0:00 [संगीत] नमस्कार स्वागत है आप सभी का संसद टीवी के इस विशेष कार्यक्रम इनसाइट में। मैं हूं प्रीति सिंह। आज हम चर्चा करने जा रहे हैं एक ऐसे विषय पर जिसने भारत के शासन, अर्थव्यवस्था और नागरिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया है, छुआ है। पिछले 15 वर्षों में आधार संख्या केवल 12 अंकों की यूनिक आईडी नहीं रही बल्कि ये देश के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की रीड बन चुकी है। आधार ने लाखों करोड़ों भारतीयों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। सरकारी योजनाओं और सब्सिडीज की डिलीवरी को सीधा और पारदर्शी बनाया और डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा दी। लेकिन
0:46 इसके साथ ही कुछ चुनौतियां भी आई हैं इस सफर में। प्राइवेसी के सवाल कुछ उठे हैं। डाटा सुरक्षा की चिंता और कुछ समुदायों का बहिष्करण। आज जब हम 2047 के विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं। यह समझना बेहद जरूरी है कि आधार का अब तक का सफर हमें क्या सिखा रहा है। आने वाले समय में यह हमारी नीतियों, अर्थव्यवस्था और समाज को किस दिशा में लेकर जाएगा। इसलिए आज की चर्चा में हम आधार के जो 15 साल हैं, उसका संपूर्ण विश्लेषण करेंगे। चुनौतियां और आगे की दिशा को समझेंगे। इसके विज़न को लेकर, इसके प्रभाव तक और इसके भविष्य से लेकर इसकी चुनौतियों तक। [संगीत] और आज हमारे साथ चर्चा के लिए दो बेहद खास
1:33 मेहमान जुड़ रहे हैं। डॉ. सुबोध शर्मा मेरे साथ जुड़े हुए हैं। एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग आईटी दिल्ली। बहुत-बहुत स्वागत है आपका डॉ. सुबोध शर्मा। शुक्रिया सेंस टीवी के साथ जुड़ने के लिए। साथ ही हमारे साथ डॉ. आर एस शर्मा जी जुड़े हुए हैं। फॉर्मर फाउंडिंग डीजी एंड मिशन डायरेक्टर यूआईडीएआई। बहुत-बहुत स्वागत आपका भी डॉ. आर एस शर्मा। शुक्रिया सेंस टीवी के साथ जुड़ने के लिए। मैं शुरुआत आप ही के साथ करूंगी डॉ. आर. एस शर्मा। जब यूआईडीएआई की औपचारिक स्थापना हम जानते हैं 2009 को हुई। पहला आधार नंबर 2010 को जारी किया गया। और इस प्रारंभिक दौर को ध्यान में रखते हुए जब आज के अनुभव के आधार पर हम कहें कि शुरुआती विज़न जो कि एक यूनिक डिजिटल पहचान का रहा। उसने भारत में शासन और सर्विस डिलीवरी का ढांचा किस तरह से बदला है? आप इस 15 साल के सफर को कैसे
2:19 देखते हैं? और एक तरह से क्या आपको लगता है कि कुछ ऐसी चीजें हैं जिनके बारे में हमें दोबारा सोचना जरूरी है? देखिए पहले तो बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे इस चर्चा में भाग लेने के लिए आमंत्रित करने का। इस प्रश्न का जवाब देने से पहले मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि आधार को प्रारंभ करने के लिए कारण क्या थे? क्यों आधार की शुरुआत हुई 2009 में? तो इसके दो महत्वपूर्ण कारण थे। पहला कारण था कि हमारे देश में जो सब्सिडी और बाकी बेनिफिट्स की जो वितरण हुआ करता था उस वितरण में बहुत सारे डुप्लीकेट्स और घोस्ट होते थे डेटा बेसिस में बेनिफिशरीज में तो यह सोचा गया कि भाई ये डुप्लीकेट्स और
3:06 घोस्ट हम कैसे दूर कर सकते हैं? तो उसके लिए जो एक आईडिया था वह आईडिया 2006 से प्रारंभ हुआ था और 2009 तक एक कमेट थी डॉक्टर प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में उस कमेटी ने कहा कि एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया बनाई जाए जो बेसिकली प्रत्येक रेजिडेंट को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर देगी। एक नंबर देंगे जिससे होगा क्या कि अगर एक आदमी को एक ही नंबर मिलेगा और एक नंबर जिसे मिलेगा वह वस्तुत जीवित आदमी होगा तो ऐसे से डुप्लीकेट्स और घस्ट खत्म हो जाएंगे डेटा बेसिस से और सब्सिडी के वितरण में काफी बचत होगी। पहला विचार तो यह था। दूसरा विचार यह था कि बहुत से सिटीजंस ऐसे हैं, बहुत से लोग ऐसे थे उस वक्त जिनके पास कोई
