0:01 हेलो एवरीवन, वेलकम बैक टू माय YouTube चैनल। तो आज मैं लाई हूं आप सभी के लिए एक इंपॉर्टेंट वीडियो। यहां पर हम डिस्कस करेंगे आपके बॉटनी 1337 के इंपॉर्टेंट क्वेश्चन एंड मोस्ट रिपीटेड क्वेश्चन जो कि हमेशा पूछे जाते हैं आपके पेपर में। ठीक है? तो हम यहां पे स्टार्ट करेंगे। यहां पे हमने क्या करा है? बहुत सारे पेपर मतलब कि चारप पेपर लेके वहां से मोस्ट रिपीटेड क्वेश्चन एंडेंट क्वेश्चन को एनालाइज किया है। जिससे आपके पीवाईक्यूस भी यहां पे कवर हो जाते हैं। राइट? तो चलिए हम स्टार्ट कर लेते हैं वीडियो। तो मेरा नाम है सालिया खान और आप देख रहे हैं इग्नू शिक्षा डिजिटल। ठीक है? तो चलिए स्टार्ट कर लेते हैं। क्वेश्चन नंबर वन है जिसमें आपको देखना है कि डिस्क्राइब द केल्विन बंसन साइकिल। ठीक है? केल्विन बंसन साइकिल इज नथिंग बट योर C3 साइकिल। ठीक है? जो आपने C3 साइकिल पढ़ा होगा अपनी क्लास 11th में। ठीक है? वही है आपकी
0:47 केल्विन बंसन साइकिल। ठीक है? और C4 साइकिल में भी आता है आपका। ठीक है? क्वेश्चन और इन दोनों के बीच में डिफरेंस भी आता है। तो मैंने आपको यहां पर एक क्वेश्चन में से बता दिया किस-किस टाइप से क्वेश्चन पूछा जाता है। ठीक है? तो आपको इस तरीके से करना है। तो यहां पे सबसे पहले आप इसको डिस्क्राइब करेंगे केल्विन बंसन साइकिल को फोटोसिंथेटिक कार्बक रिडक्शन में। तो ये आपका रिपीट हुआ है। जून 22 में आया है और दिसंबर 24 में भी आया है। तो चलिए स्टार्ट कर लेते हैं इस क्वेश्चन को। तो केल्विन बंसन साइकिल को हम C3 साइकिल कहते हैं। यह आपका लाइट इंडिपेंडेंट रिएक्शन है। यानी इसको लाइट की डायरेक्टली जरूरत नहीं है। लाइट से इंडिपेंडेंट रिएक्शन होती है। तो हम इसको डार्क रिएक्शन भी कहते हैं। जैसे आपने फोटोसिंथेटिक में लाइट डिपेंडेंट रिएक्शन पढ़ी होगी। उसमें आपने Z स्कीम पढ़ी होगी। फोटोफॉस्फोराइलेशन पढ़ा होगा। जहां पे हम
1:33 एटीपी बनाते हैं बेसिकली। लेकिन जो आपकी C3 एंड C4 साइकिल है, उसको हम डार्क रिएक्शन भी कह सकते हैं। या फिर मैं उसको बोल सकती हूं कि लाइट इंडिपेंडेंट रिएक्शन ये होती है। यह आपकी कहां पे होती है? आपने क्लोरोप्लास्ट के पूरे फंक्शन के बारे में देखा होगा। क्लोरोप्लास्ट आपका कुछ इस तरीके से दिखता है जिसकी आउटर लेयर होती है, इनर लेयर होती है। यहां पे आपको एक स्टक लाइक का सिस्टम दिखता है। इस पूरे को हम बोलते हैं ग्रेना। ठीक है ना? और इसका एक जो एक बंडल दिख रहा है ना ये सैक लाइक स्ट्रक्चर इसको हम बोलते हैं थैलाकॉइड। तो इसके थैलाकॉइड में आपकी जो है लाइट रिएक्शन होती है। लेकिन आपकी ये स्ट्रोमा में होती है। अब यहां पे जो ये पानी सा है इसके अंदर ठीक है? यहां पे बहुत सारे बंडल्स होंगे और ये जो बाकी बची हुई फ्लूइड मेंब्रेन होती है इसको हम स्ट्रोमा कहते हैं। ये दो स्टक जो हैं इनको अगर मैं कनेक्ट करूं तो उसको किससे कनेक्ट करते हैं? स्ट्रोमल लेमिली से कनेक्ट करते हैं। तो बेसिकली आपको ये
2:19 स्ट्रक्चर समझ में आ रहा होगा। क्लोरोप्लास्ट का स्ट्रक्चर है। जहां पे मैं बताऊं कहां पर होता है? आपके लाइट डिपेंडेंट रिएक्शन जो होती है बेसिकली इंडिपेंडेंट रिएक्शन हम पढ़ रहे हैं जो कि डार्क रिएक्शन भी हम इसे बोलते हैं। ठीक है? ये आपकी कहां होती है? स्ट्रोमा में होती है क्लोरोप्लास्ट के लिए। और यहां पे बेसिकली क्या होता है? आप कार्बन डाइऑक्साइड की फिक्सेशन करते हो। ठीक है? और उसको ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स में चेंज कर देते हो। लाइक ग्लूकोज़ हो गया। ठीक है? माल्टोज़ हो गया, स्टार्च हो गया। तो आपको जो डार्क रिएक्शन कराई जाती है उसमें आप कार्बन डाइऑक्साइड की फिक्सेशन करते हो एटमॉस्फेरिक कार्बन डाइऑक्साइड का और उससे आप ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स बनाते हो। वो फिर आप खाते हो। मतलब आप नहीं बल्कि प्लांट्स। ठीक है? इसके तीन मेन फेसेस होते हैं आपके C3 साइकिल का। सबसे पहला फज़ जो होता है वो आपका होता है कार्बन फिक्सेशन। जहां पे आप कार्बन फिक्सेशन करते हो। यानी कि कार्बन डाइऑक्साइड को फिक्स किससे कंबाइन करते
3:05 हो? पांच कार्बन शुगर से। उसका नाम क्या है? आरयूबीपी। तो बेसिकली आप एक साइकिल बनाएंगे तो सबसे पहले ना आपका कार्बन फिक्सेशन वाली साइकिल होगी। उसके अंदर क्या करोगे? आप CO2 को रिएक्शन करा दोगे आरयूबीपी के साथ। आरयूबीपी आपका कितने का है? आरयूबीपी आपका पांच कार्बन का कंपाउंड है। ठीक है? कितना है? पांच कार्बन कंपाउंड है। अब इसमें इसका नाम क्या है? आरयूबीपी का? राइबुलोज़ डिसफॉस्फेट। ठीक है? और इसके लिए जो इस रिएक्शन को कैटलाइज़ करेगा यानी इस रिएक्शन को आगे बढ़ाएगा। उसके लिए जो कैटेलिस्ट आप यूज़ करोगे एंजाइम जो यूज़ करोगे वो आपका रूबिस्को होगा। तो रुबिस्को की प्रेजेंस में आप कार्बन डाइऑक्साइड को आरयूबीपी के साथ रिएक्ट कराओगे तो आपके पास छह कार्बन का कंपाउंड बन जाएगा। एक कार्बन कार्बन डाइऑक्साइड के पास है और आरयूबीपी पांच कार्बन का है। तो जब दोनों को मैंने कंबाइन किया तो आपके पास छह कार्बन का एक अनस्टेबल कंपाउंड बना। फिर ये अनस्टेबल
3:50 कंपाउंड जो है वो स्प्लिट हो जाएगा। अब आपके पास जो स्प्लिट होगा ये कंपाउंड वो दो मॉलिक्यूल्स में टूट जाएगा। वो दो मॉलिक्यूल्स कौन से होंगे? PGA ठीक है? इसका पूरा नाम क्या है? फास्फोग्लिसरेट। अब दो में टूटेगा तो तीन-तीन करके टूटेगा क्योंकि छह कार्बन है तो तीन कार्बन का ये होता है। तो यानी टू मॉलिक्यूल्स ऑफ़ 3 PGA। ठीक है? इस तरीके से आपका ये टूटेगा। तो पहले में आपने क्या बनाया है? 3 पीजीa बनाया है। कैसे बनाया है? CO2 के को कंबाइन किया। आरयूबीपी के साथ। CO2 एक कार्बन हो गया उसके अंदर। आरयूबीपी के पास पांच कार्बन हो गए। तो हमारे पास छह बचा। उसको स्प्लिट स्प्लिट करके हमने तीन तीन-तीन कार्बन वाले पीजीए बना लिए। वो भी दो मॉलिक्यूल। ठीक है? एंजाइम कौन सा लगा आपका? आपका रूबिस को लगा। नेक्स्ट जो है वो है रिडक्शन स्टेप। अब रिडक्शन स्टेप में क्या होगा? इसमें जो आपने तीन पीजीए बनाया था उसको कन्वर्ट करोगे आप G3P में।
4:38 ठीक है? किस में कन्वर्ट करोगे? G3P में। जिसको हम बोलते हैं ग्लिस ग्री ग्लिसरल्डिहाइड थ्री फास्फेट। ठीक है? ग्री ग्लिसरल्डिहाइड थ्री फास्फेट। ये G3P में आप करोगे। और इसके लिए आपको यूज़ करना है एटीपी का और एनएडीपीए का। ठीक है? जो कि आप लाइट रिएक्शन से लेकर आए हो क्योंकि हमने लाइट रिएक्शन में एटीपी बनाया है। NADPए बनाया है। उसका यूज़ हम डार्क रिएक्शन में करेंगे। तो आप एटीपी का यूज़ करोगे यहां पे इस स्टेप पे रिडक्शन फज़ पे। यहां पे एटीपी यूज़ करोगे। NADPH यूज़ करोगे। है ना? और फिर उसके बाद आप यहां पे 3pg को कन्वर्ट कर दोगे थ्री फास्फेट में यानी ग्लिसरल्डिहाइड थ्री फास्फेट। कुछ जो होंगे मॉलिक्यूल उसको हम कार्ब ग्लूकोज़ बनाने में हेल्प कर देंगे और बाकी जो है उसको हम अदर कार्बोहाइड्रेट्स के पास भेज देंगे। ठीक है? तो आपकी रिडक्शन स्टेज हो गई। नेक्स्ट जो है रीजनरेशन यानी कुछ बचे हुए G3P होंगे उसको हम दोबारा से आरईबीपी
5:24 के पास भेज देंगे कि दोबारा साइकिल हो जाए स्टार्ट और जो बाकी बचा हुआ होगा वो हमने अपना जो मॉलिक्यूल है बनाने ऑर्गेनिक कंपाउंड बनाने में यूज़ कर लिया तो इस तरीके से आपका ये बनता है ठीक है ये केल्विन साइकिल चलती है और इस प्रोसेस को भी एटीपी की जरूरत पड़ती है। अब देखो यहां पे क्या बोल रहा है? एव्री थ्री कार्बन डाइऑक्साइड मॉलिक्यूल्स फिक्स्ड वन G3P. हमने बोला है कि हर एक तीन कार्बन डाइऑक्साइड मॉलिक्यूल्स को G3P जो होता है उसके पास एक मिलता है और छह टर्न ऑफ साइकिल के लिए एक ग्लूकोज़ मॉलिक्यूल बनता है। तो हमें पता है जब छह बार कार्बन डाइऑक्साइड आएगा तो हमारे पास एक ग्लूकोज़ बचेगा बनेगा। क्यों? क्योंकि ग्लूकोज़ में छह कार्बन होते हैं। तो हमारे पास छह कार्बन होने चाहिए ना तो छह कार्बन डाइऑक्साइड वाली साइकिल चलनी चाहिए। ये जो होता है प्लांट ग्रोथ एंड फूड प्रोडक्शन के लिए बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है। ठीक है? तो इसके लिए एक मैं आपको ट्रिक बता देती हूं। 3 2 1 है। यानी कि आपका जो है
