0:07 जय श्री स्टार्ट गुड मॉर्निंग यस गुड मॉर्निंग गुड मॉर्निंग आवर ऑर्गेनाइजर असिस्टेंट डायरेक्टर संजीव पांडे सर असिस्टेंट डायरेक्टर यूजीसी एमएमटीटीसी रानी दुर्गावती कॉलेज जबलपुर मध्य प्रदेश एंड ऑल द पार्टिसिपेंट आई वेलकम यू ऑल इन इन द रिफ्रेशर कोर्स ऑन एनवायरमेंटल स्टडीज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट। टुडे वी हैव विद अस प्रोफेसर राजेश कुमार दुबे सर एंड इट इज एन ऑनर फॉर मी टू इंट्रोड्यूस सर इन फ्रंट ऑफ यू ऑल द पार्टिसिपेंट। प्रोफेसर राजेश कुमार दुबे सर इज अ डिस्टिंग्विश्ड एकेडमिक लीडर एंड एनवायरमेंटल बायोटेक्नोलॉजिस्ट। करेंटली
0:55 सर्विंग एज प्रोफेसर डायरेक्टर ऑफ द यूजीसी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर एट जैन व्यास यूनिवर्सिटी जोधपुर राजस्थान विद ओवर 25 इयर्स ऑफ एक्सपीरियंस इन रिसर्च एकेडमिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड इंस्टीट्यूशनल मैनेजमेंट ही हैज़ हेल्ड सेवरल प्रेस्टीजियस पोजीशंस इंक्लूडिंग डायरेक्टर ऑफ द नेशनल रिसोर्स सेंटर बायोटेक्नोलॉजी प्रोफेसर एंड हेड ऑफ द बायोटेक्नोलॉजी जी एंड माइक्रोबायोलॉजी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑफ बायोडायनामिक टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टट्यूट एंड एडवाइजर टू मल्टीपल गवर्नमेंट बॉडीज सच एज काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी छत्तीसगढ़ एंड द डिपार्टमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर उत्तराखंड
1:41 प्रोफेसर दुबेस एक्सपर्टीज स्पंस एग्री बायोटेक ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड नैनो बायोटेक्नोलॉजी वि 10 पेटेंट्स टू ह क्रेडिट ही हैज़ पब्लिश्ड ओवर 150 रिसर्च पेपर 60 बुक चैप्टर्स एंड 30 बुक्स एंड हैज़ रिसीव्ड मोर देन 30 अवार्ड्स एट नेशनल एंड इंटरनेशनल लेवल। अ स्ट्रांग एडवोकेट ऑफ इनोवेशन इन हायर एजुकेशन। ही हैज़ सुपरवाइज 10 पीएचडी स्कॉलर्स कोऑर्डिनेटेड ओवर 100 ओरिएंटेशन एंड रिफ्रेशर कोर्सेज 120 वेबिनार्स एंड लेड द डेवलपमेंट ऑफ न्यूमरस मूक्स एंड स्वयं। ह लीडरशिप हैज कंट्रीब्यूटेड टू द सक्सेसफुल इंप्लीमेंटेशन ऑफ मोर देन 20 लाइवलीहुड
2:26 डेवलपमेंट प्रोजेक्ट एंड पार्टिसिपेशन इन आवर 575 कॉन्फ्रेंसेस एंड सेमिनार वर्ल्ड वाइड मेकिंग हिम अ वाइडली रेस्पेक्टेड फिगर इन एकेडमिया रिसर्च एंड पॉलिसी एडवाइज़री आई रिक्वेस्ट प्रोफेसर राजेश कुमार दुबे सर टू एनलाइटन अस विद हिज वर्ड्स ऑफ विज़डम वेलकम सर सर थैंक यू डॉक्टर जयश्री एंड नमस्कार संजीव एंड कांग्रेचुलेशन टू संजीव फॉर ऑर्गेनाइजिंग बैक टू बैक प्रोग्राम्स इन वर्चुअल मोड एंड वेलकम ऑल माय फ्रेंड्स डियर टीचर्स पार्टिसिपेंट्स ऑफ दिस रिप्रेशर कोर्स गुड मॉर्निंग एक्चुअली दिस टॉपिक इज
3:18 अपने माइक का ख्याल रखिए या प्लीज। सो वेलकम ऑल दी टीचर्स हु आर हियर ऑन आवर वर्चुअल प्लेटफार्म एंड एस डॉक्टर जयश्री इंट्रोड्यूस मी एंड यू नो शी स्पीक समथिंग मोर हाई व्हाटवर साइटिश रिटन शी जस्ट रीडिंग इट थैंक यू जय श्री फॉर योर गुड वर्ड्स डियर एंड वेलकम ऑल द टीचर्स हु आर हियर इन दिस वन ऑफ द बेस्ट टॉपिक ऑफ मॉडर्न वर्ल्ड दैट इज यू नो वेयर वी आर लिविंग वी ऑल मस्ट गेट रिफ्रेश दैट्स हाउ दिस कोर्स इज मल्टीडिसिप्लिनरी
4:04 टीचर फ्रॉम एनी सब्जेक्ट कैन जॉइ दिस प्रोग्राम लर्न वेयर वी आर एंड वेयर आवर जनरेशंस विल बी संजीव शुड आई गो इन इंग्लिश ओनली आर यू हैव टीचर्स फ्रॉम नॉर्थ इंडिया वी कैन गो इन मिक्स्ड या अनम्यूट योरसेल्फ संजीव सॉरी मिक्स चलेगा सर बिल्कुल हिंदी इंग्लिश हिंदी भी चलेगा बहुत अच्छे से ज्यादातर टीचर्स नॉर्थ इंडिया से है कि साउथ से भी है नर्थ नर्थ नर्थ से है ओके थैंक यू बहुत-बहुत धन्यवाद आपको राजस्थान से भी बहुत सारे हैं सर यस राजस्थान से भी बहुत से हैं
4:50 नंदाराम जी तो राजस्थान स्थान सही है। आपने जय श्री सर मैं नीलू चौहान मैंने भी जोधपुर से लास्ट मेरा रिफ्रेश किया था और सर आपकी स्माइल मैं हमेशा मिस करती थी। मतलब आपका जब भी हमारा जो ग्रुप बना हुआ है आप उसमें प्रोग्राम डालते थे सर्च करती थी रिफ्रेशर कोर्स के बारे में। आपका जो पॉजिटिव रिस्पांस रहा उसमें और सेम सर संजीव सर भी सेम टू सेम आपके जैसे स्माइलिंग बिल्कुल कूल काम हमें बहुत इजी गोइंग हमारा रिफ्रेशर कोर्स हो रहा है सर जैसे आप है वैसे ही संजीव जी सर भी हैं। थैंक यू नीलू थैंक यू सो मच एंड वेलकम यू ऑल फ्रॉम राजस्थान आल्सो बिकॉज़ आजकल हम
5:36 राजस्थान में ही हैं। तो राजस्थान से लगाव तो पूरे देश से है लेकिन राजस्थान थोड़ा ज्यादा है। एंड थैंक यू संजीव फॉर योर गुड कूल काम स्टाइल ऑफ कंडक्टिंग दिस वर्चुअल प्रोग्राम। वैसे भी हम अपने पर्यावरण को भी कूल काम के लिए ही पढ़ते हैं। पर्यावरण ही एक ऐसी चीज है जो हमको प्रकृति से जोड़ना सिखाती है और जो लोग जैसा अभी हमारी नीलू चौहान कह रही थी कि कूल काम एंड वेलकमोज्ड। सो थैंक यू ऑल। दैट दैट इज रियली ना टेक अवे फ्रॉम एनवायरनमेंट। पर्यावरण से हम यही सीखते हैं और हमारे सभी शिक्षक छुट्टी ले पर्यावरण
6:23 अपने पूरे परिवार को दिखाने के लिए घूमने जाते हैं। तो हम कहां जाते हैं? या तो हम कोई बड़े पहाड़ों पर जाते हैं। जहां पर हमें शुद्ध हवा मिलती है। इसीलिए हम जाते हैं। आजकल शहर के सदर बाजार में या चौराहों पे अच्छी हवा नहीं मिलती। तो हम अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबको ले घूमने कहीं जाते हैं। तो वो घूमना कोई समुद्र का किनारा हो सकता है। बीच एंड यू नो वी एंजॉय द ब्रीज ऑन द बीच कूल एयर। पोलशन फ्री एयर। वी गो टू सम माउंटेंस फॉर व्हाट? टू सी द ग्रीन थिंग्स। वहां हराभरा दिखता है। एक
7:10 साथ सारा हरा दिखता है तो बहुत अच्छा लगता है। वैसे भी हमारी भारतीय संस्कृत में कहा गया है कि यह सावन और भादो तो सब हरा भरा ही दिखता है। आजकल आज जिस महीने में आपका ये प्रोग्राम हो रहा है यहां तो सब कुछ हरा भरा ही दिखता है। आप जहां भी देखें एवरीथिंग इज ग्रीन। एंड ग्रीन के साथ आजकल इतने सारे क्लाउड ब्रस्ट अभी आपने पंजाब देखा थोड़ा दिन पहले आपने जंबू देखा उत्तराखंड में रोज समाचार आते हैं। इस बार तो हिमाचल का भी बहुत सारे समाचार आपके पास आई है। इवन हमारे राजस्थान से नंदाराम जी है। हमारे राजस्थान में भी अब बारिश ऐसी होती
7:56 है जैसा उत्तराखंड में होती रहती थी। हम मुंबई की बात करें, महानगरों की बात करें, दिल्ली की बात करें, गंगा, यमुना ऐसी नदियों की बात करें हमारे उत्तर भारत में है। तो हम सब शिक्षक जो भी यहां है सब यह जरूर महसूस करेंगे। इसको आप मानेंगे भी कि यस जो पहले हम सुनते थे कि जलवायु परिवर्तन कुछ होता है जो हम पहले पढ़ते थे कि क्लाइमेट चेंज होगा तो क्या-क्या होगा वो सब हम लोग अब प्रतिदिन अपने आंखों से देख सकते हैं कानों से सुन सकते हैं पढ़ सकते हैं समझ सकते हैं दैट्स व्हाई आई थिंक कि
8:47 यह जो विषय है आज का यह हमारे वर्तमान और हमारे भविष्य दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन हम इस विषय को किसी पत्रकार के दृष्टि से नहीं एक शिक्षक के नजरिए से आज सच चर्चा करेंगे कि हमारे शिक्षक क्या कर सकते हैं। अगर शिक्षक यह सोचेंगे कि नहीं यह तो पर्यावरण विभाग का काम है। यह तो कृषि विभाग का काम है। पौधे लगाना किसी और का काम है। हमारा काम तो शिक्षक का है। हम तो अपने कैंपस में जाएंगे, कॉलेज में जाएंगे, क्लास में जाएंगे
9:37 और थोड़ा बहुत नाम के लिए नीलू साल में एक बार, साल में दो बार, कम्युनिटी भी चले जाएंगे। कम्युनिटी में भी चले जाएंगे। कोई एनएसएस का प्रोग्राम होगा तो चले जाएंगे। नहीं तो अपने स्टूडेंट्स को लेके कुछ सेलिब्रेट कराएंगे। फोरम पूरा कराएंगे तो वो कैंपस, क्लास, कॉलेज, कम्युनिटी एक बार जाना इससे काम नहीं चलेगा। अब अब आप इसको बिल्कुल मत मानिए कि यह विभाग का काम है। कौन सा विभाग? पर्यावरण विभाग या जल विभाग या कृषि विभाग या ऊर्जा विभाग या आप ऐसे नाम बहुत सारे ले सकते हैं। अब
10:23 यह पर्यावरण उन विभागों का काम तो है ही है लेकिन उनसे पूरा नहीं होगा। जब तक हमारे शिक्षक इस काम में नहीं लगेंगे तब तक ज्ञान का प्रसार नहीं होगा। ज्ञान का प्रसार कहे तो पर्यावरण विभाग को आप देखते होंगे। सोशल फॉरेस्ट्री देखते होंगे। सामाजिक वन जैसे कार्यक्रम चलाते हैं। सड़क के किनारे कम्युनिटी लाइन पे जहां उनको जमीन दिख गई वहां पौधे भी लगाते हैं। हर साल लगाते हैं। जहां पे अभी लगाया है दोबारा फिर लगा देंगे आके। तीसरी बार फिर लगा देंगे। और आप अगर ध्यान से देखिए तो कभी उसमें पानी डालने वो नहीं
11:12 आते। जो पौधे लगाते हैं उसमें कभी खाद डालने नहीं आते। आप शिक्षकों की जिम्मेदारी इसमें क्यों है और क्या है? शिक्षक मामूली चीज नहीं होता। यह जो रिफ्रेशर कोर्स है यह केवल आपको याद दिलाने के लिए होता है। इसका नाम है रिफ्रेश जैसे आप अपने लैपटॉप पे कंप्यूटर पे जब बहुत देर तक काम कर लेते हैं तो उसमें एक रिफ्रेश बटन है उसको दबाते हैं और यह मानते हैं कि आपकी जो मशीन है यह थोड़ा रिफ्रेश हो गई। जैसे आप थक जाते हैं दिन भर एकेडमिक लोड से,
12:00 पढ़ाने से, काम करने से तो शाम को आप भी कुछ म्यूजिक सुनते होंगे, कुछ स्पोर्ट्स करते होंगे, कुछ रिलैक्स करते होंगे। वो भी आपके रिफ्रेश का ही तरीका है। ऐसे ही यह जो पर्यावरण है उसमें शिक्षक को पर्यावरण विभाग को भी समझाना है। कि खाली नर्सरी से लाके, खरीद के, बजट बढ़ा के, पौधे लगाने से काम नहीं चलेगा। इसमें पानी भी डालना पड़ेगा। यह तो सामान्य बात रही कि पौधों में पानी डालना है। वी ऑल नो वेरी वेल। टू कीप योर ग्रास ग्रीन यू मस्ट वाटर इट। पानी ही प्यार है घास का। अगर वो पड़ता
12:49 रहेगा तो घास हरी भरी रहेगी। यही है पर्यावरण। और यही नियम लागू है। चाहे वह घास एक महीने वाली हो। छ महीने वाली हो, साल भर वाला पौधा हो या कई वर्षों वाला पौधा हो जिसे हम कहते हैं ट्री पेनियल प्लांट्स। जो हमारे शिक्षक विज्ञान बैकग्राउंड से होंगे वो जानते हैं कि कितनी सारी हर्ब्स होती है, कितने शब्स होते हैं, कितने ट्रीज होते हैं और कितने ऐसे ट्रीज होते हैं जो बट वृक्ष बन जाते हैं। तो आप जो शिक्षक लोग हैं उनको हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति गुरु कहती है। गुरु क्यों कहती है? गुरु हमारे देश की परंपरा रही थी। हमारे देश में शिक्षक का
