0:00 अस्सलाम वालेकुम। दिस इस मोई पीरजादा इन वाशिंगटन यूनाइटेड स्टेट्स। आज 14 जून 2026 है। इतवार का दिन है। अब से चंद घंटे पहले एक बार फिर आजाद कश्मीर में राकोट के बाहर ईदगाह के मुकाम पे रेंजर्स ने आजाद कश्मीर के मुसाहरीन पे जिन्होंने धरना दिया हुआ था उनप फायरिंग कर दी। जब मैं इस वीक की रिसर्च कर रहा था अब से बहुत घंटे पहले तो मुझे बड़ी उम्मीद थी कि आज मैं बड़े पॉजिटिव नोट से इस वीक का आगाज़ करूंगा। बिकॉज़ अमेरिका के सरदार डोनल्ड ट्रंप मुसलसल ये क्लेम कर रहे हैं, दावा कर रहे हैं ट्रुथ सोशल के ऊपर। उनकी टीम भी कह रही है कि आज के दिन में जब यूरोप में सूरज तुल होगा तो जिनेवा में अमेरिका और ईरान के दरमियान में एक पीस एग्रीमेंट के ऊपर दस्तखत हो जाएंगे। उसके ऊपर साइन हो जाएंगे। मैं चाह रहा था कि यहां से मैं
0:45 अपने वीक का आगाज करूं। लेकिन प्यारे पाकिस्तान में रेंजर्स ने एक बार फिर आजाद कश्मीर में जहां गुजस्ता तीन दिन से लगता था एक अमन की सुरते हाल थी। वहां एक बार फिर रावलाकोट के ईदगाह के मुकाम पर मुजाहरीन के ऊपर फायरिंग की जिसमें कम से कम भी अब तक अगर आप देख तो तीन लोग खबर है कि जाबक हुए हैं और बहुत बड़ी तादाद में लोग जख्मी है। वैसे तो अगर आप कमिश्नर रावलाकोट सरदार वहीद खान साहब की स्टेटमेंट देखें जो बड़े कंट्रोल तरीके से एक सरकारी स्टेटमेंट इशू की गई है बीबीसी उर्दू में आप उसे देख सकते हैं। तो वहां ये दावा किया गया है कि राबलाकोट की पुलिस एंड लॉ इनफोर्समेंट इदारे जिसका इशारा रेंजर्स की तरफ है वो ईदगाह में पहुंचे जहां पे कोई 800 या 500 मुजाहरीन ने धरना दे रखा था उन्हें जगह खाली करने की कोशिश की गई लेकिन पुलिस को देखते ही पुलिस की
1:31 बख्तबंद गाड़ियां थी खुद अपनी स्टेटमेंट से पता चलता है कि रेंजर्स के पास बतरबंद गाड़ियां थी और ये उस किस्म की बख्तबंद गाड़ियां है जिसके बारे में मुसलसल आजाद कश्मीर के लोग बता रहे हैं जिनके ऊपर सब मशीन गंस और ऑटोमेटिक वेपन्स लगे हुए हैं। अंदाजा लगाएं कि ये पाकिस्तान है। ये पाकिस्तान के अंदरूनी एक सियासी मामला है। और वहां पर इस किस्म की बख्तबंद गाड़ियां इस्तेमाल की जा रही है जो किसी इंसर्जेंसी की जगह पे या जंग के किसी जगह पे आप जो है उसे इस्तेमाल कर सकते हैं। कितना मतलब रहम दिल किस्म की रियासत है पाकिस्तान की। रियासत हो तो मां की तरह की हो। बल उनका कहना ये है कि वहां पर मुजाहरीन ने रेंजर्स के ऊपर फायरिंग कर दी। लेकिन रेंजर्स क्योंकि बख्तरबंद गाड़ियों के अंदर थे। आर्म मोड पर्सनल कैरियर्स में थे। उनको कुछ नहीं हुआ। अल एक शख्स जो है वो बहुत ज्यादा जख्मी हो गया। ये एक बड़ा तरीका है ये बताने के लिए कि वायलेंस में
2:17 कैजुअल्टीज हुई है। डेथ्स हो सकती है। क्या आपने ये एडमिट कर लिया है कि फायरिंग हुई है। लोगों का कसूर था एक शख्स जो है वो बहुत ज्यादा जख्मी हो गया है। लेकिन मुझे बहुत ज्यादा शक है कि ये डेथ टॉल जो है ये बढ़ जाएगा। जब तक इसकी पिक्चर हमारे सामने और घंटों में क्लियर होगी और इसमें देर इसलिए लगती है कि आजाद कश्मीर में एक मुकम्मल न्यूज़ ब्लैक आउट है। बहुत से लोग कई कई घंटों के लिए इन कम्युनिकडो हो जाते हैं। वहां से कोई इमेज वहां से खबरें जो है वो बहुत मुश्किल से आती है। इसी वजह से बहुत सी खबरें जिन्हें हम डिस्कस करते हैं वो गैर मुस्तदका भी होती है। देखिए एक ट्रेडिशन था रवायती तौर पे कि जब सरकार बात करती थी तो सरकार की बात में सच्चाई होती थी। उसकी वजह ये है कि सरकारी मुलाजमीन अकाउंटेबल होते थे। उनकी अकाउंटेबिलिटी होती थी। सरकार झूठ नहीं बोल सकती थी। लेकिन पाकिस्तान ने हुकूमत
3:02 और सरकार ने इस पुराने जो एक एज ओल्ड ट्रेडिशन था इसको भी उन्होंने बिल्कुल खत्म कर दिया है। बिकॉज़ पाकिस्तान में जो सरकारी मुलाजमीन है जो अफसर है जो अफसरशाही है जो लोग पावर एक्सरसाइज करते हैं उनकी किसी भी किस्म की अकाउंटेबिलिटी नहीं है। इसका एक और मुजाहरा पंजाब में भी हुआ है। गुजस्ता 24 घंटे में जहां सीटीडी जो काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट है उसने किसी शहर में किसी सड़क के ऊपर एक बेचारी फैमिली पाकिस्तानी ओरिजन ऑस्ट्रेलिया से पाकिस्तान आई भी थी शादियों के लिए लोगों को मिलने के लिए वो किसी जगह पे मां-बाप अपने बच्चों के साथ खाना खाने के लिए गए वहां पे पता नहीं कोई डाकुओं की खबर थी क्या थी लेकिन सीटीडी ने जो ताकत के नशे में अंधाधुंध थे उन्होंने इन्हीं वालदैन की जो ऑस्ट्रेलियन फैमिली थी पाकिस्तानी उनके ऊपर फायर खोल दिया जिसके नतीजे में
