0:08 हेलो पयर बच्चों बहुत-बहुत स्वागत अपने youtube1 सर में और आज की क्लास में बहुत ही महत्त्वपूर्ण हम टॉपिक लेकर के आए हैं जो कि बिजनेस लॉ या बिजनेस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का अक्सर पहला चैप्टर यही आपके लिए एग्जाम में मिलता है और यहां से भी लॉन्ग क्वेश्चन है हर वर्ष आने की पूरी पूरी संभावना रखता है तो ये जो लॉ क्वेश्चन है आज आप देख रहे हो भारतीय अनुबंध अधिनियम
1:00 होने वाला है तो बने रहेंगे क्लास में शुरू से लेकर के लास्ट तक और आप लोग कमेंट्स के माध्यम से भी अगर कुछ पूछना चाहो तो पूछ सकते हो क्योंकि इस क्लास के माध्यम से हम आपके प्रश्नों का रिप्लाई भी देने का पूरा पूरा कोशिश करेंगे तो जल्दी से सब लोग क्लास में आ जाइएगा और आज का क्लास बहुत ही महत्त्वपूर्ण होने वाला है तो इसमें आज हम आपके लिए पढ़ा रहे हैं व्यवसायिक नियमन एवं ढांचा यानी जिसको बिजनेस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के नाम से जाना जाता है और बिजनेस लॉ और बिजनेस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में कोई विशेष आपके लिए डिफरेंस नहीं है पढ़ने के उद्देश्य से दोनों एक ही हैं ओके वैसे बिजनेस को कैसे चलाया जाए कौन-कौन से नियम हैं उनको पालन करना यह बिजनेस लॉ कहलाता है और बिजनेस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क यानी व्यवसाय के
1:46 नियमन एवं ढांचा में यह समझाया जाता है कि किसी भी बिजनेस को कैसे करके स्थापित किया जाए फिर उसको कैसे चलाया जाए फ और कौन-कौन से नियमों का पालन करके और फिर खाते तैयार किए जाए तो ये सब चीजें जिस में है वो व्यावसायिक नियमन एवं ढांचा है ढांचा कहते हैं बनावट के लिए यानी बिजनेस कैसा है और नियम उसमें कौन-कौन से पालन करने प्लस बिजनेस की बनावट के संबंध में जिसमें पढ़ते हैं उसे हम बिजनेस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क कहते हैं तो यहां पर आप लोग पढ़िए ये टॉपिक बिजनेस लॉ बिजनेस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मतलब सभी में हाई है और सबसे महत्त्वपूर्ण टॉपिक है तो आइए श्री गणेश करते काफी लोग आ चुके हैं क्लास में और बिल्कुल इस क्लास को हम डिस्टर्ब नहीं करेंगे बड़े अच्छे तरीके से आज हम आपको यह समझाएंगे और इस बिजनेस लॉ के लिए आप चाहे कहीं से पढ़
2:33 लेना लेकिन जितने अच्छे क्लासेस आपको हमारे यहां और जितने इजी लगेंगे पूरे इंडिया में कहीं पर भी नहीं मिलेंगे तो आप देख लीजिए ये सब सही आज ही क्लास में हो जाएगा कि क्या सही है और क्या गलत तो व्यवसायिक नियमन एवं ढांचा जिसको बिजनेस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क कहते हैं भारतीय अनुबंध अधिनियम हैं और इंडियाज नंबर वन ऑनलाइन क्लासेस आपके लिए हम प्रोवाइड करा रहे हैं अपने youtube1 सर के माध्यम से और इस पूरे बिजनेस लॉ या बिजनेस रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के जो पीडीएफ नोट्स है अगर आप लेना चाहते हैं तो यह प्ले स्टोर पर जो हमारा ऐप है वहां पर अवेलेबल है मिल रहे हैं बहुत ही
3:18 कम फीस में वहां पर उपलब्ध है ठीक है अ थोड़ा सा प्राइस ऊपर नीचे होता रहता है इसलिए यहां प्राइस तो नहीं बता रहे हैं लेकिन हां ये कि जितने में बुक मिलती है उतने से भी कम में बहुत अच्छे पीडीएफ नोट्स वहां पर अवेलेबल है ठीक है और ऐप जो अवेलेबल है कॉमर्स भी संजीव सर नाम से है तो चलिए हम शुरुआत करते हैं आज भारतीय अनुबंध अधिनियम 18725 अप्रैल 18725 ये कहलाता है ओके और भारत में ये जो लागू हुआ था वो सितंबर 72 के संबंध में आप लोगों से कहना है समझाना है आप लोगों को कि इसके बारे में
4:04 डिटेल में तो खैर पीडीएफ नोट्स में ही है लेकिन यहां पर हम संक्षेप में समझाएंगे ये तब की बात है जब हमारा देश स्वतंत्र नहीं हुआ था यानी या कंपनी यहां पर स्थापित की थी जिसका मुख्य उद्देश्य उनका लूटना नहीं था व्यापार करना था और व्यापार की प्रणाली ऐसी यहां पर लागू करना कि हम सब लोग उनके बिजनेस में कहीं ना कहीं इस तरीके से इवॉल्व हो जाएं कि सब का सब जो माल है ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से हम लोग परचेज करें ऐसा स्वप्न लेकर के वो चले
4:50 लेकिन बाद में उनकी नियत खराब हुई और नियत खराब होने के बाद में उन्होंने इंडिया को ही अपना क्या गुलाम बना लिया तो वहां पर क्रेता और विक्रेता के बीच में कुछ ऐसी चीजें कुछ ऐसी शर्तें लागू की गई जिनके माध्यम से ना तो क्रेता पक्ष का नुकसान हो ना विक्रेता पक्ष का नुकसान हो या ना तो लेनदार पक्ष का नुकसान हो ना देनदार पक्ष का नुकसान हो यानी जो अनुबंध की बात कर रहे हैं ये दो पक्षों की है चाहे सर्विस को लेकर के हो चाहे क्रय विक्रय को लेकर के हो चाहे किसी भी चीज को लेकर के हो यानी दो पक्षों के बीच में भारतीय अनुबंध अधिनियम निकल कर के आया और जिसको अब हम आपको समझाते हैं एक एग्जांपल मित्रों फ तरन समझ में आएगा पहले हम बात अनुबंध की ही कर ले अनुबंध हम किसके लिए कहते हैं जिसको हम अंग्रेजी में बेटा कांट्रैक्ट