13:35 महत्व उतना नहीं है जितना गुरु का महत्व है, आचार्य का जो महत्व है। तो इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जब इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति में संजीव जी ये प्रोग्राम कर रहे हैं तो आप इसको रीडफाइन कर सकते हो। और रिीडफाइन क्या है? कि शिक्षक एक गुरु की तरह व्यवहार करें। शिक्षक एक आचार्य की तरह व्यवहार करें। हम लोग सैलरी पाते हैं। इंक्रीमेंट्स मिलता है। अभी जुलाई मिला होगा। जुलाई में हर साल मिलता है। हां सर बिल्कुल मिला है ना? हां जी। हां जी सर। यस रोहित। हां जी बिल्कुल सर मिला है। रोहित आप कहां से हो? सर मैं श्रीगंगानगर से हूं सर।
14:22 देखिए रोहित जी भी हमारे श्रीगंगा से हैं। हमारे उत्तर प्रदेश में तो गंगा है संजीव लेकिन हमारे राजस्थान में श्रीगंगा है। तो आप समझ सकते हैं कि राजस्थान के लोग पर्यावरण को और कितने सम्मान से देखते हैं। और देखिए श्री गंगानगर हमारे एकदम पाकिस्तान के बॉर्डर पे है। और वहां तक इंक्रीमेंट जलाई वाला मिल चुका है। तो रोहित अब पर्यावरण को देखते हुए जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधार हैं वो यह कहते हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को हम भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी कह सकते हैं। क्यों कह सकते हैं कि इस शिक्षा नीति में बहुत सारी भारतीयता की बात है और वो जितनी भी भारतीयता की बात है जैसे
15:11 आप सुने होंगे सभी शिक्षक सुने होंगे आईकेएस इंडियन नॉलेज सिस्टम इंडियन नॉलेज सिस्टम क्या है? इंडियन नॉलेज सिस्टम भारतीय ज्ञान परंपरा में सबसे पहले और सबसे ज्यादा हम अपने पर्यावरण की पूजा करते हैं। क्यों करते हैं? पर्यावरण हम सबको बचाता है। पर्यावरण मेक्स ऑल ऑफ अस हैप्पी। हमें खुश रखता है और बचाता है। हमें हैप्पीनेस देता है। खुश रखता है। जब हम घूमने जाते हैं पर्यावरण में पहाड़ों पे, नदियों के किनारे, समुद्र
15:57 के किनारे या ऐसे अनेक पर्यावरण के क्षेत्र हैं जहां आप अपने परिवार के साथ खुद जब बहुत आप अपने को रिफ्रेश करना चाहते हैं तो वहां जाते हैं। पर्यावरण हमें बचाता है। पर्यावरण हमें खुश रखता है। और उससे भी बड़ी बात है कि पर्यावरण हमें स्वस्थ रखता है। हमें एलोपैथ की दवाएं स्वस्थ नहीं रहती। वो तो इमरजेंसी की बात है। और आप सब जानते हैं कि आप कितने बड़े से बड़े कार्डियोलॉजिस्ट के पास चले जाइए। अगर किसी के दिल में बीमारी है कितने बड़े से बड़े यूरोलॉजिस्ट के साथ चले जाइए जिनको
16:43 किडनी की बीमारी है या कितने बड़े से बड़े न्यूरोलॉजिस्ट के पास चले जिनको दिमाग संबंधी तंत्रिका तन संबंधी बीमारियां है उनकी दवाएं आपको शत प्रतिशत फायदा नहीं करती कितने नुकसान करती है कभी-कभी 100% कभी-कभी 50% एंड 22% 20% तो यूनाइटेड नेशंस का कहना है कि प्रोसेस्ड प्रिजर्व केमिकल मेडिसिंस हमारे स्वास्थ्य को 22% तक नुकसान अवश्य करती है। तो आप खुद समझ लीजिए
17:29 कि कोई एक व्यक्ति है एक शिक्षक है जिसका सर दर्द करता है शाम को मान लो तो लोग कहते हैं भाई सेडोन पैरासिटामॉल या इस तरह के तमाम केमिकल्स है ड्रग्स है उसको आप खा लो आपका सर दर्द ठीक हो जाएगा बट ऐसे भी शिक्षक हैं जो दवा नहीं खाते वो थोड़ा आराम कर लेते हैं थोड़ा सो जाते हैं नींद ले लेते हैं घूम आते हैं कुछ और कर लेते हैं वो ठीक हो जाता दैट मींस कि योर बॉडी इटसेल्फ प्रिपेयर्स मेडिसिन फॉर योर हेल्दी हेल्थ। आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिए शरीर खुद ही इस प्रकार की मेडिसिंस बनाती है। कहां से
18:17 बनाती हैं? जब वो मिट्टी से आपकी माटी से जब आपका शरीर जुड़ा रहेगा तो आपका शरीर खुद ही दवा बनाएगा। यह आप महसूस करते होंगे। लेकिन इस पर नोबल प्राइज मिला है। इसको कहते हैं अंब्रेला इफेक्ट पर्यावरण में। यह रिफ्रेशर प्रोग्राम है तो आपको हम कुछ अपने लेकिन आप सब तो वीडियो बंद करके बैठे हुए हो। हमारे राजस्थान वाले वीडियो बंद कर देते हैं। देखो भाई ऐसा है कि अच्छी अच्छी बातें तभी हो पाएंगी या तो आप क्लास रूम में बैठिए।
19:04 जैसे आप शिक्षक हैं। देखो संध्या तो कार चला रही है। संध्या ऐसा ना करो आप। कार चलाते हुए प्रोग्राम मत देखो। आपके पास तो संध्या पहले से शेड्यूल है संजीव जी का। तो आपको अपने प्रोग्राम को ऐसा ही कस्टमाइज रखना चाहिए था कि सेशन के टाइम पे यू शुड बी एट सम प्लेस फ्रॉम वेयर यू कैन ज्वाइन द प्रोग्राम प्रॉपर्ली। ड्राइविंग कार ऑन द रोडली अगर आप दिल्ली में हो या हमारे भोपाल में हो तो आपको बिल्कुल नहीं करना चाहिए। एनीवे मैं आपसे कह रहा था कि देखो आप डिस्ट्रैक्ट मत करो दैट्स व्हाई यू विल नॉट गेट एवरीथिंग। सो इन दिस सेशन आई थिंक
19:49 देयर शुड बी सम गुड टेक अवे सम टेक अवे फ्रॉम योर होम फ्रॉम योर डिपार्टमेंट फॉर योर गुड करियर। सो व्हाट वी शुड अंडरस्टैंड? वी शुड अंडरस्टैंड द कांसेप्ट द रिलेशन बिटवीन ह्यूमन एंड एनवायरनमेंट। पर्यावरण और मानव के बीच के संबंध क्या है? वैसा आपको समझना चाहिए। आप एक बार समझ लेंगे। तो जो हमारी सुप्रीम कोर्ट कहती है सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश दिया 2002 में कि पर्यावरण शिक्षा को अनिवार्य कर दिया जाए। तो संजीव जी को बहुत-बहुत धन्यवाद कि उन्होंने रिप्रेशर कोर्स ही कर दिया उस विषय पे। पर्यावरण शिक्षा अनिवार्य क्यों कर दिया जाए? हमने आपको बताया कि पर्यावरण से हम हैं। पर्यावरण नहीं है तो हम नहीं हैं। फिर पर्यावरण हमें स्वास्थ्य देता
20:36 है। बहुत सारे ड्रग्स, दवाइयां सब पौधों से या प्रकृति के अन्य जीवों से बन के आती है। पर्यावरण से हमें सुख मिलता है। हम जाते हैं घूमने। लेकिन अभी जो बात हम लोग कर रहे थे बहुत महत्वपूर्ण थी कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति जिसको हम भारतीय शिक्षा नीति कहते हैं उसमें भारत के बहुत सारे ज्ञान और परंपराएं जोड़ दी गई है। उदाहरण के लिए हम सब अभी महाकुंभ सुना था। सुना था ना? हां सर इसी साल सुना और ये भी ये भी सुना
21:22 उसमें 66 करोड़ लोग गए थे वहां। जी सर जी सर हाईएस्ट 66 करोड़ लोग पहुंचे थे। 66 करोड़ लोग कहां गए? संगम पे गए। संगम पे तीन नदियां मिलती हैं। और हम लोग पर्यावरण के हो या अन्य विषय के शिक्षक हो। जैसे अभी जय श्री ने कहा कि हम बायोटेक्नोलॉजी से हैं। बायोटेक्नोलॉजी से लगा के इतिहास, भूगोल, गणित, विज्ञान किसी विषय में हम बड़ा सा बड़ा कॉन्फ्रेंस करते हैं। इंटरनेशनल करते हैं, नेशनल करते हैं। कितने लोग आते हैं उसमें? मुश्किल से दो3000 5000 मान लो
22:09 इंडियन साइंस कांग्रेस से बड़ा कोई प्रोग्राम अपने देश में नहीं होता। कितने टीचर्स आते हैं? रिसर्च स्कॉलर्स आते हैं। इंडस्ट्री के लोग आते हैं। और स्टेक होल्डर्स आते हैं। तमाम बच्चे आते हैं। उनका मॉडल लगाते हैं। कितने होते हैं मैक्सिमम? 5000 तो आप समझ सकते हो कि जब पर्यावरण की बात होती है, संगम की बात होती है और हमारी भारतीय परंपरा के अनुसार किसी नक्षत्र को भी उसमें जोड़ दिया जाता है। किसी तारे को भी जोड़ दिया जाता है। किसी ग्रह को जोड़ दिया जाता है। ग्रह और नक्षत्रों की गति को पढ़ लिया जाता है। समझ लिया जाता है। जिसको हम ज्योतिष कहते हैं। और यह कहा
22:55 जाता है कि इस तारीख को यह नक्षत्र होगा तो उसमें गंगा में स्नान करने से इतना पुण्य मिलेगा और वो पुण्य क्या करेगा? वो पुण्य आपके पूरे परिवार को स्वस्थ रखेगा। और हम लोगों को मोक्ष देगा। किसको देगा मोक्ष? जो वहां जाकर स्नान करेगा। ये आपकी किसी किताब में लिखा है क्या कि मोक्ष कैसे मिलता है? कहीं नहीं अध्यात्म में तो मेंशन है सर अध्यात्मी अच्छे कर्म से सर अच्छे कर्म से ऐसा है कि आप कई लोग हैं तो जिसको बोलना
23:41 हो प्लीज रेज योर हैंड सो दैट वी कैन बी वेरी सिस्टमेटिक एंड वी कैन बी इन अ क्लास रूम हम आपसे ये भी कह रहे थे कि वर्चुअल क्लास रूम जो है इसमें भी कुछ एथिक्स हैं। जैसे हम शिक्षक हैं। अपने क्लास में जाते हैं और वहां स्टूडेंट्स है तो हम उसको पढ़ा सकते हैं। कोई स्टूडेंट नहीं है तो हम उसको पढ़ा नहीं सकते। तो इस कार्यक्रम में कोई स्टूडेंट तो नहीं है। यू ऑल आर टीचर आई थिंक। लेकिन वर्चुअल प्लेटफार्म की भी एथिक्स है कि यू ऑल शुड बी प्रेजेंट इन वीडियो मोड। सो काइंडली स्विच ऑन योर वीडियो मेक अ गुड क्लास। आई थिंक टुडे आई एम ब्लेस्ड आल्सो हम भी बहुत सौभाग्यशाली है आप लोगों से
24:27 जुड़े हैं। तो यू कैन आल्सो अंडरस्टैंड द थिंग्स प्रॉपर्ली एंड देन यू कैन प्लान समथिंग फॉर व्हाट प्लान समथिंग फॉर योर गुड करियर टू सेव योर मदर अर्थ। वी ऑल टीचर शुड नॉट बी बिहाइंड ओनली आवर मदर बट वी ऑल हैव कॉमन मदर टू व्हाट वी कॉल मदर अर्थ तो अपनी पृथ्वी माता को कैसे बचाएं ये 66 करोड़ लोग जो वहां गए थे वो इसीलिए गए थे जिसको हमारे रोहित जी कह रहे थे अभी ये ये ऐसी स्पिरिट ऐसी भावना ऐसा ऐसा ज्ञान, ऐसी परंपरा
25:14 किसी भी देश में नहीं है। कहीं भी नहीं है। वैसे आजकल यह कहा जाता है कि हम भारत जिसको इंडिया कहते हैं वह दुनिया में शिक्षा में रिसर्च में दोनों को मिलाके एजुकेशन एंड रिसर्च इसमें मिला के हम वी आर दी थर्ड बेस्ट कंट्री ऑफ द वर्ल्ड। हम नंबर तीन पर हैं। ऐसा डाटा जो बनाते हैं, वह बताते हैं कि अभी हम नंबर तीन पे हैं। लेकिन कभी ऐसा था कि हम नंबर एक पे थे। नंबर एक पे क्यों थे? नंबर एक पे इसलिए थे
26:01 कि हमारे जो गुरु होते थे, हमारे जो शिक्षक होते थे, आज शिक्षक हैं। पहले वही आचार्य भी कहते हैं और उनको हम गुरु कहते हैं। उन गुरु की एक एथिक्स होती थी। उनकी एक मोरल ड्यूटी होती थी। उनके मोरल्स होते थे। और गुरु शिष्य परंपरा हमारे देश में ऐसे चलती थी कि विश्व का पहला विश्वविद्यालय हमारे देश में था। वो विश्वविद्यालय कौन सा था? नालंदा। आलंदा आलंदा भालंदा वेरी गुड दीपिका दीपिका आप कहां से हो?
