chapter 6 लोकतान्त्रिक व्यवस्था का संकट Class 12 Political science book 2 / 2024-25

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो 12वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की दूसरी पुस्तक के अध्याय 6, "लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट" का विस्तृत विवरण है। इसमें 1967 के चुनावों के बाद की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति, कांग्रेस पार्टी में विभाजन, गरीबी हटाओ का नारा, बांग्लादेश संकट, नक्सलवादी आंदोलन, गुजरात और बिहार में छात्र आंदोलन, इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला, आपातकाल की घोषणा और उसके परिणाम, शाह जांच आयोग, आपातकाल के सबक और 1977 के चुनावों के परिणामों पर चर्चा की गई है।

  • 1967 के बाद कांग्रेस की स्थिति और 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी की जीत।
  • आर्थिक संकट और नक्सलवादी आंदोलन का उदय।
  • गुजरात और बिहार में छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण की भूमिका।
  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला और आपातकाल की घोषणा।
  • आपातकाल के परिणाम, शाह जांच आयोग और आपातकाल से सबक।
  • 1977 के चुनाव और जनता पार्टी की सरकार।

परिचय

वीडियो में 12वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की दूसरी पुस्तक के अध्याय 6, "लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट" पर चर्चा की गई है। यह अध्याय आपातकाल और उससे जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर केंद्रित है। वीडियो में सभी महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाएगा और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

1967 के चुनावों में कांग्रेस को नुकसान हुआ, लेकिन केंद्र में सरकार बचाने में सफल रही। 1971 के चुनावों में इंदिरा गांधी की कांग्रेस (कांग्रेस आर) भारी बहुमत से जीती और इंदिरा गांधी एक मजबूत नेता के रूप में उभरीं। इस दौरान, राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बढ़ गए और न्यायपालिका और सरकार के बीच टकराव देखने को मिला, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की कई योजनाओं को संविधान के खिलाफ माना।

आर्थिक समस्याएँ और आंदोलन

1971 के चुनावों में इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया, लेकिन 1971-72 के बाद भी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बांग्लादेश संकट के कारण 80 लाख शरणार्थी भारत आ गए, जिससे अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ा। पाकिस्तान के साथ युद्ध के बाद अमेरिका ने भी भारत की मदद बंद कर दी। 1973 में महंगाई 23% और 1974 में 30% तक बढ़ गई। बेरोजगारी बढ़ गई, सरकारी कर्मचारियों के वेतन रोक दिए गए और सूखे के कारण कृषि उत्पादन में गिरावट आई। इसी दौरान, वामपंथी समूहों ने किसानों और मजदूरों को भड़काकर नक्सलवादी आंदोलन को बढ़ावा दिया।

गुजरात और बिहार में छात्र आंदोलन

1974 में गुजरात में छात्रों ने बढ़ती कीमतों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया, जिसमें बाद में राजनीतिक पार्टियाँ भी शामिल हो गईं। मोरारजी देसाई ने दोबारा चुनाव कराने की मांग की और आमरण अनशन की धमकी दी, जिसके बाद 1975 में चुनाव हुए और कांग्रेस हार गई। इसी तरह, बिहार में भी छात्रों ने बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया और जयप्रकाश नारायण (जेपी) को नेतृत्व के लिए आमंत्रित किया। जेपी ने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने और इसे देशव्यापी बनाने की शर्त रखी। जेपी नारायण ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया और रेलवे कर्मचारियों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला

12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने फैसला सुनाया कि इंदिरा गांधी का लोकसभा निर्वाचन अवैधानिक है, क्योंकि उन्होंने चुनाव प्रचार में सरकारी कर्मचारियों की सेवाओं का इस्तेमाल किया था। इस फैसले के अनुसार, इंदिरा गांधी को सांसद पद छोड़ना पड़ता और वे प्रधानमंत्री भी नहीं रह पातीं। 24 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर आंशिक रोक लगाते हुए कहा कि जब तक अपील पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक इंदिरा गांधी सांसद रहेंगी, लेकिन संसद के काम में भाग नहीं ले पाएंगी।

आपातकाल की घोषणा

जयप्रकाश नारायण और अन्य विपक्षी दलों ने इंदिरा गांधी पर इस्तीफे का दबाव बनाया। 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन किया गया। जेपी नारायण ने पुलिस और सेना से भी सरकार की बातें न मानने की अपील की। इन घटनाओं को देखते हुए सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी। 25 जून 1975 की रात को प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से आपातकाल लागू करने को कहा, जिसके बाद अनुच्छेद 352 के तहत पूरे देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई। आधी रात के बाद अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई और विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

आपातकाल के परिणाम

आपातकाल के दौरान विरोध प्रदर्शन रुक गए, हड़तालों पर रोक लगा दी गई और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई। निवारक नजरबंदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया और कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। आरएसएस और जमात इस्लामी जैसे संगठनों को बैन कर दिया गया और मौलिक अधिकार निष्प्रभावी हो गए। इंडियन एक्सप्रेस और स्टेट्समैन जैसे अखबारों ने प्रेस सेंसरशिप का विरोध किया और कई लेखकों ने अपने पुरस्कार वापस कर दिए।

आपातकाल के समय विवाद

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को बदलने के लिए संविधान में संशोधन किया गया, जिससे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पद को अदालत में चुनौती देना मुश्किल हो गया। आपातकाल के दौरान संविधान का 42वां संशोधन हुआ, जिसमें कई विवादित बदलाव किए गए और विधायिका के कार्यकाल को 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दिया गया।

शाह जांच आयोग

जनता पार्टी की सरकार ने मई 1977 में शाह जांच आयोग का गठन किया, ताकि इमरजेंसी के दौरान हुई गलतियों की जांच की जा सके। जेसी शाह, जो सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश थे, को इस आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। आयोग ने सबूत इकट्ठा किए, गवाहों के बयान दर्ज किए और इंदिरा गांधी से जवाब मांगने का प्रयास किया। आयोग ने पाया कि सत्ता का दुरुपयोग किया गया, लोगों के साथ ज्यादतियां की गईं, जबरन नसबंदी कराई गई, झुग्गियां उजाड़ दी गईं और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई। संजय गांधी ने सरकार के काम में दखल अंदाजी की और निवारक नजरबंदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।

आपातकाल के सबक

आपातकाल से यह सबक मिला कि भारत से लोकतंत्र को खत्म करना मुश्किल है। अब अंदरूनी गड़बड़ी बताकर आपातकाल नहीं लगाया जा सकता, केवल सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में ही इसे लगाया जा सकता है। आपातकाल की घोषणा से पहले मंत्री परिषद से सलाह लेना जरूरी है और नागरिक अपने अधिकारों को लेकर ज्यादा जागरूक हो गए हैं।

1977 के चुनाव और जनता पार्टी की सरकार

जनवरी 1977 में चुनाव कराने का फैसला हुआ और सभी नेताओं को जेल से बाहर कर दिया गया। विपक्षी पार्टियों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई और जयप्रकाश नारायण को नेतृत्व सौंपा। कांग्रेस के कुछ नेता भी जनता पार्टी में शामिल हो गए। जनता पार्टी ने चुनाव प्रचार में इमरजेंसी के दौरान हुई ज्यादतियों को जनता के सामने रखा, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस हार गई। पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार आई। लोकसभा में कांग्रेस को मात्र 154 सीटें मिलीं, जबकि जनता पार्टी को 330 सीटें मिलीं। इंदिरा गांधी भी रायबरेली से चुनाव हार गईं।

जनता पार्टी सरकार की विफलता

1977 में जनता पार्टी चुनाव तो जीत गई, लेकिन उसमें तालमेल नहीं था। मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम के बीच प्रधानमंत्री पद के लिए प्रतिस्पर्धा हुई, जिसमें अंततः मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। लेकिन पार्टी में खींचतान बनी रही और 18 महीने में सरकार गिर गई। कांग्रेस ने चौधरी चरण सिंह को समर्थन देकर सरकार बनवाई, लेकिन चार महीने बाद समर्थन वापस ले लिया, जिससे उनकी सरकार भी गिर गई। 1980 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस वापस सत्ता में आई और जनता पार्टी बुरी तरह हार गई।

मंडल आयोग

जनता पार्टी की सरकार ने ओबीसी आरक्षण के लिए मंडल आयोग का गठन किया, जिसके अध्यक्ष बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल (बीपी मंडल) थे। आयोग ने ओबीसी को 27% आरक्षण देने की सिफारिश की।

