Research Aptitude Updated Marathon | UGC NET Paper-1 Unit-2 | Concept + PYQs #ugcnet #ugcnetpaper1

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो UGC NET Paper 1 की यूनिट 2 पर आधारित है, जिसमें रिसर्च एप्टीट्यूड के महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। इसमें रिसर्च के प्रकार, विशेषताएँ, वैधता, विश्वसनीयता, आँकड़ों के प्रकार, और नैतिकता जैसे विषयों पर चर्चा की गई है। वीडियो में विभिन्न प्रकार के रिसर्च डिज़ाइन, जैसे कि एक्सपेरिमेंटल, डिस्क्रिप्टिव, हिस्टोरिकल, और एक्शन रिसर्च को समझाया गया है। इसके अतिरिक्त, परिकल्पना निर्माण, सैंपलिंग तकनीकें, और प्लेगरिज्म से बचने के उपायों पर भी प्रकाश डाला गया है।

मुख्य बातें:

  • रिसर्च की विशेषताएँ और प्रकार
  • वैधता और विश्वसनीयता के प्रकार
  • सांख्यिकीय परीक्षण और उनका उपयोग
  • रिसर्च में नैतिकता और प्लेगरिज्म से बचाव

परिचय

इस वीडियो में UGC NET Paper 1 की यूनिट 2, रिसर्च एप्टीट्यूड पर चर्चा की गई है। इसमें जून 2025 और दिसंबर 2024 के PYQs (पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र) शामिल हैं। यह मैराथन दिसंबर 2025 या उसके बाद की तैयारी करने वालों के लिए भी उपयोगी है। इस मैराथन में 10 यूनिट्स को कवर किया जाएगा और यह PYQs के साथ पर्याप्त होगी। इसके अलावा, पहले की 79 क्लासेस भी प्रैक्टिस के लिए उपलब्ध हैं। यह मैराथन सितंबर में पूरी करने की कोशिश की जा रही है ताकि अक्टूबर-नवंबर में रिवीजन के लिए समय मिल सके। इन मैराथनों की PDF अक्टूबर के बाद उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी, जिसके लिए कुछ शुल्क लगेगा।

टीचिंग एप्टीट्यूड में अतिरिक्त जानकारी

टीचिंग एप्टीट्यूड के लिए पिछली क्लास में कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है, जिसमें EPG पाठशाला (2012 में शुरू), विद्या मित्र (Inflibnet Center का प्रोजेक्ट, 2014 में शुरू), और स्वयं (32 DTH चैनल्स के साथ शुरू, अब 40) शामिल हैं। इसके अलावा, FASKAN (Food Safety and Knowledge Assimilation Network) के बारे में भी बताया गया है, जो सरकार की नई PDF में शामिल है।

रिसर्च एप्टीट्यूड का सिलेबस

रिसर्च एप्टीट्यूड के सिलेबस में रिसर्च, उसके प्रकार, विशेषताएँ, पॉजिटिविज्म और पोस्ट-पॉजिटिविज्म दृष्टिकोण, और रिसर्च मेथड्स शामिल हैं। रिसर्च एप्टीट्यूड और रिसर्च मेथोडोलॉजी में अंतर होता है। रिसर्च एप्टीट्यूड पढ़ाने की तरफ एक दृष्टिकोण है, जबकि रिसर्च मेथोडोलॉजी किसी विशेष विषय पर रिसर्च करते समय उपयोग की जाने वाली रणनीतियाँ और तकनीकें हैं। रिसर्च एप्टीट्यूड आपकी नेचुरल टेंडेंसी है रिसर्च के प्रति।

रिसर्च: परिभाषा और विशेषताएँ

रिसर्च का मतलब है किसी चीज को दोबारा खोजना। यह एक सावधानीपूर्वक और व्यवस्थित जांच है, जिसका उद्देश्य ज्ञान की किसी भी शाखा में नए तथ्यों को जोड़ना है। क्रेस्वल के अनुसार, यह जानकारी एकत्र करने और विश्लेषण करने की एक प्रक्रिया है ताकि किसी विषय या मुद्दे की समझ बढ़ाई जा सके। रिसर्च वैज्ञानिक प्रकृति का होता है और इसमें निष्पक्ष मूल्यांकन शामिल होता है। वैज्ञानिक विधि में समस्या की पहचान, डेटा का संग्रह, परिकल्पना का निर्माण और अनुभवजन्य परीक्षण शामिल हैं। रिसर्च सामान्य ज्ञान या अनुभव पर आधारित नहीं होता है, बल्कि यह ज्ञान को बढ़ाने या मौजूदा ज्ञान में जोड़ने के लिए एक व्यवस्थित जांच है। कुक ने रिसर्च के लिए एक संक्षिप्त नाम दिया है: Rational way of thinking, Expert or exhaustive treatment, Search and solution, Exactness, Analysis, Relationship of facts, Critical observation, Careful planning, Constructive attitude, Condensed generalization, Honesty and hard working।

अच्छे रिसर्च की विशेषताएँ

एक अच्छे रिसर्च में वस्तुनिष्ठता, विश्वसनीयता, वैधता, सटीकता, विश्वसनीयता, सामान्यीकरण, अनुभवजन्य, व्यवस्थित, नियंत्रित कारक, तार्किक, चक्रीय और दोहराने योग्य विशेषताएँ होती हैं। वस्तुनिष्ठता का मतलब है बिना किसी पूर्वाग्रह के रिसर्च करना। वस्तुनिष्ठता सुनिश्चित करने के लिए, पूर्ण रिकॉर्ड रखना, मानकीकरण करना और अवधारणाओं का परिचालन करना महत्वपूर्ण है। वैधता का मतलब है किसी उपकरण की क्षमता को मापना जो वह दावा कर रहा है। विश्वसनीयता का मतलब है परिणामों में स्थिरता। विश्वसनीयता गुणांक हमेशा 0 से +1 के बीच होता है।

वैधता के प्रकार

वैधता के तीन मुख्य प्रकार हैं: कंटेंट वैलिडिटी, क्राइटेरिया वैलिडिटी और कंस्ट्रक्ट वैलिडिटी। कैम्पबेल और स्टेनली ने आंतरिक और बाहरी वैधता के दो प्रकार बताए हैं। ब्राश और ग्लास ने बाहरी वैधता को जनसंख्या और पारिस्थितिक वैधता में विभाजित किया है। कंटेंट वैलिडिटी का मतलब है कि कंटेंट प्रासंगिक होना चाहिए। फेस वैलिडिटी का मतलब है कि टूल को देखकर ही समझ आ जाना चाहिए। क्राइटेरिया वैलिडिटी का मतलब है कि माप एक स्थापित मानदंड के साथ तुलना करें। क्राइटेरिया वैलिडिटी के दो प्रकार हैं: समवर्ती वैधता और भविष्य कहनेवाला वैधता। कंस्ट्रक्ट वैलिडिटी का मतलब है कि टूल एक विशिष्ट विशेषता को माप रहा है। कंस्ट्रक्ट वैलिडिटी के दो प्रकार हैं: अभिसारी और भिन्न वैधता।

आंतरिक और बाहरी वैधता

आंतरिक वैधता का संबंध स्वतंत्र और आश्रित चर के बीच संबंध से है। आंतरिक वैधता के खतरे में भ्रम, चयन पूर्वाग्रह, इतिहास, उपकरण परिवर्तन, दोहराव परीक्षण, परिपक्वता, प्रसार, मृत्यु दर, प्रायोगिक पूर्वाग्रह, माध्य की ओर प्रतिगमन और क्षतिपूर्ति प्रतिद्वंद्विता शामिल हैं। बाहरी वैधता का संबंध निष्कर्षों को सामान्य करने की क्षमता से है। बाहरी वैधता के खतरे में योग्यता, उपचार, बातचीत, स्थितियाँ, पूर्व-परीक्षण प्रभाव, पोस्ट-परीक्षण प्रभाव और रोसेन्थल, पिग्मेलियन प्रभाव शामिल हैं।

विश्वसनीयता को मापने के तरीके

विश्वसनीयता को मापने के तरीकों में टेस्ट-रीटेस्ट विधि, समकक्ष या समानांतर फॉर्म विधि, स्प्लिट-हाफ विधि, कुडर रिचर्डसन विधि और इंटर रेटर विश्वसनीयता शामिल हैं। टेस्ट-रीटेस्ट विधि में एक ही टेस्ट को कुछ समय बाद दोबारा लेना शामिल है। समकक्ष या समानांतर फॉर्म विधि में दो अलग-अलग टेस्ट का उपयोग करना शामिल है जिनमें समान कठिनाई स्तर होता है। स्प्लिट-हाफ विधि में एक टेस्ट को दो बराबर भागों में विभाजित करना और उनकी तुलना करना शामिल है। इंटर रेटर विश्वसनीयता में दो अलग-अलग लोगों द्वारा एक ही चीज को रेट करना शामिल है।

उपयोगिता

उपयोगिता का मतलब है कि कोई टेस्ट कितना उपयोगी है। एक उपयोगी टेस्ट वस्तुनिष्ठ, लागत प्रभावी, समय बचाने वाला, प्रयास बचाने वाला और प्रशासित करने में आसान होना चाहिए।

पॉजिटिविस्ट और पोस्ट-पॉजिटिविस्ट पैराडाइम

पॉजिटिविस्ट पैराडाइम अनुभवजन्य ज्ञान पर निर्भर करता है और वैज्ञानिक पद्धति को सच्चाई और वस्तुनिष्ठता को देखने का एकमात्र तरीका मानता है। यह विज्ञान को नियतात्मक, कारण और प्रभाव संबंध बताने वाला और यंत्रवत मानता है। पोस्ट-पॉजिटिविस्ट पैराडाइम मूल मूल्यों को अस्वीकार करता है और मानता है कि अवलोकन त्रुटि के अधीन हैं। इसे क्रिटिकल रियलिस्ट भी कहा जाता है क्योंकि यह मानता है कि हर विधि में कुछ त्रुटि होती है। पोस्ट-पॉजिटिविज्म शुद्ध वस्तुनिष्ठता को प्राप्त नहीं किया जा सकता है और रिसर्च व्यापक है।

रिसर्च के प्रकार

रिसर्च के प्रकारों में बेसिक रिसर्च, एप्लाइड रिसर्च और एक्शन रिसर्च शामिल हैं। बेसिक रिसर्च का उद्देश्य नए ज्ञान की खोज करना है। एप्लाइड रिसर्च का उद्देश्य समस्याओं का समाधान खोजना है। एक्शन रिसर्च का उद्देश्य स्थानीय समस्याओं के तत्काल समाधान प्रदान करना है। तर्क के आधार पर, रिसर्च दो प्रकार की होती है: डिडक्शन और इंडक्शन। डिडक्टिव दृष्टिकोण सामान्य से विशिष्ट की ओर बढ़ता है, जबकि इंडक्टिव दृष्टिकोण विशिष्ट से सामान्य की ओर बढ़ता है। गुणात्मक और मात्रात्मक रिसर्च भी दो प्रकार हैं। गुणात्मक रिसर्च भावनाओं और मानवीय संबंधों पर केंद्रित है, जबकि मात्रात्मक रिसर्च संख्याओं और आंकड़ों पर केंद्रित है।

गुणात्मक और मात्रात्मक रिसर्च

गुणात्मक रिसर्च में बॉटम-अप दृष्टिकोण का उपयोग किया जाता है, जिसमें विशिष्ट अवलोकनों से सामान्य निष्कर्ष निकाले जाते हैं। मात्रात्मक रिसर्च में टॉप-डाउन दृष्टिकोण का उपयोग किया जाता है, जिसमें सामान्य सिद्धांतों से विशिष्ट निष्कर्ष निकाले जाते हैं। गुणात्मक रिसर्च में मौखिक डेटा, गहन साक्षात्कार और चर्चाएँ शामिल होती हैं, जबकि मात्रात्मक रिसर्च में संख्याएँ और आँकड़े शामिल होते हैं। गुणात्मक रिसर्च में गैर-संभाव्यता सैंपलिंग का उपयोग किया जाता है, जबकि मात्रात्मक रिसर्च में संभाव्यता सैंपलिंग का उपयोग किया जाता है। गुणात्मक रिसर्च प्रक्रिया-उन्मुख होती है, जबकि मात्रात्मक रिसर्च परिणाम-उन्मुख होती है।

डिस्क्रिप्टिव, हिस्टोरिकल और एक्सपेरिमेंटल रिसर्च

डिस्क्रिप्टिव रिसर्च का उद्देश्य यह वर्णन करना है कि क्या है। हिस्टोरिकल रिसर्च का उद्देश्य अतीत का अध्ययन करना है। एक्सपेरिमेंटल रिसर्च का उद्देश्य कारण और प्रभाव संबंधों का अध्ययन करना है। डिस्क्रिप्टिव रिसर्च में गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों विधियों का उपयोग किया जा सकता है, जबकि एक्सपेरिमेंटल रिसर्च में मुख्य रूप से मात्रात्मक विधियों का उपयोग किया जाता है।

एक्स पोस्ट फैक्टो स्टडी

एक्स पोस्ट फैक्टो स्टडी में, घटना घटित होने के बाद कारणों का पता लगाया जाता है। एक्सपेरिमेंटल रिसर्च में स्वतंत्र चर पर नियंत्रण होता है, लेकिन एक्स पोस्ट फैक्टो में शोधकर्ता सीधे स्वतंत्र चर में हेरफेर नहीं कर सकता है।

