0:00 तो दोस्तों धरती इक शेर कैसी है स्पिरिचुअल यह तो हम सभी जानते है लेकिन कैसे ताकि हम इतने शोर कैसे हैं आंखों से देखने पर तो धरती हमें इसे फोल्ड दिखती है धरती को गोल मारने की एक बड़ी वजह हमारी स्कूली पढ़ाई और मीडिया है जहां हर जगह धरती को गोल बताया जाता है कि हमने खुद से कभी अनुभव नहीं किया है हममें से ज्यादातर ने जो कुछ बताया गया है उसी को सच मान लिया है और बहुत ही कम लोग ऐसे होंगे जिन्होंने कभी खुद से इसे जांचने की कोशिश की होगी हममें से ज्यादातर लोगों के धरती को गोल मारने की वजह सिर्फ साइंस में उनका विश्वास है कि आप जानते हैं दुनिया में करोड़ों लोग ऐसे भी हैं जो इस बात पर संदेह करते हैं और बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो यह मानते हैं धरती दरअसल गोल नहीं बल्कि फ्लैट है फ्लैट में विश्वास रखने वालों की अच्छी खासी तादाद दुनिया में मौजूद है और इन लोगों की फ्लाइट सोसायटी
0:46 के नाम से एक ऑर्गेनाइजेशन है वैसे तो और भी कई सारी ऑर्गेनाइज्ड एंड बट यह वाली मेन है एक सर्वे के अनुसार हाल के वर्षों में इस लैटर मॉडल में विश्वास करने वालों की संख्या लगातार बढ़ी बजे का एक बड़ा कारण इंटरनेट सोशल मीडिया और स्मार्टफोन से है कि आज YouTube पर तमाम वैसा कंटेंट मौजूद है 10 साइंस की औसत जानकारी रखने वाले को लेटेस्ट मॉडल के लिए कन्वेंस कर सकता है अगर आप ऐसा सोचते हैं कि फ्लैट मॉडल में विश्वास करने वाले लोग बेवकूफ है तो आप गलत जरा सोचिए आपके सामने एक व्यक्ति है जो इस लैटर मॉडल में विश्वास करता है तो आप से कैसे साबित करेंगे कि धरती सपोर्ट नहीं बल्कि बोल आप चाय सोच रहे होंगे कि नासा की तमाम होटल मजबूर है जो कि यह सिद्ध करने के लिए काफी है लेकिन लेकिन अगर वह व्यक्ति उस सारी फोटोस को डॉक्टर और नासा को गवर्नमेंट कंट्रोल एजेंसी बता दे जिसका काम ही लोगों को इस मेडिकल अर्थ मॉडल के लिए कन्वेंट करना है
1:32 तो फिर आप क्या करेंगे अगर आपके पास में कोई ऐसा तरीका नहीं आ रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है आज इस वीडियो के अंदर हम इस पर चर्चा करने वाले हैं और लेटेस्ट मॉडल की साइंस को समझने की कोशिश करेंगे और देखेंगे कि यह साइंटिफिकली कितना सही है और साथ ही हम यही समझेंगे कि आखिर क्यों लोग कांग्रेस की झोली में विश्वास करते हैं और इससे बचने के लिए हम क्या कर सकते हैं मैं हूं आपका दोस्त विशाल फिर द्विवेदी बने रहिए मेरे साथ इस वीडियो के अंत तक अ कर दो में भर्ती गोल है यह कोई नई खोज नहीं है हजारों साल पहले से लोग जानते थे कि धरती गोल है और जिसका सबसे बड़ा उदाहरण था कि सूरज और चांद भी बोलते हैं और शिश्न का उठना एक को धरती की संभावना पर बल देता था 15वीं सी में अरिस्टोटल है धरती के स्पेशल