रेल हड़ताल

जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में रेलवे कर्मचारियों ने बोनस और सेवा शर्तों से संबंधित मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू कर दी थी। सरकार ने मांगों को मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद हड़ताल वापस ले ली गई।

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Transcript

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0:00 हेलो एवरीवन आज के इस वीडियो में हम डिस्कस करेंगे क्लास 12थ की पॉलिटिकल साइंस की जो हमारी सेकंड बुक है सेकंड बुक से चैप्टर नंबर सिक्स लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट ठीक है चैप्टर बहुत ही इंपॉर्टेंट है यहां से आपका लॉन्ग क्वेश्चन जरूर पूछा जाता है इस चैप्टर में से और इमरजेंसी वाला यह चैप्टर है इसमें से ज्यादातर क्वेश्चन इंपोर्टेंट बनते हैं मैं आपको सारे इंपोर्टेंट क्वेश्चन कराऊंगा एक-एक टॉपिक कराऊंगा और सारे टॉपिक में से जहां-जहां से पेपर में क्वेश्चन पूछे जाते हैं वो आपको क्वेश्चन भी बता दूंगा ठीक है इसकी पीडीएफ जो है फ्री में अवेलेबल है आपको हमारे

0:51 telegram.com सर्च करना है ठीक है उसके बाद आपके सामने इस प्रकार से हमारी वेबसाइट आएगी और उसमें आपको सारी चीजें मिल जाएगी यह हमारा आपको क्लास 12 ईएसपी न्यू ग्रुप सर्च करना है और यहां पे आपको पीडीएफ मिल जाएगी तो आप यहां से पीडीएफ को देख सकते हो ठीक है तो चलिए स्टार्ट करते हैं वीडियो को और सबसे पहला जो हमारा कुछ इंट्रोडक्शन के साथ ले चलेंगे ठीक है अगर आपने लास्ट चैप्टर की वीडियो को बहुत ध्यान से देखा हो तो आपको पता होगा कि हुआ क्या था 1967 के जो चुनाव हुए थे उसमें कांग्रेस को धक्का लगा था धक्का लगने का मतलब है उसकी जो वोट परसेंटेज है वो भी कम हो गया था उसकी सीटें भी कम हो गई थी थी ठीक है केंद्र में तो जैसे-तैसे करके कांग्रेस ने अपनी सरकार को बचा लिया था लेकिन नौ राज्यों से उसकी सरकार चली गई थी इतना

1:36 हमने पढ़ा था लास्ट में फिर हमने वहां पे यह भी पढ़ा था कि उसके बाद अगला जो चुनाव होता है 1971 में उसमें इंदिरा गांधी जो थी पार्टी टूट जाती है दो हिस्सों में इंदिरा गांधी वाली पार्टी जो है वह बहुत ज्यादा मार्जन से जीतती है ठीक है यह हमने समझा था इसी को आगे कंटिन्यू करते हैं देखिए 1967 के बाद 1971 के जो चुनाव होते हैं वहां पे कांग्रेस जो है भारी बहुमत से जीती अब कांग्रेस का मतलब यहां पर कौन सी कांग्रेस है कांग्रेस आर यानी कि इंदिरा वाली कांग्रेस ठीक है इस समय इंदिरा गांधी जो थी एक कद्दावर नेता बनकर उभरी क्योंकि उन्होंने अपनी इमेज ऐसी बना ली थी कि अब उनसे बड़ा कोई नेता नहीं था देश में इस दौर में दलगत राजनीति जो थी वह बहुत तीखी हो चुकी थी और ध्रुवीक हो चुकी थी यानी कि जो नेता थे ना अलग-अलग पार्टियों के वो एक

2:23 दि एक दूसरे को देख नहीं सकते थे इस लेवल की राजनीति हो गई थी खुल्ला उल्टा सीधा बोला जाता था ठीक है राजनीति बिल्कुल ध्रुवीक हो चुकी थी न्यायपालिका और सरकार के बीच में भी हमको टकराव देखने को मिलता है तो न्यायपालिका और सरकार के बीच में टकराव पर दो या तीन पॉइंट है जो आगे हम डिस्कस करेंगे वहां पे इसको पढ़ेंगे ठीक है सर्वोच्च न्यायालय यानी जो सुप्रीम कोर्ट है उसने सरकार की कई पहल कदम हों पे यानी सरकार ने कुछ योजनाएं बनाई उसको कहीं ना कहीं सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के खिलाफ माना तो इसलिए सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच में भी कुछ विवाद देखने को मिलते हैं ठीक है अगली स्लाइड प चलते हैं कांग्रेस का मानना था कि सरकार सही काम कर रही रही है लेकिन अदालत जो है यानी कि जो न्यायपालिका है उसका रवैया ठीक नहीं है सरकार ऐसा कहना चाह रही है कि न्यायपालिका जो है गरीबों को लाभ पहुंचाने वाली नीति

3:09 को उसमें कहीं ना कहीं रोड़े अटका रही है ठीक है उसमें रुकावटें डाल रही है यह किसका कहना था यह सरकार का कहना था यानी न्यायपालिका को बीच में नहीं आना चाहिए ऐसा सरकार का कहना है अब चलिए इतना इंट्रोडक्शन से आप समझ गए होंगे कि सरकार और न्यायपालिका के बीच में विवाद हो रहा है ठीक है आगे इसको भी देखते हैं अब यहां पे कुछ आर्थिक समस्याएं भी हो गई थी जिसके कारण कुछ आंदोलन हुए थे इसको भी देख लेते हैं देखिए आर्थिक संदर्भ समझते हैं 1971 के चुनाव में कांग्रेस ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था ठीक है किसने इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था ये हमने पढ़ा था लास्ट चैप्टर में 1971 72 के बाद भी आर्थिक दशा जो था उसमें कोई बदलाव कोई सुधार नहीं देखने को मिला बांग्लादेश संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था पर ज्यादा बुरा

3:55 असर पड़ा था क्योंकि 80 लाख शरणार्थी भारत में आ गए थे जिनका बोझ भी हमको ही ढोना था पाकिस्तान से युद्ध भी हो गया था युद्ध के बाद अमेरिका ने भी भारत की मदद करनी बंद कर दी थी कहीं ना कहीं भारत में आर्थिक संकट बहुत ज्यादा इस समय देखने को मिल रहा था ठीक है तेल की जो कीमतें हैं वह बढ़ गई थी अब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो सभी चीजों की कीमतें बढ़ने लग जाती हैं ठीक है तो 1973 में अगर हम महंगाई की बात करें मुद्रा स्पीति की बात करें ये 23 पर बढ़ चुकी थी और 1974 में अगर हम देखें तो ये 30 पर जो महंगाई है वो बढ़ चुकी थी बेरोजगारी बहुत ज्यादा थी सरकारी जो कर्मचारी थे उनकी सैलरी रोक दी गई थी उनका वेतन रोक दिया गया था पैसा नहीं था सरकार के पास मानसून असफल रहा जिसके कारण सूखा

4:40 पड़ गया देश में अब जब सूखा पड़ा तो कहीं ना कहीं कृषि पैदावार में गिरावट हो गई खाद्यान संकट हो गया इतनी सारी समस्याएं हो गई थी इस काल में इस दौर में जब इतनी सारी समस्याएं हुई तो फिर उसके बाद क्या हुआ हमको यह भी देखना है ठीक है चलिए समझते हैं इसको इसी अवधि में कुछ ऐसे ग्रुप थे जो सामने आए जो संसदीय व्यवस्था में विश्वास नहीं रखते यानी जो संसद और सरकार में विश्वास नहीं रखते ऐसे जो ग्रुप थे ग्रुप थे वो एक्टिव हो गए और यह वही ग्रुप थे जिसको हम कहते हैं वामपंथी ठीक है यह वही वामपंथी थे इन्होंने क्या करा किसानों को मजदूरों को भड़काना शुरू करा और देश में उनको नक्सलवादी बनाया और देश में कहीं ना कहीं आतंक का माहौल हो गया था आगे देखते हैं पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को हटाने के