3:49 उनकी आठ साल की बच्ची आनिया या अह जो है उसकी तो वही मौके पर डेथ हो गई बहुत से और लोग भी उस गाड़ी में जख्मी हुए अगर आप इस गाड़ी के इमेजज़ देखें जिससे आपको पता चलता है कि यहां कल्चर ऑफ़ अकाउंटेबिलिटी नहीं है। अगर सीटीडी से गलती हो भी गई तो एक दो गाड़ियों पे गोली चलती। कोई उसके टायर के ऊपर गोली चलती। गाड़ी को रोकने की कोशिश की जाती। अगर आप ये सफेद रंग की गाड़ी को देखें तो आप आसानी से देख सकते हैं कि इसके ऊपर सैकड़ों लगता है कि गोलियों के सुराख है। कम से कम आसानी से 100 के करीब आपको इसके ऊपर गोलियों के जो है ना पेनिट्रेशन पॉइंट्स जो है वो आपको नजर आएंगे। कमिंग बैक टू आजाद कश्मीर की सिचुएशन। ये कंटिन्यू किस्म की इस वक्त सिचुएशन है। अभी तक हमें ये क्लियर नहीं हो सका कि थर्सडे की रात को जब रावला कोर्ट में उमर कश्मीरी जो है उन्होंने एक
4:36 तकरीर की तो बहुत बड़ा क्राउड वहां पे था जैसे 80 हजार बताया गया लाख बताया गया 80 हजार बताया जा रहा था। वो क्राउड किधर चला गया? कोई मूवमेंट क्यों ना हो सकी? उसके बाद क्या हुआ? ये कोई नेगोशिएशन हो गई। कोई डील थी इनकी लीडरशिप के दरमियान में। बहरहाल धरने जारी रहे। थर्सडे, फ्राइडे, सैटरडे धरने जारी रहे। और अब आप देख रहे हैं कि एक बार फिर एक वायलेंस का प्रोसेस जो है वो शुरू हो गया। एक स्पेकुलेशन मुसलसल हो रही है कि जो कुछ आजाद कश्मीर में हुआ क्या ये महज एक एक्ट ऑफ़ मैडनेस है और देयर इज़ अ मेथड टू दिस मैडनेस। यानी इसके पीछे कोई हिकमते अमली है या महज एक गुस्सा है कि इन लोगों ने हमें आंख दिखाई कैसे है? पूरे पाकिस्तान में कोई खड़ा नहीं हो सकता। कोई हमसे मुतालबा नहीं कर सकता। इन कश्मीरियों की कैसे हिम्मत हो गई कि हमसे मुतालबे करें। मुजफराबाद जाके कहे कि बंद कर दे। तो हमने इनको सीधा कर दिया। तो एक तो ये है कि ये मैडनेस ही मैडनेस है
5:21 और दूसरा ये है कि इसमें कोई मेथड है। अच्छा जो मैडनेस मैडनेस थ्यरी है उसको अगर आप देखें उसको थोड़ा सा क्रिटिसाइज इवैलुएट करें कि अगर ये लोग मार्श ऑन करते हुए कश्मीरी जो है जो कश्मीर के मुख्तलिफ डिस्ट्रिक्ट से इकट्ठे हुए चेक सवारी डोडियाल मीरपुर कोटली धीर पता नहीं कहां-कहां से आते हैं रावलाकोट से लोगों को लेकर अगर ये मुजफराबाद चले भी जाते ये एक दिन के लिए मुजफराबाद को बंद भी कर देते तो कौन सी कयामत आ जानी थी कौन सी कोई हुकूमत ने गिर जाना था अभी पता नहीं चंद साल पहले मुझे याद है कि जो पंजाब के फार्मर्स थे नॉर्थ ऑफ इंडिया से उन्होंने आके दिल्ली बंद कर दिया। वो अपने साथ अपने ट्रैक्टर ले आए। ठीक-ठाक वायलेंस हुई। लेकिन हुकूमत ने इन द एंड उनसे नेगोशिएट किया और हुकूमत का वहां पर एक स्टैंड था एग्रीकल्चर पॉलिसी के ऊपर जिससे वो पीछे नहीं हटे। लेकिन उन्होंने उनसे नेगोशिएट किया। कुछ बात मानी कुछ नहीं मानी। और यही
6:07 वजह है कि हिंदुस्तान के प्राइम मिनिस्टर जो है नरेंद्र मोदी जब अमेरिका से नेगोशिएशन थी एग्रीकल्चर पॉलिसी की तो बड़े सेंसिटिव हैं। आपने अक्सर ये सुना होगा। आपने ये देखा होगा। खबरों में देखा होगा, पढ़ा होगा। शायद मैंने भी अपने वॉग्स में जिक्र किया होगा कि नरेंद्र मोदी बार-बार ये कहते थे कि वो फार्मर के इंटरेस्ट को पसेप नहीं डाल सकते। बिकॉज़ जब फार्मर्स ने प्रोटेस्ट किया तो हिंदुस्तान को उसे खड़े होके सुनना पड़ा, देखना पड़ा। फार्मर्स ने हिंदुस्तान की सड़के बंद कर दी। ये है पिटिकल अकाउंटेबिलिटी का कल्चर। जहां मुख्तलिफ कम्युनिटीज अपने अपने इंटरेस्ट के लिए बाहर निकलते हैं। बदकिस्मती से पाकिस्तान में हर चीज का जवाब जो है वो गोली से दिया जाता है और डिमांड जो है वो नहीं मानी जाती। अब जो दूसरी तरफ एक स्पेकुलेशन हो रही है कि इसके पीछे क्या कोई इनकी लार्जर हिकमते अमली है कश्मीर में मुसलसल क्या ये कश्मीर की सियासी सुरते हाल को बदलना चाहते हैं
6:52 क्या ये कश्मीर को पाकिस्तान प्रॉपर में इंटेग्रेट करना चाहते हैं ये बहुत बड़ा सब्जेक्ट है मैंने इस बहुत रिसर्च की है मेरी कोशिश होगी कि इसके ऊपर मैं लिखू भी और मैं आपसे एक अलग से एक वीग जो है एक आध दिन में उसके हवाले से शेयर करूं लेकिन ज़हन में रखिए कि चंद दिन पहले ही दो दिन पहले ये जो स्पेकुलेशन थ्योरी है इसमें उस वक्त बहुत वजन पड़ा जब हिंदुस्तान के जो वाटर मिनिस्टर है जलशक्ति शक्ति या समथिंग उनकी मिनिस्ट्री को कहते हैं। बकायदा एक वाटर मिनिस्ट्री है हिंदुस्तान में। तो जो वाटर मिनिस्टर थे उन्होंने कहीं क्वेश्चन आंसर का जवाब देते हुए कहा कि प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी का विज़न ये है कि जब हमारा ये तमाम स्ट्रक्चर कंप्लीट हो जाएगा तो और ये जो इंडस वाटर ट्रीटी को हमने होल्ड हेल्ड एंड अगेंस किया है तो एक बूंद एक कतरा पानी भी नीचे पाकिस्तान के पास नहीं जा सकेगा। तो मैंने रिसर्च की कि इसमें फिर दिक्कत है क्या? मतलब क्या ऐसा