3:52 प्रूवेबल आइडेंटिटी नहीं थी, कोई डॉक्यूमेंट नहीं था। उनके पास राशन कार्ड था जो कि फैमिली डॉक्यूमेंट है। उनके पास और सारे कोई भी एजुकेशन प्रमाण पत्र होता था। मान लीजिए स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट वो भी कोई वैलिड डॉक्यूमेंट नहीं था। तो फॉर्मल सिस्टम से इंटीग्रेट होने के लिए मान लीजिए किसी को बैंक अकाउंट खोलना है या मोबाइल सिम लेनी है। उसके पास कोई फॉर्मल डॉक्यूमेंट नहीं था जो उसकी आइडेंटिटी को प्रूव कर सके इंडिविजुअल लेवल पर। तो दो कारण हुए। एक तो यह हुआ सरकार की तरफ से डुप्लीकेट्स और घोस्ट को एलिमिनेट करने का और सिटीजंस की तरफ से लोगों को आइडेंटिटी पेपर प्रदान करने का जिससे कि वो फॉर्मल सिस्टम को एक्सेस कर सकें। इन्हीं दो उद्देश्यों के साथ आधार की शुरुआत की गई थी और आज 15 वर्षों के बाद मैं इतना कह सकता हूं कि आधार ने अपना
4:39 काम पूरा किया है। बहुत सारी बचत हुई है। लोगों का फाइनेंसियल इंक्लूजन हुआ है। आधार के फायदे गिनातेगिनाते मैं लगता हूं काफी वक्त लगेगा। ये उसको मैं बाद में बात करेंगे। लेकिन इतना मैं कहूंगा कि दुर्भाग्य से जिस प्रकार का उपयोग आधार का होना चाहिए था उतना उपयोग नहीं हुआ है तो इस देश ने एक बहुत ही क्रांतिकारी कदम उठाकर आधार बनाया जो दुनिया में अपने तरह का अप्रतिम और अपने तरह का अकेला आर्टिफेक्ट है। लेकिन दुर्भाग्य से इसको बहुत सारी चीजों में उलझा के रख दिया गया। नतीजा हुआ कि इसके उद्देश्य को और इसके उपयोग को काफी हद तक लिमिट कर दिया गया। जी जी ठीक है। आपने कहा कि बहुत सारे लाभ हैं और बहुत सारे ऐसे पहलू हैं जिन पर हम आगे बातचीत करेंगे। बिल्कुल डॉक्टर शर्मा अगर आपसे
5:27 मैं समझूं डॉक्टर सुबोध शर्मा कि आप इस 15 साल के सफर को अपनी नजर से कैसे देख रहे हैं? यूआईडीआई के डैशबोर्ड के अनुसार अगर हम देखें तो अब तक 1.427 अरब आधार जनरेट हो चुके हैं। वैश्विक स्तर पर यह सबसे बड़ा बायोमेट्रिक आईडी डेटाबेस बन चुका है। विशाल कवरेज है इसकी और वही मैंने कहा कि शुरुआती प्रतिक्रिया इन 15 साल के सफर को लेकर आपकी क्या रहेगी? पहली तो पहली बात तो थैंक यू फॉर हैविंग मी ऑन द शो। इसमें कोई दो राय नहीं है कि ये एक वर्ल्ड का एक यूनिक आइडेंटिटी प्रोग्राम बना है और बन के उभरा है और टेक्नोलॉजिकली वेरी सोफेस्टिकेटेड मतलब आप अगर देखें वर्ल्ड ओवर जितने आइडेंटिटी प्रोग्राम्स बने हैं
6:15 वो इस लेवल पे इस स्केल पे हमारा पपुलेशन का साइज बहुत बड़ा है। इस लेवल पे ऑपरेट करने वाले सिस्टम्स अभी तक ऐसे उभर के नहीं आए हैं। तो ये अपने में एक बहुत बड़ी सक्सेस है, जीत है इन शोइंग द टेक्नोलॉजिकल कैपेसिटी ऑफ द नेशन। आधार जैसे डॉ. रामसेवक शर्मा जी ने कहा कि इट एसेंशियली सॉल्वड कई सारी प्रॉब्लम्स को इसने सॉल्व किया। एक आइडेंटिटी दी गई जिसके कारण बहुत मैसिव स्केल पे डी डुप्लीकेशन हुआ और बहुत सारे इसके यूज़ केसेस थे डी डुप्लीकेशन के जिसमें गवर्नमेंट को भी बचत हुई और एक इससे क्या हुआ है कि लोगों की लाइफ तो
7:01 सुलभ हुई है। जैसे मेरी पर्सनली अगर मैं बोलूं कि पहले टैक्स देने में जैसे टैक्स से अब जो आधार से जो कनेक्शन हुआ है और जो टैक्स वेरिफिकेशन होता है इन अ मैटर ऑफ फ्यू सेकंड्स वो रिमारकेबल है। तो उससे क्या हुआ है कि एक सुविधा तो लोगों की सिटीजंस की सुविधा तो बढ़ी है बट मुझे ऐसा लगता है कि एक इनोवेशन का मार्केट भी उससे बना है। जिसमें जो टेक्नोलॉजिकल इनोवेटर्स जो आए हैं उनके पास भी बहुत साधन बड़े हैं बिकॉज़ ऑफ़ द एकिस्टेंस ऑफ एक एक ऐसा एक इंस्ट्रूमेंट जो कि यूनिकली आइडेंटिफाई कर सके सिटीजन सिटीजनरी को और उसके ऊपर सर्विज बनाई जा सके। हम तो मेरे हिसाब से तो ये बहुत ही इंटरेस्टिंग सफर रहा है और आने वाले काल