5:28 लिए हथियार उठा लिए ठीक है यानी कि इन्होंने कुछ ऐसे मतलब खुद तो हथियार उठाए और साथ में गरीबों मजदूरों को भी अपने साथ ले लिया पूंजीवादी व्यवस्था को हटाने के लिए यह समूह जो है इसको मार्क्सवादी कहा जाता है इनको लेनिन वादी भी कहा जाता है क्योंकि लेनिन के विचार को मानते हैं मार्क्स के विचार को मानते हैं ये माओवादी इनको कहा जाता है इनको भारत में देखें तो नक्सलवादी कहा जाता है नेपाल में इनको माओवादी कहा जाता है ठीक है तो ये सब इन्हीं के नाम हैं और यह वामपंथी विचारधारा से जुड़े हुए हैं इनको वामपंथी कम्युनिस्ट भी कहा जाता है ठीक है यह समूह जो थे समूह जो थे यह पश्चिम बंगाल में ज्यादा एक्टिव थे पश्चिम बंगाल से ही ये नक्सलवाद की शुरुआत होती है पश्चिम पश्चिम बंगाल में एक नक्सल बाड़ी नाम का एक गांव था वहां से शुरुआत होती है ठीक है

6:14 वहां पे इन लोगों को इन्होंने भड़काया था और यह सरकार के खिलाफ हो गए और इन्होंने हथियार उठा लिए ठीक है तो यहां से यह नक्सलवादी आंदोलन शुरू होता है और फिर धीरे-धीरे बाकी राज्यों में फैल जाता है अब इसके बाद बात करते हैं प्रोटेस्ट की यानी कि आंदोलन की तो क्या होता है कि देखिए गुजरात और बिहार के जो स्टूडेंट थे उन्होंने एक आंदोलन शुरू कर दिया ठीक है एक आंदोलन शुरू करा जो कि 1974 का आंदोलन है यह आपको समझना है इंपॉर्टेंट है देखते हैं गुजरात और बिहार दोनों जगह कांग्रेस की सरकार के खिलाफ दोनों की दोनों जगह सरकार थी कांग्रेस की इन सरकार के खिलाफ क्या करा स्टूडेंट ने इकट्ठा होकर आंदोलन शुरू कर दिया तो यह कैसे होता है कहां पर होता है इसको समझिए 1974 के जनवरी महीने में गुजरात में जो स्टूडेंट थे वह इकट्ठे

7:02 हुए उन्होंने खाद्यान और खाद्य तेल और जो अन्य वस्तुओं की जो कीमत बहुत बढ़ गई थी इसके खिलाफ और जो भ्रष्टाचार बढ़ा हुआ था इसके खिलाफ इन्होंने आंदोलन छेड़ दिया ठीक है कहां के स्टूडेंट थे गुजरात के स्टूडेंट ठीक है 1974 के जनवरी माह में आंदोलन में बड़ी राजनीतिक पार्टियां जो थी वो शामिल हो गई क्योंकि जब स्टूडेंट का आंदोलन था बड़े लेवल पर ये आंदोलन हो रहा था तो जो अन्य राजनीतिक पार्टियां हैं उनको लगा कि भाई इंदिरा को को सत्ता से हटाने का यह एक अच्छा मौका है इनको हम क्या करते हैं सपोर्ट कर देते हैं तो इन्होंने इनको स्टूडेंट्स को सपोर्ट कर दिया गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया ठीक है ये इंपॉर्टेंट है याद रखना फिर क्या होता है जो विपक्षी दल थे जितने भी अपोजिशन की पार्टियां थी उन्होंने यह कह

7:48 दिया कि भाई दोबारा से चुनाव करवाओ ठीक है दोबारा चुनाव कराओ उन्होंने मांग कर दी मुरार जी देसाई ने तो यह भी कह दिया कि अगर चुनाव दोबारा नहीं करवाओ ग ना तो मैं भूख हड़ता बैठ जाऊंगा और मैं आमरण अंसन करूंगा ठीक है जब तक आप चुनाव नहीं करवाओ ग तब तक मैं भूक हड़ताल पर बैठा रहूंगा मोरार जी देसाई भी एक बड़ा नाम था उस समय में तो ऐसे में सरकार पर दबाव बना क्योंकि एक तरफ स्टूडेंट हो गए पूरी की पूरा अपोजिशन हो गया सब का दबाव था सरकार पर तो सरकार ने क्या करा 1975 में चुनाव करवा दिए अब जैसे ही चुनाव हुए तो कांग्रेस हार गई यानी कि गुजरात में कांग्रेस हार गई याद रखना गुजरात का जो आंदोलन था इस आंदोलन ने गुजरात राज्य में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया दोबारा चुनाव करवा

8:34 के सिंपल है अब देखो यह आंदोलन यहां पर तो सफल रहा अब यही आंदोलन जो है यह गुजरात के बाद पहुंच जाता है बिहार में बिहार में भी ऐसा ही आंदोलन शुरू हो जाता है तो बिहार में भी स्टूडेंट का एक आंदोलन शुरू होता है यहां पर शुरू होता है मार्च महीने में ठीक है बिहार में स्टूडेंट ने आंदोलन छेड़ दिया यहां पर भी मुद्दा वही था कीमतें बढ़ रही थी खाद्यान संकट था देश में बेरोजगारी थी भ्रष्टाचार था इसीलिए स्टूडेंट एकजुट हो गए और इन्होंने उस समय जो समाजवादी नेता थे जयप्रकाश नारायण जिसको हम शॉर्ट में जेपी कहते हैं जेपी नारायण इनको इन्होंने निमंत्रण भेजा अब जेपी नारायण जो थे वो इस समय समाज सेवी बन चुके थे और जो एक्टिव राजनीति होती है यानी राजनीति में ये

9:21 एक्टिव नहीं थे अब ये समाज सुधारक के रूप में थे एक समय ये गांधी जी के साथ रहे हैं ठीक है आंदोलनों में शामिल हुए हैं और देश की राजनीति में समाजवाद का एक बड़ा चेहरा था जेपी नारायण तो यह राजनीति छोड़ चुके थे अब लेकिन इनको स्टूडेंट ने बुलाया है तो जयप्रकाश नारायण ने क्या करा जो स्टूडेंट का जो इन्विटेशन था निमंत्रण था उसको एक्सेप्ट कर लिया और बोल दिया कि हां ठीक है हम आपके आंदोलन में शामिल हो जाएंगे ठीक है अब समझिए क्या होता है यहां से होती है राजनीति बिल्कुल डिफरेंट अब जयप्रकाश नारायण तो शामिल हो रहे हैं लेकिन उन्होंने कुछ शर्त रख दी उन्होंने शर्त यह रखी कि आंदोलन तो हम करेंगे लेकिन आंदोलन में किसी भी प्रकार की हिंसा लड़ाई झगड़ा दंगा नहीं होना चाहिए ठीक है हमारा जो आंदोलन होगा वह शांतिपूर्ण होगा और किसी भी प्रकार के

10:08 उसमें लड़ाई झगड़ा नहीं होना चाहिए तो स्टूडेंट ने बोला ठीक है मान लेते हैं फिर यह आंदोलन दूसरी शर्त ये रखी कि आंदोलन केवल बिहार तक नहीं रहेगा यानी क्योंकि बिहार से हो रहा है आंदोलन पहले गुजरात में हो चुका है उन्होंने बोला बिहार तक नहीं बल्कि इसको हम क्या करेंगे आगे बढ़ाएंगे यानी कि देश के दूसरे राज्यों में भी पहुंचाएंगे दिल्ली में भी लेकर चलेंगे तो जीवन के हर क्षेत्र के जो लोग थे वह इस आंदोलन में आकर जुड़ गए देखिए जो जेपी नारायण है ना वह बहुत बड़ा नाम है याद रखना भारत की राजनीति में जयप्रकाश नारायण जो है बहुत बड़ा नाम है बहुत बड़े नेता थे इंदिरा के विकल्प के रूप में लोग जेपी को देखते थे इन्होंने संपूर्ण क्रांति की बात कर दी ठीक है संपूर्ण क्रांति का नारा किसने दिया पेपर में आता

10:53 है तो आपको याद रखना है जयप्रकाश नारायण ठीक है आगे चलते हैं अब जयप्रकाश नारायण जो थे इन्होंने रेलवे के कर्मचारियों से बोल दिया कि आप भी आइए हमारी आंदोलन में शामिल हो जाइए अगर रेलवे के कर्मचारी आंदोलन में शामिल होंगे तो आप अंदाजा लगा सकते हो कि क्या होगा देश में सोचिए अगर रेलवे के कर्मचारी इसमें शामिल हो गए रेल चलनी बंद हो गई तो देश का जो डेली का जो कामकाज है वो ठप हो जाएगा रुक जाएगा ठीक है और कहीं ना कहीं देश को बहुत ज्यादा नुकसान होगा अब इस चीज को लेकर इंदिरा गांधी की सरकार जो थी वो बहुत टेंशन में आ रही थी क्योंकि जे जो थे वो रुकने वाले तो थे नहीं फिर 1975 में जेपी ने जनता के जनता के संसद मार्च का नेतृत्व किया यह संसद मार्च यानी दिल्ली भी गए और इन्होंने

