How BJP MESSED UP CJP Protests | BJP’s BIGGEST BLUNDER

Brief Summary

This video discusses the recent protests related to the CJP (Committee for Justice and Peace) in India, highlighting the government's handling of the situation and the involvement of various political parties. The speaker criticises the BJP's strategy of initially ignoring the protests, which ultimately led to an escalation of tensions and violence. They also point out the problems faced by students and the significance of communication between the government and the affected communities.

  • The Indian government's handling of the CJP protests is scrutinised.
  • The BJP's strategy of ignoring protests was ineffective and led to conflict.
  • The influence of opposition parties and student issues are explored.

Government Response to CJP Protests

The video opens with a focus on how the Indian government has worsened controversies by banning the CJP regarding their protests. The context is set at Jantar Mantar, where large crowds have gathered, and tensions are rising as people disregard guidelines from the police. As protestors threaten to uproot the Parliament if their demands are not met, the initial strategy of the ruling party, BJP, was to ignore the protests, believing that they would diminish over time.

Protests and Political Hijacking

The speaker notes that the BJP recognised the protests were hijacked by political parties and anti-national elements. He mentions individuals, like Arundhati Roy and Prashant Bhushan, who have previously advocated for controversial causes, as being linked to the movement. Despite an early decision not to engage for 20 days, the BJP then shifted tactics abruptly as the CJP announced its largest protest yet, suggesting poor strategic management by the government.

Understanding BJP's Initial Strategy

Initially, the BJP's approach seemed to be to deny oxygen to the protests by not engaging at all. Early on, very few supporters were attending the protests, suggesting this strategy was somewhat effective initially. However, the involvement of various leftist student organisations started to increase attendance. Despite claims of a grassroots movement, there are accusations of insincerity by CJP leaders who are accused of merely seeking political advancement.

Mistakes in Handling Protesters

The BJP's significant mistakes in handling the protests include ignoring legitimate student grievances, particularly regarding paper leaks in education. The speaker argues that immediate accountability from Education Minister Dharmendra Pradhan was necessary following these scandals to maintain trust with students. He states that a press conference or direct engagement with students would have been more appropriate than the government's passive approach.

Protests Escalate and Violence Erupts

As tensions grew, police used force against protesters who defied barricades, leading to clashes. The protesters had initially aimed for a peaceful protest, but provocateurs from opposing parties disrupted the tranquility, leading to violence and injury on both sides. The video highlights the role of opposition-associated agents who incited violence, risking the movement’s integrity and creating a narrative that tarnished students' image.

CJP's Leadership Questioned

Criticism is directed at the leadership of the CJP, which is portrayed as detached from the genuine concerns of students while seeking to raise their political profiles. Key CJP leaders were also noted to be absent from the frontline during the violence. The speaker underscores a disconnection between protest leaders and genuine protest experiences, suggesting that their priorities lie elsewhere rather than with the students' needs.

BJP's Confused Strategy

The BJP's strategy lacked clarity as they swung between ignoring and engaging with the protests. The moment when protests teamed up with political opposition marked a turning point that prompted the BJP to engage abruptly. This confusion is critiqued for signalling to future protestors that only violent actions would warrant governmental engagement, which could set a dangerous precedent.

Final Thoughts on Strategy and Student Engagement

The speaker urges that the government should have established separate channels of communication with students that focused on addressing their grievances rather than reacting to protests involving political hijacking. Emphasising that a proactive, structured communication plan could have fostered goodwill and trust, the speaker calls for continued pressure on the government for tangible solutions while advising against participation in violence-driven protests.

Call to Action for Students

The video concludes by encouraging students to persistently demand accountability from the government without engaging with anti-national elements. The importance of non-violent protests is reiterated, along with a recognition of genuine student concerns, advocating for their voices to be heard while maintaining focus on constructive dialogue for resolution.

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Transcript

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0:00 देखिए गाइज़, जिस तरह इंडियन गवर्नमेंट ने सतलुज को बैन करके उस कंट्रोवर्सी को जरूरत से ज्यादा बड़ा कर दिया, बिल्कुल वैसा ही मिस स्टेप इन्होंने यह सीजेपी से रिलेटेड 20 तारीख को जो प्रोटेस्ट हुए हैं, उस पर किया है। फाइनली दोस्तों, हम आ चुके हैं जंतरमंतर पर और मैंने ईंट उठा ली। जिसने भी मुझे रोकने की कोशिश करी। ये नोक वाली साइड से कसम से कह रहा हूं भाई। यहां पे चारों तरफ बहुत ज्यादा भीड़ है। इसलिए आरएफ है, इधर सीआरपीएफ है, पुलिस है, रायत कंट्रोल करने के लिए बस है। द पॉइंट इज लोग बहुत ज्यादा अग्रेसिव हैं और कोई भी दिल्ली पुलिस की जो गाइडलाइंस है जो उनकी एडवाइज़री है उसको नहीं सुन रहा है। संसद भवन उखाड़ दिया जाएगा। संसद भवन उखाड़ दिया जाएगा और इस्तीफा नहीं मिला तो। उखाड़ दिया जाएगा। सब उखाड़ दिया जाएगा। सब कर दिया जाएगा। नेपाल उखाड़ जाएगा। नेपाल नेपाल नेपाल। याद रखिए बीजेपी गवर्नमेंट का इनिशियल स्टंस क्या था कि भाई हम सीजेपी के साथ एंगेज ही नहीं करेंगे। उन्होंने क्लियरली

