0:02 हां तो सभी विद्यार्थियों को नमस्ते। आप सभी का स्वागत है लर्न एंड शेयर के इस प्लेटफार्म पर। आज की इस कक्षा में विद्यार्थियों आज हम लोग नया अध्याय प्रारंभ कर रहे हैं जिसका नाम है मानव नेत्र तथा रंग बिरंगा संसार। सच में ये संसार तो बहुत ज्यादा कलरफुल है। रंग बिरंगा है। सच्ची बात है। तो बिल्कुल बिल्कुल सच्ची बात है। तो सभी जने उत्साहित हैं। इस अध्याय को लेकर के मेरे को फटाफट से चैट सेक्शन में भारत माता की जय लिख के बताएंगे कि हां राहुल भैया भारत माता की जय। हम जो हैं उत्साहित हैं इस अध्याय को लेकर के और अभी तक इससे पहले हम कितने अध्याय पढ़ चुके हैं। तो एक बार बता देता हूं। इससे पहले हम लोग रासायनिक अभिक्रिया एवं समीकरण पहला अध्याय पढ़ चुके हैं। जैव प्रक्रम पांचवा अध्याय पढ़ चुके हैं। और उसके अलावा
0:49 प्रकाश नवां अध्याय पढ़ चुके हैं। और हमारा पर्यावरण अंतिम अध्याय भी पढ़ चुके हैं। नई पुस्तक के अनुसार बिहार की पुस्तकों के अनुसार क्रम थोड़ा सा अलग है। लेकिन चैप्टर्स उनके ये सारे हैं। और फिर अगला जो चैप्टर है वो हम आज कर रहे हैं। इसी के अगला अपन ने मानव नेत्र वाला चैप्टर क्यों लिया? क्योंकि आंख कैसे देख पाती है? तो आंख में लेंस होता है। कौन सा लेंस होता है? उत्तल लेंस। उत्तल लेंस होता है। तो उत्तल लेंस के बारे में अभी अपन ने प्रकाश वाले चैप्टर में पढ़ा है। तो प्रकाश वाला चैप्टर कंटिन्यू हो रहा है। वही आगे चल रहा है। माने प्रकाश वाला चैप्टर और ये चैप्टर जुड़ा हुआ है। तो इसीलिए मैंने इसको आज की कक्षा में लिया है। समझ गए क्या सारे विद्यार्थी इस बात को? फटाफट से मेरे को चैट सेक्शन में सब ने बता ही दिया है और जिन्होंने वीडियो को लाइक नहीं किया है वो फटाफट से जो है
1:36 वीडियो को भी लाइक कर दे और पिछले चैप्टर का जो लेंस का वन शॉट वन शॉट नहीं लेंस का जो प्रैक्टिकल था उसका वीडियो भी डल गया है। तो अगर आप लोगों ने वो भी नहीं देखा है तो वो भी देखना है। इसी चैनल पर वीडियोस वाले सेक्शन में आप वो भी देख सकते हो। बहुत शानदार वाला प्रैक्टिकल था। उसमें दर्पण का भी प्रैक्टिकल है और उसमें लेंस का भी प्रैक्टिकल है। और अब अपन को जैसे ही समय मिलेगा कुछ दिनों में तो अपन प्रकाश वाले चैप्टर का भी रिवीजन करेंगे। वन शॉट के रूप में कर लेंगे बढ़िया इंटरेस्टिंग तरीके से। तो ताकि जिन स्टूडेंट्स का नहीं हो पाया तो वो भी पढ़ सकें। ऐसा हम लोग कर लेंगे। चल तो बहुत सारे विद्यार्थी आ गए हैं। किरण, अजू,
2:22 प्रिंस, रागिनी, सुनैना, महक, इसरत केतन रॉयल स्टार रेस्पेक्ट शॉट्स अवनीश सत्यम अंजलि और काजल अनामिका ज्योति सुनैना महक देवराज भूपेंद्र बहुत सारे विद्यार्थी हैं। तो चलिए आ जाइए। हम लोग अब कक्षा को प्रारंभ कर लेते हैं। ये छोटा चैप्टर है। छोटे-छोटे लेक्चर लेकर के आराम से कर लेंगे। टेंशन वाली बात बिल्कुल भी नहीं है। आज हमें जो सबसे पहले पढ़ना है वो बेसिक इंट्रोडक्शन है। परिचय इंट्रोडक्शन किसका? आंख का। आंख भैया बहुत ज्यादा कीमती अंग है हमारे शरीर का। शरीर के सारे ही अंग बहुत कीमती हैं। माने आप किसी भी अंग की कीमत नहीं लगा सकते। वो
3:08 इतने कीमती हैं। माने वो प्राइसलेस हैं। प्राइस ही नहीं लगा सकते आप उनका। उनकी कोई कीमत नहीं हो सकती। करोड़ों रुपए भी कीमत नहीं हो सकती। और फिर भी हम देख लो आजकल की दुनिया में हमारे शरीर के अंगों को खराब करते रहते हैं। कचरा खा के, गंदा खाना खा के, बाहर का फास्ट फूड खा के अपना पेट खराब करते हैं। कोल्ड ड्रिंक्स पी के अपना शरीर खराब करते हैं। आंखों को लैपटॉप कंप्यूटर के सामने खराब करते हैं। मोबाइल के सामने बैठ के और दिमाग को तो हर वक्त ही खराब करते रहते हैं। चलो तो शुरू करते हैं। तो स्टूडेंट्स आज हम लोग इस मानव नेत्र का संरचना के बारे में ही पढ़ेंगे। देखो अपन क्या-क्या पढ़ने वाले हैं चैप्टर में? आज अपन मानव नेत्र के बारे में पढ़ लेंगे। चित्र भी बना लेंगे। कभी-कभी मानव नेत्र का चित्र हमसे परीक्षा में पूछता है। तो आज अपन वो भी बनाना सीख लेंगे कि कैसे बनाते हैं। फिर उसके बाद में हम लोग
3:54 इस चैप्टर में मानव नेत्र में कौन से कौन से दोष होते हैं? माने कौन सी आंख खराब हो जाती है ना? नजर कमजोर हो जाती है। मोतियाबिंद हो जाता है या फिर एक दो चीजें ऐसी और होती हैं। तो वो अपन पढ़ने वाले हैं। और दूर की नजर कम हो गई है। पास की नजर कम हो गई है। इसका क्या मतलब होता है? वो अपन इसमें पढ़ने वाले हैं। फिर उस हिस्से के बाद में हम लोग इस चैप्टर में थोड़ी एक्स्ट्रा चीजें पढ़ते हैं। जैसे कि हम लोग बारिश जब होती है तो इंद्रधनुष बनता है तो वो कैसे बनता है? ये चीज पढ़ने वाले हैं। छोटा सा प्रिज्म के बारे में भी थोड़ा बहुत यहां पर हम लोग पढ़ने वाले हैं। तो ऐसे थोड़े से कुछ घटनाएं हैं जिनके बारे में हम लोग इस चैप्टर में आगे पढ़ने वाले हैं। संसार के बारे में। तो पहले आंख के बारे में, आंख की बीमारी के बारे में और थोड़ा सा रंग बिरंगे संसार के बारे में हम लोग पढ़ने वाले हैं। तो आ जाओ फटाफट से।