5:36 कहते हैं ये कांट्रैक्ट है क्या देखो सबसे पहले नंबर पर कोई भी क्रय विक्रय हो रहा है उसमें सबसे पहले नंबर पर दिया जाता है बेटा प्रस्ताव ठीक क्या होता है प्रस्ताव प्रस्ताव को हम अंग्रेजी में प्रपोजल कहते हैं ठीक है प्रपोजल का मतलब सीधी सी बात है कि जब हम अपनी बात किसी दूसरे के सामने रखते हैं तो वो चीज कहलाती है प्रपोजल जैसे मान लीजिएगा कि आप आपके पास में अगर किसी भी एक
6:29 के समक्ष रखना यह चीज क्या कहलाता है प्रस्ताव कहलाता है और सामने वाले पे जैसे ही मिल जाती है स्वीकृति स्वीकृति का मतलब है हमें हां जिसको अंग्रेजी में हम कहते हैं एक्सेप्टेंस ठीक है एक्सेप्टेंस यानी स्वीकृति जिसके लिए कहते हैं तभी यह बन जाता है प्रस्ताव और स्वीकृति दोनों से मिलकर के बन जाता है क्या ठहराव जिसको हम लोग कहते हैं एग्रीमेंट ओके ये पूरी हम प्रक्रिया आपको समझा देते हैं यानी शुरुआत होती है किसी भी अनुबंध की कहां से प्रस्ताव से प्रस्ताव में जब सामने वाला होता है सहमत तभी वो चीज बन जाती है क्या एग्रीमेंट और एग्रीमेंट में किसमें एग्रीमेंट में एग्रीमेंट में जब प्लस कर
7:16 दिया जाए कानून द्वारा कानून द्वारा परिवर्तनीय परिवर्तनीय ऐसे ही लिख कर के आओगे बेटा परिवर्तनीय तभी वो चीज हमारी क्या कहलाती है अनुबंध कहलाती है तो अनुबंध कुछ और नहीं है किसी भी प्रस्ताव पर दूसरे पक्ष द्वारा स्वीकृति मिलने से ठहराव बनता है और ठहराव को जब कानून द्वारा परिवर्तनीय कराया जा सके उसी के लिए हम क्या कहते हैं अनुबंध कहते हैं अब ये पनीय परिवर्तनीय आपके समझ में जल्दी नहीं आ रहा होगा क्यों क्योंकि हम जब पढ़ाते हैं तो धीरे-धीरे करके कमेंट्स देखते हैं और तमाम बच्चों से पूछते हैं तो वहां पर निकल कर के कठिनाइया आ जाती है परिवर्तनीय का मत मतलब होता है चेंजेबल और ये चेंजेबल का मतलब है कि
8:02 जिसको एक पक्ष के द्वारा ही फिर कानून द्वारा ताकत मिल जाए उसे हम चेंजेबल कहते हैं एग्जांपल के थ्रू सुनिए एग्जांपल के थ्रू सुनिए कि एक कार है ठीक एक कार है मान लो जब हमने कार का एग्जांपल लिया तो कार का ही एग्जांपल लेते हैं एक कार है ए बेच रहा है किसके लिए बी के लिए ए ने प्रपोजल रखा बी के लिए कि भाई हम तुम्हें एक कार हम बेच रहे हैं और इन्होंने कोई रेट बताए इन्होंने कोई रेट अपने बताया और बीच में ये कार जो तय हो गई थी ये 10 लाख में तैयार हो गई यानी 10 लाख में यह खरीदने बेचने के लिए तैयार हो गए अब बी ने क्या काम किया कि ₹ लाख रप या 20 हज तुरंत किसको दे दिए ए के लिए दे दिए कि लो भैया ये 00 और बाकी जिस दिन आप हमें कार दोगे उसी दिन हम बाकी का पेमेंट कर देंगे या लोन पर दे देंगे या किस्त प दे देंगे किसी
8:48 प्रकार से पेमेंट कर देंगे अब क्या हुआ कि एक व्यक्ति था ए जिसने दिया प्रस्ताव दूसरा व्यक्ति था कौन बी जिसने दी स्वीकृति दोनों के बीच में लिखा पड़त हुई जो कि कहलाया क्या ठहराव अब ठहराव तो हो गया एग्रीमेंट तो हो गया अनुबंध कब होगा जाकर के जब उस पर दोनों पक्ष ने अपने अपनी सहमति देकर के हस्ताक्षर कर दिए और हस्ताक्षर करने के बाद में किसी वकील से इसे प्रमाणित करा लिया या किसी जिम्मेदार व्यक्ति से इसको प्रमाणित करा लिया दोनों पक्ष हां सहमत है तभी वो चीज बन गई हमारी क्या अनुबंध अनुबंध का मतलब है अनुशासन में बंदना अनुबंध दो शब्दों से मिलकर के बना है अनु प्लस ब अनु माने अनुशासन से बंद माने बंधने से यानी अब ना तो ए गड़बड़
9:34 करेंगे ना बी गड़बड़ करेंगे अब बीच में आ गया कौन कानून अब कानून क्या कहता है कि अगर बी कह दे कि नहीं अब तो हम कार नहीं लेंगे तो समझ लो कि ये 00 जप्त करने का अधिकार किसके पास में है ए के पास में है अगर ए कह दे कि नहीं भैया अब हमारी कार महंगी हो गई है अब हम कार नहीं बेचेंगे तुम्हारे लिए तो बी के पास में कानून के द्वारा इतनी ताकत मिल गई मिल जाती है कि बी अब इस से कानून के सहारे से जबरदस्ती भी उस कार के लिए परचेज कर लेगा बाकी का पेमेंट तो देना पड़ेगा यानी ए को अब कार देनी पड़ेगी किसके लिए बी के लिए तो इस तरीके का जो लेन देन है यही चीज हमारी क्या कहलाती है अनुबंध कहलाती है अब भारतीय अनुबंध अनियम
10:29 भी पक्ष से किसी भी दूसरे पक्ष को प्रताड़ना ना मिले इस तरीके के अनुशासन में बंधने को ही हम क्या कहते हैं अनुबंध कहते हैं अब उम्मीद है कि आपके समझ में आ गया होगा जैसे हम बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लासेस देते हैं तो एक बात की ये जिम्मेदारी लेते हैं कि भैया हम तुम्हें पढ़ाएंगे पढ़ा करके हम तुम्हें कामयाब करेंगे कामयाब करने के लिए कहीं ना कहीं पर हम मेहनत कर रहे हैं तो आपको भी मेहनत करनी होगी तो ये एक प्रकार का प्रपोजल है जब टीचर कहता है कि हमारे यहां कोचिंग ज्वाइन कर लो सामने वाला जैसे ही सहमत होता है वो चीज स्वीकृति कहलाती है अब बीच में हो गया एग्रीमेंट अगर उसका कहीं पर पेमेंट अगर हो रहा है तो भैया पढ़ाना पड़ेगा बिना पढ़ाए तो काम चल ही नहीं सकता तो ठीक इसी प्रकार से तमाम जितने भी लेनदेन हैं उनमें दो पक्ष होते हैं ठीक है अब चलिए अब इनमें भी कुछ चीजें ऐसी निकल कर के आती है बेटा जो आपको अलग-अलग तरीके
