0:00 अगर आपको दोपहर के 2 से 5:00 बजे के बीच बहुत ज्यादा नींद आती है तो साइंटिस्टों के हिसाब से आप बहुत जल्दी मर सकते हो। लेट मी एक्सप्लेन यू व्हाई। यह है रंजन दास। इंडिया के वन ऑफ द लीडिंग आईटी कंपनी एसएपी के सीईओ। हर दिन वर्कआउट पे जाना, रेगुलरली जॉगिंग करना, हमेशा हेल्दी खाना ही खाना, इवन मैराथों्स में पार्टिसिपेट करना, इन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में यह सब कुछ किया। एंड ही सीम्ड कंप्लीटली फिट फ्रॉम इनसाइड आउट। बट देन, एक दिन 21 अक्टूबर 2009 को अचानक से खबर आती है कि जब वो जिम से घर लौट रहे थे, उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। यस, एक कंप्लीटली एथलेटिक इंसान जो जॉगिंग जैसे कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाज़ रेगुलरली किया करता था, जिसने मैराथों्स में भागने तक के लिए अपने हार्ट को ट्रेन कर दिया था, वो
0:47 इंसान कम उम्र में ही हार्ट अटैक से मर गया। और वजह ही स्ट्रांगली बिलीव्ड कि फिट और फ्रेश फील करने के लिए रोजाना बस सिर्फ 4 घंटे की ही नींद जरूरी होती है। बट क्या कम सोने की वजह से किसी को हार्ट अटैक भी आ सकता है? कैसे एक हेल्थ कॉन्शियस सीईओ ने इतनी बड़ी बात मिस कर दी? वेल आपने डे लाइट सेविंग के बारे में सुना होगा। यूएसए में मार्च महीने में क्लॉक्स को 1 घंटे आगे बढ़ाया जाता है ताकि समर सीजन में दिन के समय को लंबा किया जा सके। घड़ियों को 1 घंटा आगे सेकंड मार्च रात को 2:00 बजे किया जाता है और लोगों को उस एक दिन 1 घंटा कम सोने को मिलता है और रिपोर्ट्स के हिसाब से सिर्फ उस 1 घंटे कम नींद की वजह से हार्ट अटैक्स 25% से बढ़ जाते हैं और दो दिनों तक 25% से बढ़े रहते हैं। आई
1:34 रिपीट सिर्फ 1 घंटे कम स्लीपिंग टाइम की वजह से। अच्छा इसका रिवर्स भी होता है नवंबर को जब एक घंटे ऐड होते हैं तब हार्ट अटैक्स 22% से कम हो जाते हैं। फैसिनेटिंग राइट? दुनिया के सभी स्लीप साइंटिस्ट का एक ग्रुप है कॉल्ड एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल स्लीप सोसाइटीज। उनकी एक रिपोर्ट में उन्होंने यह रिवील किया कि जो लोग स्लीप डिप्र्राइव्ड होते हैं उन्हें यूजुअली दो स्पेसिफिक टाइम स्पैम्स में बहुत ज्यादा नींद आती है। एक 2 से 7 am के बीच और दूसरा 2 से 5 पी.m. के बीच। अब इसमें एक वियर्ड पैटर्न देखना। मोस्ट ऑफ द हार्ट अटैक केसेस में लोग इन्हीं टाइम स्पैन्स में ही सबसे ज्यादा मरते हैं। अब इन्हीं सारे वियर्ड पैटर्न्स को देखकर सबसे पहले सभी साइंटिस्टों को यही लगा कि ये कोइंसिडेंसेस हो सकते हैं, संयोग हो सकता है। लेकिन अभी पिछले साल अहमदाबाद के ज़ाइडस हॉस्पिटल ने जब 243 हार्ट पेशेंट्स
2:21 का एक सर्वे किया तब उन्हें पता चला कि करीब 37% हार्ट पेशेंट्स में उनके कंडीशन की वजह थी इनएडीिक्वेट स्लीप। इवन द यूरोपियन हार्ट जर्नल ने आठ अलग देशों के 470000 लोगों पर हुए एक स्टडी को जब रिलीज किया उसमें पता चला कि जो लोग स्लीप डिप्राइब्ड होते हैं हार्ट डिजीज से मरने के चांसेस डायरेक्टली 48% से बढ़ जाते हैं और हार्ट स्ट्रोक से मरने के चांसेस 15% से। यानी कि पॉइंट यह है कि अगर आपको दोपहर में बहुत तेज नींद आती है, तो यह आपके बॉडी का एक नेचुरल अलार्म साइन है कि आप सीअरली स्लीप डिप्राइव्ड हो और आपका हार्ट कमजोर होना शुरू हो चुका है। अब क्या आपने यह कभी एक्सपीरियंस किया है कि आप कभी एक या दो दिन ठीक से नहीं सोते हो। तो आपको लिटरली ऐसा फील होता है कि आपने दारू पिया हुआ है। यू नो एकदम स्लो एंड
