0:53 चलिए क्लास शुरू करते हैं। पढ़ना क्या है अपने को? एनवायरमेंट एंड इकोलॉजी। किसी भी सब्जेक्ट को पढ़ने से पहले क्या पढ़ना है आने वाले दिनों में कितना पढ़ना है उस सब्जेक्ट का आपका सिलेबस या आपका एग्जाम क्या डिमांड करता है इसको जान के रखना बहुत जरूरी है। समझ गए? अकॉर्डिंग टू सिलेबस एज अकॉर्डिंग टू आवर एग्जाम डिमांड्स जो हमको जानना चाहिए उतना ही पढ़ेंगे। क्योंकि यह जो सब्जेक्ट है एनवायरमेंट यह इनफिनाइट सब्जेक्ट है। अपने आप में साल भर लगेगा पढ़ने में तो भी इतनी सारी टर्मिनोलॉजी और इतनी नई-नई चीजें हैं। डायनामिक पार्ट है ना यह तो और एक ऐसा टॉपिक जो हमसे हमारे एग्जिस्टेंस से मतलब हमारे अस्तित्व से सीधा जुड़ा हुआ है। समझ रहे हो बात? मेरे को नहीं लगता कि
1:41 एनवायरमेंट को पढ़ाने की जरूरत पड़नी चाहिए। क्योंकि एनवायरमेंट तो आप लोग जानते हो। आप लोग महसूस करते हो, फील करते हो। उसी एनवायरमेंट में आप रहते हो और उसी एनवायरमेंट में चेंजेस आपकी बॉडी, तबीयत, दिमाग सब चीज में चेंजेस लाता है। समझ गए बात? क्लियर है? चलो छोटा सा ब्रीफ इंट्रोडक्शन अपन लेंगे अपने सब्जेक्ट का।
2:39 टॉपिक क्या है पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी एनवायरमेंट एंड इकोलॉजी। एक ऐसा सब्जेक्ट जिसको हमको क्यों पढ़ना पड़ता है? आप लोग यहां बैठकर के क्यों पढ़ रहे हो? तो हमारा जो एग्जाम है सीजीपीएससी वो इस सब्जेक्ट की डिमांड करता है। ठीक है? कहां-कहां करता है? तो पिछले तीन-चार सालों का अगर हम लोग ट्रेंड देखें तो प्रीलिम्स में चार से पांच क्वेश्चन का वेटेज हो गया है अब एनवायरमेंट का। समझ गए? ऐसे बड़े-बड़े सब्जेक्ट्स जो आप 3 महीने, चार महीने पढ़ते हो और इतना लंबा पढ़ने के बाद भी आएगा नहीं आएगा वो अलग बात है। लेकिन उसके क्वेश्चन कंपैरिजन में इस छोटे से सब्जेक्ट के ज्यादा होते हैं। मतलब ऑलमोस्ट 15 से 20 दिन की क्लास चलेगी। क्लियर है बात? ऑलमोस्ट ये ज्योग्राफिकल पार्ट वाला ही थोड़ा सा अलग
3:26 डिफरेंट पार्ट है। ज्योग्राफी का ही हिस्सा है। लेकिन 15 से 20 दिन क्लास चलेगी। जो एग्जाम डिमांड करता है वही हम लोग पढ़ेंगे। यहां तक बात समझ में आ गई? सबके दिमाग में होगा कि सर कितनी मोटी कॉपी बना लें। यही है। नोट्स के लिए कितना पेज चाहिए? तो बहुत ज्यादा ही हो जाएगा। 100 पेज 100 पेज लेकिन उससे पतली तो मिलती नहीं है। तो एक 100 पेज की कॉपी रहेगी। शॉर्ट एंड स्वीट नोट्स रहेगा जो हमारा एग्जाम हमसे डिमांड करता है। पढ़ना क्यों है? प्रीलिम्स में चार से पांच क्वेश्चन का वेटेज है और ऐसा कोई दूसरा सब्जेक्ट नहीं है जिसको इतने कम समय में पढ़ के इतना ज्यादा क्वेश्चन जिससे आए तो इसलिए ये इंपॉर्टेंट है। जब आप मेंस में जाओगे जब आप मेंस की प्रिपरेशन करोगे या कर रहे होगे तो इसमें मेंस के एक पेपर में पूरे
4:12 50 मार्क्स का वेटेज है। कितने मार्क्स का? 50 मार्क्स का। और 50 मार्क्स मेंस में कम नहीं होते। समझ गए? तो बहुत ज्यादा वेटेज फिर जाओगे आप इंटरव्यू में तो आज एक ऐसा टॉपिक और दुनिया का एकमात्र एक ऐसा टॉपिक जिसमें सारे देश एक दूसरे से एग्री हैं। एक दूसरे से सहमत हैं। वो टॉपिक कौन सा है? तो एनवायरमेंट का। समझ गए? क्यों एक दूसरे से एग्री है? क्यों इनको सबको एक मंच पर आना पड़ रहा है एनवायरमेंट के लिए? क्योंकि यह हमारे अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। और अस्तित्व से इसलिए जुड़ा हुआ है क्योंकि आज इसके बुरे प्रभाव हम देख रहे हैं। समझ गए बात? यहां तक समझ में आई? क्लियर है? इस टॉपिक को पढ़ने से पहले एक डायग्राम के द्वारा हम लोग समझेंगे कि हमको आगे पढ़ना क्या है?
5:03 हम लोग कौन हैं? मानव। ह्यूमन बीइंग्स। कौन है हम लोग? मानव। हमारे अस्तित्व के लिए हमको क्या-क्या चाहिए? हमको जिंदा रहने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत पड़ती है? ये तो जानते ही हो ना? चलो बताओ क्या-क्या चाहिए? हवा, पानी और क्या चाहिए? खाद्य पदार्थ। क्या-क्या खाते हो? दाल चावल। अरे मांसाहार नहीं हो क्या? देखो अगर बात करें हमारे अस्तित्व की तो हम मानव हैं। हमको जीने के लिए सबसे पहले
5:49 क्या चाहिए? तो ऑक्सीजन। क्या चाहिए? ऑक्सीजन। कहां से मिलेगा? यह हमको मिलेगा वायुमंडल से जिसको बोलते हैं एटमॉस्फियर। दूसरा हमको जिंदा रहने के लिए चाहिए पानी। जल वो हमको कहां से मिलेगा? जलमंडल, हाइड्रोस्फीयर और तीसरा हमको रहने के लिए या खेती करने के लिए क्या चाहिए? जमीन। वो कहां से मिलेगा? स्थलमंडल। इसको बोलेंगे लिथोस्फीयर।
6:34 यहां तक बात क्लियर है। हमको जीने के लिए चाहिए ऑक्सीजन। वायुमंडल से मिलेगा। पानी जलमंडल से मिलेगा। खेती करने के लिए रहने के लिए जमीनें हमको कहां से मिलेंग? स्थलमंडल से। क्या यह सब जिंदा है? जीवित है या मृत है? यह सब जिंदा चीजों में है या मरी हुई चीजों में? निर्जीव में है या जिंदा में है? जीव में है? निर्जीव में है। तो इन सब को हम लोग एक नाम देते हैं अजैविक घटक। एबायोटिक कंपोनेंट्स मतलब ऐसे निर्जीव पदार्थ जो हमारे आसपास
7:22 रहते हैं हम उनको क्या बोलते हैं? अजैविक घटक। और इन अजैविक घटक में हम लोग किसको किसको इंक्लूड करेंगे? तो वायुमंडल को, जलमंडल को और किसको? तो स्थलमंडल को। यहां तक बात समझ में आई ना? अब हमको क्या चाहिए खाने के लिए? जीवजंतु और पेड़-पौधे। इनको हम लोग बोलेंगे लिविंग ऑर्गेनिज्म और इनको हम लोग बोलेंगे वेजिटेशन। समझ गए बात? क्या चाहिए खाने के लिए? जीव-जंतु और पेड़-पौधे। यह सारे जीव-जंतु
8:08 और पेड़-पौधे क्या है? तो जीवित हैं। जिंदा है। समझ गए? जैसे वो निर्जीव है। यह कौन है? जीवित। तो इनको हम लोग कौन सा नाम देंगे? जैविक घटक। बायोटिक कंपोनेंट्स। समझ गए? तो हम जो मानव हैं हम अपने आसपास बहुत सारी चीजों से घिरे हुए हैं। हमारे आसपास जो भी चीज है वह दो ही हो सकता है। या तो वो होगा एबायोटिक कंपोनेंट्स यानी अजैविक घटक जो निर्जीव पदार्थ हैं। मेनली किनको शामिल करेंगे? तो वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल। दूसरा और क्या हमारे आसपास हो सकता है? तो जैविक घटक, बायोटिक कंपोनेंट्स। इसमें हम लोग क्या शामिल
