संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो दुनिया के कुछ सबसे गहरे स्थानों की खोज करता है, जिसमें रूस में कोला सुपरडीप बोरहोल, विभिन्न खदानें और अंटार्कटिका में बर्फ के नीचे की वेधशालाएं शामिल हैं। यह मेरियाना ट्रेंच, पृथ्वी पर सबसे गहरा ज्ञात बिंदु, और वहां पाए जाने वाले अद्वितीय जीवों पर प्रकाश डालता है।
- कोला सुपरडीप बोरहोल: 12 किलोमीटर से अधिक गहरा, अत्यधिक तापमान के कारण छोड़ दिया गया।
- बिंगहैम कैनियन माइन: तांबे के उत्पादन के लिए एक विशाल मानव निर्मित गड्ढा।
- सैन जोस माइन रेस्क्यू: 33 फंसे हुए खनिकों को बचाने के लिए एक कुआं खोदा गया।
- मेरियाना ट्रेंच: पृथ्वी का सबसे गहरा बिंदु, माउंट एवरेस्ट से भी गहरा, अद्वितीय जीवों का घर।
यह वीडियो सेंट्रो फर्ज जैसी फिल्मों में दिखाए गए गहरे स्थानों और वास्तविक जीवन में मौजूद गहरे स्थानों के बारे में बात करता है। यह मेरियाना ट्रेंच की यात्रा पर ले जाता है, जो पृथ्वी की सबसे गहरी गुफा है, जो सतह से 12 किलोमीटर नीचे तक जाती है।
रूस में कोला प्रायद्वीप पर स्थित दुनिया का सबसे गहरा कुआँ, कोला सुपरडीप बोरहोल है। इस कुएं को खोदने में 21 साल लगे और वैज्ञानिक 12 किलोमीटर 260 मीटर की गहराई तक पहुंचे। गहराई बढ़ने के साथ ड्रिलिंग उपकरण गर्म होते गए। 135 किलोमीटर की गहराई पर तापमान 70 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया, और 12 किलोमीटर की गहराई पर 220 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस कुएं के बारे में अफवाहें उड़ीं कि वैज्ञानिकों ने नरक तक खुदाई कर ली है, क्योंकि वहां इंसानों के रोने की आवाजें सुनाई दीं।
रूस की तरह, अमेरिका ने भी समुद्र के अंदर छेद करके दुनिया का सबसे गहरा कुआँ खोदने की कोशिश की। उनका मानना था कि समुद्र के किनारे खुदाई करना आसान होगा क्योंकि समुद्री पानी गर्मी को सोख लेगा और समुद्र तल से गहराई में जाना आसान होगा। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कुल पांच कुएं खोदे, लेकिन किसी की गहराई 180 मीटर से ज्यादा नहीं हो पाई। आर्थिक तंगी के चलते इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया।
अमेरिका ने अंटार्कटिका में 86 गहरे कुएं खोदे हैं, जिनमें से सबसे गहरे कुएं की गहराई 2882 मीटर है। इन कुओं का उद्देश्य अंतरिक्ष में शोध करना था, क्योंकि न्यूट्रिनो को अन्य तत्वों से अलग करना धरती की सतह पर मुश्किल है। इसलिए, वैज्ञानिकों ने बर्फ को चुना और वहां आइस क्यूब न्यूट्रिनो आब्जर्वेटरी लगाई।
उडाचनया खदान 640 मीटर गहरी है और इसके सबसे निचले भाग में 1600 मीटर है। इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है। इस गड्ढे को खोदने में पूरे साल का समय लगा और 360 मिलियन टन मिट्टी बाहर निकाली गई। इस मिट्टी में 80 बिलियन डॉलर के छोटे-छोटे हीरे भी पाए गए।