0:45 देखा कि इन प्रोटेस्ट को पॉलिटिकल पार्टीज ने हाईजैक कर लिया है। एंटी नेशनल एलिमेंट्स ने हाईजैक कर लिया है। चाहे अरुंधति रॉय हो, कोलिन गोंसालवेस हो जिन्होंने 261 आतंकवादी अजमल कसाब के लिए पिटीशन फाइल की थी। प्रशांत भूषण हो जिन्होंने आतंकवादी याकूब मेनन की हैंगिंग रोकने के लिए रात में 12:00 बजे सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी। नंदिता नारायण जो गा रही थी बस नाम रहेगा अल्लाह का। अल्लाह का मतलब वो शक्ति जो हम सब में है। बस नाम रहेगा अल्लाह का। तो 20 दिनों तक ना इंगेज करने का डिसीजन लेने के बाद रातोंरात जब सीजेपी ने अनाउंस किया कि वो अपना सबसे बड़ा प्रोटेस्ट ल्च कर रहे हैं और पार्लियामेंट में मार्च करेंगे। अचानक से इन्होंने डिसाइड किया कि चलिए भाई अब हम एंगेज कर लेते हैं और फिर उसके बाद पलट के सीजेपी ने ही उनको रोस्ट कर दिया। तो देखिए गाइस ये एक परफेक्ट

1:30 एग्जांपल था कि कैसे किसी प्रोटेस्ट को हैंडल नहीं करना चाहिए। इस तरह की हैंडलिंग के पीछे क्या थिंकिंग है मेरे को तो नहीं पता। बस मुझे इतना पता है कि बीजेपी ने अपना कम्युनिकेशन और जिस तरह से इस सीजेपी प्रोटेस्ट को उन्होंने अल्टीमेटली हैंडल किया है वो बहुत बुरी तरह से मेस अप कर दिया है एंड आई विल एक्सप्लेन टू यू कैसे। [संगीत] हेलो हेलो श्याम शर्मा शो के इस एपिसोड में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। मैं हूं सेकुलरिज्म का सीईओ श्याम शर्मा और आप सबको एक सेकंड। क्या आप जॉब करते हैं? क्लॉड यूज़ करने वाले लोग अपने मैनेजर को वो आउटपुट दे रहे हैं जो पहले पूरी टीम देती थी। क्या आप फ्रीलांसर हैं? जो पहले एक हफ्ते में डिलीवर होता था, वह अब एक दिन में डिलीवर होता है और क्लाइंट्स आपकी स्पीड के साथ-साथ आपकी क्वालिटी से भी खुश हैं। क्या आप फाउंडर हैं? क्लॉड पूरी टीम का काम कर सकता है अकेले। कॉस्ट कम, स्पीड

2:16 ज्यादा और मार्जिनस मच बेटर। और यह सिर्फ एक एआई टूल नहीं है। यह अगले 10 सालों का इंफ्रास्ट्रक्चर है। Google जानता है यह बात। Amazon जानता है यह बात। इसलिए यह कंपनीज़ ऐसी चीजों में बिलियंस लगा रहे हैं। इसलिए आप पीछे ना रह जाए। इसलिए मैं आपको रेकमेंड करना चाहता हूं कंप्लीट क्लॉड लाइव ट्रेनिंग। और सबसे अच्छी बात है कि कंप्लीट क्लॉट लाइव ट्रेनिंग में दो अलग ट्रैक्स हैं। एक टेक प्रोफेशनल्स के लिए और दूसरा नॉन टेक प्रोफेशनल्स के लिए। जो आपके लिए अप्लाई करता है आप उसको अटेंड कर सकते हैं। इस सैटरडे और संडे जो दो दिन की लाइव वर्कशॉप है सिर्फ क्लॉड के लिए। सुबह 10:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक 16 घंटे की लाइव हैंड्स ऑन सेमिनार है ये। लिंक डिस्क्रिप्शन में है। अभी के अभी जाकर साइन अप करें। चाहे आप वर्किंग प्रोफेशनल हो, फ्रीलांसर हो, फाउंडर्स हो, एंटरप्रेन्योर हो, जो सीरियसली आगे बढ़ना

3:01 चाहता है वो इसको ज्वॉइ कर सकता है और उसे इसको ज्वॉइ करना चाहिए। इसमें आप सीखेंगे क्लॉट [संगीत] से घंटों की रिसर्च मिनट्स में कैसे करें? बिना एक लाइन कोड के टूल्स और डैशबोर्ड बनाना, प्रेजेंटेशंस और रिपोर्ट खुद से और क्लॉट को अपना परमानेंट इंटेलिजेंट असिस्टेंट बनाना। तो ये ट्रेनिंग इज ब्रॉट टू यू बाय आउटस्किल। आउटस्किल इस ट्रेनिंग को आपके लिए बिल्कुल फ्री कर दिया है। वंस अगेन लिंक डिस्क्रिप्शन में दिया हुआ है। इस वीडियो को देखते ही साइन अप करें। क्योंकि देखिए इनेशन वॉर में जो पहले वार करता है जो फर्स्ट मूवर होता है जो सबसे पहले आगे बढ़ता है वही जीतता है। तो देखिए ये जो सीजेपी का प्रोटेस्ट हुआ है इसको हैंडल करने में जो बीजेपी की स्ट्रेटजी रही है वो उतनी ही खराब रही है जितनी अभिजीत दीपके जी की एक्टिंग सर मारिए मत