8:55 करेंगे? तो सभी जीव-जंतुओं को और पेड़-पौधों को। यही हमारा क्या है? तो पर्यावरण समझ गए? हम जो अपनी आसपास दो प्रकार की चीजों से घिरे हुए हैं। एक को हम लोग बोलते हैं जैविक घटक और दूसरे को हम लोग क्या बोलते हैं? अजैविक घटक। इसी को हम अपना क्या बोलते हैं? पर्यावरण। क्या बोलेंगे? पर्यावरण। तो एक ब्रीफ डेफिनेशन हमने अपने इसका तो ले लिया कि पर्यावरण होता क्या है? लिखाऊंगा मैं अभी। अभी केवल समझ रहे हैं। ठीक है बात? अब यह जो हमारे आसपास का पर्यावरण है, हम लोग इस पर्यावरण में जो रहते हैं, हम लोग एक दूसरे के साथ मतलब यह सारे जैविक घटक आपस में भी और ये इन अजैविक घटकों के साथ क्या करते हैं? अंतर क्रिया करते हैं।
9:41 इंटररिलेशन होता है हमारा। समझ गए? और इंटररिलेशन में हम लोग क्या करते हैं? तो लेनदेन। किस चीज का लेनदेन? जो हमको हमारे जीवन के लिए जरूरी है। जैसे कि सांस लेने के लिए आपको क्या चाहिए? ऑक्सीजन कहां से मिलेगा? वायुमंडल से। तो वायुमंडल के साथ आप क्या कर रहे हो? क्रिया कर रहे हो। हमारे साथ-साथ सारे जीव जंतुओं को भी क्या चाहिए? ऑक्सीजन। कहां से मिलेगा? वायुमंडल से। तो जीव जंतु भी किसके साथ क्रिया कर रहे हैं? वायुमंडल के साथ। पेड़ पौधों को क्या चाहिए? कार्बन डाईऑक्साइड और यह कार्बन डाइऑक्साइड कहां मिलेगा? समझ गए बात? फिर चाहे मानव हो, जीवजंतु हो, पेड़-पौधे हो, हम सबको जीवन में सबसे
10:28 ज्यादा क्या जरूरी है? जल। वो हम कहां से ले रहे हैं? जलमंडल से। तो हम सबका किसके साथ रिलेशन बन रहा है? जलमंडल के साथ। क्लियर है यहां तक बात? ये जीव-जंतु कहां रहेंगे? पेड़-पौधे किस में ग्रो होंगे? किस में उगेंगे? मानव कहां रहेगा? खेती कहां करेगा? स्थलमंडल। तो हम सब का एक कोरिलेशन या अंतर संबंध या रिलेशन किसके साथ बन रहा है? स्थलमंडल के साथ। समझ गए बात? तो हम जितने भी लिविंग ऑर्गेनिज्म है या बायोटिक कम्युनिटी जिसमें मानव, जीवजंतु, पेड़-पौधे क्या करते हैं? अपने आपस में ये लोग आपस में भी क्रिया करेंगे। कैसे करेंगे? मैं बताऊंगा। इसको यही तो खाएगा। पेड़-पौधे को कौन खाएगा? जीव-जंतु। तो
11:14 जीव-जंतु को कौन खाएगा? मानव मानव पेड़ पौधे भी खाएगा। इसलिए वो सर्वाहारी है। समझेंगे आगे हम लोग। तो ये आपस में भी एक दूसरे के साथ रिलेशन में है। क्रिया कर रहे हैं। और ये सब अजैविक घटकों के साथ भी क्या कर रहे हैं? क्रिया। यह आपस में क्रिया करके एक यूनिट एक पर्यावरण तैयार करते हैं। जिसको हम लोग बोलते हैं पारिस्थितिकी तंत्र। इकोसिस्टम। यह है एनवायरमेंट। यह है इकोसिस्टम। अब हम जो हैं वह एनवायरमेंट का पार्ट है या इकोसिस्टम का पार्ट है? तो हम इकोसिस्टम का पार्ट है। समझ गए? सभी मानव
12:01 किसी ना किसी पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। पर्यावरण का हिस्सा नहीं है। पर्यावरण तो वो फैक्टर है जो उसकी इकोसिस्टम को या उसके पारिस्थितिकी तंत्र को डिफाइन करेगा। जैसे जलवायु आप लोग देखे होंगे। एकदम कॉमन चीजें हैं सब। कोई दूसरे ग्रह से आए वाली जानकारी नहीं है। एकदम कॉमन कांसेप्ट में ले चलना है। अभी कौन सा महीना चल रहा? मतलब कौन सा मौसम चल रहा है अभी? बारिश का जाने वाला है। जब बारिश का मौसम था तो आपको अपने आसपास क्या दिखता था? बहुत सारे पेड़ पौधे, घास फूस, काइयां और बहुत सारे कीड़े मकोड़े ये दिखते थे। कितने ही प्रकार के पेड़ पौधे, घास, फूस और कीड़े मकोड़े क्या आपको गर्मियों में दिखेंगे? नहीं दिखेंगे ना। गर्मियों में
12:47 ह्यूमिडिटी, उमस ज्यादा लगता है। ठीक है। अभी देखो आप लोग सब एसी चल रहा है कि बंद है? अगर चला भी दिया जाए और अगर 25 डिग्री टेंपरेचर कर दिया जाए तो आप लोग आराम से बैठोगे। आराम से बैठोगे ना? अच्छा लग रहा है। अब थोड़ी गर्मी लग रही थी। अब थोड़ा अच्छा लग रहा है। लेकिन यही 25 डिग्री टेंपरेचर जब 2 महीने बाद आपको मिलेगा तो आप लोग जैकेट वेकेट और स्वेटर पहनने लग जाओगे। समझ रहे हो? तो धीरे-धीरे जैसे मौसम चेंज होता है, मौसम चेंज होता है तो आपके आसपास की चीजें चेंज होती हैं। आपके बॉडी का मेटाबॉलिज्म जो होता है, एक बॉडी की जो कैपेसिटी होती है वो चेंज होता है। सारी चीजें अपने आपस में क्या होती रहती है? समय के साथ-साथ चेंज होती हैं। और जो चीजें चेंज होती हैं उसको हम लोग बोलते हैं गतिशील होना। डायनामिक होना। क्या
13:33 बोलते हैं? गतिशील होना या डायनामिक होना। तो ये हमारा जो पर्यावरण है ये हमेशा क्या होता है? गतिशील होता है, डायनेमिक होता है। पर्यावरण क्या है? तो हमारे आसपास जितनी भी जैविक और अजैविक चीजें हैं, वह सब हमारा क्या है? पर्यावरण। इस पर्यावरण में हम लोग क्या करते हैं? एक दूसरे के साथ कोरिलेशन बनाते हैं। अंतर क्रिया करते हैं। और इस अंतर क्रिया से जो एक यूनिट एक इकाई तैयार होती है, उसको हम लोग क्या बोलते हैं? पारिस्थितिकी तंत्र। और इस पारिस्थितिकी तंत्र में यह जो हम लोग इंटररिलेशन बनाते हैं जो कोरिलेशन होता है हमारा आपस का संबंध यह कैसा बनता है इसी का जब साइंटिफिक वे पे वैज्ञानिक तरीके से जब हम अध्ययन करेंगे तो उसको हम लोग क्या बोलेंगे
14:18 पारिस्थितिकी समझ में आया बात लिखा दूंगा टेंशन मत लो अभी तक समझ में आया ना हमारे पूरे सब्जेक्ट का तीन कोर वर्ड है एक है पर्यावरण एक है पार पारिस्थितिकी तंत्र और तीसरा है पारिस्थितिकी। तीनों में मेन डिफरेंस समझ में आया? क्लियर है यहां तक बात? अब हमको पढ़ना क्या है? तो मैंने बोला कि हम लोग आपस में एक दूसरे के साथ कोरिलेशन में है। अंतर क्रिया कर रहे हैं। और यह अंतर क्रिया जब तक बैलेंस्ड है जब तक संतुलित है तब तक ठीक है। जब इसका संतुलन बिगड़ेगा यानी जो लेनदेन की कारवाही है यह जब बदलेगी तो प्रॉब्लम क्रिएट होगा। जैसे जीवजंतु हो, मानव हो इसको क्या इससे क्या
15:03 ले रहे हैं? ऑक्सीजन। बदले में क्या दे रहे हैं? कार्बन डाईऑक्साइड। समझ गए बात? इस कार्बन डाइऑक्साइड को लेने का काम कौन करेगा? पेड़-पौधे। और बदले में ऑक्सीजन देने का काम कौन करेगा? पेड़-पौधे। यह तब तक अच्छा था हमारा पर्यावरण। आज अच्छा है क्या? आज क्या देखते हो आप लोग? पर्यावरण के नाम पर प्रदूषण। पोल्यूशन। और पोल्यूशन का मतलब क्या होता है? इसी बैलेंस यही जो एनवायरमेंट का बैलेंस है यह जब बिगड़ता है तो बिगड़ने से क्या क्रिएट होता है? पॉल्यूशन। जैसे कि हम इससे ले रहे हैं कार्बन डाइऑक्साइड। दे रहे हैं सॉरी इससे ले रहे हैं ऑक्सीजन। दे रहे हैं कार्बन