अमेरिका में स्थित बिंगहैम कैनियन माइन 1.2 किलोमीटर गहरा है और इसका अंदरूनी व्यास 4 किलोमीटर है। इस गड्ढे में 10 फुटबॉल के मैदान समा सकते हैं। यहां पिछले डेढ़ सालों से तांबे का उत्पादन किया जा रहा है। 2030 तक इसका व्यास 300 मीटर तक और बढ़ाने की योजना है।
चिली की सैन होज़े माइन में 33 लोग फंस गए थे। उन्हें बचाने के लिए 700 मीटर गहरा एक कुआं खोदा गया। 69 दिनों बाद मजदूरों को बचाया गया। यह रेस्क्यू दुनिया के सबसे कमाल के कामों में गिना जाता है।
220 माइल्स खदान से सारा माल निकालने के बाद इसे लावारिस छोड़ दिया गया। एक दिन यह खदान धंस गई और कुछ सालों बाद इसमें एक और धमाका हुआ। दो झटकों ने इस खदान को 327 मीटर गहरे गड्ढे में बदल डाला। बाद में यह गड्ढा पानी से भर गया और आज यह एक झील बन चुकी है।
क्रुबेरा गुफा दुनिया की सबसे गहरी गुफा का दरवाजा है। 2018 में पता चला कि यह गुफा 2212 मीटर गहरी है। इसके अंत तक पहुंचने में एक हफ्ते का समय लगता है। यहां जानवरों की 20 नई प्रजातियां मिलीं, जो करोड़ों साल से इस गुफा से बाहर नहीं आई थीं।
मेरियाना ट्रेंच पृथ्वी का सबसे गहरा प्राकृतिक बिंदु है, जो 10,924 मीटर गहरा है। माउंट एवरेस्ट को भी इसके अंदर रख दें तो भी एवरेस्ट पानी के ऊपर से नहीं दिखाई देगा। आज तक मेरियाना ट्रेंच के सबसे गहरे बिंदु को देखने वाले सिर्फ आठ लोग हैं। वैज्ञानिकों को यहां बड़े-बड़े पर्वत और एक ज्वालामुखी मिला है। यहां का पानी बहुत ठंडा है और दबाव बहुत ज्यादा है, लेकिन फिर भी यहां कई तरह के जानवर पाए जाते हैं।
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Transcript
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0:00 है दोस्तों कि आपने कभी सेंट्रो फर्ज मूवी देखी है अगर देखिए तो आपको जरूर पता होगा कि उसमें वैज्ञानिकों को एक सुरंग मिलती है जिसके अंदर से डायनासोर बाहर निकल कर आता है खैर यह बात तो थी एक मूवी की असल जिंदगी में कितना सच है तो आज मैं आपको दुनिया के सबसे गहरे प्वाइंट पर लेकर जाऊंगा जी हां इस धरती की सबसे अंदरूनी गुफा जो कि आपके पैरों से 12 किलोमीटर नीचे तक जाती है जी हां आज हम यात्रा करेंगे मेरियाना ट्रेंच की तो क्या आप जानना चाहते हैं कि धरती के अंदर क्या-क्या सीक्रेट छुपे हुए हैं तो चलिए शुरू करते हैं इस रेमिडी को स्टार्ट फूल किसको और कमेंट पिक मी टू गेट ए शॉर्ट नोट इन नेक्स्ट वीडियो लेकिन उससे पहले बात करते हैं दुनिया के सबसे गहरे कुएं की जो कि रशिया में बना हुआ है और रशिया के कोला पेनिनसुला में आप इसे देख सकते हैं और आप शायद विश्वास ना करें पर इस कुएं को खोजने
0:46 के लिए पूरे 21 साल का समय लगा और इसे होते हुए वैज्ञानिक पूरे 12 किलोमीटर और 260 मीटर नीचे जा पहुंचे लेकिन अब यह दिक्कत यह थी कि दृढ़ जितना नीचे होती हुई जा रही थी उतना ही ड्रिल गर्म होती जा रही 135 किलोमीटर की गहराई पर ही वहां का तापमान 70 डिग्री तक बढ़ चुका था और साथ किलोमीटर की गहराई पर तापमान 120 डिग्री तक बढ़ चुका था और वही बारा किलोमीटर की गहराई पर तापमान 220 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो चुका था जी हां इतना गर्म तापमान कि उसमें आप एक गिलास पानी डालेंगे तो पानी नीचे पहुंचने से पहले ही भाप के रूप में आपके पास वापिस आ जाएगा जब इस कुएं के बारे में जानकारी दुनिया को पता लगी तो इसके बारे में कई अफवाहें भी उड़ी और बहुत से लोग मानने लगे हैं कि वैज्ञानिकों ने नरक तक खुदाई कर ली है क्योंकि वहां का तापमान लोग 1000 डिग्री