2:19 होने की घोषणा की और जिसका आधार था कि जब हम नार्थ व साउथ की ओर लंबी यात्रा करते थे तो हमें कुछ नए सितारे देखने को मिलते थे ट्वेंटी 20 के आसपास एक ग्रेट मैथेमैटिशन एयर टो थम इसने न केवल यह साबित किया कि धरती गोल है बल्कि इसकी परिधि को भी ना पापा अरे टॉस पुलिस ने सुना था कि 22जून को इजिप्ट के साइंस शहर के एक कुएं में दोपहर के समय सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं और को वेतन पर कोई छाया नहीं बनती उसने यही प्रयोग एलेक्जेंड्रिया में उठाने का सोचा और उसने एक पोल को सीधा खड़ा किया उसने पाया कि एग्जाम दिया में 22जून को दोपहर में पोल कुछ शेड्यूल बना रहा था इसका मतलब ऑन द वेरी सेम डे एलेक्जेंड्रिया में सूरज की किरणें सीधी नहीं थी जो कि एक करोड़ की तरफ इशारा कर रही थी बाद में शहरों के एंगल को मिश्रित करके उसने थे कि सरकम्फ्रेंस को कैलकुलेट किया जो कि
3:06 वास्तविकता के काफी करीब था दोपहर में जब सूरज ठीक सर के ऊपर होता है तब यह धरती पर अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग लंबाई की सड़कों बनाता है जो इस बात का पुख्ता सबूत है कि धरती गोल है सूरज का कर चुकी धरती से काफी बड़ा है और यह धरती से काफी दूरी पर है इसलिए धरती पर इसकी जो है वह स्ट्रैट आती है और धरती की गुलामी की वजह से मिट्टी के दौरान अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग लंबाई की सड़क बनाते हैं क्या इस लैटर के पास इसका कोई जवाब है जी हां बिल्कुल है अगर सु्र्य का आकार को छोटा कर दिया जाए और धरती से इसकी दूरी को कम कर दिया जाए तो भी लगभग यही रिजल्ट्स पा सकते हैं लेकिन अब जानते कि सूरज का आकार धरती से काफी बड़ा है और इसके ऐसा होने के तमाम सबूत हमारे पास है लेकिन अभी उस पर चर्चा नहीं करते पहले हम फ्लैट कर पूरे मोडल को समझने की कोशिश करते हैं लैपटॉप के मेनली
3:53 दो तरह के मॉडल्स हमें देखने को मिलते हैं एक मोटल में आर्टिरीज इन थिस ट्रैप अर्थ के सेंटर है और इसके किनारों पर अंटार्कटिका है जो पूरी डिस्को घिरे हुए हैं दूसरे अधर अपॉइंटमेंट के साथ आर्कटिक और अंटार्कटिक दोनों ही समुद्र सिगरेट इस पर मौजूद है पहले वाला मॉडल ज्यादा पॉपुलर है क्योंकि इसको ऑब्जर्वेशन के अनुकूल बनाना थोड़ा सा प्लेटफार्म पर जो पहला ऑप्शन और बढ़ा सकते हैं वह यह कि यहां पर दिन रात कैसे होंगे इस प्रकार पर तो हम जानते हैं कि दिन-रात धरती के घूमने से होते हैं दो हिस्सा सूर्य के सामने होता है वहां पर दिन होता है और बाकी हिस्से पर आपको थी लेकिन अगर धरती फ्लैट हो तो वहां पर दिन रात होने को कैसे एक्सप्लेन किया जाएगा प्लेटफार्म के पास इसका भी एक सलूशन है और वह है एक बेहद छोटा सूरज की धरती से लगभग 30 किलोमीटर दूर रहकर इस विक्षेप