6:14 तीन एटीपी लगता है। ठीक है? तीन एटीपी लगता है। दो NADPए लगता है। दो NADP लगता है एक कार्बन डाइऑक्साइड के फिक्स करने में। ठीक है? तो अगर मेरे पास ये मैं बता रही हूं जब एक कार्बन डाइऑक्साइड आप फिक्स करते हो। एक कार्बन डाइऑक्साइड वाली साइकिल चलाओगे ना आपको ग्लूकोस बनाने के लिए कितने चलानी पड़ेगी? छह। ठीक है? तो जब एक चलाते हो तो आपके पास तीन एटीपी की जरूरत पड़ती है और दो NADPH की जरूरत पड़ती है। एक कार्बन डाइऑक्साइड अगर मैं छह के लिए चलाऊं तो यानी कि ग्लूकोस अगर मुझे बनाना है तो मैं क्या करूंगी? छह CO2 लगाऊंगी तो आपका 3 2 1 था यानी 3 एटीपी था तो 3 * 6 कर दूंगी तो 18 एTP हो जाएंगे। ठीक है? और दो NADP थे तो 2 * 6 से इसको भी करोगे क्योंकि छह के लिए आपको छह कार्बन के लिए करना है। तो ये हो जाएंगे 12 NADPH। तो अगर एक ग्लूकोस आपको बनाना है तो उसके लिए कितने एटीपी की जरूरत पड़ेगी? 18 एटीपी की और 12 NADPए की। समझ
7:01 गए? तो आपको इस तरीके से केल्विन साइकिल करनी है। तो आप ये शीट बना के भी दिखा दोगे ना तो एग्जामिनर तो वैसे भी खुश हो जाएगा। ठीक है? तो चलिए नेक्स्ट पे चलते हैं। नेक्स्ट क्वेश्चन है आपका डिस्क्राइब द ग्लाइकोलिसिस। ठीक है? तो ग्लाइकोलिसिस साइकिल बहुत ज्यादा ये आपका रेस्पिरेशन इन प्लांट्स में क्लास 11th में आप पढ़ सकते हो। वहां पे आप जाके सर्च करना। ठीक है? प्लांट फिजियोलॉजी। ठीक है? प्लांट फिजियोलॉजी वन शॉट इसमें तीन-चार घंटे का लेक्चर होगा। उसको पूरा देख लेंगे ना सारा कवर हो जाएगा आपका। प्लांट फिजियोलॉजी बाय गरिमा गोयल। ठीक है? किससे करना है आपको? बाय गरिमा गोयल। ठीक है? वो क्लास 11, 12थ जो भी है वो सारा आपका करा देंगी। ठीक है? आप देखो ग्लाइकोलिसिस वो बहुत अच्छे से समझाती हैं। तो आप उनका देख सकते हो जाकर के अगर इफ यू हैव मच टाइम। ठीक है? चलिए ये आपका जून 24 और दिसंबर 23 में आया हुआ है। ठीक है? ग्लाइकोलिसिस विद एस्केमेटिक डायग्राम। डायग्राम आप कैसे बनाओगे? आपको कुछ डायग्राम बनाने नहीं है। आपको बस
7:47 स्टेप्स दिखाने हैं कि सबसे पहले क्या होगा? आपने ग्लूकोस लिया, ग्लूकोस से ग्लूकोस सिक्स फास्फेट बनाया। इस तरीके से आप बता देना। ठीक है? यही आपका डायग्राम होता है। तो ग्लाइकोलिसिस आपका बेसिकली है क्या? फर्स्ट स्टेप होता है सेलुलर रेस्पिरेशन का। क्योंकि सेल्स के बीच में रेस्पिरेशन होता है। सांस तो लेते हैं। उनके पास ना ही लंग्स होता है ना ही आपका कोई भी ऐसा सिस्टम होता है जिससे प्लांट्स जो है वो सांस लें। तो क्या करते हैं? ग्लाइकोलिसिस करते हैं। सेलर रेस्पिरेशन करते हैं। कहां होता है? साइटोप्लाज्म में होता है। ठीक है? तो ग्लाइकोलिसिस कहां पे चलती है? आपकी साइटोप्लाज्म में चलती है। ये जो होता है एक ग्लूकोस के मॉलिक्यूल को तोड़ता है तीन कार्बन के पाइरुवेट में। यानी बेसिकली अगर मैं ओवरऑल रिएक्शन बताऊं तो ग्लूकोस जो होता है वो छह कार्बन का होता है। उसको आप तोड़ के दो मॉलिक्यूल्स ऑफ पाइरुविक एसिड बनाते हो या पाइरुवेट भी आप लिख सकते हो पाइरुविक एसिड। पाइरुविक एसिड तीन कार्बन का होता है। इसीलिए दो मोल्स आप बनाते हो क्योंकि 2 * 3 = 6
8:34 होगा। ठीक है? अब यहां पे जो है प्रोड्यूसिंग एनर्जी। इसमें भी एनर्जी लगेगी। इसके दो मेन फेसज़ होते हैं। सबसे पहला होता है प्रिपरेटरी फज़। ठीक है? जहां पे ग्लूकोस जो होगा बेसिकली फास्फोराइल करेगा। तो आपके पास अब क्या है? ग्लूकोज़ है। ग्लूकोस कितने का है? छह कार्बन का है। आपने इसको क्या किया? फास्फोराइल फास्फोराइलेट किया। यानी कि फास्फोराइलेशन का मतलब होता है फास्फेट को ऐड करना। जब आप ग्लूकोस में फास्फेट ऐड करोगे तो आपका बनेगा ग्लूकोस सिक्स फास्फेट। यानी आपके पास कार्बन कितने हैं? छह कार्बन है। उसके छठे कार्बन पे आपने एक फास्फेट ऐड किया तो उसको मैं बोलूंगी G6P यानी ग्लूकोस सिक्स फास्फेट। ठीक है? यहां पे भी आपने एटीपी लगाया है। ठीक है? क्या लगाया है? एटीपी लगाया है। अब क्या करोगे? नेक्स्ट स्टेप में जो आपके पास ग्लूकोस सिक्स फास्फेट था यानी ग्लूकोस के छठे कार्बन पे फास्फेट लगा था। ग्लूकोस सिक्स फास्फेट इसको कन्वर्ट करोगे फ्रुक्टोज़ सिक्स फास्फेट।
9:20 यानी अब आपने इसको फ्रुक्टोज़ में चेंज किया और उसके छठे कार्बन पे आपने फास्फेट ऐड किया। इसीलिए इसका नाम हो जाएगा फ्रुक्टोज़ सिक्स फास्फेट। अगेन आप क्या करोगे? इसको फास्फोराइलेशन दोबारा करोगे। फास्फोराइड करोगे। अब की बार जो फ्रुक्टोज़ आया है उसके वन कार्बन पे भी फास्फेट लगाओगे। उसके छठे कार्बन पे भी फास्फेट लगाओगे। तो क्या है? दो फास्फेट आया। तो इसीलिए मैं उसके लिए यूज़ करूंगी बिस। और हमने कौन-कौन से कार्बन पे लगाया? वन और सिक्स पे। तो फिर हम इसको क्या नाम देंगे? बिस फ्रुक्टोज़ 166 बिस फास्फेट और यहां पे भी आपने क्या किया है? एटीपी का यूज़ किया है। ठीक है? उसके बाद क्या करोगे? जो आपका ये बिस फास्फेट है इसको स्प्लिट करोगे तीन-तीन कार्बन में। फिर बना लोगे आप G3P जैसे हमने पीछे बनाया था ना ग्लिसरल्डिहाइड थ्री फास्फेट आपने उसको तोड़ा तीन कार्बन के G3 में और जो है तीन कार्बन का डाईहैप। ठीक है? DHAP। ठीक है?
10:08 ये इसमें जिसको कन्वर्ट कर देते हो आप दोबारा से G3P में। है ना? तो इस तरीके से आपका कन्वर्ट होगा। तो, यह आपका पहला फ़ज़ का है। ठीक है? समझ में आ गया? मैं दोबारा बता देती हूं। सबसे पहला पहले आपके पास ग्लूकोज़ है जो कि छह कार्बन का है। उसको फास्फोरोलाइड करोगे। यानी कि आप उस पे फास्फेट ऐड करोगे उसके छठे पे, तो आपका होगा ग्लूकोज़ सिक्स फॉस्फेट। फिर इसको कन्वर्ट करोगे फ्रुक्टोज़ सिक्स फॉस्फेट में। ठीक है? फिर फ्रुक्टोज़ सिक्स फॉस्फेट की जगह आप वन पे और छह पे लगाओगे। इसीलिए इसका नाम बनेगा वन सिक्स डिस फॉस्फेट। जब ये वन सिक्स डिस फॉस्फेट आएगा। इसको तोड़ोगे आप G3P में और डाईहैप में। ठीक है? G3P में और डीएच एपी में। इसको तोड़ोगे। फिर इसको दोबारा से G3P में आ जाएगा। ठीक है? नेक्स्ट स्टेप है आपका जो है पे ऑफ फज़। अब ये वाला फज़ क्या है? जो हर एक G3P है उसको कन्वर्ट कर दोगे आप पाइरुवेट में। लास्ट स्टेप आ जाएगा। इस प्रोसेस में दो NADPH, दो NADH और चार एटीपी लगेंगे और
10:54 नेट गेन आपका दो एटीपी पर ग्लूकोज़ होगा। क्योंकि दो एटीपी आपने यूज़ पहले कर लिया था। है ना? दो एटीपी हर एक ग्लूकोस में आपने यूज़ किया था। तो अब क्या बनेगा? जो आपने G3P बनाया है उसको डायरेक्ट कन्वर्ट कर दोगे आप पाइरुविक एसिड में जो कि तीन मॉलिक्यूल्स तीन कार्बन का होगा। उसके दो मॉलिक्यूल आप बनाओगे। ठीक है? तो लास्ट में आपका है पाइरुविक एसिड। तो ओवरऑल रिएक्शन क्या कहता है कि आपने ग्लूकोस लिया, दो एडीपी लिया, दो NAD प्लस लिया। एडीपी से आप एटीपी बनाते हो, NAD से आप NADH बनाते हो। ठीक है? दो वाटर रिलीज़ किया आपने और आपने दो मोल्स ऑफ़ पाइरुवेट बना लिया। तो इस तरीके से आप एक ओवरऑल रिएक्शन लिख देंगे। ठीक है? ग्लाइकोलिसिस एक एनरोबिक रिएक्शन है। यानी कि इसको ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती है। ठीक है? वाइटल प्रोसेस होता है। सारे लिविंग सेल्स में होता है। तो आई होप आपको ये समझ में आ गया होगा। किस तरीके से आपको सारा इसका डायग्राम बनाना है। ठीक है? ग्लूकोस सिक्स