अन्य प्रकार के रिसर्च

एक्सप्लोरेटरी रिसर्च का उद्देश्य किसी विषय का पता लगाना है। एक्सप्लेनेटरी रिसर्च का उद्देश्य किसी विषय को समझाना है। एनालिटिकल रिसर्च का उद्देश्य जानकारी का विश्लेषण करना है। मिक्स्ड रिसर्च में गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों विधियों का उपयोग किया जाता है। ट्रायंगुलेशन में विभिन्न दृष्टिकोणों और डेटा स्रोतों का उपयोग किया जाता है। नॉर्मेटिव रिसर्च में नियमों और मूल्यों के आधार पर क्या होना चाहिए, इस पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। ग्राउंडेड थ्योरी रिसर्च में डेटा संग्रह से संतुष्ट होने तक डेटा एकत्र किया जाता है। नैरेटिव रिसर्च में कहानियों को दोबारा बताया जाता है। केस स्टडी में किसी चीज का गहराई से अध्ययन किया जाता है। एथनोग्राफिक रिसर्च में लोगों और उनकी संस्कृति का व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है। ट्रेंड एनालिसिस में दो मात्रात्मक संस्थाओं के बीच ट्रेंड का विश्लेषण किया जाता है।

चर (Variables)

चरों के प्रकारों में स्वतंत्र, बाहरी, मध्यवर्ती और आश्रित चर शामिल हैं। स्वतंत्र चर वह है जिसे बदला जा सकता है, और आश्रित चर वह है जो स्वतंत्र चर पर निर्भर करता है। मध्यवर्ती चर स्वतंत्र और आश्रित चर के बीच एक लिंक दिखाता है। बाहरी चर वह है जो संबंध को प्रभावित कर सकता है लेकिन ज्ञात नहीं है। सक्रिय चर वह है जिसे हेरफेर किया जाता है, और विशेषता चर वह है जिसे हेरफेर नहीं किया जाता है। श्रेणीबद्ध चर में स्थिर, द्विअर्थी और बहुअर्थी शामिल हैं। निरंतर चर में प्रत्येक सेकंड को गिना जा सकता है, और असतत चर में स्पष्ट अंतर होता है। एक भ्रमित करने वाला चर वह है जिसे सीधे तौर पर देखा या नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।

बाहरी चर को नियंत्रित करना

यादृच्छिकरण, मिलान और सामान्यीकरण के माध्यम से बाहरी चर को नियंत्रित किया जा सकता है। मिलान का मतलब है कि रिसर्च प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सभी चीजों को बराबर रखना। यादृच्छिकरण का मतलब है कि समूहों को बेतरतीब ढंग से चुना जाता है।

चरों को मापने के पैमाने

चरों को मापने के लिए चार पैमाने हैं: नाममात्र पैमाना, क्रमिक पैमाना, अंतराल पैमाना और अनुपात पैमाना। नाममात्र पैमाना सबसे सरल पैमाना है और इसका उपयोग केवल वर्गीकरण के लिए किया जाता है। क्रमिक पैमाने में क्रम होता है, लेकिन कोई अंतराल नहीं होता है। अंतराल पैमाने में अंतराल होता है, लेकिन कोई शून्य नहीं होता है। अनुपात पैमाने में एक वास्तविक शून्य होता है।

सैंपलिंग

सैंपलिंग एक बड़ी आबादी से कुछ बच्चों का चयन करने की प्रक्रिया है। सैंपलिंग दो प्रकार की होती है: संभाव्यता आधारित (यादृच्छिक सैंपलिंग) और गैर-संभाव्यता आधारित (गैर-यादृच्छिक सैंपलिंग)। संभाव्यता सैंपलिंग में, प्रत्येक सदस्य के पास नमूने में चुने जाने का समान मौका होता है। गैर-संभाव्यता सैंपलिंग में, प्रत्येक सदस्य के पास नमूने में चुने जाने का समान मौका नहीं होता है।

संभाव्यता सैंपलिंग के प्रकार

संभाव्यता सैंपलिंग के प्रकारों में सरल यादृच्छिक सैंपलिंग, स्तरीकृत यादृच्छिक सैंपलिंग, क्लस्टर सैंपलिंग, व्यवस्थित सैंपलिंग और बहु-चरणीय सैंपलिंग शामिल हैं। सरल यादृच्छिक सैंपलिंग में, प्रत्येक सदस्य के पास नमूने में चुने जाने का समान मौका होता है। स्तरीकृत यादृच्छिक सैंपलिंग में, आबादी को समूहों में विभाजित किया जाता है और फिर प्रत्येक समूह से सदस्यों को बेतरतीब ढंग से चुना जाता है। क्लस्टर सैंपलिंग में, आबादी को समूहों में विभाजित किया जाता है और फिर कुछ समूहों को बेतरतीब ढंग से चुना जाता है। व्यवस्थित सैंपलिंग में, प्रत्येक nth सदस्य को चुना जाता है। बहु-चरणीय सैंपलिंग में, कई चरणों में सैंपलिंग की जाती है।

गैर-संभाव्यता सैंपलिंग के प्रकार

गैर-संभाव्यता सैंपलिंग के प्रकारों में आकस्मिक सैंपलिंग, उद्देश्यपूर्ण सैंपलिंग, कोटा सैंपलिंग और स्नोबॉल सैंपलिंग शामिल हैं। आकस्मिक सैंपलिंग में, प्रतिभागियों को सुविधा के अनुसार चुना जाता है। उद्देश्यपूर्ण सैंपलिंग में, प्रतिभागियों को जानबूझकर चुना जाता है। कोटा सैंपलिंग में, प्रतिभागियों को कोटा के अनुसार चुना जाता है। स्नोबॉल सैंपलिंग में, प्रारंभिक प्रतिभागियों से अन्य प्रतिभागियों को संदर्भित करने के लिए कहा जाता है।

परिकल्पना

परिकल्पना एक अप्रमाणित कथन है जिसे सिद्ध करने की आवश्यकता होती है। यह स्पष्ट, विशिष्ट और परीक्षण योग्य होना चाहिए। परिकल्पना के स्रोत अकादमिक साहित्य, औपचारिक साक्ष्य, अनुभवजन्य साक्ष्य या अवलोकन हो सकते हैं। एक अच्छी परिकल्पना सरल, सटीक, प्रासंगिक, संक्षिप्त और स्पष्ट होनी चाहिए। परिकल्पना के प्रकारों में शून्य परिकल्पना और वैकल्पिक परिकल्पना शामिल हैं। शून्य परिकल्पना मानती है कि दो चर के बीच कोई संबंध नहीं है। वैकल्पिक परिकल्पना मानती है कि दो चर के बीच संबंध है।

शून्य और वैकल्पिक परिकल्पना

शून्य परिकल्पना को हमेशा परीक्षण किया जाता है। यदि शून्य परिकल्पना को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो वैकल्पिक परिकल्पना को स्वीकार किया जाता है। वैकल्पिक परिकल्पना दो प्रकार की होती है: गैर-दिशात्मक और दिशात्मक। गैर-दिशात्मक परिकल्पना मानती है कि दो चर के बीच संबंध है, लेकिन यह नहीं बताती है कि किस दिशा में। दिशात्मक परिकल्पना मानती है कि दो चर के बीच संबंध है और यह भी बताती है कि किस दिशा में।

परिकल्पना का निर्माण और महत्व का स्तर

परिकल्पना बनाने के लिए, पहले एक रिसर्च प्रश्न चुनें, फिर शून्य परिकल्पना बनाएं, फिर परिकल्पना का प्रकार निर्धारित करें, और अंत में साहित्य समीक्षा के आधार पर इसे परिष्कृत करें। महत्व का स्तर (alpha) शून्य परिकल्पना को अस्वीकार करने की संभावना है जब वह सही हो। महत्व के दो स्तर होते हैं: 5% और 1%। 1% अधिक कठोर है।

शून्य परिकल्पना का परीक्षण

शून्य परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए, पहले शून्य परिकल्पना और वैकल्पिक परिकल्पना को निर्दिष्ट करें, फिर महत्व का स्तर तय करें, फिर डेटा एकत्र करें, फिर एक सांख्यिकीय परीक्षण लागू करें, फिर परिणामों की व्याख्या करें और एक निष्कर्ष निकालें। यदि गणना की गई वैल्यू तालिका वैल्यू से अधिक है, तो डेटा महत्वपूर्ण है और शून्य परिकल्पना को अस्वीकार कर दिया जाता है। यदि p-वैल्यू alpha वैल्यू से कम है, तो डेटा महत्वपूर्ण है।

टाइप 1 और टाइप 2 त्रुटियाँ

टाइप 1 त्रुटि तब होती है जब शून्य परिकल्पना को अस्वीकार कर दिया जाता है जब वह सही होती है। टाइप 2 त्रुटि तब होती है जब शून्य परिकल्पना को स्वीकार कर लिया जाता है जब वह गलत होती है। टाइप 1 त्रुटि को कम करने के लिए, महत्व के स्तर को कम किया जा सकता है। टाइप 2 त्रुटि को कम करने के लिए, नमूना आकार बढ़ाया जा सकता है।

रिसर्च के चरण

रिसर्च के चरणों में रिसर्च समस्या का निर्माण, साहित्य समीक्षा, रिसर्च डिज़ाइन का वैचारिकरण, रिसर्च उपकरण का निर्माण, डेटा संग्रह के लिए नमूना का चयन, रिसर्च प्रस्ताव लिखना, डेटा एकत्र करना, डेटा का विश्लेषण और व्याख्या करना और अंत में एक रिसर्च रिपोर्ट लिखना शामिल है।

सांख्यिकी

सांख्यिकी डेटा को एकत्र करने, वर्गीकृत करने, प्रस्तुत करने और व्याख्या करने की एक विधि है। सांख्यिकी के प्रकारों में पैरामीट्रिक, गैर-पैरामीट्रिक और वर्णनात्मक शामिल हैं। केंद्रीय प्रवृत्ति के माप में माध्य, माध्यिका और बहुलक शामिल हैं। फैलाव के माप में रेंज, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन और मानक विचलन शामिल हैं।

जेड स्कोर और टी स्कोर

जेड स्कोर एक माप है जो बताता है कि एक डेटा बिंदु माध्य से कितने मानक विचलन दूर है। टी स्कोर जेड स्कोर का एक रूपांतरण है। जेड स्कोर की गणना करने का सूत्र है: (कच्चा डेटा - माध्य) / मानक विचलन। टी स्कोर की गणना करने का सूत्र है: (जेड * 10) + 50।

संबंध का माप और अनुमानित सांख्यिकी

संबंध को मापने के लिए सहप्रसरण, कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक और रैंक सहसंबंध का उपयोग किया जाता है। अनुमानित सांख्यिकी में, पैरामीटर जनसंख्या इकाई को मापता है, जबकि आँकड़ा नमूने को मापता है।

पैरामीट्रिक और गैर-पैरामीट्रिक सांख्यिकी

पैरामीट्रिक सांख्यिकी कुछ मान्यताओं पर चलती है, जैसे कि डेटा अंतराल या अनुपात पैमाने पर होना चाहिए, जनसंख्या सामान्य रूप से वितरित होनी चाहिए और नमूने में समान विचरण होना चाहिए। गैर-पैरामीट्रिक सांख्यिकी इन मान्यताओं पर नहीं चलती है। पैरामीट्रिक सांख्यिकी के उदाहरणों में टी-टेस्ट, एफ-टेस्ट, जेड-टेस्ट और एनोवा शामिल हैं। गैर-पैरामीट्रिक सांख्यिकी के उदाहरणों में काई-स्क्वायर टेस्ट, स्पीयरमैन रैंक अंतर विधि और कैंडल का ताऊ शामिल हैं।

केंद्रीय प्रवृत्ति का माप

केंद्रीय प्रवृत्ति के माप में माध्य, माध्यिका और बहुलक शामिल हैं। माध्य सभी डेटा बिंदुओं का औसत है। माध्यिका डेटा बिंदुओं को क्रम में व्यवस्थित करने के बाद मध्य बिंदु है। बहुलक वह मान है जो सबसे अधिक बार होता है।

टी-टेस्ट और जेड-टेस्ट

टी-टेस्ट का उपयोग दो नमूनों के माध्य की तुलना करने के लिए किया जाता है जब जनसंख्या विचरण अज्ञात होता है। जेड-टेस्ट का उपयोग दो नमूनों के माध्य की तुलना करने के लिए किया जाता है जब जनसंख्या विचरण ज्ञात होता है।

एफ-टेस्ट और एनोवा

एफ-टेस्ट का उपयोग दो समूहों के बीच विचरण की तुलना करने के लिए किया जाता है। एनोवा (विचरण का विश्लेषण) का उपयोग दो से अधिक समूहों के बीच माध्य की तुलना करने के लिए किया जाता है।

सामान्य संभाव्यता वक्र

सामान्य संभाव्यता वक्र एक सममित वक्र है जिसमें माध्य, माध्यिका और बहुलक समान होते हैं। वक्र के नीचे का क्षेत्र 1 होता है।

विषमता और कर्टोसिस

विषमता वक्र की समरूपता का माप है। कर्टोसिस वक्र की चपटापन का माप है।

अध्ययन डिजाइन

अध्ययन डिजाइन में क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन, अनुदैर्ध्य अध्ययन, पूर्व और बाद के अध्ययन, पूर्वव्यापी अध्ययन और संभावित अध्ययन शामिल हैं। क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन में एक ही समय में डेटा एकत्र किया जाता है। अनुदैर्ध्य अध्ययन में समय के साथ डेटा एकत्र किया जाता है। पूर्व और बाद के अध्ययन में हस्तक्षेप से पहले और बाद में डेटा एकत्र किया जाता है। पूर्वव्यापी अध्ययन में अतीत में हुई घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। संभावित अध्ययन में भविष्य में होने वाली घटनाओं का अध्ययन किया जाता है।

