chapter 7 क्षेत्रीय आकांक्षाएँ class 12 political science 2024-25 ( kshetriya aakanshaen ) book 2

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की दूसरी पुस्तक के अध्याय 7, "क्षेत्रीय आकांक्षाएं" का विस्तृत विवरण है। इसमें 1980 के दशक में स्वायत्तता की मांगों, भारत सरकार के दृष्टिकोण, तनाव के क्षेत्रों, जम्मू और कश्मीर, पंजाब और पूर्वोत्तर भारत में क्षेत्रीय आंदोलनों जैसे विषयों को शामिल किया गया है। वीडियो का उद्देश्य इन जटिल मुद्दों को स्पष्ट करना और छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार करना है।

मुख्य बातें:

  • 1980 का दशक स्वायत्तता की मांगों का दशक था।
  • भारत सरकार क्षेत्रीय विविधता का सम्मान करती है और बातचीत के माध्यम से मुद्दों को सुलझाने का प्रयास करती है।
  • जम्मू और कश्मीर, पंजाब और पूर्वोत्तर भारत में विभिन्न क्षेत्रीय आकांक्षाएं और आंदोलन हुए।
  • मिजोरम में अलगाववादी आंदोलन को शांति समझौते के माध्यम से हल किया गया, जबकि नागालैंड की समस्या अभी भी अनसुलझी है।
  • असम में बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन आप्रवासियों के मुद्दे और संसाधनों पर उनके प्रभाव से संबंधित था।

भारत सरकार का नजरिया

1980 का दशक स्वायत्तता की मांगों का दशक था, जिसमें विभिन्न राज्यों से विशेष अधिकारों की मांग उठी। सरकार ने इन मांगों को संविधान के दायरे में रहकर बातचीत से सुलझाने का प्रयास किया। भारत में क्षेत्रीय विविधता का सम्मान किया जाता है, जो यूरोप के विपरीत है, जहां सांस्कृतिक विविधता को खतरे के रूप में देखा जाता है। अलगाववाद, क्षेत्रवाद और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के बीच अंतर को समझाया गया है। राष्ट्रवाद लोगों को एकजुट रखता है, और सरकार क्षेत्रीय आकांक्षाओं का सम्मान करती है और उन्हें बातचीत से सुलझाने का प्रयास करती है।

तनाव के दायरे

आजादी के तुरंत बाद भारत के सामने विभाजन, देशी रियासतों का विलय और विस्थापन जैसी कई चुनौतियाँ थीं। विदेशी पर्यवेक्षकों को संदेह था कि भारत एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रह पाएगा। जम्मू और कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का विषय बना रहा, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में अलगाववादी मांगें उठीं। दक्षिण भारत में द्रविड़ आंदोलन ने हिंदी भाषा का विरोध किया।

जम्मू और कश्मीर

जम्मू और कश्मीर में हिंसा हुई और कई परिवार विस्थापित हुए। इस क्षेत्र में तीन राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र थे: जम्मू, कश्मीर और लद्दाख। लद्दाख को अब केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है। 1947 से पहले, जम्मू और कश्मीर एक रियासत थी जिसका हिंदू शासक हरि सिंह था, जो स्वतंत्र रहना चाहता था। पाकिस्तान को लगता था कि मुस्लिम बहुल होने के कारण कश्मीर को पाकिस्तान में शामिल होना चाहिए। अक्टूबर 1947 में, पाकिस्तान ने घुसपैठियों को कश्मीर में भेजा, जिसके बाद हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी और विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान ने कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया, जिसे पीओके कहा जाता है। यह मामला संयुक्त राष्ट्र संघ में भी गया। 2019 में, अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया, जिससे जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था।

1948 के बाद की राजनीति

शेख अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री बनने के बाद भूमि सुधार किए, लेकिन केंद्र सरकार के साथ उनके मतभेद बढ़ गए। 1953 में उन्हें पद से हटा दिया गया। 1965 में, राज्य के प्रधानमंत्री के पद को बदलकर मुख्यमंत्री कर दिया गया। 1974 में, इंदिरा गांधी ने शेख अब्दुल्ला के साथ समझौता किया और उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाया। 1982 में शेख अब्दुल्ला की मृत्यु के बाद, उनके बेटे फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने, लेकिन उन्हें भी पद से हटा दिया गया। 1989 तक, राज्य एक अलग कश्मीर राष्ट्र बनाने के लिए उग्रवादी आंदोलन के कब्जे में चला गया। 1996 में, फारूक अब्दुल्ला फिर से सत्ता में आए। 2002 में, पीडीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनी। 2014 में, पीडीपी और बीजेपी ने मिलकर सरकार बनाई, और महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं। 2018 में, बीजेपी ने समर्थन वापस ले लिया, और राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। 2019 में, जम्मू और कश्मीर का पुनर्गठन हुआ और अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया गया।

पंजाब

पंजाब से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश बने। अकाली दल ने 1967 और 1977 में गठबंधन सरकारें बनाईं। 1970 में, अकाली दल ने पंजाब के लिए स्वायत्तता की मांग की। आनंदपुर साहिब प्रस्ताव में क्षेत्रीय स्वायत्तता की मांग की गई और सिखों के वर्चस्व का ऐलान किया गया। 1984 में, ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया, जिससे स्वर्ण मंदिर को नुकसान हुआ और सिख नाराज हो गए। 31 अक्टूबर 1984 को, इंदिरा गांधी की हत्या उनके सिख अंगरक्षकों ने कर दी। 1985 में, राजीव गांधी और हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच एक समझौता हुआ, जिसे पंजाब समझौता कहा जाता है। 1992 में, पंजाब में चुनाव हुए, लेकिन कम मतदान हुआ। 1997 में, अकाली दल और भाजपा सत्ता में आए।

पूर्वोत्तर

पूर्वोत्तर में सात राज्य हैं, जिन्हें सात बहनें कहा जाता है। नागालैंड 1963 में राज्य बना, जबकि मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा 1972 में राज्य बने। अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम 1987 में राज्य बने। मणिपुर और त्रिपुरा को छोड़कर, आजादी के समय पूरा इलाका असम कहलाता था। गैर-असमी लोगों पर असमी भाषा थोपी जा रही थी, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन हुए। 1960 में, ऑल पार्टी हिल्स ने असम से अलग एक जनजातीय राज्य की मांग की। असम से मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश बनाए गए।

अलगाववादी आंदोलन

मिजोरम में, 1959 में अकाल पड़ा, और असम सरकार की विफलता के कारण अलगाववाद की मांग उठी। लाल डेंगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट बनाया गया। 1966 में, मिजो नेशनल फ्रंट ने आजादी की मांग करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया। 1986 में, राजीव गांधी और लालडेंगा के बीच एक शांति समझौता हुआ, जिसके तहत मिजोरम को अलग राज्य बना दिया गया। नागालैंड में, अंगम जापू फिजो के नेतृत्व में 1951 में भारत से आजाद होने की घोषणा की गई। नागालैंड की समस्या का समाधान आज तक नहीं हो पाया है।

असम: बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन

असम में बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन आप्रवासियों के मुद्दे से संबंधित था। स्थानीय जनता आप्रवासियों को बाहरी मानती थी और उनके प्रति गुस्सा था। 1979 में, ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने विदेशियों के विरोध में आंदोलन चलाया। 1985 में, राजीव गांधी और आसू के नेताओं के बीच समझौता हुआ। आसू ने असम गण संग्राम परिषद के साथ मिलकर असम गण परिषद नामक एक राजनीतिक पार्टी बनाई, जिसने चुनाव जीता और सत्ता में आई।

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Transcript

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0:00 हेलो एवरीवन आज के इस वीडियो में हम डिस्कस करेंगे क्लास 12थ की पॉलिटिकल साइंस की जो सेकंड बुक है उसका चैप्टर नंबर सेवन देखिए यह जो क्षेत्रीय आकांक्षाएं चैप्टर है यह बाकी चैप्टर से बड़ा है तो यह वीडियो है थोड़ी लंबी हो सकती है एक घंटे के आसपास तो बहुत ध्यान से देखना है क्योंकि कई सारे टॉपिक है जो आपको अच्छे से समझते हुए चलना है ठीक है तो चलिए स्टार्ट करते हैं देखते हैं सिलेबस को देखिए एक बार ध्यान से आपका जो 2024 2 का सिलेबस है ठीक है लेटेस्ट सिलेबस जो है आपको यह सारे के सारे टॉपिक उसके अंतर्गत पढ़ने हैं तो एक बार यह टॉपिक देख लो ये सारे टॉपिक जो है इसमें कवर हो जाएंगे और नोट्स आपके जो हैं वह आपको वेबसाइट प मिल जाएंगे एकल study.com और इसकी पीडीएफ जो लेक्चर की पीडीएफ है वो तो आपको

0:54 telegram.com सर्च करना है तो चलिए स्टार्ट करते हैं वीडियो को देखते हैं सबसे पहला टॉपिक भारत सरकार का नजरिया देखिए क्या था कि 1980 का जो दशक है ना इसको स्वायत्ता के दशक के रूप में देखते हैं क्योंकि अलग-अलग राज्यों से अलग-अलग तरह की डिमांड आ रही थी मांगे हो रही थी ठीक है जो स्वायत्ता या विशेष अधिकार की मांग कर रहे थे तो ज्यादातर यह देखने को मिला तो इसीलिए 1980 का दशक यानी 1980 से लेके 1990 इन 10 साल के बीच में बहुत सारी ऐसी घटनाएं हुई हैं जो कि इस चैप्टर में हमको पढ़नी है जिसमें कहीं ना कहीं स्वायत्ता की डिमांड की गई थी तो यह इंपॉर्टेंट है कि 1980 के दशक को किस नाम से जाना जाता है तो आप क्या बोलोगे स्वायत्ता के दशक के नाम से जाना जाता है ठीक है सिंपल आगे चलते हैं आगे देखिए क्योंकि 10 सालों में देश के कई हिस्सों

