NCERT | CBSE | Class - 11 | भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार | संविधान-क्यों और कैसे | प्रश्नावली

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो संविधान के कार्यों, प्रमाणिकता और निर्माण पर केंद्रित है। इसमें संविधान के महत्व, सरकार के विभिन्न अंगों के बीच शक्तियों के वितरण, और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। वीडियो में यह भी बताया गया है कि संविधान जनता की आशाओं और आकांक्षाओं का केंद्र है, और यह सुनिश्चित करता है कि सत्ता में अच्छे लोग आएं।

  • संविधान नागरिकों के अधिकारों की गारंटी देता है और सरकार की शक्तियों को सीमित करता है।
  • संविधान जनता की आशाओं और आकांक्षाओं का केंद्र है।
  • संविधान में शक्तियों और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है ताकि कोई भी संस्था तानाशाही न बन जाए।

संविधान का कार्य

संविधान नागरिकों को अधिकार की गारंटी देता है, शासन की विभिन्न शाखाओं की शक्तियों को अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित करता है, और मूल्यों की अभिव्यक्ति करता है। संविधान यह सुनिश्चित नहीं करता है कि सत्ता में अच्छे लोग आएं, क्योंकि यह जिम्मेदारी नागरिकों की है कि वे जागरूक होकर वोट दें और योग्य उम्मीदवारों का चुनाव करें।

संविधान की प्रमाणिकता

संविधान की प्रमाणिकता संसद से अधिक है क्योंकि संविधान यह बताता है कि संसद कैसे बनाई जाए और उसे कौन-कौन सी शक्तियां प्राप्त होंगी। संविधान सरकार के गठन और उसकी शक्तियों के बारे में एक लिखित दस्तावेज है। यह लोकतांत्रिक और गैर-लोकतांत्रिक दोनों देशों में होता है, और यह आदर्शों और मूल्यों का ध्यान रखता है। संविधान नागरिकों को एक नई पहचान देता है।

संविधान सभा में जनता का प्रतिनिधित्व

संविधान सभा में भारतीय जनता का प्रतिनिधित्व था, क्योंकि इसका निर्वाचन चुनावों द्वारा हुआ था और इसमें लोकप्रिय नेता शामिल थे जो जनता की आशाओं से वाकिफ थे। संविधान बनाने की प्रक्रिया में कई बड़े फैसले लिए गए, और नेताओं के बीच स्वतंत्रता, समानता और नागरिक अधिकारों जैसे बुनियादी सिद्धांतों पर सहमति थी। संविधान में मौलिकता है, क्योंकि इसमें अन्य देशों के संविधानों से अच्छी बातों को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाया गया है।

संविधान निर्माण में नेताओं का विश्वास

संविधान का निर्माण विश्वसनीय नेताओं द्वारा हुआ, जिनके लिए जनता के मन में आदर था। संविधान ने शक्तियों का बंटवारा इस तरह किया कि इसमें संतुलन बना रहे, और कोई भी अंग इतना शक्तिशाली न हो कि वह संविधान का अतिक्रमण कर सके। संविधान जनता की आशाओं और आकांक्षाओं का केंद्र है, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों का प्रावधान करता है, नीति निर्देशक तत्वों का समावेश करता है, और सार्वभौमिक मताधिकार प्रदान करता है।

शक्तियों और जिम्मेदारियों का निर्धारण

संविधान में शक्तियों और जिम्मेदारियों का साफ-साफ निर्धारण इसलिए जरूरी है ताकि संस्थाएं तानाशाही न बन जाएं और संविधान के मूल ढांचे को नष्ट न कर दें। शक्तियों का अलग-अलग निर्धारण होने से सभी संस्थाएं अपना कार्य सुचारू ढंग से करती हैं और एक दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करती हैं। यदि कोई एक संस्था संविधान का अतिक्रमण करती है, तो दूसरी संस्था उस पर नियंत्रण स्थापित करती है।

शासकों की सीमा का निर्धारण

शासकों की सीमा का निर्धारण करना संविधान के लिए इसलिए जरूरी है ताकि सरकार कोई अन्यायपूर्ण कानून न बना सके और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करती रहे। संविधान सरकार पर नियंत्रण रखता है, मौलिक अधिकार देता है, और न्यायालय को सरकार के अवैध निर्णयों को रद्द करने का अधिकार देता है। लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध संविधान नागरिकों को अधिकार देता है।