3:07 कंफ्यूज दिमाग भी शार्प फील नहीं होता और अपने रेगुलर कामों को अच्छे से भी नहीं कर पाते। क्या आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है? वेल बहुत पुरानी बात है। साल 1894 में एक रशियन साइंटिस्ट मैरी डे मानसीना ने कुछ पप्पीज पर एक एक्सपेरिमेंट किया था। उन्होंने पप्पीज को जानबूझकर कई दिनों तक सोने नहीं दिया। उनसे लगातार कुछ ना कुछ एक्टिविटीज करवाकर उन्हें जगाए रखा ताकि ना सोने पर या कम सोने पर उनके शरीर के अंदर क्या होता है यह वो समझ सके। पता चला कि खेल कूद और अच्छा खाना पीना देने के बावजूद वो सारे के सारे पप्पीज महज एक से दो हफ्तों में ही मर गए। एंड कॉज ऑफ डेथ का पता चला कि उनके दिमाग में जगह-जगह पर लीजंस यानी कि छाले पड़ चुके थे। अब ये छाले कैसे पैदा हुए और क्या इंसानों में भी कम सोने की वजह से ऐसे ही छाले पैदा होते हैं इसके बारे में मैं आगे बताऊंगा
3:54 जब हम साइंस डिस्कस करेंगे। बट अभी के लिए अंडरस्टैंड इट्स नॉट जस्ट द हार्ट बट आल्सो द ब्रेन जिसे कम नींद डायरेक्टली डैमेज करती है। इनफैक्ट इसी से जुड़ी हुई एक नई स्टडी बताती है कि हर साल लिटरली सिर्फ 1% से भी अगर आपके डीप स्लीप का टाइम कम होता है तो उससे आपके ब्रेन डैमेजिंग बीमारियां जिसके अल्जाइमर्स और डिमेंशिया होने के रिस्क 27% से बढ़ जाते हैं। अब मैंने नींद नहीं लेने की वजह से दारू पीने जैसी फीलिंग आने की बात की थी ना। यह है वो रिसर्च। ऑस्ट्रेलिया की सेकंड मोस्ट प्रेस्टीजियस यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स की रिसर्चर एंड विलियमसन के अनुसार सिर्फ 17 घंटे तक जगे रहना भी परमिसिबल लिमिट से ज्यादा अल्कोहल पीने जितना घातक होता है। ऑस्ट्रेलियन परमिसिबल लिमिट इंडियन लिमिट से ज्यादा है। सो इंडिया के कॉन्टेक्स्ट में यू आर प्रैक्टिकली ड्रंक। अब हाल ही
4:40 में जो पुणे में पॉश वाला एक्सीडेंट हुआ था ना उसमें गाड़ी ठोकने वाला ड्रंक था। जिस वजह से दो बेकसूर लोगों की जान चली गई थी। राइट? लेकिन जो चीज लोग अब भी रियलाइज नहीं कर रहे वो ये है कि इंडिया में हर साल ड्रिंक एंड ड्राइव की वजह से तो सिर्फ 11% ही लोग रोड एक्सीडेंट्स का शिकार होते हैं। मगर नींद में गाड़ी चलाने से करीब 40% रोड एक्सीडेंट्स होते हैं। ये ऑफिशियल डाटा है। यानी कि लगभग चार गुना ज्यादा और अल्कोहल को लेकर तो हमने कानून बना रखे हैं। बट व्हाट अबाउट लैक ऑफ स्लीप? कितने ही ट्रांसपोर्ट ड्राइवर्स लगातार 18 से 20 घंटों की शिफ्ट्स में ड्राइविंग करते रहते हैं। एक स्टेट से दूसरे स्टेट। कुछ तो इवन एक-द दिन भी नहीं सोते हैं नॉनस्टॉप और फ्रीली हाईवेज में बड़ी गाड़ियां चला रहे होते हैं। आई मीन जरा सोच कर देखो। हम जब भी हाईवेज पर निकलते हैं एक तरह से चलते
5:25 फिरते कॉफिस के बीच मूव कर रहे होते हैं। जिनमें से एक पर कभी भी हमारा नाम लिखा हो सकता है। अब देखो क्योंकि इस पर लॉज़ नहीं है। इसीलिए अवेयरनेस और एजुकेशन से ही यह बेहतर होगा। जिसके लिए हर एक इंडियन को साइंस बिहाइंड स्लीप को समझना होगा कि कैसे लैक ऑफ स्लीप बॉडी में कितने ही प्रॉब्लम्स को क्रिएट कर रहा है। जो आप डेली लाइफ में फेस करते हो लेकिन उसका रूट कॉज ही आपको शायद पता नहीं। जैसे फॉर एग्जांपल पहले मुझे हर कुछ दिनों में मेरे जीभ में छाले हो जाते थे। जो चार-प दिनों तक खूब दर्द देते थे। जिन्हें होते हैं उन्हें दर्द पता होगा। बेसिकली काम करना मुश्किल हो जाता है। खासकर अगर आपका मेरी तरह बोलने का काम हो तो। अब मुझे शुरुआत में लगा कि बी कॉम्प्लेक्स विटामिंस की शायद कमी होगी। तो मैंने सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर दिया बट प्रॉब्लम सॉल्व ही नहीं हुई। और फिर एंड में मैंने डिस्कवर किया कि अगर कभी मैं दो दिन लगातार ठीक से सो