एक्सपेरिमेंटल स्टडी डिजाइन

एक्सपेरिमेंटल स्टडी डिजाइन में आफ्टर-ओनली एक्सपेरिमेंटल डिजाइन, बिफोर एंड आफ्टर डिजाइन, कंट्रोल ग्रुप डिजाइन, डबल कंट्रोल डिजाइन, तुलनात्मक स्टडी डिजाइन, मैच्ड कंट्रोल एक्सपेरिमेंटल डिजाइन और प्लेसीबो डिजाइन शामिल हैं।

क्वासी-एक्सपेरिमेंटल डिजाइन

क्वासी-एक्सपेरिमेंटल डिजाइन में, समूहों को समान नहीं माना जाता है। नॉन-इक्विवेलेंट कंट्रोल ग्रुप डिजाइन में, एक कंट्रोल ग्रुप और एक एक्सपेरिमेंटल ग्रुप होता है, लेकिन दोनों ग्रुप समान नहीं होते हैं। प्रीटेस्ट पोस्टटेस्ट सैंपल डिजाइन में, प्रीटेस्ट अलग लोगों पर किया जाता है और पोस्टटेस्ट अलग लोगों पर किया जाता है। डबल प्रीटेस्ट डिजाइन में, दो बार प्रीटेस्ट किया जाता है।

मिक्स्ड फैक्टोरियल डिजाइन और इंटरप्टेड टाइम सीरीज डिजाइन

मिक्स्ड फैक्टोरियल डिजाइन में, एक विषय चर के बीच होता है और एक विषय के भीतर होता है। इंटरप्टेड टाइम सीरीज डिजाइन में, एक ही विषय समूह का अलग-अलग समय पर प्री-टेस्टिंग और पोस्ट-टेस्टिंग किया जाता है।

काउंटर-बैलेंस्ड डिजाइन और क्रॉस-सेक्शनल डिजाइन

काउंटर-बैलेंस्ड डिजाइन में, प्रायोगिक नियंत्रण को बेतरतीब ढंग से लागू किया जाता है। क्रॉस-सेक्शनल डिजाइन में, अलग-अलग चरणों में डेटा एकत्र किया जाता है।

ट्रेंड स्टडीज और पैनल स्टडीज

ट्रेंड स्टडीज में, वर्तमान और अतीत को देखते हुए क्या हो सकता है, इसका अनुमान लगाने की कोशिश की जाती है। पैनल स्टडीज में, एक ही समूह से बार-बार जानकारी एकत्र की जाती है।

ब्लाइंड स्टडी और डबल ब्लाइंड स्टडी

ब्लाइंड स्टडी में, प्रतिभागियों को यह नहीं पता होता है कि उन्हें उपचार मिल रहा है या नहीं। डबल ब्लाइंड स्टडी में, न तो प्रयोगकर्ता को और न ही प्रतिभागियों को पता होता है कि उन्हें उपचार मिल रहा है या नहीं।

एक्सपेरिमेंटल डिजाइन

एक्सपेरिमेंटल डिजाइन में ट्रू एक्सपेरिमेंट, लेस रिगोरस एक्सपेरिमेंट, क्वासी एक्सपेरिमेंटल और कोरिलेशनल स्टडीज शामिल हैं।

साइनोप्सिस, थीसिस और आर्टिकल

साइनोप्सिस एक संक्षिप्त सारांश है। थीसिस और डिजर्टेशन एक ही रिसर्च को पूरा करने के बाद सबमिट की जाती हैं।

साइनोप्सिस और थीसिस का प्रारूप

साइनोप्सिस के प्रारूप में परिचय, साहित्य समीक्षा, अध्ययन का औचित्य, समस्या का कथन, परिचालन परिभाषाएँ, उद्देश्य, परिकल्पना, प्रक्रिया और डिज़ाइन शामिल हैं। थीसिस के प्रारूप में शीर्षक पृष्ठ, प्रमाण पत्र, घोषणा, सार, पावती, सामग्री सूची, तालिका, चित्र, संक्षिप्त शब्द, अध्याय, संदर्भ और ग्रंथ सूची शामिल हैं।

थीसिस और आर्टिकल में अंतर

थीसिस एक व्यापक प्रस्तुति है, जबकि आर्टिकल एक संक्षिप्त प्रस्तुति है। थीसिस में विस्तृत चर्चा होती है, जबकि आर्टिकल में स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से चर्चा होती है। थीसिस में संदर्भों की एक विस्तृत सूची होती है, जबकि आर्टिकल में संदर्भों की एक चयनात्मक सूची होती है। थीसिस में परिशिष्ट अनिवार्य है, जबकि आर्टिकल में परिशिष्ट वैकल्पिक है।

रेफरेंसिंग स्टाइल

रेफरेंसिंग स्टाइल में MLA, APA, शिकागो, हार्वर्ड और वैंकूवर शामिल हैं। APA शैली हार्वर्ड शैली का एक प्रकार है।

ओपन एक्सेस और ओपन डेटा इनिशिएटिव

शोध गंगा भारतीय थीसिस के लिए एक भंडार है। शोध गंगोत्री सिनोप्सिस के लिए है। ई-शोध सिंधु 2015 में लॉन्च किया गया था और यह तीन पहले की पहलों को मिलाकर बनाया गया था।

सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर

SPSS एक सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर है जो मुफ़्त नहीं है। R एक शक्तिशाली सॉफ्टवेयर है जिसका उपयोग किया जा सकता है। PSPP एक सॉफ्टवेयर है जो SPSS का विकल्प है।

प्लेगरिज्म

प्लेगरिज्म तब होता है जब आप किसी और के काम को अपना बताकर प्रस्तुत करते हैं या बिना अनुमति के किसी और के काम को प्रकाशित करते हैं।

प्लेगरिज्म से संबंधित दिशानिर्देश

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) 2018 के नियमों के अनुसार, रिसर्च में प्लेगरिज्म से बचना चाहिए। प्लेगरिज्म करने पर दंड है।

प्लेगरिज्म के लिए दंड

यदि समानता सूचकांक 10% से कम है, तो कोई दंड नहीं है। यदि समानता सूचकांक 10% से 40% के बीच है, तो छात्र को 6 महीने के बाद एक संशोधित पांडुलिपि जमा करने के लिए कहा जाएगा। यदि समानता सूचकांक 40% से 60% के बीच है, तो छात्र को 1 साल के बाद एक संशोधित पांडुलिपि जमा करने के लिए कहा जाएगा। यदि समानता सूचकांक 60% से अधिक है, तो छात्र का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

शिक्षकों पर दंड

यदि समानता सूचकांक 10% से 40% के बीच है, तो शिक्षक को अपनी पांडुलिपि वापस लेने के लिए कहा जाएगा। यदि समानता सूचकांक 40% से 60% के बीच है, तो शिक्षक को अपनी पांडुलिपि वापस लेने के लिए कहा जाएगा और 1 वर्ष की वार्षिक वेतन वृद्धि से वंचित कर दिया जाएगा और 2 साल तक कोई नया विद्वान नहीं ले सकता है। यदि समानता सूचकांक 60% से अधिक है, तो शिक्षक को 2 साल तक वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी और 3 साल तक कोई नया विद्वान नहीं ले सकता है।

विभागीय और संस्थागत स्तर पर समितियाँ

विभागीय स्तर पर, एक अकादमिक अखंडता पैनल होता है जो यह जांच करेगा कि क्या चीजें सही चल रही हैं। संस्थागत स्तर पर भी, नियमों के अनुसार एक समिति होगी।

नैतिक मुद्दे

नैतिक मुद्दों में पूर्वाग्रह से बचना, उपचार का प्रावधान या अभाव, सूचित सहमति और अनुचित रिसर्च पद्धति शामिल हैं।

रिसर्च नैतिकता

रिसर्च नैतिकता वे सिद्धांत और दिशानिर्देश हैं जिनका पालन रिसर्च करते समय किया जाना चाहिए।

डिजायरेबल एलिमेंट्स

डिजायरेबल एलिमेंट्स में ईमानदारी से डेटा की रिपोर्ट करना, पूर्वाग्रह से बचना, वस्तुनिष्ठता बनाए रखना, अखंडता बनाए रखना, सावधान रहना, डेटा साझा करना, सामाजिक जिम्मेदारी मानना और गैर-भेदभाव शामिल हैं।

संक्षिप्त शब्द और सूत्र

कुछ संक्षिप्त शब्द और सूत्र हैं जिनका उपयोग रिसर्च में किया जाता है।

प्रश्न और उत्तर

वीडियो के अंत में, कुछ प्रश्न और उत्तर दिए गए हैं जो रिसर्च एप्टीट्यूड से संबंधित हैं।

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Transcript

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0:00 हलो नमिश्कार, बेलकम तू इंकलकेट लर्निंग, युनिट टू है जी, UGC Net Paper 1 की मैराथन हमने शुरू कर रखी है, पहले युनिट टीजिंग अप्टिट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्� यानि जून 2025 के PYQs और आपके December 2024 के, ओकी, तो ये एक perfect marathon फिलाल के लिए रहने वाली है, अगर आप December 2025 की त्यारी कर रहे हैं या उसके बाद की त्यारी कर रहे हैं, ठीक है,

0:46 तो क्योंकि 2025 के बाद की कर रहे हैं, तो फिर obviously December वाले question papers भी important हो जाएंगे, ये चीजे तो रहेंगी � Okay, so first of all, you have comments from the two or three questions. So, I will tell you if the marathon is enough or not, I have told you that I will do 10 marathons with 10 units. So, if you have 10 marathons, you will have to watch or not, or you will have to watch another book. So, you can trust yourself particularly. करके इतना experience तो है कि मैं बोल सकती हूं कि यह 10 marathons इनफ होंगी लेकिन with the PYQs

1:31 यह तो PYQs दो टाइम कही है ना तो जो मैंने एक से लेके 105 question paper करवा रखे हैं तो इन marathons में जो questions आपको दिख रही हैं वो सिर्फ class number 80 से लेके 105 तक के हैं यानि कि first 79 classes जो है वो अभी भी आपको practice क तो आपको वो classes plus यह marathons more than enough यानि PYQs और marathons more than enough रहेंगे आपको किसी book की जरूरत नहीं पड़ेगी मुझे exactly ऐसी कोई book दिखती भी नहीं है जिसमें recent के इतने सारे questions included हो और सारी चीजें included हो और bulk भी कम हो तो वो नहीं दिखता है ऐसा कुछ जो मैं आपको recommend कर पाँ अपके दूसरा question आपका है कि यह कब-कब डलेंगी marathons कोई schedule

2:20 हो particularly ताकि आप अपने targets पूरे कर सको तो देखो मुझे भी नहीं पता है क्योंकि मैं कोशिश कर रही हूँ जल्दी से जल्दी डालने की I have done the first marathon, then I have done the work on it and compiled it. Then, I recorded it as well as it will be recorded. So, it will be uploaded next day. So, exactly, I don't know exactly what I have to know. But, today I am recording it on the 11th of September. Most likely, it will be done by 12th of September. सब कोशिश है कि सब्सक्राइबर में आपकी 10 की 10 मैराथन जो हैं वो कम्प्लीड हो जाएं ताकि October, November आपके पास 2 महीने बजें इनको बार बार देखने के लिए, revise करने के लिए, notes बनाने के लिए या जो भी आप करना चाहूं ठीक है,

3:07 revision बहुत जरूरी, जब आप बोल भेगो तीसर question था आपका, कि इन marathons की PDF available होगी या नहीं होगी, अभी के लिए तो पहले पूरी करूँगी इन 10 marathons को, जिब 10 marathons पूरी हो जाएंगी, मालो September में हो गई, तो कोशिश है कि एक October के बाद से आपको जो है इनकी मिल पाएं जो ये PDF हैं, तो एक तरीके से detailed ही हो गई, ये these things will be available but obviously that cost because I have made all of these things free so if you make notes well and good I always encourage

3:55 notes but if there are some working or some of you have not made or some reasons or after you have prepared your time so at that time you can buy their PDFs obviously if I am saying buy it will come with a cost प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रविज प्रवि� जो है एक last class जो आमने teaching aptitude के लिए थी उसमें थोड़ा सा addition आप लगा लो क्योंकि अभी ये भी पूछ लिया जाते है कई बार sequence में लगाना ठीक है, जैसे EPG पाट शाला है 2012

4:43 में इनिशेट हुई, विद्या मित्र है, ये भी Inflivenet Center को ही project जो है, वो असाइंड है, so ये 2014 में था online जब शुरू किया था तो 32 DTA channels के साथ शुरू किया था अब 40 हैं एक है F-E-S-S-A-I, FASKAN, दूसरा इसके अंडर है यह FASKAN, तो FASKAN की full form magic food safety knowledge assimilation network, आपको ध्यान इसलिए रखना है क्योंकि मैंने recently एक new PDF देखी थी government के तरफ से जिसमें initiatives and all चीज़ें थी, तो उसके अंदर � अब है जी यह है हमारा research aptitude का syllabus तो syllabus दिखने में तो बहुत अच्छा लग रहा है ठीक है तो अब बिसी बात है कि इस तरीके

5:31 से paper आता है उस तरीके से इसको cover करने की कोशिश करेंगे research उसका types और उसके characteristics पूछी है positivism और post-positivism का approach जो है वो research में कैसा रहता है वो पूछा है methods प सबसे पहले एक और कोई आई थी पिछली क्लास के टीचिंग आप्टीटूड के नीचे की मैं रिसर्च आप्टीटूड और रिसर्च मेथडोलोजी जो है वो डिफरेंट होती है सेम होती है