11:38 इसका नेतृत्व किया और इनके साथ देश की राज राजधानी जो है यहां पर एक बड़ी रैली की गई अब सोचिए कि उस समय में दिल्ली का जो रामलीला मैदान है उसमें इतनी बड़ी भीड़ आई थी इतने ज्यादा लोग आए थे कि पूरा जो रामलीला मैदान है बहुत बड़ा है अगर आपने कभी देखा हो तो पूरा रामलीला ला मैदान जो था वह भरा हुआ था मतलब आज तक इतनी बड़ी रैली कभी नहीं हुई थी और इतनी बड़ी जनसंख्या कभी आई नहीं थी किसी रैली में तो जयप्रकाश नारायण को विपक्षी पार्टियों का भी साथ मिल गया क्योंकि विपक्ष जो होता है चाहे आज का विपक्ष हो चाहे उस समय का विपक्ष हो या कभी का विपक्ष हमेशा अपनी राजनीतिक रोटियां सेखने के लिए तैयार रहता है वह हमेशा देखता है कि कोई ऐसा मुद्दा मिल जाए जिसमें सरकार को घेरने का मौका

12:25 मिले तो विपक्षी जो पार्टियां थी उनको तो मौका मिल गया था भाई जेपी नारायण के साथ पूरा स्टूडेंट है स्टूडेंट के साथ-साथ सभी वर्ग के लोग जेपी नारायण के साथ हैं उन्होंने बोला हम भी आपके साथ हैं इंदिरा को हटाना है ठीक है तो आंदोलन जो हुआ था ना इतनी भीड़ थी उसमें इतनी भीड़ थी आप सोच भी नहीं सकते इतने लोग इसमें शामिल हुए थे ठीक है आगे देखो क्या होता है जयप्रकाश नरायण जोते इनको किसका समर्थन मिलता है इनको समर्थन मिलता है भारतीय जनसंघ भारतीय जनसंघ का और जनसंघ ही बाद में क्या बन गई बीजेपी ठीक है और देखो कांग्रेस ओ कांग्रेस व कौन सी सिंडिकेट वाली हमने लास्ट चैप्टर में पढ़ा था ना कांग्रेस टूट गई थी दो गुट बन गए थे एक तो सिंडिकेट था दूसरा इंदिरा गांधी वाला था तो जो सिंडिकेट वाला कांग्रेस है वो इसमें

13:10 आ गया जनता अब यहां पे जनता में सभी तरह के लोग उसमें स्टूडेंट भी हैं इसमें मजदूर भी हैं किसान भी हैं हर तरह के लोग जो थे वो इसमें शामिल हो गए ठीक है फिर सोशलिस्ट पार्टी जो थी आचार्य नरेंद्र देव वाली वो पार्टी भी इसमें शामिल हो गई भारतीय लोकदल जो है इसने भी सपोर्ट कर दिया यानी कि जेपी नारायण को कितना बड़ा समर्थन मिल रहा है सोचो एक तरफ इंदिरा गांधी है दूसरी तरफ जेपी नारायण है इंदिरा गांधी के सब खिलाफ हो रहे हैं जेपी नारायण के सब सपोर्ट में आ रहे हैं तो सोचो कितना बड़ा जन समर्थन था इन सभी पार्टियों ने जय प्रकाश नारायण को इंदिरा गांधी के विकल्प के रूप में देखा उन्होंने सोचा कि बस यही इकलौता आदमी है जो इंदिरा गांधी को हटा सकता है सत्ता से और उसके विकल्प के रूप में इनको लगा इन

13:56 आंदोलनों को कांग्रेस और इंदिरा गांधी के खिलाफ माना गया था ठीक है देखिए टाइपिंग की मिस्टेक है माफी चाहूंगा यहां पर माना गया था ठीक है यह था आगे चलते हैं इसके बाद क्या होता है एक ना फैसला आता है इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यानी इलाहाबाद की जो हाई कोर्ट होती है उसका कुछ ऐसा फैसला आ जाता है जो बहुत ही मतलब आप यह कह लो कि बहुत ही खतरनाक फैसला था इंदिरा गांधी के लिए इंदिरा गांधी के लिए बहुत नुकसानदायक फैसला था इस फैसले में क्या हुआ इसको समझते हैं देखिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय जो था इसके न थे जगमोहन लाल सिन्हा मैं आपको कहता हूं कि यह नाम आप याद रखना ठीक है यह नाम जरूर याद रखना जगमोहन लाल सिन्हा जो थे यह जज थे इन्होंने एक फैसला सुनाया था 12 जून 1975 को सुनाया था किस दिन सुनाया था 12 जून

14:42 1975 को इन्होंने फैसला यह सुनाया कि इंदिरा गांधी का जो निर्वाचन है जो लोकसभा के लिए वह सांसद बनी हुई है व अवैधानिक है यानी कि वह गलत तरीके से हुआ है वह इल्लीगल है ठीक है यह फैसला समाजवादी नेता राजनारायण के द्वारा एक एक या चिका दायर की गई थी ठीक है उसके संज्ञान में यह लिया गया था हुआ क्या था कि समाजवादी नेता थे राजनारायण उन्होंने जाकर कोर्ट में केस कर दिया किसके खिलाफ इंदिरा गांधी के खिलाफ उन्होंने यह कहा कि इंदिरा गांधी ने क्या करा है जो सरकारी कर्मचारी हैं उनकी सेवाओं का इस्तेमाल करा है चुनाव में और यह तो बिल्कुल इल्लीगल है अब जब कोर्ट ने देखा तो जगमोहन लाल सिन्हा ने फैसला सुना दिया फैसला क्या सुनाया उन्होंने ठीक है याचिका में इस बात इस बात थी कि इंदिरा गांधी ने चुनाव प्रचार में सरकारी

15:28 कर्मचारियों की सेवाओं का इस्तेमाल किया है ठीक है इस फैसले का मतलब यह था कि इंदिरा गांधी इन्होंने अवैधानिक बोल दिया इसका मतलब यह है कि इंदिरा गांधी अब सांसद तो रहेंगे नहीं और सांसद जब नहीं रहता तो उसको 6 महीने का टाइम मिलता है 6 महीने के अंदर दोबारा से चुनाव लड़ो अगर जीत जाओगे तो बन जाओगे सांसद नहीं जीते तो फिर हट जाओगे तो इसका मतलब यह था कि अब वह प्रधानमंत्री भी नहीं रह पाएंगी क्योंकि वह सांसद नहीं है तो फिर प्रधानमंत्री कैसे रह पाएंगे यह समस्या थी तो ऐसे में क्या होता है 24 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट में जाता है यही मामला ठीक है इंदिरा जाती है सुप्रीम कोर्ट वहां पे सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुनती है और सुप्रीम कोर्ट क्या करती है जो हाई कोर्ट का जो फैसला था उस परे थोड़ी सी रोक लगा देती है आंशिक रोक पूरी तरीके से रोक नहीं

16:13 आंशिक इसमें क्या फैसला होता है कि जब तक इस अपील पर सुप्रीम कोर्ट में पूरी तरीके से सुनवाई नहीं हो जाती तब तक इंदिरा गांधी सांसद रहेंगी यानी जो एक तलवार लटक रही थी सांसद नहीं रहेंगी वो तलवार हट गई सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि जब तक तक सुनवाई चल रही है हमारे यहां पे तब तक तो इंदिरा गांधी सांसद रहेंगे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन लेकिन शर्त लगा के लेकिन वे संसद के काम में भाग नहीं लेंगी अब आप यह सोचो कि वह सांसद हैं लेकिन संसद के जो कार्य होते हैं उसमें हिस्सा नहीं ले पाएंगी तो वह किस बात की सांसद है आप समझिए कुछ इस तरीके से आंशिक रोग ल रोक जो थी वह लग चुकी थी ठीक है अब आगे देखो क्या होता है संकट जो था वो और ज्यादा गहराता जा रहा था एक तरफ इंदिरा के साथ ये कोर्ट वाला मामला हो गया दूसरा दूसरी तरफ इंदिरा