6:13 नहीं पाता या मेरी स्लीप इफेक्ट होती है तो मुझे जीभ में छाले आने लगते हैं। सो ऐसे कितने ही प्रॉब्लम्स को हम फेस कर रहे हैं जिनका स्यूशन एकदम सिंपल है। स्लीप को एक प्रायोरिटी बनाना। एंड दिस इज एक्सैक्टली व्हाई आज का यह वीडियो बहुत ज्यादा जरूरी है। एस्पेशली उन लोगों के लिए जिनको सोने में दिक्कत होती है। हर इंसान अपनी वन थर्ड लाइफ सोते हुए बिताता है और इसीलिए सभी को इसके बारे में सही नॉलेज होना जरूरी है। आज आपके नींद से जुड़े सभी सवाल यही वीडियो में आंसर होंगे। आज इस वीडियो के थ्रू मेरा मकसद सिंपल है नींद कीेंस आपको बताना और नींद से जुड़े आपके सभी सवालों के जवाब यहीं पर आंसर करना। और इसीलिए आज इस वीडियो में हम जानेंगे स्लीप हमारे शरीर के लिए बायोलॉजिकली स्पीकिंग सबसे इंपॉर्टेंट एक्टिविटी क्यों है? आई रिपीट सबसे
6:58 इंपॉर्टेंट एक्टिविटी। रात के अलावा हमें दोपहर में 2:00 से 5:00 बजे के बीच क्यों नींद आती है? कैसे नींद जैसी एक सिंपल सी एक्टिविटी से इतनी सारी बीमारियां कनेक्टेड है और कैसे आप एक पावरफुल स्लीपिंग टेक्निक द मिलिट्री स्लीप मेथड को यूज करके सिर्फ दो से 7 मिनट के अंदर ही तुरंत नींद ला सकते हो। यह टेक्निक साइंटिफिकली प्रूवन है और मिलिट्री वाले यूज भी करते हैं अपने आप को लिटरली सेल्फ हिप्नोटाइज करके पथरीली जमीन पेड़ पौधों के बीच गोलियों की आवाज में डर और ए्जायटी के बीच कहीं पर भी नैप लेने के लिए। सो बेसिकली हमारा शरीर एक मशीन ही है। एक सिस्टम इसे एक बायोलॉजिकल मशीन की तरह समझो। जिसे रेगुलरली सर्विसिंग, क्लीन अप और रिसेट की जरूरत पड़ती है। अब लेट्स से एक कंप्यूटर में अगर हम कुछ इंपॉर्टेंट काम कर रहे हैं तो कंप्यूटर अचानक से सर्विसिंग मोड या
7:45 सॉफ्टवेयर अपडेट पर तो नहीं चले जाता ना। कुछ इसी तरह हमारा शरीर भी ऐसे ही इवॉल्व हुआ कि उसने 24 आवर्स में से एक सेपरेट समय निकाल लिया फॉर दिस पर्पस और उससे कुछ समय पहले से ही वो हमें वर्न करने लग जाता है कि अब सर्विसिंग मोड एक्टिवेट होने वाला है व्हिच मींस हमें नींद आने लगती है। अब स्लीप में हमारा शरीर हजारों काम करता है। लेकिन इन सभी कामों को हम तीन मेजर कैटेगरीज में डिवाइड कर सकते हैं। पहला रिसेट या रिबूूट, सेकंड ग्रोथ एंड रिपेयर और थर्ड मेमोरी कंसोलिडेशन। सो, स्लीप के यही तीन मेजर पर्पसेस है जो हमारे हेल्थ का लाइफ ब्लड है। और जितने भी कॉम्प्लिकेशंस होते हैं वो यही तीन फंक्शंस के पूरा नहीं होने की वजह से होते हैं। अब ये स्लीप का पूरा साइकिल निर्भर करता है मेजरली सिर्फ एक मेन सिस्टम पर। यह है हमारे शरीर का सरकैडियन रिदमम जिसका
8:33 बिगड़ना कि सारे स्लीप प्रॉब्लम्स का मेजर जड़ हो सकता है। हमारा सरडियन रिदमम पूरा डिपेंडेंट है सनलाइट पर। जैसे जब सूरज उगता है, सूरज की रोशनी हमारी आंखों के फोटोसेप्टर्स पर पड़ती है और बॉडी कॉर्टिजोल यानी कि वेक अप हॉर्मोन क्रिएट करने लगता है। और फिर रात में जब सूरज ढल चुका होता है और आसपास की लाइट कम हो जाती है तो हमारी आंखें लाइट के एब्सेंस को डिटेक्ट करके ब्रेन को बताती है और हमारा ब्रेन फिर स्लीप हॉर्मोन मेलेटोनिन सेक्रेट करता है। इस हॉर्मोन के असर से हम ड्राउजीनेस फील करते हैं और शरीर सिर्फ वाइटल चीजें जैसे कि हार्ट बीट, ब्रीदीिंग, किडनी फिल्ट्रेशन और उन्हें कंट्रोल करने वाले ब्रेन सिस्टम्स को ही चालू रखकर बाकी सभी प्रोसेससेस को टोन डाउन करने लगता है और हमें नींद आने लगती है। यही वजह है कि हमने स्लीप वाले ग्राफ में देखा था कि 2 टू 7 am के बीच हमें
