Decode Full Show: देखिए Decode, Sudhir Chaudhary के साथ; March 10, 2026 | Episode Today | Iran War

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সংক্ষিপ্ত সারসংক্ষেপ

এই ভিডিওটিতে ইরান যুদ্ধ এবং এর কারণে বিশ্বব্যাপী তেলের সংকট নিয়ে আলোচনা করা হয়েছে। এছাড়াও, ভিডিওটিতে তেল সংকটের কারণে পাকিস্তান ও বাংলাদেশের অর্থনৈতিক অবস্থা এবং ভারতের উপর এর প্রভাব নিয়ে আলোচনা করা হয়েছে। সবশেষে, অন্ধ্র প্রদেশে ভেজাল দুধ পান করে ১১ জনের মৃত্যুর একটি দুঃখজনক ঘটনা তুলে ধরা হয়েছে।

মূল বিষয়গুলো:

  • ইরান যুদ্ধের কারণে বিশ্বব্যাপী তেলের সরবরাহ কমে গেছে, যার প্রভাব পড়েছে বিভিন্ন দেশের অর্থনীতিতে।
  • পাকিস্তান ও বাংলাদেশের মতো দেশগুলো ইতিমধ্যেই তেল সংকটের কারণে কঠিন পরিস্থিতির সম্মুখীন।
  • ভারত সরকার পরিস্থিতি মোকাবিলায় প্রয়োজনীয় পদক্ষেপ নিচ্ছে।
  • অন্ধ্র প্রদেশে ভেজাল দুধ পান করে ১১ জনের মৃত্যু হয়েছে, যা খাদ্য সুরক্ষার বিষয়ে উদ্বেগ বাড়িয়েছে।

ভূমিকা

অনুষ্ঠানটি শুরু হয় ইরান যুদ্ধের কারণে বিশ্বব্যাপী তেলের সংকট এবং এর ফলস্বরূপ আপনার বাজেটের উপর এর প্রভাব নিয়ে আলোচনার মাধ্যমে। উপস্থাপক বলেন যে যুদ্ধের কারণে হওয়া ক্ষয়ক্ষতির বিল এখন জনগণের কাছে পৌঁছাতে শুরু করেছে।

বিশ্বব্যাপী তেল সরবরাহে ঘাটতি

বর্তমানে বিশ্বে প্রতিদিন প্রায় ১০ কোটি ব্যারেল অপরিশোধিত তেল সরবরাহ করা হয়, কিন্তু এখন প্রায় ২ কোটি ব্যারেল সরবরাহ কমে গেছে। এর ফলে তেলের সরবরাহে প্রায় ২০% ঘাটতি দেখা দিয়েছে। সৌদি আরব, ইউএই এবং ইরাকের মতো দেশগুলো তেলের উৎপাদন কমিয়ে দিয়েছে।

তেলের দামের বৃদ্ধি

যুদ্ধ শুরু হওয়ার আগে অপরিশোধিত তেলের দাম ছিল ব্যারেল প্রতি $৭২, যা যুদ্ধের দশম দিনে বেড়ে প্রায় $১২০ হয়েছিল। বর্তমানে দাম কিছুটা কমে $৯১ এ দাঁড়িয়েছে।

সরবরাহ চেইন ভেঙে যাওয়া

বিশ্বের বিভিন্ন পথে অপরিশোধিত তেল সরবরাহ করা হয়। মালাক্কা প্রণালী দিয়ে বিশ্বের প্রায় ২৯% তেল যায়, যা সবচেয়ে ব্যস্ত তেল मार्ग। হরমুজ প্রণালী দিয়ে প্রায় ২৬% তেল সরবরাহ করা হয়। বর্তমানে এই অঞ্চলে যুদ্ধ চলায় এই পথ দিয়ে তেল সরবরাহ প্রায় বন্ধ হয়ে গেছে।

ঐতিহাসিক প্রেক্ষাপট: ১৯৭৩ সালের তেল সংকট

১৯৭৩ সালে আরব দেশ ও ইসরায়েলের মধ্যে ইয়োম কিপ্পুর যুদ্ধ হয়েছিল। সেই সময় আরব দেশগুলো আমেরিকা ও পশ্চিমা দেশগুলোকে তেল বিক্রি বন্ধ করে দিয়েছিল, যার ফলে তেলের দাম ৩০০% বেড়ে গিয়েছিল।

১৯৭৩ সালের সংকটের পরবর্তী পরিবর্তন

১৯৭৩ সালের সংকটের পর তিনটি বড় পরিবর্তন হয়েছিল:

১. বিশ্বব্যাপী অপরিশোধিত তেলের উপর নির্ভরতা কমানোর চেষ্টা শুরু হয় এবং বিকল্প জ্বালানির উৎস খোঁজা হয়। ২. আন্তর্জাতিক সংস্থা ইন্টারন্যাশনাল এনার্জি এজেন্সি (IEA) প্রতিষ্ঠিত হয়, যা দেশগুলোকে কমপক্ষে ৪০-৫০ দিনের তেলের রিজার্ভ রাখার পরামর্শ দেয়। ৩. ছোট এবং জ্বালানি সাশ্রয়ী গাড়ি তৈরির উদ্যোগ নেওয়া হয়।

অতীতে তেলের দামের উল্লম্ফন

বিভিন্ন সময়ে তেলের দামের বড় উল্লম্ফনগুলো হলো:

  • ১৯৯০ সালে ইরাক-কুয়েত যুদ্ধের সময় ১৭৩% বৃদ্ধি।
  • ২০০৭-০৮ সালে বিশ্বব্যাপী চাহিদার কারণে $৫১ থেকে $১৪৭ এ বৃদ্ধি।
  • ২০১১ সালে আরব বসন্তের সময় ৫৫% বৃদ্ধি।
  • ২০২২ সালে রাশিয়া-ইউক্রেন যুদ্ধের সময় ৪৩% বৃদ্ধি।
  • আমেরিকা-ইরান যুদ্ধের শুরুতে ১০ দিনে ৬৩% বৃদ্ধি।

তেল উৎপাদন কেন্দ্রে হামলা

আবুধাবিতে ইরানের ড্রোন হামলার পর একটি তেল শোধনাগার বন্ধ করে দেওয়া হয়েছে, যা প্রতিদিন প্রায় ৯ লাখ ব্যারেল অপরিশোধিত তেল পরিশোধন করত।

পাকিস্তান ও বাংলাদেশের অবস্থা

তেল সংকটের কারণে পাকিস্তান ও বাংলাদেশের অর্থনীতিতে বড় ধরনের প্রভাব পড়েছে। পাকিস্তানে স্কুল-কলেজ বন্ধ করে দেওয়া হয়েছে, সরকারি অফিসে সপ্তাহে চার দিন কাজ চলছে এবং সরকারি গাড়ির ব্যবহার কমিয়ে দেওয়া হয়েছে। বাংলাদেশেও পেট্রোল ও ডিজেল কেনার সীমা নির্ধারণ করা হয়েছে এবং বিশ্ববিদ্যালয়গুলো বন্ধ করে দেওয়া হয়েছে।

ভারতে তেল সংকট

ভারত তার চাহিদার প্রায় ৯০% অপরিশোধিত তেল, ৬৬% এলপিজি এবং ৫০% এলএনজি অন্য দেশ থেকে কেনে। সরকার পরিস্থিতি মোকাবিলায় প্রয়োজনীয় পদক্ষেপ নিচ্ছে, যেমন - গ্যাসের মজুতদারি বন্ধ করা, এলপিজি উৎপাদন বাড়ানো এবং ৪০টি দেশের সঙ্গে তেল সরবরাহ নিয়ে আলোচনা করা।

ইরান যুদ্ধের আপডেট

ডোনাল্ড ট্রাম্প হুমকি দিয়েছেন যে ইরান হরমুজ প্রণালীতে তেল সরবরাহ বন্ধ করার চেষ্টা করলে আমেরিকা তার উপর আরও শক্তিশালী হামলা চালাবে। ইরানও পাল্টা জবাব দিয়েছে।

ইরান যুদ্ধের অর্থনীতি

আমেরিকা এই যুদ্ধে প্রতিদিন প্রায় ১৮,০০০ কোটি টাকা খরচ করছে। ইরান তাদের শহীদ ড্রোন ব্যবহার করছে, যা সস্তা হলেও আমেরিকার আকাশ প্রতিরক্ষা ব্যবস্থার ক্ষেপণাস্ত্র অনেক বেশি দামি।

যুদ্ধ বন্ধের প্রস্তাব

ডোনাল্ড ট্রাম্প এখন ইরান যুদ্ধ থেকে বেরিয়ে আসার চেষ্টা করছেন, কারণ তেলের দাম বাড়ছে এবং আমেরিকার জনগণ এই যুদ্ধের বিপক্ষে।

ইরানের কৌশল

ইরান পাল্টা হামলা চালিয়ে আমেরিকাকে ক্লান্ত করে দিতে চায়। তারা মনে করে যে যুদ্ধ দীর্ঘ হলে তেলের দাম বাড়বে এবং আমেরিকা সমঝোতা করতে বাধ্য হবে।

স্কুলে হামলা

ইরানের একটি স্কুলে ক্ষেপণাস্ত্র হামলায় ১৬৮ জন ছাত্রী নিহত হয়। প্রথমে ইসরায়েলকে দায়ী করা হলেও, পরে জানা যায় যে এটি আমেরিকার টমাহক ক্ষেপণাস্ত্র ছিল।

রাশিয়ার প্রস্তাব

রাশিয়ার প্রেসিডেন্ট ভ্লাদিমির পুতিন ইরান যুদ্ধে যুদ্ধবিরতির প্রস্তাব দিয়েছেন এবং ইউরোপীয় দেশগুলোকে তেল সরবরাহের প্রস্তাব দিয়েছেন।

