The 1% Mindset Book Summary in Hindi | Change Your Mindset, Change Your Life

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो "द 1% माइंडसेट" के बारे में है, जो उन लोगों की सोच पर केंद्रित है जो भीड़ से अलग अपनी राह बनाते हैं। यह किताब बताती है कि कैसे 1% लोग अपनी जिंदगी को डिजाइन करते हैं, पैसे को एक टूल के रूप में देखते हैं, वैल्यू बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, और रिस्क को कैलकुलेट करते हैं। यह वीडियो प्रेरणा, जिम्मेदारी, और लगातार सीखने के महत्व पर जोर देता है, और बताता है कि कैसे छोटे-छोटे निर्णय समय के साथ बड़े परिणाम देते हैं।

मुख्य बातें:

  • 1% लोग अपनी जिंदगी को डिजाइन करते हैं, जबकि 99% लोग हालातों पर प्रतिक्रिया करते हैं।
  • पैसे को सिर्फ खर्च करने की चीज नहीं, बल्कि फ्रीडम और अवसर पैदा करने का टूल मानना।
  • इनकम बढ़ाने के बजाय वैल्यू बढ़ाने पर ध्यान देना।
  • फेलियर को फीडबैक मानना और लगातार सीखते रहना।
  • अपनी सोच, समय, और भविष्य की जिम्मेदारी लेना।

परिचय: 1% मानसिकता की शक्ति

यह वीडियो 1% मानसिकता की अवधारणा का परिचय देता है, जो उन लोगों की सोच है जो भीड़ के पीछे नहीं चलते बल्कि अपनी राह खुद बनाते हैं। यह बताता है कि दुनिया में हर कोई मेहनत करता है, लेकिन कुछ लोग ही सफल होते हैं क्योंकि वे चीजों को अलग तरह से देखते हैं और फैसले लेते हैं। 1% मानसिकता वाले लोग डर के आधार पर नहीं, बल्कि समझ और स्पष्टता के आधार पर निर्णय लेते हैं। वे अपनी जिंदगी को डिजाइन करते हैं और शॉर्ट टर्म आराम के बजाय लॉन्ग टर्म ग्रोथ को चुनते हैं।

99% बनाम 1%: सोच में अंतर

यह खंड 99% और 1% लोगों की सोच में अंतर को स्पष्ट करता है। 99% लोग अपनी जिंदगी रिएक्शन में जीते हैं, जबकि 1% लोग अपनी जिंदगी डिजाइन करते हैं। 1% मानसिकता वाला व्यक्ति यह नहीं पूछता कि लोग क्या कहेंगे, बल्कि यह पूछता है कि 10 साल बाद इसका असर क्या होगा। वे आज स्ट्रगल चुनते हैं ताकि कल फ्रीडम मिले। उनकी इनकम उनकी वैल्यू का परिणाम होती है, और वे मोटिवेशन पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि सिस्टम और आदतों पर काम करते हैं।

पैसे के प्रति दृष्टिकोण: गरीब बनाम अमीर सोच

यह खंड पैसे के प्रति 99% और 1% लोगों के दृष्टिकोण में अंतर पर प्रकाश डालता है। 99% लोग पैसे को सिर्फ खर्च करने की चीज मानते हैं, जबकि 1% लोग इसे एक टूल के रूप में देखते हैं जो फ्रीडम क्रिएट करता है। गरीब सोच और अमीर सोच में फर्क सैलरी का नहीं, बल्कि डायरेक्शन का होता है। 99% लोग इनकम बढ़ाने की सोचते हैं, जबकि 1% लोग वैल्यू बढ़ाने की सोचते हैं।

वैल्यू और इनकम: सफलता का मार्ग

यह खंड वैल्यू और इनकम के बीच संबंध को स्पष्ट करता है। 1% मानसिकता वाला व्यक्ति यह देखता है कि वह मार्केट को क्या दे रहा है, उसकी स्किल कितनी रेयर है, और उसकी नॉलेज कितनी यूज़फुल है। वह खुद को रिप्लेसेबल नहीं बनने देता। अगर आप इजीली रिप्लेस हो सकते हैं, तो आप कभी फ्री नहीं हो सकते।

काम को एसेट बनाना: 1% लोगों का दृष्टिकोण

यह खंड बताता है कि 1% लोग अपने काम को सिर्फ काम नहीं मानते, बल्कि उसे एसेट बनाते हैं। वे जॉब में भी सीखने पर फोकस करते हैं, बिजनेस में भी सिस्टम बनाते हैं, और फ्रीलांसिंग में भी ब्रांड क्रिएट करते हैं। वे मेहनत को रिजल्ट से मेजर करते हैं, न कि समय से। बिजी रहना प्रोडक्टिव होना नहीं होता।

प्राथमिकता और डेलीगेशन: समय का सदुपयोग

यह खंड प्राथमिकता और डेलीगेशन के महत्व पर जोर देता है। 1% मानसिकता वाला व्यक्ति पहले डिसाइड करता है कि सबसे इंपॉर्टेंट काम क्या है, फिर उसी पर फोकस करता है। वे डेलीगेशन सीखते हैं, ऑटोमेशन सीखते हैं, और सिस्टम बनाते हैं। उन्हें क्लेरिटी होती है कि उनका टाइम सबसे वैलएबल रिसोर्स है।

अवसर और रिस्क: 1% लोगों का नजरिया

यह खंड बताता है कि 1% लोग ओपोरर्चुनिटी क्रिएट करते हैं। वे प्रॉब्लम ढूंढते हैं, क्योंकि जहां प्रॉब्लम होती है, वहीं वैल्यू क्रिएट होती है। वे रिस्क को अवॉइड नहीं करते, बल्कि कैलकुलेट करते हैं। वे डाटा देखते हैं, एक्सपीरियंस सीखते हैं, और फिर एक्शन लेते हैं।

असफलता का सामना: 1% मानसिकता

यह खंड असफलता के प्रति 1% लोगों के दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। 99% लोग फेलियर को एंड मानते हैं, जबकि 1% लोग फेलियर को फीडबैक मानते हैं। उनके लिए फेलियर यह बताता है कि क्या काम नहीं किया और क्या इंप्रूव करना है। अगर आप फेलियर से डरते हैं तो आप ग्रोथ से भी डरते हैं।

अनुमोदन और आराम: 1% लोगों की प्राथमिकताएं

यह खंड बताता है कि 1% मानसिकता वाला इंसान अप्रूवल का भूखा नहीं होता। उसे सबका वैलिडेशन नहीं चाहिए। वह जानता है कि अगर आप सही रास्ते पर हैं तो शुरुआत में लोग आपको समझेंगे नहीं। कंफर्ट और ग्रोथ एक साथ नहीं चल सकते।