9:20 बहुत ज्यादा नींद आती है। लेकिन हमारे आज के मॉडर्न लाइफस्टाइल के वजह से यही नेचुरल सरडियन रिदमम सबसे ज्यादा बिगड़ रहा है। इंडिया में स्मार्टफोनस पर ऑन एन एवरेज स्क्रीन टाइम आज वर्ल्ड में सबसे हाई है। मोर देन फोर आवर्स पर डे और ये यूसेज मोस्टली रात को ही होता है। स्मार्टफोन से वही ब्लू लाइट निकलती है जो दिमाग को मैसेज भेजती है कि सुबह हो गई उठने का समय हो गया है जबकि असल में तो रात होती है और इसी वजह से हमारा सरडियन रिदमम बिगड़ता है और स्लीप क्वालिटी पुअर हो जाती है। इसके अलावा रात को ओवर ईटिंग करना, स्ट्रेस, पुअर न्यूट्रिशन, एट्सेटरा भी आपके सरियन रिदमम को बिगाड़ता है। सो इन्हें कंट्रोल में रखना अच्छी स्लीप के लिए बिगेस्ट प्रायोरिटी होनी चाहिए। अब अच्छी स्लीप लेने का और तेज सोने का एग्जैक्ट साइंस मैंने आगे वीडियो में बताया है। तो उसके लिए थोड़ा सा जस्ट वेट उससे पहले आपको यह बताना बहुत जरूरी है कि
10:06 कैसे कॉम्प्रोमाइज स्लीप जानलेवा बीमारियों को ट्रिगर कर सकती है। इन इमेजेस को जरा ध्यान से देखें। ये कुछ चूहों के ब्लड आर्टरीज के इमेजेस है। जिन पर हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और मैसिव चूसेट्स जनरल हॉस्पिटल ने एक जॉइंट रिसर्च की थी। इनमें से फर्स्ट वाली इमेज उन चूहों के नसों की है जिन्हें ठीक से सोने दिया गया था और सेकंड वाली इमेज उनकी है जिन्हें 16 हफ्तों तक ठीक से सोने नहीं दिया गया था। इनमें आप क्लियरली देख सकते हो कि सेंटर में एक गाढ़ा प्लैक फॉर्म हो गया है जो कि फर्स्ट वाले में तो कम है लेकिन सेकंड वाले में ऑलमोस्ट पूरे ब्लड वेसल को ब्लॉक कर रहा है। अब साइंटिस्टों ने सोचा कि ये आखिर हुआ क्यों? वेल, क्योंकि लगातार डिसरप्टेड स्लीप से डब्ल्यूबीसीस के प्रोडक्शन को रेगुलेट करने वाले हिपोक्रेटिन हॉर्मोन का लेवल एब्नॉर्मली ड्रॉप हो जाता है और इससे हद
10:52 से ज्यादा डब्ल्यूबीसीस बनने लगते हैं जो नसों को ब्लॉक कर देते हैं। जी हां, दैट्स राइट। अनफॉर्चूनेटली वो प्लैक हमारे ही डब्ल्यूबीसीस से बना हुआ प्लैक है जो एक्यूमुलेट हो के नसों को ब्लॉक करता है और फिर हार्ट डिजीजेस कॉज करता है। बट इट डजंट स्टॉप ओवर हियर। 2011 के कैंसर जर्नल में एक रिसर्च पब्लिश हुआ रिवलिंग कि कंसिस्टेंटली 6 घंटे से कम सोने से कैंसर स्पेसिफिकली कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा 50% से बढ़ जाता है। यह रिस्क बिल्कुल उतना ही रिस्क है जितना रिस्क जिस इंसान के फर्स्ट डिग्री रिलेटिव जैसे पेरेंट या भाई-बहन को अगर कैंसर हुआ तो उसे होता है। अब इसके पीछे का मेन रीजन है शरीर में जगह-जगह पर इनफ्लेमेशन। क्रॉनिक इनफ्लेशन कैंसर का वन ऑफ द मेजर कॉज है। लैक ऑफ स्लीप आपके शरीर में हर किस्म का इनफ्लेमेशन क्रिएट करता
11:39 है और इसके कुछ सिंपल इफेक्ट्स तो मुंह में छालों के रूप में ही दिखने लग जाते हैं। सो जस्ट थिंक कि ये अंदर ऑर्गन्स को कैसे डैमेज कर रहा है। इसी वजह से कई लोगों को चेहरे पर एक्ने भी फूटने लगते हैं या हेडेएक्स वगैरह होने लगते हैं। अब मर्दों के लिए तो एक और एक बैड न्यूज़। एक रिसर्च में पाया गया कि एक यंग हेल्दी एडल्ट सिर्फ एक हफ्ते भी अगर लगातार 5 घंटे से कम सोए ना, तो उसका टेस्टोस्टरॉन लेवल यानी उसके सेक्स हॉर्मोन की मात्रा करीब 10 से 15% से ड्रॉप हो जाती है। जबकि नेचुरल एजिंग से यह लेवल पर ईयर सिर्फ 1% से ही ड्रॉप होता है। अब टेस्टोस्टरॉन को फाउंटेन ऑफ यूथ बोला जाता है। और यह भी एक वजह है कि आजकल जवान मर्द कम उम्र में हीेंट होते जा रहे हैं। तो फिर क्या हुआ है मुंह? बताओ तो सही। अब जो भी लोग अपना वेट कम करना चाह रहे