15:48 डाइऑक्साइड। उस कार्बन डाइऑक्साइड को कौन ले रहा है? पेड़ पौधे। बदले में क्या दे रहा है? ऑक्सीजन एक बैलेंस को बनाने की कोशिश हो रही है। यह कोशिश अच्छी थी लेकिन यह इंडस्ट्रियलाइजेशन आया इकोनमी में डेवलपमेंट का विकास का जो कांसेप्ट आया अब हम लोग को अंधाधुंध विकास चाहिए। किसकी शर्त पर? अपने जीवन की शर्त पर। जैसे कि बिजली चाहिए। नहीं चाहिए। हां। तो हां बोला करो। बताया करो। मैं घबरा जाता हूं। नहीं चाहिए। बिजली नहीं चाहिए। थोड़ी देर में यह लाइट भी और यह बोर्ड सब बंद हो जाएगा। पढ़ नहीं पाओगे तो बिजली चाहिए ना। लेकिन कैसे मिलेगी? किसी हसदेव जैसे जंगल को उजाड़ा जाएगा।
16:34 अभी फिर सुना था ना आपने साल भर से छत्तीसगढ़ अपने दो-तीन हॉट टॉपिक की वजह से ट्रेंड में रहा। एक हसदेव अरण्य का उजड़ना और दूसरा यही सेम केस रायगढ़ जिले के तमनार में कोल ब्लॉक के लिए हो रहा है। तो भाई कोयला कहां दबा हुआ है? सब जंगलों के नीचे और जंगल क्यों जरूरी है? जंगल इसलिए जरूरी है क्योंकि जितना कार्बन डाइऑक्साइड दे रहे हैं, इस कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने का काम यही पेड़-पौधे करेंगे। अब हम लोग क्या कर रहे हैं? अपने डेवलपमेंट के लिए इन पेड़-पौधों को काट रहे हैं। जहां से जहां मिले वहां से पेड़-पौधे काट रहे हैं। बड़े-बड़े जंगलों को उजाड़ रहे हैं। या तो वहां इंडस्ट्री लग रही है या तो वहां कोई मानव की बसाहट आ रही है। एक और नेशनल लेवल पर इशू था। एक तेलंगाना का याद है? हैदराबाद का भी एक केस था कि हैदराबाद के
17:20 एक बड़े से बायोडायवर्सिटी वाले एरिया को मतलब जहां बहुत दुर्लभ प्रकार के जीव-जंतु पेड़ पौधे और वहां जैव विविधता है समझाऊंगा सब आगे उसको किस लिए सरकार काट रही थी क्योंकि वहां कॉलोनी बनाना था है ना रेजिडेंशियल एरिया बनाना था तो आप जब मानव अपने रहने के लिए जब जंगलों को उजाड़ेगा वहां रहने वाले जीवजंतुओं का घर तोड़ेगा तो वही रहने वाले जीवजंतु फिर कहां आएंगे मानव के पास पास और फिर वहीं से एक एक क्फ्लिक्ट चालू होता है। मेंस में आप लोगों के टॉपिक भी है मानव वन्य जीव संघर्ष और हम लोग तो भुक्त भोगी प्रदेश हैं। कोई कोरबा का है कोई रायगढ़ का है? होंगे होंगे ना रायगढ़ कोरबा डिस्ट्रिक्ट बलरामपुर तरफ के और नहीं
18:05 होंगे तो वहां जब भी न्यूज़ आती है मैक्सिमम यह रहता है कि हाथी ने कुचल दिया या हाथी ने घर तोड़ दिया या हाथी का विचरण चल रहा है तो रोड ब्लॉक हो गया आए दिन वीडियो आते रहते हैं अब तो सब देखे हो ना तो तो बस यही कहानी है कि यह बैलेंस को हम लोग बिगाड़ रहे हैं और इस बैलेंस को कैसे बिगाड़ रहे हैं सोखने वाला पेड़ पौधा जो है उसको काट रहे हैं लगातार और छोड़ने वाला जो कार्बन डाइऑक्साइड है उसकी मात्रा उसका परसेंटेज तो हमने हजार गुना बढ़ा दिया। अब हम लोग केवल सांस छोड़ के कार्बन डाइऑक्साइड नहीं दे रहे हैं। अब हम गाड़ी चला के भी कार्बन डाइऑक्साइड दे रहे हैं। हमको बिजली चाहिए कहीं पास कोयला खुदेगा और जहां कोयला खुदेगा वहां गड्ढा खुदेगा। जो रायगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोरबा डिस्ट्रिक्ट के होंगे सबसे बड़ी समस्या है पॉल्यूशन
18:53 की। जब पोल्यूटेड सिटी का लिस्ट जारी होता है पूरे भारत के लिए तो टॉप 10 में यह दोनों सिटी रहती है रायगढ़ और कोरबा और अगर वहां रहने वाले कोई जानते हो किसी को तो पूछना उनसे सुबह वाइट शर्ट पहन के निकलेंगे शाम को वापस आते तक वो ब्राउन हो जाएगा पाउडर लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती वहां सबका खर्चा बच जाता है नेचुरल पाउडर लग जाता है वाइट वाइट ट्रेन से कभी जाना हुआ या रास्ते से कभी जाओगे तो पेड़ कभी हरा नहीं दिखेगा पेड़ काला दिखेगा क्योंकि वह डस्ट जो फैक्ट्रियों से निकल रहा है। वह पत्तों पर जमा हो गया। सड़कें काली दिखेंगी। मिट्टी काली दिखेंगी। वायुमंडल मतलब जो आपका आसपास का एटमॉस्फियर है 100 प्रकार की बीमारी वाली गैसेस भी होंगी और जीवाणु विषाणु भी होंगे। बीमारी भी ज्यादा होगी, एक्सीडेंट भी ज्यादा होगा। यह
19:39 कॉजेसेस होते हैं कोयले को निकालने का। लेकिन जरूरी है ना? क्योंकि वह जब तक एनटीपीसी में जाकर जलेगा नहीं, विद्युत पैदा होगा नहीं। विद्युत पैदा होगा नहीं तो हमको नहीं मिलेगा। प्लांटों को चलने के लिए नहीं मिलेगा। ऐसे में कोई इकोनमी नहीं चल सकती। कोई भी अर्थव्यवस्था डेवलपमेंट के बिना नहीं चल सकती। और डेवलपमेंट हम जो कर रहे हैं वो किसकी शर्त पर कर रहे हैं? अभी तक तो अपनी जान की शर्त पर। अपने जीवन को दव पे लगा दिया है। समझ गए बात? क्लियर है? गाड़ी चलाना जरूरी है ना? लेकिन उस गाड़ी चलाने से आपके ऊपर क्या साइड इफेक्ट हो रहा है। यह भी तो आपको जानना जरूरी है कि कैसे आप पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हो। उसके हार्मफुल इफेक्ट क्या हो रहे हैं। अभी जस्ट यहीं निकल जाओ। दोपहर में गांधी चौक के आसपास ट्रैफिक जाम
20:26 रहेगा। अभी तो त्यौहारों का सीजन चालू हो गया है। यह गोल बाजार रोड में कहीं भी कभी भी चक्का जाम हो सकता है। कभी भी आप एकद घंटे के लिए फंस सकते हो। अचानक से होगा। अगर ऐसा हुआ नहीं है तो हो जाएगा। चिंता मत करो। जब भी ऐसी परिस्थिति में फंसोगे तो देखना थोड़ी देर बाद सांस लेने में तकलीफ होगी। है ना? थोड़ी सी आंख जलेगी। थोड़ा सा अनइजी फील होगा। क्यों फील होगा? क्योंकि वो ट्रैफिक में रुकी हुई जितनी गाड़ियां हैं सब साइलेंसर से धुआं छोड़ रही है। और वो धुआं में कार्बन मोनोऑक्साइड है, सल्फर डाइऑक्साइड है, नाइट्रस ऑक्साइड है। बहुत सारे ऐसी जहरीली गैस हैं जो आपके स्वास्थ्य के लिए शरीर के लिए क्या है? खतरा है। हानिकारक है। समझ गए बात? दमा जानते हो? तो दमा एक बीमारी होती है। है ना? किसी जमाने में अस्थमा ये
21:12 जो है मतलब आज से 202 साल पहले की बात करें तो उस समय पे यह बीमारी किसको होने वाली बीमारी थी? तो बुजुर्गों को। एक ऐज के बाद होने वाली बीमारी कहा जाता था दमा या अस्थमा को। हमने इतना ज्यादा पोल्यूशन फैलाया अपने डेवलपमेंट के लिए कि आज यह दमा जो 60 70 साल बाद होता था। आज ये बच्चों में बाय बर्थ होता है। कई बच्चे जो है वह बाय बर्थ अस्थमैटिक पैदा होते हैं। बहुत सारे प्रॉब्लम लेकर के पैदा होते हैं। किसकी वजह से? वायुमंडल की वजह से। किसने बिगाड़ा? हमने बिगाड़ा। समझ गए? पानी चाहिए सबको। लेते तो हैं। बदले में क्या दे रहे हो? अर्पा से पानी तो ले रहे हो। और अर्पा को बदले में क्या दे रहे हो?
