0:00 हेलो साथियों, स्वागत है टॉप बुक समरी के इस YouTube चैनल में। आप जरा अपने जीवन को ईमानदारी से देखिए और यह सोचिए कि क्या आप वही सोच रहे हैं जो ज्यादातर लोग सोचते हैं? या फिर आप उन गिनेचुने लोगों की तरह सोचने की कोशिश कर रहे हैं जो हर फील्ड में सबसे ऊपर पहुंचते हैं। प्रायन्रेसी इस बुक की शुरुआत इसी पावरफुल थॉट से करते हैं और साफ कहते हैं कि दुनिया में सबसे बड़ा फर्क इंटेलिजेंस या रिसोर्सेज से नहीं बल्कि थिंकिंग लेवल से पड़ता है। टॉप 10% लोग कोई जादू नहीं करते बल्कि वे अपने दिमाग को ट्रेन कर लेते हैं कि हर सिचुएशन में सही सवाल पूछें। सही डिसीजन लें और लॉन्ग टर्म रिजल्ट पर फोकस करें। लेखक समझाते हैं कि इंसान का दिमाग एक गोल
0:47 सीकिंग मशीन की तरह काम करता है। अगर आप इसे बड़े क्लियर गोल्स दे देते हैं तो यह अपने आप सशंस ढूंढने लगता है। और अगर गोल्स वेग हो तो रिजल्ट्स भी वेग ही मिलते हैं। इसलिए टॉप लेवल थिंकिंग की पहली पहचान यह है कि व्यक्ति को यह साफ पता होता है कि उसे क्या चाहिए और क्यों चाहिए। ब्रायन ट्रेसी इस बुक में बार-बार यह बात दोहराते हैं कि एवरेज लोग रिएशंस में जीते हैं। जबकि टॉप 10% लोग रिस्पांस में जीते हैं। रिएक्शन मतलब बिना सोचे समझे हालात के हिसाब से बिहेव करना और रिस्पांस मतलब सिचुएशन को समझकर सोच समझकर एक्शन लेना। लेखक बताते हैं कि टॉप थिंकर्स इमोशंस के गुलाम नहीं होते। वे
1:33 अपने इमोशंस को मैनेज करना सीख लेते हैं और यही स्किल उन्हें प्रेशर में भी सही फैसला लेने में मदद करती है। इस बुक के अनुसार जब आप अपने इमोशंस पर कंट्रोल पा लेते हैं तभी आप अपने लाइफ पर कंट्रोल पाते हैं। क्योंकि ज्यादातर गलत फैसले फियर, डाउट और कंफ्यूजन से पैदा होते हैं। और टॉप लेवल थिंकिंग इन तीनों से ऊपर उठकर क्लेरिटी की तरफ ले जाती है। इस पुस्तक में एक बहुत इंपॉर्टेंट कांसेप्ट बताया गया है जिसे ब्रायन ट्रेसी कहते हैं। रिस्पांसिबिलिटी प्रिंसिपल। इसका मतलब यह है कि टॉप 10% लोग अपनी लाइफ में होने वाली हर चीज की जिम्मेदारी खुद लेते हैं। वे पेरेंट्स, सोसाइटी बॉस या सिस्टम को ब्लेम नहीं करते। बल्कि यह मानते हैं कि अगर रिजल्ट अच्छा नहीं है तो कहीं ना कहीं
2:21 डिसीजन या एक्शन में कमी रही है। यह सोच इनिशियली थोड़ी अनकंफर्टेबल लगती है। लेकिन यही सोच इंसान को पावरफुल बनाती है। क्योंकि जिस दिन आप जिम्मेदारी लेना शुरू करते हैं, उसी दिन आप एक्सक्यूसेस देना बंद कर देते हैं और एक्सक्यूसेस खत्म होते ही ग्रोथ शुरू हो जाती है। लेखक साफ शब्दों में कहते हैं कि सक्सेस का रास्ता सेल्फ रिस्पांसिबिलिटी से होकर गुजरता है और जो लोग इस रास्ते को अपनाते हैं वही लॉन्ग टर्म में टॉप कैटेगोरी में पहुंचते हैं। ब्रायन ट्रेसी यह भी बताते हैं कि टॉप थिंकर्स हमेशा फ्यूचर ओरिएंटेड होते हैं। वे प्रेजेंट में रहकर फ्यूचर की प्लानिंग करते हैं। वे शॉर्ट टर्म प्लेजर के लिए लॉन्ग टर्म गोल्स को सैक्रिफाइस नहीं करते। इस बुक में टाइम मैनेजमेंट को
3:07 थिंकिंग मैनेजमेंट से जोड़ा गया है। क्योंकि लेखक के अनुसार आप टाइम को तभी सही तरीके से यूज कर सकते हैं जब आपकी थिंकिंग क्लियर हो। टॉप 10% लोग हर दिन खुद से यह सवाल पूछते हैं कि अगर आज का दिन बहुत इंपॉर्टेंट है तो मुझे क्या करना चाहिए? और वही काम वे सबसे पहले करते हैं। यह हैबिट उन्हें धीरे-धीरे एक्स्ट्राऑर्डिनरी रिजल्ट्स तक पहुंचा देती है। क्योंकि कंसिस्टेंसी के साथ सही एक्शंस लेने से ही बड़ा डिफरेंस क्रिएट होता है। यह पूरी बुक असल में आपको यह सिखाने की कोशिश करती है कि आप अपने दिमाग को कैसे रिप्रोग्राम करें ताकि आपकी सोच एवरेज से निकलकर टॉप लेवल तक पहुंच सके। ब्रायन ट्रेसी यह मानते हैं कि इंसान की सबसे बड़ी संपत्ति उसकी सोच है और अगर सोच बदल दी जाए तो हालात अपने आप बदलने लगते