6:16 जैसे टीचिंग आप्टीटूड था कि पढ़ाने की तरफ जो है किस तरीके से आप जो skills की जरूरत पढ़ती है क्या इन की थोड़ा बहुत भी inherently आपके अंदर की ability है वो देखने के लिए research aptitude होता है ठीक है यानि आप research की तरफ aptitude check कर रहे हैं जैसे आप teaching की तरफ aptitude check कर रहे थे वैसे ही research की तरफ आपका aptitude check किया जा रहा है कि critical thinking की problem solving की skills आपके अंदर inherently थोड� Okay, then research methodology इससे exact अलग है क्योंकि ये aptitude overall check कर रहे

7:04 हो आप research के प्रती, उन skills के प्रती. Research methodology जब आप किसी particular topic के ओपर research करते हो और उस time पे जो strategy, जो framework, जो methods, जो चीज़ें आप use करते हो, जो analysis, technique use करते हो, वो सारी की सारी research methodology में आ जाएगी. So, overall methodology एक strategy और systematic framework है, जो researcher use कर रहा है अपनी और रिसर्च अप्टिट्यूट जो है वो आपकी नेचुरल टेंडेंसी है रिसर्च के प्रती कि आपकी इस तरीके से चीजों को कर सकते हो ओके सो यह जी जो है वो मेजर डिफरेंस है जी अब अपना जो है यह मैरतन शुरू करते हैं रिसर्च के बारे में बात करेंगे पहले रिसर्च के मैथ रिसर्च के

7:53 अप्रोच इस रिसर्च के तो वो डिसकेस करेंगे देन आपके स्टेप्स वाला पॉर्शन डिसकेस करेंगे उससे रिलेटिड कुछ एक स्टैट जो है वो बहुत स्टैटिस्टिक्स बहुत जरूरी है आजकल questions आते हैं जिससे वो जो है चीजे क्योंकि यां mention नहीं है बट वो चीजें हमें discuss करनी है exam point of view से then आपके thesis और articles को discuss करेंगे कैसे लिखना है क्या style होना जी referencing style से पक्का question आता है आजकल बहुत जादा आने लग गया इस बहुत important है ये और फिर ICT में क्या Research, re-or-search, यानि दुबारा से आप बात कर रहे हो, किसी चीज को find out करने की. तो ओविसी बात है, careful investigation है, systematic तरीके से आप जिसको करोगे.

8:39 किसी भी branch of knowledge में, आप जब नए facts जो हैं, वो डालना चाह रहे हो, investigate करके चीजों को, आप कुछ नए चीजें जानना चाह रहे हो, तो वो research ह क्रेस्वल की एक famous definition है that it is a process of steps used to collect and analyze information to increase our understanding of a topic or issue. तो किसी भी चीज की या topic की issue की चीजों को हमें समझने के लिए उससे related हमारी understanding को बढ़ाने के लिए जो चीजें हम collect करते हैं, analyze करते हैं information को यह जो पूरा process है इसी को research हम बोलेगे. So overall हम बोल सकते हैं कि research जो हो scientific है nature में. जिसमें unbiased evaluation होनी चाहिए.

9:25 कोई भी ऐसा रिसर्च नहीं होता जिसको आप अन साइन्टिफिक बोल दो कि कही बार साइन्टिफिक मैथर्ड को हम साइन्सिस से रिलेट कर लेते हैं अज़ेक्ट हम रिलेट कर लेते हैं कि जो केमिस्ट्री या फिजेक्स या बायोजी साइन्सिस में यूज होता है उसको सा� क्योंकि अगर महा scientific वह science आप मान के चलोगे तो फिर दूसरा तो unscientific हो जाएंगी चीज़ें बट unscientific research करके कुछ भी ऐसा नहीं होता है ओके तो ये बात आपको ध्यान लखने है scientific method में क्या रहेगा problem को identify किया जाएगा relevant data collect किया जाएगा hypothesis

10:11 बनेगी empirical उसको test किया जाएगा अगर ओके, so general agreement यह है जी, कि research एक process of inquiry or investigation है, कई बार question यह भी आ जाता है, कि research जो है, वो common sense based है, या experience based है, तो देखो common sense के ओपर नहीं जाते हैं, हम यह systematic तरीके से, जो inquiry or investigation हम देखी है, हमारी knowledge को increase करने के लिए, या existing knowledge में छीजों को add करने के लिए, वो research कहलाता है, कुक ने एक acronym भी दिया है, जो वे ने पिछली marathon में भी करवाया था, rational way of thinking, expert or exhaustive treatment, search and solution, exactness कितनी है, analysis, relationship of facts or

11:00 critical observation, careful planning, constructive attitude, condensed generalization, और edge से हो गया हमारा honesty and hard working, को ये कुक ने acronym दिया है, कभी पूछा नहीं गया है, but for the sake of basic knowledge, मैंने इसको यहाँ add कर दिया है, तो देन बाद आते हैं characteristics की, so अच्छे research की characteristics क्या होगी, okay, अच्छा research आपको objective नजर आएगा, reliable होगा, valid होगा, accurate होगा, credible होगा, generalize कर पाओगे उसको, empirical होगा, with experience आया होगा, systematic रहेगा, कुछे controlled factors भी रहेंगे, then logical, cyclical और replicable रहेगा, इनका मतलब क्या है वो एक-एक करके जानना बहुत जरूरी, objectivity मतलब आप बिना किसी biasness और बिना किसी भेदभाव के वो research कर रहे हो, ठीक है, तो जितनी

11:49 भी all, सारी की सारी characteristics बची है ना, वो सारी इसी के around नजर आएगी, अगर आप biased हो गए, तो reliability, validity, सारी चीज़े stake पे चली � तो ओप्जेक्टिविटी होना वह ज़रूरी है, बाइसनेस की बात करते हैं तो बहुत सारे टाइप की बाइसनेस हो सकती है, जो अब्जर्व कर रहा है तो अब्जर्वर बाइसनेस हो सकती है, प्लैसिबो बाइसनेस हो सकती है, एक्सपेक्टेंसी बाइसनेस हो सकती है, फिर ओके बिना किसी biasness के हम क्या क्या कर सकते हैं objectivity को ensure करने के लिए सो हम complete record रखेंगे ताकि better तरीके से समझ सकें चीजों को

12:35 ऐसा नहीं होगा कि थोड़ा थोड़ा record रख रहे हैं हम चीजों का ठीक है सो biasness नहीं होगी अगर हम complete record रख रहे हैं complete observations का चीजों का उसी तरीके से उसको analyze जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं जो हैं ज आपको बहां से भी ध्यान रखना है कि objectivity maintain रहे और आप जो भी चीजें देख रहे हो आप उसकी वज़े से किसी तरीके से बाइस्ट हो गए छीक है Standardize कर सकते हो

13:22 चीजों को standardization का जो process है, वो obviously objectivity ensure करेगा, operationalization जो है concepts का, वो standardization जैसा ही है ये भी, so वो भी क्या करेगा, आपकी objectivity ensure करेगा, biasness avoid करनी है, so वो भी हमारी objectivity को ensure करेगा. उसके अलावा क्या characteristic है? validity very important अगर validity और reliability में से कभी choose करना पड़ जाए कि कौन सी जादा important है characteristic तो हम validity के साथ चाहेंगे. So validity क्या होती है? ability होती है किसी instrument की चीजों को मेजर करने की जो वो क्लेम कर रहा है अगर कोई IQ का टेस्ट है और वो क्लेम कर रहा है वो आपको intelligence quotient निकाल के देगा या सही से मेजर करके देगा तो क्या वो कर रहा है तो वो चीज देखने के लिए हम उसकी validity check करते हैं चीक

14:11 है तो वो हो गया validity अगर validity गलत direction में गई या validity के साथ अगर एक word देखना हो, तो वो हम accuracy याद रखेंगे, और अगर reliability के साथ देखना है, तो हम consistency word याद रखेंगे, okay, so reliability मतलब कितनी consistent है results, similar results बार-बार आ रही है, नहीं आ रही है, उसको हम verifiability भी बोलते हैं, क्योंकि आप बार-बार-बार verify कर रहे हो, कि same results आ रही है, कोफिशेंट जो है उसको हम reliability coefficient की term में एक मेंद लव होता ने

14:56 जब आप किसी चीज़ को कोई digit या magnitude प्रोवाइड कर देते हो तो वो reliability coefficient जो है वो magnitude होगा reliability का reliability जो है वो कभी भी negative नहीं होती है ये बात आपको याद रखनी है reliability हमेशा 0 से लेके plus 1 तक ही आपको नजर आएगी माइनस में नहीं होगी रिलाइबिलिटी क्योंकि ये क्वेशन कई बार आता है और जो बच्चा के बाद में अगर PDF दिले तो मैं रेक्मेंट करूंगी कि ये वीडियो जरूर सुने ताकि आपको समझ आए पिकिस नोट्स जो है कोई भी इंसान कोई भी टीचर अपने हिसाब स Reliability और

15:46 correlation अक्सर पूछ लिया जाता है, तो यह बात याद रखें कि जो reliability है, वो कभी भी negative नहीं होगी, 0 से plus 1 के बीच में आपको नजर आएगी, ठीक है, और जो correlation है, वो plus 1 से minus 1 के बीच में आपको नजर आएगा, so correlation negative हो सकता है, बट reliability negative नहीं होगी, यह बात आपको याद रख कौन कौन सी चीज़े इंटर रिलेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटेटे

16:40 तरस्ट कर पाओ, so quality of being trusted, usually जब आप क्या करते हो न, जैसे यह है, use of secondary data, time बचा लेता है, cost बचा लेता है, but reliability थोड़ी सी कम कर लेता है, ज्यादा reliability primary data के उपर जो है, वो की जाती है, कि अगर primary और secondary में से choose करना पड़े, so मैं primary data के उपर ज्यादा विश्वास रखूंगी, rather than secondary, जिसको आप जनरलाइज कर पाओ,

17:27 तो आप findings जो हैं वो एक larger population पे generalize कर पा रहे हो या नहीं कर पा रहे हो वो देखने वाली बात है तो यह बात आपको धियान रखने कि अच्छा research वो होगा जिसको आप large population के ओपर generalize करता हो empirical research जो life based यानि experience based रहेगा आपके direct experiences से आपने चीज़ें देखी होंगी तो हम उस research जो है empirical research कौन सा रहेगा जो real life experience पर based हो systematic तरीके से कोई भी research हो, हम systematic word तो याद रखेंगे ही, systematic तरीके से जब आप आगे बढ़ते हो step by step तो वो जो है अच्छा research माना जाएगा, controlled factor क्योंकि real life experience की जब

18:14 आप बात करते हो, तो more than one factor है, जो आपके outcome को affect कर सकते हैं, जैसे हम आगे variables की भी बात करेंगे, उसमें भी बात करेंगे, so controlled factors जो है, वो भी, it's like आप उन चीजों को control करके रखो, जो possibly आपकी outcome को affect कर सकती है, okay, so वो कोशिश की जानी चाहिए, ताकि better research आपका निकल के आए, cyclical होगा research, because यह problem के साथ शुरू होता है, sorry, problem, हाँ, problem के साथ � क्योंकि एक problem का solution निकला तो कोई और problem निकलाईगी तो यह इसलिए हम बोल सकते हैं, बट cyclical होगा, कि अगर एक problem है, उसका solution निकला तो कुछ और निकली, फिर कुछ और उससे आगे की कोई problem निकलाईगी, जिसका आप solution

19:03 डूबने ही कोशिश करोगे, तो वो cycle में ही चलता रहेग रेप्लिकेबल यानि research को replicate किया जा सके एक बाद जो research हुआ है उसको अगर दोबारा करके देखे तो same results हमें देखने को मिलें, so वो जादा better research माना जाएगा, okay, अब बात आती है research tool की, so कोई भी instrument, कोई भी resource, कोई भी technique या कोई भी method जो help करे researcher को data को collect करने में, उसको analyze करने में, � तो के रिसर्च टूल में questionnaire से लेके interview तक सारी चीज़ें आ जाती है,

19:51 physical instrument भी आ गए, biological material आ गया, तो आपकी study के हिसाब से, आपके research के हिसाब से, आपके research टूल जो हैं वो भी अलग-अलग आपको देखने को मिलेगे. अच्छे रिसर्च की भी है ये टेक्निकली आपकी जो चैरेक्टरस्टिक्स नहीं उपर वाले में भी थी ये दोनों की तिनों यह आएंगी टेक्निकली बट एक और चीज यह है कि इनकी बारे में थोड़ा सा डीटेल में जानना जरूरी है जैसे validity के types, तो validity को पढ़ लेते हैं, पहरे, validity मैंने आपको बताया, कि वो जो आप claim कर रहे है, actual में क्या वो चीज measure हो रही है, तो वो validity आपकी हो जाए, यानि relevant होनी चाहिए यह चीजे, तो कोई भी tool जो use हो रहा है data को collect

20:37 करने के लिए, जो information वो provide कर रहा है, वो relevant के साथ-साथ, यह validity के types की बात आती है जब तो तीन type की validity जो है इन्होंने यह Joint Committee of American Psychological Association, American Educational Research Association and National Council on Measurement. So इन तीनोंने मिलके जो है validity के types बताए. आपको इन कमेटी इसका नाम याद रखने की जरूरत नहीं है बट आपको validity के नाम से ये पता हो कि उसका मतलब क्या है ऐसे भी नहीं पूछा जाता कि validity के कितने टाइप से 3 है 5 है 4 है वो नहीं पूछा जाएगा बट इन्होंने 3 बोले और वो 3 कौन-कौन से बोले content validity, criteria validity और construct validity