21:58 हम आरती करते हैं सर साल में एक बार अर्पा की आरती। कुछ दे रहे हो पोल्यूशन क्योंकि आपके जितने भी घरों का कॉलोनियों का पूरे बिलासपुर सिटी का जितना भी क्या बोलते हैं सीवेज सिस्टम है नालियों की जो व्यवस्था है वो सब कहां जाकर मिल रही है अड़प्पा में ले रहे हो पानी दे रहे हो कचरा ले रहे हो कार्बन डाइऑक्साइड ले रहे हो ऑक्सीजन दे रहे हो कार्बन डाईऑक्साइड और इतना ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ दिया है हमने कि आज यही हमारे जीवन के लिए खतरा बन गया है कैसे तो जैसे जैसे बोलते हैं ना गर्मियों में काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए। क्यों नहीं पहनना चाहिए? क्योंकि वो गुड इंसुलेटर ऑफ हीट होता है। वो ऊष्मा का एक अच्छा अवशोषक होता है। ठीक उसी प्रकार अगर गैसों की बात करें तो ये जो
22:45 कार्बन डाइऑक्साइड होता है यह भी गुड इंसुलेटर ऑफ हीट होता है। मतलब ऊष्मा का अवशोषक होता है। बहुत भारी मात्रा में ऊष्मा को रोक लेता है। कौन सी ऊष्मा? जो सूर्य से आती है। कौन सी ऊष्मा जो सूर्य की रोशनी से मिलती है। उस ऊष्मा को रोक लेगा। और यह कार्बन डाइऑक्साइड एक मात्रा में जरूरी है। जग्राफी पढ़े ना आप 78% नाइट्रोजन 21% ऑक्सीजन 0.09% कार्बन डाईऑक्साइड यह लेवल अच्छा है। इस मात्रा में अगर कार्बन डाइऑक्साइड रहेगा तो यह जो पृथ्वी है जो हमारा एटमॉस्फयर है, वायुमंडल है वो एक जीवित भूमि बोलते हैं ना हम लोग। एकमात्र पृथ्वी ही ऐसा प्लेनेट है जहां लाइफ पॉसिबल है, लिविंग
23:30 पॉसिबल है, सर्वाइवल पॉसिबल है। किस वजह से? दूसरी जगह जाओगे तो या तो चट्टाने मिलेंगी, ऑक्सीजन नहीं है, पानी नहीं मिलेगा या तो दूसरी जगह जाओगे तो बर्फ मिलेगा। कोई मिटियां नहीं मिलेंगी। जहां पेड़-पौधे हो सके या जहां सांस लेने के लिए ऑक्सीजन हो सके, यहां जिंदा रहने के लिए पानी हो सके। यह सब कहां मिला? पृथ्वी पर। क्यों मिला? क्योंकि पृथ्वी ने अपना एक सेल्फ का टेंपरेचर मेंटेन करके रखा है। जग्राफी में ओजोन लेयर पढ़े हो? ओजोन पढ़े हो ना? हमने खुद का एक ओजोन लेयर भी है जो बहुत सारे हानिकारक किरणों से बचाएगा। आगे सब बताऊंगा मैं और हमने अपने एटमॉस्फेयर के टेंपरेचर को मेंटेन करके रखा है कि सब कुछ अच्छा बना रहे। अब यह टेंपरेचर बिगड़ रहा है क्योंकि जितनी भारी मात्रा में सारे फैक्ट्रियां चल रही हैं, सबको
24:17 डेवलपमेंट चाहिए, सबको सामान चाहिए, वस्तुएं चाहिए, रोजगार चाहिए, ज्यादा से ज्यादा फैक्ट्री होनी चाहिए, ज्यादा से ज्यादा क्या बोलते हैं? क्या बोलते हैं? बिजली षड्यंत्र होना चाहिए। सब तो चाहिए ना। लेकिन क्या मिल रहा है? पॉल्यूशन। उस पॉल्यूशन को दूर करने के लिए ही एक बैलेंस्ड एप्रोच अपना रही है पूरी दुनिया। क्योंकि जितनी मात्रा में हम कार्बन डाइऑक्साइड दे रहे हैं उतनी ही मात्रा में वायुमंडल जो है वह गर्म हो रहा है। वायुमंडल के गर्म होने से नॉर्थ पोल और साउथ पोल उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव इसके आसपास क्या जमा हुआ है? बर्फ ग्लेशियर जिसको बोलते हैं। और ये सारे ग्लेशियर धीरे-धीरे क्या होंगे? पिघलेंगे गर्मियों की वजह से। ग्लेशियर के पिघलने
25:03 से वाटर लेवल जो है समुद्रों का जल स्तर बढ़ जाएगा। और जब समुद्रों का जल स्तर बढ़ जाएगा तो शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन का घर डूब जाएगा। यह जो हमारा इकोनॉमिक कैपिटल है आर्थिक राजधानी देश की बंबई एक द्वीप पर है पता है आपको सालट द्वीप बोलते हैं। द्वीप पर बसाहट है और समुद्र के किनारे है। सब तो देखते हो ना? आने वाले 60 70 साल बाद इसका अस्तित्व नहीं रहेगा। घूम घूम-घूम के आना है। अभी से आ जाओ। बाद में नहीं देख पाओगे। 60 70 80 साल 100 साल बाद। क्यों? क्योंकि जिस स्पीड से ग्लोबल वार्मिंग जो बढ़ रही है उस स्पीड से ग्लेशियर पिघल रहा है। समुद्रों का जल स्तर बढ़ेगा और समुद्रों का जल स्तर जब
25:48 बढ़ेगा तो जितने भी कोस्टल एरिया में जितने भी शहर हैं केवल बंबई की बात नहीं कर रहा हूं। चेन्नई भी हो सकता है, भुवनेश्वर भी हो सकता है, उड़ीसा पूरी भी हो सकता है। छोटे-छोटे द्वीप देश हो सकते हैं। और वर्ल्ड में भी बहुत सारे ऐसे कंट्री बड़े-बड़े देश शहर हैं जो आने वाले समय पर डूब जाएंगे। जैसे द्वारिका डूब गई। लेकिन वो ग्लेशियर पिघलने की वजह से नहीं डूबा। उसका कुछ और कारण है। समझ गए बात? तो धीरे-धीरे ये जो वाटर लेवल बढ़ रहा है, उसको रोकना जरूरी है कि नहीं है? रोकना जरूरी है। आज जो वायुमंडल में प्रदूषण की वजह से लोगों को बहुत प्रकार की बीमारियां हो रही हैं। उसको रोकना जरूरी है कि नहीं है? जरूरी है। स्थलमंडल सब कुछ तो दे रहा है हमको और हम इसका कैसे
26:33 यूज कर रहे हैं? खेती किसानी करके खेती किसानी करते हैं ना। इसका एक साइड इफेक्ट देखो क्या होता है भाई सबको खेती किसानी मतलब फसलों के उत्पादन में फर्टिलाइजर जरूरी है भाई फसलों को बड़ा करने के लिए अच्छा ग्रो हो अच्छी वृद्धि हो अच्छा पैदावार हो इसके लिए क्या चाहिए फर्टिलाइजर चाहिए सब किसानों को चाहिए अब वो फर्टिलाइजर डाल रहे हैं पहले के जो ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर आते थे जिनको बोलते थे हम जैविक खाद वो जैविक खाद अब रासायनिक खादों में बदल गया केमिकल फर्टिलाइजर में बदल गया अब तो वो एक और नेक्स्ट लेवल पर आ पहुंचा है आज के जमाने पे। जैसे इंसानों में बॉडी में अचानक चेंजेस लाने के लिए जिन लोग जिम जाते हैं उन लोग देखना प्रोटीन इंटेक के लिए स्टेरॉइड का प्रयोग
27:19 करते हैं। करते हैं। अचानक से शरीर बढ़ने लगता है, फूलने लगता है, मसल्स आने लगते हैं। ऐसे स्टेरॉइड्स आते हैं। वैसे ही अचानक से कम समय में बहुत ज्यादा ग्रो करने के लिए, डेवलपमेंट के लिए। किसान भी ऐसे केमिकल का और ऐसे एस्टेरॉइड्स का प्रयोग कर रहे हैं फलों में और सब्जियों में जो उनके पकने के टाइम को क्या कर देता है? बढ़ा देता है। रात में लौकी जो था वो इतना बड़ा था किसान ने इंजेक्शन लगाया और सो गया। सुबह जब उठा तो वो लौकी इतना बड़ा था। क्योंकि रात में इंजेक्शन लग गया था। अब वो लौकी जब मार्केट में आकर के बिकेगा ना। बैलेंस तो बनाना पड़ेगा। डिमांड है। पापुलेशन बढ़ रहा है। सब देखते हो ना आप लोग। अभी देखना केला खरीद के लाओ। मौसम आ गया है। नवरात्रिवा फास्ट का ऊपर से पका