जापान का संविधान

जब कोई राष्ट्र किसी अन्य देश के कब्जे में होता है, तो स्वयं की अपेक्षाओं के अनुरूप संविधान बनाना मुश्किल होता है। ऐसे संविधान में शासन राष्ट्र के हितों का अधिक ध्यान रखा जाता है। भारत का संविधान भारतीयों द्वारा चुनी गई संविधान सभा द्वारा बना है, और इस पर किसी तरह का अंग्रेजी सरकार का दबाव नहीं था।

संविधान की प्रासंगिकता

भारतीय संविधान में लचीलेपन का गुण है, इसलिए बदलते परिस्थितियों के साथ बदलाव के कारण यह आज भी प्रासंगिक है। संविधान सभा संपूर्ण देश का प्रतिनिधित्व कर रही थी, इसलिए यह हमारा भी प्रतिनिधित्व कर रही थी।

संविधान की सफलता

भारतीय संविधान एक लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान करने में सफल रहा है, क्योंकि यह शक्ति जनता को प्रदान करता है, नियमित अंतराल में चुनाव होते हैं, सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास किया गया है, और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। संविधान में स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सुनिश्चित करने का वादा किया गया है, लेकिन आज भी असमानता व्याप्त है और सांप्रदायिक दंगे होते हैं। हालांकि, शिक्षा में बढ़ोतरी हुई है, देश के विकास में प्रगति आई है, और कृषि की तकनीक उन्नत हुई है। संविधान असफल नहीं हुआ है, बल्कि हमने उसे असफल बनाया है, क्योंकि जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर मतदान हम ही करते हैं, दागी नेताओं को समर्थन देने वाले भी हम ही हैं, और सामाजिक स्तर पर भेदभाव सामान्य लोगों द्वारा ही किया जाता है।

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Transcript

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0:00 बच्चों पिछले वीडियो में अपने संविधान के बड़े में जाना संविधान की क्यों आवश्यकता है यह अपने जाना है किसी भी देश के लिए संविधान उसके बुनियादी पहचान होता है फिर अपन ने ये जाना की भारतीय संविधान बनाने के लिए हमारी संविधान सभा का चुनाव किस तरह से हुआ था किस तरह हमारी संविधान सभा की कार्यशाली रही और हमारी संविधान सभा ने एक इतने सुंदर संविधान का निर्माण किया जो की बहुत उपयुक्त है हमारी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के लिए अब अपन ले लेते हैं इस चैप्टर के क्वेश्चन आंसर्स यानी की प्रस्ताव प्रश्नावली अपन बढ़ते हैं इस चैप्टर की प्रश्नावली की और प्रश्नोत्तरी की और देखते हैं पहले प्रश्न इसमें से कौन सा संविधान का कार्य नहीं है नीचे हमें

0:46 कार्य दिए हुए हैं की इनमें से कौन सा कार्य है जो संविधान नहीं करता है पहले यह नागरिकों को अधिकार की गारंटी देता है बेशक यह कार्य संविधान करता है हमारा संविधान हमें मूल अधिकार देता है हमारी अधिकारों की रक्षा होगी इस बात की गारंटी देता है यह शासन की विभिन्न शाखों की शक्तियों के अलग-अलग क्षेत्र का रेखन करता है बिल्कुल करता है अपने पढ़ा था अपने चैप्टर में जैसे की हमारा भी संविधान सरकार की तीनों अंग हैं कार्यपालिका व्यवस्थापिका न्यायपालिका उनमें शक्तियों का बंटवारा करता है यह सुनिश्चित करता है की सत्ता में अच्छे लोग आए ये कम संविधान नहीं कर सकता की सत्ता में अच्छे लोग आए

1:31 यह कम तो हमें ही करना होगा हम वोट देते हुए जागरूक होकर वोट दें अच्छे लोगों को वोट दे योग्यता देखकर वोट दें ना की किसी की जाति धर्म और संप्रदाय को देखकर वोट दें तो यह कम संविधान का नहीं है तो इसका आंसर यह हो जाएगा की संविधान यह सुनिश्चित नहीं करता की सत्ता में अच्छे लोग की अभिव्यक्ति करता है निसंदेह मूल्य की अभिव्यक्ति करता है यह वाला कम संविधान नहीं है तो इस क्वेश्चन का सही आंसर यह हो जाएगा की यह सुनिश्चित करता है की सत्ता में अच्छे लोग आए दूसरा क्वेश्चन देखते हैं निम्नलिखित में से कौन सा कथन इस बात की एक बेहतर दलील है की संविधान की प्रमाणिकता सांसद से ज्यादा है की संविधान है वो सांसद से ज्यादा प्रमाणिक है यानी