1:42 में क्या हुआ स्वायत्ता की मांग उठ रही थी नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में नॉर्थ के राज्यों में कई जगह पे यह डिमांड हुई थी कई बार तो ऐसा भी हो गया कि संवैधानिक हदों को पार किया गया संवैधानिक हदों को पार करने का मतलब है गैर कानूनी तरीके से कार्य करना लड़ाई झगड़ा करना हिंसा दंगे करना ये चीजें भी देखने को मिलती है कई बार यहां के लोग जो थे उन्होंने अपनी मांगों के पक्ष में हथियार भी उठा लिए ठीक है कुछ लोगों ने हथियार भी उठाए हजारों लोगों की जान भी चली गई यहां तक हो चुका था और इन संघर्षों को रोकने के लिए सरकार ने क्या किया बातचीत का रास्ता अपनाया सरकार ने यह भी प्रयास किया कि विवाद जो है विवाद के जितने भी मुद्दे हैं उसको संविधान के दायरे में रहकर निपटाया जाए ठीक है सेना के दबाव से नहीं बल्कि संविधान में के दायरे में रहकर आपसी

2:27 बातचीत के जरिए इनकी समस्याओं को सुना जाए और उसको सुलझाया जाए यह हमारी सरकार का नजरिया था ठीक है अब देखो भारत के अंदर जो क्षेत्रीय विविधता है उसका सम्मान किया जाता है जैसे मान लो अलग-अलग भाषाओं को बोलने वाले लोग रहते हैं उनकी विचारधारा अलग है तो सबको एक साथ लेकर चला जाता है सम्मान किया जाता है ऐसा भारत में होता है लेकिन अगर आप यूरोप की बात करें ठीक है यूरोप के देशों में खासकर बेल्जियम या फिर अन्य कई देशों में तो वहां पे आपको इस तरह की चीजें नहीं देखने को मिलती ठीक है वहां पे कई बार विवाद हुआ है और वो बहुत बड़े लेवल पे हुआ है ठीक है वहां की कि सेना तक को उसको दबाना पड़ा है लेकिन हमारे यहां पे ऐसा नहीं हुआ उसको बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया तो भारत का जो नजरिया है भारत की सरकार का जो नजरिया है वो बिल्कुल अलग है तो देखिए भारत एक ऐसा देश है जहां पे विविधता जो है बहुत ज्यादा है या आपको

3:13 पता है यहां पे अलग-अलग धर्म के लोग रहते हैं अलग-अलग जाति में बटे हुए लोग हैं रंग रूप अलग है संस्कृति अलग है भाषाएं अलग है उनके रीति रिवाज कल्चर प्रथाएं सब कुछ अलग है ठीक है और भिन्न नजरिया यानी सबका जो एक एटीट्यूड है आप ये कह सकते हो उनका नजरिया दृष्टिकोण जो है वो भी आपको अलग देखने को मिलेगा ठीक है अलग-अलग नजरिए के लोग भारत में निवास करते हैं रहते हैं ऐसे में कहीं-कहीं पे अलगाववाद की मांग देखने को मिलती है जैसे पंजाब में खालिस्तान के नाम से हो गया या नॉर्थ ईस्ट के जो राज्य हैं वहां पे भी अलगाववाद देखने को मिलता है कहीं पे क्षेत्रवाद दिखता है ठीक है जो अपने क्षेत्र को ही बेहतर मानते हैं महाराष्ट्र में आपको ऐसा देखने को मिलेगा क्षेत्रीय आकांक्षाएं तो उठना लाजमी है बिल्कुल जायज है क्योंकि देखो एक ऐसा देश जो बहुत बड़ा देश हो जिसमें बहुत बड़ी जनसंख्या हो और इतनी ज्यादा वैरायटी हो जब

3:58 इतनी ज्यादा वैरायटी होगी इतनी ज्यादा विविधता होगी तो यह चीजें तो कॉमन है कि ये तो होना ही होना है ऐसा तो होगा ही होगा ठीक है लेकिन हमारी जो सरकार का नजरिया है ना वो इसको लेकर अच्छा है हमारी सरकार जो है वह क्षेत्रीय आकांक्षाओं को सम्मान देती है क्षेत्रीय और क्षेत्रवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करती है भारत में इतनी विविधता होने के बाद भी यहां पर राष्ट्रवादी जो भावनाएं हैं वह लोगों के अंतर है ठीक है अब यहां पे दो तीन टर्म्स ऐसी आई है जो आपको समझनी है एक तो है अलगाववाद सबसे पहले आपको अलगाववाद समझना है अल अलगाववाद का क्या मतलब होता है अलगाववाद का मतलब यह होता है कि जब कोई राज्य कोई स्टेट हमारे देश का अलग होने की बात करें जैसे कश्मीर के कुछ लोग पाकिस्तान से जुड़ने की बात करते थे ठीक है पंजाब के कुछ लोग खालिस्तान अलग बनाने

4:43 की बात करते हैं नॉर्थ ईस्ट में भी ऐसा आपको मिजोरम वगैरह में देखने को मिला था ठीक है नागालैंड में देखने को मिला था तो इसको कहा जाता है अलगा वाद जब देश से अलग होने की बात करने लगे ठीक है स्टेट से अलग होने की बात करने लगे क्षेत्रवाद में क्या होता है अपने क्षेत्र को वरीयता देना अपने लोगों को वरीयता देना दूसरे स्टेट के लोगों से नफरत करना महाराष्ट्र में आपने देखा होगा महाराष्ट्र में उन्होंने तो यह कह दिया था कि केवल जो मराठी लोग हैं जो महाराष्ट्र के लोग हैं उनको ही रखा जाएगा यहां पे जो यूपी और बिहार से जो मजदूर वगैरह काम करने जाते थे उनको वहां से भगाया जाएगा ऐसा ऐसा बोल दिया गया था इसको क्षेत्रवाद कहते हैं अपने क्षेत्र को तो वो बेहतर मान रहे हैं अपने क्षेत्र को लेकिन जो दूसरे क्षेत्र हैं हमारे देश के उसको उस तरीके से नहीं देखते तो ये क्षेत्रवाद की भावनाएं क्षेत्रीय आकांक्षाएं ये तीसरी टर्म है अलगाववाद समझ में आया क्षेत्रवाद समझ में आया क्षेत्र

5:29 आकांक्षा समझिए क्षेत्री आकांक्षा क्या होती है हमारे पूरे देश में अलग-अलग राज्यों से लोगों की अलग-अलग प्रकार की जो डिमांड आती है वो क्षेत्री आकांक्षा के रूप में हम उसको देख सकते हैं ठीक है इसको हम आगे और डिटेल में पढ़ेंगे जब आपको अच्छे से समझ में आएगा असम के लोग क्या डिमांड कर रहे थे मिजोरम के लोग क्या डिमांड कर रहे थे ठीक है कश्मीर और पंजाब के लोगों की क्या डिमांड थी जब आप यह सारे टॉपिक आगे जब पढ़ोगे तो आपको अपने आप समझ में आ जाएगा कि क्षेत्री आकांक्षाएं जो होती है व क्या होती है तो यह सारा क्लियर है अब देखो आगे चलते हैं राष्ट्रवाद जो है हमारे जनता के बीच में एकता का कहीं ना कहीं एकता बनाए रखती है अब लोगों के मन में क्या है राष्ट्रवाद यानी राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना है ठीक है अब राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना है लोगों के मन में तो कहीं ना कहीं व जोड़

6:16 कर रखती है लोगों को यूरोप में अगर आप देखोगे तो वहां पर सांस्कृतिक विविधता जो है उसको राष्ट्र के लिए खतरे के रूप में देखा जाता है लेकिन भारत में ऐसा नहीं है भारत की सरकार का नजरिया अलग है हम इस विविधता का सम्मान करते हैं इसको खतरे के रूप में नहीं देखते ठीक है तो यह हमारी सरकार का नजरिया यही हमको पढ़ना था अब आगे समझते हैं देखिए भारत में विविधता का सवाल जो है उस परे लोकतांत्रिक दृष्टिकोण अपनाया गया है सभी को समान माना गया है लोकतंत्र में क्षेत्रीय आकांक्षाओं के राजनीतिक अभिव्यक्ति की अनुमति है यानी किसी राज्य में किसी लोग को कोई किसी समुदाय को कुछ डिमांड चाहिए तो वो राजनीतिक रूप से कह सकते हैं ठीक है अपनी सरकारों से कह सकते हैं आंदोलन कर सकते हैं तो सरकार उसको सुनेगी यहां आजादी है कि कोई दल यानी कि कोई राजनीतिक पार्टी

7:01 क्षेत्रीय समस्या को आधार बनाकर लोगों की जो भावना है उसकी नुमाइंदगी करें ठीक है हमारे यहां पे बिल्कुल अलाउड है आपने देखा होगा संसद में अलग-अलग क्षेत्र के जो सांसद होते हैं वह अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को रखते हैं ठीक है तो यहां पे पूरी आजादी होती है कि जो उनकी क्षेत्रीय समस्या होती है उसको रखा जा सकता है क्षेत्रीय मुद्दे जो होते हैं और समस्या जो होती है उसके प्रति सरकार को नीति निर्माण पर विशेष ध्यान दिया दिया जाता है ठीक है हमारी जो सरकार है वह क्षेत्रीय मुद्दों और क्षेत्रीय समस्याओं को ध्यान में रख के अपनी जो पॉलिसी होती है उसको बनाती है कभी-कभी ऐसा भी होता है कि राष्ट्रीय एकता की राह में क्षेत्रीय आकांक्षाएं भारी पड़ जाए ऐसा हमें मिजोरम में देखने को मिला था ठीक है आगे हम जब मिजोरम पढ़ेंगे तब आपको अच्छे से समझ में आ जाएगा ऐसे में सरकार को सोच समझकर फैसला लेना चाहिए कहीं ऐसा ना हो कि देश में

