एक अनूठे युवक की अजीब कहानी (सबको समझ नहीं आएगी) || आचार्य प्रशांत (2023)

संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में एक युवक की यात्रा और उसके अनुभवों के माध्यम से स्वतंत्रता, आत्मा, और जीवन के गहरे प्रश्नों पर चर्चा की गई है। युवक की कहानी उसके जीवन की आकांक्षाओं, असंतोष, और उसकी खोज की यात्रा को चित्रित करती है।

  • युवक ने शिक्षा और करियर में सफलता हासिल की।
  • उसकी खोज स्वतंत्रता की ओर ले जाती है, लेकिन उसे लगता है कि ये सभी चीजें उसे सच्चा सुख और संतोष नहीं दे रही हैं।

Intro

वीडियो की शुरुआत में, युवक की कहानी के बारे में बताया जाता है जो खुद को खोजने के उस सफर पर निकलता है। समाज के द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करते हुए, उसकी शुरुआत शिक्षा से होती है और वह नौकरी प्राप्त करता है।

एक जवान युवक की रोचक कहानी

एक युवा लड़के की कहानी सुनाई जाती है जो युवाओं की हर संभव आकांक्षा को पूरा करना चाहता है। उसने उच्च शिक्षा हासिल की और एक सफल करियर की ओर बढ़ने के लिए मेहनत की। शुरुआत में, उसे सफलता मिली, और वह अपने करियर में बहुत ही आगे बढ़ता है।

युवक की असंतुष्टि और महत्वाकांक्षा

हालांकि युवक का करियर तेजी से बढ़ रहा था, पर वह असंतुष्ट महसूस करता है। उसे यह महसूस होने लगता है कि उसकी महत्वाकांक्षाएँ उसे पूर्णता नहीं दे रही हैं। वह अपने जीवन में एक नई दिशा और अर्थ खोजने की कोशिश करता है।

आज़ादी हासिल करने की कामना

युवक को यह एहसास होता है कि असली आज़ादी सिर्फ भौतिक उपलब्धियों में नहीं है, बल्कि वह कुछ और गहरा है। उसकी आज़ादी की कामना उसे आत्मा के गहरे अर्थ और जीवन के उद्देश्य की ओर ले जाती है।

युवक का मौन में चले जाना

उसकी इस खोज के दौरान, युवक मौन में चला जाता है। वह अपने अंदर की परेशानियों और संवाद को समझने के लिए रुकता है। उसकी मौन में विचारणाएं कहीं अधिक गहरी और महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

स्वतंत्र होने के भ्रम का झटके से टूट जाना

युवक का भ्रम जब टूटता है, तो उसे अपनी सीमाओं का एहसास होता है। उसने महसूस किया कि उसकी कई आकांक्षाएँ केवल भ्रम हैं, और उसे अपने भीतर की गहराइयों में जाना होगा।

वास्तविक आज़ादी क्या है?

एक बार जब युवक ने अपने अंदर का सफर शुरू किया, तो उसने वास्तविक आज़ादी की पहचान की। आज़ादी केवल भौतिक वस्तुओं से नहीं, बल्कि अपने भीतर की स्वाधीनता से संबंधित होती है।

कहानी में युवक की भूल

युवक अपनी यात्रा में कई बार गलतियां करता है। वह बाहरी चीजों की ओर ध्यान देता है, जबकि असली समस्या अंदर ही होती है। यह उसकी एक बड़ी भूल साबित होती है।

आत्मा क्या है?

आधिकारिक घनत्व की खोज के बारे में बताते हुए, युवक की आत्मा का विचार महत्वपूर्ण बन जाता है। आत्मा का आकार और उसकी स्वतंत्रता पर चर्चा की जाती है।

कैसे जानें चेतना जागृत होना शुरू हो गई है?

युवक अपने चेतना के विकास को पहचानने के तरीकों को समझता है। वह अपनी जिज्ञासाओं और आत्म-समर्पण के माध्यम से जागृति के संकेतों को समझने की कोशिश करता है।

वैराग्य क्या है?

स्वच्छंद रहने और वस्तुओं से परे होने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। वाराग्य और उसके महत्व को संदर्भित करने वाले विचारों का विस्तार किया गया है।

पौरुषहीनता कायरता है

वीडियो में पौरुष और कायरता के बीच के अंतर पर चर्चा की गई है। यह स्पष्ट किया जाता है कि व्यक्ति को अपने भीतर की शक्ति को पहचानना है।

भीतर से विशाल कैसे हों?

युवक को बताया जाता है कि कैसे वह अपने अंदर की विशालता को पहचान सकता है। सफलता और अदृश्य शक्तियों की खोज के बारे में बातें की जाती हैं।

युवक की जिज्ञासा और मुक्ति के क्षण

युवक के सवाल उसकी आंतरिक मुक्ति की ओर ले जाते हैं। जीवन के गहरे अर्थ को समझने के लिए उसके जिज्ञासाएं महत्वपूर्ण बन जाती हैं।

असली विजेता कौन?

वीडियो में विजेता की परिभाषा पर चर्चा की जाती है। असली विजेता वह होता है जो अपने जीवन की चुनौतियों को स्वीकार कर उन्हें पार करता है।

गुरु और शिष्य का वास्तविक संबंध

गुरु-शिष्य संबंध का महत्व समझाने का प्रयास किया जाता है। एक सच्चा गुरु अपने शिष्य की राह को सरल बनाने में मदद करता है।

समापन

वीडियो का समापन युवक की यात्रा और आत्मा की स्वतंत्रता पर बल देकर होता है। उसे समझ में आता है कि जीवन की सच्ची उपलब्धि उसे खुद को जानने में है।

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Transcript

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0:00 कितनी देर लगी थी श्री राम को स्वीकार करने में कि महल का और अयोध्या का त्याग करना है यह दो चीजें हैं जो राम को राम बनाती हैं अयोध्या छोड़ना और फिर लंका छोड़ना ना अयोध्या छोड़ना आसान था ना लंका छोड़ना आसान था जो कभी कुछ नहीं जीतते उनकी कोई कहानी कभी नहीं कही जाती जो कभी कुछ नहीं जीतते उनकी तो कहानी कौन सुने कौन कहे कीड़े मकोड़े क्या बात बेकार खनन क्या करना है वो तो रावण इधर-उधर से जो मिला वहीं से लूट लाट के दुनिया भर का सोना वही इकट्ठा कर रखा था और एक बार को ख्याल करो उस धनुर्धर का जो जंगल में नंगे पांव निकला था कुछ नहीं है उसके पास जगत की महाशक्ति को हराना तो किसी भी ताकतवर राष्ट्र के लिए भी गौरव की बात होती है और यहां एक राष्ट्र नहीं नहीं हराया था सुपर

0:46 पावर को यहां दो व्यक्तियों ने हराया था आप सब लोग अंदर आ गए कुर्सियां बाहर चली गई अब बेचारी कुर्सियां कैसे अटेंड करेंगी चेतना अंदर आती है तो जड़ता को तो बाहर जाना होगा आइए आगे इधर आ जाओ है जगह इ और पीछे हो जाओ ना एक जगह निकल आएगी यहां पर भी इधर आ जाओ खंभे के पीछे से से क्या

1:35 दिखेगा सब आ गए हैं कोई है अभी जल्दी बुलाओ और गेट बंद करो इधर ही आ जाए इसी तरफ थोड़ा सा जगह बनाइए पीछे होकर उनके लिए वहा बैठ लेंगे करें बात शुरू तो आज एक कहानी से शुरू

2:20 करें और कहानी को ई फिर आगे तक ले जाएंगे देखते हैं कहां तक जाती है तो एक जवान लड़का था आवाज नहीं आ रही यह कैसे हो गया आएगी आ जाएगी ठीक है बाद में बहुत लोगों को कहना होता है कि आवाज नीची करी

3:11 है अब अंदर का अंदर बाहर का बाहर रखो यह आना जाना बंद करो यहां भी बैठ सकते हैं गा जने कोई दिक्कत नहीं है आ जाओ बैठ जाओ यहां य ऊपर बैठ जाओ या वहां बन रही हो तो कोई बात नहीं हां तो ठीक है वही बैठ जा हम तो एक जवान लड़का

3:56 था कुछ कुछ वैसा जैसा जवानी को होना चाहिए प्रतिभा से [संगीत] उत्प्रवास उमंगे सारे अरमान उसमें भीतर गूंजते रहते

4:42 थे तो उसने वही करा आमतौर पर जो कोई युवा व्यक्ति करता है और जब मैं लड़का बोलूं तो यह नहीं कि लड़का माने कोई लिंग भेद कर दिया लड़का माने मनुष्य तो लड़का लड़की सब तो उसने क्या करा मेहनत कर सकता है प्रतिभा भी है ऊर्जा की कोई कमी नहीं काम कराओ ग काम कर दूंगा पढ़ाओ ग पढ़ लूंगा दौड़ा होगे दौड़ जाऊंगा तो समाज जो अच्छे से अच्छा और ऊंचे से ऊंचा दे सकता

5:27 है वो उस लड़ ने हासिल करने की ठानी तो सबसे पहले तो शिक्षा लड़का है माने छात्र है तो सबसे पहले तो शिक्षा में जितनी ऊंची जगह हो सकती थी संस्थान हो सकते थे उसने सब में प्रयास कर करा और मोटे तौर पर सफलता भी पाई तो उसने कहा कि यह चीज मुझे मिली अच्छा

6:13 है लगता है जिंदगी सार्थक होने जा रही है लगता है कुछ ऐसा मिलने जा ही रहा है जो पाकर मैं कह पाऊंगा कि वाह मौज आ गई मैं सफल हूं सही जी रहा हूं सही जा रहा हूं तो पढ़ाई लिखाई उसने अच्छी कर ली पढ़ाई लिखाई करने के बाद अब वही हुआ जो समाज पढ़ाई लिखाई के एवज में दिया करता है नौकरी तो उसको नौकरी भी अच्छी मिल

7:02 गई तो उसने कहा ये अच्छा है संस्थान बढ़िया थे अंक अच्छे ले आ लिए अब जो आय का आंकड़ा है वह भी अच्छा ही है अंकों का खेल मैं एक के बाद एक जीतता ही चला जा रहा हूं तो उसने अपना नौकरी भी करनी शुरू कर दी और नौकरी करनी शुरू कर दी उसका नाम होने लग गया कि भाई कम उम्र में ही देखो क्या बात है कैसी प्रतिभा है कितना आगे निकलता जा रहा है क्या कमा रहा

7:51 है नाम होने लग गया तो दुनिया भर के लोग उसकी ओर आने लग गए उससे कम उम्र वाले छात्र आते उससे कुछ सलाह लेने थोड़ा पथ प्रदर्शन कर दीजिए बताइए हम जिंदगी में क्या करें वह समय दिया करता इतने लोग उससे बात करने को आतुर थे लेकिन लोग आते उससे पूछते और जो वह बताता है उसको बहुत ध्यान से सुनते बड़े बूढ़े इधर-उधर के दूर दूर के

8:43 रिश्तेदार जिनसे आमतौर पर कोई रिश्ता भी नहीं रहता कोई बोल बातचीत नहीं रहती वह भी आने लगे वह बोले कि हम आशीर्वाद देने आ रहे हैं पर वो आशीर्वाद देने क्या आ रहे थे वह तो संपर्क बनाने आते थे कि लड़का अभी बढ़िया नौकरी कर रहा है कल परसों में शायद कहीं यह विदेश में बस भी जाएगा आगे हमारे काम आएगा और लड़कियां वह भी आकर्षित होने लग गई वह उसमें एक पहले रूमानी प्रेमी देखती थी फिर एक

9:29 योग्य वर देखने लग गई सोशल मीडिया पर उसके फॉलोअर बढ़ने लग गए क्योंकि लोगों को पता था इसने क्याक क्याक हासिल करा है लोग भी चीजें हासिल करना चाहते हैं तो जिसको पाते हैं कि सफल हो चुका है उसके पीछे पीछे आ जाते हैं लेकिन इस युवक की आकांक्षा और ऊंची थी इसको नहीं तृप्ति मिल रही थी यह सब जो इसने पा लिया उससे इसे आगे और आगे बढ़ते ही रहने कि जैसे धुन लग गई

10:17 थी जीवन भर इसने करा ही यही था 25 का हो गया था और अपनी जिंदगी के बीते 10 15 साल बस ये आगे आगे आगे ही बढ़ता रहा था अब 25 का हो गया था और दुनिया समाज प्रचलित आदर्श उसे कुछ बता नहीं पा रहे थे कि अब और आगे कैसे बढ़ना है अभी तक की तो राह बता दी थी पढ़ लो नौकरी कर लो पैसा कमा लो थोड़ा नाम हो जाएगा घर बसा लो इतना तो बता दिया था पर इसके आगे यह उन्हीं सामाजिक लोगों से राय लेने जाता था तो व एक ही बात बोल पाते थे कि इसके बाद तो अब बस एक ही चीज

11:04 है कि जो आमदनी हो रही है उसको बढ़ाते जाओ और थोड़ा घर बढ़ा लेना इसके बाद हम तुम्हें नहीं बता पाएंगे कि आगे क्या है वो पूछा करता था आगे कुछ और तो होगा अलग तो होगा वो एक शब्द पर आकर के अटक गया था बोलता था व्हाट्स बियोंड अब इसके आगे और क्या बियोंड बियोंड बियोंड और अब कोई जवाब नहीं दे पा रहा था वह दसवीं में था उसने पूछा था इसके आगे क्या है तो बोला था लोगों ने अभी 12वी है 12वी में था पूछा था इसके आगे क्या है उन्होंने कहा था उच्चतर शिक्षा के संस्थान है वहां गया तो पूछा यहां क्या है तो बोले

