0:20 बचपन में जब मैं आकाश की ओर देखती थी तो मैं हमेशा सितारों के बारे में उत्सुक रहती थी इन्हीं अनगिनत तारों में है हम हरा एक छोटा सा ग्रह पृथ्वी अपने समंदर की गहराई से लेकर पहाड़ों की चोटियों तक वह जीवन से खिल रही है और यह मेरे लिए बहुत सुंदर है यह एकमात्र स्थान है जिसे हम सभी घर कहते हैं जब मैं बाहर यात्रा करती हूं सितारों की तरह मुझे अनगिनत गाय और भैसे दिखाई देती है उनकी कहानी क्या है व हमसे कैसे जुड़े हैं और वह हमारी पहचान का इतना अभिन्न अंग कैसे बन गए हैं भारत की गायों और भैंसों की कहानी
1:06 जानने के लिए मेरे साथ इस यात्रा पर [संगीत] चलिए नमस्ते मेरा नाम डॉक्टर हर्षा है ट्रेनिंग से मैं एक डॉक्टर जरूर हूं लेकिन जिंदगी में कुछ ऐसे मोड़ आए कि मैं एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर बन गया मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुआ और कई भारतीयों की तरह मैं भी मांस और अंडे खाकर पला बड़ा सभी प्रकार के मांस मजे से खाकर भी मैं अपने आप को एनिमल लवर समझता था मेरा मानना था कि इंसान का खाना तो उसका निजी मामला है पर मेडिकल कॉलेज के तीसरे वर्ष में एक दिन मैं गलती से मीट मार्केट
1:53 चला गया और उस दिन से सब कुछ बदलने लगा मैं इस मीट इंडस्ट्री के बारे में और जानना चाहता था और मैं जितनी गहराई में गया गंदगी उतनी ही बढ़ती गई अब मेरे पास दो रास्ते थे या तो मैं इन सारे तथ्यों को अनदेखा कर दूं या फिर किसी की परवाह किए बगैर इस मुद्दे को उठाऊं सच को लोगों के सामने लाऊं मांस खाने के पक्ष में जो तर्क थे वह सारे मेरे सामने ढेर हो गए और मैं रातों-रात शाकाहारी बन गया मेडिकल लाइसेंस की परीक्षा पास करने के बाद नौकरी करने से पहले मैं भारतीय और पश्चिमी दर्शन शास्त्र की अपनी जिज्ञासा पूरी करना चाहता था इस दौरान मैंने कई महान चिंतकों की रचनाएं और
2:39 जीवनिया पढ़ी फिर मैंने जैन धर्म के बारे में जाना और भगवत गीता भी पढ़ी इन ग्रंथों ने मेरी आंखें खोल दी धीरे-धीरे मैं अहिंसा के बारे में समझने लगा और मेरे अंदर सभी प्राणियों के लिए करुणा भाव जागने लगा इस नजरिए से देखने पर यह साफ हो हो गया कि हम इंसानों की क्रूरता गाय या भैंस को काटने से बहुत पहले शुरू हो जाती है इसकी शुरुआत होती है दूध के उत्पादन से फिर मैंने अपने आहार से सभी कमर्शियल डेरी उत्पादों को हटा दिया मैं सिर्फ गौशालाओं का दूध पीने लगा जहां पशुओं की अच्छी देखभाल की जाती है जिसे अहिंसा दूध कहते हैं मैं जिस कृष्ण मंदिर में अक्सर जाता था वहां मुझे बताया गया कि यहां भगवान को
3:26 यही अहिंसा दूध चढ़ाया जाता है और प्रसाद में भी यही इस्तेमाल होता है पर एक दिन मुझे इस मंदिर में एक अनोखा दर्शन हुआ पीछे के गेट से एक ट्रक अंदर आया और मंदिर की स्टाफ ने कई डजन बक्से बाहर निकाले और इनमें सैकड़ों कमर्शियल दूध के पैकेट थे यह बात मंदिर के अधिकारियों के सामने उठाने पर मुझे इसे अनदेखा करने के लिए कहा गया तब मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि अहिंसा दूध सिर्फ एक वहम है मैंने सारे डेरी प्रोडक्ट्स अपने आहार से पूरी तरह हटा दिए कुछ दिन बाद मेरी एक कलीग ने मु मुझे दूध से बनी एक मिठाई दी जब मैंने खाने से इंकार किया तब उसने पूछा क्या तुम वीगन हो मैंने यह शब्द पहली बार उस दिन सुना इसके बारे में इंटरनेट पर पढ़ने के बाद मुझे
4:11 पता चला कि दुनिया में मेरे जैसे कई लोग हैं एक साल बाद मेरे मां-बाप की सम्मति से मैंने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़कर इस विषय में अभ्यास करने का फैसला किया अगले 2 साल मैंने देश के अलग-अलग प्रांतों में विभिन्न लोगों के साथ पशु क्रूरता के बारे में बात की उनके विचार जाने भारत में खुले कसाई खानों की आज बड़ी संख्या है इसलिए लोग मांस और अंडों से जुड़ी क्रूरता साफसाफ देख पा रहे थे पर जब मैंने दूध और डेरी प्रोडक्ट से जुड़ी क्रूरता की बात छेड़ी तब लोग मानने के लिए तैयार ही नहीं थे मुझे जो जवाब मिले वह कुछ ऐसे थे हमारे गांव में ऐसा नहीं होता लेकिन भगवान को तो दूध पसंद है ना कर्मा य तो भाई किसाना की जिंदगी ना
4:59 बर्बाद करने वाली बात हम तो सि गौशाला का ही दूध पीते रिलक्स ओके का सेनन इन इंडिया ना मानु वि आर यू कम्युनिस्ट आर य संगी आर यू इवेंजलिस्ट हमा धर्म भट करवा वट अबाउट माय कैल्शियम वट अबाउट माय प्रोटीन ट अबाउट ी ने ट अबाउट आइसक्रीम डेरी उत्पादों से जुड़ी यह क्रूरता लोग क्यों नहीं देख पा रहे हैं यह मेरी समझ के परे था मैंने इस मामले में जांच करने के लिए कई वक्ता पत्रकार न्यूज़ चैनल्स और इन्फ्लुएंस से संपर्क
5:45 किया इस कहानी में किसी की खास दिलचस्पी नहीं नजर आई लेकिन मैं सच जानना चाहता था समझना चाहता था कि हम यहां पहुंचे कैसे मेरी संस्कृति में इन पशुओं का और हमारा रिश्ता दूध की बुनियाद पर खड़ा है इसीलिए मैंने शुरुआत की दूध की खपत के आंकड़ों से आज भारत का डेरी उद्योग दो प्रकार का है संगठित क्षेत्र में सहकारी समितियां दूध खरीदकर उसका प्रोसेसिंग पैकिंग और वितरण करती है जैसे कि अमूल और नंदिनी दूसरा है असंगठित क्षेत्र जिसमें तबेले दूध वाले स्थानिक विक्रेता और पशु पालने वाले परिवार शामिल है भारत के कुल दूध उत्पादन में संगठित क्षेत्र का योगदान केवल 20 प्र है जबकि 80 प्र उत्पादन असंगठित क्षेत्र में होता है नेशनल डेरी डेवलपमेंट बोर्ड
6:32 के अनुसार पिछले 60 सालों में देश में दूध का उत्पादन 19 गुना हो गया है इस वृद्धि के लिए भारत की दुग्ध क्रांति को श्रेय दिया जाता है जो दुनिया का सबसे बड़ा डेरी उत्पादन और विकास अभियान है 2021 में डेरी उद्योग से जुड़े रोजगार से भारत के करीब 10 करोड़ परिवारों को सहयोग मिला दुग्ध क्रांति को ऑपरेशन फ्लड नाम दिया गया था कहा गया कि इससे उत्पादन इतना बढ़ जाएगा कि देश में दूध की मानो बाढ़ आ जाएगी लेकिन यह सब किस कीमत पर यूएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में भारत ने गाय और भैंस का कुल 16 लाख टन मास निर्यात किया लेकिन भारत सरकार द्वारा जारी किए गए अपेड़ा के आंकड़े केवल भैंसों के मास का निर्यात दर्शाते हैं 2020 में एक्सपोर्ट
7:19 के लिए करीब 95 लाख भैंसों को मारा गया लेकिन उसी साल हमारे अपने देशवासियों को मांस खिलाने के लिए कुल 2 करोड़ 25 लाख गाय और भैंस मारे गए पशु हत्या के यह आंकड़े चौका देने वाले हैं अगर मनुष्यों की आबादी से तुलना की जाए तो भारत में हर साल उतने ही गाय भैंस कटते हैं जितने मुंबई पुणे और हैदराबाद शहरों में कुल मिलाकर इंसान रहते हैं आज बीफ एक्सपोर्ट के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों में भारत का भी नाम शामिल है और हमारे आंकड़े साल दर साल बढ़ते ही जा रहे हैं पश्चिमी देशों में इंसान और गाय का रिश्ता केवल आर्थिक रहा है इसकी शुरुआत होती है कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया से जब बछड़े का जन्म होता है तब उसे तुरंत
8:06 अपनी मां से अलग कर दिया जाता है मां के दूध का एक बूंद तक उसे नसीब नहीं होता सारा दूध मनुष्य अपने लिए रख लेता है जब गाय दूध देना बंद करें तब उसे मार दिया जाता है अगर बछड़ा नर हो तो उसे व्हील मास या मुलायम चमड़े के लिए मारा जाता है या फिर उसे बीफ फार्म पर खिला पिलाकर बड़े होने के बाद काटा जाता है अगर बछड़ा मादा हो तो वो बड़ी होकर अपनी मां की जगह ले लेती है और यह चक्र ऐसे ही चलता रहता है दूसरे देशों के डेरी उद्योग में ज्यादातर गाय का इस्तेमाल होता है लेकिन कभी-कभी भैंसों का भी उपयोग किया जाता है कई बार इनके नर बछड़े नदी में फेंक दिए जाते हैं सिर्फ इसलिए कि वह दूध नहीं देते पर भारत देश में क्या स्थिति है बीफ उत्पादन और एक्सपोर्ट के आंकड़े देखने के
8:53 बाद मेरे मन में कुछ सवाल उठ रहे थे इतना सारा बीफ आता कहां से है क्या यहां भी पशुओं के साथ वही होता है जो पश्चिमी देशों में होता आया है मांस के उत्पादन के लिए बंधी हुई मुर्गियों और बकरियों के दृश्य हम भारत में अक्सर देखते हैं पर हमारे देश में यह बीफ फार्म्स है कहां और देश में बीफ का व्यवहार कैसे चलता है जब मैंने इंटरनेट पर सर्च किया तो मुझे भारत में पश्चिमी देशों जैसा एक भी बीफ फार्म नहीं दिखा लेकिन भारत में 110 से भी अधिक भैंसों के कसाई खाने हैं जो सरकार द्वारा अधिकृत है पर इनके अलावा देश में कई गैर कानूनी कसाई खाने हैं जिनकी संख्या कोई नहीं जानता कसाई खानों के अंदर आखिर चलता क्या है जानने के लिए हम कुछ कसाई से मिलने चले
9:40 गए पर वहां पहुंचने पर जैसे ही मैंने बीफ शब्द का प्रयोग किया तो इन लोगों ने आगे बात करने से इंकार कर दिया मुझे पता चला कि यह लोग कसाई नहीं बल्कि कसाई खाने के मालिक हैं उन्होंने हमें कसाई से मिलने भी नहीं दिया इसके बाद कुछ और कसाई से बात हुई पर कोई भी इंटरव्यू देने के लिए तैयार नहीं था एक दरवाजा बंद हो गया जब मेरी कुछ एनिमल रेस्क्यूर से बात हुई तब उन्होंने बताया कि बीफ के व्यापारी अक्सर स्थानीय नेताओं के साथ मिले होते हैं और अगर जान प्यारी है तो मुझे मेरी एक खोज यहीं रोकनी चाहिए एक और दरवाजा बंद उसी समय मुझे यह भी पता चला कि यही स्थानीय नेता डेरी फार्म से भी जुड़े हुए