ভেজাল দুধ

অন্ধ্র প্রদেশের পূর্ব গোদাবরী জেলায় ভেজাল দুধ পান করে ১১ জনের মৃত্যু হয়েছে। দুধে ইথিলিন গ্লাইকল নামক একটি রাসায়নিক পাওয়া গেছে, যা মেশিনের যন্ত্রাংশ ঠান্ডা করার জন্য ব্যবহৃত হয়।

দুধে ভেজাল: একটি জাতীয় সমস্যা

ভারতে দুধ এবং দুগ্ধজাত পণ্যে ভেজাল একটি বড় সমস্যা। ভেজাল মেশানোর অপরাধে ১ লাখ টাকা পর্যন্ত জরিমানা এবং ৭ বছর পর্যন্ত কারাদণ্ডের বিধান রয়েছে, তবে এর পরেও এই অপরাধ চলছে।

সমাপনী

অনুষ্ঠানটি শেষ হয় দর্শকদের সুখী, নিরাপদ ও সুস্থ থাকার বার্তা দিয়ে।

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Transcript

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0:01 [संगीत] नमस्कार, मैं हूं सुधीर चौधरी और डिकोड में आपका स्वागत है। तो आइए आज की खबरों को आपके लिए [संगीत] डिकोड करते हैं। आज ईरान युद्ध के सिर्फ 11 दिन हुए हैं। लेकिन पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई में लगभग 20% की कमी आ चुकी है। सऊदी अरब, यूएई और इराक जैसे देशों ने हर दिन 5 से लेकर 30 लाख बैरल तक तेल का उत्पादन कम कर दिया है। स्टेट ऑफ

0:47 हरमूस से दुनिया का लगभग 26% तेल गुजरता है। लेकिन इस रास्ते से तेल की सप्लाई लगभग बंद हो चुकी है। यह दुनिया का सबसे बड़ा तेल संकट है। आप यह समझ लीजिए कि इस युद्ध में होने वाले हर नुकसान का बिल अब आप तक पहुंचना शुरू हो गया है। जिसका आपके घरेलू बजट पर बहुत बड़ा असर पड़ सकता है। इस तेल संकट से पाकिस्तान की हालत अब बहुत खराब हो चुकी है। पाकिस्तान में स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। सरकारी दफ्तर हफ्ते में सिर्फ चार दिन खुलेंगे और वहां के सभी सांसदों की सैलरी में भी कटौती की गई है और सरकारी गाड़ियों में अब सिर्फ 50% तेल डलेगा। बांग्लादेश में भी सभी

1:33 यूनिवर्सिटीज को बंद कर दिया गया है। साथ ही पेट्रोल और डीजल खरीदने की एक सीमा तय कर दी गई है। अब आप जितना चाहे उतना पेट्रोल डीजल बांग्लादेश [संगीत] में नहीं खरीद पाएंगे। आज हम आपको यह बताएंगे कि इस तेल संकट का भारत पर क्या असर पड़ेगा। आप पर क्या असर पड़ेगा और भारत की सरकार इसके लिए [संगीत] कितनी तैयार है। लेकिन उससे पहले आपको अपने अड़ोस पड़ोस में क्या हो रहा है, यह भी देखना चाहिए। और आखिर में आपको यह दिखाएंगे कि आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध पीने से [संगीत] 11 लोगों की मौत हो गई। इस दूध में एक ऐसा खतरनाक केमिकल पाया गया जिसका इस्तेमाल गाड़ियों में किया जाता है। जिस दूध को हमारे देश में अमृत माना जाता है। जिसे शुद्धता के साथ जोड़कर देखा जाता है। जिसे हर मां पूरे भरोसे के साथ अपने बच्चे को पिलाती

2:19 है। आज उसी दूध में उसी देश में सबसे ज्यादा मिलावट हो रही है। लेकिन सबसे [संगीत] पहले आपको बताते हैं इस वक्त की आज की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर। ईरान युद्ध की वजह से अब दुनिया एक बहुत बड़े तेल संकट की तरफ बढ़ रही है और अब इसका असर आपके बजट पर आपकी रसोई पर भी पड़ सकता है और दुनिया भर में तेल की सप्लाई में अब भारी गिरावट [संगीत] आई है। आप यह समझ लीजिए कि अभी तक युद्ध की जितनी सारी तस्वीरें आप देख रहे थे, इन हमलों की तस्वीरें, इस आग की तस्वीरें, इन फाइटर जेट्स की तस्वीरें, इन मिसाइलों की तस्वीरें, [संगीत] अब हर उस हमले का बिल आप तक पहुंचना शुरू हो गया है। आपको भी

3:06 इसका बिल भरना पड़ेगा। आज इस युद्ध का सिर्फ 11वां दिन है। अभी तो सिर्फ 11 दिन हुए हैं और 11 दिन में ही इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब इतने कम समय में इतना बड़ा तेल संकट पूरी दुनिया में खड़ा हो गया है। तेल की कमी की वजह से [संगीत] पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी कमजोर अर्थव्यवस्थाएं पहले ही बहुत परेशानी में आ गई हैं। दुनिया की ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं पर यानी ज्यादातर देशों पर अब इस तेल संकट का बुरा असर दिखना शुरू हो गया है। तो सबसे बड़ा सवाल आज यह है कि यह हुआ क्यों? दुनिया में हर रोज लगभग 10 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई [संगीत] होती है। एक अनुमान के मुताबिक अभी दुनिया में प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई कम हो गई है। पहले 10 करोड़

3:53 होती थी। अब 8 करोड़ हो रही है। [संगीत] यानी अभी तक कच्चे तेल की सप्लाई में लगभग 20% की कमी आ चुकी है। मध्य पूर्व के कुछ देशों जैसे सऊदी अरब ने हर रोज 20 लाख से 25 लाख बैरल तेल का उत्पादन कम कर दिया है। यूएई में भी प्रतिदिन 5 लाख से लेकर 8 लाख बैरल तक तेल का उत्पादन कम हो चुका है। जबकि [संगीत] इराक ने भी प्रतिदिन लगभग 30 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन कम कर दिया है। आपने यह देखा होगा कि हाल के दिनों में लगातार तेल की रिफाइनरीज पर हमले हुए हैं दोनों तरफ से। पिछले कुछ दिनों में दुनिया भर में जिस कमोडिटी में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, वो है कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल। युद्ध शुरू होने से पहले यानी 27 फरवरी को

4:42 दुनिया में कच्चे तेल की कीमत थी 72 प्रति बैरल। युद्ध शुरू होने के 10वें दिन यानी 9 मार्च को इसका भाव लगभग $120 प्रति बैरल तक चढ़ गया। और आज जब मैं आपको यह खबर सुना रहा हूं तो आज तेल का भाव है लगभग 91 प्रति बैरल यानी 120 तक गया और अब थोड़ा कम होकर 91 पर आया है आज लेकिन युद्ध होने से पहले शुरू होने से पहले $72 था भाव। अब आप यह समझ लीजिए कि इस युद्ध में मिसाइल्स से जो हमला हो रहा है, जो नुकसान हो रहा है, उसका बिल आप तक पहुंचना शुरू हो गया है और इसका आपके घरेलू बजट पर भी असर पड़ेगा। इसलिए आप भी तैयार हो जाइए। अब

5:29 आपको यह बताते हैं कि इस युद्ध की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई चेन कैसे टूट गई और इसे लेकर इतनी ज्यादा चिंता क्यों है? दुनिया भर में अलग-अलग रास्तों से कच्चे तेल की सप्लाई होती है। स्टेट ऑफ मलेक्का जो इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच में है, वहां से पूरी दुनिया का लगभग 29% तेल गुजरता है। यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है। मध्य पूर्व से चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और एशिया के देशों में जाने वाला तेल यहीं से होकर गुजरता है। और इसी तरह से स्टेट ऑफ हरमूस से लगभग 26 26% तेल गुजरता है। खाड़ी देश जैसे [संगीत] सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और ईरान का लगभग सारा के सारा तेल इसी रास्ते से होकर पूरी दुनिया तक

6:17 पहुंचता है। इस समय इस इलाके में युद्ध चल रहा है और फिलहाल इस रास्ते से कच्चे तेल की सप्लाई लगभग बंद हो चुकी है। अब दुनिया भर में अलग-अलग रास्तों से कच्चे तेल की सप्लाई की जा रही है। लेकिन इससे कुछ खास फायदा होगा नहीं। क्योंकि दूसरे रास्ते बहुत ज्यादा लंबे हैं और मध्य पूर्व ही तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। क्योंकि जो ऑयल प्रोड्यूसिंग कंट्रीज हैं बड़े-बड़े वो सब मिडिल ईस्ट में है। पश्चिम एशिया में है और यही वो देश हैं जो सबसे ज्यादा प्रभावित इस समय हो रहे हैं इस [संगीत] युद्ध से। इस युद्ध से कच्चे तेल की कीमत में जो तेजी आई है, उसने पिछले 53 साल आप यह समझ लीजिए कि 53 साल पहले के इतिहास को फिर से

7:04 ताजा कर दिया है। फिर से दोहरा दिया है। आज आपको बताते हैं कि 1973 में इससे पहले ऐसी स्थिति आई थी। वर्ष 1973 में अरब देशों और इजराइल के बीच योम के पुर युद्ध हुआ था। इसे कहते हैं योम के पुर युद्ध। इस युद्ध में अरब देश जैसे इजिप्ट और सीरिया ने मिलकर इजराइल पर हमला कर दिया था और इस युद्ध में अमेरिका ने तब इजराइल का साथ दिया था जैसे आज इजराइल और अमेरिका एक टीम में है तब भी ऐसे ही थे और इससे नाराज होकर अरब देशों ने अमेरिका और पश्चिमी देशों को तेल बेचना या समझ लीजिए कि तेल देना बंद कर दिया था। इससे कच्चे तेल की कीमत $300% बढ़कर $3 से बढ़कर तब $ हो गई थी। आज से 53 साल पहले की बात मैं