21:27 With that, Campbell and Stanley have two types of internal and external validity. Brash and Glass have divided the external validity in 1968, in two types of population and ecological validity. One time, the question has come from ecological validity. That's why I have included these things here at a deeper level. तो ओवर ओल यह हैं वैलिडिटी के टाइप इनके नाम से आपको पता हो कि किसका क्या मतलब है कौन सा किसका टाइप है, ओकी, so content validity, criteria के दो टाइप है, concurrent और predictive, construct के दो टाइप है, convergent, divergent, then face validity, internal validity, और external validity के फिर दो टाइप होगे, population और ecological, एक एक करके इनका मतलब समझने की कोश

22:16 क्योंकि आप objective question solve करोगे तो आपको concept समझ आना चाहिए आपको lines रटने की जरूरत नहीं है तो content validity क्या करेगा यानि जो content आपने बोला है वो check तो करे अगर मैं बोल रही हूँ कि मुझे 10 chapters का test लेना है मैं एक से लेकि 10 chapters तक का test लोगी तो जो test मैंने बनाया है वो test जो है इन 10 के ऐसा ना हो कि आपने सिर्फ दस्वें चैप्टर से सारे questions दे दिये और बाकी सारे chapters हो सकता है किसी बच्चा ने दस्वाई chapter छोड़के गया हो बच्चा, right? तो वो तो content validity check नहीं कर पाएगी ना उसके जो हम अगर यह दियेगी, घड़बड हो

23:02 जाएगी content validity. So, यानि कि जो content के आ So researcher को यह identify करना होगा कि तीसरी क्रास के बच्चों के level पे जितनी-जितनी spellings होनी चाहिए, वो सारी की सारी चीजें वहाँ पे आती हो included हो, okay? So यानि कि आप जो content claim कर रहे हो, वो सारा content जो है, वो आपके research tool में या आपके test में दिखना चाहिए. Face validity सिर्फ superficial measures की बात करेगा Face validity मतलब देख के पता चल जाए आपको ठीक है यानि कि अगर मैंने कोई question paper या कोई टूल बनाया है questionnaire बनाया है तो इस questionnaire को दूर से paper पे देखके ही समझ आ जाना चाहिए कि

23:48 मालो मैं आपको एक paper दिखाऊं और आपको पूछू कि क्या नजर आ रहा है तो अगर आपको वहां पे Hindi दिखी कोई particular language दिखी आपको idea हो जाएगा mathematics का होगा तो अलग से आपको देखते ही कैसी है, okay, concurrent validity, criteria में आ जाती है, दोनों चीज़े, criteria validity के ही types हैं, एक second, okay, यह उपर आ गया concurrent, मैंने यह उपर नीचे हो गया, शाहिद आ जो चुब है, concurrent कैसे आ गया, so criteria के, criteria validity, जो है, वो क्या चीज़ चेक करेगी, measure करेगी चीज़ों को, एक already established validity के साथ,

24:38 यानि, एक already established criteria के साथ, मानलो आपने एक नया intelligence test बनाया है, तो क्या वो नया intelligence test, जो intelligence check करके आपको बता रहा है, क्या वो results, क्या वो scores, already जो एक standardized IQ test था, उस से compare करें, तो क्या वो चीजें same आ रही है, अगर वो same आ रही है, that means criteria validity बहुत high है, अगर same नहीं आ रही है, यानि criteria validity कम है, अब time frame के हिसाब से हम दो चीजों में divide करते हैं दो types में, एक है concurrent validity और दूसरा रहेगा predictive validity, concurrent validity same time की बात करेगा, यानि उसी time के test scores की बात करेगा और predictive validity कुछ time बाद जो है वो predict करेगा, future की बात करेगा,

25:24 इसलिए concurrent validity जो है वो achievement test या diagnostic clinical test मालों आपने anxiety measure करनी है, so it would be said to have concurrent validity if it rightly reflects the current level of anxiety experienced by an individual. तो वो तभी वह उसी time का बताएगा ना लेकिन predictive में future का बताएगा वो. यहां पे भी आप measurement जो करोगे वो एक criteria के base पे ही करोगे ठीक है बट वो criteria के base पे results कब आपको मिल रहे हैं कब के results मिल रहे हैं उस basis पे ये दो time frames में divided है ने जी construct, validity, construct जो हैं आप कोई भी specific trait से याद रख सकते हो तो ये जो है किस extent तक उस specific trait या specific construct को measure कर पा रहा है जैसे मालनो anxiety ह

26:15 ठीक है ये भी हम presumed measure of a construct के साथ की पहले से जो चीजें है reference है उस हिसाब से ही करेंगे बट यहाँ थोड़ा सा difference है यह convergent और divergent की बाद करता है उपर वाले जो आपका ये criteria validity था वो किसकी बात कर रहा था? पर्टिकिलर criteria के साथ compare करके और timing, time frames के इसाफ से बात कर रहा था. Convergent, divergent में क्या होगा? कि कितना related है या कितना different है? Convergent जैसे हम word use करते हैं, Convergent thinking में भी ये word use करते हैं, Convergent मतलब एक जगा पहुँचना. आपके पा तक पहुंच गया तो सही है, तो वो convergent validity होगी, यानि the extent to

27:03 which, दो जो different test या measures हैं, किसी same theoretical construct के, वो कितना similar result आपके सामने present कर रहे हैं, कितनी एक positive relation जो हैं उनके score में देखने को मिल रहा है, Divergent में Discriminant Validity भी बोलेंगे और यह differentiate करके बताएगा आपको कि इतना different result आपको देखने को मिल रहा है तो criteria और construct में confused होने की जरूरत नहीं है criteria क्या दिखाएगा if the test results correlate with a specific external outcome यानि यह criteria से वो match कर रहा है या नहीं कर रहा है Okay, construct validity जहां वो थोड़ी broader हो गई, यह देखेगी कि test जो है, वो accurately वो चीज़ measure कर रहा है, जो theoretical concept measure करने के

27:51 लिए वो है, okay, so construct validity बात करती है, does it measure the theoretical concept और फिर वो बात करेगी convergent और discriminant की, यानि convergent है तो positive correlation है उसका और discriminant है तो वो relate नहीं हो रही है चीज़ें, क्राइटेरिया वैलिडिटी आंसर करेगी कि वो एक स्पेसिफिक आउटकम के साथ रिलेट हो रहा है या नहीं हो रहा है यहाँ पर हमने ऊपर वाले में हमने बात की कि को रिलेशन कैसा है पॉजिटिव है नेगिटिव कैसा है वो देखने के लिए और क्राइटेरिया में हम क� अब बात आती है internal validity की, internal validity जो है, वो internally, यानि अगर आपको ही

28:40 research करके देख रहे हो, तो उसमें dependent और independent variable है, उनके बीच में जो relationship है, उससे concerned है, इसे concerned है, okay, सिर्फ इतना ही पूछा जाता है, internal validity क्या है, so it is concerned with the logic of relationship between independent variable and dependent variable. अब internal validity के कुछ एक threats हो सकते हैं, यानि internal validity को किस-किस चीज से नुकसान हो सकता है, वो ये है, confounding, selection biasness, history, instrument change, change कर दिया, या instrument dead हो गया, या dekay हो गया, repeated testing, maturation, diffusion, morality, morality के लिए एक और word है, attrition, दोनों का मतलब same ही है, experimental bias, regression towards the mean, और compensatory rivalry, resentful demoralization.

29:28 इनके बारे में आपको पता होना जरूरी है because आपको options दे देंगे और बोलेंगे इन में से कौन से जो है वो threats है internal validity के लिए, okay? So एक-एक करके इनको discuss करते हैं. Confounding मतलब confusion of effects. So confusion create हो रहा है वहाँ पे, कि एक variable है, मालो independent variable, एक है dependent variable. Variable का topic अभी cover करवाँगी मैं, don't worry. ठीक है, तो हम इन दोनों के बीच में relationship देखना था. हम देखना चारे हैं कि independent variable, जो है, वो dependent के उपर कितना असर डाल रहा है. लेकिन बहुत सारी और भी तो चीजें होती ह ठीक है तो जब results जो हैं आप क्या करो कि कुछ चीजे हैं कुछ factors ऐसे होते हैं

30:14 जो आप separate out नहीं कर सकते उनको अलग नहीं कर सकते हैं तो वो सबसे बड़ा threat होते हैं experimentation में ओके जब आप ग्रूप को सिलेक्ट कर रहे हो तो उस टाइम पर आपने कोई बाइसनेस दिखाई है जिस वज़ा से इंडर्न वैलेडिटी को थ्रेट होगा हिस्ट्री पर्टिकुलर्ली जो सब्जेक्ट्स हैं या आप चीजों को मैजर कर रहे हो तो वहां उस जगह की हिस्ट्री � तो उनका

31:01 behavior, उनकी छीजे, responses अलग हो सकते हैं, उनकी history की वज़ा से, उनकी experience की वज़ा से, वो भी our internal validity के लिए एक threat रहेगा. इंस्ट्रुमेंट चेंज आपने रिप्लेस कर दिया, चेंज कर दिया या फिर आपने डीके हो गया आपका इंस्ट्रुमेंट तो वह भी आपकी इंटरनल वैलेडिटी के लिए थ्रेट होगा, रिपिटीट टेस्टिंग एक थ्रेट हो सकता है कि आप उससे एक बाइसनेस क्र तो अट्रेशन और मैचुरेशन दोनों का मतलब सेम ही है कि जब सब्जेक्ट डूरिंग थे

31:46 एक्सपेरिमेंट गायब हो जाए ठीक है या चेंज हो जाए ठीक है इट हैपन्स देट सब्जेक्ट चेंज दूरिंग थे खुर्स तो आप मालो आप 10th क्लास के बच्चों के ओपर प्रोसेस कि मालो आप लंबे टाइम के लिए स्टड़ी कर रहे हैं

32:34 आपको बच्चों के से पांच साथ बार data collect करना है तो उसमें बच्चे भी तो दीरे दीरे बड़े हो रहे हैं ना चीक है तो वो फर्क ला सकते हैं या उसके अलावा temporary change भी हो सकते हैं कि बच्चे उस दिन ठका हुआ है ठीक है बिमार है तो उस हिसाब से भी उसके responses में change change देख artificial जो है न कि artificial चीजों की बज़ा से कुछ change आ गया है उसके अंदर ठीक है तो यह भी एक internal validity के लिए threat रहेगा diffusion जो है क्योंकि यह compromise कर देगा ability to isolate the true effect यानि जो actual effect हम intervention की वज़ा से देखना चाहा रहे थे कि मानलो मैंने मैं

33:21 यह basic example देती हूं ताकि आपको समझ आ जाए एक traditional way में ज यह जो चीजें यह intervention होगी, ठीक है, so intervention का true effect देखने की बज़े, कुछ और दिक्कते आ रही हैं, तो वो चीज diffusion की बज़े से हो सकती है, okay, morality मैंने आपको बताई दिया, अभी-अभी mortality, morality और attrition, ठीक है, यानि कुछ एक participants जो है, midway आपकी study से जो है, वो drop out हो गई है, आपकी study complete ह regression towards the mean, मानलो आप experiment कर रहे हो, और आपने जो subjects हैं, जो आपका sample select किया, जो बच्चे select किये, मानलो आपने,

34:08 वो extreme scores वाले select कर लिए, ठीक है, so obviously वहाँ पर एक chance रहीगा, error का, वेंट सब्जेक्ट्स विद मिनिमम मैं थे मैंटिकल एबिलेटी आपने चूज कर लिए दूसरी साइड मैक्सिमम वाले भी चूज कर लिए तो बिसली रिजल्ट आपको ख्लियर नहीं पता चल जाएगा ठीक है तो वह वह चीज नहीं होनी चाहिए हमें मीन की तरफ जो है हो � यह वह था नहीं एक आपने सोचा कि एक्स्ट्रा हो था ना जैसे मालो आपने । आइसीट और ट्रेडिशनल वे में दो गुरूप रखे अब यह ट्रेडिशनल वे वाले बच्चे को भी तो यह खुनस हो सकते हैं कि अच्छा उनको आइसीटी से पढ़ा रहे हैं हमें पुरा

35:00 जिसकी वजह से यह ICT का फर्क हमें exactly पता ही नहीं चलेगा हमारे intervention की वजह से, इनके results भी better आ सकते हैं उस तरीके से तो ठीक है, तो यह compensatory कि वो compensate करना चाहरे हैं उन चीजों को, वो extra hard work कर रहे हैं, ठीक है? जो एक्सपरिमेंटर बाइसनेस जो एक्सपरिमेंट कर रहा है वो ही किसी चीज में बाइस हो जाए ओके सो वह भी इंटरनल वैलेडिटी के लिए एक थ्रेट रहेगा देन जी एक्सटरनल वैलेडिटी इंटरनल में बात कर रहे थे इंडिपेंडेंट डिपेंडेंट के बी� यानि मैंने माल लो 10th class में 10th

35:49 class के बच्चों के ओपर data collect किया सिर्फ कुरुक्षेत्र से ठीक हैं, so अब क्या मैं इसको पूरे हर्याना पे apply कर सकती हूं, right, so अगर मैं कर सकती हूं that means मैं generalize कर रही हूं चीज़ों को, हर्याना के 10th class के बच्चों के ओपर generalize कर दी मैंने चीज़े जब situation different subject setting time कोई चीज नहीं देख रहे हो तो external validity बहुत अच्छी है अगर आप generalize नहीं कर पा रहे हो तो external validity कम है वहाँ external में ही population और ecological validity आ गया जब आप जनरलाइज कर पा रहे हो और आप आइडेंटिफाइ कर पा रहे हो कि अच्छा 10th class का मैंने data तो गुरुक्षेतर से collect किया था लेकिन मैं पूरे हर्याना पर apply कर पा रही हूँ तो यानि कि मैं population को identify कर पा रही