11:51 यहां आए हो तो यहां पर नंबर अच्छे हासिल करो जितने तरीके की यहां पर संभावनाएं हो सकती हैं उनमें दक्ष हो जाओ पूछा इसके आगे क्या है बोले नौकरी इसके आगे क्या है एक और नौकरी उसके आगे क्या है इज्जत कमा लो उसके आगे क्या है घर बसा लो उसके आगे क्या है बोले अब इसके आगे तो बस यही है कि गाड़ी अब पटरी पर आ गई है और उसको जितनी दूर तक ले जा सकते हो ले जाओ तो पूछता था किस अर्थ में इसको और दूर तक ले जाऊं बोले पैसा बोले इसके आगे तो अब यही बचता है पैसा और ज्यादा लोगों से पूछने लग गया कि कुछ तो और होगा पैसे के अलावा तो उने कहा ताकत बल सत्ता जब पैसा आ जाएगा तो उसके साथ-साथ कई तरीके की ताकत इकट्ठा हो जाती वह भी

12:39 धीरे-धीरे आ जाएंगी उसने कहा इसमें तो कोई बियोस ही नहीं है यह तो बात जम नहीं रही बहुत इधर उधर जाकर के पूछने लगा साल दो साल तीन साल चार साल बीतने लगे और उसने जिंदगी में कभी भी तीन साल बिना प्रगति के गवाए नहीं थे बहुत तेज गति से उसका जीवन चला था हर साल वह कोई ना कोई नई उपलब्धि हासिल करता हुआ चला था यह उसके लिए बहुत भयानक बात थी कि तीन साल चार साल अब बीत रहे थे और उसको नहीं दिखाई पड़ रहा था कि उन्नति का अगला आयाम क्या हो सकता है व बहुत परेशान हो गया

13:29 पहले वह जाकर के लोगों से पूछा करता था कि आगे कैसे बढ़ना है अब वह जाकर के मनो चिकित्सकों से मिलने लग गया कि आगे तो बढ़ नहीं सकता जहां पर हूं वहीं पर संतुष्ट हो जाने का कोई तरीका है कोई दवा कोई गोली विधि वगैरह बताइए वह भी कुछ उसे बता नहीं पाए उसके मन में आत्महत्या का विचार आने लग गया लेकिन इतनी जल्दी उसने हार नहीं मानी और प्रयास करा और प्रयास करा लेकिन जितना वह प्रयास करता उतना उसे और स्पष्ट होता जाता था कि राह आगे की खत्म हो चुकी है आगे एक दीवार खड़ी है वह दीवार कह रही है कि या तो बाए निकल जाओ या दाएं निकल जाओ आगे अब नहीं जा सकते और वह कह रहा था

14:17 मुझे आगे जाना है मुझे दीवाल लांनी है आई वांट टू गो बियोंड दीवाल बहुत बड़ी थी आगे क्या आ चुका है वो बोलता था कल डिसेक यहां राह समाप्त होती है तो एक दिन उसने कहा ठीक है फिर दुनिया के हिसाब से जो कुछ पाया जा सकता है व तो मैंने पा ही लिया है जब सब कुछ पा ही लिया है तो यात्रा पूरी हुई ना अगर यही मंजिले हैं तो मंजिलें तो हासिल हो गई है अब और यात्रा करके क्या होगा तो उसने कहा खत्म ही करते हैं पर लड़का मजेदार था उसने कहा खत्म भी करना है तो साधारण तरीकों से क्या करें पूरी

15:05 जिंदगी तो हमने असाधारण जीए हर मामले में मैं लोगों से अलग रहा हूं बिल्कुल अव्वल कुछ ना कुछ मैंने विलक्षण हमेशा करके दिखाया है तो बोला जा रहा हूं थोड़ा बाहर जा रहा हूं शहर से पहाड़ों की ओर जा रहा हूं पहाड़ उसे पसंद थे बोला वहीं पर घूमें फिरेंगे घूमते फिरते ऐसे ही ऐसे ही कुछ जिंदगी आगे निकलेगी फिर मौत आ जाएगी यह मेरा तरीका है कायरता से वह सब नहीं करूंगा जो हर कोई करता है क्योंकि जिंदगी में मैंने कभी वह नहीं करा जो हर कोई करता है तो मरू भी वैसे क्यों जैसे हर कोई मरता है जहर खाना और यह पंखे पर लटक जाना और पानी में कूद जाना अ यह बेकार की बात ऐसे

15:52 नहीं वो जंगल निकल गया जंगल में घूम रहा है घूम रहा है इधर उधर पहाड़ है अच्छे हैं उसको शाम हो रही थी एक दिन एक तरफ थोड़ी रोशनी दिखाई दी सिर्फ एक तरफ जंगल बहुत घना तो नहीं था पर वहां आबादी भी नहीं थी किसी और दिशा में रोशनी नहीं थी बस एक तरफ को कुछ उसे रोशनी दिखाई दी उसे थोड़ा कोतुहल हुआ बोला य क्या है व वहां जाता है तो पाता है कि किसी ने पेड़ों के बीच में बड़े सुरुचिपूर्ण तरीके से दो कमरे

16:41 बना रखे हैं और ऐसे बना रखे हैं कि अगर वहां प्रकाश ना हो तो उन कमरों का किसी को पता भी नहीं चल सकता वह कमरे जंगल को काटकर नहीं बनाए गए हैं वह कमरे ऐसे हैं जैसे वह जंगल में उगे हो जैसे वह जंगल का हिस्सा हो जैसे वह जंगल से भिन्न हो ही नहीं यह तो अभी रोशनी थी इसलिए पता चल गया कि कुछ है नहीं तो पता भी नहीं लगता तो जब तक वहां पहुंचा तब तक सूरज पूरी तरह ही ढल चुका था रात ही हो गई थी खिड़की से रोशनी आ रही थी उसने एक पल तो विचार किया सोचा कुछ

17:29 खतरा भी हो सकता है यहां कौन आकर के बसे आबादी से दूर फिर उसने कहा खतरे का क्या मतलब है भाई तुम तो आत्महत्या ही करने आए थे जो आत्महत्या करने निकला हो वह विचार कर रहा है कि कहीं यहां खतरा तो नहीं तो उसने खटखटा दिया उसने खटखटा दिया तो किसी ने दरवाजा खोला जिसने दरवाजा खोला वो व्यक्ति इस युवक से आयु में महज कुछ वर्ष बढ़ा रहा होगा पर दिखता बहुत बड़ा था बाल उसके लंबे हो गए थे उसने दाढ़ी रख ली थी दाढ़ी सफेद होने लगी

18:14 थी जब उसने दरवाजा खोला तो इसकी युवक की नजर भीतर गई कमरा छोटा सा था वो पाता है क्या है कमरे में एक तरफ एक बिस्तर है और जितना बड़ा बिस्तर है उससे ज्यादा बड़ी एक पढ़ने की मेज रखी हुई है और उस पर किताबें ही किताबें किताबें ही किताबें और एक तरफ रखी हुई थी एक वीणा इसके अलावा उस कमरे में कुछ नहीं था था भी तो नाम मात्र की कुछ सामग्री रही होगी उसकी निगाह जाती है दरवाजा था एक दूसरा कमरा था वहां पर शायद खाने पकाने का कुछ बंध रहा होगा इससे ज्यादा कोई

19:01 व्यवस्था ही नहीं ये युवक एकदम विस्मय में पड़ गया बोलता है यह क्या है यह यहां कैसे हैं और उसने देखा वो व्यक्ति अभी काम ही कर रहा था उसकी मेज पर कलम पड़ी हुई थी कागज पड़ा हुआ था वो कुछ लिख रहा था शायद कोई पांडुलिपि थी कोई मैनु स्क्रिप्ट थी उसने पूछा आप कौन है बोले समझ ही गए होगे मेज को मेरी इतनी गौर से देख रहे हो कि लेखक हूं मैं अंदर आ सकता हूं अब यहां तक आ गए हो तो अंदर भी आ जाओ बैठो बैठने के लिए एक ही कुर्सी है उस पर

19:49 मैं काम करता हूं यहां कोई मेहमान आते नहीं है इसी कुर्सी पर बैठ जाओ मैं बिस्तर पर बैठ जाता हूं क्या बात है कैसे भटक आए पानी पियोगे जी पानी हां मिल जाता तो ठीक है अंदर से पानी लेकर के आता है एक साधारण सा गिलास उसको दे देता है पियो जितनी देर में पानी लेने गया था उतनी देर में मेज से सटी हुई कुर्सी पर बैठकर इस युवक ने उस पांडुलिपि जो मैनु स्क्रिप्ट थी जो लिखा जा रहा था उसका कुछ अंश पढ़ लिया था जो लिखा जा रहा था वह बहुत ही खूबसूरत था इतनी प्यारी कविता इस युवक ने कभी जिंदगी में पढ़ी नहीं थी इतने में पानी आ गया इसने पानी पिया

20:37 इसने पूछा कि आप कौन है उस व्यक्ति ने जवाब दिया यह प्रश्न पूछने का अधिकार तुमसे पहले मेरा है क्योंकि आए तुम हो यहां पर तो पहले परिचय भी तुम दोगे अपना तुम कौन हो अब हमारा जवान दोस्त कॉर्पोरेट जगत से आया था तो उसी हिसाब से अपना परिचय देने का आदि हो चुका था तो जब बोला गया कि अपना परिचय दो तो उसको ऐसे सुनाई दिया जैसे किसी कंपनी का कोई आचार एग्जीक्यूटिव बोल रहा हो काइंडली इंट्रोड्यूस

21:26 योरसेल्फ तो उसने अपना परिचय वैसे ही देना शुरू कर दिया जैसे सीवी पर परिचय दिया जाता है तो उसने बताना शुरू कर दिया कि दसवीं में यहां से पढ़ा हूं 12वीं यहां से करी है फिर इस शीर्ष संस्थान में गया वहां से आगे बढ़कर के पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए वहां गया फिर यह किया फिर यह नौकरी फिर वो नौकरी फिर यह हासिल किया फिर यह तमगा मिला फिर ऐसा फिर वैसा वो व्यक्ति बहुत ध्यान से युवक को सुनता रहा तो बोलता है ठीक है ये तुमने अपना परिचय बता दिया अब यहां कैसे पधारे बोता यहां तो मैं इसलिए पधारा हूं

22:12 क्योंकि यह सब करके भी मुझे कुछ मिला नहीं है और मैंने बहुत तलाश लिया पिछले तीन चार वर्ष मैंने तलाश में ही बिताए हैं अब वह छोड़ छाड़ के यहां आ गया हूं कि ऐसे ही भटकता रहूंगा मौज में और ऐसे ही भटकते भटकते किसी दिन कुछ हो जाएगा जी लीला समाप्त हो मेरी जीवन के प्रति आतुरता खत्म हो चुकी है तो व्यक्ति मुस्कुराता है और कहता है पहली बात तो यह कि तुम झूठ बोल रहे हो युवक सपकाता है बोलता है झूठ क्या बोला मैंने जानबूझ के तो कुछ नहीं तो व्यक्ति बोलता है तुम बोल रहे हो कि जो

22:57 भी ऊंचे से ऊंचा हासिल किया जा सकता था वह तुम हासिल कर चुके हो तो वह योग बोलता है हां बिल्कुल कर चुका हूं और आप मेरा प्रोफेशनल रिकॉर्ड देख लीजिए आप मेरा अकडम रिकॉर्ड मेरा पूरा विद्यार्थी जीवन देख लीजिए बताइए क्या नहीं मैंने हासिल किया बोलता है अच्छा तो बोलता है कहां के हो बोलता है दिल्ली का हूं अच्छा यह दसवी से तुमने अपनी कहानी की मुझे शुरुआत बताई कितने हासिल किए थे दसवी में वो बोलता है

23:43 96 तो व्यक्ति बोलता है और 96 हासिल करके तुम मुझे बता रहे हो कि जो कुछ भी उच्चतम पाया जा सकता था तुमने पा लिया है 98 तो युवक मुस्कुराता है बोलता है सर ग्लैड टू मीट यू बोलता है अच्छा 12वी में कितना था बोलता है 93 वो व्यक्ति बोलता है 96 प्रवेश परीक्षा में एंट्रेंस एग्जाम में कौन सी रैंक आई थी बोलता है सर बहुत बढ़िया गया था ऑल इंडिया टॉप 100 में था वो व्यक्ति बोलता है ऑल इंडिया टॉप 10

24:31 युवक एक तरफ तो थोड़ा शर्मिंदा होता जा रहा है और दूसरी तरफ उसको आनंद भी आता जा रहा है आपके सामने कोई शीर्ष व्यक्तित्व बैठा हो तो फिर भले ही वह आपको थोड़ा रगड़ रहा हो आनंद तो आ जाता है बोलता है और और क्या पाए हो बोलता है लगी थी कहां लगी थी वह अपनी कंपनी का नाम बताता है बोलता है यह तुम्हारी कंपनी यह तो मार्केट स्पेस में तीसरे नंबर पर आती है उसने अपनी कंपनी का नाम बोला बोला मैं यहां काम करता