7:48 अखंडता देश की क्षेत्री जो अखंडता होती है उसको कोई खतरा हो जाए ठीक है इसलिए सरकार को सोच समझ के फैसला लेना चाहिए आगे देखते हैं तनाव के दायरे देखिए आजादी के तुरंत बाद देश के सामने कुछ मुख्य समस्या थी हमारा देश आजाद होता है 1947 में अब 1947 में जब अपना देश आजाद हुआ तो तुरंत एक समस्या देखने को मिली देश का विभाजन हमने यह तो सोचा था कि देश आजाद हो जाएगा पर हमने कभी ये नहीं सोचा था कि देश आजाद होते ही देश का बंटवारा हो जाएगा तो एक तो समस्या भारत ने ये झेली फिर हमारे यहां पे दूसरी समस्या थी देशी रियासतों की समस्या ठीक है अब रियासतें भी अलग-अलग होना चाह रही थी उन सभी को एक साथ लेकर आना था यह भी हमने चैप्टर वन में पढ़ा हुआ है इस बुक के चैप्टर वन

8:34 में तीसरी समस्या थी विस्थापन की अब विस्थापन में क्या हो रहा था कि लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पर जाना पड़ा क्योंकि देश का बंटवारा हो गया तो भारत की तरफ से लोगों को पाकिस्तान जाना पड़ रहा था पाकिस्तान की तरफ से लोगों को भारत आना पड़ रहा था तो कई तरह की समस्याएं थी उस समय देश में तो यह आजादी के तुरंत बाद जो मुख्य समस्या सामने आई थी यह चीजें थी इसको डिटेल में हम चैप्टर वन में पढ़ चुके हैं अब देश के तथा विदेश के जो पर्यवेक्षक हैं जो एक्सपर्ट लोग थे उनका ऐसा मानना था कि भारत जो है ना वह ज्यादा दिनों तक एक राष्ट्र के रूप में नहीं रह पाएगा सबको ऐसा लग रहा था ठीक है क्यों लग रहा था क्योंकि भारत में इतनी ज्यादा विविधता है यह आपस में ही लड़ मरेंगे ऐसा किसका कहना था विदेशी लोग थे इसके बाद जम्मू और

9:20 कश्मीर का भी जो मामला है वह सामने आया कश्मीर जो है भारत और पाकिस्तान के बीच में विवाद का मामला हमेशा से रहा है आपने देखा है कश्मीर के लोगों की जो आकांक्षाएं हैं वह कश्मीर में कहीं ना कहीं अलगाववाद की समस्या को दिखाती है ठीक है क्योंकि कई लोग ऐसे हैं कश्मीर में जो कहीं ना कहीं पाकिस्तान की तरफ उनका रुख देखने को मिलेगा आपको ठीक है नॉर्थ ईस्ट के राज्यों की अगर हम बात करते हैं पूर्वोत्तर की तो भारत के अंग होने पर सहमति है खासकर नागालैंड जैसे स्टेट को आप देखोगे सिक्किम को देखोगे ठीक है नागालैंड मिजोरम अलगाववाद की मांग के रूप में कहीं ना कहीं आपको देखने को मिलेगा इसके बारे में ना आगे पढ़ेंगे पूरा का पूरा टॉपिक है बहुत बड़े टॉपिक है तो यहां पे आपको बेसिक इंट्रो के रूप में समझना है अब बात कर लेते हैं साउथ की यानी दक्षिण भारत को देख

10:05 लेते हैं दक्षिण भारत क्या है दक्षिण भारत में आपका यह जो नीचे का हिस्सा आ जाता है यह सारा इसमें आ जाएगा ठीक है दक्षिण भारत में एक आंदोलन चलता है जिसको द्रवीण आंदोलन कहा गया द्रवीण आंदोलन जो था यह तमिलनाडु में हुआ था और इसमें हिंदी भाषा का विरोध किया गया था यह जो लोग हैं ये तमिल भाषा बोलते हैं तो यह हिंदी का विरोध करते थे और तमिल को कहीं ना कहीं अ मेन भाषा के रूप में महत्व देने की ये बात करते थे इसलिए यहां पे आंदोलन हुआ था तो इसको आपको इतना ही समझना है इससे ज्यादा डिटेल में नहीं जाना जो मेन टॉपिक है वो आपका जम्मूकश्मीर का है हालांकि बहुत बड़ा टॉपिक है क्वेश्चन इतना बड़ा नहीं आता लेकिन फिर भी हमें क्या करना है सब कुछ अच्छे से पढ़ना है तो जम्मूकश्मीर आप मैप में देख सकते हो कहां पर है ठीक है भारत में जो सबसे ऊपरी हिस्सा आपको यहां दिखता है मैप में ये आपका जम्मू-कश्मीर वाला हिस्सा हो जाता है इसको देख लेते हैं देखिए जम्मू-कश्मीर को

10:52 डिटेल में समझना जम्मू-कश्मीर जो है यहां पे हिंसा बहुत हुई और हजारों लोगों की यहां पे जान गई है बहुत सारे परिवार यहां से विस्थापित हुए हैं जम्मू और कश्मीर में तीन राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र थे एक है जम्मू एक है कश्मीर और एक है लद्दाख ठीक है अब क्या हुआ है पहले तो यह पूरा एक कंबाइन ही होता था लेकिन अब इनको क्या करा है अलग कर दिया गया है सरकार ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है और जम्मूकश्मीर को भी ठीक है लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग बिल्कुल एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया जिसकी वजह से लद्दाख जो है वह काफी खुश है लद्दाख इस चीज से खुश है कि उसको अलग से बना दिया गया क्यों क्योंकि हमेशा जम्मू कश्मीर की बात जब भी होती थी तो कश्मीर को ज्यादा वेटेज मिलती थी ठीक है लद्दाख को बिल्कुल भी वेटेज नहीं मिलती थी इसलिए लद्दाख बिल्कुल ही अलग हो गया है अब जम्मूकश्मीर

11:38 जो है ये अभी एक साथ है ठीक है लेकिन केंद्र शासित प्रदेश बना दिए गए हैं ये विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है ठीक है आगे देखिए कश्मीर की अगर हम डेमोग्राफी को देखें तो कश्मीर में आपको हिंदू मुस्लिम और सिख ठीक है तीनों तरह के लोग जो हैं वो आपको देखने को मिलते हैं तीनों समुदाय आपको देखने को मिलते हैं लद्दाख की बात करें तो यहां पर बौद्ध रहते हैं और मुस्लिम रहते हैं ठीक है कश्मीर की समस्या को समझते हैं कि कश्मीर की समस्या क्या है तो कश्मीर की समस्या की जड़े देख लेते हैं देखिए 1947 से पहले जम्मू कश्मीर जो था एक रियासत होता था और यहां पर जो शासक था वह हिंदू शासक था हरि सिंह उसका नाम होता था और यह हिंदू शासक था जब हरि सिंह जो थे वह भारत में शामिल नहीं होना चाहते थे वह अपनी जो रियासत है उसको स्वतंत्र रखना

12:26 चाहते थे आजाद रखना चाहते थे ठीक है और पाकिस्तान को ऐसा लगता था कि ज्यादा आबादी जो है यहां की वो मुस्लिम है यानी यहां पे मुस्लिम ज्यादा रहते हैं तो इसलिए जम्मू और कश्मीर जो है वह पाकिस्तान में शामिल हो जाना चाहिए और यहां के लोग जो थे वह खुद को सबसे पहले मानते हैं कश्मीरी ठीक है ये अपने आप कश्मीरी में मानते हैं इसका मतलब क्या है ये कहीं ना कहीं क्षेत्रवाद वाली चीजें आ जाती है ठीक है शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में एक आंदोलन चला शेख यह चाहते थे कि जो राजा है जो हरी सिंह है ठीक है वह अपना जो पद है उसको छोड़ दें नेशनल कॉन्फ्रेंस नाम का एक इनका धर्म निरपेक्ष संगठन था नेशनल कॉन्फ्रेंस का कांग्रेस के साथ गठबंधन होता था ठीक है और नेहरू और शेख जो होते हैं शेख

13:11 अब्दुल्ला यह दोनों मित्र होते थे एक समय में अक्टूबर 1947 में क्या होता है पाकिस्तान ने घुसपैठियों को कश्मीर में भेजा कब्जा करने के लिए क्योंकि पाकिस्तान को ऐसा लग रहा था कि वहां की जो ज्यादातर आबादी है कश्मीर की वह मुस्लिम है तो वह उनको सपोर्ट करेगी उनके साथ रहे रहेगी ठीक है अब कश्मीर के महाराजा ने जब देखा कि भाई पाकिस्तान की तरफ से यह हो रहा है तो उन्होंने भारत की जो सेना थी उनसे मदद मांगी ठीक है मजबूर हो गए मदद मांगने के लिए भारतीय सेना ने क्या करा उनको तुरंत मदद दे दी भारत सरकार ने महाराजा से विलय पत्र यानी जो इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन था उस परे सिग्नेचर करा लिए पाकिस्तान ने कश्मीर के एक बड़े हिस्से में कब्जा कर लिया जो पाकिस्तान में चला गया ठीक है जिसको क्या कहा जाता है पीओके यानी पाक

13:57 अधिकृत कश्मीर कहा जाता है अब यह मामला जो था यह संयुक्त राष्ट्र संघ यानी कि यूएनओ में भी चला गया हालांकि यह नेहरू जी की गलती थी क्योंकि उस समय जो युद्ध हो गया था भारत और पाकिस्तान के बीच में तो भारत तो उसे जीतना ही था ऐसे में यूएनओ जाके गुहार लगाने की कोई जरूरत नहीं थी हमारा वह जो क्षेत्र पाकिस्तान के कब्जे में चला गया वो तब से उनके कब्जे में है आप सुनते हो ना कि पीओके को वापस लिया जाएगा ऐसा कहा जाता है यह पीओके जो है वो जम्मू कश्मीर का ही कुछ हिस्सा था जो पाकिस्तान की तरफ चला गया है 21 अप्रैल 1948 को जो यूएनओ है संयुक्त राष्ट्र संघ है उसका प्रस्ताव आया उसमें यह बातें की गई कि पाकिस्तान को अपने ठीक वो सारे नागरिक वापस बुलाने हैं जो कश्मीर में घुस गए हैं पहला पॉइंट ये था फिर भारत को धीरे-धीरे अपनी सेना को कम करते रहना

