0:00 कि जगन्नाथ स्वामी की [प्रशंसा] जगन्नाथ कौन है कि यह जानना आवश्यक है को जाने बिना नोए पड़ती मीणा बिंदु पर तीन हुई है प्रीति इस संसार में कहीं भी मैं किसी का प्रेम होता है है तो उस वस्तु के इंर्पोटेंस
0:46 कि के अनुसार होता है झाल तो जैसे मान लो किसी को एक अंगूठी पड़ी मिल गई थी कि उसने किसी से पूछा कि कितने की होगी कि कोई अल्पज्ञता उसके लिए का शौक डेढ़ सौ उपयोगी में कांटे नकली ई एम ए कि वह उसका प्यार उस अंगूठे से सौ-डेढ़ सौ की लिमिट का हुआ था कि वह मुठिया भी रख देता है वह आवेदक देता है कोई जाए तो क्या है ₹100 हो
1:34 कि एक दिन जौं हरि आया है कि कोई हीरे का जानकार है कि उसने दूर से देखा और ने कहा है अंगूठी आपने कहां से लिया में निकाल लिया नहीं पड़ी मिल गई थी मीणा आपको मालूम है कैसी अंगूठी तो हॉप बताएं तो एक आदमी आया था उसने कहा ₹100 करूंगी अच्छा जी नहीं 10 लाख की अंगूठी है कैंडी क्रश लाख वीर है और लू कि उसे अंगूठी को अब हम पहले भी देखते थे
2:23 500 रुपए के मूल्य के अनुसार उसमें प्रेमदास अब 10 लाख के अनुसार हो गया बहुत संभाल के रखे हैं है और उसके देखने में सुख बढ़ गया है मैं पहले देखते थे मेहसाणा रुपए गया कि वह 10 लाख य है यानी यह मैं 10 लाख का आदमी हो गया ऐसे ही यदि किसी व्यक्ति के बारे में जब हम जानते
3:08 हैं अब से प्राइम मिनिस्टर है अच्छा है कि अरे यार मुंह ना तो सब क्यों भेजते है प्राइम मिनिस्टर रोता है चपरासी ओशो लेकिन यह प्राइम मिनिस्टर है यह जान लेने के बाद जब कि उसकी इतनी इंपॉर्टेंट सो गई आप मेरे साथ और टोकता सकते हैं अ प्राइम मिनिस्टर कि फिर जाएगा तो हम कलेक्टर से कम प्रेग्नेंट है झाल कि ऐसे ही अगर जगन्नाथ का वास्तविक स्वरूप
3:57 हम जान ले ली है तो हमारा प्यार मोहब्बत जाए तो यह जानते ने झाल कि जगत के नाथ तो फिर शब्दार्थ है यह जगत मानी है कि 11 चेतन जीव कि जीव हुआ था और माया
4:46 है कि संसद जो है इसमें और जड़ वस्तु है माई ई कि पृथ्वी जल तेज यह तीन चीजें कि उस फूल है दृश्य है अब हम देखते हैं पेड़ों को कि पृथ्वी देते हैं जल्द ही देखते हैं आदमी देखते लेकिन दो चीज निराकार है कि बालू है और आकार ए हवा को हम नहीं देखते
5:32 स्पर्श से आप जानते हैं ठंडी हवा आ रही है गर्म आ रही है तेज हवा आ रही है झाल और आकाश भी हम ऐसे देखते अनुभव करते आकाश मैंने क्या कि खाली जगह झाल कि आकाश-2 पर नहीं होता सब जगह होता कहा कि मैंने खाली जगह आप लोग आकाश में बैठे हैं कहने में अटपटा लगता है बहुत हाउस में है हां हां मैं इसे कहते हैं मट्ठा आकार
6:19 एक होता है घाटा अकाउंट है और एक होता है महाकांत लोगों को यह पंचमहाभूत का त्यौहार का विकार जो है यह जड़ है हैं और इसमें दो प्रकार के जीव रहते हैं कि एक जीव का नाम जड़ जीवनी एक का नाम चेतन जीव पानी स्थावर-जंगम कि एक चलने वाले जीव
7:06 101 न चलने वाली जीव तो जड़ जियुं वृक्ष व गहरा चेतन डुब कि मैं कई किस्में है कि एक टू माय अभिनय जी है जो माया के अंडर में है सदा खाते कि एक दिन हुए ऐसा नहीं के होंठ एक ऐसे जीव होते हैं जो सदा से मायातीत है झाल मृत्यु समुद्री जीव कहते हैं उनको