10:27 हैं मुझे ऐसा लगने लगा कि कि डेरी फार्म्स और कसाई खानों का कोई करीबी रिश्ता है जवाब की तलाश में हम ऐसे ही एक डेरी फार्म पर जा पहुंचे जहां गाय और भैंस आमतौर पर पाए जाते हैं फार्म की दशा बेहद भयानक थी वहां काम करने वाले लोगों के लिए और उससे भी ज्यादा वहां रहने वाले पशुओं के लिए डॉक्टर होने के नाते मैं यह कह सकता हूं कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बिल्कुल अनुचित है और डेरी फार्म्स का निरीक्षण करने पर स्थिति लगभग वैसी ही नजर आई एक थन उसके ह तीन थन आपको द निकालना कितने साल रखते आप उसको कितने बार प्रेगनेट होने या पा बार बाद में क्या होता उनका उम्र कम हो दूध भी कम हो जाता उसको रख आप कुछ मिलता
11:14 सबिक कोर अनी कोई खेती नहीं खेती से खिला सक ज वही पैसे में बेच देते हैं ना आपको पता है कि क्या होता है उनका नहीं अभी अभी समझो मैं आपको बेचा अभी आप रहने को समझो मुंबई में आपने भ बंबई ले गए फ आपका मेरा कां द दे खत्म हो गई क कोई बाद में पता नहीं होता है कि क्या फिर किधर गई वो उसका आप लोग को मतलब आप लोग को पैसा मिला ये द दे इसके जगह प दूसरी नहीं लीले खत्म हो जाता क्या है था हा मर गया निने इसका वासरू होता वासरू बच्चा वास
12:01 बच्चा इसका बच्चा है मर गया है इस च पकड़ेगा पाना छोड़ेगा दूध निकालेगा यह सब देखकर मुझे विश्वास होने लगा कि वाकई में डेरी फार्म्स का कसाई खानों के साथ कोई संबंध है लेकिन अभी मेरे पास कोई ठोस सबूत नहीं था सबूत की खोज में आगे जाने से पहले मैं पीछे जाकर यह जानना चाहता था कि इन पशुओं का और हमारा इतिहास कैसे जुड़ा हुआ है इस कहानी की शुरुआत होती है कुछ 10000 साल पहले जब मनुष्य शिकार छोड़कर खेती और पशुपालन की ओर बढ़ने लगा पशुओं का उपयोग ज्यादातर खेती में परिवहन के लिए दूध के लिए या संपत्ति के
12:47 रूप में होता था उनका मास सिर्फ ऐसी कठोर परिस्थितियों में खाया जाता जब और कुछ भी उपलब्ध ना हो अगर हम तुलना करें तो भारतीय पशुओं में जो कूबड़ नजर आता है वह यूरोपियन पशुओं में नहीं दिखता हालांकि इन सब की प्रजाति एक ही है आज की विविध भारतीय नस्लें जबू नामक उप प्रजाति के चुनिंदा प्रजनन यानी सिलेक्टिव ब्रीडिंग का नतीजा है ठीक उसी तरह जैसे भेड़ियों से कुत्तों की नस्ले विकसित हुई हजारों वर्षों के अवधि में हमारे पूर्वज भारत के अलग-अलग प्रांतों में फैल गए और इन पशुओं को अपने साथ ले गए समय के साथ गायों पर हमारी निर्भरता बढ़ती और इसीलिए गाय हमारी संस्कृति का केंद्र बन गई गाय को हानि पहुंचने पर लोगों को
13:34 बहुत नुकसान होता क्योंकि गाय नहीं तो दूध नहीं खेत की जुताई के लिए बैल नहीं और खाने के लिए धान्य नहीं इसी कारण से हिंदुओं ने गाय को सभी देवताओं का प्रतीक मानकर गौ माता के रूप में पूजना शुरू किया वैदिक काल की यह परंपरा आज भी जीवित है हिंदुओं के लिए गाय परिवार का सदस्य बन गई भैसों की कहानी कुछ और है हमारे पूर्वजों ने इनका पालन कुछ 5000 साल पहले ही शुरू किया भारत में पाए जाने वाली भैंसों की सभी नसले जंगली भैंस यानी वाटर बफेलो से विकसित हुई हैं हम देख सकते हैं कि यह जानवरों के लिए अच्छा समय नहीं था कई बार देवताओं के सामने जानवरों की बलि चढ़ाई जाती या उन्हें मांस के लिए काट दिया
14:20 जाता इस दौरान पशुबली के कई उदाहरण दिखते हैं यहां तक कि गवा लंब यानी गाय की हत्या का भी उल्लेख पाया गया है तो हो सकता है कि इस काल में गाय को भी काटा जा रहा था शायद इसी समय के आसपास लोगों को यह एहसास होने लगा कि जानवर भी दर्द महसूस करते हैं माना जाता है कि महाभारत का युद्ध कुछ 5000 साल पहले लड़ा गया था इस ग्रंथ में जब युधिष्ठिर भीष्म से मांसाहार त्यागने से मिलने वाले पुण्य के बारे में पूछते हैं तब भीष्म जानवरों की हत्या से जुड़ी हिंसा के बारे में विस्तार से समझाते हैं इससे यह कहा जा सकता है कि भीष्म खुद शाकाहारी थे लेकिन उस समय शाकाहार कुछ समुदाय के लोगों तक ही सीमित
15:07 था भारत देश में जब बौद्ध और जैन धर्मों का प्रचार प्रसार होने लगा तब चारों ओर करुणा जीवदया और अहिंसा का संदेश फैल गया और शाकाहार मुख्य धारा में शामिल हो गया लगभग इसी समय पर आयुर्वेद का भी विकास हुआ जिसमें ज्यादातर पौधों और जड़ी बूटियों का इस्तेमाल औषधि के रूप में होता था इससे शाकाहार को और बढ़ावा मिला पतंजलि के योग सूत्र के अनुसार भी योग की पहली सीढ़ी आसन या श्वसन नहीं बल्कि अहिंसा का पालन है अहिंसा के मार्ग पर चले बिना कोई सिद्ध योगी नहीं बन सकता धीरे-धीरे पशुबली की जगह नारियल फोड़ने जैसी प्रथाओं ने ले ली इस वजह से
15:53 अहिंसा और परंपरा का संगम हो गया अहिंसा भारतीय संस्कृति का केंद्र बिंदु बन गई इसका प्रभाव इतना था कि विदेशी यात्री देखकर चौक जाते फाशियाना नाम के चीनी बौद्ध भिक्षु ने चौथी सदी में भारत का दौरा किया और लिखा भारत एक अजब देश है यहां किसी जीव की हत्या नहीं होती लोग सूअर या मुर्गियां नहीं पालते और जिंदा पशुओं को भी नहीं बेचते इस दौर में करीब-करीब पूरा भारतीय उपमहाद्वीप शाकाहारी बन गया था लोग गौ हत्या को पाप मानने लगे और गाय को काटना पूरी तरह बंद हो गया जो कुछ लोग शाकाहारी सिद्धांतों को नहीं मानते थे वह गाय के अलावा और प्राणी पक्षियों की बली चढ़ाते रहे आज भारत के ज्यादातर मंदिर शाकाहार का
16:41 पालन करते हैं और पशुबली को बढ़ावा नहीं देते कई माइनों में शाकाहार हमारे पूर्वजों की नैतिकता करुणा और विवेक का नतीजा है पर क्या आज की तारीख में भी शाकाहार उचित है मैंने यह सवाल कुछ एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट और रेस्क्यूर्स को पूछा जो डेरी इंडस्ट्री है यानी कि जो गाय भैंस रखी जाती हैं दूध के लिए यह हर क्रूरता के जड़ है अगर आप सारे तबेले देखें तो गाय अपने गोबर में पूरे दिन खड़ी रहती है कोई एक्सरसाइज नहीं खाना कभी सखा भूसा कभी गं बला जो दिया जाता है अभी-अभी गौशा में 150 गाय एक ही दिन में मर गए क्योंकि फंगस
17:26 वाला खाना उसको दे रहे थे एंड क्योंकि वह कभी एक्सरसाइज नहीं की जाती उसको आर्थराइटिस होता है उसको ट्यूबरकुलोसिस होता है उसको कम से कम आठ से 10 बीमारियां ऐसे होती हैं जो बहुत ही गंभीर है और सबसे गंभीर जो बीमारी है वह है ब्रूसेलोसिस और गंभीर इसलिए मैं बोल रही हूं इसलिए नहीं कि बाकी कम गंभीर है इसलिए गंभीर क्योंकि जब आप दूध पिएंगे उस गाय से तो वह गाय का जो ब्रूस ससिस है वो इंसान में ट्यूबरकुलोसिस बन जाता है जो हिंदुस्तान में ट्यूबरकुलोसिस इतनी बुरी तरह से फैल गया है उस सबका जड़ वो गाय का के साथ ब्रूसस का दूध पीना आज भारत विश्व
18:14 में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है दुनिया के कुल उत्पादन का करीब 19 से 20 प्र भारत से आता है अगर उत्पादन की मात्रा मांग के अनुसार तय हो रही हो तो जाहिर है कि उत्पादन की प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे खासकर इसलिए कि यह कोई निर्जीव उद्योग नहीं है 2012 और 2018 के दौरान फिप और अन्य कुछ संस्थानों द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन में यह पाया गया कि दूध की सप्लाई तेजी से बढ़ाने के लिए कई विदेशी नस्लों का भारत में बड़ी संख्या में प्रयोग किया जा रहा है इनमें जर्सी इजिप्ट और अन्य कई नस्ले शामिल है इन नस्लों को हर दिन 20 लीटर दूध देने पर मजबूर किया जाता है हालांकि जब एक गाय
18:59 अपने बछड़े को दूध पिलाती है तब उसकी प्राकृतिक क्षमता सिर्फ एक से 4 लीटर की ही होती है यह लोगों का स्वार्थ है बस उन्हें सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे की पड़ी है जब तक गाय या भैंसों से उन्हें फायदा होता है तब तक व उन्हें रखते हैं दूध खत्म होने के बाद कोई नहीं रखता उन्हें भैंस के बछड़े का कोई ख्याल नहीं रखता उसे कसाई खाने भेजकर काट दिया जाता है यह बेहद भयानक है क्योंकि भैंस का बछड़ा गाय के बछड़ी जितना ही भावुक और मासूम होता है भले ही वह देवी देवताओं का वाहन ना हो पर वह बहुत निर्मल और प्यारा लगता है अगर गाय समय पर गर्भवती ना हो पाए तो उसे छोड़ देते हैं या फिर बूढ़ी होने पर छोड़ देते
19:45 हैं पूरी जिंदगी लोग उनसे दूध निकालते हैं उन्हीं से पैसे कमाते हैं पर बूढ़ी होने पर यही लोग उसे रास्ते पर छोड़ देते हैं जहां वह दुर्घटना का शिकार होती हैं बीमार पड़ती है अंत में बिना कुछ खाए पिए यह बैठे-बैठे मर जाती हैं या कुत्ते उसे जिंदा ही खा लेते हैं ऐसा ही होता है और भैंसे भी मारी जा रही हैं बड़ी बेरहमी से पूरी जिंदगी लोग उनका फायदा उठाते हैं और अंत में क्या होता है उन्हें भयानक मौत मिलती है बच्चा उता है तो बच्चे को मा का दूध पी जाती है तो उनको बेचने के लिए धंधा करने के लिए दूध नहीं मिलता है तो बच्चे को जिंदा बच्चे को टच से फेंक देते हैं या तो
20:31 फिर वो लोग इंजेक्शन दे के मार देते हैं या तो बहुत दिन से बांध के रखे मैं आंखों से देखा उसको दूध देते नहीं वो दिन से बांध के रखते हैं तो दूध नहीं है पेट पूरा अंदर चला जाता है उसका पूरा कॉलम ये हो जाता है ना तो कहीं फेंक देते हैं एज पर माय नॉलेज इट इज बिजनेस फॉर देम बिकॉज इन दिस विलेज आल्सो वेर आई स्टे तलोजा यहां पे भी काफी सारे गौशाला है लेकिन आप वहां पर देखिए किसी को आप यह नजर नहीं आएगा कि उनको कोई उनकी आंखें क्या बोलती है उनकी क्या फीलिंग हैट कोई नहीं समझेगा लेकिन हां उनका दूध कितना लीटर निकला यह खिलाने से दूध ज्यादा निकलेगा यह सब चीजों का नॉलेज है उनको लेकिन उनकी अपनी फीलिंग क्या है दे आल्सो नीड रेस्ट दे आल्सो नीड दैट टाइम वो उनको फीलिंग नहीं है हमारे देश में लोगों को