3:55 हैं। यह समरी यहीं रुकती नहीं बल्कि आगे यह बुक गोल सेटिंग, सेल्फ डिसिप्लिन, डिसीजन मेकिंग, फोकस, कॉन्फिडेंस और कंटीन्यूअस लर्निंग जैसे टॉपिक्स को और गहराई से एक्सप्लेन करती है। ब्रायन ट्रेसी आगे बताते हैं कि टॉप 10% सोच रखने वाले लोग अपने गोल्स को सिर्फ सपने की तरह नहीं देखते बल्कि उन्हें क्लियर रिटन फॉर्म में डिफाइन करते हैं। इस बुक के अनुसार गोल सेटिंग एक सिंपल एक्सरसाइज नहीं बल्कि सोच को शेप देने की प्रोसेस है। जब आप अपने गोल्स को साफ शब्दों में लिखते हैं तो आपका दिमाग उन्हें रियल मानना शुरू कर देता है। और फिर उसी डायरेक्शन में आपको आइडियाज, अपोरर्चुनिटीज और करज मिलने लगती है। लेखक कहते हैं कि औसत लोग वैग विश रखते
4:40 हैं। जैसे अच्छा जीवन, अच्छा करियर या ज्यादा पैसा जबकि टॉप थिंकर्स एग्जैक्ट फिगर्स, एग्जैक्ट टाइमलाइंस और एग्जैक्ट एक्शंस के साथ गोल्स बनाते हैं। यही क्लेरिटी उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है। क्योंकि क्लियर गोल वाला इंसान रास्ता भटकता नहीं है और अगर भटक भी जाए तो जल्दी वापस आ जाता है। ब्रायन ट्रेसी इस बुक में सेल्फ डिसिप्लिन को टॉप लेवल थिंकिंग की बैकबोन बताते हैं। उनके अनुसार टैलेंट इंटेलिजेंस और लक से ज्यादा पावरफुल चीज सेल्फ डिसिप्लिन है। क्योंकि यही वह क्वालिटी है जो आपको सही काम तब भी करने के लिए मजबूर करती है जब मन नहीं करता। टॉप 10% लोग मोटिवेशन का इंतजार नहीं करते बल्कि डिसिप्लिन से काम करते हैं। वे
5:27 जानते हैं कि फीलिंग्स टेंपरेरी होती हैं, लेकिन हैबिट्स परमानेंट रिजल्ट देती हैं। लेखक यह समझाते हैं कि हर बार जब आप कंफर्ट छोड़कर जरूरी काम करते हैं, तो आपकी थिंकिंग स्ट्रांग होती जाती है और धीरे-धीरे वही बिहेवियर आपकी पहचान बन जाता है। यही कारण है कि टॉप थिंकर्स प्रेशर में भी कंसिस्टेंट रहते हैं और यही कंसिस्टेंसी उन्हें लॉन्ग टर्म सक्सेस तक ले जाती है। इस बुक में डिसीजन मेकिंग पर भी गहरा फोकस दिया गया है। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि आपकी लाइफ की क्वालिटी आपके डिसीजंस की क्वालिटी पर डिपेंड करती है। एवरेज लोग डिसीजंस टालते रहते हैं या दूसरों पर छोड़ देते हैं। जबकि टॉप 10% लोग जल्दी डिसीजन लेते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुधार भी लेते हैं। वे परफेक्ट
6:13 मोमेंट का इंतजार नहीं करते बल्कि अवेलेबल इंफॉर्मेशन के साथ बेस्ट पॉसिबल डिसीजन लेते हैं और फिर पूरी एनर्जी के साथ उस पर काम करते हैं। लेखक यह भी बताते हैं कि गलत डिसीजन लेना उतना नुकसानदायक नहीं होता जितना डिसीजन ना लेना क्योंकि इन डिसीजन इंसान को मेंटली कमजोर बना देता है और उसकी थिंकिंग स्लो कर देता है। ब्रायन ट्रेसी आगे बताते हैं कि टॉप थिंकर्स कंटीन्यूअस लर्निंग को कभी नहीं छोड़ते। वे मानते हैं कि सीखना कभी खत्म नहीं होता। इस बुक के अनुसार हर दिन थोड़ा सा सीखना लॉन्ग टर्म में मैसिव एडवांटेज देता है। टॉप 10% लोग बुक्स, ऑडियो प्रोग्राम्स, मेंटर्स और एक्सपीरियंसेस से लगातार सीखते रहते हैं। वे यह नहीं मानते कि उन्हें सब कुछ आता है बल्कि वे हमेशा बेहतर बनने की सोच रखते हैं। यही हंबल