4:39 तो स्टूडेंट्स यहां देखेंगे सब जने फटाफट से मानव नेत्र की संरचना सबसे पहला यही है। तो देखो अगर बाहर से हम लोग आंख को देखते हैं तो आंख ऐसी दिखाई देती है। आंख ऐसी दिखाई देती है ना? ये हमारी पुतली है आंख की। ये बहुत छोटा लिखने में आ गया है। मैं इसको फटाफट से बड़ा करके लिख देता हूं। यह जो है बीच में जो काला सा खड्डा होता है जो हमारी आंख में यह होती है पुतली या फिर प्यूपल। भाई बाहर से देख रहे हैं तो क्या-क्या दिखता है? देखो कुछ चीजें दिखती हैं ज्यादा चीजें दिखती नहीं है। और फिर इसके बाद में ये जो सफेद वाला हिस्सा होता है ना असल में जो हमारी आंख का मेजर हिस्सा है उसको हम लोग बोलते हैं स्क्लेरा। उसको हम लोग बोलते हैं स्टूडेंट्स स्क्लेरा। तो प्यूपिल स्क्लेरा
5:27 यह वाला जो हिस्सा है सफेद वाला भाई आंख का लगभग जो हिस्सा है बड़ा-बड़ा वो सफेद है तो ये है स्क्लेरा ये है स्क्लेरा और ये क्या है हमारे पास में इसको हम लोग बोलते हैं परितारिका अंग्रेजी में भी इनके क्या-क्या नाम है वो अपन देखेंगे धीरे-धीरे परितारिका परितारिका को अंग्रेजी में वैसे हम लोग आइरिस बोलते हैं। स्क्लेरा को स्क्लेरा ही बोलते हैं। बस स्पेलिंग अंग्रेजी में हो जाती है। एस सी एल ऐसे करके हो जाती है। पुतली क्या होती है? प्यूपिल होता है ये। अंग्रेजी में प्यूपिल। ये चीजें हमें बाहर से दिखाई देती हैं। तो मानव नेत्र जो है ना वो लगभग गोलाकार होता है। माने अगर आंख ऐसे निकाल के देखो तो
6:12 गोल होती है। बोले राहुल भैया किसकी निकालेंगे? अरे डॉक्टर लोगों ने अध्ययन किया है। का बात कर रहे हो? तो नेत्र लगभग गोलाकार होता है। गोला समझ गए? बॉल के जैसा छोटी सी बॉल है और इसका व्यास जो है वो लगभग 2.3 सें.मी. होता है। तो मानव नेत्र कैसा है स्टूडेंट? सब कुछ हाथ से लिखने वाले हैं। कॉपी पेन उठा लो फटाफट से। ये वाला चित्र बनाने की आवश्यकता नहीं है। केवल आपको समझाने के लिए। मानव नेत्र लगभग गोलाकार होता है। लगभग गोलाकार होता है। मानव नेत्र लगभग गोलाकार होता है। इसका
6:57 व्यास लगभग लगभग 2.54 सेंटीमीटर होता है। व्यास समझते हो ना? जैसे ये वृत्त है तो ये इसका व्यास है। तो यहां से यहां तक की दूरी जो केंद्र से हो के जाती है तो उसको हम लोग व्यास कहते हैं। 2.5 ही लिखो। है ना? 2.5 भी नहीं 2.3 सॉरी फाइव तो मेरे को अलग ही ध्यान रह गया। 2.3 रहता है। 2.3 सें.मी. इसका जो हमारे पास में व्यास है वो लगभग 2.3 सें.मी. लगभग क्यों? किसी का हल्का सा कम, किसी का हल्का सा ज्यादा हो सकता है। उसमें कोई बड़ी बात नहीं है। अब ये जो हमारी जो आंख है ना इसमें दो परतें
7:43 हैं। अगर बाहर से हम देखने की कोशिश कर रहे हैं। तो एक परत बाहर वाली परत है और एक अंदर वाली परत है जो हमें दिखती नहीं है। तो मानव नेत्र की हमारे पास में दो मुख्य परतें हैं। क्या लिखेंगे स्टूडेंट्स? दो प्रमुख परतें हैं हमारे पास में मानव नेत्र की। तो हम ऐसा लिख रहे हैं इसमें दो प्रमुख परतें हैं। हम पहली जो परत है स्टूडेंट्स हमारे पास में वो है बाह्य परत। बाह्य परत या बाहरी परत। तो पहली परत है बाह्य परत। बाह्य परत का नाम होता है हमारे पास में स्टूडेंट्स स्क्लेरा। यह जो सफेद वाली दिख रही है ना
8:30 यह सफेद वाली आंख पूरी ऐसी है। तो ये होती है हमारे पास में स्क्लेरा। भाई आंख को यूं ऊं करते हैं, यूं नीचे करते हैं। तो सफेद वाला ही हिस्सा है ना चारों तरफ तो। तो वही है हमारे पास में। इसको हम लोग क्या कहते हैं? बाह्य परत है। बाह्य परत को हम लोग कहते हैं स्टूडेंट्स। इसका नाम है स्क्लेरा। एस सी एल ई आर ए स्क्लेरा इसका हमारे पास में नाम है। फिर उसके बाद में अगला क्या है? हमारे पास में कैसी होती है? तो ये सफेद रंग की होती है। दिख ही रहा है। अपारदर्शी होती है। इसके आरपार नहीं दिखता। ये सफेद वाला जो भाग है ना इसके अगर पार देखें तो पार थोड़ी दिखता है। आरपार नहीं दिखता इसके। तो ये कैसी होती है? सफेद होती है रंग से और अपारदर्शी होती है। अपार
9:19 दर्शी सफेद होती है, अपारदर्शी होती है और कैसी होती है? एकदम कठोर होती है। सॉफ्ट नहीं होती, कठोर होती है। सफेद, अपारदर्शी और कठोर। ये इसकी हमारे पास में खासियत है। समझ गए क्या सबने इस बात को? अब देखना, यहां पर एक नई चीज़ आती है। नई चीज़ क्या? यह स्क्लेरा है। यह स्क्लेरा है वाइट-वाइट वाला पूरा। लेकिन आगे की तरफ ये नेत्र का जो गोला है इसमें आगे की तरफ इसमें आगे की तरफ यहां पे ये जहां पे ये काला वाला है और ये जो बीच में छेद है ये सारा है तो इसके ऊपर एक और परत होती है जिसको हम लोग बोलते हैं कॉर्निया इसको हम लोग बोलते हैं कॉर्निया या फिर इसको अंग्रेजी में अंग्रेजी में कॉर्निया और हिंदी में एक और शब्द होता है इसके लिए स्वच्छ मंडल माने इसके ऊपर एक और परत होती
10:05 है पारदर्शी वो दिखती नहीं है एकदम ऐसे समझो थैली लगी हुई है एक इसके ऊपर एक थैली लगी हुई है तो वो कहलाती है क्या हमारे पास में कॉर्निया समझ गए क्या सारे विद्यार्थी इस बात को? तो क्या है? एक अपन यहीं पर कॉर्निया के बारे में भी पढ़ रहे हैं क्योंकि वो इसके भी ऊपर है आगे की तरफ जो हमें दिख नहीं रही आंख से। तो हम यहां पर एक और अंग के बारे में पढ़ रहे हैं जिसका नाम है कॉर्निया। इसको अंग्रेजी में भी आप लोग कॉर्निया ही बोलते हैं। कॉर्निया या फिर हिंदी में इसका एक और नाम है स्वच्छ मंडल। स्वच्छ मंडल। स्वच्छ मंडल इसका हमारे पास में एक और नाम है। अच्छा फिर उसके बाद क्या है?