2:19 की सांसद से ऊपर है संविधान तो देखते हैं दलील सांसद के अस्तित्व में आने से कहानी पहले संविधान बनाया जा चुका था संविधान के निर्माता सांसद के सदस्यों से कहानी ज्यादा बड़े नेता थे यह तो कोई बात नहीं हुई संविधानी ये बताता है की सांसद कैसे बनाई जाए और इसे कौन-कौन सी शक्तियां प्राप्त होगी सांसद संविधान का संशोधन नहीं कर शक्ति तो इसमें ये वाला उत्तर सही हो जाएगा की संविधानी ये बताता है की सांसद कैसे बनाई जाए और कौन-कौन सी शक्तियां इसको प्राप्त होगी इसका निर्धारण कहां होता है संविधान में होता है तो यह है बेहतर दलील क्वेश्चन नंबर 3 देखते हैं बताइए उनके संविधान के बड़े में निम्नलिखित कथन सही है या गलत है गलत या सही बताना है अपन को सरकार के गठन और उसकी

3:07 शक्तियों के बड़े में संविधान एक लिखित दस्तावेज है बिल्कुल सही बात है की सरकार के गठन और उसके शक्तियों के बड़े में संविधान हमें जानकारी देता है लिखित रूप में देता है संविधान सिर्फ लोकतांत्रिक देश में होता है और उसकी जरूर ऐसे ही देश में होती है ये कथन गलत है अपने देखा भी था की जिन देश में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था नहीं है वहां पर भी संविधान होता है और वो इस तरह का संविधान निर्माण करते हैं की वो अपने जो देश की शासन व्यवस्था है उसको लोकतांत्रिक साबित करते हैं बस संविधान एक कानूनी दस्तावेज है और आदर्श और मूल्य से इसका कोई सरोकार नहीं ये भी पूर्णतया गलत कथन है संविधान आदर्श और मूल्य का ध्यान रखना है संविधान एक नागरिक

3:54 को नई पहचान देता है यह बिल्कुल सही बात है की बुनियादी पहचान हमारा संविधान हमें देता है एक राष्ट्र के नागरिक के रूप में एक देश के नागरिक के रूप में अगला क्वेश्चन लेते हैं भारतीय संविधान के निर्माण के बड़े में लिखित अनुमान सही है या नहीं उत्तर बताइए करण बताना है उत्तर का संविधान सभा में भारतीय जनता की नुमाइंदगी नहीं हुई इसका निर्वाचन सभी नागरिकों द्वारा नहीं हुआ था ये बात ये कथन गलत है क्यों नहीं हुई थी नुमाइंदा के संविधान सभा का हमारा जब चयन हुआ था तो हम सभी ने देखा की संविधान सभा है वो चावन के द्वारा चुन्नी गई थी और संविधान सभा के अंतर्गत सारे के सारे जो भी नेता थे वह लोकप्रिय नेता थे राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े हुए थे और वो जनता की

4:39 महत्वाकांक्षाओं को जनता की आशाओं से वाकिफ थे और उन्हें आशाओं को मध्य नजर रखते हुए उन्होंने संविधान का निर्माण किया था दूसरा संविधान बनाने की भीम में कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया क्योंकि उसे समय नेताओं के बीच संविधान की बुनियादी रेखाओं के बड़े में आम सहमति थी हां यह बात सही है संविधान के नेताओं के बीच में बुनियादी सहमति थी लेकिन फिर भी कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया ऐसा अपन नहीं का सकते बहुत सारे बड़े-बड़े फैसला लिए गए केवल एक बात की सार्वभौमिक व्यस्त बता दी कर वाला जो बात है केवल उसको बिना किसी वाद-विवाद के विचार विमर्श के स्वीकार किया गया बाकी अन्य सभी फसलों पर बड़ा विचार विमर्श हुआ बड़ा वाद विवाद हुआ यह आम सहमति

