0:00 कोई हजारों में एक चलता है। चलने वालों में कोई हजारों में कोई एक रास्ता तय करता नहीं तो लड़खड़ा के गिर जाता है मनोरंजन में। जब एक करोड़ नाम जप होता है तब तन स्थान की शुद्धि होती है। शरीर निष्पाप हो जाता है। एक करोड़ नाम जप करने पर। रजोगुण तमोगुण का नाश हो जाता है। हर समय शुद्ध सतोगुण की स्थिति रहती है। शुद्ध सतोगुण में हर समय भगवान का भजन होता है। एक करोड़ नाम जप में इतने लाभ होते हैं। शरीर निष्पाप हो जाता है। रजोगुण तमोगुण का नाश हो जाता है। सतोगुण की स्थिति रहती है। और आगे रोग होने वाले जितने पाप बीज है सब नष्ट हो जाते हैं। और जो रोग हो गया है उसके सहने की सामर्थ मिलती है। तत्काल
0:46 उसके अंदर भावनाओं का प्रवाह फूट पड़ता है और उन भावनाओं में वो डूबा रहता है और स्वप्न में बड़े बड़े देवता बड़े बड़े ऋषि मुनि बड़े बड़े संत भक्त ये मिलते हैं और वार्तालाप होता है। बिल्कुल यथार्थ जैसा लिखा है ऐसा ही है। अब जब इस तरह की स्थिति उसके होती है तो उसका अनुभव भजन में और गाढ़ होने लगता है। तो दो करोड़ भजन हुआ। जब दो करोड़ नाम जप हुआ तब स्थिति क्या हुई? दो करोड़ तक हो जाता जब जप का उपसख्यान दोष रहित अत्यंत शुद्ध हो जाता धन का स्थान
1:32 निर्धनता की पीड़ा से मिल जाता है निस्तार साधक के हित हो जाता है सुखमय सब संसार दैन्य दुख से देश में रहते जो अन्यत्र शीघ्र लौटकर वे निज ग्रह में हो जाते एकत्र वे दुहा दरिद्र उपद्रव हो जाते हैं शांत होती रहती है कुटुंब में सुख की वृद्धि नितांत शेष कहे मन मन में लेकर ऐसे
2:17 अनुभव के भाव आगे आगे अधिक वेग से चलो बढ़ाते पाव एक करोड़ नाम जप में तन शुद्ध हो गया रजोगुण तमोगुण नष्ट हो गया शुद्ध सतोगुण की स्थिति आ गई रोगों का बीज पाप नष्ट हो गया भावों का प्रवाह बढ़ा बड़े बड़े देवता संत स्वप्न में दर्शन देने लगे इनहीं अनुभव से आगे बढ़ा अब दो करोड़ संख्या पूरी हुई दो करोड़ संख्या पूरी होते ही उसके धन का अभाव जो था वो खत्म हो गया। एक मनुष्य के अंदर रहता है। मैं ऐश्वर्यवान बनू, धनवान बनू। भाव ही खत्म हो जाता है। और अगर धन चाहिए तो कह रहे निर्धनता की पीड़ा जो उसके अंदर
3:05 सता रही थी वो खत्म हो जाती है। उसके आवश्यकता से बढ़कर धन भगवान देने लगते हैं। जब दो करोड़ नाम जप माला दो माला से नहीं कि चेक आ गई कि नहीं। माला दो माला से नहीं। दो करोड़ नाम जप करने वाले साधक के अंदर से धन की चाह खत्म हो जाती है। भगवान दो प्रकार से चाह पूर्ण करते हैं। एक चाह हटा के अचा करते हैं और एक धन देकर के चाह से अचा कर देते हैं। दैन्यता दुख भटकना ये सब खत्म हो जाता है। दरिद्रता के जितने उपद्रव होते हैं सब खत्म हो जाता है। उसमें सुख ही सुख सुख ही सुख छा जाता है। जैसे दो करोड़ नाम जप करने वाले के हृदय से धन का अभाव हो जाता है। सारी अनुकूलताएं उसको घेर लेती है। सारे वैभव उसको घेर लेते हैं। जैसे समुद्र बिल्कुल
