Lonar Lake - भारत की सबसे रहस्यमयी झील की कहानी | one of the most mysterious places in India?

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में स्थित रहस्यमयी लोनार झील के बारे में है। यह झील वैज्ञानिकों के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है, जिसके बारे में कई मान्यताएं हैं, जैसे कि इसका रंग बदलना और लाखों साल पुराना होना।

  • लोनार झील का निर्माण एक उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था।
  • नासा के वैज्ञानिकों ने इस झील को मंगल ग्रह पर पाई जाने वाली झीलों के समान बताया है।
  • झील के पानी का रंग बदलता रहता है, जिसका कारण खारापन और शैवाल को माना जाता है।

परिचय: लोनार झील का रहस्य

यह वीडियो भारत की एक रहस्यमयी झील, लोनार झील के बारे में है, जो महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में स्थित है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस झील पर रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन इसका रहस्य अभी भी अनसुलझा है। ऐसा कहा जाता है कि यह झील रंग बदलती है और लाखों साल पुरानी है।

लोनार झील का निर्माण और खोज

लोनार झील प्रकृति द्वारा बनाया गया एक रहस्य है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह झील एक उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण बनी थी। सबसे पहले यूरोपियन ब्रिटिश ऑफिसर एग्जाम अनुसार ने 1822 में इसकी खोज की थी। यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है, जिसका व्यास 1.2 किलोमीटर और गहराई 150 मीटर है।

मंगल ग्रह से संबंध और अन्य मान्यताएं

नासा के वैज्ञानिकों ने इस झील को मंगल ग्रह पर पाई जाने वाली झीलों के समान बताया है, क्योंकि इसके पानी का केमिकल नेचर वहां की चीजों के केमिकल नेचर से मेल खाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में इस तरह की सिर्फ तीन झीलें हैं, जिनमें लोनार झील के अलावा अमेरिका के कैलिफॉर्निया की मोन अछि तथा केन्या के मकान भी चीज है। 70 के दशक में क्वाइट थे कि यह चील ज्वालामुखी के मुख के कारण बनी होगी जो कि बाद में गलत साबित हुआ।

झील की प्राचीनता और पौराणिक कथाएं

हालिया शोध में पता चला है कि यह 570000 साल पुरानी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 570000 साल पहले 5 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से धरती पर एक उल्कापिंड गिरा था, जिसके कारण इस झील का निर्माण हुआ। लोनार झील का उल्लेख ऋग्वेद और स्कंद पुराण में भी मिलता है। यहां कई प्राचीन मंदिरों के अवशेष भी मिले हैं। पद्मपुराण और आईने अकबरी में भी इसका जिक्र है।

मंदिर और झील की विशेषताएं

झील के पास प्राचीन शिव मंदिर, भगवान विष्णु और सूर्य को समर्पित मंदिर हैं, जिनकी खजुराहो के मंदिरों से तुलना की जाती है। इन मंदिरों का निर्माण करीब एक हजार साल पहले यादव ने कराया था। दसवीं शताब्दी में पानी के तट पर मंदिर निर्माण झाल जिसमें 12 शिवलिंग स्थापित किए गए थे।

झील का पानी सूखना और रंग बदलना

स्थानीय लोगों का कहना है कि साल 2006 में झील का पानी सूख गया था, जिसके बाद उन्हें वहां मिनरल्स के छोटे-छोटे टुकड़े चमकते हुए देखे गए थे। इस झील के पास एक कौर पुआर मौजूद है, जिसके आधे हिस्से का पानी खारा है और आधे हिस्से का पानी मीठा है। कुछ साल पहले झील का रंग पहले लाल फिर गुलाबी हो गया था, जिसका कारण खारापन और शैवाल को माना जाता है।

भ्रमण और निष्कर्ष

अगर आपको दूसरे ग्रहों पर जाने का मौका नहीं मिल पाया, तो आप महाराष्ट्र के बुलढाना जनपद के डूंगर गांव में लोनार झील पर जाकर मंगल ग्रह पर पाई जाने वाली नकद व कर सकते हैं। यहां तक पहुंचना आसान है, क्योंकि इसके सबसे पास औरंगाबाद एयरपोर्ट है, जहां से इसकी दूरी 157 किलोमीटर है।