11:16 से दिखाई देंगे यानी अनुबंध तो होंगे लेकिन अनुबंधों में भी कई चीजें पैदा हो जाएंगी कहीं खटास पैदा होगी कहीं मिठास पैदा होगी कहीं कुछ पैदा होगा और ये वो टॉपिक है जो जल्दी बच्चों के समझ में नहीं आते हैं और अनुबंध के अनुबंध के जितने भी प्रकार हैं आपको हमारे यहां पर पूरा का पूरा कंटेंट मिलेगा एक भी पॉइंट छुपा हुआ नहीं होगा तो अनुबंध तो हमने समझ लिया कि अनुबंध दो शब्दों से मिलकर के बना है अनु प्लस बंध अनु माने अनुशासन से बंध माने बंधने से यानी जब दो या दो से अधिक पक्षों के बीच में जो समझौता होता है उस समझौता का पालन करने के लिए जो सभी को अपने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होता है उसे हम अनुबंध कहते हैं यह बात तो सब बच्चों के समझ में आ गई अब ये होते कितने प्रकार के हैं ये समझ लीजिएगा सबसे पहले नंबर पर है वैद अनुबंध जिसमें समस्त कानूनी अ
12:02 प्रक्रियाओं का पूर्ण रूप से पालन हो रहा हो दोनों पक्षों में से दोनों पक्षों का हित पूरा हो रहा हो दोनों में से कहीं किसी के लिए धोखा ना दिया जा रहा हो यानी वह अनुबंध जिसमें पूरा शिष्टाचार और दोनों पक्ष का फायदा हो पूर्ण रूप से कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा हो ऐसे अनुबंध को हम कहते हैं वैध अनुबंध जैसे मान लीजिएगा कि ए व्यक्ति है वो अपनी भूमि बेच रहा है जमीन बेच रहा है प्लॉट बेच रहा है किसके लिए बी के लिए अब यहां पर इन दोनों के बीच में देखा कि ए वास्तविक मालिक है बी खरीददार है दोनों के बीच में समझौता हो गया और कि हां भाई इस के लिए हम 20 लाख में परचेज कर रहे हैं तो दोनों ने क्या काम किया इन्होंने जितना पेमेंट इन्हें दिया इन्होंने स्वीकार करके रसीद दे दी अब ये सब चीजें वैद है तो कानून
12:48 द्वारा स्टैंप लगा कर के स्टैंप अ जो न्यायिक स्टैंप है उसको लगा कर के और वकील से प्रमाणित करा लिया वकील को इसलिए यहां पर लाते हैं क्योंकि कानून का ज्ञाता उसी को माना जाता है ये चीज हमारी क्या कहलाए गी वैध अनुबंध कहलाए गी अब व्यर्थ अनुबंध किसे कहते हैं भाई चलो हमने मान लिया कि जिसमें सब कुछ सही है वो तो वैध है तो व्यर्थ अनुबंध किसे कहते हैं व्यर्थ अनुबंध उसे कहते हैं जिसमें कोई नियम कायदा कानून लागू ही नहीं हो सकता है ऐसे किए गए अनुबंध को बेटा व्यर्थ अनुबंध कहते हैं जैसे मान लो कि एक व्यक्ति है एक्स लिमिटेड कंपनी है ठीक है ये एक शहर में तीन लोगों को माल बेच रही है किसे बेच रही है ए को बेच रही बी को बेच रही सी को बेच रही है अब ए इससे अनुबंध कहता है है कि भैया ऐसा है एक्स वाई लिमिटेड कंपनी तू ना तो बी को माल बेच ना सी को माल बेच ठीक
13:35 मेरे को ही अकेले दे जिससे मैं मनमानी करके व मार्केट में बेच सकू तो ये इस तरीके के अनुबंध कैसे हैं व्यर्थ अनुबंध है यानी व्यर्थ अनुबंध से आशय वो है जिनमें नियम कायदा कानून और हित होता ही नहीं है अब आप सोचोगे यह तो हित है यहां पर ए का अहित है हित नहीं है जनता के साथ अहित है ओके या ए बी से अनुबंध करता है कि तू एक साथ अगर बिजली के दोनों तारों को पकड़ लेगा तो मैं तेरे लिए कुछ रुपए पैसे दूंगा इस तरीके के अगर अनुबंध है जान में जोखिम वाले डालने वाले अनुबंध हैं तो इसको हम क्या कहते हैं व्यर्थ अनुबंध कहते हैं तो व्यर्थ अनुबंध से आशय वो है जिसको कानून द्वारा मान्यता प्रदान ना की जाए ऐसे अनुबंध को हम बेटा व्यर्थ कहते हैं तो समझ गए होंगे व्यर्थ वैध किसे कहते हैं
14:21 जिसको कानून द्वारा मान्यता प्रदान की जाए ठीक है और व्यर्थ अनुबंध किसे कहते हैं जिसमें दूसरे पक्ष के लिए मतलब ना तो कुछ मिल रहा हो और जिसमें कानून द्वारा जिसको प्रवर्तनीय ना कराया जा सके यानी जिस पर कानून लागू ना हो अब व्यर्थ निय अनुबंध क्या होता है ये किताब से पढ़ोगे सर दर्द कर देंगे तुम्हें लेकिन यहां पर जो समझा रहे हैं फटाफट समझ में आएगा व्यर्थ निय अनुबंध का मतलब सीधा-सीधा सा होता है यानी बह अनुबंध जो दो पक्षों में तो हो गया लेकिन दूसरे वाले पक्ष के लिए कुछ मिलावट करके दे दी जैसे यह शहर है ये शहर है ए और बी के बीच में अनुबंध हुआ कि भैया हम ये पूरी कॉलोनी काट रहे हैं हैं और यहां पर हम तुम्हें बहुत अच्छा सबसे अच्छी जगह पर हम तुम्हारे लिए एक भूमि का टुकड़ा दे देंगे यानी एक प्लॉट दे देंगे अब ए और बी
15:07 के बीच में बेटा अनुबंध हुआ अब पता चला कि ये कॉलोनी का गेट है और बी के लिए अब यहां पर लाकर के दिया जा रहा है अब जबकि कहा था कि 20 है तुम्हें बहुत अच्छी जगह पर दे देंगे पसंद की जगह दे देंगे अब उसका जब नंबर आया पेमेंट लेने का तो अब यहां पर दिया जा रहा है और वो बिल्कुल तैयार नहीं है भी तो वो अपनी इच्छा से जिस अनुबंध को खंडित करा सके ऐसे अनुबंध को हम व्यर्थ निय अनुबंध कहते हैं यानी अनुबंध तो हुआ लेकिन उसके साथ में धोका धड़ी जैसा उसे लग रहा है तो वो चाहे तो इसको खरीद भी सकता है और चाहे तो इसे रिजेक्ट भी करा सकता है तो जिसमें पीड़ित पक्षकार के पास में पूरी पावर होती है यानी दूसरे पक्षकार के पास में पूरी पावर होती है उसे स्वीकार करने के भी उसे रिजेक्ट करने के भी ऐसे अनुबंध