21:16 आदत पड़ गई है भैंसों को बंधा हुआ देखने की गायों को बंधा हुआ देखने की उनके बच्चों को मरते हुए देखने की और किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता क्योंकि हम उसको एक बिनाइन सी वह मानते हैं कि तो फार्मिंग है व तो बेचारा गरीब आदमी है चाहे उसके पास 80 भैसे हो उ गरीब सा आदमी है और व्हाट एवर असल बात यह है कि किसी भी मां को दूध तभी आता है जब उसका बच्चा होता है डेरियो में बच्चों को भूखा मार दिया जाता है जिस दिन से वह जिस मिनट से पैदा होते हैं उनको मां से अलग कर दिया जाता है यह एक क्रिमिनल ऑफेंस है कि हम मांओं को बच्चों से अलग कर देते हैं बच्चों को भूखा मरने देते हैं हम लेकिन हम इसको रिपोर्ट भी नहीं करते प्रिवेंशन ऑफ कूटी टू
22:03 एनिमल्स एक्ट में खास तौर पर लिखा है कि हम किसी भी जानवर को अननेसेसरी पेन एंड सफरिंग नहीं दे सकते यह गाय भैंसे बहुत इंटेलिजेंट पशु होते हैं देर वेरी इंटेलिजेंट इनके अंदर उतनी ही मातृत्व की भावना होती है जितनी इंसानों में होती है य शायद हम से भी ज्यादा और इनसे जब इनके बच्चे छीन लिए जाते हैं क्योंकि उनका दूध अ जो है वो किसी को अपनी चाय में डालना है तो ये बहुत बहुत ज्यादा मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरते हैं बीफ इंडस्ट्री जो है वो बिना डेरी के पॉसिबल नहीं है ठीक है क्योंकि कोई भी एक गाय या भैंस को इतने साल खिला के पालना बड़ा महंगा पड़ जाएगा तो वो जो डिस्काउंट होता है वो डिस्काउंट डेरी वाले कराते हैं क्योंकि हम एक गाय
22:50 पालना उनके लिए आसान बनाते हैं कुछ टाइम के लिए दूध ₹ किलो या कहीं 0 किलो या कहीं कम सस्ता महंगा बिक रहा है तो इट्स अ गुड मनी फॉर दोस विलेजर्स वो पैसे के लिए उसको रखना शुरू करते हैं बट जब वो दूध देना बंद कर देते तो उसको नहीं पाल पाते क्यों दूध से डिस्काउंट मिल रहा था तो अगर डेरी इंडस्ट्री नहीं होगी तो इतना आसान नहीं होगा बीफ मिल पाना गाय अगर बच्चा देती है अगर वो फीमेल काफ हो तो उसको अपने साथ रखा जाता है लाइक फीमेल बछड़ा और अगर वो मेल हो तो मेल का नॉर्मली कुछ यूज नहीं होता बहुत सारे कम फार्मर्स है जो उनको रखते खेती के लिए बट अभी खेती भी ऑलमोस्ट ट्रैक्टर के द्वारा ही की जाती है तो वो मेल का को भेज देते हैं स्लॉटर हाउस में या फिर वो लेदर कंपनीज को और ये गाय फिर जाती है कतल के लिए ट्रकों में भर भर करके
23:36 भर भर करके जाते हैं अब यह जो गाय जाती है बहुत ही बुरी तरह से काटते हैं जिसको कहते हैं मॉडर्न स्लॉटर हाउस उसमें वह भैंस को के पैर पर बेड़ी डाल देते हैं एक पैर पर और उसको एकदम से झटके से ऊपर उल्टा टांग देते हैं इसमें वो टांग टूट जाती है उसके बाद एक लाइन में भैंसों को डालते हैं जिंदा है पहले तो उबला हुआ पानी उनके ऊपर डालते हैं ताकि उनके शरीर त्वचा जो है वह हल्की हो जाए उसके बाद उसका गर्दन काटते हैं थोड़ा सा ताकि खून निकलता रहे खून निकलता निकलते जाता क्योंकि खून व बेचते हैं दवाई की इंडस्ट्री को यह जो आयन टोनिक
24:21 और आप सब लेते हैं यह वही खून है फिर उसके बाद वह उसका चमड़ा उतारना शुरू कर देता जि जिंदा भैंस से और उसके बाद ही व गाय भैंस जो भी है मर जाती यह मॉडर्न स्लटर हाउस जिसको कहते हैं जो केरला के स्लटर हाउसेस है उनका भी अनोखा तरीका है गाय भैंस को मारने का और वह यह है कि वह हथौड़ा लेते हैं और सिर पर हथौड़ा तब तक मारते हैं जब तक पूरा मुह शरीर फट ना जाए और क्यों करते हैं क्योंकि वो कहते हैं कि इससे मास मीठा होता है और जगहों में तो वह कभी रस्टेड ब्लेड के साथ करते हैं कभी चुरी के साथ करते हैं
25:08 लेकिन 15 मिनट से आधा घंटा लगता है उस गाय या भैंस को मरने के लिए अभी-अभी हमने एक ट्रक पकड़ा जो जा रही थी अ बंगाल क्योंकि बंगाल में इजाजत है गाय को काटने के लिए तो यहां से सारे गाय वहां भी जाते हैं और केरला जाते हैं यह दोनों स्टेट हमारे अनफॉर्चूनेटली लू ल होल्स तो हमने पकड़ा एक गाय जो एक ट्रक जो जा रही थी उसमें छह गाय होने के बजाय उसमें 60 गाय थे और सब के सब गर्भवती थे और क्योंकि एकही ऊपर एक एक के ऊपर एक ठुसे गए थे इस ट्रक में उनके पेट पर इतना दबाव हो गया था कि फिटस बाहर निकला हुआ था और वह पूरा ट्रक खून से भर
25:53 भर करके फीट सेस भी मां भी रोए फिटस भी मरी हुई निकली ट्रक के पीछे पीछे से खून निकलते निकलते ऐसे तो हमने पहचाना नहीं तो वो बंद कर देते स्मगलर्स ताकि आप पहचान ना पाए गाय हमारी संस्कृति से जुड़ी होने के कारण आज गौ हत्या का मुद्दा एक राजनीतिक हथियार भी बन चुका है कई सवालों का जवाब मुझे अभी भी नहीं मिला था मेरी खोज जारी रही बीफ व्यापारियों से बातचीत होना मुमकिन नहीं था इसीलिए मैं कुछ गौ रक्षकों से मिला जिन पर कई बार मारपीट और लिंचिंग्स के आरोप लगते हैं लेकिन ज्यादातर गौरक्षक कैमरे पर कुछ भी कहने से हिचकिचाना मुझे एक गौरक्षक मिले जो
26:39 इंटरव्यू के लिए राजी हो गए कसाई लोभी इतनी पावरफुल है कसाई लोबी कि इनके पास लाखों का धंधा है एक एक दो दो करोड़ का आप सोच सकते हैं जो 3500 किलो मैंने गौ मास का गाड़ी पकड़ा था अगर वो 00 पकड़ते 00 3500 किलो तो आज वो 12 14 लाख का होता है आप सोच सकते हैं वो आइसर गाड़ी 18 20 लाख का आज मांडवी चौकी पर ऐसे ही सट रहा है आज 6 महीना होने को आया तो ये लोबी इतनी पावरफुल है के कल हमको हमारा एक्सीडेंट भी करवा सकती है हमें तीन टाइम पुलिस के सामने मारा गया है पुलिस डिपार्टमेंट के सामने और अभी तो एक मही 20 दिन महीने पहले पुलिस को भी मारा गया हमारे गौरक्षक राजेश पाल को 200 जन ने मोब
27:26 लिंचिंग करके मारा तो इस सिचुएशन से हम गौरक्षा करते हैं जो काम प्रशासन का है शायद इसी वजह से बाकी गौरक्षक भी कैमरा पर आने से मना कर रहे थे इनके मन में भ्रष्ट पुलिस वालों अधिकारियों नेताओं और कसाई का डर था फिर मैंने यह जाना कि कुछ गौरक्षक भी भ्रष्ट है पकड़ते तो क्या है जो गौरक्षक बन के रहते हैं ना वो रकाते हैं उनको 200 हज देते हैं वो कार स्टार्ट करके चले जाते हैं उसका ट्रक लेके चलता था ओरिजिनल तो ये है अच्छा हकीकत लेते हैं सब लेते हैं ये तो क्या है दूत के एक गोरक्ष उ का पै धंधा बन रख है यार भैया सबका अपना अपना धंधा बस धंधा क्या है धर्म भट करनी बात है या किसी के सामने आओ मतना यार गोरक्ष तो घर के बैठ जाना लेकिन
28:12 क्या रोकते पैसे देते भग जाते कभी-कभी कसाई खुद गाय की तस्करी की जानकारी गौ रक्षकों को लीक कर देते हैं ऐसा करने से यह कसाई अपनी कंपटीशन को खत्म करने की कोशिश करते हैं मुझे एहसास हुआ कि यह पूरा मुद्दा इतना भी सरल नहीं सदियों से भारत की राजनीति में गाय का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है श्रीमद् भागवत में कई बार गौ हत्या की कड़ी निंदा की गई है इसका मतलब यह है कि उस समय लोग गौ हत्या करते थे विष्णु पुराण के अनुसार इस कलयुग में गाय की बली चढ़ाना पूरी तरह मना है जो चीज प्रचलित हो उसी को रोकने की जरूरत पड़ती है जो प्रचलित ही नहीं उसे कोई क्यों रोके
28:58 आज देश के कई हिस्सों में गोहत्या को राजनीतिक मुद्दा बनाया जाता है पर कितने नेता सच में गाय का भला चाहते हैं इस तरह गाय को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की प्रथा भी कई शतकों से चली आ रही है जब अंग्रेज भारत आए तब उन्हें अपने आहार में बहुत सारा दूध और मिल्क प्रोडक्ट्स खाने की आदत थी वह जहां बसे वहां उन्होंने डेरी फार्म्स की स्थापना की साथ-साथ अपने लिए बीफ का इंतजाम करने के हेतु से उन्होंने कसाई खाने भी शुरू करवाए इस दौरान ब्रिटिश बस्तियों के पास फूका या धूम देव जैसी क्रियाओं का प्रयोग होने लगा जिनमें गाय की योनि में हवा फूक कर ज्यादा दूध निकाला जाता है इसी वजह से महात्मा गांधी ने गाय और भैंस का दूध पीना
29:44 बंद कर दिया था दूसरे विश्व युद्ध के बाद भारत के डेरी फार्मर्स परेशान थे अंग्रेजों के शोषण का मुकाबला करने के लिए गुजरात में एक सहकारी यूनियन का गठन हुआ फिर वर्गीज कुरियन इनके साथ जुड़ गए जिन्हें दुग्ध क्रांति का नायक माना जाता है इन्हीं के नेतृत्व में 1957 में अमूल और 1965 में एनडीडीबी की स्थापना हुई डेरी व्यापार की स्थापना के लिए भारत सरकार ने अपना पूरा सहयोग दिया यह करते वक्त सरकार का ध्यान पोषण से ज्यादा आर्थिक विकास पर था 1960 में जब कुछ प्रगत देशों के सामने ऑपरेशन फ्लड का प्रस्ताव रखकर कर्जा मांगा गया तब उन्होंने कुछ सवाल उठाए
30:29 क्या आप अपनी मूल्यवान जमीन पर खेती की जगह पशु खाद्य उगाए इस पर कुरियन ने खुद कहा यह आलोचना बेबुनियाद तो नहीं थी 1976 में अमूल ने क्राउड फंडिंग से पैसे जुटाकर मंथन नाम की फिल्म बनवाई जिसके द्वारा लोगों को दूध के व्यापार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया तब तक कृत्रिम गर्भाधान प्रचलित हो चुका था धीरे-धीरे देश में डेरी फार्मर्स की और उनके यूनियन की संख्या बढ़ती गई अपनी योजनाओं द्वारा सरकार भी डेरी फार्मर्स और उनके व्यवसाय को बढ़ावा देती रही इसी दौरान कुछ हिंदू संगना ने गौ हत्या पर रोक लगाने की मांग की लेकिन सरकारों ने इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया आगे जाकर इन्हीं मांगों को लेकर गो हत्या विरोधी आंदोलन
31:16 शुरू हुआ 7 नवंबर 1966 के दिन हजारों की तादाद में लोग दिल्ली में इकट्ठा हुए और देश में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग लेकर संसद की तरफ चल पड़े जवाब में उस समय की इंदिरा गांधी सरकार ने पुलिस को भीड़ पर गोली चलाने का निर्देश दिया इस घटना के बाद परिस्थिति हाथ से बाहर निकलने के डर से इंदिरा गांधी ने गौ हत्या प्रतिबंध की साध्य जांचने के लिए एक समिति बिठाई समिति के सदस्यों में पुरी के शंकराचार्य वर्गीज कुरियन और कुछ अन्य लोग शामिल थे वर्गीज कुरियन की आत्मकथा पढ़ने पर मैंने जाना कि कमेटी मीटिंग में क्या बातचीत हुई उन्होंने ने कहा मेरा मकसद गोहत्या पर प्रतिबंध लगने से रोकना था