3:53 नहीं चाहता पर नदियां दौड़ती हुई समुद्र में अपने आप समा जाती है। ऐसे ही दो करोड़ नाम जापक के पास अपने आप सुख समृद्धि घेर लेती है। आगे तीन कोटि भगवन नामों का जप होता जब पूर्ण तो स्थान पराक्रम का विशुद्ध तब हो जाता है तो जो दो करोड़ के बाद आगे बढ़ा तो अंतःकरण स्थान है परम पवित्र होने लगता है दो करोड़ नाम जप के बाद जब धन की चाह मिट गई एक करोड़ में सुना दो करोड़ में अब तीन करोड़ में पहले जो प्रतीत होते थे
4:40 कार्य अति असाध्य वे सब के सब हो जाते हैं शीघ्र सहज ही साध्य तीन करोड़ नाम जप करने वाले का हृदय पवित्र हुआ और जो असाध्य था कि काम नहीं छोड़ सकते क्रोध नहीं छोड़ सकते अरे ये तो बहुत बड़ी सब साध्य होने लगा जो चाहता है वो हो जाता है तीन करोड़ नाम जप करने वाले का ऐसा संसार उसे प्यार करने लगता है जब तीन करोड़ नाम हो जाता है जैसे सगा भाई अपने सगे भाई से प्यार करता है और उससे भी घनिष्ठ पूरा संसार उसे प्यार से देखता है जिसके तीन करोड़ नाम रूपी धन हो जाता है शेष कहे मन में लेकर ऐसे अनुभव के भाव आगे
5:26 आगे अधिक वेग से चलो बढ़ाते पांव अब चार कोटि जप से होती है सुख स्थान की शुद्धि फिर तो बाधित किसी त्रास से हो न कभी मन बुद्धि चार करोड़ जब नाम हुए तो सुख स्थान कौन है हृदय हृदय में सुख क्या है भगवदानंद अब उसके अंदर भगवनंद का हुआ चार करोड़ नाम जब से अब मान अपमान लाभ हानि दुख सुख द्वंद जितने इनका कोई प्रभाव भाव उसके हृदय में नहीं पड़ता। चार करोड़ नाम जापक के हृदय में प्राणी को नित्यत्व बोध का सुख मिलता भरपूर। कायिक वाचिक मानसिक सब दुख हो जाते दूर।
6:15 शेष कहे मन में लेकर ऐसे अनुभव के भाव। आगे आगे अधिक वेग से चलो बढ़ाते पाव। जब चार करोड़ नाम जप होता है तब हृदय एकदम परम पवित्र कोई भी बाधा उसे स्पर्श नहीं कर सकती लौकिक पारलौकिक बाहरी भीतरी कोई भी बाधा अबाद स्थिति चार करोड़ में और उसे अपने नित्य स्वरूप का बोध हो जाता है मैं नित्य हूं शरीर संसार अनित्य है। वेदांत नहीं पढ़ना पड़ा। चार करोड़ नाम जप से उसको ये बोध होने लगा। प्राणी को नित्यत्व बोध का सुख मिलता भरपूर कायिक वाचिक मानसिक सब दुख दूर हो गए शरीर निर्विकार मन
7:03 निर्विकार वाणी विकार रहित आनंदमय जीवन चार करोड़ नाम जप स्वरूप का बोध और निर्विकार स्थिति पांच करोड़ पूर्ण हो जाता है जब जप का मान परम शुद्ध होता है ततक्षण शुद्ध विद्या का स्थान अब उसके अंदर अपार ज्ञान की मृत्यु उदय हो गई। पांच करोड़ नाम जप में जब पांच करोड़ नाम जप किया तो विद्या का प्रादुर्भाव हो गया। जो शास्त्रों में लिखा है उसकी वाणी से निकलेगा। अगर वो संसार चाहता है जो चाहेगा पांच करोड़ नाम जप में पुत्रहीन पुत्रवान हो जाएगा। आयुषवान हो जाएगा। अगर जिसकी आयु है मूर्ख
7:51 मनुष्य है तो बहुत विद्वान शास्त्रों का हो जाएगा। कोई उससे द्वेष करता है तो उसके सामने घुटने टेक बहुत से लाभ उसके पांच करोड़ नाम जप करने चार करोड़ में स्वरूप बोध हो गया था। पांच करोड़ में जो चाहे तो चाह ही नहीं रह जाती स्वरूप बोध के बाद लेकिन अगर फिर भी आवश्यकता है तो जो चाहे वो प्राप्त हो जाता है छ करोड़ जप से कट जाते स्थान के कष्ट बाह्य और कामादिक आंतरिक बैरी होते नष्ट छ करोड़ नाम जप करते ही वो छह शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर लेता है काम क्रोध लोभ मोह मद मत्सर इन पर विजय स्वरूप बोधवान अपार धन संपत्ति स्वप्न में देव देवंतों के बड़े-बड़े