15:53 को हम क्या कहते हैं अ व्यर्थ निय अनुबंध कहते हैं अगला जो आता है वो है हमारा संयोग अनुबंध और इस लाइव क्लास में आप लोग बने रहो देखो रिप्लाई हम जरूर नहीं दे पा रहे लेकिन समझा बहुत अच्छा रहे ठीक है क्योंकि ये दो चैनलों पे क्लास लाइव है इसलिए आप जरा इसे देखिए मैं बहुत अच्छे तरीके से समझाने का पूरा प्रयास कर रहा हूं बेटा संयोग अनुबंध संयोग अनुबंध जो होते हैं हमेशा हानि रक्षा पूर्ति वाले अनुबंध होते हैं हानि रक्षा पूर्ति अनुबंध का मतलब है कि कोई भी घटना संयोग बस घटे ऐसे अनुबंध को हम संयोग अनुबंध कहते हैं जैसे गाड़ियों का बीमा कराया जाता कभी इस उद्देश्य नहीं कराया जाता कि गाड़ी लड़ाए और उससे क्लेम ले ले लेंगे हां किसी कारण बस अगर एक्सीडेंट हो जाए तो समझ लो कि हानि की जो पूर्ति है वो बीमा कंपनी द्वारा की जाती है लेकिन जानबूझ के अगर तुमने किसी को तोड़ा है तुमने जानबूझ कर
16:40 के किसी कोई नुकसान किया है तो उसका क्लेम नहीं दिया जाएगा तो ये इस तरीके की जो अनुबंध होते हैं संयोग अनुबंध होते हैं संयोग का मतलब संयोग बस अचानक अगर कहीं हो जाए ठीक है गर्भित अनुबंध गर्भित अनुबंध का मतलब यहां पर उन अनुबंधों से होता है जिनमें किसी ना किसी घटना घटित होने की संभावना तो होती है लेकिन स्पष्ट नहीं होती है ऐसे अनुबंधों को हम क्या कहते हैं गर्भित अनुबंध कहते हैं अब गर्भित अनुबंध के अंतर्गत जैसे एक एग्जांपल हम ले ले कि कोई व्यक्ति है वो लॉटरी खेलता है तो उसमें 100 लोग भाग लेते हैं अब ये तो कंफर्म है कि 100 में से एक व्यक्ति का या दो व्यक्ति का नंबर निकलेगा और उसके लिए पेमेंट मिलेगा लेकिन किसे मिलेगा ये कोई पता नहीं होता कौन सा नंबर निकलेगा कोई पता नहीं होता यानी जिसमें संभावना तो है निकलने की 100% कुछ ना कुछ निकलेगा क्या
17:26 निकलेगा ये पहले से पता ना हो इसके लिए हम क्या कहते हैं अ गर्भित अनुबंध कहते हैं आगे है हानि रक्षा अनुबंध ये वो अनुबंध है जिनमें अगर हानि होती है तो उसकी क्षतिपूर्ति दी जाएगी अगर हानि नहीं होती है तो नहीं दी जाएगी ऐसे अनुबंधों को हम हानि रक्षा अनुबंध कहते हैं इसमें जैसे ज्यादातर इंश्योरेंस वगैरह है क्लेम वगैरह है ठीक है जीवन बीमा है वो सब चीजें निकल कर के आती हैं अब अगला है निक्षेप तथा गिरवी के अनुबंध निक्षेप और गिरवी का मतलब क्या होता है निक्षेप का मतलब होता है कोई भी वस्तु अपनी दूसरे के पास में में सौंपना बेलमेंट करना और गिरवी का मतलब होता है बेलमेंट करना यानी जमानत के तौर पर किसी चीज को जमा करना तो निक्षेप का मतलब होता है कि जब कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से कोई भी वस्तु है
18:12 किसी अन्य व्यक्ति के पास में रख कर के जाता है और उससे अनुबंध करता है कि भाई जब तक हम लौट के ना आ जाए तब तक ये चीज हमारी आप अपने पास सुरक्षित रखना तो ये चीज हमारी क्या कहलाती है निक्षेप कहलाती है ठीक है यानी इसमें सुरक्षा की दृष्टि से इसे किया जाता है गिरवी का मतलब क्या होता है ये अधिकांश ता यह होता है कि कोई भी धन उधार लेने के लिए या अपना कोई कार्य पूरा करने के लिए जमानत के तौर पे अपनी कोई संपत्ति या वस्तु किसी अन्य व्यक्ति को दी जाती है तो उसे हम क्या कहते हैं गिरवी के अनुबंध कहते हैं ये पूरे पूरे टॉपिक है निक्षेप और गिरवी आगे हम इसको विस्तार से पढ़ेंगे ठीक है और इसके पीडीएफ नोट्स बहुत ही इजी प्ले स्टोर पर जो ऐप है वहां पर अवेलेबल भी है अगर अच्छा लग रहा हो तो वहां से आप तुरंत परचेज कर सकते हो ठीक है 2 3 300 के आसपास में वहां पर 300 400 के
18:58 आसपास में कोई प्राइस होगा ठीक है देख लीजिए वहां घटता बढ़ता रहता है ठीक आगे एजेंसी अनुबंध किसे कहते हैं जब कोई निर्माता या कोई कंपनी जब अपना माल की बिक्री बढ़ाने के लिए जगह-जगह पर अपने एजेंटों को नियुक्त करती है और एजेंसी के का व्यापार देक के और अपनी बिक्री को बढ़ाने का प्रयास करती है तो ऐसे अनुबंधों को हम एजेंसी अनुबंध कहते हैं जैसे कोका कोला है ठीक है थम्सअप है ठीक है और ये दुनिया भर की जो एजेंसी है जैसे रो की एजेंसी है सब निर्माता हैं जो ग्राहकों के पास तक अपनी सुविधा पहुंचाने के लिए एक एजेंसी के रूप में एक बिजनेस ओपन करके करने के रूप में अपनी सुविधाओं को पहुंचाते हैं ऐसे अनुबंधों को हम क्या कहते हैं एजेंसी अनुबंध कहते हैं आगे है वस्तु विक्रय