दिन की शुरुआत और जिम्मेदारी: 1% लोगों की आदतें

यह खंड 1% लोगों की सुबह की आदतों और जिम्मेदारी लेने के महत्व पर जोर देता है। 1% लोग सुबह उठकर फोन स्क्रॉल नहीं करते। वे दिन को इंटेंशनली स्टार्ट करते हैं। वे रिस्पांसिबिलिटी पर बहुत जोर देते हैं। कोई ब्लेम नहीं, कोई एक्सक्यूज नहीं।

अनुशासन और आदतें: 1% लोगों का मार्ग

यह खंड बताता है कि 1% लोग मोटिवेशन का इंतजार नहीं करते। वे डिसिप्लिन पर चलते हैं। उन्हें पता है कि मोटिवेशन आएगा और चला जाएगा, लेकिन हैबिट साथ निभाती है। यह माइंडसेट ओवरनाइट नहीं बनता। यह रोज के छोटे डिसीजन से बनता है।

सुबह की रस्में और प्रतिक्रिया: 1% लोगों का दृष्टिकोण

यह खंड बताता है कि आपकी सुबह कैसी होती है, वही आपकी जिंदगी की दिशा तय करती है। 1% सोच वाला इंसान सुबह अपने दिमाग को शांत रखता है। वह दिन की शुरुआत सोच समझकर करता है। 1% लोग हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देते। वे रुकते हैं, सोचते हैं, फिर जवाब देते हैं।

ऊर्जा और ध्यान: 1% लोगों की पूंजी

यह खंड ऊर्जा और ध्यान के महत्व पर जोर देता है। 1% लोग अपनी ऊर्जा बचाकर रखते हैं। वे जानते हैं कि ऊर्जा ही उनकी असली पूंजी है। ध्यान भटकना आज के समय की सबसे बड़ी बीमारी है।

समय और सीमाएं: 1% लोगों का नियंत्रण

यह खंड बताता है कि 1% लोग अपने समय की रक्षा करते हैं। वे हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं होते। वे जरूरी काम के लिए ही समय निकालते हैं। 1% सोच वाला इंसान हर किसी को खुश करने की कोशिश नहीं करता। वह सीमाएं बनाता है।

माहौल और संगत: 1% लोगों का चुनाव

यह खंड बताता है कि माहौल बहुत असर डालता है। जिन लोगों के साथ आप रहते हैं, उनकी सोच धीरे-धीरे आपकी सोच बन जाती है। 1% लोग भीड़ का हिस्सा नहीं बनते। वे गलत जगह अकेले रहना पसंद करते हैं बजाय सही दिखने के लिए गलत लोगों के साथ रहने के।

धैर्य और निरंतरता: 1% लोगों का खेल

यह खंड बताता है कि 1% लोग लंबे खेल पर भरोसा करते हैं। वे जल्दी परिणाम नहीं चाहते। वे आज मेहनत करते हैं ताकि कई साल बाद उसका फल मिले। जिंदगी कोई दौड़ नहीं है जिसे जल्दी खत्म करना हो। यह एक लंबी यात्रा है जिसमें धैर्य सबसे जरूरी होता है।

शारीरिक स्वास्थ्य और सीखना: 1% लोगों की आदतें

यह खंड बताता है कि 1% लोग अपने शरीर का भी ख्याल रखते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि कमजोर शरीर में मजबूत सोच नहीं रह सकती। वे सीखना कभी बंद नहीं करते। वे खुद को पूरा नहीं मानते।

सच्चाई और लचीलापन: 1% लोगों का दृष्टिकोण

यह खंड बताता है कि 1% लोग खुद से झूठ नहीं बोलते। वे अपनी कमियों को पहचानते हैं। वे बहाने नहीं बनाते। जब मुश्किल समय आता है तो 1% लोग उसी समय सबसे ज्यादा मजबूत बनते हैं।

दर्द और विकास: 1% लोगों का मार्ग

यह खंड बताता है कि अगर आपकी जिंदगी में दर्द नहीं है तो शायद आप बढ़ नहीं रहे क्योंकि हर विकास के साथ असुविधा आती है। 1% लोग इस असुविधा से भागते नहीं बल्कि इसे स्वीकार करते हैं।

संतुलन और स्वामित्व: 1% लोगों का नियम

यह खंड बताता है कि 1% सोच का सबसे बड़ा नियम यही है कि आप अपनी जिंदगी के मालिक खुद बने। कोई और आपकी सोच तय ना करें। कोई और आपकी दिशा तय ना करें।

सोच, आदतें, और फैसले: 1% लोगों का परिवर्तन

यह खंड बताता है कि जब आप अपनी सोच बदलते हैं तब आपकी आदतें बदलती हैं। जब आदतें बदलती हैं तब आपके फैसले बदलते हैं और जब फैसले बदलते हैं तब आपकी पूरी जिंदगी बदल जाती है।

स्पष्टता और आत्म-नियंत्रण: 1% लोगों की शक्ति

यह खंड बताता है कि 1% सोच वाला इंसान हमेशा अपने मन को साफ रखने की कोशिश करता है। आत्मनियंत्रण एक बहुत बड़ी शक्ति है। 1% लोग अपने मन के मालिक होते हैं।

लक्ष्य और डर: 1% लोगों का मार्गदर्शन

यह खंड बताता है कि 1% सोच वाला इंसान अपने लक्ष्य को रोज याद करता है। डर कोई दुश्मन नहीं है। डर सिर्फ संकेत है कि आप कुछ नया करने जा रहे हैं।

तुलना और अनुशासन: 1% लोगों का मार्ग

यह खंड बताता है कि 1% सोच वाला इंसान तुलना में नहीं जीता। वह दूसरों की जिंदगी देखकर चलता नहीं। अनुशासन का मतलब कठोर होना नहीं है। अनुशासन का मतलब है खुद से किया हुआ वादा निभाना।

असफलता और समय: 1% लोगों का उपयोग

यह खंड बताता है कि 1% लोग अपनी असफलताओं को छुपाते नहीं। वे उनसे सीखते हैं। समय सबके पास बराबर होता है। लेकिन उपयोग सब अलग-अलग करते हैं।

अकेलापन और सीखना: 1% लोगों का विकास

यह खंड बताता है कि अकेले चलना कभी-कभी जरूरी होता है। सीखना कभी बंद मत करो। जैसे ही आप सोचते हैं कि आपको सब कुछ आ गया है, वहीं से गिरावट शुरू हो जाती है।

पहचान और प्रयास: 1% लोगों का सार

यह खंड बताता है कि आपकी पहचान आपके परिणाम से नहीं बल्कि आपकी कोशिश से बनती है। 1% सोच वाला इंसान अपनी जिंदगी को टालता नहीं। वह यह नहीं कहता कि बाद में करेंगे।