10:51 तो स्टूडेंट्स उसके बाद में हमारे पास में एक पॉइंट और है। इसके बारे में लिखेंगे थोड़ा सा। तो ये कहां पर होती है? नेत्र गोलक के आगे के भाग में स्क्लेरा के ऊपर एक पारदर्शी उभरी हुई सतह होती है जिसको हम लोग कॉर्निया कहते हैं। तो नेत्र गोलक के आगे के भाग में तो लिखो इसको फटाफट से। तो हम लिखना शुरू करते हैं। तो हम ये लिख रहे हैं यहां पे नेत्र गोलक के नेत्र गोलक के आगे के भाग में
11:38 एक उभरी हुई पारदर्शी परत होती है। कैसी स्टूडेंट्स? एक स्क्लेरा के ऊपर पारदर्शी उभरी हुई परत होती है। में स्क्लेरा के ऊपर स्क्लेरा स्क्लेरा के ऊपर एक पारदर्शी उभरी हुई परत होती है। जिसे कॉर्निया कहते हैं।
12:40 दिख रहा है सबको जिसे कॉर्निया हम लोग कॉर्निया हम लोग कहते हैं। ठीक है? आई होप सबको दिख रहा होगा। कॉर्निया कहते हैं। इसको अगर हटा दें ना प्यूपिल लिखे हुए को तो एक कहते हैं हमारा यहां अगर चलो तो आगे बढ़ेंगे सभी जने फटाफट से
13:44 ये है कुछ नेक्स्ट क्या है स्टूडेंट्स हमारे पास में तो नेक्स्ट हम लोग और आगे बढ़ेंगे इसके बारे में और लिखेंगे और आप बोलेंगे राहुल भैया कैसी फोटो ले आए हो आप तो यहां पर एकदम खतरनाक खतरनाक फोटो फोटो ले आए हो फिल्म की हीरोइन की। अरे क्यों लाया हूं समझ गए? तो ये जो होती है ना अभी अपन परितारिका के बारे में पढ़ेंगे। ये जो रंग बिरंगी होती है काफी लोगों की आंख में। जैसे मेरी आंख में ये जो बड़ा बड़ा वाला गोला है ना ये भूरे रंग का है। काफियों का काला होता है। काफियों का भूरा होता है। कुछ-कुछ लोगों का अलग कलर का भी होता है। और हमारे देश में जो ऐश्वर्या राय जी हैं ऐश्वर्या राय बच्चन जी जो हैं ये भी इस बात के लिए ऐसे फेमस है। इनकी आंख का कलर अलग है। तो उसके बारे में विवरण पढ़ेंगे।
14:32 खैर अभी तो हम लिख रहे हैं दूसरी परत। कि दूसरी परत कौन सी है? दूसरी परत जो अंदर वाली परत है आंतरिक परत। उसके बारे में पढ़ेंगे। आंतरिक परत के बारे में। फिर उसके बाद में हम इस पर भी आएंगे। तो आंतरिक परत का क्या नाम है स्टूडेंट्स? तो आंतरिक परत है हमारे पास में कोरॉइड। है ना? इसको हम लोग कहते हैं कोरोइड या फिर अंग्रेजी को हिंदी करें तो इसको रक्तक बोला जाता है। रक्त तक यह कैसी होती है? काले कलर की होती है। कट काली तो इसको आप देख नहीं सकते। अंदर होती है। पहली बात
15:19 तो देख नहीं सकते। दूसरा क्या होता है? काली क्यों होती है? क्योंकि ये ना आंतरिक परावर्तन को रोकती है। माने लाइट आपकी आंख में अंदर गई। तो अब अंदर भी टिंग टिंग टिंग टिंग टिंग टिंग करती रहेगी। वो तो परावर्तन करके। तो इसलिए काली होती है। काला रंग क्या होता है? परावर्तन नहीं करता। काले रंग में प्रकाश अंदर आ जाता है। तो यहां पे परावर्तन नहीं होता। उससे क्या फायदा होता है? हमारी आंख के अंदर प्रकाश समेधी कोशिकाएं होती हैं बहुत सारी। माने समझो बाहर से रोशनी जा रही है। अगर बहुत ज्यादा तेज रोशनी आंख के अंदर चली जाएगी ना तो अंधा हो जाएगा इंसान। माने वो अंदर के जो कोशिकाएं हैं जो प्रकाश संमेदी है बहुत तेज प्रकाश उन पे पड़ेगा तो वो मर सकती हैं। तो ये अंदर जो प्रकाश आता है वो फिर हमारे पास में स्टूडेंट्स ऐसे अगर मुड़ने की कोशिश करता है तो काले कलर में खप जाता है पूरा। तो अंदर इस तरह से जो कोशिकाएं होती है वह
16:07 खराब नहीं होती। यह है पॉइंट। समझ गए सारे विद्यार्थी इस बात को? तो क्या है हमारे पास में? यह काले रंग की होती है व आंतरिक परावर्तन को रोकती है। यह कोरोइड या जो रक्तक है यह काले रंग की होती है। यह काले रंग की होती है तथा आंतरिक परावर्तन को रोकती है। आंतरिक परावर्तन को रोकती है।
16:53 ये हो गया हमारे पास में पॉइंट। अब इससे क्या होगा? आंतरिक परावर्तन रोकने से इससे जो आंख के अंदर उपस्थित प्रकाश संमेदी हमारे पास में अंग हैं, वह बच जाते हैं। उनको नुकसान नहीं होता। तो एक और पॉइंट हम यह भी लिखेंगे। इससे आंख में उपस्थित इससे आंख में उपस्थित प्रकाश संवेदी अंग अंगों को क्षति नहीं पहुंचती है।
17:52 समझ रहे हैं आंख के अंदर और भी छोटी-छोटी चीजें हैं जो प्रकाश संवेदी हैं। ज्यादा प्रकाश पड़ गया तो तो वो बच जाती हैं फिर। फिर हमारे पास में अब ये तो परतों के बारे में पढ़ लिया अपन ने। फिर इसके बाद हम लोग क्या पढ़ रहे हैं भाई? पॉइंट्स चल रहे थे ना तो अगला पॉइंट है हमारे पास में क्या परितारिका इसको एकदम ऐसे अलग कलर में लिखेंगे अपन भी हां एकदम ऐसे ऐसे स्टार बना करके परितारिका या फिर इसको बोलेंगे आइरिस आइरिस परितारिका या फिर आइरिस परितारिका या फिर इसको को हम लोग बोलेंगे आइरिस क्या है हमारे पास में तो ये जो है एडजस्ट