17:00 के साथ उसके सारे अपोजिशन वाले एक साथ हो रहे हैं पूरे देश की जनता उनके खिलाफ आंदोलन कर रही है तो उनकी स्थिति जो थी वह बहुत बेकार हो रही थी ठीक है तो सर संकट और सरकार इसको समझिए जयप्रकाश नारायण और अन्य विपक्षी दलों ने इंदिरा गांधी के इस्तीफे का दबाव बनाया सबने यह बोल दिया कि इंदिरा गांधी इस्तीफा दो इंदिरा गांधी इस्तीफा दो ठीक है सभी दलों ने मिलकर 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन किया और आज तक दिल्ली में कभी भी इतना बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ था मैंने आपको स्टार्टिंग में बताया था ना कि पूरा रामलीला मैदान भर चुका था इतने लोग आए थे इतने लोग आए थे जितने आज तक कभी किसी रैली में भी नहीं आए थे ठीक है जेपी नारायण ने इंदिरा गांधी से इस्तीफे की

17:47 मांग कर दी पुलिस और सेना से भी इन्होंने आहवान कर दिया कि वह भी सरकार की बातें ना माने और हमारे साथ हमारे आंदोलन में आ जाए अब सोचो अगर पुलिस और सेना भी इनके साथ आ जाती है तो देश में क्या होगा आप अंदाजा लगा सकते थे सरकारी कर्मचारियों को भी कहा कि वे सरकार के खिलाफ आ जाएं ठीक है जितने भी सरकारी कर्मचारी हैं सब सरकार के खिलाफ आ जाए और अपने आंदोलन में शामिल हो जाए इससे सरकारी कामकाज भी ठप हो जाने का खतरा हो रहा था सरकार ने इन घटनाओं को देखते हुए आपातकाल की घोषणा कर दी अब सरकार ने क्या करा देश में इमरजेंसी लगा दी ठीक है आपातकाल लगा दिया हालांकि इन चीजों को लेकर आपातकाल नहीं लगाया जाता लेकिन फिर भी इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगा दी इमरजेंसी की घोषणा के बाद सारी शक्तियां

18:35 जो होती है वह केंद्र सरकार के हाथ में चली जाती है अब केंद्र सरकार जो चाहे वह कर सकती है 25 जून 1975 की रात में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति थे उस समय फकरुद्दीन अली अहमद इनको कहा कि आपातकाल लागू कर दो ठीक है अब राष्ट्रपति को आदेश मिला प्रधानमंत्री से तो इन्होंने तुरंत ही उद्घोषणा कर दी तुरंत ही कह दिया कि ठीक है हम इमरजेंसी जो है उसको लागू कर देते हैं ठीक है अब समझिए 25 जून 1975 को सरकार ने इमरजेंसी की घोषणा कर दी अनुच्छेद 352 के तहत पूरे देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई आधी रात के बाद अखबार के जो दफ्तर होते हैं उनकी बिजली काट दी गई सुबह जो मंत्रिमंडल है उसको यह सूचना दी गई कि आपातकाल लग चुका है

19:23 विपक्षी नेता जो है उनको गिरफ्तार कर लिया है अब यहां पर एक चीज आपको समझनी है कि इंदिरा गांधी ने जिस तरीके से आपातकाल लगवाया था आपातकाल का यह तरीका नहीं होता है ठीक है आपातकाल अब आप समझिए आपातकाल लग चुका है इमरजेंसी लग चुकी है लेकिन उनकी कैबिनेट को सुबह पता लग रहा है कि ऐसा हो गया कैबिनेट को पता ही नहीं है ऐसा नहीं होता जब भी आपातकाल लगाया जाता है तो कैबिनेट के साथ बैठकर चर्चा की जाती है ठीक है उसके बाद कैबिनेट और सबकी मंजूरी लिखित में राष्ट्रपति के पास जाएगी फिर राष्ट्रपति उस परे विचार करके उसको लगाएगा ठीक है ये कुछ प्रोसीजर है लेकिन य पे यह प्रोसीजर फॉलो नहीं हुआ इंदिरा गांधी ने सीधा राष्ट्रपति से कहा राष्ट्रपति ने इमरजेंसी लगा दी कैबिनेट को तो पता ही नहीं है उसको नेक्स्ट सुबह पता लग रहा है कि भाई ऐसा ऐसा हो चुका

20:08 है आपातकाल जब लग गया तो आपातकाल के क्या परिणाम हुए यह समझ लो मैं आपको पहले ही बता रहा हूं यह मोस्ट इंपोर्टेंट क्वेश्चन है ठीक है और आपको क्या करना है इस क्वेश्चन को याद करना है यह आपके पेपर में आएगा तो सिक्स मार्क्स में आएगा यानी कि ये लॉन्ग क्वेश्चन है ठीक है तो इसको याद रखना आपात के क्या परिणाम हुए तो जैसे ही देश में आपातकाल लगा जो विरोध हो रहा था जो प्रोटेस्ट हो रहा था ठीक है जो आंदोलन हो रहा था वह अचानक से रुक गया क्यों रुक गया क्योंकि सारे जो नेता थे वह तो इन्होंने जेल में डाल दिए अब जब नेता ही नहीं बचे तो जनता कैसे आंदोलन करेगी ठीक है हड़ताल के ऊपर रोक लगा दी यह बोल दिया गया कोई भी हड़ताल नहीं करेगा अगर कोई हड़ताल करता पाया गया तो उसको जेल में डाल

20:55 दिया जाएगा प्रेस यानी कि जो मीडिया होती है उस पर भी रोक लगा दी गई निवारक नजरबंदी का बड़े पैमाने पर अ इस्तेमाल किया गया निवारक नजरबंदी क्या होता है इसके तहत किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है ठीक है नॉर्मली किसी को कब गिरफ्तार किया जाता है जब कोई व्यक्ति कोई अपराध करता है जब कोई व्यक्ति कोई अपराध करेगा तब उसको पुलिस क्या करती है गिरफ्तार कर लेती है लेकिन मान लो किसी व्यक्ति ने कोई अपराध नहीं करा क्या तब भी पुलिस गिरफ्तार कर सकती है यस कर सकती है कब कर सकती है निवारक नजरबंदी के तहत कर सकती है पुलिस तब किसी को गिरफ्तार कर सकती है जब पुलिस को ऐसा लगता है कि भाई यह व्यक्ति हो सकता है आज कुछ ना कर रहा हो लेकिन आने वाले समय में कुछ गलत कर दे जैसे मान लो पुलिस

21:40 को खबर लगी कि भाई फलानी जगह में बम बनाए जा रहे हैं ठीक है अब पुलिस ये थोड़ी वेट करेगी कि भाई बम बना के फोड़ देगा दो चार बम तब जाके हम उनको गिरफ्तार करेंगे पुलिस को पता लगेगी तो डायरेक्ट ही जाके गिरफ्तार कर लेगी उसकी जांच करेगी तो इसी को कहा जाता है निवारक नजरबंदी इसका खूब इस्तेमाल किया सभी लोगों को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया ठीक है आरएसएस जो संगठन है और जमात इस्लामी जो संगठन है इसको बैन कर दिया गया और मौलिक अधिकार भी कहीं ना कहीं निष्प्रभावी हो गए अब आप कोर्ट में भी नहीं जा सकते हो जैसे मान लो किसी को गिरफ्तार किया गया वह कोर्ट में भी नहीं जा सकता सरकार के खिलाफ तो यह थे आपातकाल के परिणाम सिंपल पॉइंट है आराम से इसको समझिए ठीक है ध्यान से देखिए आगे बात करते हैं आपातकाल के विरोध की इंडियन एक्सप्रेस और स्टेट जैसे जो

22:29 न्यूजपेपर थे अखबार थे इन्होंने प्रेस सेंसरशिप का विरोध करा क्योंकि प्रेस पर थोड़ी तुम बैन लगा सकते हो मीडिया को थोड़ी रोक सकते हो लेकिन इन्होंने उसको भी बैन कर दिया सेमिनार ऑन मेन स्ट्रीम जैसी जो मैगजीन थी यह तो बंदी हो गई उस समय लेखक थे शिवराम कारत और फणीश्वर नाथ रेणु इन्होंने भी लोकतंत्र के दमन के खिलाफ इनको जो अवार्ड मिले हुए थे जो पदवी मिली हुई थी तो इन्होंने भी अपने अवार्ड को वापस कर दिया ठीक है इन्होंने अपने वर्ट को वापस कर दिया इन्होंने विरोध किया मतलब ये इनका विरोध का तरीका था इमरजेंसी का इस तरीके से विरोध किया जा रहा था अब बात कर लेते हैं कि जो इमरजेंसी लगाई गई थी जो आपातकाल लगाया गया था आपातकाल के समय में क्या विवाद है उसको देख लेते हैं तो देखिए