32:02 डेरी व्यवसाय में यह जरूरी है कि हम अनुपयोगी गायों को बाहर निकाले ताकि उपयोगी और स्वस्थ पशुओं के लिए संसाधन कम ना पड़े शंकराचार्य और मेरी शुरुआत से ही नहीं बनी मैं इस हद तक जाने के लिए तैयार था कि कोई भी उपयोगी गाय ना मारी जाए इस बात पर शंकराचार्य और मेरे बीच एक बड़ी बहस छिड़ गई मैंने उनसे बार-बार पूछा शंकराचार्य जी क्या आप इन सारी बीमार बेकार गायों को खुद अपनाकर अंतिम समय तक उनका पालन पोषण करेंगे आप जानते हैं कि यह मुमकिन नहीं उनके पास मेरे इस सवाल का कोई जवाब नहीं था असल में यही डेरी और बीफ के बीच की
32:49 कड़ी है जिन्होंने भारत के डेरी व्यवसाय की नीव रखी उनका ही यह बयान वह बात दर्शाता है जो एक्टिविस्ट सालों से कहते आए हैं यही पूरे फसाद की जड़ थी डेरी फार्मर्स को प्रोत्साहन मिला कि वह बूढ़े और बेकार पशुओं से छुटकारा पाने के लिए उन्हें कटने दें बाद में क्या होता उनका उम्र कम होने तो दूध भी कम हो जाता ना फिर तो उसको रख के आप लोग को कुछ मिलता नहीं क पर कुरियन की बात भी सच थी उनके पास और चारा ही क्या था उनकी देखभाल कौन करेगा अगले कुछ दशकों में जैसे दूध और डेरी प्रोडक्ट्स की खपत बढ़ी वैसे ही पशुओं की आबादी भी बढ़ गई औद्योगिक प्रजनन प्रक्रियाओं द्वारा यह संभव हुआ और इसकी वजह से बीफ और चमड़े के निर्यात में काफी बढ़त देखी गई अन्य देशों के विपरीत भारत
33:35 में डेरी फार्म्स की रचना ही इस प्रकार हुई है जिससे बीफ और अन्य व्यवसायों को सहयोग मिले इन्हीं की वजह से बीफ का व्यवसाय जीवित रहता है 100 बात की एक बात बोली जाए तो डेरी प्रोडक्ट्स खरीदने से हम पशु हत्या का समर्थन करते हैं स्वतंत्रता से लेकर आज तक भारत बहुत बदल चुका है एक कृषि प्रधान समाज से दूर औद्योगिक और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की तरफ हम तेजी से बढ़ रहे हैं भारत में अब डेरी भी एक बड़ा उद्योग बन गया है बाजार में आज हमें दूध और मिल्क प्रोडक्ट्स कई रूपों और ब्रांडेड पैकेट्स में नजर आते हैं यह जानना जरूरी है कि दुग्ध क्रांति के बाद आज देश में दूध का उत्पादन गायों
34:20 से ज्यादा भैंसों पर निर्भर है दुग्ध क्रांति के चलते देश में गाय और भैंस दोनों ही कट रहे थे लेकिन हिंदू समाज केवल गाय के लिए आवाज उठाता रहा धर्म के आधार पर कई लोग गौरक्षा को अपना कर्तव्य मानते थे पर भैंसों के लिए कौन आवाज उठाए हिंदू ग्रंथों में भैंस का चित्रण ज्यादातर नकारात्मक तरीके से हुआ है महिषासुर की कथा कहती है कि वह भैंस के रूप में एक राक्षस था जिसका मां दुर्गा ने वध कर दिया इसके अलावा भैंस को मृत्यु के देवता यमराज का वाहन भी माना जाता है इसीलिए हमारे देश में भैंसों की नकारात्मक छवि बन चुकी है गाय की तुलना में हम इन्हें आलसी मूर्ख और अपवित्र मानते
35:07 हैं मजे की बात तो यह है कि आज भारत के लोग गाय से भी ज्यादा इसी अपवित्र भैस के दूध का सेवन करना पसंद करते हैं 1967 में स्थापित कमेटी को छ महीनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी लेकिन इसे 12 साल तक आगे धकेला गया जब मोरार जी देसाई प्रधान मंत्री बने तब उन्होंने रिपोर्ट प्रस्तुत होने से पहले ही कमेटी को खारिज कर दिया भारतीय संविधान के आर्टिकल 37 और 48 के अनुसार सिर्फ अंतरराष्ट्रीय व्यापार को छोड़कर कृषि और पशुपालन के सभी संगठन राज्यों के दायरे में आते हैं इसीलिए सिर्फ राज्य ही गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाने के विषय में निर्णय ले सकते हैं यह बात उन पर छोड़ दी गई है अंतरराष्ट्रीय व्यापार को देखें तो
35:52 भारत ने गो मास के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध तो लगा दिया लेकिन भैंसों का मास कैराबीफ नाम से अभी भी एक्सपोर्ट होता है बैल गाय या गाय के बछड़े का मास हम निर्यात नहीं करते बैल गाय और उनके बछड़े की सुरक्षा से संबंधित पूरा प्रबंधन राज्य द्वारा देखा जाता है हम इनमें से किसी के निर्यात की अनुमति नहीं देते लेकिन पश्चिम में भैंस के मास के लिए कारा बीफ शब्द का प्रयोग किया जाता है तो भैसों के लिए यह अनुमति है इनका निर्यात हो सकता है वी आर द वर्ल्डस लार्जेस्ट बीफ एक्सपोर्टर्स और यह बीफ जो हम कहते हैं भैंस का है ये भैंस और गाय दोनों का मिला हुआ है कोई चेक करने वाला है नहीं क्योंकि
36:38 इसमें करोड़ों रुपए बंदे हुए हैं आज 2022 के मध्य में नौ राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जिनमें गाय और भैंस के कटने पर कोई प्रतिबंध नहीं 18 राज्यों और बचे हुए केंद्र शासित प्रदेशों में गाय और उसके बछड़े के संहार पर पूरा प्रतिबंध है लेकिन बेल सा और भैंस के बछड़ों के मामले में विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियम है रही बात भैंस की तो सभी राज्यों में भैंस की कटाई के लिए अनुमति है सिवाय छत्तीसगढ़ के यह इकलौता ऐसा राज्य है जहां सभी गाय भैंसों के संघार और परिवहन पर पूरा प्रतिबंध है चाहे वह किसी भी उम्र या लिंग के हो इतने प्रकार के कानून होने से और उनका ठीक पालन ना होने से कई समस्याएं पैदा होती है जैसे प्रतिबंधित राज्यों से
37:25 दूसरे राज्यों में होने वाली पशु तस्करी तो कोयंब तोर में ऐसा है किसी भी ट्रक को केरल जाना हो तो उसे कोंब तोर से गुजरना ही पड़ता है इसीलिए जब कोर में इस पर रोक लगाई गई तो केरल जाने वाले सभी ट्रकों का नुकसान होने लगा इस पर कई बैठकें हुई जहां मुख्य सचिवों को और सभी लोगों को बुलाया गया लेकिन राजनीतिक दबाव इतना था कि कोयंबतौर के पास कोई चारा नहीं था ट्रकों को अनुमति देनी ही पड़ी तो हमने कहा कि आपको कानूनों का पालन तो करना होगा पीसीए एक्ट और इसके नियमों के अनुसार सब कुछ कीजिए लेकिन कोई भी इन नियमों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था क्योंकि फिर उन्हें पहले की तरह नफा नहीं मिलता वह यह
38:10 घाटा सहने के लिए तैयार नहीं थे इसीलिए बीच का रास्ता यह है कि हम इस व्यवहार को मुश्किल बनाए लेकिन आप इन कानूनों को शक्ति से कैसे लागू करेंगे इस तरफ कौन ध्यान देगा कानून लागू करने वाले खुद इसमें मिले हुए हैं यह एक भ्रष्ट व्यापार है ऊपर से लेकर नीचे तक सभी को रिश्वत खिलाकर यह व्यापार चलता रहता है हर चेकपोस्ट पर यही चलता है यह तस्करी हमारे पड़ोसी देशों के साथ भी चलती है भारत से नेपाल में भैंसे और बांग्लादेश में गाय पहुंचती है भारत और पाकिस्तान के बीच भी तस्करी चलती है वह भी पशु संरक्षण कानून के बावजूद शहरों में भी कुछ छिपे हुए कसाई खाने हैं जहां बीफ को मटन के साथ और चर्बी को घी के साथ मिलाया
38:58 जाता है कानून लागू करने में ढिलाई पक्षपाती समाचार रिपोर्टिंग भ्रष्टाचार और पुलिस की लापरवाही से देश में धार्मिक तनाव काला धन मानव तस्करी यहां तक कि आतंकवाद के लिए भी जगह बनती है जगह है देहरादून नाम के एक शहर में जहां से मैं बिलोंग करती हूं उसका नाम है इना मुला बिल्डिंग वहां पर यह एक्चुअली अवैध पशु वध गाय भैंसों का कत्ल बहुत समय से बहुत ज्यादा चला आ रहा था और उसी जगह पर कई बार पड़ोसी देश के टेररिस्ट भी पकड़े गए किसी भी शहर की सबसे क्रिमिनल जगह वही होती है जहां पर बहुत सारे पशुओं को काटा जाता है क्योंकि ऐसे लोग जिनको चाकू छुड़
39:45 खून वगैरह से कोई प्रॉब्लम नहीं होती वही तमाम तरह के अन्य क्राइम्स की ओर भी ग्रेजुएट करते हैं एक बहुत बड़ा आईजी था जिसका नाम है शैलजा कांत मिश्र उन्होंने एक स्टडी करी जहां उसने यह पिन पॉइंट किया कि जो जो इल्लीगल स्लॉटर हाउसेस है स्मगलिंग इंडस्ट्री है बांग्लादेश में भेजने वाले लोग हैं दिस इज एनटायर गोइंग टुवर्ड्स गंस एंड द डिस्ट्रक्शन ऑफ द इंडियन स्टेट यह जो आप सोचते हो कि हल्का पन है जानवरों के ही सौदा कर रहे हैं यह पूरे हिंदुस्तान की सेफ्टी एंड सिक्योरिटी का सौदा होता है एंड दिस इज नॉट व्हाट आई एम सेइंग दिस इज व्हाट द पुलिस हैज सेड अगेन एंड अगेन कि
40:31 यह सबसे खतरनाक धंधा है दिक्कत यह है कि सूखे पशुओं की देखभाल करने की मूल समस्या पर किसी ने ध्यान नहीं दिया इसी वजह से यह अनगिनत सवाल और संघर्ष पैदा हो गए बेकार पशु कसाई को बेचने से डेरी उद्योग को मुनाफा होता है और इसीलिए यह लोग पशु संहार प्रतिबंध का विरोध करते हैं देखा जाए तो उत्तर प्रदेश में सख्त गोहत्या प्रतिबंधक कानून लाए गए यहां गैर कानूनी कसाई खानों को निशाना बनाया गया लेकिन सूखे खुले पशुओं के पुनर्वास के लिए कोई प्रबंध नहीं हुआ अब यहां के डेरी फार्मर्स ना तो इन सूखे पशुओं को खिला पा रहे थे और ना ही इन्हें कसाई को बेच पा रहे थे इसीलिए उन्होंने अपने बेकार गाय बैल रास्तों पर छोड़ दिए यह आवारा पशु भूख के मारे खेतों में घुस गए जिससे कई किसानों
41:19 का नुकसान हुआ अपनी परेशानी जताने के लिए यह किसान इन आवारा पशुओं को सरकारी स्कूलों पर छोड़ने लगे और स्कूल बंद करनी पड़ी कुछ लोगों ने तो पशुओं पर तेजा फेंक कर उन्हें मार दिया आखिरकार इन पशुओं को या तो चुपचाप कसाई खानों में ले जाकर काटा गया या वह रास्ते पर दुर्घटना का शिकार हो गए या फिर प्लास्टिक या कचरा खाकर नहीं तो भूके पेट तड़पते हुए मर गए एनिमल शेल्टर्स और गौशालाओं से भी जानवरों का अपहरण किया जाता है एक दिन ऐसा हुआ एक ऊंट को हम यहां पर उतार रहे थे उतने में दूसरी तरफ तीन बैलों को कोई चुरा कर लेके आ और और ढूंढने पर भी उनका पता नहीं चला द प्लेस वेर इट वास केप्ट एंड वी कुड नॉट ट्रेस