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Transcript

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0:00 [संगीत] हेलो दोस्तों पास जब भी प्रकृति से जुड़ी हुई होती है तो कहीं ना कहीं इंसान और उसका पूरा विज्ञान एक बार को अलग हट जाता है और ऐसा ही होता है भारत की इस रहस्मई चीर के साथ वैसे दुनिया में कई ऐसी चीजें मौजूद है जो अपने अंदर कई रहस्यों को दबाए बैठे हैं लेकिन महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में एक ऐसी चीज है जिस पर रिसर्च करने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक जुटे हैं नासा से लेकर दुनिया की तमाम एजेंसी इस कई सालों से स्थल पर सर्च कर रही है लेकिन इसका रहस्य अब भी लोगों के लिए अनसुलझी पहेली बना हुआ है जिसके बारे में कभी कहा जाता है कि यह रंग बदलती है तो कभी से लाखों साल पुराना बताया जाता है आखिर क्या है इस छील कर रहे इससे आज हम आपको इसी के बारे में बताएंगे दोस्तों इस चीज का नाम है लोनार झील यह झील प्रति

0:45 द्वारा बनाया एक ऐसा रहस्य है जो वैज्ञानिकों के लिए ऐसी कुछ बन चुकी है जो सुलझने का नाम नहीं ले रही वैज्ञानिकों की मानें तो यह छील एक उल्का पिंड के धरती से टकराने की वजह से बनी थी लेकिन सबसे हैरानी की बात तो यह है कि में का पेस्ट कहां गया इसका पता अब तक नहीं चल पाया लोणार झील की खोज सबसे पहले यूरोपियन ब्रिटिश ऑफिसर एग्जाम अनुसार 1822 में की थी लेना चाहिए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है इस झील का टाइम्स आफ 1.2 किलोमीटर है और इसकी गहराई के बारे में कहा जाता है कि 150 मीटर गहरी है अब इस झील का मंगल ग्रह से करेक्शन भी आपको समझाते हैं नासा के वैज्ञानिकों ने कुछ साल पहले इस चीज को विशाल चट्टानों से बनी झील बताया था साथ ही यह भी कहा था कि

1:32 इस तरह की जी सिर्फ मंगल की सतह पर पाई जाती है क्योंकि इसके पानी का केमिकल नेचर पर वहां की चीजों के केमिकल नीचे से मेल खाता है वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भिक्षु की अनोखी चीज है और दुनिया में इस तरह की सिर्फ तीन सीटें मिली हैं जिसमें लोनार झील के अलावा अमेरिका के कैलिफॉर्निया की मोन अछि तथा केन्या के मकान भी चीज है इन तीनों जिलों में पानी खारा है और वैज्ञानिक मानते हैं यह तीनों बडे उल्कापिंड के गिरने से बने थे 70 के दशक में क्वाइट थे कि यह चील ज्वालामुखी के मुख के कारण बनी होगी जो कि बाद में गलत साबित हुआ कि यह ज्वालामुखी से 150 मीटर गहरी होती रिसर्च से पता चला है कि चीन का पिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण बनी 2010 से पहले माना जाता था कि चीन 52

2:18 हजार साल पुरानी है लेकिन हालिया शोध में पता चला है यह 570000 साल पुरानी आपको जानकर हैरानी होगी कि लोनार झील समतल धरती को आधा किलो मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर बनी इस फिल्म को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि 570000 साल पहले 5 किलो मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से धरती पर गिरा था जिस कारण यहां का अड्डा बना और इस चीज का निर्माण हुआ कि पृथ्वी से टकराने के बाद उन हिस्सों में टूट चुका था और उसने अनार के अलावा और तो जगह पर की पूरी तरह से पानी इसके अलावा अगर मैं करेंगे तो इस चीज को लेकर दूसरी कहानी है हुआ था जब ज्वालामुखी फूटा था कहा जाता है कि चीन का उल्लेख ऋग्वेद और स्कंद पुराण में भी

3:05 मिलता है और यहां कई प्राचीन मंदिरों के अवशेष भी मिले पद्मपुराण और आईने अकबरी में भी इसका जिक्र कहते हैं कि अकबर का पानी डाल सकता था इसके अलावा को लेकर तथा यह लोग राक्षस था जिसके बाद भगवान विष्णु ने किया था उसी दौरान भगवान के पांव के अंगूठे पर लग गया था जिसे हटाने के लिए मिट्टी के अंदर और यह कह राजा बन गई प्राचीन शिव मंदिर में भगवान विष्णु सूर्य को समर्पित है जिसकी खजुराहो के मंदिरों इसके अलावा यह प्राचीन मंदिर मंदिर मंदिर