8:37 महापुरुषों के दर्शन अपार आनंद में छ करोड़ नाम जप करने पर दुशाध्य रोग असाध्य जो कभी नहीं ठीक होता संकल्प करें छ करोड़ नाम जप करके तो तत्काल ठीक हो जाए अभी जो भजनानंदी महात्मा इनके लिए कोई दुर्लभ वस्तु है क्या छ करोड़ नाम इस नाशवान शरीर के लिए लगावे ब्रह्मास्त्र का प्रयोग मच्छर मारने के लिए जब तक जीना है तब तक तू जी छ करोड़ नाम से भगवान की प्राप्ति करेगी से बोले होता है दुशाध्य रोग शीघ्र ही समूल विनाश पूर्ण आरोग्य देह करता है नित्य निवास सात करोड़ नामों के जप का जब पूर्ण होता विधान ही सात करोड़ नाम उसके जप हुए तो उससे
9:25 विशुद्ध होता है तक्षण जाया स्थान अब त्रिभुवन में कोई कामिनी उसे आकर्षित नहीं कर यहां से लेकर के अप्सरा देवोक ब्रह्मलोक तक की अब उसको आकर्षित नहीं कर सकती। परम पवित्र भाव उसके अंदर में जहां कामिनी का प्रवेश ही नहीं। भारी से भारी प्रतिकूलता भारी से भारी अनुकूलता भगवन नाम नहीं छुड़ा सकती। सात करोड़ नाम जापक की ऐसी स्थिति हो गई कि घनी भूत गाढ़ नाम में डूबा हुआ है। विश्व की अप्सराएं भी एक साथ उसको मोहित करना चाहे तो नहीं मोहित कर सकती है। एक दूसरे को आपस में देते मोद अमंग। बड़े-बड़े महाभागवतों का प्रकट में मिलन शुरू हो गया। जैसे देवर्षि नारद जी सनकादी जी वो उनसे बात करते हैं। वो आनंद मोद में
10:11 डूबा हुआ भगवान के आनंद मोद में उनको डूबता है और वह उनको डूबाते हैं। अब आठ कोटि जप से होता है शुद्ध मृत्यु का स्थान बाधा दूर अकाल मृत्यु की होती आयु महान पूर्ण आयु पाकर साधक नर साधन में हो लीन आत्मराज के सिंहासन पर हो जाता आसीन जब आठ करोड़ नाम जप किया तो मृत्यु का भय खत्म हो गया वैसे वो दीर्घायु होगा क्योंकि अकाल मृत्यु का नाश हो जाता है भगवान नाम जप करने से लेकिन शरीर से संबंध उसका नहीं रह गया। वो आत्म स्वरूप में स्थित आत्म सिंहासन पर हर समय विराजमान रहता है। आठ करोड़ जिसका नाम हो जाता है
10:56 जप हो जाता है वो पूर्ण आत्मज्ञानी महापुरुष शरीर संसार लोक व्यवहार काम क्रोध मोह मद मत्सर सबसे दूर निर्विकार परमात्म स्वरूप हो गया। नौ करोड़ जब पूरा हो जाता है जप का मान तब उससे अत्यंत शुद्ध होता धर्म स्थान सगुण रूप में मंत्र देवता का हो जाता साक्षात्कार। अब जो आप प्रेम धर्म में चले थे, भगवत धर्म में चले थे। अब वो शुद्ध साक्षात्कार का समय आ गया। नाम का अधिष्ठात देवता सामने प्रकट हो जाता है। जैसे राम राम तो राम प्रकट हो जाएंगे। राधा राधा तो राधा नाम जप करो। लिखा तो है। संख्या से अगर धुआंधार जप हो तो जब हो जाएंगे तो श्री जी अपने आप मिल जाएगी। गिनती कौन करे? आप
