0:00 नमस्ते। आपकी कढ़ाई में जो रिफाइंड तेल है उसका कनेक्शन तेल के कुओं से है जो सऊदी में है। क्या बात कर रहे हो सर? यस। रिफाइनरी और तेल के कुएं जो होते हैं उनका कनेक्शन रिफाइंड ऑयल से है। इसको अपन आज समझेंगे। चलो एक क्वेश्चन पूछता हूं। 1 किलो सोयाबीन लेके आए मान लो आप और आज का रेट है मान लो ₹60 किलो का। भाई 2026 में तो यही रेट चल रहा है। ₹60 किलो के हिसाब से 1 किलो सोयाबीन लाए। उस सोयाबीन में पहली बात तो 1 किलो में तेल कितना निकलेगा? तो चलो वो मैं बता देता हूं। 18 से 20% होता है। मतलब 180 ग्राम के आसपास तेल निकल जाएगा। 180 ग्राम तेल अगर ₹60 का पड़ा तो फिर तो 1 लीटर बहुत महंगा हो जाएगा। फिर यह ₹100 लीटर रिफाइंड तेल कैसे
0:46 मिल जाता है हमको मार्केट में? चलो इसको समझते हैं। तो जो भी रिफाइंड तेल होता है सोयाबीन का उसकी जर्नी शुरू होती है खेत से। अब खेत में क्या होगा? का फार्मर जो है उसने सोयाबीन उगाया, एक्सट्रैक्ट किया और मंडी में बेच के आ गया। अब मंडी में बिकने तक तो फार्मर के पास था वो। अब वो फैक्ट्री में पहुंचा है। तो फैक्ट्री में जैसे ही पहुंचेगा सबसे पहले उस सोयाबीन के कुछ टेस्ट होंगे। टेस्ट में क्या-क्या चेक करेंगे? सबसे पहले चेक करेंगे मॉइस्चर कितना है? मॉइस्चर मतलब नमी कितनी है? पानी कितना है उसके अंदर? फिर फॉरेन मटेरियल चेक करेंगे। फॉरेन मटेरियल क्या होता है? कि मान लो उसके अंदर कोई मेटल या कोई और बाहर की मिट्टीविट्टी कोई भी चीज उसके अंदर कितनी है। देन डैमेज चेक करेंगे कि कितने सोयाबीन के दाने जो है वो टूटे हुए आ रहे हैं। कैसी क्वालिटी कैसी है?
1:32 फिर उसमें ऑयल कंटेंट भी चेक करेंगे। कितने परसेंट तेल है? 18% तो होना ही चाहिए मिनिमम। ये सारे टेस्ट होने के बाद ये कहते हैं अभी ठीक है। ओके है ये लॉट। चलो इसको लेके चलो। प्रोडक्शन में लेके चलते हैं। अब देखो इसका तेल कैसे बनेगा? तो पुराने जमाने में जब इतना डेवलप नहीं था केमिस्ट्री तब तक तेल बनाने का सबसे बढ़िया तरीका होता था मैकेनिकल क्रशिंग। मैकेनिकल क्रशिंग क्या होती है? हम सब ने बचपन में देखा है कि हम सरसों लेके जाते हैं एक जगह पे वहां पे एक ऐसे मशीन लगी होती है। उसके अंदर वो ऊपर से सरसों डालते थे और याद होगा वो सरसों निकल का तेल निकलवाते थे। आंखें जलती थी। लेकिन वहीं बैठना पड़ता था। क्योंकि ऐसे घर वाले कह के बैठे थे वहीं बैठे रहना। नहीं तो यह तेल मिला देगा इसके अंदर या तुम्हारा यह जो खली निकलती है वह ले लेगा खल जो है तो वहीं बैठे रहते थे आंखें जलती रहती थी। बाद में पढ़ाई करी तो पता लगा आंखें इसलिए
