0:00 बहुत-बहुत धन्यवाद सभी को और बिना देरी किए हम चलते हैं डॉक्टर साहब के पास। ज्यादा से ज्यादा हम लाभ ले आज इस सत्र का आखरी दिन है। वैसे आखरी नहीं हम तो शुरू कर रहे हैं अभी डॉक्टर साहब के साथ जुड़ाव को पर इस सत्र का आखरी दिन है। तो पधारिए स्वागत है आपका। नमस्कार सबको सब दिव्या आत्माओं को मेरा बहुत-बहुत नमस्कार। आप सब पुण्य आत्मा है जो आपको सुबह सुबह इतना बढ़िया प्रसाद मिलता है
0:46 नहीं तो चारों तरफ आप देखते हैं कि लोग कितने भटकते जा रहे हैं। तो कल मैंने जो पांच पेट्रोल की टंकियों की चर्चा की थी तो आज नहीं तो कल अगर आपको सचमुच दुख से, तनाव से, चिंता से, भय से मुक्त होने का शौक है क्योंकि इसकी प्यास चाहिए। सबसे बड़ी बात वो है और मैं इस चीज को इसलिए प्राप्त कर पाया क्योंकि मेरे भीतर एक प्यास थी कि दुख क्यों जीवन में? क्यों हम परम आनंद में जी नहीं सकते हर मुख पल। तो बस इसी प्यास ने मुझे यहां तक पहुंचा दिया।
1:32 तो आपके अंदर भी प्यास होगी कि यार इस संसार में मुझे परम आनंद में जीना है। परमात्मा के साथ जीना है। तो फिर आप अपने भीतर जाएं ध्यान करें। जैसे अभी आप कर ही रहे थे ध्यान। पर इसमें एक बात थोड़ा सा ख्याल जरूर रखें कि जब हम ध्यान करते हैं और रोज करते हैं, कई दिनों तक करते हैं, कई सालों तक भी करते हैं। पर इस बात की जागरूकता जरूर रखें कि हमारे अंदर अभी भी पेट्रोल की टंकियां कितनी बची हुई है। क्योंकि मैं तो कई हजारों ध्यानियों से मिलता रहता हूं। पता चलता है कि अभी भी उनकी प्रतिक्रियाएं समाज के प्रति परिवार के प्रति
2:20 अपने प्रति समाप्त नहीं होती। समय आने पर प्रतिक्रियाशील हो ही जाते हैं। अभी भी अटैचमेंट, अभी भी अहंकार यानी कि सूक्ष्म स्तर पर भी सही और अभी भी लोगों की तुलना करना मतलब ये सब चीजें चलती रहती है। तो ध्यान का अर्थ है कि इस इस पुल या इस पार से उस पार चला जाना। इसलिए तो तीर्थंकर कहा गया कि उस पार तीर्थ कर चले जाना। लेकिन अगर हम ध्यान करते करते उस पार नहीं जा पा रहे और पुलिया पर अटक के वापस नीचे आ जाते हैं तो फिर वो एक आदत पड़ जाएगी और आप सालों तक ऐसे ही करते रह जाएंगे तो एक बार
3:06 ध्यान की गहराइयों में चले जाए जैसे कि आपको यहां गाइड किया जा रहा है और बस उस पर जंप कर दें बस एक बार जैसे भगवान बुद्ध ने किया महावीर ने किया एक बार में जंप कर लिया ये ये लंबे समय तक घसीटते रहने को ध्यान नहीं कहते ये ध्यान में रखना। तो इसीलिए आपने आपको बहुत अच्छा प्रसाद मिला है ध्यान का और आज हम हेल्थ और न्यूट्रिशन के ऊपर चर्चा करेंगे। हेल्थ और न्यूट्रिशन पे चर्चा करने से पहले मैं एक शेर सुनाना चाहता हूं। एक बार रास्ते में भगवान मिल गए मुझको। तो
3:51 मैंने सोचा चलो मैं भी भगवान से पूछ ही लेता हूं। तो पूछ बैठा हे प्रभु पूछ बैठा हे प्रभु क्या हुई तुमसे भूल कभी पूछ बैठा हे प्रभु क्या हुई तुमसे भूल कभी खूब दुख से भर के बोले प्रभु जी खूब दुख से भर के बोले हुआ मुझे एहसास भी मेरे कृति की इस तरह उड़ाएंगे मजाक सभी मेरे कृति की इस तरह उड़ाएंगे मजाक सभी भूल कर भी नहीं रचूंगा धरती पर मानव कभी तो भगवान कहते हैं भैया एक गलती हो गई कि मैंने मानव पैदा कर दिया क्योंकि उसने मेरी पूरी धरती को इधर अस्तव्यस्त कर दिया उसने शरीर को उसने अस्तव्यस्त कर दिया मन को उसने अस्तव्यस्त कर दिया आत्मा को अस्तव्यस्त
4:38 कर दिया तो इसीलिए परमात्मा कहता है भैया गड़बड़ सारी मानव ने कर दी बाकी 84 लाख योनिया बेचारे नियम से अपने अपने अनुसार जिए जा रहे हैं तो दोस्तों आज हम इस शरीर के बारे में चर्चा करेंगे और स्वास्थ देखिए हेल्थ और न्यूट्रिशन जो दो विषय है ना यह ये इतने कॉम्प्लिकेटेड और इतने जटिल हो गए हैं आज के युग में कि आज हजारों तरह के धारणाएं मान्यताएं विश्वास और हर एक के अलग-अलग अलग-अलग जो है आप देखते हैं कि लोग उपदेश दे रहे हैं। कोई कहता है यूं खाओ यूं खाओ ऐसा मत करो वैसा मत करो वैसा मत करो। अगर आप ध्यान से अब तो YouTube पे क्योंकि कॉमन हो चुके तो आप
5:24 अनुभव करेंगे। आपको लगता है कि करें तो करें क्या यार पूरी जिंदगी क्या ये मतलब ये कुछ ना कुछ करते रहने में ही बिता दे क्या मैं लोग मैं ऐसे देखता हूं तो इसीलिए कभी भी ध्यान में रखिएगा हेल्थ और न्यूट्रिशन बिल्कुल कॉमन सेंस की बात है अगर हेल्थ के लिए कभी भी ध्यान में रखिएगा यू डोंट हैव टू डू मच फॉर योर हेल्थ हेल्थ एक शांति की तरह है एक आनंद की तरह है जैसे कोई कहता है मैं आनंद के लिए बहुत प्रयास करता हूं। जी मैं तरह तरह के प्रयोग करता हूं। जी मैं शांति के लिए बड़ा अभ्यास करता हूं। जी तो आप बहुत बड़े भ्रम में है। शांत शांति पाने के लिए कुछ करना नहीं पड़ता। अशांत होना बंद करना पड़ता है। तो शांत हो जाते हैं। तो स्वास्थ्य भी पाना नहीं पड़ता। ये मैंने
6:11 पहले ही दिन बता दिया था। स्वास्थ्य मिला मिलाया है। आप इसमें डिस्टरबेंस मत पैदा करो। इसमें बाधाएं मत पैदा करो। बस तो फिर शरीर इतना बढ़िया ढंग से चलेगा कि मरते दम तक आपको कुछ बोलेगा ही नहीं कभी भी। अगर आप मुझे कोई पूछे कि भाई साहब आप अपने स्वास्थ्य के लिए क्या करते हैं? तो मैं कहता हूं मैं स्वास्थ्य के लिए ही कुछ नहीं करता। क्यों? क्यों करूं? जो ऑलरेडी मिला मिलाया है। मैं तो मैं तो बह रहा हूं, जी रहा हूं। शरीर के पीछे पीछे चलता हूं। भूख लगे तो खाता हूं। नहीं लगे तो वेट करता हूं। प्यास लगे तो पानी पीता हूं। नहीं नहीं लगे तो वेट करता हूं। और कासेप्ट नहीं बनाता कि इतने बजे खाना चाहिए। इतना पानी पीना चाहिए ना। ये सब
6:58 अगर मैं इसमें उलझ गया ना तो जिंदगी नरक बन जाएगी पूरी। तो मैं शरीर की भाषा सुनता हूं और घंटी बजे तो बाथरूम जाता हूं। मैं ये नहीं सोचता कि पेशाब कब आना चाहिए ना मोशन कब आना चाहिए। व्हाई शुड आई थिंक मेरा काम है सही माल डालना। अब बॉडी का काम है कब निकालना। मैं क्यों सोचू भाई कब निकले 7:00 बजे आवे कि 12:00 बजे आवे कि दोपहर शाम को आवे भैया तू जाने मैंने तो अपनी तरफ से भूख से खाया और सही खाना खाया तो अपनी तरफ से सही खाना खाने की कोशिश करता हूं 90% है 10% थोड़ा रिलैक्सेशन कर लेता हूं और उसके बाद में थक जाए तो सो जाता हूं आंख खुले तो उठ जाता हूं उठने का भी प्रयास नहीं करता कि इतने बजे उठना चाहिए जी कितने बजे उठना चाहिए अरे हां जल्दी सोता
7:43 हूं इसलिए 4 बजे आंखें खुली जाती है भाई सीधी सी बात है तो तो मतलब ये है कि ना उठने का प्रयास और ना सोने का प्रयास। आंखें रात को थोड़ी 9:30 बजे भारी होने लगती है तो मैं जाके सो जाता हूं। बस मैं क्यों सोचू कि ऐसे सोना चाहिए ना ऐसे नहीं सोना चाहिए मतलब ऐसे उठना चाहिए ना इतने बजे उठना चाहिए ना। तो मतलब आदमी क्या करता है मालूम है? जितना नियम में बनता जाता है ना उतना वो स्ट्रेस में आता जाता है। क्योंकि अब उसके अनुसार नहीं घटी घटना तो उसका दिमाग खराब होने लगता है। अनह होने लगता है। तो इसलिए मेरा मानना क्या मालूम है? जीवन सहज है। इसको बहाव बनाओ। लाइफ इज ए फ्लो। डोंट फाइट वि योर लाइफ। यू समझ ले। तो इसीलिए तो हेल्थ जो है वो पाने की कोशिश मत कीजिए। आप मस्ती से जीना
8:30 शुरू कीजिए बस। और न्यूट्रिशन जो है ना दोस्तों पोषण का विज्ञान वो तो इतना भटकाव आ गया है उस पोषण के विज्ञान में के आज आदमी आज भी कंफ्यूज्ड है। अभी भी कंफ्यूज्ड है कि क्या सही है ने क्या गलत है। पहचान ही नहीं पा रहा है बेचारा। मैंने बहुत साल पहले यानी कि करीब करीब 45 साल पहले जब मैंने अपनी यात्रा शुरू की थी प्राकृतिक चिकित्सा की उसी समय मैंने ये मैंने कविता लिख दी थी के सदियां बीत गई मानव फिर भी पूछ रहा है ये क्या खाऊं कैसे खाऊं खाना ढूंढ रहा है जो ना खाना था ना पीना था वो भी निगल गया सारा बुद्धि मिली थी ज्यादा जिसको वही भटक गया बेचारा ईश्वर
9:17 ने इस सृष्टि का सुंदर जब निर्माण किया हर प्राणी को अपना अपना जीने का सामान दिया पूरे प्राणी जगत में अब तक ऐसा नहीं सवाल हुआ सिर्फ पूछ रहा है मानव सदियों से परेशान हुआ तो दोस्तों एक मानव ही ऐसा प्राणी है जो डॉक्टर को जाकर कहता है डॉक्टर साहब कब खाऊं कैसे खाऊं कितना खाऊं तो मतलब क्या नॉनसेंस है यार ये यानी कि तुम्हारे शरीर की भाषा कोई और बताएगा। अजीब सी बात है। तो और तो तो इसीलिए आज हम इस कार्यक्रम के माध्यम से हम उन चीजों को जानेंगे जो हमारे मूल इस रोग के कारण है
10:04 जो अनजाने में हम अडॉप कर लेते हैं। देखिए आज ये जो मैं नियम बताने जा रहा हूं ये नियम आप जान जाओगे ना तो आपका रोगी होना असंभव हो जाएगा। जैसे मैंने प्रथम डिग्री में बताया सॉरी मैंने आपको पहले दिन बताया था कि मेरी मर्जी के बिना एक खुजली भी नहीं आ सकती। मैंने जैसे बताया इसका कारण क्या है? शरीर को बीमार पड़ने का शौक नहीं है। शरीर को आपको गलत कारण देना पड़ेगा तब जाकर शरीर बोलेगा वरना मरते दम तक भी बोलेगा। तो क्या है वो कारण जिसके बारे में हम अनजान है और कोई डॉक्टर आपको बताता भी नहीं है और ना किसी किताबों में उतना गहराई से लिखा हुआ है। सरसरी तौर पर जरूर जानते होंगे। तो आज मैं उन तीन कारणों पर