23:15 इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के लिए संविधान संशोधन में ऐसा प्रावधान कर दिया गया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पद को अदालत में कोई चुनौती ही नहीं दे सकेगा ठीक है तो यह था इंदिरा गांधी के समय में अब आज के समय में देखते हो ना आप जैसे कि आज के समय में जो सरकार है उसके खिलाफ होते हैं बोलते हैं लोकतंत्र खतरे में आ गया लोकतंत्र यह हो गया वो हो गया आप देखते हो ऐसा आंदोलन चलते रहते हैं लेकिन असली खतरे में तो तब आया था लोकतंत्र जब खुलेआम पूरे विपक्ष को जेल में डाल दिया गया था ठीक है ऐसा मतलब इलाहाबाद के जो कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए सरकार ने संविधान में ही संशोधन कर दिया उन्होंने बोला कि अब तो कोई प्रधानमंत्री राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति के पद को चुनौती ही नहीं दे सकता इसे बोलते हैं लोकतंत्र में खतरा आगे

24:00 देखो आपातकाल के दौरान संविधान का 42वां संशोधन हुआ और इस समय सारे विपक्षी नेता जेल में थे इंदिरा ने खुद ही करवा दिया सारा ठीक है इस संशोधन के जरिए संविधान में बहुत सारे हिस्सों में बदलाव हुआ और यह सबसे विवादित संशोधन माना जाता है हमारे संविधान में इसी दौरान विधायिका के कार्यकाल को भी इन्होंने 5 साल से बढ़ा दिया था और 6 साल कर दिया था ठीक है तो यह भी इन्होंने करा था संशोधन के जरिए अगला है शह जांच योग आपके पेपर में ना यहां से क्वेश्चन आता है मैं आपको कह रहा हूं कि इसे थोड़ा सीरियस होकर पढ़ना यहां से आपके पेपर में शॉर्ट क्वेश्चन पूछा जाता है साह जांच आयोग किस लिए बनाया गया था देखो जब इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई 18 महीने तक आपातकाल चला उसके बाद दोबारा

24:47 चुनाव हुए चुनाव हुए तो इंदिरा गांधी सत्ता से बाहर हो गई और दूसरी सरकार आई जिसको कहा जाता है जनता पार्टी की सरकार क्या कहा जाता है जनता पार्टी की सरकार ठीक है जनता पार्टी की सरकार ने मई 1977 में शाह जांच आयोग बिठाया गठन किया किसलिए किया था यह इसलिए किया था कि इमरजेंसी के दौरान जो गलत हुआ था उसकी जांच करने के लिए और जो जेसी शाह हैं यह सुप्रीम कोर्ट के एक्स जज थे ठीक है पूर्व न्यायाधीश थे इनको इन्होंने क्या करा इसका मेन बनाया इसीलिए इसका नाम जेसी शाह आयोग कहा जाता है इसको शाह जांच आयोग भी कहा जाता है 25 जून 1975 में जो आपातकाल लगाया गया था उसमें जो अति हुई थी गलत हुआ था जो कद अचार हुआ था कानून का उल्लंघन हुआ था सत्ता का जो दुरुपयोग हुआ था इसको इसको

25:34 समझने के लिए क्या-क्या हुआ कैसे-कैसे हुआ इसके लिए आयोग बनाया गया था आयोग ने क्या करा जितने भी सबूत थे सब सबूतों को इकट्ठा किया उसकी अच्छे तरीके से जांच की हजारों गवाहों के इन्होंने बयान दर्ज करे इंदिरा गांधी का बयान लेने का प्रयास किया लेकिन इंदिरा गांधी ने इनको कोई जवाब ही नहीं दिया ठीक है तो यह साह जांच आयोग इसलिए बनाया गया था अब एक क्वेश्चन बनता है कि इमरजेंसी के दौरान क्या-क्या गलत हुआ था लोगों के साथ ठीक है ये इंपॉर्टेंट है याद रखना है तो देखिए सत्ता का दुरुपयोग किया गया खुलेआम यानी जो उनके पास पावर थी उसका खुलेआम दुरुपयोग हुआ लोगों के साथ इन्होंने जातियां करी लोगों को जबरन जेल में ाल डाल दिया गया उनको आंदोलन करने की कोई अनुमति नहीं थी ठीक है 676 जो नेता थे विपक्ष के उनको गिरफ्तार किया गया तो आप

26:19 सोचो कितने बड़े लेवल पर गिरफ्तारी हुई लोगों की जबरन नसबंदी करा दी गई नसबंदी कार्यक्रम भी इन्होंने इसी टाइम शुरू कर दिया ठीक है नसबंदी में क्या था यह होता था कि लोगों को वैसे जागरूक करना चाहिए था लेकिन ये जबरन करा देते थे ताकि लोग ज्यादा बच्चे पैदा ना करें जबरन नसबंदी कराई गई दिल्ली में जो झुग्गियां थी रातों रात झुग्गियां उजाड़ दी गई ठीक है लोगों को गिरफ्तार किया गया कई लोगों की तो जेल में भी मौत हो गई थी यह सब हुआ अखबारों के जो दफ्तर थे उनकी बिजली काट दी गई प्रेस पे सेंसरशिप लगा दी गई संजय गांधी जो कि इंदिरा गांधी के बेटे थे ठीक है संजय गांधी वह सरकार के काम में दखल अंदाजी दे रहे थे बहुत ज्यादा जबकि यह किसी पद पर नहीं थे कोई पोस्ट में नहीं थे

27:05 लेकिन फिर भी यह क्या कर रहे थे सरकार के काम में खूब दखल अंदाजी कर रहे थे प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई थी निवारक नजरबंदी का इस्तेमाल बहुत बड़े लेवल पर हुआ था लोगों को अदालत का दरवाजा खटखटाने की भी कोई इजाजत नहीं थी यह गलत हुआ था इमरजेंसी के दौरान पेपर में आता है और यह लॉन्ग क्वेश्चन में पूछा जाएगा तो इसको याद करके जाना है ठीक है आगे देखो आपातकाल के सबक कि इमरजेंसी लग गई इमरजेंसी खत्म हो गई आपातकाल से अपने को क्या सबक मिलता है ये हमको देखना है ठीक है तो सबक देख लेते हैं ये पेपर में आता है ये भी लॉन्ग क्वेश्चन है मैं आपको जो जो इंपोर्टेंट क्वेश्चन है ना पेपर में पूछे जाते हैं वो आपको मैं साथ के साथ ही बताते जा रहा हूं ठीक है इन क्वेश्चन को आपको याद करना है बाद में मैं आपको चैप्टर वाइज इंपोर्टेंट क्वेश्चन की वीडियो बनाऊंगा वहां तो कराऊंगा ही लेकिन फिर भी

27:51 आप थोड़ा इन पर ज्यादा फोकस करें देखिए आपातकाल से हमको यह सबक मिला कि भारत से लोकतंत्र को विदा कर पाना कठिन है भारत से लोकतंत्र नहीं जा सकता ऐसा पता लगा दूसरा आपातकाल अब अंदरूनी गड़बड़ी बताकर नहीं लगाया जा सकता यह इंपॉर्टेंट है क्योंकि इंदिरा गांधी ने क्या करा था इंदिरा गांधी ने यह बोल दिया था कि देश में अंदरूनी गड़बड़ी चल रही है और यह जो है यह मेरे खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं इसलिए उसने इमरजेंसी लगा दी लेकिन अब अंदरूनी गड़बड़ी बता के इमरजेंसी नहीं लगाई जा सकती कब लगाएंगे केवल सशस्त्र विद्रोह में मान लो देश में स सस्त्र विद्रोह हो जाए दंगे हो जाए बहुत बड़े लेवल पे ठीक है सरकारें उसको रोकने में असफल हो तब इमरजेंसी लगा के सेना के जरिए से उसको रोका जा सकता है