2:18 जलती थी बिकॉज़ उसमें सल्फर होता है बहुत सारा। तो सल्फर जो है उसके केमिकल से आंखें जलती थी। खैर उसको छोड़ो। तो सोयाबीन का तेल पहले है ना ऐसे ही निकालते थे। इसको क्रश करके और ऐसे पीस के। अब इस तेल के अंदर है ना एक दिक्कत आती थी। यह 13% ही निकलता था। मतलब 1 किलो में 130 ग्राम। अब फिर केमिस्ट्री वालों ने कहा नहीं एक मेथड है कि क्या है तेल के कुएं जो होते हैं पेट्रोलियम जहां से निकलता है उसकी रिफाइनिंग जब होती है तो एक केमिकल निकलता है जो कहीं काम नहीं आता हेक्सेन बोलते हैं इसको हेक्सेन इसलिए बोलते हैं छह कार्बन होते हैं उसमें तो वो जो C6 वाला हेक्सेन है उस हेक्सेन को लेके आओ कि क्यों कि वो एक सॉल्वेंट है सॉल्वेंट किसको बोलते हैं जो अपने अंदर कोई चीज को घोल ले तो अब क्या करते हैं सोयाबीन इनको
3:06 पीस के और उसके अंदर डाल देते हैं पेट्रोलियम से निकला हुआ वो केमिकल जिसका नाम है हेक्सेन। अब हेक्सेन जैसे ही उसके अंदर डालते हैं हेक्सेन क्या करता है? इसके अंदर की सारा जो ऑयल कंटेंट है जितनी भी चीजें हैं उसको घोल के अंदर से निकाल लेता है। तो ये इसको बोलते हैं सॉल्वेंट एक्सट्रेक्शन मेथड। हेक्सेन की हेल्प से जो होता है। तो ये कनेक्शन तो मैंने बता दिया कि क्या कनेक्शन है तेल के कुएं में और रिफाइंड तेल के अंदर। अब अपन देखते हैं कि इतने से क्या बन गया क्या? नहीं। अब आपने ऑइल जो था वो पूरा अलग कर लिया। इधर जो रह गया यह सोयाबीन के टुकड़े रह गए। इनकी भी बात अपन आगे की स्लाइड में करेंगे। अब आपके पास वो तेल है जो आपने हेक्सेन और तेल दोनों मिला के तैयार किया है। अब आपको क्या करना पड़ेगा? यह जो ऑइल
3:51 है इस ऑइल के अंदर गम है। गम मतलब दुख वाला गम नहीं गोंद वाला गम। अच्छा आपको मैं एक बात बता दूं। गम जो होता है ना गम बॉडी के लिए बहुत फायदेमंद होता है। वैसे अगर आप चाहे तो नीचे ऑयल लिख देना कमेंट में और हो सके तो अपनी जगह भी बता देना सो दैट मेरे को पता लगे यार कहां-कहां से देख रहे हो। है ना? स्टेट तो बता ही देना। तो पता लगे मेरे को कि अगर आपको ऑइल में ये चाहिए कि रिफाइंड ऑयल और नेचुरल ऑयल जो घाणी वाला तेल जिसको बोलते हैं। दोनों में क्या कंपैरिजन है तो नीचे लिख देना ऑइल। इस पे भी मैं वीडियो बना सकता हूं एक बहुत अच्छा। तो अब देखो अपन को इसमें से अब हम तो फैक्ट्री वाले हैं भाई। फैक्ट्री वालों को इसमें से गम अलग करना है कि क्यों करना है कि देखो लोगों को है ना यह नहीं चाहिए कि तेल को कढ़ाई में चढ़ाया और जब पू तल रही थी आंटी जी देखो इधर तो ऐसा नहीं होना