10:49 चर्चा करने जा रहा हूं जो आप अगर समझ गए तो आपके जीवन में रोग असंभव हो जाएगा। देखिए सबसे पहला हमारा बीमारी की जो जड़ है जो आदमी खो चुका है वो है भूख। हंगरलेस ईटिंग यानी कि भूख के बगैर भोजन करना। दोस्तों हम हम लोग जो है वास्तविक भूख से खाना नहीं खा पाते क्योंकि भूख एक शरीर की फिजियोलॉजिकल लैंग्वेज है भाषा है जो कहता है लाओ जी मैं खाना पचाने को तैयार हूं और नहीं भूख का मतलब डालना मत भैया मैं तैयार नहीं हूं मैं कहीं एंगेज्ड हूं लेकिन आप क्या कहते हैं नहीं भैया मुझे तो सुबह ऑफिस जाना है 9 बज गया इससे खा लो दो दो लंच हो गया इससे खा लो आज घर आ गया इससे खा लो बीवी
11:36 ने अच्छा खाना खाना बना है ऐसे खा लो। बेकार जाएगा इसलिए खा लो। ज्यादा बन गया इसलिए खा लो। फ्री में मिल रहा है इसलिए खा लो। तो आपका जो खाना है ना वो साइकोलॉजिकल और टाइमली है। एक्चुअल बॉडी की डिमांड से हम खाना बहुत भूल मतलब भूलते जा रहे हैं। तो इसलिए दोस्तों याद रखना जब तक तुम सच्ची शारीरिक शारीरिक मांग से भूख से खाना नहीं सीखोगे ना तब तक हेल्थ की कोई संभावना नहीं है। बाकी तुम कितने भी दुनिया के अमृत खा लो ना जब शरीर ने मांगा ही नहीं तो वो अमृत भी जहर है। ध्यान रखना। चाहे वो फल है तो भी बता रहा हूं। तो इसीलिए शरीर की सुनो। शरीर आपको गाइड करता है। और जिस दिन आपने भूख से खाना सीख लिया रियल रियल भूख से तो उसी दिन आपका जो है चाहे खाना घटिया था
12:25 चाहे खाना भारी था। पचने की 100% गारंटी। और जिसका खाना पच गया उसको कभी कब्ज हो ही नहीं सकती। क्योंकि हमारी देखिए कब्ज को लेकर है ना हमारा दिमाग हमेशा परेशान रहता है और हम फाइबर खाते रहते हैं ना चूर्ण खाते रहते हैं ना हरड़े खाते रहते हैं ना कई तरह के शंख प्रक्षालन क्रियाएं करते रहते हैं मतलब आदमी लड़े जा रहा है अपने आंतों से तो दोस्तों जब जैसे आंखें देखने के लिए बनी है तो आंखें भी तो मोशन निकालने के लिए डिजाइन है ना भाई वो तो कहता है मैं तुमसे ज्यादा परेशान हूं पेट साफ करने के लिए वो कहता तुम बाधाएं मत पैदा करो भाई। तो बाधा क्या होती है मालूम है कि हमारे शरीर में एक लिमिटेड वोल्टेज होती है। तो अब जब आपका खाना ऊपर से भूख
13:14 से जाता है ना और खाना पच गया तो पचने के बाद में वो नीचे आता है और नीचे आकर फिर वो आंतों में चला जाता है। तो तो होता क्या है कि आंतों को फिर पूरी ऊर्जा मिलती है उसको धक्का मार के निकालने के लिए। लेकिन प्रॉब्लम कहां आती है मालूम है आपको? जब वो आते उस समय तैयारी कर रही होती कि अब जा डिस्पैच करने के लिए माल आ गया है। जी अब सारे मजदूर जो ऊपर लगे थे आगे के मतलब आगे के डिपार्टमेंट में मजदूर लगे थे ना जैसे आपने देखा होगा जब आप फ्लाइट में जाते हो तो जो एयरलाइंस के जो वर्कर्स होते हैं ना वो पहले रिसेप्शन पे रहते हैं बाद में आके वहां पे सर्विस में लग जाते हैं। यानी कि
13:59 सेम। तो बस यही घटना यहां पे भी घटती है। आपकी सारी एनर्जी जो ऊपर लगी थी वो नीचे आ जाती है और सारी ऊर्जा वहां जाकर फिर आंतों को मल निकालने की तरफ ऊर्जा का प्रवाह आ जाता है। लेकिन अगर आपने उस समय जब मोशन होने की संभावना होती है उस समय आपने बगैर भूख के आपने ऊपर से खाना दे दिया तो जानते हो शरीर क्या करता है। फिर वो इमरजेंसी डिक्लेअ करता है। वो कहता है भैया पता नहीं ऊपर अचानक कोई मेहमान आ गया जी बिन बुलाए जी तो जरा ऊपर जाना देखना कौन आया है तो आपको हैरानी होगी कि देखिए जब आपने डाल ही दिया तो शरीर कोई चुप तो बैठेगा नहीं वो तो स्ट्रगल करेगा तो फिर वो सारी एनर्जी जो नीचे आई थी वो सीधी ऊपर भागती है तो दोस्तों ये जीवनी शक्ति का गेम है और कुछ नहीं है कब्ज कोई बीमारी नहीं है वो तुम्हारी अज्ञानता है भ्रम है
14:47 समझो एक प्रकार का तो इसीलिए कोई ज्यादा फाइबर खाने से कोई मोशन आएगा ऐसा कभी मत समझ के चलो। फाइबर तो स्वाभाविक है जो हमारे फल सलाद मिलेगा ही। तो इसीलिए भूख से खाना सीखोगे ना तो कब छूट जाएगी। पेशाब करने को एक बार 10 15 सॉरी 70 80 सेकंड लगते होंगे। पर स्टूल पास करने को सिर्फ और सिर्फ 10 सेकंड लगते हैं। आप चाहे तो फोन होल्ड करके जाके आ सकते हो और किसी को पता भी नहीं चलेगा कि आपने क्या कर दिया। दोस्तों हम सुबह घूमने जाते हैं ना जब तक एक पार्टनर जूता उठाकर फीता बांधता है ना फीता पांच 10 सेकंड लगेंगे ना 10 सेकंड उतनी देर में दूसरा पार्टनर तैयार हो के आ जाता है इतना जल्दी बता रहा हूं और ये कोई ये कोई आश्चर्यजनक बात भी नहीं है ध्यान रखना क्यों आपने कभी जानवरों को देखा होगा
15:35 रास्ते में हाथी घोड़े कुत्ते बिल्ली चलते चलते अचानक खड़े होते हैं टक टक टक टक टक टक टक पास करते निकल पड़ते हैं कितनी टाइम लगती है भैया पर पता नहीं ये आदमी को पता नहीं क्या तकलीफ हो गई बेचारे को कि लाइब्रेरी बना के बैठ गया पूरे बाथरूम के अंदर तो मतलब कहने का मतलब ये है कि भाई इतनी तकलीफ नहीं होती समझे ना और तो इस तरह से भूख सीखिए देखिए मैंने शायद उस समय ये भी बताया था पहले दिन कि हमारे परिवार में आज तक किसी बच्चे ने कोई वैक्सीनेशन नहीं लिया कोई डॉक्टर के पास नहीं गया शक्ल नहीं देखी इसका कारण क्या मालूम है हम अपने बच्चों के पीछे खाना ले कभी नहीं भागे एक बात ध्यान रखना अपने परिवार में सबको भूख सिखाओ। बच्चों को भी भूख सिखाओ। मां-बाप है ना सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं कि बच्चों के पीछे
16:21 खाना ले भागते रहते हैं। खास करके महिलाएं बेचारी ये दादी मां ने ये सब प्यार प्यार जताने का रास्ता वही हो गया उनका। उनका लगता है कि मेरा बच्चा खाता रहे। अब सुबह सुबह बच्चे को भूख नहीं है। 6:00 बजे 7:00 बजे स्कूल होती है। 6:00 बजे जाना होता है। 6:00 बजे उठता है तो भूख लगने में दो-तीन घंटे लगने लगते हैं जनरली। पर उसके हम क्या करते हैं? मेरा बच्चा भूखा जा रहा है। अरे भूख लगे तो भूखा जा रहा है भाई। पर हमारी आदत ऐसी हो गई कि हम बच्चों को सिखाते नहीं है कि नहीं भूख है तू भी खा ले तू बस किसी भी तरह। तो इसीलिए हमारे यहां पर क्या होता है? हमारे बच्चे उल्टे उल्टे ढंग से पूछते हैं। वो कहते हैं खाना कब दोगे भाई? ऐसा पूछते हैं जब वो पूछते हैं कि खाना कब दोगे? तब फिर हम खाने की बात करते हैं। वरना हम बच्चों को सब पूछते हैं। खाना कभी नहीं पूछते बस। क्यों? कोई
17:08 बच्चा दुनिया का भूखा रहेगा क्या? भूख लगेगी तो आपका सर खा जाएगा। तो इसीलिए मेरा मानना क्या है कि अगर आपको सचमुच जिंदगी में अपने पेट को बिल्कुल नॉर्मल और स्वस्थ रखना है तो भूख से खाना सीखें और बच्चों को भी भूख सिखाएं। आप तो देखिए वैसे तो मैं बड़ी हैरानी की बात बता रहा हूं के हमारे यहां मेहमान भी आते हैं ना तो मैं उनको कहता हूं आप कोई बात नहीं आधा घंटा और वेट कर लीजिए लेकिन भूख लगे तो खाइएगा। कारण क्या है? मैं जबरदस्ती नहीं अब आप आ ही गए हैं 9 बज गए अब तो आपको घर जाना चाहिए खा ही लो जी किसी भी तरह तो मतलब मैं कोशिश ये रहती है कि भाई भूख सीखे लोग बस किसी भी तरह ठीक है ना तो उससे कम से कम खाने की 100% गारंटी अच्छा अब कई लोग कहते हैं देखिए भूख में भी क्या है सच्ची भूख झूठी भूख अब सच्ची भूख की
17:56 पहचान क्या मालूम है सच्ची भूख में जो है आप कभी भी ध्यान रखना पेट में कभी सिम्टम नहीं होने चाहिए याद रखना एक बार जो सच्ची भूख लगती ना तो शरीर में कोई लक्षण नहीं होने चाहिए। ऐसा नहीं कि गैस बन गई, एसिडिटी बन गई। जी मेरे को चक्कर आ रहे है जी। मेरे को तो कमजोरी लग रही है। जी। यह सब सच्ची भूख नहीं है। याद रखना शेर को पहले भूख लगती है। बाद में वो खाना ढूंढने निकलता है। पक्षी को पहले भूख लगती है। फिर वो दाना चुगने निकलता है। तो इसीलिए भूख में एनर्जी भरपूर होती है। ज्यादा होती है। बल्कि मैं यू कहता हूं। समझे ना? यह सच्ची भूख का निशानी है और सच्ची भूख में आपको एक बार जो भूख लगी है ना तो लगातार लगी रहेगी वो ऐसा नहीं कि अब तो साहब 2 बज गए तीन बज गए अब तो मेरा भूख का टाइम खत्म हो गया जी तो वो सच्ची भूख का टाइम कभी खत्म नहीं होता अगर मान लो शेर
18:43 शिकार करने जा रहा है और एक दो घंटे शिकार नहीं मिला तो यूं बोलेगा क्या अब छोड़ो यार दो तीन घंटे तो हो गए अब तो टाइम भी अब तो टाइम भी दो बज गए दोपहर के अब रहने दो छोड़ो अब मैं बाद में देखता हूं तो सच्ची भूख जो है हमें हमेशा लगी रहती है कभी खत्म नहीं होती एन हंगर नी नो पैेट डिकलर्स एक बात ध्यान रखना सच्ची भूख किसको कहते हैं कि आपको ना कच्चा घिया कच्ची भिंडी कच्चा पालक का पत्ता भी खाना अच्छा लगेगा या आपको फीके चावल भी खाने अच्छे लगेंगे अगर आपको लगता है कि लो जी भूख लगी है तो खाओ जी ये फीका चावल खा लो जी फीका दलिया खा लो जी तो आप कहोगे नहीं मेरे को खाने की इच्छा नहीं है तो इसका मतलब है रियल भूख नहीं है याद रखना रियल भूख में रियल टेस्ट आपको मिलता है आज आपको क्यों नहीं मिलता? क्योंकि आपका परवर
19:28 टेस्ट हो गया। परवरेट का मतलब क्या है? जीभ आपकी उत्तेजना की आधी हो गई है। इसलिए आप जो रियल टेस्ट है ना वो आप लेना भूल गए हो आप। और जो वास्तविक स्वाद होता है चाहे वो फीका चावल है, फीका दलिया है, घिया है कोई भी आलू भी कच्चा है बता रहा हूं तो भी आपको स्वादिष्ट लगता है वो। तो इसीलिए सच्ची भूख में आपको हमेशा नमक, चीनी, घी, तेल, मसालों की याद नहीं आएगी। यह भी ध्यान में रख लेना। और और अगर और अब झूठी भूख में क्या होता है कि गैस बनती है, एसिडिटी बनती है, चक्कर आता है, आपको कमजोरी लगती है। तो ये गैस्ट्रिक भूख है, एसिडिक भूख है। ये किनको होती है? जो हैवी खाना खाते हैं, मसालेदार खाना खाते हैं। बीच-बीच में खाने की आदत है, स्ट्रेस ज्यादा लेते हैं। डिप्रेशन में रहते हैं। तो ऐसे लोगों की और एक्सरसाइज कम करते