26:52 छत्तीसगढ़ सर नालंदा हमारे देश का पहला विश्वविद्यालय था लेकिन वो जो जिसमें आप छत्तीसगढ़ के कॉलेज में हो ना वैसा था वो कि उसका एक डिपार्टमेंट होगा एक लाइब्रेरी होगी एक बाउंड्री होगी उसको एक गेट लगेगा ताला लगेगा हॉस्टल होंगे ऐसा विश्वविद्यालय था नालंदा लेकिन जैसा पहला विश्वविद्यालय नालंदा नहीं था पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला था जो इग्नू जैसा था। इग्नू मींस इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी। तो फर्स्ट यूनिवर्सिटी वास दी तक्षशिला। दैट वाज ओपन यूनिवर्सिटी। उनका कोई कैंपस नहीं था। कोई डिपार्टमेंट नहीं होते थे।
27:39 लेकिन वो पूरे देश में पूरे विश्व में फैला रहता था। यह था हमारे देश की गुरु शिष्य परंपरा और दीपिका ने सही बताया कि तक्षशिला एक फॉर्मल यूनिवर्सिटी स्ट्रक्चर यूनिवर्सिटी एंड देन विक्रमशिला वल्लभी बहुत सारे तब हम दुनिया में नंबर एक पे थे ज्ञान की परंपरा में शोध की परंपरा में और हम रोहित जी हमारे श्रीनगर से हैं। हम नंबर एक पे खाली कहने को नहीं थे। नंबर दो वाला बहुत पीछे था। नंबर तीन वाले की गिनती की जरूरत ही नहीं थी। दुनिया के हर कोने से लोग शिक्षा लेने
28:28 हमारे नालंदा और तक्षशिला आते थे। और उच्च शिक्षा जिसमें आप लोग हो आप उच्च शिक्षा के शिक्षक हो। जय श्री उच्च शिक्षा के ऊपर कुछ नहीं होता। यू आर ऑन द टॉप ऑफ द एजुकेशन सिस्टम ऑफ इंडिया। आपके ऊपर कोई नहीं होता। आप पीजी में पढ़ाते हैं, आप पीएचडी करवाते हैं, रिसर्च करवाते हैं। उसके ऊपर तो कोई शिक्षा होती ही नहीं है। उसके नीचे जरूर होती है। जिसको हम सेकेंडरी एजुकेशन कहते हैं। और उसके नीचे होती है उसे हम प्राइमरी एजुकेशन कहते हैं। प्राथमिक शिक्षक। यह है हमारे शिक्षा का इको सिस्टम। हमारे शिक्षा
29:17 का पर्यावरण। प्राथमिक शिक्षा में कोई शिक्षक नहीं होगा जिसकी ट्रेनिंग ना होती हुई हुई हो। बिना ट्रेनिंग किए कोई प्राइमरी एजुकेशन में शिक्षक बन ही नहीं सकता। और सेकेंडरी एजुकेशन जिसमें हम कहते हैं ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर, टीजीटी या हम कहते हैं पीजीटी, पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेंड टीचर। कोई माध्यमिक शिक्षा में शिक्षक बन ही नहीं सकता। रोहित जी जिसकी ट्रेनिंग ना हुई हो। लेकिन हमारे उच्च शिक्षा में दीपिका छत्तीसगढ़ से है। कोई भी टीचर ट्रेंड नहीं होता।
30:03 नो टीचर इज ट्रेंड इन हायर एजुकेशन। दे आर पीजी प्लस नेट आर पीएचडी एंड दे कैन बी द टीचर एस असिस्टेंट प्रोफेसर आई कैन सी ऑन द स्क्रीन योगेश कुमार टेलर यस योगेश आप कहां से हो सर गुड मॉर्निंग सर सर कोटा से कोटा राजस्थान देखिए हमारे कोटा से हैं एंड कोटा का नाम आजकल हम लोग सुनते ही रहते हैं जी सर पहले तो ये सुनते थे कि कोटा में एक ऐसा संयंत्र था जो बहुत पोलशन करता था। कोयले से ऊर्जा बनती थी। आप सब सुने होंगे। तो पर्यावरण का एक संबंध था। बाद में हम
30:48 लोगों ने सुना कि कोटा में प्रदूषण तो छोड़िए वहां पढ़ाई होने लगी। कोचिंग होने लगी और आजकल सुनते हैं कि कोचिंग करने लोग वहां जाते हैं। दो साल तीन साल से कोचिंग करते हैं। और अखबारों में आप सुनते होंगे कि कोचिंग करने वाले बच्चे आजकल क्या कर रहे हैं। क्या यही हमारे शिक्षा का इको सिस्टम होना चाहिए? इसीलिए योगेश जी उच्च शिक्षा के शिक्षकों को शिक्षण के साथ एक और काम दिया गया। अब बिल्कुल हिंदी बोलेंगे हम आपसे। एक और काम दिया गया। वो क्या काम दिया गया? शोध करेंगे। प्रशिक्षित नहीं है। कोई बात नहीं। लेकिन
31:34 रिसर्च का काम केवल जयश्री जैसे दीपिका जैसे डॉक्टर कामिनी जैसे आई कैन सी स्क्रीन ऑन स्क्रीन सो मेनी टीचर्स ये काम आप लोगों को दिया गया अब सुनीता भार्गव जी मुस्कुरा रहे हैं तो सुनीता यू मे नॉट बी ट्रेंड यू मीन्स द टीचर्स ऑफ हायर एजुकेशन मे नॉट बी ट्रेंड बट रिसर्च बट रिसर्च इज ओनली योर रिससिबिलिटी शोध करने का काम आपको दिया गया। आपको ही दिया गया। और आपके शोध से माध्यमिक शिक्षा के शिक्षक आपके शोध से प्राइमरी शिक्षा के शिक्षक सबकी किताबें नई बनती है। सब में नए पाठ्यक्रम आते हैं।
32:21 सब में नए प्रैक्टिकल्स आते हैं। तो आपकी जो जिम्मेदारी है ना जय श्री वो तीन गुना ज्यादा है। आप अपने लिए हायर एजुकेशन के लिए पेपर्स लिखते हो, पब्लिकेशन करते हो, बुक्स लिखते हो, रिसर्च करते हो। और आपका काम फिर आगे क्या है? आपका काम आगे यह है कि फिर आपके ही वही रिसर्च पेपर, आपके वही बुक्स, वही रिसर्च आउटकम्स आपके शिक्षकों के लिए, आपके स्टूडेंट्स के लिए, आपकी अगली जनरेशन के लिए ज्ञान बनते हैं।
33:06 और वही ज्ञान हायर एजुकेशन से सेकेंडरी एजुकेशन सेकेंडरी एजुकेशन से प्राइमरी एजुकेशन तक जाता है। इसलिए जो ये यूजीसी का एमएमटीटीसी है और हमारे संजीव जी हैं जो इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। ये कितना अच्छा काम कर रहे हैं कि जो आपकी ट्रेनिंग कभी नहीं थी वो कम से कम छोटा ही सही बट ट्रेनिंग हो रही है। रिफ्रेशर कोर्स इज आल्सो ट्रेनिंग प्रोग्राम फॉर योर करियर एडवांसमेंट। आपको सैलरी बढ़ती है, आपका प्रमोशन होता है। लेकिन वो तो कागज पर होता है। होना भी चाहिए। परंतु आप नई चीज सीखते भी हैं।
33:53 और जो आप नई चीज सीखते हैं, यह आप अपने पीएचडी के दौरान, अपने पीजी के दौरान या आपने पढ़ाई जो पढ़ाते हैं आप अपने क्लास उसमें नहीं सीख सकते वीडियो कैमरा वीडियो दास टू फर्स्ट फर्स्ट ए वीडियो कैमरा इमोजी वीडियो कॉल दास सॉरी देयर इज सम पैरेलल कनेक्शन फ्रॉम
34:39 ग्लासगो यूनिवर्सिटी ग्लासगो एनीवे सो आई वास जस्ट टॉकिंग टू यू योर इंपॉर्टेंट रोल नॉट टू मेक योर एनवायरनमेंट गुड बट टू क्रिएट एजुकेशनल एनवायरनमेंट फॉर एवरीबडी आप सब शिक्षकों को अपने माय डियर वाइफ समवे माय संशो फर्स्ट फर्स्ट टू पीपल आर ऑन वीडियो कॉल संजीव जस्ट वन मिनट सम आई थिंक आईपड इज ऑन एंड दे आर टॉकिंग अबाउट क्लास
35:34 यस थैंक यू। सो द रोल ऑफ अ टीचर टू मेक आवर एनवायरनमेंट नॉट ओनली क्लीन नॉट ओनली ग्रीन बट यू ऑल शुड बी टीचर ऑफ नेचर। यू ऑल शुड बी टीचर ऑफ फ्यूचर। दिस शुड बी योर टेक अवे पॉइंट फ्रॉम दिस रिफ्रेशर कोर्स कि हम कैसे अपने प्रकृति अपनी पृथ्वी मां के भी लिए ज्ञान बना सके और उसको अपने विद्यार्थियों को दे सके और कैसे आप ऐसा ज्ञान क्रिएट कर सके अपने
36:23 रिसर्च से अपने पब्लिकेशन से जिसको आप आने वाली पीढ़ी को दे सके। तो इसी उद्देश्य से आज का जो यह आपसे चर्चा है वी विल टॉक ऑन रीडिफाइनिंग आवर कॉमन फ्यूचर। एंड वी विल बी टॉकिंग हाउ यू कैन बी अ टीचर ऑफ नेचर। हाउ यू कैन बी अ टीचर ऑफ फ्यूचर। आज का चैलेंज यही है कि जो हम पढ़ते थे पहले रोहित रोहित जी हां सर हां सर जो हम पहले पढ़ते थे तो हमारे गुरु जी होते थे वो कागज पर ब्लू इंक पेन से लिख
37:08 के लाते थे और वो पढ़ाते थे उनके नोट्स हम लोग पढ़ते थे और उनको देखते हुए हम लोग भी काफी कुछ नोट्स बना के अपने क्लास में जाते हैं ले जाते हैं लेकिन आप सॉरी टू सर हम लोग तो जैसे गांव में पढ़े उस टाइम में टीचर्स जो थे वो बहुत ही मेसमराइजिंग थे सर मतलब उन्होंने जैसे पहाड़े याद कराना ठीक है बारखड़ी याद कराना हिंदी मीडियम में रहे सर गांव के अंदर स्कूल ही वो होता था तो उसके बाद जैसे हम सीनियर स्कूल्स में आए तो साइंस के हमारे टीचर बहुत अच्छे थे उन्होंने मेमोराइज कभी नहीं कराया कंसेप्चुअल फ्रेमवर्क डेवलप किया और इसका एक हमें बेनिफिट मिला सर कि हमने किताबों
37:54 को पढ़ पढ़ के उसको एनालिसिस करना जो है उस पर फोकस किया ना कि उसको रटने पर फोकस किया। तो वी आर लाइक इनडेबिटेड टू देम। थैंक यू रोहित। थैंक यू फॉर योर गुड मेमोरी। ऐसे ही याददाश्त अपना बनाए रखो। लेकिन जब और आप पीछे जाएंगे आप तो अपनी पीढ़ी के गुरुओं की बात कर रहे हो। जो 1986 पॉलिसी में पढ़ के आए हैं। हम जितने शिक्षक यहां बैठे हैं, हम सब लोग जो 1986 की शिक्षा नीति थी जब राजीव गांधी जी प्रधानमंत्री थे, उस शिक्षा नीति से हम लोग पढ़ के यहां तक आए हैं। उसके पहले भी एक शिक्षा नीति थी 1968 द फर्स्ट एजुकेशन पॉलिसी ऑफ इंडिया
38:39 इंडिपेंडेंट इंडिया। तो पहली पॉलिसी 1968 में आई। दूसरी पॉलिसी 1986 में आई और तीसरी पॉलिसी 2020 में आई। यह तो शिक्षा की नीतियां है। मतलब फ्रेम वर्क है। दिस इज अ फ्रेम। कैसे हम शिक्षा का उन्नयन करें। लेकिन जब आप रोहित जी बहुत अच्छी बात कह रहे थे कि हमारे शिक्षक अच्छे थे। कई शिक्षकों को याद भी कर रहे होंगे। हमारे जितने शिक्षक बैठे हैं यू कैन आल्सो रिमेंबर योर वन गुड टीचर एटलीस्ट वन उसको आप याद रखते ही है बट जो भारतीय ज्ञान परंपरा थी उसमें ऐसा था कि राम भगवान राम
39:27 या पुरुषोत्तम राम आप जो भी कहो उत्तर भारत के लोग पुरुषोत्तम राम कहते हैं लेकिन दक्षिण भारत के लोग उन्हें गॉड राम कहते हैं। भगवान राम कहते हैं। क्यों? क्योंकि वो जो पर्यावरण के दृष्टि से ही उनको भगवान कहा जाता है। उन्होंने पर्यावरण की कभी हानि नहीं पहुंचाई। इसलिए उनको भगवान राम साउथ वाले लोग कहते हैं। और जो उनके आचार्य थे वशिष्ठ उन्होंने राम को गुरुकुल जो उनका था उसमें एक गुरु कितने विद्यार्थियों को जो शिक्षा दिए उनकी एथिक्स उनके मोरल्स उनकी वैल्यूस के
40:13 नाते ही उनको हम पुरुषोत्तम राम या गॉड राम कहते हैं। और हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी पर्यावरण को बचाने के लिए आने वाली जनरेशंस को भी हमारे संसाधन मिले हवा बनी रहे अच्छी पानी बना रहे अच्छा मिट्टी मरे ना जगी रहे ऐसे गुरुकुल में यह शिक्षा दी जाती थी तो चाहे वो चाहे वो वशिष्ठ आचार्य हो चाहे जहां पे राम के दोनों लड़के
41:00 लौ और कुश जाके शिक्षा दीक्षा प्राप्त किए जिसे हम कहते हैं वाल्मीकि का आश्रम जो आजकल के आधुनिक में बुलंदशहर जो दिल्ली के पास है वहां पर था वहां पे जो शिक्षा दी गई जय केसरी वो यह थी कि कैसे हम अपने पानी को शुद्ध रखें। पानी क्यों उदा बहुत टाइम नहीं रहता ऑनलाइजेशन में। तो इसलिए आपसे हमें पानी की बात कह रहे हैं। पानी हमारे हमारे पर्यावरण का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन ही नहीं है। हमारे जीवन की उत्पत्ति पानी में हुई और हमारे बॉडी का ऑलमोस्ट 80% पानी है।
41:48 आंख 80% पानी है। दिमाग 90% पानी है। ब्लड 95% पानी है। ऐसे ही और आज का पानी कैसा है? यस अंजू कुमारी आई कैन सी वन टीचर ऑन द स्क्रीन। अंजू आप कहां से हो? यस सर। सीकर राजस्थान। अंजू भी सीकर से है। राजस्थान से है। तो राजस्थान में पानी का महत्व और बढ़ जाता है। एवरीबडी नो वेरी वेल बिल्कुल सर राजस्थान में पानी का महत्व बहुत बढ़ जाता है और वह महत्व राजस्थान में कितना बढ़ता
42:34 है यह तो हम सब जानते ही हैं। आज बोतल का पानी हमारे देश में जगह-जगह बिकता है डॉक्टर नंदाराम और बोतल का पानी का मूल्य जो है वो ₹ तो रेलवे स्टेशन पे है बाजार में है एयरपोर्ट चले जाएंगे तो ₹100 है थोड़ा नाम गंगा जैसा, हिमालय जैसा, गोमती जैसा रख देंगे तो और दाम बढ़ जाता है। और कोई फाइव स्टार होटल में चले जाएंगे तो हो सकता है ₹200 लीटर मिले। पानी वही
43:20 है। यहां पे जरूरत है शिक्षक की। यहां पे जरूरत है किसी अच्छे आचार्य की। कि पानी को ₹200 लीटर तक बेचने की जो परंपरा आज चली है क्या भविष्य में ₹00 में हो जाएगा ₹1000 लीटर पानी बिकेगा और कौन सा पानी जिसका नाम है मिनरल वाटर और मिनरल कितना है उसमें यस कोई केमिस्ट्री के भी टीचर है यहां?