5:27 सिद्धांतों और मूल्य पर थी की हमें स्वतंत्रता को सर्वोपरि रखना है सामान्य को सर्वोपरि रखना है नागरिक अधिकारों को सर्वोपरि रखना है हमारी शासन व्यवस्था को न्याय पूर्ण बनाना है इन बटन पर सहमति थी लेकिन फिर भी बहुत बड़े-बड़े फैसला लिए गए तो यह कथन गलत हो जाता है संविधान में कोई मौलिकता नहीं है क्योंकि इसका अधिकांश हिस्सा दूसरे देश से लिया गया है इस पर भी अपन ने जब यह चैप्टर पढ़ा था बहुत बड़ा विचार विमर्श किया था निसंदेह हमारे संविधान में अन्य देश के संविधानों से बहुत साड़ी बटन को शामिल किया गया है बहुत साड़ी अच्छी-अच्छी बटन को लिया गया है लेकिन इसका यह मतलब कदापि नहीं है की हमारे संविधान में मौलिकता नहीं है हमारे संविधान में जिन बटन को अपनाया गया वह

6:13 भारतीय परिस्थितियों को भारतीय अपन कहे की नाग जनसंख्या को मध्य नजर रखते हुए भारतीय समस्या और परेशानियां को देखते हुए कुछ बदलाव के साथ हमने स्वीकार किया यूं का यूं हमने कॉपी पेस्ट नहीं किया तो इसका मतलब मौलिकता है निसंदेह हमने दूसरे संविधानों से शिखा उनके अनुभवों से हमने प्रेरणा ली लेकिन मौलिकता का भाव है ये बात कहना गलत है अगला क्वेश्चन लेते हैं भारतीय संविधान के बड़े में निम्नलिखित प्रत्येक निष्कर्ष की पुष्टि में दो उदाहरण देने हैं पहले निष्कर्ष यह है की संविधान का निर्माण विश्वास नेताओं द्वारा हुआ इसके लिए जनता के मां में आधार था यह एक कथन है इस कथन की इस निष्कर्ष की पुष्टि में अपन को उदाहरण देते हैं देखिए संविधान सभा के अधिक बड़े नेता भारतीय

7:01 राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने वाले नेता थे और वह लोकप्रिय नेता थे इसकी बात तो अपन बार-बार कर चुके हैं की हमारी संविधान सभा को बनाने वाले नेता थे ना वो बेहद लोकप्रिय नेता थे जनता उनको पसंद करती थी वो जनता के अधिकारों की बात करते थे जनता के मूल्य की बात करते थे इन नेताओं के अथक परिश्रम और संघर्ष से ही हमें आजादी मिली है ये वो नेता थे जिन्होंने हमें आजादी दिलाई जिन्होंने हमें विदेशी शासन से मुक्ति दिलाई इसलिए इनके प्रति जनता के मां में विश्वास था तो यह बात सही है की संविधान का निर्माण विश्वसनीय नेताओं द्वारा हुआ और जनता के मां में उनके प्रति आधार था बेहद सम्मान था क्योंकि सीधी सी

7:48 बात है जिन लोगों ने उनको गुलामी से मुक्ति दिलाई उनके प्रति क्या सम्मान नहीं होगा मां में दूसरा कथन लेते हैं संविधान ने शक्तियों का बंटवारा इस तरह किया की इसमें तो फिर मुश्किल है यह कथन भी पूर्णतया सही है संविधान ने अवरोध और शक्ति के संतुलन के सिद्धांत का पालनपुर किया है और तीनों अंग कार्यपालिका विधायक का और न्यायपालिका में शक्तियों का बंटवारा इस प्रकार किया है की यदि कोई एक अंग संविधान का अतिक्रमण करने का प्रयास करता है तो दूसरा अंग है वो उसे पर अपन कहें की नियंत्रण स्थापित कर लेट है जैसे की हमारी विधायक है वह कार्य पालिका पर नियंत्रण करती है करों को प्रस्ताव के द्वारा या फिर अन्य किसी भी बहुत सारे ऐसे

8:34 प्रस्ताव हैं सुनने कल है तो इनके मध्य से विभिन्न प्रश्न वो रखती है जो कार्यपालिका कम कर रही है जो कानून बना रही है उनकी ऊपर वह सवाल उठाती है उनका पक्ष विपक्ष देखते है तो बहुत सारे त्रिकोण से जैसे की विश्वास प्रस्ताव लाना है तो बहुत सारे त्रिकोण से हमारी व्यवस्थापिका कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है व्यवस्थापिका द्वारा कोई पारित किया गया कानून उसमें चिंतन रखती है न्यायपालिका न्यायपालिका है वह न्यायिक पुनरावलोकन का जो उसके पास अधिकार है उसके तहत वह उन बनाए हुए कानून और नियमों का एक तरह से प्रिया वृक्षण कर लेती है अगर संविधानिक ढांचे के अनुरूप कोई कानून नहीं है तो न्यायपालिका उसको रेड भी कर शक्ति है या