12:25 हैं या अपने वेट को मेंटेन करना चाह रहे हैं आपके लिए भी एक बैड न्यूज़। अभी रिसेंटली रिसर्च में देखा गया कि सिर्फ 4 से 5 दिन कम सोने से लिवर की इंसुलिन सेंसिटिविटी करीब 25 से 30% से घट जाती है जो एक्सेसिव वेट गेन और टाइप टू डायबिटीज के खतरे को बढ़ाती है। प्लस आपने यह भी नोटिस किया होगा कि जिस दिन आपने ठीक से सोया नहीं होगा उस दिन आपका खुद का कंट्रोल खुद पर कम हो जाता है और आप बहुत सारे फूड क्रेविंग्स का शिकार बन जाते हो। आपके शरीर का फूड क्रेविंग हॉर्मोन ग्रेलिन और सेटिस्फाई फील कराने वाला हॉर्मोन लेप्टिन जो हर रात नेचुरली रिसेट और रेगुलेट होते हैं वो डिसररप्टेड स्लीप से प्रॉपर्ली रिसेट नहीं हो पाते और डिसफंक्शनल हो जाते हैं जिससे आपको बार-बार कुछ ना कुछ खाने की क्रेविंग मचने लगती है और अल्टीमेटली इंसान ओवरवेट हो
13:10 जाता है। सो अब आप अच्छी तरह से जान चुके हो कि नींद को प्रायोरिटी हर हाल में बनाना ही चाहिए। वरना इसके बिना हमारी हेल्थ, हमारा परफॉर्मेंस सब कुछ खोखला ही रह जाएगा। और इसीलिए चलिए अब मिलकर साइंटिफिकली हमारे स्लीप को लाइफ टाइम के लिए सुधारते हैं। इसके लिए सबसे पहले हमें स्लीप के स्टेजेस को समझना होगा जिसे फिर हम ऑप्टिमाइज कर सकते हैं। सो इसे ध्यान से सुनना। दरअसल हमारी नींद चार स्टेजेस में डिवाइडेड होती है। तीन नॉन रम स्टेजेस और चौथा रम स्टेज होता है। सिंपल है साइंटिस्ट इन्हें ऐसे कैटेगराइज करते हैं। रम यानी रैपिड आई मूवमेंट स्टेज जिसमें बेसिकली सोते वक्त आपकी आंखें हर कुछ समय में इधर-उधर मूव कर रही होती है। और नॉन रम स्टेज यानी आपकी आंखें एक ही जगह पर स्टेबल होती है। अब इनमें से सबसे ज्यादा
13:56 दो स्टेजेस इंपॉर्टेंट होते हैं। एक है नॉन रम का थर्ड स्टेज जिसे हम सिंपली डीप स्लीप स्टेज भी कहते हैं और दूसरा है रम स्टेज जिसमें हमें सपने दिखाई देते हैं। अब सिर्फ यह दो स्टेजेस ही आखिर क्यों? वेल दैट इज बिगेस्ट इनमें से जो डीप स्लीप वाला स्टेज है उसमें हमारे बॉडी के फिजियोलॉजिकल प्रोसेससेस जैसे कि हार्ट रेट, बीपी, डाइजेस्टिव सिस्टम, इम्यून सिस्टम, ग्रोथ ये सबका रिसेट और रिपेयर वर्क चलता है। और रम स्टेज में हमारे सारे मेंटल प्रोसेससेस जैसे कि डिसीजन मेकिंग फ्रेमवर्क, इमोशंस को हैंडल करने वाला सिस्टम, मेमोरी को कंसोलिडेट करने वाला सिस्टम इन सबका रिसेट और रिपेयर वर्क चलता है। सो होता कुछ ऐसा है कि जैसे ही आप सोने जाते हो आप सीधे नॉन रम स्टेज वन में चले जाते हो और फिर कुछ 10 या 15 मिनट बाद आप नॉन रम स्टेज टू में जाते हो एंड देन
14:42 फाइनली जैसे ही आपकी नींद गाढ़ी होती जाती है आप स्टेज थ्री में एंटर करते हो जो कि सबसे डीपेस्ट स्टेज होता है स्लीप का जिसमें आपका ब्रेन सबसे लीस्ट एक्टिव डेल्टा वेव्स रिलीज कर रहा होता है। इस स्टेज में पहुंचने के बाद ब्रेन वापस से स्टेज टू में आता है और फिर स्टेज वन एंड फाइनली आप रेम स्लीप में आते हो। अब ये रैम स्टेज बिल्कुल वही स्टेज होता है जिसमें आप सपने देखते हो जो 30 से 45 मिनट्स तक चलता है और फिर जाके आपके स्लीप का एक साइकिल कंप्लीट होता है। ऐसे ही नॉन रैम और रैम स्लीप के अराउंड चार से पांच साइकिल्स हर रात कंप्लीट करना जरूरी है एक अच्छी नींद के लिए। और अगर आप किसी भी वजह से इन साइकिल्स के बीच में अगर उठ जाते हो जैसे फॉर एग्जांपल नॉन रम स्टेज टू पर एक फोन की घंटी आपको उठा देती है तो आपके स्लीप का वो साइकिल वहीं पर ही कैंसिल हो