19:45 अनुबंध ये वस्तु विक्रय अनुबंध हमारा आगे भी आप लोगों के लिए मिलेगा वस्तु विक्रय अनुबंध हमारा यह कहता है कि किसी भी वस्तु को बेचते समय कौन-कौन सी बातों का पूर्ण रूप से ध्यान रखना चाहिए क्रेता को भी और विक्रेता को भी ऐसे अनुबंधों को हम वस्तु विक्रय अनुबंध कहते हैं ये वेरी वेरी वेरी मोस्ट इंपॉर्टेंट है और यह आगे हम लोग इसके बारे में पढ़ेंगे पूरा चैप्टर है ठीक है तो अब यहां पर बेटा जितने भी अनुबंध थे सबके बारे में हमने बताया और इनमें से जो सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट अनुबंध है ये तीन चार अनुबंध है जो अक्सर पूछ लिए जाते हैं वैद अनुबंध जिस पर सारे नियम कायदे कानून लागू हो रहे हैं व्यर्थ अनुबंध जिसमें कोई नियम लागू ही ना हो कोई बात सिर्फ पते की पता ही ना हो जैसे एक्सवा से कहता है कि
20:30 तू अगर इस नदी को तैर करके अगर पार कर जाएगा ना तो मैं तेरे लिए ₹ लाख दूंगा उसे पता है डूब के मर जाएगा तो ऐसे अनुबंधों पे कोई नियम कायदा कानून लागू होता ही नहीं है ठीक है तो इस तरीके के अनुबंध हमारे किसमें आते हैं व्यर्थ आते हैं व्यर्थ नीय अनुबंध में क्या होता है इसमें अनुबंध तो होता है लेकिन एक पक्ष ऐसा होता है जिसके लिए धोखाधड़ी जैसा लगता है तो वो चाहे तो अपनी उस अनुबंध को स्वीकार भी कर सकता है और रिजेक्ट भी कर सकता है ये दोनों उसकी इच्छा पर निर्भर होते हैं ऐसे अनुबंध को हम व्यर्थ नीय कहते हैं और ये जल्दी व्यर्थ व्यर्थ नहीं है सबसे ज्यादा आपको कंफ्यूज करते होंगे लेकिन अब नहीं कर रहे होंगे व्यर्थ कहते नहीं क्या यार व्यर्थ की बातें कर रहे हो वो व्यर्थ है व्यर्थ निय का मतलब व्यर्थ है नहीं लेकिन आप चाहो तो व्यर्थ निय हो जाएगा संयोग जिसमें कोई घटना संयोग बस घटे
21:19 अचानक घटे ठीक गर्भित जिसमें घटना तो घटेगी लेकिन क्या घटेगी निश्चित नहीं होती है ठीक है ये ज्यादातर इंपॉर्टेंट है अब वैन अनुबंध के लक्षणों की या विशेषताएं ये वेरी वेरी मोस्ट इंपोर्टेंट है क्योंकि पहले नंबर पे है और यही लॉन्ग क्वेश्चन में सबसे ज्यादा आता है वेरी वेरी मोस्ट आईएम पी और ये वैद अनुबंध का मतलब है कि सीधे ये देख रहे अदालत का हथौड़ा जो सब कुछ कानून के अनुसार हो ठीक है ये हैमर इस बात का प्रतीक है कि नियमों का कायदों का कानूनों का पूर्ण रूप से पालन हो रहा है तो इसकी जो लक्षण या विशेषताएं करके एग्जाम में आ जाता है तो पहला है राज नियम द्वारा मान्यता मान्यता का मतलब होता है स्वीकार करना यानी इसमें जो वैद अनुबंध है इसमें केवल उन्हीं लेनदेन को उन्हीं बातों को 100% सहमति दी जाती है जिससे दोनों
22:04 पक्षों का हित पूरा हो रहा हो जैसे हम यहां पर पढ़ा रहे हैं हम भले ही आपको कुछ ना दें ठीक है ये पेन ना दें मोबाइल ना दें पेन ना दें लेकिन कम से कम एक नॉलेज तो आपको मिल रहा है उसके बदले में आपने जो भी पेमेंट किया है तो दोनों ओर से क्या है वैलिड है अब पता चल रहा है कि कोई व्यक्ति ऐसा है जो आपको दे कुछ नहीं रहा है लेकिन उसके बावजूद भी अगर वो अनुबंध करता है हैं और उसके बदले में कोई धनराशि भी तय कर लेता है ठीक है तो ऐसे अनुबंधों को हम क्या कहते हैं अ मतलब व्यर्थ अनुबंध कहते हैं जैसे हमने एग्जांपल के रूप में जो बताए ठीक है जान को जोखिम में डालने वाले अनुबंध ठीक आप जो प्राकृतिक घटनाएं हैं उनके वास्तविक रूप से घटने का पूरा पता है इसके बावजूद भी किए जाने वाला अनुबंध यानी धोखाधड़ी वाले अनुबंधों को व्यर्थ अनुबंध कहते हैं आगे योग पक्षों का होना ये भी याद
22:53 रखिएगा कि दोनों पक्ष जो है वो कैसे होने चाहिए योग होने चाहिए ठीक है योग का मतलब है कि दोनों पक्षों के बीच में जो समझौता हो रहा है उसकी दोनों पक्षों को समझ होनी चाहिए ठीक है कि कई पागल शराबी दिवालिया है कोड़ी है प्रदा नशीन स्त्री है ऐसे लोगों के साथ में जो अनुबंध है वो वैद नहीं होते हैं वो अब मतलब अनुबंध है उनको वैलिड नहीं कराया जा सकता है तो इसमें राज नियम द्वारा मान्यता पहला लक्षण है दूसरा दोनों पक्षों का योग्य होना नंबर तीन है एक से अधिक पक्षों का होना यानी ै अनुबंध के लिए जरूरी है कि एक से अधिक पक्ष हो दो भी हो सकते हैं तीन भी हो सकते हैं 30 भी हो सकते हैं यानी कहने का मतलब है कि एक से अधिक पक्ष होंगे अनुबंध की स्पष्टता स्पष्टता इस बात के
23:39 लिए कहते हैं कि जो लेनदेन तय हो रहा है जो लिखा जा रहा है वो सब स्पष्ट होना चाहिए ठीक है ये नहीं पता होना चाहिए कि बोले एक एक्स को हम एक जानवर बेच रहे हैं और गाय की जगह पर उसको ऊंट का कान पकड़ा दे ठीक है तो ये नहीं होनी चाहिए अनुबंध हमारा इस बात को कहता है कि जो कुछ भी लेनदेन है वो स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए ठहराव का होना बहुत देर पहले हमने एक चीज बताई थी कि बेटा पहले नंबर पर होता है प्रस्ताव कहते हैं प्रपोजल आया या प्रपोज्ड किया सामने वाले की मिली स्वीकृति दोनों से मिलकर के दोनों बातें एक पर ठहर गए ये चीज कहलाई क्या ठहराव और ठहराव के बाद में ही क्या बनता है अनुबंध बनता है ठीक है और ठहराव भी कैसा होना चाहिए वैधानिक होना चाहिए ये बहुत अच्छे हेडिंग्स है कि आपको पूरे