14:43 है ठीक है ताकि हालात जो है सामान्य हो जाए और वहां पर एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह करा लिया जाए कश्मीर में कि वहां के जो लोग हैं वह क्या चाहते हैं ठीक है स्वतंत्र रहना चाहते हैं भारत में रहना चाहते हैं पाकिस्तान में रहना चाहते हैं कुछ इस प्रकार का जन्मत संग्रह की बात यहां पर करा दी गई थी अब देखो दो तरह के वर्ग हैं ठीक है आपको पता है जो जम्मू कश्मीर है उसको आर्टिकल 370 के तहत विशेष अधिकार प्राप्त थे ठीक है स्वायत्ता प्राप्त थी लेकिन अब यहां पे दो तरह के वर्ग हैं एक वर्ग य ऐसा था जो कहता था कि 370 को खत्म कर देना चाहिए क्योंकि 370 के तहत जम्मूकश्मीर जो है एक अलग राज्य है भारत के जो संविधान है उसकी सारी चीजें उस परे लागू नहीं होती कहीं ना कहीं वह भारत के अन्य राज्यों से उसको डिफरेंट बना देता है और कहीं ना कहीं रोकता है भारत जैसा राज्य बनने से ठीक है

15:29 तो कुछ लोग ऐसे थे जो कहते थे 370 से प्राप्त जो स्वायत्ता है व तो कम है बल्कि हमको तो और अधिक अधिकार देने चाहिए यानी कि अलग-अलग तरह की विचारधारा के लोग हैं यहां पे ठीक है यह दोनों आपको समझना है आगे देखते हैं 2019 में क्या होता है जम्मू कश्मीर से जो आर्टिकल 370 है उसको मोदी जी की सरकार ने क्या कर दिया वहां से रिमूव कर दिया इससे जो विशेष राज्य का उसको दर्जा मिला हुआ था व खत्म हो गया लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बना दिया ठीक है वह पूरी तरीके से केंद्र शासित प्रदेश हो गया है और जो जम्मू कश्मीर है इसको विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया यानी कि केंद्र शासित प्रदेश तो रहेगा लेकिन विधानसभा वाला यहां पे विधानसभा भी रहेगी इलेक्शन भी होंगे अभी जम्मू कश्मीर में विधानसभा

16:15 इलेक्शन भी हुए हैं जस्ट उसका रिजल्ट भी आया ठीक है आपने देखा होगा 1948 के बाद से देखते हैं क्या राजनीति हुई ठीक है यहां पे ये जो मैंने आपको बता दिया ना ये वैसे लास्ट में पढ़ना था क्योंकि इससे पहले आपको ये 1948 से लेर कि पूरी स्टोरी पढ़नी है कि देश आजाद हुआ तब कश्मीर कैसा था फिर धीरे-धीरे धीरे-धीरे कैसे आते गए कौन सा नेता आया वो सब कुछ पढ़ के एंड में जाके आपको यह पढ़ना था लेकिन मैंने आपको फिर भी स्टार्टिंग में बता दिया अब देखो 1948 से कैसी राजनीति यहां पे थी इसको देखते हैं प्रधानमंत्री बनने के बाद शेख अब्दुल्ला ने भूमि सुधार और अन्य नीतियां शुरू कर दी जिससे लोगों को लाभ हुआ अब देखो जम्मूकश्मीर में जो पद होता है ठीक है जम्मूकश्मीर में जो मुख्यमंत्री का पद होता है जो जैसे बाकी स्टेट में सीएम कहा जाता है लेकिन यहां पे उसको पीएम कहा जाता

17:02 था यानी प्रधानमंत्री कहा जाता था ठीक है ये जो प्रधानमंत्री है ना ये जम्मूकश्मीर के प्रधानमंत्री हैं ठीक है लेकिन कभी ऐसा होता है किसी स्टेट का प्रधानमंत्री हो ऐसा तो होता ही नहीं प्रधानमंत्री तो देश का होता है राज्य में तो मुख्यमंत्री होता है लेकिन वहां पे प्रधानमंत्री का पद होता था उसको प्रधानमंत्री के नाम से जानते थे तो प्रधानमंत्री बनने के बाद जो शेख अब्दुल्ला थे जो कि नेहरू के मित्र थे इन्होंने भूमि सुधार के काम शुरू कर दिए जिससे कि जनता को लाभ हुआ लेकिन कश्मीर के दर्जे पर उनकी स्थिति के विषय में उनके और केंद्र सरकार के बीच में मतभेद बढ़ता रहा ठीक है हालांकि ये कांग्रेस के सपोर्टर थे कांग्रेस के समर्थन से थे लेकिन इनके बीच में विवाद हो गया फिर उन्हें 1953 में क्या हुआ विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया था कि 1953 में उनको पद से हटा दिया गया ठीक है पद कर दिया गया आपकी किताब में ऐसे कुछ वर्ड लिखा होगा यानी उनको पद से हटा

17:48 दिया गया कई वर्षों तक कैद करके उनको रखा गया और इसके बाद नेतृत्व इसके बाद के नेतृत्व को उतना लोकप्रिय समर्थन नहीं मिला क्योंकि जो शेख अब्दुल्ला थे थे ना वो कश्मीर में थोड़ी उनकी मतलब अच्छी रेपुटेशन थी इसलिए उसके बाद जो नेता आए उनको वो वैल्यू नहीं मिली 1953 और 1974 की बीच का जो समय था इसमें कांग्रेस पार्टी ने क्या करा राज्य की नीतियों को पूरी तरीके से प्रभावित किया नेशनल कॉन्फ्रेंस जो कि शेख अब्दुल्ला की पार्टी थी अब वह शेख अब्दुल्ला के बिना एक धड़ा जो है कांग्रेस का एक्टिव समर्थन के साथ कुछ समय तक सत्ता में रहा और बाद में कांग्रेस में मिल गया अब यहां पे एक चीज समझना है कि जो नेशनल कॉन्फ्रेंस है ठीक है शेख अब्दुल्ला वाली और कांग्रेस यह गठबंधन में है अब नेशनल कॉन्फ्रेंस के शेख

18:35 अब्दुल्ला को तो इन्होंने मान लो जेल में डाल दिया नजर बंद कर दिया तो इसके बाद जो नेशनल कॉन्फ्रेंस के अन्य लोग हैं वो कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में रहे ठीक है यह बताया गया है इस प्रकार कांग्रेस को राज्य पर सीधा नियंत्रण मिल गया था और 1965 में जम्मूकश्मीर के संविधान के प्रावधान में एक परिवर्तन किया गया वह परिवर्तन यह था कि राज्य के प्रधानमंत्री का पद नाम जो है वह बदलकर मुख्यमंत्री कर दिया गया अब समझ में आया आपको जैसे कि हमारे सभी स्टेट में सीएम होते हैं चीफ मिनिस्टर होते हैं मुख्यमंत्री होते हैं ऐसे जम्मूकश्मीर में मुख्यमंत्री नहीं होते थे वहां के मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था लेकिन 1965 में बाद में चेंजेज किया गया संविधान में अब प्रधानमंत्री नहीं वह मुख्यमंत्री कहलाएगा ठीक है यह कर दिया गया आगे देखते हैं इसके

19:22 बाद जो कांग्रेस है उसके गुलाम मोहम्मद सादिक जो है उनको यहां का सीएम बना दिया गया 1974 में इंदिरा गांधी आती है ठीक है इंदिरा गांधी जब आई तो उन्होंने शेख अब्दुल्ला के साथ एक समझौता करा यह वही शेख अब्दुल्ला है जिनको इन्होंने जेल में डाला हुआ था फिर राज्य के मुख्यमंत्री उनको बना दिया यानी कि कभी ऐसा हुआ था कि शेख अब्दुल्ला से कांग्रेस का के बीच में नहीं बनी मिसअंडरस्टैंडिंग हो गई या जो भी हो गया उसकी वजह से उन्होंने उनको जेल में डाल दिया सीएम पद से हटा दिया लेकिन इंदिरा गांधी आती है तो वापस से समझौता करके उनको वापस से क्या बना देती है सीएम बना देती है उन्होंने नेशनल कॉफ को दोबारा से जीवित किया ठीक है जिसने 1977 के विधानसभा चुनाव में बहुमत प्राप्त करा क्योंकि 1977 में जब चुनाव होते हैं और नेशनल कॉन्फ्रेंस की तरफ से वो शेख

20:09 अब्दुल्ला आ जाते हैं क्योंकि ये फेमस थे इनको सब जानते थे तो कहीं ना कहीं इसको सपोर्ट अच्छा मिलता है और वहां पे वापस से इनको बहुमत मिल जाता है ठीक है फिर देखो क्या होता है पूरी स्टोरी समझनी है शेख अब्दुल्ला ने 1982 में 1982 में इनका निधन हो जाता है और नेशनल कॉन्फ्रेंस जो है उसका का नेतृत्व जो है उनके बेटे करते हैं फारूक अब्दुल्ला और इनको वहां का सीएम बना दिया जाता है जल्दी राज्यपाल के द्वारा उनको भी पद से हटा दिया जाता है ठीक है और नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग हुआ एक गुट छोटे समय के लिए सत्ता में आता है अब इनको भी हटा दिया यानी कि अभी उनके जो पिता के साथ होता था वैसा ही इनके साथ भी किया गया केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से फारूक अब्दुल्ला की सरकार जो थी उसको हटाने के बाद कश्मीर में कहीं ना कहीं लोगों के मन में नाराजगी हुई ठीक है वहां के लोग नाराज हुए फिर सशस्त्र