7:47 में जब आधार फ्रॉम इट्स वर्जन 1.0 व्हेन इट जब वो मूव करेगा टू वर्जन 2.0 तो मैं तो बहुत इगरली और विद एक्साइटमेंट देख रहा हूं कि किस तरीके से ये पूरी जर्नी जो है शिफ्ट हो रही है। इनफैक्ट आधार को ही बेस बना के वर्ल्ड ओवर भी एक एक यूनिक आइडेंटिटी प्रोग्राम्स की चर्चा स्टार्ट हुई है। इस इसमें भी कोई इसमें दो राय नहीं है। आई मीन हम सब जानते हैं कि कई बार ये डिस्कशन वेस्टर्न डेमोक्रेसी में जब स्टार्ट हुए थे तो एक बहुत बड़ा मुद्दा प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी को लेकर उसको रोक दिया जाता था। बट जब ये प्रोजेक्ट इंडिया में स्टार्ट हुआ और उसकी सक्सेस जब देखी गई तो कई सारे
8:32 और देशों ने भी इसको बहुत एक्टिवली पर्सू किया। एंड वो जो कोरिलेशन है वो बहुत अपेरेंट है। ठीक है। दोज़ आर माय इनिशियल हां ये मेरे इनिशियल पॉइंट्स बिल्कुल डॉक्टर आर एस शर्मा जरूर हम चैलेंजेस पे भी अपने आगे के दौर में बात करेंगे लेकिन आपने जैसे कहा कि फायदे बहुत हैं अगर उसी पर डॉक्टर आर एस शर्मा आगे हम बढ़े तो डीबीटी यानी डायरेक्ट बेड ने फिर ट्रांसफर एक बहुत बड़ा इसको लेकर फायदा हुआ और क्योंकि उसके माध्यम से सरकारी सब्सिडी या वेलफेयर में यह कहा जा रहा है कि कुल लगभग 3.48 लाख करोड़ की बचत हुई है। तो इस बचत के आंकड़ों के संदर्भ में ये पूछना भी जरूरी है कि ये बचत जाहिर तौर पर कुछ मेथड्स हैं जिनके जरिए इन बचतों को मापा जाता होगा। इसके अलावा डीबीटी के आगे भी अगर हम इसके फायदों को थोड़ा हम समझना चाहें आम नागरिक
9:19 तक जुड़ने के लिए तो किस तरह के फायदे हैं जिन्हें आप यहां इस समय गिनाना चाहेंगे? यह बहुत अच्छा प्रश्न आपका है। देखिए आधार जब बना तो हम लोगों ने कहा कि आधार एक कार्ड नहीं है। एक नंबर है और उसका अर्थ बहुत स्पष्ट था कि आधार एक फंक्शनल आइडेंटिटी नहीं है। एक फाउंडेशनल आइडेंटिटी है। आधार यह सिद्ध करता है कि मैं आर एस शर्मा हूं। बस इसके आगे कुछ नहीं। आर एस शर्मा अमीर हैं, गरीब हैं, शादीशुदा हैं। और कुछ उनके क्या स्टेटस है इससे कोई अर्थ नहीं। एक फाउंडेशनल आइडेंटिटी है और उस फाउंडेशनल आइडेंटिटी को किसी भी ट्रांजैक्शन में हम प्लग इन कर सकते हैं। चाहे वो बैंक अकाउंट खोलना हो,
10:05 चाहे वो मोबाइल सिम लेना हो या राशन कार्ड लेना हो। और आधार ने इसके साथ-साथ आइडेंटिटी नंबर के साथ-साथ एक और सेवा शुरू की जिसको ऑथेंटिकेशन सर्विस बोलते हैं। इसका मतलब है कि आप अपनी डेमोग्राफिक डिटेल्स दे के, मोबाइल नंबर दे के, फिंगरप्रिंट दे के, आयरिश दे के और आप फेस दे के फेस के ऑथेंटिकेशन जो निजी यात्रा में आप इस्तेमाल करते हैं। अपने आप प्रूव कर सकते हैं कि मैं वो हूं जो मैं क्लेम कर रहा हूं। ये एक बहुत बड़ा पावरफुल इंस्ट्रूमेंट है जो सिटीजन के हाथ में है जो सिटीजन एंपावरमेंट का बहुत बड़ा सशक्त माध्यम है। तो ये जो काम हुआ और उसके बाद फिर आधार के ऊपर बहुत सारे आर्टिफेक्ट डेवलप किए गए जिनको हम आज इंडिया स्टक के