3:51 मारिए मत आ हा हा नेमार लेवल की एक्टिंग है भैया लोग इनके बारे में इस तरह के मीम्स शेयर कर रहे हैं तो देखिए मैं आपको बीजेपी की स्ट्रेटजी समझाता हूं कि कैसे इन्होंने इस पूरे सीजेपी के प्रोटेस्ट को अप्रोच किया है। जो स्ट्रेटजी देख के ऑनेस्टली सर खुजाने का ही मन करता है। जब यह प्रोटेस्ट शुरू हुआ था तो इनिशियली बीजेपी की स्ट्रेटजी थी कि भैया इनको हम बिल्कुल भी ऑक्सीजन नहीं देंगे। इनको पूरी तरह से इग्नोर करेंगे और इनके साथ कुछ भी इंगेजमेंट नहीं करेंगे। और इनिशियली अगर यही इनकी स्ट्रेटजी थी तो शुरुआत में लगता था कि स्ट्रेटजी थोड़ी काम कर भी रही है। क्योंकि प्रोटेस्ट को ऑनलाइन तो बहुत सपोर्ट मिल रहा था लेकिन ग्राउंड पे बिल्कुल भी सपोर्ट नहीं था। 22 मिलियन फॉलोअर्स होने के बावजूद सीजेपी के प्रोटेस्ट में मैक्सिमम 200 250 लोग आ रहे थे डेली। तो लग रहा था कि बीजेपी की स्ट्रेटजी है कि भैया इस प्रोटेस्ट को इग्नोर करो अपने आप स्टीम खत्म हो जाएगी। और चलिए एक तरह से आप यह स्ट्रेटजी समझ सकते हैं क्योंकि इनकी जो प्रोटेस्ट है हमेशा से सोशल क्लाइबर्स और अपोरर्चुनिटी

4:37 से भरी हुई है। क्योंकि चाहे दीपके हो, चाहे सौरव दास हो, चाहे विजेता दहिया हो ये लोग अपना पॉलिटिकल प्रोफाइल बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इनको स्टूडेंट्स की टेंशन नहीं है। क्योंकि अगर इनको स्टूडेंट्स की टेंशन होती तो ये स्टूडेंट्स पर फोकस करते। ये हर तरह के फालतू इंसान को अपने मूवमेंट से जोड़ नहीं लेते। एक तो देखिए एडॉन इनके पास मैक्सिमम 200 250 लोग आ रहे थे। उसमें से आधे भी जो थे वह कम्युनिस्ट ग्रुप जैसे आयशा और एसएफआई के लोग थे। क्योंकि यह जो वाम विचारधारा से समर्थित जो दल हैं उनके ये छात्र संगठन है। आप आयशा का नाम ले रहे हैं या बाकी जो संगठन है और ये कहने में कोई हर्ज भी नहीं है कि जो इस प्रोटेस्ट साइट पर हम अभी हैं जो सीजेपी का प्रोटेस्ट है उसकी रौनक आयशा और उसके सिस्टर ऑर्गेनाइजेशनंस हैं उनकी वजह से ये और ये सौरव द्विवेदी ने भी खुद एक्सपोज किया था। तो आपने क्राउड देखी है। क्राउड कंप्लीटली यहां पर ऑर्गेनिक क्राउड आ रही है। सारे मैक्सिमम यूथ आ रहे हैं या उनके पेरेंट्स आ रहे हैं जिनके बच्चे अभी 10थ है। 10थ में है या 11थ में हैं।

5:23 मैं आपको रोकूंगा बीच में आप कह रहे हैं ऑर्गेनिक क्राउड आ रहा है। लेकिन यहां पे एआईएसएफ, एसएफआई आईसा दीज़ आर ऑर्गेनाइज्ड स्टूडेंट आउटफिट्स एसोसिएटेड विद लेफ्ट पार्टीज। तो उनके भी वालंटियर्स आ रहे होंगे। सर उनके वालंटियर्स आप देख लीजिए। सीजेपी लीडर्स जो एक समय पर कहते थे कि ये सिर्फ स्टूडेंट्स हैं। इस मूवमेंट को हम बिल्कुल भी पॉलिटिसाइज नहीं करना चाहते। इनके मुंह से सुन लीजिए। एक्सिस्टिंग पिटिकल पार्टी से हम किसी को नहीं चाहते। आज मामला कुछ और ही है। आम आदमी पार्टी, हमारी पूरी टीम और दिल्ली के नागरिक और जनप्रतिनिधि होने के नाते हम सीजेपी का समर्थन करते हैं। अगर मैं कह रहा हूं यहां खड़े होकर एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद कि यहां से संसद तक आदमी आदमी होगा तो आदमी आदमी होगा। मेरी बात को आप याद रखना। एकिस्टिंग पॉलिटिकल पार्टी से हम किसी को नहीं चाहते। जब से इन्होंने ये कहा है कि हम इसको पॉलिटिसाइज नहीं करना चाहते तब से सारी ऑलमोस्ट ऑल पॉलिटिकल पार्टीज इस मूवमेंट को आके ज्वाइन कर चुकी हैं। इंक्लूडिंग

6:09 डिंपल कपाडिया। दोस्तों नौजवान साथियों आपको एड्रेस करने के लिए आपसे मिलने के लिए देश की युवा सांसद समाजवादी पार्टी से डिंपल कपाडिया जी हमारे [हौसला बढ़ाने की आवाज़] डिंपल यादव जी तो क्लियरली बीजेपी के जो लीडरशिप है इन्होंने प्रूफ कर दिया है कि भैया ये स्कैमर्स हैं। यह बस अपना खुद का पॉलिटिकल करियर बढ़ाना चाहते हैं ताकि वो खुद पॉलिटिकल लीडर्स बन सके आगे जाके। इनको कहीं ना कहीं से टिकट मिल जाए। तो एक हाथ से तो वह कहते हैं कि सीजेपी जो है वह ग्रास रूट स्टूडेंट मूवमेंट है। दूसरे हाथ में देखिए हर एक पॉलिटिकल पार्टी आके ज्वाइन कर चुकी है इस मूवमेंट को। लेकिन सिर्फ सीजेपी ने ही गलत एक्शन नहीं लिया है। लेट्स बी ऑनेस्ट। बीजेपी ने भी कुछ बहुत बड़े गलत एक्शंस लिए हैं इस पूरे प्रोटेस्ट को हैंडल करने में। देखिए जो स्टूडेंट्स पेपर लीक के बारे में कंप्लेन