20:55 विद्रोह होता है वहां पे उसको समझते हैं तो देखिए यह तो वातावरण जो था इसमें 1987 के विधानसभा चुनाव होते हैं सरकारी जो परिणाम होते हैं उसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस को बहुत ज्यादा अच्छी सीटें मिलती है जीत दिखाई जाती है फारूक अब्दुल्ला जो है वह मुख्यमंत्री के रूप में वापस लौट जाते हैं ठीक है ऐसा माना गया था कि संपूर्ण चुनाव जो प्रक्रिया थी उसमें कहीं ना कहीं गड़बड़ी हुई है घोटाला किया गया है 1989 तक राज्य एक पृथक कश्मीर राष्ट्र बनाने को लेकर उग्रवादी आंदोलन के कब्जे में चला जाता अब यहां पर क्या होता है एक नई चीज शुरू होती है अभी तक तो आप यह मेन मेन चीजें समझ रहे थे कि भाई शेख अब्दुल्ला था उनको हटाया गया किसी और को लाया गया फिर उनकी उनकी डेथ हो जाती है उनके बेटे को सीएम बनाया जाता है फिर उसको हटाया जाता है यह सब चल रहा था लेकिन 1989

21:41 में क्या होता है एक नया मुद्दा आ जाता है कि राज्य मतलब एक अलग राज्य यानी कश्मीर को एक अलग राज्य बना दिया जाए भारत से अलग कर दिया जाए कुछ इस तरीके से अलगाववाद वाली बातें चलती हैं इन विद्रोहियों को पाकिस्तान से सपोर्ट मिलता है कहीं ना कहीं पाकिस्तान पैसा आर्थिक हर तरह की चीज जिनको हथियार वगैरह सब दे रहा होता है कई वर्षों तक कश्मीर में राष्ट्रपति शासन चला और यहां पे सेना और इनके बीच में ऐसा चलता रहा 1990 का जो पूरा समय था वह जम्मू और कश्मीर ने विद्रोहियों के हाथ में सेना की कार्रवाई से असाधारण हिंसा यहां पे देखने को मिली यानी कि सेना और उग्रवादियों के बीच में चलता रहा जिसकी वजह से वहां के लोगों को भी नुकसान हुआ राज्य में 1996 में जाकर फिर से विधानसभा के चुनाव हुए जिसमें फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जो नेशनल कॉन्फ्रेंस थी ठीक है और कश्मीर

22:28 का जो क्षेत्रीय स्वायत्ता की मांग करते हुए वापस से सत्ता में आती है दोबारा से इनको सत्ता मिल जाती है और फिर 2002 में जम्मू और कश्मीर राज्य में दोबारा से चुनाव होते हैं यहां पर नेशनल कॉन्फ्रेंस को बहुमत नहीं मिलता है ठीक है इसकी जगह पर वहीं की एक पार्टी होती है पीडीपी ठीक है अ पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी इसको कहीं ना कहीं समर्थन मिल जाता है तो अब क्या था अभी तक आपने देखा नेशनल कॉन्फ्रेंस प्लस कांग्रेस इनकी सरकार चली आ रही थी अभी तक हमने य देखा लेकिन अब पीडीपी प्लस कांग्रेस की सरकार बनी क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस को इस बार वोट उतने नहीं मिले थे ठीक है आगे देखो क्या होता है 2002 और इसके बाद फिर गठबंधन के समझौते के अनुसार मुफ्ती मोहम्मद जो थे वह पहले 3 साल के लिए सीएम बना दिए जाते हैं जिनके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गुलाम नवी

23:15 आजाद जो थे वो सीएम बनते हैं यानी इनके बीच में एक समझौता होता है कि पीडीपी का जो सीएम होगा ठीक है वो 3 साल के लिए होगा शुरू में और बाद में जो होगा सीएम वह कांग्रेस का होगा 2 साल के लिए होगा तो 3 साल के लिए तो भाई यह मुफ्ती मोहम्मद जो थे यह बन जाते हैं सीएम उसके बाद 2 साल के लिए बनते हैं गुलाम नवी आजाद जो कि कांग्रेस की तरफ से होते हैं और 2008 में फिर यहां पे क्या लगा दिया जाता है राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाता है यहां पर बार-बार राष्ट्रपति शासन लग रहा था इसके कारण यह अपना जो कार्यकाल है उसको पूरा नहीं कर पाते हैं फिर उसके बाद अगला चुनाव होता है 2008 में नवंबर दिसंबर में ठीक है और नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार बन जाती है एक मिलीजुली सरकार फिर 2009 में उमर अब्दुल्ला जो थे उन के नेतृत्व में सत्ता में दोबारा से आ रहे हैं फिर देखो क्या होता है फिर राज्य

24:03 को लगातार हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के द्वारा पैदा की गई गड़बड़ियों का सामना करना पड़ता है हुर्रियत जो थे वहां पे कट्टर पति संगठन है जो कि कहीं ना कहीं वहां के लोगों को भड़काता है और वहां पे दंगे वगैरह करवाता है ठीक है तो 2014 में राज्य में फिर से चुनाव होते हैं जिसमें पिछले 25 सालों से सबसे ज्यादा मतदान हुआ जिसमें पीडीपी की जो मुफ्ती मोहम्मद सईद थी ये नेतृत्व में कहीं ना कहीं आती है और बीजेपी के साथ सरकार बनाती है ठीक है तो अभी तक आपने क्या देखा नेशनल कॉन्फ्रेंस प्लस कांग्रेस इनकी सरकार थी फिर एक बार आपने यह भी देखा पीडीपी प्लस कांग्रेस यही देखा आपने आज तक लेकिन 2014 के चुनाव में थोड़ा सा अलग हो जाता है पीडीपी के साथ आ जाती है बीजेपी यह सरकार बना लेती है ठीक है महबूबा मुफ्ती वाली जो यह पीडीपी पार्टी है इसकी बात कर रहे हैं और मुफ्ती

24:49 मोहम्मद सईद के निधन के बाद उनकी जो बेटी थी महबूबा मुफ्ती वो यहां पे सीएम बन जाती है और यह पहली महिला सीएम थी ठीक है जम्मूकश्मीर के लिए अब देखो आगे क्या होता है फिर महबूबा मुफ्ती के कार्यकाल में वहां पर फिर से दंगे वगैरह ये सारी चीजें होने लग जाती है बाहरी तनाव ज्यादा बढ़ने लग जाता है तो 2018 में क्या होता है बीजेपी जो होती है वो अपना समर्थन जो है वो खींच लेती है वापस तो फिर से वहां पे उनकी सरकार गिर जाती है और राष्ट्रपति शासन लग जाता है इसके बाद 2019 में जम्मूकश्मीर में पुनर्गठन होता है और कहीं ना कहीं जो आर्टिकल 370 था उसको समाप्त कर दिया जाता है ठीक है उसको वापस से पुनर्गठित किया जाता है और दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिए जाते हैं जो जम्मू कश्मीर लद्दाख मिलाकर जम्मू कश्मीर हो रहा रहा था अब उसको दो हिस्सों में बांट दिया एक हो गया जम्मू एंड कश्मीर और दूसरा हो गया लद्दाख ठीक है दोनों ही केंद्र शासित

25:35 प्रदेश हैं एक यह विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश है और यह बिना विधानसभा वाला ठीक है तो इस तरीके से इसको बना दिया जाता है जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में भारत में जो बहुलवादी समाज है यह आपको दिख सकता है क्योंकि यहां पर केवल सभी प्रकार के धार्मिक सांस्कृतिक और भाषाई जाती और जनजातीय विविधता देखने को मिलती है बल्कि यहां पर विविध प्रकार की जो राजनीतिक और विकास की आकांक्षाएं यह भी आपको कहीं ना कहीं देखने को मिलती है तो एक अच्छा एग्जांपल आप इसको मान सकते हो तो यहां पर अपना जम्मू कश्मीर का टॉपिक था जो खत्म हो जाता है यहां से कोई इतना बड़ा क्वेश्चन आता नहीं है जितना हमने यह पढ़ा है अब्दुल्ला परिवार फिर बाद में क्या होता है फिर वो नेशनल कॉन्फ्रेंस पीडीपी इतना नहीं आता पेपर में ठीक है लेकिन फिर भी अपने को पढ़ना था जो आपके एनसीआरटी में

26:21 दिया मैंने पढ़ा दिया है क्वेश्चन कैसे आएंगे मैं इंपोर्टेंट क्वेश्चन की जब सीरीज लाऊंगा वहां पर करा दूंगा अगला टॉपिक है पंजाब पंजाब में भी कुछ ऐसा ही रहता है लेकिन पंजाब को मैं आपको और शॉर्ट में पढ़ाऊंगा ताकि आपको और अच्छे समझ में आए देखिए पंजाब एक ऐसा राज्य था जो कि बहुत बड़ा क्षेत्रफल में था पंजाब से ठीक है पंजाब से पंजाब तो हुआ ही इससे एक हरियाणा अलग हो जाता है और इसी से अलग हो जाता है हिमाचल प्रदेश तो ज्यादातर बच्चे यह जानते होंगे कि पंजाब और हरियाणा अलग हुए हैं लेकिन बहुत सारे बच्चे हो सकता है यह ना जानते हो कि हिमाचल प्रदेश भी इन्हीं से अलग हुआ है यह याद रखना है और पंजाब का एक और हिस्सा था जो कि पाकिस्तान में चला जाता है ठीक है पाकिस्तान में भी कुछ पंजाब का हिस्सा यानी पंजाब कितना बड़ा स्टेट था कि उससे आपने पंजाब भी बना दिया हरियाणा भी बना दिया हिमाचल प्रदेश भी बना दिया और उसका