7:40 कोई इंफ्रास्ट्रक्चर अगर हिंदुस्तान बना रहा है तो ये स्ट्रक्चर कब तक मुकम्मल होगा जब उसको मुसलसल यानी मुकम्मल तौर पे रोकने की सिचुएशन में आ जाएंगे। तो मुझे रिसर्च करके ये पता चला कि तकरीबन 2030 अब से चार बरस के बाद हिंदुस्तान जो तेजी से स्ट्रक्चर बना रहा है जिसमें बड़ी-बड़ी नहरे और कैनाल्स बना रहे हैं जिसमें इंडस का जो बेसन है चनाब को से पानी निकाल के 100-100 किलोमीटर की नहरों के जरिए उसको बयास में डाला जा रहा है ताकि उसको जम्मू एंड कश्मीर और हिंदुस्तानी पंजाब में उस पानी को डिस्ट्रीब्यूट किया जा सके। उसके अलावा जो उनके पुराने डैम थे जैसे सलाल था जैसे रतल है जिन में सिल्ट आ चुकी थी जिसमें उनकी गहराई में कमी आ चुकी थी। उनकी जो पोंडेज एंड वाटर रिजवायरेबिलिटी कम हो चुकी थी उसकी डिसिल्टिंग का प्रोसेस बहुत तेजी से जारी है। पहले ये डिसिल्टिंग नहीं कर पाते थे। बिकॉज़ जब भी ये ऐसा
8:25 प्रोसेस शुरू करते थे इनिशिएटिव लेते थे तो पाकिस्तान इंडस वाटर ट्रीटी के तहत उसप ऑब्जेक्शन रे करता था। हिंदुस्तान को रोकना पड़ता था। अब पाकिस्तान ऑब्जेक्शन एक छोड़ 10 दफा रे कर रहा है। लेकिन जाहिर है हिंदुस्तान का जवाब ये होता है कि हम किसी भी आर्बिट्रेशन को तस्लीम नहीं करते और इंडस वाटर ट्रीटी सस्पेंडेड है और उतनी देर तक सस्पेंडेड रहेगी जब तक पाकिस्तान एक वेरीफायबल मैकेनिज्म के जरिए मैकेनिज्म देखिए एक वेरीिफायबल तरीके से एक मैकेनिज्म के जरिए ये साबित नहीं करेगा कि उस कि पाकिस्तानी कश्मीर से पाकिस्तानी साइड से हिंदुस्तान के खिलाफ दहशतगर्दी जो है वो बंद होगी। अब पाकिस्तान की अब तक इसमें अप्रोच क्या है? एक तो अप्रोच ये है कि मसल कहा जा रहा है कि हम डैम्स को तबाह कर देंगे। हमारे F16 जाएंगे और दो चार रॉकेट के बम शाम मारेंगे और डैम जो है वो डिस्ट्रॉय हो जाएंगे। लेकिन प्रैक्टिकली और जाहिर है कि ये कोई प्रैक्टिकल ऑप्शन
9:10 नहीं है। मेरा ख्याल है कोई बहुत समझाने की जरूरत नहीं है। मैं जो एक इस पे डिटेल अलग से वीक करूंगा एक्सप्लेनर वी लॉग। मैं सोच रहा हूं कि अपने एक्सप्लेनर वी लॉग्स का नाम मैं इंफोलॉग्स रख दूं। तो मैं जो इंफोग स्ट्रोक एक्सप्लेनर वी लॉग करूंगा। मैं एक्सप्लेन करूंगा कि क्यों पाकिस्तान के पास इस किस्म की कोई कैपेबिलिटी नहीं है इन टर्म्स ऑफ़ वेपन सिस्टम कि हिंदुस्तान के ये बड़े-बड़े कंक्रीट फील्ड डैम जो चट्टानों में और पहाड़ों में बनाए गए हैं इनको पाकिस्तान तोड़ सके और अगर तोड़ भी सकता फॉरेंस उसके पास बंकर बस्टर होते उसकी एयरफोर्स वहां तक पेनिट्रेट भी कर सकती तो क्यों ये एक प्रैक्टिकल ऑप्शन नहीं है प्रैक्टिकली पाकिस्तान इस स्टेज पे क्या कर रहा है पाकिस्तान ये कर रहा है कि वो मुसलसल वर्ल्ड बैंक और यूनाइटेड नेशन के जितने भी ज़ली इदारे हैं और ऑर्बिट्रेशन पैनल्स है वहां से स्ट्रांग स्पीकिंग डिसीजंस हासिल कर रहा है हिंदुस्तान के ऊपर मोरल प्रेशर एक्सरसाइज
9:57 करने के लिए। लेकिन हकीकत ये है कि किसी भी किस्म का कोई भी इंटरनेशनल कोर्ट या आर्बिट्रेशन या कोई हुकूमत दुनिया में ऐसी नहीं है जो हिंदुस्तान के साइज के बड़े साइज के एक मुल्क को मजबूर कर सके। वैसे भी हमने देखा है कि कोई भी मुल्क अगर स्टैंड ले लेता है तो उसको मजबूर करना बड़ा मुश्किल हो जाता है। खासकर की जो इकोनमिकली इंडिपेंडेंट कंट्रीज होते हैं। तो हिंदुस्तान को कौन समझाएगा कि भ आप बात मान ले किसी ट्रिब्यूनल की। लेकिन एट द सेम टाइम पाकिस्तान के बैक ऑफ द माइंड में ये भी है कि वो एक रबस्ट एग्रेसिव डिप्लोमेसी कर सकते हैं चाइना के जरिए और चाइना जो है वो एक अपर रिपेरियन है जो ब्रह्मपुत्र रिवर जो है वो हिंदुस्तान ओरिजिनेट होता है फिर चीन में चला जाता है फिर चीन से वापस आता है तो वहां से चीन जो है वो एक रूबस्ट अग्रेसिव डिप्लोमेसी करके हिंदुस्तान को ये बाबर करवा सकता है कि आपको पाकिस्तान के साथ ये नहीं करना चाहिए