25:17 था बोलता है और अब जब सारी बातें बता भी रहे हो तो यह भी बता दो पैसा कितना कमाया है तो बताता है तो वो व्यक्ति कहता अच्छा यहां मैं तुमसे पीछे रह गया वह युवक वो युवक बोलता है कि बस तीन चार वर्ष की नौकरी में मैंने एक करोड़ जो है कमा लिया या जमा कर लिया वो व्यक्ति बोलता है यहां मैं तुमसे पीछे रह गया तुम्हारा एक करोड़ मेरा 8 लाख था फिर बोलता है डॉलर [संगीत] तुम तीन चार साल में करोड़ जमा करके बैठे

26:02 थे मेरा 50 ही लाख था लेकिन डॉलर था अब इसको जो आनंद आ रहा था वह आनंद अवाकत में बदल जाता है मु और मौन हो जाता है कुछ संबंध ही नहीं बैठता वो कहता है अगर आप वह है तो आप यहां क्या कर रहे हैं वह सब छोड़ छाड़ के बोलता वही जो तुम यहां पर कर रहे हो सब छोड़ छाड़ के यू शुड बी द लास्ट पर्सन आस्किंग दिस क्वेश्चन तुमको क्यों ताज्जुब हो रहा है तुम यहां क्या करने आए वही मैं करने आया था वही मैं करने आया था बोले मैं जो करने आया तो आया आप मुझे

26:50 बताइए आप यहां आए क्या तलाशते हुए मुझे लगता है मैंने बहुत पाया था आप तो मुझसे भी बहुत आगे का पा चुके हैं उसके बाद की उसके बियोंड कौन सी चीज है जो पाने के लिए आप यहां आए और मुझे बताइए यह आप करा क्या करते हैं यहां पर बोला मैं कुछ नहीं करता मैं लिखा करता हूं मैं लेखक हूं और जो तुम किताबें देख रहे हो सब रखी हुई मेरी किताब मैं अपनी अगली किताब पर काम कर रहा हूं तो बोलता है कि इसका मतलब सबसे ऊंची बात लेखन है बियोंड नेस लाइज इन क्रिएटिव राइटिंग आप यह बता रहे हैं मुझे उसको लगा कि शायद

27:36 जवाब मिल गया है तो व्यक्ति बोलता है नहीं तुम बहुत ऊपरी चीज देख रहे हो तुमने मेरी मेज देख ली है बस सबसे बड़ी चीज मैं तुमको बताए देता हूं कि क्या है जिसकी तलाश तुमको आज है मुझे भी कभी थी उसको बोलते हैं स्वतंत्रता स्वतंत्रता वह लड़का बिल्कुल स्प्रिंग की तरह उछल करके कुर्सी से खड़ा हो गया बोलता है ठीक फ्रीडम जब सब कुछ हासिल कर सकता हूं मैं जिंदगी में तो इसको भी हासिल करके दिखाऊंगा वह व्यक्ति उसको बोलता

28:22 है समझ गए हो इतने में ही या कुछ और बताऊं य बोलता है सब समझ गया मैं तो प्रसिद्ध रहा हूं जल्दी समझ जाने के लिए कॉलेज में भी लेक्चर में जो बात मेरे सहपाठियों को एक घंटे में समझ में आती थी वह मैं 20 मिनट में समझ लेता था आपने कहा दुनिया में जितनी चीजें हो सकती हैं उन सब चीजों से बड़ी चीज होती है स्वतंत्रता फ्रीडम मुझे बात समझ में आ गई और मैं आपका जीवन भर आभारी रहूंगा सब कुछ हासिल किया अय भी हासिल करके दिखाऊंगा और उसके बाद आपसे जल्दी ही मिलने आऊंगा व व्यक्ति कहता है कुछ पूछना

29:09 तो और नहीं चाहते हो व कहता है नहीं नहीं नहीं पूरी समझ में आ गई बात यह लड़का चला जाता है अब इसके पास जीने का एक मकसद है इसे स्वतंत्रता चाहिए स्वतंत्रता चाहिए अब और जो भी बड़ी से बड़ी बात हो सकती है दुनिया में पाने लायक यह उसको हासिल करने की पूरी कोशिश में लग जाता है यह कहता है स्वतंत्रता कहता है स्वतंत्रता किसी ना किसी चीज में तो होगी और अगर सबसे ऊंची चीज है स्वतंत्रता तो

29:55 दुनिया की सबसे ऊंची चीजों में पाई जाती होगी वह खूब कमाने लगता है कहता है इस पैसे में होगी स्वतंत्रता इतना पैसा तो कोई नहीं कमाता इतनी ऊंची तो किसी की आमदनी नहीं होती मेरी है शायद इसमें होगी वह उस ऊंची आमदनी से ऊंची ऊंची कलाकृतियां खरीदना शुरू कर देता है वह कहता है यह है एकदम एक यूनिक स्कल्पचर या पेंटिंग इसको मैं अपने घर लेकर आऊंगा इसको मैं अपने सामने सजाऊंगा शायद इसमें स्वतंत्रता है प्रतिभाशाली तो था ही अब वह सत्ता बल इकट्ठा करने की ओर भी अपना ध्यान केंद्रित कर देता

30:41 है जाकर के ऊंचे पदों के लोगों से मिलना जुलना शुरू कर देता है स्थिति यहां तक बन जाती है कि अगर वह चाहे तो देश की संसद में प्रवेश कर जाए टिकट उस के लिए छोटी बात हो गई है पहले उसने जितना हासिल करा था वह सब उसे अब मजाक जैसा लगने लगता है अपनी नई उपलब्धियों के सामने लेकिन उपलब्धियों का दीवाना तो कभी था ही नहीं अभी भी वह उपलब्धियां इसलिए चाह रहा था कि उसे स्वतंत्रता मिल जाए उसे जो भी उपलब्धि मिलती जा रही है हर उपलब्धि से एक ही सवाल पूछ रहा है क्या तुम्हारा नाम है स्वतंत्रता क्या तुम्हारा नाम है क्या

31:28 तुम्हारा नाम है क्या तुम्हारा नाम है क्या तुम्हारा नाम है उसने देश छोड़ दिया वो बाहर चला गया उसने काम बदल दिया टेक्नोलॉजी के जो बहुत उभरते हुए नए क्षेत्र थे उनमें उसने प्रवेश कर लिया ज्ञान के हर नए तत्व से वह यही प्रश्न पूछता आर यू फ्रीडम क्या तुम्हारा नाम है आजादी वो पूछता जाता है पूछता जाता है और जवाब कभी भी हां में नहीं

32:16 आता उसने 3 साल और बिता दिए और जब कहीं भी उसको वह स्वतंत्रता नहीं मिली जिसके लिए व उस दिन जंगल से बेतरतीब भाग कर आया था तो एक दिन वह अपने आप को वापस उसी जंगल में पाता है वह पूछता है आपने जो मुझे बताया वह सुनने में तो बहुत अच्छा लगा पर कहीं मिल नहीं पाया यह स्वतंत्रता क्या चीज है यह स्वतंत्रता किस चीज में मिलती

33:02 है वह व्यक्ति मुस्कुराता है अब तक उसकी मेज पर कुछ किताबें और बढ़ गई थी व्यक्ति मुस्कुरा कर कहता है उस रात भी मैंने तुमसे पूछा था समझ गए हो क्या पर तुम आत्मविश्वास के मरीज तुमको लगा जैसे तुम्हारी सारी शिक्षा रही है अभी तक की वैसे ही जो मैं बात तुमको बता रहा हूं वह भी है तुमको लगा मैं कोई बाहरी बात बता रहा हूं और उसको तुम्हारा यह जो तीक्षण मस्तिष्क है और कुशाग्र बुद्धि

33:47 है एकदम तत्काल पकड़ लेंगे और मैंने तुम्हें चेताया भी था क्योंकि मैं देख पा रहा था कि जो मैं बोल रहा हूं उसका तुमने ने अतीत और अनुभव के हिसाब से अर्थ कर लिया है तुम समझे हो नहीं पर तुम भाग गए तुम दुनिया की सब चीजों में स्वतंत्रता खोजने लग गए तो युवक पूछता है कुछ गलती हुई है क्या स्वतंत्रता से भी ऊपर कुछ होता है बोले मैं तुमसे झूठ क्यों बोलूंगा अगर मैंने कहा कि सबसे ऊंची बात है स्वतंत्रता तो सबसे ऊंची बात स्वतंत्रता है तो बोल रहा फिर कहां पर चूक हो गई जो आपने सबसे ची चीज बताई वही चीज मैंने खोजी उसके बाद भी मेरी यह दुर्दशा क्यों

34:37 है उस उस लेखक ने कहा दुर्दशा इसलिए है क्योंकि तुम स्वतंत्रता चीजों में खोज रहे थे तुम स्वतंत्रता को भी कोई चीज मान रहे थे तुम्हें लगा संसार में किसी चीज का नाम स्वतंत्रता है जबकि स्वतंत्रता का अर्थ होता है सब चीजों से और संसार से ही स्वतंत्रता किसी वस्तु का नाम नहीं स्वतंत्रता होता वस्तुओं से ही स्वतंत्र हुआ जाता है बोला अरे बाप रे बाप यह तो बड़ी बुनियादी भूल हो

35:24 गई आपने क्या बताया और मैंने क्या समझ लिया पहले भी तीन चार साल खराब करे थे फिर तीन चार चले गए तो वस्तुओं से स्वतंत्र होना है बोले हा बोले फिर मुझे स्वतंत्रता मिल जाएगी मैं अपने आप को स्वतंत्र कह सकता हूं बोले हा बोले फिर मैं यह कहने का अधिकारी हो जाऊंगा कि जिंदगी में जो भी उच्चतम मैंने पा लिया बोता हां हो जाओगे यह व्यक्ति इस बार उत्साह के साथ नहीं गंभीरता के साथ वापस जाता है और जितनी तत्परता से और जितनी ऊर्जा से इसने आज तक सब कमाया

36:09 था उससे ज्यादा ऊर्जा से और निर्ममता से यह अब त्यागने लग जाता है यह कहता है यह भी छोड़ा यह भी छोड़ा यह भी छोड़ा यह भी छोड़ा यह भी छोड़ा और मुझे देखने दो कि सब कुछ छोड़ते जाने के बाद भी जिया जा सकता है कि नहीं और अगर मुझे बताया गया है कि यह स्वतंत्रता सबसे बड़ी बात है तो निश्चित रूप से यह सब छोड़ने के बाद का जीवन सबसे बड़ा जीवन होगा मुझे उस जीवन को देखने दो मैं उसे पाना चाहता हूं यह अब छोड़ता जाता है छोड़ता जाता है छोड़ता जाता है और जैसे ऐसे छोड़ता जाता है इसे हक मिलता जाता है यह कहने का आई एम फ्री मैं आजाद हूं

36:57 यह पाता है कि मन हल्का होता जा रहा है माथा निर्ब होता जा रहा है बहुत सारे काम जो उसे सिर्फ इसलिए करने पड़ते थे कि कुछ सिद्ध करना है उन कामों को करने की जरूरत नहीं है बहुत से जो सपने कभी सोते हुए आते थे कभी जगते हुए उन सपनों से पिंड छूट जाता है नींद ऐसे हो जाती है जैसे समाधि जमीन पर चलता है लेकिन कदम हल्के हो जाते हैं वह साफसाफ अनुभव कर पाता है कि जैसी जिंदगी वह जी रहा था उससे बहुत बेहतर अभी

37:43 उसकी अवस्था है लेकिन भीतर अभी भी कोई बचा रहता है यह पूछने के लिए इस देर नथ बंड दिस क्या इसके आगे कुछ नहीं है क्या यह आखिरी बात है इस व्यक्ति का मन अब लगभग मौन हो चुका था भीतर कामना की अ कुलाह लगभग शांत हो चुकी थी लेकिन ऐसा लगता था कि कुछ नहीं पाया जब मौन के ध्यान के शांति के पलों में यकायक

38:29 भीतर से एक दुबली सी आवाज में कोई बोल पड़ता था यह सब बहुत अच्छा है बहुत अच्छा है बहुत अनूठा भी है पर क्या यह आखिरी है क्या इसके आगे कुछ नहीं वह अपने आप को ही जवाब देता था बोलता था क्या मैं अब स्वतंत्र नहीं हूं और अगर मैं स्वतंत्र नहीं हूं तो बताओ अभी भी क्या बंधन है और वाली आवाज कोई जवाब नहीं दे पाती थी व कहती थी स्वतंत्र तो हो अभी तुम किसी की गुलामी नहीं कर रहे यह बात पक्की है कोई चीज नहीं है जो तुमको चला रही हो कोई नहीं है जो तुम्हारे सर पर चढ़कर बैठा हो यह बात तो पक्की है आजाद तो

39:16 हो लेकिन फिर भी हमें अभी उस प्रश्न का उत्तर नहीं मिला क्या यही अंतिम आखिरी अल्टीमेट बात है या इसके आगे अभी कुछ बचा वह अपने आप को कहना चाहता था निष्कर्ष के रूप में दिलासा देना चाहता था कि अब आगे कुछ नहीं बचा है दिलासा दे भी लेता था पर उसको पता होता था कि बात में दम नहीं है शायद अभी आगे कुछ और है आगे अभी कुछ और है तीन चार साल बिताने के बाद वह एक दिन