36:39 हूँ तो जब आप identification of population से concerned हैं तो वो population validity अगर आप पॉपुलेशन से उसकी बजाए आप एन्वार्मेंटल कंडिशन के परे जाके चीजों को देखना चाहरे हैं आप जनरलाइज करना चाहरे हैं ठीक है तो वह आपकी एकोलाजिकल वैलेडिटी जैसे अगर मैं यहां का रिजल्ट हर्याना का रिजल्ट या दिल्ली का रिजल्� External validity के अंदर ही ecological validity हो जाएगा, छीक है जी? Obviously, external validity के लिए भी threats हैं हमारे पास, aptitude, treatment, interaction, situations,

37:26 pre-test effects, post-test effects, और rosenthal, pigmalion effect, okay? So, aptitude, treatment, interaction, यानि, जो आपका independent variable है, वो ही किसी चीज़ के साथ interact करके, और चीज़ों को generalizability जो है, वो कम कर रहा है, उस वे जासे. Then situations, हर किसी की situation अलग होती है, वहां की जगह, treatment, conditions, light, noise, temperature, कोई भी चीज़ चेंज हो सकती है, so उसकी वज़े से भी generalization limit हो सकती है, आप हो सकता है, सब जगह generalize ना कर पाओ, तो situations जो हैं, वो भी generalization पे, यानि कि external validity को affect करेंगी. Pre-test और post-test effect, ये दोनों चीज़े भी generalization को limit कर सकत तो वो चीज़ आपके thread में आ जाएगी और

38:15 Pygmalion effect, Rosenthal effect यह आपको पता होना चाहिए क्या है जब high expectations lead to improved performance या low expectation leads to पूर परफॉर्मेंस इस लाइक मालो मैं किसी बच्चे से बहुत एक्सपेक्ट कर रही हूं कि हाँ यह बच्चा अच्छा है और यह तो एक बार में जी आरेफ कर देगा ऑके भले ही मैं इस लाइक क्योंकि अगर मैंने एक्सपेक्ट कर लिया है उस बच्चे से जब वो बच् लेकिन जो बच्चा आपको जिसकी परफॉर लग रहे है या आप जिससे एक्सपेक्ट ही नहीं कर रहे हो तो उस वज़़े से और आपके behavior को इंटर वाला interpersonal context है उसकी वज़़े से भी चीज़ें चेंज हो सकती हैं जब high expectation की वज़़े से improved performance या low

39:01 expectation की वज़़े से poor performance नजर आए validity में हम accuracy बात करते हैं अब बात आती है reliability की Okay, reliability consistency check करेगा, ये reliability को check करने के methods है, test retest method, equivalent या parallel forms method, test retest with equivalent यानि इन दोनों को combine कर दिया, split half method, kudder richardson method और inter rater reliability, point ये है कि आपको ये पता हो, इनके नाम सुनते ही, कि अच्छा ये reliability से related है, ये reliability को check करके बताएंगे, reliability को check करने के लिए ये methods है, यह अलग-अलग किस तरीके की reliability को यह check करेगा

39:48 और यह इसका procedure है, test, retest आपने एक test लिया, same test कुछ time के बाद, अब minutes to several years, कितना भी difference हो सकता है, so कुछ time के बाद, दुबारा से same test लिया, okay, तो उन test को जब हम compare करेंगे, चीजों को देखेंगे, तो वो कैस क्या बताएगा, वो stability � एक्विविलेंस है या पैलल फॉम है तो दो अलग अलग टेस्ट हैं बट सेम डिफिकल्टी लेवल है तो यह दो चीजे सेम है या नहीं पैलल है या नहीं वह चीज हमें बताएंगे इनके रिजल्ट्स जो हैं तो यह मैजर ओफ एक्विविलेंस में आ जाएगा हमने यहां दोनों को combine किया है, तो measure of stability and equivalence

40:34 दोनों आ जाएगा. Split half जो है, वो internal consistency बताएगा, because test एक ही है, इसके अंदर भी. ठीक है, so हमने एक बार test लिया, मालो 50 question थे, मैंने 25-25 में divide कर दिये, so वो 25-25 को फिर मैं compare कर रही हूँ. ठीक है, so equal halves में आपने divide किया, इसमें usually यह होता ह और इवन आइटम में split किया जाता है कि मैं एक, तीन, पाँच ये वाले questions एक side कर रहे हूं दूसरे वाले दूसरी तरफ even वाले ठीक है, तो वहां से फिर उनकी sub scoring होगी और उस sub scoring के बाद मैं जो है वो Spearmint Brown formula लगा के check करूँगी चीज़ों को, तो ये internal consistency check करके बताएगा मुझ

41:31 इंटर रेटर यारी जब रेटिंग की जा रही है तो दो अलग-अलग लोग एक ही इंसान को रेट कर रहे हैं ठीक है, तो यह क्या measure करेगा consistency of rating कि दोनों की rating same होता है आपने एक response sheet भरवाई बच्चे से अब वो response sheet जो हो दो अलग-अलग teacher को check करने के लिए दे दी, तो क्या दोनों ने जो check किया है वो कितना same है, यानि दो अलग-अलग लोगों ने उसको rate किया है, judge किया है, तो वो वहाँ checking दो वार हो रही है, दो अलग अलग लोगों से हो रही है, तो वो interrator method कहलाता है, okay, then energy, validity, reliability हो गया, usability, कि कोई भी test कितना usable है, tool या test

42:18 या research, ठीक है, so वो जितना objective होगा, cost effective होगा, time कम लगे, effort कम लगे, ठीक है, easy to administer हो, तो जब ये सारी qualities match होगी, तो वो usable जादा होगा, तो ये च Okay, then आपका topic है जी, positivist paradigm और post-positivist. ठीक है, positivist में majorly काम जाएंग, उस starting में August Comte ने किया है, August Comte और sociology से भी relate किया जाता है. एजूकेशनल सोचियोलोजी के फादर इनको बोला जाता है, if I'm not wrong, ठीक है, reflected through, ये फिर Francis Bacon और कही नाम और जुडते हैं, हमें क्या ध्यान रखना है, हमें ध्यान रखना है कि पॉजिटिविस्ट में कोई भी negative connotation नहीं है, पॉजिटिविस्ट में वो

43:08 factual knowledge जो है, वो observation से आपको तो scientific method जो है वो सिर्फ एक तरीका बचेगा यहाँ पे चीजों को truth को objectivity को देखने के लिए ओकी तो यह positivism रहेगा. Positivism किस-किस चीज पर rely करता है यह बोलते हैं कि science जो है वो deterministic है cause and effect relationship भी बताती है, mechanistic भी है, यह इंपिरिसिजम से भी डील कर रहे है, deductive approach जो है वो यहां लगेगा, quantitative research strategies से यह associated है, ठीक है, तो overall आपको क्या समझने की कोशिश करनी है, कि scientific knowledge के ओपर यह भरोसा करते है, anything that cannot

43:54 be observed, वो बहुत कम importance की, तो जो आप observe कर सको, जो चीजे देख सको, ठीक है, तो वहाँ वो चीजे science म So, यह इड़ोकेट तैप्लिकेशन ओफ मैथडस अफ नेचुरल साइनस तु स्टड़ी दे सोशल रियालिटी एंड बियोंड. So, यह पॉजिटिविजम का अप्रोच जो है वो आपका रहेगा. Post-Positiveism इससे completely अलग नजर आएगा. यह reject करता हुए नजर आएगा core values को. ठीक है पॉस्ट पॉस्टिविस्ट बोलते हैं कि जो हमारी observations हैं हम सिर्क उन पे rely नहीं कर सकते हैं subjective to error हैं यह चीजें ठीक है इनको इसलिए critical realist

44:40 भी बोला जाता है क्योंकि यह मानते हैं कि एक method में हर एक method में कुछ ना कुछ error है तो इसको avoid करने के लिए हमें अलग-अलग methods use करने पड तेने जी, post-positivism, जो है, वो, pure objectivity can't be achieved. Positivism बोलते है, objectivity can be achieved. बट यह बोलते हैं, biasness आएगी, आएगी, कहीं ना कहीं. Research, जो है, वो broader है, broader, rather than specific. तो broad, वो था न, कि specific नहीं होती चीज़े, लेकिन, वहाँ पे science है, scientific चीज़े हैं, तो हम specific बोल रहे हैं, positivism ने. Theory और practice को आप

45:39 चीजो को देखते हैं। आप यह दो-तीन पॉइंट्स ध्यान रख लेंगे तो बहुत जादा मोर देन इनफ रहेंगी चीजें लॉजिकल पॉजिटिविजम तो वो साइंस की बात करते हैं और पॉस्ट पॉजिटिविजम वाले कॉमन सेंस की बात करते हैं ओके सब्सक्राइब करते हैं यह इंड़क् पोस्ट वाले में क्वांटिटीटीव है तो mostly probability sampling जादा बहकर रहेगी ठीक है यह realist है, objectivist है, यह critical realist है थोड़ा और जादा सोच रहे हैं और यह modified

46:28 objectivist है यह कही ना कही sort of subjectivity की तरफ जा रहे है और non probability sampling जादा तर यूज की जाती है ऐसा नहीं है कि आप logical positivism में non probability sampling use ही नहीं कर पाऊगे, नहीं. But mostly, जब quantitative studies हैं, तो mostly हम random sampling के साथ जा रही है, qualitative और mixed में फिर हमे purpose-based convenience हो, हिसाब से जाना पड़ेगा, तो हम non probability के साथ जाएंगे. Okay? Then, Aatya ji, types of research. तो टाइपस ओफ रिसर्च, मैथड़स ओफ रिसर्च और अप्रोचिस ओफ रिसर्च यह थोड़ा फरक ध्यान रखों बाकि तो इनका मतलब बता होगा तो बहुत है और कुछ करने की जरूरत नहीं है टाइपस में बेसिक और फंडमेंटल रिसर्च, अप्लाइड रिसर्च, जो

47:16 है वो किसने दी action research Kurt Levin ने और Stephen M. Corey ने इस action research को education के field में use किया था. Then है methods, methods में usually 3 हैं, बाकी सारे methods कहीं न कहीं न के sub parts में included माने जाते हैं. So descriptive, historical, or experimental. Approaches की अब बात करोगे, तो qualitative approach, quantitative approach तो वो research में भी आगया, approach में भी आगया और mixed research. Okay, सबसे पहले basic, pure, and fundamental. So obviously, नाम से ही प्रिता चल रहा है कि आप कुछ नई discovery कर रहे हो, ठीक है? कुछ नया innovation है. So ये mostly academic रहेगा, इसका कुछ जादा practical application आपको देखने को नहीं मिलेगा. बहुत broad level पे extensive रहेगा nature में, जो pure research है, basic research है. ये क्या major काम ये करेगा, कि

48:06 जो already existing knowledge है, उसक अप्लाइड जो है वो क्या है कि चीजे तो वैसी हैं बट आप क्या कर रहे हो solution निकाल रहे हो problems का ठीक है so innovation और application part जादा नजर आएगा practical aspect पर जादा focus करेंगे हम यह intensive जादा नजर आएगा rather than extensive okay so यह applied रहेगा applied का ही एक part जो है वो action research को मान लिया जाता है कि यह जो है कही न कही के रूप में देखते हैं ठीक है सो बट classroom situations में ये best माना जाता है Stephen M. Corey जो है उन्होंने सबसे पहले education के field में ये word यूज किया और Kurt Levin ने इस word को दिया okay action research action

48:54 मतलब कुछ करना you do something और research मतलब जिसको आप वापस से कर रहे हो कुछ information जानने के लिए या analyze करने के लिए so learning by doing वाला focus हो इसके एक particular cycle भी होती है जो Stephen chemist ने दी है पहले आप plan करोगे चीजों को फिर act करोगे उसके basis पे आप जो results निकल के आरे हैं observe करोगे और उसके बाद जहां आप reflect back करोगे जब तक जरूरत होगी तब तक आप इस cycle को repeat करोगे मैं एक example देती हूँ इसमें आप लोगों को हमेशा कि माल लो एक बच्चे को समझ नहीं आई कोई चीज तो मुझे यह result दिख गया है कि इसको नहीं समझ आई अब मैं क्या करूँगी

49:40 intervene करूँगी अलग अलग तरीके से कोई तो आप इसी format को ध्यान रख लो action research के लिए कि introduction, objectives और methodology यह आपको पता है, results आए, then आप intervene करोगे और उस intervene के बाद आप impact देखोगे उस intervention का, impact देखने के बाद आप चीजों को interpret करोगे और उस हिसाब से अपने suggestions दोगे, तो यह जो है आपका एक basic format रहेगा इसी sequence में आप इसको ध्यान रखना क्योंकि कही बार result word देखके obviously हम last में जाने की कुछिश करते हैं but action research में आप result जो ही इन्होंने second पे रखा था जब answers दिया तो तो ठीक sound कर रहा है कि जो result आपके आ रखे हैं उसके बाद आप intervene करोगे उस intervention क

50:30 जिब action research की बात आती है तो इसको local क्योंकि local problems के लिए immediate solutions जो है provide करने के लिए जाना जाता है तो situational or problem solving perspective रहेगा इसका real world में यह intervene करता है alternative practices adopt करते हैं कि एक चीज से समझ नहीं आरा दूसरा अपना दूसरा नहीं आरा तीसरा तो alternative practices आपको यहाँ देखने को मिलेंगी immediate जो है solution provide करेगा यह problematic solution को situation को ठीक है goals क्या रहेंगे social sciences में so mostly social sciences में इसको use किया जाता है collaborative participatory रहेगा co-learning आपको देखने को मिलेगी self evaluative है करनी हो तो और action research overall एक process है कोई एक result जो है वो outcome नहीं है process