20:15 हैं। तो उनका मेटाबॉलिज्म लो हो जाता है। तो उन लोगों को ऐसी भूख खुल जाती है। फिर उनको पता ही नहीं चलता कि कितना खाऊं ना कितना नहीं खाऊ। वो बस खाते रहते हैं। उनको दो चार घंटे बाद फिर दे दो फिर खा लेंगे। तो यह जो भूख है ना यह खतरनाक भूख है। इसको पहचाने कैसे कि मेरी झूठी भूख है। याद रखना सच्ची भूख में खाओगे ना तो आपका मोशन बंधा हुआ होगा। पॉट पे चिपकेगा नहीं। बदबू नहीं होगी। क्यों? इसका मतलब है कि आपने माल डाला साड़ी पूरी बनी और अच्छी तरह बन के बाहर माल अच्छी तरह बनके बाहर निकला। लेकिन अगर आप इस तरह का झूठी भूख से खाना खा रहे हो तो आपका मोशन में बदबू होगी। चिपकेगा उसप पानी की ज्यादा जरूरत पड़ेगी। तो समझ लेना कि तुम्हारी झूठी भूख है। तुम्हारा मोशन कभी भी बढ़िया
21:02 होगा ही नहीं। हो सकता है दो एक दो बार जाना पड़े, चार बार जाना पड़े, बदबूदार भी होना हो और तो ये इससे आप समझ सकते हैं कि झूठी भूख है। तो इसको कैसे ठीक करें? तो इसका सबसे पहले ठीक करने का तरीका यह है कि एक तो जहां तक हो सके कोशिश करें कि भूख से खाए। आप आप कहते नहीं साहब मैं तो सुबह ना खाऊं नाश्ता तो मेरी तो हालत खराब हो जाएगी। तो फिर क्या करो एक ग्रीन वेजिटेबल जूस पियो। अल्कलाइन जूस पियो क्योंकि ब्लड पेट में एसिडिटी बनी है वो एसिडिटी जो है देखिए आपकी जो पाचन की ग्रंथियां है ना वो हाइपर ट्रॉफीड हो गई यानी कि ओवर एक्टिव हो गई है इसलिए जैसे ही आपका पेट खाली होता है वो तुरंत एकदम एसिड सीक्रेशन शुरू कर देती है तो वो आपने तो उसको एनलार्ज किया ना उस ग्लैंड को डाइजेस्टिव ग्लैंड्स को तो अब उसको शांत करने के लिए क्या करें कि कोई वेजिटेबल
21:48 जूस पिए जैसे लौकी का जूस है पेठे का जूस है अगर आप आप आप अगर वात वात प्रकृति के और ठंडी प्रकृति के व्यक्ति है तो फिर घिया पेठा का जूस मत पीना वो आपको तंग कर देगा तो आप लोगों को उन लोगों को पीना चाहिए जिनकी थोड़ी पित्त प्रकृति है और उनको ऐसा खाना अच्छा भी लगता है तो ऐसे लोग जो है घिया का जूस यानी कि लौकी का जूस है और जिसको दूध ही कहते हैं आप लोग और या पेठे का जूस है या गाजर का जूस है यानी तो ग्रीन वेजिटेबल जूस मिक्स जूस बनाकर आप उसको एक सुबह सुबह उसको पी ले सबसे पहले तो उससे क्या होगा जो एसिड बनी है ना वो आपकी न्यूट्रलाइज होने लगेगी। ठीक है? अच्छा फिर क्या करें कि धीरेधीरे मैं जानता हूं आपकी आदत हैवी खाने की हो गई
22:33 है। सुबह सुबह कुछ चाहिए हैवी तो क्या करो कि पहले है ना थोड़े से वेजिटेबल जूस या थोड़ा सलाड खाने की आदत डाल दो। सुबह सुबह सलाड खाना मुश्किल होता है क्योंकि चबाना बहुत पड़ता है। तो कोशिश करें कि थोड़े स्प्राउट्स वग ले ले जो एक इंच लंबे होने चाहिए। कई बार वात प्रकृति के लोगों को अंकुरित पचते नहीं है तो कोई बात नहीं उनको एक इंच लंबा कर दे और हल्की सी स्टीम कर दें तो मतलब इस तरह से क्या होगा कि जैसे आपने सुबह सुबह आप जो है इस तरह का जो खाना खाते हैं रोटी जो भी आप दलिया खाते हैं कि पराठा खाते हैं जो भी आपकी आदत होती है मैं जानता हूं तो वो एकदम छोड़ने को नहीं कहता हूं क्योंकि मालूम है तुम अगर सुबह सुबह नहीं खाओगे ना तो प्रॉब्लम क्या आएगी मालूम है तुम्हारे पेट में गैस एसिडिटी बढ़ती जाएगी नएनए हो इसलिए तो धीरेधीरे क्या करो के फल सलाड की
23:19 मात्रा बढ़ाते जाओ और एक्सरसाइज की मात्रा बढ़ाओ। ये दो दो सूत्र है ध्यान रखना कि फल सराट बढ़ाना और एक्सरसाइज बढ़ाना। तो आप क्या करो? सुबह थोड़ा नाश्ता करके चले जाओ और दोपहर को जो है ना ऑफिस के अंदर खाना मत खाओ। फिर आप क्यों? हर वक्त अनाज मत खाते रहो। तो आपने सुबह सुबह अनाज खा लिया। दोपहर को आपने ऑफिस में खूब पेट भर के फल खा खाते रहे। अंकुरित दालें खाते रहे। और इस तरह से आप करके शाम को जब घर लौटते हैं ना तो एक आदत डालो कि जब तक एक सलाड एक अच्छी मात्रा में प्लेट भर के ना खा लूं मैं तब तक खाना नहीं खाऊंगा। तो धीरे-धीरे जैसेजैसे आपकी फल सलाड की मात्रा बढ़ती जाएगी और जो अनाज खा रहे हो वो धीरे-धीरे 50% कम करते जाओ। मसाला थोड़ा 50% कम कर दो जिससे उत्तेजना
24:05 ज्यादा ना मिले। तो क्या होगा? धीरे धीरे धीरे आपकी जो ओवर एक्टिव जो ग्लैंड्स है ना वो सिकुड़ने लगेगी नॉर्मल होने लगी 101 दिन लगेंगे उस चीज को लेकिन आप फल सलाड की मात्रा और वेजिटेबल जूस ये फ्रूट फ्रूट जूस नहीं ध्यान रखना फलों के जूस नहीं पीना तो ये करते करते धीरेधीरे आपका पेट जो है ठीक होने लगेगा समझ लीजिए और एक्सरसाइज बढ़ा दी तो मेटाबॉलिज्म हाई हो गया मेटाबॉलिज्म हाई हो गया तो फिर जो खाना खाओगे वो पचेगा इस तरह से जैसे आप सुबह सुबह एक्सरसाइज करते ही है आजकल इस तरह से तो ऐसे करके के झूठी भूख से मुक्ति पा सकते हैं। ठीक है? चलिए अब दूसरा हमारा बीमारी का कारण क्या है? रोंग फूड कॉम्बिनेशंस। देखिए हमारा जो भगवान ने पाचन बनाया ना वो बढ़िया पचाने के लिए डिजाइन किया गया है। खाना पेट में जाके
24:51 सड़ जाए। ये कितनी शर्मनाक बात है। कोई आदमी यू कहे कि भाई साहब मैंने जर्मनी से मशीन मंगवाई है जी करोड़ों रुपए की और मैं उसमें धागा डालता हूं। जी साड़ी बनाने के लिए लेकिन साड़ी नहीं बनती। भाई साहब गुच्छा बन के निकलता रहता है जी रोज। यानी तो अच्छे ढंग की साड़ी नहीं बनती। टेढ़ीमेढ़ी बनती है तो फिर आप हंसोगे ना यार ये तो आप तो मशीनरी का गलत दुरुपयोग कर रहे हो भाई तो पेट कभी नहीं बोलता बता रहा हूं पेट नामक कोई चीज आपको जिंदगी भर पता नहीं चलेगी बता रहा हूं अगर आपने ये ये कॉम्बिनेशन का समझ लिया यानी कि गैस एसिडिटी और अपच ये तीन चीजें होती है और तो उसका कारण क्या है शरीर एक बार में एक ही प्रकार का सॉलिड स्टार्च या सॉलिड प्रोटीन पचाता है ठीक है ना देखिए
25:37 आपने देखा होगा कि ईश्वर ने हमारा खाना पाचन कैसे बनाया। मां का दूध दिया उस समय हमें दांत नहीं दी। तो इसका मतलब क्या है कि हमें उस समय मां के दूध को ही पचाने की ग्रंथियां काम कर रही होती है। समझे ना आप? फिर जैसे जैसे दांत आने लगते हैं हमारे और ठोस खाने योग्य होते हैं तो कुदरत क्या करती है? दूध को खत्म कर देती है। ऐसे धीरेधीरे समझे ना? तो आप समझ सकते हैं कि कुदरत जो है एक बार में एक सॉलिड स्टार्च या प्रोटीन पसंद करती है। तो आपको क्या करना है कि जनरली अब देखिए हम लोग सब शाकाहारी है यहां पे। ठीक है ना? तो आप तीन तरह के तीन तरह के भोजन हमारे खाने के साथ जुड़ गए। गलत कॉम्बिनेशन जुड़ गए। पहला क्या है कि एक तो जब अन्न दाल खाते
26:24 हो ना तो अन्न दाल के साथ कभी भी दूध, पनीर, लस्सी, खोया यानी कि दूध से बनी हुई जो हैवी चीजें हैं घी को छोड़ दें लेकिन बाकी जो हैवी चीजें हैं दूध से बनी हुई चीजें वो हमेशा अन्न दालों के साथ सड़ती है और दालों के साथ सबसे ज्यादा डेयरी प्रोडक्ट सड़ते हैं सारे। तो इसीलिए कोशिश यह करें कि अगर आप दूध पी मान लीजिए अब कई गांवों में लोग हैं आप में से कई लोग दूध पीना पसंद करते हैं तो मैं अभी उसके बारे में बाद में बताऊंगा तो अगर दूध पीना है तो खाली पेट पिए लस्सी पीनी है खाली पेट पिए खाने के साथ कभी ना पिए क्योंकि वो खाने के पूरे डाइजेस्टिव मैकेनिज्म को चेंज कर देता है और वातावरण को बदल देता है इसीलिए तो इसीलिए क्योंकि दूध का पाचन
27:12 एसिडिक एनवायरमेंट में होता है अनाज का पाचन छोटी आंतों में जाकर अल्कलाइन माध्यम में होता है। तो अब दोनों जा जाते हैं तो फिर जो है वहां सड़ने लग जाते हैं। तो इसलिए जैसे दूध और दलिया, ब्रेड और दूध, बिस्किट और दूध, कॉनफ्लेक्स और मिल्क ये सब हमारी कॉमन आदत पड़ चुकी है। तो इनका उपयोग जो है कोशिश करें कि इनसे बचें। देखिए ओकेशनली कभी आपको खाना पड़ गया। आप का जैसे कई लोगों को दूध जलेबी खाने का भी शौक होता है। कई लोगों को खीर घर में बनती रहती है। जनरली कई घरों में तो मैं ये नहीं कहता कि मत खाओ आप ऐसे सब चीजें ठीक है। कभी वार त्यौहार में आपको शौक है तो एंजॉय कर लो और वो कॉम्बिनेशन गड़बड़ कर भी दो। क्यों? शरीर कोई एक दिन के खाने से या दो दिन के खाने से बीमार नहीं पड़ता। ध्यान रखना। रेगुलर जो करते हैं वो बीमारी
27:59 का कारण बनता है। तो इसलिए डर डर के मरमर के जीने की भी जरूरत नहीं है। तो मैं ये बात इसलिए बता रहा हूं क्योंकि थोड़ा कॉम्प्रोमाइजिंग बात तो मुझे करनी पड़ेगी। ठीक है? और क्योंकि दुनिया बहुत दूर आ गई है। और तो दूध की चीजें अकेले खाएं। अच्छा और अगर आप शादी ब्याह में भी जाते हो ना तो कोशिश करो कि दूध की मिठाइयों को अवॉइड करो और अगर आप रोटी दाल खा रहे हो तो फिर अनाज की मिठाइयों को प्रेफरेंस दो। जैसे गाजर का हलवा, दाल का हलवा, लड्डू है, जलेबी जो भी अनाज से जो निर्मित होती है आप उनको प्रधानता दो। उससे क्या होगा? पेट ज्यादा खराब नहीं होगा। मतलब आपका कहने का मतलब है। ठीक है? अच्छा अब खाने के साथ कभी भी ध्यान रखना फल, जूस, चीनी, गुड़ ये सब जो है ना हमेशा ये सब फलों से निकली शर्कराएं हैं। शर्करा का सिद्धांत क्या