6:55 कर रहे हैं और इस प्रोटेस्ट को ऑनलाइन या इनपर्सन सपोर्ट कर रहे हैं वो 100% सही। और यहां आता है बीजेपी का गलत एक्शन नंबर वन। देखिए मेरा मानना है कि जैसे ही नीट के पेपर लीक हुए यह इतनी बड़ी खबर हुई थी। उसी समय पर धर्मेंद्र प्रधान को रिजाइन कर देना चाहिए था। क्योंकि याद करिए इन्हीं की लीडरशिप में वो यूजीसी वाले गाइडलाइंस भी आए थे जो कि जनरल कैटेगरी स्टूडेंट्स के खिलाफ बहुत ज्यादा डिस्क्रिमिनेटरी थे। तो बैक टू बैक दो इतने बड़े मैसिव कंट्रोवर्सीज और स्कैंडल्स इनकी लीडरशिप में आए हैं। तो इसके बाद इनको रिजाइन करना ही चाहिए था। नीट पेपर लीक के बाद गवर्नमेंट को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस निकालनी चाहिए थी या फिर स्टूडेंट्स और उनके फैमिलीज को इंगेज करना चाहिए था डायरेक्टली और उनको प्रॉमिस करना चाहिए था स्टूडेंट्स को और उनकी फैमिलीज को कि यह सीरियस इशू है और इसको हम सीरियसली लेके जल्दी से जल्दी रॉल्व करेंगे और टजेबल स्टेप्स लेंगे जिनको आप ट्रैक कर सके ताकि पेपर लीक्स जो है अगले दो या तीन सालों

7:42 में कंप्लीटली खत्म कर दिए जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गवर्नमेंट का डिसीजन था कि भाई हम सिर्फ सीजेपी प्रोटेस्ट को नहीं बल्कि सारे स्टूडेंट्स को भी इग्नोर करेंगे। मेरी नजर में यह उनकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम रही है। सीजेपी क्लियरली एक स्कैम ऑर्गेनाइजेशन है जो आम आदमी पार्टी के फैंस या उनके एकलाइट्स चला रहे हैं और जो खुद अल्टीमेटली पॉलिटिकल लीडर्स बनना चाहते हैं। इनको स्टूडेंट्स की चिंता नहीं है लेकिन स्टूडेंट्स की जो ग्रीवेंसेस हैं, स्टूडेंट्स की जो प्रॉब्लम्स है वो जेन्युइन है। उनका जो दर्द है वो जेन्युइन है। हर पेपर लीक के साथ उनके करियर्स को जो नुकसान हो रहा है और उनकी मेंटल हेल्थ को जो नुकसान हो रहा है वो जेन्युइन है। आपको स्टूडेंट्स के साथ कम्युनिकेशन का एक लाइन क्लियरली मेंटेन करना चाहिए था। चाहे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए हो, चाहे मोदी जी की मन की बात के जरिए हो, चाहे एक टाउन हॉल आप ऑर्गेनाइज करिए जिसमें अफेक्टेड स्टूडेंट्स और उनकी फैमिलीज को इनवाइट किया जाए और डायरेक्टली गवर्नमेंट उनसे कम्युनिकेट करें कि भाई हम इस तरह से आपकी

8:28 प्रॉब्लम सॉल्व करेंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। गवर्नमेंट वैसे ही चुप होकर बैठ गई जैसा मुनीर चुप हो के अपनी गुफा में घुस गया था जब इंडियन एयरफोर्स रावलपिंडी के ऊपर घूम रही थी। तो ये थी पहली बड़ी गलती। अब आते हैं दूसरी बड़ी गलती। लेकिन दूसरी बड़ी गलती समझने के लिए सबसे पहले हमें क्रोनोलॉजी जरा समझनी पड़ेगी। तो देखिए हाईकोर्ट ने आर्डर दिया कि वांगचु की हेल्थ को खतरा है इसलिए उनको वहां से हटाकर हॉस्पिटल ले जाया जाए और उनको प्रॉपर्ली चेक किया जाए। फिर वही हुआ। उसके बाद दीपके ने अनाउंस किया कि वो अनलिमिटेड हंगर स्ट्राइक पे बैठ जाएगा जो कि 48 आवर्स के अंदर खत्म हो गई। मतलब भैया प्रोटेस्ट छोड़ देंगे स्टूडेंट्स को छोड़ देंगे लेकिन कचौड़ी नहीं छोड़ सकते। गरमा गरम मूंग दाल की पूरी और आलू की इतनी बेहतरीन सब्जी प्राण ही लेके चली जाए। और देखिए इन्होंने अनाउंस भी किया था कि भाई 20 तारीख को हम एक बड़ा प्रोटेस्ट करने