3:51 का निर्माण करीब एक हजार साल पहले यादव ने कराया था दसवीं शताब्दी में पानी के तट पर मंदिर निर्माण झाल जिसमें 12 शिवलिंग स्थापित किए गए थे आपको जानकर हैरानी होगी कि चीन के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इस साल 2006 में चीन का पानी सूख गया था जिसके बाद उन्हें वह मिनरल्स के छोटे-छोटे टुकड़े चमकते हुए देखे गए थे हालांकि बाद में फिर इस इलाके में बारिश हो गई और चीज फिर से पानी से भर गई इस झील के पास है कौर पुआर मौजूद है जिसके आधे हिस्से का पानी खारा है और इससे का पानी मीठा है प्रकृति का इस तरह का अनोखा रहे से दुनिया में शायद ही कहीं हो जहां एक हिसाब से निकलने वाला पानी ज्यादा मीठा और आधा खराब होता है पुणे में भी ढेर सारा पानी की विशेषता के कारण आसपास के लोग उसे

4:38 सास बहू का कूड़ा भी कहते हैं इसके अलावा अगर बात की जाए चीन के एक और अनोखापन की तो यह अपना रंग बदल देती है साल पहले चीन का रंग पहले लाल फिर गुलाबी हो गया था जिससे कि वैज्ञानिक और सब्सक्राइब गए थे इसके बाद जब इस मामले की जांच की गई तो लोनार झील संरक्षण एवं विकास समिति के मेंबर ने कहा कि झील का पानी खारा है और पीएस लेवल 10.5 है उनके अनुसार पानी की सफाई से एक मीटर नीचे ऑक्सीजन नहीं है जबकि चीन में सवाल है और गर्मी की वजह से इसका पानी कम हो जाता है जिससे इसके खारेपन में और बढ़ोतरी होती है इस प्रकार पानी की पिंक होने के पीछे पानी का खारापन तो शहवाज जिम्मेदार हो सकते हैं ऑस्ट्रेलिया में भी इसी तरह की एक गुलाबी रंग की चीज है जिसका रंग सवालों के कारण ही पिंक रहता है इसके अलावा इसलिए के

5:24 बदलाव का कारण मौसम भी बना है जिंदगी में कभी आपको दूसरे ग्रहों पर जाने का मौका नहीं मिल पाया अगर आप महाराष्ट्र के बुलढाना जनपद के डूंगर गांव में जरूर मंगल ग्रह पर पाई जाने वाली नकद व कर सकते हैं और साथ उनका पिंडों के पृथ्वी पर पडने वाले प्रभावों को भी देख सकते हैं यहां आपको इस दुनिया की ताकत का अहसास होगा अगर आप भी इस लेकर जाना चाहते हैं तो लोनार झील तक पहुंचना काफी आसान है इसके सबसे पास औरंगाबाद एयरपोर्ट है जहां से लेकर दूरी 157 किलोमीटर है आप एयरपोर्ट से यहां कैंप के जरिए पहुंच सकते हैं वहीं सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन जालना में है जो यहां से 90 किलोमीटर की दूरी पर कि आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लोनार झील के बहुत से लोग सदियों से रोमांचित होते रहे हैं और आज भी जो चीज देखने आने वाला हर शब रोमांचित हुए बिना नहीं लौटता तो दोस्तों

6:12 आपको यह कैसी लगी और क्या आप इस जगह घूमना चाहेंगे अपनी राय हमें कमेंट करके बता सकते हैं अगर आज की वीडियो पसंद आई हो तो इसे लाइक करने के साथ-साथ अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर जरूर करें अगर आप यह वीडियो यूट्यूब पर देख रहे हैं तो चैनल को subscribe करके बेल आइकॉन दबाएं और घर फेसबुक पर आप यह वीडियो देख रहें हैं तो फेसबुक पेज को जल्दी से लाइक करें फिलहाल के लिए इतना ही अभी के लिए हमें इजाजत आपसे मुलाकात होगी अगली वीडियो में शुक्रिया है

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