहे हैं कि और डिफेंस सप्लाई ले ले। चीन को नहीं हम कर सकते। उससे तो हमारा 100 बिलियन डॉलर का ट्रेड डेफिसिट है। हमारे क्रिटिकल चीजें वहां से आ रही है। हमारी बहुत सारी फैक्ट्री उनके मशीनों पे चल रही है। और रूस से हमारा स्ट्रेटजिक वो रिश्ता है। तो इसलिए हम तीनों के बीच फंसे हैं क्योंकि हम टेक्नोलॉजी में बहुत कमजोर है। अगर टेक्नोलॉजी में हम स्ट्रांग होते तो हम नहीं फंसते। जी जी थैंक यू सो मच प्रो साहब बातचीत करने के लिए और मेरे ख्याल में आने वाले समय में फिर से क्योंकि नए डाटा अभी आ जाएंगे इसके बाद वो शायद इंटरेस्टिंग होगा भारत में भी उसको कैसे जस्टिफाई किया जाता है क्योंकि थैंक यू सो मच बहुत-बहुत शुक्रिया धन्यवाद नमस्ते