9:14 वाले हैं। और इस बड़े प्रोटेस्ट में सारी की सारी अपोजिशन पॉलिटिकल पार्टीज ऑलरेडी एक्टिवेट हो चुकी थी और उनके कार्डर भी एक्टिवेट हो चुके थे। ये जब प्रोटेस्ट 20 तारीख को हो रहा था तो आम आदमी पार्टी भी प्रोटेस्ट स्पॉट पर मौजूद थी। तो सोनम वांगचुक के हॉस्पिटल जाने के बाद और 20 तारीख को जो इन्होंने अनाउंस किया था कि बड़ा प्रोटेस्ट होने वाला है तो बहुत सारे जेन्युइन स्टूडेंट्स भी आए थे और उन जेन्युइन स्टूडेंट्स के अंदर जो यह पॉलिटिकल पार्टी के जो वर्कर्स थे यह भी घुसे पड़े थे। अब प्रोटेस्ट की शुरुआत में सीजेपी ने कहा था कि भाई इस प्रोटेस्ट को पीसफुल रखिए। प्रोवोकेशन अवॉयड कीजिए। उन्होंने नॉन वायलेंट और कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोटेस्ट रखने को कहा था। किसी भी हालत में कोई भी हिंसा कभी भी नहीं। जब मैं युवा होता था हमारा एक नारा होता था। हमला चाहे जैसा भी हो हाथ हमारा नहीं उठेगा। लेकिन साथ ही साथ मोदी और अमित शाह के

10:00 अगेंस्ट भड़काया भी जा रहा था। हाए हाए मोदी मर गया हाए अमित शाह मर गया हाए हाए हाए हाए फिर 20 जुलाई को चलो संसद इनका शुरू हुआ इनिशियली देखिए मूड पीसफुल था फिर 7:30 बजे दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली में सिक्योरिटी काफी टाइट कर दी क्योंकि इनको भी पता था कि देखिए स्टूडेंट्स तो आ रहे हैं लेकिन सारी अपोजिशन पार्टी जो हैं उनके भी अलग-अलग मेंबर्स इस प्रोटेस्ट में इन्वॉल्व हैं। तो हो सकता है यह कुछ ना कुछ उल्टा सीधा करने की कोशिश करेंगे। पार्लियामेंट और जंतरमंतर के आसपास मल्टी लेयर्ड बैरिकेड्स भी लगा दिए गए थे और सेक्शन 163 बीएनएसएस तहत प्रोहिबिटरी ऑर्डर्स भी कंटिन्यू किए गए थे। पुलिस ने साफ कर दिया था कि जंतरमंतर से पार्लियामेंट तक किसी भी मार्च की परमिशन ना ली गई है ना दी गई है। पुलिस की वार्निंग्स के बावजूद इन्होंने बैरिकेड क्रॉस करना शुरू किया और प्रोहिबिटरी ऑर्डर्स का उल्लंघन करना शुरू किया।

10:45 कृपया करके सभी बैरिकेड्स के पीछे चले जाइए। ऐसा ना करके बैरिकेड से बाहर आके धारा 163 डीएनएसएस का उल्लंघन करेंगे आप। आपके विरुद्ध कानूनी कारवाई की जा सकती है। सबसे अनुरोध है बैरिकेड्स के पीछे चले जाइए। सड़क को खाली कर दीजिए। बैरिकेड्स के पीछे जाइए। प्रोटेस्ट साइट अंदर है। और धीरे-धीरे फिर पुलिस और प्रोटेस्टर्स के बीच में स्कफ शुरू हो गई। और यहीं पर पथराव की खबर आने लगी। पुलिस की लाठी चार्ज की खबर आने लगी और पुलिस के टियर गैस यूज़ की खबर आने लगी। अब देखिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया यह सही बात है। टियर गैस का यूज किया यह भी हुआ है। लेकिन उसके साथ-साथ यह भी हम इग्नोर नहीं कर सकते कि प्रोटेस्टर्स ने भी स्टोन बेल्टिंग की है। इस प्रोटेस्ट में क्लियरली कुछ एजेंट प्रोवाकेटिवस थे जो अपोजिशन पॉलिटिकल पार्टी से एसोसिएटेड थे और ऐसे कुछ जो ट्रबल कॉज करना चाहते थे और स्टूडेंट्स को वायलेंस में इंगेज करने के लिए कोक्स कर रहे थे। आप खुद देख सकते हैं।

11:30 मैं अभी मैं मैं खुद एक जर्नलिज्म स्टूडेंट हूं। मैं आगे की तरफ गया था। कुछ छोटे बच्चे हैं जिनको कुछ बड़े लोग उसा रहे हैं। और मैं उनको रोक के आया कि आप मत करो प्रोटेस्ट खत्म हो जाएगा। पीसफुल प्रोटेस्ट है। बट वो पीछे से कह रहे हैं हम खड़े हैं। तुम फेंको। ये पत्थर चलाना ठीक बात नहीं है। इससे आप अपना आंदोलन कमजोर कर रहे हैं। इतने दिन से आप अहिंसा के साथ गांधी जी के थॉट के साथ ये आंदोलन चला रहे थे। सब कोई इसका समर्थन कर रहा था। आज जो हुआ वो ठीक बात नहीं है। नीला दुपट्टा पहना हुआ है। अब नीला दुपट्टा समझ लीजिए किस पॉलिटिकल मूवमेंट से जुड़ा हुआ है। और इन एजेंट प्रोवोकेटस की वजह से पुलिस और प्रोटेस्टर्स के बीच में मुठभेड़ भी हुई। जिसकी वजह से खबर आ रही है कि कुछ इनोसेंट स्टूडेंट्स को भी पीटा गया है। इनोसेंट लड़कियों को भी मारा गया है। पुलिस को भी नुकसान हुआ है। व्हीकल्स भी डैमेज की गई है और स्टूडेंट्स