44:11 सर जी सर केमिस्ट्री सही है। हां ओवर टू यू जरा बताइए पानी केमिकल और मिनरल और उसकी गुणवत्ता के बारे में। आप हैं कहां? अपना वीडियो तो ऑन करिए। हेलो सर यस अरविंद मसेल्फ इस अरिंदम अरिंदम सर आई एम नॉट सर फ्रॉम केमिस्ट्री आई एम फ्रॉम जलॉजी बैकग्राउंड नो हु इस फ्रॉम केमिस्ट्री प्लीज हु इस फ्रॉम केमिस्ट्री थैंक यू योगेश है योगेश सर योगेश सर वेयर आर यू
44:58 यही हो सर यस योगेश फ्रॉम कोटा अभी तो बात हो ही रही थी योगेश से योगेश जरा हमारे सभी शिक्षकों को अपनी केमिस्ट्री की भाषा में बताइए कि ये मिनरल वाटर के नाम से जो बिकता है ये कितना पर्यावरण मित्रवत है और कितना आपके स्वास्थ वर्धक है कितना इसका भविष्य है मिनरल्स तो ऑलरेडी निकाल लेते हैं सर आरो वाटर में मिनरल्स होता कहां है ठीक रिवर्स ऑस्मोसिस तो उसमें जितने भी डिोल्व सोबिलिटी उनको तो सारा तो उन्होंने निकाल दिया है तो तो उसमें तो मिनरल लेस हो गया है तो आप आरो वाटर भी अगर हम घर पे भी कंज्यूम कर रहे हैं तो मिनरल्स तो अपन ले ही नहीं रहे हैं ना सर तो जो भी आजकल ये जोड़ों का दर्द बीमारियां वगैरह जो हो रही है इसका एक बड़ा कोज हो सकता है ये आरो
45:45 वाटर भी कंज्यूम करना वेरी गुड थैंक यू योगेश नहीं सर हां यस यस डॉक्टर श्याम सोनी हां सर मिनरल वाटर में सर वैसे तो जो अच्छी कंपनियां है ना वो वाटर वास्तव में मिनरल ऐड करती है लेकिन जैसे लोकल और कुछ नीची जो कंपनियां है वो ज्यादा मिनरल ऐड नहीं कर पाती मिनरल वाटर वैसे तो जो रनिंग वाटर है वो सबसे बेस्ट है हेल्थ के लिए और आरो का भी यूज़ नहीं करना चाहिए अगर नदियों का पानी आ रहा है आपके बारिश से आ रहा है और वो फिल्टर हो के आ रहा है तो वो सफिशिएंट है लेकिन कुछ इलाके ऐसे हैं जहां पानी की सप्लाई सही नहीं है तो वहां वो पैक्ड वाटर भी काम में आता है और वो मिनरल ऐड करके ही बेचते हैं।
46:30 कौन सी कंपनी मिनरल डाल के बेचती है पानी? श्याम जी जी सर कौन सा वाटर है मिनरल पड़ा रहता है? जरा बताओ। सर हिमालय की जो कंपनी है हिमालय वाले में वो पहले वास्तव में वाटर मिनरल लिखा लिख देते थे। ये लेकिन उसके बाद क्या है केस हो गए हैं कि आपके पानी में मिनरल है नहीं और आप लिख रहे हो। तो अब आजकल केवल वही कंपनियां लिख पाती है जो वास्तव में ऐड कर रही है। थैंक यू। लेकिन आपका विषय क्या है श्याम? केमिस्ट्री सर। कहां से हो आप? तो राजस्थान। आप भी राजस्थान से हो। क्या बात है संजीव? तुम राजस्थान के सभी शिक्षकों को बुला लाए हो। जबलपुर
47:17 सब लोग बोले कि जोधपुर में नहीं मिल रहा है तो आपके यहां आ गए हैं। वहां पर हाउसफुल हो गया है। हां बात तो ठीक कह रहे हैं श्याम जी जी सर एक तो पानी जिस पर आप और योगेश जी ने अपना बहुत अच्छा विचार दिया जी दूसरा पानी है जिसको हम लोग साधारण भाषा में काला पानी कहते हैं। एंड व्हाट इज काला पानी? जिसको दीपिका टिप्पो हमारी कोका कोला थम्स अप पेप्सी बोलती है। यस नाउ दीपिका स्माइलिंग कि वो कहां बोलती है
48:04 बट सो मेनी वाटर सो मेनी वाटर ऑन द नेम ऑफ ब्रोमिनेटेड वाटर ब्रोमीन गैस डाली जाती है। योगेश बताएंगे आपको दैट ब्रोमिनेटेड वाटर जिसको हम कहते हैं कोका कोला पेप्सी थम्स अप रंगीन पानी ने कह दिया दीपिका बताती थी काला पानी वो काला पानी इस मिनरल वाटर के डबल या ट्रिपल दाम पर बिकता है तो श्याम राम जी अब खाली पानी नहीं बिकता।
48:50 जी अब काला पानी भी बिकता है। और जितने शिक्षक हैं शिक्षक किसी भी विषय का हो केमिस्ट्री का नहीं किसी विषय के हो। सब जानते हैं कि यह आरो वाटर शाम तक आपको थकान देगा। दिन भर आपको स्ट्रेस देगा और आए दिन आपको हेडेक देगा। ये तो यूनिसेफ कहता है पूरी दुनिया में कहता है तीन जो शाम को आप थका थका महसूस करते हैं या जो भी महसूस करते हैं उसका केवल एक रीजन है आरो वाटर जो आपको हेडेक होता है उसका एक ही कारण है
49:36 आरो वाटर जी और काला वाला पानी पेप्सी थम्स अप ये क्या काम करता है। आप भली बात जानते हैं। एंड नन ऑफ दी वाटर्स नन श्याम जी ध्यान से सुन लो। जी सर। कोई मिनरल वाटर नहीं है जिसमें मिनरल डाल के बेचा जाए। वो आप केमिस्ट्री के हो और योगेश जी भी है। आप दोनों इसका थोड़ा और चर्चा करना। जैसे ही आप पानी में मिनरल डाल देंगे तो मिनरल को प्रिजर्व करने के लिए जैसे आप अचार बनाते हैं घर पर राजस्थान में बहुत
50:21 मिर्चे लाल मिर्चे का अचार आते हैं तो उसमें कुछ नमक डालना पड़ेगा थोड़ा ऑयल डालना पड़ेगा कि वो अचार कई महीनों तक बना रहे प्रिजर्वेटिव के रूप में गांव में डालते थे शहर में तो केमिस्ट्री वाले बताएंगे कि कितने प्रकार के प्रिजर्वेटिव पढ़ते थे पढ़ते हैं आज भी एंड नो प्रिजर्वेटिव हेड फ्रेंडली पॉलिथीन प्लास्टिक इटसेल्फ इज नॉट हेल्थ फ्रेंडली। नन ऑफ दी थिंग्स आर गोइंग टू मेक यू हेल्दी, हैप्पी एंड हर्ष, उल्लास, उमंग इनमें कहीं नहीं मिलने वाला है आपको। इसको और सरलता से हम समझना चाहे तो हम
51:09 पर्यावरण के दृष्टि से आपसे ये बताते हैं कि अभी हम लोग कलयुग में रहते हैं। क्यों रोहित रोहित जी चले गए? हां जी सर। हां जी सर। श्रीनगर में श्री गंगानगर श्री गंगानगर में कलयुग लगा है कि नहीं? कलयुग तो सर सभी जगह जब जहां कल युग मतलब कल कारखाने हैं वही तो कलयुग है सर। हां तो आप श्री गंगा में है ना इसलिए हमने पूछा। नहीं नहीं सर बिल्कुल है क्या तो अभी हम सब लोग कलयुग में रहते हैं और कलयुग में हमारी एवरेज इस पर्यावरण में हमारी एवरेज लाइफ कितनी है
51:59 सर अभी तो विद मेडिकल सपोर्ट सिस्टम 65 टू 70 है सर मान लो 100 है मान लो अधिकतम 100 है। ठीक है सर। लेकिन आप जानते हैं इसके पहले हमारे जो भारतीय ज्ञान परंपरा थी यह किसी और ने नहीं कहा है। ये खाली हमारे भारत में चर्चा है कि हम लोग कलयुग में है और कलयुग के पहले क्या था जो राजस्थान के श्रीनाथ नाथ द्वारा जिसे कहते हैं जहां आप जाते हैं कृष्ण भगवान का दर्शन करते हैं।
52:45 वह था द्वापर युग जब श्रीनाथ में भगवान कृष्ण भगवान का युग था। उसमें आप जानते हैं कि उम्र कितनी थी? एक आदमी की औसत उम्र कितनी थी उस समय? यस। कितनी थी आप में से कोई बताइए
53:38 आप इसको बता सकते हैं सर लगभग साल तक शायद वेरी गुड शायद नहीं पक्का पक्का 11000 11ाउ ओ सॉरी 1100 1100 तो हजार 1100 लगभग एक ही बात हुई अब आप बताओ कि उस समय अभी श्याम जी बता रहे थे कि कुछ कंपनियां मिनरल डाल रही है पानी में तो श्याम उस समय कैसा पानी रहा होगा? कैसी हां उस समय तो अच्छा रहा होगा। मिनरल्स ज्यादातर रन करती थी। वाटर और नदियां थी
54:25 तो नदियों का जो पानी सप्लाई होता था तो मिनरल ऑलरेडी एडेड थे उसमें। हां बिल्कुल ठीक है। थैंक यू सर। थैंक यू। तो जो द्वापर का युग था वो इतना शुद्ध था कि आदमी की जो औसत उम्र थी वो 1100 वर्ष होती थी। तो खाली पानी से नहीं होती थी। पानी के साथ केमिस्ट्री में हवा भी होती है। भाई बिना पानी के तो आप तीन घंटे रह सकते हैं लेकिन बिना हवा के आप तीन मिनट नहीं रह सकते।
55:11 एयर इज मोरेंट फॉर लाइफ देन वाटर। नोबडी कैन लिव मोर देन 3 मिनट्स विदाउट एयर। तो हवा भी शुद्ध रही होगी। आज हम पर्यावरण पर रिप्रेशर कोर्स कर रहे हैं। एयर वाटर देन मिनरल्स केवल केमिस्ट्री के शिक्षक नहीं सभी शिक्षक जानते हैं कि ऑल मिनरल्स कम्स फ्रॉम आवर मदर अर्थ। आवर मदर मदर इज सो ब्यूटीफुल। पृथ्वी मां इतनी बुद्धिमान है कि वह सारे मिनरल्स जो आपको चाहिए वो उस पृथ्वी मां में होता है। जब आप उस
55:56 पर फल, सब्जियां, ग्रेंस उगाते हैं तो वही मिनरल उस फल से होते हुए आपके पास आता है। यह है पर्यावरण का मानव संबंध। माटी जहां की रिच है, फर्टाइल है, वहां की संस्कृति, सभ्यता, इनकम, नॉलेज एवरीथिंग इज गुड। जहां की मिट्टी सिक है, बीमार है, मिट्टी बांझ है, अनफर्टाइल है, वहां पे पावर्टी है, क्राइम
56:44 है, वही सब कुछ है। अपना पर्यावरण ऐसा था संजीव कि जहां बड़ी-बड़ी लड़ाईयां लड़ी गई, वो केवल संसाधन लेने के लिए लड़ी गई। तो यू कैन कोरिलेट योर एनवायरनमेंट टू आवर बैटल्स कि लड़ाईयां वही हुई जहां की मिट्टी रिच थी। अगर आप अपने द्वापर जिसकी बात आप कृष्ण की कर रहे थे और ऐसा कहा जाता था कि माना जाता है चित्र भी आता है चर्चा भी आती है कि कृष्ण भगवान और गाय तो जहां गाय होगी वहां क्या अच्छा मिलेगा? दूध अच्छा मिलेगा, घी अच्छा मिलेगा और जो
57:30 पंचगव्य होता है वह अच्छा मिलेगा। जितनी लड़ाईयां लड़ी गई वो सब नॉर्थ इंडिया में लड़ी गई। कहां पे? पानीपत हरियाणा से लगा के आगे चले जाओ। ठीक है? आपको एक बहुत समझ की बात की चर्चा कर रहा हूं कि जहां पर लोग अच्छे हैं, जहां पर गाय अच्छी है, वहीं पर लोग अच्छे हैं। उनकी लंबाई, उनकी ऊंचाई, उनका ज्ञान, उनका स्वास्थ्य आप यू समझ सकते हो कि जहां पर्यावरण शुद्ध है। हां संतोष मम्मी को
58:28 शुड आई कंटिन्यू और यू विल कंटिन्यू ओके सो देयर इज क्लियर कट रिलेशनशिप बिटवीन गुड एनवायरमेंट एंड गुड ह्यूमन सिविलाइजेशन। किस भगवान को गाय के साथ दिखाया जाता है, माखन के साथ दिखाया जाता है और बहुत सारी चीजें आप उसको समझ सकते हो कि हाउ दिस ऑल इज पार्ट ऑफ गुड हेल्दी एनवायरमेंट। लेकिन थोड़ा सा उसके पहले चलिए आप चलिए त्रेता युग में त्रेता युग किसका था? भगवान राम का युग कहते हैं। उस समय कितनी उम्र