15:30 जाएगा और आपको फिर से एन रम स्टेज वन से ही शुरू करना पड़ेगा। यानी कि आपका स्लीपिंग टाइम वेस्ट हो गया। और यही चीज एक्चुअल में डिटरमाइन करती है आपकी क्वालिटी ऑफ स्लीप। अगर आपके स्लीप साइकिल्स पूरी तरह से अनइंटरप्टेडली कंप्लीट नहीं हो रहे हैं तो मैटर नहीं करता आप कितने भी समय क्यों ना सो रहे हो आपकी नींद फिर भी कंप्लीट नहीं हुई होगी और आप घंटों तक सोने के बाद भी ऐसा फील करोगे जैसे कोई ड्रंक इंसान फील करता है। सो अब हम पहुंच गए हैं आज के इस वीडियो के प्रोबेबबली द मोस्टेंट पार्ट में। फास्ट डीप और इन जनरल एक अच्छी क्वालिटी स्लीप आज के प्रॉब्लम्स और परेशानियों से भरे इस मॉडर्न लाइफ में आखिर कैसे मिल सकती है? देखो फंडामेंटल प्रिंसिपल ना एक अच्छे स्लीप का एकदम सिंपल है। एक ही बॉडी के
16:15 सिस्टम को आपको बस एक्टिवेट करना होगा और बस उसी के अराउंड आपको अपनी लाइफस्टाइल को भी बिल्ड करना होगा। सो हमारे शरीर में दो मेजर सिस्टम्स होते हैं जो हमारी बॉडी की एक्टिविटी लेवल को रेगुलेट करते हैं। एक है सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम जिसे फाइट और फ्लाइट नर्वस सिस्टम भी कहते हैं और दूसरा है पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम जो फाइट और फ्लाइट का एग्जैक्ट उल्टा बॉडी को कूलडाउन और रिलैक्स होने का सिग्नल भेजता है। और आपको एक रिलैक्स स्टेट में रखता भी है। अब अच्छी नींद का फंडा ना एकदम सिंपल है। सोने से पहले अपने सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिवेट होने से हर हाल में हमें रोकना है। यानी कि किसी भी हालत में स्ट्रेस हॉर्मोनस जिसके एड्रिनलिन और कॉर्टिसोल को बॉडी में इंक्रीस होने से रोकना है और पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिवेट करवाना है जिससे फिर हम
17:01 रिलैक्स स्टेट में आसानी से जा पाएंगे। अब यही एक सिंपल सा फंडामेंटल प्रिंसिपल आपके पूरे स्लीप को कंट्रोल करता है। जैसे फॉर एग्जांपल डॉक्टर्स क्यों कहते हैं कि रात को हमेशा सोने से दो से 3 घंटे पहले ब्लू लाइट को कट करना चाहिए। दैट इज बिकॉज़ वो स्ट्रेस हॉर्मोन कॉर्टिसोल को रिलीज करता है जो हॉर्मोन आपको दिन में जगाता है। आप येलो लाइट यूज़ कर सकते हो इंस्टेड लेस पावरफुल और मच बेटर है। नंबर टू सेम विद स्टिमुलेंस लाइक कॉफी ये सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम को स्टिमुलेट करते हैं जिससे बॉडी में एड्रिनलिन बढ़ता है एंड यू फील रेस्टलेस यानी रिलैक्स्ड का टोटल ऑोजिट। इवन रात को लेट पेट भर के नहीं खाने को कहा जाता है। बिकॉज़ वो डाइजेशन और ब्लड प्रेशर में स्ट्रेस क्रिएट कर सकता है जो आपकी रिलैक्स स्टेट को ब्रेक कर देगा। नंबर थ्री, इवन आप क्या थॉट सोचते हो,
17:48 उसका भी आपके ब्रेन के सिंपैथेटिक या पैरासिंैथेटिक कौन सा नर्वस सिस्टम एक्टिवेट होगा, उसमें एक बहुत बड़ा रोल होता है। अगर आप फ्यूचर के बारे में सोचकर बहुत टेंशन ले रहे हो या पास्ट के बारे में सोच कर दुखी हो रहे हो, तो वो आपके दिमाग में वापस से स्ट्रेस हॉर्मोन्स क्रिएट करेगा और नतीजा यू वोंट बी एबल टू एंटर इंटू अ रिलैक्स्ड स्टेट। इन सो ओमनियाक्स के साथ भी एग्जैक्टली ऐसा ही होता है। सो ऑल इन ऑल आप बेसिक समझ गए हो राइट? कि रात को आपको किसी भी हालत में खुद को एक स्ट्रेस फ्री थोड़ा थका हुआ लेकिन रिलैक्स्ड स्टेट में लाना होगा। अब मैं आपको कुछ टिप्स दूंगा कि आप अपने आपको ऐसे स्टेट में रात को आसानी से कैसे डाल सकते हो। और फिर मैं आपको उस सीक्रेट मिलिट्री टेक्निक के बारे में भी बताऊंगा जो आपको महज 5 मिनट में सुला देगा। सो लेट्स स्टार्ट विद टिप नंबर वन। अपने