11:40 फास्फेट कर करके आपको बनाना है। बेसिकली यह आपका पूरा ग्लाइकोलिसिस हो जाता है। आई होप यू अंडरस्टैंड। इस तरीके से आप सिंपलेस्ट फॉर्म में लिखेंगे। थोड़ा एंजाइम वगैरह भी अगर आपको आते होंगे वैसे पहले स्टेप के लिए जब ग्लूकोस से ग्लूकोस सिक्स फास्फेट टूटता है तो उसके लिए एंजाइम आपका हेक्सोकाइनेज़ लगता है। है ना? तो हेक्सोकाइनेज़ वाला आप लगा सकते हो। ठीक है? तो आपको मार्क्स मिल जाएंगे बेसिकली। ठीक है? तो इस तरीके से आप ओवरऑल रिएक्शन इसकी ग्लाइकोलिसिस की करके दिखा सकते हैं। नेक्स्ट क्वेश्चन है आपका डिस्क्राइब द स्ट्रक्चर फंक्शन ऑफ़ माइटोकांड्रिया। अब यहां पे आप पढ़ोगे कि बेसिकली माइटोकांड्रिया आपका एक सेल ऑर्गेनल है जो कि सिर्फ और सिर्फ यूकैरियोटिक सेल्स में ही मिलता है। प्रोकैरियोट्स में आपको सेल ऑर्गेनल्स नहीं देखने को मिलते हैं। तो माइटोकांड्रिया का आपका स्ट्रक्चर और उसका फंक्शन बताना है। तो लेट्स स्टार्ट। यह आपका दिसंबर 24 में आया हुआ क्वेश्चन है। माइटोकांड्रिया आपका क्या है? एक मेंब्रेन बाउंड ऑर्गेनिल है। बेसिकली जिसको हम पावर
12:25 हाउस ऑफ़ द सेल भी कहते हैं। क्योंकि यहां से आप एटीपी प्रोड्यूस करते हो सेलुलर रेस्पिरेशन के थ्रू। यह जो होता है बेसिकली सारे मोस्टली यूकैरियोटिक सेल्स में पाए जाते हैं। माइटोकांड्रिया भी आपका कुछ इस तरीके से दिखता है जैसे मैंने आपको क्लोरोप्लास्ट में दिखाया। डबल मेंब्रेन बाउंड है। यानी कि एक मेंब्रेन ऊपर एक मेंब्रेन अंदर की तरफ होता है। आउटर मेंब्रेन जो होती है इसकी कैसी होती है? स्मूथ एंड परमीिएबल होती है और स्मॉल मॉलिक्यूल्स के लिए होती है। ठीक है? यानी स्मॉल मॉलिक्यूल्स आकर के घुस सकते हैं। इनर वाली मेंब्रेन जो होती है वो फोल्डेड होती है। देखो ऐसे मेंब्रेन इनर वाली जो होगी ना वो कुछ इस तरीके से फोल्डेड होती है। इस तरीके से जो ये अंदर की तरफ फोल्डेड है इसको मैं बोलती हूं क्रिस्टे। क्या बोलती हूं? क्रिस्टे बोलती हूं। ठीक है? अंदर की तरफ फोल्डेड है इनर वाली उसको मैं क्रिस्टेड क्रिस्टे बोलती हूं। इसका क्या काम है? सरफेस एरिया को इंक्रीस करना और ताकि और सारी रिएक्शन जो है वो यहां पे हो सके। इंटर मेंब्रेन स्पेस यानी कि जो
13:12 आपका आउटर है और जो इनर वाली इस तरीके से फॉल है इन दोनों के बीच में एक सरफेस है। एक स्पेस बचा हुआ है। इसको मैं बोलूंगी इंटर मेंब्रेन स्पेस यानी कि आउटर एंड इनर मेंब्रेन के बीच में बचा हुआ। अब एक है मैट्रिक्स यानी कि जो आपने ऐसे करके फोल्डेड वाली चीजें बनाई है। अब इसके बीच में कुछ ये सारे खाली जगह है। उसको मैं मैट्रिक्स बोलूंगी। इसके अंदर फ्लूइड फील्ड क्या होती है? स्पेस होती हैं। ये इनर होती है बहुत ज्यादा। इसके अंदर फ्लूइड भरा होता है। इसी के अंदर आपके क्या होते हैं? एंजाइम्स होते हैं। माइटोकांड्रियल डीएनए होता है और राइबोजोम्स प्रेजेंट होते हैं। ठीक है? तो ये आपका स्ट्रक्चर हो गया माइटोकांड्रिया का। अब हम इसके फंक्शन की बात करते हैं। बेसिकली आप माइटोकांड्रिया जो है वो आपका पावर हाउस ऑफ द सेल है। तो एटीपी का प्रोडक्शन भी यही कराता है। यानी मेन फंक्शन इज़ टू जनरेट एटीपी या इलेक्ट्रॉन ट्रांसपोर्ट चेन। इलेक्ट्रॉन ट्रांसपोर्ट चेन जो है बेसिकली वो यहीं पर होता है। कहां पे होता है? ऑक्सीडेटिव फास्फोराइलेशन भी आपके इनर मेंब्रेन ऑफ़ माइटोकांड्रिया में किया जाता है ताकि आप
13:59 एटीपी जनरेट कर पाएं। ठीक है? क्रैब साइकिल भी आपकी यहीं पे होती है। मैट्रिक्स में होती है। ठीक है? जो कि पाइरुवेट को आप जो पाइरुवेट ग्लाइकोलिसिस से बना के आए हो उसको तोड़ के आप बनाते हो एनएडीए। ठीक है? तो आपका क्रैब साइकिल भी होता है। हीट प्रोडक्शन भी आपका इसी में होता है। ब्राउन फैट सेल्स में माइटोकांड्रिया जो होता है थर्मोजेनेसिस करता है। तो हीट का प्रोडक्शन भी कौन करता है? माइटोकांड्रिया। एपोपोसिस भी माइटोकांड्रिया में ही होता है। यानी कि जो ऐसे सेल्स होते हैं जो कि आपके काम के नहीं है तो उसकी डेथ हो जाती है। वो सेल रिमूव कर दिए जाते हैं। ठीक है? बाय रिलीजिंग साइटोक्रोम। तो वो आपका एपोपोसिस का काम भी माइटोकांड्रिया में ही होता है। नेक्स्ट चीज़ है मेटाबॉलिक रोल्स। जो मेटाबॉलिक रोल्स हैं यानी अमीनो एसिड्स वगैरह फैटी एसिड्स का मेटाबॉलिज्म जो होता है वो आपका माइटोकांड्रिया में ही होता है। तो हम यहां पे बात करते हैं कि माइटोकांड्रिया जो होता है उसका खुद का डीएनए होता है और ये इंडिपेंडेंटली रेप्लिकेट कर सकते हैं और इवोल्यूशनरी
14:45 ओरिजिन भी हैं प्रोकैरियोट्स में। सबसे पहले प्रोकैरियोट्स में भी हुआ करता था। ये इवोल्यूशन से बन के यूकैरियोट्स में ओनली आए हैं आपके। ठीक है? तो इस तरीके से आपका ये कंप्लीट होता है। नेक्स्ट क्वेश्चन पे चलते हैं आपका। एक्सप्लेन द कैम। ठीक है? यानी कि आपका क्रशुलेशन एसिड मेटाबॉलिज्म होता है। इसकी सिग्निफिकेंस आपका है जो कि दिसंबर 24 में आया हुआ है क्वेश्चन। तो आपको इसे करना है। आप जो देखते हैं स्टोमेटा के बारे में किस तरीके से होता है स्टोमेटा आपका दिन के टाइम पे आपका स्टोमेटा जो है वो ओपन होता है। बट इन द नाइट टाइम नाइट टाइम में आपका स्टोमेटा जो है वो क्लोज होता है। लेकिन जो कैम पाथवे होते हैं यानी कि जो क्रेसुलेशियस एसिड मेटाबॉलिज्म वाले प्लांट्स होते हैं जिनमें कैम पाथवे होता है उनका नाइट में आपका ओपन होता है क्या? स्टोमेटा लेकिन क्लोज हो जाता है डे के टाइम। तो अब यहां पे हम देखेंगे क्या होता
15:31 है जो ये आपका ये टाइप ऑफ़ फोटोसिंथेटिक अप्टेशन है। ठीक है? प्लांट्स के थ्रू जो कि एरिड एनवायरमेंट में रहते हैं। यानी कि जो डेजर्ट में रहते हैं जहां पानी की कमी होती है। तो पानी को बचाने के लिए इनके अंदर कौन सी पाथवे होती है? कैम पाथवे होती है। फोटोसिंथेटिस का ही ये टाइप है। ठीक है? कैम पाथवे होती है ताकि डेजर्ट वाले इलाके में आप क्या कर सको? पानी को कंजर्व कर सको। ठीक है? तो कैसे होता है? इनके की फीचर्स की बात करें। नाइट टाइम में स्टोमेटा ओपन होता है। ये कार्बन डाइऑक्साइड को लेता है और मिनिमाइज वाटर लॉस ताकि वाटर लॉस कम हो पाए। है ना? तो CO2 को ये कन्वर्ट कर देता है किसमें? कार्बन डाइऑक्साइड जो आता है उसको कन्वर्ट करता है मैलिक एसिड में और वैक्यूल्स के अंदर उसको स्टोर कर लेता है। नेक्स्ट डे टाइम में क्या होता है? डे टाइम में आपका क्लोज रहता है। पानी वाटर लॉस जो है वो बंद हो जाए। क्योंकि डे के टाइम ही हमारा क्या करता है? ट्रांस्पिरेशन होता है हमारे स्टोमेटा में जो बेसिकली हम जहां रहते हैं वहां के प्लांट्स स्टोमेटा से
16:17 ट्रांस्पिरेशन करते हैं और वाटर लॉस होता है। लेकिन जो डेजर्ट वाले इलाके में उनको पानी को कंजर्व भी करना है। इसीलिए वो डे टाइम में बंद रखते हैं। ठीक है? अब जो मैलिक एसिड आप बना के लाए हो नाइट टाइम में उसको ब्रोक करते हो किससे? कार्बन डाइऑक्साइड में। फिर आप इसको रिलीज़ करोगे। रिलीज़ करने के बाद आप केल्विन साइकिल में इसको भेज दोगे जहां पे आपका फिक्सेशन हो जाएगा। ठीक है? हम इसकी बात करें। क्या सिग्निफिकेंस है इस कैम पाथवे को यूज़ करने की? बेसिकली वाटर लॉस को यह रिड्यूस करता है ट्रांस्पिरेशन के टाइम में। प्लांट को सर्वाइव करने के लिए हेल्प करता है ताकि वह हाई टेंपरेचर ड्राई और सॉल्टी एनवायरमेंट में रह सकें। किस-किस में देखने को मिलता है? आपके कैक्टस हो गए, पाइन एप्पल हो गए, अगेब हो गए, वहां पे देखने को मिलता है जिनको सकुलेंट्स भी हम बोलते हैं। बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट स्ट्रेटजी है ताकि प्लांट को अपनी फोटोसिंथेटिक एफिशिएंसीटी को बेसिकली मेंटेन रख सकें और स्ट्रेस कंडीशन के अंदर भी वो जी सकें, एडप्ट कर सकें अपने आप को।