59:15 होती थी? 1100 वर्ष तो द्वापर में थी। त्रेता की उम्र होती थी लगभग 10,000 वर्ष। 100 थाउजेंड इयर्स। कैसा रहा होगा पानी का स्वास्थ्य? योगेश और कैसा रहा होगा मिट्टी का स्वास्थ्य? कैसा रहा होगा हवा जिसको हम ऑक्सीजन नाइट्रोजन कहते हैं। कितने हेल्दी रहे होंगे कि एक आदमी जो हम और आप हैं हमारे और आपके लगभग त्रेता को हम कहें तो 12 लाख लगभग 13 लाख लगभग 13 लाख पहले
1:00:06 हेलो या लगभग 13 कुछ बीच में डिस्टरबेंस आते हैं। एक्चुअली हम जहां बैठे हैं राजस्थान में नहीं है। आज हम यात्रा करके दिल्ली पहुंचे हैं और यहां बहुत क्लाउड है। सो मे बी थोड़ा डिस्टरबेंस हो बीच में। लगभग 13 लाख 13 लाख इयर्स एगो त्रेता युद्ध था। और उस समय एज कितनी होती थी एक आदमी की? ये पर्यावरण की गुणवत्ता ही है कि आज भी हमारी उम्र बढ़ जाती है। जो लोग शुद्ध पर्यावरण रहते हैं। नाम आप ले सकते हो जापान के लोग। नाम आप ले सकते हो अपने यहां भी जो दक्षिण भारत के लोग
1:00:51 हैं। वहां पर समुद्र के किनारे हैं। ग्रीनरी है। थोड़ा शुद्धता है दिल्ली की तुलना में। हरियाणा की तुलना में, पंजाब की तुलना में। एंड हमारे एवरी टीचर नो इट वेरी वेल कि इफ यू आर लिविंग इन क्लीन ग्रीन एनवायरनमेंट यू आर सपोज टू बी मोर हैप्पी मोर हेल्दी एंड मोर कंटेंडेड। मतलब आप कामधाम भी अच्छा कर सकते हैं। दिल्ली में आप आ जाएंगे थोड़ा दिन रहेंगे तो आपको अस्थमा, सांस की प्रॉब्लम, स्किन की प्रॉब्लम, बीमारियां ये सब चलती रहेगी। यही है हमारे शिक्षकों को समझने की बात कि कैसे कलयुग में हम अधिकतम 100 वर्ष रहते
1:01:38 हैं। लेकिन यही मानव अच्छे पर्यावरण में द्वापर के युग में लगभग 1100 वर्ष रहता था। 1000 ईयर हमारे टीचर ने बताया। और उसके पहले त्रेता का युग था। वहां पर हमने आपको बताया कि लगभग 10 थाउजेंड इयर्स एक आदमी की औसत उम्र थी सुनीता और जानते हो राम की उम्र कितनी थी? 16,000 इयर्स 16,000 वर्ष के राम थे। दैट एफसाइजेस दैट हाईलाइट्स द इंपैक्ट ऑफ एनवायरनमेंट ऑन आवर ह्यूमन हेल्थ।
1:02:26 एंड थोड़ा पहले और चले क्या क्यों लक्ष्मीकांत निमा यह भी राजस्थान से ही है एमपी से हूं सर आप सर एक प्रश्न उठ रहा था सर दिमाग में हमारा परिचय आपसे नहीं था इसलिए मैंने बोल दिया राजस्थान हां बताओ सर मैं ये पूछ रहा था कि जैसे 10,000 वर्ष वहां पे उम्र थी त्रेता युग में तो सर अगर इसको अपन को बोलना है और अपन को कोई रेफरेंस देना तो अपन कहां से रेफरेंस देंगे? मतलब कैसे प्रमाणित करेंगे? तो हम झूठ थोड़ी बोल रहे हैं। एक तो रेफरेंस हमारा दे सकते हो। बताया था एक तो देखो सब हंस रहे हैं। एवरीबडी स्माइलिंग एक तो लीमा राम नहीं लक्ष्मीकांत
1:03:12 लक्ष्मीकांत एक तो रिफ्रेश अपना ही दे दो। रिफ्रेश कोर्स बताया गया। जी सर ये भी चलेगा। जैसे हमारे इसमें कोई ला के भी है क्या? कोई शिक्षक ला से भी है विधि विज्ञान से लॉ साइंसेस लॉ स्टडीज एनीबडी हियर फ्रॉम लॉ डिपार्टमेंट कोई नहीं है कोई नहीं है कोई बात नहीं हम बताते हैं आपको जी सर लक्ष्मीकांत जी आप सुनते होंगे कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने एक न्याय दे दिया। जी सर।
1:03:58 तो न्यायाधीश ये कहता है सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जो न्याय देते हैं आर्डर लिखते हैं वो आर्डर पूरे देश में माना जाता है। जी जी क्या कह के माना जाता है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था तो आपको मानना पड़ेगा। हमारे राजस्थान में भी यही बात कही जाती है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने कोई निर्णय दे दिया तो दे दिया। अब वो जज जो है वह दो प्रकार से न्याय देते हैं। एक तो जो किताब में लिखा है उसकी विवेचना करते हैं। क्सिट्यूशन में जो लिखा है उसकी विवेचना करके एक निर्णय देते हैं। और वो माना जाता है कि ये एस पर रूल दिया गया है। जी सर। और दूसरा क्या देते हैं लक्ष्मीकांत?
1:04:45 दूसरा कहते हैं रूल बुक में तो लिखा ही नहीं था। यह तो दिस इज रूल बाय जज। ये तो ऐसा ऐसा केस तो अपनी किताब में लिखा नहीं था। तो फिर उसमें संशोधन होता है और परिशोधन होता है। जानते ही हो आप। तो रूल बाय जज एंड रूल बाय बुक। तो ऐसे आप भी कह सकते हो कि ये जो बताया था वो हमारे एक डायरेक्टर साहब ने बताया था इसलिए हमने इसको मान लिया है। ओके थैंक यू सर। सर सर तो एक तो यह बात हो गई लेकिन हमारे बीच में कई टीचर हो गए वो कहते हैं कि डायरेक्टर कौन होते हैं सब कहने वाले हम या कोई जैसे स्टूडेंट आपको बोलते होंगे
1:05:31 आप टीचर है और हम लोग तो लक्ष्मीकांत मैं बायोटेक्नोलॉजी का प्रोफेसर था माइक्रोबायोलॉजी बायोटेक्नोलॉजी का हेड था जब मैं यहां नहीं आया था यूजीसी हालांकि मैं यूजीसी में 2014 से हूं तो आप जानते हो मैं रेगुलर डायरेक्टर हूं यहां 14 के पहले उधर था तो कई हम अपने स्टूडेंट से सुनीता हम अपने स्टूडेंट से कहते थे कि आप मेरी बात जो हम पढ़ा रहे हैं ना क्लास में सब मेरी बात मत मान लेना यस दीपिका दीपिका बहुत ध्यान से सुन रही इसे कोई गंगा के किनारे बैठ के कोई गोष्टी हो रही हो सर सर आप बोल भी बहुत अच्छा रहे हैं सर
1:06:16 बहुत आनंद चलो आगे सुनो जी सर हम लोग जब पढ़ाते थे आपके ऐज के थे हाला मैं कभी असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं था लक्ष्मीकांत मैं 21 इयर्स का था तभी प्रोफेसर हो गया था तब से मैं प्रोफेसर ही हूं आई नेवर वर्ड एस असिस्टेंट एंड एसोसिएट प्रोफेसर एनीवे तो दीपिका हमारी उम्र और बच्चों की उम्र बराबर होती थी जो जो पढ़ने आते थे बायोटेक्नोलॉजी माइक्रोबायोलॉजी उनकी एज और हमारी एज बराबर रहती थी। बल्कि कोई हमसे ज्यादा भी रहते थे। यू कैन इमेजिन कि 21 ईयर पे आप प्रोफेसर हो गए और वो 21 ईयर पे असिस्टेंट प्रोफेसर भी थे। रिसर्च स्कॉलर तो रहते ही थे और कई स्टूडेंट भी रहते थे।
1:07:03 तो आप सोच लो कैसा लगता रहा होगा। तो हम जब पढ़ाते थे लक्ष्मीकांत तो अपने स्टूडेंट्स को क्लास के बाद बाहर निकलते ही हम लोग बैठ के चाय पी लेते बायोटेक बहुत कम रहते थे और गर्ल्स स्टूडेंट बहुत ज्यादा रहती है। आज भी बायोटेक्नोलॉजी माइक्रोबायोलॉजी में ही विल फाइंड मोर लेडी टीचर्स एंड लेडी गर्ल स्टूडेंट्स रिसर्च स्कॉलर्स देन मेल्स। तो हम लोग क्या करते थे कि भाई क्लास तो हो गई। आओ जब चाय पिलाएंगे प्रोफेसर साहब। तो समोसे खाते थे। चाय पीते थे कैंटीन बैठ के और वो जो पर्यावरण बनता था वो बड़ा अच्छा बनता था। उसमें इतनी बिलोंगिंगनेस होती थी कि यू कैन नोट फॉरगेट एनीबडी। लेकिन जो मैं आपसे बात कह रहा था
1:07:51 वो ये कह रहा था कि हम लोग उनको चाय पिलाते इसलिए थे कि उनको चाय पिलाते पिलाते बता देते थे कि हमने जो कुछ कहा उसको सही मत मान लेना। ऐसे भूल मत करना कि हम टीचर है सब सही बोलते हैं। हम भी गलत बोल सकते हैं। हम भी गलत पढ़ा सकते हैं। तो जो हमने पढ़ाया इसको किताबों से वेरीफाई कर लेना। यही है रिफ्रेशर कोर्स का दूसरा टेक अवे। आप सबको मैं बता रहा हूं श्याम सोनी जी कि अपने रिसर्च स्कॉलर्स को अपने पीजी यूजी के स्टूडेंट्स को रोज नहीं तो एक आध हफ्ते में एक आध महीने में दीपिका जरूर बता देना
1:08:39 कि हमने जो पढ़ाया था सब सही ही नहीं है। तुम भी किताब पढ़ लेना तो इसी बहाने वो किताब पढ़ेंगे तो और किताब पढ़ के जब यह कहेंगे श्रद्धा मिश्रा कि हमारे टीचर ने सब सही पढ़ाया है। देन यू आर विनर देन यू आर रिफ्रेश टीचर देन यू आर गुड टीचर और हम लोग ही कहते रहे कि अरे हम तो सही पढ़ाते हम गलत पढ़ा ही नहीं सकते। हम गलत बोल ही नहीं सकते। अरे भाई हम भी तो आदमी है। गलत गलत क्यों नहीं बोल सकते? हम टीचर हैं। इसका मतलब थोड़ी है कि हम गलत नहीं बोल सकते। हम गलत बोल भी सकते हैं और गलत कर भी सकते
1:09:24 हैं। टीचर भी है लेकिन आप रिप्रेशर कोर्स के बाद एक स्किल जरूर सीख जाओ कि स्टूडेंट से चैलेंज मत करो और आज के स्टूडेंट से 15 साल पहले वाला तो अलग स्टूडेंट होता था। अब तो आप जो पढ़ाते हो ना वो स्टूडेंट खुद गूगल करते रहते हैं। और अभी हमारे एक शिक्षक ने पूछ ही दिया कि सर आप बताओ ये अपने मन से बता रहे हो या इसका कोई रेफरेंस भी है। लक्ष्मीकांत जी कह रहे हैं। तो लक्ष्मीकांत जी मैं आपसे वही बात आप स्टूडेंट नहीं हो बट मैं आपसे वही बात कह रहा हूं कि आप मेरी सब बात सच मत मान लो।
1:10:10 आप तो जो हमने बताया कि 13 लाख वर्ष पहले त्रेता था या गूगल से या किताब से लाइब्रेरी से पूछ लेना पढ़ लेना समझ लेना लेकिन हमारी पूरी बात मत मानना ठीक है जितनी जितनी बात आपको लगे कि ये ठीक है उतना ही मानना और हां यही काम आप अपने विद्यार्थियों से भी कहना जा के यहां से कहना भाई मैं रिफ्रेशर कोर्स से आया हूं। एक डॉक्टर साहब थे। उन्होंने बताया है कि मेरी सब बात सच मत मान लेना। हमारी बात को किताब से वेरीफाई करना। गूगल से, एआई से, आर्टिफिशियल