चुनाव और निरंतरता: 1% लोगों का रहस्य

यह खंड बताता है कि आप खास बनने के लिए पैदा नहीं हुए। आप अपने फैसलों से खास बनते हैं। निरंतरता ही असली ताकत है।

प्रगति और ईमानदारी: 1% लोगों का मापदंड

यह खंड बताता है कि 1% सोच वाला इंसान अपनी प्रगति को दूसरों से नहीं नापता। वह खुद से पूछता है कि क्या मैं कल से बेहतर हूं? खुद के साथ ईमानदार होना बहुत जरूरी है।

स्पष्टता और निर्णय: 1% लोगों का मार्गदर्शन

यह खंड बताता है कि स्पष्टता आत्मविश्वास को जन्म देती है। 1% लोग कठिन निर्णयों से नहीं भागते।

ध्यान और आलोचना: 1% लोगों का दृष्टिकोण

यह खंड बताता है कि ध्यान बंटा हुआ दिमाग कभी बड़ा काम नहीं कर सकता। 1% लोग आलोचना से टूटते नहीं। वे उसमें सच्चाई ढूंढते हैं।

संतुलन और ऊर्जा: 1% लोगों का प्रबंधन

यह खंड बताता है कि असफलता और सफलता दोनों ही अस्थाई हैं। 1% लोग संतुलन बनाए रखते हैं। 1% सोच वाला इंसान अपनी ऊर्जा सही जगह लगाता है।

आत्मसम्मान और तैयारी: 1% लोगों का निर्माण

यह खंड बताता है कि आत्मसम्मान चुपचाप बनता है। यह दिखावे से नहीं आता। 1% लोग भविष्य को लेकर डरते नहीं। वे तैयारी करते हैं।

आंतरिक आवाज और प्रशिक्षण: 1% लोगों का चुनाव

यह खंड बताता है कि हर इंसान के अंदर दो आवाजें होती हैं। 1% लोग दूसरी आवाज को चुनते हैं। मन को प्रशिक्षित किए बिना कोई भी बड़ा बदलाव संभव नहीं है।

तैयारी और धैर्य: 1% लोगों का दृष्टिकोण

यह खंड बताता है कि 1% लोग हालात को दोष नहीं देते। वे खुद को तैयार करते हैं। धैर्य कोई कमजोरी नहीं है। धैर्य वह शक्ति है जो इंसान को जल्दबाजी से बचाती है।

अतीत और निर्णय: 1% लोगों का उपयोग

यह खंड बताता है कि 1% सोच वाला इंसान अपने अतीत को बोझ नहीं बनाता। वह उससे सीखता है। हर इंसान के जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब उसे अकेले फैसला लेना पड़ता है।

स्थिरता और जिम्मेदारी: 1% लोगों का आधार

यह खंड बताता है कि स्थिरता बाहर से नहीं आती। वह अंदर से आती है। 1% लोग अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेते हैं।

स्पष्टता और लड़ाई: 1% लोगों का मार्ग

यह खंड बताता है कि 1% सोच को अपनाने का मतलब यह नहीं है कि आप दुनिया से अलग हो जाए। इसका मतलब है कि आप अपनी सोच को साफ कर लें। आपकी सबसे बड़ी लड़ाई बाहर की दुनिया से नहीं होती बल्कि आपके अपने मन से होती है।

पीड़ित और प्रक्रिया: 1% लोगों का दृष्टिकोण

यह खंड बताता है कि 1% सोच वाला इंसान खुद को पीड़ित नहीं मानता। सफलता कोई मंजिल नहीं है। यह एक तरीका है जीने का।

जीत और शब्द: 1% लोगों का सम्मान

यह खंड बताता है कि 1% लोग छोटे जीतों का सम्मान करते हैं। आपकी सोच आपके शब्दों में दिखाई देती है।

दोष और समाधान: 1% लोगों का मार्गदर्शन

यह खंड बताता है कि 1% सोच वाला इंसान दूसरों को दोष देने में समय नहीं गनवाता। वह पूछता है कि इन हालात में मैं क्या कर सकता हूं।

धैर्य और भावनाएं: 1% लोगों का नियंत्रण

यह खंड बताता है कि धैर्य एक शांत शक्ति है। 1% लोग भावनाओं के गुलाम नहीं बनते।

जीवन और बदलाव: 1% लोगों का दृष्टिकोण

यह खंड बताता है कि आप जो बनना चाहते हैं, वैसा अभी जीना शुरू करें। बदलाव बाहर से नहीं आता।

समय और पहचान: 1% लोगों का निर्माण

यह खंड बताता है कि 1% लोग इंतजार नहीं करते कि सही समय आए। वे उपलब्ध समय को ही सही बना लेते हैं। धीरे-धीरे यह सोच आपकी पहचान बन जाती है।

निष्कर्ष: 1% सोच की यात्रा

यह खंड बताता है कि 1% सोच कोई दिखावा नहीं है। यह रोज की जिम्मेदारी है। सवाल यह है कि आप अपनी सोच को कितना ईमानदारी से बदलने को तैयार हैं।

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Transcript

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0:00 हेलो साथियों, सोचिए अगर आपकी जिंदगी वैसे ही चलती रही जैसे अभी चल रही है तो 5 साल बाद आप कहां होंगे? वही जगह, वही परेशानियां, वही शिकायतें या फिर एक बिल्कुल अलग जिंदगी जहां आप खुद फैसले लेते हैं और हालात आपको नहीं चलाते। यही सवाल एक प्रतिशत सोच से शुरुआत करता है। यह उन लोगों की सोच है जो भीड़ के पीछे नहीं चलते बल्कि अपनी राह खुद बनाते हैं। तो 1% माइंडसेट की यह कहानी एक बहुत ही साधारण लेकिन गहरी सच्चाई से शुरू होती है। दुनिया में लगभग हर इंसान मेहनत करता है। हर कोई चाहता है कि उसकी जिंदगी बेहतर हो। फिर भी कुछ लोग बहुत आगे निकल जाते हैं और बाकी लोग पूरी जिंदगी कोशिश करते रहते हैं। यह फर्क हालात से नहीं बनता। यह

0:46 फर्क सोच से बनता है। अक्सर हम मानते हैं कि जो लोग बहुत सफल [संगीत] हैं, उनके पास कुछ एक्स्ट्रा है। ज्यादा पैसा, ज्यादा कनेक्शंस या ज्यादा टैलेंट। लेकिन यह किताब साफ कहती है कि ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता। असली फर्क यह होता है कि वे लोग चीजों को कैसे देखते हैं और फैसले कैसे लेते हैं। द 1% माइंडसेट उन लोगों की सोच है जो भी का हिस्सा नहीं बनते। वे वही नहीं करते जो सब कर रहे हैं। वे वही नहीं सोचते जो सब सोच रहे हैं। वे अपनी जिंदगी के फैसले डर के आधार पर नहीं बल्कि समझ और क्लेरिटी के आधार पर लेते हैं। यह किताब बताती है कि 99% लोग अपनी जिंदगी रिएक्शन में जीते हैं। हालात जैसे आए वैसे ही चल