40:02 फिर जंगल में उसी दरवाजे पर खड़ा हुआ था लेखक दरवाजा खोलता है उसके बाल उसकी दाढ़ी अब तक कुछ और सफेद हो चुके थे लेकिन उसके चेहरे पर अब पहले से भी ज्यादा एक अपूर्व कांति आ चुकी थी व उस वक को देखता है और कहता है स्वतंत्र तो अब तुम हो हवा के झोंके से लग रहे हो किसी का बोझा ढोते प्रतीत नहीं होते युवक मुस्कुराता है मुस्कुराहट में आनंद तो था पर दर्द भी व कहता है हां स्वतंत्र तो

40:51 हूं बट इ देर नथिंग बियोंड दिस क्या यही आखिरी है लेखक पूछता है तुम्हारा अभी मन भरा नहीं जो मिल गया है इससे यह छोटी चीज है जो हालत तुम्हारी है अभी बोलता है नहीं मैं अनुग्रहीत हूं आपने जो मुझे दे दिया वह बहुत बड़ी बात है और अपने बूते तो मैं 4000 साल में यह सब हासिल ना कर पाता इतनी स्वच्छंदता इतना हल्का पन इतनी आजादी कहां किसी को नसीब होती है लेकिन फिर भी भीतर पता नहीं कौन सी चिड़िया बैठी

41:36 है शांति और विश्वास के पलों को खंडित कर देती है वह क्या पूछ बैठती है इज दिस द अल्टीमेट यही है तो वो लेखक कहता है कि अभी कौन हो तुम बोलता है पूरा विश्वास है मुझे कि अब स्वतंत्र हूं लेखक कहता है मैं तुम्हारी बात से सहमत हूं तुम अब स्वतंत्र हो बोलता है हां मैं स्वतंत्र हूं बोलता है यही तो फसे हुए हो स्वतंत्र

42:24 हो पर हो स्वतंत्र हो पर हो बहुत अचरज में भर कर के हमारा जवान दोस्त उस लेखक का चेहरा देखता है कुछ एकदम ऐसी बात कही जा रही थी जिसको समझ नहीं पा रहा था और यह उसके साथ जीवन में पहली बार हो रहा था कि उससे कुछ ऐसा कहा गया था जो उसकी समझ के बाहर का था उसको ऐसा प्रतीत हु जैसे उसके मन में कुछ विस्फोट हो गया है बड़ा भारी जैसे भीतर जो कुछ भी था उसके चीथर उड़ गए हैं सामने कुछ ऐसा खड़ा है जो उसकी पहुंच

43:09 और समझ से बहुत-बहुत आगे का है और उस विस्फोट के आखिरी शब्द में उसको यही सुनाई दिया यही है बियोंड नेस यही है आगे की बात जब कुछ ऐसा हो जिसका तुम अर्थ कर ही नहीं सकते अपने रहते हुए मैं स्वतंत्र हूं तक ठीक है अपने होते हुए भी स्वतंत्र हुआ जा सकता है पर वास्तविक स्वतंत्रता तो तब है जब मैं भी ना रहूं मैं भी ना रहूं का अर्थ क्या हुआ यह उसको नहीं समझ में आ रहा था क्योंकि जब तक

43:55 मैं हूं अर्थ करने के लिए तभी तक तो अर्थ करा जा सकता है और अर्थ इस बात का करना है कि मैं अब ू ही नहीं तो मैं अपने होते हुए इस बात का अर्थ कैसे करूं कि अब मैं हूं ही नहीं कल्पना करो कि तुम कल्पना नहीं कर रहे हो कल्पना में विस्फोट हो गया कल्पना करने वाला उपकरण जाम हो गया मन की गति एकदम ठहर गई कुछ ठोस भीतर ऐसा था जो टूट नहीं रहा था उसके चीथर उड़ गए उसने लेखक की आंखों में आंखें डालकर

44:42 देखा व पूछता है जैसे कोई मरता हुआ आदमी अपनी आखिरी सांस में पूछे आप कौन हो आप कौन हो लेखक बोल कहां हू कहां हूं पूछता आप कौन हो बोलता कहां हूं और कहने वाले कहते हैं कि उस क्षण में उस जवान व्यक्ति की और उस लेखक की शक्ल बिल्कुल एक सी हो गई अंतर कर पाना मुश्किल हो गया कि दोनों में से कौन-कौन है

45:31 परंपरा चली आ रही है कि वह दोनों आमने सामने ऐसे खड़े थे उस पल जैसे कोई दर्पण के सामने खड़ा होता है जिन्होंने यह कहानी आगे बढ़ाई है वह इस कहानी को प दर पीढ़ी आगे बढ़ाते आ रहे हैं पर सवाल उनका शेष है यह स्वतंत्रता चीज क्या है यह दोनों अंत में बिल्कुल एक से कैसे हो गए

46:19 थे यह मामला क्या है तो कहानी चली आ रही है कहानी का अर्थ किसी को पता नहीं आपको पता हो तो बताइए इतनी बार तो बताया है पर आपको आत्मविश्वास पूरा रहता है कि समझ में आ गया तो फिर अगली बार बताना पड़ता

47:06 है एक एक चीज है जो हमें चाहिए प्रतिभाशाली हो तो भी चाहिए गुणी हो तो भी चाहिए बुद्धिमान हो तो भी चाहिए और यह सब कुछ ना तो भी चाहिए और इसमें किसी को कोई शक नहीं है कि वह चीज तो हमको चाहिए दिक्कत बस यह है कि हम उस चीज को चीज समझ लेते हैं व जो चीज हमें चाहिए उसका नाम है स्वतंत्रता मुक्ति आजादी फ्रीडम

47:57 और हमारी आदत रही है चाही गई सब चीजों को संसार में ही खोजने की और फिर सफलता पूर्वक कई बार पाने की भी तो यह भी जो हमें चीज चाहिए इसको हम खोजने निकल पड़ते हैं संसार में जो भी व्यक्ति संसार में खोज रहा है खोज इसी को रहा है और कोई ऐसा नहीं है जो खोज नहीं रहा हो जीवित होने का अर्थ ही होता है गतिमान होना और गति का अर्थ ही होता है तलाश ऐसे ही थोड़ी आप इधर से उधर चलते रहते हो ऐसे ही थोड़ी आंखें इधर से उधर भटकती

48:46 हैं यह जो मन को हम चंचल बोल देते हैं बार-बार उसकी चंचलता कोई बेसबब थोड़ी ही है उसके पीछे एक अर्थ है एक बात है हमें कुछ चाहिए हो सकता है आप निरुद्देश टहलने भी निकले हो पर उस टहलने में भी आपको कुछ चाहिए आपको पता नहीं होगा क्या चाहिए पर चाहिए समझ में आ रही बात बस जो चाहिए उसको हम अपने अतीत और अनुभव और इंद्रियों के माध्यम से परिभाषित कर लेते

49:31 हैं फिर पाना चाहते हैं हम कहते हैं आज तक तो हमने पानी मांगा पानी कहां मिला बाहर मिला हमने कपड़ा मांगा कपड़ा कहां मिला बाहर मिला चश्मा मांगा चश्मा कहां रखा था बाहर रखा था कुछ पैसे चाहिए थे पैसे कहां से पाए बाहर से पाए दुनिया का सबसे बड़ा अरबपति हो उसने भी अपने पैसे कहीं बाहर से ही पाए अपने घर में तो नहीं उगाए कहीं ना कहीं से लेकर ही आया है कोई चीज हमारे पास ऐसी नहीं होती है जो हमने बाहर से ना पाई हो खोज के बताइएगा और तो और छोड़ दीजिए यह जो शरीर है यह भी बाहर से ही पाया

50:16 है अपनी हस्ती ही बाहर से पाई है हम में से कौन है जो स्व भावित है जो स्वतः स्फूर्त उत्पन्न हो गया हो पैदा भी तो हम दो बाहर वाले लोगों के शरीरों से हुए हैं जो मिला है आज तक बाहर से ही मिला है तो वह जो खास चीज हमें चाहिए उसको भी हम बाहर खोजने निकल पड़ते हैं उसका नाम है स्वतंत्रता वह मिलती नहीं है बाहर क्योंकि स्वतंत्रता का अर्थ ही है जो कुछ बाहर है उससे

51:05 स्वतंत्रता समझ में आ रही है बात वह चीज बाहर कैसे मिलेगी जब उसका अर्थ ही है बाहर वाली चीजों से आजादी आजादी का विपरीत होता है गुलामी जितना आप जो उच्चतम है जिससे आपकी जिंदगी अर्थ पाती है जिससे आपके प्राण बंधे हुए हैं जो उच्चतम है आपके लिए जितना ज्यादा आप उसको बाहर तलाश होगे उतनी भयानक गुलामी रहेगी तो आजादी की तलाश में हम और और गहरे गुलामी में उतरते चले जाते हैं आजादी जितना ज्यादा बाहर तलाशी जाएगी

51:53 उतना ज्यादा उसका नाम बदलकर गुलामी हो जाएगा क्योंकि आजादी के अलावा हमें कुछ नहीं चाहिए शास्त्र में उसको ही मुक्ति बोलते हैं तो जो आपके लिए सर्वाधिक मूल्य और महत्व रखता हो अगर वह आपसे बाहर है तो आपकी हालत कैसी होगी सोचिए जो चीज आपके लिए सबसे महत्व रखती है गहरा उसको आप कहां रखना चाहते हो अपने बिल्कुल पास आजादी अगर आपसे बाहर कहीं है तो लगभग वैसी बात हुई कि आपका दिल आपसे बाहर कहीं धड़क रहा है आपकी हालत कैसी रहेगी हमेशा फिर

52:38 बहुत घबराई हुई कुछ भी हो सकता है समझ में आ रही है बात उच्चतम मूल्य जिस चीज का है वह चीज सब चीजों से मुक्ति का नाम है इसका अर्थ क्या होता है इसका अर्थ होता है कि कोई भी चीज आपके लिए बहुत बड़ी ना बन जाए क्योंकि जो उच्चतम चीज है वह है ही यही कि कोई भी चीज आपके लिए बहुत बड़ी ना बन जाए यह एक बात है यह एक बात है और यह एक बात है और यह एक बात है और सबसे बड़ी क्या बात है सबसे बड़ी यह बात है कि इनमें से कोई

53:25 भी बात बहुत नहीं बड़ी बात है यह एक बात है यह दूसरी बात है यह तीसरी बात है यह चौथी बात है और सबसे बड़ी क्या बात है कि इन चार बातों में कोई भी नहीं मेरे लिए बहुत बड़ी बात है और यह बात मैं सिर्फ चार अदनी बातों के लिए नहीं बोल रहा हूं चार छोटी बातों के लिए नहीं बोल रहा हूं यह बात मैं उन बातों के लिए भी अगर बोल सकता हूं जो मेरे लिए सबसे ऊंची चार मूल्य की बातें हैं तो फिर जो सबसे बड़ी बात है वह मेरे

54:11 साथ है यह सोने का है बहुत मेहनत से हासिल करा है सिर्फ इसलिए नहीं कि सोने का है तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा है यह कप है भाई कप यह जीता गया है दुनिया भर को परास्त करके सबसे बड़ा सिकंदर बनकर मैंने यह कप जीता है बहुत बहुत बड़ी बात है यह यह मेरे वक्ता होने का प्रतीक है आज मेरी बात करोड़ों लोग सुनते हैं कोई साधारण बात नहीं है यह मेरे सम्मान का मेरे पद का मेरे रुतबे का प्रतीक है वाह इससे बड़ा क्या हो सकता है यह

54:57 यह मेरे कृतित्व का प्रतीक है 10 नेशनल बेस्ट सेलर 11वी आ रही है प्रतिदिन इतनी किताबें और जो छपी है तो छपी है बाकी सॉफ्ट कॉपी ई बुक्स यह व पढ़ी जा रही है यह कोई छोटी बात है कलम कहने वाले कहते हैं कि बंदूक पर और तलवार पर कलम भारी पड़ती है यह और यह यह बता रहा है कि आपकी बात अभी तक जो सुन रहे थे सुन रहे थे उनसे और ज्यादा लोगों तक फैल रही है जहां तक पहुंचे हो वहां तक तो पहुंचे

55:44 ही हो आगे अभी और कई गुना लोगों तक पहुंचने वाले हो बताओ यह कितनी बड़ी बात है बहुत बड़ी बात है इस पर खुदा हुआ है तुम सिकंदर हो यह कितनी बड़ी बात है बत बड़ी बात है यह कितनी बड़ी बात है बहुत बड़ी बात है यह अरे पूछिए ही मत यह तो भविष्य है मेरा यह तो कामना है पूरी मेरी कल कहां-कहां तक मेरी बात पहुंचेगी यह उसका प्रतीक है यह तो वह सब कुछ है जो मैंने हासिल कर लिया यह द्योतक है उस सबका जो मैं भविष्य में हासिल करना चाहता हूं ये चार बातें हैं बड़ी से बड़ी पर सबसे बड़ी बात यह है कि इन चारों में से भी कोई बात बहुत बड़ी नहीं है इसको