1:10:56 इंटेलिजेंस से, आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस से, आर्टिफिशियल स्पेशल इंटेलिजेंस तीन है। बता लक्ष्मीकांत। जी सर। Google तो वो है जिसमें कोई जान ही नहीं है। अभी टाइप मार दो कुछ आ जाएगा उल्टा सीधा। आपने सुना होगा कभी आपने सुना होगा कभी मेरठ में रोड बन रही थी तो पर्यावरण के लोग उसमें लगे थे कि भाई आप पेड़ कैसे काट सकते हो? नदी कैसे मिट्टी गिरा सकते हो? हम पर्यावरण के लोग हैं। तो वो तो अलग चलता रहा। एक दिन योगेश एक दिन एक हमारे ऐसे ही लक्ष्मीकांत जैसे डॉक्टर साहब थे तो अपनी कार से जा रहे थे। उन्होंने गूगल किया और गूगल ने उनको रोड बताया और बताया कि इस पर
1:11:44 मिनिमम स्पीड 100 है। 100 किलोमीटर के जा सकते हैं और जा रहे थे। उनकी कार एक गड्ढे में गिर गई। ये है गूगल। तो जब कार को गड्ढे में गिरा सकता है तो वह ज्ञान भी गलत दे सकता है। ठीक है लक्ष्मीकांत जी सर ये है पर्यावरण हम लोगों के आसपास का जी सर और जब गूगल गलत दे सकता है तो एआई तो पक्का गलत दे सकता है ज्यादा गलत दे सकता है इसलिए एआई बहुत फास्ट है यस श्याम सोनी एआई इज फार फास्ट देन Google सो इफ Google कैन एरर एआई कैन डू मोर मिस्टेक्स, ब्लंडर्स।
1:12:31 और लक्ष्मीकांत और एआई में फर्क क्या है? हमारे जो शिक्षक है लक्ष्मीकांत नीमा जी मध्य प्रदेश से इनसे और एआई में फर्क क्या है? इनसे और Google में फर्क क्या है? इनके अंदर भावना है। कि इनका स्टूडेंट है। Google के अंदर भावना नहीं है। नहीं तो गड्ढे में गिरता ही क्यों? गड्ढे में गिराता ही क्यों? तो शिक्षक में एक भावना है, थॉट प्रोसेस है, विचार है। विचार किस बात का है? हमारा विद्यार्थी है। उसके प्रति भावनात्मक संबंध है, स्नेह का संबंध है, प्रेम का संबंध है। इसलिए कोई भी हमारा लक्ष्मीकांत जैसे शिक्षक किसी विद्यार्थी का नुकसान नहीं करेगा। Google कर देगा।
1:13:18 जब Google कर देगा तो एआई एआई तो और बड़ा कर देगा। इसलिए लक्ष्मीकांत जब तो प्लीज डोंट डिस्टर्ब सर एआई में लक्ष्मीकांत एआई में एआई में जब शिक्षक की भावना पड़ जाए जी सर शिक्षक का थॉट प्रोसेस आपका विचार जब एआई मशीन में आपका विचार डाल दिया जाए तो उसे कहते हैं ए जीआई आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस सर यही फर्क है एआई और एजीआई में और एजीआई जब आ जाएगा तो शिक्षकों का भूमिका और ज्यादा
1:14:03 चैलेंजिंग हो जाएगी। अभी तो आप स्टूडेंट से कह सकते हो भाई मैं शिक्षक हूं। मैं जो कह रहा हूं सही कह रहा हूं। ना हो तो दूसरों से पूछ लो या ये नहीं बोलता। लेकिन एजीआई यह कहा जा रहा है कि अभी डेढ़ साल में एजीआई आ जाएगा। एआई खत्म हो जाएगा। गूगल तो काफी खत्म हो ही गया। अब लोग एआई में जाने लगे। लेकिन यह कहा जा रहा है कि 2030 तक 2032 वर्ष को एक आंकड़ों के अनुसार 2032 को एक बॉटम लाइन बनाए। काफी टाइम तो नहीं हो गया। आपका ब्रेक लेना है क्या आपको? 12:00 बजे
1:14:50 आपको लेना हो तो बता देना नहीं तो हम यह कथा कहते रहेंगे पर्यावरण की आपको सर वो अच्छा भी लग रहा है सर एक कथा अच्छा लग रहा है ठीक है तो चलो वी विल कथा पूरी करके फिर आपका ब्रेक कर देंगे आप यू कैन हैव मोर टाइम फॉर योर लंच एनीवे सो मैं आपसे कह रहा था कि जो ये ए जी आई है ये दो साल में आ जाएगा और अगले तीन साल में खत्म हो जाएगा फिर क्या आएगा तो दुनिया के विशेषज्ञ यह बात कह रहे हैं कि 20 2032 में आ जाएगा आर्टिफिशियल स्पेशल इंटेलिजेंस वो क्या करेगा वो जैसे शिक्षक करते हैं वैसा सब कुछ
1:15:37 करेगा जैसे आप पेपर लिखते हैं दीपिका आपने रिसर्च की तो आपका क्या मन होता है कि लेट अस डू द रिसर्च दैट कैन सॉल्व द रियल लाइफ प्रॉब्लम। लेकिन हमारी नेहा गहलोत वो पक्का राजस्थान की है। आई कैन टेल यू। यस नेहा यस सर। कहां से हो? बताओ थोड़ा अपना सब्जेक्ट बता दो। जगह बता दो। सर बेसिकली मैं बीकानेर से हूं बट मेरी पोस्टिंग अभी जोधपुर में है और सब्जेक्ट मेरा होम साइंस होम मैनेजमेंट है सर। तो हमारे एचआरडीसी में तुम कभी नहीं देखेगी। यू नेवर टर्न टू मावर एचआरडीसी दैट इज मेड
1:16:25 फॉर योर टीचर्स। यू नो एचआरडीसी इज लाइक योर मदर्स होम। जैसे हमारे शिक्षक है ना और शिक्षक के विद्यार्थी भी जब वो पेन में होते हैं तो दे रिमेंबर देयर मदर। अपनी मां को पहले याद करते हैं। वैसे जितने अच्छे शिक्षक है नेहा सर वो सब यूजीसी अब तो एमएमटीटीसी हो गया। उसके पहले यूजीसी एचआरडीसी था। उसको याद करते हैं। आपको पता है सबको कि यूजीसी ने शिक्षकों के ट्रेनिंग का प्रोग्राम 1986 में शुरू किया। तो जोधपुर में 1986 में ही खुला है वो सेंटर। तो पहले उसका नाम था यूजीसी एएससी एकेडमिक
1:17:11 स्टाफ कॉलेज। 2014 तक उसका नाम था यूजीसी एएससी। ये तो क्वेश्चन पूछे जाते हैं। टेस्ट में आता है। 2014 में जब मोदी जी आए तो उन्होंने उसका नाम बदल के क्या कर दिया? यूजीसी एचआरडीसी यूजीसी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर। और अभी जब मोदी जी का जो ये राष्ट्रीय शिक्षा नीति हम लोग आजकल पढ़ते हैं तो 5 सितंबर 2023 से इसका नाम बदल के हो गया मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर। सो नेहा मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर द मदर्स होम ऑफ टीचर। इफ यू वांट टू डू गुड पब्लिकेशन, यू वांट टू डू गुड रिसर्च, यू
1:17:57 वांट टू गेट गुड प्रोजेक्ट, यू वांट टू गेट सम फंड्स, यू वांट टू गेट मतलब जैसे हम आप आके आपसे रिसोर्स पर्सन है वैसे हम अपने आसपास के संपर्क के शिक्षक है उनको बुलाते हैं व्याख्यान के लिए। तो व्याख्यान ना दे सको तो हम कहते हैं कि अभी नेहा ने तुरंत कोई रिप्रेशर कोर्स किया था और हमसे मिले थे। तो नेहा विल शेयर द एक्सपीरियंस जो 12 दिन का एक्सपीरियंस है वो आप शेयर करना तो दैट्स हाउ एमएमटीटीसी बिकम योर मदर्स होम बट नेहा या यस सर व्याख्यान के लिए भी है ज भी कोई टॉपिक अगर ऐसा रहेगा और मैं एक बार विजिट करूंगी सर पक्का अभी ये रिफ्रेशर कोर्स खत्म होते ही हम आपसे कह क्या रहे थे
1:18:43 क्वेश्चन क्या था कि कभी विजिट किया क्या यस। सो टॉपिक वाज कि वी द टीचर्स वेदर एनी टाइम वी आर कमिंग टू योर मदर्स होम टू मेक योर करियर प्राइड। लेकिन लक्ष्मीकांत मैं तो खुद ही भूल गया कि किस टॉपिक बात हो रही थी। किस में सर वो पर चर्चा हो रही थी वो 16000 इयर्स
1:19:28 थे उनका मतलब वहां पे वो जैसे मैंने जैसे मैंने आपसे कहा कि हम लोग बोलते हैं कि भाई हमारा जो पढ़ाते हैं उसको चेक कर लेना वैसे ही वर्चुअल प्रोग्राम में बोलना पड़ता है कि भाई हम क्या बात कर रहे थे तो सो यू कैन टेल मी दैट गिव्स गारंटी दैट आप ध्यान से सुन रहे हैं तो थैंक यू लक्ष्मीकांत थैंक यू सर थैंक यू सो नेहा राजस्थान में बहुत सारी चीजें ऐसी थी जिसका जिसका ज्ञान हमें वहां की परिस्थितियों के नाते बहुत चैलेंजेस थे। राइट? राम का जो टाइम था वो 16,000 वर्ष उनका लाइफ थी। लेकिन जो एवरेज टाइम था
1:20:14 उस समय जिसको हमने लक्ष्मीकांत से कहा कि किताब में खोल के देखना एआई की बात कर रहे थे स्पेशल इंटेलिजेंस की बात कर रहे थे लक्ष्मीकांत इसके पहले का जो समय था वो राजस्थान का ही टाइम था ब्रह्मा जी का मंदिर है पुष्कर में उसको हम कहते थे सतयुग सो आवर आवर आवर एनसेेस्टर्स जो हमारे एस्ट्रोलॉजी वाले लोग थे वो भारतीय ज्ञान थी लक्ष्मीकांत एस्ट्रोलॉजी हमारे पास कोई लैब नहीं थी कोई टेलिस्कोप नहीं था कोई ऐसा यंत्र नहीं था फिर भी हमारे लोगों ने चंद्रमा सूर्य पृथ्वी अन्य ग्रह कितने बड़े हैं कैसे गति करते हैं क्या करते हैं वो सब लाखों वर्ष पहले बता
1:21:02 रखा था और उसी की क्रम में जब हम बात करते हैं तो बात आती है हमारे सतयुग की तो जो हमने आपसे बताया जी सर कि ये जो राम का युग था त्रेता 13 लाख और सतयुग हम आपसे बता रहे हैं लगभग 17 लाख तो लक्ष्मीकांत कह रहे थे कि सर यही आप ही बोल रहे हो कोई और कहता है ऐसा तो लक्ष्मीकांत आपने पेन निकाल डाल लो और सब लोग लिख लो। सब लोग अलग-अलग जगह बैठे हो। अपने देश के एक बहुत बड़े इतिहासकार रहे
1:21:49 हैं। उनका नाम है प्रोफेसर बी लाल। जी सर। सर उनका नाम उनकी किताब का नाम है महाभारत। तो जब आप यहां से फ्री होना तो गूगल करना और महाभारत का पीडीएफ कॉपी डाउनलोड कर लेना। जी सर और उसमें पढ़ना कि ये जो आपको हमने बताया क्या है तो कल्पना करो कि जो महाभारत जो महाभारत किताब है जो प्रोफेसर बी लाल पश्चिम बंगाल के थे वही किसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी थे। जी जी तो वो पर्यावरण को उन्होंने ऐसे मेजर किया कि सतयुग अपने वैदिक किताबों में लिखा ही
1:22:35 है कि सतयुग था देन उसके बाद राम का युग त्रेता युग आया उसके बाद द्वापर आया और हम और लक्ष्मीकांत कलयुग में है और हम लोग कितना भी अच्छी दवा खा लें कितना अच्छा एंटीबायोटिक खा लें कितने अच्छे क्रीम ले लगा लें कितने कॉस्मेटिक्स कर लें और कितने डाई करके बालों को स्वस्थ अच्छा बना के उसी रूप में रखे जैसा बना बनाया था नेचर ने ब्लैक रखें क्या रखें बट एज तो बढ़ती नहीं जो उल्टा घट जाती है बाल को काला करने के चक्कर में वी डिस्ट्रॉय आवर स्किन बाल को कलर करने डाई डालने में वी डिस्ट्रॉय आवर अदर ऑर्गन्स