28:45 है? शर्करा फास्ट डाइजेस्टिंग शुगर होती है। फल जल्दी पेट पर पच जाते हैं। तो हम क्या करते हैं? हम कई लोग क्या करते हैं? खाना खाने के बाद फल खाते हैं। यानी कि आगे बैलगाड़ी को भेजते हैं। फिर पीछे हवाई जहाज को भेजते हैं। तो इसलिए दोस्तों कभी भी ध्यान में रखना अगर आपको फल खाना है और खाना भी खाना मान लो आपको दोनों पार्टी में आगे दोनों सामने रखे हुए हैं तो पहले फल पहले तो जूस पी लेना। जूस पहले पीना लिक्विड जो है पहले पास होता है। उसके बाद फल खाना और फल खाने के बाद आधा घंटा रुक कर फिर खाना खाना। अगर दोनों दोनों सामने आ गए तो बता रहा हूं। नहीं तो बेस्ट यह है दोस्तों कि हमेशा फल अकेले एज ए मील उसको अलग से खाना चाहिए। उसको कभी भी किसी के साथ मिक्स मत करो। और फलों में भी थोड़ा
29:32 सा ख्याल क्या रखना है? ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी है। एक्सट्रीम खट्टे फल जो होते है ना वो एक्सट्रीम मीठे फल के साथ ना खाएं। यू समझ ले। जैसे नींबू है, पाइनएप्पल है, मौसंबी, अनार है। ये सब केले, चीकू, सीताफल ऐसे खजूर वगैरह इनके साथ ना खाए बस तो थोड़े बाकी सब फलों के साथ खट्टे फल खाए जा सकते हैं। सिर्फ एक्सट्रीम मीठे फल अवॉइड करें बस। तो उससे क्या होगा? पेट में कभी भी गड़बड़ नहीं होगी। अच्छा ऐसा नहीं कि ये भी खा जाए तो कोई गड़बड़ होगी। अगर आपका पेट ठीक-ठाक है तो थोड़ा एक दो दिन बर्दाश्त भी कर लेगा। क्योंकि कई बार क्या होता है? हम फ्रूट प्ला बनाते हैं तो उसमें कट्टे फल भी डाल देते हैं। जैसे पाइनएप्पल डाल दिया, अनार डाल दी। कोई बात नहीं वो एक दो दिन चल जाएगा। लेकिन पेट खराब है तो फिर ये कॉम्बिनेशन बहुत स्ट्रिक्टली फॉलो करना
30:17 पड़ता है। ठीक है? और और तो इस तरह से फल हमेशा सेपरेट मील की तरह ले। ठीक है? और बहुत ज्यादा खाने में अगर चीनी गुड है। याद रखना शुगर कभी भी किसी स्टार्च या प्रोटीन के साथ नहीं चलती। आप कभी भी नोट कर लेना कि अगर आपको एसिडिटी है आप अगर दूध पीते हो प्लेन तो आपको शायद उतना प्रॉब्लम ना करे लेकिन आपने दूध में चीनी मिला दी तो आपकी एसिडिटी बढ़ जाएगी तुरंत क्यों शुगर के प्रेजेंस में दूध का पाचन नहीं होता फिर तो इस तरह से क्या होता है कि हम ज्यादा जैसे मिठाई भी खाते हैं ना तो मिठाई वैसे पेट में 100% थोड़ी फर्मेंट तो होती है सर्दी तो है ही है लेकिन अब आदत पड़ गई है हम दूर बहुत आ गए मिठाइया हमारे जीवन का अंग बन चुकी है तो अब ठीक है मीठा खाना ही है सबको तो कोशिश करें कि थोड़ी कम मात्रा मिले। बस मैं यूं कह सकता
31:04 हूं इस तरह से। ठीक है? और अब रहा तीसरा खाने के साथ है ना ज्यादा नींबू, इमली, अमचूर, टमाटर ना खाएं। देखिए क्या होता है। अब भारत के अंदर आदत क्या हो गई है। हर चीज में खटाई खटाई डालने की आदत पड़ चुकी है। तो देखिए तो तो खास करके ये दो जो खटाई है ना तीन खटाई ये खाने में से थोड़ा बचा के रखें। एक तो एक तो अमचूर क्योंकि वो कच्ची कच्चा आम है और एक इमली और एक एक ज्यादा नींबू का इस्तेमाल देखिए एक दो बूंद दो चार बूंद डाला तो चल जाएगा बता रहा हूं आपको कोई दिक्कत नहीं है लेकिन आप ज्यादा अगर जैसे उतना नींबू निचोड़ रहे है हर एक में खूब इमली डाल रहे है जैसे आपने कभी नोट किया होगा आप कभी जब सांभर खाते हो देखिए घर में एक आप सिंपल
31:50 दाल खाते हो आपको एसिडिटी नहीं बनेगी लेकिन जिस दिन आपने सांभर खा लिया किसी होटल में या कहीं पर भी घर में बना के उसमें इमली डाली जाती है तो आपका पेट पेट में तुरंत एसिडिटी फील होने लग जाती है। क्योंकि इमली के प्रेजेंस में जो वो खटास के प्रेजेंस में क्या होता है कि फिर वो दाल का पाचन अच्छी तरह नहीं होता। तो कोशिश करें कि देखिए ओकेशनली मैं जानता हूं आप सांभर आपके इमली के बिना नहीं बनना पसंद करते आप तो ओकेशनली एंजॉय कर ले पर दिमाग अगर पेट खराब है तो फिर स्ट्रिक्टली स्ट्रिक्ट फॉलो करना पड़ेगा कि खाने में खटाई नहीं भैया। क्यों? तो और अगर हां बाकी देखिए टमाटर हमारी सब्जियों में बहुत आदत पड़ गई है तो ओकेशनली टमाटर डाल के कोई खास सब्जियां बनानी है जैसे अमचोर के कई बार कोई सब्जी बनती है तो ठीक है ओकेशनली एंजॉय कर लो लेकिन नॉर्मल कंडीशन में अगर पेट खराब है तो ध्यान में रखो
32:36 गड़बड़ कहां है तो ये यहां गड़बड़ यहां पर है ये समझ लो तो अब आपने दूध फल खटाई ये तीन याद रखिए दूध फल खटाई जैसे ही आपने हटाई स्वास्थ्य से हुई सगाई ठीक है तो इस तरह से आपने मोशन आप जो है उसको पहचान कर सकते हैं। ठीक है? अब रहा तीसरा जो सबसे बड़ा कारण दोस्तों देखिए मैं इस क्षेत्र में जब आया ना मैंने आपको पहले दिन बताया था कि मैं मैं बचपन से खोजी टाइप का व्यक्ति रहा हूं। मेरे दिमाग में था कि रोग क्यों दुख क्यों गरीब मतलब गरीबी क्यों? तो मैं इसको खोजते खोजते मैं इस मुझे ये दिमाग में था कि यार संसार में सभी प्राणियों का भोजन परमात्मा ने बनाया है तो क्या हमारा कोई भोजन बनाया ही
33:22 नहीं क्या क्यों इतना कन्फ्यूजन है कोई कहता है ये खाओ कोई कहता है ये मत खाओ कोई कहता है ये मत खाओ इस तरह से तो मैं इसकी खोज में जब लगा और मैं खोजता चला गया तो मैंने कहा कि अब ये पता कैसे करेंगे यार मेरा खाना कौन सा है तो मैंने कहा कि जब सारे 84 84 लाख योनियां अपना भोजन अपनी अंतर प्रेरणा से बिना किसी साइंटिस्ट को डॉक्टर को या किताबें पढ़े अपने आप ढूंढ लेते हैं तो हम तो यार मनुष्य है हम क्यों नहीं ढूंढ सकते तो इसीलिए फिर मैंने कहा चलो हम अपनी आत्मा से पूछते है कि मेरा भोजन कौन सा है ठीक है आप भी अपनी आत्मा से पूछिएगा देखिए अगर मैं आपके थाली में कच्चा मांस ला के रखूं क्या आपकी आत्मा देखकर बड़ी गदगद होती है कच्चा मांस देखकर मुंह में क्या ला टपकती है आपके आपको कहेगा नहीं भाई साहब लेकिन लेकिन खाना भी
34:09 पड़ा तो आप मॉडिफाई करोगे, मसाला डालोगे तभी तो खा पाओगे ना। अच्छा तो उसका वो भी हमारा खाना नहीं है। अच्छा कच्चे अंडे देखकर क्या आपके मुंह में बड़ी लाट अड़पकती है? आपका दिल गदगद होता है? आपको लगता है नहीं भैया तो फिर वो भी हमारा आहार नहीं है। ये भी मैं समझ गया। फिर मैंने फिर मैंने देखा कि अगर मैं आपके सामने कच्चे अनाज के दाने ला के रख दूं। गेहूं ज्वार मिल्लेट, ज्वार, बाजरा सब लाके रख दूं। क्या कच्चे अनाज के ढेर आपको देखकर क्या मुंह में बड़ी ला टपकती है? आपका ऐसा दिल करता है आ हा हा क्या प्यारे चावल के दाने क्या के दाने हैं? क्या ज्वार के दाने दिल करता है लपक के चाट लूं। ऐसा लगा कभी आपको जीवन में पर चूहे पक्षी, घोड़े सब जानवर
34:55 आके कच्चा फड़ा फड़ खा जाएंगे। लेकिन जैसे ही आपके सामने मैं केला, चीकू, पपीता, आम, अखरोट, बादाम, नारियल लाके रखता हूं। देखते ही तुमको नहीं लगता हम बने तुम बने एक दूजे के लिए एक स्वाभाविक आकर्षण और आप जानते हैं परमात्मा ने सिर्फ हमारे भोजन में तीन चीजें दी है ध्यान रखना जो दुनिया के किसी भोजन में नहीं है सुंदरता सुगंध और स्वाद किस में दी है सुंदरता सुगंध और स्वाद दुनिया के किसी भोजन में नहीं है क्या मांस में है सुंदरता सुगंध स्वाद क्या अनाज के दानों में है क्या अंडों में है नहीं है ना तो आपका भोजन नहीं है तो अच्छा अब अनाज कच्चा तो खा नहीं सकते भाई। चलो कोई बात नहीं जी मैं उबाल के देता हूं। अब मैंने आपको उबला हुआ ज्वार, उबला हुआ
35:41 बाजरा, उबला हुआ गेहूं मैंने आपको दिया और मैंने कहा खाओ जी इसको इसको बगैर नमक, चीनी, घी, तेल या चार चटनी के खाओ इसको एस इट इज। क्या आप सचमुच दिल से प्यार से खा पाते हो? स्वाद के साथ खा पाते हो। आप आप मजबूरी में भूखे हो तो खा लोगे। अच्छा आप क्या बोलोगे भाई साहब? थोड़ा नमक, चीनी, घी, प्याज, अचार, चटनी कुछ तो मिल जाए जिसके थ्रू खा लूं। आप जरा सोचिए एक रोटी खाने के लिए आपको समुद्र से जाके नमक सुखा के लाना पड़ेगा। गाय पैदा करके घी निकालना पड़ेगा। तिल पैदा करके तेल निकालना पड़ेगा। 10 तरह की सब्जियां पैदा करनी पड़ेगी। 10 तरह के मसाले भी पैदा करने पड़ेंगे। आग पैदा करनी
36:26 पड़ेगी। तब जाके तुम्हारे मुंह में एक रोटी घुसती है और तुम लोग क्या कहते हो भाई साहब मैं तो रोज नॉर्मल खाना खाता हूं जी ये नॉर्मल खाना है इतना डिपेंडेंसी वाला और जब बीमार पड़ते हो तो डॉक्टर निकालता क्या है जो जोड़ते हो वही तो निकालता है नमक निकाल चीनी निकाल घी निकाल तेल निकाल मसाला निकाल यही तो निकालता है डॉक्टर 40 50 साल के बाद और आपकी मैक्सिमम बीमारियां किसकी है नमक की चीनी की घी तेल की तो भैया आपने जोड़ा ही क्यों पहली बात तो ये क्वेश्चन पैदा होता है ना क्या आपने कभी ऐसे सोचा भाई साहब मैं केला कैसे खाऊं मेरे घर में तेल नहीं है छोंकने के लिए भाई साहब मैं आम कैसे खाऊं भाई साहब थोड़ी हरी मिर्च मिल जाएगी कि जिसके थ्रू मैं आम खा लूं अरे यार आपने नहीं कहा तो गाय ने
37:12 कहा हो भाई साहब ये आपने मुझे घास क्या दे दी क्या थोड़ा केचप नहीं है क्या थोड़ी चटनी वटनी नहीं है क्या अरे किसी प्राणी का आहार किसी पर निर्भर नहीं है और तुम इतना डिपेंडेंट आहार को खाते हो और तुम कहते हो मैं नॉर्मल खाना खा रहा हूं। तो भैया अनाज की प्रॉब्लम क्या मालूम है? अनाज घास के बीज है। घास के बीज है जो चरने वाले जानवरों के लिए डिजाइन हुए थे। लेकिन खैर आदमी ने सर्वाइवल के लिए इसका इस्तेमाल शुरू किया। क्योंकि इसको स्टोर किया जा सकता है। इसको जिंदा इस पर जिंदा रहा जा सकता है। तो मुश्किल से 10,000 साल पहले खेती की शुरुआत हुई। अन्य अन्न दालों को प्रिजर्व करना शुरू किया। आदमी ने खाना शुरू किया तो कहने का मतलब क्या है कि