12:16 के साथ-साथ पुलिस ऑफिसर्स भी जख्मी हुए हैं। तो देखिए इतनी बात तो क्लियर है कि मैल कंटेंट्स की तरफ से एक अटेम्प्ट था कि प्रोटेस्ट में इनफल्ट्रेट किया जाए और वायलेंस को प्रवोक किया जाए ताकि पुलिस को एक्शन लेना पड़े और इनोसेंट स्टूडेंट्स को चोट लगे और फिर हम पूरे भारत और पूरी दुनिया की मीडिया को दिखाएंगे कि देखिए ये जो पुलिस है इनोसेंट स्टूडेंट्स को पीट रही है। मैंने जो वीडियो दिखाया है उसमें ये बिल्कुल क्लियर था कि बहुत सारे स्टूडेंट्स नहीं चाहते थे कि ये प्रोटेस्ट वायलेंट हो जाए। लेकिन इस प्रोटेस्ट में कुछ ऐसे एलिमेंट्स थे जो वहां सिर्फ प्रोलीस को प्रोवोक करने के लिए और इस प्रोटेस्ट को वायलेंट बनाने के लिए गए हुए थे। और याद रखिए जब ये सारी प्रोटेस्ट हो रही थी जब स्टूडेंट्स अपनी जान पर खेल के ये मार्च कर रहे थे तो देखते हैं हमारे प्रोटेस्ट के लीडर्स क्या कर रहे थे। हमारे फाउंडर अभिजीत दीपके जी जो थे वो तो मीडिया में काफी बिजी थे। लेकिन जब स्टूडेंट्स पे लाठी चार्ज हो रहा था तो यह भाई साहब दुबक के ट्रक के अंदर छुपे हुए थे और कह रहे थे कि भाई तुम लाठी खाओ हम

13:02 तुम्हारे साथ हैं। [हंसी] वाह बहुत नीच आदमी। [हंसी] अब कुछ लोग कह रहे हैं कि अभिजीत दीपके जी पूरे टाइम पे छुपे हुए थे। लेकिन देखिए ऑनेस्टली मुझे एक एक्सक्लूसिव वीडियो भी मिला है जिसमें दिख रहा है कि दीपके जी क्लियरली प्रोटेस्ट में थे। आप खुद देख सकते हैं। निंजा हटोड़ी [संगीत] आ गया हूं। पहाड़ों के ऊपर। फिर बात करते हैं विजेता दहिया जी की। जिस समय पर स्टूडेंट्स पार्लियामेंट में मार्च कर रहे थे और पुलिस से पिट रहे थे, उस समय दहिया जी मॉल में चिल्ला करके बर्गर खा रहे थे। ये बताइए ये गलत बात है। आप मुझे बताइए सिंपल आप क्यों नहीं गए? हम मैं जंतरमंतर पे भी आज क्यों नहीं गया? आप यहां क्यों घूम रहे हैं? मुझे ये तो बताइए। वहां सब लाठी खा रहे हैं और आप यहां घूम रहे हो। हैं? ये कौन सा सपोर्ट कर रहे हो? ये कौन सा सपोर्ट कर रहे हो आप? बाबा को गाली दे रहे हो। हैं

13:49 हमारे सौरभ दास जी और आशुतोष रंका जी भी जेपी नड्डा के साथ एसी रूम में चिलैक्स कर रहे थे। और इन सारे प्रोटेस्टर्स के जो पिताजी हैं ध्रुव राठी और उनका पालतू अर्पित शर्मा। वह तो भैया जब स्टूडेंट्स यहां पे मार खा रहे हैं वो लोग दोनों विदेश में चिल्लास कर रहे हैं और बोल रहे हैं भैया हम तुम्हारे साथ हैं तुम आगे बढ़ो हालात देखिए ऊपर से इस प्रोटेस्ट में आम आदमी पार्टी का कोई बड़ा लीडर नहीं गया था ना ही कोई बॉलीवुड का बड़ा आर्टिस्ट या एक्टिविस्ट गया था सब ने स्टूडेंट्स को भेज दिया लाठी खाने के लिए और सब पीछे बैठ के चिलक्स कर रहे हैं कि भैया तुम आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं। ये कौन सा तुम्हारे साथ होता है बे? भैया गांधी जी के बारे में कुछ भी बोल लो। गांधी जी में इतनी हिम्मत तो थी ना कि हमेशा प्रोटेस्टर्स के सामने खड़े होते थे कि भैया तुमको अगर लाठी मारनी है तो सबसे पहले मेरे ऊपर मारनी पड़ेगी। तो इसीलिए जब मैं कह रहा हूं आपको कि यह जो सीजेपी की

14:34 लीडरशिप है एक नंबर के फ्रॉड है। एक नंबर के सोशल क्लाइंबर्स हैं। यह सिर्फ अपना पॉलिटिकल करियर आगे बढ़ाने के लिए आए हैं यहां पर। स्टूडेंट्स की इनको घंटा चिंता है। बट फिर भी यहां पर आती है बीजेपी का दूसरा सबसे बड़ा मिस्टेक। यूनियन गवर्नमेंट ने दिल्ली पुलिस के जरिए सीजेपी से डायलॉग चैनल शुरू करने की कोशिश की। सेंटर की तरफ से डीसीपी सचिन शर्मा ने रिप्रेजेंटेटिव से बात की कि पहले डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट के साथ मीटिंग का ऑफर दिया। फिर एक सीनियर ब्यूरोक्रेट और फिर उसके साथ मिनिस्टर ऑफ सेट के साथ ऑफर दिया। उसके बाद जाकर फिर नड्डा जी के साथ इनकी मीटिंग होती है। करीब 2:00 बजे पता चला कि बीजेपी प्रेसिडेंट और यूनियन मिनिस्टर जेपी नड्डा ने सौरव दास और आशुतोष रंका के साथ मीटिंग की है और इसमें सीजेपी ने तीन डिमांड्स रखी है। जेपी नड्डा जी से हम लोगों ने तीन डिमांड्स रखी हैं। पहली चीज सोनम वांगचु की तत्काल रिहाई की जाए। दूसरी चीज जो भी धर्मेंद्र प्रधान ने कांड किस्से किए हैं उसके लिए वह शिक्षा मंत्री बने रहने के