17:03 तो ये कैंप प्लांट होते हैं। ठीक है? नेक्स्ट पे चलते हैं। आ जाओ। नेक्स्ट क्वेश्चन है आपका डिस्क्राइब द ट्रांस्पिरेशन पुल एंड कोहेशन टेंशन थ्योरी। यह आपको क्लास 11th के में मिल जाएगा जिसमें आपका ट्रांस्पिरेशन इन प्लांट्स वाला चैप्टर जो प्लांट फिजियो का पहला चैप्टर है। तो आप गरिमा मैम की लेक्चर से पढ़ सकते हैं। ठीक है? 3-4 घंटे का पूरी प्लांट फिजियो होगी। वहां से पढ़ सकते हैं। तो मैं अभी आपको यहां पे बता रही हूं ट्रांस्पिरेशन पुल के बारे में और कोहेशन टेंशन थ्योरी के बारे में। ठीक है? चलिए। तो कोहेशन टेंशन थ्योरी के बारे में अगर मैं बात करूं तो ये अपवर्ड मूवमेंट बताता है पानी का रूट से लीफ तक। ठीक है? जाइलम के थ्रू स्पेशली टॉलर। अब जैसे कि आपको पता है कि प्लांट में क्या होता है जो छोटे-छोटे प्लांट होते हैं ना उसमें भी पानी का मूवमेंट होता है और जो टॉल ट्रीज़ होती हैं उसमें भी पानी का मूवमेंट होता है। तो जो छोटे-छोटे प्लांट्स हैं उसमें
17:49 पानी का मूवमेंट करने के लिए छोटे-छोटे डिफ्यूज़ प्रोसेस, फैसिलिटेड डिफ्यूज़ प्रोसेस हो जाते हैं। यानी छोटी सी जगह में हम पानी रूट से लेके कहां पहुंचा रहे हैं? पूरे प्लांट की बॉडी तक पहुंच। छोटे प्लांट होगा तो उसको ज्यादा टेंशन या कोहेशन की जरूरत नहीं होगी। उनको प्रेशर की जरूरत नहीं पड़ेगी। है ना? तो इसीलिए जो है उनमें ईजीली हो जाता है। लेकिन टॉल ट्रीज में हमें क्या चाहिए? वस्कुलर बंडल्स चाहिए। पानी को पहुंचाने के लिए। जैसे आपको पता है कि पानी को पहुंचाने का काम कौन करता है? ज़ाइलम करता है। तो पानी को पहुंचाने के लिए अपवर्ड मूवमेंट कराना। रूट से लेकर के कहां तक ले जाना? लीव्स तक ले जाना ज़ाइलम के थ्रू। स्पेशली ये आपके टॉल्टरीज में होता है। तो उसमें कोहेशन टेंशन थ्योरी होती है। अब स्टेप क्या है? इसके अंदर सबसे पहले ट्रांस्पिरेशन होगा। ट्रांस्पिरेशन कैसे होता है? वेपर का लॉस हो जाना स्टोमेटा से। ठीक है? जो कि एक नेगेटिव प्रेशर लगाता है कि यहां पे एक सक्शन प्रेशर है। एक प्रेशर आता है सक
18:34 करने वाला प्रेशर। ठीक है? ताकि पानी को खींच सकें हम रूट से लीफ तक। अब पानी को खींचेगा प्लांट तो कैसे फोर्स है? सक्शन फोर्स है। वो फोर्स खींचेगा अपनी तरफ। खींचने के बाद जो है पत्तियों तक क्या आएगा? पानी आ जाएगा। अब उस पत्तियों से जो है बेसिकली पानी लॉस होगा। कैसे? किसके थ्रू? ट्रांस्पिरेशन के थ्रू। अब टेंशन लगेगा। यानी ये टेंशन जो होगा पानी को ज़ाइलम से खींच रहा है ताकि वो लीफ की वेंस तक आ जाए। ठीक है? तो इसीलिए टेंशन लग रहा है। ट्रांस्पिरेशन टेंशन। और कोहेशन का मतलब क्या है? कोहेशन का मतलब है वाटर मॉलिक्यूल जो है एक साथ चिपकते हैं ताकि हाइड्रोजन बॉन्डिंग हो सके और ईजीली अपने ट्रांस्पिरेशन कर सके। तो इसीलिए कोहेशन ट्रांस्पिरेशन यह आपका हो गया है। नेक्स्ट जो है एडेशन का मतलब क्या होता है? वाटर मॉलिक्यूल जो होता है वह वाल से चिपक-चिपक के ज़ाइलम वेसल्स में पानी जो है वो वॉल से चिपक-चिपक के और फिर ऊपर की तरफ आती है। कंटीन्यूअस कॉलम बनता है। यही फ़ जो होता
19:20 है वो कॉलम ऑफ वाटर को बनाए रखता है। रूट से लीफ तक बताता है। एक कॉलम बनता है। उसी कॉलम के थ्रू आपका लीफ तक का पानी पहुंचता है। यह आपका एक पैसिव मैकेनिज्म है। इसको कोई भी एटीपी की जरूरत नहीं पड़ती है। ठीक है? एक तो आपका होता है एक्टिव प्रोसेस जिसमें आप एटीपी का यूज़ करते हैं। एक होता है पैसिव जिसमें आप एटीपी की जरूरत नहीं पड़ती। एनर्जी की जरूरत नहीं पड़ती है। ठीक है? तो इसीलिए जो आपका यह ट्रांस्पिरेशन कोहेशन मॉडल है जो थ्योरी है बेसिकली वो पैसिव है। यानी कि इसको एनर्जी की जरूरत नहीं पड़ेगी। तो एनर्जी जो होता है प्लांट के लिए वो कौन सी? एटीपी है। ठीक है? एसेंशियल होता है न्यूट्रिएंट ट्रांसपोर्ट करने के लिए। ठीक है? तो ये आपका हो गया। नेक्स्ट पे चलते हैं। नेक्स्ट है आपका क्रैब स। जैसे कि मैंने आपको बताया कि क्रैब सकी मैंने आपको शायद ट्रिक नहीं दी हुई है। ओके? फाइन। चलिए डिस्क्राइब द क्रैब स विद रिएक्शन एंड एटीपी जनरेशन। अब देखो क्रैब स क्या होता है यहां पे? क्रैब साइकिल जो होता है
20:06 हम उसको बेसिकली टीसीए साइकिल भी कहते हैं। ठीक है? क्या बोलते हैं? टीसीए साइकिल यानी कि ट्राई कार्बोक्सिलिक एसिड साइकिल या फिर मैं इसको सिट्रिक सिट्रिक एसिड साइकिल भी कह सकते। कहां पे होता है ये आपका? मैंने आपको बताया था माइटोकांड्रिया की मैट्रिक्स में होता है। यहां पे रोल क्या होता है? सेलुलर रेस्पिरेशन कराना। ऑक्सीडाइजिंग एसिटाइल कोएंजाइम को कार्बन डाइऑक्साइड में चेंज करना और फिर उससे आपको NADH और एफएडीए को बना देना। ठीक है? अब क्या होता की स्टेप की बात करूं तो यहां पे आपका सबसे पहला आता है एसिटाइल कोएंजाइम ए जो कि दो कार्बन का होता है। आपकी एक लिंक रिएक्शन होती है। मैंने आपको बताना था कि जब आपने ग्लाइकोलिसिस से पाइरुवेट बनाया उस पाइरुवेट को माइटोकांड्रिया के सरफेस पे लेके आओगे। आउटर मेंब्रेन पे लेके आओगे और फिर उससे आप एसिटाइल कोएंजाइम ए बनाते हो। ठीक है? आपने क्या किया? एसटाइल कोएंजाइम ए बनाया। अब मैट्रिक्स में पहुंचोगे आप तो आपके पास क्या आ गया? एसिटाइल कोइंजाइम ए।
20:52 ये एसिटाइल को-ए-इंजाइम ए आपके दो कार्बन का होता है। इसको कंबाइन करोगे आप ऑक्सलो एसीटेट में। ठीक है? ऑक्सेलो एसीटेट से जो कि चार कार्बन का है। तो चार और दो मिलके बना लेगा एक छह कार्बन का कंपाउंड जिसका नाम होगा सिट्रेट। ठीक है? क्या होगा? सिट्रेट। अब इसी सिट्रेट को आप आइसोमेराइज करेंगे आइसोसिट्रेट में। आइसोमेराइज किया आपने। अब इसको बना दिया आइसोसिट्रेट में। जहां पे होगा डीकार्बोक्सिलेशन यानी कि कार्बन डाइऑक्साइड रिलीज़ होगा। जैसे ही सिट्रेट आपका क्या था? छह कार्बन का। यानी कि एक कार्बन डाइऑक्साइड अगर आप भेज दोगे तो एक कार्बन कम हो गया। यानी पांच कार्बन का एक कंपाउंड बनेगा। तो आइसोसिट्रेट से आपने डीकार्बोक्सिलेशन किया। डीकार्बोक्सिलेशन का मतलब है कार्ब कार्बन डाइऑक्साइड को रिमूव करना। तो आपका बन जाएगा पांच कार्बन का कंपाउंड जो कि अल्फा कीटोग्लटेटरेट होता है। ये रिलीज़ करता है कार्बन डाइऑक्साइड और बना देता है NADH। अब क्या है आपका? इसको अल्फा कीटोग्लिटरेट जो है आपके पांच
21:38 कार्बन का है। इसको कन्वर्ट करोगे सब सक्सिनिल कोएंजाइम में जो कि चार कार्बन का होगा और यहां पे दोबारा से आपका CO2 जो है वो रिलीज़ हुआ। तो इस स्टेप पे भी आपका CO2 रिलीज़ हुआ। तो यहां पे आपका क्या बन गया? NADH। इस स्टेप पे भी हुआ तो आपका बन गया NADH। अब जो सक्सिनिल को एंजाइज़ाइम A आपने बनाया है उसको कन्वर्ट करोगे सक्सिनेट में और यहां पे आपको जीटीपी मिलेगा। सक्सिनेट को ऑक्सीडाइज़ करोगे फ्यूमरेट में और यहां पे आपको मिलेगा FADH2। अब यही फ्यूमरेट आपका मेलेट में बनेगा। मेलेट जो होगा दोबारा से रीजनरेट हो के ऑक्सेलो एसीटेट में बनाएगा और फिर दोबारा से एक अनदर NADH बनेगा। तो ये पूरी की पूरी आपकी साइकिल होती है क्रैब साइकिल। ठीक है? मैं आपको एक बार दोबारा बना बता देती हूं कैसे करना है। ठीक है? आ जाओ। एक मैं आपको ट्रिक बता रही हूं जिसके थ्रू आप क्रैब स को लर्न कर सकते हैं। सी आई नो ठीक है आप लोग लिख लीजिएगा। ठीक है? सी आई
22:25 नो सम सिंपल फार्मूला मेकिंग ऑप्शन। ठीक है? अब मैं इसको थोड़ा सा मैं बता देती हूं इसको किस तरीके से करेंगे। ठीक है? आ जाओ। सी से आपका आएगा सिट्रेट। ठीक है? रुक जाओ। सिट्रेट से मैं क्यों बता रही हूं? क्योंकि आपको बेसिकली ना जो हमारा पहला कंबाइन है उसको याद रखना है। ठीक है? कि एसटाइल कोएंजाइम ए को आपने किससे किया है? चार कार्बन से कंबाइन किया है। तो आप बनाते हो सबसे पहले सिट्रेट। ठीक है? तो सी से आएगा सिट्रेट जो कि कितने कार्बन का है? छह कार्बन का है। फिर आप उससे क्या बनाओगे? आइसोसिट्रेट। ठीक है? क्या बनाओगे? आइसोसिट्रेट। ठीक है? आइसोसिट्रेट बनाने के बाद आप क्या करोगे?