27:07 कुछ हिस्सा पाकिस्तान में भी चला गया तो ये था पूरा ठीक है तो पंजाब से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश बने 1966 में राज्य पुनर्गठन हुआ था यहां पे और यहां 1920 के दशक से एक पार्टी है जिसका नाम है अकाली दल इसका गठन हुआ था और अकाली दल ने पंजाब सूबे का गठन के लिए आंदोलन चलाया था ठीक है क्योंकि यहां पे अकाली दल को ज्यादा समर्थन प्राप्त है पंजाबी भाषी सूबे में सिख लोग जो हैं वह बहुसंख्यक हैं तो सिख जो हैं वह कहीं ना कहीं अकाली दल वगैरह का समर्थन करते थे ठीक है अब थोड़ा सा राजनीतिक संदर्भ में इसको देखते हैं पंजाब को समझने की कोशिश करते हैं अकाली दल ने क्या किया 19 दो बार सरकार बनाई थी एक तो 1967 में बनाई थी और दूसरी 1977 में बनाई थी और दोनों बार जो सरकार बनाई थी वो गठबंधन वाली सरकार बनाई थी केंद्र सरकार

27:53 ने क्या करा अकाली दल की जो सरकार थी उसके कार्यकाल से पहले ही उसको ब खस्त कर दिया ठीक है अकाली दल को हिंदुओं का कम समर्थन प्राप्त था क्योंकि अकाली दल जो थी वो सिख ज्यादातर सिख लोग जो थे उनका ही समर्थन इसको ज्यादा मिला हुआ था सिख समुदाय जो था वो भी जाति में बटा हुआ था वर्गों में बटा हुआ था कांग्रेस को अकालिया से ज्यादा समर्थन प्राप्त था ठीक है यहां पे कांग्रेस को ज्यादा समर्थन प्राप्त है अकालिया से 1970 में क्या हुआ अकालिया के एक तबके ने पंजाब के लिए स्वायत्ता की मांग कर दी कि भाई पंजाब को कुछ विशेष अधिकार चाहिए वो तो हमको चाहिए इसके लिए इन्होंने आंदोलन भी कर दिया ठीक है फिर इसके बाद आनंदपुर साहिब प्रस्ताव जो होता है यह याद रखना है यह आपके पेपर में आता है इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है यह ज्यादातर पेपर में पूछा जाएगा तो

28:38 देखिए यह जो प्रस्ताव था इसमें क्या हुआ था जो क्षेत्रीय स्वायत्ता है इसकी मांग की गई थी केंद्र राज्य के संबंध जो है इसको प्रभावित करने की मांग की गई दोबारा से ठीक है कहीं ना कहीं उसको दोबारा से उसकी व्याख्या करने की मांग की गई सिखों के वर्चस्व का ऐलान हुआ कि भाई पंजाब जो है वह सिखों का है और सिखों का यहां पर वर्चस्व है इस तरीके की बातें की गई और इसे एक अलग सिख राष्ट्र के मांग के रूप में भी देखा गया है कई बार इसको ऐसा भी देखा जाता है कि यह जो है यह अलग सिख राष्ट्र बनाना चाहते थे ठीक है इस प्रस्ताव का सिख समुदाय पर कोई बहुत ज्यादा असर नहीं हुआ था ठीक है इसका काफी कम असर है और 1980 में अकाली दल की जो सरकार है उसको बर्खास्त कर दिया गया और अकाली दल ने क्या किया पंजाब तथा पड़ोसी राज्यों के बीच में पानी का जो बंटवारा था उस मुद्दे को लेकर भी इन्होंने आंदोलन चला

29:24 दिया फिर क्या-क्या होता है आगे समझिए अब यहां पे हिंसा हो जाती है पंजाब के अंदर पंजाब में हिंसा जो होती है एक लंबे समय तक यहां पे हिंसा चली तो देखिए आंदोलन जो था इन्होंने किया था उसने विद्रोह का रूप ले लिया उग्रवादियों ने क्या करा अमृतसर का जो स्वर्ण मंदिर है गोल्डन टेंपल जो है उसको अपना मुख्यालय बना दिया गोल्डन टेंपल को पूरी तरीके से हथियारों से भर दिया था यानी इन्होंने इस मंदिर को एक हथियार बंद किले के रूप में तब्दील कर दिया था सरकार ने क्या करा जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार चला दिया उस समय में इंदिरा गांधी की सरकार थी ऑपरेशन ब्लू ब्लू स्टार्स के तहत इनको जो यह स्वर्ण मंदिर था उसको वो उग्रवादियों से छुड़वाना था ठीक है तो सरकार ने क्या करा उग्रवादियों को वहां से भगा दिया लेकिन इसमें जो स्वर्ण मंदिर है उसको भी नुकसान हो गया क्योंकि भाई गोलिया चलेगी तो कुछ

30:10 नुकसान तो हो ग ही जिससे जो सिख लोग थे वो भड़क गए उन्होंने कहा कि भाई हमारे मंदिर पर तुमको हमला नहीं करना चाहिए था और इससे हमारी धार्मिक जो भावनाएं हैं गोल्डन टपल जो था इनका इनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती है ऐसी इन्होंने बात कर दी तो सिख इस बात से बहुत नाराज हुए थे ठीक है कुछ दिन के बाद क्या हुआ उस ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लिया गया तो 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी जो थी उनके दो जो बॉडीगार्ड थे अंगरक्षक थे जो कि सिख थे उन्होंने उनको गोली मार के उनकी हत्या कर दी इसको ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला माना गया इंदिरा के अंगरक्षक ने इस घटना से पू जो अंगरक्षक जो थे उन्होंने उनकी जब हत्या करी तो उसके बाद पूरा देश शौक में डूब गया क्योंकि देश की प्राइम मिनिस्टर मारी गई थी तो दिल्ली और यूपी में हिंसा शुरू हो

30:58 गई सिखों को ढूंढा गया और ढूंढ ढूंढ के उनको मारा गया ठीक है सबसे ज्यादा जो था सिख मारे गए थे दिल्ली में उस समय ऐसा हो रहा था कि यह कांग्रेस के खुले समर्थन से हो रहा था ठीक है कांग्रेस ने खुला समर्थन दिया था भाई जहां सिख है मारो दिल्ली में उनकी जो टायर होते हैं टायर जला जला के उनके कंधों पे सिर प फेंके गए थे ठीक है सिख जो ते अपने बाल कटवा कटवा के छिप रहे थे इस तरीके से उन्हें छिपना पड़ा जो भी मतलब घर में सिख होता था उसको मार दिया जाता था ये ये हाल हो गया था और 2005 में संसद में मनमोहन सिंह जो हैं प्राइम मिनिस्टर जो थे इन्होंने अफसोस भी इस घटना के लिए जताया था ठीक है तो ये हुआ था सिखों के साथ फिर बात करते हैं शांति की ओर 1984 के चुनाव के बाद सत्ता में आते हैं नए प्रधानमंत्री

31:44 जो कि राजीव गांधी थे राजीव गांधी ने नरम पंथिया से बातचीत की शुरुआत कर दी और 1985 में इनके बीच में एक समझौता होता है जिसको पंजाब समझौता के नाम से भी जाना जाता है लोंगोवाल समझौता के नाम से भी जाना जाता है ठीक है तो इसमें अकाली दल की तरफ से थे हरचंद सिंह लोंगोवाल और कांग्रेस की तरफ से थे राजीव गांधी इन दोनों के बीच में एक समझौता हुआ था ठीक है जिसे पंजाब समझौते के नाम से भी जाना जाता है इसमें कुछ बातें ये रखी गई थी इसमें क्या कहा गया था कि चंडीगढ़ जो है ठीक है यह पंजाब को दे दिया जाएगा पंजाब जो है हरियाणा के बीच में जो सीमा विवाद है उसको सुलझाने के लिए एक आयोग बना दो क्योंकि पंजाब हरियाणा के बीच में सीमा विवाद है तो इसको सुलझा लिया जाएगा ठीक है पंजाब हरियाणा और राजस्थान के बीच में जो नदी जल बंटवारे को लेकर जो विवाद रहता है इसके लिए एक न्यायाधिपथी

32:35 जाए पंजाब में जो विशेष सुरक्षा बल अधिनियम लगा हुआ था इसको भी वहां से हटा लिया जाए रिमूव कर दिया जाए तो यह कुछ बातें हुई थी उन दोनों के बीच में समझौते के दौरान ठीक है लेकिन समझौते के बाद भी इन सब चीजों पर अमन कायम नहीं हुआ वैसे ही चलता रहा हिंसा लगभग 10 वर्ष तक चलती रही अकाली दल जो था वोह धीरे-धीरे बिखरने लगा 1992 में पंजाब में चुनाव हुए तो केवल 24 पर लोगों ने वोट करा क्योंकि वहां पर इतनी हिंसा थी लोग घर से निकले ही नहीं उग्रवाद को सेना ने दबा दिया लेकिन जनता ने अनगिनत वहां पर उठाए थे ठीक है जनता ने बहुत सारे दुख वहां पर उठाए थे 1990 के दशक के मध्यवर्ती वर्षों में देखें तो 1995 के आसपास से जाकर पंजाब में शांति बहाल हुई 1997 में दोबारा से चुनाव होते हैं अकाली दल बादल ठीक जो बादल वाला गुट है और भाजपा

33:24 यह सत्ता में आती है ठीक है यानी कि बीजेपी प्लस अकाली अब अकाली दल में कौन सा गुट बादल वाला ठीक है यह सत्ता में आते हैं और टेलीग्राम ग्रुप जरूर जवाइन करना इसकी जो पीडीएफ है आपको टेलीग्राम पर मिल जाएगी ठीक है आगे चलते हैं अभी खत्म नहीं हुई वीडियो अब बात कर लेते हैं नॉर्थ ईस्ट की ठीक है पंजाब हो गया कश्मीर हो गया यह समझ लिया आपने अब नॉर्थ ईस्ट में देखते हैं नॉर्थ ईस्ट में भी यही चला नॉर्थ ईस्ट के इधर के जो राज्य हैं यहां पर देखते हैं क्या-क्या होता है पूर्वोत्तर राज्य 1980 के दशक में क्षेत्रीय आकांक्षाएं जो थी वो उ भर कर सामने आई सात राज्य होने के कारण इनको सात बहने कहा जाता है क्योंकि वहां पर सात स्टेट है इसलिए इसको सात बहनों के नाम से जाना जाता है इस क्षेत्र की जो सीमाएं हैं वो चाइना से म्यांमार से बांग्लादेश से इन सब क्षेत्रों से लगती है