15:21 लायक नहीं है। उन्हें तुरंत रूप से तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जाए। और तीसरी डिमांड हमने ये रखी है कि नीट का पेपर लीक होने के बाद जिन भी स्टूडेंट्स ने सुसाइड की उनके परिवार को एक एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए। अब आपके दिमाग में सवाल आ रहा होगा कि भैया मिल तो लिए, मीटिंग कर तो लिए। इंगेज तो कर रहे हैं अब स्टूडेंट्स के साथ। आप इसको मिस्टेक क्यों कह रहे हो? वेल इसलिए क्योंकि मीटिंग के तुरंत बाद वही सीजेपी के लीडर जो नड्डा से मिलने गए हुए थे। तुरंत मीटिंग के बाद आके नड्डा को ट्रोल कर रहे हैं। इनको मिनिस्टर से मीटिंग हुई है। उसके बावजूद यह लोग बोल रहे हैं कि इंडिया डेमोक्रेसी नहीं है। मार्च खत्म होने के बाद भी सीजेपी ने पब्लिक कहा है कि प्रोटेस्ट तब तक जारी रहेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते। इसके बावजूद की मीटिंग हो चुकी है इन डंडा जी के साथ। सोनम वांचुक ने भी कहा है कि अब वो अनशन बंद नहीं करेंगे। उल्टा और कंटिन्यू करेंगे। और यह है बीजेपी की बहुत बड़ी गलती। गलती यह है कि बीजेपी बेसिकली दो स्ट्रेटजीस के बीच में फंस गई। एंगेज

16:07 करें या इंगेज ना करें। जब दीपके इंडिया आया और उसने प्रोटेस्ट ऑर्गेनाइज किया। गवर्नमेंट ने इंडिकेशन दिया कि उन्हें इन हुडलम से इंगेज करने में कोई इंटरेस्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रोटेस्ट को एंटी नेशनल एलिमेंट्स और अपोजिशन पॉलिटिकल पार्टीज ने हाईजैक कर लिया है। जो की बात बिल्कुल सही है। वो किसी ऐसी सोशल मीडिया ऑर्गेनाइजेशन के प्रेशर में नहीं झुकने वाले थे जिसको क्लियरली आम आदमी पार्टी जैसे पॉलीटिकल पार्टीज ने बैक करके रखा हुआ था। तो उन्होंने प्रोटेस्टर्स से इंगेज नहीं किया जब प्रोटेस्ट एक जगह तक कंफ थी और छोटी थी। लेकिन अचानक उन्होंने प्रोटेस्टर्स से इंगेज करने का डिसाइड किया। उसी दिन जब प्रोटेस्टर्स ने अपना सबसे बड़ा प्रोटेस्ट अनाउंस किया जब हर एक अपोजिशन पार्टी ऑलरेडी इस प्रोटेस्ट में पूरी तरह से जुड़ चुकी थी और इन पॉलिटिकल पार्टीज के कार्डर्स और वर्कर्स भी प्रोटेस्टर्स का हिस्सा बन चुके थे। तो मुझे यह स्ट्रेटजी समझ में ही नहीं आती। इस स्ट्रेटजी को देख के मैं उतना ही

16:52 कंफ्यूज्ड हूं जितना वो ऑडियंस मेंबर था जब उसने अल्फा मूवी में वो सीन देखा जहां आलिया भट्ट एक सुपर सीक्रेट स्पाई है। लेकिन उसके हाथ में इतना बड़ा टैटू है जो क्लियरली आइडेंटिफाई कर सकता है कि वो एक सुपर सीक्रेट स्पाई है। जब प्रोटेस्टर्स ने अपोजिशन पार्टीज के साथ टीम अप किया और एक मॉब बनाया जो पार्लियामेंट की तरफ मार्च कर रहा था। तब इंगेज करने का डिसाइड करना यह क्लियरली कुछ ऑब्वियस इंसेंटिव्स देता है फ्यूचर प्रोटेस्ट के लिए। यह बेसिकली कहता है प्रोटेस्ट को कि भाई आप जब भी पीसफुल प्रोटेस्ट करेंगे तो हम आपके साथ एंगेज नहीं करेंगे। लेकिन अगर आप अपोजिशन पार्टीज के साथ टीम अप करेंगे, मॉब बनाएंगे और गवर्नमेंट ओवर थ्रो करने की धमकी देंगे, तब हम आपके साथ एंगेज करेंगे, तब हम आपके साथ बात करेंगे। यह कैसी स्ट्रेटजी है यार? आपने खुद कहा था कि एंटी नेशनल एलिमेंट्स और अपोजिशन पार्टी के एलिमेंट्स इन प्रोटेस्ट को हाईजैक कर चुके हैं। फिर क्यों इंगेज कर रहे हो? देखिए, मेरी बात यह है कि गवर्नमेंट को स्टूडेंट्स के साथ सीजेपी के