23:11 बनाओगे अल्फा कीटोग्लिट्रेट। अल्फ़ा कीटोग्लिटरेट पांच कार्बन का हो जाएगा। उससे बनाओगे आप सक्सिनल कोएं। ठीक है? सक्सिनल कोएंम ए से आप बनाओगे सक्सिनेट। ठीक है? फोर से आपका हो जाएगा फार्मूला से हो जाएगा आपका फ्यूमरेट। मेकिंग से हो जाएगा आपका मेलेट। ऑप्शन से आपका हो जाएगा ऑेलो एसीटेट। दोबारा से यहां पे आपको जीटीपी एनएडीए जहां-जहां पे हो रहा है उसको याद रखना है। वो मैंने आपको स्टेप के थ्रू बता दिया। यह थोड़ा सा गंदा सा लग रहा है। पर आप इसको समझ के लिख लीजिए अपने साथ। ठीक है? थोड़ा पेन का मेरा इशू हो रहता है। ठीक है? तो इसको और अच्छे से करने की कोशिश करूंगी मैं। ठीक है? तो आप इसको लिख लीजिएगा। अब हम यहां पे देखते हैं नेट गेन कैसे मिलता है पर साइकिल पे। हमने देखा हमारे तीन बार NADH बन रहा है। ठीक है? एक FA एडीए बन रहा है। एक GTP बन
23:57 रहा है। जब आप एक कार्बन डाइऑक्साइड की साइकिल चला रहे हो। ठीक है? जब एक कार्बन डाइऑक्साइड की साइकिल चलाओगे, तीन NADH बनेगा, एक FADH2 बनेगा, एक GTP बनेगा। ठीक है? तो इस तरीके से वन ग्लूकोस मॉलिक्यूल के लिए आपके पास अगर दो आपका दो एसिटाइल कोएंजाइम चलेगा ना तो ट्वाइस ग्लूकोस बनेंगे। ठीक है? तो बेसिकली ये आपका एक जब साइकिल चल रही है उसमें तीन कार्बन की बात हो रही है। जब दो चलाओगे तो छह कार्बन के लिए हो जाएगा यानी ग्लूकोस के लिए। तो आप इसको मल्टीप्लाई कर देंगे। ठीक है? एक दो से। ठीक है? तो आ जाएगा आपका। हम चलिए नेक्स्ट पे चलते हैं। नेक्स्ट। डिस्कस द फिजियोलॉजिकल रोल एंड डेफिशिएंसी सिम्टम्स फॉर माइक्रोोनट्रिएंट्स। ठीक है? तो बेसिकली आपके पास दो टाइप के न्यूट्रिएंट्स होते हैं। एक तो होता है भाई माइक्रोोनट्रिएंट। माइक्रोोनट्रिएंट में के नाम से ही पता चल रहा है जिसमें कम अमाउंट की बात की जाए। मैक मतलब लार्ज अमाउंट में जो मिले हमें।
24:42 तो माइक्रोोनट्रिएंट और मैोनट्रिएंट में मैं आपको बता देती हूं। बेसिकली मैोनट्रिएंट का मैं आपको बता देती हूं। एक वो चिप मोंग्स। ठीक है? चिप मोंग्स कैफे जिसमें से आपको आयरन को हटा देना है। ठीक है? चिप मोंग्स कैफे। अब यहां पे देखो चिप से सी से आ जाएगा आपका कार्बन एच से आ जाएगा आपका हाइड्रोजन पी से आ जाएगा आपका फास्फोरस आपका मैंगनीज सॉरी मैग्नीशियम ओ से आपका ऑक्सीजन एन से नाइट्रोजन के से पोटेशियम एस से सल्फर और सी से सी ए से कैल्शियम तो ये सारे आपके मैोनट्रिएंट्स हैं। ठीक है? आप इसको लिख लीजिए और आयरन जो है ना बेसिकली माइक्रोोनट्रिएंट में आ जाता है। इसीलिए कैफे को यहां फे को यहां से हटा दो। ठीक है? तो चिप मक्स कैफे। ओके? तो ये आपका हो गया। तो अब हम यहां पर देखते हैं बेसिकली
25:28 मैोनट्रिएंट्स आपके मिनरल एलिमेंट्स होते हैं जो प्लांट्स को चाहिए लार्ज अमाउंट में। चार मेजर के बारे में बताना है आपको लेकिन आपको सारे पता होना चाहिए। तो जैसे कि मैंने आपको ट्रिक में बताया था नाइट्रोजन भी था। सबसे पहले नाइट्रोजन जो होता है इसका रोल क्या होता अमीनो एसिड्स में मिलता है, प्रोटंस में मिलता है, क्लोरोफिल में मिलता है, न्यूक्लिक एसिड्स में भी मिलता है। अगर आपके प्लांट्स के अंदर यह न्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है, तो आपके प्लांट की ग्रोथ नहीं हो पाती है। जो लीफ्स है वो येलो कलर की हो जाती है। तो नाइट्रोजन की कमी से आपका क्लोरोसिस हो जाता है। यानी डेफिशिएंसी सिम्टम्स ऑफ़ नाइट्रोजन। नाइट्रोजन अगर नहीं है प्लांट में तो उसकी येलो लीफ हो जाएगी। और अगर येलोइंग ऑफ लीफ हुई तो वो डिसीज का नाम क्या होता है? क्लोरोसिस। यानी कि क्लोरोफिल कम। तो क्लोरोसिस। ठीक है? नेक्स्ट पे चलते हैं फास्फोरस। फास्फोरस जो होता है बेसिकली यह एटीपी में मिलता है, डीएनए में मिलता है, फास्फोलिपिड में मिलता है। बेसिकली एनर्जी ट्रांसपोर्ट का
26:13 काम करने का काम फास्फोरस का होता है। अगर फास्फोरस की कमी हो गई तो आपका जो है कलर ऑफ लीव का जो है वो डिकलरेशन हो जाएगा। मैच्योरिटी डीप हो जाएगी। रूट्स भी बहुत वीक हो जाएगी। ठीक है? नेक्स्ट पे चलते हैं पोटेशियम। पोटेशियम जो होता है एंजाइम्स में मिलता है। मेंटेनेंस ऑफ वाटर बैलेंस रखता है। स्टोमेटल की ओपनिंग और क्लोजिंग में हेल्प करता है। अगर यह नहीं हुआ प्लांट्स में तो लीफ मार्जिन जो होगी ना वो बहुत बेकार हो जाती है। स्टेम्स वीक हो जाती है। रेजिस्टेंस जो होता है स्ट्रेस से वो रिड्यूस हो जाता है। ठीक है? नेक्स्ट है कैल्शियम। कैल्शियम जो होता है बेसिकली सेल वॉल की स्टेबिलिटी में बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट होता है। मेंब्रेन फंक्शन में रूट की ग्रोथ में। अगर यह नहीं है तो ग्रोथ की टिप्स जो होती है वह डेथ ग्रोइंग टिप्स जो होती है वह नहीं चल पाती है। लीफ ग्रोथ भी नहीं हो पाती है और रूट जो है फ्रूट्स में वह उसका एंड भी ढंग सा नहीं हो पाता है। ठीक है? तो इस तरीके से आपके
26:59 न्यूट्रिएंट्स हैं। मैंने सारे बताए तो आपको सारे के बारे में पता होना चाहिए। ठीक है? तो यहां पे चार ही पूछे थे तो हमने चार बता दिए। नेक्स्ट पे चलते हैं। नेक्स्ट एक्सप्लेन द रोल ऑफ़ प्लांट हॉर्मोंस। अब आपको पता है कि प्लांट हॉर्मोनस कितने होते हैं? आपके ऑिन, साइटोकाइनिन, जिबेलिंस ये सारे जो होते हैं ना आपके हॉर्मोनस होते हैं। बेसिकली पांच प्लांट हॉर्मोंस होते हैं। ठीक है? ऑिन साइटोकाइन जिबरेलन और इथाईलीन और एबिसिसिक एसिड यह पांच आपके होते हैं और इसमें जो है रोल किसका पूछा गया है? ऑक्सिन का साइटोकाइन जिबरेलिन का। ठीक है? जो कि ग्रोथ में हेल्प करते हैं। अब देखो सबसे पहले प्लांट हॉर्मोन जो होता है वो ग्रोथ एंड डि डेवलपमेंट के लिए प्लांट के ग्रोथ एंड डेवलपमेंट के लिए बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है। स्टिमुलाई को भी अप्रोच करता है कि प्लांट्स जो है वो किस तरीके से रिस्पांस करते हैं। तीन मेन ग्रोथ हॉर्मोनस होते हैं। बेसिकली आपका सबसे
27:44 पहला है ग्रोथ हॉर्मोन। ठीक है? इसको हम प्लांट प्रमोटर भी कहते हैं इन तीनों को। लेकिन जो आपका एबीए है यानी कि इसका नाम है एबिसिसिक एसिड। यह जो होता है यह आपका इनबिटर होता है। यानी कि प्लांट की ग्रोथ को कम करने वाला होता है। ठीक है? दूसरा होता है इथाईलीन। ये जो होता है दोनों में होता है। यानी कि ये वाला हॉर्मोन। हम इथाईलीन को गैसियस हॉर्मोन भी कहते हैं। ये प्रमोटर भी हो सकता है और इनहबिटर भी हो सकता है। ठीक है? चलिए तो हम यहां पे तीन के बारे में जो पढ़ रहे हैं ना मेन ग्रोथ हॉर्मोनस हैं। जिनके बारे में पूछा गया। सबसे पहले आता है ऑक्सिन। ऑक्सिन को हम बोलते हैं आईएए इंडोल एसिटिक एसिड। इसका फंक्शन होता है सेल को बढ़ाना, रूट के स्टार्टिंग कराना, एपिकल डोमिनेंस कराना, वस्कुलर डिफरेंशिएशन कराना। बेसिकली इसका यूज़ हम रूटिंग हॉर्मोनस कटिंग्स में, वीड को कंट्रोल करने में किया जाता है ऑक्सिन का यूज़। ठीक है? नेक्स्ट है साइटोकाइनिन।
28:29 साइटोकाइनिन का फंक्शन होता है सेल डिवीज़ को। देखो सी से साइटोकाइनिन, सी से सेल डिवीज़। ठीक है? तो सेल डिवीज़ को प्रमोट करना, लीफ की सेनेसिनस को रोकना, शूट को डेवलपमेंट करना, एपिकल डोमिनेंस को ब्रेक करना। इसका वर्क जो होता है वह ऑक्सिन के उल्टा होता है। इसीलिए इसका बोल रहा है कि एागोनिस्ट है। नेक्स्ट है जिबरेलिन। यह जो होता है स्टेम को इलोंगेट करने में, सीड जर्मिनेशन, फ्रूट डेवलपमेंट, फ्लावरिंग कराने में काम करने वाला जो होता है जिबेरलिंस है। स्पेशल यूज़ की बात करें, गैब साइज को इंक्रीस करना, सीडलेस फ्रूट को बढ़ाने का काम जिबरेलिक एसिड करता है। यानी कि जहां आप फ्रूट बना देते हो विदाउट फर्टिलाइजेशन। ठीक है? के फर्टिलाइजेशन नहीं करते तो उसको पार्थेनोकार्पिक फ्रूट कहते हैं। यह हॉर्मोन जो होता है बैलेंस इंटैक्ट करता है हॉर्मोनस के साथ और यह प्लांट को डेवलपमेंट और स्ट्रेस रिस्पांससेस में ज्यादा हेल्प करता है। ठीक है? नेक्स्ट पे चलते हैं। नेक्स्ट है