4:39 अर्थ के ऊपर घूम रहा है अपने छोटे साइज में जैसे यह एक समय डिस्ट्रिक्ट अर्थ केवल कुछ हिस्से को रोशन कर पाता है कि आपको सलूशन में कोई समस्या नजर आ रही है टेस्ट मैच में एक नहीं कई सारी समस्या है सबसे बड़ी बात तो यह है कि हम जानते हैं कि सूरज का आकार कितना पढ़ा है और यह कितनी दूरी पर और यह सुनी सुनाई बात नहीं है इस पर आपको ईमान लाने की जरूरत कोई भी इंसान आज थोड़ी सी मैथ्स लगाकर इसके आकार और दूरी को आसानी लुट कर सकता है और कमेंट से हम इस मॉडल को एक्सेप्ट कर लेते हैं लेकिन अभी भी इसमें कई भारी समस्या है अगर सूर्य के आकार को छोटा भी कर दिया जाए तो भी फ्लैट तख्ते किसी हिस्से में कंप्लीट में सोना जैसा कि रात में होता है वैसा असंभव नहीं है उसका कारण है कि आकार में छोटा होने के बावजूद सूरज की रोशनी को फ्लैट अर्थ के दूर हिस्सों में पहुंचने से रोकने
5:26 वाला यहां पर कुछ भी नहीं है सूरज भले फ्लैट पर के किसी हिस्से के ऊपर ना होकर उससे कितना भी दूर हो लेकिन फिर भी उसकी रोशनी कम मात्रा में ही सही लेकिन बाकी हिस्सों तक भी पहुंचेगी फ्लैट पर सो कॉल्ड रात के समय सूरज पूरी तरह से गायब नहीं होगा बल्कि स्थित इसके ऊपर एक बेहद तेज रोशनी वाले तारे की तरह दिखता रहेगा जिसकी रोशनी इतनी होगी कि आप इसकी रोशनी में आसानी से किताब पढ़ सकेंगे जैसे-जैसे दिन होगा यह तारे जैसा दिखने वाला सूरज धीरे-धीरे स्थिति से चलकर आपके सर के ऊपर आ जाएगा और साथ ही साथ आकार भी बड़ा हो जाएगा लेकिन फ्लैट्स ने इस समस्या का भी एक समाधान निकाल लिया है और वह यह कि सूरज और क्विक सर्च लाइट की तरह डाइरैक्शन है ऐसा करके रात वाले हिस्सों में भी कंप्लीट ब्राइटनेस को अचीव किया जा सकता है पर
6:11 यहां भी कुछ भारी समस्याएं यह समस्या यह है कि ग्रोवर पर जिस तरह का संकट और सनराइज हम देखते हैं वह हमें फ्लैट अट पर सर्च लाइट संघ के साथ देखने को नहीं मिलेगा सनराइज और सनसेट के समय सूरज हमें शक्ति से युक्त दिखता है और यह थंब होता है लेकिन डाइरैक्शन लाइट वाला सर्चलाइट सन स्थिति से किस तरह होगा और गोल कैसे लिख का यह एक बड़ा सवाल है प्लॉट पर धरती के कर्वेचर की वजह से हमें चीजें स्थिति से मुक्ति नजर आती हैं लेकिन फट पर चीजें स्पीड से नहीं होंगी बल्कि क्षितिज के कुछ ऊपर से होंगी और डायरेक्टर लाइट वाला सन केवल सर के ऊपर आने पर ही कॉल दिखेगा इसके साथ ही फ्लैट पर ग्रैविटी को डिफाइन करना भी एक बड़ी चुनौती है स्फेरिकल अर्थ पर आप कहीं भी खड़े हो ग्रेविटेशनल पुल लगभग यूनिफार्म होता है और जो कि इस पेड़ का
6:58 सेंटर ऑफ मार्क्स इस पेड़ का सेंटर होता है इसलिए अर्थ की सरफेस पर आप कहीं भी खड़े हो ग्रैविटेशनल मैं हमेशा परपेंडिकुलर होता है लेकिन लेटेस्ट पर ऐसा नहीं होगा इस लैटर पर आप जैसे-जैसे इसके सेंटर से दूर जायेंगे ग्रैविटी आपको जिसका अर्थ के सेंटर की तरफ खींचेगी ऐसे में यदि आप लगातार साउथ की तरफ यात्रा कर रहे हैं तो आपको ऐसा लगेगा कि मानो आप अखिल जा रहे हो जितना ज्यादा साउथ की तरफ जाएंगे आपको लगेगा कि चढ़ाई और खड़ी होती जा रही है ग्रैविटी कैसे विवाद के कारण ऐसी जगहों पर मकान भी सीधा बनाना संभव नहीं होगा ऐसे में ग्रैविटी उन्हें लगातार एक ओर खींचती रहेगी और उनके गिरने का खतरा बना रहेगा लेकिन फ्लैट के problems ने इसका भी एक सलूशन निकाला है उनका कहना है कि इस लैटर स्पेस में अब अट्रैक्शन में 98 मीटर प्रति