17:39 सेपरेटली एंगेज करना चाहिए था। उन्हें या तो प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए थी या रेगुलर मन की बात अनाउंसमेंट करनी चाहिए थी या एक टाउन हॉल ऑर्गेनाइज करना चाहिए था। जहां अफेक्टेड स्टूडेंट्स और उनके फैमिलीज को इनवाइट किया जाता और उन्हें अश्योर किया जाता कि पेपर लीक्स कंप्लीटली खत्म करने के लिए एक प्रीडिटर्मिन टाइम फ्रेम में हम यह टजिबल स्टेप्स लेंगे। इससे स्टूडेंट्स और उनके फैमिलीज की बहुत सारी जेन्युइन कंसर्न्स और फियर्स कम हो जाती और स्टूडेंट्स के दिमाग में गवर्नमेंट के बारे में बहुत सारा गुडविल भी जनरेट होता। स्टूडेंट्स खुद देखते कि उनकी कंसर्न्स को एड्रेस किया जा [संगीत] रहा है, सुना जा रहा है। लेकिन इसके बजाय गवर्नमेंट ने जो किया है वो एक एक्सट्रीमली स्किसोफ्रेनिक स्ट्रेटजी है। पहले प्रोटेस्ट और स्टूडेंट्स को कंप्लीटली इग्नोर करने का डिसाइड किया। और फिर जब प्रोटेस्ट एंटीनेशनल एलिमेंट्स और अपोजिशन पार्टीज के साथ टीम अप कर लिया और मॉब बना के पार्लियामेंट पे मार्च करना शुरू कर दिया तब हम इनके साथ एंगेज करेंगे। भैया दिस सेट्स अ हॉरेबल एग्जांपल

18:26 और मैल कंटेंट्स और जितने भी एंटी नेशनल लोग हैं उनको परफेक्ट इंसेंटिव्स मिलते हैं। यह बेसिकली एक्सजेक्टली वही प्लेबुक है जो गवर्नमेंट ने फार्मर्स प्रोटेस्ट के दौरान किया था। जहां बेसिकली यह कहा गया था कि अगर आप नेशनल हाईवेज को महीनों तक ब्लॉक करेंगे और वायलेंट होने की धमकी देंगे तो अल्टीमेटली गवर्नमेंट प्रेशर में आ जाएगी और कानून वापस ले लेगी। ये गवर्नमेंट की तरफ से बहुत बुरा मैनेजमेंट था और वो इसी कंफ्यूज स्ट्रेटजी का रेपरकेकशन आज फेस कर रहे हैं। तो अब देखते हैं आगे गवर्नमेंट क्या करती है। लेकिन स्टूडेंट से मैं एक बात कहना चाहता हूं कि देखिए गवर्नमेंट पे आप प्रेशर बनाते रहिए, डालते रहिए धर्मेंद्र प्रधान की रेिग्नेशन मांगते रहिए और राधाकृष्णन कमेटी की रेकमेंडेशंस इंप्लीमेंट करने की मांग करते रहिए। राधाकृष्णन कमेटी 2024 में पेपर लीक्स की प्रॉब्लम एग्जामिन और सॉल्व करने के लिए क्रिएट की गई थी। उन्होंने 10001 रेकमेंडेशंस दी हैं जो पेपर लीक्स की प्रॉब्लम कंप्लीटली सॉल्व करने के लिए

19:12 इंप्लीमेंट करनी चाहिए। लेकिन प्लीज इन एंटीनेशनल एलिमेंट्स और अपोजिशन पॉलिटिकल पार्टीज के मैल कंटेंट से इनवॉल्व मत होइए। वह सिर्फ सड़कों पे जाके केओस क्रिएट करना चाहते हैं। वायलेंस इंस्टिगेट करना चाहते हैं ताकि गवर्नमेंट पे प्रेशर बने और गवर्नमेंट टॉप हो जाए। उनको आपकी परवाह नहीं है। उन्हें सड़कों पर वायलेंस क्रिएट करने से कोई प्रॉब्लम नहीं [संगीत] है। वो भैया जेल में जाएंगे। यह पॉलिटिकल पार्टी के लौंडे हैं। दो दिन में छूट जाएगी। आप स्टूडेंट्स हैं। आपका किसी पॉलिटिकल पार्टी से कोई कनेक्शन नहीं है। लेकिन आप जेल में जाएंगे तो आपको कौन छुड़ाएगा? इस बकवास के चक्कर में आपकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। प्लीज ट्राई योर बेस्ट कि अगर आप प्रोटेस्ट में जा रहे हैं तो यह प्रोटेस्ट नॉन वायलेंट ही रहें। अगर इन प्रोफेशनल प्रोटेस्टर्स को दंगा करना है तो इनको करने दीजिए। इनके साथ मत जुड़िए। पुलिस उनका ख्याल रख लेगी। स्टूडेंट्स को यह इंश्योर करना है कि उनकी प्रायोरिटीज गवर्नमेंट पे लीगल प्रेशर डालना है और यह मेक श्योर करना है कि उनकी इंटरेस्ट का ध्यान रखा जाए। बाकी मैं आपसे

19:59 पूछना चाहता हूं कि क्या आपको लगता है कि गवर्नमेंट ने इसको ठीक से हैंडल किया है? उन्होंने क्या गलती की है? और स्टूडेंट्स की प्रॉब्लम को फिक्स करने के लिए गवर्नमेंट को अगला स्टेप क्या लेना चाहिए? नीचे कमेंट सेक्शन में मुझे जरूर बताएं। बाकी गाइस आपसे अगले वीडियो में मुलाकात होगी और तब तक के लिए स्वस्थ रहें, सुखी रहें फिर मिलेंगे और आप सबको एक सेकंड प्रणाम।

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