7:01 माइंडसेट उन्हें ग्रो करने में मदद करता है। लेखक कहते हैं कि अगर आप हर साल अपनी स्किल्स इंप्रूव कर लेते हैं तो कुछ ही सालों में आप ऑटोमेटिकली टॉप कैटेगरी में पहुंच जाते हैं। क्योंकि कंपटीशन ज्यादातर लोग खुद पर काम करना ही छोड़ देते हैं। इस पुस्तक में कॉन्फिडेंस को भी सोच का डायरेक्ट रिजल्ट बताया गया है। ब्रायन ट्रेसी के अनुसार कॉन्फिडेंस बाहर से नहीं आता बल्कि प्रिपरेशन क्लेरिटी और एक्शन से बनता है। जब आप जानते हैं कि आपको क्या करना है और आप उस पर रोज एक्शन लेते हैं तो कॉन्फिडेंस अपने आप बढ़ने लगता है। टॉप 10% लोग डर को इग्नोर नहीं करते बल्कि उसे समझते हैं और उसके बावजूद एक्शन लेते हैं। वे जानते हैं कि फियर का मतलब खतरा नहीं बल्कि ग्रोथ का सिग्नल होता है। यही सोच
7:48 उन्हें रिस्क लेने की ताकत देती है और बिना रिस्क लिए कोई भी इंसान टॉप लेवल तक नहीं पहुंच सकता। ब्रायन ट्रेसी अंत की तरफ यह स्पष्ट करते हैं कि टॉप 10% सोच कोई जन्म से मिलने वाली गिफ्ट नहीं है बल्कि यह एक स्किल है जिसे कोई भी इंसान प्रैक्टिस से डेवलप कर सकता है। इस बुक का मैसेज बहुत साफ है। अगर आप अपनी थिंकिंग बदलने का फैसला कर लेते हैं तो आपकी हैबिट्स, एकशंस और रिजल्ट्स अपने आप बदलने लगते हैं। यह पूरा कंटेंट आपको यह एहसास दिलाने के लिए है कि आपकी लिमिट्स बाहर नहीं बल्कि आपके दिमाग के अंदर पनी हुई हैं। और जिस दिन आप उन लिमिट्स को चैलेंज करना शुरू कर देते हैं, उसी दिन से आप एवरेज लाइफ से बाहर निकलकर टॉप लेवल लाइफ
8:34 की तरफ बढ़ने लगते हैं। ब्रायन ट्रेसी आगे इस बुक में बताते हैं कि टॉप 10% लोग अपने काम को सिर्फ ड्यूटी की तरह नहीं करते बल्कि मिशन की तरह लेते हैं। उनके लिए काम समय काटने का जरिया नहीं होता बल्कि खुद को प्रूफ करने का मैदान होता है। लेखक समझाते हैं कि जब इंसान अपने काम को मीनिंगफुल मानने लगता है तब उसकी थिंकिंग अपने आप हाई लेवल पर शिफ्ट हो जाती है। एवरेज लोग काम इसलिए करते हैं क्योंकि करना पड़ता है। जबकि टॉप थिंकर्स काम इसलिए करते हैं क्योंकि वे एक्सीलेंस की फीलिंग चाहते हैं। यही कारण है कि वे छोटे काम को भी पूरी क्वालिटी और पूरी सीरियसनेस से करते हैं। और यही हैबिट उन्हें धीरे-धीरे अलग पहचान दिलाती है। इस
9:21 बुक के अनुसार एक्सीलेंस कोई बड़ा जंप नहीं बल्कि रोज के छोटे सही डिसीजंस का रिजल्ट है। ब्रायन ट्रेसी यह भी समझाते हैं कि टॉप लेवल थिंकिंग रखने वाले लोग अपने आसपास के एनवायरमेंट को बहुत सोच समझकर चुनते हैं। वे नेगेटिव लोगों के बीच ज्यादा समय नहीं बिताते क्योंकि वे जानते हैं कि सोच कॉनंटेजियस होती है। एवरेज लोग यह नहीं समझते कि जिन लोगों के साथ वे ज्यादा समय बिताते हैं, वही लोग धीरे-धीरे उनकी थिंकिंग को शेप कर देते हैं। लेखक बताते हैं कि अगर आप टॉप 10% में जाना चाहते हैं, तो आपको ऐसे लोगों की तलाश करनी होगी जो आपसे आगे हो जो आपको चैलेंज करें और जो आपकी एक्सक्यूसेस को एक्सेप्ट ना करें। क्योंकि ग्रोथ हमेशा डिसकंफर्ट से निकलती है और सही एनवायरमेंट इस