51:18 को ही हम action research पोल रहे हैं then logic की base पे दो types हैं जी deduction और induction बहुत important आपको पता होने चाहिए, so deductive approach जिसको top down approach भी हम बोलते हैं ठीक है और इसको हम bottom up approach बोलेंगे, inductive approach तो bottom up मतलब आप नीचे से शुरू हो रहे हो, specific से शुरू हो हरे हो, हर एक इनसान से, बहां से आपने चीजों को observe किया, और फिर आप एक generalization तक पहुँचे, generalized statement तक पहुँचे, so नीचे से उठके आप उपर तक गई हो, ऐसा लगा रहा हो, so bottom up approach, यह deductive वाला down, top down, यह general to specific approach रह और इंडक्टिव में इसका उल्टा हो जाएगा आप

52:05 स्पेसिफिक टू जनरल जो है उसकी बात करें ओकि यानि कि जो डिडक्टिव वाला है यहां पे किसी थियरी या किसी भी चीज के बेस पे प्री एक्जिस्टिंग नॉलेज के बेस ठीक है तो यह आप है पोथिस सेट करो� ओके यहां पर इंडक्टिव में उल्टा नजर आएगा कि आप specific observations के बाद एक general statement पर पहुँच रहे हो, यहां general statement से लेकर आप specific पर पहुँच रहे हो. ऐसे ही दो और टाइप हम इंख्रूड करते हैं, qualitative और quantitative research, इसके बारे में differentiate करना, दोनों का फर्क समझना बहुत जादा ज़रूरी है, तो वो आपको पता होना चाहिए, जब हम qualitative की बात कर रहे हैं, तो obvious सी बात है कि हम numbers पे focus नहीं

52:52 करेंगे हम लोगों की feelings पे, चीजों पे, human relations � तो इस अप्रोच आप्रोच सब्जेक्टिव कि सेंस में हैं कि ऐसे वो दर ना open ended हैं सारी की सारी चीज़ें, आपको explore करनी हैं, जो भी problems हैं उनको समझने के लिए, चीज़ों को करने के लिए आपको थोड़ा सा broad way में जाना पड़ेगा, यहाँ पे quantitative के अगर हम बात करें तो objective approach is to describe, explain and quantify the problem, यहाँ पे आप quantify कर रहे हो चीज़ों को, गूम फिर के

53:45 जब हम quantity अगी बात कर रहे हैं तो हम what पे when पे कब कहां यह इन चीजों पर focus करते हैं जब हम quality अगी बात कर रहे हैं तो हम how पे focus करते हैं how पे when पे कैसे हुआ कब हुआ ठीक है यहाँ पे हम क्या पे majorly यह how और what जो है वो differentiate करेगा चीजों को कि जिब हम qualitative की बात करते हैं हमने ऊपर जिब positiveism और post-positivism की बात की थी तब भी हमने बात की थी कि usually qualitative research में bottom-up approach लगता है ठीक है तो bottom-up मतलब आप specific to general जाते हो specific to general मतलब bottom-up और आपका inductive reasoning हो गया जिसके अंदर आप specific observations करते हो लोगों की और उसके बाल अगर वो generalize हो पाए तो वो

54:31 अंटीटीटियों में क्या रहेगा? डिड़क्टिव रीजनिंग रहेगा और टोप डाउन अप्रोच रहेगा. यानि जेनरल तो स्पेसिफिक जा रहे हुआ ठीग है? डिड़क्टिव रीजनिंग में थियरी से स्टार्ट होंगी चीजें, फिर हम हाइपोथिसिस बनाएं Okay, then qualitative in further verbal data which you will get to see quality again, in-depth interviews, discussions, observations. So, that's the thing. You don't get to focus on quantity, on characteristics. Words, images, interviews, you will get to see qualitative research. Quantitative in numbers, again, numbers,

55:17 statistics, structured way, rigid way, you can get to see some things. Structured interviews are very rigid, compared तो हम नंबर इंग पर आगये वापर कि हम डाटा क्लेक्ट करेंगे मेजरमेंट पर जब हम qualitative approach की बात करते हैं तो हम non probability sampling की बात करते हैं ऐसा नहीं है कि qualitative approach में probability sampling हो सकती है लेकिन majority of time हम non probability sampling use करते हैं किस qualitative है हमें specific to general जाना है जब हम specifically लोगों का data collect करने या interview ले रहें आप सोच हो हम कितनों का ले पाएंग राइट तो हमें उस हिसाब से non probability sampling The same thing is better than the purpose of sampling, convenience sampling which we will

56:03 study types. So it is better when we talk about qualitative. Quantitative probability will focus on the fact that we can collect things randomly and then we can generalize better. So here probability, random sampling will look at result oriented, quantitative research, qualitative process oriented. कुछ जादा statistical test required नहीं होती है यहां पर statistical test require होते है hypothesis को prove करने के लिए okay qualitative में हम hypothesis generate करते हैं यहां पर हम hypothesis को test करते हैं यह question एक बार आया हुआ है so testing of hypothesis usually quantitative research से relate की जाती है okay qualitative है तो हम inductive approach की बात तो कर रहे हैं कि

56:51 हम specific to general जाएंगे but generalize कर पाना थोड़ा सा मुश्किल होता है यहां less generalizable findings आपको नजर आई है वहां पर किसने क्या बोला कैसे हुई चीजें या क्या रहा रहा रिसर्च में क्वांटिटेटिव में स्टाटिस्टिकल पॉर्षन जादा मिलेगा जहां पे आपको नंबर्स डाटा चीजें वह आप रिपोर्ट कर रहे हो वेरिबल के वीच में रिलेशन्शिप रिपोर्ट कर रहे हो

57:43 वह चीजें तो एक गुड़ स्टाटिस्टिकल एनलसिस जो है इस डा तो अब इसको जन्रलाइज नहीं कर पाते हैं बेटर तरीके से लार्ज वोल्यूम ऑफ डाटा हो समॉल सेंपल साहिज से हम ज्यादा डाटा क्लेक्ट करने ही कोशिश करते हैं रिसर्चर की बाइसनेस भी आ जाती है कई बार क्रियेटिव प्रोसेस तो यह मेंड इशूस जो है If we see in the difference, if we see in the qualitative and quantitative studies, we have interviews type in the qualitative, biographical studies, phenomenology, grounded theory, ethnographic studies. So these are examples,

58:30 especially exploratory, because when we talk about quantitative, we talk about explanatory studies. So exploratory research, they will look at you here. These are quantitative examples, फोकस किस पर कर रहे हो data collect करने पर, quantity पर, numerical data. Okay, so overall, अगर आप differentiate करना चाहो, तो qualitative research, inductive reasoning की बात करता हूँ, नजर आएगा, जिसको ओम bottom आप approach भी बोलते हैं, और majorly non-random sampling या non-probability sampling आपको यहाँ use होते हुए नजर आएगी. Quantitative research में deductive reasoning नजर आएगी थोड़ी सी, top-down approach आपको नजर आएगा, जिसमें हम general to specific की बात करते हैं

59:17 Again, I will say that we cannot use non-random sampling quantitative research, but avoid it. In quantitative research, we use it in quantitative approach. In qualitative research, we focus on characteristics, attributes, or interviews, that we have to collect data, so there are purposes and convenience sampling. रेंडम सांप्लिंग में इंक्लूड हो जाता है ठीक है जी देन बात करते हैं क्वालिटी रेटिव या क्वालिडेटिव के डाटा एनालिसिस तो जो qualitative data analysis है उसमें usually data collect करोगे, prepare करोगे, चीजों को organize करोगे, themes बनाओगे, code करोगे data को,

1:00:04 code करते हुए आप identify करोगे themes को, then interpret करोगे in themes को conclusions draw करने के लिए और फिर उन findings को report करोगे, ठीक है, तो यहाँ पर thematic way में आपको analyze करते हुए नजर आएंगी चीजे, but quantitative में चुकि हमारे प हम objectives define करेंगे या questions define करेंगे जो हमे research questions करने है data को collect करेंगे clean and preparing it for analyzing so हमे analyze करने के लिए उसको prepare करना है then explore करना है और फिर हम conclusion पे पहुँशे उसको summarize करेंगे ठीक है statistical test लगाएंगे ताकि हम hypothesis testing कर सके hypothesis testing या regression analysis regression में हम चीजों को predict करते हैं कि मानलो अगर

1:00:54 एक की वज़ए से दूसरा दूसरा फैक्टर एफेक्ट हो रहा है मानलो कि independent variable की वज़ए से dependent variable change हो रहा है. So, वो कितना change हो रहा है वो predict करने के लिए हम regression analysis लूज करते हैं. फिर हम results को interpret करते हैं और उनको अपने reports और presentation के थूदू communicate करते हैं. Okay, so आपको यह नजर � पर फोकस किस पर है quantity पर है numerical data पर है measurement पर है qualitative में थोड़ा सा experience पर focus है क्योंकि human behavior include हो जाता है और qualitative में हम experience पर ज्यादा focus कर रही है चीज़ा थोड़ी सी flexible है So this is the major difference in both methodology. We are looking at the rational

1:01:40 approach, rationalism. In qualitative, empiricism, experience. Quantitative is a little result, structurally result methodology. And qualitative is a little flexible. Qualitative is a focus on the description, on describe it. quantitative में focus data को collect करना और उसको analyze करना वो भी numerical data okay so यह numerical data को explore करेगा फिर वहां से हम pattern identify करेंगे relationship देखेंगे चीजों को देखेंगे predict करेंगे last में जाके हम outcomes जो हम अपने report कर देगे qualitative में ज्यादा exploration है experience की क्या मतलब निकल किया रहा है कौन क्या चीज बोल रहा है क्या perceptions है क्या feelings है उस

1:02:30 रहनाता है जी descriptive research describe करेगा जो कि क्या है so what is ठीक है तो what is पर focus करता बने से आए गई गई वह इस से मिर को एकदम से वो याद आगे ओ खीचडी में खीचडी सीरियल आता था ना पहले जिसमें वो हंसा होती है what is so what पर focus करेगा यह descriptive जो यह describe करेगा कि जो जो चीजें exist करती हैं क् तो यह वाट पर फोकस करेगा इसकी केटेगरी अगर आप देखोगे तो यहां पर आपको descriptive में अगर आप qualitative की बात करोगी तो case studies भी मिल जाएंगी surveys मिल जाएंगी developmental studies मिल जाएंगी तो यह सारी चीजे ना आपको descriptive में ऐसे नहीं है कि सिर्फ quantitative ही हो

1:03:17 सकता descriptive में qualitative quantitative दोनों research हो सकती ह पूछी जाती है इक बहुत बेसिक एक्जामपल हमेशा देती हूं यह देती हूं यह तो आप यह यह आद रख लो कि लोगी टूडनल है एक से जादा बार सेम इंडूइजूल से डाटा करेक्ट किया जाएगा प्रोसेक्शनल है So, you will have one time interaction with the subject. But if you remember the example, you will

1:04:05 automatically remember that. You बहुत लंबा टाइम लग रहा है, so it is longitudinal study, अब इस study में क्या-क्या specifications आपको नजर आ रही है, आपको नजर आ रहा है कि हम बार-बार same subject से, subject बोलते हैं जब आप किसी से data collect करते हो, तो एकसमें research की terms बोल देंगे, तो जो बच्चे हैं जिनसे आप data collect करें, जो आपकी subjects हैं, उनस cross-sectional

1:05:11 तो यह दो टाइप्स जो है आपको अच्छे से पता होने चाहिए, Cross-Sectional Study और Longitudinal Study, Okay? Then Descriptive Research में Steps क्या रहे हैं? यह Major Steps हैं, आप जब भी कही Steps की बात आए चाहिए, वो Descriptive में, किसी भी तरीके की Research में या Research के Process में, जब आपसे Steps पुछे जाएं, Use Your Common Sense, ठीक है? ओब्यूस तो वह common sense आपको लगानी है कि ऐसा नहीं हो सकता है कि आप research report पहले लिग दो और बाद में problem select लो तो usually ऐसे steps में sequence पूछी जाती है, वह sequence में लगाने के लिए कोई भी 3-4 step आपको दे रखे होंगे, तो उनके हिसाब से पहले कौन सी चीज करोगे फिर

1:05:57 कौन सी होगी, वह common sense आपन तो problem को select किया, फिर हमने उसकी statement ready की define किया problem को, data को identify किया, select किया या develop किया, tool को develop किया, फिर sample select किया, data को collect किया, analyze और interpret किया, और interpret कि बाद ही तो results आएंगे, conclusion आएगा, उसको हमने research report में mention किया, so ये major major steps हैं, बट आपको थोड़ा idea रहेगा, तो आप sequence में लगा पाओगी, तो वह चीजे आपके पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर

1:06:47 पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर पर प आपको यहां पर नजर आएंगा आपको ट्रेंड स्टडी करना है एफेक्ट स्टडी करने है यह आपको रेलेवेंस देखना है पीछले वाली चीजों का आज के टाइम पर तो इस्टोरिकल रिसर्च आपकर रहेगा जब भी इस्टोरिकल रिसर्च आए आपको स्टेप्स बता historical research data criticizes in two ways external criticism and internal criticism so when word comes to criticism of data or external and internal criticism which type of research you close to historical research then you have to select the problem,

1:07:35 then hypothesis, then data collected After the data collection, the data criticized, then analyzed, interpreted and then the research report. So, criticism is the main point here. So, that should be remembered. Now, we will cover one criticism. Before we talk about historical research, we can collect two different ways. Primary data will remain and secondary data. Primary data will remain? Which one is the first witness to which one is the first witness. कि मान लो मैं जलिया वाला बार जे वर्तिया कांड वहां की और मैं इक लोती बच गई और अब मैं उस पर रिसर्च कर रहे हैं, तो मैं प्राइम विटनेस हूं या कोई और रिसर्च कर रहा है तो जो इनसान वहां बच गया था