7:53 हेलो हाय जीव कि Jio शक्तिपीठ श्री कृष्ण के अंश शहद जगन्नाथ के अंश है लेकिन सदा से मुद्दे को भगवान के परिक्रमा पार्षद है हैं तो एक मायाधीन जीव अब माया भीम जिव में दो किस्में एक जग जीव ने एक चेतन जीव और तीसरा मैंने बताया माया मुक्त सदैव से वे जीव है और एक होते हैं भगवान के स्वांश व
8:42 कि स्वांश मैंने डायरेक्टर अंस ए कि भगवान ही है वे इस तरफ ब्रह्मा विष्णु शंकर दाणी अवतार भगवान यह सब स्वास्थ्य कि यह सब छोड़ो पर शक्ति के गवर्नर है दें और माया मुक्त जीव को स्वरूप-शक्ति गगन कर दीजिए कि भाड़ पुरुषों को और माया धाम के पास स्वरूप उस व्यक्ति अटकती तक नहीं
9:32 कि माया शक्ति जाएगी तब हुआ है जीत कि जगन्नाथ उनके भी नाथ है झाल कि जगन्नाथ के का अंश है महाविष्णु कारणों साईं कैसे हैं उनको महाविष्णु कि वह अनंत कोटी ब्रम्हांड के नायक है तो फिर उम्र के अंश है गर्भ और दूसरा ई ई
10:20 तो फिर उम्र के अंश है विरोध फ्राई हो है जो आप लोगों के हृदय में रहते हैं आप लोगों को शक्ति देते हैं आप लोगों के आईडिया आज नोट करते हैं आप लोगों को कर्म का फल देते हैं अ हुए तमाम व्रत करते हैं सदा आपके साथ रहते हैं अवसर व्यापक भी रहते हैं झाल ब्लुटूथ इतने सारे हैं हैं जिनके नाथ है जगन्नत
11:07 प्योर दो प्रकार के जगत होते हैं कि एक को देवी धाम कहते हैं है यानी माया लोक ब्रह्मलोक तक माया का आधिपत्य है है और एक होता है पर्व धूमधाम से है कि माया के अनंत कोटि ब्रह्मांड है इसके आगे विरजा नदी है के कारणों भी कहते हैं उसको और उसके ऊपर है पर अब हम उसमें इस अब हम भगवंतों के लोग कहते हैं
11:55 कि तुम आया लोकपाल और दिव्यलोक गैदर दोनों जगत के नाथ है जगन्नाथ कि खाली इसी माया लोक के नाथ नहीं है जो दिव्य जगत है यहां या नहीं जा सकती हैं कि यह सूर्य चंद्र जहां नहीं जा सकते झाल कुंडलों के कुलों के भी मालिक नाथ जगन्नाथ है कि वे जगन्नााथ
12:43 कि दीनानाथ है है अर्थात अगर कोई जीव अपने को दीन-हीन मानले पतित मान ले को अपराधी मान लें मान ले भीतर से से है तो वह कृपा कर देते हैं सब क्या बात कर देते अनंत जन्मों के पाप नष्ट कर देते हैं मैं स्वयं दास बन जाते हैं है इसलिए हमें सावधान होकर के मानव देखे इंपॉर्टेंस को समझना है सूचना है बार-बार तो उस समय का सदुपयोग करें भगवान का गुरु
13:29 का चिंतन करें हैं कि यह न भूलें और है कि शरीर नश्वर है कल का दिन मिले न मिले जो करना है आजकल लोग क्योंकि अंतिम समय में आपके चित्तवृत्ति जैसी योगी जहां होगी मरने के बाद वह फल मिलेगा को लंबा विस्मरण भावना त्यजत्यंते कलेवरम् तमिल भाई मीणा है तो भगवान जगन्नाथ का महत्व समझो अपने
14:16 शरीर का महत्व समझो उसकी नश्वरता पर सदा निगार रहे हंै कपिल जाए पता नहीं कब तनुजा होशियार रॉ उल्टी रॉ मन हरि गुरु में रखो अगर संसार में रहा और मर गए तुम मरने के बाद उसी की प्राप्ति होगी कि है जहां मन कहता है इस मूवमेंट होगा चिंतन होगा हो कि यह समझने की और समझने के बाद बार-बार मनन करने की चीज है जितनी बार सोचोगे इतने आगे इस आपकी
15:02 प्रोग्रेस होगी का स्रोत अब यह फिर मंतव्य हम मनन नहीं करते सुनते हैं जैसे समय आप घुंघराले बिल्कुल ठीक कह रहे हैं यह मैंने नहीं किया तो फिर संसार का मनन करना पड़ेगा क्योंकि मन तू चुप रहेगा नहीं है और संसार का मनन किया तो गंदगी मन में आई मन और बुद्धि हो गया रंग नष्ट हो गए