7:51 आपको बता रहा हूं। उस समय अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों में जगह-जगह पेट्रोल पंप्स पर गैस और पेट्रोल खत्म होने के नोटिस लगा दिए गए थे। तेल कहीं मिल नहीं रहा था आम लोगों को और आम जनता को पेट्रोल की सप्लाई बहुत ही सीमित कर दी गई। वर्ष 1947 से लेकर 1973 के बीच पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाओं में बहुत तेजी से विकास हुआ था। लेकिन इस युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ गई थी। [संगीत] इससे पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाओं में सबसे बड़ा आर्थिक संकट आया। वहां महंगाई और बेरोजगारी बहुत बढ़ गई और आर्थिक विकास उस समय रुक गया था इस तेल की कमी की वजह से और इस घटना ने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया और इसके बाद तीन सबसे बड़े बदलाव

8:37 किए गए। पहला दुनिया भर में कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश शुरू हुई और ऊर्जा के दूसरे विकल्पों की खोज शुरू हुई। पश्चिमी देशों को, बड़े-बड़े देशों को यह समझ में आया कि हम कब तक सिर्फ इस कच्चे तेल पर आधारित रहेंगे और यह कच्चा तेल जो है यह खाड़ी देशों के मुट्ठी में है और अगर किसी दिन इन्होंने सप्लाई बंद कर दी जैसा कि उन्होंने पहले किया था तो फिर हम लोग क्या करेंगे? इसका मतलब कुछ और नई खोज की जाए जिससे कच्चे तेल का विकल्प सामने आए। और आपने देखा होगा उसके बाद बहुत सारे विकल्प आए। गाड़ियां और दूसरी जो चीजें हैं वो सीएनजी से चलने लगी। इसके बाद इलेक्ट्रिक गाड़ियां आई और भी बहुत सारे विकल्प तलाशे गए ऊर्जा के। दूसरा अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल एनर्जी

9:24 एजेंसी की स्थापना की गई और उसने यह सलाह दी कि दुनिया के देश कम से कम 40 से 50 दिनों का कच्चा तेल का रिजर्व अपने यहां पर हमेशा बचा कर रखें। इसीलिए आपने देखा होगा कि जो बड़े-बड़े देश हैं, अच्छी अर्थव्यवस्थाएं, वह कम से कम 40 से 50 दिन का तेल का रिजर्व अपने देश में बचा कर रखते हैं कि मान लीजिए कभी कोई ऐसी क्राइसिस की स्थिति आ गई, कोई आपातकाल ऐसा हो गया जैसा कि इस समय चल रहा है तो हमारा देश रुके नहीं। कच्चा तेल का रिजर्व हमारे पास होना चाहिए लगभग 2 महीने का। और तीसरा बड़ा बदलाव यह हुआ कि [संगीत] छोटी और एनर्जी एफिशिएंट कार्स बनाने की शुरुआत हुई और आज के समय में BS6 जैसी टेक्नोलॉजी उसी [संगीत] सोच का परिणाम है।

10:10 तो यह तीन बड़े बदलाव 1973 के बाद किए गए। जब पश्चिमी देशों ने यह देखा कि अगर किसी दिन तेल की सप्लाई रुक गई तो उनका पूरा देश ही रुक जाएगा। वर्ष 1973 के बाद दुनिया में कच्चे तेल में कब-क बड़ी-बड़ी तेजी आई हैं और क्यों आई हैं? अब जरा यह भी देखिए। वर्ष 1990 में इराक और कुवैत युद्ध के दौरान कच्चे तेल में लगभग 173% की तेजी आई थी। कच्चा तेल $15 प्रति बैरल से बढ़कर 41 प्रति बैरल तक पहुंच गया था। उस समय के हिसाब से यह बहुत बड़ा जंप था। इसके बाद वर्ष 2007 और आठ में दुनिया भर में कच्चे तेल की मांग तेजी से बढ़ी। कच्चा तेल 1 साल से भी कम समय में $51 से बढ़कर $147 प्रति बैरल तक पहुंच गया।

10:57 हालांकि उसके बाद दुनिया भर में आर्थिक मंदी आ गई जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमत में भी भारी गिरावट आई और फिर यह वापस $36 के भाव तक आ गया और फिर वर्ष 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान मध्य पूर्व देशों में सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शन हुए और इसका कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा था और तब भी जो है [संगीत] इसी प्रकार की स्थिति हुई अरब स्प्रिंग के दौरान भी 55% बढ़ गया था कच्चा तेल। और फिर वर्ष 2022 में जब रशिया ने यूक्रेन पर हमला किया तब भी कच्चे तेल की कीमत में 1 महीने के अंदर ही 43% की तेजी आ गई थी। जबकि अमेरिका और ईरान के बीच अब जब यह युद्ध शुरू हुआ है। उसके बाद सिर्फ 10 दिनों के अंदर कच्चे

11:42 तेल के भाव में 63% की तेजी आई है। मैं आपको बड़ी स्क्रीन पर दिखाता हूं। देखिए दुनिया के इतिहास में कब-कब हाल के वर्षों में कच्चे तेल में इसके भाव में इतनी वृद्धि हुई है। खाड़ी युद्ध के दौरान 173% हुआ था। दुनिया भर में फिर 2008 में 188% ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि इतने कम दिनों में कच्चे तेल की कीमत में इतनी बड़ी तेजी आई है। [संगीत] इसलिए दुनिया भर में बड़ी-बड़ी सरकारें, बड़े-बड़े देश चिंता में हैं कि अगर यह युद्ध ज्यादा दिनों तक चला, तो फिर से दुनिया भर में वर्ष [संगीत] 1973 जैसे हालात बन सकते

12:29 हैं। और इसमें कोई भी सरकार कुछ खास कर नहीं पाएगी। जैसा कि हमने आपको बताया था कि इस युद्ध में लगातार कच्चे तेल की रिफाइनरीज पर हमले हो रहे हैं। आज आबू धाबी में ईरान के ड्रोन हमले के बाद अपना एक रिफाइनरी प्लांट बंद कर दिया गया है। यह देखिए आबू धाबी पर आज एक हमला हुआ है ईरान की तरफ से और इस प्लांट में हर दिन लगभग 9 लाख बैरल कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता है। अब इसे भी बंद करना पड़ा है। तो इससे पहले अगर आप देखें तो ईरान ने जो दूसरे अड़ अपने पड़ोसी खाड़ी देश हैं उनकी ऑयल रिफाइनरीज पर काफी हमले किए हैं। यानी जो तेल की सप्लाई है उसे [संगीत] बाधित करने की कोशिश की जा रही है। स्टेट

13:14 ऑफ हरमूस को भी बंद कर दिया गया है ताकि उससे भी तेल दूसरे देशों तक ना पहुंचे। और आू धाबी में जो नया हमला हुआ है उसमें भी यही देखने को मिल रहा है। और इस युद्ध की वजह से दुनिया की जो अर्थव्यवस्थाएं पहले से ही कमजोर हैं वहां पर तो और भी ज्यादा संकट शुरू हो चुका है और भारत के पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश में इसका सबसे ज्यादा असर अभी से दिखने लगा है। अब जरा पाकिस्तान की हालत देखिए। पाकिस्तान में तो बुरी हालत हो चुकी है। पाकिस्तान की सरकार ने अपने देश में तेल की खपत को कम करने के लिए आज कई बड़े फैसले लिए हैं। [संगीत] अब पूरे पाकिस्तान में स्कूल और कॉलेज दो हफ्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं। जबकि यूनिवर्सिटीज में

14:00 क्लासेस ऑनलाइन होंगी। पाकिस्तान में सरकारी दफ्तर और अब हफ्त एक हफ्ते में सिर्फ चार दिन खुलेंगे। सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में 50% कर्मचारी अब वर्क फ्रॉम होम करेंगे। घर से ही काम करेंगे ताकि वह सड़कों पर ना निकलें ताकि पेट्रोल और डीजल की खपत कम हो। 60% सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल अब नहीं किया जाएगा। यानी 60% सरकारी गाड़ियों को खड़ा कर दिया जाएगा, पार्क कर दिया जाएगा और सरकारी गाड़ियों को 2 महीने तक 50% कम फ्यूल अलाउंस दिया जाएगा। यानी जो बाकी की सरकारी गाड़ियां हैं भी उनमें [संगीत] भी सिर्फ आधा पेट्रोल और डीजल पड़ेगा। पाकिस्तान के सांसदों की सैलरी में 2 महीने के लिए 25% की कटौती कर दी गई है। और इस संकट के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल

14:46 के दाम ₹55 बढ़ा दिए गए हैं। और अब यह हैं ₹266 से बढ़कर यह ₹321 पर लीटर भाव वहां का हो चुका है। तो पाकिस्तान में जो पेट्रोल बिक रहा है वह है ₹321 प्रति लीटर। तो वहां पर पेट्रोल डीजल के भाव बढ़ गए हैं। अब आपको सुनाते हैं कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आज वहां की जनता से इस संकट के बारे में क्या कह रहे थे और फिर जनता ने क्या जवाब दिया। आइंदा दो माह के लिए सरकारी महकमों की गाड़ियों को मिलने वाले तेल में 50% फिल फॉर कटौती की जा रही है। सरकारी और