4:39 चाहिए कि ऊपर है ना धुआं उठे अब जैसे मेरे घर में हम लोग सरसों का तेल काम में लेते हैं घर का अब वो जो सरसों का तेल काम में लेते हैं तो पू बनती है ना तो तीन घरों तक पता लग जाता है। रीज़न वो ऐसे है ना कढ़ाई पे चढ़ाएंगे तो पहले यहां धुआं ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे यहां पे धुआधुआ धुआं इकट्ठा हो जाएगा ऐसे अब इसमें ऐसा नहीं होता। उसका रीजन क्या है? यह क्या करती है कंपनी? कंपनी वाले इसमें से सारा गोंद या गम जो है उसको हटा देते हैं। अब गम ऐसे तो हटेगा नहीं बिना रिएक्शन के। तो अब एक और केमिकल आता है। अब जो केमिकल आता है ना उसको कहते हैं फास्फोरिक एसिड। अब इसमें तेल के अंदर डाल देते हैं फास्फोरिक एसिड। देखो पहले तेल के अंदर क्या? पहले तेल में डाला हेक्सेन जो कहां से आया? तेल के कुओं से। अब तेल में डाला फास्फोरिक एसिड। अब फास्फोरिक एसिड भर दिया इसके अंदर। फास्फोरिक एसिड जैसे ही डालते हैं ना तो
5:25 फास्फोरिक एसिड तुरंत रिएक्शन करता है गम के साथ। गम मतलब गोंद के साथ जो उस तेल के अंदर था। अब इसको गर्म करते हैं 60 70° पे गर्म करते रहते हैं और ऊपर से थोड़ा-थोड़ा थोड़ा-थोड़ा इसमें हाइड्रेशन मतलब पानी डालते रहते हैं थोड़ा-थोड़ा इसके अंदर चलाते रहते हैं इसको। अब चलाते रहते हैं। तो आधे घंटे बाद क्या होता है? तेल जो है तेल में जितनी गाढ़ी चीजें थी वो सारी नीचे बैठ जाती हैं। ऐसे यहां पे ऐसे तो इसको एक ऐसे भर लेते हैं एक बर्तन में जो नीचे से ऐसे होता है कोनिकल ऐसे तीखा उसमें भर लेते हैं। अब ये जो भर गई इनको क्या करते हैं? फिर नीचे एक होती है उसको खोलते हैं। तो जब इतना निकल जाता है तो ये रह गया हमारे पास तेल। तो ये बिना गम का ऑयल तैयार कर लिया इन्होंने। अब ध्यान से सुनना। जैसे पिछले स्टेप में इन्होंने क्या किया था? पिछले स्टेप में इन्होंने
6:12 बचा के रख लिए थे यह वाली चीज जिसका मैंने कहा आगे बताऊंगा मैं गणित। अब इन्होंने क्या बचा के रख लिया? फैक्ट्री वालों ने सारा का सारा जो गोंद था इस तेल के अंदर वो बचा के इन्होंने साइड में रख लिया। तो अब फायदा क्या होगा? पहले तेल ऐसा दिख रहा था। अब तेल एकदम ऐसा दिखेगा। तो सोयाबीन का या कोई भी रिफाइंड तेल देखोगे ना ऐसे ग्लास में रखोगे ऐसे एकदम बहुत सुंदर लगेगा देखने में। और मेरे घर पे आके तेल देखोगे तो तुमको पसंद नहीं आएगा देखने में। अरे यार इसमें तो टुकड़े से तैर रहे हैं। कैसा तेल है ये? तो ये हमने डिफरेंस देखा अभी तक। अब क्या हुआ है कि आपने इसको हटाने के लिए एक चीज हटाने के लिए आपने इसके अंदर एक चीज और डाल दी। एसिड डाला था इसमें आपने। अब अगर आप एसिड को ऐसे ही छोड़ दोगे तो वो तो गड़बड़ करेगा। तो अब क्या करेंगे? ये फ्री फैटी एसिड थे और पहले जो एसिड डाला उनको न्यूट्रलाइज करने