18:33 सरकडियन रिदमम को फिक्स करने के लिए मेक श्योर करें कि आपकी आंखों को दिन में हर रोज एटलीस्ट दो से तीन घंटे की स्ट्रांग सनलाइट मिल रही है। जैसे विंडोज़ के करीब या बालकनी में या फिर आप एक घंटा सीधा बाहर ही चले जा सकते हैं। दिन में स्ट्रांग सनलाइट आपके सरार्डियन रिदमम को रेगुलेट करेगी और रात में मेक श्योर करेगी कि आपको अच्छी स्लीप आए। नंबर टू, रात को सोने से पहले अगर आप फोन या कंप्यूटर यूज करते हो तो ब्लू लाइट ब्लॉकिंग ग्लासेस यूज कर सकते हो। आप इवन फोन में आई कंफर्ट शील्ड या ब्लू लाइट फिल्टर का ऑप्शन होता है वो यूज कर सकते हो। अगर आपके फोन में बिल्ट इन यह फीचर नहीं है तो आप Android या iOS मार्केट से कोई ऐप को इंस्टॉल कर सकते हो उसके लिए। बट याद रहे ब्लू लाइट को हर हाल में रात को अवॉयड करना है। यह हमारे सरार्डियन रिदमम को डायरेक्टली अफेक्ट करता है। नंबर थ्री रूम टेंपरेचर को कोल्ड रखना भी बहुतेंट है। आइडियल
19:20 टेंपरेचर 20 से 24 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए इंडियन क्लाइमेट के हिसाब से। सोने के समय हमारा ब्रेन बॉडी के टेंपरेचर को कूल डाउन कर रहा होता है ताकि हम एक रिलैक्स्ड पावर सेविंग मोड में एंटर कर सकें और इसीलिए कोल्ड रूम टेंपरेचर जल्दी से नींद लाता है। नंबर फोर मॉडरेट टू हैवी इंटेंसिटी एक्सरसाइज जिसकी जॉगिंग या रनिंग करना, मॉडरेटली हैवी वेट्स को लिफ्ट करना बहुत ही पॉजिटिवली कोरिलेटेड है हाई क्वालिटी स्लीप के साथ। मेरे केस में भी इस अकेले फैक्टर ने मेरी स्लीप क्वालिटी को इंप्रूव कर दिया। बेसिकली एक्सरसाइज से आपका बॉडी फिजिकली एग्जॉस्ट भी हो जाता है। प्लस आपके बॉडी के अंदर की जो केमिस्ट्री है वो बहुत ही रिलैक्स्ड हो जाती है। फील गुड रिलैक्सिंग हॉर्मोंस जैसे एंडोरर्फिन, सेरोटोनिन आपका बॉडी सेक्रेट करता है एक्सरसाइज के बाद और ब्लड प्रेशर को भी लो करता है। इनफ्लेमेशन भी
20:06 आपके शरीर में कम हो जाता है। जिससे ओवरऑल बॉडी में स्ट्रेस बहुत कम होता है। हजारों बेनिफिट्स हैं एक्सरसाइज के और रिसर्चेस में यह पाया गया है कि अच्छी स्लीप के लिए बेस्ट वर्कआउट टाइम है लगभग शाम के 8:00 बजे। नंबर फाइव, अगर आपको सीरियस स्लीप के प्रॉब्लम्स हो रहे हैं और उससे आपकी लाइफ भी अफेक्ट हो रही है, तो आप मेलेटोनिन सप्लीमेंट लेना भी कंसीडर कर सकते हो। यह नेचुरल स्लीप हॉर्मोन है। बहुत अच्छा सेफ्टी प्रोफाइल है और इसका एक से 2 मिलीग्राम्स का डोज़ इनफ होता है जो आपको सोने से 30 मिनट पहले लेना होगा टू गेट गुड क्वालिटी स्लीप। बट फिर उसके बाद आपको यह भी मेक श्योर करना होगा कि आपका ब्लू लाइट एक्सपोज़र ना के बराबर हो रहा है। वरना आपका सप्लीमेंट बेसिकली वेस्ट हो जाएगा। एंड देन नंबर सिक्स लास्टली अगर आप मेडिटेशन कर सकते हो तो यह भी आपके बॉडी को काम करने में बहुत हेल्प करेगा। अब ऐसे
20:51 बहुत सारे टिप्स है जो आप ट्राई कर सकते हो। बेसिक जस्ट आप समझ चुके हो कि आपको आपके बॉडी को रिलैक्स कराने में हेल्प करना है। स्ट्रेस को कम करने में हेल्प करना है। एंड देन अल्टीमेटली यू हैव टू ट्राई दीज़ टिप्स ऑल बाय योरसेल्फ एंड सी कि आपके लिए कौन सा टिप वर्क करता है। इसमें एक हल्का सा ट्रायल एरर का विंडो होगा। यू हैव टू फाइंड आउट ऑल बाय योरसेल्फ व्हाट वर्क्स फॉर यू। आपका स्लीप स्केेड्यूल क्या होगा? आपके चॉइसेस क्या होंगे जो आप अपनी लाइफ में लेंगे अपने स्लीप को प्रायोरिटाइज और ऑप्टिमाइज करने के लिए और उन चॉइसेस के अराउंड आप अपनी लाइफ स्टाइल को कैसे क्रिएट करोगे ये आपको खुद ही फिगर आउट करना होगा। एंड ट्रस्ट मी इट्स नॉट दैट हार्ड एट ऑल। एंड एट द एंड ऑफ द डे इट इज गोइंग टू बी वन ऑफ योर बिगेस्ट इन्वेस्टमेंट दैट यू मेक ऑन योर हेल्थ। एनीवे फ्रेंड्स नाउ मूविंग फर्दर अब सीखते हैं वो एक्सपर्ट मिलिट्री