18:40 हो सकती है आप नोटिस करोगे ना ये बड़ी हो जाती है छोटी हो जाती है और ये क्या करती है देखो समझना थोड़ा समझना इधर आओ ये जो कलरफुल देख रहे हो ब्लू वाली ये इस इंसान के पीली है पता नहीं लेंस लगा लिया और नकली आदमी ने पता नहीं आजकल तो यार लेंस आते हैं आजकल तो लेंस लगा के लोग आंखों का कलर बदलते हैं यार गजब हो यार तुम तो अब समझो इसमें बीच में जो काला वाला छेद है ना जो प्यूपिल है जिसको हम लोग पुतली कह रहे तो प्रकाश इसके अंदर जाता है। तो अब मान लो ज्यादा रोशनी में आ गए आप तो ये पुतली छोटी हो जाती है। ये पुतली छोटी हो जाती है। ये चारों तरफ की जो परितारिका है ये इसको छोटा कर देती है दबा के इसको दबा के छोटा कर देती है ताकि प्रकाश कम जाए। और जब आप अंधेरे वाली जगह पे जाते हो तो वहां पे पुतली बड़ी हो जाती है ताकि फिर प्रकाश उसमें ज्यादा जाए। तो आप नोटिस करना कभी एकदम से आप तेज रोशनी से आप एकदम
19:26 अंधेरे वाले कमरे में यहां घर के अंदर आते हो बाहर धूप से तो काला-काला ही दिख रहा होता है सब कुछ। क्यों? क्यों? क्योंकि पुतली छोटी हो रखी है। क्योंकि धूप में प्रकाश तेज था तो ज्यादा प्रकाश अंदर जाता तो अंदर नुकसान हो सकता था। अब आप अंदर आए हो तो धीरे-धीरे दिमाग समझेगा कि हां यहां पे कम है रोशनी। तो फिर वो पुतली को थोड़ा बड़ा करेगा, बड़ा करेगा, ज्यादा प्रकाश आएगा तो फिर आपको सही दिखने लग जाएगा उसमें। तो आप देख के देखो कि कितना शानदार जो है शरीर हमारा बना हुआ है। एक नंबर मतलब कोई कमी नहीं है इसमें। तो परितारिका क्या है? पुतली के चारों ओर एक मांसपेशीय डायफ्राम है। ये क्या है? पुतली के चारों ओर एक मांसपेशीय डायफ्राम बोलते हैं इसको। पुतली के चारों ओर
20:16 एक मांसपेशीय डायफ्राम है। पुतली के चारों तरफ एक मांसपेशीय डायफ्राम है। देखो डायफ्राम क्या है जो एडजस्ट हो सकता है। आप यूं समझो मांसपेशियों से बना हुआ है। जैसे डायफ्राम यहां पेट में भी है अपना इधर है ना? ना तो ये ऊपर नीचे ऊपर नीचे हो सकता है ऐसे तो यहां पर ये भी एडजस्ट होता है और ये पुतली को जो है उस छेद को बड़ा छोटा बड़ा-छोटा करता है। यहां तक सब जने समझ गए क्या? सिंपल है। देखो बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं है। कोई अपन बहुत भारी चीज नहीं पढ़ रहे। नेक्स्ट अपन लिखेंगे पुतली के आकार को नियंत्रित करती है। ये जो परितारिका है हमारे पास में
21:03 इसकी सबसे खास बात क्या है? यह पुतली के आकार को नियंत्रित करती है। तो हम लिखेंगे परितारिका पुतली के आकार को नियंत्रित करती है। समझ गए? एक पॉइंट ये हो गया हमारे पास में। और यह जो अब आप देख रहे होगे आपके मन में भी होगा कि इसका कलर अलग-अलग होता है। तो एक हमारे शरीर में एक पिगमेंट होता है। वर्णक पिगमेंट अंग्रेजी शब्द है। वर्णक
21:51 हमारे पास में हिंदी शब्द है। वर्णक माने रंग देने वाला। तो वर्णक अगर अलग-अलग है तो इस परितारिका का कलर भी अलग-अलग हो सकता है। जैसे कि बालों के लिए भी पिगमेंट है। तो किसी के कलर अंग्रेज जो लोग हैं उनके भूरे से कलर होते हैं बाल। अपने काले होते हैं। किसी के थोड़े भूरे होते हैं। तो बाल तो चलो इतने तरह के ही होते हैं। या फिर सफेद हो जाते हैं। काफियों के तो बाल है ना वो तो बुड्ढे हो जाते हैं। तो पिगमेंट चला जाता है। पिगमेंट में वरना एक केमिकल है वो चीज अगर खत्म हो जाएगी तो सफेद सफेद हो जाएंगे। फिर तो ऐसे ही आंख के लिए भी पिगमेंट है और हमारी त्वचा के लिए भी कोई ज्यादा गोरा है, कोई थोड़ा सांवरा है, किसी का कलर थोड़ा सा ज्यादा डार्क है। ऐसा तो पिगमेंट से होता है। तो वर्णक के आधार पर इसका अलग-अलग लोगों में अलग-अलग रंग होता है। तो वर्णक के आधार पर भिन्न-भिन्न रंग की होती है। समझ गए सब इस
22:37 बात को? भिन्न-भिन्न लोगों में इसका रंग अलग-अलग होता है। तो ये लाइन तो बड़ी है। यहां पर आएगी नहीं। तो अपन अगले पेज पर ही लिख लेंगे क्या अपन फटाफट से? तो अपन एक काम करते हैं फटाफट से नेक्स्ट पेज पर ही लिख लेते हैं। तो हम लोग यहां कह देंगे हम यहां कह देंगे वर्णक के आधार पर। तो वर्णक को अंग्रेजी में हम लोग कहते हैं पिगमेंट। पिगमेंट के आधार पर भिन्न-भिन्न लोगों में
23:27 इसका रंग इसका रंग अंग भिन्नभिन्न हो सकता है। समझ गए क्या सारे विद्यार्थी इस बात को? यह हमारे पास में हो गया परितारिका का काम। अब हमारे पास में नेक्स्ट है पुतली। जो छेद है ना छोटा सा वह तो नेक्स्ट पुतली का लिख लो फटाफट से। तो फटाफट से अगली हम लोग पॉइंट बनाएंगे पुतली। पुतली को अंग्रेजी में आप लोग बोलते हैं प्यूपिल। इसका एक और नाम हम लोग दे सकते हैं अगर चाहे तो। वो है परिवर्तनशील छिद्र।
24:20 देखो पुतली खुद में कुछ है नहीं। समझो एक छेद है। भाई फिर आप बोलोगे फिर राहुल भैया ये काला क्यों दिख रहा है? देखो परितारिका का कलर कुछ भी हो उतनी तो काली दिखती है आपको। यह समझो यह बीच वाली जो है ना इसकी बात कर रहे हैं अपन। यह तो काली होती है सबकी। तो कुछ है ही नहीं असल में भाई आंख अंदर से काली है। अंदर से काली है ताकि परावर्तन अंदर ना हो। अंदर के अंदर प्रकाश टकरा टकरा करके ऊपर नीचे ना हो। समझ गए सजन इस बात को? तो यह चीज अंदर से काली है। इसीलिए वो छेद के अंदर आपको कुछ दिख नहीं रहा है। काला दिख रहा है। तो इस छिद्र को हम लोग पुतली कह रहे हैं। समझ गए सब जन इस बात को? एक विद्यार्थी कह रहे हैं कि सर हमारे स्कूल में भी हमारे सारे इस चैप्टर को करा