7:44 सेकंड स्क्वायर की एक्सीलरेटिंग स्पीड से उठकर रहिए और ग्रेविटेशनल पुल का कारण यही है लेकिन यहां पर भी कई समस्याएं हैं हम जानते हैं कि ग्रैविटेशनल एक्सप्लेनेशन यानि जी की वैल्यू धरती पर सभी जगह एक ही नहीं है यह पोलर रीजंस पर को ज्यादा है तो इक्वेटर पर कुछ कम इसका कारण है अर्थ रोटेशन अर्थ रोटेशन की वजह से हुआ सेंट्रीफुगल फोर्स एक ट्विटर पर कुछ ज्यादा होता है इसकी वजह से ट्विटर पर जी की वैल्यू में मामूली सी कमियां आ जाती है हलक यह भी कम होती है जिसे हम महसूस नहीं कर पाते पर इसे मापा जा सकता है फ्लैट मॉडल में इसके लिए कोई भी एक्सप्लेनेशन नहीं है इसके साथ ही फ्लैट मॉडल में बिना ग्रैविटी सूरज और चांद किस कारण से धरती के ऊपर चक्कर काट रहे हैं और कैसे वह धरती से कांस्टेंट दूरी पर बने हुए हैं इसका भी कोई एक्सप्लेनेशन नहीं है और सबसे कमाल की
8:31 बात यह है कि आखिर वह कौन सी फोर्स है दो फ्लेट को लगातार ऊपर की ओर एक टेक्स रेटिंग स्पीड से पुष्कर रही है और यह ऊर्जा कहां से आ रही है अगर किसी स्पीड से फैट को पुष्ट करती रही तो अब तक तो धरती को लाइट की स्पीड को सजाना था वैसे फ्लाइट मोड बंद करने के लिए हमें इसमें ज्यादा टेक्नीक और डिटेल में जाने की जरूरत ही नहीं है हम कुछ सिंपल रिजर्वेशन के जरिए इसे कंफर्म कर सकते हैं इसमें जो सबसे बेस्ट मुझे लगता है वह यह कि अगर अर्थ लैटर होती तो हम दूरबीन के जरिए काफी दूर तक चीजों को देख सकते हैं एक नाप भले ही कितनी भी शक्तिशाली दूरबीन क्यों ले लें आप रूप से आगे नहीं देख सकते लैटर सच कहते हैं कि इसकी वजह धरती के सरफेस पर मौजूद लैंसेट मुश्किल है पर असल में ऐसा नहीं है डांस अट मसूरी के बावजूद एक क्लीयर्ड ए को आपकी आंखें शॉप किलोमीटर तक की दूरी तक
9:17 आसानी से देख सकती है लेकिन अमूमन ऐसा नहीं होता अगर आपकी हाईट 6 फिट है तो आप जमीन पर खड़े होकर लगभग पांच किलोमीटर तक की दूरी तक ही देखते हैं लेकिन आम तौर पर ऐसा भी नहीं हो पाता क्योंकि पेड़ और बिल्डिंग सहित तमाम रुकावटें हमारी नजर की राह में आ जाती है लेकिन अगर आप समुद्र तट पर हो तो आप इतनी दूरी तक कि देख पाएंगे इसका कारण है धरती का कर्वेचर इस कर्वेचर की वजह से एक दूरी के बाद धरती की सतह हमारी साइड से ओझल हो जाती है हालांकि अगर कोई चीज तथा से ऊपर है तो इसे हम देखते हैं जैसे यदि समुद्र में दूर पर कोई पहाड़ी टापू है तो वह में दिखेगा लेकिन उसका तट और उसके आसपास मौजूद नौकाएं हमें नहीं दिखेंगे भले ही हम दूरबीन का ही प्रयोग क्यों ना करें इसी तरह यदि आप तट से दूर जाते किसी शिव को देखें तो पहले