28:05 हुआ दिखेगा पूरा येलो और अंदर से कच्चा फील हुआ है ऐसा आप लोगों के साथ। अभी भी खरीदने जाओगे तो आप लोग देखना केले के दोनों तरफ का जो साइड का किनारा रहता है वह पूरा ग्रीन दिखेगा और बीच वाला जो पार्ट है वह पूरा येलो दिखेगा। ऐसे लगेगा पक गया है। तो एक केमिकल का प्रयोग करके आजकल इन फलों को पकाया जा रहा है। बहुत कम समय में ज्यादा ग्रोथ के लिए उनको बहुत सारे इंजेक्शन और बहुत सारे केमिकल दिए जा रहे हैं। और यह सब आपके फूड हैबिट के थ्रू आपके भोजन के थ्रू सीधा कहां आएगा? आपकी बॉडी में। और यह सारे जो क्या बोलते हैं? हडाजियस सब्सटेंसेस हैं। हानिकारक जितने भी पदार्थ हैं ये जब आपकी बॉडी में आते हैं तो यह क्या पैदा करेंगे? बीमारियां।
28:52 समझ गए? वो कीटनाशक होते हैं ना कीटनाशक मिलाते हैं। जैसे हम सब छत्तीसगढ़ में हैं। छत्तीसगढ़ में धान की पैदावार ज्यादा होती है और धान की पैदावार में क्या ज्यादा लगता है? पानी। तो देखना किसान खाद डालेगा, फर्टिलाइजर डालेगा और पूरे खेत को पानी से क्या कर देगा? भर देगा। अब वो खाद में वो फर्टिलाइजर में जितने भी ऑर्गेनिक चीजें हैं इनऑर्गेनिक चीजें हैं वो सब किस में घुलनशील हैं? पानी में। वो सब पानी में घुल जाएंगे। फिर वो पानी कहां चला जाएगा? अंडर ग्राउंड। भूजल स्तर पे चला जाएगा। भूजल स्तर पर ऑलरेडी क्या है? हमारे लिए पानी है। उस भूजल स्तर के पानी का अंडरग्राउंड वाटर का यूज़ हम लोग कैसे करते हैं? तो जब बोर चलाते हैं, जब बोरिंग चलाते हैं, उस तरीके से हम लोग उस पानी को फिर यूज कर रहे हैं। खेतों में हम
29:38 हज़ार्डियस केमिकल डाल रहे हैं फसलों को बढ़ाने के लिए। वो केमिकल पानी में घोल करके अंडर ग्राउंड वाटर में जाकर के नीचे की पानी में मिल गया। थोड़ी सी दूर पे उसी पानी को हम लोग बोरिंग या बोर करके निकाल ले रहे हैं और यूज़ कर रहे हैं। तो वो जो केमिकल का जो एलिमेंट कुछ ना कुछ जो उस पानी में था वो पानी के थ्रू किस में आ गया? हमारी बॉडी में। फिर बायोलॉजी में आप लोगों पानी से होने वाली बीमारियां, फंगस से होने वाली बीमारियां, वायरस से होने वाली बीमारियां, बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियां सब सुनते हैं ना हम लोग। तो ये सब किस कारण से हो रहा है? कि हमारे एनवायरमेंट का जो बैलेंस धीरे-धीरे बिगड़ रहा है। इस बिगड़ते हुए एनवायरमेंट के कारण बीमारियां हो रही हैं। ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या आ गई है। पूरा विश्व
30:24 खतरे में है। अगर इसको नहीं बचाया गया तो कुछ शहरों की बात छोड़ो। पूर्व पृथ्वी का अस्तित्व ही कुछ 100 सालों में खत्म हो जाएगा। समझ गए? अरे नहीं अभी तुरंत पृथ्वी खत्म नहीं हो रहा है। इतना उदास नहीं होना है। अभी है। आप लोग आराम से जिओगे। चिंता मत करो। क्लियर है यहां तक बात? समझ गए? एकदम बेसिक और जनरल कांसेप्ट है। यही आपका एग्जाम डिमांड करता है कि भाई क्या प्रॉब्लम क्या है? प्रदूषण क्या है? वायु प्रदूषण क्या है? थोड़ी देर पहले मैंने बताया कि ये जो रेश्यो बना हुआ है ऑक्सीजन का, नाइट्रोजन का, कार्बन डाइऑक्साइड का यह रेश्यो जब बिगड़ेगा तो पोल्यूशन होगा। है ना? जल प्रदूषण क्या है? तो जल स्वच्छ हो। जल को प्रदूषित कौन कर रहा है? हम कर रहे हैं। मृदा प्रदूषण क्या है? इतना ज्यादा खेती कर दो जमीनों में कि वो उसकी
31:12 जो फर्टिलिटी है जमीनों की जो उर्वरकता है वो खत्म हो जाए। जैसे कि पंजाब और हरियाणा। अभी तक आज तक आप लोग जग्राफी में पढ़ रहेगे कि सबसे ज्यादा फसलों के उत्पादन वाला राज्य या तो पंजाब या तो हरियाणा या तो उत्तर प्रदेश या तो वेस्ट बंगाल या बिहार ये सब ये जो नॉर्थ स्टेट है ना गंगा किनारे वाले ये सब जलोढ़ मिट्टी मिलेगी फसलों का पैदावार ज्यादा होगा सब अच्छे उस पे मिलेंगे आपको पायदान पे प्रोडक्शन के मामले में मतलब फूड स्टेट कहा जाता था पंजाब को और हरियाणा को बहुत सारे प्रोडक्शन में गेहूं में तो फर्स्ट सेकंड में कोई ना कोई रहेगा और टॉप थ्री में दोनों के दोनों रहेंगे। चावल में भी उनका नाम रहेगा। देख लीजिएगा आप लोग जब भी पढ़ोगे। तो अब उन लोग फिर आप लोग इकोनमी
31:59 में एक टर्मिनोलॉजी हम लोग पढ़ते हैं। एक इंसिडेंट पढ़ते हैं जिसको हम लोग बोलते हैं ग्रीन रिवॉल्यूशन हरित क्रांति। फसलों की पैदावार को बढ़ाने के लिए केमिकल फर्टिलाइजर है ना मशीनों का प्रयोग, उच्च किस्म के बीजों का प्रयोग सब हमने किया और कहां किया? तो प्रैक्टिकल के तौर पर हमने किया उसको पंजाब और हरियाणा में क्योंकि वहां बड़े-बड़े किसान थे। उनके पास इरीगेशन की फैसिलिटी थी। महंगे बीज खरीदने के लिए, फर्टिलाइजर खरीदने के लिए उनके पास पैसे थे। तो उस एरिया में ग्रीन रिवॉल्यूशन को प्रमोट किया गया। और उसी का रिजल्ट है कि लंबे समय तक उस समय से लेकर आज तक यह पंजाब और हरियाणा आज भी अपने प्रोडक्शन में कृषि के उत्पादन में टॉप थ्री में रहते हैं। क्योंकि उसी समय से इनको पुश अप किया गया था। लेकिन आज इनका
32:46 एक ड्रॉबक देखने को मिल रहा है। यह पर्यावरण प्रदूषण का मापन करने वाले कुछ ऑर्गेनाइजेशन हैं। इनके बारे में पढ़ेंगे हम लोग। उन ऑर्गेनाइजेशनों ने बताया कि आज पंजाब की 50% कृषि योग्य भूमि जो है वो अब मरुस्थल बन चुकी है। वो डेजर्ट में कन्वर्ट हो गई। और डेजर्ट का मतलब यह नहीं कि बालू हो दूर-दूर तक कुछ ना दिखे। ऊंट घूमता हुआ मिल जाए। उसी को डेजर्ट नहीं बोलते। यह जो बंजर भूमि वाला कांसेप्ट है कि अब वो भूमि की जो फर्टिलिटी है, उर्वरकता है वह खत्म हो चुकी है। अब उसमें कोई उत्पादन नहीं हो सकता। और यह इतनी तेजी से क्यों हो रहा है? क्योंकि इस ग्रीन रिवॉल्यूशन के फायदे को और पाने के लिए ज्यादा से ज्यादा फायदा हो कौन नहीं चाहता? तो और पाने के लिए वहां के किसान लोग कंटिन्यू खेती करते हैं। सिंचाई की व्यवस्था है तो पानी भी मिल जाता है। साल
33:33 में दो से तीन फसल ले लेते हैं। तो हमारे यहां तो उल्टा है। हमारे यहां तो हम लोग एक ही फसल ले पाते हैं। उससे ज्यादा दो और अगर दो-ती साल खेती खो गई तो चौथे साल घर के बुजुर्ग उस खेत को खाली छोड़ देते हैं। और फिर उसको बोलते हैं क्या हो गया खेत में? तो परिया पढ़ना बोलते हैं। छत्तीसगढ़ में पूछा है पीएससी ने। परिरिया पढ़ने का मतलब क्या होता है? तो खेत को बीच में कुछ समय के लिए छोड़ देना। क्यों छोड़ देना? कि फिर खेत अपने आप को अपनी उर्वरकता को दोबारा क्या करेगा? बनाएगा। अपनी फर्टिलिटी को दोबारा वो प्राप्त करेगा। तो तीन साल प्रोडक्शन करो। एक साल आराम करके अपनी उर्वरकता को बढ़ा लो। फिर तीन साल प्रोडक्शन करो। यह सिस्टम चलता है। समझ गए बात? जापान पंजाब में हरियाणा में ऐसा कोई सिस्टम नहीं। पूरे साल खेती हो रही है। दो