29:16 आपका व्हाट इज़ वर्नलाइजेशन? क्या होता है? और इसका रोल बताना है आपको एग्रीकल्चर में। बहुतेंट है क्योंकि दिसंबर 22, जून 22 यानी कि हर साल रिपीट होने वाला क्वेश्चन है। वर्नलाइज़ेशन। यह एक ऐसा प्रोसेस है जिसमें आप फ्लावरिंग करते हो। यानी कि आप फूल पत्तियां उगाएंगे बाय एक्सपोजिंग देम टू अ पीरियड ऑफ़ लो टेंपरेचर। यानी कि कम टेंपरेचर में आप फ्लावरिंग कर रहे हो। ठीक है? तो इसीलिए हम इसको वर्नलाइजेशन बोलते हैं। डेफिनेशन की अगर हम बात करें तो एक्सपोज़र ऑफ सीड और यंग प्लांट्स टू कोल्ड कंडीशन। यानी कोल्ड कंडीशन में आप प्रमोट कर पा रहे हो। ठीक है? अर्लियर प्रमोट कर पा रहे हो। फ्लावरिंग कर पा रहे हो। इसका मैकेनिज़्म क्या है? कोल्ड ट्रीटमेंट करना। शूट एपिकल मेरिस्टेम में उसको अफेक्ट पड़ता है। फ्लावरिंग करता है सिग्नल लाइक फ्लोरजन। ठीक है? फ्लोरिजन। ये एनश्योर करता है प्लांट में फ्लावर आ रहा है एप्रोप्रिएट सीजन में या नहीं। यानी कि लो टेंपरेचर बता रहा है। एग्जांपल के लिए विंटर, वीट,
30:01 बार्ले, बायनियल, वेजिटेबल्स लाइक कैबेज और कैरेट। ठीक है? एग्रीकल्चर इंपॉर्टेंट क्या है इसमें? यह क्रॉप को शॉर्ट सीजन में भी ग्रो कर सकता है। फ्लावरिंग को बेसिकली यह प्रिवेंट करता है ताकि प्रीमेच्योर फ्लावरिंग ना हो पाए। बायनियल क्रॉप्स में अच्छे से मैच्योर हो। सिंक्रोनाइजेशन फ्लावरिंग करता है। बेटर यील्ड देता है, हार्वेस्टिंग देता है। आर्टिफिशियल वर्डनाइजेशन का हम ग्रीन हाउस में यूज़ करते हैं ताकि फ्लावरिंग को हम टेंपरेचर क्रॉप्स में वार्मर रीजंस में ग्रो कर पाए। तो आर्टिफिशियल वर्नलाइज़ेशन हुआ क्योंकि आप वहां पे टेंपरेचर वार्मर रीजन में लगाते हो। है ना? तो इसीलिए वह वर्नलाइज़ेशन है लेकिन आर्टिफिशियल है। वैसे तो वर्नलाइज़ेशन आपके कोल्ड टेंपरेचर में होता है। ठीक है? नेक्स्ट क्वेश्चन इज़ डिफरेंशिएट बिटवीन C3 एंड C4 जैसे कि मैंने आपको बताया था कि इन दोनों के बीच में आता है। ठीक है? या फिर C4 के बारे में पूछ लेगा कि हैच एंड स्लैक पाथवे क्या होता है? इसको हम हैच एंड स्लैक पाथवे भी
30:47 कहते हैं। ठीक है? हैच एंड स्लैक पाथवे। तो आपका पूछ सकता है कि हैच एंड स्लैक पाथवे के बारे में डिस्क्राइब करो। ठीक है? अलग से C3 C4 के बारे में अगर मैं बात करूं फीचर्स की ठीक है ओके फीचर्स इधर उड़ के आ गए तो पहला फर्स्ट स्टेबल कंपाउंड की बात कर रहा है C3 में जो होता है ना फर्स्ट स्टेबल कंपाउंड वो तीन कार्बन का होता है जो कि 3pg है फास्फोग्लिसर एल्डिहाइड लेकिन जो आपका C4 में उसमें चार कार्बन का होता है उसका नाम है ऑक्सेलो एसीटेट साइट ऑफ़ CO2 फिक्सेशन आपका कार्बन डाइऑक्साइड का फिक्सेशन कहां पे होता है C3 में मेजोफिल सेल में और यहां पे जो CO2 का फिक्सेशन होता है वो आपका मेजोफिल सेल में भी होता है और बंडल सेल में भी होता है। ठीक है? फोटो रेस्पिरेशन जो होता है बेसिकली इसमें हाई होता है और इसमें लो होता है। ठीक है? ड्राई क्लाइमेट्स में आपके काम करते हैं
31:34 C3 और यहां पे जो होता है आपके हॉट क्लाइमेट में काम करते हैं C4। एग्जांपल की बात करूं वीट, राइस और सोयाबीन आपका C3, मेज और मेज, सोरघम और शुगरकेन वो आपका C4। ठीक है? एंजाइम कौन सा होता है? आपके रुबिस्को जो है C3 में होता है और जो आपका स्पर्श जो यहां पे जो आपके होते हैं ना एक तो दो सेल्स होते हैं। मेजोफिल सेल्स में आपका कार्बोक्सिलेज़ होता है और रुबिस्को आपका बंडल सेल में से होता है। ठीक है? तो ये C4 और C3 प्लांट्स के बीच में होता है। ठीक है? नेक्स्ट पे चलते हैं। व्हाट इज़ फोटोपीरियोडिज़्म? एंड क्लासिफाई ऑन द डे लेंथ एंड एक्सप्लेन द रोल ऑफ़ डार्क पीरियड। ठीक है? फोटोपर पीरियडज़्म आपका एक फिजियोलॉजिकल रिएक्शन होता है प्लांट्स के अंदर जो कि लेंथ बढ़ाता है डे एंड नाइट टाइम में। स्पेशली रिलेशन टू फ्लो ब्रिंग करना। फर्स्ट जो है वह गर्नर एंड अलार्ड ने ऑब्जर्व किया था। प्लांट्स को क्लासिफाई किया हमने तीन
32:20 ग्रुप में उनकी फ्लावरिंग रिस्पांस के बीच में कि कैसे लाइट पड़ती है और वह फ्लावरिंग करते हैं। एक तो होता है एसडीपी जो है आपका शॉर्ट डे प्लांट्स यानी फ्लावर होता है। डे लेंथ इज़ लेस देन क्रिटिकल पीरियड। यानी जो इनकी लाइट होती है वो कम होती है क्रिटिकल पीरियड से। इसीलिए हम इसको शॉर्ट डे प्लांट्स कहते हैं। लॉन्ग यूनट्रप्टेड अनइंट्रक्टिव नाइट के टाइम पे ये बढ़ते हैं। एग्जांपल के राइस, सोयाबीन एंड क्रेज़ेंथम। ठीक है? लॉन्ग डे वाले क्या होता है? फ्लावर जब होता है डे लेंथ जिसका मोर देन क्रिटिकल पीरियड्स होता है तो हम उसको लॉन्ग डे प्लांट कहते हैं। इनको शॉर्ट नाइट की जरूरत पड़ती है। सिंपल वीट, स्पिनच और आपका रेडिश बनता है। डे न्यूट्रल वाले जिनको फोटो पीरियड से कोई इफेक्ट ही नहीं पड़ता। इसका एग्जांपल है टोमेटो, कॉटन एंड सनफ्लावर। रोल ऑफ़ डार्क पीरियड। डार्क पीरियड में जो ड्यूरेशन होता है नाइट का वो मोर होता है इंपॉर्टेंट देन डे इन मेनी प्लांट्स में क्या होता है? अगर ड्यूरेशन नाइट की
33:05 ज्यादा हो रही है ना तो वो ज्यादा अच्छा होता है उनकी फ्लावरिंग के लिए। है ना? इवन अ ब्रीफ फ्लैश लाइट ड्यूरिंग द डार्क पीरियड। ठीक है? वही शॉर्ट डे प्लांट्स को फ्लावरिंग करती है। ठीक है? डार्कनेस जो होता है बेसिकली वो फोटोपीरियर सेंसिटिव प्लांट्स होते हैं। नेक्स्ट है आपका एक्सप्लेन द z स्कीम। ठीक है? इंपॉर्टेंट है Z स्कीम फोटोसिंथेटिक इलेक्ट्रॉन ट्रांसपोर्ट। ठीक है? यानी कि आप ये Z स्कीम जो होता है बेसिकली आप लाइट डिपेंडेंट रिएक्शन कर रहे हो। Z स्कीम जो होता है एक पाथ होता है इलेक्ट्रॉन को आप लाइट की प्रेजेंस में। ठीक है? आप क्या कर रहे हो? थैलेकॉइड मेंब्रेन में लाइट की प्रज़ेंस में क्या बना रहे हो? एटीपी बना रहे हो। तो उसको हम बोलते हैं Z स्कीम। यहां पे की कॉम्पोनेंट्स क्या-क्या होंगे? मैं आपको बता देती हूं। सबसे पहले यहां पे फोटो सिस्टम चाहिए। आपके दो टाइप के फोटोसिस्टम होते हैं। एक वन एक टू होता है। तो यहां पे सबसे पहले फोटोसिस्टम टू चाहिए जो कि कितनी लाइट को एब्सॉर्ब कर लेता है जिसका 680 हो। ये इलेक्ट्रॉन को
33:52 एक्साइट करता है और फिर पानी को तोड़ता है और ऑक्सीजन निकालता है। ठीक है? स्प्लिट कराता है। तो अगर पानी तोड़ेगा तो उसको फोटोलिसिस कहेंगे। इलेक्ट्रॉन को पास करता है प्लास्टोक्युनिन के पास। फिर साइटोक्रोम बी6 के पास। उसके बाद प्लास्टोसाइनिन। ठीक है? ये सारी पास करता है फोटोसिस्टम टू। इसको मैं अच्छे से समझाती हूं अभी। फिर आपका ये जो आपने इलेक्ट्रॉन को पास किया इन सब से उसको रिसीव कौन करेगा? फोटोसिस्टम वन। यानी जो इलेक्ट्रॉन आप PS2 से पास किए हैं वो PS1 के पास जाएगा। अब जैसे ही PS1 के पास जाएगा तो लाइट जो होता है वो कौन सा PS1 कितनी लाइट एब्जॉर्ब करेगा? P700 तक। इलेक्ट्रॉन जो होगा वो फैराडॉक्सिन के पास जाएगा। फाइनली NADP से NADPH बन जाएगा। ये एनर्जी लेवल जो होता है इस तरीके से मूव करता है जिससे आपको Z शेप का कर्व दिखेगा। इसीलिए इसका नाम आपने Z स्कीम रखा है। ठीक है? ये एटीपी देता है आपको। वो NADPए देता है। रिड्यूसिंग पावर और ये आपका प्रोटॉन
34:38 ग्रेडियंट्स है। दोनों जो है हम केल्विन साइकिल में ले जाते हैं। ऑक्सीजन जो रिलीज़ होता है बेसिकली वो एक बाय प्रोडक्ट की तरह है। ठीक है? अब मैं इसको आपको अच्छे से बता देती हूं। ठीक है? फिर हम इसको फोटो एक यहां पे यहां से बताती हूं। देखो होता क्या है? आपके पास एक रिएक्शन सेंटर है जिसको जिसका नाम है क्लोरोफिल ए। इसके साथ लगे हुए होते हैं कुछ एक्सेसरी पिगमेंट्स। वो एक्सेसरी पिगमेंट्स आपके क्लोरोफिल, बीस्ट, जेंथोफिल, कैरेटिनॉइड सारे होते हैं। यह जो है आपका PS1 है जिसमें सॉरी PS2 है जिसमें 680 नैनोमीटर की लाइट आप एब्सॉर्ब कर सकते हो। सन चाचा आए हैं बहुत ज्यादा और इतना ज्यादा इंप्रेसिव है कि यह लाइट फेंकेंगे अब। जैसे ही यह लाइट फेंकेंगे। ठीक है? धुमना ना देना देना। अब यह लाइट को क्लोरोफिल ए लेगा और रिसीव करेगा। जैसे ही क्लोरोफिल ए रिसीव करेगा समझ जाएगा कितनी लाइट आ गई
35:23 है। यानी कि मेरे पास 680 नैनोमीटर की लाइट आ गई है। अब ये भेज देगा अपने इन पिगमेंट्स को कि भाई देखो देखो देखो जैसे ही ये देखेंगे यानी कि अब इनको पता चल गया लाइट मुझे कहां फेंकनी है आपके पास एक्सेप्टर होगा प्राइमरी एक्सेप्टर जो कि जिसका नाम हम क्या बोला गया है? प्लास्टोक्यूनोन प्राइमरी एक्सेप्टर के पास भेजेगा प्राइमरी इलेक्ट्रॉन एक्सेप्टर। ठीक है? इसके पास आपने इलेक्ट्रॉन भेजे दो। ये इलेक्ट्रॉन अब क्या करेगा? प्लास्टोक्यूनोन के भेजेगा। प्रियंका चोपड़ा। ठीक है? प्रियंका चोपड़ा। ठीक है? प्लास्टोसाइनिन साइटोक्रोम B6F उसके बाद भेज देगा प्लास्टोसाइनिन इस तरीके से है ना तो आप याद कर सकते हो प्रियंका प्रियंका चोपड़ा से ठीक है यानी पी से प्लास्टोकाइनिनोन प्रियंका चोपड़ा से साइटोक्रोम और फिर प्लास्टोसाइनिन दोबारा से प्रियंका चोपड़ा ठीक है तो प्लास्टोकायरन के पास आपने कितने भेजे दो इलेक्ट्रॉन इसके पास भी दो इलेक्ट्रॉन गए आपने पहली रिएक्शन कर दी