37:57 अनाज एक पृथ्वी तत्व का आहार है। शरीर में जड़ता स्टिफनेस भारीपन पैदा करता है। अनाज खाओ और घोड़े बैलों की तरह नहीं भागे तो अनाज आपको खा जाएगा। याद रखना। तो इसीलिए अनाज जो है आप जानते हैं कि अनाज के कारण ये जितने 50 साल के अंदर हम जो बूढ़े होते हैं ना हमारी अब खून खून की नरिया हार्ड होने लगती है। ब्लड प्रेशर हाई होने लगता है। जॉइंट्स हार्ड होने लगते हैं। आंखें कमजोर होने लगती है। हियरिंग लॉस होने लगती है। हम आप जरा सोचो ना हम 60 साल 55 60 साल की उम्र में बूढ़े हो जाते हैं। आधी उम्र में हम बूढ़े हो जाते हैं। ये शर्मनाक बात नहीं है हमारे लिए। तो मतलब किसके कारण? सिर्फ अनाज खाने के कारण मैं ये नहीं कहता अनाज अनाज कैसे खाना मैं बताऊंगा पर आपको पहले उसके
38:44 प्रॉब्लम को समझना है तो दोस्तों अनाज के चक्कर में आदमी ने खाकर शरीर को इतना जड़ और स्टिफ बना दिया कि हमारे योगियों को 500 तरह के आसन निकालने पड़े। आज आप ये आसन जो सुबह सुबह कर रहे हो ये क्यों कर रहे हो? क्योंकि आप सुबह दोपहर शाम हर वक्त जो अनाज खाते हो तो शरीर इतना जड़ हो जाता है कि उसको तोड़ने के लिए तरह तरह के आसन अपनाने पड़ते हैं। एक्चुअल में आप जानते हैं अंगड़ाई के सिवा आदमी को और कोई आसन की वास्तव में जरूरत नहीं होती अगर आप शरीर ढंग से जियो तो पर आदमी अब इतना दूर आ गया है कि शरीर को जड़ कर गया तो जड़ कर गया तोड़ो भैया वापस उसको। तो इसीलिए आप जानते हैं हमारी देखिए दुनिया में सभी प्राणियों के शरीर फ्लेक्सिबल होते हैं।
39:29 सिर्फ मानव का शरीर जड़ जड़ जड़ होता है। यानी कि जड़ एकदम स्टिप हो जाता है। तो इसीलिए अनाज को कम करो कम करना है। देखिए इस बात को हमारे ऋषि मुनि जानते थे। तभी उन्होंने नवरात्रि ने कदम कदम पे एकादशी ने द्वादशी ने पूर्णिमा ने शिवरात्रि ने गणपति उपवास करो जी। उपवास का मतलब क्या है? अनाज से थोड़ा छुटकारा पाओगे तो अनाज से देखिए अनाज आदमी को वैसे कह दो अनाज थोड़ा कम कर दे करेगा ही नहीं लेकिन भगवान के नाम पे सब कर देगा अपने कुछ मोक्ष प्राप्त करनी है स्वर्ग में जाना है ये थोड़े लालच दे दो तो करता है बोले आदमी तो इस तरह से तो आदमी को बेचारे को फिर फुसलाया गया कि भाई आज एकादशी करेगा तो
40:14 तुझे वकुट धाम मिलेगा तो फिर ये सब करना पड़ा भाई तू तो जबरदस्ती हमारे ऋषि मुनियों को बोलते है बच्चों को फुसलाने के लिए ऐसे टोटके अपनाने पड़े तो गलत भी नहीं है वो तो इस तरह से तो अब अनाज क्या करना है 50% कम करो जैसे ही आप 50% अनाज कम कर लोगे ना आप देखो और उसकी जगह क्या करना है भूख भूखा नहीं रहना है कम नहीं खाना है फल सलाद अंकुरित दालें और मेवे अगर आपको सस्ते मेवे खाने हैं तो नारियल मूंगफली और तिल सबसे सस्ते हैं और अगर महंगे थोड़े खाने का आपकी ताकत है तो फिर बादाम अखरोट काजू पिस्ता हज़ल नट ब्रज़ल नट सब है सारे नट्स है तो मतलब तो आप नट्स एंड सीड्स तो ये मैक्सिमम थोड़ा अडॉप करना शुरू करो और
41:00 अनाज की मात्रा कम करो याद रखना दोस्तों आपने 50% अनाज कम किया ना आप देखोगे कि धीरेधीरे जैसे आपने अनाज कम किया देखिए हम दिन में तीन बार खाना खाते है ना तो आप एक बार कम से कम फल खाओ इतना तो कोई भी कर सकता है ना इतना तो कॉम्प्रोमाइज ठीक है कि एस ए मील है ऐसे प्रसाद की तरह नहीं और दूसरा खाना घर में जब खाओगे तो सलाड और अंकुर दालें अच्छी एक प्लेट भर के ऐसे टुकड़े-टुकड़े नहीं दो टुकड़े खीरे टमाटर के नहीं पूरा ऐसे बॉल भर के प्लेट भर के सलाड खाना है ध्यान रखना और उसके बाद जो आप चार रोटी खाते हो दो करो दो खाते हो तो एक करो और करके देखो तो सही एक एक महीना करके तो देखो आप हैरान हो जाओगे जैसे ही
41:45 आपने अन्न दाल थोड़ी कम कर दी 50% बता रहा हूं आपका जो ये जितने भी जो आपका ब्लड प्रेशर जो बढ़ा हुआ है सब धीरे धीरे एक 15 दिन महीने में नीचे आने लगेगा आएगा ही आना ही चाहिए नियम है उसका ऐसा कोई डाउट नहीं कि शायद शायद वर्ड नहीं है मेरे पास में ध्यान रखना और शुगर धीरेधीरे डाउन आएगी ही और आपका जो अनस्ट कंस्ट्रक्शन बॉडी में निकल गया ना ये आगे पीछे ऊपर नीचे तो ये सब डेमोलिश होगा यानी कि योगी जी हो जाएंगे आपका आपका आहार जो है ना योगी हो जाएगा। वो सारे तोड़फोड़ के सारा बॉडी को है ना सिस्टमेटिक कर देगा। दोस्तों मुझे हैरानी किस बात की होती है मालूम है। आज आज जेंट्स को देखता हूं। मैं महिलाओं को
42:32 देखता हूं। देखिए जेंट्स जब बेचारे 25 साल की उम्र तक कितने स्मार्ट और कितने बढ़िया होते हैं। कितने सुंदर होते हैं। लेकिन जब वो 30 35 40 साल की उम्र में जातेते जब वो ऑफिसों में जाते हैं, बिजनेस में जाते हैं। फिर मैं देखता हूं कि उनके बेढंगे जो शरीर बनने लग जाते हैं। पेट आगे आ गया होता है यानी कि गर्भवती महिला की तरह और यानी कि और सारे आगे पीछे ऊपर सब बढ़ चुके होते हैं दोस्तों और महिलाएं भी बेचारी कितनी सुंदर होती है और उनको तो सुंदर रहना चाहिए मरते दम तक लेकिन बस ज्यादा से ज्यादा उनकी सुंदरता 35 40 साल तक बस फिर उसके बाद में तो ऐसी पता नहीं शरीर की ढांचा बिगड़ जाता है कि वो सारी सुंदरता गायब हो जाती है और फिर सब बेडंगे हो जाते हैं तो दोस्तों याद रखना हम हम सत्यम शिवम
43:19 सुंदरम ये शब्द आप सुनते हो ना तो हमें हमें सत्य ये जो आज मैं जो बातें बता रहा हूं वो सत्य है जीवन के शिवम यानी कि कल्याणकारी है और सुंदरम यानी कि आपको सुंदर से सुंदर बनके जीना चाहिए क्यों कुदरत में सब चीजें सुंदर है इसलिए तो आप जैसे ही खाना कम करोगे ना बताऊ इतनी ऊर्जा बढ़ जाएगी मैं आपको बताता हूं आपके थकना मुश्किल हो जाएगा दोस्तों मेरा एक वीडियो है YouTube पर जाकर देख लीजिएगा कि थक कैसे थके यह समस्या है मेरी दोस्तों मैं सुबह जैसे 4 बजे उठता हूं मैं फिर मैं 11 बजे तक रात तक काम करता हूं और मैं अभी 76 इयर्स में हूं मेरी प्रॉब्लम ये थके तो थके कैसे साथ समझ में नहीं आता क्योंकि देखिए थकावट का मतलब क्या मालूम है हाई एसिडिक बॉडी तो अब आपकी बॉडी में इतनी एस एसिडिटी नहीं
44:07 है इतनी लाइटनेस है और स्वास्थ आज जो हम स्वास्थ्य का जो ये मामला सीख रहे हैं स्वास्थ्य का अर्थ क्या है स्व में स्थिर हो जाना तो दोस्तों मेरे पास शरीर है ना मुझे पता ही नहीं चलता कि मेरे पास शरीर है। पता नहीं मैं जब चलता हूं तो ऐसा लगता है कि मैं चल नहीं रहा हूं। वो जैसे जो ब्रह्मांड ऊर्जा मुझे चलाए जा रही है अपने आप। उड़े जा रहा हूं मैं ऐसे। तो क्योंकि शरीर भारी लगना चाहिए। सर दर्द होना चाहिए। कमर दर्द होना तभी तो आदमी को भारीपन लगता है ना। तो दोस्तों इतनी ऊर्जा महसूस होगी। जीभ पे कभी मेल नहीं आएगा। ऐसे-ऐसे करके टंग क्लीनर से क्लीन नहीं करोगे। ध्यान रखना और नींद ऐसे आएगी कि सुबह रात को सोए सुबह उठे ना तो ऐसा लगेगा पांच मिनट टू आवर सोके डाउट आता है मेरे को डाउट आता है कई बार कि जब मैं सोता हूं ना तो मैं सुबह सुबह अचानक जब 4:00 बजे आंख खुलती है ना तो मुझे क्या लगता है यार
44:54 अभी तक सोया क्यों नहीं यार क्या बात है लेकिन जब घड़ी देखता हूं बोले अरे बाप रे 4:00 बज गए अरे बाप रे पता नहीं चला मैं कब सोया इतनी बढ़िया नींद आती है बता रहा हूं मैं आपको तो दोस्तों कहने का मतलब और और कहने का मतलब क्या है आपका जो स्वाभाविक जो परमात्मा ने गुण दिया है ना वो सारे गुण आपको मिलने लगेंगे। आपको मैं बता रहा हूं और पसीने में कभी बदबू नहीं आती। आपके कपड़े मैं बता रहा हूं। देखिए आप हैरान हो जाएंगे। आपके कपड़े है ना जो खराब होते हैं आपके नमक के कारण जो आपके पसीने में निकलते हैं। एसिड के कारण निकलते हैं। आपको लगेगा कपड़े में कपड़े में चार दिन पहनू तो कोई कह नहीं सकता कि मैं चार दिन से पहन रहा हूं। मान लो और अंडर गारमेंट्स भी है ना खराब ही नहीं होते। कई कई सालों तक बता रहा हूं मैं आपको। क्यों? खराब ही नहीं होते। कोई एसिडिटी और नमक से खराब होते हैं जनरली तो कपड़े तो इसीलिए दोस्तों कहने मतलब कितने
45:41 लंबे चौड़े फायदे मैं क्या बताऊं आपको और इस तरह से अनाज को कम करना ठीक है अच्छा अब अंत में एक और चीज हमारे साथ जुड़ गई है वो है दोस्तों दूध देखिए मैं जानता हूं हम बहुत दूर आ गए देखिए दूध हमारी मजबूरी थी क्योंकि हम एक जमाने में हमें सर्वाइवल प्रमुख था हमने जानवरों को पाला जो भी जानवर घोड़े यानी कि जितने भी घोड़े पाले, हमने गाय पाली, हमने हमने ऊंट पाले, भैंस पाल ली, जो भी पा ली क्योंकि जिंदा रहना था। देखिए सर्वाइवर प्रमुख था इसलिए वो क्वेश्चनेबल बात नहीं है। आदमी ने तो मांस भी खाया, दूध भी पिया, सब पिया उसने तो दूध जो है ना देखिए आपको समझना क्या है मालूम है कि 4000 दुधारू प्राणी है। सबके
46:29 दूध उसके अपने बच्चे के विकास से बने विकसित हुए हैं। ठीक है ना? और उसमें वो तत्व होते हैं जैसे उसके बच्चे की केमिस्ट्री है। जैसे उसके बच्चे की ग्रोथ है। जैसे जितना दिमाग चाहिए नहीं चाहिए इस तरह से। ठीक है ना? तो हमारी मां का दूध में हमारे तत्व होते हैं। समझे? तो दूध का नियम क्या मालूम है? दांत नहीं आने तक परमात्मा की व्यवस्था। दांत आए दूध गाए। फिर संसार का कोई प्राणी पलट के दूध पीता नहीं। गाय का बड़ा भी महीना भर के बाद मां का दूध छोड़ देता है और हमारा भी हमारा भी दूध जो है दो साल तक चलता है और उसके बाद में फिर मां स्तन काटता है तो बच्चा मां मां दूध छुड़ा देती है यानी कि दूध जो है दांत नहीं आने तक परमात्मा की व्यवस्था और सॉलिड आते ही फिर दूध की दूध की दूध शब्द