15:33 निजी शोबे में इंतहाई जरूरी सर्विज को छोड़कर यानी एसेंशियल सर्विज को छोड़कर बाकी तमाम जगहों पर 50% स्टाफ घर से काम करेगा। यानी वर्क फ्रॉम होम। हफ्ते में सिर्फ चार दिन दफादर खुलेंगे। तेल की बचत के लिए हफ्ते में एक इजाफी छुट्टी दी जा रही है। जैसे ही स्कूल का बंद ऐलान किया उन्होंने। ये सारी मार्केटें ये दुकानें बिल्कुल खाली पड़ गई हैं। जैसे हमारे जैसे और असेसरी का काम करते हैं, यूनिफार्म का काम करते हैं तो उनके लिए भी एक तो मुश्किल हो जाएगी पेट्रोलियम

16:20 मसआत की रीजन बना के तो ये तरीकाकार तो नहीं है। उम्मीद है कि आवाम को इस हद तक रिलीफ मिलेगा कि जब तक ये मौजूदा जो सुरते हाल है जंगी मामला जो चल रहा है ये होप सो कि जल्द से जल्द ये मामला खत्म हो। जो आलमी मंडी में पेट्रोल की कीमत है उसमें भी कमी आए। यहां पर पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत में कमी आए ताकि लोग रोजाना के मामूल के मुताबिक अपनी जिंदगी में गुजर-बसरर करें। तो पाकिस्तान की हालत खराब हो चुकी है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही इतनी कमजोर है कि उसके अंदर इतनी ताकत ही नहीं बची कि वो इस नए क्राइसिस का सामना कर सके। इसलिए अब पाकिस्तान में आपको आने वाले दिनों में लंबी-लंबी लाइन दिखाई देंगी पेट्रोल डीजल [संगीत] के लिए पेट्रोल पंप पर। वहां पर स्कूल कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। 50% कर्मचारी जो हैं वह वर्क फ्रॉम होम करेंगे। सरकारी

17:06 गाड़ियां जो है वह आधी सरकारी गाड़ियों को खड़ा कर दिया गया है ताकि उनमें पेट्रोल डीजल डालने की नौबत ही ना आए और बहुत बड़े-बड़े कदम वहां की सरकार को उठाने पड़े हैं और उन्होंने दाम तो बढ़ा दिए हैं पहले ही। अब देखिए हमारा दूसरा पड़ोसी देश बांग्लादेश। बांग्लादेश ने भी कच्चे तेल के संकट से निपटने [संगीत] के लिए कई सख्त फैसले किए हैं। वहां पर सभी सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को 9 मार्च से ही बंद कर दिया गया है। पेट्रोल पंप्स पर लोगों की भीड़ की वजह से पेट्रोल और डीजल खरीदने की एक समय एक सीमा तय कर दी गई है। देश की पांच सरकारी फर्टिलाइजर फैक्ट्रीज में से चार को अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया है। और भी कई कड़े फैसले वहां की सरकार अभी उठा सकती है क्योंकि बांग्लादेश

17:54 में भी इतनी ताकत नहीं बची कि वह इस क्राइसिस का सामना कर सके। उन्हें कुछ सख्त फैसले लेने ही पड़ेंगे। अब देखिए कि हमारे देश में क्या चल रहा है। सबसे पहले तो आप यह जान लीजिए कि हमारे देश में भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल। यह ध्यान से सुनिएगा आप। 90% कच्चा तेल, 66% एलपीजी और 50% एलएनजी हम दूसरे [संगीत] देशों से खरीदते हैं। इसलिए एक बात तो यह याद रखिए कि हमारा जो 90% तेल है यह हम दूसरे देशों से खरीद रहे हैं और अगर दूसरे देशों में उत्पादन ही नहीं होगा तो यह तेल हम कैसे खरीद पाएंगे? [संगीत] अगर इस तेल के दाम बढ़ जाएंगे तो भारत को इसके लिए और ज्यादा पैसा देना पड़ेगा

18:41 जिससे महंगाई बढ़ेगी। इस महंगाई को कोई रोक नहीं सकता। भारत हर साल लगभग 31 मिलियन टन एलपीजी [संगीत] इस्तेमाल करता है और इसमें से 87% का इस्तेमाल हमारे घरों में होता है। आपके रसोई में होता है। जबकि 13% का इस्तेमाल कमर्शियल होता है। जैसे होटल्स में, रेस्टोरेंट्स में, दूसरी जगह फैक्ट्रियों में। भारत की एलपीजी का जो टोटल हम आयात है उसका 85 से 90% हिस्सा स्टेट ऑफ हरमूस से होकर आता है। हमारे देश में एक महीने में 80 लाख टन डीजल और 35 लाख टन पेट्रोल की खपत होती है और भारत सरकार ने भी इस संकट को देखते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और तैयारियां की हैं। जैसे घरेलू गैस की जमाखोरी और

19:27 कालाबाजारी को रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया गया है। रिफाइनरीज और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दे दिया गया है कि आप अब उत्पादन को और बढ़ाइए क्योंकि अब मांग बढ़ेगी। घरेलू स्तर पर तेल उत्पादन में करीब 10% की वृद्धि की गई है। यानी हमारे अपने ही देश में जो हम तेल का उत्पादन करते हैं, हमने पूरा जोर लगा दिया है कि हम अपने देश में होने वाले उत्पादन को अब बढ़ाएं। देश की सभी रिफाइनरीज अब अपनी पूरी 100% क्षमता से काम कर रही है। घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग का समय 21 [संगीत] दिन से बढ़ाकर अब 25 दिन कर दिया गया है। जिससे कोई जमाखोरी ना हो सके। दुनिया के लगभग 40 देशों के साथ कच्चे तेल की सप्लाई

20:14 को लेकर अब भारत सरकार बातचीत कर रही है। भारत दूसरे रास्तों से भी कच्चे तेल और गैस का आयात अब करेगा। दूसरे देशों से बात हो रही है जिनसे हम कच्चा तेल खरीद सकते हैं, गैस खरीद सकते हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने आज कहा है कि देश में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यानी आप सबके लिए एलपीजी की कोई कमी नहीं है और किसी को भी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी पेट्रोल पंप या डिस्ट्रीब्यूटर के पास पेट्रोल या डीजल का स्टॉक खत्म नहीं हुआ है। तो अभी हमारे देश में बहुत सारी अफवाएं चल रही हैं। आप जानते हैं कि जब भी कोई चुनौतीपूर्ण स्थिति हमारे देश के सामने आती है तो हमारे देश में अफवाहएं सबसे पहले शुरू हो

21:00 जाती हैं और हमारे देश के विपक्षी जो नेता हैं वो सबसे पहले लोगों को डराना शुरू कर देते हैं। आप कोविड का समय याद कर लीजिए। हमारे देश के विपक्षी नेताओं ने और उनके साथ मिले हुए कुछ लोगों ने एक खास लॉबी ने पूरे देश के लोगों को डराने की कोशिश की। कोविड के समय। उसके बाद अब यह जो युद्ध का समय चल रहा है इस समय जब पूरी दुनिया के देश परेशान हैं। अब फिर से हमारे देश के विपक्षी दल हमारे विपक्षी नेता और वही लॉबी आपको डराने की कोशिश करेगी। आपको कंफ्यूज करने की कोशिश करेगी। [संगीत] आपको यह बताया जाएगा कि तेल का संकट आने ही वाला है। एलपीजी का संकट आने वाला है। कोई तैयारी नहीं है। तो हम आपको यह बताना चाहते हैं कि इस समय [संगीत] कोई संकट नहीं आया है। तैयारी सरकार कर रही है।

21:45 जितने भी रास्ते हो सकते हैं उन सब रास्तों पर चर्चा चल रही है कि कैसे तेल की सप्लाई पहले की तरह आती रहे। गैस की सप्लाई आपके घर तक पहले की तरह चलती रहे। और अभी सरकार ने इस प्रकार का कोई संकेत नहीं दिया है कि हम किसी भी प्रकार के क्राइसिस में हैं। लेकिन आप यह देख [संगीत] लीजिए कि पाकिस्तान की क्या हालत हो गई है। बांग्लादेश की क्या हालत हो गई है और यहां तक कि बड़े-बड़े पश्चिमी देश भी अभी इस ऑयल क्राइसिस से कितने परेशान हैं। लेकिन यहां आपको हमेशा यह बात याद रखनी चाहिए कि किसी भी देश में जो निर्णायक सरकार होती है। ऐसे समय में किसी भी [संगीत] स्टेट जो देश है उसकी लीडरशिप सबसे ज्यादा इस पर निर्भर करता है कि आपकी लीडरशिप कैसी है। आपकी सरकार कितनी

22:32 दूरदर्शिता के साथ काम करती है। आपकी सरकार ने ऐसे दिनों के लिए पहले से क्या तैयारी करके रखी है। और इसीलिए क्या कहा जाता है कि चुनाव में जब आप अपना वोट डालते हैं तो आपको अपने वोट का इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए। ऐसी सरकार को लाने के लिए करना चाहिए कि वो सरकार आपको इस प्रकार की चुनौतियों से बिना आपका नुकसान किए बचा कर ले जाए। ऐसी नीतियां वह बनाकर रखें और हमारे देश में अभी पर्याप्त भंडार हर चीज का है और इस समय आपको घबराने की किसी भी प्रकार की कोई आवश्यकता नहीं है। अब आपको ईरान युद्ध के कुछ बड़े अपडेट्स बताते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि अगर ईरान हॉर्मोंस की खाड़ी में तेल की सप्लाई