10:50 नाम से जानते हैं। तो फॉर एग्जांपल इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी डेवलप हुआ जिससे आप बैंक अकाउंट खोल सकते हैं। उसके ऊपर जैम ट्रिनिटी डेवलप हुई। जनधन, आधार और मोबाइल जिनके माध्यम से फाइनेंसियल इंक्लूजन का बहुत बड़ा कार्यक्रम जनधन योजना माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रारंभ की गई और करीब 450 मिलियन यानी 45 करोड़ अकाउंट जो है 450 दिन में खोले गए। उसी प्रकार से इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर ऑन डिमांड जिसको यूज़ करके हम इनकम टैक्स रिटर्न्स फाइल करते हैं वो हुआ। डिजिटल लॉकर खोला गया जिसमें करीब-करीब 650 करोड़ डॉक्यूमेंट आज उपलब्ध हैं। जिसमें कि हम सारे के सारे डॉक्यूमेंट अपने ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर के सब कुछ रख सकते हैं जिसको हम यूज़ कर सकते हैं। उसी प्रकार से
11:37 जो बहुत सारे सब्सिडी प्रोग्राम में इसको यूज़ किया गया। एक प्रश्न जो आपने पूछा ये बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है कि इसके माध्यम से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर हमने इनेबल किया। तो अब क्या हुआ कि आधार केवल एक नंबर ही नहीं रहा बल्कि एक फाइनेंशियल एड्रेस हो गया क्योंकि हमने आधार को बैंक अकाउंट से लिंक कर दिया इसलिए अब सरकार जो है केवल आधार नंबर और अमाउंट देकर के पैसा ट्रांसफर कर सकती है। तो हमने कोविड के टाइम में देखिए अरबों रुपया इससे ट्रांसफर किया और आज जो है एलपीजी की सब्सिडी हो और अब तो फर्टिलाइजर की सब्सिडी की बात भी हम लोग कर रहे हैं। बहुत सारे सब्सिडी प्रोग्राम्स में इसको इस्तेमाल किया गया। नतीजा क्या हुआ कि जितने लीकेजेस होते थे एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम्स में जितना भ्रष्टाचार होता था वो सब खत्म हो गया और
12:24 जो पैसा एक सेकंड पहले ₹100 मैंने किसी के अकाउंट में डाला तो उसको दूसरे सेकंड ₹100 उसके अकाउंट में उतना ही मिल जाएगा। एक नया पैसा भी उसमें से गायब नहीं होगा। तो यह जो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर हुआ जिसमें कि आधार को फाइनेंसियल एड्रेस के तौर पर इस्तेमाल किया गया। यह बहुत बड़ा एक डेमोंस्ट्रेबल तरीका है। उसी प्रकार से पोर्टेबिलिटी बढ़ गई। आज माननीय प्रधानमंत्री जी हम लोग बात करते हैं सब लोग ए वन नेशन वन कार्ड वन नेशन वन कार्ड कैसे हुआ कि अगर मान लीजिए मेरा एंटाइटलमेंट फूड का अपना ऑनलाइन है क्लाउड पे है मेरा आइडेंटिटी मेरी क्लाउड पर है तो मैं आराम से आधा अपना फूड कहीं से ले सकता हूं आधा कहीं से ले सकता हूं मेरा परिवार अगर दुमका में रह रहा है तो मेरा परिवार 5 किलो राशन वहां ले सकता है मैं
13:09 दिल्ली में रिक्शा चला रहा हूं तो मैं ले सकता हूं तो ये पोर्टेबिलिटी ऑफ़ एंटाइटलमेंट्स हो गए तो तो ये बहुत बड़ा डिजिटल पावरफुल हुआ है। आप जानते हैं जी20 में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में आधार हिंदुस्तान का सबसे बड़ा और सबसे पहला डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है। ठीक है। ठीक है। और इसके अलावा डॉ. सुबोध शर्मा आधार ऑथेंटिकेशन अब तक बड़े पैमाने पर चला है। 2024-25 में 2707 करोड़ ऑथेंटिकेशन और क्यूमुलेटिव 150 प्लस बिलियन से ऊपर के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए गए हैं। इतना हाई वॉल्यूम है जिसमें लेनदेन होता है। यूआईडीएआई अह और अगर इसके इंफ़्रास्ट्रक्चर के रेज़िलियंस और आउटेज मैनेजमेंट की बात करें तो क्या आपको लगता है कुछ रिस्क फैक्टर्स हैं जो उभरते हैं
13:55 या अगर हम रिस्क फैक्टर्स की तुलना करें तो वो उन पर काम कर किया जा रहा है और बहुत जल्दी हम इसे एक और ज्यादा स्मूथ प्रोसेस के रूप में देख सकेंगे जिसमें रिस्क ना हो। सिक्योरिटी सेफ्टी पूरी तरह हो। हां मतलब ये तो हमेशा एक किसी भी लार्ज सिस्टम में एक ऑनगोइंग प्रोसेस ही होता है कि ये एक कैट एंड माउस गेम है। जैसे-जैसे सिस्टम और कॉम्प्लेक्स होते जाता है उसका एक जो सरफेस होता है जिस पे अटैक किया जा सकता है वो भी और बढ़ रहा होता है। तो ये एक ऑनगोइंग प्रोसेस है और आधार की आप अगर जर्नी देखेंगे तो आधार हैस मतलब ये इस इस जर्नी के थ्रू गया है और आगे भी चलेगा। राइट? तो जैसे आधार आइडेंटिटी जब 2016-17 में जब बातें हो रही
