0:00 योगेश उर्फ़ राजू गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा के गिरोह के लिए काम करने वाला शूटर। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश एक में जिम मालिक नादिर शाह की हत्या का आरोपी। क्या यह अपराधी 25 जुलाई की शाम सीजेपी प्रोटेस्ट में मौजूद था? दिल्ली पुलिस का सुप्रीम कोर्ट को दिया गया हलफनामा यह बात कहता है। दिल्ली पुलिस का चेहरा पहचानने वाला सिस्टम ऐसा कहता है। लेकिन जेल के रिकॉर्ड वो क्या कहते हैं? वो कहते हैं कि यह आदमी लगभग 2 साल से जेल में बंद है। तो फिर यह पहेली क्या है? जंतरमंतर पर हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि प्रोटेस्ट में शामिल 2873 लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड हैं। पुलिस
0:45 के मुताबिक इनमें से 205 ऐसे थे जिन पर हत्या, रेप, पॉक्सो एक्ट और हत्या की कोशिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत अति गंभीर मामले चल रहे थे। अब इंडियन एक्सप्रेस की एक पड़ताल में सामने आया है कि ऐसे गंभीर अपराध के कम से कम 25 मामलों से जुड़े लोग दरअसल प्रोटेस्ट की तारीखों के दौरान जंतरमंतर पर मौजूद ही नहीं थे अगर जेल के रिकॉर्ड्स की मानें तो नमस्कार मेरा नाम सौरभ द्विवेदी है। आप इंडियन एक्सप्रेस हिंदी देख रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस इन्वेस्टिगेशन का यह एक नया एपिसोड है और यह जांच पड़ताल की है हमारे असिस्टेंट एडिटर महेंद्र सिंह मनराल ने।
1:30 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतरमंतर पर छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ी सभी एफआईआर रद्द कर दी। यह प्रदर्शन नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में हुए थे। जिसके बाद शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत छात्रों की अन्य मांगे सरकार ने स्वीकार की और इसके बाद प्रदर्शन खत्म हो गए। कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दाखिल एफआईआर तो रद्द कर दी लेकिन उन 2873 लोगों के खिलाफ कारवाई की अनुमति दी जिनके बारे में दिल्ली पुलिस का दावा था कि उनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन स्थल पर इन लोगों को 20 से 26 जुलाई के बीच एफआरएस यानी फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम ने आइडेंटिफाई किया था।
2:19 17 अगस्त को दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया गया था। यह एकाधिक याचिकाओं के जवाब में दिया गया था। इन याचिकाओं में प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस के हाथों ज्यादा बल प्रयोग और सर्विलेंस के आरोप लगाए गए थे। हलफनामे के मुताबिक एफआरएस ने प्रदर्शन स्थल पर ऐसे लोगों की पहचान की जिनकी जानकारी पुलिस के डाटाबेस में मौजूद रिकॉर्ड से मेल खाती थी। पुलिस ने बताया कि कुल 2873 लोगों की पहचान हुई। इसमें 2402 लोगों की पहचान दिल्ली पुलिस के बायोमेट्रिक डेटाबेस क्राइम कुंडली से हुई और 471 लोगों की पहचान उनके आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर हुई। 205 गंभीर मामलों की बात