1:08:27 या जिसने वह गटना देखी थी या जो आस पा Secondary क्या हो जाएगा कि वहां से किसी ने उस इंसान से data लिया फिर छाप दिया फिर न्यूस्पेपर्स में छपा था वहां से आपने देख लिया फिर वुक्स में छपा था वहां से आपने collect कर लिया तो वह क्या होगी वह first hand information नहीं है that is second hand information तो वह secondary data लिजाएगा यह एक्जैम्पल से जैसे परसनल रिकॉर्ट हो गए ओफिशिल रिकॉर्ट हो गए चार्टर्स हो गए विल्स हो गए इस दीड्स तो यह सारी चीज़े किसमें आएंगी जी प्राइमरी डाटा में आएंगी सेकंडरी डाटा में आपकी जो टेक्स्ट बुक्स हैं एंसाइक्ल

1:09:26 एक्स्टरनल में हम डाटा की जैनुइननेस चेक कर रहे हैं और जब हम उसकी वैलिडिटी और वर्फ चेक कर रहे हैं तो वह आपका इंटरनल क्रिटिसिजम हो गया तो यह बात आपको पता हुआ जिए जब भी क्रिटिसिजम की बात हो तो वह हिस्टॉरिकल रिसर्च में होता क्या चीज हुई कैसे हुई उसके पीछे क्या कारण था कोज एंड एफेक्ट रिलेशन्शिप को जो आप study करना चाहरे हो तो आप experimental research जो है उसके उपर focus करते हो और experimental research है तो कुछ एक words भी होंगे जैसे experiment जो experimenter जो experiment कर रहा है

1:10:11 जो experiment हो रहा है वो हमें पता है कि हाँ हम कुछ जान So, this will be an experiment that we have planned on the researcher's how to do it. तो इसमें भी आप लिट्रेचर सर्वे करोगे, फिर प्रोब्लम को डिफाइन करोगे, सिलेक्ट करोगे, फिर स्टेट आपने डेफिनिशन बना दी प्रोग्लम की, फिर आपने हाइपोथेस बनाई, फिर आपने प्लान बनाया, डिजाइन किया, फिर उसको इंप्लिमेंट कर से उसी

1:11:00 step पे जाओगे और फिर से उसको experiment को करके देखोगे अब बात आती है experimental और descriptive में फर्क की descriptive में हम what पे focus कर रहे हैं क्या है what is experimental में हम what if पे focus कर रहे हैं क्या हो अगर ऐसा हो जाए तो यहां पर हम cause and effect की बात करेंगे, यहां पर हम सिर्फ data collect कर रहे हैं, जो चीज है exactly उसको describe करके mention कर रहे हैं. Typically sociological और psychological studies में descriptive research और forensic studies में, biological studies या laboratory studies में experimental research देखने को मिलता है. This means that it can't be in experimental research in social sciences. No, it is true. What do you do in experimental research? I mean, I give an example in education. I have given an example that I want to see that traditional

1:11:50 lecture method is that when children are learning from that, and when they are learning from ICT, what difference is that I have to give an intervention for the ICT. It's like I have selected a school and I am doing experimental study, so I will go there. I will study a group with ICT and a group with a group. So, I am watching those things. So, it is not that there is a use in experimental research in social sciences. But comparatively, it is less. When the descriptive comes, we focus on quantitative and qualitative methods. But when we talk about experimental, we focus primarily on quantitative. Because, see, this is something that extreme way of the universe doesn't happen. So, it

1:12:37 doesn't happen. So, it doesn't happen that you can use qualitative methodology here. No. But majorly you use quantitatively when you talk about experimental. Because, we focus on scientific research on experimental or scientific research that it can be replicated. ठीक है अगर lab में कोई equation reaction करके देखी है तो कोई और बच्च अभी किसी और lab में भी same reaction, same procedure के साथ करें. So, वो replicate हो सके, उसके result भी same आ सके. इसलिए हम majorly quantitative methodology पे focus करते हैं. Okay, then एक word आता है, exposed facto study. Exposed facto, यानि वो fact वो चीज हो चुकी है. So, after the factor research, जिसको हम बोलते हैं. तो यह वो रिसर्च डिजाइन ओगा जिसमें कोई घटना घटित हो चुकी है ठीके किसी का मर्डर

1:13:24 हो चुका है अब हमें देखना है किस ने किया है तो एक्स पोस्ट फैक्टो स्टडी होगी यानि after the fact कि कोई चीज बारिश हो चुकी है कैसे पता चला क्यों हुई क्या रहा वो एक इंडिपेंडेंट वेरियेबल और एक डिपेंडेंडेंट नाम से पता चल रहा है यह डिपेंडेंट तो किसी पर निर्वर करता है लेकिन इस पर निर्वर करता है यह इंडिपेंडेंट वेरियेबल पर निर्वर करता है अब यह इंडिपेंडेंट जिसको आप मैनुपल आप manipulate कर सकते हूं independent variable को तो आप और उसका फर्क देगी fact

1:14:14 देखना चाहरे हो dependent तो यह cause and effect relationship आप जानने की पोशिश कर रहे हो तो यह experimental research है लेकिन अब murder हो चुका है ना अब ना हम उसको बचा सकते ना कुछ और कर सकते तो जो activity already हो चुकी है आप उसका फर्क कैसे देखोगे, तो यह major difference है कि experimental research में control है हमारा independent variable के उपर, but exposed factor में researcher जो है, वो directly manipulate नहीं कर सकता है, क्योंकि वो चीज वो चुकी है, तो वो effect तो हमारे सामने है न, अब हमें predict करना है कारण क्या था, So in X-post-factor research, the researcher cannot directly manipulate the independent variable, y'all need

1:15:03 current as he or she predict the cause. The effect of the dependent variable is the basis. So, एक्सपरिमेंट जो हम कर रहे हैं कि मैं दो ग्रूप्स बनाके उनको पढ़ा रही हूं तो मैं रेंडमली वो ग्रूप बनाऊंगी तो मेरे रिजर्ट्स बेटर आएंगे और उसकी बज़र से चीजें और जो जो बाइसने सी अब आखी चीजें आ सकती थी वो नहीं आएंगी हमारा जब कोई control ही नहीं है current के उपर, क्योंकि effect तो already हो

1:15:50 चुका है, तो बहुत सारी possibilities आ जाती है, causes की, कि murder किस नहीं किया, क्यों किया, कोई-कोई अलग-अलग suspects हो सकते हैं, तो वो चीज जिए जिए वो ex-post facto में आएगी, कि हम principle of randomization यहां लाबू नहीं कर सकते हैं. Manipulation of variable, तो manipulation The result interpretation will be easier to see if you can see it because you can relate to it. So you will see the difference between what to do and what to do. So the difference will be seen in the experimental, but in the post-factors will not be seen. Because the interrelationship is not known, we are just taking inference. It is difficult to interpret and infer the relationship.

1:16:40 Inference is difficult to take out the inference. we don't know so many possibilities as compared to experimental research then or words like exploratory research explanatory research analytical research explore यानि जेनरली वो चीज हुई नहीं है आप क्या कर रहे हो एक्स्प्लोर करना चाहरे तो आप एक small scale study करके देखोगे कि वो चीज आगे लागू हो सकती है नहीं हो सकती है ठीक है तो exploratory में qualitative data qualitative research जादा नजर आईगी क्योंकि आप explore कर

1:17:27 रहे हो चीजों को exploratory में आप जो चीज है � leads to note learning. So, वो जब आप जानना चारे और explain करना चारे और explainatory research होगा. Analytical research में आप analyze कर रही हो. Critical evaluation, critical thinking के साथ की आप जो है, जो है, जो already facts or information आपके पास present है. So, आप analyze करके चीजों तक पहुंच रही हो. Okay? जब आप एक से ज़्यादा तहली का इस्तेमाल कर रहे हो, multiple methods का, multiple data sources का, so व So to use the multiple methods or data resources in qualitative research to develop a comprehensive understanding of phenomena. You can say this different words, but

1:18:15 triangulation means that when you want to see different perspectives, different insights, different ways you collect things, so that triangulation will be called, remember to keep this word. Okay? अब exploratory में data कैसे collect किया जाएगा पहले qualitative data collect होगा and then same pre nominated the data छीच है वो explanatory में quantitative पे focus होगा triangulation में दोनों साथ में collect किये जा रही है छीच है तो triangulation में दोनों तरीके से आप data collect कर रहे हो quantitative भी qualitative भी explanatory में quantitative data collect कर रहे हो exploratory में qualitative ओके फर पता हो Normative research, जैसे आपने descriptive research में what is भे focus किया था, हनसा वाला what

1:19:03 is, तो what पे focus किया था, वैसे what should be, क्या होना चाहिए, क्या है और क्या होना चाहिए, यानि norms के हिसाब से, rules के, values के, moral principles के हिसाब से, क्या चीज़ होने चाहिए, वो अगर आप focus कर रहे हो, वो explore कर रहे हो, तो normative research, जब आप क तो conclusion, क्योंकि आप normative research हमेशा defined set of values और moral principles के साथ शुरू होता है, फिर आप use करते हो इन principles का एक conclusion तक पहुचने के लिए, तो यह essentially पूचेगा कि given these values की, इनके साथ साथ क्या एक best course of action हो

1:19:49 सकता है, यानि कि conclusion तो आपने already inherent उसके अंदर जो initial framing है question की उसी के अंदर कर दिया जैसे should government subsidize renewable energy यानि कि renewable energy अच्छी चीज है उसको subsidize करना चाहिए तो should करना चाहिए कि नहीं चाहिए तो वह करना चाहिए वाला यह बस question mark लगा गया Should there be a minimum wage minimum wages होने चाहिए यह सही बात है moral principles or values के हिसाब से So, आप क्या कर रहे हो इसमे conclusion कही न कही inherent होता है यह बात याद रखने कि question आया हुगा है कि किस तरीके की research में conclusion जो है वह given situation में included आपको नजर आएगा तो वह normative में नजर आ तो प्रवाइब करें

1:20:37 तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्रवाइब करें तो प्र� ग्राउंडेड रिसर्च में ग्राउंडेड थेयरी रिसर्च में कब तक डाटा केलेक्ट करते हो तो जब तक आप डाटा केलेक्शन से सैटिस्पाइड नहीं हो जाते तब तक आप इसमें डाटा केलेक्ट करते हो तो जब तक आप इसमें डाटा करते हो

1:21:24 यह बात याद रखेगा okay theory वेरिफाइब करेंगे और जनरलाइज करेंगे तो ग्राउनिट थेयरी में यूज्वली हम थेयरी को जनरेट करने पर फोकस करते हैं कि कैसे नई थेयरी कई कोई नई जनरलाइज थेयरी बनाई जासके ओके इसमें तीन तरीके की कोडिंग होती है इस बात आपको पता हो पू� So, within the grounded theory approach, first

1:22:12 you identify patterns for the theory to develop. Then with open coding, being the initial stage, break down the initial codes. Then you try to connect those codes and make relationships. Then you try to connect those codes. You try to connect those codes. You try to connect those codes. Then you try पर देन को और थीम तक वहुंच रहे हो ठीक है कैसे पहुंच रहे हो रिलेशन्शिप आइडेंटिफाइब करके किस बैसे पर एक्जियल कोडिंग के बैसे ओके रिसर्च जो है अन्टेक्स अकॉर्डिंग इन ग्रांड़ेट थेयरी तू स्टॉप तो यह बात आपको याद रहत निए थे ओरिटिकल सैचुरेशन वह पॉइंट होता है कि इसके आगे जो है कोई और डाटा जनेरेट नहीं चीज जनेरेट नहीं की

1:23:03 जा सकती यारी आपने देखो तब तक डाटा के लेक्ट किया जब तक आप से हो रहा था जब तक फिल्क एंड saturation का point रही था चीक है वो था normative यह है narrative. तो narrative research में आप narrate करते हो. यानि you are retelling the stories. जो आपने explore की थी, जो लोगों का experience था. अब उसको आप कैसे, researcher curious रहता है लोगों के बावे में जानने के लिए, उनकी feelings के बावे में जानने के लिए narrative research में क्योंकि वो ही चीज़ तो वो narrate करेगा further. Right? So इसमें collecting और analyzing

1:23:53 आप समझने की कोशिश करते हो कि किसी क्या स्टोरी है कैसी है केस स्टडी में हम डीपर लेवल पर किसी चीज को स्टडी करते हैं केस स्टडी केस से याद आ जाएगा आपको समझ आ जाना चाहिए जैसे आप कभी वकील वगेरा के केसी वगेरा देखते हैं तो वो केस खिचता � तो केस का मतलब भी वहीं से लगा लो आप पहले research question identify करोगे फिर आप case select करोगे research design develop करोगे देखो design हमेशा पहले develop होता है उसको करने से पहले research design develop करना और research करना दो चीज़ें हैं तो research design पहले develop होगा फिर आप data को collect करोगे analyze करोगे interpret करोगे और findings को write up करके report करोगे एक और तरीके का रिसर्च है जी

1:24:41 एथ्नोग्राफिए इसको एथ्नो मेथ्नोडोलोजी भी बोलते हैं कि उस मेथ्नोडोलोजी ओपीपल से आया है यह क्या डिस्टराइब करता है यह सिस्टेमेटिक स्टेडी है लोगों की लोगों के कल्चर की इसमें major चीज, usually तो हम cultural phenomena explore करने के लिए ही ethnographic study करते हैं, ठीक है? qualitative research method यह बात आपको पता हो, usually interviews कि

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