56:33 कहते हैं स्वतंत्रता पहली गलती हमारा जवान दोस्त यह कर रहा था कि उसको पता भी नहीं था कि वह जो कुछ भी अपनी जिंदगी में कर रहा है वह स्वतंत्रता के लिए कर रहा है वह उस शब्द से ही अनभिज्ञ था तो जाता है लेखक से मिलने लेखक उसकी पहली भूल को सुधार देता है वो कहता है देखो बाकी सब तो जो तुम पा रहे हो तो पा रहे हो अच्छा है तुमने यह सब पाया है लेकिन इन सबसे बड़ी एक और बात है स्वतंत्रता तो वह पहली भूल से उठकर दूसरी भूल में आ जाता है वह क्या सोच लेता है स्वतंत्रता भी कोई चीज है तो वह सोचता है यह रही

57:18 चीज जैसे बड़े-बड़े नेताओं के शॉल नहीं डाली जाती है तो इसको आप शॉल मान लीजिए वो कहता है अब सत्ता बल हासिल करूंगा वह सबसे बड़ी बात है वही है स्वतंत्रता समझ में आ रही और फिर वह आगे क्या गलती करता है अब उस पर आते हैं अभी तक जो कहा पहले उसको अच्छे से समझ ले आखिरी भूल अगर हमने समझ ली तो फिर आखिरी शब्द भी क दिया बात ही समाप्त हो जाएगी बात समाप्त हो गई तो फिर यह जो बातचीत है इसका मजा रुक

58:04 जाएगा बात तो दो मिनट में भी समाप्त करी जा सकती है यहां तो हमारे सामने दो पात में पूरी बात हो गई है पर हमें तो बात को खींचने का रस लेना है आप भी इसलिए थोड़ी आए हैं कि दो मिनट में सारी बात मेरा भी का काम है कि जीवन अनुभवों की एक लंबी श्रंखला होता है ना होता है ना सब अनुभव सुख के लिए ही किए जाते हैं कोई व्यक्ति नहीं कहता मैं फलाने अनुभव में जा रहा हूं ताकि मुझे दुख मिले

58:53 ठीक अच्छे से समझिए एक सुख वह होता है जो अनुभव में उतरने से मिलता है दुख मिल जाता है पर व जब मिलता है तो हमारे बिना मांगे मिलता है वह तो हमारे अज्ञान से और संयोग से मिल ही जाता है तो एक सुख व होता है जो अनुभव में उतरने से मिलता है और उससे बड़ा सुख होता है कि अनुभव में सुख मिले कि दुख मिले हमारे लिए बड़ी बात नहीं हो गई अनुभव से क्या मिलेगा कितना मिलेगा कब मिलेगा वो हमारे हाथ में नहीं होता लेकिन अनुभव से जो कुछ भी

59:38 मिलेगा वह हमारे लिए बड़ी बात नहीं बनेगा यह बात बिल्कुल हमारी होती है बाहर क्या होगा यह मेरे हाथ में नहीं है पर बाहर जो कुछ भी होगा वो बाहर बाहर ही होगा यह मेरे हाथ में है बात समझ में आ रही है बाहर कुछ ऊंचे से ऊंचा बड़े से बड़ा हो सकता है लेकिन उसका स्थान कभी नंबर 100 रहेगा और कभी नंबर दो रहेगा नंबर एक कभी नहीं हो सकता क्यों क्योंकि बाहर जो कुछ भी होगा वह मुझे एक सीमा से ज्यादा प्रभावित

1:00:24 नहीं करना पाएगा इसको स्वतंत्रता बोलते हैं यह सबसे ऊंची बात होती है इसी स्वतंत्रता के लिए नाम है आत्मा आत्मा कोई परा भौतिक वस्तु नहीं ना आत्मा हमारी कल्पना का कोई विषय है सब अनुभवों से गुजरते हुए भी किसी भी अनुभव को बाप ना बना लेने का नाम आत्मा अनुभव चाहे आपको कुछ ना दे चाहे बहुत कुछ दे दे चाहे रोमांच दे चाहे रूदन

1:01:12 दे अनुभव है बाहर की चीजें कुछ हो गया वह बाहर जो भी चीज थी व जितनी भी बड़ी चीज थी उससे बड़ी चीज यह है कि उस बड़ी चीज से हम हिल नहीं गए बाहर बड़ा भारी भूकंप आया उस भूकंप में आपका शरीर पूरा कांप गया हो सकता है आप गिर भी पड़े हो सकता है आप चोट भी खा गए लेकिन भीतर आप संयत बने रहे अब बताओ भूकंप ज्यादा बड़ा था या आपका अकंपदम और जिसको य सबसे बड़ी बात नहीं पता

1:01:59 होती अगर उसमें ईमानदारी होगी तो उसकी हालत वैसे ही आत्महत्या जैसी बन जाती है जैसे हमारे जवान दोस्त की बन गई थी हम में से ज्यादातर लोग आत्महत्या की नहीं सोचते इसका मतलब यह नहीं है कि हम बड़े सुखी संतुष्ट है इसका मतलब यह है कि हमें अपनी हालत की बर्बादी का एहसास ही नहीं है आत्महत्या की तो दर्शनिक सोचते हैं विचारक सोचते हैं जिन्होंने जीवन पर गौर करा होता है वह बहुत तकलीफ से गुजरते हैं खासकर अगर आप पश्चिमी विचार को की जीवनिया पढ़ेंगे उसमें उसमें कलाकार भी आएंगे

1:02:47 उसमें कवि भी आएंगे आप अगर उनके बारे में पढ़ेंगे तो आप पाएंगे कि वह बिल्कुल दिल को फाड़ देने वाली पीड़ा से गुजरे हैं बहुत उनमें से कितनों ने तो सचमुच आत्महत्या ही करी समझ में आ रही बात आत्महत्या बिल्कुल प्राकृतिक परिणति है एक ऐसे जीवन की जहां आपको पता ही नहीं कि वह उच्चतम क्या है जिसको पाने के लिए आपका जन्म हुआ है फिर आप पूछते हो कि फिर जब जन्म है क्यों पता ही नहीं तो जन्म को लंबा काय को खींचे

1:03:35 समाप्त करो ना क्योंकि जीने के लिए कोई माकूल वजह तो होनी चाहिए या यूं ही जिए जाए लेकिन जीने के लिए कोई वजह नहीं है यह पता भी उनको चलता है जो जीवन के प्रेमी होते हैं जो जीवन से कुछ उम्मीद रखते हैं जिन्होंने अपने आप को एक औसत जिंदगी के सुपुर्द नहीं कर दिया होता जिन्होंने अपने आप को भीड़ और समाज के बिल्कुल हवाले नहीं कर दिया होता जो ईमानदारी से खुद से खुद का हाल पूछा करते हैं उनको पता चलता है कि कितनी दुर्दशा है वरना बाकी लोगों को पता ही

1:04:22 नहीं चलता बाकी लोग तो खुशियां मनाते हैं दुख उनके हिस्से की चीज है जिनके पास कम से कम थोड़ा आत्म अवलोकन हो विचार हो थोड़ा तो आत्मज्ञान हो उनको दुख मिलता है सुखिया सब संसार है खावे और सोए दुखिया दास कबीर है जागे और रोए संसार बहुत सुख में रहता है मेरी फूटी किस्मत अभी करवा चौथ था और उस दिन मैं वहां पर जाकर एक रेस्टोरा में बैठ गया किताब आने वाली है मैनु स्क्रिप्ट पर काम करना था यहां पर काम करो तो यह लोग

1:05:08 आकर के परेशान करते हैं कुछ ना कुछ पूछने आ जाते हैं ध्यान मैं वहां चला गया वहां अपना लैपटॉप लेकर बैठा हूं और मैंने कितना कोसा अपने आपको को मैं कहा तुम्हें इतनी अकल नहीं है आज दिन कौन सा है मुझे ऐसे ऐसे भयानक मंजर दिखाई दिए मुझे आज तक खौफनाक सपने आते हैं और वह जो भयानक दृश्य थे वह चीत्कार के नहीं थे वह किसी के रोने के नहीं थे वह खून खच्चर के नहीं थे वह लाशों के गिरने के नहीं थे वह सब भयानक दृश्य लोगों की खुशियों के थे इतनी विकृत इतनी कुरूप इतनी वल्गर इतनी

1:05:58 ऑबसीन खुशियां और जब मैं वल्गर और ऑबसीन बोल रहा हूं तो उससे मेरा आशय यह नहीं है कि वहां अंग प्रदर्शन हो रहा था या पब्लिक डिस्प्ले ऑफ अफेक्शन था या चूमा चाटी ना ना ना वो तो बहुत साधारण दर्जे की अश्लीलता होती है उसमें कुछ ऐसा रखा भी नहीं है वो जो हो रहा था वो वो शब्दों से बाहर की बात है उसको बताना बड़ा मुश्किल है कि क्या हो रहा था सुखिया सब संसार है खावे और सोए समझ में आ रही है

1:06:48 बात आपकी तकलीफें उस दिन से शुरू हो जाती हैं जिस दिन आप इंसान बनना शुरू करते हो तकलीफें नहीं शुरू करनी है ना तो जानवर बने रहिएगा जिस दिन आपकी चेतना थोड़ी खुलने लगेगी उस दिन आप पाओगे कष्ट खुलने लग गया आप देखोगे आप सवाल पूछोगे आप समझना चाहोगे यह क्या है आप तलाश कहीं प्रकाश है आप सौंदर्य का पता मांगोगे कहीं कुछ तो सुंदर

1:07:36 दिखे फिर दर्द होता है कष्ट होता है तब अक्सर उपाय यह निकलता है कि दोबारा जानवर बन जाओ चारा खाओ और सो जाओ कौन से जानवर ने आज तक शिकायत की कि मेरा अस्तबल कि मेरी गौशाला कि मेरा बाड़ा मेरा पिंजड़ा कुरूप है कोई घोड़ा आज तक बोलने आया कि अरे जरा सा सौंदर्य का भी तो ख्याल करो एस्थेटिक्स यह मैं यहां बंधा हुआ हूं यह सब

1:08:24 बड़ा रहीन है कुछ रस होना चाहिए जानवर बन जाओ बिना रस के काम चलेगा कुरूप हो जाओ वही कुरूपता जो उस दिन में मा देख के आ रहा था और कुरूपता माने यह नहीं कि शक्ल बौंडी है कुरूपता माने यह कि चेतना एकदम छोटी है सझ में आ रही है बात ये जितना ज्यादा आप बाहर की चीजों को ही बड़ा मानते जाते हो उतना आप कुरूप होते जाते हो पशु बाहर ही बाहर देखता

1:09:12 है तो उसकी जिंदगी आगे बढ़ती है हिरण बाहर बाहर देख रहा है उसको दिख जाएगा भेड़िया आ रहा है व भाग लेगा और मनुष्य जितना बाहर बाहर देखता है उतना उसकी चेत घटती है लेकिन बाहर तो देखना पड़ेगा क्योंकि इंद्रियां बाहर को ही देखती हैं बाहर देखना ही पड़ेगा क्योंकि जो आप हासिल करने के लिए पैदा हुए अभी व हासिल कर नहीं लिया और हासिल करने के साधन सारे बाहर ही बाहर है और हासिल करने की प्रक्रिया कोई एक रोज की नहीं है वो तो जन्म पर्यंत एक यात्रा

1:10:01 है इस पूरी प्रक्रिया में बाहर बहुत कुछ मिलेगा यात्रा चलेगी चीजें मिलती जाएंगी जो कुछ भी मिले उसके प्रति दृष्टि कभी भी यह ना हो जाए कुछ बहुत अच्छा मिला इसका मतलब है उससे कुछ और अच्छा बिल्कुल मिलने ही वाला है कुछ बहुत अच्छा मिला इससे कुछ और अच्छा बस मिलने ही वाला है क्या इसे बहुत अच्छा मत मानो यह इससे भी अच्छी बात है कि कुछ बहुत अच्छा

1:10:47 मिला यह सूत्र पकड़िए यहीं पर हमारा जवान दोस्त चूक कर रहा था यह कब तो मुझे हासिल करना पड़ेगा क्योंकि मैं मनुष्य हूं और मुझे कुछ पाना है पाने की यात्रा में एक एक करके उपलब्धियां आएंगी उपलब्धि यह भी हो सकती है कि कब हासिल किया यह भी हो सकती है कि हासिल नहीं किया आ रहा था हमने कहा नहीं चाहिए पर चाहे हासिल किया हो चाहे हासिल ना किया हो चाहे सुख आया हो चाहे दुख आया हो जो कुछ भी आपकी तरफ आया है उससे जरा सा ऊंचा कुछ और आ सकता है वो क्या है कि जो कुछ भी आपकी ओर आया है बोलिए जब एक कप जीते तो वह एक कप जीतने का

1:11:35 मौका नहीं है कितने कप जीतने का मौका है दो कप जीतने का मौका है जब एक कप जीता जाए तो वह दो कप जीतने का मौका है पहला कप यह कहता है कि बाहर कुछ बहुत ऊंचा हासिल किया यह पहला कप है पहला कप कहता है बाहर कुछ बहुत ऊंचा हासिल किया और दूसरा कप है कि जो कुछ भी हासिल किया वह हमारे लिए बड़ी बात नहीं हो गई दिक्कत तब होती है ज्यादातर लोग तो औसत जिंदगियां जीते हैं उनके पास कब कभी आता नहीं उससे जब आगे बढ़ते हो तो हमारे भाई जैसे हो जाते हो जीतना शुरू कर देते हो लेकिन वह भाई भी कहां पर चूकता है वह