10:07 डिसकंफर्ट को प्रोडक्टिव बना देता है। इस बुक में फोकस की पावर पर भी गहराई से बात की गई है। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि टॉप थिंकर्स एक समय में एक ही चीज पर पूरा ध्यान लगाते हैं। वे मल्टीटास्किंग को इंटेलिजेंस नहीं बल्कि डिस्ट्रैक्शन मानते हैं। एवरेज लोग बहुत सारे काम एक साथ करने की कोशिश करते हैं और अंत में किसी भी काम में उत्कृष्टता हासिल नहीं कर पाते। जबकि टॉप 10% लोग डिसाइड करते हैं कि अभी क्या सबसे इंपॉर्टेंट है और फिर उसी काम पर तब तक लगे रहते हैं जब तक वह पूरा ना हो जाए। यह डीप फोकस उनकी प्रोडक्टिविटी को कई गुना बढ़ा देता है और यही कारण है कि वे कम समय में ज्यादा और बेहतर रिजल्ट प्रोड्यूस करते हैं। ब्रायन ट्रेसी आगे बताते हैं कि सेल्फ इमेज इंसान की थिंकिंग
10:54 का फाउंडेशन होती है। इस बुक के अनुसार आप खुद को जैसा मानते हैं वैसा ही बिहेव करते हैं। अगर आप अपने आप को एवरेज मानते हैं तो आप अननोइंगली एवरेज डिसीजंस लें। और अगर आप खुद को टॉप परफॉर्मर मानने लगते हैं तो आपकी बॉडी लैंग्वेज, आपकी वॉइस और आपके एक्शंस अपने आप चेंज होने लगते हैं। लेखक कहते हैं कि टॉप 10% लोग खुद से पॉजिटिव और पावरफुल लैंग्वेज में बात करते हैं। वे खुद को कमजोर नहीं बल्कि कैपेबल मानते हैं। और यही बिलीफ धीरे-धीरे रियलिटी बन जाती है। यह बुक आपको यह सिखाती है कि सेल्फ इमेज को कॉन्शियसली अपग्रेड किया जा सकता है। और जब सेल्फ इमेज बदलती है तो बाहरी दुनिया भी बदलने लगती है। ब्रायन ट्रेसी इस बात पर भी जोर
11:41 देते हैं कि टॉप थिंकर्स फेलियर से डरते नहीं बल्कि उसे फीडबैक की तरह देखते हैं। एवरेज लोग फेलियर को पर्सनल अटैक मान लेते हैं और वहीं रुक जाते हैं। जबकि टॉप 10% लोग हर फेलियर से यह सीखते हैं कि अगली बार क्या बेहतर किया जा सकता है। इस बुक के अनुसार फेलियर सक्सेस का ऑोजिट नहीं बल्कि उसका हिस्सा है। और जो इंसान इस सच को एक्सेप्ट कर लेता है वही लॉन्ग टर्म में अनबीटेबल बन जाता है। लेखक बताते हैं कि कॉन्फिडेंस उन्हीं लोगों में आता है जिन्होंने गिर कर उठना सीख लिया होता है क्योंकि उन्हें पता होता है कि वे मुश्किल हालात में भी खुद को संभाल सकते हैं। ब्रायन ट्रेसी आगे यह क्लियर करते हैं कि टॉप लेवल थिंकिंग का सबसे बड़ा फायदा यह
12:26 है कि इंसान अपनी लाइफ को रिएक्टिव मोड से निकालकर प्रोएक्टिव मोड में ले आता है। वह इंतजार नहीं करता कि कुछ हो तब वह एक्शन लेगा बल्कि वह पहले एक्शन लेता है और फिर सिचुएशन को शेप करता है। एवरेज लोग फ्यूचर से डरते हैं जबकि टॉप थिंकर्स फ्यूचर को डिजाइन करते हैं। इस बुक का हर चैप्टर इसी बात को रीइंफोर्स करता है कि आपकी थिंकिंग आपकी डेस्टिनी को लिखती है। और अगर आप कॉन्शियसली अपनी थिंकिंग को अपग्रेड करते रहते हैं तो आपकी डेस्टिनी भी अपने आप अपग्रेड होती चली जाती है। यह बुक धीरे-धीरे आपको यह महसूस कराने लगती है कि टॉप 10% कोई अलग स्पीशीज नहीं है। वे भी इंसान ही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने एवरेज सोच को एक्सेप्ट करने से
13:13 मना कर दिया और उसी दिन से उनकी लाइफ ने अलग डायरेक्शन पकड़ ली। अगर आप इस मैसेज को सीरियसली ले लेते हैं और रोज अपनी थिंकिंग हैबिट्स पर काम करना शुरू कर देते हैं तो ब्रायन ट्रेसी के अनुसार टॉप कैटेगरी में जाना कोई ड्रीम नहीं बल्कि लॉजिकल आउटकम बन जाता है। ब्रायन ट्रेसी आगे इस बुक में बताते हैं कि टॉप 10% लोग अपने हेल्थ और एनर्जी को भी अपनी थिंकिंग का हिस्सा मानते हैं। वे यह समझते हैं कि टायर्ड बॉडी के साथ शार्प थिंकिंग पॉसिबल नहीं होती। एवरेज लोग हेल्थ को बाद में देखने वाली चीज मानते हैं। जबकि टॉप थिंकर्स इसे प्राथमिकता बनाते हैं। वे सही नींद, एक्सरसाइज और फूड को लग्जरी नहीं बल्कि परफॉर्मेंस टूल्स मानते हैं। लेखक