14:43 थी इसके बारे में कि सिक्योरिटी और प्राइवेसी जो आपके ऑथेंटिकेशन प्रोसेस की जो एक बहुत इंपॉर्टेंट आस्पेक्ट है तो उसी समय आधार ने वर्चुअल आईडीज रिलीज किए जो कि उस समय का जो डिस्कशन था उसको सामने रखते हुए उन्होंने दे डिवाइस्ड दिस आईडिया ऑफ वर्चुअल आइडेंटिफायर्स। फिर धीरे-धीरे वो यूजबिलिटी पे आया कि भाई अगर हम इंक्लूजन की बात कर रहे हैं तो देयर आर पीपल जहां पे नेटवर्क की अवेलेबिलिटी नहीं हो तो वहां पे किस तरीके से आधार को यूज किया जा सके तो वहां पर क्यूआर बेस्ड ऑथेंटिकेशन स्टार्ट किया गया जो कि ऑफलाइन ऑथेंटिकेशन प्रोवाइड कर सके जहां पे एरियाज तो जैसे-जैसे सिचुएशनंस डेवलप हुई जहांजहां पे समझ में आया कि देयर इज अ
15:30 रिस्क देयर इज अ यूजबिलिटी कंसर्न तो उसको फिर एड्रेस किया गया। तो इट्स बेसिकली अ स्टोरी ऑफ इवॉल्विंग और ये मुझे ऐसा लगता है कि इन फ्यूचर भी चलते रहेगा। जैसे अब आप बात करेंगे कि इंडिया की जो पपुलेशन है उसमें इंडिया स्टैंड्स आउट द नंबर द परसेंटेज ऑफ अंडर एज चिल्ड्रन इन इंडिया इज हायर देन द अदर मतलब आप बाकी के तीन बड़े नेशनों नेशंस को अगर आप उनका जो ये परसेंटेज है उनको ऐड कर दें उससे ज्यादा नंबर ऑफ अंडर एज किड्स हमारे देश में हैं। और अब अंडर एज किड्स जो कि 15 साल 16 साल के बच्चे जो इंटरनेट को एक्सेस कर रहे हैं वहां पे उनका ऑथेंटिकेशन इज बिकमिंग अ
16:16 ह्यूज प्रॉब्लम कि क्योंकि ऐसा है कि अंडर एज किड्स के बायोमेट्रिक्स दिए गए हैं नहीं दिए गए हैं बिकॉज़ इट्स अ वंटरी एक्सरसाइज। तो इवन दो अगर वो सिस्टम में है उनका ऑथेंटिकेशन प्रॉपर्ली इसलिए नहीं हो पाए क्योंकि बायोमेट्रिक्स अवेलेबल ना हो। तो एक तो आधार एस एन एंटिटी हैज़ रियलाइज्ड कि दिस इज अ प्रॉब्लम एंड दिस विल इसका एक रिस्क फैक्टर है। इसकी एक यूज़बिलिटी कंसर्न है और उसके ऊपर अब काम करना स्टार्ट हो रहा है। तो जो मैंने पहले इनिशियल रिमार्क्स में कहा था कि नाउ वी आर मूविंग टुवर्ड्स आधार 2.0 तो उसी संदर्भ में इन सब चीजों को देखा जा सकता है कि यस सिक्योरिटी प्राइवेसी रिस्क फैक्टर्स हमेशा एक्सिस्ट करेंगे बट कितने प्रली उनको एकनॉलेज किया जा रहा है और उन पे काम किया जा रहा है ये देखने की जरूरत
17:03 है एंड आई थिंक आधार हैज़ सक्सेसफुली रिजन अप टू द चैलेंज और उन्होंने मतलब कई चीजों पे ध्यान दिया है। तो जैसे अभी एक बड़ा मुद्दा जो जिस पे रामसेवक जी भी बात करेंगे मुझे पूरा विश्वास है कि जैसे अब बात हो रही है सेलेक्टिव डिस्क्लोज़र ऑफ इन कि मतलब यूजर के पास ये राइट हो कि भाई मैं कहीं जाके अपने आप को ऑथेंटिकेट करूं तो सारी डेमोग्राफिक इंफॉर्मेशन जो है वो ना लीक हो मतलब जाता तो सिर्फ यही है कि आइडेंटिटी ऑथेंटिकेशन होता है कि ये आदमी जो अपने को क्लेम कर रहा है वो वही है जैसे रामसेवक जी ने पहले बताया बट अह थ्रू अदर मीन्स कि अगर मुझे सेलेक्टिव इंफॉर्मेशन डिस्क्लोज़र करनी हो और वो आधार आइडेंटिफायर से जुड़ सके जिसे कहते हैं