34:10 इन देशों से लगती है ठीक है इस क्षेत्र ये जो क्षेत्र है ये भारत के लिए दक्षिण पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार कहा जाता है दक्षिण पूर्व एशिया कौन सा वही जो आपने पढ़ा होगा आसियान वाला जिसमें इंडोनेशिया मलेशिया फिलीपीन सिंगापुर थाईलैंड यह सब आपने पढ़ा था तो उन उधर की तरफ जाने के लिए थ ईस्ट है उसका कहीं ना कहीं प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है अब त्रिपुरा जो है त्रिपुरा मणिपुर मेघालय यहां पर खासी पहाड़ी क्षेत्र है ठीक है और यह अलग-अलग रियासतें होती थी खासी पहाड़ी क्षेत्र मतलब यहां की जो जनजाति वगैरह उससे रिलेटेड है ये आजादी के तुरंत बाद क्या होता है भारत संघ में इनको शामिल किया गया था पूर्वोत्तर राज्य में बड़े स्तर पर राज्य का पुनर्गठन हुआ था तो यहां पर आपको क्या-क्या याद रखना है यह समझिए देखिए यहां पर सात राज्य हैं इसलिए इसको सात सेवन सिस्टर कहा जाता है सात बहने कहा

34:57 जाता है ठीक है यह जो क्षेत्र हैं यहां पर क्या है यह अलग-अलग कभी रियासतें होती थी लेकिन बाद में इनको क्या किया गया अलग राज्य बना दिया गया ठीक है यहां पे बड़े लेवल पे जो बड़े लेवल पे क्षेत्रीय जो क्षेत्र है उनका पुनर्गठन किया गया था ठीक है नागालैंड जो था 1963 में राज्य बना था मेघालय मणिपुर त्रिपुरा की बात करें तो यह 1972 में स्टेट बनाए गए थे अरुणाचल प्रदेश मिजोरम जो है 1987 में राज्य बनाए गए थे पूर्वोत्तर राज्य भारत के राज्यों का विकास उतना नहीं हो पाया नॉर्थ ईस्ट के जो राज्य हैं उसका विकास उतना नहीं हो पाया जितना कि आपको नॉर्थ इंडिया या साउथ इंडिया की तरफ दिखेगा यह इलाका जो शेष भारत है उससे कहीं ना कहीं अलग थलग आपको दिखाई देता है ठीक है तो इसलिए यहां पे विवाद भी जो है वो ज्यादा है अब यहां पे लोग करते हैं स्वायत्ता की मांग क्योंकि

35:43 इनको चाहिए विशेष अधिकार तो देखिए मणिपुर त्रिपुरा को अगर हम छोड़ दें तो आजादी के वक्त पूरा इलाका जो था असम कहलाता था ठीक है बड़ा एरिया होता था असम जो सरकार थी यहां पर आपको समझना है वह जो गैर असमी लोग थे यानी जो वहां पर असमी लोग नहीं रहते थे गैर असमी लोग उन परे जबरन असमी भाषा थोप रही थी अब उन परे असमी थोप रही थी तो उसका यह लोग क्या करते थे विरोध कर रहे थे स्वायत्ता की मांग करने लगे यहां पर बहुत विरोध प्रदर्शन हुआ बहुत सारे दंगे हो गए जनजातीय समूह के नेता जो थे वह असम से अलगाव चाह रहे थे कि भाई हमें असम से अलग कर दिया जाए हम इनकी असमी को नहीं स्वीकार कर सकते फिर इन लोगों ने क्या करा एक ईस्टर्न इंडियन जो ट्राइबल यूनियन है इसको

36:29 बना लिया ठीक है ट्राइबल जो जनजाति लोग होते हैं उनका एक संगठन बना लिया गया इन्होंने इनके द्वारा फिर इसी को और बड़ा कर दिया गया 1960 में इसका नाम हो गया ऑल पार्टी हिल्स ठीक है इसमें बदल गया इसने क्या मांग रखी थी ये समझना है इसने मांग रखी कि असम से अलग एक जनजातीय राज्य इनके लिए बनाया जाए यानी ये असम से अलग होना चाहते हैं इनके लिए जनजातीय राज्य बना दिया जाए इसी को कहा जाता है अलगाववाद ठीक है इसी को कहा जाता है क्षेत्रवाद सरकार ने एक ही जगह पर कई जनजातीय राज्य बना दिया अब सरकार ने यह देखा कि यहां तो भाई बोडो डोगरी कई तरह की जनजाति वगैरह रहती है खासी ठीक है तो अब क्या है सबके लिए अलग-अलग स्टेट बनाना तो पॉसिबल नहीं है तो इन्होंने क्या करा इन्होंने कई सारे क्षेत्रों में के अंदर भी स्वायत्ता दे दी जिले बना दिए और कुछ तो स्टेट भी बना दिए तो यहां पे इन्होंने इनके लिए अलग-अलग

37:15 क्षेत्र बनाए तो असम को इन्होंने तोड़ा असम से बना दिया मेघालय ठीक है असम को तोड़ के बना दिया मिजोरम असम को तोड़ के बनाया इन्होंने अरुणाचल प्रदेश तो इस तरीके से उन्होंने उस असम को बड़ा स्टेट जो होता था छो छोटा कर कर के तोड़ तोड़ के यह बना दिया लेकिन उसके बाद भी मांग होती गई अब इन्होंने सोचा कि भाई इतनी सारी डिमांड हो रही है तीन स्टेट बना दिए मान लो अब यह थोड़ी है कि 102 लोग डिमांड कर रहे हैं तो 102 स्टेट बना देंगे ये तो पॉसिबल नहीं है तब उन्होंने जिले लेवल पे भी उनको क्या करा स्वायत्ता दी तो देखिए त्रिपुरा और मिजोरम जो थे इनको भी राज्य का दर्जा दे दिया गया था 1972 में पूर्वोत्तर का जो नॉर्थ ईस्ट का जो पुनर्गठन था वह हो चुका था लेकिन यहां पे स्वायत्ता की मांग जो थी वह खत्म नहीं हुई असम के जो बोडो हो गए करबी हो गए दमसा हो गए ये सारे समुदाय हैं ये जनजातियां है वहां की यह अपने लिए अलग-अलग राज्य की

38:01 मांग कर रहे थे जनमत तैयार किया गया बहुत बड़े लेवल पे आंदोलन चलाए गए विद्रोह कार्यवाही हुई लड़ाई झगड़ा हुआ ठीक है लेकिन सरकार के लिए पॉसिबल नहीं था कि वो छोटे-छोटे राज्य बनाती जाए अब मान लो नॉर्थ ईस्ट में जो सात राज्य आप देख रहे हो वहां पे अगर मान लो इतनी डिमांड होए वहां पे 70 राज्य थोड़ी बना देगी सरकार तो पॉसिबल नहीं था छोटे-छोटे राज्य बनाना तो सरकार ने क्या करा इनको राज्य में ही रखकर कि तुम जहां रह रहे हो वहीं रहो तुम्हारा जिला ही बना देते हैं और उसको स्वायत्ता दे देते हैं उससे तो वो भी खुश हो गए और सरकार का भी काम चल गया फिर देखते हैं थोड़ा सा अलगाववादी आंदोलन को समझते हैं क्योंकि मिजोरम वाला जो टॉपिक है यह आपको अच्छे से समझना है यहां से आपके पेपर में क्वेश्चन आता है ठीक है मिजोरम इसको देखते हैं अलग देश की मांग से देश की अखंडता को खतरा था इस मांग से

38:48 निपटना जो था वह बहुत मुश्किल था नॉर्थ ईस्ट के दो दो राज्य में अलगाववादी जो आंदोलन थे इसकी मांग हुई थी मिजो पर्वतीय क्षेत्र जो था उसको असम के अंदर एक स्वायत्त जिला बना दिया गया था ठीक है मिजो लोग जो थे कुछ ऐसा ऐसा मानते थे कि वो तो कभी भी अंग्रेजों के गुलाम नहीं रहे ब्रिटिश इंडिया के पार्ट नहीं रहे तो इसलिए भारत में क्यों उनको शामिल कर लिया गया ठीक है उनका भारत से कोई लेना देना नहीं है ऐसा ये लोग माना करते थे फिर 1999 में क्या होता है मिजो पर्वतीय इलाका जो होता है यहां पे अकाल पड़ जाता है बहुत सूखा पड़ जाता है असम की सरकार जो है वो मैनेजमेंट नहीं कर पाती इनकी मदद नहीं कर पाती अच्छे से जनता बहुत ज्यादा नाराज हो जाती है जनता ने अलगाववाद की मांग कर दी कि भाई हम तो असम से अलग होना चाह रहे हैं मिजो लोगों ने गुस्से में आकर लाल डेंगा जो यहां के नेता थे उनके गु साथ एक मिजो

39:33 नेशनल फ्रंट बना लिया ठीक है तो यह याद रखना मिजो नेशनल फ्रंट जो है ठीक है वो किससे रिलेटेड है लाल डेंगा से रिलेटेड है ठीक है ये इनके नेता थे अब मिजो नेशनल फ्रंट बन गया 1966 में मिजो नेशनल फ्रंट जो था इसने आजादी की मांग करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया सशस्त्र विद्रोह शुरू कर दिया लड़ाई झगड़ा शुरू हो गया फिर भारतीय सेना और मिजो विद्रोह चलता रहा ठीक है तो यह लगा लो कम से कम 20 साल तक यह चला यानी कि दो दशक तक भारत की सेना और मिजो के जो जो विद्रोही थे उनके बीच में विवाद चलता रहा मेजो नेशनल फ्रंट ने गोरिला युद्ध अपना लिया अब गोरिला युद्ध क्या होता है ये समझिए ये युद्ध की एक तकनीक होती है कुरेला युद्ध में क्या होता है ये मतलब इसके कोई नियम नहीं होते जैसे मान लो कोई जंगल में से जा रहा है पेड़ पे ये बैठे