13:59 बताते हैं कि जब आपकी एनर्जी हाई होती है तब आपकी सोच भी क्लियर होती है। और जब सोच क्लियर होती है तब डिसीजंस स्ट्रांग बनते हैं। यही कारण है कि टॉप लेवल पर पहुंचने वाले लोग अपने शरीर को एक एसेट की तरह ट्रीट करते हैं क्योंकि उनका मानना होता है कि अगर बॉडी साथ नहीं देगी तो माइंड भी ज्यादा देर तक साथ नहीं दे पाएगा। ब्रायन ट्रेसी इस बुक में हैबिट्स की पावर पर भी बहुत गहराई से बात करते हैं। उनके अनुसार इंसान की लाइफ रैंडम एक्शन से नहीं बल्कि डेली हैबिट से बनती है। एवरेज लोग यह सोचते हैं कि एक बड़ा फैसला उनकी लाइफ बदल देगा। जबकि टॉप थिंकर्स जानते हैं कि रोज के छोटे सही हैबिट्स ही लॉन्ग टर्म में बड़ा डिफरेंस क्रिएट करती हैं। लेखक बताते हैं कि टॉप 10% लोग कॉन्शियसली अपनी
14:45 हैबिट्स डिजाइन करते हैं। वे यह नहीं छोड़ते कि हैबिट अपने आप बन जाए बल्कि वे डिसाइड करते हैं कि उन्हें कौन सी हैबिट्स अडॉप्ट करनी है और कौन सी छोड़नी है। यह लेवल की अवेयरनेस उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है। क्योंकि ज्यादातर लोग हैबिट्स के स्लेव बन जाते हैं। जबकि टॉप थिंकर्स हैबिट्स को अपना सर्वेंट बना लेते हैं। ब्रायन ट्रेसी आगे बताते हैं कि टॉप लेवल थिंकिंग रखने वाले लोग अपने कंफर्ट जोन को पहचानते हैं और जानबूझकर उससे बाहर निकलते रहते हैं। एवरेज लोग कंफर्ट ज़ोन को सेफ्टी समझ लेते हैं। जबकि टॉप थिंकर्स जानते हैं कि कंफर्ट ज़ोन ग्रोथ का सबसे बड़ा दुश्मन है। इस बुक के अनुसार जब भी आप नर्वस फील करते हैं या अनशोर महसूस करते हैं तब समझ लीजिए कि आप ग्रोथ जोन
15:31 में कदम रख रहे हैं। लेखक कहते हैं कि टॉप 10% लोग डिसकंफर्ट को अवॉइड नहीं करते बल्कि उसे वेलकम करते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि हर नई स्किल, हर नया लेवल और हर नया रिजल्ट पहले डिसकंफर्ट के साथ ही आता है। यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रहती है। ब्रायन ट्रेसी यह भी बताते हैं कि टॉप थिंकर्स अपने आसपास क्लेरिटी क्रिएट करते हैं। वे कंफ्यूजन में काम करना पसंद नहीं करते। वे अपने गोल्स, प्रायोरिटीज और वैल्यूस को लिखकर बार-बार रिव्यू करते रहते हैं। एवरेज लोग अपने दिमाग में सब कुछ रखने की कोशिश करते हैं और ओवरलोड हो जाते हैं। जबकि टॉप थिंकर्स चीजों को बाहर निकालकर सिस्टम बनाते हैं। इस बुक के अनुसार क्लेरिटी पावर देती है
16:18 और कंफ्यूजन वीकनेस पैदा करती है। जब आपको साफ पता होता है कि आपको क्या करना है तो प्रोक्रेस्टिनेशन अपने आप कम हो जाती है और एक्शन लेना आसान हो जाता है। ब्रायन ट्रेसी आगे बताते हैं कि टॉप 10% लोग खुद को विक्टिम नहीं मानते। वे लाइफ में आने वाली प्रॉब्लम्स को अनफेयर नहीं बल्कि नॉर्मल मानते हैं। एवरेज लोग हर प्रॉब्लम पर पूछते हैं कि यह मेरे साथ ही क्यों हुआ? जबकि टॉप थिंकर्स पूछते हैं कि अब इससे सीख क्या मिल रही है? यह शिफ्ट बहुत सल है। लेकिन यही शिफ्ट इंसान को मेंटली अनबीटेबल बना देता है। क्योंकि जब आप विक्टिम थिंकिंग छोड़ देते हैं, तब कोई भी सिचुएशन आपको अंदर से तोड़ नहीं पाती। और यही मेंटल स्ट्रेंथ टॉप लेवल सक्सेस की फाउंडेशन होती है। ब्रायन ट्रेसी इस बुक