7:00 के लिए इसके अंदर अब डालेंगे NaOH। NaOH क्या होता है पता है? सोडियम हाइड्रोक्साइड। सोडियम हाइड्रोक्साइड क्या होता है पता है? साबुन बनती है ना साबुन वो सोडियम हाइड्रोक्साइड अब इसके अंदर लाके डालते हैं सोडियम हाइड्रोक्साइड ऐसे थैला लाके भर के इसमें डाल देते हैं सच में साबुन वाला सोडियम हाइड्रोक्साइड जो साबुन बनाते टाइम ना वही वाला ऐसे ऐसे इसको बोलते हैं कास्टिक सोडा सुना होगा अब वो जब डालते हैं इसमें लाके तो वो रिएक्शन करेगा फैटी एसिड्स के साथ जिस भी बच्चे ने नाइंथ या 10th में यह पढ़ा है कि साबुन कैसे बनती है उसने पढ़ा होगा कि भाई फ्री फैटी एसिड जब रिएक्शन करते हैं किसके साथ? NaOH के साथ तो बनती है साबुन। तो क्या यहां पर भी साबुन बनेगी? बिल्कुल। यहां भी साबुन बनेगी। नीचे साबुन ऊपर तेल। अब क्या
7:47 करेंगे? फिर से वही तेल अलग कर लिया। अब हमारा तेल हो गया न्यूट्रलाइज। तो मतलब जो एसिड्स थे उनको भी अलग कर दिया। जो इसके अंदर गोंदन था वो भी अलग कर दिया। तीसरा प्रोडक्ट क्या मिल गया? साबुन मिल गया। अब तक मैं आपको तीन चीजें बता चुका। ये दिमाग में बिठा के रखना। ना ये गणित तभी समझ में आएगा कि सोयाबीन और रिफाइंड ऑयल को इतना प्रमोट क्यों करती हैं कंपनीज़। तो पहले नंबर पे इनको क्या मिला? सोयाबीन की ये कचरा मिला। दूसरे नंबर पे क्या मिला था? दूसरे नंबर पे गोंद मिला था। तीसरे नंबर पे क्या मिल गया? तीसरे नंबर पे खूब सारी साबुन मिल गई। साबुन का घोल मिल गया कि ठीक है साहब। इसको सोप स्टॉक बोल देते हैं। सोप स्टॉक इसलिए बोलते हैं साबुन अकेली नहीं मिलती। सीधी साबुन होती है प्लस पानी होता है। वाटर होता है। अब क्या करेंगे भाई? अब हुआ क्या है कि इतनी सारी प्रोसेस होने की वजह से जो तेल है ना उसके
8:34 अंदर कलर अजीब सा हो जाता है। तेल का कलर जो है वो एक्चुअल में है तो इस वजह से कि जहां से सोयाबीन आ रहा है उसके अंदर भी कलर था। कंपनी ये चाहती है कि सोयाबीन का कलर भले चेंज होता रहे। तेल का कलर हमेशा एक जैसा रहना चाहिए। तेल का कलर जैसे ही चेंज होगा इंडियन लेडी जो है रसोई में खाना जो बना रही है उसको तुरंत पता लग जाएगा कुछ तो गड़बड़ है बिकॉज़ महिलाएं जो होती हैं उनमें कलर को सेंस करने की कैपेसिटी पुरुषों से ज्यादा होती है। तो अब क्या होगा कि इसको ब्लीच करेंगे। ब्लीच का मतलब क्या होता है? कोई भी चीज का रंग उड़ा दो। उसको कहते हैं ब्लीच करना। कराया होगा ना कुछ लोग ऐसे ब्लीच करा के आते हैं फेस वेस पे कि ब्लीच कराया तो वो क्या करते हैं? रंग उड़ा देते हैं। ब्लीचिंग पाउडर लगा देते हैं। यहां ब्लीचिंग पाउडर नहीं डालेंगे। ब्लीच करने के लिए थोड़ा