1:33 सेल्सियस तक बता रहे थे इतना ही नहीं जो कि वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे थे उन्होंने बताया कि उन्हें वहां इंसानों के रोने की आवाज भी सुनाई दी और कुछ लोग तो यह भी बोल रहे थे कि साथ शैतान इस कुएं से बाहर निकल आएगा ऐसा ही कुछ लोग आज भी इंटरनेट पर मौजूद है अब कुछ काम रशिया कर रहा है तो अमेरिका कैसे पीछे रहेगा उसने भी दुनिया का सबसे गहरा कुआं खोदना शुरू किया और बजाय ठोस जमीन के उन्होंने समुद्र के अंदर छेद में का खर्चा और वह यहां पर सीरिल्स का इस्तेमाल करने वाले थे क्या आपको यह बहुत अजीब नहीं लगता मुझे तो बहुत अजीब लगा लेकिन अमेरिका के वैज्ञानिकों का मानना था कि समुद्र के किनारे खुदाई करना बहुत आसान काम होगा क्योंकि यह उनको दो फायदे मिलने वाले थे सबसे पहला धरती के अंदर से निकलने वाली गर्मी कुछ हद तक समुद्री पानी सोख लेता वहीं दूसरा पता था कि समुद्र के तल
2:21 से धरती की गहराइयों में जाना आसान काम है और फिर इस आइडिया पर काम शुरू किया गया अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कुल पांच कि वे खुद दे लेकिन किसी के लिए गहराई 180 मीटर से ज्यादा नहीं हो पाई और यहां पर वैज्ञानिकों को अपनी गलती समझ अा गई लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी असल गलती क्या थी यह तो कभी अमेरिका द्वारा नहीं बताई गई लेकिन उन्होंने सिर्फ आर्थिक तंगी के चलते इस प्रोजेक्ट को बंद करने का कारण दुनिया को दिया तो इस रेस में रसिया जीत गया लेकिन अमेरिका अंटार्कटिका में कई गहरे कुएं खोज चुका है जी हां सही आंकड़ों में बताऊं तो 86 कुएं और इसमें से सबसे गहरे कुएं की गहराई 2882 मीटर है सुनने में अच्छा लग रहा है लेख आपके पीछे कारण था यह कुएं अंतरिक्ष में शोध करने के लिए चाहिए थे जी हां मैं मजाक नहीं कर रहा हम सबको पता है कि न्यूट्रिनो
3:07 ने स्पेस को समझने में बहुत मदद की है लेकिन यह ट्रेनों को और एलिमेंट से अलग करना धरती की सतह पर असंभव सा लगता है इसलिए वैज्ञानिकों ने धरती की बजाय बर्फ को चुना और वहां पर अमेरिका द्वारा आइस क्यूब न्यूट्रिनो आब्जर्वेटरी लगा दी गई चलिए थोड़ा आगे चलते हैं और बात करते हैं जो कि बहुत छोटा होता है लेकिन अब जरा इस को देखिए जो कि पूरे 640 मीटर गहरा है जिसे खोद कर निकाला गया लेकिन बाद में वे नाम दिया गया और के सबसे निचले भाग में भी पूरे सोलह सौ मीटर था यह इतना बड़ा है कि आप इसे अंतरिक्ष से भी देख सकते हैं कि यह आप देख रहें हैं यह में मिट्टी के कच्चे है जिन पर बड़े-बड़े ट्रक चलते हैं कि आप