42:04 इट एक इंटरव्यू के लिए अपनी टीम के साथ सफर करते वक्त रास्ते पर मुझे एक गाय घायल अवस्था में दिखी हम उसे पास के एक एनिमल शेल्टर पर ले जाने से पहले उसने एक प्लास्टिक की थैली निकल ली खुले पशुओं के लिए प्लास्टिक एक बड़ी समस्या है इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए मैं हनुमान जी से मिला जो जानवरों के पेट से प्लास्टिक निकालने की सर्जरी करते हैं तो किसी का फोन आया था हमारे पास कि रोड पे वहां पे एक गौ माता पड़ी है तो हम लोगों ने जाकर देखा वहां पे तो उसकी हालत बहुत ही खराब थी बहुत ही खराब पोजीशन में था पीछे भी बहुत बड़ा घाव हो गया था और उसका पैर टूट गया था और गाड़ी वाले ने ऐसी ठोकर मारी कि उसका कमर ही रा पूरा तोड़ दिया अंदर का सिस्टम पूरा तोड़ दिया यह जो दर्द है यही दर्द नहीं है इसका असली दर्द है इसके अंदर में इसके अंदर में क्या भरा हुआ
42:51 है वह किसी को भी मालूम नहीं है इसके अंदर में कम से कम 25 से 30 किलो प्लास्टिक का कचरा भरा होगा तो यह पीड़ा तो उसको है ही वह तो अपने को दिख रही है लेकिन जो अंदर वाली जो पीड़ा है प्लास्टिक का कचरा लोहे की कील कांच का टुकड़ा यह सब आइटम अंदर में है इसके रस्ते में कोई भी ग गोमस देखो आप रोड पे तो उसमें देख लेना कि उसमें कम से कम 30 से 35 किलो प्लास्टिक 100% भरा ही होएगा अपने सभी संसाधनों के साथ उनकी संस्था अब तक केवल 120 सर्जरीज कर पाई है आज भारत में ऐसे भटकने वाले पशुओ की संख्या लगभग 50 लाख है इन्हें सिर्फ तभी छोड़ दिया जाता है जब उनसे कोई आर्थिक मुनाफा नहीं हो पाता इतनी बड़ी क्रूरता इतने बड़े पैमाने पर शायद ही कभी देखी
43:38 जाती है इनमें से किसी भी एनिमल शेल्टर को सरकार द्वारा कोई भी सहायता नहीं मिलती क्या आपको सरकार से कोई सहायता मिलती है नहीं एक पैसा भी नहीं जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं मिला कभी मुझे पद्मश्री पुरस्कार दे दिया बस इन गाय भैंसों को अत्यंत क्रूरता के साथ बिना कुछ खिलाए पिलाए कई बार असहनीय गर्मी या ठंड में रखा जाता है और अंत में एक के ऊपर एक बेरहमी से पैक करने के बाद इन्हें कसाई खाने भेज दिया जाता है एक ट्रक में अगर एक-एक लेके जाएंगे या जितना लॉ अलाव करता है चार लेके जाएंगे या पांच लेके जाएंगे तो उसमें नुकसान है तो एक ट्रक में अगर आपको एक पॉइंट ए से पॉइंट ब तक उन जानवरों को पहुंचाना है तो पैसा बचाने का तरीका क्या हुआ सबसे अच्छा कि एक
44:25 ट्रक में जितने ज्यादा जानवर आ तो आप इमेजिन नहीं कर सकते होंगे कि शायद एक ट्रक में 40 से 60 तो मिनिमम पाए जाते हैं तो 40 टू 60 एनिमल्स उन ट्रकों में भरा हुए होते हैं जो रोज कटने के लिए जाते हैं कसाई खाना कानूनी हो या गैर कानूनी पशु वहां पहुंचने के बाद उनके साथ एक ही जैसा व्यवहार होता है हमने वहां पर देखा कि कैसे जानवरों को भैंसों को नीचे लिटा के रखा हुआ है उनके पैरों को बांधा हुआ है उनकी गर्दन को खींचा हु हुआ है उनको मारने के लिए कैसे छोटी-छोटी नालियां बनी हुई हैं जिनमें उनका खून बहता जा रहा है जितनी भी भैसे काटी जा रही है क्या छोटे क्या बड़े सारी उम्र की भैंसे वहां पर थी जो कि एक दूसरे
45:10 के सामने जिनको काटा जा रहा था उनको पूरा क्लियर दिख रहा था कि शायद हमारे साथ भी ऐसा ही होने वाला है और ना सिर्फ यह बल्कि हमने यह भी देखा कि जो जानवर कटने के लिए लाइन में खड़े थे कतल खाने के बाहर जो शायद बूढ़ी भैंसे थी और जिनका दूध कम हो जाता है उनका भी दूध आखिरी एक बूंद तक उनका दूध नि चोड़ा जा रहा था कटते हुए जानवरों से भी आखिरी बूंद दूध की लो लोच ली जाती है जब वो गाय कट रही होती है तब भी उसको ऑक्सीटोसिन का टीका लगा के जो उसकी थन से आखिरी दूध दूध की बूंद होती है वो बोतलों में इकट्ठी की जा रही होती है कई बार हमें कॉलेज की तरफ से अगर फार्म पे पॉसिबल नहीं है तो स्लॉटर हाउसेस में ले जाया जाता है अ परकट एग्जामिनेशन वगैरह के लिए
45:58 तो अगर हम उसके लिए जब जाते हैं तो जो एनिमल स्लॉटर होने जा रहे हैं हमें उन परे करने बोलते हैं और उस टाइम पर हमें टीचर से बड़ा स्ट्रिक्ट इंस्ट्रक्शन मिलता है कि अगर तुमने पक्ल एग्जामिनेशन के वक्त तुम्हें व एनिमल प्रेगनेंट समझा तो बताना मत जो स्लॉटर हाउस ने उनको खरीदा है उन्होंने काफी पैसे दिए उसके लिए तो अगर वो एनिमल को हमने प्रेगनेंट डिक्लेयर कर दि दिया तो उसको स्लॉटर नहीं कर पाएंगे और फिर उसको रखने का जो खर्चा है वह बढ़ जाएगा यह चीज हमारे साथ जब हुआ था जब मैंने पहली बार एक्सपीरियंस किया था तो काफी बुरा लगा था जब सर ने मना की कि नहीं
46:43 कुछ बोल मत नहीं तो कॉलेज का जो कांट्रैक्ट है य आने का वो बंद हो जाएगा कसाई खाने में कटने के बाद उनके मांस से बीफ प्राप्त होता है हड्डियों से जिलेटिन और अस्थि अंगार बनता है उनकी त्वचा चमड़े साबर या कुत्तों की चूइंग स्टिक्स में तब्दील होती है और सिंघो से हमारे लिए बटन बनते हैं मृदंगम की बात करें तो इसमें तीन जानवरों की त्वचा का इस्तेमाल होता है बकरी गाय और भैंस मतलब मृदंगम बनाने के लिए इन तीन प्राणियों को काटा जाता है आज की तारीख में मृदंगम की बद्धि बनाने के लिए गाय को विशेष रूप से काटा जाता है डेरी प्रोडक्ट की बती मांग की वजह से पशुओं के बीच मादाओ की संख्या बढ़ती जा
47:30 रही है नर पशु डेरी के व्यापार में काम नहीं आते इसीलिए उन्हें भूका मार दिया जाता है भारत की 20वीं पशु गणना के अनुसार पशुओं की आबादी में से केवल 25 प्र नर है भैंसों की हालत तो और भी खराब है इनकी आबादी में अब सिर्फ 10 प्र नर बचे हैं [संगीत] हम डेरी उद्योग की अमानवीय प्रथाओं से इस कदर अनजान क्यों है जानने के लिए मैंने पूरे भारत में तकरीबन 20000 किलोमीटर की यात्रा तय की और डेरी से जुड़े विभिन्न लोगों से मिलकर उनसे बातचीत की जैसे मैं लोगों से मिलता गया वैसे मुझे एक पैटर्न उभरता दिखाई दिया इस सिस्टम को समझने के
48:16 लिए एक पहिए की कल्पना कीजिए अंदर का घेरा डेरी उद्योग है बाहरी चक्र बीफ उद्योग है और दोनों को जोड़ने वाली कुछ कड़ी जो इस व्यवस्था को बरकरार रखती है भारत सरकार ने मुझे खाद्य व्यवसाय का अध्ययन करने हेतु से एक महीने के लिए जापान भेजा हम देख रहे थे कि वहां क्याक बनता है हम जहां जहां खाना खाने जाते वहां तो फू जरूर मिलता फिर मुझे पता चला कि चीन और जापान के गांव में गाय के दूध की जगह सोया का दूध खरीदते हैं जो काफी सस्ता
49:01 है तो वह यही घर ले जाते हैं देखिए एक किलो सोयाबीन से आपको 7 लीटर दूध मिल सकता है तो यह दूध बनाने की लागत मुश्किल से ₹ है अगर आप इस दूध को ग्रामीण भारत में उपलब्ध कराएं जिस तरह चीन में होता है तो इससे बच्चों के पोषण का खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा मुझे विश्वास था कि सोया का उद्योग खड़ा हो सकता है भारत वापस आने पर मैंने एनडीडीबी को समझाने की कोशिश की लेकिन उनका मानना था
49:48 कि इससे डेरी उद्योग को नुकसान पहुंचेगा जब मैंने पता लगाया कि उन वर्षों में एनडीडीबी के प्रमुख कौन थे तो फिर वर्गस का नाम सामने आया इसके कुछ साल बाद रजीत जी ने वॉलंटरी रिटायरमेंट लेकर सोया उत्पादों पर रिसर्च करना शुरू किया फिर उन्होंने चेतन नाम के ब्रांड की शुरुआत की जिसके द्वारा सोया दूध टोफू या सोया पनीर और सोया दही जैसे प्लांट बेस डेरी विकल्प तैयार किए जाते हैं चेतन के ज्यादातर ग्राहक वीगन है और उनके कई विकल्प मूल डेरी उत्पादों से भी सस्ते हैं भारत में कई कंपनिया और ब्रांड्स डेरी और मास के विकल्प के रूप में उभर रहे हैं प्लांट बेस्ड कंपनियों का व्यापार नवंबर 2020 तक अच्छी रफ्तार पकड़ रहा था
50:36 जब अमूल ने डेरी विकल्पों की बढ़ती लोकप्रियता देखकर एफएसएसएआई में आधिकारिक रूप से शिकायत दर्ज की अमूल के सीईओ आरएस सधी ने कहा कि उन्होंने एफएसएसएआई से अनुरोध किया है कि प्लांट बेस्ड विकल्पों के लेबलों से दूध शब्द हटाया जाना चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि 10 करोड़ डेरी फार्मर्स मिलकर इस झूठ का सामना करेंगे सोड़ी जी का ये मुद्दा है कि दूध उद्योग से डेरी फार्मर्स का भला होता है लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि सोया दूध उद्योग से सोया किसानों का भी तो भला होता है उन्होंने उन्होंने अपनी ट्वीट में इसका जिक्र नहीं किया और चेतन इससे ग्राहक का भी भला होता है यह एक मात्र ऐसा उद्योग है जहां हम सीधे प्रकृति से सारे ताजा घटक
51:23 लेकर उत्पाद बनाते हैं जब हम बादाम या काजू का दूध बेचते हैं तब किसानों को बहुत लाभ होता है क्योंकि हम सीधे किसानों से यह घटक खरीदते हैं अपने लिए इस्तेमाल करते हैं और ग्राहक तक उत्पाद पहुंचाते हैं यह सभी के लिए अच्छा सौदा है ग्राहक भी खुश किसान भी खुश और गाय तो सबसे ज्यादा खुश क्योंकि उसका दूध हम नहीं लेते इसीलिए मुझे लगता है कि वह सिर्फ अपने व्यापार के बारे में सोच रहे हैं मैं इस मुद्दे को लेकर गहराई में जाना चाहता था क्या प्लांट डेरी विकल्पों के लिए दूध या मिल्क इस शब्द का प्रयोग करना वाकई में गलत था मेरे पास एक डिक्शनरी है वी एस आपटे संस्कृत इंग्लिश डिक्शनरी वी एस आपटे इ वन ऑफ द कंसीडर्ड
52:12 टू बी वन ऑफ द मोस्ट अथॉरिटेटिव डिक्शनरी ऑफ संस्कृत दुग्ध दे से दिस इ एन एडजेक्टिव बिकॉज इन संस्कृत ग्रामर दिस वर्ड विल बी कैटेगरी एस एन एडजेक्टिव और पार्टिसिपल बेसिकली दुग्ध मींस दैट व्हिच इज मिल्क्ड मिल्क्ड आउट एक्सट्रैक्टेड ड्रॉन आउट मिल्की जूस ऑफ प्लांट्स द स्किम ऑफ मिल्क क्रीम और क्या चाहिए ऐसा ही एक मामला यूरोपियन यूनियन के सामने भी आया था जब वहां प्लांट बेस डेरी विकल्पों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई लेकिन मई 2021 में ईयू के अधिकारियों ने