1:33 दिए। नौकरी मिली तो ठीक नहीं मिली तो किस्मत को दोष दे दिया। पैसा आया तो खर्च कर दिया। नहीं आया तो चिंता कर ली। लेकिन 1% लोग अपनी जिंदगी डिजाइन करते हैं। वे पहले सोचते हैं, फिर कदम उठाते हैं। 1% माइंडसेट वाला इंसान यह नहीं पूछता कि लोग क्या कहेंगे? वह यह पूछता है कि 10 साल बाद इसका असर क्या होगा। वह शॉर्ट टर्म कंफर्ट के बजाय लॉन्ग टर्म ग्रोथ चुनता है। जहां बाकी लोग आज आराम चाहते हैं, वहां यह इंसान आज स्ट्रगल चुनता है ताकि कल फ्रीडम मिले। यह किताब बार-बार एक ही बात समझाती है कि आपकी इनकम आपकी वैल्यू का रिजल्ट है। अगर आपकी सोच छोटी है तो आपकी लाइफ भी छोटी ही रहेगी। द

2:21 1% माइंडसेट हमें यह भी सिखाती है कि सक्सेसफुल लोग मोटिवेशन पर डिपेंड नहीं करते। वे सिस्टम बनाते हैं। वे आदतों पर काम करते हैं। वे रोज छोटे डिसीजंस लेते हैं जो दिखने में मामूली लगते हैं। लेकिन समय के साथ बहुत बीडी रिजल्ट्स देते हैं। यह किताब आपको अमीर बनने का सपना नहीं बेचती। यह आपको जिम्मेदारी लेना सिखाती है। अपनी सोच की जिम्मेदारी, अपने समय की जिम्मेदारी, अपने फ्यूचर की जिम्मेदारी। अगर आपकी सोच यह है कि कोई आपको बचाने आएगा तो आप 99% में ही रहेंगे। लेकिन जिस दिन आप यह मान लेते हैं कि आपकी जिंदगी की पूरी जिम्मेदारी आपकी है, उसी दिन आप एक प्रतिशत माइंडसेट की तरफ पहला कदम रख देते हैं। यही इस किताब की फाउंडेशन है। यहीं

3:07 से असली बदलाव शुरू होता है। द 1% माइंडसेट का सबसे बड़ा फर्क पैसे को लेकर दिखाई देता है। 99% लोग पैसा सिर्फ खर्च करने की चीज मानते हैं। उनके लिए पैसा आया मतलब शॉपिंग आराम और दिखावा। पैसा कम हुआ मतलब स्ट्रेस, डर और कंप्लेंट। उनकी पूरी जिंदगी इसी साइकिल में निकल जाती है। कमाया, खर्च किया फिर दोबारा कमाने की दौड़। लेकिन 1% लोग पैसे को इमोशन से नहीं लॉजिक से देखते हैं। उनके लिए पैसा सिर्फ खर्च करने की चीज नहीं होता बल्कि टूल होता है। एक ऐसा टूल जो फ्रीडम क्रिएट करता है, ऑप्शंस देता है और फ्यूचर सिक्योर करता है। वे पैसा मिलने पर सबसे पहले यह नहीं सोचते कि क्या खरीदें बल्कि

3:53 यह सोचते हैं कि इसे कैसे ग्रो करें। यह किताब बहुत साफ शब्दों में कहती है कि गरीब सोच और अमीर सोच में फर्क सैलरी का नहीं होता। डायरेक्शन का होता है। 99% लोग इनकम बढ़ाने की सोचते हैं। 1% लोग वैल्यू बढ़ाने की सोचते हैं। इनकम अपने आप वैल्यू के पीछे आती है। जब एक नॉर्मल इंसान जॉब करता है तो वह सिर्फ सैलरी पर फोकस करता है। करता है। महीने के अंत में कितने पैसे आए यही उसका गोल होता है। लेकिन 1% माइंडसेट वाला इंसान यह देखता है कि वह मार्केट को क्या दे रहा है। उसकी स्किल कितनी रेयर है। उसकी नॉलेज कितनी यूज़फुल है। वह खुद को रिप्लेसेबल नहीं बनने देता। इस किताब में एक बहुत इंपॉर्टेंट बात

4:38 बार-बार रिपीट होती है। अगर आप इजीली रिप्लेस हो सकते हैं, तो आप कभी फ्री नहीं हो सकते। जब तक आप वही कर रहे हैं जो हर कोई कर सकता है, तब तक आपकी इनकम भी एवरेज ही रहेगी। 1% लोग अपने काम को सिर्फ काम नहीं मानते। वे उसे एसेट बनाते हैं। वे जॉब में भी सीखने पर फोकस करते हैं। वे बिजनेस में भी सिस्टम बनाते हैं। वे फ्रीलांसिंग में भी ब्रांड क्रिएट करते हैं। उनका गोल सिर्फ आज का पैसा नहीं होता बल्कि आने वाले कई सालों में की वैल्यू किसी कीपीसी की की वैल्यू होती है। 99% लोग मेहनत को समय से मेजर करते हैं। 8 घंटे काम किया मतलब मेहनत पूरी। लेकिन 1% लोग मेहनत को रिजल्ट से मेजर करते हैं। वे यह नहीं देखते कि

5:26 कितनी देर काम किया बल्कि यह देखते हैं कि कितना इंपैक्ट क्रिएट हुआ। यह किताब यह भी बताती है कि बिजी रहना प्रोडक्टिव होना नहीं होता। बहुत लोग पूरे दिन बिजी रहते हैं लेकिन लाइफ में आगे नहीं बढ़ते क्योंकि वे रॉन्ग चीजों पर एनर्जी लगा रहे होते हैं। 1% माइंडसेट वाला इंसान पहले डिसाइड करता है कि सबसे इंपॉर्टेंट काम क्या है? फिर उसी पर फोकस करता है। 1% लोग हर काम खुद करने की कोशिश नहीं करते। वे डेलीगेशन सीखते हैं, ऑटोमेशन सीखते हैं, सिस्टम बनाते हैं। उन्हें ईगो नहीं होता कि सब कुछ वही करें। उन्हें क्लेरिटी होती है कि उनका टाइम सबसे वैलएबल रिसोर्स है। 99% लोग पैसे के पीछे भागते हैं। 1% लोग