23:18 रोकने की कोशिश करेगा तो अमेरिका पहले से 20 गुना ज्यादा ताकत से उसके ऊपर हमला करेगा। डॉनल्ड ट्रंप को ईरान के नेता अली लारीजानी ने सोशल मीडिया पर ही जवाब दे दिया इसका और उन्होंने लिखा कि ईरान को मिटाने की कोशिश करने वाले कभी सफल नहीं हुए और कहीं ऐसा ना हो कि ईरान को मिटाने की कोशिश में खुद अमेरिका ही खत्म हो जाए। अली लारीजानी ने यह भी लिखा कि युद्ध भड़काने वालों के लिए हरमूस की खाड़ी हार और तबाही का रास्ता साबित होगा। अमेरिका के मुताबिक आज अमेरिकी सेना ईरान पर अपना सबसे बड़ा और सबसे घातक हमला कर रही है। अब आपको ईरान युद्ध का अर्थशास्त्र समझाते हैं। अमेरिका की एक बड़ी मशहूर मैगजीन है

24:05 जिसका नाम है पॉलिटिको। इस मैगजीन के मुताबिक अमेरिका अब इस युद्ध पर हर दिन लगभग 18,000 करोड़ का खर्च कर रहा है। यानी अमेरिका हर घंटे लगभग ₹750 करोड़ खर्च कर रहा है इस युद्ध पर। एक और अमेरिकी थिंक टैंक के मुताबिक पहले 100 घंटों में ही इस युद्ध पर लगभग 34,000 करोड़ खर्च कर दिए गए और ज्यादातर खर्च बॉम्ब्स और मिसाइल पर हुआ। अमेरिकी सेना ने ईरान में लगभग 5000 लक्ष्यों पर हमले किए हैं। टारगेट्स पर हमले किए हैं। जिसमें अब तक ईरान के लगभग 50 वॉरशिप्स नष्ट हो चुके हैं। और 80 से 90% मिसाइल लांचर्स भी उसके नष्ट हो चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के वॉरशिप्स अपने कब्जे में लेकर उनके

24:52 सैनिकों से उन्होंने सरेंडर नहीं करवाया बल्कि उसकी जगह उन वॉरशिप्स को उन्होंने पानी में ही डुबो दिया। क्योंकि अमेरिकी सेना को इन्हें [संगीत] डुबोने में ज्यादा मजा आता है। यह बयान दिया है अमेरिका के राष्ट्रपति ने। अब सोचिए अमेरिका के राष्ट्रपति कहते हैं कि हम [संगीत] चाहते तो ये जो ईरान के वॉरशिप्स हैं इनसे सरेंडर करवा कर इन्हें अपने कब्जे में ले सकते थे। लेकिन वह यह कह रहे हैं कि नहीं हमें और हमारी सेना को इन वॉरशिप्स [संगीत] को पानी में डुबोकर ज्यादा मजा आता है। इससे आपको अमेरिका की मानसिकता और वहां के राष्ट्रपति डोन्ड ट्रंप की मानसिकता के बारे में पता चलता है। [संगीत] किसी वॉरशिप को डुबो देना और उसमें मौजूद

25:37 सैनिकों को मार डालना भी उनके लिए एक मनोरंजन का साधन जैसा है और आप यह भी कह सकते हैं कि यही तो है अपनी ताकत का दुरुपयोग करना। ड्रोन एंड मिस कैपेबिलिटी बी डिलिश द नेवी गट द बॉटम ऑफ़ द ओशन 46 शिप्स कैन यू बिलीव इट गेट लिसेट विथ पीपल आई सेड व्हाट क्वालिटी ऑफ़ शिप एक्सीलेंट सर टॉप ऑफ़ द लाइन आई सेड व्ह वी जस्ट कैप्चर द शिप यूज़ इट व्हड वी सिंफर टू सिं आई गेस इट्स प्रोबेब्ली

26:24 तो आप देखिए अमेरिका के राष्ट्रपति कहते हैं कि हमारी सेना को उन शिप्स को डुबोने में मजा आता है। जबकि उनके पास यह विकल्प था कि वो उन वॉरशिप्स को कह सकते थे कि वो सरेंडर कर दे जिससे ईरान के इन सैनिकों की जान बच सकती थी। तो किस स्तर पर यह युद्ध लड़ा जा रहा है। किस क्रूरता के साथ यह युद्ध लड़ा जा रहा है यह आप देख [संगीत] सकते हैं। इजराइल के मुताबिक वो भी ईरान पर 7000 बॉम्ब्स और मिसाइल से हमला कर चुका है और ईरान के लगभग 150 एयर डिफेंस सिस्टम्स को नष्ट कर चुका है। ईरान ने भी बदले में जो हमले किए हैं। ईरान के हमलों से पश्चिमी एशिया में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के चार थर्ड एयर डिफेंस सिस्टम और एक

27:11 अर्ली वार्निंग रेडार सिस्टम नष्ट हो चुके हैं। और सिर्फ इन पांच सिस्टम्स की कुल कीमत है लगभग ₹82,000 करोड़। पूरी दुनिया में सिर्फ 10 थर्ड सिस्टम्स हैं और उसमें से चार ईरान ने नष्ट कर दिए हैं। अब छह बचे हैं और ऐसा एक सिस्टम का निर्माण करने में लगभग दो से तीन वर्षों का समय लगता है। यानी ऐसा भी नहीं है कि अगर इतने सारे थार्ड सिस्टम्स जो हैं नष्ट हो गए अमेरिका के तो वह तुरंत इनका निर्माण कर लेगा। उसमें भी बहुत समय लगेगा। ईरान के हमलों में अमेरिका का वो अर्ली वार्निंग रेडार सिस्टम भी नष्ट हो गया जो 5000 कि.मी. की रेंज में एक साथ सैकड़ों मिसाइल्स को रोक सकता है, निगरानी कर सकता है। ईरान के मुताबिक अब तक उसने पश्चिमी

27:59 एशिया में कुल मिलाकर 10 रेडार नष्ट किए हैं। और इस युद्ध में ईरान अपने शाहिद ड्रोंस का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है। और यह जो शाहिद ड्रोंस हैं, यह बड़े सस्ते होते हैं। इनकी कीमत सिर्फ 18 लाख से ₹40 लाख है। लेकिन इन ड्रोंस को मार गिराने वाले अमेरिका के पेट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की एक मिसाइल ₹36 करोड़ की है और थर्ड की एक मिसाइल की कीमत [संगीत] है 135 करोड़ तो आप सोचिए कि ईरान जिस शाहिद ड्रोन से हमला कर रहा है उसकी कीमत है [संगीत] 18 से 40 लाख और इस ड्रोन को मारने के लिए अमेरिका जिस मिसाइल का इस्तेमाल करता है उसकी कीमत है ₹36 करोड़ ईरान का दावा है कि उसने ₹00 करोड़ के

28:47 अमेरिका और इजराइल के 11 बड़े ड्रोंस मार गिराए हैं। यानी ₹5000 करोड़ के तो सिर्फ ड्रोंस ही नष्ट हो चुके हैं अमेरिका के और इजराइल के। युद्ध के शुरू के दो दिनों में ही अमेरिका के तीन F1-15 फाइटर जेट्स भी नष्ट हो गए थे। और ऐसे एक फाइटर जेट की कीमत ₹900 करोड़ के आसपास है। यानी ₹2700 करोड़ के [संगीत] यह तीन फाइटर जेट्स नष्ट हो चुके हैं। इस युद्ध पर अमेरिका के कुल खर्च को लेकर दो बड़े अनुमान इस समय आए हैं। पहला लगभग 3.6 लाख करोड़ का अनुमान है और दूसरा लगभग 19 लाख करोड़ का अनुमान है। अलग-अलग एजेंसियों ने अपने अलग-अलग अनुमान लगाए हैं। अब तक इस युद्ध में ईरान के 1,230 लोग मारे गए हैं। जबकि अमेरिका

29:33 के सात सैनिकों की मौत इसमें हो चुकी है। अब शुरू में अमेरिका ने सोचा तो यह था। डॉनल्ड ट्रंप ने यह सोचा था कि वो कुछ ही दिनों में ईरान के इस युद्ध को समाप्त कर देंगे। ईरान की सत्ता बदल जाएगी और ईरान सरेंडर कर देगा। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। 11 दिन बीत चुके हैं। नुकसान दोनों तरफ से बहुत ज्यादा हुआ है। इसलिए [संगीत] अब ईरान युद्ध को खत्म करना अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की एक बहुत बड़ी मजबूरी भी बन सकता है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि डॉनल्ड ट्रंप अब स्थिति में फंस गए हैं। अमेरिका के मीडिया के मुताबिक वहां के जो बड़े-बड़े अखबार हैं जो छाप रहे हैं खबरें उनके मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार अब उन्हें ईरान युद्ध से बाहर

30:20 निकलने के लिए कह रहे हैं। तो क्या ट्रंप अब किसी एग्जिट प्लान पर काम कर रहे हैं कि कैसे इस युद्ध से बाहर निकला जाए? ट्रंप पर दबाव की कई वजह हैं। युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ रही हैं जिसका असर अमेरिका पर भी पड़ेगा। अमेरिका के ज्यादातर लोग पहले ही इस युद्ध के बहुत खिलाफ हैं। इसलिए ट्रंप की जो लोकप्रियता है वो नीचे जा सकती है। अब तक सात अमेरिकी सैनिक सैनिक मारे भी जा चुके हैं। अगर खर्च और सैनिकों की मौत ऐसे ही बढ़ती रही तो अमेरिका के मिड टर्म इलेक्शंस में ट्रंप को नुकसान हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका और इजराइल के बड़े हमलों के बावजूद ईरान सरेंडर नहीं कर रहा। और अपने एग्जिट प्लान के तहत राष्ट्रपति ट्रंप पहली बार अब यह