11:43 लोगों को गिनती आती हो तो गिनती कर लो अपने तो धुआंध के गिनो तुम जब हम रहे प्रभु से कहते हैं गिनो तुम जप हम रहे हम हम हमें पता है तुम बेईमानी नहीं करोगे कि संख्या में बेईमानी आप नहीं करोगे जपले में बेईमानी हम नहीं करेंगे धुआंधार जपो रात दिन अभी देखो ये सब हाय हाय इधर ये पीड़ा वो पीड़ा ये समस्या भगवान का नाम पकड़ के जपो देखो क्या क्या नहीं मिलता नाम रूपी धन को तो भूले हुए हो और इधर उधर बेईमानी छल कपट से चंद चंद रुपए चंद धन चंद सुख इनमें विश्राम मिलने वाला है। सगुण रूप से भगवान का साक्षात्कार आठ करोड़ नाम जप करने वाले को होता है। बोले भगवान कितने में मिलते हैं? तो संख्या में सुन लो आठ करोड़ में साक्षात सामने सियाराम राधेश्याम शिव पार्वती जो चाहोगे
12:29 वो खड़े हो जाएंगे। आठ करोड़ नाम जप करो। और वो वाणी का सत्य वक्ता हो जाता है। जो बोलेगा वही होगा। आठ करोड़ नाम जप करने वाला साधक जो बोलेगा जाओ तुम्हारा मंगल हो जाए मंगल हो जाए जाओ तुम्हें भगवान का साक्षात हो जाए ऐसे साक्षात्कार होता है जब नौ करोड़ नाम जप किए तब वो भगवत साक्षात्कार के योग्य हो गए उनकी वाणी सत्य हो गई और उनके सुख का वर्णन नहीं किया जा सकता नौ करोड़ नाम जापक के हृदय में जो सुख उदय हुआ उसका वर्णन नहीं किया जा सकता अब जब दस करोड़ जप का पूर्ण विधान हो जाता तो दोष रहित अत्यंत शुद्ध हो जाता कर्म स्थान अब संचित कर्म भस्म हो गए नवीन
13:18 क्रमाण भस्म हो गए प्रारब्ध भोगने की क्षमता आ गई कितने 10 करोड़ नाम जप में खत्म खेल अभी पहुंच रहा है परम मोक्ष की तरफ भगवत साक्षात्कार इसके बाद जो नाम जप हो रहा है उससे संचित प्रारब्ध सब क्रिया सब समाप्त भगवत दर्शन और नाम जप बढ़ा ये सब समाप्त उसके हृदय में इतना आनंद है इतना अपार आनंद क्योंकि भगवान का स्वरूप विराजमान है और अब जन्म होना नहीं है तो आप कहोगे भगवान के दर्शन के बाद जन्म होता है क्या बहुतों के लिए जैसे मुकुंद जी से कहा आपको अगला जन्म लेना पड़ेगा दुर्योधन ने भी भगवान के दर्शन किए बहुत लोगों ने दर्शन किए भगवत
14:03 दर्शन के बाद जब और भजन होता है। इसीलिए भाई जी ने कहा नाम मत छोड़ना भजन मत छोड़ना। अब उसके हृदय के कायिक मानसिक वाचिक जितने भी कर्म संचित क्रियामा प्रारब्ध सब खत्म। कर्म संस्कार सब खत्म। अब वो अपने भाव में भाव स्वरूप में आत्म साक्षात्कार अब इसके बाद भाव देह का प्रादुर्भाव। 10 करोड़ के बाद अरे डट के भजन 10 करोड़ 10 करोड़ कहने में जबान थक गई 10 करोड़ नाम जप ये है करने से और होने से जो कृपा से होता है एक बार जिन नाम लिए हित सोए अति दीन ताको संग न छाही
14:52 ध्रुव पनो कर ली हरिवंश प्रताप ही जानत है हरिवंश प्रबोध प्रमाणत है हरिवंश सर्वस्व है तनके सुख संपत्ति दंपति यहां करोड़ नहीं बता रहे यहां कह रहे हरिवंश प्रताप ही जानत है हरिवंश प्रबोध प्रमाणत है हरिवंश सर्वस्व है जिनके सुख संपत्ति दंपति जिनके अब जो 11 करोड़ जो 11 करोड़ का नाम जप करता है अब उसके लिए लाभ शब्द खत्म हो जाता है मतलब जितना जो कुछ लाभ है लौकिक पारलौकिक योगिक सब स्थितियां उसके सामने जागृत हो जाती है। ज्ञान की अष्ट भूमिकाएं, भक्ति की भूमिकाएं, योग की भूमिका वो जो चाहे 11 करोड़ जप करने वाला