6:12 ओपोरर्चुनिटी क्रिएट करते हैं। वे प्रॉब्लम ढूंढते हैं। जहां प्रॉब्लम होती है, वहीं वैल्यू क्रिएट होती है और जहां वैल्यू होती है, वहीं पैसा आता है। यह किताब यह भी सिखाती है कि 1% लोग पैसे के पीछे भागते हैं। लोग रिस्क को अवॉइड नहीं करते बल्कि कैलकुलेट करते हैं। वे ब्लाइंड जंप नहीं लेते [संगीत] लेकिन डर कर रुकते भी नहीं। वे डाटा देखते हैं, एक्सपीरियंस सीखते हैं और फिर एक्शन लेते हैं। फेलियर को लेकर भी माइंडसेट का फर्क बहुत बड़ा है। 99% लोग फेलियर को एंड मानते हैं। एक बार हार गए तो खुद को इनके कैपेबल मान लेते हैं। लेकिन 1% लोग फेलियर को फीडबैक मानते हैं। उनके लिए फेलियर यह बताता है कि क्या काम नहीं किया और क्या इंप्रूव

6:58 करना है। इस किताब में साफ लिखा है कि अगर आप फेलियर से डरते हैं तो आप ग्रोथ से भी डरते हैं क्योंकि दोनों साथ चलते हैं। कोई भी बड़ा रिजल्ट बिना मिस्टेक्स के नहीं आता। 1% माइंडसेट वाला इंसान अप्रूवल का भूखा नहीं होता। उसे सबका वैलिडेशन नहीं चाहिए। वह जानता है कि अगर आप सही रास्ते पर हैं तो शुरुआत में लोग आपको समझेंगे नहीं। लोग मजाक बनाएंगे। लोग डिसरेज करेंगे। लेकिन वह डायरेक्शन नहीं बदलता। यह किताब बताती है कि कंफर्ट और ग्रोथ एक साथ नहीं चल सकते। अगर आप आज बहुत आराम चुनते हैं तो कल [संगीत] स्ट्रगल आपकी चॉइस नहीं रहेगा। लेकिन अगर आप आज स्ट्रगल चुनते हैं तो कल कंफर्ट आपकी चॉइस बन सकता है। 1% लोग सुबह उठकर फोन स्क्रॉल नहीं

7:44 करते। वे दिन को इंटेंशनली स्टार्ट करते हैं। वे जानते हैं कि डे की शुरुआत ही डे का डायरेक्शन डिसाइड करती है। वे अपने माइंड को जंग से नहीं भरते। वे रैंडम कंटेंट कंज्यूम नहीं करते। वे वही पढ़ते हैं, वही देखते हैं, वही सुनते हैं जो उनकी सोच को मजबूत बनाए। यह किताब रिस्पांसिबिलिटी पर बहुत जोर देती है। 1% माइंडसेट का कोर यही है। कोई ब्लेम नहीं, कोई एक्सक्यूज नहीं। अगर लाइफ जैसी है वैसी आपको पसंद नहीं है, तो उसे बदलने की जिम्मेदारी भी आपकी है। जब तक आप पेरेंट्स सिस्टम, गवर्नमेंट लक को ब्लेम करते रहेंगे तब तक आप पावरलेस ही रहेंगे। जिस दिन आप यह मान लेते हैं कि आपकी हर हालत की जिम्मेदारी आपकी है, उसी दिन आप पावरफुल बनते हैं। यह किताब आपको शॉर्टकट

8:32 नहीं सिखाती। यह पैट सिखाती है। प्रोसेस पर भरोसा करना सिखाती है। डेली बोरिंग डिसिप्लिन को रिस्पेक्ट करना सिखाती है। 1% लोग मोटिवेशन का इंतजार नहीं करते। वे डिसिप्लिन पर चलते हैं। उन्हें पता है कि मोटिवेशन आएगा जैसलता हुआ जाएगा लेकिन हैबिट साथ निभाती है। वे रोज वही काम करते हैं जो उन्हें लॉन्ग टर्म में आगे ले जाए। चाहे मूड हो या ना हो। यह माइंडसेट ओवरनाइट नहीं बनता। यह रोज के छोटे डिसीजन से बनता है। आप क्या देखते हैं? आप किन लोगों के साथ रहते हैं? आप अपना समय कैसे स्पेंड करते हैं? यही सब मिलकर आपकी आइडेंटिटी बनाते हैं? 1% सोच वाले लोग रोज की आदतों को बहुत [संगीत] गंभीरता से लेते

9:18 हैं। वे जानते हैं कि बड़ी सफलता अचानक नहीं आती। वह रोज के छोटे फैसलों से बनती है। 99% लोग तब बदलना चाहते हैं जब हालात बहुत खराब हो जाते हैं। लेकिन 1% लोग तब बदलते हैं जब हालात सामान्य होते हैं। यही फर्क उन्हें आगे ले जाता है। यह किताब बताती है कि आपकी सुबह कैसी होती है। वही आपकी जिंदगी की दिशा तय करती है। जो इंसान सुबह उठते ही मोबाइल देखता है, वह अपनी सोच दूसरों के हाथ में दे देता है। लेकिन 1% सोच वाला इंसान सुबह अपने दिमाग 100% लगाता है। को शांत रखता है। वह दिन की शुरुआत सोच समझकर करता है। वह तय करता है कि आज उसे क्या करना है और क्या नहीं करना है। 1% लोग हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं

10:04 देते। वे रुकते हैं, सोचते हैं, फिर जवाब देते हैं। 99% लोग छोटी-छोटी बातों पर भावुक हो जाते हैं। गुस्सा चिंता डर यही उनकी ऊर्जा खा जाता है। लेकिन 1% लोग अपनी ऊर्जा बचाकर रखते हैं। वे जानते हैं कि ऊर्जा ही उनकी असली पूंजी है। यह किताब साफ कहती है कि ध्यान भटकना आज के समय की सबसे बड़ी बीमारी है। लोग घंटों बिना मतलब की चीजों में समय बर्बाद कर देते हैं। फिर कहते हैं कि समय नहीं है। 1% लोग अपने समय की रक्षा करते हैं। वे हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं होते। वे जरूरी काम के लिए ही समय निकालते हैं। 1% सोच वाला इंसान हर किसी को खुश करने की कोशिश नहीं करता। वह जानता है कि अगर वह सबको खुश करेगा तो खुद

10:51 को खो देगा। वह सीमाएं बनाता है। वह जरूरत पड़ने पर मना करना सीखता है। यही उसे मजबूत बनाता है। यह किताब यह भी सिखाती है कि माहौल बहुत असर डालता है। जिन लोगों के साथ आप रहते हैं, उनकी सोच धीरे-धीरे आपकी सोच बन जाती है। अगर आप हर समय शिकायत करने वालों के बीच रहेंगे तो आप भी वही सीखेंगे। लेकिन अगर आप आगे बढ़ने की सोच रखने वालों के साथ रहेंगे तो आपकी सोच भी बदलने लगेगी। 1% लोग भीड़ का हिस्सा नहीं बनते। वे गलत जगह अकेले रहना पसंद करते हैं बजाय सही दिखने के लिए गलत लोगों के साथ रहने के। वे जानते हैं कि अकेलापन अस्थाई होता है। लेकिन गलत संगत का नुकसान लंबे समय तक रहता है। यह किताब बताती है कि 1% लोग लंबे खेल पर भरोसा करते हैं। वे