25:06 चुके हैं। और लगभग ऐसे ही नोट्स बनवाए हैं उन्होंने। तो वापस बनाने की जरूरत है क्या? कोई बात नहीं रिवाइज़ कर लो। और आपको लगे तो स्कूल की ही कॉपी में एक दो पॉइंट ऐड कर देना कि राहुल भैया ने और बता दिए थे एक्स्ट्रा तो वहां लिख देना कोई दिक्कत नहीं। आपको लग रहा है जरूरत नहीं है मत बनाना। देखो हमारा उद्देश्य है लिखना माने रटना नहीं है। कॉपियां भरना नहीं है। हमारा उद्देश्य है समझना और समझ के याद कर लेना। समझ गए तो याद हो गया अपने आप। फिर आपको लिखने की उसको वापस जरूरत नहीं है। ये है बात। तो ये प्यूपिल हो गया हमारे पास में परिवर्तनशील छिद्र। तो इसको आगे लिखेंगे। पुतली से होकर प्रकाश अभिनेत्र लेंस में प्रवेश करता है। माने पुतली के पीछे ये जो छेद है ना समझना इस बात को। ये जो छेद है इसके पीछे लेंस है। यहां से लाइट जाती है सीधा लेंस पे। तो हमारी आंख
25:52 का लेंस जिसको अभिनेत्र लेंस बोला जाता है। माने नेत्र में आगे की तरफ जो लेंस है अभिनेत्र लेंस। तो जो अभिनेत्र लेंस है यहां से प्रकाश जाता है। फिर वो अभिनेत्र लेंस में जाता है। तो पुतली से होकर के प्रकाश अभिनेत्र लेंस में प्रवेश करता है। तो हम लोग क्या लिखेंगे स्टूडेंट्स उसको? तो हम लोग लिखेंगे पुतली से होकर के प्रकाश अभिनेत्र लेंस में प्रवेश करता है।
26:38 अभी अपन एक ऐसा चित्र बनाएंगे जिसमें हम लोग यह अभिनेत्र लेंस वगैरह भी बना करके दिखाएंगे आंख के अंदर। अगला पॉइंट है हमारे पास में पुतली आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है। तो जो हमारे पास में पुतली है वो छोटी बड़ी हो जाती है। तो इससे अंदर जो जाने वाला प्रकाश है वो कंट्रोल होता है। पुतली छोटी हो जाती है तो प्रकाश कम जाता है अंदर। पुतली खींच के बड़ी हो जाती है तो प्रकाश अंदर ज्यादा जाता है आंख में। बात तो वही है ना कि यह जो परितारिका है यह उसके साइज को कंट्रोल करती है। तो हम क्या लिखेंगे? पुतली आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है। पुतली आंख में प्रवेश करने वाले।
27:40 प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है। ये है हमारे पास में। अब अगर किसी को डाउट हो तो यूं समझ लो। ये जो बीच वाला छेद है ये है आपकी पुतली। ठीक है? ये जो कलरफुल है ये है परितारिका। और ये जो सफेद है ये है आप लोगों के पास में क्या? ये है स्क्लेरा। स्क्लेरा। ठीक है? और इस पर एक अदृश्य परत है जो दिख नहीं रही है अपन को। अपन उसको किसी और
28:27 तरीके से बना लें। क्या एक वो नहीं होता? हाईलाइटर है तो सही यार उसमें है तो सही। बना के देखते हैं। इसके ऊपर ये एक ऐसी परत है जिसको हाइलाइटर हम लोग कह रहे हैं। यह पूरे पर ही है। समझ गए सभी ने? इस तरह की एक परत। तो ये अदृश्य जो परत है ये आप लोगों के पास में इसको मैं वाइट बनाता हूं। ब्लूइश बनाता
29:12 हूं। वाइट बनाते हैं। ठीक है? तो ये जो परत है स्टूडेंट्स ये परत ही क्या है आप लोगों के पास में? कॉर्निया। यह दिखती नहीं है ना? अदृश्य है। माने पारदर्शी इसके आरपार दिख जाता है अपन को। तो यह पूरे पर यहां पर बनी हुई है एक परत। तो अब आप समझ गए होंगे कि कौन सी चीज क्या है। ये चीज आप लोगों को क्लियर हो गई होगी। समझ गए सब जन इस बात को? फटाफट से मेरे को बता दो। थम्स अप कर दो। बढ़ जाते हैं हम लोग आगे। फटाफट से। तो स्टूडेंट्स नेक्स्ट हमारे पास में क्या है? अभिनेत्र लेंस की बात करेंगे। इसके बाद में हम लोग लेंस की बात करेंगे। आंख के लेंस की बात करेंगे।
29:59 फिर अपन इसका चित्र बनाएंगे। सिंपल सी बात है। कोई बहुत ज्यादा बचा नहीं काम अपने पास। चलो तो अब हमें पढ़ना है अभिनेत्र लेंस के बारे में। अभिनेत्र लेंस। अभिनेत्र लेंस आंख का जो लेंस है उसको अभिनेत्र लेंस बोलते हैं। प्रकाश वाले सर ये कॉर्निया हटती तो नहीं है। ये इंटरेस्टिंग चीज है। मैं आपको जब आंखों के जो वो बताऊंगा ना चलो अभी बताता हूं। अब आपने पूछा है तो अभी बताता हूं। एक चीज होती है दृष्टि वैशम्य या इसको बोला जाता है एस्टिगमेटिज्म।
30:45 अंग्रेजी में एस्टिगमेटिज्म या फिर दृष्टि वैश में बोलते हैं। क्या होता है? जो हमारा कॉर्निया होता है ना जो ऊपर वाली अदृश्य परत होती है। यह परत में प्रकाश का अपवर्तन बहुत ज्यादा हो जाता है। 80 90% अपवर्तन यहीं हो जाता है। माने प्रकाश मुड़ जाता है इसी में ही। लेंस में कम मुड़ता है। इसी में मुड़ जाता है। तो ये बहुत इंपॉर्टेंट चीज है। तो अगर बहुत ज्यादा आंखें कोई मसलता है ना तो यह खराब हो जाती है। यह टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है। समझ रहे हो इस बात को? तो दृष्टि वैश में होता है। फिर देखने में दिक्कत आती है। या फिर जो लेजर सर्जरी होती है चलो मैं उसका बताऊं आपको। तो लेजर सर्जरी से आंखें ठीक करते हैं। पता है आप लोगों को? तो लेजर सर्जरी से क्या करते हैं? ये जो हमारे पास में कॉर्निया की जो परत होती है इस कॉर्निया की परत में इस कॉर्निया की परत में या तो छेद बनाया जाता है या फिर ऐसे उभार साइड में से घिस दिया जाता है। उस