52:58 ऐसा करने से मना कर दिया यूरोपियन पार्लियामेंट के सदस्य फ्रांसिस्को गिरे ने कहा कि प्लांट बेस्ड उद्योग पर्यावरण स्वास्थ्य और पशु कल्याण के लिए आवश्यक है इनको रोकने के बजाय ईयू को इन्हें बढ़ावा देना चाहिए हमारे आहार में अक्सर नारियल के दूध का इस्तेमाल किया जाता है यहां तक कि एफएसएसएआई भी अपने डॉक्युमेंट्स में इसे मान्यता देता है इसीलिए यह मुद्दा बेतुका लगता है यह भी जानना जरूरी है कि डेरी उद्योग को सरकार से भारी सब्सिडी और फंडिंग मिलती है 1960 के दशक से हर साल हमारी सरकार हजारों करोड़ रुपए डेरी फार्मर्स के सहयोग के लिए खर्च करती आई है 2020 के बजट में भारत सरकार ने 2025 तक दूध का प्रोसेसिंग दो गुना करने की बड़ी योजना बनाई 20वीं पशु गणना के अनुसार 2019
53:47 में भारत में मादा गाय और भैंसों की कुल संख्या तकरीबन 25 करोड़ थी मान लीजिए इसमें 100% सेक्स सॉर्टेड ब्रीडिंग का प्रयोग किया जाए फिर भी भारत सरकार का लक्ष्य हासिल करने के लिए हमें 50 करोड़ पशुओं का पालन पोषण करना पड़ेगा और इसमें हम सिर्फ मादाओ की बात कर रहे हैं कल्पना कीजिए इस गति से 2030 या 40 में इनकी आबादी क्या होगी और 140 करोड़ लोगों के साथ य इस देश में कैसे रह पाएंगे प्रोडक्शन डबल कैसे करेंगे वी आ एट सैचुरेशन पॉइंट ऑलरेडी तो यू नो यह कहना कि हम डबल करेंगे कहने वाली बात है दूसरा अगर की पॉलिसी कोई उनको समझाते कि भैया दूध छोड़ो मास छोड़ो अमीर बनो हम लोग पैसे
54:33 कमा नहीं रहे हैं जो मास जा रहा है भैंसों का आपको मालूम है कि सरकार ने सारे मास को जीएसटी फ्री दे दिया इट्स टैक्स फ्री इट्स जीएसटी फ्री तो जो कतलखाना खोलता है उसकी तो चांदी ही चांदी है उसको एक पैसा नहीं देना सरकार को कुछ ऐसे कारण है जिनकी वजह से प्लांट बेस्ड उत्पादों की कीमत कम नहीं हो सकती उदाहरण के तौर पर हमें 18 प्र जीएसटी भरना पड़ता है और डेरी उत्पादों पर कोई जीएसटी नहीं लगता 19 20 साल हो गए अलकबीर को चले हुए आज तक उसने एक पैसा नहीं दिया सरकार में वह हर साल कहती है हम लॉस में चले गए क्योंकि हमारा मास जो है वो खराब निकला लेकिन कत्ल कितने कर चुके हैं कम से कम 20
55:19 करोड़ 30 करोड़ भैंस गाय जो भी आप मान ले तो आप किसके फायदे में कर रहे हैं किसके अगर बहुत पैसे मिल रहे होते तो मैं कहती कर लो अगर बहुत सेहत बनती आपकी तो मैं कहती कर लो अगर बहुत खुशी मिलती तो मैं कहती कर लो लेकिन इनमें से क्या मिला आपको कुछ भी नहीं 20 साल तक डेरी उद्योग वाले यह कहते रहे कि दूध आपकी सेहत के लिए अच्छा होता है यह एक झूठ है जो वह बोलते रहे जब इनकी बिक्री कम होने लगी तब उन्होंने गट मिल्क विज्ञापनों का प्रचार किया और बिक्री बढ़ गई गट मिल्क कैंपेन प्रोडक्ट पर नहीं बल्कि की कमी पर आधारित था पश्चिम में जब भी दूध की मांग घटती है डेरी उद्योग बिक्री बढ़ाने के लिए अलग-अलग पत्रे आजमा आता है इसी तरह भारत में आजकल देसी दूध को
56:06 प्रमोट करने का ट्रेंड शुरू हुआ है क्योंकि यह तो ए2 दूध है पर असल में ए1 और ए2 इन शब्दों का देसी भारतीय नस्लों से कोई लेना देना नहीं है एट शब्द का प्रयोग सबसे पहले न्यूजीलैंड के एक वैज्ञानिक ने किया इन्होंने गाय की विभिन्न नस्लों के दूध में कैसीन नामक मिल्क प्रोटीन की रचना के आधार पर दूध का a1 और a2 ऐसा वर्गीकरण किया उनका मानना था कि a2 दूध देने वाली गाय a1 से बेहतर होती है इस आधार पर उन्होंने सन 2000 में द a2 मिल्क कंपनी की स्थापना की जो स्टडीज a2 दूध को a1 से बेहतर बताती हैं उन सबके साथ ऐसा डिस्क्लेमर पाया जाता है कि इस रिसर्च की फंडिंग a2 मिल्क कंपनी लिमिटेड द्वारा हुई है मतलब यह तो खुद को ही प्रमोट करने वाली
56:53 बात हो गई यह दावा किया जाता है कि कि गाय की देसी नस्लें केवल a2 दूध ही देती हैं google2 में उठा था ठीक उसी साल जब गो संरक्षण बिल संसद में लाया गया कई डेरी फार्मर्स का झुकाव हाइब्रिड नस्लों की तरफ होता है क्योंकि इनसे दूध ज्यादा मिलता है और बीफ का व्यवहार आसान हो जाता है हो सकता है कि a2 को बढ़ावा देने की रणनीति देसी नस्लों की घटती संख्या को देखकर बनाई गई हो आप बुंदेलखंड जाइए हजारों देसी गाय भूख प्यासी मार दी जाती है उनको बंद कर दिया जाता है दीवारों के बीच में या कहीं तालाबों में धक्का दे दिया जाता है कोई पुरानी बिल्डिंग्स होती है या पंचायत की कोई जगह होती है वहां उनको बिना खाने पीने के हर साल हजारों गाय भूख प्यासी मार द जा
57:41 रही है तो किसानों के पास है ही नहीं उनको खिलाने के लिए कहां से सलूशन आएगा इसका हमारी नेटिव स्पीशीज को खत्म करने की रीजन भी दूध ही है क्यों अगर आदमी दूध के लालच में उन गायों को ना पाल रहा होता तो ना मिक्स हमारी जर्सी और एचएफ के साथ मिक्स ना होती हमारी गाय कम दूध देने वाली गाय हैं गिर गाय कभी खत्म नहीं होगी वो ज्यादा दूध देती है लोग उसको वैसे भी पा लेंगे आप मुझे से कुन्हा की बात कीजिए या कुछ ऐसी स्पीशीज है जो बिल्कुल कम दूध देने वाली है जैसे नागोरी है राजस्थान की जिसके बैल बहुत अच्छे थे आप उनको क्यों कटने भेज दे रहे हैं बांग्लादेश इलीगली जा रही है ये सब और वो सब कटने क्यों जा र है अगर बचाना है तो उन स्पीशीज को बचाने की जरूरत है जो दूध कम देती हैं आपको दूध पर से निर्भरता हटानी पड़ेगी ब्रीड बचाने के लिए भारत के डेरी कॉरपोरेशंस ने भी इन दावों की वैधता
58:27 पर सवाल उठाया था पहले तो मुझे यह नहीं लगता कि a1 और a2 दूध से जुड़े दावों का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार है वैश्विक स्तर पर किसी भी पियर रिव्यूड प्रकाशन में इस बारे में कुछ नहीं छपा है यह बस कुछ लोग मानते हैं इसका प्रचार करते हैं और मुझे इस पर यकीन नहीं है भारत का ज्यादातर डेरी व्यवसाय भैंसों पर आधारित है इसलिए जल्द ही कुछ कंपनियों ने भैंस के दूध को भी ए2 घोषित कर दिया कुल मिलाकर इससे देसी नस्लों को बचाने के लिए कुछ खास मदद नहीं मिली डेरी उद्योग वाले यह दावा करते हैं कि उनकी कमाई का ज्यादातर हिस्सा सीधे डेरी फार्मर्स को मिलता है उन 00 रुपयों में से 75 से 80 प्र राशि उस दूध के प्राथमिक उत्पादक को वापस जाती है लेकिन जब मैंने उनसे खुद बात की तब उनका कहना
59:14 कुछ और ही था आई डोंट थंक सो ही है टू चेक द न चेंज ऑफ डिस्ट्रीब्यूटर बिकॉज आई एम गिविंग डेरी य फॉर लास्ट थ इयर्स एंड आई ऑलवेज क्राई कि भाई तुम लोग क्या कर रहे हो तुम लोग तो जान ले रहे हो हमारी मैं बोला मैं पढ़ी लिखी हूं तो भी मुझे ऐसा कभी-कभी फ्रस्ट्रेशन आया कि मैं भी जाऊं संभाल नहीं पा रही हूं अगर यू हैव डन अ रिसर्च एक सर्टेन मंथ में ना यू डू दैट रिसर्च आई एम सेइंग ना दो महीना या तीन महीने में साल में ना रे मिलकर रेट डाउन कर देता है और दाने का रेट वही रखता है 000 अब बोलो ये गरीब लोग क्या करेंगे हमारा अर्निंग मेंबर था तो हम उधर से फंड लाके कर रहे हैं सर्वाइवल के लिए वो तो
1:00:01 बेचते हैं फिर और वो ऐसी जगह प बेचते जो हम बिलीव ही नहीं कर सकते र फिर बोलते गौ हत्या होती है य अरे तुम लोग ने ही हमें मजबूर किया है ऐसे लोगों को बेचने के लिए एक लीटर के लिए 22 मिलते हैं क्या ये आपके लिए काफी है बहुत कम है कोई बचत नहीं होती एक लीटर पानी की बोतल 20 की आती है अगर हम 2 प्रति लीटर से दूध बेचेंगे तो नफा कैसे कमाएंगे जरा सोचिए दशकों से सरकार से सब्सिडी मिलने के बावजूद भारत के डेरी फार्मर्स की यह स्थिति है जब नफा इतना कम हो रहा हो तब वह पशुओं की देखभाल पर कैसे खर्च करें ज्यादातर डेरी फार्म्स की हालत खराब है यहां ना नरम फर्श है और ना संचार के लिए जगह यह हवादार भी नहीं होते और अस्वच्छता की वजह से इनमें बदबू आती
1:00:49 है डेरी फार्म की मेरी एक विजिट के दौरान मैं एक आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन इंस्पेक्टर से मिला जो पशुओ का गर्भाधान करने के लिए वहां आया था मेरा सुनो समझो एक 101 किलोमीटर सरा जो फार्मर्स रहते हैं ना वो फार्मर्स को इंफॉर्मेशन देते हैं ऐसा है ऐसा है बोलके उनको जो हीट प आया होता है गए जब वो कॉल कर देते हैं हमको हम जाके सेमन लगाते हैं प्रोफेशनली हम वही करते हैं दूसरा कुछ काम करते नहीं है हर एक रोज प एक तीन चार सेमन लगा देते हैं मतलब एक ही तरफ नहीं दूसरे दूसरे गांव प दूसरे दूसरे फार्मर्स के तीन चार सेम लगे जाते हैं यह तो वेटरनरी डॉक्टर खुद नहीं कर सकते क्योंकि उनको तो बहुत काम रहते है व रते है सभी इधर लोकल पर तो अवेलेबल नहीं रहते
1:01:35 हैं बच्चे पैदा कैसे होते हैं डेरी इंडस्ट्री हिंदुस्तान में अब नेचुरल तरीके से कोई मीटिंग अलाव करती नहीं यानी कि सांड आए मेट करे महिला के साथ खत्म वो नहीं होता है अब यह सीमन लेते हैं ंड से और सीमन डालते हैं गाय के अंदर अब सीमन लेने के लिए क्या होता है सांड को रखा जाता है एक जगह और 5 साल से लेकर के 10 साल में वही सांड को बांधा जाता है पूरे दिन एक ही जगह में बंधा है नो एक्सरसाइज नथिंग लेकिन उसको चार दफा हफ्ते में ले जाते हैं बाहर और उसके एनस