47:15 हमेशा के लिए खत्म बस तो लेकिन हम लोगों ने क्या किया हमारे दांत आने के बाद भी हम दूध को मेंटेन करते रहे तो आप जानते हैं कि बचपन के बाद में जो है दूध की पाचन ग्रंथियां हमारी कमजोर होने लगती है। कम होने लगती है जिसको रेनिन कहते हैं। ठीक है ना? वो धीरे-धीरे कम होने लगती है। तो जो दूध का लैक्टोज होता है वो टॉलरेंस कम होता है। तो फिर लैक्टोज इनटोलरेंस जैसे समस्याएं होने लगती है। और कई लोगों की पित्त बॉडी है तो थोड़ा पता नहीं चलता जल्दी कि दूध ठीक है कि नहीं उनके लिए। तो तो दूध जो है बचपन के बाद हमारी नीड ही नहीं है और और कोई भी दूध किसके लिए डिजाइन है? जैसे उसके बच्चे की ग्रोथ अब आप देखो ना गाय का बछड़ा 60 70 75 प का पैदा होता है और दो साल में
48:02 जाकर डेढ़ दो हजार पौ का बन जाता है आदमी का बच्चा छ सात आठ पौ का पैदा होता है और 20 साल लगते हैं 18 20 साल लगते हैं उसको 150 200 प का बनने का मैच्योर होने के लिए तो आप जरा सोचो ना हमारी मैच्योरिटी 20 साल की उनकी दो साल की इतना डिफरेंस तो आप जरा सोचो कि उस दूध में कितने तरह तरह के हार्मोनस 56 काइंड्स ऑफ हार्मोंस होते हैं। ध्यान रखना दूध के अंदर ग्रोथ हार्मोनस कहते हैं उसको। जो हार्मोंस अगर आप अपनी बॉडी को बैठे-बठाए ऐसे ही इंजेक्ट कर रहे हो दूध पी रहे हो तो आप हार्मोनल ड्रिंक पी रहे हो ध्यान रखना। और तो फिर आपकी बॉडी क्या करती है? उन हार्मोंस को मैनेज करने के लिए हमारे थायराइड, हमारा पनक्रियाज, हमारे प्रोस्टेट जितने हमारी हार्मोनल ग्रंथियां है उनको मैनेज करने के
48:47 लिए फाइट करती है। ओवर एक्टिव होकर काम करती है। फिर समय आने पर उनकी बीमारियां सामने आती है। तो देखिए मैं दूध जो है ना तो बचपन के बाद में है ना दूध की हमारे बॉडी में उसका शब्द होना भी नहीं चाहिए। और देखिए क्या आप ऐसा बोल सकते हैं क्या कि देखिए जानवर का दूध जानवर के लिए सूटेबल नहीं है जरा सोचिए क्या आप ऐसा बोल सकते हैं कि शेरनी का दूध गधे के लिए बड़ा अच्छा होता है। गधे का दूध ऊंटने के लिए बड़ा अच्छा होता है। ऊंट का दूध बकरे के लिए बड़ा अच्छा होता है। अरे जब जानवर का दूध जानवर के लिए सूटेबल नहीं है भैया तुम्हें कैसे सूटेबल करेगा। तो इसीलिए बचपन के बाद में दूध का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। देखिए आप में से कई लोग जैन है यहां पे है ना तो मैं एक जैन धर्म के हिसाब से कविता सुनाता हूं कि मांस दूध
49:33 शहद और अंडा मांस दूध शहद और अंडा ये चार माह चोरी का धंधा जो कोई खाता इसे बेचता है वो पशु से बदतर बंदा कोई ना प्राणी किसी के खातिर कोई आहार जुटाता है मेहनत कर दिन रात बेचारा अपने लिए कमाता है ये क्रूर बेदर्दी अत्याचारी मानव इसे चुराता है धिक्कार इसके के जीवन पर औरों की कमाई जो खाता है क्या इन पर अधिकार तुम्हारा किस हक से चुराते हो सबका अपना अपना जीवन तुम क्यों बीच में आते हो उठो मानव होश में आओ अपना आहार खुद कमाओ चाहे जितना खाओ लुटाओ हर फल तुम्हारा अंडा है हर मेवा तुम्हारा मांस इसमें भरपूर दूध छुपा है मधु की छिपी मिठास जो जीता और जीने देता
50:21 जो जीता और जीने देता वही सच्चा खुदा का बंदा कहे नंद खूब खूब पेड़ उगाओ और खूब करो फलों का धंधा। तो दोस्तों जियो और जीने प्राणियों को छोड़ो। क्यों गाय भैंस के पीछे जा रहे हो यार? अरे गाय भैंस की शक्ति तुम गाय भैंस को कैसे मां कहते हो यार? तुम गधे को गधी को मां कहोगे कि तुम किसी ऊंटनी को मां कहोगे कि तुम किसी बकरी को अपनी मां कहोगे। कमाल है यार। तुम देखिए जानवरों के साथ प्यार करो लेकिन उसको मां क्यों रिश्ता क्यों जोड़ रहे हो यार? ना तो इसीलिए ना ना गाय तुम्हारी माता है ना बैल तुम्हारा बाप जिस तरह ऊंट बकरी के गधे नहीं मां-बाप तो दोस्तों कोई किसी का मांबाप नहीं है जानवरों के साथ प्यार करो लेकिन अपना
51:07 रिश्ता मत डेवलप करो उनके साथ मां मां की तरह इस तरह से तो देखिए आपका दूध जो है ना भगवान ने नारियल में अखरोट में बादाम में दिया देखिए भगवान ने क्या कमी रखी तुम्हारे खाने में भैया कि जो तुम जानवरों के पीछे भाग रहे हो याद रखना अपना ही आहार देता स्वास्थ्य का सच्चा फायदा पराया आहार रोगी करता कुदरत का सीधा फायदा इसीलिए रिटर्न बैक टू योर ओन फूड रिटर्न बैक टू योर ओन नेचर दैट्स ऑल दोस्तों तो इस तरह से आप अपने थोड़ा सा आहार का ख्याल करें और देखिए जब आप ऐसे आहार पर रहोगे ना दोस्तों तो आपको पानी की जरूरत बड़ी कम पड़ेगी ये फालतू बोलते है ना अल्कलाइन पानी पियोने ये पानी पियो ने वो पानी पियो ने ये सब लफड़े मेरे जीवन में तो नहीं है भैया मैं तो तुलसी का पत्ता भी नहीं खाता
51:53 हूं बता हूं। ऐसा नहीं कि नहीं खाना चाहिए। बीमार पड़ने पर जरूर आप उपयोग कर लीजिए। तो तो लेकिन आज है देखो ना आज हमें कई तरह के सप्लीमेंट लेने पड़ते हैं। आज कई तरह के हमें क्यों लेने पड़ते हैं? क्योंकि तुम अपने शरीर में कमियां पैदा करोगे तो दुनिया तो तुम्हें वो पकड़ाएगी ना। तुम कमजोर बनोगे तो तुम्हें लोग अंगूठियां भी पहनाएंगे। ज्योतिष लोग तुम्हें अंगूठिया भी पहनाएंगे। क्यों? तुमने अपने आप को कमजोर क्यों बनाया भैया? तो कहने का मतलब क्या है? हर चीज अपनी जगह पे सही है लेकिन तुम्हें अपने अपने प्रति जागना है दोस्तों। तो देखिए एक समाप्त करने से पहले एक शेर सुनाना चाहता हूं के मेरी थोड़ी लिखने की आदत है के संत लाख कहे कि जीवन असार है। संत लाख कहे
52:40 कि जीवन असार है। परंतु जीवन जी लेने में ही सार है। खुदा इतना भी पागल नहीं है यारों के रास्ता है खुद हर पल और फिर कहे कि बेकार है। तो याद रखना दोस्तों लाइफ इटसेल्फ इस द गॉड लिव लाइफ एंड लव लाइफ। आई एम टेलिंग यू। जीवन से आगे अगर कोई परमात्मा तो हमारे काम का नहीं है। जीवन ही परमात्मा है। मैं यू कहता हूं। तो दोस्तों बहुत लंबा चौड़ा विषय है और आप कभी ऐसी जरूरत पड़ी तो कभी हम क्वेश्चन आंसर के लिए तिलोक जी कभी ऐसा लगे कि क्वेश्चन आंसर सिर्फ लोगों की जो समस्याएं हैं हेल्थ की ऐसी कभी कोई जरूरत पड़ी तो मैं आपके साथ एक दिन सुबह सुबह मैं फिर जुड़ जाऊंगा और सिर्फ आपकी जो समस्याएं है
53:26 इसके स्वास्थ्य की उससे संबंधित हम एक घंटा चर्चा कर पाएंगे अगर जरूरत महसूस हुई तो ठीक है तो चलिए मैं बहुत-बहुत शुभकामना देता हूं और मैं खास करके मैं देखिए एक बात ध्यान रखिएगा वैसे YouTube YouTube पे आप जाएंगे दोस्तों तो आपको बहुत कुछ जानने को मिल जाएगा और सब्सक्राइब कीजिएगा देखिए आपको लगता है कि ऐसा ज्ञान दुनिया तक पहुंचना चाहिए तो आप हमारे YouTube को भी सब्सक्राइब कीजिएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ये सब चीजें पहुंचे और यह जो आज जो रिकॉर्ड हुआ है आपके साथ में आपको लगता है कि यह लोगों के जीवन के लिए अच्छा है आपको ठीक लगता है तो आगे इसको प्रचार प्रसार कर दीजिएगा ठीक है और तो मैं त्रिलोक जी को और आपके आरसीएम के पूरे सदस्यों को ग्रुप को मैं बहुत-बहुत वास्तव में बधाई देता हूं और मैं मैं इसके लिए भी
54:15 धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे मेरे इस क्या कहते हैं कि थोड़ छोटे से जो जानकारी है उसको आप तक पहुंचाने का मुझे उन्होंने एक प्लेटफार्म दिया, अवसर दिया। सो आई एम रियली थैंकफुल टू हिम रियली रियली। जी बहुत-बहुत धन्यवाद। छोटी सी जानकारी नहीं है। जानकारी तो मतलब जानकारी ज्यादा आ गई हमारे जीवन में। में वही तकलीफ का विषय है। शायद अज्ञानी रहते तो ज्यादा अच्छे से जी पाते क्योंकि सारे जीव जानवर जो है अज्ञानी होते तो अपनी तरीके से जीते हैं और हमारे ज्ञान को हम अनेक मिसयज कर लिए इसलिए वापस उस ज्ञान को हटाने के जरूरत पड़ रही है और आपने बहुत
55:01 ही तर्कों से बहुत तर्कसंगत तरीके से बहुत सारी चीजें हमें समझाई है और जहां तक प्रश्न उत्तर का सवाल है तो अगर हम प्रश्न पूछना शुरू करेंगे तो दुनिया इतनी समस्याओं से घिरी हुई किलो सालों तक सिलसिला खत्म नहीं होगा। इतने सवाल है जब भी हम इस तरह का करते हैं तो सवाल ही सवाल आते हैं तरह तरह के। तो साथियों पांच दिन का हमने एक अद्भुत सेशन हमें मिला है। इसको काम में लेंगे तो फायदा है। केवल इधर सुना और उधर चले गए तो कुछ फायदा नहीं है। बहुत सारी अच्छी-अच्छी चीजें हमें जानने को मिली है। तो हम धन्यवाद देने का तरीका यही होता है जीवन में कि हम शब्दों से बोल के धन्यवाद देते
55:47 हैं। वो कोई धन्यवाद नहीं है। उन चीजों को वास्तविक में हम अपनाते हैं। उन चीजों को हम फैलाते हैं जो काम कारवा बढ़ा है उस कारवा को आगे बढ़ाते हैं तो ये धन्यवाद देने का सही तरीका होता है। बिल्कुल सही है। बिल्कुल सही इस रूप में हम धन्यवाद दे। डॉक्टर साहब को मैं बताना चाहता हूं कि हमने भी 2026 को स्वास्थ्य क्रांति वर्ष के रूप में इसको संकल्प लिया हुआ है कि हमें दुनिया को स्वस्थ रोग मुक्त बनाना है और आपका जो सत्र है इसमें बहुत ज्यादा उपयोगी साबित होगा। हमने सबको टारगेट दे रखा है कि तीन महीने के अंदर अंदर आपको सबको रोग मुक्त होना है और अपने परिवारों को दवाओं से दूर करना दवा होना चाहिए