28:37 यह नहीं कि कोई सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहा है तो तुम इमरजेंसी लगा दो ये ऐसा पॉसिबल अब नहीं है ठीक है दूसरा आपातकाल की घोषणा उस समय क्या था इंदिरा ने बोला राष्ट्रपति को राष्ट्रपति ने कर दिया अब आपातकाल की घोषणा अगर होनी है तो उसके लिए ठीक है मंत्री परिषद जो हमारी कैबिनेट है कैबिनेट से पहले सलाह करनी पड़ेगी फिर राष्ट्रपति को लिखित में देना पड़ेगा कि भाई यह हम दे रहे हैं इमरजेंसी लगानी है व जैसे पिछली बार हुआ था कि मंत्री परिषद को तो अगली सुबह पता लगा कि भाई ऐसा ऐसा हुआ उनको तो पता ही नहीं है कुछ भी ऐसा नहीं चलेगा अब ये होना चाहिए फिर क्या है नागरिक जो है यानी कि जनता जो है अब अपने अधिकारों को लेकर ज्यादा जागरूक हो गई है क्योंकि उस उसको पता लग गया हमारे क्या-क्या अधिकार हैं और सरकार ने किस प्रकार से हमारे अधिकारों का हनन करा था उस समय में ठीक है आपातकाल के बाद कई

29:23 संगठन बन गए थे मानव अधिकार से रिलेटेड भी कई सारे संगठन बने थे तो ये तो तो हो गया हमारा इमरजेंसी के सबक एक यह क्वेश्चन आएगा कि जब इमरजेंसी खत्म हो जाती है तो क्या होता है चुनाव चुनाव में क्या परिणाम आते हैं यह समझना है तो लोकसभा के चुनाव होते हैं 1977 में अब भाई इमरजेंसी लगी हुई थी 25 जून 1975 को उसके बाद 18 महीने तक लगभग लगभग इमरजेंसी लगी रही उसके बाद चुनाव कराए गए तो जनवरी 1977 में चुनाव कराने का फैसला हुआ सभी नेताओं को जेल से बाहर कर दिया गया 1977 के मार्च में ठीक है चुनाव हुए और विपक्ष को तैयारी करने के लिए ज्यादा समय मिला नहीं क्योंकि उनको दो-तीन महीने का टाइम मिल रहा है उनको जेल से बाहर आए हुए चुनाव से पहले

30:09 विपक्षी पार्टी एक साथ मिल गई और जनता पार्टी बनाई अब यहां पर क्या था सारे नेता जब जेल से बाहर आए तो उन्होंने समझ लिया कि इंदिरा इस बार सत्ता से जाएगी जाएगी क्योंकि इमरजेंसी पूरे देश ने देख ली थी तो सारी पार्टियों ने क्या करा मिलकर एक साथ एक एक साथ आ गए और इन्होंने एक पार्टी बना ली ठीक है गठ बंधन पार्टी जिसको कहा जाता है जनता पार्टी अब यह जनता पार्टी में सारे नेता एक साथ हो गए नई पार्टी ने जयप्रकाश नारायण को भी नेतृत्व सौंपा उन्हें भी बुलाया गया कांग्रेस के कुछ नेता जो थे आपातकाल इमरजेंसी के खिलाफ थे ठीक है जो इंदिरा गांधी की पार्टी के लोग थे वो भी इमरजेंसी के खिलाफ थे वो भी जनता पार्टी में आ गए क्योंकि उ उन्हें भी पसंद नहीं आया था जगजीवन राम ने एक पार्टी बनाई थी कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी इंपॉर्टेंट है पेपर में पूछा जा सकता है तो जगजीवन राम

30:57 ने यह जो पार्टी बनाई थी लेकिन बाद में वह भी जनता पार्टी में शामिल हो गए क्योंकि उन्हें पता था अलग से पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने में फायदा नहीं है साथ में फायदा है पार्टी ने चुनाव प्रचार में इमरजेंसी के दौरान जो जो गलत हुआ था जो जो जातियां हुई थी वह जनता के सामने रखा कि किस प्रकार से इंदिरा गांधी ने हमारे साथ गलत करा नेताओं को जेल में डाला लोगों को जेल में डाला प्रेस सेंसरशिप लगाई जो जो हुआ था वह सब उन्होंने जनता को बताना शुरू करा जनता ने कांग्रेस को वोट नहीं दिया और जनता पार्टी जो थी वह जीत गई पहली बार देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि केंद्र में कोई ऐसी गैर कांग्रेसी सरकार आई हो ठीक है इससे पहले जितनी भी सरकार थी सारी कांग्रेस की थी चाहे व नेहरू के समय हो लाल बहादुर शास्त्री इंदिरा गांधी हमेशा जितनी भी सरकार थी वह कांग्रेस की

31:42 थी पहली बार ऐसा होता है कि गैर कांग्रेसी सरकार आती है अब देखो 1977 के चुनाव परिणाम को समझते हैं आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि कांग्रेस चुनाव हार गई ठीक है लोकसभा में 154 सीटें मिली मात्र 154 कहां कांग्रेस 364 300 के करीब सीटें लाती थी अब उसको 150 के करीब सीटें मिल रही हैं वोट परसेंट देखें तो 35 पर कम वोट मिला और जनता पार्टी को कितने वोट मिले 330 सीटें सोचो आज तक भारत में कभी किसी भी विपक्षी पार्टी को या विपक्षी गठबंधन को 50 सीटें भी नहीं मिल पा रही थी अब इनको 330 सीटें मिल गई और अकेले जनता पार्टी को देखें तो 295 सीटें मिली यानी कि जनता पार्टी को 295 सीट मिली प्लस उनके सहयोगी जो थे जो

32:28 भी गठबंधन में थे उन सबकी मिला के 330 सीटें हो गई उत्तर भारत की बात करें नॉर्थ इंडिया यहां पे मैं मैप बनाने की कोशिश करता हूं ठीक है सही से नहीं बन पाया यह जो है यह अपना उत्तर भारत है उत्तर भारत में कांग्रेस का बहुत बुरा हाल था बिहार इनके हाथ से चला गया यूपी दिल्ली हरियाणा पंजाब यहां पर इनको एक एक भी सीट नहीं मिली ठीक है एक सिंगल सीट इनको इन जगह पर नहीं मिली कांग्रेस को राजस्थान में और एमपी में यानी मध्य प्रदेश में सीट मिली वह भी एक मात्र एक सीट मिली सोचो कांग्रेस कितनी ज्यादा सीटें लाती थी यहां पर उसका बिल्कुल बार हो चुका है ठीक है अब एक बार इस मैप को ना बहुत

33:14 ध्यान से देखना है आपको बहुत ध्यान से इस मैप को देखो यह जितने भी आपको डार्क कलर में राज्य दिख रहे हैं ठीक है यह सारे वो राज्य हैं जहां पर जनता पार्टी आई है ठीक है आपको राजस्थान में एक सीट दिख रही होगी एमपी में एक सीट दिख रही होगी इधर बाकी सारे राज्यों में लगभग लगभग कांग्रेस जो है साफ हो गई है लेकिन यह जो येलो वाला पार्ट है यह कांग्रेस का है ठीक है लेकिन अगर आप साउथ में देखोगे दक्षिण भारत में देखोगे तो यहां पर आपको कांग्रेस दिख रही है पर नॉर्थ इंडिया में यानी उत्तर भारत में कांग्रेस जो थी वोह बिल्कुल साफ हो चुकी थी 1977 के चुनाव में ठीक है अब देखो थोड़ा सा और समझो कि ये तो हमने रिजल्ट देख लिया सोचो इंदिरा गांधी भी चुनाव हार

33:59 गई इंदिरा गांधी जो थी उन्होंने रायबरेली से चुनाव लड़ा था लोकसभा का और वह यहां पर हार चुकी हैं संजय गांधी जो थे अमेठी से इन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा था यह भी हार गए और महाराष्ट्र गुजरात उड़ीसा में कांग्रेस जो थी वो कई सीटें जीती ठीक है यानी साउथ की तरफ जाओगे तो वहां पे फिर भी कांग्रेस जीती उत्तर भारत का जो मध्य वर्ग था वो कांग्रेस से बिल्कुल दूर जाने लगा उसने बिल्कुल कांग्रेस को वोट नहीं दिया आपातकाल की जो हिंसा थी इसका नतीजा था 1977 का चुनाव का परिणाम क्योंकि आपातकाल के दौरान जो इंदिरा गांधी ने गलत करवाया था उसी का रिजल्ट उसको मिला कि उसको बिल्कुल साफ कर दिया गया जनता पार्टी ने सरकार बनाई पहली बार केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार आई पूछा जाएगा पेपर में तो आपको बताना है कि पहली बार केंद्र में