31:06 कह रहे हैं कि ईरान युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा। पहले उन्होंने कहा था कि यह युद्ध चार से पांच हफ्तों तक चल सकता है और कल इस युद्ध के खत्म होने का ऐलान ट्रंप ने एक नहीं बल्कि दो-दो बार किया है। हालांकि ट्रंप की किसी भी बात को बहुत गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। जब सामने खड़े रिपोर्टर्स ये पूछते हैं कि युद्ध कब खत्म होगा? तो ट्रंप के पास और कोई विकल्प नहीं होता सिवाय इसके कि वह यह कहे कि हां बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। वर्क ब्रिलियंट

31:51 सेफ क्विकली। तो ट्रंप कह तो रहे हैं कि जल्द खत्म हो जाएगा। लेकिन यह जल्द का क्या मतलब है? जल्द खत्म होने का मतलब है दो दिन में खत्म होगा, एक हफ्ते में खत्म होगा, [संगीत] चार हफ्ते में खत्म होगा या कई महीनों में खत्म होगा यह कोई नहीं जानता। ट्रंप कह रहे हैं कि यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। लेकिन ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड यह कह रहा है कि युद्ध रोकने का फैसला अब अमेरिका के हाथ में है ही नहीं। अब यह फैसला ईरान करेगा कि यह युद्ध कब रुकेगा? यानी शुरू अमेरिका ने किया था। लेकिन इस युद्ध को खत्म ईरान करेगा। ईरान का कॉन्फिडेंस देखिए आप। जब तक अमेरिका और इजराइल के हमले चलते रहेंगे तब तक ईरान जवाबी हमले करता रहेगा। ऐसा ईरान का कहना

32:38 है। ईरान बड़ी संख्या में मिसाइल्स और ड्रोन से हमले करके एक लंबा युद्ध लड़कर रणनीतिक तौर पर अमेरिका को थका देना चाहता है। ईरान मानता है कि अगर युद्ध लंबा चला तो तेल की कीमतें बढ़ती चली जाएंगी और इन बढ़ती कीमतों के दबाव में अमेरिका उसके साथ समझौता करने के लिए मजबूर हो सकता है। क्योंकि ईरान इस बात को समझ चुका है कि वह अमेरिका के जो सहयोगी देश हैं, खाड़ी देश हैं, जो ऑयल प्रोड्यूसिंग देश हैं, उन पर लगातार हमले कर रहा है। उनकी इकॉनमी को, अर्थव्यवस्था को खराब कर रहा है। लोग जो विदेशी लोग वहां रहा करते थे, वो छोड़-छोड़ कर वहां से जा रहे हैं, भाग रहे हैं। लोगों के बीच में डर है। ऑयल रिफाइनरीज लगातार बंद हो रही हैं। ऑयल सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ा है और

33:23 दुनिया भर में जो तेल है वह बहुत महंगा हो गया है और इसकी वजह से पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी आ सकती है। इसकी वजह से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ सकती है और यह महंगाई अमेरिका तक भी पहुंचेगी और ईरान यही चाहता है कि अमेरिका पर लगातार दबाव बढ़ता रहे और अमेरिका के जो सहयोगी देश हैं खाड़ी देश इन पर भी यह दबाव लगातार बढ़ता जाए और एक दिन ऐसा आ जाए जब ये खाड़ी देश ही अमेरिका आपको कहे कि अब बहुत हुआ अब आप इस युद्ध को रोक दीजिए। एक और बड़ी गलती जो अमेरिका ने की। देखिए युद्ध शुरू होने से पहले जब ईरान के अंदर लाखों प्रोटेस्टर्स सड़क पर खामनई के खिलाफ सत्ता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। तब पूरी दुनिया में ईरान की

34:09 आलोचना हो रही थी। पूरी दुनिया में खामनई की आलोचना हो रही थी। पूरी दुनिया की राय ईरान के खिलाफ थी। खामनई के खिलाफ थी। खामनई पर आरोप लग रहे थे कि खामनई जबरदस्ती अपनी सेना का इस्तेमाल करके वहां के युवाओं के इस प्रदर्शन को दबा रहे हैं। वहां पर अत्याचार हो रहा है और पूरी दुनिया चुपचाप ये होते हुए देख रही थी। वहां तक पूरी दुनिया की राय ईरान के बारे में नेगेटिव थी। और अगर कुछ दिन और ऐसा ही चलता रहता तो ईरान की छवि और खराब होती। खामने की स्थिति अपने आप ही बहुत कमजोर हो जाती। लेकिन बीच में इस दौरान अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला करने से अब ईरान की [संगीत] छवि पहले से बेहतर होने लगी है और अमेरिका की छवि अब खराब हो रही है। अब

34:56 पूरी दुनिया में लोग अमेरिका पर सवाल उठा रहे हैं और दुनिया की जो सहानुभूति है वो ईरान की तरफ ज्यादा जा रही है। लोगों को लगता है कि इतने सारे शक्तिशाली देशों ने मिलकर एक ईरान पर हमला कर दिया और इसकी वजह से ईरान में निहत्ते लोगों की जान जा रही है जो कि अच्छी बात नहीं है। और इसी बात पर आपको एक अगली खबर अब मैं बताता हूं। आपको याद होगा ईरान के जिस मिनाब स्कूल पर हमला हुआ था जिस जगह पर यह मिनाब नाम की जो जगह थी यहां पर एक मिसाइल हमला हुआ था। उसके लिए [संगीत] इजराइल नहीं बल्कि अमेरिका जिम्मेदार है। पहले कहा गया था कि छोटे-छोटे स्कूली बच्चों पर जो यह हमला हुआ है, यह इजराइल ने किया है। लेकिन अब कई रिपोर्ट्स ऐसी आई हैं जो यह दावा कर

35:43 रही हैं कि इस स्कूल पर हमला असल में इजराइल ने नहीं बल्कि अमेरिका ने किया था। और यह पता ऐसे चला क्योंकि वहां से अमेरिका की टॉमा हॉक मिसाइल्स वहां से मिली हैं। और अब यह कहा जा रहा है कि अमेरिका ने अपनी टॉमा हॉक मिसाइल से यह हमला किया। लेकिन अमेरिका अभी भी इस जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं कर रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि टॉमा हॉक मिसाइल अमेरिका के अलावा दूसरे देश भी इस्तेमाल करते हैं। इसलिए अगर वहां से टॉमा हॉक मिसाइल मिली है तो इसका मतलब यह नहीं कि यह अमेरिका की मिसाइल है। आपको याद होगा हमने आपको बताया था कैसे ईरान में एक स्कूल पर [संगीत] जब हमला किया गया तो उसमें 168 छोटी-छोटी छात्राओं बच्चियों की मौत हो गई थी और इसमें ज्यादातर बच्चियां

36:28 7 से 12 साल की थी। ईरान युद्ध के पहले ही दिन 28 फरवरी को स्कूल पर हमला हुआ था और इस हमले की तस्वीरों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया और इसे ईरान युद्ध की सबसे बड़ी त्रासदी बताया गया। ईरान ने इसके लिए अमेरिका और इजराइल दोनों को जिम्मेदार ठहराया था। इजराइल ने इस हमले से पहले ही इंकार किया और कहा कि यह हमला हमने किया ही नहीं है। जबकि अमेरिकी सेना ने कहा कि इस पर अभी हम जांच कर रहे हैं। लेकिन इस विवाद में एक बड़ी सच्चाई तब आई जब ईरान की एक न्यूज़ एजेंसी ने [संगीत] इस स्कूल पर मिसाइल हमले का एक वीडियो जारी किया।

37:29 और यह जो वीडियो आपने देखा इस वीडियो में आप स्कूल पर मिसाइल हमले की तस्वीरें देखी आपने। इस वीडियो को देखने के बाद कई रक्षा विशेषज्ञों ने यह दावा किया कि जो मिसाइल इसमें दिखाई दे रही है, यह अमेरिका की टॉमा हॉक मिसाइल है क्योंकि इसका डिजाइन, इसका साइज और इसके विंग्स बिल्कुल टॉमा हॉक मिसाइल की तरह हैं। रक्षा विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि इस युद्ध में टॉमाहॉक मिसाइल का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिका ही कर रहा है। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप यह कहते हैं कि टॉमा हॉक मिसाइल का इस्तेमाल [संगीत] ईरान सहित कुछ और देश भी करते हैं। हालांकि अमेरिका खुद इस मिसाइल को बनाता है, निर्माण करता है इसका और अमेरिका ही इस टॉमाहॉक मिसाइल को बनाकर दूसरे देशों को बेचता है। और अमेरिका ने आज तक कभी ईरान को टॉमाहॉक मिसाइल बेचने

38:17 की बात कम से कम दुनिया को तो कभी नहीं बताई। इसलिए [संगीत] अगर यह टोमाहॉक मिसाइल थी तो इसका मतलब यह है कि यह हमला इन मासूम बच्चियों पर जो हमला हुआ जिसमें सबकी जान चली गई। यह हमला अमेरिका ने किया था। आई विल सेक वन ऑफ द मोस्ट पावरफुल वेप्स अराउंड बाय एंड बाय अदर कंट्रीज यू नो एंड वेदर इट्स अरे हु आल्सो हैस समह दे हैड मोर बट वेदर इट्स सम्सकमा इट्स अदर कंट्रीज बट दैट्स बीइंग इन्वेस्टिगेटेड राइट नाउ अब देखिए इस युद्ध में तीन देश शामिल अमेरिका, इजराइल और ईरान और इन तीनों में