3:05 करें तो इसमें हत्या के 101, रेप के 61, पॉक्सो के छह और हत्या की कोशिश के 37 मामले दर्ज हैं। हालांकि पुलिस के हलफनामे में यह साफ नहीं किया गया कि पहचाने गए लोग आरोपी थे, दोषी ठहराए जा चुके थे या सिर्फ किसी आपराधिक मामले में उनके नाम दर्ज थे। एरिया के हिसाब से देखें तो नॉर्थ दिल्ली से सबसे ज्यादा लोगों की पहचान की गई। यह संख्या है 285 की। इसके बाद आउटर दिल्ली के जिले में 257, उत्तर पश्चिम में 256, उत्तर पूर्व में 174, पूर्वी दिल्ली में 173, दक्षिण पश्चिमी दिल्ली में 166 लोगों की पहचान हुई। बाकी सूची में रेलवे, शाहदरा, मध्य दिल्ली, दक्षिण पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, द्वारका, दक्षिणी दिल्ली, रोहिणी, नई दिल्ली, क्राइम ब्रांच, आईजीआई एयरपोर्ट, मेट्रो और स्पेशल सेल जैसी इकाइयां शामिल
3:51 थी। अब आगे बढ़ने के पहले समझ लीजिए कि दिल्ली पुलिस का एफआरएस यानी फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम कैसे काम करता है। हमने पूछा अपने साथी रिपोर्टर महेंद्र सिंह मंडाल से। एफआरएस फेस रिकग्निशन सिस्टम दिल्ली पुलिस का एक ऐसा सिस्टम है जिसको दिल्ली पुलिस ने अपने एक वाहन में डाल लगाया हुआ है और इस वाहन को वो अक्सर जब भी इस तरह के बड़े प्रोटेस्ट हो या कुछ बड़े इवेंट हो रहे होते हैं तो वहां पर उनको लगाया जाता है। अधिकतर इस तरह के जो एफआरएस के जो वाहन होते हैं दिल्ली पुलिस के यह 26 जनवरी लाल किला 15 अगस्त के समय या 26 जनवरी के वक्त इन सब जगहों में मिलते हैं। सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान भी यह वहां पर लगाया गया। इसमें फेस रिटेशन सिस्टम का बेसिक एक सिस्टम यह होता है जिसमें दिल्ली पुलिस के सभी क्रिमिनल डोजर जो है वो इसमें ऑलरेडी डले हुए हैं। सभी क्रिमिनल से मिलते जब चेहरे
4:38 दिखाई देते हैं जब उस कैमरे से आगे से गुजरते हैं तो वो कैमरा उसको पकड़ता है और उसका डाटा एक दिल्ली पुलिस को मोटा-मोटी उसमें से जो जो फीचर्स मैच करते हैं उसमें वो एक रिपोर्ट देता है कि यह व्यक्ति का नाम उनके डाटा में यह मैच कर रहा है और उस व्यक्ति की पूरी की पूरी कुंडली उसमें खुल जाती है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ चेहरे की पहचान के आधार पर कारवाई नहीं होगी। पहले फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए यह जांच की जाएगी कि व्यक्ति वास्तव में वही है या नहीं और उसके खिलाफ रिकॉर्ड सही है या नहीं। लेकिन ठीक यहीं से पुलिस की चुनौतियां शुरू होती हैं। हत्या, हत्या की कोशिश, रेप और बच्चों के साथ अपराध जैसे गंभीर मामलों में आरोपी बताए गए लोगों की पड़ताल से एक अजीब बात पता चलती है कि जंतरमंतर पर एफआरएस से
5:24 पहचाने गए कम से कम 25 लोग प्रदर्शन के समय जेल में थे। पुलिस, जेल और अदालत के रिकॉर्ड से यह बात सामने आई है। इन 25 के बारे में इंडियन एक्सप्रेस को यानी हमें क्या पता चला? इनमें से 17 हत्या से जुड़े मामले हैं। रेप और पॉक्सो मिलाकर चार मामले हैं। यह हुए 21। बचे चार मामले हत्या की कोशिश के हैं। ये 25 लोग प्रोटेस्ट की तारीखों के दौरान दिल्ली की तीन अलग-अलग जेलों में थे। तिहाड़, मंडोली और रोहिणी की जेल। एफआरएस ने इन 25 लोगों में से तीन की पहचान 24 जुलाई को की। 21 लोगों की 25 जुलाई को और एक व्यक्ति की 26 जुलाई को। 26 जुलाई जंतरमंतर पर प्रदर्शन का आखिरी दिन था। इंडियन एक्सप्रेस ने सभी 205 अति गंभीर मामलों की पड़ताल की है।