17:50 वेरीिफायबल क्रेडेंशियल्स। इस पे बाकी वर्ल्ड में भी काफी काम हो रहा है। तो मुझे ऐसा लगता है कि ये सारी जो चीजें हैं ये काफी फ्यूचरिस्टिक है। इस पे आधार भी आधार एज एन एंटिटी भी काम करना स्टार्ट होना चाहिए या हो ही गया होगा। आई थिंक आई एम नॉट रिवी टू द डिस्कशन। मुझे लगता है कि यह सारी चीज़ बहुत्ट होने वाली है। जाहिर तौर पर सबको यही उम्मीद है कि इन पहलुओं पर काम हो रहा होगा। अगर डॉक्टर आर एस शर्मा आप थोड़ा चैलेंजेस के बारे में बात करें और उन पर किस तरह से हम आगे काम कर रहे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि जब इतना बड़ा सिस्टम इतनी बड़ी जनसंख्या तो अपने आप में चैलेंजेस भी बहुत ज्यादा है और जब इतना बड़ा रिफॉर्म कोई भी सामने आता है तो उसके लिए थोड़ा लंबा सफर हमें एक तरह से 100% अगर उसमें हम अच्छाई ढूंढे तो उस सफर में कुछ चुनौतियां जाहिर तौर पर
18:35 आती हैं जो कि आधार को लेकर भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 के फैसले में आधार की वैधता को सामान्य रूप से बरकरार रखा। इसके अलावा हम जानते हैं कि जब कुछ ऑडिट हुए सीएजी और अन्य ऑडिट हुए उन्होंने एनरोलमेंट और ऑथेंटिकेशन इकोसिस्टम में डाटा मैचिंग और थोड़ा कुछ फेलोर्स थे बायोमेट्रिक जिनके बारे में इशारा किया। तो ये जिस तरह के चैलेंजेस सामने आ रहे हैं। इन पर 100% शतप्रिशत काम हो इसके लिए किया क्या जा रहा है और आप इनको कैसे देख रहे हैं? देखिए मेरा मानना यह है कि इतने बड़े सिस्टम में जैसा सुबोध जी ने भी कहा और बिल्कुल सही कहा कि इतने बड़े सिस्टम में और इतने बड़े देश में और इतने डायवर्स देश में जाहिर है कुछ ना कुछ चैलेंज तो हमेशा
19:21 ही रहते हैं। इस देश में समस्याओं की कमी तो है नहीं। और आज आधार के ऑथेंटिकेशन के बारे में देखें आप तो 150 बिलियन ऑथेंटिकेशन हो चुके हैं। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति करीब करीब 100 सवा5 बार जो है ऑन एन एवरेज ऑथेंटिकेट कर चुका है। तो ऐसी चीज तो नहीं है कि आधार में आधार के स्केल में तो कोई कमी है नहीं। ये दूसरी जो चीज है ना प्राइवेसी की चीज। दुर्भाग्य ये है कि आधार से बड़ा सफल डिजिटल प्रोजेक्ट कोई हिंदुस्तान में आज तक नहीं हुआ। यह निर्विवाद रूप से सत्य है और आधार से ज्यादा डेमोनाइजेशन किसी प्रोजेक्ट का हिंदुस्तान में नहीं हुआ। ये भी सच है। इतने लोगों ने हल्ला मचाया कि साहब
20:06 प्राइवेसी वायलेट हो गई। मैं समझता हूं कि सुप्रीम कोर्ट में जो पीआईएल हुए और जो सितंबर 2018 के फैसले की बात आप कर रही हैं। उस फैसले में कई सारे प्रश्न सुप्रीम कोर्ट ने वो अपने फैसले में सुनाए थे। पहला नौ प्रश्न थे कुल मिला के उसमें से तीन प्रश्न मुझे याद हैं। अभी मैं बता देना चाहता हूं कि क्या आधार प्राइवेसी भंग करता है और उसका उत्तर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था नहीं। क्या आधार एक सर्वििलेंस स्ट्रक्चर क्रिएट करता है देश में? उत्तर था नहीं। तीसरा था क्या आधार सिटीजन को प्रोफाइल करता है? उत्तर था नहीं। मैं बताना चाहता हूं कि उस वक्त जब आधार हमने प्रारंभ किया 2009 में उस
20:55 वक्त प्राइवेसी एक बहुत बड़ा मुद्दा उस समय नहीं था हमारे देश में कम से कम वेस्टर्न कंट्रीज में तो था वो अलग बात है। लेकिन उस समय भी हम लोगों ने प्राइवेसी बाय डिजाइन जो कांसेप्ट होता है सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में वो हमने इंट्रोड्यूस किया। उदाहरण के तौर पे आधार एक रैंडम नंबर है 12 डिजिट का। हम 12 डिजिट में से 11 डिजिट जो है सिग्निफिकेंट है और 11 डिजिट में 10 टू द पावर 11 अर्थात 100 कर 100 बिलियन नंबर्स क्रिएट हो सकते हैं। हम लोग मात्र 1.4 बिलियन है। इसलिए नंबर लाइन पे वो डेंसिटी केवल 1.4% है। रेंडम नंबर था। साथ-साथ जब भी आप ऑथेंटिकेट करते हो तो