15:37 सब प्रकार की रिद्धिया सिद्धिया सुख संपत्ति सब कुछ और जहां की लीला चाहे गोकुल की अयोध्या की काशी की सब लीलाएं उसके सामनेगी 11 करोड़ सब सिद्धिया सब आनंद सब लीला में प्रवेश 11 करोड़ के बाद और 12 करोड़ जब नाम जप कर लेता है तो उसके पास इतना खजाना हो जाता है कि भगवान उसके अधीन होकर पीछे पीछे डोलते हैं। और जब 13 करोड़ नाम जप कर लेता है तो किसी को भी मोक्ष दे सकता है। बस इतनी संख्या है। 13 करोड़ नाम जप कर ले तो किसी पापी आदमी को भी मोक्ष में सतर सांत
16:24 इसीलिए कह रहे हैं कि अपने हृदय रूपी महल पर हमने नाम का दीपक जलाया और ये दीपक बारा नाम का महल भया उजियार नाम का तेज विराजा शब्द किया प्रकाश मानसर ऊपर छाजा मन के ऊपर सवार हो गया नाम जपक देखो नाम बहुत बड़ी चीज है गोस्वामी जी ने कहा अब लो निशान अब हमें सबसे बड़ी चीज मिल गई पायो नाम चार
17:11 चिंतामणि उ करते न खसो अब लो नसानी अब एक सेकंड खाली नहीं जाने जो चाहिए हर नाम से मिलने नाम में सब कुछ विराजमान है तुम्हें धन चाहिए स्त्री चाहिए पुत्र चाहिए जो चाहिए सब मिल जाएगा पर ऐसे नहीं मिल जाएगा कि दो चार माला घुमाई ऐसे नहीं मिलेगा जब द हजार वर्ष तक करदम जी ने नाम जप किया तो देहुति जी दुल्हन मिली महाराज मन शतरूपा की पुत्री देहुति और पुत्र रूप में भगवान कपिल देव जी आए तो अपने 10 हजार वर्ष तो है ही नहीं 70 80 वर्ष की जीवन ही है इससे ज्यादा तो रह ही नहीं गई है तो हम नाम जप करें। नाम जप के द्वारा जो चाहेंगे वो प्राप्त हो जाएगा। कह रहे महल भया उजियार नाम का तेज विराजा शब्द किया प्रकाशमान सर ऊपर छाजा सबके ऊपर
18:01 मन जो है अपना अधिकार किए हुए है और मन के ऊपर अधिकार कर ले वही सच्चा मान प्राप्त करने वाला है नाम जापक मन के ऊपर अधिकार कर लेता है और जे भी मन के ऊपर अधिकार किया मन अधीन हुआ तो दसो दिशा भ शुद्ध बुद्ध भ निर्मल सांची छटी कुमत की गांठ सुमति प्रगट होए नाची जो बुद्धि प्रकृति के अधीन थी नाम जापक की परमात्मा में अधीन होने लगी जो कुमति से जड़ चैतन्य की गांठ पड़ गई थी वो छूट गई और सुमति प्रकट हो गई हर समय भगवान के नाम जापक को अन्य कोई साधन छूना भी नहीं पड़ता अपने आप वो दिव्य बोध को प्राप्त हो जाता है होत क्षति सो राग दाग त्रिगुण का छटा
18:46 सतोगुण रजोगुण तमोगुण तीनों गुणों से ऊपर हुआ अद्भुत राग रागनियों का आनंद यह अनहैद नाद है। उसमें बहुत प्रकार के वाद्य बजते रहते हैं। घंटा किसी ध्वनि के साथ मंत्र चल रहा है। कभी बंसी ध्वनि चल रही। एक अद्भुत अद्भुत अब ऐसे थोड़ी बंसी ध्वनि सुनाई देगी कि यहां घूम रहे हो। इधर उधर की बातें कर रहे हो। संसार का चिंतन कर रहे हो। बंसी ध्वनि सुनाई देगी। नहीं बंसी ध्वनि नहीं सुनाई देगी। त्रिगुण माया का नाटक ये दिखाई देगा। प्रपंच दिखाई देगा। ये बहुत लाभ है नाम जप करने में। जो चाहोगे प्राप्त हो जाएगा नाम जप करने से पलटू अंधियारा मिटी बाती दीनी तार दीपक बारा नाम का महल भया उजियार इसलिए
19:33 मैं आसक्त मना पार्थ भगवान में यदि आसक्त होना है तो एक नियम ले लो उठते बैठते चलते फिरते जैसे गरीब आदमी धन कमाना दिमाग में रख के वो मेहनत करता रहता है ऐसे नाम रूपी धन इकट्ठा कर लो जो चाहोगे प्राप्त हो जाएगा जो चाहोगे।