10:02 उसका ताला आयोजन होगा अपने पिता मसूद धरती की ढिलाई के कारण ही हम रेडियो टीवी चैनल्स को एक सीमित दायरे में ही प्रसारित कर पाते हैं भले ही आप कितने ही पावरफुल रेडियो सिग्नल क्यों न भेजें धरती की सतह पर यह सिर्फ साठ-सत्तर किलोमीटर तक भी जा सकता है एंटीरे की ऊंचाई बढ़ाकर आप इसे कुछ और ज्यादा दूर तक भेज सकते हैं लेकिन एक ही एंटीना से 14 किलोमीटर से ज्यादा आप इसे प्रसारित नहीं कर सकते इसीलिए हमें हर कुछ दूरी पर रेलवे स्टेशन बनाने पड़ते हैं और इसीलिए हमें सेटेलाइट की मदद लेनी पड़ती है अगर अर्थ लैटर होती तो हमें इस सब की जरूरत नहीं पड़ती इसके साथ ही हवाई यात्रा में लगने वाला समय भी लैटर के रोमांस के लिए भारी चुनौती पेश करता है अगर फ्लैट हो तो जैसे-जैसे हम साउथ की तरफ बढ़ते जाएंगे रिलेटिव ब्लाउस की लंबाई भी लगातार बढ़ती
10:48 जाएगी जबकि ग्लोबल पर साउथ की तरफ जाने पर इक्वेटर तत्व लंबाई बढ़ती है पर उसको पार करने के बाद घटती जाती है प्लेट पर इसके भरते जाने का मतलब है साउथ में जो कॉन्टिनेंट्स है उनके बीच की दूरी भी बढ़ती जाएगी ऐसे में यदि कोई फ्लाइट साउथ के किसी कॉन्फिडेंस से साउथ के ही किसी वुडलैंड के लिए उठती है तो उसे बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा जैसे सिडनी से सेंटियागो जाने वाली फ्लाइट पेसिफिक ओसेन के ऊपर से होकर जाती है जबकि इस लैटर पर इसे इस तरह से होकर जाने की जरूरत नहीं है यह एक स्ट्रेट बात को फॉलो कर सकती है और फ्लाइट हमेशा ऐसे ही स्ट्रेट बात को फॉलो करती है लेकिन लैटर पर पेसिफिक ओशन के ऊपर से जाने के लिए फ्लाइट को अननेसेसरीली एक कॉर्ड बात को फॉलो करना पड़ेगा जो की अननेसेसरी होने के साथ-साथ काफी लंबा भी
11:34 होगा और इसमें टाइम भी ज्यादा लगेगा लेकिन कोई भी थोड़ी सी गोली करके यह पता कर सकता है कि इस फ्लाइट में एक्चुअल में कितना टाइम लगता है फ्लैट मॉडल मैं स्वयं हम इस पर पूरी तरह से स्टार्ट हो जाएंगे इसके प्रॉमिनेंट के लिए भारी चुनौतियां पेश करता है और इसके तमाम समर्थक सौतन हैव ए स्पीयर की मौजूदगी से इंकार करते हैं तो कुछ कहते हैं कि मौजूद तो है पर वहां मानव आदि ने यानि अनुसार ऑस्ट्रेलिया में कोई रहता ही नहीं है और वहां होने वाली घटना है सरकारों द्वारा स्क्रिप्टेड है दोस्तों यह तो मात्र कुछ चुनौतियां हैं जो फ्लैट अर्थ अपने को अनसाइंटिफिक सिद्ध करते हैं वास्तव में लेटेस्ट मॉडल की हर चीज पर इतने सवाल है जो उसकी धज्जियां थे लेकिन फिर भी आश्चर्यजनक रूप से इस के कट्टर समर्थक और है हर तरह की आलोचना से निपटने का कोई ना कोई बहाना तैयार कर रखा है इसके जरिए वह को दिलासा देते हैं कि वह सही है