21:40 इमीडिएटली आपको इंफॉर्मेशन होता है। आप स्वयं ऑथेंटिकेट करते हो। और नंबर वन नंबर टू किस काम के लिए ऑथेंटिकेट कर रहे हो आप इसकी जानकारी आधार के सिस्टम को नहीं है। इसका मतलब है आधार इज एग्नोस्टिक टू दी ऑथेंटिकेशन पर्पस। जिसका मतलब है कि आधार का डेटाबेस फेडरेटेड डेटाबेस है। आधार केवल आइडेंटिटी कंट्रोल करता है। आधार ट्रांजैक्शन के बारे में कुछ नहीं जानता। इसलिए कोई भी किसी भी सिटीजन की प्रोफाइलिंग नहीं हो सकती कि उसकी एक्टिविटीज गतिविधियां क्या है। हम उसी प्रकार से आधार के ऑथेंटिकेशन का डाटा भी मात्र उसका जो लॉग होता है वो लॉक भी मात्र छ महीने तक मेंटेन रहता है। तो इसलिए यह कहना और आज तक 15 वर्षों में
22:26 आधार से एक भी बायोमेट्रिक डाटा लीक नहीं हुआ है। आप यह जान के जान के आपको आश्चर्य होगा कि लोग इतने प्राइवेसी के बारे में इतना हल्ला मचाया। लोगों ने इतना परेशान हुए। आधार नंबर एक सीक्रेट नंबर है। आधार नंबर में जो वर्चुअल आईडी जिसकी बात सुबोध जी ने अभी की आधार के ऊपर भी एक वर्चुअल आईडी अरे भाई आधार अपने आप में तो एक रैंडम नंबर है। उसमें तो कोई मैंने चैलेंज किया था। मैंने स्वयं आप चैलेंज किया था। आपको शायद याद होगा। Twitter पे मैंने चैलेंज किया था कि मेरा आधार नंबर यह है। बोलो क्या कर सकते हो कोई? आप अपना आधार नंबर सैकड़ों जगह देते हो। आप बैंक अकाउंट खुलवाते हो तब आधार का फोटो कॉपी ले लेता है। होटल में जाते हो तब आधार का फोटो। अगर इतना ही आधार खतरनाक होता तो अब तक तो कितना नुकसान हो चुका होता हम लोगों का किसी का नुकसान आज तक हुआ है तो इसलिए ये डिस्क्लोज़र ऑफ़ आधार नंबर
23:13 वर्चुअल आईडी लगाना रही बात कि लिमिटेड पर्पस का वो ऑथेंटिकेशन तो मैं बता देना चाहता हूं कि आधार के ऑथेंटिकेशन की परिभाषा यह है कि आधार नंबर और आदमी का कोई भी बायोमेट्रिक एट्रिब्यूट इसका मतलब आधार नंबर वन टू थ्री फोर एज 26 आधार से जवाब आएगा हां और ना जरूरी भी नहीं है कि आप अपना नाम भी भेजें वहां पे आधार नंबर आपको भेजना पड़ेगा क्योंकि तभी वह वन टू वन मैच करेगा तो इसलिए सेलेक्टिव तरीके से इंफॉर्मेशन शेयर करके उसका ऑथेंटिकेशन आप कर सकते हैं। ये शुरुआत से ही आधार के ऑथेंटिकेशन की परिभाषा रही है। तो इसलिए मुझे लगता है चैलेंजेस जो है ना चैलेंजेस लोगों ने खुद क्रिएट की हैं। इसके बारे में बहुत सारी भ्रांतियां करके
23:59 और उसका नतीजा ये हुआ है कि आज आधार केवल सरकारी कार्यक्रमों के लिए आधार रह गया है। जबकि प्राइवेट सेक्टर में आधार की और ज्यादा उपयोगिता होती है। मुझे लगता है कि आधार का उपयोग केवल 20% हो रहा है। 80% अभी उपयोग होना बाकी है। अगर आप प्राइवेट सेक्टर के लिए भी इसको कर दें। आप हर सिटीजन को एमावर कर दीजिए कि वो कहीं भी जाके प्रूव कर सके कि मैं हूं। जी। दिस इज़ व्हाट दिस इज़ व्हाट इट ट्रू एमावर। बिलकुल। करना चाहिए। बिल्कुल और समय क्योंकि कम है डॉक्टर सुबोध शर्मा आखिर में आपका क्या कमेंट होगा जैसे डॉक्टर आर एस शर्मा भी कह रहे हैं कि 20% उपयोग कर हो रहा है अभी और बड़े आधार पर आधार का उपयोग होना अभी बाकी है तो एक तरह से जो अभी तक का सफर है क्या हम उसे देखें कि आधार सिर्फ आइडेंटिटी नहीं बल्कि डिजिटल इकॉनमी और गवर्नेंस का
24:44 अब भारत में बेस बन चुका है और आने वाले समय में जैसे आपने कहा था ना कि इनोवेशन का मार्केट बढ़ा है इससे। आपको क्या लग रहा है कि कौन-कौन से और इनोवेटिव यूजज़ अभी हो सकते हैं और जब हम इंडिया 2047 की बात करते हैं, विकसित भारत की बात करते हैं तो वहां योजनाओं में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को केंद्रीय भूमिका दी जा रही है। तो 2047 तक आधार आईडी स्टक को एक भरोसेमंद नागरिक हितैषी नीव बनाने के लिए आपकी प्राथमिक नीति सिफारिशें क्या होंगी आज? नहीं बहुत ही पर्टिनेंट क्वेश्चन है ये। और रिफ्लेक्टिव क्वेश्चन भी है सभी बुद्धिजीवियों के लिए कि ये आगे देखिए पॉसिबिलिटीज इममेंस है। जैसे रामसेवक जी ने भी कहा कि इसका अडॉप्शन अभी लिमिटेड है बट ये किसी भी सर्विस डिजिटल इकोसिस्टम