56:33 तो ये जो जानकारियां है बहुत काम आने वाली है और सभी साथी बिल्कुल इनका उपयोग करेंगे तो बहुत मैं जगह हमेशा आपके सारे लोगों के लिए हमेशा उपलब्ध रहेगी आप कभी भी याद कर लीजिएगा पांच मिनट हम आपका और लेंगे किसी साथी का जो पांच दिन के सत्रों में ऐसा कोई विशेष कोई रह गया हो, कोई कंफ्यूजन हो रहा हो तो आप पूछ सकते हैं। ज्यादा समय तो नहीं पर एक दो सवाल। मैं एक सवाल सबसे पहले मैं पूछ लेता हूं जो आपने शक्तिपात कराया था तो जो लाइव लाइव के समय तो चलो सबने शक्तिपात किया हो एक ही का लेकिन उसको क्या कोई बाद में देखकर भी करेगा तो उतना ही लाभकारी होगा। हां ये ये मैं उस समय बताना चाहता था। मैं
57:19 भी उस समय भूल गया था। पर हां सब लोग ध्यान में रख लें कि अगर आप YouTube पर जाकर जैसे कि वहां पर लोडेड है पब्लिश है तो उसमें भी 15 मिनट का देखिए क्या होता है कि जब आप 15 मिनट का ध्यान करते हैं और उस समय आप हमको दिमाग में रखते हैं तो आपकी ऊर्जा हमारे साथ कनेक्ट हो जाती है और उस समय जो हम एनर्जी जो क्रिएटेड क्रिएट करते हैं वो एनर्जी परमानेंटली यूनिवर्स में रिकॉर्डेड हो गई है। इसीलिए आप जब भी वो YouTube पर भी जो शक्तिपात हुआ है अगर आप उसके ऊपर जाकर 15 मिनट का ध्यान कर लेंगे तो आप अपने परिवार समेत तो आप भी महसूस करेंगे कि 15 मिनट के बाद आपके हाथों में सचमुच एनर्जी का फ्लो आने लग जाएगा। तो यानी कि
58:05 उसके उस वहां से भी आप शक्तिपात का पूरा लाभ 100% एस इट इज ले सकते हैं। चलिए और किसी का सवाल एक बार एक बार बुलाए सर हां रविदास जी बोलिए बोलिए ना सर एक एक कनेक्टिंग सवाल है कि ये शक्तिवाद एक बार हम लोग कर लिए हैं लाइव मतलब लाइव जब किए थे उसी दिन तो ये क्या हम लोगों को बार-बार करना पड़ेगा? नहीं नहीं नहीं नहीं एक ही बार ये पहली बार सिर्फ हम वो तो हमें काम करना करता है इसलिए हम ये करवाते हैं। एक बार आपका हो गया फिर बार-बार बिल्कुल जरूरत नहीं है। फिर तो रेकी का खाली प्रयोग करते जाओगे तो उतनी आपकी हाथ की सेंसिटिविटी बढ़ती बढ़ती चली जाएगी। तो मतलब फिर बाद में बिल्कुल
58:51 जरूरत नहीं होती। हां अगर आपको लगता है कि कई महीने हो गए, कुछ साल हो गए, आपने बिल्कुल प्रयोग ही नहीं किया तो फिर आप दोबारा वापस YouTube पे जाके दोबारा शक्तिपथ का फिर से प्रयोग कर लीजिए। मान लो कई दिनों से महीनों से यूज़ नहीं किया आपने तो ऐसे तो उस समय आप चाहे तो कर सकते हैं वरना इसकी सेकंड टाइम जरूरत नहीं होती। जी धन्यवाद। बहुत सारे साथी का यही सवाल था। फोन भी आया था आप लोग हैंड ओवर कर सकते हैं। आइए रितेश भैया आप आइए। हां धन्यवाद। सर से सवाल था कि सर रेकी हीलिंग व्यवस्थित ढंग से करने के लिए क्या सभी का विगन होना जरूरी है? सर? नहीं नहीं नहीं देखिए क्या होता है जहां तक एक खानपान जो है ना ये एक सभ्यता और सिविलाइजेशन का प्रॉब्लम है क्योंकि हम बचपन से जो हम लोग खा पी रहे होते हैं ना हमें हम हम उसको हम हम रूटीनली खा रहे
59:38 होते हैं हमारे जैसे अभी आज मैं विदेशों में जाता हूं और वहां पर मैक्सिमम जितने भी लोग विदेशी लोग हैं अमेरिकन यूरोपियंस ये सब जो है मांसाहारी लोग हैं जनरली लेकिन उनके हाथों में भी उतनी ही एनर्जी है और वो वो उतने ही और बड़े सिंसियरली करते हैं और बहुत पावरफुल हीलर्स बने हुए हैं। तो इसका मतलब ये नहीं है कि इसमें कोई शक नहीं। देखिए क्या होता है के जैसे पर हां एक चीज मैंने अनुभव की है कि जैसे जैसे आप इस शक्ति का उपयोग करना शुरू करते हैं ना आपका आकर्षण गलत चीजों के प्रति अपने आप कम होने लगता है। तो मेरे विदेशी भी जो विद्यार्थी है उन्होंने भी नॉनवेज जो है छोड़ना शुरू कर दिया। क्यों? अब उनके अंदर एक सात्विकता का भाव आने लग गया है। तो पर इस कारण क्या होता है? विगेनिज्म अपनाने से सबसे पहली बात क्या
1:00:25 है? अब जानवरों के प्रति जो हमने क्रूरता अपना ली है, उनके उनको आपके हमारे डिमांड के कारण जानवरों पर जो अत्याचार हो रहे हैं वो कम से कम कम हो जाते हैं। अगर आप ज्यादा शहद की मांग करोगे, आप ज्यादा दूध की मांग करोगे तो उतने ही गायों पर जो है अत्याचार होगा। तो इसीलिए हमें जानवरों को मुक्त करना है। उनको फ्री करना है और हमें भी बचाना है अपने आपको। क्योंकि अगर हमें दूध से हेल्थ मिलता तो हम जरूर उसको पीते भाई लेकिन ऐसा नहीं होता इसलिए विगेन बनना बहुत जरूरी है और विगेनिज्म क्या मालूम है ये धरती का पर्यावरण और जानवरों की स्वतंत्रता ये दोनों के ऊपर काम करती है इसलिए विगेनिज्म बहुत जरूरी है ठीक है ना रंजीत सर
1:01:11 जी वाकई में सर बहुत चमत्कार है हम लोगों के अंदर सही है ना सर बहुत-बहुत धन्यवाद है चार तारीख को सर हम रोज रात को सोते हैं तो सर मच्छरदानी लगा के सोते हैं। लेकिन 4 तारीख को हमारे मच्छरदानी के अंदर एक मच्छर चला गया था। उसको मैं पकड़ के बाहर किया तो जैसे लगा कि वो मर गया। लेकिन रेकी हीलिंग किए ना सर वाकई में थोड़ी देर बाद वो उड़ के भाग गया। तो वाकई में सर हमने [हंसी] कि आप सही बताए थे कि अपने ऊपर जानवर के ऊपर किसी के ऊपर करेंगे। सर वाकई में हमारा जिंदगी सर बहुत धंधे हो गया और इस सिस्टम के हम बहुत जी धन्यवाद भैया। चैट बॉक्स में एक सवाल आया है कि पास्ट लाइफ पास्ट लाइफ के बारे में कैसे जाने? कहां कांटेक्ट करें सर? देखिए पूर्व जन्म के बारे में पहली बात तो
1:01:59 ये कि हर व्यक्ति को एक बार पूर्व जन्म का लाभ जो में जरूर लेना चाहिए। अभी मैं बताना चाहूंगा कि अभी तो फिलहाल एक काम करें। अभी आठ तारीख को जो है ना मैं अभी हम लोग है ना एक ग्रुप पास लाइव सेशन लेने वाले हैं। आप घर में बैठे-बैठे ऑनलाइन आप जा सकते हैं और जो मैं हर महीने जनरली करता हूं। तो आप है ना एक नंबर चाहे तो नोट कर लें 985 9818570079 और फिर भी अगर आपको ज्यादा नंबर की कोई समस्या हो तो मेरे YouTube पर जाएंगे तो वहां सारे नंबर आपको मिल जाएंगे। ठीक है
1:02:45 ना? तो इस तरह से आप जो है वहां संपर्क कर लीजिएगा। तो मतलब उस पूर्व जन्म और भविष्य गमन ये दोनों वहां पर आप कर सकते हैं। देखिए मैं यहां पर एक बात जरूर बताना चाहूंगा कि हमारे भगवान बुद्ध ने महावीर ने जाति स्मरण की बात की थी। जाति स्मरण का मतलब है अगर आप दुनिया में आए हो और आपको यह नहीं मालूम कि मैं कौन हूं मैं क्या हूं जीवन का सत्य क्या है तो आप जीवन भर अंधकार में जीते हैं एक घोड़े की नाल की तरह तो इसीलिए मैंने एक शेर लिखा कि यू तो जन्म हजार लिए एक और जन्म लिया तो क्या जिस दिन जागा तभी जन्मा में वृंदावन जिया तो क्या तो दोस्तों पूर्व जन्म और भविष्य गमन आंखें खोलता है आपको मृत्यु के डर से समाप्त करता है जात पात ऊंचनीच का भेदभाव
1:03:31 समाप्त होता है और आपको रूट कॉज समझ में आते हैं तो आप है ना कभी जीवन में प्रश्न नहीं करोगे जजमेंट नहीं करोगे क्यों सब कुछ तो संसार में नियम से चल रहा है नीम नियम से निकल रहा है आम से निकल रहा है आप कैसे क्वेश्चन करोगे तो आपके सारे क्वेश्चन समाप्त हो जाएंगे और आपको जीवन का परम सत्य जो चाहिए वो आपको उससे मिलने लग जाता है इसीलिए पूर्व जन्म की यात्रा बहुत जरूरी है ठीक है ना तो आप जरूर मौका मिले तब जरूर करते रहिए हम हर महीना करते हैं जनरली पूर्व जन्म की कार्यशाला तो आप उसमें ज्वाइन कर सकते ठीक है जी और बाकी जो है एडवांस लेवल जो रेकी का है वो अभी 14 और 15 को होने वाला है अभी 14 और 15 को एडवांस रेकी लेवल होगा तो अगर उनको उसमें भी आगे बढ़ना है रेकी में तो और उसमें और मजेदार बहुत जबरदस्त चीजें
1:04:16 आपको जानने को मिलेगी तो आप चाहे तो उसमें भी फिर ज्वाइन करके आगे बढ़ते रह सकते हैं आप लोग ठीक है जी ठीक है सर धन्यवाद सर और आदरणीय सर के पास चलते हैं जी गुरुदेव आइए प्लीज समय भी हो गया है और किन्ही को लेना है क्या आप एक बार साहब अगर पांच मिनट की और इजाजत दे तो एक दो प्रश्न ले ले सकते हैं कोई दिक्कत नहीं कोई दिक्कत नहीं आराम से ठीक है तो आगे बढ़ते हैं संजीव सर आप आइए प्लीज हाथ दर्द करेगा नहीं तो जी आइए धन्यवाद मैडम सर से जानना चाह रहे थे ये एडवांस रेखी का जो कोर्स है फिजिकली तौर पर इसका समय स्थान और फीस कृपया इसको अवगत कराएं देखिए ये ये हमारे ये थोड़ी पेबल होती है।
1:05:05 ये तो रेकी तो मैं प्रचार प्रसार के लिए काम करता हूं। फिर आगे जिनका रुचि होती है तो वो थोड़ी चार्जजेबल हो जाती है। तो आप क्या करें? हमारे जो नंबर जो दिए गए ना वहां पर आप सारी इंक्वायरी करेंगे तो वहां फीस वगैरह सब कुछ वहां पता चल जाएगी आपको। तो अभी 1415 को है ये तो आप उसको समझ के चलिएगा। ठीक है ना? तो और कुछ पूछ बताइए। सुनिए ये ऑफलाइन ऑनलाइन होती है हमेशा क्लासेस और क्योंकि ऑफलाइन के लिए तो फिर हमें अगर ऑ्गेनाइज करना है तो वो तो फिर मतलब फिर से वो लंबा चौड़ा तामझाम थोड़ा करना पड़ता है कॉन्फ्रेंस हॉल्स पब्लिक लोगों को इकट्ठा करना एक जगह पर वो तो फिर आगे ऐसी कोई जरूरत पड़ी तो हम जरूर करेंगे लेकिन अभी ऑफलाइन भी लेकिन अभी फिलहाल जो
1:05:50 है आप ऑनलाइन ज्वाइन कर सकते हैं जी धन्यवाद आइए धनराज भैया दो सवाल थे क्लियर हो गया एक इस्तेमाल नहीं करना था लेकिन दूध से बने हुए जो पदार्थ दूध से बने हुए जो पदार्थ है जैसे छाछ है या दही हम देखिए जैसे हां जी हां जी देखिए पहली बात तो क्या है धनराज जी के अब छाछ जो है ना वो हमारा जैसे बोलते है ना जीवन का अंग बन गया कई परिवारों का साउथ इंडियन लोगों का तो छाछ तक तो सीमित है। कोई दिक्कत की बात नहीं है। क्यों मालूम है? क्योंकि छाछ जो है वो उसमें बहुत कम दूध की मात्रा होती है दही