1:12:22 सोचता है इसको जीत लिया तो को जीत लिया नहीं जब इसको जीतो तो इसके साथ इसका एक जुड़वा कब भी जीतो जो इससे एक इंच थोड़ा ऊंचा हो यह जितना भी बड़ा है उससे बस जरा सी बड़ी एक चीज और होती है क्या यह यह यह कोटी खरीदी कितनी खूबसूरत है बहुत खूबसूरत है वाह बहुत बढ़िया यह है खूबसूरत नहीं इंकार कर रहे अध्यात्म जो संसार में उपलब्धि से इंकार करता वो बिल्कुल भगोड़े पन का विज्ञान बन जाता है हम नहीं इंकार कर रहे कि यह कप नहीं जीतना चाहिए कप बिल्कुल जीतना चाहिए क्यों नहीं जीतेंगे आज हमने जो कहानी सुनी वह कहानी क्या शुरू भी हो पाती अगर हमारे मित्र ने

1:13:10 जीवन में श्रम ना करा होता और उपलब्धियां ना हासिल करी होती कहानी शुरू ही नहीं होती शुरू नहीं होती तो खत्म तक कैसे पहुंचेगी अंत अपना और निष्पत्ति कैसे हासिल करेगी अगर शुरुआत तो शुरुआत तो है हां ये हासिल करना है और यह जब हासिल करना है तो इसको हासिल करना तुरंत उसी समय कुछ और हासिल करने का अवसर है क्या यह जितना भी यह मान लीजिए यह कप बड़ा वाला कप है ट्रॉफी जैसा और दो फुट का है तो दो फुट एक इंच की कौन सी चीज है कि जब यह हाथ में लिया तो ऐसे लिया जैसे चीज बड़ी हल्की है बहुत हल्की है हम यह नहीं क इसको उठा के फेंक दो

1:13:57 वैराग्य का अर्थ ये नहीं होता कि हाथ में यह कभी उठाने की नौबत ही नहीं आई वो वैराग्य नहीं कहलाता वो अकर्मण्यता कहलाती है कि जिंदगी में कभी कुछ जीता ही नहीं जो कभी कुछ नहीं जीतते उनकी कोई कहानी कभी नहीं कही जाती आज हमने जो कहानी कही उसमें दो किरदार थे और दोनों कौन थे दोनों विजेता थे और शीर्ष कोटि के विजेता थे जो कभी कुछ नहीं जीतते उनकी तो कहानी कौन सुने कौन कहे कीड़े मकड़े क्या बात बेकार बात लेकिन इसको हासिल करने पर रुक नहीं जाती है बात यह है कि जब यह हासिल करो तो ऐसे पकड़ो जैसे बढ़िया चीज है पर इससे ज्यादा बढ़िया चीज इधर है और वो जो ज्यादा बढ़िया चीज इधर है वह क्या है कि

1:14:44 यह कप है और इससे ऊंचा कप यहां है तो इस कप का महत्व तो है लेकिन इस कप से कम है इसका महत्व तो बिल्कुल है लेकिन और वो जो भीतर है वह और निखरता जाता है जितना आपके हाथ का यह कब बढ़ता जाता है क्योंकि अगर पहले आप कह रहे थेय दो फुट का है यह दो फुट 1 इंच का है अब अगर 6 फुट वाला कब जीत लिया तो भीतर वाला कितने का हो जाएगा 6 फुट 1 इंच का बाहर की उपलब्धि इसलिए नहीं जरूरी है कि बाहर की उपलब्धि पा लोगे तो कुछ पा लोगे बाहर की उपलब्धि इसलिए जरूरी है कि बाहर जितना ज्यादा पाओगे भीतर उसर भीतर उससे भी ज्यादा बड़ा होने का अवसर मिलता

1:15:31 जाएगा जब 6 फुट का कप पाओगे तभी तो भीतर 6 फुट 1 इंच के हो पाओगे ना समझ में आ रही है बात हम हम ये यह कप जीतते इसीलिए हैं कि फिर कह सके कि तेरी औकात क्या है जो कुछ जीता जाता है सब जीतेंगे यह नहीं कि उसको पा लिया तो बड़ी बात हो गई भोगना है अब उसको सब जीत कर के उसको कहेंगे ले तुझे भी पा लिया तेरी औकात क्या है तुझे भी पा लिया क्या तेरी औकात बता और यह बात आप आप किसी बहुत छोटी सी चीज को बोलो तेरी औकात क्या है तो चीज

1:16:17 कहेगी मालिक सही बोला हमा तो सही में नहीं कोई औकात है अब झाड़ू का तिनका एक उठा ला है उसको बोल रहे तेरी औकात क्या है वो चिचिया नहीं लगेगा बोलेगा सही तो बोल रहे हो मेरी क्या औकात तेरी औकात क्या है यह बोलने में शान तब है जब बड़ी मेहनत से खून पसीना एक करके जीतेगा इस कप को बोलो तेरी औकात क्या है और तुझ में दम बहुत है तुझ में दम बहुत है इसका प्रमाण क्या है मेरा खून तू अगर सस्ती चीज होता तो मेरा इतना पसीना बहता ना खून तुझे हासिल करने में जान ही चली गई मेरी लगभग तो है तो तू बहुत दमदार चीज

1:17:04 बहुत दमदार चीज है तू लेकिन तू जितना दमदार होता जाएगा अगर तू एन है तो भीतर ए प्व चलता जाएगा तू अगर 10 फीट का होगा तो तेरे 10 फीट के होते ही व भीतर वाली चीज 10 फीट 1 इंच की हो जाएगी इसको वैराग्य भी बोलते हैं वैराग्य कार्थ यह नहीं है कि यह कभी जीता ही नहीं वैराग्य का अर्थ यह है कि खूब जीता खूब जीता लेकिन जितना बड़ा यह होता गया इससे ज्यादा बड़ा भीतर कुछ और होता गया जिसके सामने यह हमेशा छोटा रहा यह हमेशा छोटा रहा समझ में आ रही है बात है भीतर हमारी गरिमा है बाहर हमारी गुलामी

1:17:52 है बाहर आप बड़ी चीज भी अगर पा रहे हो और उस बड़ी चीज के आगे आप छोटे हो गए तो बड़ी चीज काहे को लेकर आए थे अपनी दुर्दशा कराने को बड़ी भारी गाड़ी ले आए और अब गाड़ी में चलने से भी कतराते हो कहीं खरोच ना लग जाए तो गाड़ी तुम्हारी नौकर है तुम गाड़ी के नौकर हो मालिक चलते हैं गाड़ी में मुश्किल से दिन के आधा घंटा लेकिन रोज सुबह शाम पाए जाते हैं गाड़ी की बड़ी महंगी गाड़ी है भाई बड़ा ममत्व है अपने हाथ से उसकी धुलाई करते हैं कुछ बहुत ऊंचा अगर जीवन में ले आए और

1:18:40 जो ऊंचा तुम ले आए वह तुमसे भी ऊंचा हो गया तो तुम अपने घर तो अपना मालिक ले आए ना कि नहीं ले आए बहुत खुश हो रही थी मोहिनी बहुत खुश हो रही थी क्यों अरे बड़ी भारी नौकरी वाला लड़का मिल गया है हरफनमौला है कंप्लीट पैकेज है हर दिशा से भरा पूरा बिल्कुल तुझे वो मिल गया है या अब तू उसके यहां जा रही है छोटी होकर के तुझे बड़ी चीज मिल गई है या तू छोटी हो गई अब बोलिए यह हमारा हाल रहता है हम जब भी कुछ बड़ा

1:19:28 अपने जीवन में लेकर के आते हैं उपलब्धि के तौर पर उसके सामने हम हमेशा छोटे हो जाते हैं जिंदगी उसकी है जो जिंदगी में बड़े से बड़ा लेकर के आए और फिर कहे तुझसे बड़ा मेरे पास पहले से है तुझसे बड़ा पहले से बड़े से बड़े भोग को अपने सामने लाकर के रख दे ऐसा नहीं कि हम में पौरुष की कमी है ऐसा नहीं कि हम इस दुनिया में खेलना नहीं जानते हम खेलना जानते हैं हम जीतना जानते हैं जो जीतने में चीजें बहुत मुश्किल है वह अपने सामने जीत करके रख देंगे और फिर क्या बोलेंगे अरे माल पसंद नहीं

1:20:14 आया माल पसंद नहीं आया जैसे कोई बिगड़ैल राजकुमारी बड़ा भारी और कठिन स्वयंवर रचाए बोले यह कर दोगे वह कर दोगे यह कर दोगे वह कर दोगे तो ही मुझे जीत पाओगे तो हम जाएंगे उस स्वयंवर में जो जो उसने शर्तें रखी थी सारी शर्तें पूरी करके दिखाएंगे और फिर जब वह वरमाला लेकर आएगी तो कहेंगे माल पसंद नहीं आया मैं तेरी शर्तें पूरी करके तुझे घर लाऊ तो मालिक तो तू हो गई बात तो तब होती जब तू बेशर्त हमारे साथ

1:21:07 आती समझ में आ रही है बात कोई शर्त ना पूरी करूं तो फिर इंसान कहलाने का हकदार नहीं फिर तो जैसे जानवर पैदा हुआ था जानवर हूं जानवर के लिए कोई शर्त नहीं होती जानवर कहलाने की कोई कुत्ता मिला है जिसको आप बोले कि जब तू ग्रेजुएट हो जाएगा तो बोलेंगे कि तू कुत्ता है वो तो पैदा होते से ही कुत्ता है हां इंसान को आप ये नहीं बोल सकते कि पैदा हो गया तो इंसान हो गया इंसान को तो शर्तें पूरी करनी पड़ेंगी हमें स्वयंवर जीतने पड़ेंगे लेकिन स्वयंवर जीतने के बाद उसे घर मत ले आइएगा उसे भोगने मत लगीगाला से हमारे पास है

1:21:54 बहुत-बहुत तू सुंदर है पर तुझसे कहीं ज्यादा सुंदर कोई हमारे घर में पहले से है तुझे घर क्या ले आए हां तूने कुछ शर्तें बताई थी शर्तें पूरी कर दी समझ में आ रही बात यह दोनों ही काम नहीं करने पहला काम होता है कि पौरुष हीन हो गए कुछ ना कर्मठता है ना खुद्दारी है ऐसों को बोलते हैं का पुरुष कायरता और कातर है

1:22:42 बस पैदा हुए हैं तो मन में बुद्धि में संकल्प में और बाजुओं में दम होना चाहिए हार जीत हमारे हाथ में नहीं होती पर प्रयास ऐसा होना चाहिए कि अस्तित्व की छाती फाड़ दे उसके बाद हार हो कि मौत हो देखा जाएगा समझ यह पहली बात और दूसरी बात इतनी कोशिश अगर करोगे तो संसार में निश्चित रूप से विजेता कहलाओगे और संसार बहुत सारी अपनी उपाधियां लेकर के और संपदा एं सामने खड़ा हो जाए जब संसार सामने खड़ा हो जाए तो क्या कहना

1:23:27 है नहीं चाहिए जिस क्षण आपने संसार की संपदा एं ठुकरा दी पाने का हकदार होने के बावजूद ठुकरा दी उस क्षण भीतर की संपदा के दरवाजे खुल जाते हैं वरना भीतर की संपदा नहीं खुलेगी भीतर का 6 फुट 1 इंच का कप तभी अचानक प्रकट होता है जब पहले हाथ में यह 6 फुट वाला जीता जाता है जो यह 6 फुट वाला कभी नहीं जीत सकता वो 6 फुट 1 इंच वाला कभी देखने को ही नहीं पाएगा भीतर लेकिन लेकिन जो यह जीते वह बस जीते भोगे नहीं हम भोगने के लिए नहीं है हम भोगने के लिए

1:24:14 नहीं इसको मैंने जीता है इसकी खातिर नहीं बोलो यह 6 फुट की चीज जीती है 6 फुट की चीज की खातिर नहीं ये 6 फुट 1 इंच को जगाने का आह्वान करने के लिए इसको ना जीता होता तो यह कैसे जगता और यह जग गया तो अब इसकी औकात क्या यह जग गया तो अब इसकी औकात क्या यह साधन है प्रकृति साधन मात्र है प्रकृति साध्य नहीं है प्रकृति इसलिए नहीं है कि उसे भोगो वो इसलिए है ताकि उससे रास्ता बना कर के उसके पार निकल जाओ जो यहां अटक

1:25:00 गया उसकी हालत उनसे बहुत बेहतर नहीं होती जिन्होंने कभी इसको जीता ही नहीं एक भागे वह जो जीवन के रण क्षेत्र में कभी उतरे ही नहीं और दूसरे अ भागे वह जो उतरे कुछ जीता और जो जीता खुद ही उसके गुलाम बन गए यह कौन सी जीत यह कौन सी जीत है किसकी ज्यादा बड़ी गुलामी है बड़े दफ्तर की बड़ी इमारत के आगे जो गार्ड खड़ा रहता है जो कम से कम अपनी शिफ्ट पूरी होने पर घर चला जाता है या जो बड़ा भारी भीतर विजेता बैठा हुआ

1:25:46 है जो घर भी नहीं जा सकता कभी अपने सड़ा हुआ काम है जिसको वह किसी तरह जी को मार कर रहा है पर घर नहीं जा सकता ज्यादा बड़ा गुलाम कौन है कहना मुश्किल है व जो बाहर गार्ड खड़ा उसने कुछ नहीं जीता उसकी एक गुलामी है यह जो भीतर घुसे हुए इन्होंने बहुत कुछ जीत लिया शायद इनकी और बड़ी गुलामी है जो भोग के लिए जीतेगा वह भोगी हुई चीज पर फिर रुकेगा भी तो यह जो आदमी है जो जिंदगी कोई उपलब्ध नहीं हासिल कर पाते यह कौन से लोग हैं जिनको छोटी चीज मिली उसी को भोगने में घुस