11:37 जल्दी परिणाम नहीं चाहते। वे आज मेहनत करते हैं ताकि कई साल बाद उसका फल मिले। 99% लोग तुरंत फायदा चाहते हैं और जब तुरंत कुछ नहीं मिलता तो वे हार मान लेते हैं। 1% सोच वाला इंसान जानता है कि जिंदगी कोई दौड़ नहीं है जिसे जल्दी खत्म करना हो। यह एक लंबी यात्रा है [संगीत] जिसमें धैर्य सबसे जरूरी होता है। वह रोज थोड़ा-थोड़ा बेहतर बनने पर ध्यान देता है। वे अपने शरीर का भी ख्याल रखते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि कमजोर शरीर में मजबूत सोच नहीं रह सकती। वे खानेपीने और आराम को हल्के में नहीं लेते। यह सब उनके अनुशासन का हिस्सा होता है। यह किताब यह भी बताती है कि 1% लोग सीखना कभी बंद नहीं करते। वे खुद को पूरा नहीं मानते। उन्हें

12:24 पता है कि दुनिया हर दिन बदल रही है और अगर वे नहीं बदले तो पीछे रह जाएंगे। वे नए विचारों को अपनाते हैं और पुराने घमंड को छोड़ देते हैं। 1% लोग खुद से झूठ नहीं बोलते। वे अपनी कमियों को पहचानते हैं। वे बहाने नहीं बनाते। वे खुद को सही साबित करने से ज्यादा खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं। जब मुश्किल समय आता है तो 99% लोग टूट जाते हैं। वे कहते हैं कि अब बस हो गया। लेकिन 1% लोग उसी समय सबसे ज्यादा मजबूत बनते हैं। वे जानते हैं कि कठिन समय ही असली परीक्षा होता है। यह किताब कहती है कि अगर आपकी जिंदगी में दर्द नहीं है तो शायद आप बढ़ नहीं रहे क्योंकि हर विकास के साथ असुविधा आती है। 1% लोग इस असुविधा से भागते नहीं बल्कि

13:09 इसे स्वीकार करते हैं। वे अपनी पहचान हालात से नहीं बनाते। आज हार गए तो खुद को हारा हुआ नहीं मानते। आज सफल हुए तो खुद को महान नहीं मानते। वे संतुलन में रहते हैं। 1% सोच का सबसे बड़ा नियम यही है कि आप अपनी जिंदगी के मालिक खुद बने। कोई और आपकी सोच तय ना करें। कोई और आपकी दिशा तय ना करें। आप खुद जिम्मेदारी लें और खुद रास्ता बनाएं। यह किताब बार-बार यही समझाती है कि जब आप अपनी सोच बदलते हैं तब आपकी आदतें बदलती हैं। जब आदतें बदलती हैं तब आपके फैसले बदलते हैं और जब फैसले बदलते हैं तब आपकी पूरी जिंदगी बदल जाती है। यहीं पर एक प्रतिशत सोच पूरी तरह साफ हो जाती है। यह कोई जादू नहीं है। यह कोई

13:57 एक दिन का बदलाव नहीं है। यह रोज का चुनाव है। हर दिन सही चुनाव करने का साहस। 1% सोच वाला इंसान हमेशा अपने मन को साफ रखने की कोशिश करता है। वह जानता है कि अगर मन उलझा रहेगा तो फैसले भी गलत होंगे। इसलिए वह बेकार की बहसों से दूर रहता है। वह हर बात पर अपनी राय देने की जरूरत महसूस नहीं करता। वह शांति को कमजोरी नहीं बल्कि ताकत मानता है। यह किताब बताती है कि आत्मनियंत्रण एक बहुत बड़ी शक्ति है। 99% लोग अपनी इच्छाओं के गुलाम होते हैं। जो मन किया वही कर लिया। जो अच्छा लगा वही खा लिया। जो आसान लगा वही चुन लिया। लेकिन 1% लोग अपने मन के मालिक होते हैं। वे जानते

14:45 हैं कि आज जो अच्छा लग रहा है वही हमेशा सही नहीं होता। 1% सोच वाला इंसान अपने लक्ष्य को रोज याद करता है। वह इसे कागज पर लिखता है। वह इसे मन में दोहराता है। क्योंकि उसे पता है कि जो चीज रोज दिमाग में रहती है, वही जिंदगी में आकार लेती है। 99% लोग लक्ष्य बनाते हैं और फिर भूल जाते हैं। 1% लोग लक्ष्य के साथ जीते हैं। यह किताब यह भी कहती है कि डर कोई दुश्मन नहीं है। डर सिर्फ संकेत है। संकेत कि आप कुछ नया करने जा रहे हैं। 99% लोग डर को देखकर रुक जाते हैं। लेकिन 1% लोग डर [संगीत] को देखकर समझ जाते हैं कि यही रास्ता आगे ले जाएगा। 1% सोच वाला

15:32 इंसान तुलना में नहीं जीता। वह दूसरों की जिंदगी देखकर चलता नहीं। वह अपनी गति पर चलता है। वह जानता है कि हर इंसान की यात्रा अलग होती है। तुलना सिर्फ मन को कमजोर बनाती है और ध्यान को तोड़ती है। यह किताब बताती है कि अनुशासन का मतलब कठोर होना नहीं है। अनुशासन का मतलब है खुद से किया हुआ वादा निभाना। जब आप खुद से किए वादे तोड़ते हैं तो आत्मसम्मान गिरता है और जब आत्मसम्मान गिरता है तो सोच भी कमजोर हो जाती है। 1% लोग अपनी असफलताओं को छुपाते नहीं। वे उनसे सीखते हैं। वे उन्हें अपने अनुभव का हिस्सा बनाते हैं। वे जानते हैं कि गिरना गलत नहीं है। गिरकर ना उठना गलत है। यह किताब यह भी सिखाती है

16:19 कि समय सबके पास बराबर होता है। लेकिन उपयोग सब अलग-अलग करते हैं। 99% लोग समय काटते हैं। 1% लोग समय लगाते हैं। वे हर दिन कुछ ऐसा करते हैं जो आने वाले कल को बेहतर बनाए। 1% सोच वाला इंसान आज के फैसले कल के असर से जोड़कर देखता है। वह यह नहीं पूछता कि आज क्या मिलेगा। वह यह पूछता है कि इससे मेरा भविष्य कैसा बनेगा। यही सोच उसे भीड़ से अलग करती है। यह किताब यह भी बताती है कि अकेले चलना कभी-कभी जरूरी होता है। जब आप सही रास्ते पर होते हैं तो शुरुआत में साथ कम लोग देते हैं। [संगीत] लेकिन 1% लोग भीड़ की मंजूरी का इंतजार नहीं करते। वे सही को चुनते हैं। चाहे वह कठिन ही क्यों ना हो।