1:02:22 में एक बिजली का रड डालते हैं और उसको का इतना तगड़ा शौक देते हैं कि उसका सीमन भी निकल आता है लेकिन वह गिर जाता है उसके पूरे टलिंग हो जाती है और बेहोश हो जाता है चार दिन के लिए हफ्ते में हर रोज दो दफा किया जाता है अब जो सीमन ली जाती है वह सीमन का कोई चेक भी नहीं करते हैं कि कौन सी इसमें बीमारियां है लेकिन वह सीमन चला जाता है गाय के अंदर अब जो गाय के अंदर सीमेंट डालने का जो प्रोसेस है वो बहुत ही डेलिकेट होता है क्योंकि आप एक मशीन लेकर के अंदर सुई डालते हैं जैसे औरत को जब इंप्रेग्नेट करना होता है तो आईवीएफ बहुत तकलीफ वाली चीज होती है लेकिन यहां उन्होंने ऐसे लोगों को रखे हैं जो दो
1:03:10 हफ्ते की ट्रेनिंग मिलती है और वह भी बेरोजगार किसी इंसान जो लिखा पड़ा नहीं है उसको दो हफ्ते की ट्रेनिंग देते हैं और फिर वह किट पकड़ते हैं और कहते हैं कि जाओ इनसेमिनेट बन जाओ वो अक्सर जब गाय के अंदर सीमेंट डालते हैं तो यूटरस को फाड़ देता अब फटी हुई यूटरस के साथ वह गाय या तो मरेगी या तो उसका अबॉर्शन होगा या तो प्रेगनेंट होगी नहीं आपको मालूम है कि हमारा रेट ऑफ सक्सेस क्या है हिंदुस्तान में 1800 करोड़ रुपए इस पर खर्चा किया गया है रेट ऑफ सक्सेस 2 पर यह बेजुबान जानवर है यह आवाज नहीं उठा सकते और मतदान भी नहीं कर सकते यह बोल नहीं पाते इसीलिए हम पर य कृत्रिम गर्भाधान की
1:03:57 प्रक्रिया करते हैं इस बारे में हमें गंभीरता से सोचना चाहिए जो हम गाय या भैंस के साथ करते हैं वह अगर किसी इंसान के साथ किया जाए तो क्या लोग चुप रहेंगे इतनी नाजुक प्रक्रिया ठीक ट्रेनिंग के बिना करने की अनुमति क्यों दी जा रही है इसके लिए वेटरनरी डॉक्टरों को क्यों नहीं बुलाया जाता वी हैव 33 वेटनरी कॉलेजेस यह शायद दुनिया में सबसे खराब है और केवल एक लक्षण है उनका कि गाय को गर्भवती कैसे बनाते हैं बस और कुछ नहीं यू नो गाय हमारी माता है मुझे और कुछ आता नहीं आता है यह वो वाला कांसेप्ट है सबसे बड़ा एंप्लॉयर जो है वेटने का वह है पशुपालन विभाग पशुपालन विभाग जो है उसका
1:04:44 मतलब यह नहीं है कि पशुओं की सेवा करने का विभाग वह है पशुओं के उत्पादन करने का विभाग कैसे अंडा बढ़ाया जाए कैसे दूध बढ़ाया जाए कैसे लेद बढ़ाया जाए कैसे मीट बढ़ाया जाए कैसे ऊन बढ़ाया जाए इत्यादि के बारे में काम करने का विभाग सा का इनसेमिनेशन कॉलेजेस तो या तो मगर इसका इलाज क्या है इसका इलाज केवल एक है कि अगर आपके पास कोई पैसा है तो आप वेटनरी कॉलेज शुरू क्यों नहीं करते एक वक्त था कि हर लॉयर ली क्या बोलते लॉ कॉलेज घटिया से घटिया होता था 50 में आप डिग्री अपना खरीद लो फिर बंग लॉ कॉलेज शुरू हुआ और वह इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का था
1:05:30 दो साल के अंदर-अंदर हर लॉ कॉलेज हिंदुस्तान में इतना अच्छा बन गया कि आज कोई खराब कॉलेज है ही नहीं तो एक वेटनरी कॉलेज अगर शुरू हो जाए जो इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स का है तो आप देखेंगे बाकियों को करना ही [संगीत] पड़ेगा तो क्या डेरी उत्पादन से जुड़ी इस क्रूरता को रोकने के लिए ू धार्मिक समुदाय कुछ कर रहे हैं अगर आप पूछेंगे क्या इसकन में कहीं भी डेरी नहीं यूज होता तो मैं कहूंगा कि होता है इसकन के लिए यह नियम नहीं है कि हम दूध नहीं बेच सकते तो मुझे ऐसा गाय का दूध दीजिए आप अवेलेबल कीजिए जिसमें अहिंसा के माध्यम से दूध
1:06:16 मिला हो और उस गाय को कोई कष्ट नहीं हुआ हो उसके लिए आपको क्या करना होगा आपको गौशाला खोलनी पड़ेगी आपको वहां पर उन गायों को अ रखना होगा और फिर उस दूध को आप लोगों की तरफ पहुंचाए तो लेंगे जरूर लेकिन सब लोग ऐसा नहीं कर सकते कक मैं मुंबई में तो सब लोग बादाम का दूध भी नहीं ले सकते ना हा उसे कगा मैं आपको ऐसी गाय का दूध देता हूं जो शुद्ध है और शकारी और जो अहिंसा है व मानेंगे मगर अवेलेबल कीजिए लेकिन जब तक हम उसका नहीं डिमांड कर सकते तब तक व हो तब तक य चलने दो भगवान भावना देखते भाव है वो भी देखते हैं कि य प्रॉब्लम
1:07:02 है उनको पता है कि य पर प्रॉब्लम है इसको एक्सेप्ट करेंगे भगवान भावना देखेंगे तो आई कैन गव सो ब क्योंकि हमें पता है उनको पसंद नहीं है लेकिन भगवान को वो भी पसंद नहीं है कि जो दूध क्रूरता से आ रहे है उसका स्वीकार नहीं करना है वही भावना से यह भी देना सही नहीं है आप जिस कार्य में जुटे हैं ना आप उसे चालू रखिए आपका विचार बहुत उच्च कोटि का है मैं आपको सिर्फ सजेशन दे रहा था कि ज्यादा लोग मानेंगे नहीं इसको जो दूध चढ़ाने की प्रथा भी है कहां से आ रही है थोड़ा
1:07:47 समझिए अहंकार का घटना और खत्म हो जाना आखिरी लक्ष्य होता है आध्यात्मिक साधना का स्पिरिचुअलिटी इसीलिए होती है ताकि आपके भीतर जो एक आपका फॉल्स सेंटर बैठा हुआ है ना जो आपकी सारी तकलीफ का कारण है वो खत्म हो सके वो फॉल्स सेंटर एजिस्ट करता है अटैचमेंट से किस चीज से वो अटैच होता है जिस चीज को वो कीमती वैल्युएबल समझता है एक जमाना था जब इंसान के पास सबसे बड़ा धन पशुधन होता था और पशुधन में भी दूध सबसे बड़ा उसको अमृत बोलते थे क् वो सबसे बड़ी चीज होती थी क्योंकि और कुछ था ही नहीं और कुछ था ही नहीं तो आपको लगता था आपके पास सबसे कीमती चीज है क्या
1:08:32 है दूध तो आप कहते थे कि यह जो दूध है मेरे यही मेरे लिए सबसे कीमती चीज है तो मेरी जो ईगो है उसके लिए सबसे वैल्युएबल चीज क्या है तो मुझे अगर त्याग करना है या बलिदान करना है या समर्पण करना है या कुर्बानी देनी है तो मैं किस चीज की दूंगा दूध की दूंगा तो बात दूध की नहीं है बात उस चीज की है जो आपको आज सबसे ज्यादा कीमती लगती है आपको वो जाकर चढ़ा है भगवान को आपको दूध थोड़ी चढ़ाना है गाय का गाय परेशान हो रही है कि मेरा दूध ले जा के व का को चढ़ा दिया भाई आप वो चीज चढ़ाओ जो आपके लिए कीमती है आपने वो चीज चढ़ा दी जो बछड़े के लिए कीमती आप बछड़े हो क्या आपके लिए कीमती आपके घर में जो आपके शेयर्स के
1:09:17 कागजात रखे हैं आपकी जो एफडी रखी है आपकी बीवी के गहने आपकी आपकी जमीन के कागज आपकी प्रसिद्धि और आपकी एंबिशन यह सब आप सबसे ज्यादा वैल्यू देते हो ना इनको यह जाकर के भगवान जी को अर्पित करो इनका समर्पण करना होता है जो कृष्ण यह सोचता है कि मेरे घर में आने वाला दूध पहले मुझे मिलना चाहिए फिर मथुरा में बिकने के लिए जाना चाहिए उसी कृष्ण ने यह भी तो सोचा होगा कि जिस गाय का हम दूध निकाल रहे हैं उसके बच्चे को व पहला मिलना चाहिए बाद में हम तक आना चाहिए उसके पहले क्या होता था कि वो गाय के बछड़े को कहीं जाकर कोने में बांध के रखते थे जबरदस्ती उसको दूध पीने नहीं देते थे
1:10:04 पहले पूरे गाय का दूध जितना बेचने के लिए चाहिया उतना निकालने के बाद फिर बछड़े को छोड़ा जाता था तो कृष्ण ने यह भी चेंज किया उन्होंने यह भी एक्टिविज्म किया उन्होंने कहा नहीं गाय के दूध पर पहला अधिकार उस गाय के बच्चे का है तो आप पहले बच्चे को गाय के पास छोड़ दो उसको चाहिए जितना अपनी मा का दूध पीने दो और उसका दूध पी के होने के बाद में हम दूध निकालेंगे अगर कुत्ते को बांध दिया जाए तो उसे घुटन महसूस होगी कहेगा छोड़ दो मुझे क्या कर रहे हो कम से कम मुझे घर के अंदर या बाहर मुक्त छोड़ दो कोई भी बंधन में नहीं रहना चाहता मेरी आध्यात्मिक समझ यह है कि औरों के साथ वैसा ही बर्ताव करो जैसा तुम उनसे चाहते हो वैसे ही जैसे मैं बंधा हुआ रहना नहीं चाहता शोषण नहीं सहना चाहता मैं नहीं चाहता कि कोई मेरे बच्चे को मुझसे दूर ले
1:10:50 जाकर मेरे शरीर का उपयोग करता रहे यह बहुत ही सरल बात है कोई चीज नहीं है जिसको हम अहिंसा मिल्क बोल सकते हैं कोई भी गाय का दूध लेने में आपको उसके बछड़े को भूखा रखना पड़ेगा गाय एक मशीन नहीं है वो मां की तरह अगर मेरा मैं अपने बच्चे को पिला रही हूं दूध तो मेरे थन में उतना ही दूध आएगा जितना मेरे बच्चे को को जरूरत पड़े उसी तरीके से गाय के नों में उतना ही दूध आएगा जितना उसके बच्चे की जरूरत है अब बच्चे बच्चे को चाहिए 3 किलो 4 किलो लेकिन आप न किलो 4 किलो निकाल करके उसको एक पाव दूध देते वह भूखा भूखा जो
1:11:36 लड़की है व भूख से जूझती रहे क्योंकि पूरे दिन बांधी रहती है मां के पास तो जाने देते नहीं है कहा जाता है कि अगर इस जन्म में हम एक मुर्गी को काट कर खाते हैं तो अगले जन्म में वो मुर्गी इंसान बनेगी और हम मुर्गी हमारा धर्म कहता है कि मुर्गी को काट कर खाना नहीं चाहिए जीवों के प्रति हिंसा नहीं करना चाहिए शिवरात्रि आते ही सभी दूध के पैकेट लेकर लाइन में लग जाते हैं दूध के पैकेट्स ये एक फैशन बन गया है क्या करें तो आप लोगों से क्या कहना चाहेंगे अगर हम दूध ना चढ़ाएं तो क्या हमारी भक्ति कम हो जाएगी बिल्कुल नहीं अगर हम दूध चढ़ाना बंद करें तो शिव को जल भी अर्पण कर सकते हैं मन में शिव के लिए भक्ति हो तो जल ही काफी है दूध की कोई जरूरत नहीं भगवत गीता में कृष्ण स्वयं कहते हैं यदि कोई
1:12:22 मुझे प्रेम और भक्ति भाव के साथ एक पत्ता फूल फल या सिर्फ जल भी चढ़ाए तो भी मैं उसका स्वीकार करूंगा कृष्ण ने कभी भी अपने भक्तों से दूध चढ़ाने की मांग नहीं की फिर भी हम डेरी उद्योग की क्रूरता को अनदेखा करते हुए इस प्रथा का पालन करते हैं यथा राजा तथा प्रजा यद भाव तद भवती परिस्थिति हमारी सोच को आकार देती है अगर कृष्ण आज जीवित होते तो वो दूध नहीं चुराते या दूध नहीं पीते यह हमारे आचार विचारों पर निर्भर है यहां जो मेरा भगवान है वह पूरी तरह विगनल मैं उसे कोई पशु उत्पाद अर्पण नहीं करता मैं प्रार्थना करता हूं ध्यान