12:21 प्लेट के समर्थकों के तर्क भले ही कितने मूर्खतापूर्ण हो और वह मानव के मनोविज्ञान को समझने के लिए एक अच्छा केस अनिल कैसे को उन समझ से मुंह मोड़ सकता है जो कि एकदम उसकी आंखों के सामने आखिर वह क्या चीज है जो हम इंसानों को अपनी विचार धारा से पागलपन की हद तक चिपके रहने के लिए मजबूर करते हैं वेल इस सवाल का जवाब मैंने पिछले वीडियो में दिया है और अगर आपने वह नहीं देखा है तो आप चैनल से देख सकते हैं पर यह सवाल मेरे और शायद आपके भी दिमाग में आ रहा होगा कि आखिर इस लैटर जैसी स्टूडियो में विश्वास रखने वाले भी क्या तो फिर क्या कुछ ऐसे लोग हैं जो कि कम पढ़े लिखे हैं या जिनको चीज़ों की ज्यादा समझ नहीं है कि यह बाकी लोगों से कम रेसलर है वेदव्यास नहीं रहता कुछ लोग रिलिजियस रीजंस की वजह से इस लैटर मॉडल में विश्वास रख सकते हैं पर यह कोई महत्व नहीं है क्योंकि आज सभी
13:08 धर्म व मॉडल को एक्सेप्ट करते हैं भले ही उनके रिलेटिव्स टैक्स अर्थ को फ्लैट बनाते हैं पर धर्मगुरु ने बहुत पहले ही उनकी डिप्रेशन को बदलकर अर्थ को गांव के रूप में एक्सेप्ट कर लिया है और ज्यादातर लोग इन इंटरप्रिटेशन को विदाउट एनी डाउट एक्सेप्ट करते हैं लेटेस्ट मॉडल में विश्वास रखने की असल वजह कुछ और है मैंने यहां के लोगों को देखा सुना है मुझे यह आम लोगों की तुलना में ज्यादा स्केप्टिकल अबाउट चाहने लगे और यह इसलिए क्योंकि वास्तव में यह लोग हैं जिन्होंने लो बस मॉडल को इससे एक्सेप्ट नहीं किया क्योंकि विज्ञान ने साबित किया है और यह बच्चे अरेस्ट वन पर्सन क्वालिटी है कि वह चीजों को फैला करेक्ट नहीं करता है असल में वह ट्रैक्स पर डोंट करता है और देखता है कि क्या वह वास्तव में सही है क्वालिफिकेशन साइंटिफिक मेथड टाइट इंपोर्टेंट स्टेप यह रिस्पेक्ट प्रेसिडेंट किए गए हैं उन्हें
13:53 गलत सिद्ध करने की कोशिश करना यानि देखा जाए कि क्या उन्हें गलत सिद्ध किया जा हां यस योर ऑब्जर्वेशंस का कोई अल्टरनेट एक्सप्लेनेशन दिया जा सकता है तो टेक्निकली देखा जाए तो यह लोग यही करने की कोशिश करें तो फिर आखिर गलती कहां पर है गलत यह समय यहां पर है कि वह जिन चीजों पर डांट कर रहे हैं उन चीजों की उन्हें पूरी समझ नहीं है पूरे साइंटिफिक नॉलेज है उसके बेस पर क्योंकि वह अर्थ को आरोप सिद्ध नहीं कर पाते हैं या उन एक्सपेरिमेंट जिनके जरिए हमें अर्थ के गोल होने का पता चलता है उन्हें जो कि वह ठीक से नहीं समझ पाते हैं या उन्हें खुश थे कंडक्ट नहीं कर पाते हैं यहां से उन्हें अवगत मॉडल पर डोंट पैदा होता है उन्हें लगता है कि उन्हें कुछ छुपाया जा रहा है क्योंकि सेंसो ने बता रहे हैं कि धरती फ्लैट पर साइड पर डाटा कुछ और इधर है कहीं ऐसा तो नहीं दुनिया भर की सरकारें साइंटिफिक कमिटी के जरिए लोगों को बेवकूफ बना लिया