17:06 1% सोच का एक और बड़ा नियम है कि सीखना कभी बंद मत करो। जैसे ही आप सोचते हैं कि आपको सब कुछ आ गया है, वहीं से गिरावट शुरू हो जाती है। विनम्रता सीखने का दरवाजा खोलती है। यह किताब समझाती है कि आपकी पहचान आपके परिणाम से नहीं बल्कि आपकी कोशिश से बनती है। अगर आप पूरी ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं तो आप पहले ही सही रास्ते पर हैं। 1% सोच वाला इंसान अपनी जिंदगी को टालता नहीं। वह यह नहीं कहता कि बाद में करेंगे। वह जानता है कि बाद में अक्सर कभी नहीं आता। वह आज छोटा कदम उठाता है। धीरे-धीरे यह सोच उसकी आदत बन जाती है और आदत उसकी पहचान बन जाती है और पहचान उसकी जिंदगी। यह किताब का सार

17:53 यही है कि आप खास बनने के लिए पैदा नहीं हुए। आप अपने फैसलों से खास बनते हैं। हर दिन आपको चुनाव करना होता है कि आप 99% में रहेंगे या 1% में। यह चुनाव आसान नहीं होता। लेकिन यही चुनाव आपकी पूरी जिंदगी बदल देता है। यहीं पर यह कहानी पूरी होती है। लेकिन असली शुरुआत आपकी है। 1% सोच वाला इंसान यह भी समझता है कि हर दिन एक जैसा नहीं होता। कुछ दिन भारी होते हैं। मन नहीं करता। शरीर थका होता है। लेकिन वही दिन असली परीक्षा होते हैं। 99% लोग ऐसे दिनों में रुक जाते हैं। 1% लोग ऐसे दिनों में भी आगे बढ़ते हैं। यह किताब बताती है कि निरंतरता ही असली ताकत है।

18:40 तेज शुरुआत करना आसान है। लेकिन लंबे समय तक टिके रहना मुश्किल है। 1% लोग चमकने पर ध्यान नहीं देते। वे टिके रहने पर ध्यान देते हैं। 1% सोच वाला इंसान अपनी प्रगति को दूसरों से नहीं नापता। वह खुद से पूछता है कि क्या मैं कल से बेहतर हूं? यही सवाल उसे सही दिशा में रखता है। यह किताब यह भी सिखाती है कि खुद के साथ ईमानदार होना बहुत जरूरी है। खुद से झूठ बोलना सबसे आसान होता है। लेकिन वही सबसे खतरनाक भी होता है। 1% लोग अपनी कमियों को स्वीकार करते हैं क्योंकि स्वीकार करना ही सुधार की शुरुआत है। 1% लोग हर दिन अपने मन को प्रशिक्षित करते हैं। जैसे शरीर को मजबूत करने के लिए व्यायाम चाहिए। वैसे ही मन को

19:27 मजबूत करने के लिए सही सोच चाहिए। वे बार-बार खुद को याद दिलाते हैं कि क्यों शुरू किया था। यह किताब यह भी बताती है कि स्पष्टता आत्मविश्वास को जन्म देती है। जब आपको पता होता है कि आपको क्या चाहिए तब आप इधर-उधर नहीं भटकते। 1% लोग अपने लक्ष्य को धुंधला नहीं होने देते। 1% सोच वाला इंसान कठिन निर्णयों से नहीं भागता। वह जानता है कि आसान निर्णय आज आराम देते हैं। लेकिन कठिन निर्णय कल आजादी देते हैं। यह किताब यह भी सिखाती है कि ध्यान बंटा हुआ दिमाग कभी बड़ा काम नहीं कर सकता। इसलिए 1% लोग एक समय में एक ही काम करते हैं। वे अधूरा नहीं छोड़ते। 1% लोग आलोचना से टूटते नहीं। वे उसमें सच्चाई

20:15 ढूंढते हैं। अगर आलोचना सही है तो वे सुधार करते हैं। अगर गलत है तो उसे छोड़ देते हैं। यह किताब बताती है कि असफलता और सफलता दोनों ही अस्थाई हैं। जो इंसान सफलता में बहक जाता है, वह गिरता जरूर [संगीत] है और जो इंसान असफलता में टूट जाता है, वह उठ नहीं पाता। 1% लोग संतुलन बनाए रखते हैं। 1% सोच वाला इंसान अपनी ऊर्जा सही जगह लगाता है। वह उन चीजों पर समय नहीं गनाता जिन्हें [संगीत] वह बदल नहीं सकता। वह उन्हीं चीजों पर काम करता है जिन पर उसका नियंत्रण है। यह किताब यह भी कहती है कि आत्मसम्मान चुपचाप बनता [संगीत] है। यह दिखावे से नहीं आता। जब आप रोज खुद से किया वादा निभाते हैं तब

21:00 आत्मसम्मान मजबूत होता है। 1% लोग भविष्य को लेकर डरते नहीं। वे तैयारी करते हैं। डर उन्हें रोकता नहीं बल्कि सतर्क बनाता है। यह सोच धीरे-धीरे इंसान को भीतर से मजबूत बना देती है। बाहरी हालात बदले या ना बदले कि उसकी स्थिरता बनी रहती है। 1% सोच वाला इंसान यह भी जानता है कि हर इंसान के अंदर दो आवाजें होती हैं। एक आवाज कहती है रुक जाओ आसान रास्ता चुनो। आज [संगीत] नहीं कल कर लेना। दूसरी आवाज कहती है, आगे बढ़ो। डर के बावजूद कदम उठाओ। 99% लोग पहली आवाज की सुनते हैं। 1% लोग दूसरी आवाज को चुनते हैं। यही चुनाव

21:47 उनकी दिशा तय करता है। यह किताब बताती है कि मन को प्रशिक्षित किए बिना कोई भी बड़ा बदलाव संभव नहीं है। मन अगर कमजोर है तो हालात थोड़े से भी भारी हुए तो इंसान टूट जाता है। लेकिन अगर मन मजबूत है तो हालात चाहे जैसे हो इंसान रास्ता निकाल ही [संगीत] लेता है। 1% लोग हालात को दोष नहीं देते। वे खुद को तैयार करते हैं। एक सोच वाला इंसान यह स्वीकार करता है कि हर छा नहीं जाएगा। कुछ दिन ऐसे होंगे जब मेहनत का कोई फल नहीं दिखेगा। लेकिन वह यह नहीं मानता कि मेहनत बेकार गई। वह जानता है कि हर प्रयास कहीं ना कहीं जुड़ रहा है। जैसे बीज जमीन के नीचे काम करता रहता है, ऐसे ही मेहनत ही दिखे बिना असर करती