1:23:23 वी आर यूजिंग सो मच ऑफ ड्रग्स हम आपसे बता रहे थे कि भारतीय ज्ञान परंपरा और हमारा पर्यावरण कैसा था। तो वी दीपिका वी आर नॉट द ओनली फर्स्ट कंट्री ऑफ द वर्ल्ड हु ओपन ऑपरेटेड रन द यूनिवर्सिटी वी इंडियंस हम भारत के लोग शिक्षक खास करके शिक्षक हम दुनिया में भारत के पहले शिक्षक हैं। जिन्होंने तारों का, ग्रहों का, सूर्य का, चंद्रमा का ज्ञान प्राप्त किया। उसको पढ़ा, उसका
1:24:11 विज्ञान बनाया और उसका नाम दिया ज्योतिष शास्त्र या ज्योतिष विज्ञान। क्या दिया? ज्योतिष विज्ञान। वी आर द फर्स्ट इन द वर्ल्ड विदाउट एनी लैब वी लैंडेड टू टेल एवरीबडी इन द वर्ल्ड अक्रॉस द वर्ल्ड ऑन द पेनोरमा ऑफ एजुकेशन दैट वी हैव डन इट एंड नाउ दिस एस्ट्रोनोलॉजी इज वेल रिकग्नाइज्ड अक्रॉस द वर्ल्ड आप अभी ब्राजील के लोग भी बनारस में पा जाओगे लक्ष्मीकांत बनारस गए होंगे काशी जिसे कहते वहां चटिंग करते हुए ब्राजील के लोग मिल
1:24:57 जाएंगे। आप हमारे राजस्थान आ जाओ। हमारे राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर में तमाम और सबसे ज्यादा पुष्कर में पुष्कर श्रद्धा पुष्कर में ऐसे फॉरेनर्स आप देख सकते हो जो वहां चटिंग से लगा के योग तमाम तरह के भारतीय ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। अपनी उम्र बढ़ा रहे हैं और लौट के जाके अपने कॉलेजेस में, अपने कम्युनिटी में, अपने स्कूल्स में बताते हैं कि इंडियन नॉलेज इज ग्रेट। सो नॉट ओनली यूनिवर्सिटी वी ओपन लक्ष्मीकांत वी
1:25:45 क्रिएटेड एस्ट्रोलॉजी जी। आज दुनिया के 178 कंट्रीज में योग दिवस मनाया गया। जी खाली 66 करोड़ लोग यहां स्नान करने नहीं आए अपने पर्यावरण में। 178 देशों में 21 जून को योग दिवस मनाया जा रहा है। योग किसने शुरू किया? योग आप शिक्षकों ने शुरू किया। हमारे देश के शिक्षकों ने शुरू किया। और योग से बिना किसी साइड इफेक्ट के आप अपने जीवन को लंबा भी कर सकते हो, बड़ा भी कर सकते हो,
1:26:33 स्वस्थ भी रख सकते हो, सक्रिय भी रख सकते हो यादास भी बढ़ा सकते हो। आदि आदि आप समस्त यू आल आर टीचर। आई थिंक यू नो ऑल वेरी वेल। हम तो केवल आपको एक अपने पर्यावरण की बात कह रहे हैं कि कैसे हम सतत विकास के लोग थे और तीसरा दो तो हो गया क्या क्या हो गया फर्स्ट यूनिवर्सिटी ऑफ द वर्ल्ड एंड एस्ट्रोलॉजी एंड थर्ड की बात कर रहे थे योग बट थर्ड केवल योग नहीं है वह है फर्स्ट हेल्थ सिस्टम ऑफ द वर्ल्ड टू व्हाट वी कॉल आयुर्वेदा।
1:27:18 आयुर्वेद हमारे शिक्षकों ने बनाया। दुनिया में पहली बार बनाया। आयुर्वेद बनने के पहले दुनिया में किसी के पास भी हेल्थ स्वास्थ्य विज्ञान नहीं था। आयुर्व विज्ञान नहीं था। और आज का आयुर्व्ञान क्या है? आज का आय विज्ञान लक्ष्मीकांत यह है कि जो हम आपसे कह रहे थे कि हार्ट का डॉक्टर नाम तो कार्डियोलॉजिस्ट है लेकिन उसको नहीं पता कि उसी हार्ट के बिल्कुल बगल में लीवर है। हार्ट की दवा खाओ तो लीवर खराब होने लगता है। लीवर की दवा खाओ तो हार्ट खराब होने लगता है। मतलब लीवर वाला यह नहीं जानता कि बगल
1:28:06 में हार्ट है और जानता है तो यह नहीं जानता कि ऐसी क्या दवा दे कोई नुकसान ना करे शरीर में तो आप सुने होंगे कि कार्डियोलॉजी की दवा तो खा रहा था लेकिन किडनी खराब हो गई लीवर खराब हो गया पनक्रियाज खराब हो गए उदाहरण के लक्ष्मीकांत मैं चैलेंज के साथ आपसे कह रहा हूं कि आप पूरे यूरोप में पांच कॉन्टिनेंट है इस पृथ्वी पे पांच कॉन्टिनेंट है। पांचों कॉन्टिनेंट में आयुर्वेद को निकाल दो तो आप जरा पता करके बता दो कि कौन एलोपैथ वाला शुगर को ठीक कर सकता है।
1:28:54 शुगर को नहीं ठीक कर सकता। शुगर को कम कर सकता है दवा से। जैसे हमारे श्याम जी कह रहे थे कि कुछ लोग मिनरल डाल रहे हैं तो डाल सकते हैं थोड़े दिन के लिए ज्यादा दिन नहीं चलेगा वो लेकिन कोई भी एलोपैथ का डॉक्टर श्याम जी केमिस्ट्री के शिक्षक है। कोई ड्रग आज तक नहीं बनाया जिसके साइड इफेक्ट नहीं हो। तो जो एलोपैथ हमारे शरीर में ही पर्यावरण को शुद्ध नहीं रख सकता वो शरीर के बाहर के पर्यावरणों को शुद्ध कर दे। जो आपका आज का सेशन है उसमें एक टेक अवे है कि नो एलोपैथ
1:29:44 इज हेल्थ फ्रेंडली। एंड व्हाट इज हेल्थ फ्रेंडली? आवर सिस्टम ऑफ मेडिसिन टू व्हाट वी कॉल आयुर्वेद। भाई श्रद्धा मिश्रा आयुर्वेद काम कम करे आयुर्वेद काम कम करे ये तो हम मान सकते हैं। स्लो काम करे ये भी मान सकते हैं। धीरे-धीरे दवाई फायदा करेगी। हम सब जानते हैं। लेकिन आयुर्वेद कभी भी आपके स्वास्थ्य का नुकसान नहीं करेगी। जी जी सर। आयुर्वेद में एक वैद्य योगेश जी आयुर्वेद का जो एक वैद्य होगा वह
1:30:29 आपके बालों से सर के बाल से लगा के पैर तक की स्किन का इलाज एक वैद्य कर सकता है और वो दवा खुद बना सकता है और आपको दे सकता है बिना किसी नुकसान की यह दवा आपको फायदा भी कर सकती है। जोर से कर सकती है। धीरे-धीरे कर सकती है। बहुत टाइम भी लग सकता है। ये सब हो सकता है। बट वन बैग ऐसा शिक्षा अपने समाज में मिला था उसको। मैं तो हमारे देश का था। मैं तो हमारे देश का शिक्षक था। उसने फिर आयुर्वेद में काम किया। तो उसके जो गुरु शिष्य परंपरा थी
1:31:17 लक्ष्मीकांत जी तो सोचो आपको कैसा गुरु रहा होगा कितनी प्रकृति का ज्ञान रखता होगा कितने पर्यावरण को समझता होगा कि पर्यावरण से उसने ऐसा विज्ञान निकाला वनस्पतियों से ऐसा विज्ञान निकाला जिसको उन्होंने आयुर्वेद कहा और यह कहा कि आयुर्वेद का अगर आप साथ लेंगे सेवन करेंगे समझेंगे तो आप बीमार ही नहीं पड़ेंगे। तो जरूरत कहां है तुमको अस्पताल भर्ती होने की? अगर आप फैन केमिस्ट्री के लोग तो विधव समझते हैं। आप भी समझते हो लक्ष्मण का कि प्रिवेंशन इज ऑलवेज बेटर देन क्योर? प्रिवेंशन इज ऑलवेज बेटर देन क्योर? सो
1:32:05 व्हाई यू नॉट प्रैक्टिस प्रिवेंशन? व्हाई यू जंप ऑन क्योर फॉर ऑपरेशन थिएटर इन एम्स? आर इन सम अदर हॉस्पिटल्स हु चार्जेस यू मोर देन 5 लाख 10 लाख 20 लाख फॉर स्माल थिंग्स सो दैट यू मस्ट अंडरस्टैंड हाउ टू गो वि नेचर हाउ टू लिव इन द नेचर वो कितने बुद्धिमान है कि अपने परिवार को ले पहाड़ों पर जाते हैं। दो-तीन दिन रहते हैं एंड अच्छी हवा प्राप्त करके फिर से आकर रिचार्ज होकर काम करते हैं। राइट जी सर जी सर तो ये जो पर्यावरण का साथ है वो हमारे
1:32:51 आयुर्वेद से है वो हमारे योग से है पर्यावरण और नक्षत्रों का ज्ञान हमारे ग्रहों से है और आपको एक बात अवश्य बताना चाहते हैं जी कि जो जिसको हम आज यह कहते हैं कि वह आधुनिक विज्ञान के पिताजी हैं। कौन है? हु इज द फादर ऑफ मॉडर्न साइंस? गैलीलियो गैलीलियाई नाम आप सब ने सुना होगा। गैलीलियो गैलीलियाई को फादर ऑफ मॉडर्न साइंस कहते हैं।
1:33:36 गैलीलियो गैलीलियाई कहां के थे? पता है आपको में किसी को? गैलीलियो गैलीलियाई इटली के थे। पिज़्ज़ा पिज़्ज़ा पिज़्ज़ा नहीं पिज़्ज़ा। पिज़्ज़ा सुना है? यस सर यस अरुण कुमार जी अरुण कुमार जाखड़ जी हमारे राजस्थान से ही है अजय जाखड़ सर क्या बात है अजय अजय हां सर अजय क्या बात है सब राजस्थान के लोग इकट्ठा आज हमसे मिल रहे हो ये भी हमें अच्छा लग रहा है टू सी यू ऑल ऑन वर्चुअल स्क्रीन इज रियली ग्रेट सो मैं आपसे ये बात कह रहा था कि जो मॉडर्न साइंस के फादर
1:34:24 हैं नाम है गैलीलियो गैलीलियाई उनका जन्म हुआ था श्याम जी जरूर बताएंगे वो साइंस के थे तो श्याम जी हमारे साइंस के हैं यस श्याम जी सर गैली गलिया के बारे में जरा बताओ टीचर उसको गैलीलियो इटली के थे पीसा के थे बस इतना ही पता था तो इतना तो मैं इतना तो मैं बता ही रहा हूं आपको 16 सेंचुरी में हुआ था सर उनका जन्म हां हुआ था तो वो क्या थे कि वो आप लोगों की तरह वो भी एक अच्छे शिक्षक थे और बाद में उस पिज़्ज़ा यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी थे वो दिशा में उस समय यूनिवर्सिटी थी वहां तो उन्होंने
1:35:10 क्या किया कि वहां पे जो फादर लोग होते हैं ना यू नो फादर यस लक्ष्मीकांत अब आप बोल नहीं रहे हो कुछ हां जी जी सर जी सर लक्ष्मीकांत जी सर जी सर फादर जो इसमें होते हैं सर अपने क्या कहते हैं इसको सर्च सर्च के अंदर जो होते हैं चर्च के अंदर वो एक प्रकार का पुरोहित जो प्रमुख धर्म गुरु होता है उनको फादर भी कहा जाता है सर फादर कहते हैं तो वो जमाना फादर का था उस जमाने में फादर धर्म गुरु होते थे यूरोप में और जो फादर ने कह दिया ना अजय
1:35:57 कुमार वह ब्रह्म की लकीर हो गई। उसके खिलाफ कोई नहीं बोल सकता। इसीलिए मैं कह रहा था अविनाश जाधव से कि अविनाश पढ़ाई करने के बाद स्टूडेंट्स को बोल देना कि भाई मैंने जो पढ़ाया है इसको सब सच मानो। हमने जो पढ़ाया है इसको सब सत्य मत मान लो कि ऑल स्तुत आप अपने तरह से किताब खोल के पढ़ लो अगर कहीं गलत था तो हमको बता देना आप चैलेंज मत लो कि हम टीचर है हम जो बोलेंगे सब सच बोलेंगे और सच के सिवा कुछ नहीं बोलेंगे ऐसा नहीं है हम लोग सच के सिवा भी बोलते रहते हैं ऐसा बता दो अपने स्टूडेंट्स को तो इससे एक फायदा तो ये