10:44 लेकिन अगर हिंदुस्तान के डैम इतनी तेजी से बनते चले जाते हैं कैनाल सिस्टम खड़ा हो जाता है। उसप बिलियंस ऑफ़ डॉलर्स लग जाते हैं। डैम की डिसिल्टिंग हो जाती है और 2030 तक कुछ नहीं होता और उनका सुपर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा हो जाता है। तो वो उस स्टेज पे पानी रोके ना भी वो स्ट्रक्चर ऐसा उनके पास आएगा कि बटन दबाते ही वो पानी रोक सकते होंगे। उसकी ह्यूज सिग्निफिकेंस होंगी पाकिस्तान के एग्रीकल्चर के लिए, पाकिस्तान के वाटर टेबल के लिए, पाकिस्तान की इकॉनमी के लिए, पाकिस्तान का पूरा जो फ्यूचर है, जो रोजगार है उसके लिए और ये वो वजह है कि जो स्पेकुलेटिव लोग हैं जो स्पेकुलेशन थ्योरी है वो ये कहती है कि कश्मीर के स्टेटस को बदलने की यहां पर एक प्लानिंग है। ऐसे हालात पैदा कर दिए गए हैं। अब इलेक्शन नहीं होंगे जो होने थे जुलाई के आखिर में इलेक्शन नहीं होंगे। उसके बाद मेरा ख्याल
11:29 है कि प्रेसिडेंट को फारग किया जाएगा। बिकॉज़ ये जो मौजूदा सदर है सरदार लतीफ मेरा ख्याल जिनका नाम है इन्होंने तो चंद दिन पहले ये साबित कर दिया कि मैं इस काबिल ही नहीं कि मैं यहां का सदर रहूं। जब उन्होंने कहा कि ये जो कालादम करार देने का फैसला किया है जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी को ये दस्तखत मेरे नहीं है। ये जो लोगों के सर के ऊपर हेड मनी रखी गई है 10 मिलियन रुपए की ये मेरी नहीं है। उन्होंने साबित कर दिया कि मैं बड़ा गैर जिम्मेदार किस्म का एक सिविलियन हूं। मेरे ऊपर ये ढांचा ट्रस्ट नहीं कर सकता। इसका मतलब है कि ये ऐन मुमकिन है कि ये जो राठौर साहब की हुकूमत है प्राइम मिनिस्टरशिप की। बाज लोग समझते हैं ये कंटिन्यू करेगी। वो भी मूछों को दाव देके बार-बार ऐसे ही लगाते हैं कि शायद हमेशा वो प्राइम मिनिस्टर रहेंगे। लेकिन ज्यादा पॉसिबिलिटी है कि यहां पर एक प्रेसिडेंशियल सिस्टम आए। एक नए प्रेसिडेंट को लाया जाए। जो मौजूदा सदर है उनको हटाया जाए और उसकी जगह यहां पर एक रिटायर्ड फौजी जनल साहब जो आजाद कश्मीर से
12:16 पुरपुर से कहीं से उनका ताल्लुक होगा। ज्यादातर पुंची ही है जो फौज में सीनियर अफसर है रिटायर्ड। तो उसको किसी को लगाया जाएगा और साथ ही एक सुरते हाल ये रहेगी कि हिंदुस्तान की तरफ से यहां पर एक डिस्टेबलाइज करने की कोशिश की जा रही है। इसलिए बड़ा सख्त जरूरी है कि आयरन हैंड से सुरते हाल का मुकाबला किया जाए और एक ऐसी नई सुरते हाल पैदा हो जाएगी जिसमें आजाद कश्मीर के सियासी मुस्तकबिल के हवाले से कोई भी फैसला जो है वो किया जा सकता है। वैसे भी इसे ज़हन में रखें। आप में से बहुत से लोग इससे वाकिफ नहीं होंगे कि अप्रैल 1949 में ही एक सीक्रेट एग्रीमेंट के जरिए आजाद कश्मीर की हुकूमत से गिलगित बल्तिस्तान को अलग कर लिया गया था। वरना ये सारा का सारा तकरीबन आप कह ले के 33,000 स्क्वायर माइल का जो टेरिटरी थी वो सारा का सारा आजाद कश्मीर था। आजाद कश्मीर
13:01 गिल्गित बल्तिस्तान एक टेरिटरी थी। ये एक इसकी लीगल एंटिटी थी। इसे अलग कर लिया गया। लेकिन वो सीक्रेट एग्रीमेंट कभी नहीं पता चला। वो 1993 में उस वक्त एक्सपोज हुआ जब गिल्गित बल्तिस्तान के लोग आजाद कश्मीर की हाई कोर्ट में मेरा ख्याल है सरदार अब्दुल मजीद मजीद मलिक साहब उस वक्त आजाद कश्मीर के हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे उनके पास गए और उन्होंने एक बहुत ही लैंडमार्क डिसजन किया जब उन्होंने उस सीक्रेट एग्रीमेंट को एक्सपोज किया और उन्होंने कहा कि ये जो सरदार इब्राहिम उस वक्त जब प्रेसिडेंट थे 1949 में उन्होंने जो एग्रीमेंट किया उनकी अपनी कोई रिप्रेजेंटेशन की हैसियत नहीं थी वो प्रोब्ली इलेक्टेड ही ठीक तरह से नहीं हुए हुए थे कोई इलेक्शन शायद हुए ही नहीं थे इसलिए उन्होंने कहा कि कोई सीक्रेट एग्रीमेंट वैलिड नहीं है और जम्मू और गिलगित बल्तिस्तान आजाद कश्मीर का और रियासत का जो महाराजा की रियासत थी उसका हिस्सा है। उसके बाद से मुसलसल इसके ऊपर
13:47 तब्दीलियां आती रही है और ये जो एक छोटा सा टुकड़ा स्टंप है 5000 स्क्वायर माइल का इसको रखा ही इसलिए गया है कि मसला कश्मीर को आपने जिंदा रखना है एस पर दी यूनाइटेड नेशन करारदा एंड ऑल दैट। लेकिन अब इसके हवाले से लग रहा है कि बहुत तेजी से सुरते हाल चेंज हो रही है। चीन फॉरेनस गिलगित बल्तिस्तान के बारे में चाइना का बहुत प्रेशर रहा है गुजस्ता चंद बरसों में कि उसे पाकिस्तान प्रॉपर का हिस्सा बनाया जाए। चीन ये सुरते हाल बिलकुल पसंद नहीं करता की उसने अगर किसी रीजन के अंदर डैम्स में इंफ्रास्ट्रक्चर में रोड नेटवर्क में बहुत ज्यादा पैसे लगाए हुए हैं इन्वेस्टमेंट की हुई है। तो उसका लीगल स्टेटस जो है वो दुनिया की नजर में और हिंदुस्तान की नजर में बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा कंट्रोवर्शियल हो। और इसी वजह से अगर हिंदुस्तान ने वाटर डिस्प्यूट में भी रोल प्ले करना है सॉरी चीन ने प्ले करना है तो चीन की इन रिटर्न सर्टन