36:10 ठीक है यानी कि आपने कुछ इस तरीके से किया कुछ इस तरीके से नीचे भेजा ठीक है और उसके बाद आप दोबारा भेजोगे किसके पास ये जो आपके इलेक्ट्रॉन यहां पे आए हैं अब इसको भेज दोगे आप किसके पास? PS1 के पास। PS1 में 700 नैनोमीटर की लाइट है। अब यह जो आपने भेजा है ना इसको यह आपने भेजा है वो क्या करेगा? PS1 के पास चला जाएगा। PS1 के पास भी क्लोरोफिल A है। वो क्या करेगा? इसको अब्जॉर्ब करेगा लाइट को। अब मान लो मैं PS1 के बारे में बात कर रही हूं। ये फिर दोबारा इसको भेजेगा और फिर भेज देगा यह प्लास्टो साइटोक्रोम किसको भेजेगा? फेराडॉक्सिन को। ठीक है? यह फेराडॉक्सिन को भेजेगा। यही फेराडॉक्सिन क्या करेगी? NADP+ को रिडक्शन करने के बाद NADPH में बना देगी और एटीपी भी बना देगी। अब जो आपने इलेक्ट्रॉन भेजे थे Z स्कीम से यानी
36:56 कुछ इस तरीके से रिएक्शन होती है। आपने ये भेजा यहां पे दोबारा नीचे की तरफ आते हैं इलेक्ट्रॉन फिर आपके PS1 के पास चले जाते हैं। मान लो ये PS2 है। तो इस तरीके से ना Z शेप बन जाती है। इसीलिए मैं इसको Z स्कीम कहते हूं। PS1 के टाइम पे आपका जो है फोटोलिसिस होता है ना पानी का ब्रेकडाउन होता है। पानी का ब्रेकडाउन होता है तो यहां पे क्या हो जाता है? आपके पास ऑक्सीजन रिलीज़ हो जाती है। ठीक है? अब PS1 जो है बेसिकली यहां पे ये जाके PS1 में चला गया और इलेक्ट्रॉन चला गया। यानी कि जो इलेक्ट्रॉन आपने भेजा था वापस नहीं आया। इसीलिए मैं इसको बोलती हूं नॉन साइक्लिक फोटोफॉस्फोराइलेशन। यानी साइकिल में नहीं चला रिएक्शन। इसीलिए मैं इसको क्या बोलती हूं? नॉन साइक्लिक फोटोफॉस्फोराइलेशन। ठीक है? अब इसको और अच्छे से पढ़ लेते हैं। आ जाओ। की कॉम्पोनेंट हमने पढ़ लिए। और यहां पे टाइप्स पढ़ते हैं। आ जाओ। दो टाइप की होती हैं। फोटोफॉस्फोराइलेशन। एक होता है नॉन साइक्लिक। यानी जिसमें PS1, PS2
37:42 हमने दोनों लिया और एटीपी यानी डीपीए बना लिया और ऑक्सीजन बना लिया। जो इलेक्ट्रॉन आपने भेजे वापस नहीं आए। इसीलिए इसका नाम नॉन साइक्लिक है। एक होता है साइक्लिक। साइक्लिक में आपका PS1 ही यूज़ होता है। तो PS1 जो होता है बेसिकली यही यूज़ होता है। लाइट आई एसरी पिगमेंट ने उसको अब्सॉर्ब किया। पी क्लोरोफिल ए यहीं पे बैठा हुआ है। 700 नैनोमीटर की लाइट आई। इसने भेज दिया प्राइमरी इलेक्ट्रॉन एक्सेप्टर को। फिर इसने फराडॉक्सिन को भेजा। प्रियंका चोपड़ा को भेजा। फिर प्रियंका चोपड़ा ने इसको दोबारा भेज दिया। यानी जो आपने इलेक्ट्रॉन इसको भेजे वो दोबारा आ गए। तो एक साइकिल चल गया। तो इसको मैं बोलूंगी क्या बोलूंगी? ओ साइक्लिक फोटोफॉस्फोराइलेशन जिसमें आपका सिर्फ और सिर्फ एटीपी बनता है। एनएडीपीए नहीं बनता ना ही ऑक्सीजन बनता है। यानी फोटोलिसिस जो होता है ना बेसिकली वो आपका पीए वन में यानी कि साइक्लिक फोटोफॉस्फोराइलेशन में नहीं होता। तो आपको अगर डिफरेंस पूछा जाए
38:27 नॉन साइक्लिक और साइक्लिक फोटोफॉस्फोराइलेशन में तो आप बता सकते हो। ठीक है? चलिए नेक्स्ट पे चलते हैं। क्वेश्चन नंबर 13 पे आ जाते हैं। आ जाओ। डिफाइन फोटो रेस्पस्पिरेशन। वेरीेंट फोटो रेस्पिरेशन आपकी एक वेस्टफुल प्रोसेस होती है। ठीक है? जो कि सिर्फ और सिर्फ कहां पे पाई जाती है? आओ देख लेते हैं। ठीक है? और इसकी जो है क्या-क्या स्ट्रेटजी है जो प्लांट इसको यूज़ करते हैं। ठीक है? फोटो रेस्पिरेशन आपकी एक वेस्टफुल प्रोसेस होती है। जब होती है जब आपका एम एंजाइम जो रूबिस्को है वो बाइंड करता है ऑक्सीजन की जगह कार्बन डाइऑक्साइड से। यानी कि रूबिस्को आपका एक ऑक्सीजनेस टाइप का भी है। कार्बन और कार्बोक्सिलेज़ टाइप का भी एंजाइम है रूबिस्को। ठीक है? तो रूबिस्को जब आपका ऑक्सीजन से बाइंड ना करके कार्बन डाइऑक्साइड से बाइंड करता है तो वह आपका फोटो रेस्पिरेशन होता है। स्पेशली यह हाई ऑक्सीजन अंडर हाई ऑक्सीजन एंड टेंपरेचर के बीच में होता है। जब टेंपरेचर हाई होता है यानी कि C4 प्लांट्स
39:13 में होता है बेसिकली। ठीक है? अब देखो क्या करता है? ये जो मैकेनिज़्म आपकी वेस्टफुल प्रोसेस है। ठीक है? ये कार्बन डाइऑक्साइड को फिक्स करता है। रुबिस्को के साथ रिएक्ट करता है। ये CO2 जो है वो रुबिस्को के साथ रिएक्ट करके ऑक्सीजन के साथ ये बना लेता है आपके पास 3 PG। यह पीजी आपका वन मॉलिक्यूल जो होता है आपका पीजीए बना देगा और दो मॉलिक्यूल ऑफ फास्फोग्लिस वो फास्फोग्लाइकोलेट भी बना लेगा। जो फास्फोग्लाइकोकोलेट आपने बनाया है वो टॉक्सिक होता है। ठीक है? एक मॉलिक्यूल किसका बनाएगा? आपका फास्फोग्लिसरेट यानी तीन पीजीए जो होता है तीन कार्बन का पीजीए उसका एक मॉलिक्यूल और आपके पास दो फास्फोग्लिसरेट का एक मॉलिक्यूल दो मॉलिक्यूल। तो ये आप बनाओगे। ठीक है ना? यह बनाने के बाद यह टॉक्सिक होता है। बेसिकली यही जो होता है बेसिकली आपका फिक्स्ड कार्बन को एनर्जी को लॉस करता है। एटीपी एनएडी क्यों वेसफुल है? यह
39:59 फोटोसिंथेटिक एफिशिएंसी को कम कर देता है और ये एटीपी और शुगर नहीं देता है। इसीलिए भाई कुछ काम का नहीं है। ठीक है? हम यहां पे बेसिकली डिटॉक्सिफाई करते हैं टू फास्फोग्लाइकोलेट के। यहां पे बेसिकली हम रिड्यूस करते हैं फोटो रेस्पिरेशन का। ठीक है? C4 पाथवे में होता है ये आपका जिसमें आप पेप कार्बोक्सिलेज़ को यूज़ करते हो इनिशियली जो कार्बन डाइऑक्साइड को फिक्स करता है। ऑक्सीजन पे कोई मदद नहीं करता। और फिर कार्बन डाइऑक्साइड को फिक्स करके केल्विन साइकिल में ले जाते हो जो कि आपकी मेज़ में होता है। केम पाथवे में भी होता है आपका फोटो रेस्पिरेशन क्योंकि ये टेंपोरल सेपरेशन करता है। CO2 को अपटेक करता है नाइट के टाइम में और फिर केल्विन साइकिल को भेज देता है। कैक्टस और पाइनएप्पल में होता है। यही एडप्टेशन जो होता है प्लांट को हॉट और ड्राई एनवायरमेंट में भी रहता है और फोटो रेस्पिरेशन को अवॉइड करता है और एनर्जी को बचाता है। तो बेसिकली फोटो रेस्पिरेशन आपका क्या है? एक वेस्टफुल प्रोसेस है। नेक्स्ट क्वेश्चन पे चलते हैं। आ जाओ। कितने क्वेश्चन है भाई? डिस्कस फैक्टर्स
40:46 अफेक्टिंग दैट एंजाइम की एक्टिविटी। अब एंजाइम्स जो होते हैं बेसिकली वो क्या करते हैं? आपकी रिएक्शन को फास्ट करते हैं। आपकी रिएक्शन को कैटलाइज़ करते हैं। कौन-कौन से फैक्टर्स उन पे अफेक्ट करेंगे? आ जाओ। सबसे पहले हम बात करें कि एंजाइम आपका बायोलॉजिकल कैटेलिक्स होता है जो कि किसी भी रिएक्शन को स्पीड अप करता है। इनकी एक्टिविटी क्या होती है? एनवायरमेंटल और केमिकल फैक्टर्स पे डिपेंड करती है। अगर मैं सबसे पहले बात करूं एंजाइम की एक्टिविटी टेंपरेचर पे। जितना टेंपरेचर बढ़ाओगे उतना इनक्रीस होगा। ऐसा टेंपरेचर आएगा कि उस टाइम पे वो डिनेचर हो जाएंगे। ज्यादा ही टेंपरेचर कर दोगे तो डिनेचर हो जाएंगे और एक्टिविटी इनकी कम हो जाएगी। यूजली 37° सेल्सियस पर ये ज्यादा काम करते हैं। पीए की बात करूं तो अगर एंजाइम के हर एक अलग-अलग पीए होता है। कोई-कोई एंजाइम एग्जांपल के लिए अगर मैं बात करूं हर एंजाइम अपनी अलग-अलग पीए पे काम करता है। पेप्सिन है जो पीए2 पे काम करता है। एमा एमाइलेज़ है जो पीए से पे काम करता है। सब्सस्ट्रेट के कंसंट्रेशन पे भी डिपेंड करता है। यानी कि जैसे-जैसे आप एक्टिविटी
41:32 इंक्रीस करोगे उतना ज्यादा एंजाइम जो है वो सैचुरेट हो जाएगा। एंजाइम के कंसंट्रेशन पे भी बात करता है। डायरेक्टली जो होता है रिएक्शन रेट पे जितना ज्यादा आपका सब्सस्ट्रेट अवेलेबल होगा उतना ज्यादा की रिएक्शन रेट बढ़ेगी। कोफरक्टर को एंजाइम कुछ एंजाइम जो होते हैं उनको मेटल आयंस की जरूरत पड़ती है। ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स की उसको कोफक्टर कहते हैं। यानी कुछ आयंस या मेटल का आप यूज करोगे ना वो एंजाइम की एक्टिविटी और बढ़ जाएगी। तो उसको हम को एएंजाइम्स कहते हैं। विटामिन वगैरह तो फंक्शन को बढ़ा देगा। इनहबिटर्स भी होते हैं आपके एंजाइम्स। कॉम्पिटिटिव इनहिबिटर्स जो होते हैं वो एक्टिव साइट को ही ब्लॉक कर देते हैं। यानी वो कंपटीशन कर रहे हैं। नॉन कॉम्पिटिटिव जो होता है बेसिकली वो एंजाइम की शेप को चेंज कर देता है। उसको कंपटीशन से मतलब नहीं है। वो एंजाइम को दूसरी शेप में लाके दूसरी साइड से बाइंड हो जाएगा। बेसिकली ये आपका एग्रीकल्चर वगैरह में भी यूज़ होते हैं। बायोटेक्नोलॉजी में भी आप एंजाइम यूज़ होते हैं। नेक्स्ट क्वेश्चन पे चलते हैं। व्हाट आर द फिजियोलॉजिकल रोल्स