34:19 फसल, तीन फसल एक लिमिट तक ना जब तक फर्टिलिटी होगी तब तक वह उत्पादन देगा। फिर जब वो मिट्टी की सारी फर्टिलिटी खत्म हो जाएगी तो वो क्या हो जाएगा? बंजर। और आज पंजाब और हरियाणा की जमीनें सबसे तेजी से क्या हो रही हैं? बंजर हो रही है। समझ गए? डेजर्टिफिकेशन हो रहा है। मरुस्थलीकरण हो रहा है। इन सब को रोकने के लिए फिर सरकार क्या करेगी? नियम कानून बनाएगी। है ना? कानून बनाएगी, नियम बनाएगी। इन जीव-जंतुओं को बचाना है। बचाना है। देख लो आज बहुत सारे प्रोजेक्ट चल रहे हैं जीव-जंतुओं को बचाने के। प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीिफेंट, प्रोजेक्ट क्रोकोडाइल, कोटमी सुनार, छत्तीसगढ़ प्रोजेक्ट क्रोकोडाइल चल रहा है ना? तो प्रोजेक्ट
35:05 व्चर गिद्ध संरक्षण परियोजना बहुत सारे जानवरों को बचाने की परियोजनाएं चल रही हैं। सरकार ने इस पर्यावरण को बचाने के लिए बहुत सारे समय-समय पर कानून बनाए हैं। इस पर्यावरण को बचाने के लिए नेशनल लेवल पर और इंटरनेशनल लेवल पर ऑर्गेनाइजेशन है जो काम करता है। समझ गए? और ये ऑर्गेनाइजेशन समय-समय पर अपनी बैठक करके अपना फ्रेमवर्क तैयार करता है। अपना प्लान तैयार करता है। जैसे सीओपी के बारे में सुना है आपने? सीओपी 28 29 सीओपी 30 अभी तक नहीं सुने हो तो सुनोगे प्रीलिम्स दोगे ना इस बार तो याद करना पड़ेगा सीओपी 30 कहां हो रहा है सीओपी 30 में कौन-कौन से टारगेट तय किए गए प्रीलिम्स का मोस्ट
35:50 फेवरेट टॉपिक है सी एनवायरमेंट में ये सीओपी सीओपी मतलब कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज हर साल पूरे विश्व के देश किसी ना किसी जगह पर बैठक करते हैं। ठीक है? एक ऑर्गेनाइजेशन है जिसका नाम है यूनेप यूनाइटेड नेशन एनवायरमेंट प्रोग्राम और इस यूनेप के अधीन में सारे देश हर साल कोई ना कोई बैठक करते हैं और उस बैठक में क्या तय होता है कि पर्यावरण में आज के समय में सबसे ज्यादा जो समस्या है कौन सी प्रॉब्लम सबसे तेजी से फैल रही है किसको सबसे पहले सॉल्व करना है उन सभी फ्रेमवर्क को लेकर हर साल बैठक होती है इसको हम लोग बोलते हैं यूएफसीसी की बैठक जिसको सीओपी के नाम से जाना जाता है प्रीलिम्स पूछता है कहां हो रही है इस साल बैठा कई बार पूछा है स्टेटमेंट बना करके पूछा है सारे देश हम
36:37 पर्यावरण को बचाने के लिए क्या-क्या कर रहे हैं जैसे भारत क्या कर रहा है अगर मैं आपसे पूछूं इतनी प्रॉब्लम बताने के बाद कि भारत अपने पर्यावरण को बचाने के लिए क्या कर रहा है और भारत जो कर रहा है पूरा विश्व वही कर रहा है क्या कर रहा है विष्णुदेव सरकार बिजली बिल बढ़ा दी से और का कहत है कि पीएम सूर्य योजना का लाभ उठाएं और पीएम सूर्य योजना क्या है? तो रूफ टॉप सोलर सौर ऊर्जा है ना थोड़ी देर पहले मैंने बताया कि ऊर्जा तो चाहिए लेकिन कोयला जला के चाहिए यह जरूरी है क्या? नहीं उसका कोई ऑप्शनल वे भी हो सकता है। उसका कोई और विकल्प हो सकता है। तो एनर्जी के विकल्प के रूप में अब हमने क्या अपना रहा है? अपना रहे हैं तो सौर
37:23 ऊर्जा। अब सौर ऊर्जा से बिजली बनेगी। क्या कोयला जलेगा? नहीं। बस प्लेट टांगना पड़ेगा छत में जिसको सोलर पैनल बोलते हैं। क्या उस सोलर पैनल को लगाने के लिए कोई पेड़ काटना पड़ेगा? नहीं ना? कोई एनवायरमेंट को लॉस होगा। वहां से कोई जहरीली गैस निकलेंगी उस सोलर पैनल से। नहीं। कुल मिलाकर के ये जो कार्बन डाइऑक्साइड का जहरीली गैसों का जो निकलना था जो किससे हो रहा था? कोयलों को जलाने से। उसका एक ऑप्शन मिल गया है सौर ऊर्जा का। सूर्य तो भाई हम हमारे जीवन से ज्यादा सूर्य का जीवन है। समझ गए? जब तक मानव सभ्यता रहेगी उससे और लंबे समय तक सूर्य रहेगा। रोज सुबह सूर्य निकलेगा शाम को डूब जाएगा। यह प्रकृति का नियम है। यह चेंज नहीं होगा। तो ऐसा सोर्स जो निरंतर
38:10 कंटिन्यूटी में हमको मिलता रहे और उससे हम लोग एनर्जी पैदा कर सके। इससे अच्छा ऑप्शन और क्या हो सकता है? तो आज पूरा वर्ल्ड भारत के साथ हमारा छत्तीसगढ़ स्टेट सब किसको प्रमोट कर रहे हैं? तो ऊर्जा के ऐसे विकल्प को जो एनवायरमेंट में पॉल्यूशन नहीं फैलाते। तो एक सबसे अच्छा विकल्प सौर ऊर्जा का आ गया। फिर वो पवन चक्की देखी है आपने घूमते हुए उसको हम लोग क्या बोलते हैं? पवन ऊर्जा। चक्की घूम रहा है किससे? पवन से। विंड एनर्जी से। है ना? हवे से। तो हवा तो बहना बंद नहीं होगा। और हवे के बहने से कोई प्रोडक्शन गैसव का तो नहीं हो रहा है। कोई पोल्यूशन तो नहीं हो रहा है। तो सूर्य की रोशनी से बहते हुए पानी से बहता बहते हुए पानी में नदियों में बांधों
38:55 में हम क्या कर रहे हैं? हैडल प्रोजेक्ट लगा रहे हैं। जिसको हम लोग बोलते हैं जल विद्युत परियोजना। छत्तीसगढ़ में पढ़ोगे गंगरेल में है जल विद्युत परियोजना। हसदेव बांगो में है जल विद्युत परियोजना। और वहां से हम लोग इलेक्ट्रिसिटी पैदा कर रहे हैं। तो बहते हुए पानी से, बहती हुई हवाओं से, सूर्य की रोशनी से ऊर्जा पैदा करो। कोयले का उपयोग कम करो। कार्बन डाइऑक्साइड का प्रोडक्शन बंद करो। सरकार यही चाहती है। इसके अलावा पेट्रोलियम। दूसरा ऊर्जा का सबसे मेन स्रोत जो है हमारा वो क्या है? तो पेट्रोलियम। गाड़ियों को चलने के लिए, मशीनों को चलने के लिए डीजल और पेट्रोल चाहिए। चाहिए ना? अब ये पेट्रोलियम क्या करेगा? फिर वही ड्रेन करके निकालो, खनन करो। फिर उसको रिफाइन करो। जब दो तो गाड़ियां चलेंग
39:44 और धुआ निकलेगा। उस धुएं में क्या रहेगा? बहुत सारी जहरीली गैस। तो जैसे कोयला नहीं चाहिए वैसे ही हमको क्या नहीं चाहिए? पेट्रोलियम नहीं चाहिए। क्यों? क्योंकि वह पोल्यूशन दे रहा है। तो गाड़ी किससे चलाएं? इलेक्ट्रिक व्हीकल चलाओ। तो आज गवर्नमेंट किसको प्रमोट कर रही है? इलेक्ट्रिक व्हीकल को। जानते हो ना? बैटरी वाली गाड़ी आज हर जगह देखने को मिल रहा है और बैटरी वाली गाड़ी सस्ती क्यों मिल रही है? क्योंकि गवर्नमेंट इनको प्रमोट करने के लिए सब्सिडी दे रही है कि आप पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी खरीदने जाओगे तो एक से ₹1.5 लाख की पड़ेगी। आप इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल से चलने के लिए गाड़ी खरीदने जाओ आपको ₹00 में मिल जाएगी। वहां आपको हर महीना 45000 ₹3000 पेट्रोल में खर्च करना पड़ेगा। यहां प्लग लगाओ आठ सो जाओ। सुबह
40:29 उठो और ले निकलो सीधा रात भर चार्ज हो जाएगा। नो कॉस्ट। समझ गए बात? तो सरकार अब धीरे-धीरे यही सब काम कर रही है। हम अपने पर्यावरण को या हम नहीं हमारा राज्य, हमारा देश, ये पूरा विश्व यही सब काम कर रहे हैं कि हम लोग एनवायरमेंट को बचाने के लिए ऐसीऐसी पॉलिसी लाएं या ऐसीऐसी टेक्निक लाएं जिससे हम अपने अस्तित्व को बचा सकके। कार्बन डाइऑक्साइड का प्रोडक्शन कम करना है ना? तो कर रहे हैं। कैसे कम करके? प्रमोट करो कि कोयला ज्यादा से ज्यादा यूज ना किया जाए। पेट्रोलियम का यूज़ ना हो। यह दोनों मेजर फैक्टर हैं कार्बन डाइऑक्साइड के। इसलिए इनको क्या करना है? खतोत्साहित करना है। समझ गए? डोमिनेट करना है इनके यूज़ को। क्लियर है?