6:10 इनमें से हम आपको उन 25 मामलों की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं जिनकी हमने अभी बात की। यानी अब हम आपको बता रहे हैं अति गंभीर मामलों में जेल गए यह लोग दरअसल जेल में क्यों थे और कब से थे। सबसे पहले हम बात करेंगे हत्या के 17 मामलों की। इनके डिटेल्स आपको स्क्रीन पर नजर आ रहे हैं। हम आपको बताएंगे कि यह कब से जेल में हैं और इनके नाम क्या है। इनके बरे देखिए गौर से। 26 साल का किशन 17 अक्टूबर 2023 से जेल में है। 29 साल का मुश्ताक 23 जून 2026 से जेल में है। 22 साल का अंकित कुमार 24 जून 2026 से जेल में है। पहले भी जेल जा चुके हैं ये लोग। योगेश 27 साल का 29 नवंबर 2024 से जेल में है। प्रताप सिंह
6:56 सिसोदिया 31 साल उम्र 5 अगस्त 2026 को मंडोली से तिहाड़ जेल ट्रांसफर किया गया। कई दफा जेल जा चुका है। अर्जुन 28 साल का 9 मार्च 2023 से जेल में है। सोनू कुमार 34 साल उम्र 27 अक्टूबर 2025 से जेल में है। 26 साल का विजय 19 जनवरी 2026 से जेल में है। राकेश 42 साल उम्र 18 फरवरी 2024 से जेल में। भोला उर्फ श्याम कुमार 29 मार्च 2025 से जेल में है। पहले भी जेल जा चुका है। राजा 27 साल उम्र 1 जुलाई 2024 से जेल में है। विक्की उर्फ़ मनोज ठाकुर 34 साल उम्र 7 मई 2016 से जेल में है। मोहम्मद फराज 23 साल उम्र 9 अक्टूबर 2024 से जेल में है। मनीष 28 साल उम्र 23
7:44 अक्टूबर 2024 से जेल में है। धर्मेंद्र यादव 37 साल उम्र 14 मई 2026 से जेल में है। सोनू 29 साल का 26 अप्रैल 2022 से जेल में है। Royal मेसी 25 साल उम्र 4 अप्रैल 2023 से जेल में है। यहां पर मैं दर्शकों को बता दूं कि यह सारे अपराधी पहले भी जेल में रह चुके हैं। स्क्रीन पर आपको ब्यौरे नजर आ रहे हैं और यह भी नजर आ रहा है कि एफआरएस से पहचान में किस तारीख को यह लोग जंतरमंतर पर कथित रूप से मौजूद पाए गए। इस वीडियो की शुरुआत में हमने आपसे जिस योगेश उर्फ़ राजू के बारे में बात की उसका मामला इन्हीं 17 मामलों में से एक है। पुलिस ने उसे मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। जिसमें उसके बाएं पैर पर गोली लगी थी।
8:30 रिकॉर्ड्स के मुताबिक 2024 से वह जेल में है। लेकिन दिल्ली पुलिस के हलफनामे के मुताबिक वो 25 जुलाई की शाम 4:24 पर प्रोटेस्ट में देखा गया। हत्या के मामलों के बाद अब रुख करते हैं रेप और पॉक्सो यानी बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों की। आप सूची देखिए। हम आपको नाम बताएंगे कब से जेल में है यह बताएंगे। आपको स्क्रीन पर नजर आएगा कि इनको एफआरएस सिस्टम के मुताबिक कब स्पॉट किया गया और यह असल में कहां से गिरफ्तार हुए थे। सूची में पहला नाम है अंकित उर्फ़ मोगली। 34 साल उम्र 16 जुलाई 2024 से तिहाड़ जेल में है। पहले भी जेल में रह चुका है। 26 साल का सुनील 30 अगस्त 2025 से जेल में है। हीरा सिंह 11 जुलाई 2023 से जेल में है।