9:19 रहम करेंगे ना। ऐसे थोड़ी कुछ भी डाल देंगे। ब्लीच करने के लिए क्या डालेंगे? मुल्तानी मिट्टी। मुल्तानी मिट्टी देखा पाकिस्तान में मुल्तान है। वहां से वो मिट्टी आती है। मुंह पे लगाता है जो मुल्तानी मिट्टी, चौक और कार्बन। कार्बन क्या होता है? एक्टिवेटेड चारकोल लिखा है। यहां तो एक्टिवेटेड कार्बन का मतलब क्या होता है पता है? कोयले जो है ना कोयले पिसे हुए कोयले वो डालते हैं इसके अंदर। अब तेल के अंदर ये सारे डाल दिए आपने। जैसे ही ये सारे डाल दिए तो आपको पता है मिट्टी में तो तेल घुलेगा नहीं तो क्या होगा वो इसके अंदर डाल के उसको थोड़ी देर चलाओगे प्लस गर्म करोगे गर्म करोगे और गर्म भी कैसे करोगे वैक्यूम के अंदर गर्म करोगे वैक्यूम किसको बोलते हैं ऐसी जगह जहां पर हवा भी ना हो उसको वैक्यूम कहा जाता है हिंदी के अंदर निर्वात कहा जाता है। निर प्लस वात वात मतलब वायु जहां पर हवा नहीं है वो निर्वात तो ऐसे इसको ये
10:06 करते हैं। अब जब ये करते हैं तो इसमें से क्या होगा भाई? जब फ़िल्टर करते हैं, तो ऐसा ऑयल मिलेगा जो एकदम ब्लीच हो गया है। ब्लीच हो गया मतलब इसके अंदर कलर ही नहीं है। अब तेल के अंदर सिर्फ एक चीज़ बची है। वो क्या बची है? स्मेल। अब स्मेल तेल की भी है और स्मेल उस उन प्रोसेस के स्टेप्स की भी है जो हमने इसके ऊपर किए हैं। तो अब क्या करेंगे? अब इसमें से ये स्मेल उड़ानी है। तो अब जो भी तेल था हमने तैयार किया उस तेल को एक भट्टी में चढ़ा देंगे। ऐसे ये मशीन जो है इस तरह से चढ़ा देंगे। ये एक्चुअल में क्या होता है? एफबीडी फ्लूडाइज बेड ड्रायर या इस टाइप की फैसिलिटी होती है जिसके अंदर नीचे से स्टीम आएगी बहुत तेज गर्म। अब इसके अंदर चढ़ा दिया इसको और यहां पे भी ऑलमोस्ट वैक्यूम होता है। बहुत हाई पावर पे
10:52 वैक्यूम क्रिएट करते हैं और फिर इसको गर्म करते हैं। अब इसको गर्म जब कर रहे हैं और साथ में स्टीम भेज रहे हैं इसके अंदर। ऐसे स्टीम जा रही है ऐसे और इसको ऐसे ऐसे ऐसे उछाल रही है इसको। तो होगा क्या? तेल 200 डिग्री सेल्सियस पर गर्म हो रहा है। उबल रहा है तेल एकदम से और उबलते टाइम इसके अंदर स्टीम आ रही है। तो जैसे ही तेल उबलेगा ना तो होता क्या है? अपने घरों में देखा होगा सरसों का तेल पहली बार जब हम गर्म करते हैं तो आंखें जलाता है। क्यों? उसके अंदर जो जो उड़ने वाली चीजें थी वो उड़ रही हैं। यहां पे जो जो उड़ना था वो यहीं उड़ जाएगा और उसको स्टीम के साथ क्या कर लेंगे? अलग कर लेंगे। तो लास्ट के अंदर ऐसा ऑयल आएगा जिसके अंदर कोई खुशबू नहीं है। कोई स्वाद नहीं है। उसके अंदर कोई रंग खास नहीं है। तो आप रिफाइंड तेल को देखना
11:39 जीभ पर रखे उसमें स्वाद नहीं आएगा आपको। इसीलिए नहीं आएगा। उसमें जो स्वाद था, जो खुशबू थी वो सब उड़ा लिया। अब जो बचा वो हमारे सामने आ गया। अब कंपनी एफएसएसआई की परमिशन के अकॉर्डिंग अपने लाइसेंस के अकॉर्डिंग इसमें कलर, इसके अंदर खुशबू इसके अंदर और कोई चीज मिलानी है वो मिला सकती है इसके अंदर। मिलाने के बाद में क्या करते हैं इसको? फिर तो करना क्या है? फिर तो पैक कर देते हैं। बढ़िया-बढ़ से लेवल लगा देते हैं। अब यहां एक चीज सोचो के आदमी ने ₹60 की तो सोयाबीन खरीदी और ₹60 की सोयाबीन में हेक्सेन डालने के बाद ₹10 ग्राम तेल निकला। तो वो तो बिक जाएगा ना इतने में तो ₹100 लीटर कैसे बेच लेगा वो? तो अब आता है यहां पे वो गणित जो मैं आपको तब से बात कर रहा था। अब सिर्फ