14:40 आखिरकार यह सब है तो कमेंट कंट्रोल महीना यह चीज हमारे समाज में पल रहे गंभीर समस्या की तरफ हमारा ध्यान लेकर जाती है इस पर ध्यान देना बहुत जरूरी है कि आप जानते हैं कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के आने के बाद दुनिया में इस लैटर की संख्या बढ़ी है उपाय टीम में अमेरिका में और हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई है असल में अर्थ की से पर आउट करने वाले पहले भी मौजूद रहे होंगे पर सोशल मीडिया और खासतौर पर यूट्यूब के होने के बाद ऐसे लोगों को तमाशा कंटेंट मिलो यार इसमें अर्थ को फ्लैट सिद्ध किया गया और जिसने उनके डाउट को यकीन में बदल दिया साथ यह चीज और है कौन प्रसिद्ध सीरीज हमें ज्यादा आकर्षित करती हैं एक आम इंसान जिसे चीजों की ज्यादा समझ नहीं है उसे यह सीरीज दिमाग पर ज्यादा जोर दिया बिना आसानी से समझ आ जाती हैं और साथ ही उसे इंटेलेक्चुअल होने का
15:25 एहसास भी कराती हैं उसे लगता है कि वह कुछ ऐसे ही ट्वीट को भांग है जिसे ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं लोग खुद को अलग और खास दिखाने के चक्कर में इनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं अब आप देख सकते हैं कि आज भी आपको तमाम अपने आस-पास ऐसे लोग मिल जाएंगे जो करोड़ा कॉन्ग्रेस्सी में विश्वास रखते हैं उनके अनुसार यह बीमारी दुनिया भर की सरकारों का मिलाजुला श्रीयंत्र और हैरानी की बात यह है कि यह लोग कोई कम पढ़े-लिखे या अंधभक्त टाइप के लोग नहीं है मेरे बहुत से लोगों को जो कि काफी हेल्पफुल विचार रखते हैं उन्हें भी इस कंस्पिरेसी में विश्वास करते पाया है ओके तो की समस्या कहां पर है समस्या की जड़ असल में विज्ञान और समाज के विकास की रफ्तार के अंतर में छुपी है बीती शताब्दी के दौरान विज्ञान के क्षेत्र में जिस तेजी से विकास हुआ है समाज उसके साथ तालमेल नहीं बिठा सकें हम
16:10 विज्ञान की खोजों के तकनीकी पहलुओं को एक आम इंसान को समझाने में असफल रहे हैं विज्ञान में जिस तेजी से विकास हो रहा है यह दिन-ब-दिन और ज्यादा जटिल होता जा रहा है और साथ नई जानकारी को और इंसान को समझा पाना भी और मुश्किल होता जा रहा है और इस तरह जिसका एक है वह दिनों दिन बढ़ता जा रहा है नॉलेज किस तरह का फायदा उठाकर तमाम चालबाज लोग अपनी कमजोरी अधूरी ज़रूर साइंटिफिक टूल्स के जरिए लोगों को गुमराह कर अपना धंधा चमकाने में लगे हैं कि यह गंभीर मुद्दा है और मुझे लगता है कि सरकारों को इस पर ध्यान देना चाहिए वैज्ञानिक जानकारी को आम लोगों को समझ आ सकने वाली भाषा में कैसे बंद किया जा सकता है इस पर काफी काम करने की जरूरत है और जब तक यह नहीं होगा तब तक एक बड़ी आबादी इसी तरह धन का शिकार होती रहेगी तो दोस्तों डेट ऑफ बर्थ डे इस वीडियो के अंत में मैं अपने सभी व सब्सक्राइब के साथ सपोर्टर्स
16:58 भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जो लगातार इस चैनल को सपोर्ट करते हैं और हमारे और आपके इस मिशन को मजबूती देते हैं बाकी यह वीडियो आपको कैसी लगी मुझे कमेंट में जरूर बताइएगा अगर आपने मेरे चैनल को सबस्क्राइब नहीं किया तो चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए उस एक्टिविटी फ्री मिलते हैं यदि किन्हीं वीडियो में तब तक के लिए गुड बाय टेक केयर ए [संगीत]