41:15 समझ में आया बात? सर। रेफ्रिजरेटर अच्छा लगता है ना? फ्रिज से ठंडा-ठंडा पानी। एसी अच्छा लगता है ना? लेकिन इसका रिजल्ट क्या मिलता है कि इनके चलने से कुछ जहरीली गैस आती हैं। इनकी मशीनों से बाहर कंप्रेसर लगा होगा। समझ गए? और वो जहरीली गैस क्या काम करती हैं? तो वो काम करती हैं ओजोन लेयर जो बना हुआ है जो हमारी पृथ्वी को रहने लायक बना के रखा है। उस ओजोन लेयर को वो क्या कर रहा है? तोड़ रहा है। डिफ्लीट कर रहा है। समझ गए? ओजोन का क्षरण हो रहा है। और ओजोन का क्षरण होगा तो क्या होगा? सूर्य से आने वाली अल्ट्रावायलेट रेज पैराबैंगनी किरणें सीधे पृथ्वी पर आएंगी और वह अल्ट्रावायलेट रेज के कारण मानव शरीर में क्या आएगा? तो कैंसर हर इंसान को कैंसर हो जाएगा। क्यों?
42:01 ओजोन के क्षरण होने के कारण तो बचना पड़ेगा। तो धीरे-धीरे इन गैसों के जो यूजेज को क्या करना है? अपने को कम करना है। यही सब हमको एनवायरमेंट में पढ़ना है। समझ गए? कल से मैं पढ़ाऊंगा आप लोगों को लिखाऊंगा भी। एनवायरमेंट, पर्यावरण, पारिस्थितिकी और कुछ नाम आते हैं कि कौन से व्यक्ति ने इस शब्द का प्रयोग पहली बार किया। किसको जनक? जैसे अर्थशास्त्र पढ़ोगे तो अर्थशास्त्र का जनक। मैथ्स पढ़ोगे तो मैथ्स का जनक। भूगोल पढ़ोगे तो भूगोल का जनक। कौन है भूगोल का जनक? अरस्तु। भूगोल ज्योग्राफी टॉलमी का नाम सुने हो? वो है कि नहीं है?
42:48 चलो हर सब्जेक्ट के अपने फादर होते हैं तो फादर ऑफ इकोलॉजी इकोलॉजी मतलब पारिस्थितिकी फादर ऑफ इकोसिस्टम या एनवायरमेंटल साइंस ऐसे करके चार पांच क्वेश्चन आ चुके हैं और चार पांच नाम ही पढ़ने हैं अपने को। समझ गए? तो चार पांच नाम हल्का डेफिनेशन किस कारण से पॉल्यूशन हो रहा है? ये हमारे जो इंटररिलेशन होते हैं वो कैसे होते हैं? कौन-कौन से फॉर्म पे होते हैं? यही सब अपने को पढ़ना है। समझ गए? हमको क्या चाहिए खाने में? खाने में क्या चाहिए? दाल भात, सब्जी, चना, पनीर, अंडा, चिकन सब
43:34 चाहिए ना? क्यों चाहिए? क्योंकि इससे आप लोगों को एनर्जी मिलती है। कौन सी एनर्जी? तो एनर्जी इनके फॉर्म पे नहीं होता। वह एनर्जी होता है प्रोटीन के फॉर्म पे, कार्बोहाइड्रेट के फॉर्म पे, फैट के फॉर्म पे होता है। तो आपको फिर सुने होंगे ना आजकल तो यही सब चलता है। आप लोग तो जानते हो एनवायरमेंट से रिलेटेड हो कि ऑयली ऑयली नहीं खाना है। मोटे हो जाएंगे। फैट ज्यादा आ जाएगा। है ना? तो तेल नहीं खाना है। किस लिए नहीं खाना है? क्योंकि फैट मिलेगा। शरीर पतला दुबला है। थोड़ा सा मसल्स चाहिए तो चना खाओ, अंडा खाओ, पनीर खाओ। क्यों खाएंगे? क्योंकि उससे प्रोटीन मिलेगा। समझ गए बात? कुछ दिक्कत आ रही है, शरीर में कुछ प्रॉब्लम है तो किसी फलाना विटामिन की कमी है। डॉक्टर के पास जाओगे तो डॉक्टर
44:21 क्या करता है? चेक करेगा। ब्लड ब्लड सैंपल लेगा। कौन सा विटामिन की कमी है और उसी विटामिन की टेबलेट आपको दे देगा। तो यह जो दवाइयों के थ्रू प्रोटीन, विटामिन और यह सब हम लोग लेते हैं, वही हमको किसके माध्यम से चाहिए? फूड के माध्यम से, खाने के माध्यम से। तो मैंने बोला ना कि हमारा कोरिलेशन होता है। जैसे मानव का पेड़ पौधों के साथ कोरिलेशन है। क्या कोरिलेशन है? कि मानव इसी पेड़-पौधे में तो भाजी, सब्जी, तरकारी जो भी वो आप दिनचर्या में हम लोग खाते हैं, वह सब कौन सी कैटेगरी में आते हैं? पेड़-पौधे। जो मांसाहारी हैं, वह मांस का प्रयोग करेंगे। उनको प्रोटीन चाहिए। चिकन में खाना है रोज उबाल के। तो कौन सी कैटेगरी में आएंगे? जीव-जंतु के। हमारा कोरिलेशन इनके साथ हो रहा है ना? समझ गए? कौन सी चीजें लेना
45:07 चाहते हैं हम लोग? कार्बनिक पदार्थ। क्या बोलेंगे? कार्बनिक पदार्थ। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, फैट, मिनरल्स सब कहां से मिलेंगे? पेड़-पौधे से। समझ गए बात? और बाकी चीजें कहां से मिलेंगी? जीव-जंतु से। तो, यह एक हमारा कोरिलेशन हो गया। इनको भी तो खाना चाहिए। हमको सबको खाना देने का काम मानव हो या जीव जंतु हो सबको खाना देने का काम कौन करता है? पेड़ पौधे। और पेड़ पौधे कैसे करते हैं? तो छवी क्लास में पढ़ा था हमने प्रकाश संश्लेषण की क्रिया फोटोसिंथेसिस कि सूर्य की रोशनी, कार्बन डाइऑक्साइड, पानी सबके प्रयोग से पेड़-पौधे स्वयं के लिए खाना बनाते हैं। और खाना बनाते हैं तो ये लोग क्या करते हैं? कार्बन डाइऑक्साइड
45:53 जो लेते हैं उसको ये लोग चेंज कर देते हैं। किस में? कार्बोहाइड्रेट में। किस में चेंज कर देते हैं? कार्बोहाइड्रेट में। और वही कार्बोहाइड्रेट को खा के हम अपने लिए क्या बनाते हैं? प्रोटीन। और अपने लिए क्या बनाते हैं? विटामिन। इसी जीव-जंतुओं को खा के हमको क्या मिलेगा? प्रोटीन। और हमको क्या मिलेगा? फैट। तो हमको जो खाने में चाहिए वो हमको चाहिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, मिनरल्स। इन सबको कौन सी कैटेगरी में रखा गया है? तो कार्बनिक पदार्थ ऑर्गेनिक सब्सटेंसेस समझ गए बात पेड़ पौधों को क्या चाहिए प्रोटीन विटामिन नहीं चाहिए इनको इनको क्या चाहिए तो पहले चाहिए पानी ठीक है पानी के साथ इनको क्या चाहिए तो यह जो किसान खाद डालते हैं उसमें एक नाम लिखा