1:36:43 होगा कि जो आजकल स्टूडेंट किताब पढ़ते ही नहीं वो किताब पढ़ना शुरू कर देंगे। कोई स्टूडेंट किताब नहीं पढ़ता आजकल। यस अविनाश हां सर सही बात है। सर हां सही है सर। तो रिफ्रेशर कोर्स में ये जरूर बताना अपने स्टूडेंट्स को। तो दूसरी बात मैं कह रहा था। यस अजय क्या बात हो रही थी आपसे? सर आप यह गैलीलियो गैली के बारे में बता रहे थे कि फादर की बात को कोई गैलीलियो गैलीलियाई जो था वो एक हम लोगों की तरह शिक्षक था वो ज्ञान प्राप्त करने की रुचि थी उसकी जैसे हमारे श्याम सोनी में है श्याम ने बताया कि डाल देते हैं मिनरल थोड़ा तो पता
1:37:30 किया होगा कहीं से तब तो बता रहे ऐसे ही फादर लोग अजय फादर लोगों ने एक फादर लोगों ने एक कांफ्रेंस बुलाई जैसे हम लोग भी कॉन्फ्रेंस बुलाते हैं करते हैं बीचबीच में तो फादर लोगों ने कांफ्रेंस में दो दिन यह ज्ञान देते रहे सभी श्रोताओं को कि सूर्य एक जगह सुबह दिखता है। हमारा जो यह कमरा है इसके ठीक सामने सूर्य दिखता है। दोपहर को हमारे कमरे के दाहिनी तरफ जाता है। शाम शाम होते होते
1:38:17 वो हमारे कमरे के पीछे आ जाता है। ठीक है? तो फादर लोग श्याम जी फादर लोग दो दिन सभी पार्टिसिपेंट्स को ये ज्ञान देते रहे कि सूर्य नहीं घूमता। पृथ्वी घूमती है। ये तो उल्टा ही हो गया। नहीं नहीं ये तो गैलीलियो ने बोला सर ने बोला सुनो बात बात सुनो। अब ध्यान से सुनना इसलिए हम बीच में थोड़ा उल्टा बोल सकते हैं। फादर ने ये बताया कि सूर्य घूमता है। सुबह सामने रहता है। दोपहर को दाहिने तरफ पहुंच जाता है और शाम को पीठ के पीछे हो जाता
1:39:02 है। सूर्य घूमता है और हम जहां हैं हमारा जो यह टेबल है, चेयर है, हमारा जो ये डिपार्टमेंट है, हमारा जो यूनिवर्सिटी है, हमारा जो घर है, ये तो रोज यही रहता है। कहीं नहीं घूमता। तो फादर लोगों ने ज्ञान दिया कि पृथ्वी नहीं घूमती स्थिर रहती है। दरवाजे, खिड़कियां, गेट सब वही रहते हैं। कई सालों से वहीं पर हैं और सूर्य रोज घूमता है। ये उन्होंने ज्ञान दिया। अंतिम दिन जैसे अभी अपने सेशन के लास्ट में हम लोग कहेंगे भाई कुछ प्रश्न ले ले। जो आपका क्वेश्चन हो ले ले कुछ आंसर कर दें। तो
1:39:48 कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन अंत में यह बात आई तो गली गले खड़े हो गए। अब कहा फादर लोगों के खिलाफ बोलने की किसी की हिम्मत नहीं। नोबडी कैन स्पीक अगेंस्ट दी फादर हु आर द धर्म गुरु दे वर सो स्ट्रांग इन देर इकोसिस्टम। बट दिस गैलीलियो गैलीलियाई स्टुड अप एंड ही सेड दैट फादर सॉरी यू आर 100% रॉन्ग टॉकिंग रबिश सिंस लास्ट टू डेज तो सारे फादर तो उनके कान खड़े हो गए लक्ष्मीकांत बोले कौन है भाई जो हमारे फादर के फादर के खिलाफ ही बोल रहा है और
1:40:34 इतना उससे बोल रहा है तो गैलीलियो गैलियाई ने वहां पर यह थरी ही प्रोपाउंड दिस थरी उन्होंने यह थरी संपादित किया कि पृथ्वी माता भारत में इसको पृथ्वी माता कहते हैं। उन्होंने कहा वहां उन्होंने कहा कि आप एस्टोलॉजी पढ़ो। वहां पृथ्वी घूमती है। चंद्रमा घूमती है। सूर्य भी घूमते हैं। लेकिन सूर्य स्थिर इसलिए दिखाई रखते हैं कि इनके सापेक्ष घूमते हैं। सारे ग्रह उनके चारों तरफ घूमते हैं। तो ये कहा जा सकता है कि सूर्य नहीं घूमते। पृथ्वी ही घूमती है। एकदम उल्टा कह
1:41:20 दिया उन्होंने नतीजा बहुत मतलब कहानी लंबी है। कुछ शॉर्टकट कर रहा हूं आपसे कि गैलीलियो गैलीलियाई को घर में नजरबंद करा दिया फादर लोगों ने और ये कहा कि अगर यह सोसाइटी में जाएगा कम्युनिटी में जाएगा तो फादर बूढ़ी बेइज्जती होगी। और फादर की बेेजज्जती होगी तो फिर हमारा जो यह धर्म शास्त्र है चर्च का जो हमारे लक्ष्मीकांत कह रहे थे वो चर्च का तो महत्व समाज में कम हो जाएगा यू अंडरस्टैंड द इको सिस्टम ऑफ एनवायरनमेंट इन दैट पीरियड 16 सेंचुरी नतीजा क्या निकला
1:42:07 नतीजा यह निकला कि थोड़ा दिन और बीता गैलीलियो गैलीलियाई को कहा ऐसा गया है लिखा तो नहीं गया कहा गया है ऐसा कि गैलीलियो गैलीई को नजर बंद करने के बाद उनका गला दबा के हत्या कर दी गई और किसने किया फादर लोगों ने एक ग्रुप बनाया जिसको कहते थे यूरेटस यूरेटस क्या था यूरेटस वैसे ही था जैसे जैसे आजकल तमाम राजनीति में पार्टियां अपने अपने दल बनाई है। कोई लाल टोपी पहनता है, कोई सफेद टोपी पहनता है और वो हमारे यूनिवर्सिटी में भी आप देखते होंगे कि कोई
1:42:53 स्टूडेंट का यूनियन है, कोई सोसाइटी का यूनियन है, वो इलेक्शन लड़ेगा, वो आपके सामने आकर खड़ा हो जाएगा और आपसे बहस भी करेगा और आप यह मान सकते हैं कि वो सब नियमों से नहीं चलते। बदमाशी और गुंडई भी करते हैं। करते हैं कि नहीं? हां सर। करते हैं। आपके यहां सर बहुत सारी घटनाएं घटी है सर ऐसी घटी है। ये संजू आपके यहां जी सर बिल्कुल। बिल्कुल। तो वैसा ही एक ग्रुप बनाया। उसका नाम दिया यूरेटस। यूरेटस। यूरेटस बिकम अ गैंग ऑफ अनवांटेड मैन आर वुमेन एंड दे क्रिएटेड न्यूसेंस
1:43:41 अक्रॉस दिस कांसेप्ट ऑफ गैलीलियो गैली और ऐसा भी माना जाता है कि उन्हीं लोगों ने या जिन लोगों ने भी उनकी हत्या हो गई गैलियो गैलियाई की डाइड परंतु जब भारतीय ज्ञान को समझा गया, पढ़ा गया, यूरोप में आधुनिक मशीनें आई। बड़ी-बड़ी ऐसे दूरदर्शी मशीनें आई सुनीता जी जिसको बहुत दूर तक देखा जा सकता है जिसके माध्यम से तो यह तय हो गया कि गैलीलियो गैलीलियाई सही थे और अब उनको हम आधुनिक विज्ञान का
1:44:26 फादर कहते हैं। दिस स्टोरी ट्रांसलेट्स द नॉलेज ऑफ इंडियंस। आज नासा है उनके पास खगोल शास्त्र का बहुत बड़े-बड़े मशीनें हैं। लेकिन हमारे यहां तो कोई मशीन नहीं थी कि हम बता दिए कि नक्षत्र क्या होते हैं। हम ये बता दिए भगवान भी होते हैं। कोई नहीं मानता था अंजू कि भगवान होते हैं। श्रद्धा जीव कोई नहीं श्रद्धा करता था भगवान से श्रद्धा नाम की चीज ही नहीं थी वो कहते थे भगवान क्या होता है भाई लेकिन अभी बहुत
1:45:11 हाल में कब 2014 में 2014 2014 में जो सन फार्मा लैब है फ्रांस में वहां पर दो वैज्ञानिक एक भारत के थे एस एन बोस और एक ब्रिटेन के थे हग्स पीटर हेग्स दोनों ने मिलके एक शोध किया रिसर्च किया अनेक वर्षों का रिसर्च किया और आप सब सुने होंगे कि उन्होंने एक नए पर्यावरण में एक नए पार्टिकल की खोज की जिसका नाम है ओसान पार्ट पार्टिकल
1:46:00 तो पीटर हिं्स एंड एसए बोस दोनों के नाम को मिलाकर उसका कहा गया बोसान एंड बोसान को सुनीता भार्गव जी उसी को कहा गया दिस गॉड पार्टिकल दिस इज गॉड पार्टिकल तो पूरा यूरोप मानता है कि जब वैज्ञानिक लोग कह रहे हैं और फ्रांस की लैब में कह रहे हैं कि बोसान इस द गॉड एंड बोसान बिहेव्स लाइक ए गॉड पार्टिकल। तो भारत के शिक्षक, भारत के आचार्य, भारत के गुरु लोग तो लाखों करोड़ों वर्ष पहले कह चुके थे कि यह है भगवान। और श्याम जी बैठे हैं। योगेश बैठे हैं।
1:46:47 केमिस्ट्री के हैं। योगेश केमिस्ट्री में यह कहते हैं हमारे केमिस्ट्री के लोग ये बताते हैं कि जो अणु है अणु से नीचे परमाणु है। यस श्याम और परमाणु जो है वो बना हुआ है इलेक्ट्रॉन से, प्रोटॉन से, न्यूट्रॉन से। आप सब सुने होंगे। यस डॉक्टर कामिनी दुबे दिख पड़ रही है। आपका क्या विषय है सर? बॉटनी बॉटनी। अब देखो काफी सही शिक्षक मिल गए हैं। तो बॉटनी वाले भी बताते हैं कि भाई ये तो पहले तो प्लांट है, उसका फ्लावर है, लीफ है, इसका स्टेम है, इसका रूट है। तो केमिस्ट्री वाले बताते हैं कि इसके लीफ जो
1:47:34 है ना वो एटम से बनी है। तो एटम किससे बना है? यस श्याम जी बताओ थोड़ा इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन अब इलेक्ट्रॉन कहां रहता है ऑर्बिट और प्रोटन न्यूट्रॉन न्यूक्लियस न्यूक्लियस में रहता है जी सर और इसमें कौन घूमता है कहां घूमता इलेक्ट्रॉन कहां घूमता है ऑर्बिट में ऑर्बिट श्रद्धा आप कुछ कह रहे हो सर ऑर्बिट में न्यूक्लियस के चारों तरफ
1:48:21 चारों तरफ घूमता है। अब श्रद्धा ये बताओ कि ये फ्लावर से, लीफ से, स्टेम से, रूट से होते हुए हम लोग सीधे चले गए एटम पे। यस नेहा गौतम नेहा गहलोत यस सर और केमिस्ट्री के हमारी श्रद्धा बता रही है श्याम जी बता रहे हैं कि वो जो प्रोटॉन है और न्यूट्रॉन है वो तो अंदर रहता है उसके चारों तरफ इलेक्ट्रॉन घूमता है। तो श्रद्धा मिश्रा जी ये बताओ कि इलेक्ट्रॉन घुमाता कौन है? केमिस्ट्री में कोई व्यवस्था है श्याम जी
1:49:06 जी सर है थ्योरी कौन सी थ्योरी बोर ने एक्सप्लेन किया था अट्रक्शन रिपल्शन दोनों इक्वल होते हैं तो घूमता रहता है ये बोहर ने कब कहा ये बात तो याद नहीं है सर पर एक उन्होंने पोस्टेट दिया था अपना अरे भाई आपको याद नहीं है याद तो पूछ सकते है ना श्रद्धा से पूछ सकते हैं श्रद्धा बताओ ये बोहर थरी कब आई सर मुझे याद नहीं एक्चुअली हम होम साइंस के हैं सर अरे होम साइंस भी साइंस होता है केमिस्ट्री सब में होता है इलेक्ट्रॉन हर जगह पढ़ा है पढ़ा है पर सर भूल गया अभी
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