12:26 सोयाबीन का तेल नहीं मिला। सोयाबीन का तेल तो प्रोडक्ट नंबर वन था। प्रोडक्ट नंबर दो क्या निकला? प्रोडक्ट नंबर दो में निकला भाई हमारे पास सोयाबीन के टुकड़े कि ये कौन से टुकड़े थे? ये वो टुकड़े थे जब सोयाबीन को पीसा था और उसमें से हेक्सेन निकाला था। उस टाइम बच गए थे कि ठीक है साहब ये जो है इनको कहां काम में लेंगे? अभी अपन बात करेंगे। और क्या बचा? सोयाबीन का बिल्कुल चूरा जो निकला बिल्कुल पाउडर वो भी तो बच गया। ये दूसरा प्रोडक्ट। तीसरा क्या? तीसरा तो सर याद है गोंद निकला था। इसमें से गम निकला था वो निकाल लिया। चौथा साबुन निकली थी भाई पानी में घुली हुई वो निकाल ली। पांचवा क्या निकाला? ब्लीचिंग जब करी है आपने। ब्लीचिंग का मतलब क्या? याद करो उसमें कोयला पीस के डाला था। उसके अंदर खूब सारी
13:11 मुल्तानी मिट्टी डाली थी पीस के। वो भी तो मिली है। उसको थोड़ी बेकार जाने देंगे। फिर उसके बाद आपने जब इसकी खुशबू उड़ाई तो वो जो स्टीम के साथ ऊपर गया वो भी बच गया। उसको भी नीचे ले लिया। और लास्ट में जाके जब आपने तेलवेल सब निकाल लिया। मशीनों के अंदर जो चिपका हुआ था वो भी तो निकला जिसको स्लज बोलते हैं कि ठीक है साहब तो इसका मतलब कितनी चीजें मिली 1 2 3 4 5 6 7 8 अब ये जो था ना ये 1 किलो में सिर्फ कितना निकला 180 ग्राम बाकी क्या निकला ये सारा का सारा जो है ये मिला के हो गया 920 ग्राम नष्ट नहीं हुआ 1 ग्राम भी अब इसमें से भी ये दोनों जो हैं यह लगभग 800 ग्राम के आस आसपास होते हैं। अब अपन देखते हैं
13:56 ये कहां-कहां काम आएंगे। तो अब देखो जो सोयाबीन के बड़े टुकड़े निकले उनसे बना देते हैं एनिमल्स का फीड। जो पशुओं का पशु आहार आता है ना वो बन जाता है इससे। अब पशु आहार जिनसे नहीं बनता उनसे फिर क्या बनाते हैं हम? बाद में जाकर के ऑर्गेनिक वेस्ट बना देते हैं उससे कि कौन सा के साहब? बायोंपोस्ट जैविक खाद जो है उसके अंदर मिला देते हैं। वह भी नहीं बनता तो और बच जाता है अगर कचरा तो उससे बोर्ड बना देते हैं। कौन से बोर्ड? सस्ती टेबल खरीदी होगी कभी। ऐसे बिल्कुल पतली सी आती है वो। वो बोर्ड जो होते हैं वो इसी से बनते हैं। फिर उसके बाद जो छोटे टुकड़े बच गए थे तेल निकालने के बाद। देखा छोटे-छोटे छोटे-छोटे। वो जो छोटे-छोटे टुकड़े बच गए थे उनसे बन जाता है मुर्गों का खाना। पोल्ट्री फीड। उसी से बना देते हैं गायों