31:30 कॉर्निया की परत को ही लेंस के जैसा बना देते हैं। जो कॉर्निया की परत है उसे ही लेंस के जैसा बना देते हैं। समझ रहे हो इस बात को? तो आंखें ठीक हो जाती हैं। फिर ये है पॉइंट कहने का। सर हमारे आंख में रोते समय आंसू कैसे आते हैं? यार रोते समय वही है ना कि यहां पे वो टियर ग्लैंड्स होती हैं। जैसे हमारे शरीर में अलग-अलग ग्रंथियां हैं तो वैसे ही आंखों में टियर ग्लैंड्स हैं यहां पे तो वो उनमें से आंसू निकलते हैं। तो वो आंसू एक तो क्या है कि भ आंख को नम रखते हैं ना। वो जो पानी है वो आंखों को मॉइस्चर देता है। आंखें सूखी भी नहीं होती। अपनी ध्यान दो ताकि पलकेवलके आराम से ऐसे जबजब कर सकें। उसके अलावा उसको नरिश करने का भी वो थोड़ा काम ऐसे कर देती है। तो वो आंसू आते हैं। अब वो कनेक्शन कहीं और भी जुड़ा हुआ है। दिल टूटता है तो फिर थोड़े आंसू डुक डुगु डुग करके गिरते हैं। एकदम आंसुओं का स्वाद
32:15 कैसा होता है? ये तो बताना यार एक बार। तुम लोग तो एक्सपर्ट लोग हो। बहुत रोएगे पिटेगे घर वालों से। रोते पीटते हुए जो है आंसू स्वाद भी ले लिया होगा आंसुओं का तुमने। जी बोले राहुल भैया मस्ती कर लो आप। चलो आ जाओ। तो क्या है? पुतली और परितारिका के पीछे होता है। अभिना अभिनेत्र लेंस कहां पर होता है स्टूडेंट्स? यह पुतली और परितारिका के पीछे होता है। पुतली एवं परितारिका के पीछे होता है। देखो इधर आओ। कम हियर। ये आंख है। ये आपके
33:05 पास में आगे यहां पे एक परत है। अभी अपन इसको बड़ा बनाएंगे। चित्र को टेंशन वाली बात नहीं है। तो इसमें कॉर्निया है। फिर उसके बाद में ये आंख आगे की तरफ उभरा हुआ भाग है। ये जो इधर वाला इधर जो देखते हैं ना जहां से अपन वो थोड़ा उभरा हुआ होता है। तो हल्का सा उभरा हुआ भाग है। फिर इसके बाद में यहां पर हमारे पास में परितारिका है। ये छोटा सा छेद है जिसको हम लोग पुतली बोलते हैं। पीछे उसके लेंस है। ये लेंस दिख रहा है आपको। तो जो लेंस है परितारिका और पुतली के पीछे होता है। माने जो काला खड्डा दिख रहा है और जो कलरफुल आपको वो दिख रहा है उसके जस्ट पीछे क्या है आपके पास में आंख का लेंस है जो कि एक उत्तल लेंस होता है हमारे पास में पारदर्शी होता है क्रिस्टलीय संरचना इसकी हमारे पास में होती है पारदर्शी माने आरपार दिखता है इसके हमारे पास में यह पारदर्शी होता है यह
33:52 पारदर्शी होता है यह पारदर्शी होता है तथा इसकी संरचना क्रिस्टलीय होती है। इसकी संरचना क्रिस्टलीय होती है। यह पारदर्शी होता है, ट्रांसपेरेंट होता है। इसकी संरचना क्रिस्टल के जैसी होती है। ठीक है? फिर उसके बाद में क्या है? हमारे पास में ये बंधा हुआ कैसे रहता है? तो देखो इसमें पीछे क्या होता है? हमारे पास
34:37 में पक्षमाभ पेशियां होती है। माने कुछ मांसपेशियां होती हैं। फिर उनसे कुछ धागे बंधे हुए होते हैं। तो वो धागे जो हैं इस लेंस को पकड़ करके रखते हैं। अपनी स्थिति में इसको बना करके रखते हैं। जिनको निलंबन स्नायु बोला जाता है। निलंबन स्नायु बोलते हैं। या फिर आप पक्षमा पेशी भी कह सकते हो। तो ऐसी कोई टेंशन वाली बात नहीं। लेकिन असल में पक्षमाभ पेशियों के आगे निलंबन स्नायु होते हैं। जोन्युलर फाइबर्स ऐसे तो वो उसको पकड़ करके रखते हैं। तो क्या है? निलंबन स्नायु की सहायता से यह अपनी स्थिति में बंधा रहता है। किसकी सहायता से? असल में कौन है? निलंबन स्नायु। मैं आपको कल चित्र ला के दिखा भी दूंगा कि निलंबन स्नायु क्या होता है? कहां होता है। निलंबन स्नायु की सहायता से
35:24 अपनी स्थिति में बना रहता है। यह निलंबन स्नायु की सहायता से अपनी स्थिति में बना देता है। अपनी स्थिति में बंधा रहता है। समझ गए क्या सारे विद्यार्थी इस बात को ये ऐसे
36:11 बंधन बंधा रहता है। अब अपन चित्र बना लें फटाफट से। इसका अपन चित्र बना लेते हैं जो कि हमारे पास में अंतिम है। बाकी तो अपन ने पढ़ लिया कि संरचना कैसी होती है। फिर हमें बस यह पढ़ना रहेगा कि यह काम कैसे करता है? संरचना कैसी है? ये अपन ने पढ़ लिया है। बस इसका चित्र बना रहे हैं। पेंसिल उठा लो हाथ में फटाफट से। क्रिस्टलीय क्या होता है? देखो प्रकृति में काफी सारे पदार्थ क्रिस्टल के जैसे होते हैं। जैसे नमक नमक के क्रिस्टल होते हैं। क्रिस्टल देखा है आपने? जैसे मान लो हमारे पास में फिटकरी होती है तो क्रिस्टल होते हैं ना उसके इतने बड़े-बड़े टुकड़े होते हैं ढलेल्ले होते हैं इतने बड़े-बड़े और उसके अलावा नमक के भी ऐसे क्रिस्टल्स होते हैं या इस तरह से जो क्वार्ड्स होते हैं सिलिका के ऑक्साइड मिट्टी के जो ऑक्साइड जो कांच है तरह से एक तरह से उसकी संरचना
36:57 कैसी है क्रिस्टलीय संरचना क्रिस्टल की जैसी संरचना क्रिस्टल माने जो आपको आरपार दिखाने में हेल्प कर रहे हैं आप यूं समझ सकते हो एक बार के लिए 12थ क्लास में पढ़ते हैं इसको अवस्था के बारे में कि ठोस पदार्थों में क्रिस्टलीय संरचना होती है माने उनके अंदर की व्यवस्था ऐसी होती है कि उनके आरपार आप देख पाते हो। समझ गए सारे विद्यार्थी? सर मैंने चैप्टर नाइन नहीं पढ़ाया तो मुझे चैप्टर पढ़ने में प्रॉब्लम तो नहीं होगी? नहीं होगी। एक जगह पर होगी वहां जो मैं बोलूं वो मान लेना। एक जगह पर थोड़ी सी दिक्कत हो सकती है। तो वहां जो मैं बात बोलूं उसको मान लेना। बस इतनी सी बात है। बाकी कहीं कोई दिक्कत नहीं आएगी। सर इसकी संरचना क्रिस्टली होती है तो ये चुभती क्यों नहीं? अरे भगवान की व्यवस्था है रे। है ना? तो ऐसे चुभ चुभने चुभेगी तब ना जब