24:28 इसके बाद में ठहराव का वैधानिक होने के साथ-साथ दोनों पक्षों की इच्छा एक समान होना अब यहां पर ठहराव का वैधानिक होना वैधानिक होने का मतलब है कि जो कानूनी प्रक्रियाएं हैं वो एकदम दोनों के समझ में पूर्ण रूप से आनी चाहिए और उसके साथ में सबकी इच्छा एक जैसी होनी चाहिए तभी जाकर के ये निकल कर के आएगा जो कि वैद अनुबंध कहलाएगा वैद प्रतिफल का होना वैद प्रतिफल होने का मतलब है जायज चीज होना जायज जायज कह रहे जैसे कहते हैं कि भैया आप जो है ₹ लाख दो एक कार देंगे पता नहीं प्लास्टिक की देंगे या लोहे की देंगे चलेगी भी नहीं भी चलेगी सही देंगे खराब देंगे कैसी देंगे तो यह सब चीजें धोखाधड़ी नहीं होनी चाहिए पता चला कि कहीं पर विज्ञापन देखा और उसपे
25:13 एक कार का आ रहा है चित्र उसको ऑनलाइन परचेज कर लिया पता चला कि अ ओरिजिनल की जगह पे और उन्होंने कार तो भेजी लेकिन पता चला प्लास्टिक की भेज दी तो ये इस तरीके से वैद प्रतिफल नहीं होना ठीक है और एक चीज याद करना बिना प्रतिफल मिल के किए गए अनुबंध हमेशा अवैध होते हैं ठीक है व्यर्थ अनुबंध होते हैं व्यर्थ का मतलब बेकार के होते हैं ओके बिना प्रतिफल का प्रतिफल किसे कहते हैं किसी भी काम को करने के बदले जो कुछ भी मिलता है वो हमारा क्या कहलाता है प्रतिफल कहलाता है जैसे हम यहां से ऑनलाइन क्लासेस दे रहे हैं उसके बदले फीस ले रहे हैं तो वो हमारा प्रतिफल है कोई व्यक्ति मंदिर है मस्जिद है गुरुद्वारा है गिरजा घर है उसमें झाड़ू लगाता है उसको मानसिक संतुष्टि मिलती है व उसका प्रतिफल है यानी किसी भी काम को करने के बदले हमें जो कुछ भी मिलता है वो हमारा क्या कहला है प्रतिफल कहलाता है आगे
26:00 पक्षकारों में अनुबंध करने की क्षमता यह बहुत इंपॉर्टेंट है यह होना जरूरी है यानी जो पक्षकार हैं वो ऐसे होने चाहिए जिनमें पूरी पूरी समझ हो वैधानिक उद्देश्य कोई लेनदेन कर रहे हैं तो उसके पीछे जो उद्देश्य है वो कैसा होना चाहिए वैधानिक होना चाहिए यानी कानून से मान्यता मिलनी चाहिए ये नहीं है कि चलो दो लोगों में अनुबंध हो गया कि चलो कहीं पर भी चोरी करते हैं और तू भी चोरी करेगा हम भी चोरी करेंगे दोनों लोग मिलकर के चोरी करेंगे तो यह कानून के द्वारा कैसा है जुर्म है तो ऐसे काम नहीं किए जाते हैं तो ठीक इसी प्रकार से जो अनुबंध हो वो ऐसा हो कि जो वैधानिक उद्देश्य की पूर्ति करता हो स्पष्ट रूप से व्यर्थ घोषित ठहराव ना होना स्पष्ट रूप से व्यर्थ घोषित ठहराव वो ठहराव होते हैं जिनमें कोई प्रतिफल होता
26:46 ही नहीं है जान को जोखिम में डालने वाले ठहराव ठीक है और जिनमें कोई प्रतिफल ना हो ऐसे ठहराव ये सब व्यर्थ घोषित वाले ठहराव होते हैं जैसे राम श्याम से कहता है कि तू अगर बिजली के तारों को गीले कपड़े से अगर साफ करता है तो मैं तेरे लिए 00 दूंगा ये सब व्यर्थ घोषित ठहरा ह कोई व्यक्ति कहता है तू नदीय पार करके निकल जाएगा तो मैं तुझे 000 दूंगा ठीक है ये वर्त के ठहरा है एक्स बाई से कहता है कि तुम सी के लिए माल मत बेचना ठीक ये व्यर्थ का ठहराव है राम राम श्याम से कहता है तू मीरा से शादी मत करना ये व्यर्थ का ठहराव है तो ये इस तरीके के जो ठहराव है वो कैसे होते हैं व्यर्थ घोषित ठहराव होते हैं ठहराव का लिखित होना वैध ठहराव के लिए जरूरी है कि ठहराव कैसा होना चाहिए लिखित होना चाहिए ठीक है और लिखित होने के साथ-साथ में
27:33 प्रमाणित व रजिस्टर्ड होनी चाहिए इतनी हेडिंग्स हम दे रहे हैं आपको कहीं पर भी मिल नहीं सकती अगर कहीं मिल जाए तो शिकायत आप हमसे करना ओके और यह जो प्रमाण प्रमाणित होना और रजिस्टर्ड होने के लिए हम बता रहे थे कि कानून के लिए वकीलों को नियुक्त किया गया है ठीक है ठहराव की निश्चित होना निश्चित का मतलब है कि जो एग्रीमेंट हो रहा है उसमें कोई ना कोई चीज वास्तविक रूप से होनी चाहिए ये नहीं है हवाहवाई में तुमने कोई एग्रीमेंट कर लिया जैसे एक्स कहता है भाई से चल एक एग्रीमेंट करते हैं कि तू कार हमसे खरीद रहा है और भाई कहता है हां हम खरीद रहे हैं चलो बैंक से लोन करा लेते हैं और पता चला कि बैंक ने लोन कर दिया उस कार के पेपरों पे कार है ही नहीं तो इस तरीके का ऐसा नहीं होता है ठहराव निश्चित होता है किसी निश्चित के लिए और ठहराव निष्पादन की संभावना होना यानी ये चीज निष्पादन का मतलब होता है
28:19 पूरा होना ठहराव हमेशा वही बैद कहलाएगा जिसमें लगभग पूरे होने की संभावना है जैसे कोई टीचर कहता है कि हम तुम्हें पढ़ लाएंगे और तुम्हारे 95 पर अंक आएंगे इस बी इस बात का हम एग्रीमेंट करते हैं कताई एकदम क्या है निष्पादन की संभावना है ही नहीं क्यों क्योंकि मार्किंग किस पे आईग लिखे हुए पे कितनी अच्छी कॉपी बच्चे ने लिखी है कैसी हेडिंग्स डाली है लिखने का तरीका कैसा है राइटिंग का तरीका कैसा है लॉन्ग क्वेश्चन कैसे लिखे ठीक है इन सब चीजों पे उसके 95 से ज्यादा भी आ सकते हैं और वो 50 से भी कम आ सकते हैं तो यह कोई संभावना नहीं है कि कितने नंबर आएंगे ये टीचर के पढ़ाने पर डिपेंड नहीं करता है ये बल्कि बच्चे के लिखने पर डिपेंड करता है लेकिन टीचर और बच्चे के बीच में अगर इस तरीके का अनुबंध है तो वो समझ लो कि