34:45 गैर कांग्रेसी सरकार कब आई ठीक है अब देखो 1977 का चुनाव जो था जनता पार्टी जीत गई लेकिन उसमें तालमेल नहीं था क्योंकि इसमें ना मतलब अलग-अलग पार्टियों के लोग थे खूब सारी पार्टी जब मिलती है तो तालमेल तो रहता नहीं क्योंकि सबकी विचारधाराएं जो होती है वो अलग होती है अब यहां पे लड़ाई होने लग गई पीएम के लिए कि भाई पीएम कौन बनेगा प्राइम मिनिस्टर कौन बनेगा एक तरफ थे मोरार जी देसाई अब आपने अगर इससे पहले के चैप्टर बहुत ध्यान से देखे हो बहुत ध्यान से तो मैंने आपको बताया था जब नेहरू जी की मौत हुई थी तो प्राइम मिनिस्टर मोरार जी देसाई बनना चाहते थे लेकिन लाल बहादुर शास्त्री का नाम आया तो वह चुप हो गए कुछ नहीं बोले फिर लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हुई तो इंदिरा गांधी के समय जब इंदिरा गांधी प्राइम मिनिस्टर बनी थी उस समय भी मोरार जी देसाई प्राइम मिनिस्टर बनना चाहते थे दोनों के बीच में

35:31 प्रतिस्पर्धा हुई लेकिन सिंडिकेट ने इंदिरा गांधी को समर्थन दिया इसलिए इंदिरा गांधी प्राइम मिनिस्टर बन गई अब प्राइम मिनिस्टर इंदिरा गांधी हटी है तो फिर ये मतलब समझो इनका पुराना ही सपना था प्राइम मिनिस्टर बनने का तो यह कहां चुप बैठने वाले थे मुरार जी देसाई कह रहे थे मैं बनूंगा प्राइम मिनिस्टर अब चौधरी चरण सिंह जो थे किसान नेता ये कह रहे थे नहीं भाई प्राइम मिनिस्टर तो मैं बनूंगा इधर बाबू जगजीवन नाम थे ये कह रहे नहीं प्राइम मिनिस्टर तो मैं बनूंगा अब ये तीनों में तीनों आपस में लड़ने लगे कि भाई मैं बनूंगा इनकी यह विवाद ऐसा चलता रहा लेकिन अंत में क्या हुआ मोरार जी देसाई जीतते हैं इनको प्राइम बना दिया जाता है ठीक है यह प्रधानमंत्री बन जाते हैं अब यह प्रधानमंत्री बन तो गए हैं लेकिन इनके पास कोई विजन नहीं है मोरार जी देसाई प्रधानमंत्री बन गए पर पार्टी में खींचतान

36:16 जो थी वह वैसी ही बनी रही ठीक है और पार्टी के आलोचकों ने कहा कि जनता पार्टी के पास किसी कोई दिशा नहीं है कोई नेतृत्व नहीं है कोई कार्यक्रम नहीं है कोई एजेंडा नहीं है बस क्या है यह सी तरीके से इमरजेंसी के जो गलत हुआ था उसके कारण यह जीत कर आ गए वरना कुछ काम वाम इनको करना नहीं है जनता पार्टी कुछ समय बाद बिखर गई क्योंकि सब अलग-अलग थे मोरारजी देसाई की सरकार जो थी वह 18 महीने चल पाई बेचारे इतने समय से प्राइम मिनिस्टर बनने का सपना देख रहे थे 5 साल अपनी सरकार को नहीं चला पाए 18 महीने में सरकार जो थी गिर गई अब दूसरी सरकार बनी किसके समर्थन से कांग्रेस ने समर्थन कर दिया अब देखो कांग्रेस ने क्या खेल करा यहां पे कांग्रेस ने बोला कोई बात नहीं चौधरी चरण सिंह भी अ प्राइम मिनिस्टर बनना चाह रहे थे तो कांग्रेस ने कहा चरण सिंह

37:01 को कि आप प्राइम मिनिस्टर बन जाओ हम क्या करते हैं आपको सपोर्ट कर देते हैं हमारे पास भी तो भाई 154 के करीब सीटें हैं हम आपको सपोर्ट कर देते हैं तो चरण सिंह ने बोला ठीक है अब कांग्रेस ने इनको क्या करा इनके साथ कांग्रेस ने बहुत ज्यादा गलत करा इनको प्राइम मिनिस्टर बना दिया समर्थन करके लेकिन ठीक है समर्थन करके प्राइम मिनिस्टर बना दिया लेकिन तीन-चार महीने के बाद 4 महीने के बाद कांग्रेस ने अपना समर्थन वापस ले लिया अब वापस से समर्थन ले लिया तो चरण सिंह की सरकार जो थी वह दोबारा से गिर गई यानी 18 महीने के लिए बने मोरार जी देसाई 4 महीने के लिए बने चरण सिंह लेकिन प्राइम मिनिस्टर तो बना दिया गया इनको फिर क्या होता है मजबूरी में 1980 के जनवरी में लोकसभा के चुनाव दोबारा करवाने पड़ते हैं ठीक है क्योंकि

37:47 अब देखो 1977 में चुनाव हुए हैं तो 5 साल तो सरकार चलनी चाहिए ना लेकिन सरकार तो 5 साल नहीं चल पा रही है पहले ही गिर गई तो 1980 के बीच में इनको जनवरी में चुनाव कराने पड़े और इस चुनाव में जनता पार्टी जो थी वह बुरी तरीके से हार गई कांग्रेस वापस से इंदिरा गांधी वाली 353 सीटें ले आई और बहुमत के साथ आई मतदाता ने दिखाया कि जिस के अंदर ठीक है यहां पे टाइपिंग की मिस्टेक है कलह यानी जिस सरकार के अंदर कलह होती है कलह होती है तो मतदाता उसको क्या करते हैं भारी दंड देते हैं ठीक है जो सरकार ऐसे काम करती है वो ऐसे ही गिरती है यानी कि जनता पार्टी की सरकार नहीं चल पाई 1977 के बाद पिछड़े वर्गों की भलाई का मुद्दा हमारी राजनीति में आने लगा था बिहार में

38:34 ओबीसी आरक्षण को लेकर शोर मच रहा था इसके बाद जनता पार्टी की सरकार ने मंडल आयोग बना दिया था ठीक है जनता पार्टी की सरकार वही 1977 वाली सरकार जो 18 महीने चल रही है उसने क्या करा था ओबीसी के लिए एक मंडल आयोग बना दिया था ओबीसी को आरक्षण के लिए तो मंडल आयोग में आपसे पूछा जाता है कि मंडल आयोग के अध्यक्ष कौन थे बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल इनको शर्ट में आपको बीपी मंडल भी लिखा मिलेगा ठीक है बीपी मंडल तो यह बीपी मंडल जो थे इनकी अध्यक्षता में बना था इसका काम जो था वह पिछड़ी जातियों के बारे में जांच करनी थी और अपनी रिपोर्ट देनी थी तो इसने कहा था ओबीसी को 27 पर आरक्षण दे देना चाहिए यह मंडल आयोग की सिफारिश में था ठीक है तो यहां पर अपना जो चैप्टर है वो खत्म हो जाता है लास्ट आप क्या करना है एक बार इसको पढ़ लेना रेल

39:21 हड़ताल के बारे में इसमें बस आपको एक ही चीज याद रखनी है कि रेल हड़ताल में एक व्यक्ति का नाम आता है जो आपसे पेपर में पूछा जाता है वह है जॉर्ज फर्नांडिस इनके नेतृत्व में क्या हुई थे रेलवे के कर्मचारियों ने एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू कर दी थी बोनस और कुछ सेवा और कुछ सैलरी से रिलेटेड कुछ मुद्दे को लेके सरकार ने कहा था कि हम तुम्हारी इन मांगों को नहीं मानेंगे बाद में यह हड़ताल कुछ समय के बाद वापस ले ली गई थी ठीक है लेकिन यह जॉर्ज फर्नांडिस का एक नंबर का क्वेश्चन जो है आपसे एमसीक्यू में पूछ लिया जाएगा इसलिए मैं कह रहा हूं यह नाम याद रखना ठीक है तो यहां पे अपना चैप्टर खत्म हो है आई होप आपको अच्छे तरीके से समझ में आया होगा चैप्टर अगर आपको जरा भी डाउट है ना आप वीडियो को दो बार देख लो तीन बार देख लो आप कभी भूलोगे नहीं इसको तो थैंक्स फॉर वाचिंग लाइक कर दें वीडियो

40:08 को कमेंट कर दें शेयर कर दें और अगर आपने सब्सक्राइब नहीं किया है तो आप सब्सक्राइब कर दें ठीक है थैंक्स फॉर वाचिंग जय हिंद जय भारत

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