3:53 इस बात पर विश्वास कर पाएंगे कि इतने बड़े और गहरे गड्ढे को खोजने के लिए पूरे साल का समय लगा इस होते हुए कुल 360 मिलियन टन मिट्टी बाहर निकाली गई लेकिन इसी मिट्टी में कई छोटे-छोटे डायमंड भी पाए गए जिनकी कीमत 80 बिलियन डालर की थी लेकिन अब हम चलते हैं दुनिया के सबसे गहरे गड्ढे की ओर तो यह अमेरिका में बना है बेगम के अनियंत्रित आप शायद विश्वास ना करें पर यह घटना पूरे 12 मीटर गहरा है और वह इसका अंदरूनी डायमीटर पूरे चार किलोमीटर का है इस गड्ढे में 10 फुटबॉल के मैदान समा सकते हैं और अगर आप इसे अंतरिक्ष देखेंगे तो यह कुछ ऐसा दिखाई देगा यह जो ट्रक वापिस पर चलता हुआ देख रहे हैं यह माइनिंग ट्रक है और ऐसे हर प्रांत में 500टन मिट्टी भरी हुई है अब आप सोच रहे होंगे कि क्यों इतने बड़े-बड़े को
4:39 खुदा तो हर गधे का अलग कारण होता है जैसे कि गम कैन इवन में पिछले डेढ़ सालों से तांबे का उत्पादन किया जा रहा है शुरुआत में छोटी थी खदान थी लेकिन समय के साथ साथ यह और ज्यादा गहरी होती चली गई और आज भी इसका आकार बढ़ ही रहा है और इसके मालिकों का मानना है कि सन 2030 तक आते-आते वह इसका डायामीटर 300 मीटर तक और बढ़ाने वाले हैं अब इस सात सौ मीटर गहरे कुएं को देखिए जितने इंसानों की जान बचाने के लिए खोदा गया था जब जिले की सैन होज़े मा यन बसीं तो उसमें 33 लोग पशुओं के थे उन्हें बचाने के लिए सात सौ मीटर गहरा एक कुआं खोदा गया आप क्योंकि बचे हुए मजदूर धरती से सात सौ मीटर नीचे फंसे हुए थे जल्दबाजी में इसको को खोजने के लिए हर तरीका आजमाया गया आप यहां पर उनको बचाने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी लेकिन तभी विद्वानों ने एक साथ 100 मीटर गहरा कुआं खोदा ऐसा कुछ इससे
5:25 पहले दुनिया में कभी नहीं किया गया था जिसके बाद कोई में एक बीड डाल कर एक मजदूर को बचाया गया आप शायद विश्वास नागरे पर उन मजदूरों को पूरे 69 दिनों बाद बचाया जा सका यह रेस्क्यू आज भी दुनिया के सबसे कम माल के कामों में गिना जाता है दोस्तों कि आपको पता है कि दुनिया में ही कुछ ऐसे गड्ढे इंसानों द्वारा बनाए गए हैं जिनके बारे में आज हमें नहीं पता जी हां 220 माइल्स भी उन्हीं में से एक है इसके अंदर से सारा माल निकालने के बाद इस खदान को लावारिस छोड़ दिया गया लेकिन एक दिन है वहां आसपास रहने वाले लोगों को एक बहुत तेज गड़गड़ाहट सुनाई दी उनको लगा यह कोई भूकंप है और जब और जब वह इससे बचने के लिए इस खानदान के पास गए तो उन्होंने देखा कि यह गन ही असल में धंस चुकी है जी हां यह गन अपना ही भार सहन नहीं कर पाई इतना ही नहीं कुछ सालों बाद इसी खदान में
6:13 फिर से एक और धमाका हुआ और यह धमाका पहली बार से भी ज्यादा शक्तिशाली था कुल मिलाकर दो झटकों ने इस खदान को एक 327 मीटर गहरे गड्ढे में बदल डाला था बाद में गुड पानी से भर गया और आज के समय वह एक कमाल की झील बन चुकी है अब जो होल आपको अपनी स्क्रीन पर दिख रहा है उसे आप साधारण समझने की गलती ना करें क्योंकि असल में ही दुनिया की सबसे गहरी गुफा का दरवाजा है इस गुफा में आपको इतनी कमाल की चीजें देखने को मिलेंगी कि आप यह भूल ही जाएंगे कि अभी आप धरती के कई किलोमीटर नीचे जा चुके हैं जी हां यह मैं बात कर रहा हूं कि ना केवल की कई सालों पहले तक इसके अंदर जाने वाले लोगों को लगता था कि इस गुफा की गहराई सिर्फ 440 मीटर की है लेकिन 2018 में इसकी सच्चाई सामने आई बजाय 440 के यह गुफा 22