40:20 रहेंगे लोग छुपके जैसे कोई जाएगा उस परे पत्थर फेंकना शुरू कर देंगे तीर चलाना शुरू कर देंगे या मान लो कहीं गड्ढा खोद दिया उसपे पत्ते पत्ते बिछा लिए किसी को पता नहीं है वो जा रहा है पैर रखा और सीधा गड्ढे में चला गया यह तकनीक होती है युद्ध की इसको गोरिला युद्ध कहा जाता है इसमें बहुत अलग-अलग तरीके से मार दिया जाता है किसी को जला दिया जाता है ठीक है यह होता है तो भारतीय सेना ने भी कार्यवाही करी मिजो नेशनल फ्रंट को पाकिस्तान का सपोर्ट मिल रहा था क्योंकि लाल डेंगा जो थे पाकिस्तान में जाक बैठ गए थे पाकिस्तान को तो मजे आ रहे थे भाई नुकसान पहुंचाने में तो पाकिस्तान इनको सपोर्ट कर रहा था फिर पूर्वी पाकिस्तान में मिजो विद्रोहियों ने अपना ठिकाना बनाया पूर्वी पाकिस्तान कौन सा बांग्लादेश वाला ठीक है भारतीय सेना की जवाबी कार्यवाही में आम जनता को भी अब नुकसान उठाना पड़ा वह तो होना ही था 20 साल तक ऐसी बगावत चलती रही दोनों पक्षों

41:06 को नुकसान हुआ बहुत ज्यादा अब ऐसे में दोनों ने यह चीज समझ ली थी भाप ली थी कि ऐसे नुकसान तो होता ही रहेगा फिर पाकिस्तान में जो लाल डेंगा रह रहे थे वह आए भारत उन्होंने हमारी सरकार से शुरू करी बातचीत राजीव गांधी थे उस समय में ठीक है तो राजीव गांधी और लालडेंगा के बीच में 1986 में एक होता है शांति समझौता और इस समझौते के अंदर यह मान लिया जाता है कि मिजोरम को हम क्या करेंगे अलग बना देंगे तो इस तरीके से असम से एक और स्टेट हट जाता है मिजोरम जो एक अलग राज्य बना दिया जाता है और उसके बाद से ठीक है उसके बाद से यह जो मिजो नेशनल फ्रंट है इसने अलगाववादी आंदोलन जो छोड़ दिया लालडेंगा को वहां का सीएम बना दिया गया समझौता हो जाता है कि भाई सब ठीक रहेगा और उसके बाद यह शांतिपूर्ण राज्य बन जाता है कला साहित्य विकास हर क्षेत्र में यह काफी तरक्की कर रहा है तो ये जो मिजोरम की

41:53 समस्या थी इसको तो सुलझा लिया गया फिर है नागालैंड नागालैंड की समस्या को अभी भी नहीं सुलझाया गया है तो नागालैंड में देखो क्या समस्या है नागालैंड का अलगाववादी आंदोलन जो है वह ज्यादा पुराना है और अभी इसका मिजोरम की तरह से एक अच्छा हल नहीं निकला है यहां के नेता हैं अंगम जापू फिजो नाम याद रखना अंगम जापी फिजो इनके नेतृत्व में लोगों ने एक तबके ने लोगों के गुट ने 1951 में भारत से आजाद होने की घोषणा कर दी यानी भारत से अपने आप को अलग करने की घोषणा कर दी फिजो से बातचीत का प्रस्ताव हुआ लेकिन इन्होंने बातचीत का प्रस्ताव ठुकराया हिंसक विद्रोह हुआ और बाद में नगा लोगों ने इनका एक जो तबका था एक समूह था भारत सरकार के साथ एक समझौते पर दस्तखत

42:39 किए ठीक है लेकिन अन्य विद्रोही जो थे वह इस समझौते को नहीं मानते हैं नागालैंड की समस्या का समाधान आज तक नहीं हो पाया यह चलता रहता है वहां पर ठीक है इसके बाद है एक टॉपिक असम यानी बाहरी लोगों का के खिलाफ एक आंदोलन चलता है असम के अंदर यह समझ लीजिए देखिए बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन होता है क्यों क्योंकि नॉर्थ ईस्ट में बड़े लेवल पर आप्रवासी बसे हुए हैं जब बांग्लादेश प्रकट हुआ था तो 80 लाख शरणार्थी जो थे ये नॉर्थ ईस्ट में आ गए थे ठीक है इसकी वजह से एक खास समस्या पैदा हुई स्थानीय जनता जो थी इनको भारी मानती है व कहती है भाई यह बाहरी हैं इनके मन में उनके प्रति बहुत गुस्सा रहता है कि भाई इनको भगाया जाए यहां से अन्य देशों से जो आए लोग हैं यहां की जनता के रोजगार के अवसर खा रहे हैं इनके कहीं ना कहीं संसाधनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं ठीक है

43:25 स्थानीय लोग जो हैं व बाहर से आए लोगों के बारे में बिल्कुल भी मतलब नहीं उनको पसंद करते वह कहते हैं कि ये लोग हमारे जमीन और हमारे संसाधन को हथियार हैं जो नॉर्थ ईस्ट के राज्य के मसले हैं इसने कहीं ना कहीं राजनीतिक रंग ले लिया ठीक है और इन बातों के कारण यहां पर खूब हिंसक लड़ाई झगड़े हुए असमी लोगों को यह संदेह था कि बांग्लादेश से आकर एक बड़ी मुस्लिम आबादी है जो कि असम में बसी हुई है और असम के संसाधनों को और इनके रोजगार को वहां से खत्म कर र है ठीक है इन विदेशी इन्होंने कहा कि यह जो बाहर से आए हुए लोग हैं इनको पहचान की जाए और इनको भगा दिया जाए वरना हम क्या होंगे यहां पे अल्पसंख्यक हो जाएंगे इन असम जो है एक ऐसा स्टेट है जहां पे तेल चाय कोयले इन सब के भंडार हैं लेकिन फिर भी वहां पर बहुत ज्यादा गरीबी है और गरीबी का कारण यह माना जाता है कि

44:11 बाहर के लोग जो हैं वह आए हुए हैं यहां के जो प्राकृतिक संसाधन है उसको यहां से बाहर भेज रहे हैं इसके कारण यह सब हो रहा है ठीक है तो यह विरोध हुआ फिर 1979 में एक जो यूनियन है जिसको ऑल असम स्टूडेंट यूनियन कहा जाता है स्टूडेंट का संगठन है इसने जो विदेशी हैं उनके के विरोध में आंदोलन चला दिया आसू एक छात्र संगठन है इसका जुड़ाव किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं था ठीक है आसू का आंदोलन जो था वह अवैध जो आप्रवासी उनके खिलाफ था बंगाली और अन्य लोगों के दबदबे और मतदाता सूची में जो लाखों अप्रवासी जो है इल्लीगल रूप से उनके जो नाम दर्ज हो गए वोटर लिस्ट में उसको हटाने के लिए आंदोलन था आंदोलन की मांग क्या थी कि 1951 के बाद जितने भी लोग असम में आकर बसे हैं उन सबको वहां से बाहर भेज दिया जाए इस आंदोलन को पूरे असम का क्या मिला समर्थन मिल गया आंदोलन के दौरान

44:56 हिंसा और रासत घटनाएं होने लगी बहुत सारे लोगों की जान चली गई धन और संपत्ति का नुकसान उठाना पड़ा लोगों को आंदोलन के द दौरान रेलगाड़ियों की जो आवाज आई थी वह रोक दी गई कहीं ना कहीं तेल शोधक जो कारखाने हैं उसकी आपूर्ति भी रोकने की कोशिश की गई 6 साल के लगातार अस्थिरता रही असम में इसके बाद राजीव गांधी और जो आसू के नेता है इन्होंने बातचीत शुरू करी 1985 में इनके बीच में समझौता हुआ समझौते के अंतर्गत यह तय किया गया कि जो लोग बांग्लादेश युद्ध ठीक है यहां पे टाइपिंग की मिस्टेक है जो लोग बांग्लादेश युद्ध के दौरान या उसके बाद के सालों में असम आए हुए हैं उन सबको पहचाना जाए और उनको वापस भेजा जाए आंदोलन की कामयाबी के बाद आसू जो संगठन था ठीक है असम गण संग्राम परिषद यह मिल गए और

45:44 इन्होंने एक राजनीतिक पार्टी बना ली अपनी क्षेत्रीय पार्टी असम के अंदर इस पार्टी को कहा जाता है असम गण परिषद और इसने चुनाव लड़ा जीती वहां पर सत्ता भी में भी आ गई है और सत्ता में किस वादे के साथ आई थी कि विदेशी लोगों की समस्या को सुलझाया जाएगा पहचान के उनको वापस भेजा जाएगा एक स्वर्णम असम का निर्माण किया जाएगा ठीक है एक अच्छा असम बनाया जाएगा यह इन्होंने क्या करी थी बातें कही थी ठीक है तो यहां पर अपना जो चैप्टर है खत्म हो जाता है आई होप आपको समझ में आया होगा यह चैप्टर जो है बाकी चैप्टर से काफी बड़ा है लेकिन इंपॉर्टेंट है तो वीडियो पसंद आए तो लाइक कर देना मेरा नाम सत्येंद्र प्रताप है आप मुझे टा पर फॉलो कर सकते हो एक लव स्टडी पॉइंट जो है यह मेरा यूजर नेम है ठीक है मिलते हैं आपसे नेक्स्ट वीडियो में थैंक्स फॉर वाचिंग जय हिंद जय भारत ठीक है m

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