29:04 निष्पादन की संभावना वाला अनुबंध है ही नहीं क्यों क्योंकि जो जिसके हाथ में है वही काम कर सकता है हम केवल आपको पढ़ा सकते हैं हम आपको समझा सकते हैं हम कहते नहीं हम आपको टॉपर बना देंगे तो ये हम कर सकते हैं क्यों क्योंकि जितनी आप मेहनत करोगे उतना ही आप आगे बढ़ते हुए जाओगे क्योंकि एक टीचर के पढ़ाने में एक क्लास में 80 बच्चे हैं इन 80 बच्चों में से चार बच्चों के नंबर 90 पर आ गए छ बच्चों के जो नंबर है 85 पर आ गए और 30 बच्चों के जो नंबर है 70 पर आ गए और बाकी जो बच्चों के हैं नंबर वो 60 पर आ गए कुछ के बच्चों के नंबर मात्र 43 पर आ गए तो यहां पर इनपुट तो एक जैसा दिया गया आउटपुट एक जैसा क्यों नहीं निकला क्योंकि किसने कितने रीता से
29:52 लिया कितनी किसने कैपेसिटी से लिया इनपुट तो समान दिया लेकिन आउटपुट समान ना निकलने का कारण है कि ठहराव निष्पादन की संभावना किस पर निर्भर करती है सामने वाले पर निर्भर करती है चलो उम्मीद है कि 15 हेडिंग किसी बच्चे के पास नहीं होंगी जितनी आपके पास पहुंच चुकी है और पहला लॉन्ग क्वेश्चन आएगा जरूर एग्जाम में ठीक है इनके बारे में भी आपको कुछ लिखना है और इतना अच्छे से लिखना है कि कॉपी चेक करने वाला चक्कर खाके गिर पड़े कि हां वास्तव में बच्चे ने बहुत कुछ लिखा हुआ है क्योंकि अगर आप जितना अच्छा लिखोगे आपकी कॉपी ही वहां पर प्रेजेंट कराती है कि आपके अंदर नॉलेज कितना है ठीक है कितना आप आगे बढ़ने के लिए तैयार हो ठीक और एक चीज याद रखना कि संघर्ष के बिना कोई महान नहीं बनता संघर्ष के बिना कोई महान नहीं बनता
30:38 और य तो बिना चोट खाए पत्थर भी भगवान नहीं बनता तो किसी भी सफलता के स्तर पर अगर पहुंचना है रुको बिल्कुल मत संघर्ष करते रहिए जीवन जरूर सफल होगा और एक चीज संजीव सर की याद रखना कि हमेशा जिन्होंने आदत बना ली मेहनत करने की यानी मेहनत जिसकी आदत बन जाए मेहनत करना जिसकी आदत बन जाए तो मुकद्दर कामयाबी ही बनता है समझ लो कि कामयाब अगर होना है तो मेहनत तो करनी होगी बिना मेहनत के दुनिया में कुछ नहीं मिलता हम भी आपको पढ़ा रहे हैं तो मेहनत से ही पढ़ा रहे हैं तो इसकी जो विशेषताएं हैं 15 मैंने बताई है और ये आएगा जरूर एग्जाम में रट के जाना राज नियम द्वारा मान्यता का मतलब सरकार कानून के द्वारा मान्यता मिलना है यहां पर यानी जिसको कानून वैलिड करे ठीक है जैसे एक्स कहता है बा से एक्स है
31:26 और बा है एक्स कहता है बाई से तू मुझसे शादी कर ले और बाई है उसकी ऐज 16 वर्ष या 17 वर्ष यानी 18 वर्ष से कम है राज नियम मान्यता ही नहीं देता इनमें किसी प्रकार का अनुबंध हो ये चीज यहां से एग्जांपल के दर फटाफट कत फिट हो जाएगी क्योंकि यह सबसे सरल उदाहरण है यानी राज नियम द्वारा मान्यता का मतलब जो नियम में बातें कही गई है जो नियम बनाए गए हैं उनकी मान्यता मिलनी चाहिए यानी इंडिया के अंदर 18 वर्ष से कम की कोई भी लड़की है उसके लिए कानून शादी करने की सलाह नहीं देता है कोर्ट मैरिज की सलाह नहीं देता है वैलिड मैरिज की सलाह नहीं देता है तो इस तरीके से ऐसे अनुबंध लागू ही नहीं होंगे तो राज नियम का मतलब अब अच्छे से समझ गए होंगे योग्य
32:13 पक्षों का होना अब दूसरे यह मान्यता क्यों नहीं देता है क्योंकि लड़की अगर 18 वर्ष से कम की है तो इसका मतलब है वो नासमझ है उसमें समझने की क्षमता है नहीं ये मान कर के जो दूसरा पक्ष है उसे अयोग्य मान लिया जाता है एक से अधिक पक्ष का होना अब भैया देखो यह अनुबंध जो होता है एक पक्ष में तो नहीं होता कम से कम दो पक्षों में होता है अनुबंध की स्पष्टता का मतलब सब बातों को स्पष्ट कर देने से होता है ठहराव का हो मतलब दोनों पक्षों के बीच में प्रस्ताव फिर स्वीकृति फिर दोनों की सहमति और उसका फिर प्रमाणन होना ये होता है दोनों की इच्छा एक समान ठीक है दोनों की जो इच्छा है दोनों पक्षों की वो कैसी होनी चाहिए एक समान अब बिल्कुल सादी मत पहुंच जाना पता चले शादी पहुंच जाओ ठीक है यहां बिजनेस के लेनदेन में रहना कहीं आगे बढ़ जाओ वैद प्रति ल का होना का मतलब है कि जो उसके
33:00 बदले मिलने वाला परिणाम हो वो वैध होना चाहिए अवैध नहीं होना चाहिए वैध का मतलब है कि मान लो कि कोई एक व्यक्ति है विक्रेता है वो किसी भी वस्तु को बेच रहा है मान लो जैसे किसी एक मोबाइल को बेच रहा है और वो 0000 में बेच रहा है ठीक है अब पता चला कि वो वस्तु वो खरीद करके लाया था वो 9000 की खरीद करके लाया और तुम उसको ताकत दिखा रहे कह रहे कि अबे तू जानता नहीं तेरी दुकान बंद करा दूंगा 8500 में तू इसे हमें बेच तो यह क्या है वैध प्रतिफल नहीं है तुम प्रतिफल तो दे रहे हो के लिए लेकिन उसकी लागत भी निकल रही नहीं निकल रही तुम ऐसा दे रहे तो ये चीज वैध प्रतिफल नहीं कहलाए गी तो वैध प्रतिफल का मतलब है उचित पारिश्रमिक जैसे हम आपको क्लासेस दे रहे हैं ठीक है और बिजनेस लॉ की जो क्लासेस हैं हमारे यहां वैसे 899 में मिलती हैं लेकिन ऐप के थ्रू अभी हमने