17:05 में यह भी बताते हैं कि टॉप थिंकर्स पेशेंट्स को वीकनेस नहीं बल्कि स्ट्रेटजी मानते हैं। वे इंस्टेंट रिजल्ट की एडिक्शन में नहीं रहते। वे लॉन्ग टर्म गेम खेलते हैं। एवरेज लोग जल्दी हार मान लेते हैं क्योंकि उन्हें जल्दी रिवॉर्ड चाहिए होता है। जबकि टॉप 10% लोग प्रोसेस पर भरोसा करते हैं। वे जानते हैं कि सही एकशंस अगर लगातार लिए जाए तो रिजल्ट आना तय है। यह थिंकिंग उन्हें फ्रस्ट्रेशन से बचाती है और स्टेडी प्रोग्रेस की तरफ ले जाती है। ब्रायन ट्रेसी अंत की तरफ बार-बार यह मैसेज रीइंफोर्स करते हैं कि टॉप 10% सोच कोई मोटिवेशन स्पीच नहीं बल्कि डेली प्रैक्टिस है। यह रोज के सवालों, रोज के डिसीजंस और रोज के एक्शंस में दिखाई देती है। यह बुक आपको यह सिखाने की कोशिश करती है कि हर सुबह उठकर आप खुद से क्या सवाल
17:52 पूछते हैं। वही आपकी लाइफ की डायरेक्शन तय करता है। अगर आप एवरेज सवाल पूछेंगे तो एवरेज लाइफ मिलेगी और अगर आप टॉप लेवल सवाल पूछना शुरू कर देंगे तो धीरे-धीरे आपकी लाइफ भी उसी लेवल पर मूव करने लगेगी। यह जर्नी यहीं खत्म नहीं होती बल्कि यहीं से शुरू होती है। क्योंकि ब्रायन ट्रेसी के अनुसार जिस दिन आप कॉन्शियसली बेटर थिंकिंग चूज कर लेते हैं उसी दिन से आप उस भीड़ से अलग हो जाते हैं जो हालात को ब्लेम करती रहती है। और उसी दिन से आप उन लोगों की कैटेगरी में कदम रख देते हैं जो अपनी लाइफ खुद डिजाइन करते हैं। ब्रायन ट्रेसी आगे यह बताते हैं कि टॉप 10% लोग अपने आसपास की रियलिटी को जैसी है वैसी एक्सेप्ट करने के बजाय उसे इंप्रूव करने
18:38 की रिस्पांसिबिलिटी लेते हैं। वे यह नहीं कहते कि सिस्टम ऐसा है या मार्केट खराब है। बल्कि वे यह मानते हैं कि हर सिचुएशन में कुछ ना कुछ ऐसा जरूर होता है जिसे बेहतर बनाया जा सकता है। इस बुक में यह माइंडसेट बहुत साफ तरीके से समझाया गया है कि जब इंसान इंप्रूवमेंट की सोच अपनाता है तब उसका दिमाग ऑटोमेटिकली सॉलशंस ढूंढने लगता है। एवरेज लोग लिमिट्स देखते हैं। जबकि टॉप थिंकर्स पॉसिबिलिटीज देखते हैं। और यही नजरिया उन्हें वही काम अलग तरीके से करने की ताकत देता है जो बाकी लोग रोज करते हैं। लेकिन बिना रिजल्ट के ब्रायट्रेसी इस बुक में यह भी बताते हैं कि टॉप लेवल थिंकिंग रखने वाले लोग अपने पास्ट को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। वे पास्ट
19:26 मिस्टेक्स को रिग्रेट की तरह नहीं बल्कि लेसन की तरह यूज करते हैं। एवरेज लोग पास्ट को एक्सक्यूज बना लेते हैं और कहते हैं कि उनके साथ पहले ऐसा हुआ। इसलिए अब वे आगे नहीं बढ़ सकते। जबकि टॉप 10% लोग पास्ट को डाटा की तरह देखते हैं और फ्यूचर को डिसीजन की तरह ट्रीट करते हैं। लेखक बताते हैं कि जो इंसान अपने पास्ट को मेंटली छोड़ देता है वही पूरी एनर्जी के साथ प्रेजेंट में एक्शन ले पाता है और यही एक्शन फ्यूचर को बदल देता है। ब्रायन ट्रेसी आगे बताते हैं कि टॉप थिंकर्स अपने कम्युनिकेशन पर भी बहुत ध्यान देते हैं। वे कैसे बोलते हैं, क्या बोलते हैं और खुद से अंदर ही अंदर क्या बोलते हैं। यह सब उनकी थिंकिंग का हिस्सा होता है। इस बुक के अनुसार एवरेज लोग कंप्लेंट वाली
20:13 लैंग्वेज यूज करते हैं। जबकि टॉप 10% लोग पॉसिबिलिटी वाली लैंग्वेज बोलते हैं। वे प्रॉब्लम्स की चर्चा कम करते हैं और ओपोरर्चुनिटीज की चर्चा ज्यादा करते हैं। क्योंकि शब्द सोच को शेप देते हैं और सोच एक्शन को ड्राइव करती है। जब आप अपनी लैंग्वेज बदलते हैं तो आपकी थिंकिंग अपने आप हायर लेवल पर मूव करने लगती है। प्रायन ट्रेसी यह भी बताते हैं कि टॉप लेवल थिंकिंग रखने वाले लोग कंपैरिजन में नहीं रहते। वे दूसरों से जलने या खुद को कम आंकने में समय वेस्ट नहीं करते। वे सिर्फ एक कंपैरिजन करते हैं और वह होता है आज का खुद और कल का खुद। इस बुक में बताया गया है कि जब आप अपनी प्रोग्रेस को दूसरों से कंपेयर करना छोड़ देते हैं, तब आपके अंदर एक स्ट्रेंज सा मेंटल पीस आ जाता है और