1:26:32 गए कभी कप मिल तो गया 6 इंच वाला मिल गया अभी 6 इंच में मु डाल दिया बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया कप ऐसी चीज है कि बारबार भरते रहो पीते रहो अगला काहे को चाहिए इसलिए बड़ा कप नहीं आता हमारी जिंदगी जो सांसारिक विजयों से शून्य हो होती है उसका कारण ही यही होता है जो छोटी विजय मिलती है हम उसको भोगने लग जाते हैं और उसे भोग भोग के मोटे हो जाते हैं बिल्कुल अब आगे कैसे दौड़ो ग छोटा कप तो जीत लिया 100 मीटर दौड़ के आगे कैसे दौड़ो ग छोटे कप में ही भर भर के पिए ही जा रहे हो पिए ही जा रहे हो पिए ही जा रहे हो तो आगे बढ़ने का तरीका यही है कि जो मिला हो

1:27:17 उससे बोलो तू मिल तो गया पर तुझसे बड़ा मेरे पास पहले ही है तो तू हट ना मुझे आगे जाने दे और कहीं पर भी मत जो भी ऊंचे से ऊंचा मिलता जाए मिलता जाए मिलता जाए उसको कहो अभी तुझसे जो बड़ा है वह तो इधर बैठा है यह आपको स्वतंत्र कर देता है और जीतने के लिए और याद रखिए इस जीत में चूंकि भोग नहीं है इसीलिए स्वार्थ नहीं है स्वार्थ हो ही नहीं सकता भोग की लिप्सा के बगैर जहां भोग नहीं स्वार्थ नहीं कहने की जरूर नहीं वहा निष्काम होता है एक क्षण को भी अर्जुन को नहीं कह रहे हैं कृष्ण कि जीत जाओगे तो क्या जबरदस्त

1:28:04 सुख पाओगे सुख तो दूर की बात है जीत जाओगे ऐसा भी कोई भरोसा नहीं दे रहे हैं बस क्या बोल रहे हैं जीतो यह बात हमको पहेली जैसी लगनी चाहिए कि अगर भोगना नहीं है तो जीते किसलिए इसलिए जीतो कि जब जीत लोगे तो पाओगे उससे बड़ी जीत भीतर बैठी हुई है पर यह जीवन का नियम है इसको अच्छे से समझ लीजिए वह जो बड़ी चीज आपके भीतर बैठी है वह उतना ही अनावृत होती है उतनी ही खुलती है जितनी बड़ी चीज आप पहले जिंदगी में अपने लिए खोलते हैं यह 6 फीट का होगा तभी भीतर 6 फीट 1 इंच का और आत्मा को ब्रह्म भी बोलते हैं ब्रह्म

1:28:49 जिस धातु से आता है वह धातु बोलती है वो जो फैलता जाए वो जो जहां से ब्रह्म आ रहा है ना वहीं से आता है वृहद जो अपना आकार हर समय बढ़ाता ही जाए जिसका अंत कभी ना आए उसको ब्रह्म बोलते हैं यह कभी आपका 100 फीट का हो गया तो जो भीतर वाला वो कितने का हो जाएगा वो 101 फीट का हो जाएगा 100 फीट 1 इंच का हो जाएगा कोई अंत नहीं है उसका भीतर आप कितने बड़े हो ये इसी से साबित होता है कि बाहर की कितनी बड़ी से बड़ी चीज को आपने छोटा कह दिया जो बाहर की बहुत बड़ी चीज को छोटा बोल दे वह बाहर की बहुत बड़ी चीज से भी बहुत बड़ा हो गया समझ में आ रही बात पर वो नौबत कभी आएगी ही नहीं अगर बाहर आपके पास कोई बहुत

1:29:35 बड़ी चीज समझ में आ रही बात इसलिए आपके अवतार सब विजेता थे इसलिए दिवाली जिन श्री राम के लिए मनाते हो वो पहली बार लंका जीतते हैं और फिर कहते हैं चीज छोटी है तो सोना इतना सा मिल जाए तो जान ले ले किसी की और वहां तो सोने के स्काई स्क्रैपर्स थे सोने की गगन चुंबी इमारते जाने कहां से उतना खनन करा होगा खनन क्या करना है वो तो रावण इधर उधर से

1:30:22 जो मिला वहीं से लूट लाट के दुनिया भर का सोना वही इकट्ठा कर रखा था ऐसा ना देखा गया ना सुना गया कि पूरा पूरा शहर ही सोने का अतिशयोक्ति भी हो इसमें मान लो तो भी बड़ी बात है और और एक बार को ख्याल करो उस धनुर्धर का जो जंगल में नंगे पांव निकला था कुछ नहीं है उसके पास जगत की महाशक्ति को हराना तो किसी भी ताकतवर राष्ट्र के लिए भी गौरव की बात होती है और यहां एक राष्ट्र नहीं ने नहीं हराया था सुपर पावर

1:31:08 को यहां दो व्यक्तियों ने हराया था दो व्यक्तियों ने जो सबसे सर्व शक्तिशाली राष्ट्र था उसको घुटनों प ला दिया था दो व्यक्तियों ने और ऐसा होता है कई बार एक व्यक्ति निकलता है और वह व्यक्ति साम्राज्य खड़ा कर देता है दो नाम है इनको आप पढ़िए और पप पर डालिए पहला चंद्रगुप्त मौर्य और दूसरा हरिहर और बुक्का चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य और दूसरा हरिहर और बुक्का यह वह लोग थे जिनके पास कुछ नहीं था यह लोग थे जिन्होंने कहा हम है हमारे पास कुछ नहीं है ना रुपया ना पैसा ना शस्त्र ना शस्त्रागार लेकिन हम राज जी

1:31:54 अपने बूते पर खड़ा कर देंगे उन्होंने कर दिया खड़ा लेकिन इन्होंने भी जो करा वो भी छोटी बात थी उसके सामने जो राम ने करा क्योंकि इन्होंने तो बस राज्य खड़ा करा था उन्होंने तो उस समय कि जो सबसे बड़ी महाशक्ति थी उसको बिल्कुल नेस्तनाबूद कर दिया था कितनी बड़ी बात और इतनी बड़ी बात हासिल करने के बाद क्या बोलते हैं अजी रखो अपनी चीज नहीं लेकिन हां चौड़ नहीं बर्दाश्त हमने इसलिए नहीं तुमको हराया इसलिए नहीं वध करना पड़ा कि हमें कुछ लालच था

1:32:39 तुम्हारी चीज का देखो तुम गलत काम कर रहे थे इसलिए तुमसे युद्ध करना पड़ा वरना हमारी कोई नहीं इच्छा कि तुम्हारी वस्तु का भोग करेंगे एक स्वर्ण आभूषण तक राम और सीता लंका से लेकर नहीं आए लंका का जो वाहन भी छोड़ने आया था वह भी नहीं करा कि अपने ही पास रख ले वह भी लौटा दिया बोले जाओ जहां के हो वहीं जाओ यह आप तभी कह सकते हो जब आप पहले यह कहो तुमसे बड़ी चीज मेरे पास एक गरीब आदमी एक पल में अमीरों से अमीर हो जाता है जब उसके सामने ने बहुत बड़ी दौलत रख दी जाती है और वह कहता

1:33:27 है नहीं चाहिए क्योंकि नहीं चाहिए आप कह ही तभी सकते हो जब उससे बड़ी चीज आपके पास पहले से तो आपके पास सूत्र अच्छे से समझ लीजिए लिखना हो लिख लीजिए आपके पास क्या है यह इससे साबित होता है यह सिर्फ इससे साबित होता है कि आप किसको ठुकरा सकते हो आपके पास क्या है और कितना है इसका प्रमाण बस यही है कि क्या-क्या है जो आप ठुकरा सकते हो जो कुछ भी आप ठुकरा सकते हो आपके पास उससे कुछ ज्यादा है जो आदमी कुछ नहीं ठुकरा सकता उससे गरीब कोई हुआ कोई र दे आपको आपसे ठुकराया ना जाए इसका मतलब आपके पास कितना है अधिक से अधिक रप र आपके लिए बड़ी बात

1:34:16 है जो आदमी जितनी छोटी चीज को जिंदगी में बड़ा बना ले भीतर से वह उस छोटी चीज से भी थोड़ा और छोटा है और यहां बात उपलब्धि से आशय यह नहीं कि कप ही है या रुपया पैसा या सोना छोटी चीजें बड़ी चीजें और रूपों और आकारों में आती हैं किसी ने आकर के आपको एक गाली दे दी और वह गाली आपके लिए बहुत बड़ी बात हो गई व गाली है छोटी गाली छोटा आदमी छोटे आदमी की छोटी गाली और वो छोटी गाली आपके लिए बी बात हो गई तो इसका आशय क्या हुआ फिर इसका मतलब है कि आप उस छोटी गाली से भी छोटे आदमी हो जिसके लिए इतनी छोटी चीज भी बड़ी हो गई वह आदमी

1:35:04 कितना छोटा होगा समझ में आ रही है बात अब उस आखिरी बात पर आते हैं कैसे हुआ था कि यह दोनों आमने-सामने उस पल में एक जैसे हो गए थे एकत्व के उस पल से पहले इस युवक ने पूछा था आप कौन है और उसने उत्तर दिया था मैं हूं कहां मैं हूं

1:35:50 कहां आप जो भी बनोगे उसकी कुछ सीमा होगी और अगर आपकी सीमा होगी तो उस सीमा से बड़ा कुछ फिर बाहर खड़ा करा जा सकता है ना जब बाहर खड़ा कर दिया जाएगा तो आप कैसे कह पाओगे कि यह छोटी चीज है कुछ बनिए मत आप अपने लिए जो भी नाम पहचान वगैरह बनाएंगे उसी का फायदा उठाकर संसार आपके सामने एकदम विशाल हो जाएगा अब वो विशाल हो जाएगा आपको दबना पड़ेगा आप गुलाम हो जाओ कुछ बनो मत आप जो कुछ भी बने हो उससे कुछ ना कुछ बड़ा संसार खड़ा कर देगा क्यों क्योंकि आप जो कुछ भी बनते हो संसार से ही तो आया है संसार अगर आपको कुछ बना सकता है

1:36:37 तो उससे बड़ा कुछ आपके सामने खड़ा भी कर सकता है मैं करोड़पति हूं वह करोड़पति आपको किसने बनाया है संसार ने अगर आप करोड़पति हो संसार के बनाए हुए और संसार ने फिर आपके सामने एक खरब रुपया खड़ा कर दिया तो यह करोड़पति बहुत छोटी चीज हो जाएगा कुछ मत बनो ये भी कहोगे कि मैं स्वतंत्र हो तो भी कुछ हो अभी यही बात हमारे युवक को अभी थोड़ा सा साल रही थी अभी कुछ हूं और जो भी कुछ आप रहोगे वह आपकी गुलामी के लिए ही इस्तेमाल होगा कुछ भी मत रहो कुछ भी मत रहो

1:37:24 जो कुछ नहीं है सिर्फ वही अनंत हो सकता है जो कुछ नहीं है वही सिर्फ बड़ी से बड़ी चीज से भी बड़ा हो सकता है और यह आखिरी स्वतंत्रता है तो तीन इसमें फिर श्रेणियां आ गई लिखिए पहले पहले अंग्रेजी में लिखेंगे फिर हिंदी में पहला तल होता है उन लोगों के लिए जिनकी जिंदगी होती है ऑब्जेक्ट से भरी हुई तो पहला तल हुआ ऑब्जेक्ट्स वो एक ऑब्जेक्ट पकड़ लेते हैं छोटा सा और उसी को क्या करने लग जाते

1:38:09 हैं नतीजा यह होता है कि वह एक फुट के कब से कभी 6 फुट के कप तक पहुंच ही नहीं पाते क्योंकि एक फुट को ही भोगे जा रहे हो भोगे जा रहे हो भोगे जा रहे हो भोग तो अनंत काय को खत्म होगा तो पहली चीज होती है ऑब्जेक्ट्स कि जिंदगी में क्या है ऑब्जेक्ट्स विषय ऑब्जेक्ट के आगे विषय दूसरी चीज होती है फ्रीडम फ्रॉम ऑब्जेक्ट यह वह स्वतंत्रता है जिसकी बात इन दोनों की पहली मुलाकात में हुई तो दूसरी चीज हुई फ्रीडम फ्रॉम ऑब्जेक्ट्स विषयों से मुक्ति और फिर तीसरी चीज है फ्रीडम फ्रॉम फ्रीडम व्यक्तिगत मुक्ति से मात्र

1:39:03 मुक्ति जो आखिरी पहचान है कि मैं मुक्त हूं यह आखिरी पहचान भी ना बचे व तीसरी चीज बहुत आगे की है हम दूसरी साध ले इतना पर्याप्त है अब आप बताएंगे कि संत शिरोमणि हमसे क्या कह रहे हैं आज ना भी कमल बच है कस्तूरी जैसे मरग फिरे बनका क्या अर्थ हुआ इसका अगर कहानी समझ में आई होगी तो ही अर्थ बता पाएंगे नाभि कमल बच है कस्तूरी जैसे मृग फिरे बनका क्या अर्थ