7:00 मीटर गहरी है अगर आप इस गुफा में घूमने जाएंगे तो आपको इसके अंत तक पहुंचने में ही पूरे एक हफ्ते का समय लगेगा इसके अंदर जाना सच में दिल दहला देने वाला है जब वैज्ञानिक इसके अंदर पहुंचे तो उन्हें यहां पर जानवरों की 20 नई प्रजातियां भी मिलेगी जी हां यह प्राणी इस गुफा तक ही सीमित थे और करोड़ों साल से वह इस गुफा से कभी बाहर नहीं आए इन्होंने कभी सूरज की रोशनी को नहीं देखा तो सोच कर देखिए जब वैज्ञानिकों की टॉर्च इन पर गिरी होगी तो इन्हें कैसा महसूस हुआ होगा तो चलिए अब चलते हैं इस धरती के सबसे गहरे प्राकृतिक पॉइंट पर जिसे मेरियाना ट्रेंच के नाम से जाना जाता है जी हां यह पूरे 10294 मीटर गहरी है तो एक अनुमान के मुताबिक इसकी गहराई आप इसे समझ सकते हैं कि धरती का सबसे ऊंचा बिंदु माउंट एवेरेस्ट सिर्फ 8848 मीटर ऊंचा है और अगर हम एवरेस्ट को
7:46 भी मेरियाना ट्रेंच के अंदर रख दें तो भी हम पानी के ऊपर से एवरेस्ट को नहीं देख पाएंगे और आप शायद नाम आने पर आज तक मेरियाना ट्रेंच के सबसे गहरे बिंदु को देखने वाले इस दुनिया में सिर्फ आठ लोग हैं जबकि इससे ज्यादा इंसान तो चांद अभी जा चुके हैं तो मुझे समझ नहीं आता कि बजाय हमारी धरती को ही खंगालने के लोग क्यों अंतरिक्ष के पीछे पड़े हुए हैं तो अब सवाल उठता है कि वैज्ञानिकों को मरियाना ट्रेंच के अंदर क्या मिला तो आप शायद विश्वास ना करें पर वहां वैज्ञानिकों को बहुत बड़े-बड़े पर्वत मिले जी हां यहां पर चार बड़े बड़े पर्वत मौजूद हैं जिनकी ऊंचाई ड्राई किलोमीटर की है इसके अलावा यहां पर एक वोल्केनो भी मौजूद है नीचे का पानी बहुत ठंडा है जिसका तापमान सिर्फ तीन डिग्री सेल्सियस बना रहता है और यहां का दबाव इतना ज्यादा है कि वह शक्तिशाली संवर इसको भी सेकेंड में पिज्जा सकता है लेकिन फिर भी यहां पर कई तरह के जानवर आपको
8:33 देखने के लिए मिल जाएंगे जैसे कि मोहल्ला स्थित Android या फिर सुलग जोगी इस दुनिया की सबसे गहरे बिंदु पर राज करते हैं यहां पर किसी भी तरह की मछली नहीं पाई गई जहां का प्रेशर हजारों एटमॉस्फेरिक प्रेशर में पाया जाता है मतलब कि अभी जिस प्रेशर में आप बैठे हैं वह एक है और उसे कई हजार गुना ज्यादा दबाव आपको वहां देखने को मिल जाएगा आज भी वैज्ञानिक ऐसे ही गहरे-गहरे बिंदुओं को ढूंढने में लगे हुए हैं ताकि यह समझा जा सकेगी धरती की गहराई में आखिर क्या है क्या इतिहास में भी बहुत से प्रयास इंसानों द्वारा किए गए लेकिन कोई भी उन्हें सही से समझ रहे में सफल नहीं हो पाया क्या आपको यह अच्छा आइडिया दे सकते हैं धरती की गहराई को समझने का तो कमेंट में मुझे जरूर बता