14:32 रिक्वायरमेंट्स एंड एक्सपेक्टेशंस हैं पाकिस्तान से। ये मैंने एक व्यू आपके सामने रखा है। मैं किसी एक और वॉग में इसे ज्यादा फाइन ट्यून करने की मैं कोशिश करूंगा। अभी थोड़ा सा क्रूड ही है। अब आए गुजस्ता चंद दिनों से आपने देखा कि तीन चार दिनों से दो दिनों से पाकिस्तान के सोशल मीडिया पे बजट के हवाले से बड़ी डिस्कशन हुई कि कैसे सारे सूबों को डंडा दिया गया है। दबाया गया उनको पंजाब खैबर पख्ता और सिंध को कि भाई पैसे दो डिफेंस बजट के लिए उनसे पैसे निकाले गए हैं। सिर्फ बूचिस्तान की जान जो है उसमें गलबन बची है। बाकी सबको देने पड़े हैं। लेकिन जो मैंने देखा है कि अक्सर सोशल मीडिया में जहां बजट के हवाले से खासी तेजसतून डिस्कशन हुई है वहां पे बिग पिक्चर आपके सामने नहीं आई। बिगर पिक्चर ये देख कि पाकिस्तान का जो फेडरल बजट पेश किया गया रखा गया है सामने उसका टोटल साइज है अंदाजन 18 ट्रिलियन 18 खरब का ये बजट रखा गया है
15:19 यानी 18000 अरब का बजट रखा गया इसका सबसे बड़ा सिंगल आइटम जो है वो है डेप्ट रीपेमेंट्स यानी कर्जे जो लिए हुए हैं उन कर्जों को वापस करने के ऊपर जो खर्चा होगा इस बजट में वो तकरीबन 8000 अरब का है यानी 8 ट्रिलियन 8 आठ खरब जो है वो इस मत में है जो सेकंड बड़ा आइटम है वो डिफेंस जिसमें बजाहिरन तीन ट्रिलियन तीन खरब रुपए उसमें है जो 10 बिलियन डॉलर से थोड़े से ज्यादा बनते हैं। यह और बात है कि जब आप थोड़ा सा स्क्रैच करते हैं चीजों को तो आपको पता चलता है कि असल में जो पेंशन है वह भी तकरीबन 1000 यानी जो इस वक्त फेडरल गवर्नमेंट की पेंशन का साइज है हुजुम है वो तकरीबन 1100 कुछ अरब है जिसका 1 खरब और उसमें से 820 अरब जो है वो डिफेंस रिलेटेड
16:04 फौजी अफसरान की रिटायरमेंट के पेंशन के पैसे है इसका मतलब है कि एक अरब एक खरब आप उसमें और डाल दें तो इस वक्त डिफेंस बजेट का जो एक्चुअल साइज जो डिक्लेयर्ड एक्चुअल साइज है जो नजर आ रहा है वो तकरीबन चार खरब रुपया है और यह कुछ तकरीबन बन जाता है अगर आप इसको रेट ऑफ़ कन्वर्ज़ लगाएं जो भी डिपेंडिंग अपॉन यह 13 से 14 बिलियन डॉल का बनता है। टोटल जो पाकिस्तान का फेडरल बजट है वो 60 कहीं अगर कन्वर्ज़ डिपेंड करता है कि आप रेट ऑफ कन्वर्ज़ क्या अप्लाई करते हैं? वैसे सरकार ने लिखा है पाकिस्तान की कि हमारा रेट ऑफ़ कन्वर्ज़ $1 के 278 है। प्रैक्टिकली 270 से 72 से लेके 278 तक उसके हैं। तो उस हिसाब से अगर आप देखें तो ये टोटल बजट कहीं 64 बिलियन डॉल बनता है और कहीं ये 68 बिलियन डॉल का टोटल
16:52 पाकिस्तान का फेडरल बजट बनता है। अब इसमें एक बड़ी इंटरेस्टिंग चीज देखें कि जुम्मे के दिन में अमेरिका में स्टॉक मार्केट के अंदर जहां पर स्पेस एक्स के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग हुई है। तो एक ही दिन में spcex ने 2 खरब डॉलर से ज्यादा 2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा उसकी मालियत हो गई है। और ईलॉन मस्क जो है वो दुनिया के पहले ट्रिलियर बन गए हैं। एआई के कंपनी के ट्रिलियर बन गए हैं। और पाकिस्तान के हालात क्या है? पाकिस्तान के हालात ये है कि उसका फेडरल बजट जिसमें उसका डिफेंस डे रीपेमेंट्स उसकी सारी और भी चीजें हैं वो सारा का सारा जो है वो 64 बिलियन डॉलर का है। 1000 बिलियन डॉलर होंगे तो एक ट्रिलियन बनेगा। 2000 बिलियन डॉलर होंगे तो 2 ट्रिलियन बनेगा। एक अमेरिकन कंपनी जो है वो स्टॉक मार्केट के ऊपर एक ही दिन के
17:39 अंदर 2 ट्रिलियन डॉलर का से ज्यादा 2.1 या 2.3 ट्रिलियन डॉलर इकट्ठे करती है। इसका क्या मतलब है? मैं एक थोड़ा सा एक आइटम आपको और बता दूं कि इन तीनों चीजों को मैं इसके ऊपर आता हूं। ये तीनों आइटम्स को अगर आप इकट्ठा करें डिफेंस को उसके बाद डिफेंस को डेप्ट रीपेमेंट्स को और इसमें एक आखरी चीज ऐड कर ले कि चार ट्रिलियन रुपए से चार खरब से थोड़ा सा कम पाकिस्तान का डेवलपमेंट बजट है। तो ये मिलाजुला के बन जाता है। टोटल अगर 18 खरब का है तो ये 16 खरब तो ये तीन आइटम्स के बन जाते हैं। बाकी जो दो खरब है उसमें आपकी एजुकेशन भी आती है। उसमें आपका हेल्थ भी आता है। उसमें आपकी मिनिस्ट्रीज आ जाती है। उनकी तनख्वाएं आ जाती है। उसमें आपकी बहुत प्रेस्टीजियस मिनिस्ट्री फॉरेन अफेयर्स भी आ जाती है। आपके थिंक टैंक भी आते हैं। उसमें आपके प्राइम मिनिस्टर हाउस आपके प्रेसिडेंट हाउस भी आते हैं। और आप अंदाजा