33:45 जो है डिस्काउंट कर दिया तो वहां पर मात्र ऐसे 350 400 के आसपास में भी हो सकता है प्राइस वहां देखने होंगे ₹ 20 आगे पीछे होंगे तो ये वैध प्रतिफल है हमारे लिए कि हम पूरा कोर्स करा रहे हैं और इतने में बच्चों को पीडीएफ नोट्स प्रोवाइड करा कर के और उनकी अच्छे से तैयारी करा रहे हैं पक्षकारों में अनुबंध करने की क्षमता अब क्षमता तभी होगी जब दोनों सही से समझदार हो ठीक है देखो पागल शराबी दिवालिया ठीक मानसिक बुंदी बाला या अवयस्क इनके साथ में कोई भी अगर तुमने अनुबंध कर लिया तुमने कोई एग्रीमेंट कर लिया तुम ही हारोगेट इसकी मान्यता कानून नहीं देता है वैधानिक उद्देश्य कोई भी लेनदेन के पीछे अगर आप अगर अनुबंध कर रहे हो तो उसके पीछे जो उद्देश होना चाहिए कानूनी होना चाहिए ठीक है और क्या है
34:31 अनुबंध स्पष्ट रूप से व्यर्थ घोषित ठहराव ना होना यानी कुछ ठहराव ऐसे होते हैं जो व्यर्थ घोषित होते हैं ठीक है वो ना होना जैसे जान को जोखिम में डालने वाले ठीक है आप प्राकृतिक घटनाओं वाले ठीक है वो से रिलेटेड है ठहराव को लिखित होना यानी वैद अनुबंध के लिए जरूरी है कि जो एग्रीमेंट हो वो कैसा हो लिखित हो ठहराव का प्रमाणित ब रजिस्टर्ड होना समझ गए वकील से रजिस्ट्रेशन कराना है रजिस्टर्ड कराना है ठहराव का निश्चित होना यानी दोनों निश्चिता होना दोनों का मतलब एक निश्चित होना चाहिए ठीक है उसी के बेस पर आप इसको करा सकते हो ठहराव निष्पादन की संभावना यानी वो बातें होनी चाहिए जिनसे पूर्ति हो सके अब बहुत आता है व्यर्थ अनुबंध जिसको हम अंग्रेजी में वाइड कां कांट्रैक्ट कहते हैं क्या होता है जब किसी अनुबंध में नियम अधिनियम लागू ही ना हो सके जो किसी के हित
35:18 में भी ना हो जिससे किसी पक्ष को धोखा मिल रहा हो ऐसे अनुबंध को हम व्यर्थ अनुबंध कहते हैं समझ गए एक सेकंड में इससे ज्यादा सरल तरीके से तुम्हें दुनिया में कोई नहीं बताएगा अब व्यर्थ नीय क्या है क्योंकि इन दोनों में बहुत कंफ्यूजन होता है प्यारे बच्चों बहुत ज्यादा होता है अ वह अनुबंध जिसमें एक पक्षकार पीड़ित होता है तथा दूसरा कर्तव्य पालन नहीं करना चाहता है इस प्रकार के ठहराव जो केवल एक या अधिक पक्षकारों की इच्छा पर ही परिवर्तनीय होता है दूसरे पक्षकार की इच्छा पर परिवर्तनीय ना हो सके व्यर्थ निय अनुबंध कहलाता है इसको एक एग्जांपल हम देते हैं व कॉलोनी काटने वाला ठीक है ये है ये ये ये ये एक कोई एक्स व्यक्ति है जो भैया यहां प्लाटिंग करके बेच रहे हैं और भाई से कहते हैं कि तुम जल्दी से हमारे लिए इस कॉलोनी
36:03 में हम तुम्हें 0000 वर्ग गज के हिसाब से हम तुम्हें एक प्लाट दे देंगे अच्छा सा और तुम ऐसा करो कि हमें ₹ लाख तुरंत हमारे पास जमा कर दो और एग्रीमेंट करा लो भाई कहता है दिखा दो कहां पर दोगे अरे बोले ये सब पूरा है इसमें कहीं पर भी दे देंगे अब बाद में बेचारे को इस कॉर्नर में ले जाक रख दिया अब बाई कहता है कि भाई यह बात तो तय नहीं हुई थी तो एक्स कहता है कि भाई तय तो यहीं हीं की हुई थी बा कहता है कि नहीं मैं तो यहां चाहिए गेट पर अब दोनों अगर तैयार हो जाते हैं तो तो यहां पर है अगर बाई तैयार नहीं होता यहां लेने के लिए तो वो अपनी इतनी ताकत रखता है कि अपना जो पैसा है वापस ले लेगा ठीक है तो ऐसे अनुबंध कौन से कहलाते हैं व्यर्थ निय क्यों वो कौन हो गया पीड़ित हो गया उसकी इच्छा है तो वो लेगा उसकी इच्छा नहीं है तो नहीं लेगा ठीक है ये हमारे एग्जांपल
36:49 इससे ज्यादा और इजी क्या बताएं अब दो प्रकार के अनुबंध है व्यर्थ और व्यर्थ निय दोनों में डिफरेंस तो जो भैया पीडीएफ नोट्स है उनमें ये चीज मिलेगी बहुत इजी मिलेगी और कम से कम नहीं तो 15 हेडिंग्स अंतरों की है उनसे बहुत अच्छा लिखा जाएगा और दोनों में जो अंतर है बहुत ही मोस्ट इंपॉर्टेंट है ये और बहुत इजी तरीके से दिया है व्यर्थ और व्यर्थ नहीं ठीक है इस तरीके से यहां पर देख लेंगे ठीक और इसके बाद में ये जो पहला चैप्टर है यहीं पर दी एंड होता है तो कैसा लगा ये क्लास जरूर हमें बताइएगा आप कमेंट्स के माध्यम से अब हम आपके कमेंट्स देखने को तैयार हैं ठीक है और आपने जो अभी क्लास देखा उम्मीद है कि खूब अच्छा लगा होगा और बहुत अच्छे तरीके से आप लोगों ने हमारा
37:36 साथ दिया तो सभी बच्चे जो लाइव में जुड़े रहे अब तक ओहो बहुत मैसेज तो काफी आ गए सभी बच्चों के लिए गुड इवनिंग ठीक है बेटा अगला क्लास लगा हुआ है और आप लोग बिजनेस लॉ को बहुत अच्छे तरीके से इसके इंपोर्टेंट क्वेश्चन भी हम आप लोगों के लिए दे देंगे ठीक है ऑलरेडी अपलोडेड हैं आप कोई भी टॉपिक सर्च करना है कॉमर्स वि संजीव सर करके सर्च कर लीजिए और एक चीज बताएं जिंदगी में दोबारा पढ़ने की उम्र नहीं आती है और अच्छा करने की भी समय बार-बार नहीं मिलता है तो इसकी जो तैयारी है बहुत अच्छे से इसी की नहीं करनी सारे सब्जेक्ट को किसी एक अच्छे टीचर का साथ जरूर ले लीजिए उससे कहीं ना कहीं आप जरूर सफल होंगे ओके और अगर कोई किसी प्रकार की अगर इंक्वायरी करनी हो तो ऑफिस का नंबर है
38:23 9719 11101 ठीक है यहां से हमसे आप जुड़ सकते हो ठीक है अब मिलते हैं हम नेक्स्ट क्लास में तब तक के लिए बाय बाय अगला क्लास लगा हुआ है