39:05 से सिर्फ अमेरिका के पास ही यह टॉमाक [संगीत] मिसाइल है। दुनिया में अमेरिका ने दो और देशों को यह मिसाइल बेची है और इन देशों के नाम है ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया। यानी आशंका यही है कि अमेरिका ने ही ईरान के स्कूल पर यह मिसाइल हमला किया है। हालांकि ट्रंप यह भी कह रहे हैं कि इस पर अभी जांच चल रही है। जबकि अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी रॉयर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक जांच से यही लगता है कि इस हमले के लिए अमेरिका की सेना ही जिम्मेदार है। अब सवाल यह है कि आखिर अमेरिका की सेना से इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या अमेरिका की सेना को यह नहीं पता था कि जहां पर वह हमला कर रहे हैं वो एक स्कूल है और वहां पर 7 से 12 साल की छोटी-छोटी

39:50 बच्चियां पढ़ती हैं। टॉमा हॉक मिसाइल में एक बहुत ही खास टेक्नोलॉजी होती है जिसे डिजिटल सीन मैचिंग [संगीत] कहते हैं। इस मिसाइल के कंप्यूटर में पहले से टारगेट की एक तस्वीर फीड कर दी जाती है और हमले के दौरान यह मिसाइल अपने लक्ष्य को [संगीत] उसी तस्वीर से मैच करती है और फिर उसकी पहचान करके ठीक उसी जगह पर हमला करती है। इसलिए टॉमा हॉक को दुनिया की सबसे सटीक मिसाइल्स में से एक माना जाता है। आपने जो कोऑर्डिनेट्स इसमें फिट कर दिए ठीक वहीं पर जाकर लगती है और ऐसी एक मिसाइल की कीमत ₹2 करोड़ है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का यह कहना है कि अगर इस मिसाइल के कंप्यूटर में सेटेलाइट इमेज ही गलत फीड कर दी जाए

40:36 या गलत कोऑर्डिनेट्स फीड कर दिए जाएं या फिर इंटेलिजेंस में कोई चूक हो जाए तो यह मिसाइल गलत बिल्डिंग को भी निशाना निशाना बना सकती है। गलत जगह जाकर लग सकती है। अब यह कहा जा रहा है कि असल में अमेरिकी सेना का निशाना यह स्कूल था ही नहीं बल्कि स्कूल के पास मौजूद ईरान की सेना का एक मिलिट्री बेस था। [संगीत] लेकिन गलत इंटेलिजेंस इनपुट्स की वजह से गलती से उस मिलिट्री बेस की बजाय इस स्कूल पर हमला कर दिया गया। वर्ष 2013 की सेटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक यह स्कूल और मिलिट्री बेस किसी जमाने में एक ही कैंपस का हिस्सा हुआ करते थे। यानी बिल्कुल दोनों करीब थे [संगीत] एक दूसरे के। लेकिन वर्ष 2016 में दोनों के बीच एक दीवार बना दी गई और स्कूल के

41:22 लिए अलग से एक प्रवेश द्वार बना दिया गया। यानी स्कूल की बिल्डिंग अलग हो गई। उसका गेट अलग हो गया और मिलिट्री बेस की बिल्डिंग अलग थी। उसका गेट अलग था और 10 साल पहले ही ईरान की सेना इस मिलिट्री [संगीत] बेस को छोड़ भी चुकी थी। अब वहां मिलिट्री बेस है भी नहीं। यानी इस समय यह मिलिट्री बेस खाली था। लेकिन इस इंटेलिजेंस के आधार पर हो सकता है कि अमेरिका की सेना ने स्कूल पर हमला कर दिया हो। यह सोचते हुए कि वहां पर कोई मिलिट्री बेस है और इतनी बड़ी चूक हो गई कि [संगीत] 168 छोटी-छोटी बच्चियां इस हमले में मारी गई। वैसे ये पहली बार नहीं है। इतिहास में कई बार ऐसा हो चुका है जब अमेरिका की सेना ने टारगेटिंग एरर की वजह से नागरिक ठिकानों पर हमला कर दिया। इसे युद्ध में अक्सर

42:08 कोलटरल डैमेज कहते हैं। [संगीत] वर्ष 2021 में अमेरिकी सेना ने काबुल में एक कार में आतंकवादी होने के शक में उस कार पर ड्रोन हमला कर दिया। बाद में पता चला कि असल में उस गाड़ी में एक एनजीओ का कर्मचारी और उसका परिवार था और इस हमले में सात बच्चों सहित 10 निर्दोष लोग मारे गए। वर्ष 2015 में भी अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान के कुंदुज शहर में बमबारी की थी और उन्होंने सोचा कि यह आतंकवादियों का ठिकाना है। लेकिन असल में यह एक अस्पताल था और इसमें तब 42 लोग मारे गए थे। यह भी सारे निर्दोष लोग थे। तो क्या ईरान के स्कूली बच्चों पर हमला भी अमेरिकी सेना की एक ऐसी ही बहुत बड़ी गलती है। बहुत बड़ी चूक है? यह जो

42:54 ताबूत आप देख रहे हैं, यह उन्हीं छोटी-छोटी बच्चियों के हैं जो किसी ना किसी की गलती से आज इस दुनिया में नहीं है। अमेरिकी सेना ईरान युद्ध में तेज रफ्तार से हमलों के लिए एआई का इस्तेमाल भी कर रही है और कई बार आप जानते हैं कि एआई भी गलती कर सकता है। तो कहीं [संगीत] यह चूक एआई का तो नहीं है। यह भी हो सकता है। बहुत सारे लोग यह भी कह रहे हैं कि हो सकता है कि यह चूक एआई की वजह से हुई हो। अब देखिए इस युद्ध के बीच रशिया के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन की तरफ से आज दो बड़े ऑफर आए हैं। पहला ईरान युद्ध में पहला ऑफर ईरान युद्ध में सीज फायर का है और दूसरा यूरोपीय [संगीत] देशों को तेल की सप्लाई करने का ऑफर उन्होंने दिया है। 9

43:41 मार्च को रशिया के राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत लगभग 1 घंटे तक चली। बड़ी बात यह है कि इस बातचीत की पहल अमेरिका की तरफ से हुई थी और रशिया के मुताबिक पुतिन ने ईरान में युद्ध को खत्म कराने के लिए मध्यस्थता के कई डिप्लोमेटिक प्लांस दिए और कहा कि वह इस युद्ध को समाप्त करा सकते हैं और सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। राष्ट्रपति पुतिन का कहना है कि रशिया ने कभी भी यूरोप के साथ काम करने से इंकार नहीं किया लेकिन यूरोप को भी राजनीतिक दबाव से बाहर निकलकर अब अपना कदम बढ़ाना पड़ेगा। अब आप इस बातचीत पर पुतिन और ट्रंप का यानी दोनों राष्ट्रपतियों का यह बयान सुनिए।

44:47 आई हैड अ वेरी गुड कॉल विथ प्रेसिडेंट पुटन वी हैड अ लॉट पीपल ऑन द लाइन फ्रॉम आवर साइड फ्रॉम हिज साइड वी वर टॉकिंग अबाउट यूक्रेन व्हिच इज़ जस्ट द नेवर एंडिंग फाइट एंड व्हेन लुक दिस ट्रेमेंडस हेट्रेड बिटवीन प्रेसिडेंट एंड प्रेसिडेंट सीम टू गेट इट टगेदर बट आई थिंक इट वाज़ अ पॉजिटिव कॉल ऑन दैट सब्जेक्ट वी ऑब्वियसली टॉक दे अबाउट द मिडिल ईस्ट एंड ही वांट्स टू बी हेल्पफुल आई सेड यू कैन बी मोर हेल्पफुल बाय गेटिंग द यूक्रेन रशिया वॉर ओवर विल बी मोर हेल्पफुल बट वी हैव अ वेरी गुड टॉक एंड ही वांट्स टू बी वेरी कंस्ट्रक्टिव तो ये दो महाशक्तियां हैं दुनिया के दो बहुत बड़े लीडर्स हैं राष्ट्रपति ट्रंप और

45:35 राष्ट्रपति पुतिन [संगीत] और स्थिति ऐसी हो गई कि इन दोनों को एक दूसरे से बात करनी ही पड़ी। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में इस समय तेल की और गैस की कमी हो गई है और सबसे ज्यादा परेशान है यूरोप के देश। तो अब राष्ट्रपति पुतिन कह रहे हैं कि रशिया यूरोप को तेल और गैस की सप्लाई करने के लिए तैयार हैं। क्योंकि रशिया के पास आज भी तेल और गैस की भरपूर सप्लाई है। [संगीत] लेकिन इसके लिए यूरोप को रशिया से अनुरोध करना पड़ेगा। अब आप राष्ट्रपति पुतिन की इस शानदार डिप्लोमेसी को समझिए। जिन यूरोपीय देशों ने रशिया पर यूक्रेन युद्ध के समय प्रतिबंध लगाए थे। कहा था कि हम तो रशिया से कभी बात नहीं करेंगे। रशिया पर लग से कभी कोई बिजनेस नहीं करेंगे। रशिया

46:22 पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगा देंगे। रशिया की अर्थव्यवस्था का गला घोट देंगे। उसी यूरोप को अब इस तेल संकट में राष्ट्रपति पुतिन रशिया से तेल लेने का ऑफर दे रहे हैं। और कह रहे हैं कि हम [संगीत] आपको तेल देने के लिए तैयार हैं। लेकिन आपको पहले रिक्वेस्ट करनी पड़ेगी। आपको पहले अनुरोध करना पड़ेगा कि आप हमें तेल दे दीजिए, हमें गैस दे दीजिए। यह असल में कितना करारा जवाब है यूरोपीय देशों को, पश्चिमी देशों को [संगीत] जिन्होंने एक जमाने में रशिया पर इतने बड़े-बड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। अब यह देखना होगा कि यूरोप के यह देश आखिर क्या करेंगे। जब गैस की किल्लत हो जाएगी, जब तेल की किल्लत हो जाएगी तो फिर किसके पास जाएंगे? और इस समय