1:13:08 अनुष्ठान करता हूं इसमें किसी जानवर की जरूरत नहीं हम जैसे होते हैं हम वैसी ही बातें औरों में देखने लगते हैं अगर तुम मांस खाते हो तो तुम औरों को भी दोगे खिलाओगे अगर मैं खाता तो आपको भी जरूर खिलाता मैं मांस नहीं खाता तो मैं आपको भी नहीं खिलाऊंगा उसी तरह हम भगवान में वही लक्षण देखते हैं जो हम खुद में पाते हैं हम दूध पीते हैं तो हम वही भगवान को भी चढ़ाते हैं और मानते हैं कि ईश्वर दूध पीते हैं मेरे कृष्ण दूध नहीं पीते मेरे राम दूध नहीं पीते यह सब हमारी सोच पर आधारित है तो मैं एक ऐसे कृष्ण की आराधना करता हूं जो निष्कलंक है गाय से दूध निकालने के लिए लोग एक कारण
1:13:55 देते हैं व यह कि उनके बछड़े ज्यादा दूध पीने से मर जाते हैं क्या यह सच है कि बछड़े ज्यादा दूध पीने से मर जाते हैं नहीं बछड़ा जरूरत से ज्यादा पिएगा ही नहीं पेट भरने तक पिएगा और फिर सो जाएगा या फिर हसी खुशी खेलता रहेगा यह क्या बात हुई बछड़ा ज्यादा दूध पीने से कैसे मर सकता है किसने बताया य आपको किसी ने मैं नहीं मानता कि अगर बछड़ा पेट भर दूध पिए तो वो मर जाएगा व्वर इट इ अ टू ये गलत है इसका मतलब आप बछड़े को स्वस्थ नहीं रख रहे उसकी मम्मी वहां पे है फ्रूटी नाम रखा हुआ है मैंने उसकी उसका बच्चा ये है ये छ महीने
1:14:42 का बच्चा है इसको मां का दूध मिला है शुरू से तो उसकी हेल्थ देखिए आप और यहां पे सुबह शाम खाना मिलता है और मां का दूध बहुत जरूरी होता है तो वो मिलाए इसको तो वो हेल्थी है अच्छा है कितने महीने त जरूरत है मां का दूध मां का दूध तो अभी मेरे सामने रियलिटी तो यह है कि छ सात महीने से तो मैं देख रहा हूं पीते हुए तो अभी पता लगेगा कि कब तक वो पिएगा तो फिर मुझे आईडिया हो जाएगा इसलिए बहुत हेल्दी है हां 6 महीने में कुछ लोग ऐसा बोल र है कि अगर मां का दूध ज्यादा पिया तो वह मोसम सा के मरेगा ऐ नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है मैं उसको देख के आ रहा हूं यह शुरू से दूध पी रहा है मम्मी का दूध पी रहा है और वह बच्चा भी पी रहा है देखो वो
1:15:28 गाय के भी कुछ थन में प्रॉब्लम हो गई है तो वो बच्चा भी पी रहा है दूध छोटे बच्चे हैं दो-तीन बच्चे हैं तो वो दूध पी रहे हैं आराम से हेल्दी है कोई दिक्कत नहीं तो आप कभी खींचते नहीं है नहीं नहीं नहीं नहीं बस बस बच्चा ही पीता है इन गौशालाओं द्वारा बेचे जाने वाले दूध की मात्रा इतनी कम है कि इससे पशुओं की देखभाल का खर्चा तक नहीं निकलता आज ऐसी गिनी चुनी गौशाला एं हैं जिनमें अधिकांश दूध बछड़े पीते हैं और फिर बचा हुआ थोड़ा सा दूध लोगों को मिलता है इन गौशालाओं में दिया जाने वाला प्रसाद भी वीगन था इसमें घी दूध या दही का इस्तेमाल नहीं किया गया था यहां तक कि मिठाई भी नारियल के दूध से बनी थी गाय और भैंस को हम एक समान क्यों नहीं
1:16:15 मानते कई लोगों ने मुझसे यह कहा कि भैंस कम अकल होती है लेकिन एनिमल रेस्क्यूर्स ने कुछ और कहानी बताई इनकी होशियारी देखकर आप दंग रह जाएंगे यह जानते हैं क्या खाना है और क्या नहीं खाना है यह ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता है यह बहुत ही बुद्धिमान होते हैं जो भैंस आगे रहते हैं उनमें से कुछ यह भी जानते हैं कि उस मौसम में कौन से पेड़ों पर फल मिलेंगे यह पाच पाच मील दूर जाकर वहां पहुंच जाते हैं उन्हें पता है यहां कब जाना है उन्हें यह भी पता है कि इस घर में मुझे दो रोटियां मिलेंगी उस वाले में मुझ पर पानी फेंका जाएगा तोय जरूर बंद होते हैं मैंने तो यह भी देखा है एक भैंसा आगे था और उसके पीछे
1:17:01 एक झुंड था तो एक बगीचे का गेट थोड़ा खुला था भैसा अंदर गया पूरी तरह निरीक्षण करके बाहर आया और फिर उसने सभी को अंदर आने के लिए इशारा किया जो बड़ा भैसा होगा वो अपने झुंड के लिए जान भी जोखिम में डाल देगा ये जहरीले पौधे भी पहचानते हैं उन्हें पता है कि इनको नहीं खाना है तो आश्चर्य की बात यह है कि हमारे पास 55 गाय और एक भैंस है वो गायों से ज्यादा बुद्धिमान है और एंजल यमुना ने तो यह साबित कर दिया है कि वो बाकियों से ज्यादा होशियार क्योंकि सिर्फ वही यह गेट खोल सकती है आपके पास कितने गाय भैंस हैं तीन भैंस
1:17:49 मेरे पास दो गाय और एक बछड़ा कुल मिलाकर तीन उनकी उम्र कितनी है ये लगभग तीन साल की है ये वाली लगभग एक साल की और वो करीब न साल की सबसे बड़ी वाली छ सात साल की है आप इन्हें कितने साल तक रखते हैं जब तक ये दूध देंगी तब तक हम देखभाल करेंगे जब दूध देना बंद करें तो उन्हें छोड़ देंगे दूध देना बंद करने के बाद भी हम इन्हें खिलाते रहेंगे जब ये बूढ़ी होकर दूध देना बंद करें तब बूढ़ी होने पर हम इन्हे दे देते हैं किसको दे देते हैं कइयों को हम किसानों को दे देते हैं आपको कैसे पता उनकी ठीक से देखभाल होगी हम सिर्फ उन्हीं किसानों को देते हैं जो हम जैसे हैं आपने इन्हें क्या नाम दिए हैं वो गंग मा है वो दुर्गम मा है और यह सीतम्मा है क्या यह आपको पहचानती है हां शायद चेहरे
1:18:37 से नहीं पर कपड़ों से पहचान लेती है तो जब आप इन्हें कसाई हों को देते हैं तब रोती है क्या रोती है रोने लगती है वो क्या कहना चाहती रोती है बस मैंने आचार्य प्रशांत जी से लोगों की ऐसी सोच और बर्ताव का कारण पूछा मुद्दा उठाना पड़ेगा जितने भी व्यर्थ के मुद्दे होते हैं वह लोगों के दिमाग में घुसे हुए हैं यह मुद्दा ही नहीं बनता कभी आप अखबार को उठाइए उसमें सारे वह मुद्दे भरे होते हैं जो आदमी के दिमाग को खराब करें ठीक है ना 30 40 प्रति स्पेस तो ग्लैमर वर्ल्ड ने ले रखा होता है ले रखा होता है कि नहीं आप
1:19:23 किसी मीडिया साइट पर चले जाइए न्यूज़ वेबसाइट पर चले जाइए या अखबार उठा लीजिए या कुछ कर लीजिए अभी आपका वीकेंड चल रहा है आप देख लीजिए कि आपको मीडिया किस तरह की खबरों से न्यूज से और सबसे महत्त्वपूर्ण बात टॉपिक्स मुद्दों से बंबा कर रहा है तो आपके दिमाग में दुनिया भर के फिजूल मुद्दे डाले जा रहे हैं इस बात की ओर कोई आपका ध्यान ही नहीं खींच रहा कि तुम खा क्या रहे हो इस बात को छोड़ दिया गया है कि ये तो सबका अपना निजी मसला है पर्सनल मैटर यह बताना पड़ेगा कि यह निजी बात नहीं है पहली बात तो अगर निजी बात मानो भी तु पता होना चाहिए तुम खा रहे हो व तुम्हारे शरीर को तबाह कर देगा लेकिन तबाह करे ना करे यह निजी बात नहीं है य जो तुमने जिस किसी को मार दिया और खा रहे हो निजी बात इसलिए नहीं है क्योंकि इसमें उसकी जिंदगी का भी
1:20:09 सवाल है पहली बात दूसरी बात जो तुम खा रहे हो वह पूरी दुनिया को बर्बाद कर रहा है आज ठीक वैसे जैसे किसी ने अपने घर में डीजल जनरेटर सेट लगा रखा हो जो जबरदस्त धुआ फेंक रहा हो क्या ये उसकी निजी बात रह गई आपके पसी ने अपने घर में एक डीजी सेट लगा रखा है और वो जबरदस्त रूप से काला धुआ फेंकता है ठीक है क्या यह उसका पर्सनल मैटर है नहीं है ना क्योंकि वो जो कर रहा है वो पूरी दुनिया को तबाह कर रहा है इसी तरह से आज कोई अगर मांस खा रहा है जानवर को काट रहा है तो यह उसका पर्सनल मैटर नहीं है दूसरों का हक है आपत्ति करने का मैं जोर जबरदस्ती की बात नहीं कर रहा पर हमें इतना तो अपना फर्ज निभाना पड़ेगा कि उसको पकड़े कहे कि सुनो भाई एक बहुत जरूरी मुद्दा है उस पर तुम्हें ध्यान देना होगा
1:20:55 तो यह इसमें इंफॉर्मेशन एक्टिविज्म चाहिए [संगीत] अभी तो जब तक मैं 45 साल की हुई तब तक सारी की सारी बीमारियां हो गई थी डायबिटीज ब्लड प्रेशर हाइपोथायरायडिज्म घुटने में दर्द होता था मैं 100 मीटर भी नहीं चल सकती थी यहां तक कि कभी-कभी मैं रात को जब प्रे करती थी तो सोचती थी कि मैं कल सुबह उठूं ही नहीं भगवान से कहती थी मुझे कल सुबह उठना ही नहीं है तो नींद में ही मैं मर जाऊं तो यह सामना नहीं करना पड़ेगा मुझे इन बीमारियों का मैंने आयुर्वेदा ट्राई किया होम्योपैथी ट्राई की एलोपैथी तो बहुत सारी ट्राई की लेकिन कुछ
1:21:42 भी काम नहीं आया और फिर मुझे एक डॉक्टर ने हेल्दी वीगन खाना खाने को कहा उसके साथ एक महीने के अंदर-अंदर मेरा डायबिटीज की दवाइयां बंद हो गई नॉर्मल हो गया डायबिटीज और तीन चार महीने में तो ब्लड प्रेशर की भी दवाई बंद हो गई और हाइपो थाइरोइड जम की दवाई भी छ महीने में बंद हो गई और वेट लॉस भी हुआ 100 किलो के करीब से आज मैं 65 किलो की हो गई हूं तो कभी-कभी मुझे लगता है कि काश हमारे जो डॉक्टर्स हैं उनको इस चीज के बारे में पता हो और सारे डॉक्टर अगर लोगों को को यह ट्रीटमेंट बताएं कि सही खाना खाने से हेल्दी वीगन खाना खाने
1:22:30 से हम अपनी सारी बीमारियां दूर कर सकते हैं तो कितना अच्छा हो जाए मायावी जी की उम्र आज 60 साल से ऊपर है वह हर रोज सुबह 5:00 बजे उठती हैं और मुंबई में रहने वाले लगभग 20 वीगन लोगों के लिए खाना बनाकर उनको अपनी जीवन शैली सुधारने में मदद करती हैं मेरी डॉक्टरी शिक्षा में भी मुझे कभी जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के इलाज में आहार का महत्व नहीं सिखाया गया पशु उत्पादों का हमारे स्वास्थ्य और समाज पर क्या असर पड़ता है यह जानने के लिए मैं कुछ डॉक्टरों और विशेषज्ञों से मिला लाइफस्टाइल डिजीज का मतलब है खराब जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां इसका संबंध सबसे ज्यादा हमारे आहार के साथ अब यहां अमेरिका में लोग सुबह उठते ही मास खाने
1:23:17 लगते हैं वो सॉसेज खाते हैं बेकन खाते हैं और फिर अंडों और डेरी प्रोडक्ट्स का सेवन करते हैं और पशु उत्पादों में चर्बी होती है जो खाने से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल पैदा होता है और इसके अलावा इन उत्पादों में भी अपना कोलेस्ट्रॉल होता है तो दिक्कत क्या है जैसे-जैसे आपके खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने लगता है वैसे-वैसे आपकी धमनियां पतली होने लगती है
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