1:06:35 की। तो इसलिए वो टोलरेबल है। मतलब यू समझना तो इट कैन बी टेकन। कोई दिक्कत की बात नहीं है। दही क्योंकि मैं जानता हूं परिवारों में आदत पड़ चुकी होती है। दही के व्यंजन बन चुके हैं। तो ओकेशनली कभी कबभार आप एंजॉय करना चाहे तो जरूर करें। पर और और मैं जानता हूं कि वैसे नारियल का दही, मूंगफली का दही, काजू का दही सब बनते जरूर है और बाहर विदेशों में जो है अब ये विगेनिज्म का इतना दौर आ गया है कि वहां पर हर यूरोप में अमेरिका में लंदन में सब जगह आलमंड योगर्ट, वेलनट योगर्ट, कैच योगर्ट, पीनट योगर्ट सब योगर्ट आ गए वहां पे। भारत में अभी थोड़ी सी अभी उतनी वो बोलते है जोरदार उसका वो आया नहीं है तो आप लोग उसको कभी कबभार इस्तेमाल करें पर यहां मैं बता देना चाहता
1:07:21 हूं कि दही हम क्यों खाते हैं हम इसलिए खाते हैं कि हमारे ग बैक्टीरिया जो है बेसिलस जो बैक्टीरिया है एसिडोफिलस वो हमारी बॉडी को मिले पर सवाल क्या होता है कि क्या परमात्मा ने आपके आंतों में आपके हेल्दी बैक्टीरिया पहले से दिए हुए नहीं है कि जो आपको बाहर से लेने पड़ने की वो पड़ रही है। ये ये दही खाने की प्रथा क्यों चली? क्योंकि हमने मांसाहार और अनाज दाल इतना खा के पेट में इतनी सड़न पैदा कर दी कि पेट के ग बैक्टीरिया में बड़ा प्रॉब्लम आने लगा। इसीलिए लोग फिर इस तरह की चीजें खाने लग गए। मैं यू कहता हूं आग लगाकर आपने पानी डाला। यू समझ ले। लेकिन अगर कोई आदमी रियल में हेल्दी फूड खा रहा है, सिंपल होलसम बोलते हैं ना ये
1:08:07 प्राकृतिक आहार खा रहा है तो उसको जिंदगी में कभी भी जरूरत नहीं पड़ती। देखिए आज मैं तो क्या मेरी तरह हजारों लोग आज रॉ फूड नेचुरल फूड फॉलो कर रहे हैं। तो मैं 50 साल से मैं इस आहार पर रह रहा हूं। बल्कि मैं कहता हूं ना कि मैं रोज दो बार प्रॉपर फॉर्म फॉर्म में मोशन जाता हूं और बिल्कुल 10 सेकंड में जाता हूं। बता रहा हूं। कभी पेट खराब, एसिडिटी, कुछ भी नहीं हुआ। ना मैंने कभी दही खाया उसके लिए। तो मेरा मानना क्या है? दही की आदमी को रत्ती भर भी जरूरत नहीं है। इसका मतलब ये हो गया कि गाय नहीं होगी तो आदमी का पेट ठीक नहीं रहेगा। क्या नॉनसेंस है भाई ये? तो इसीलिए ठीक है अब हम बहुत दूर आ गए हैं। हमारी आदतें पड़ चुकी है। तो ठीक है ओकेशनली एंजॉय कर लो बस।
1:08:53 जैसे सर एक और रहा था। जैसे भोजन करने के तुरंत बाद में अगर पेट मतलब वो बाथरूम जाने का कर रहा तो ये क्या कारण हो सकता है? जैसे ऐसे खूबस में आ रहे हैं। हां नहीं देखिए क्या होता है कि देखिए कई बार क्या पहली बात तो ये है कि अगर आप सही ढंग से भूख से और कॉम्बिनेशन सिंपल करके खाएंगे ना तो आपके पेट में गैस नहीं बनेगी। समझे ना? और लेकिन प्रॉब्लम क्या होती है कि कई बार पेट में ना गैस बनी रहती है और जब हम खाना खा लेते हैं ना तो एक पेरिस्टासिस मूवमेंट जो हमारे ऊपर से जब शुरुआत होती है तो वो गति पूरे आंतों तक जाती है तो उससे क्या होता है कि अगर कई लोगों के पेट में अगर गैस फॉरेशन है तो वो तुरंत जो है ना उसको क्योंकि खाना गया
1:09:39 है तो वो पेरिस्टासिस मूवमेंट आगे पुश करके वो नीचे की तरफ जाने की कोशिश करती है रिलीज करने के लिए तो ऐसे लोगों को कई बार खाना खाते ही मोशन आता है वरना नहीं तो वैसे खाना खाते ही मोशन आना नहीं चाहिए एस ए रूल क्योंकि वो प्रॉपर पचने के बाद ही आना चाहिए ओरिजिनली यू समझ रहे ठीक है ना पर वो गैस के कारण होता है जी धन्यवाद सर धन्यवाद सर इस परिहार सर जी इस परिहार सर आप आइए जी मैम ये पांचों दिवस का हम पूरे परिवार ने लाभ लिया है और अप्लाई भी करके देखा है तो निश्चित हमें काफी फायदा मिला और एक अनुरोध मैं आदरणीय गुरुदेव हम सबके मसीहा डीसी सर से भी चाहूंगा और डॉक्टर साहब से भी के आरसीएम वर्ल्ड में ऐसा फिजिकल प्रोग्राम
1:10:26 आयोजित हो तो हम लोगों को और लाभान्वित हो पाएंगे। धन्यवाद। बिल्कुल करेंगे। जरूर करेंगे पर आपको जो टारगेट मिले हुए हैं वो पहले पूरे करो। उसके बाद जो आप चाहोगे सब कुछ होगा। तीन महीने का टारगेट पूरा करो तो फिर वो बोलते है ना देखो तथास्तु हो जाएगा। सीढ़ियां चढ़ना शुरू करें, सीखें, अपने भोजन को चेंज करें, रेकी का प्रयोग करें और ग्रोथ जो करनी है हमें वो सब कुछ करें ताकि हम थोड़ा सा एक रिलैक्स हो जाए। थोड़ा सा स्थिति में आ जाए। यस जी सर। लखन भैया अब मैं इसलिए फोन किया था कि बहुत सारे साथियों को जो बोल रहे थे एडवांस कोर्स के
1:11:13 लिए तो वहां पे कॉल करने के बाद एक ग्रुप बना हुआ है उस ग्रुप में ऑलरेडी ऐड कर देते हैं रेकी हीलिंग फाउंडेशन के जो सदस्य है मेरा ऐड किए हैं मैंने बात किया था तो अच्छा अच्छा बहुत बहुत शानदार भैया बहुत शानदार इंफॉर्मेशन आइए विनय सर मैं मैं ना सेकंड डिग्री का एक लिंक जो क्या बोलते हैं उसका जो लिंक है मैं आपको आपके आपके यहां भेज दूंगा तो आप अपने ग्रुप में सबको उसको भेज दीजिएगा फिर आप चाहे तो सर जी गुरुदेव पांच दिन के सेशन में आपने बहुत कुछ दिया है सर कुछ बोल रहे बोलिए बोलिए भेज देंगे बोलने दो जी
1:11:59 बोलिए विनय सर जी जी पांच दिन के सेशन में गुरुदेव आपने बहुत कुछ दिया है। इसके लिए तहे दिल से धन्यवाद। फिर भी मेरे मन में दो प्रश्न रह गए हैं। एक तो यह कि आप पुनर्जन्म पर काम करते हैं। क्या पुनर्जन्म होता है? ये सही है। दूसरा क्वेश्चन मेरा ये है कि निरंतर मतलब ये रेकी हीलिंग के लिए निरंतर अभ्यास भी जरूरी है। तभी काम करेगा। ये मेरे दो प्रश्न। हां जी। देखिए पहली बात तो निरंतर अभ्यास शुरुआत में करेंगे तो आपकी जो सेंसिटिविटी है ना वो बहुत हाई हो जाएगी। कुछ दिनों तक 21 दिन एक महीना करने से और किसी को हीलिंग करने से भी बाद में आप अगर बाद में फिर नहीं भी करेंगे ना तो जब भी जरूरत पड़ी तो तुरंत हाथ को रगड़ा और आपने तुरंत
1:12:46 किसी को उपचार कर दिया। ये लाइफ लोंग अब आपके हाथों में है। आप जब भी किसी की तकलीफ आएगी आप अचानक दो चार महीने में इस्तेमाल भी करोगे ना तो आपके हाथों में एनर्जी का फ्लो रहेगा। वो कभी बंद नहीं होता। ओके पहली बात और जब एडवांस लेवल में ना हम कुछ तकनीक भी सिखाते हैं कि इंस्टेंट हाथों को इमीडिएट कैसे एक्टिवेट करें ऐसा होता है ना तो वो सब थोड़ी तकनीकी बाद में जाकर थोड़ी और भी हम सीखते हैं तो फिर आपको कभी भी लाइफ लोंग जो है आपको कभी कुछ एक्स्ट्रा करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी वो हाथों में हमेशा रहेगी और पुनर्जन्म क्यों होता है क्योंकि देखिए पहली बात अगर आप अगर गीता को मानते हैं तो कृष्ण कृष्ण ने जो गीता में कहा है और शंकराचार्य को मानते हैं तो पुनरप जनम पुनरप मरणम जो भी बुद्ध महावीर को मानते हैं तो आपने देखा होगा जितने भी दुनिया
1:13:32 में बड़े-बड़े जो ऊंचे लेवल पर जो एवरेस्ट को छू चुके हैं आत्मज्ञानी लोग उन्होंने सब ने पुनर्जन्म की बहुत खुलकर व्याख्या की है बातें भी की है और अगर मैं कहता हूं और गरुड़ पुराण हमारे जीवन में हम वांछते भी है लेकिन उसके बावजूद भी मान लो हम थोड़ा और ज्यादा वैज्ञानिक जाना चाहते हैं तो मैंने बताया ना कि मैं तो खुद बड़ा वैज्ञानिक माइंड का आदमी हूं मैं वैज्ञान के बिना बात भी नहीं करता तो आपको जानकर के हैरानी होगी के में कम से कम 100 से ज्यादा मेडिकल डॉक्टर्स जो है मैं उनके नाम आपको दे सकता हूं और अभी वर्जिनिया यूनिवर्सिटी आप है ना में जाइएगा वर्जिनिया यूनिवर्सिटी डालिएगा वहां पर डॉक्टर इयान स्टीवन इयान स्टीवनसन जिन्होंने 3000 पास्ट लाइफ के डॉक्यूमेंटेड केसेस जो है वहां पर उन्होंने ये यूज किए हैं और दुनिया में
1:14:19 अगर आप डॉक्टरों के नाम अगर आप जानोगे तो डॉक्टर यान स्टीवशन डॉक्टर रेमंड मोडी डॉक्टर दीपक चोपड़ा डॉक्टर ब्रिस डॉक्टर माइकल न्यूटन ऐसे जितने ये नाम बता रहा हूं ये सब बड़े-बड़े मेडिकल डॉक्टर है डॉक्टर वाल्टर सिनको जो कैलिफोर्निया में उन्होंने एक बोन अगेन किताब लिखी है जिसके अंदर अमिताभ बच्चन शाहरुख खान अब्दुल कलाम सबके बारे में उन्होंने बताया हुआ है तो मतलब देखिए मैं तो खैर 46 हजार से ज्यादा अब तो 47 हजार के आसपास पहुंच रहा हूं मैं इतने हजारों लोगों पर काम कर चुका हूं और हर एक की पूर्व जन्म भविष्य यात्रा देखी तो मतलब कहीं पर भी एक परस भी कहीं पर वो शक नहीं है जो हमारे ऋषि मुनियों ने बहुत पहले कह दिया था आत्माओं के बारे में वो
1:15:04 आज मैं उसको बस समझो के प्रैक्टिकली अनुभव कर रहा हूं बस यू समझ ले बहुत-बहुत धन्यवाद ओके चलिए अभी ये तो प्रश्नों का सिलसिला है तो चलता ही रहेगा पर थोड़ा अपने भीतर से भी जवाब ढूंढने की कोशिश करें थोड़ा इससे भी जुड़े जो डॉक्टर डॉक्टर साहब का YouTube चैनल है उससे जुड़े थोड़ा देखते रहे फिर थोड़ा अपने आप को अपडेट कर ले फिर कुछ प्रश्न होंगे फिर कभी सत्र रखेंगे कभी अनुरोध करेंगे डॉक्टर साहब से मेरे ख्याल से जरूर हमारा जो आरसीएम परिवार है उसके लिए वो जरूर कृपा करेंगे तो बहुत-बहुत धन्यवाद सभी को डॉक्टर साहब को विशेष धन्यवाद सभी साथियों का बार-बार मैसेज आ रहा है लगातार YouTube पर भी और
1:15:51 यहां भी आपके लिए सभी बहुत-बहुत धन्यवाद के संदेश संदेश चलिए बहुत बहुत सबको मेरा बहुत-बहुत प्यार बड़ा बड़ा आशीर्वाद और बस आप सब लोग आपका परिवार आप सब लोग स्वस्थ रहें मस्त रहें सुखी रहे परम आनंद में जिए और परम आत्म जागरण की तरफ आज नहीं तो कल जाए चलिए बहुत
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