47:09 दुनिया में एक ही ऐसा देश है जिसके पास पर्याप्त गैस भी है और पर्याप्त तेल भी है और वह है रशिया। अब एक छोटे से ब्रेक के बाद आपको बताएंगे कि कैसे आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध पीने से 11 [संगीत] लोगों की मौत हो गई और इस दूध में एक ऐसा खतरनाक केमिकल पाया गया जिसका इस्तेमाल गाड़ियों में किया जाता है। [संगीत] विकसित भारत का विकसित भारत वर्किंग मॉम हूं ना जॉब के साथ सबका ध्यान रखना पड़ता है बच्चों को स्कूल के लिए रेडी करो हस्बैंड को ऑफिस के लिए अब इन सबके साथ रोड पे अनसर्टेनिटी के लिए भी

47:56 रेडी रहो इट्स टू मच टू आस्क फॉर पर जब से गाड़ी में जेके स्मार्ट [संगीत] टायर लगवाए हैं एक टेंशन तो कमो जेके स्मार्ट टायर विथ एंबेडेड सेंसर टेक्नोलॉजी [संगीत] दैट गिव्स यू रियल रियल टाइम अलर्ट्स व्हिच सेव्स फ्यूल एंड मेक्स ड्राइव्स सेफर। थैंक्स टू जेके [संगीत] स्मार्ट टाइल्स। अब लग रहा है कमान तो मेरे ही हाथ में है। घुटना, कंधा या कमर चाहे जैसा हो दर्द। डॉक्टर ऑर्थो आपको देता [संगीत] है दर्द से पूरी आजादी। यह कोई टेंपरेरी पेन किलर नहीं। आयुर्वेदिक औषधि है। क्या तनाव आपके मानसिक [संगीत] और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है और आप समय प्रबंधन नहीं कर पा रहे। तनाव प्रबंधन के लिए टेलीमानस के 14416 पर संपर्क करें। टेबल के ऊपर से जब भी खाते हैं दबा के खाते हैं। भाई साहब सब बचा देते हैं। पर दिक्कत तो उन्हें आती है जो टेबल के

48:43 नीचे से खाओ। मुल्तानी कुछ भी ना अपने हक का खाओ सब कुछ बचाओ। [संगीत] विकसित भारत का विकसित भारत। [संगीत] अभी ब्रेक से पहले हम आपको तेल संकट के बारे में बता रहे थे और आपको बता रहे थे कि इस युद्ध में जो भी हमले हो रहे हैं असल में उनका बिल अब आपके घर तक पहुंचना [संगीत] शुरू हो गया है और इसका असर आपके बजट पर भी पड़ेगा। आपकी रसोई पर भी पड़ेगा। लेकिन अपने देश में भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जिसका असर आपके घर पर, आपकी रसोई

49:28 में, आपके बच्चों पर और आपके परिवार पर पड़ेगा। अब एक बहुत दुखद और चिंताजनक खबर आपको बताते हैं जो अपने देश से आई है। आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले में जहरीला दूध पीने की वजह से 11 लोगों की मौत हो गई। सोचिए 11 लोगों की मौत हो गई। इस दूध की वजह से इन [संगीत] लोगों की किडनी को बहुत नुकसान पहुंचा जिससे इनकी मौत हो गई। जब जांच की गई तो पता चला कि 16 फरवरी को [संगीत] एक डेयरी की दुकान से 110 घरों में मिलावटी दूध की सप्लाई की गई थी और आंध्र प्रदेश पुलिस ने [संगीत] मिलावटी दूध बेचने वाले इस दुकानदार को गिरफ्तार कर लिया है और इस दूध की सप्लाई करने वाले व्यक्ति की तलाश अभी [संगीत] जारी है। फॉरेंसिक जांच में इस दूध में

50:15 एथिलीन ग्लाइकॉल नाम का एक केमिकल पाया गया है। [संगीत] यह एक इंडस्ट्रियल केमिकल होता है। इसका इस्तेमाल मशीनों और गाड़ियों को ओवर हीट होने से बचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा पॉलीस्टर और प्लास्टिक बनाने में भी इसका इस्तेमाल होता है। यह केमिकल इतना ज्यादा जहरीला होता है, खतरनाक होता है कि जब इसका इस्तेमाल किया जाता है मशीनों में तो मास्क पहनना पड़ता है। अगर गलती से किसी व्यक्ति [संगीत] के शरीर में यह केमिकल चला जाए तो किडनी, दिमाग और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। अब प्रशासन का कहना है कि जिस [संगीत] कूलिंग टैंक में यह दूध रखा हुआ था, उसकी मशीन से लीक होकर शायद यह खतरनाक केमिकल दूध में मिल गया होगा और इसकी वजह से यह दूध जहर बन गया।

51:00 इसके बावजूद आरोपी दुकानदार ने वही दूध सैकड़ों घरों में सप्लाई कर दिया। अब एफएसएसएआई ने आंध्र प्रदेश सरकार से इस घटना पर पूरी रिपोर्ट मांगी [संगीत] है। हमारे देश में दूध और इससे बने खानेपीने के सामान में बहुत ज्यादा मिलावट हो रही है। [संगीत] हैरानी इस बात की है कि खुले में बिकने वाले दूध ही नहीं बल्कि पैकेट वाले दूध की शुद्धता पर भी अभी सवाल उठते हैं। वर्ष 2024 से 2000 से 2025 में पूरे देश में दूध के 33405 सैंपल्स की जांच की गई। जिसमें से 12780 सैंपल मिलावटी पाए गए। वर्ष 2023 में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट में खानेपीने

51:47 के सामानों में मिलावट को एक गंभीर अपराध माना गया। मिलावट करने या मिलावटी सामान को बेचने पर ₹1 लाख से ₹1 लाख तक का जुर्माना है। [संगीत] 6 महीने से लेकर 7 साल तक की सजा है। अगर मिलावटी खाना या पीने से किसी व्यक्ति की जान चली जाए तो दोषी को उम्र कैद की सजा भी हो सकती है। फिर भी हमारे देश में खाने-पीने में मिलावट का यह कारोबार आज भी जारी है। इसकी तीन वजह हैं। पहला मिलावट करने वालों को आज भी सख्त कारवाही का कोई डर नहीं। दूसरा मिलावट के खिलाफ हमारे देश में कोई अभियान चलता ही नहीं। और तीसरा लोग सस्ता या नया ऑफर देखकर क्वालिटी से बहुत आसानी से समझौता कर लेते हैं। [संगीत] जो भी चीज सस्ती मिलती है, चाहे वो मिलावटी ही क्यों

52:33 ना हो, हमारे देश की जनता उसे खरीद भी लेती है। अक्सर लोग मिलावट को बहुत छोटी-मोटी बात समझकर इग्नोर कर देते हैं। भारत में दूध, घी और दही को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। [संगीत] हमारे हर पूजा पाठ की शुरुआत दूध से होती है, दही से होती है, घी से होती है। और हर मां पूरे विश्वास के साथ अपने बच्चे को बाहर का दूध पिलाती है। लेकिन उसी दूध में हमारे देश में सबसे ज्यादा मिलावट हो रही है। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि हमारे ही देश में आज अगर आप बाहर जाएं तो दूध में भी आपको मिलावट मिलेगी। पनीर में भी आपको मिलावट मिलेगी। यह मिलावट असल में हमारे देश की एक बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है और सरकारों को इसे [संगीत] लेकर अब बहुत बड़ा एक्शन लेने का समय आ गया है। अब

53:20 एक छोटा [संगीत] सा ब्रेक और ब्रेक के बाद डक जिंदगी में आपको दिखाएंगे आज का विचार। [संगीत] विकसित भारत का विकसित भारत [संगीत] डॉक्टर ऑर्थो ऑयल के रेगुलर मसाज से जॉइंट हेल्थी रहते हैं और अगर प्रॉब्लम [संगीत] बहुत पुरानी है तो डॉक्टर ऑर्थो कैप्सूल्स साथ लेना ना भूलें। अब दर्द भी घुटने टेकेगा। इस देश की हर मां, बच्चे, बूढ़े, [संगीत] जवान, खिलाड़ी, डॉक्टर, इंजीनियर सबको गाय, भैंस की दूध की शक्ति पर भरोसा है। पर जब इन पशुओं [संगीत] को कपिला पशु आहार मिलेगा। तभी तो दूध सिर्फ ज्यादा ही नहीं शक्ति से भरपूर भी होगा। कपिला पशु आहार,

54:06 देश का नंबर वन पशु आहार। क्या आप परेशानियों से घिरे हैं? मन भारी है और कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा? याद रखें समाधान आपके पास है। टेलीमानस के निशुल्क नंबर 14416 पर कॉल करें। कहीं से भी कभी भी [संगीत] 24 घंटे यह सुविधा उपलब्ध है। यहां आपकी बात सुनी जाती है, समझी जाती है और आपको सही दिशा दी जाती है। आप अकेले नहीं है। मदद बस [संगीत] एक कॉल दूर है। गोल्डी मसाले के 100 ग्राम के स्पेशल पैक्ड्स में [संगीत] फ्रेशनेस, लॉकी ऐसे। गोल्डी मसाले जहां जाएं रिश्ते बनाए। विकसित भारत का विकसित भारत।

54:53 [संगीत] तो आज के लिए डिकोड में इतना ही। अब आपसे हमारी अगली मुलाकात होगी कल रात 9:00 बजे। तब तक आप खुश रहिए, सुरक्षित रहिए, स्वस्थ रहिए और स्वभाव से इतने छोटे बने कि हर व्यक्ति आपके साथ बैठ सके और अपने कर्मों से इतने बड़े बने कि जब आप उठे तो कोई बैठा ना [संगीत] रहे। नमस्कार। [संगीत] हमें पता है। हमें पता है। हमें पता है। जो

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