1:39:48 हुआ ऐसा थोड़ी है कि बाहर कुछ नहीं है अगर हम कस्तू मृग पर विश्वास करें जैसा उसका बताया जाता है मिथ में मस्क डियर कि उसकी नाभि में कुछ होता है जो खुशबू देता है कस्तूरी और वह खुशबू इतनी आनंद देने वाली होती है एकदम आखिरी बात होती है खुशबू कि वह उसी खुशबू के स्रोत की तलाश में भटकता है एकदम बेचैन होकर के तो कोई गलत थोड़ी भटक रहा है खुशबू बाहर से तो आ ही रही है खुशबू ठीक है उसके भीतर है पर भीतर से बाहर जाती है हवा में जाती है और हवा से फिर उसकी नाक में आती है आपके पेट में जो कुछ है आपकी नाक को उसकी गंध आती है क्या

1:40:36 बड़ी तकलीफ हो जाएगी आने लग जाए तो पेट में जो कुछ है नाक को भी उसकी गंध तब आती है जब वह माल पेट से बाहर जाता है तो उसके पेट में अगर कस्तूरी है तो उसे कभी भी सीधे-सीधे डायरेक्टली कस्तूरी की सुगंध नहीं आ सकती उसे कैसे आती होगी कि वहां से जो कस्तूरी की खुशबू है वह रगड़ रगड़ के खाल तक पहुंची और फिर खाल से हवा तक पहुंची और फ हवा से उसकी नाक तक पहुंची तो मृग झूठ नहीं बोल रहा है अपने देखे मृग बिल्कुल ठीक कह रहा है कि जो खुशबू है कहीं बाहर से आ रही है क्योंकि आ तो बाहर से ही रही है आ तो बाहर से ही रही है लेकिन बाहर से जितनी आ रही है उससे कहीं ज्यादा तीव्रता

1:41:22 से भीतर मौजूद है बाहर जिस इंटेंसिटी से खुशबू आ रही है उससे कहीं ज्यादा वह भीतर मौजूद है समझ में आ रही तो जगत में उपलब्धि एक बात है उसका एक आकार एक महत्व लेकिन उससे ही ज्यादा बड़ी उपलब्धि लगातार हमारे भीतर मौजूद रहे और क्या है उस उपलब्धि का स्वरूप कि बाहर जो कुछ भी भी है मैं उसे कभी सर पर चढ़ने नहीं दूंगा चाहे छोटी बात चाहे बड़ी बात चाहे सुख चाहे दुख चाहे पाना चाहे खोना और मैंने उसको कितना अपने सर पर नहीं चढ़ने दिया वह पता तभी चलेगा

1:42:09 उसका उसका अनावरण तभी होगा जब पहले मैं बाहर कुछ पाऊं तो सही भिखारी बोले कि मैं तो बड़ा त्यागी हूं तो बा चटपटी है ना त्याग करने के लिए पहले कुछ होना तो चाहिए और बेटा आप भिखारी इसलिए नहीं हो कि संयोग की बात है आप भिखारी इसलिए हो क्योंकि आपको जिंदगी में जो कोई छोटी चीज भी मिल जाती है ना आप उसी में फसे रह जाते हो तरक्की के मौके आगे बढ़ने के मौके चाहे ज्ञान कमाना हो चाहे धन कमाना हो इसके मौके तो आपके पास भी आते रहे पर उन मौकों को आप छोटी छोटी कसौट हों पर गवाते

1:42:56 रहे किसी ने बोला होगा किसी दिन आओ मेरे साथ मैं तुमको पढ़ाऊंगा आपने बोला नहीं मुझे तो मांगने जाना है कुछ देर मांगता हूं उसके बाद जाता हूं धूम मचाता हूं यह पढ़ाई लिखाई वाला पता ही नहीं सालों साल का कार्यक्रम चलता है और उसके बाद उसमें से क्या अंजाम मिलेगा कुछ पता नहीं भीख में तो हाथ के हाथ आप कह रहे हो कि पहले 10 साल की पढ़ाई होती है फिर नौकरी लगती है उस 10 साल में तो मैं अपना पूरा कटोरा इतनी बार भर लूंगा समझ रहे बात जो छोटी चीज पर नहीं अटके वही बड़ी चीज हासिल करेगा और जो बड़ी चीज हासिल

1:43:44 करेगा सिर्फ उसको यह मौका मिलेगा कि जाने कि उससे भी बड़ा वह खुद है यह चीज है बड़ी और इससे बड़ा मैं हूं जिंदगी में गौर से तलाश कहीं कुछ ऐसा तो नहीं पकड़ लिया है जो बड़ा तो है पर आपसे भी बड़ा है इससे अच्छा तो यह होता कि बहुत बड़ा हाथी लेकर आए हैं घर में बहुत बड़ा हाथी दुनिया दात दे रही है तकलीफ बस इतनी है कि हमारे लिए घर में जगह नहीं

1:44:32 है तो अब हाथी घर में सोता है और हम सड़क पर सोते हैं कोई ऐसी चीज घर मत ले आइएगा जो आपसे आपका घर ही छीन ले आपकी कोई उपलब्धि इतनी बड़ी नहीं होनी चाहिए हाथी नुमा कि वह आपको ही घर से निष्कासित कर दे घर माने यह घर यह घर घर में जो कुछ भी लाइए उससे बड़े आप होने चाहिए मेरा है मैं उससे बड़ा हूं होगा बहुत बड़ा कोई पहचान इतनी बड़ी नहीं हो जानी चाहिए कि छिने तो आपको लगा जान निकल गई अरे पहचान है जान नहीं है सब पहचाने समाज ने दी है संसार किसी ना किसी दिन उनको छीनेगा जब छीनेगा तो आपका

1:45:19 क्या हाल होगा फिर हर चीज को कहिए हां है तो ठीक है है तो भी ठीक है अच्छी बात है और नहीं रहेगा तो भी ऐसा नहीं कि हम बिखर जाएंगे जो बिखरने लग जाते हैं उनकी बाह मरोड़ी जाती है उनको यही धमकी दी जाती है कि तुमसे फलानी चीज छीन लेंगे चलो और हमारी अब गुलामी करो बात समझ रहे हो ना भी कमल विच है कस्तूरी मृग फिरे जैसे कारे इसमें कोई मिस्टिकल अर्थ मत निकालने लगीगाला है यही आत्मा

1:46:06 है दुनिया बड़ी है बहुत बड़ी है और दुनिया में जो बड़े से बड़ा है हम उसके करीब जाएंगे हासिल करेंगे उसे आजमाए लेकिन उसे कभी भी बाप नहीं बनाएंगे बाप इथे इथे चीज हमेशा चीज ही रहेगी तू बड़ी चीज है लेकिन है तो चीज ही तो है बहुत बड़ी चीज होंगे आप आत्मा नहीं बन गए आत्मा तो नहीं बन गई ना वह हमारी है और

1:46:52 वह हर चीज से बड़ी है दुनिया की किसी चीज की खातिर इसको छोटा नहीं होने देने इसको छोटा कैसे किया जाता है यह नहीं छोटी की जाती उसको बड़ा बहुत कर देते हो तो यह छोटी हो जाती है वह जितनी भी रहे उससे 1 इंच यह बड़ी रहनी है और रवैया हमेशा यह रहे कि ठीक है बहुत बढ़िया है पर जब त्यागना पड़ेगा त्याग देंगे तो दिवाली का दिन है कितनी देर लगी थी श्री राम को स्वीकार करने में कि महल का और अयोध्या का त्याग करना है और बहुत नाटकीय क्षण था बस होने ही वाला था उनका राज

1:47:42 तिलक सिंहासन रूढ़ होने वाले थे सोचो कैसा होता है हमें कोई छोटी चीज मिलने वाली हो धड़कने तेज हो जाती है हाय राम हाय राम और जिन राम का नाम लेकर हाय राम हाय राम करते हैं उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था उनकी ताजपोशी है और तभी मंथरा को कुछ व बोलते ठीक तुम दे रहे थे तब भी ठीक था तुम नहीं दे रहे हो तब भी ठीक कोई बात नहीं नई नई शादी करके लाए थे सीता बैठी हुई थी और उनको विवरण आता है सिर्फ यही नहीं कि मानस में वाल्मीकि रामायण में विवरण आता आता है कि बड़ी सुकुमारी

1:48:30 थी तो उनको जाकर बोलते हैं कि मैं जा रहा हूं यहीं रहो कोई जरूरत नहीं साथ आने की ठीक है बहुत अच्छी बात है ले आए हैं मिथिला कुमारी को और बड़ी गुणवंती भी है सुंदरी भी है बहुत अच्छी बात है लेकिन इतनी नहीं बड़ी बात हो गई कि अपने स्वार्थ की खातिर इसको कहे कि अब तू भी चल सब ठीक लक्ष्मण खड़े हो गए हम भी उस उनको भी बोल रहे हैं तुम काहे को परेशान हो रहे हो भाई तुम्हें क्या समस्या है लोग परेशान हो गए वहां बाहर रोक रहे

1:49:17 हैं उनको वो इतना सा इशारा कर देते प्रजा विद्रोह कर देती प्रजा के बड़े प्यारे व इतना सा इशारा कर देते दशरथ ही कह देते मैं अपना वचन तोड़ता हूं कुछ नहीं दशरथ ने भी बुलाया राम बोले आप क्यों दुखी हुए जा रहे हैं क्या बात है कुछ नहीं हो गया जा रहा हूं बड़ी से बात बड़ी बात हमारे लिए छोटी होनी चाहिए कुछ ऐसा ना हो जो विचलित कर दे जो अविचल रहे उसे ही आत्मा कहते हैं

1:50:06 बिन सतगुरु इतना दुख पाया वैद मिला नहीं स्तन कारे आपने इस अर्थ में देखा नहीं होगा पर हमारी कहानी में गुरु अच्छे से मौजूद था लेकिन आवश्यक नहीं है कि वह हमेशा उसी तरीके से आए जैसे हम उसकी कल्पना करते हैं यह कहानी आगे बढ़ ही नहीं सकती थी जब तक वह दूसरा ना होता और यह कहानी खत्म नहीं हो सकती थी जब तक वह दूसरा बना रहता इस कहानी के आगे बढ़ने के लिए उस दूसरे का आना जरूरी था और इस कहानी की निष्पत्ति के लिए उस दूसरे का खत्म होना जरूरी था

1:50:53 गुरु के साथ यही संबंध होता है आपकी कहानी एक वृत्त में घूमती रहेगी अगर गुरु नहीं है कहानी आगे बढ़ने लगती है जब गुरु आ जाता है पर आपको सिर्फ यही थोड़ी चाहिए कि चीज आगे बढ़ती रहे आपको कहीं तो आकर विश्राम लेना है कहीं पर आकर तो आगे बढ़ने से भी मुक्त होना है वह मुक्ति तभी मिलती है जब गुरु नहीं बचता ना बचने से क्या आशय होता है अब कुछ पता ना लगे कि कौन-कौन है तब समझ लो कोई नहीं बचा ना गुरु बचा ना शिष्य

1:51:42 बचा गुरु का बड़ा स्वार्थ होता है अपने आप को बनाए रखने में और जो असली होगा उसकी पहचान ही यही है कि वह हटने को तैयार रहेगा क्योंकि हटेगा नहीं ना तो खुद ही राह का रोड़ा बन जाएगा नाविक का काम यह थोड़ी होता है कि नाव से बांध दे आपको पार तो लगा दिया और बांध दिया अब उतरने नहीं दे

1:52:35 रहा ये जो बात थी आज की बिल्कुल स्पष्ट है कस्तूरी मृग की बात संत साहित्य में बार-बार हुई है बार-बार हुई है जब भी वो बात सामने आएगी तत्काल क्या समझना है कस्तूरी मृग से आशय ये है कि बाहर जो अच्छा है वह तो अच्छा है ही पर वह जो कुछ भी अच्छा है अगर मैं उससे आगे निकल सकता हूं तो उससे कुछ ज्यादा अच्छा मेरे भीतर है वह जो ज्यादा अच्छा मेरे भीतर है उसी को कहते हैं कस्तूरी वह मेरी कस्तूरी है मेरे पास वह जो है वही मुझे ताकत देता है बहुत बड़ी बड़ी चीजों की भी गुलामी ना करने की आप लाए हो बहुत

1:53:23 बड़ी बात पर मैं उसी गुलामी नहीं करूंगा एक करोड़ ठुकरा दिया आपने तो आपके भीतर निश्चित रूप से कितना था एक करोड़ एक यह कस्तूरी मृग और वह अनंत हो सकता है निर्भर इस पर करता है कि आप कितना पाते हो और फिर पाने के बाद कहते हो पा लिया है पर भोगना नहीं है पाया है भोगा नहीं बाजार से निकला हूं खरीदार नहीं हो सिर्फ बाजार में मुझे खड़े देखकर यह मत सोच लेना कि यहां कुछ खरीद रहे हैं हम

1:54:09 खरीद नहीं रहे गुजर रहे हैं स्पष्ट है बात यह दो चीजें हैं जो राम को राम बनाती हैं अयोध्या छोड़ना और फिर लंका छोड़ना ना अयोध्या छोड़ना आसान था ना लंका छोड़ना आसान था

1:55:08 [संगीत] m

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