18:25 लगा सकते हैं कि बेतहाशा फालतू पैसा खर्च होता होगा प्राइम मिनिस्टर की और उसके प्रेसिडेंट हाउस पे और जो बेचारा फॉरेन ऑफिस है जिसकी आप देख रहे हैं कि इंक्रीजिंगली स्टेटमेंट्स कमजोर से कमजोर मुनाफिकाना सी है। उसके ऊपर उसकी अपकी पे ट्रेनिंग पे एक्सपोज़र पे अब कम से कम पैसा बचता होगा फेडरल गवर्नमेंट के पास लगाने के लिए। ये जो सारी सुरते हाल है रुपए पैसे के फंड्स की कमी की जिसमें सूबों को बाजू में रोड़ के कहा गया है कि भ आप भी डिफेंस के लिए हमें पैसे वैसे दें। इससे आपको क्या पता चलता है? इससे आपको पता चलता है कि अब ये जो पाकिस्तान की रूलिंग इलट है जो ये रियासत चला रहे हैं इनका टोटल दारोमदार जो है वो आईएमएफ के ऊपर है। वर्ल्ड बैंक पे है। एशियन डेवलपमेंट बैंक पे है। यूके एड स्ट्रोक डिफिट के ऊपर है। अरब जो इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक है। उसके
19:10 अलावा जीएसपी प्लस जो इनको यूरोप ने स्टेटस दे रखा है जो ये एक्चुअली इनका बनता नहीं है। बिकॉज़ जो 27 कोविनेंट्स इन्होंने इंसानी हकूक के साइन किए हैं। वो अब मुझे कहने की भी जरूरत नहीं है कि ये खुलमख्ला जब मैं 2022 में ये कहता था चार साल पहले तो शायद लोगों को लगता था कि मैं बायस्ड हूं। लेकिन अब आपको खुल्लम खुला नजर आ रहा है कि ये उन इंसानी हक के कोवनेंट्स को बिल्कुल भी इम्लीमेंट नहीं करते कि खुलम खुल्ला गोली चलाते हैं, लोगों को मारते हैं, उठा लेते हैं, इकबा करते हैं। कोई लीगल प्रोसेस नहीं है, कोई कोर्ट नहीं है, कोई सुप्रीम कोर्ट नहीं है, कोई हाई कोर्ट नहीं है, कोई मीडिया फ्रीडम्स नहीं है। तो जाहिर है कि ये जीएसपी प्लस की रिक्वायरमेंट्स को पूरा नहीं करते। लेकिन मगरब के ये तमाम इंस्टीट्यूशन जो है वो इस रिजीम को सपोर्ट करते हैं। अब क्यों सपोर्ट करते हैं? क्योंकि हम सारे पाकिस्तानी जब पैदा होते हैं तो हमारे दिमाग में एक सिपाही की सोल्जर की चिप लगाते हैं और पीठ पे हमारे
19:55 एक स्टैंप लगाते हैं कि हम बेवकूफ रहेंगे सारी उम्र तो हमाराकि सिपाहियाना ज़हन है हमारे ज़हन में फौरन खतरा पैदा होता है टक टा करके कि दरअसल ये हमें डीनट्रलाइज करना चाहते हैं हमें एक ऐसी सिचुएशन पे लेके जा रहे हैं जहां हमें डी न्यूट्रलाइज कर देंगे बिकॉज़ हम सारे के सारे सोल्जर्स हैं। सारे एक सिपाहियाना ज़हन से सोचते हैं। हमारा ज़हन में सबसे बड़ा खतरा ये है कि हम डीनलाइज हो जाएंगे। हमारे हिस्से टुकड़े कर देंगे। हमारे जेहन में ये सवाल आता ही नहीं है कि मुमकिन है कि वेस्टर्न इंस्टिट्यूशन और वेस्टर्न गवर्नमेंट जो है वो पाकिस्तान को एक यूज़फुल न्यूसेंस भी समझते हैं इस ख्ते में हिंदुस्तान के खिलाफ मशस्ता को और सेंट्रल एशिया को रेगुलेट करने के लिए और हम एक न्यूसेंस यूज़फुल प्लेयर है और ये हमारी असल में इफादियत है हमें डी न्यूट्रलाइज करने में शायद वो कोई बहुत ज्यादा इंटरेस्टेड जो है वो नहीं है क्योंकि उनको लगता है कि हम उनके लिए कोई खतरा वगैरह जो है वो नहीं है। स्पेस एक्स के साथ मैंने आपको बड़ा
20:41 इसका इंटरेस्टिंग एक कंपैरिजन दिया। अब आए उस चीज के ऊपर जहां से मैं बात का आगाज करना चाहता था। वो था ईरान, अमेरिका, यूएस, ईरान जो डील आज एक्सपेक्टेड थी। अमेरिका के सरदार डॉल्ड ट्रंप एक से ज्यादा दफा कह चुके हैं। बहुत एक्साइटेड है। सोशल पे बार-बार वो कह रहे हैं। आज उनकी बर्थडे है। आज जो दिन शुरू हो रहा है अमेरिका में। ये अमेरिका के सरदार डॉनल्ड ट्रंप की 80वीं 80थ उनकी बर्थडे है। दुनिया भर से उनको पैगामात आ रहे हैं कि जनाब आप इतनी देर तक जिंदा रहे। कमाल आपने कर दिया। दुनिया का आपने इतना खूबसूरत नक्शा बना दिया। दुनिया आपके प्रेसिडेंट बनने के बाद दिन दुगनी और रात चुगनी जो है वो तरक्की कर रही है और वो चाहते हैं कि आज के दिन में उन्होंने डिक्लेअर कर दिया है कि उनके और ईरान के दरमियान में ये जो पीस का एग्रीमेंट है ये जिनेवा के अंदर मेरा यूरोप में साइन हो जाएगा और इसमें कुछ क्रेडिट पाकिस्तान और कतर को भी मिल रहा है गो की कम जिक्र हो रहा है इतना जितना की पाकिस्तान खुद कर रहा है उसका लेकिन है कि इन्होने बड़ा रोल जो है वो