46:41 होता है कभी भी देखना डीएपी या कई जगह लिखा होगा एनपीके यह जानते हो एनपीके एनपीके क्या है तो एन से नाइट्रोजन पी से फास्फोरस और के से पोटेशियम। तो हमको जैसे विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स, फैट चाहिए वैसे ही पेड़ पौधों को क्या चाहिए? तो उनको चाहिए नाइट्रोजन, उनको चाहिए फास्फोरस और उनको चाहिए पोटेशियम पोटाश के रूप में। समझ गए बात? तो ये जो पेड़-पौधों को चाहिए उनको हम लोग बोलते हैं अकार्बनिक पदार्थ। क्या बोलते हैं? अकार्बनिक पदार्थ इनऑर्गेनिक सब्सटेंसेस। तो हमारे बीच किन चीजों का लेनदेन होता है? कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों का। और वही कार्बनिक
47:28 और अकार्बनिक पदार्थों के प्रयोग से हम अपने आप को जिंदा रखते हैं। हम समय-समय पर ग्रो करते हैं, डेवलपमेंट करते हैं और अपने आसपास एक क्या बना देते हैं? इकोसिस्टम। क्या बना देते हैं? इकोसिस्टम। जैसा कि एक किसान ने बंजर भूमि को हल से जोता। हल से जोतने के बाद कुछ उसमें फूलों के बीज लगा दिए। फूलों से बीज लगा के उसको पानी दे दिया। अब कुछ समय बाद फूल होगा। अब भौरा भी तो वह ले नहीं आएगा ना कि चलो फूल हो गया। भौरे को लाकर के छोड़ेगा। यह किसान नहीं करेगा। जैसे ही वह फूल आएगा भौरे अपने आप फूलों के पास आएंगे। उनका परागरण करेंगे। शहद बनाएंगे। है ना? और बायोलॉजी में तो हम लोगों ने पढ़ा है कि पेड़-पौधे अपनी संख्या कैसे बढ़ाते हैं? तो उसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
48:14 यह तितलियां ये भौरे जो परागण करते हैं जो जाकर के फूलों से पराग लेते हैं दूसरी जगह जाकर के दूसरे फूलों में छोड़ देते हैं। ऐसा करके ही इनकी संख्या बढ़ती है। बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तो किसी ने केवल फूल लगा फूल का पेड़ लगा दिया। पेड़ लगाने के बाद जब फूल होगा तो भौरा अपने आप आएगा। परागण की क्रिया होगी। उस एक पेड़ से कई सारे पेड़ और दूसरी दूसरी जगह पर होंगे। साथ में शहद बनेगा। एक पूरा स्ट्रक्चरल क्या तैयार हो गया? तो यूनिट एक क्रियात्मक इकाई तैयार हो गई। होती है ना? अभी किसानों ने सब्जी लगा दी बरसात में। अभी जब सब्जी सब लगी हुई है। जब खेत जाएगा किसान तो तितलियां घूमते हुए, जानवर घूमते हुए, उन सब्जियों को खाने वाले, कीट घूमते हुए ये सब हमको क्या मिलेंगे? दिख
49:01 जाएंगे। तो सब आपस में एक दूसरे से क्रिया करते हुए एक यूनिट तैयार करते हैं। समझ गए बात? तो इन्हीं तीन चीजों को समझना है। इसके बारे में मतलब प्रकार क्या हो सकते हैं? इनको डिसाइड कैसे होता है? यह डिसाइड इसलिए होता है क्योंकि ये पर्यावरण हमारा रहना, खाना, कपड़ा पहनना सब डिसाइड करता है। और सब कैसे डिसाइड करता है? तो हम जो कपड़ा पहनते हैं, कश्मीर के लोग भी क्या वही कपड़ा पहनते हैं? नहीं। जो कश्मीर के लोग पहनते हैं, वह हम पहनते हैं क्या? नहीं। क्योंकि वहां की क्लाइमेट वहां की जलवायु ठंडी होती है। ठंडी जलवायु के कारण वहां ठंड ज्यादा होता है। टेंपरेचर कम तो वहां के लोग मोटे कपड़े पहनते हैं। पूरे ढके हुए मोटे कपड़े वूलन कपड़े पहनते हैं। उनो के हमको नहीं चाहिए। हमारे यहां बर्फ नहीं जमती। हमको ठंडा नहीं लगता। और साउथ
49:46 में जाओगे तो वहां कपड़े और पतले हो जाते हैं। प्योर सूती के और पतले-पतले कपड़े हो जाते हैं। क्योंकि वहां गर्मी ज्यादा होती है। समझ गए बात? तो यही जलवायु हमारे पोशाकों को पहनने के तरीकों को डिसाइड करेगा। हम खाना क्या खाएंगे? किस तरीके का खाएंगे? यह भी कौन डिसाइड करता है? हमारा एनवायरमेंट। एक गिलास लस्सी पीने के बाद खाना खाने बोलूंगा तो खा पाओगे। कुछ लोग खा देंगे सर मैं तो खा दूंगा। मैक्सिमम लोग आप लोग क्या बोलोगे? नहीं। पंजाब, हरियाणा इन जगह पर खाने का ट्रेंड है कि खाने से पहले लस्सी चाहिए या खाने के बाद लस्सी चाहिए। और ऐसी लस्सी कि उनका गिलास आप तीन दिन पियोगे फ्रिज में रख रख के थोड़ा सा कल थोड़ा सा उधर समझ गए बड़ी-बड़ी गिलास में लस्सी पिएंगे फिर खाएंगे वो नाश्ते में 10-10 रोटियां खा लेते हैं। आप लोग तीन
50:32 दिन में खा पाओगे उनकी रोटी इतनी मोटी मोटी होती है। इतना ज्यादा घी का वो लोग यूज़ करते हैं। तो वहां के खाने का ट्रेडिशन छत्तीसगढ़ के लोग क्या खाएंगे? भात खाएंगे। हम लोग क्या खाएंगे? भात। भात खाते हैं ना? तो चावल का यूज़ हम लोग ज्यादा करेंगे। तो हमारे खाने का पैटर्न अलग है। उनके खाने का पैटर्न अलग है। हमको भात नहीं दोगे तो छटपटा जाएंगे। नींद नहीं आएगी। भात खाए बिना नींद नहीं आए यार। बोलते हैं फिर बोलते हैं ना उनको रोटी नहीं दो। उनकी हालत खराब हो जाएगी। समझ गए? तो सबके अपनी खाने की हैबिट वहां का क्लाइमेट वहां की जलवायु डिसाइड कर रही है। वहां की जलवायु, वहां का क्लाइमेट किसके ऊपर डिपेंडेंट है? वहां के एनवायरमेंट का एक पार्ट है और वही एनवायरमेंट फिर अपने क्षेत्र में अलग-अलग
51:18 क्षेत्र में अपने लोगों को क्या कर रहा है? प्रभावित कर रहा है। इफेक्ट कर रहा है। कर रहा है ना? आपका मौसम आपको इफेक्ट करता है। आपके आसपास की चीजें आपको इफेक्ट करती हैं। वही सब क्या कहलाता है? तो पर्यावरण। बेसिक कांसेप्ट यही सब अपने को पढ़ना है। क्लियर है बात? समझ गए? थोड़ा सा जग्राफी का कांसेप्ट, थोड़ा सा साइंस का कांसेप्ट, एनवायरमेंट का स्वयं का अपना कुछ शब्दावली कुछ चीजें हैं। शॉर्ट क्लास रहेगी 15 से 20 दिनों की। सारे इंपॉर्टेंट चीजों को पढ़ेंगे अपन। क्लियर है यहां तक? दिमाग का नस थोड़ा हिला कि होगा क्या आने वाले 101 दिन। समझ गए? चलो फिर आगे की क्लास कल से। आज के लिए इतना ही। थैंक यू सो मच।