9:15 कुंदन 29 मई 2024 से जेल में है। अब हम रुख कर रहे हैं तीसरी कैटेगरी का यानी कि हत्या की कोशिश अटेमप्ट टू मर्डर जिसे पॉपुलर जबान में हाफ मर्डर कहते हैं उस सूची का। इसमें चार मामले हैं। इन पर नजर डालिए। 33 साल का महेश 29 अप्रैल 2024 से जेल में है। 24 साल का बॉबी 21 फरवरी 2024 से जेल में है। जीशान अहमद इदरीशी यह 25 साल का है और 19 मार्च 2026 से जेल में है। अनू गिलोदिया उर्फ़ पहलवान 27 साल का 25 मार्च 2022 से जेल में बंद है। तो ये थे सभी 25 मामले। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी इन्वेस्टिगेशन के नतीजों के बारे में दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने
10:00 कहा प्रदर्शन के दौरान 2873 ऐसे लोगों को देखा गया जिनके बारे में पहली नजर में लगा कि उनका आपराधिक रिकॉर्ड है। हालांकि इस संबंध में आगे की जांच और पुष्टि अभी बाकी है। अब हम फिर से रुख करेंगे अपने साथी महेंद्र सिंह मनराल का जिन्होंने ये इन्वेस्टिगेशन की। इस सवाल के साथ कि इस इन्वेस्टिगेशन की प्रक्रिया क्या रही? जुलाई के आखिरी हफ्ते में हमें पता चला कि दिल्ली पुलिस ने ऐसा दावा किया है कि 2000 से 718 के करीबन मुलजिम जो है वह सीजेपी के प्रोटेस्ट के दौरान उनको अपने एफआरएस सिस्टम में वहां पर उनकी उन्होंने मौजूदगी दर्ज कराई है। तो इस डाटा को हमने जब हमें जब ये डाटा मिला उसके बाद हमने इस पर कारवाई करनी शुरू करी और इस डाटा के हमने
10:48 सभी लोगों के नाम पता हमने डिटेल्स निकालनी शुरू करी। 30 जुलाई तक हमें सारी जानकारी प्राप्त हुई। उसके बाद हमने एक महीना लगभग सारे करीबन 200 के करीबन हमने क्रिमिनल डोजियर छाने। हमने अपने सूत्रों से उन क्रिमिनल डोजर की जानकारी प्राप्त करी। उन्हें वेरीफाई कराया कि ये इस 718 में से हमने एक सैंपल साइज लिया जिसमें हमने मर्डर, रेप, पॉक्सको से रिलेटेड मामले, अटेमप्ट टू मर्डर और कई सारी और जो कैटेगरी में थी जिनमें दिल्ली पुलिस ने उन मुलजिमों को बांटा था। उन सभी कैटेगरी में से हमने इन कैटेगरी का एक सैंपल साइज लिया कि हम 200 के करीबन इन मुलजिमों का देखते हैं कि यह लोग कहां पर मौजूद थे जब यह प्रोटेस्ट चल रहा था तो हमें इन सबके क्रिमिनल डोजर और उनके डाटा को जब हमने पता करवाया तो अपने
11:33 सूत्रों से तो हमें पता चला कि इसमें लगभग 25 के करीबन जो मुलजिम है वो उस वक्त जब उनकी मौजूदगी एफआरएस सिस्टम ने जंतरमंतर पाई है उस वक्त वो सभी के सभी पिछले एक से दो साल से तिहाड़ जल में बंद थे। इसके बावजूद जब हमने दिल्ली पुलिस से इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करी कि हमें बताएं कि हमारे डाटा में हमें मतलब इस तरह की जानकारी प्राप्त हुई है और बताने की उन्होंने क्या इन लोगों को वेरीफाई किया तो पिछले एक महीने से ऊपर तक अभी तक दिल्ली पुलिस ने किसी भी व्यक्ति का कोई ऐसा वेरिफिकेशन नहीं कर रखा और उन्होंने हमें बोला ऑफिशियली कि अभी भी वो वेरिफिकेशन कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की आगे की जांच पर हमारी नजर बनी हुई है। ऐसी ही और इन्वेस्टिगेशंस के लिए आप देखते रहिए इंडियन एक्सप्रेस हिंदी।