14:44 का खाना। उसी से बन जाता है मच्छी का खाना। उसी से बन जाते हैं जो कुत्ते-वत्ते का खाना जो आता है, खरगोश का खाना जो आता है, उसके अंदर भी कुछ-कुछ इस तरह से मिक्स कर देते हैं। फिर उसके बाद एक चीज बड़ा इंटरेस्ट आ रहा होगा आपको कि साहब इसमें गम जो बचा था, गोंद जो बचा था, उसका क्या करेंगे? तो जो गोंद निकाला था तेल में से उससे बनती है चॉकलेट्स। अरे वाह सर क्या बात कर रहे हो? हमारी तो फेवरेट है। खाया करो, खूब खिलाया करो बच्चों को। तभी तो बच्चे होंगे स्ट्रंगर, स्मार्टर। फिर उसके बाद हम इसी में से कुछ चीजें और निकाल लेते हैं। क्या निकाल लेते हैं कि जो गोंद था वह तो दवाइयों में भी काम आता है। दवाइयों में कहां काम आता है? जो ये विटामिन की गोलियां आती है ना जितनी भी देखना वो सारी चिपचिपी चिपचिपी सी ऐसे रंग बिरंगी सी होती है ऐसे मोती जैसी चमकती है वो सारी जो है उसके अंदर ये
15:30 मिलता है और कहां डालो के साहब जितने भी कॉस्मेटिक्स आते हैं जो बॉडी को एकदम चिकना रखते हैं उन सबके अंदर यही गोंद मिला देते हैं तो लिपस्टिक वगैरह जो होती है उसके अंदर भी मिक्स कर देते हैं फिर साबुन बची उसका क्या करेंगे खूब सारी साबुन निकली थी याद करो कहां निकली थी हां हां सर याद आ रहा है जहां पे उसको ऑइल को प्रोसेस कर रहे थे हां वही साबुन अब ये जो साबुन बनी थी इस साबुन का क्या करोगे? साबुन से बनाओगे साबुन कपड़े धोने वाली साबुन। इसी से बनेंगे आगे मोमबत्तियां। इसी से बनेगा एनिमल फीड। फिर उसके बाद वो जो बची थी मुल्तानी मिट्टी और जो कार्बन बचा था जो कोयला बच गया था उसका क्या करोगे? उसको हम काम में लेंगे। ले जाकर के जो सड़कें बनती हैं वहां डाल देंगे। ईंटें
16:16 बनती हैं वहां डाल देंगे। या फिर खड्डा खोद के कोई खेत में दबा देंगे। ठीक है सर इतना तो मिल गया लास्ट में जो कचरा बचा था उसका क्या करोगे जो उसकी खुशबू उड़ाई थी और जो लास्ट में बच गया था उसको क्या करेंगे उससे बनता है विटामिन ई विटामिन ई की गोलियां होती है ना उनमें काम में आता है उससे बन जाता है साहब कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली चीज देखो कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली चीज जो थी वो उसमें से अलग करके अलग से बेच रही है कंपनी फिर उसके बाद इसी से बनते हैं परफ्यूम जो है उसके अंदर काम में आती है बायोडीजल में डाल देते हैं बायोफ्यूल फूल में डाल देते हैं और जो स्लज नाम की चीज बच गई थी लास्ट में कचरा उससे बन जाता है बायोंपोस्ट। देखा अब समझ में आया गणित कि ₹100 लीटर सोयाबीन का तेल कैसे बेच लेते हैं? रेट तो
17:02 400 पड़ना चाहिए इसका। तो होपफुली काफी कुछ [गला साफ़ करने की आवाज़] पता लगा होगा। स्टे हैप्पी, स्टे ब्लेस्ड। लव यू ऑल। नमस्ते।