21:28 प्ले किया अभी डील है क्या मोटा मोटा अभी तक तो चूंकि डील का ब्लैक एंड वाइट डॉक्यूमेंट इशू नहीं किया गया लेकिन उसके हवाले से जो स्पेकुलेशन है वो ये कि 60 दिन के लिए स्ट्रेट फॉर्म से ईरान खोल देगा अमेरिका फरी तौर पे अपना नेवल ब्लॉकेट खत्म कर देगा। ईरान के 24 बिलियन डॉलर के फंड्स जो फंसे हुए हैं मुख्तलिफ मुल्कों में वो दिए जाएंगे। कहां से देंगे? अमेरिका देगा कौन देगा ये क्लियर नहीं है। लेकिन साथ ही मुसलसल खबरें चल रही है कि गुजस्ता चंद दिनों में मुत्तहदा अरब इमारात और ईरान के दरमियान में भी बातचीत हुई। आईआरजीसी के एक डेलीगेशन ने विजिट किया यूएई को। फिर यूएई के कुछ की मिनिस्टर्स ने विजिट किया ईरान को और यूएई ने शायद तीन बिलियन डॉलर रिलीज भी कर दिए हैं। ये रोइटर्स की एक बहुत बड़ी स्टोरी थी जो तीन दो दिन पहले एक दिन पहले छपी थी और जिसको डिनाई कर दिया मुताहिदा अरब अमरात ने लेकिन रट्टर बजत है उस स्टोरी के
22:15 ऊपर वो कहते हैं कि तीन या चार यूएई के ऑफिशियल ने कन्फर्म किया कि कुछ पैसे यूएई जो है वो देगा इसी किस्म का एक अरेंजमेंट क़तर के साथ भी है। तो अगर और ये वजह इसकी है कि यूएई के अंदर और कतर के बक्स में फाइनेंसियल सिस्टम में ईरान का अपना पैसा जो है फंसा है तो उसे जो है वो फरी तौर पर रिलीज किया जाएगा। उसके अलावा भी ईरान को तेल इंटरनेशनल मार्केट्स में बगैर सेंश के बेचने की इजाजत होगी 60 दिन के लिए तो जो भी प्राइस मार्केट में चल रही होगी खा वो $ हो $10 हो ईरान उस पे बेचेगा। अदरवाइज ईरान को आपको पता है जब से उस पे सेंशंस है उसको डिस्काउंटेड बहुत सस्ता बेचना पड़ता है और चीन ने ईरान का सस्ता तेल खरीद खरीद के अपना जो रिजवायर है वो भरा हुआ है। लेकिन इन 60 दिनों के बाद इन 60 दिनों में ईरान पे सेंशंस कैसे खत्म होंगी? प्राइमरी सेक्शन, सेकेंडरी सेक्शन, न्यूक्लियर ईरान
23:01 कैसे उसमें कॉम्प्रोमाइज करेगा? न्यूक्लियर मटेरियल कैसे हवाले करेगा? उसका इजराइल को ये तवकको है कि वो अपना इंफ्रास्ट्रक्चर जो है सेंट्रीफ्यूज का वो हटा के उठा के अमेरिका के हवाले कर देगा। इन तमाम चीजों ने बाद में सेटल होना है। अब ये सब चीजें तो छप रही है लेकिन ईरान की तरफ से मुकम्मल खामोशी है। अमेरिका के अखबार रोइटर खबर एजेंसी सीएन वगैरह ये सब भरे हैं इस खबरों से इजराइल में मातम भी हो रहा है कि देखिए ये तो मतलब ईरान को बहुत फायदा हो गया है। मातम खुशी करने वालों में प्रोफेसर रॉबर्ट पेप जो है शिकागो यूनिवर्सिटी के अल्लाह समझ नहीं आती कि उनकी नेचर वो क्या करना चाहते हैं। वो बार-बार हर चीज को ऐसे प्रेजेंट करते हैं कि डॉनल्ड ट्रंप को शिकस्त हो गई। ईरान को बड़ा फायदा हो गया। ईरान बड़ा ताकतवर हो गया। अभी भी उन्होंने गुजस्ता चंद घंटों में इसी किस्म के ट्वीट्स किए हैं और जब भी मैं उनका ट्वीट देखता हूं तो मेरा दिल जो है थोड़ा सा बैठ जाता है कि ये इससे जो है वो डोनल्ड ट्रंप जो है ना
23:47 वो ए्बरेस फील करेंगे और ये अच्छी बात जो है वो नहीं है। बहरहाल ईरान के अंदर बड़ी टेंशन पाई जाती है। उसका पहला सिंपल ये है कि ईरान की अगर आप प्रेस टेलीविज़ की साइट देखें तो वहां से वहां पे इसका कोई जिक्र नहीं है कि आज कोई साइन फाइन जो है वो होने वाला है। रटर से आपको ये पता चलता है कि इस्माइल बकई जो है जो उनके स्पोक्सपर्सन है वो कह रहे हैं कि बहुत जल्दी डील हो जाएगी। क्योंकि दो दिन से ईरानी मुसलसल कह रहे हैं मतलब ईरान के फॉरेन मिनिस्टर की भी स्टेटमेंट चलती रही कि बहुत जल्दी डील हो जाएगी। वी आर वै क्लोज टू डील एंड ऑल दैट। लेकिन अब इस्माइल बकाई का कहना है कि डील आज तो नहीं हो रही। आज तो साइन नहीं होंगे संडे के दिन में लेकिन बहुत जल्दी हम उस स्टेज के ऊपर पहुंच जाएंगे। फिर हम मजीद तफसीलात शेयर करेंगे। ईरान के अखबारों के अंदर जो चीज का चर्चा किया जा रहा है वो ये है कि देखा ईरान ये मारका जीत गया। ईरान की फतह हो गई। इस कॉन्फ्लिक्ट के नतीजे में ईरान पहले से ज्यादा मजबूत होके वो इमर्ज कर
24:34 रहा है। किसी हद तक इसमें हकीकत भी है। लेकिन ईरान के बड़े मसाइल भी पैदा हुए है। तो इसका मतलब ये है कि इस वक्त ईरान अपनी जितने भी उसके पास प्रेस पब्लिकेशन साइट्स है उनको इंटरनल प्रोपेगेंडा के लिए नैरेटिव सेटिंग के लिए उनको इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां पे एक एक अजीब चीज ये भी हुई है जो मैंने इंटरनेशनल देखी है के कुछ मुजाहरे हुए हैं ईरान के फॉरेन मिनिस्टर डॉक्टर अब्बास सरची के खिलाफ जिसमें मुजाहरा करने वाले जो है वो ये समझते हैं कि जो डील की है डॉक्टर अब्बास सरची ने अमेरिका के साथ वो ईरान के इंटरेस्ट के मुनाफी है ईरान ने इतनी सैक्रिफाइस दी हमारे लीडर का क्या हुआ वो बार-बार तस्वीरें उन्होंने उठाई हुई है इमाम अली खामना की कि हमारा तो लीडर भी उन्होंने मार डाला हमारा लीडर शहीद है हमें क्या मिला इसमें से खास करके जब ये लग रहा है के कोई टोल नहीं होगा स्टेट ऑफ़ होमसर्स पे