37:43 वो कहीं घुस रही है। कहीं दूसरी जगह जाकर घुस रही है तब चुभेगी। अब ऐसे तो नाखून भी तीखे होते हैं तो भैया चुभते क्यों नहीं है? चुभओगे तो चुभेंगे ना। समझ गए? वन शॉट होगा प्रकाश वाले चैप्टर का। अभी तय नहीं किया है कब होगा। जब होगा पता चल जाएगा आपको। चलो आंख की संरचना बनाएंगे फटाफट से। तो कैसे बनानी है आपको एक ऐसे फिर ऐसे संरचना बनानी है। इसको थोड़ा सा टेढ़ा बनाएंगे ना तो बढ़िया मजा आएगा। एकदम इस तरह की आपको एक संरचना बनानी है। इस तरह की समझ गए क्या सारे विद्यार्थी इस
38:30 बात को? गोलाकार ही है और लगभग यहां थोड़ा सा उसको मोड़ दिया हमने जानबूझ के और पीछे कुछ ऐसे जा रहा है पूछड़ी ये पूछ क्या है इसको अपन देखने वाले हैं तो इसकी हमारे पास में दो परतें हैं एक अंदर वाली परत है एक बाहर वाली परत है तो एक दूसरी परत भी चलो बना ही लेते हैं अपन तो हमारे पास में एक दूसरी परत भी हम लोग बना लेते हैं ये वाली कौन सी देखो सर पहले यहां पर एक और लेयर इसमें बना रहे हैं एक काम कर सकते हैं। मस्त आईडिया है। तुम लोग तो हाथ से बनाओ पेंसिल से। मैं इसकी फोटोकपी कर लेता हूं और उसको छोटा कर लेता हूं।
39:15 हम
40:07 हो गया। एकदम बढ़िया। ये लो इसकी दो परतें मैंने बना दी यहां पर। ठीक है स्टूडेंट्स? दो लेयर्स इसकी बन गई। एक परत है फिर एक दूसरी परत है। तो सबसे बाहर वाली परत जो है उसका नाम क्या है हमारे पास में? तो जो सबसे बाहर वाली परत है वह है स्क्लेरा। यह वाली जो परत है यह है स्क्लेरा। और जो भीतर वाली परत है वह काले कलर की है। दिखती नहीं है आंख से। उसका नाम क्या
40:54 है? तो उसका नाम है रक्तक या फिर कोरोइड। कोरॉइड बोलोगे या फिर उसको आप रक्तक बोलोगे। तो अब इसमें क्या-क्या है हमारे पास में? यह आपका नेत्र का आपको व्यवस्था दिख रही है। अब इसमें एक और परत है जो कि सबसे बाहर है। एक और परत है जो सबसे बाहर है। ये वाली परत। तो ये वाली परत कौन सी है स्टूडेंट्स? ये है आप लोगों के पास में कॉर्नियम।
41:42 क्या है? यह वाली परत है कॉर्निया या फिर स्वच्छ मंडल। ठीक है साहब? अब हम एक बार बनाते हैं अभिनेत्र लेंस। समझो ये है आप लोगों के पास में मान लो अभिनेत्र लेंस। आंख का लेंस जो कि एक कौन सा लेंस होता है? उत्तल लेंस होता है। ठीक है? तो यहां पर मान लेते हैं यह हमारे पास में है। अभिनेत्र लेंस।
42:27 ये है आपके पास में अभिनेत्र लेंस। अब क्या है? हमारे पास में जो परितारिका है जो कलरफुल है। कलरफुल भाग जो है वह इसके ऊपर रहता है। अब यार इसको जोड़ना भी है थोड़ा सा। तो थोड़ा सा लेंस को क्या आगे खसकाना पड़ेगा मेरे को। तो जोड़ने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। तो अपन इसको थोड़ा सा आगे खसका लेते हैं। ठीक है? इस तरह से इसको आगे खसका लेते हैं। देखो
43:12 ये अपन यही वाला चित्र बना रहे हैं जो किताब में बना हुआ है ना अपन यही वाला चित्र बना रहे हैं। एग्जैक्टली तो यहां देखो क्या है हमारे पास में? थोड़ा सा ठीक है। थोड़ा सा डिफरेंट बनेगा। इतना चल जाएगा अपने को। इतनी कोई समस्या वाली बात नहीं। तो अब वो कलरफुल वाला हिस्सा बनाना है मेरे को। तो ये कलरफुल वाला हिस्सा ऊपर से लटक के ऐसे कुछ इसके सामने रहता है और यहां से भी समझ गए? ऐसे। तो यह जो कलरफुल वाला भाग है इसका नाम क्या है आप लोगों के पास में?
43:59 इसका नाम है परितारिका। परितारिक आइरिस ब्लू कलर का है ना तो इसलिए बनाया भी मैंने ब्लू ही है। अच्छा अब इसके बीच में आप देख पा रहे हो ना अगर तो ये है आपका प्यूपिल काले कलर का खड्डे जैसा जो दिख रहा है ना गोल। अब इसको तो मैं क्या ड्रॉ करूं बताओ? खड्डा ही है वो तो। तो खड्डे को तो अपन क्या ही ड्रॉ करेंगे? तो उसी को ही हम लोग क्या कहते हैं? यह हमारे पास में है जो छिद्र है छोटा सा ये कहलाता है पुतली। आंख की पुतली है ये।
44:44 पुतली। प्यूपल। ये है प्यूपिल। अब थोड़ा सा देखो ध्यान सा कि ये जो लेंस के जो पीछे वाला हिस्सा है ना लेंस के पीछे वाला जो ये हिस्सा है ये क्या है आप लोगों के पास में हिस्सा स्टूडेंट्स तो ये हिस्सा है पश्च खंड पश्च खंड को अंग्रेजी में पोस्टीरियर चेंबर हम लोग बोलते हैं। पोस्टीरियर चेंबर इसको हम लोग बोलते हैं। और यह वाला जो हिस्सा है देखना समझना भाई कमरे के दो टुकड़े हो गए एक लेंस के पीछे और एक लेंस
45:29 के आगे यह छोटी सी जगह देख रहे हो यहां पे बीच में ये वाला जो खंड है ये वाला जो हिस्सा है इसका नाम आया हमारे पास में क्या अग्रिम खंड या एंटीरियर चेंबर उसको हम लोग बोल सकते हैं छोड़ो कलर तो ज्यादा क्या ही लेवे अपन यह हो जाएगा हमारे पास में अग्रिम खंड या इसको हम लोग बोलेंगे अंग्रेजी में पोस्टीरियर चेंबर एंटीरियर चेंबर आगे वाला चेंबर एंटीरियर चेंबर