42:18 ऑफ इथाईलीन? अब देखो इथाईलीन आपका एक फाइटो हॉर्मोन है। मैंने आपको बताया था ये प्लांट हॉर्न है। इथाइलीन ये आपका गैसियस हॉर्मोन होता है। एग्जांपल की बात करूं। इथाईलीन आपका एक गैसियस प्लांट हॉर्मोन है जो कि ग्रोथ में हेल्प करता है और स्ट्रेस रिस्पांस को रिड्यूस करता है। फंक्शन की बात करूं फ्रूट रिपनिंग यानी फ्रूट को पकने में हेल्प करता है। बनाना टोमेटो अगर इथाईन डाल दोगे ना तो आपका बनाना जल्दी पक जाएगा। टमाटर ही पक जाएगा। लीफ एिसिशन यानी लीफ की फ्लोइंग से और फ्लावर सेनेसेंस में हेल्प करता है। ठीक है? सीड जर्मिनेशन को रूट हेयर फॉर्मेशन में हेल्प करता है। मैकेनिकल स्ट्रेस वगैरह आए उसमें भी हेल्प करता है। यानी कि रिड्यूस करता है। इथाईन जो होता है बेसिकली अंडरस्ट्रेस और फ्रूट मैचुरेशन में भी काम कर देता है। आपके कुछ फाइटो हॉर्मोन मेडिएटेड रिस्पांस होते हैं। फाइटो हॉर्मोन बेसिकली एक फोटोसेप्टर्स पिगमेंट्स होते हैं जो कि इंफ्रारेड और रेड और फार रीजन में हेल्प
43:04 करते हैं। दो रीजन में पाए जाते हैं आपके ये। ये फाइटो हॉर्मोन मीडिएटेड रिस्पांस की बात कर रही हूं। एक तो होता है वह जो कि रेड लाइट 660 नैनोमीटर पे अब्सॉर्ब कर ले और एक फार रेड होता है 730 ठीक है एक्टिवली फॉर्म इसका क्या काम करता है इसका काम क्या होता है बेसिकली सीड जर्मिनेशन को करना फ्लावरिंग कराना शेड अवॉयडेंस कराना करकेडियन रिधन को बना सरकडियन रिधन को बनाए रखना फोटोपीरियडिक रिस्पांस को रखना प्लांट्स को फ्लावर और राइट सीजन में अच्छे से करना ये थाईलीन और फाइटो हॉर्मोन जो होता है बेसिकली वो हेल्प करते हैं एनवायरमेंटल सिग्नल्स और डेवलपमेंट को ऑप्टिमाइज करते हैं। अब यहां पे कुछ शॉर्ट नोट्स हैं। कैम पाथवे के बारे में तो मैंने आपको बता दिया है। ठीक है? ये यहां पर यही है डेजर्ट प्लांट्स वगैरह को और नेक्स्ट है कैमियो ऑस्मोटिक मैकेनिज्म। इसके बारे में मैं आपको बता देती हूं। यहां पे आप एटीपी बनाते हो। ठीक है? कैमियो ऑस्मोटिक एक्सप्लेन करता है आपकी एटीपी बनाना ड्यूरिंग लाइट डिपेंडेंट
43:51 रिएक्शन। यानी कि लाइट की प्रेजेंस में आप एटीपी बना रहे हो। वो आपकी थ्योरी यहां पे बताती है। ये आपका माइटोकांड्रिया में होता है। इलेक्ट्रॉन ट्रांसपोर्ट जो होता है बेसिकली एक चेन होती है जो कि प्रोटॉन को पंप करता है थैलाकॉइड मेंब्रेन में। थैलाकॉइड मेंब्रेन से आप इसको कहां ले जाते हो? ल्यूमन में और वहां पे आपका एक प्रोटॉन ग्रेडियंट बनता है। ये प्रोटॉन मोटिव फ़ जो होता है प्रोटॉन को दोबारा स्ट्रोमा में ले जाता है स्ट्रोमा में और फिर आपका एटीपी बन जाता है। यही फ्लो प्रोटीन बनता है आपका और इसकाेंस क्या है? मैं आपको बता देती हूं। यह आपको एटीपी देता है जो आप केल्विन साइकिल में यूज़ कर सकते हो जो कि डार्क रिएक्शन है। और यह आपका क्लोरोप्लास्ट माइटोकांड्रिया में होता है। इसको किसने दिया था? पीटर माइकल ने दिया था। नोबेल प्राइज भी मिला था उन्होंने। यह थ्योरी बेसिकली आपको बताती है किस तरीके से एनर्जी आप यूज़ करते हो और स्टोर करते हो। ठीक है? कैमियो ऑस्मोटिक थ्योरी। व्हाट इज़ माइकोराइजा? अब माइकोराइजा क्या होता है और इसकीेंस क्या होता है और इसके
44:37 टाइस से माइकोराइजा एक सिंबायोटिक एसोसिएशन है फंजाई और रूट्स के बीच में हायर प्लांट्स के बीच में दोनों आपस में क्या करते हैं चुगलबाजी करते हैं और एक दूसरे को सहायता देते हैं जैसे दोस्त ठीक है एक दूसरे को सहायता देते हैं तो इसको हम बोलेंगे सिंबायोटिक एसोसिएशन एक तो होता है भाई साहब एक्टोमाइकोराइजा एक होता है एंडोमाइकोराइजा एक्टो माइकोराइजा जो होता है बाहर की तरफ होता है तो फंजाई जो होता है रूट सेल्स में के बाहर की तरफ होता है और फिर पेनिट्रेट कर लेते हैं एंडोवाला जो होता है आरबस्कल क्यूलर में होता है ये पार्ट है फंजाई जो होता है रूट सेल्स में घुस जाता और स्ट्रक्चर जो होता है ये इंसाइड है। इनका फंक्शन क्या है? पानी को जो है बेसिकली अब्सॉर्प्शन करना पानी का वाटर का ताकि फास्फोरस वगैरह स्पेशली इन सबको प्रोवाइड करते हैं। न्यूट्रिएंट्स लगाते हैं। डिसीज रेजिस्टेंस प्रोटेक्शन का काम करते हैं। सॉइल स्टेबलाइजेशन में काम करते हैं। ग्रोथ को पुअर सेल्स में बचाते हैं। वाइडली यूज़्ड हम करते हैं एग्रीकल्चर में हॉर्टिकल्चर फॉरेस्ट्री में यूज़ करते हैं।
45:24 ये जो होता है अंडर स्ट्रेस कंडीशन में और ड्रॉट हो गया। सेलेनिटी कंडीशन में भी ग्रो कर जाते हैं। नेचुरल बायोफर्टिलाइजेशन को इंप्रूव करते हैं। सोइल की क्वालिटी बढ़ाते हैं। नेक्स्ट है आपका व्हाट इज़ एब्जॉर्प्शन स्पेक्ट्रम क्या होता है? ये हमेशा रिपीट होने वाला क्वेश्चन है। एब्जॉर्प्शन स्पेक्ट्रम बेसिकली एक ग्राफ है जिसकी मदद से हम क्या शो करते हैं कि अमाउंट ऑफ लाइट कितना एब्जॉर्ब करता है एक सब्सटेंस एक डिफरेंट वेवलेंथ पे। पिगमेंट्स आपका क्लोरोफिल ए होता है। क्लोरोफिल बी, कैरेटिनॉइड्स ये जो होता है अपने स्पेसिफिक रीजन में अपने सारे के सारे क्या करते हैं? लाइट को अब्सॉर्ब करती है। क्लोरोफिल जो होता है स्टंगली इन द ब्लू लाइट में होता है। 430 नैनोमीटर में। रेड 66 नैनोमीटर में होता है। कैरेटिनॉइड ब्लू ग्रीन रीजन में होता है। इसकीेंस की अगर मैं बात करूं तो ये आपका आइडेंटिफाई करते हैं कि कौन सा मोस्ट इफेक्टिव होता है फोटोसिंथेसिस के लिए कितनी वेवलेंथ अच्छी होगी। एक्शन स्पेक्ट्रा बात करते हैं। यानी कि जो मैक्सिमम फोटोसिंथेसिस एक्टिविटी रख पाए।
46:10 इसमें हम अब्जॉर्प्शन स्पेक्ट्रा को पढ़ने के लिए और लाइट को कैप्चर करने के लिए यूज़ करते हैं। नेक्स्ट है आपका शॉर्ट नोट मंच प्रेशर फ्लो हाइपोथेसिस। मंच प्रेशर हाइपोथेसिस बेसिकली शुगर्स को फ्लोएम में आपने मूव किया होगा। ठीक है? सो से सिंक तक तो उसको हम क्या बोलते हैं? मंच फ्लो हाइपोथेस। हाइपोथेसिस। यहां पे क्या होता है? एक सोर्स होता है जहां पे शुगर को लो शुगर को जो है ना लोड किया जाता है फ्लोएम के अंदर। पानी आता है, एंटर करता है ऑस्मोसिस के बाद हाई प्रेशर कंटेन करता है। सिंक क्या होता है? शुगर जहां से रिमूव की जाएगी और फिर स्टोरेज में आप यूज़ करोगे। तो यहां पे बेसिकली आप सोर्स से सिंक तक भेजते हो। प्रेशर डिफरेंस होता है इन दोनों के बीच में सीपी सेल्स के बीच में। फिर वह चला जाता है। फ्लो जो होता है बल्क में होता है। यानी कि बहुत बड़ी अमाउंट में आपका जो है शुगर वह लोड किया जाता है। लोडिंग और अनलोडिंग जात होती है। और इन लोडिंग और अनलोडिंग के लिए एनर्जी
46:56 की जरूरत पड़ती है। ट्रांसोकेशन करते हो आप लॉन्ग डिस्टेंस तक। मोस्टली एक्सेप्टेड फ्लोएम ट्रांसपोर्ट ये होता है बेसिकली। तो ये आपका जो है कंप्लीट हो चुका है। आपके 20 क्वेश्चन है। सही हां यह बहुतेंट क्वेश्चन है। इसको आपको करना है। जब इसको कर लेंगे आप तो पीवाईक्यूस देख लीजिए। अगर पीवाईक्यूस नहीं है तो आप मुझे कमेंट करके बता देना। मैं पीवाईक्यू सॉल्यूशन भी लेके आ जाऊंगी। तो ये आपकेेंट क्वेश्चन होते हैं बॉटनी 137 का। बॉटनी 143 के भी मैं ले आऊंगी और जो केमिस्ट्री 137 है उसका पार्ट भी मैं अपलोड कर दूंगी जल्दी। ठीक है? इवनिंग तक आई थॉट। तो आपको क्या करना है? चैनल को सब्सक्राइब करना है। ज्यादा से ज्यादा शेयर करना है कि जो जूनियर्स हैं उनको भी मिल जाए। क्योंकि अब उनके लिए और भी अच्छे से मैं सारी प्लेलिस्ट बना के रख दूंगी आपको। तो जो नेक्स्ट दिसंबर वाले हैं उनको पहले से सारी चीजें अवेलेबल मिलेगी। ठीक है? तो चलिए मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। जब तक के लिए आपको क्या करना है? चैनल को सब्सक्राइब करना है
47:42 और शेयर करना तो भूलना ही नहीं। तो चलिए मिलते हैं नेक्स्ट में। जब तक के लिए बाय-ब एंड टेक केयर।