22:32 रहती है। यह किताब यह भी सिखाती है कि धैर्य कोई कमजोरी नहीं है। धैर्य वह शक्ति है जो इंसान को जल्दबाजी से बचाती है। 99% लोग जल्दी नतीजे चाहते हैं। और जब नतीजे नहीं आते तो दिशा बदल देते हैं। 1% लोग दिशा नहीं बदलते। वे खुद को मजबूत बनाते रहते हैं। 1% सोच वाला इंसान अपने अतीत को बोझ नहीं बनाता। वह उससे सीखता है। वह जानता है कि जो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता। लेकिन उससे मिली समझ आगे के फैसलों को बेहतर [संगीत] बना सकती है। वह पछतावे में समय नहीं गनाता। यह किताब बताती है कि हर इंसान के जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब उसे अकेले फैसला लेना पड़ता है। उस समय ना सलाह होती है ना समर्थन। वही समय 1% सोच

23:22 को जन्म की डर अक्सर उस रास्ते पर होता है जहां विकास छुपा होता है। यह किताब यह भी सिखाती है कि स्थिरता बाहर से नहीं आती। वह अंदर से आती है। जब इंसान अपने सिद्धांतों पर टिक [संगीत] जाता है तब कोई भी तूफान उसे हिला नहीं पाता। 1% लोग अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेते हैं। अगर फैसला गलत हुआ तो वे भागते नहीं। वे सुधार करते हैं। वे सीखते हैं। यह सोच धीरे-धीरे इंसान को स्पष्ट बनाती है। 1% सोच को अपनाने का मतलब यह नहीं है कि आप दुनिया से अलग हो जाए। इसका मतलब है कि आप अपनी सोच को साफ कर लें। आप तय कर लें कि आप किस दिशा में जाना चाहते हैं। जब दिशा साफ होती है तो रास्ते अपने आप दिखने लगते हैं। यह किताब सिखाती है कि आपकी सबसे

24:09 बड़ी लड़ाई बाहर की दुनिया से नहीं होती बल्कि आपके अपने मन से होती है। आलस, डर, शंका और भ्रम यही चार दीवारें हैं जो इंसान को आगे बढ़ने से रोकती हैं। 1% लोग इन दीवारों को गिराने पर रोज काम करते हैं। वे जानते हैं कि मन हमेशा आसान रास्ता चुनेगा। लेकिन विकास हमेशा कठिन रास्ते से आता है। इसलिए वे खुद को बार-बार असुविधा में डालते हैं। यही असुविधा उन्हें मजबूत बनाती है। 1% सोच वाला इंसान खुद को पीड़ित नहीं मानता। उसके साथ चाहे कुछ भी हुआ हो, वह वहीं अटक कर नहीं बैठता। वह मानता है कि अतीत बदला नहीं जा सकता लेकिन भविष्य उसके हाथ में है। यही सोच उसे आगे बढ़ने की ताकत देती है। यह किताब बार-बार याद दिलाती है कि

24:56 सफलता कोई मंजिल नहीं है। यह एक तरीका है जीने का। अगर आप सिर्फ मंजिल पर ध्यान देंगे तो रास्ते में थक जाएंगे। लेकिन अगर आप प्रक्रिया से प्यार करना सीख लेंगे तो सफर खुद आनंद बन जाएगा। 1% लोग छोटे जीतों का सम्मान करते हैं। वे हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। वे यह नहीं सोचते कि उन्हें सब कुछ एक साथ बदलना है। [संगीत] वे जानते हैं कि बड़ा बदलाव छोटे कदमों से ही आता है। यह किताब यह भी बताती है कि आपकी सोच आपके शब्दों में दिखाई देती है। जो इंसान हर समय शिकायत करता है, वह अंदर से हार चुका होता है। 1% लोग अपने शब्दों को संभालकर बोलते हैं। वे जानते हैं कि शब्द सोच को मजबूत या कमजोर दोनों बना सकते हैं। 1%

25:41 सोच वाला इंसान दूसरों को दोष देने में समय नहीं गनवाता। वह यह नहीं कहता कि हालात खराब थे इसलिए मैं नहीं कर पाया। वह पूछता है कि इन हालात में मैं क्या कर सकता हूं। यही प्रश्न उसे समाधान की ओर ले जाता है। यह किताब यह भी समझाती है कि धैर्य एक शांत शक्ति है। जो इंसान जल्दी गुस्सा हो जाता है, वह जल्दी टूट भी जाता है। 1% लोग भावनाओं के गुलाम नहीं बनते। वे भावनाओं को समझते हैं और फिर निर्णय लेते हैं। 1% सोच का एक गहरा नियम यह भी है कि आप जो बनना चाहते हैं, वैसा अब भी जीना शुरू करें। अगर आप मजबूत बनना चाहते हैं तो अभी मजबूत फैसले लें। अगर आप अनुशासित बनना चाहते हैं तो अभी अनुशासन अपनाएं। यह किताब बताती है कि बदलाव बाहर

26:29 से नहीं आता। कोई किताब, कोई व्यक्ति, कोई परिस्थिति आपको नहीं बदल सकती जब तक आप खुद तैयार ना हो। लेकिन जब आप तैयार हो जाते हैं तो छोटी सी बात भी आपकी जिंदगी बदल सकती है। 1% लोग इंतजार नहीं करते कि सही समय आए। वे जानते हैं कि सही समय कभी नहीं आता। वे उपलब्ध समय को ही सही बना लेते हैं। धीरे-धीरे यह सोच आपकी पहचान बन जाती है। आप वही नहीं रहते जो पहले थे। आप शांत हो जाते हैं, स्पष्ट हो जाते हैं। मजबूत हो जाते हैं। अगर आप यहां तक पहुंचे हैं तो इसका मतलब है कि आपके अंदर भी कुछ बदलना चाहता है। यह सफर बाहर की दुनिया से नहीं बल्कि आपके अंदर से शुरू होता है। 1%

27:16 सोच कोई दिखावा नहीं है। यह रोज की जिम्मेदारी है। अब सवाल यह नहीं है कि दुनिया कैसी है? सवाल यह है कि आप अपनी सोच को कितना ईमानदारी से बदलने को तैयार हैं। यहीं से आपकी असली यात्रा शुरू होती है। अगर यह बात आपको सोचने पर मजबूर कर गई हो तो यहीं मत रुकिए। इसे अपनी जिंदगी में उतार कर देखिए। वीडियो अच्छा लगा हो तो इसे आगे पहुंचाइए ताकि सही सोच सही लोगों तक पहुंचे और ऐसे ही गहरे विचारों के लिए टॉप बुक समरी चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए। धन्यवाद।

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