46:17 समझ समझ गए? यह वाला जो कमरा है। अब इस एंटीरियर चेंबर में एक लिक्विड भरा हुआ है। इसमें एक लिक्विड भरा हुआ है। एक द्रव भरा हुआ है। खाली नहीं होता। इसका नाम है एक्वस ह्यूमर। या फिर इसको आप लोग बोलेंगे नेत्रोध। नेत्रोध। इसको बोलते हैं हम लोग या फिर इसको बोलते हैं एक्वस ह्यूमर। अंग्रेजी नाम है इसका ए
47:02 क्यू यू ओ यू एस ह्यूमर एच यू एम ओ आर नेत्रोद या फिर एक्वस ह्यूमर यहां पर कुछ आगे हमारे पास में भरा हुआ रहता है। कोई लिक्विड भरा हुआ रहता है। अब उसके बाद एक बात आई कि ये जो हमारे पास में ये लेंस है ये बंधा हुआ कैसे है? तो ये बंधा हुआ है निलंबन स्नायु से। किससे? निलंबन स्नायु से। तो यहां पर छोटे से थोड़े से धागे हैं पतले-पतले से। ये तो ज्यादा मोटा हो गया। थोड़ा सा पतला बनाते हैं अपन। यहां कुछ एक पतले से ऐसे धागे हैं। वो बंधे हुए हैं आगे किससे? निलंबन स्नायु से। किससे बंधे हुए हैं स्टूडेंट्स? निलंबन स्नायु से। तो अपन कोई कलरफुल ही ले लेते हैं। निलंबन स्नायु को इसी कलर का
47:48 बना देते हैं अपन। तो यह कुछ इस तरह से निलंबन स्नायु है। डार्क कर लो इसको थोड़ा सा। ये इनसे टिके हुए हैं। इनको हम लोग बोलते हैं स्टूडेंट्स पक्षमाभ पेशियां क्या बोलते हैं इनको? पक्षमाभ पेशियां। पक्षमा
48:34 पेशियां। ये हैं क्या? पक्षमा पेशियां। तो पक्षमा पेशियों के लिए अंग्रेजी में कोई शब्द है क्या हमारे पास में? कॉर्निया, स्वच्छ मंडल, पुतली, परितारिका। बहुत बढ़िया। पक्षमा पेशियां इनका नाम मेरे को ध्यान नहीं आ रहा अंग्रेजी में तो अभी बता दूंगा मेरे को जैसे ही ध्यान आएगा तो यह हो गया हमारे पीछे अब जो पीछे वाला भाग है ये वाला भाग ये भी खाली नहीं होता इसमें भी कुछ ऐसा कुछ पदार्थ भरा हुआ होता है और इसको हम लोग बोलते हैं काचाभ द्रव क्या बोलते हैं स्टूडेंट्स काचाभ द्रव या इसको अंग्रेजी अंग्रेजी में हम
49:20 लोग विट्रस ह्यूमर बोलते हैं। विट्रस ह्यूमर ये हमारे पास में इसमें रहता है विट्रस ह्यूमर। ठीक है? एक्वस ह्यूमर आगे विट्रस ह्यूमर हमारे पास में पीछे रहता है इसमें। अच्छा ठीक है। अब क्या होता है? तो यहां पर हमारे पास में प्रकाश संवेदी कोशिकाएं होती हैं बहुत सारी। अब यह दरअसल कोशिकाएं दो तरह की होती हैं। कितने तरह की होती हैं? यहां पर पीछे इस पर पर्दा है जिस पर प्रतिबिंब बनता है। हमें दुनिया दिखती है। तो इस पर दो तरह की कोशिकाएं होती हैं स्टूडेंट्स। रोड शेप और कोन शेप की। खैर वो इतना हमारी
50:06 पाठ्यपुस्तक में उसकी चर्चा नहीं की गई है। तो मैं केवल बना करके उसको छोड़ रहा हूं। ठीक है? मैं केवल बना करके उसको छोड़ रहा हूं। ऐसे ड्र्रा करके इसी पर यह जो कोशिकाएं है ना यही प्रकाश के प्रति संवेदनशील है और यही सूचना को आगे मस्तिष्क तक भेजती हैं। इस तरह से तो यह जो पूरा आप ऐसे लिख सकते हो कि यह क्या है? दरअसल यह प्रकाश संवेदी कोशिकाएं हैं। प्रकाश
50:52 संवेदी कोशिकाएं। फिर उसके अलावा यह जो पीछे वाला पर्दा है यह पूरी जो दीवार है इसको हम लोग रेटिना बोलते हैं जहां पर प्रतिबिंब बनता है रेटिना रेटिना का और कोई नाम होता है क्या रेटिना को दृष्टि पटल हम लोग अंग्रेजी में हिंदी में कहते हैं। अंग्रेजी में तो रेटिना है। हिंदी में इसको दृष्टि पटल हम लोग बोलते हैं। ठीक है स्टूडेंट्स? क्या है ये चीज? दृष्टि पटल है। यह है रेटिना या फिर दृष्टि पटल। इज इट क्लियर? समझ गए क्या सभी ने इस बात को? अब यहां पर क्या है हमारे पास में? ये जो पूरी सूचना होती है ना यहां से तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं
51:38 जो उस सूचना को आगे लेकर के जाती हैं मस्तिष्क की तरफ। तो ये सूचना मस्तिष्क की तरफ लेकर के जाती हैं। सूचना मस्तिष्क की ओर। मस्तिष्क की ओर सूचना जाती है और यह जो सूचना ले जाने वाले पाइप हैं पाइप नहीं कोशिकाएं होती है तंत्रिका कोशिकाएं ये होती है हमारे पास में तंत्रिका कोशिका या इसको हम बोलते हैं त दिक्त तंत्रिका दृक माने जो देखने में हेल्प कर रही है दृक तंत्रिका दृक तंत्रिका ऐसे ऑप्टिकल नर्व अंग्रेजी में इसको हम लोग कहते हैं ऑप्टिक िकल
52:24 नर्व ये है ऑप्टिकल नर्व समझ गए क्या सारे विद्यार्थी इस बात को तो सब कुछ अपन ने लगभग देख लिया इसमें कुछ छूट तो नहीं रहा है ना सब कुछ हमने देख लिया कुछ नहीं छूट रहा ये हमारे पास में आंख का चित्र जो परीक्षा में बनाने को आ सकता है चलो तो यार तुम भागो फटाफट से तुम्हारी दूसरी कक्षा का समय हो गया है तो हम मिलेंगे देखेंगे कल की कक्षा में सिलियरी मसल्स पक्षमा पेशियों को अंग्रेजी में कहते हैं सिलियरी मसल्स आदर्श ने याद दिला दिया बहुत ही बढ़िया शानदार तो जय हिंद जय भारत बोलेंगे वंदे मातरम बोलेंगे देखो ये बोला एक स्टूडेंट कह रहा है सर रक्तक में और रेटिना में क्या डिफरेंस है तो रक्तक तो पूरी परत है पूरी आंख के अंदर की लेकिन
53:11 जहां पर बहुत सारी ये वाली कोशिकाएं हैं पीछे की तरफ जहां पर चित्र बनता है किसी चीज का वो पूरी सतह को रेटिना बोलते हैं जहां पर चित्र बनता है पूरी आंख अंदर से तो रक्त तक लेकिन जहां चित्र बनता है उसको हम रेटिना बोलते हैं। बाय-ब जय हिंद।