25:19 क्योंकि ईरान का मीडिया ये कहता है कि स्टेट ऑफ़ होमर्स के ऊपर एक टोल होगा एक फी होगी लेकिन इंटरनेशनल अखबार अखबार ये कह रहे हैं कि कोई ऐसा टोल नहीं होगा। अब ईरान ने कुछ दिन पहले से ऐलान कर दिया था कि इमाम खमना का जो फ्यूनरल है उनको एक शहीद के तौर पे जो पूरा फ्यूनरल है वो तीन दिन उसकी रसूमात रहेंगी और वो 4 जुलाई को शुरू होगा। पांच दिन चलेगा। इनफैक्ट 9 जुलाई तक चलेगा। 4 जुलाई क्यों इसको सेलेक्ट किया गया? 4 जुलाई अमेरिका का इंडिपेंडेंस डे है। तो अमेरिका की इंडिपेंडेंस डे के साथ ये नेशनल डे है उसके साथ जोड़ के ईरान में इमाम खामनाई की रसुमात जो है वो की जा रही है। तो ये तो हो गई ईरान इसकी अब ये भी एक कंटिन्यू है। अब यू नेवर नो की अभी क्या होता है अगले चंद घंटों में। लेकिन अब तक की जो सुरते हाल है वो यही है कि ये डील हो जाएगी। मेरा ख्याल है कि सेंस ऑफ़ डायरेक्शन इसकी यही है कि अमेरिका और ईरान में डील होनी ही होनी है। उसके अब ब्लैक एंड वाइट का
26:06 हमने देखना है कि उसका उसका टैक्स जो है वो क्या होगा। एक इंटरेस्टिंग न्यूज़ आइटम जो मैंने देखा कि जापान में और जर्मनी के दरमियान में डिफेंस रिलेशनशिप में इाफा हो रहा है। दोनों मुल्क जो है बहुत तेजी से री आर्मामेंट की तरफ जा रहे हैं अपने आप को अपने डिफेंस बजट्स को बढ़ा रहे हैं। डिफेंस कैपेबिलिटी को बढ़ा रहे हैं और आपस में भी कोऑपरेट कर रहे हैं। अब ज़हन में रहे कि ये दोनों मुल्क हैं जो दूसरी जंग अज़ीम में एक तरफ इंपीरियल जापान और दूसरी तरफ नाज़ जर्मनी ये एलस थे और इन्होंने पूरी दुनिया को तबाह करने में बड़ा रोल प्ले किया। दोनों को सिकस हो गई अमेरिका के हाथ में। दोनों ने अनकंडीशनल सरेंडर किया। जर्मनी को तो खैर रशिया से और अमेरिका दोनों तरफ से प्रेशर था। लेकिन जापान के ऊपर अमेरिका ने दो न्यूक्लियर बम फेंके हिरशिमा में और नागासागी में और जापान ने अनकंडीशनल सरेंडर कर दिया। जिसके बाद जापान का जो मॉडर्न कॉन्स्टिट्यूशन है
26:53 जो बड़ा लिबरल सा है ये अमेरिका ने लिखा है। जापान का सारा ढांचा उसका सारा इंफ्रास्ट्रक्चर अमेरिका ने बनाया है। जापान किस सेंस में प्रोग्रेस करेगा किस शक्ल में जाएगा ये सब अमेरिका ने बनाया है। और जापान के अंदर ऐसी पार्टीज पैदा हो गई जिन्होंने कहा कि हम कभी दोबारा मिलिट्री नहीं होगी और उसकी फर्सेस का नाम स्पेशल डिफेंस फर्सेस रखा गया। लेकिन गुजस्ता चंद बरसों से अमेरिका ही इन दोनों मुल्कों को कह रहा है कि आपको अपने डिफेंस बजट बढ़ाएं। अपनी फौज की कैपेसिटी में बढ़ाएं और बढ़ाएं चीन के खिलाफ जापान के केस में बढ़ाएं रूस के खिलाफ यूरोप की यूरोप की डिफेंस के लिए और अब पेरिस में बहुत जल्द इस हफ्ते इनकी एक मीटिंग होगी जी7 के समिट के दरमियान में जहां इस हवाले से मजीद मामलात जो है तैर पाएंगे। अब पता नहीं इसका अंजाम क्या निकलेगा। बिकॉज़ मेरा ख्याल है कि दोनों बुनियादी तौर पे ये मैं एक ऐसी चीज कहने वाला हूं। आपको बड़ा इसमें झटका लगेगा। मेरे ख्याल है कि जर्मन
27:40 और जैपनीज जो है वो कहीं ज्यादा क्रूड है। हमारे से भी कहीं ज्यादा जालिम और क्रूड है। अगर आप इनकी हिस्ट्री देखें पिछले 1000 साल की हम जालिम लोग नहीं है। वैसे तो सारे ही जालिम है। अगर आप कहीं हिस्ट्री निकाल लें सीटीडी की हरकतें निकाल लें और चीजें निकाल लें जो कुछ हो रहा है पाकिस्तान में। लेकिन जुल्म जुल्म के अंदर भी अगर आप लेवल देख तो जापानी और जर्मन दोनों बड़े जालम है। और ये जो आपको जर्मन पुलिस सड़कों के ऊपर पेस्तीनियंस को या इवन जर्म्स को जो इजराइल के खिलाफ मुजाहरे करते हैं जिस तरह से उनको मारते पीटते नजर आती है। इससे जर्मन कौम के अंदर की जो फैशज़्म है और इनके अंदर का जो एक तशद्दुद का एलिमेंट है इनके अंदर का जो जानवर है वो आपको बड़ी अच्छी तरह से नजर आता है। आपने अगर जालमो जालमो का कंपैरिजन करना है तो मेरा ख्याल है कि गुस्ता 300 400 बरसों में जो सबसे कम जालिम थे वो इंग्लिश वो सबसे कम जालिम अंग्रेज थे। स्पैनिश भी बड़े जालिम थे। तुर्क बड़े जालिम
28:27 थे अपने जमाने में। अरब कम जालिम थे। अगर उनकी हिस्ट्री देख लेकिन ये दोनों जो है बड़े जालिम है। पता नहीं दोबारा अपनी रीअमेंट जब करेंगे तो उसका क्या नतीजा निकलेगा। अभी इतना ही फिर आपसे मुलाकात होती