21:38 स्लीपिंग टेक्निक। दरअसल यूएस के एक ओलंपिक कोच और स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट बड विंटर ने वर्ल्ड वॉर टू के वक्त अपने यूएस नेवी के सोल्जर्स के लिए यह मेथड डेवलप किया था। जिससे वो सोल्जर्स गोलियों की आवाजों के बीच भी सिर्फ 5 मिनट में आसानी से सो पाते थे। यह टेक्निक कुछ ऐसी है। इसे ध्यान से सुनना। सबसे पहले आपको एक कंफर्टेबल पोजीशन में लेटना होगा। और फिर डीप ब्रीथिंग की मदद से फोकस करके अपने चेहरे से लेकर अपने टो तक के सारे मसल्स को धीरे-धीरे आपको रिलैक्स करना होगा। आपको ऐसा फील करना होगा कि आपका एक-एक मसल अपने आप ढीला होते जा रहा है। आप उसे ढीला छोड़ रहे हो। ग्रेविटी उसे नीचे खींच रही है और वो रिलैक्स्ड फील कर रहा है। अब यह एक्टिविटीज आपके हार्ट बीट्स को स्लो करने
22:24 लगेगी। और फिर आंखें बंद करके आपको अपने आसपास एक पीसफुल सी जगह इमेजिन करनी होगी। जैसे एक ठंडा सा घास से भरा हुआ मैदान या फिर आप अपने लाइफ के सबसे हैप्पी मोमेंट को भी इमेजिन कर सकते हो। उसे विजुअलाइज कर सकते हो। एंड बस कुछ ही मिनट्स में आपको नींद आने लग जाएगी। बेसिकली इसके पीछे का साइंस यह होता है कि लॉन्ग ब्रीथिंग से हमारे लंग्स के नीचे जो डायफ्राम होता है वो हमारे अपर एब्डोमेन से टच होता है। उससे वहां पर मौजूद वेगस नर्व्स यानी हमारे सभी इंटरनल ऑर्गन्स को कंट्रोल करने वाले नर्व्स एक्टिवेट हो जाते हैं और बॉडी में ब्लड फ्लो बढ़ने लग जाता है। हमारा ब्रेन फिर रिस्पांस में इस एक्टिविटी को स्लो डाउन करने के लिए पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिवेट कर देता है। और पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम के एक्टिवेट होते ही जैसे आपको पता
23:10 है हमारा ब्लड प्रेशर और हमारे हार्ट रेट्स कम हो जाते हैं जिससे हमारा बॉडी रिलैक्स फील करने लगता है और हमें नींद आने लग जाती है। सो इस मेथड को आप भी ट्राई जरूर करना और नीचे कमेंट्स में मुझे बताना कि आपके लिए काम करता है कि नहीं। सो गाइस इस वीडियो से मेरा मकसद बस यही था। आपको यह रियलाइज कराऊं कि ऑलमोस्ट वो सारी बीमारियां जिन्हें आप अवॉयड करना चाहते हो। हार्ट अटैक्स हो गया, कैंसर, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर इश्यूज वो सब कुछ लैक ऑफ स्लीप से ही लिंक्ड है। आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ, आपके लाइफ का हैप्पीनेस इंडेक्स, आपके रिलेशनशिप्स और उनकी क्वालिटी और आपका मेंटल हेल्थ सब कुछ आपके नाइट के स्लीप पर ही डिपेंडेंट है। मगर हम लाइफ में कुछ भी ऊपर नीचे होता है, तो सबसे पहले अपने स्लीप को ही सैक्रिफाइस करते हैं। नाउ, आफ्टर दिस वीडियो, दिस शुड
23:57 नॉट बी द केस। साइंस हमें नॉलेज देता है जिससे हम अपनी लाइफ को एमावर कर सकते हैं फॉर द बेटर। लेकिन एक्शन लेना, प्रायोरिटी बनाना और डिसिप्लिन से स्टिक करना आपके हाथों में ही है। एंड विथ दैट सेड अगर आपको इस वीडियो से कुछ वैल्यू मिला तो इसे अपने फैमिली मेंबर्स और फ्रेंड्स के साथ जरूर शेयर करना ताकि वह भी स्लीप केेंस को समझे और अपने हेल्थ को एमावर कर सके। सी यू नेक्स्ट टाइम। तब तक के लिए स्टे फिट एंड टेक केयर। जय हिंद।