21:00 उसी पीस से क्लेरिटी निकलती है। क्लेरिटी से फोकस बनता है और फोकस से रिजल्ट्स निकलते हैं। यही चेन टॉप 10% सोच को प्रैक्टिकली पावरफुल बनाती है। ब्रायन ट्रेसी आगे बताते हैं कि टॉप थिंकर्स अनसर्टेनिटी से डरते नहीं बल्कि उसे एक्सेप्ट करते हैं। एवरेज लोग सिक्योरिटी की तलाश में रहते हैं और इसी डर की वजह से मीडिओकर लाइफ चुन लेते हैं। जबकि टॉप 10% लोग जानते हैं कि ग्रोथ हमेशा अनसर्टेनिटी के साथ आती है। इस बुक के अनुसार सर्टेनिटी की चाह इंसान को सेफ तो रखती है लेकिन स्ट्रांग नहीं बनाती और टॉप लेवल तक पहुंचने के लिए स्ट्रांग बनना जरूरी होता है। इसलिए टॉप थिंकर्स कैलकुलेटेड रिस्क लेते हैं और उस रिस्क के साथ रिस्पांसिबिलिटी भी एक्सेप्ट करते हैं।
21:45 ब्रायन ट्रेसी इस बुक में यह भी बताते हैं कि टॉप लेवल थिंकिंग रखने वाले लोग ग्रेटट्यूड की हैबिट डेवलप करते हैं। वे यह नहीं सोचते कि उनके पास क्या नहीं है। बल्कि वे यह अप्रिशिएट करते हैं कि उनके पास अभी क्या है। यह ग्रेटट्यूड उन्हें पॉजिटिव एनर्जी देता है और पॉजिटिव एनर्जी से बेटर थिंकिंग निकलती है। एवरेज लोग हमेशा लैक पर फोकस करते हैं और उसी लैक में फंसे रहते हैं। जबकि टॉप थिंकर्स अबंडेंस माइंडसेट डेवलप करते हैं। और वही माइंडसेट अपॉर्चुनिटीज को आकर्षित करता है। ब्रायन ट्रेसी अंत के पास यह साफ करते हैं कि टॉप 10% सोच का असली टेस्ट मुश्किल समय में होता है। जब चीजें प्लान के हिसाब से नहीं चलती। उसी समय एवरेज और टॉप
22:32 थिंकर्स के बीच का फर्क साफ दिखने लगता है। एवरेज लोग टूट जाते हैं और टॉप थिंकर्स और ज्यादा फोकस्ड हो जाते हैं। क्योंकि वे जानते हैं कि हर चैलेंज उनके कैरेक्टर और थिंकिंग को शार्पन करने का मौका लेकर आता है और जो इंसान इस मौके को पहचान लेता है, वही अल्टीमेटली टॉप कैटेगरी में पहुंचता है। यह बुक बार-बार यह एहसास दिलाती है कि आपकी लाइफ एक्सीडेंटल नहीं है बल्कि लार्जली डिज़ है और डिजाइन आपकी डेली थिंकिंग से बनता है। प्राय ट्रेसी का मैसेज बहुत सिंपल है लेकिन बहुत पावरफुल है। अगर आप रोज कॉन्शियसली बेटर सोचने का प्रैक्टिस शुरू कर देते हैं तो धीरे-धीरे आपकी आइडेंटिटी बदलने लगती है और जब आइडेंटिटी बदलती है तो रिजल्ट अपने आप बदल जाते हैं। यही टॉप
23:17 10% सोच की असली ताकत है। ब्रायन ट्रेसी थिंक लाइक टॉप 10% ब्रायन ट्रेसी। आगे इस बुक में बताते हैं कि टॉप 10% लोग अपनी लाइफ को चांस पर नहीं छोड़ते। वे प्लानिंग को कंट्रोल समझते हैं और कंट्रोल को कॉन्फिडेंस की जड़ मानते हैं। एवरेज लोग कहते हैं कि लाइफ अनप्रिडिक्टेबल है। इसलिए ज्यादा प्लान करने का क्या फायदा? जबकि टॉप थिंकर्स मानते हैं कि लाइफ अनप्रिडिक्टेबल इसलिए है क्योंकि लोग प्लान नहीं करते। इस बुक के अनुसार प्लानिंग कोई रिजिड स्ट्रक्चर नहीं बल्कि फ्लेक्सिबल डायरेक्शन होती है जो आपको हर सिचुएशन में सही डिसीजन लेने में मदद करती है। जब आपके पास डायरेक्शन होती है तब प्रॉब्लम्स आपको कंफ्यूज नहीं कर पाती और यही क्लेरिटी टॉप लेवल थिंकिंग