25:30 में कोई भी सर्विस जो है उसका जो बेसिक पिलर है वो ऑथेंटिकेशन है कि आपको ऑथेंटिकेट करना है कि आप वही हैं जो आप अपने आप को क्लेम कर रहे हैं। हम और उसके लिए एक यूनिक डीडुप्लीकेटेड आइडेंटिटी होना बहुत जरूरी है। तो अभी तक का आप अगर डिजिटल इकोसिस्टम देखें तो इट इज मोस्टली अ वेब ऑफ डेटा फ्लो। ठीक है? मतलब यहां पर डेटा फ्लो कर रहा है वेब के थ्रू और उसको मोनेटाइज किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में एक वेब ऑफ वैल्यू फ्लो हो जाएगा जिसमें जो डेटा जो फ्लो कर रहा है उस डेटा पे आप वैल्यू अस्स्राइब कर
26:16 सकते हैं। और वो वैल्यू इसीलिए अस्राइब कर सकते हैं कि उस डेटा पे को आपने आप ये बता पाए कि ये डेटा जो है वो सही डेटा है। ऑथेंटिकेटेड डेटा है। हम और उसको आप कर सकते हैं और इन सारी चीजों के इन सारी चीजों के लिए तो उस डाटा पे जब वैल्यू बनेगी तो एक नया डिजिटल इकोसिस्टम बनेगा जिससे मेरे हिसाब से बहुत ज्यादा इनोवेशन की पॉसिबिलिटी है फ्रॉम ट्रांजिशनिंग फ्रॉम अ सिस्टम व्हिच इज वेब ऑफ डेटा फ्लो टू अ वेब ऑफ वैल्यू फ्लो और उसके लिए मुझे लगता है कि आधार जैसे डिजिटल इंस्ट्रूमेंट्स विल प्ले अ ह्यूज रूल बिल्कुल बट फ्यूचर में जाने के लिए एक डिजिटल आइडेंटिटी में कुछ और फीचर्स होना बहुत जरूरी है। एंड आई एम श्योर कि जो आधार की
27:03 टीम है, टेक्निकल टीम एंड द एडवाइज़री टीम मस्ट ऑलरेडी बी थिंकिंग अबाउट इट। जैसे हमारे देश में एक बहुत बड़ी पपुलेशन है जो कि माइनर है और ओल्ड एज है। और उसके हिसाब से एक डिजिटल आइडेंटिटी इंस्ट्रूमेंट में एक डेलीगेशन की कैपेसिटी हो। ट्रांसफरेबल और गार्डियनशिप की कैपेसिटी हो जिसमें आप बोल सके कि भाई मेरा जो अंडर एज किड है वो एक सो एंड सो डिसीजंस एक डिजिटल इकोसिस्टम में नहीं ले पाएगा तो डेलीगेट हो सके रिस्पांसिबिलिटी टू अ गार्डियन तो एक गार्डियनशिप तो एक डिजिटल आईडी फ्रेमवर्क का एक फर्स्ट क्लास फीचर बन सके इस पे अब काम करने की यानी कि जो जो लूप होल्स हैं उनमें और फीचर्स जोड़ के उन्हें और बेहतर बनाने की जरूरत है। तो इसीलिए कि जब हम आगे आने
27:48 वाले सालों में बात करें तो हम कह सकें कि ये पूरी तरह से इसमें अब कोई कमी नहीं है और ये दुनिया जिस तरह से आपने कहा ना कि दुनिया के बाकी देश भी अब इसे अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो ये एक मॉडल बनकर एक अच्छा मॉडल बनकर और प्रभावी मॉडल बनकर दुनिया के सामने आ सकता है। बहुत-बहुत शुक्रिया डॉ. आर एस शर्मा आपका। डॉक्टर सुबोध शर्मा आप दोनों मेहमानों का मेरे साथ इस चर्चा में जुड़ने के लिए। जाहिर है कि लाखों करोड़ों लोग आधार का रोजाना इस्तेमाल कर रहे हैं और यह नागरिकों के ट्रस्ट और फेथ इन गवर्नेंस को मजबूत करने का प्रतीक दिखा रहा है। आज की चर्चा में हमने आधार के 15 वर्षों के सफर को अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझने की कोशिश की और इसकी उपलब्धियां, इसकी चुनौतियां और इसका भविष्य हमने जाना। यह सिर्फ एक आईडी नंबर नहीं है बल्कि डिजिटल इंडिया और विकसित भारत के विज़न की नीव जरूर है और आगे का रास्ता यही तय करेगा कि यह नीव कितनी मजबूत होगी और नागरिकों के विश्वास
28:36 के साथ किस तरह हमें 2047 तक लेकर जाएगी। इसी के साथ इनसाइट में आज मेरे साथ फिलहाल इतना ही। आप बने रहिए सस टीवी के साथ। नमस्कार। [संगीत] संसद टीवी के और भी प्रोग्राम्स देखने के लिए सब्सक्राइब करें हमारा YouTube चैनल और हां इन्हें लाइक और शेयर करना ना भूलें।