24:03 का रियल साइन है। ब्रायन ट्रेसी यह भी बताते हैं कि टॉप थिंकर्स अपनी वैल्यूज को बहुत क्लियर रखते हैं। वे जानते हैं कि उनके लिए क्या एक्सेप्टेबल है और क्या नहीं। एवरेज लोग सिचुएशन के हिसाब से वैल्यूस बदल लेते हैं और फिर अंदर ही अंदर कॉन्फ्लिक्ट में जीते रहते हैं। जबकि टॉप 10% लोग अपने प्रिंसिपल्स के साथ कॉम्प्रोमाइज नहीं करते और यही इंटेग्रिटी उन्हें इनर स्ट्रेंथ देती है। इस बुक के अनुसार जब आपके एक्शंस आपकी वैल्यूस से अलाइन होते हैं तब आपका माइंड शांत रहता है और शांत माइंड ही शार्प थिंकिंग की फाउंडेशन होता है। ब्रियंट ट्रसी आगे बताते हैं कि टॉप लेवल थिंकिंग रखने वाले लोग फीडबैक को गिफ्ट की तरह लेते हैं। वे क्रिटिसिज्म से भागते नहीं बल्कि उससे
24:48 सीखते हैं। एवरेज लोग फीडबैक को इंसल्ट मान लेते हैं और डिफेंसिवनेस में चले जाते हैं। जबकि टॉप थिंकर समझते हैं कि फीडबैक उन्हें ब्लाइंड स्पॉट्स दिखाता है। जिन्हें वे खुद नहीं देख पाते। इस बुक के अनुसार जिस इंसान को फीडबैक पचाने की आदत हो जाती है, वही फास्टेस्ट ग्रो करता है क्योंकि वह ईगो को साइड में रखकर इंप्रूवमेंट को प्रायोरिटी बना लेता है। ब्रायन ट्रेसी यह भी बताते हैं कि टॉप 10% लोग कंसिस्टेंसी को मैजिक मानते हैं। वे ओवरनाइट सक्सेस के कांसेप्ट पर हंसते हैं। क्योंकि वे जानते हैं कि रियल सक्सेस बोरिंग डेली एक्शन से बनती है। एवरेज लोग एक्साइटमेंट ढूंढते हैं। जबकि टॉप थिंकर्स डिसिप्लिन ढूंढते हैं। और यही डिसिप्लिन
25:34 उन्हें उन दिनों भी आगे बढ़ाता है जब मोटिवेशन जीरो होता है। इस बुक के अनुसार कंसिस्टेंसी आपको उस लेवल तक ले जाती है जहां कंपटीशन ऑलमोस्ट खत्म हो जाता है। क्योंकि बहुत कम लोग लंबे समय तक टिक पाते हैं। अब इस बुक का एंडिंग मैसेज बहुत पावरफुल है। ब्रायन ट्रेसी साफ कहते हैं कि टॉप 10% में जाना कोई प्रिविलेज नहीं बल्कि चॉइस है। यह कोई सीक्रेट सोसाइटी नहीं है जहां एंट्री सिर्फ लकी लोगों को मिलती है। बल्कि यह एक ओपन कैटेगरी है जहां एंट्री थिंकिंग से मिलती है। जिस दिन आप डिसाइड कर लेते हैं कि आप एवरेज एक्सक्यूसेस, एवरेज हैबिट्स और एवरेज लाइफ एक्सेप्ट नहीं करेंगे। उसी दिन से आपकी जर्नी शुरू हो जाती है। हो सकता है शुरुआत
26:19 में रिजल्ट दिखाई ना दें। हो सकता है लोग आपको ओवर कॉन्फिडेंट कहें। हो सकता है रास्ता लोनली लगे। लेकिन यही साइंस बताते हैं कि आप सही डायरेक्शन में जा रहे हैं। इस बुक का आखिरी एहसास यही है कि दुनिया में भीड़ कभी कम नहीं होगी। एवरेज सोच कभी खत्म नहीं होगी। लेकिन आपको उसमें शामिल होना जरूरी नहीं है। हर सुबह जब आप उठते हैं तो आपके पास एक साइलेंट चॉइस होती है। या तो आप वैसे ही सोें जैसे कल सोचते थे या फिर थोड़ा बेहतर, थोड़ा बड़ा और थोड़ा साहसी सोचें। ब्रायन ट्रेसी मानते हैं कि यही छोटा सा डेली चॉइस टाइम के साथ आपकी आइडेंटिटी बदल देता है। और जब आइडेंटिटी बदलती है तब डेस्टिनी बदलना मजबूरी बन जाती है। अगर आप इस बुक की एक भी बात को ऑनेस्टली अप्लाई
27:05 कर लेते हैं तो आपकी लाइफ डायरेक्शन बदल सकती है। और अगर आप इसे रोज प्रैक्टिस बना लेते हैं तो टॉप 10% में पहुंचना कोई मोटिवेशन लाइन नहीं बल्कि नेचुरल आउटकम बन जाता है। क्योंकि अंत में फर्क हालात नहीं बनाते। फर्क आपकी सोच बनाती है और जब सोच टॉप लेवल की हो जाती है तो एवरेज लाइफ आपके लिए ऑप्शन ही नहीं रहती। अगर आपको यह वीडियो पसंद आई हो और आपको लगा हो कि इससे आपकी सोच को नई डायरेक्शन मिली है तो टॉप बुक समरी चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए। वीडियो को लाइक कीजिए और कमेंट में जरूर लिखिए कि आपको सबसे ज्यादा क्या अच्छा लगा क्योंकि ऐसे ही कंटेंट आगे भी आते रहेंगे जो आपको एवरेज से बाहर निकालकर बेहतर लेवल की तरफ ले जाने में मदद करेंगे। धन्यवाद।