9:19 फिर उसका कोई एक भाग ऐसा है जो की संवैधानिक ढांचे के अनुरूप नहीं है तो उसे भाग को सुनने कर शक्ति है यानी की कोई भी अंग इतना बी अधिक शक्तिशाली नहीं है सभी एक दूसरे की शक्तियों का संतुलन करते रहते हैं अगला कथन है संविधान जनता की आशा और आकांक्षाओं का केंद्र है हमारा संविधान है वो जनता की आशाओं को पूरा करता है आकांक्षाओं को पूरा करता है कौन सी आशाएं कौन सी आकांक्षाएं जब हम विदेशी शक्ति के गुलाम थे जब हम ब्रिटिश का शासन हम पर था उसे वक्त क्या आकांक्षाएं रही होगी जनता की क्या चाहती होगी जनता हर राष्ट्र की स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र की नागरिक बने उसके अधिकारों की रक्षा हो

10:05 उसको कुछ मूल अधिकार मिले अपने निर्णय वो स्वयं ले पाएं कुछ समाज में विकास हो कुछ उत्पीड़न वर्ग है उसने यह सोचा होगा की उसको भेदभाव से मुक्ति मिले तो क्या इन आकांक्षाओं को पूरा कर पाया हमारा संविधान देखते हैं देखिए हमारे संविधान ने मौलिक अधिकारों का प्रावधान किया जैसे की मैंने पहले भी बताया था वर्तमान में छह मूल अधिकार हैं जो की जनता के अधिकारों को की रक्षा करते हैं जनता को स्वतंत्रता का अधिकार है सामान्य का अधिकार है शोषण के विरुद्ध अधिकार है धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार है और सबसे महत्वपूर्ण अधिकार जिसको संविधान की आत्मा कहा है डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने संविधानिक उपचारों का अधिकार

10:52 यह वाला अधिकार हमें गारंटी देता है की हमारे मूल अधिकारों की रक्षा होगी हुई ना जनता की आकांक्षा की पुरी की उसको अधिकार मिले और वह भी गारंटी के साथ की कोई उसके लिए मूल अधिकार उससे छन नहीं सकता है जितेंद्रदेशक तत्वों का समावेश हमारे संविधान के भाग कर में नीति निर्देशक तत्व हैं जो की राज्य को सरकार को ये निर्देश देते हैं की उसे किस प्रकार से कार्य करने चाहिए ताकि वो एक लोक कल्याणकारी शासन की स्थापना कर सकें तो इन नितिन निर्देशों के तत्वों के मध्य से सरकार को एक तरह से निर्देशन मिलता है एक मार्ग प्रशांत होता है सार्वभौमिक मताधिकार हमें प्राप्त हुआ

11:39 यानी की हमें हमारी जनता हमें हमारी सरकार चुन्नी का अधिकार हमें हमारे प्रतिनिधियों के मध्य से अपनी सत्ता स्वयं संभालने का अधिकार हमारा खुद का राज हो हमारा खुद का शासन हो तो यह हमारा खुद का शासन मिला कौन से अधिकार के द्वारा सार्वभौमिक वयस्क बताधिकार के द्वारा निष्पक्ष चुनाव प्रणाली निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को अपनाया हमने आगे हम पढ़ेंगे चुनाव और प्रतिनिधित्व वाले चैप्टर के अंतर्गत की निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के लिए क्या-क्या प्रावधान है हमारे संविधान में किस तरह से चुनाव आयोग का गठन किया गया है तो इन साड़ी बटन का निर्धारण करके हमारा संविधान

12:26 है वो जनता की आकांक्षाओं और आशाओं का केंद्र है अगला क्वेश्चन लेते हैं किसी देश के लिए संविधान में शक्तियों और जिम्मेदारियां का साफ-साफ निर्धारण क्यों जरूरी है अगर ऐसा नहीं होगा तो क्या होगा मतलब की संविधान में क्यों जरूरी है की वह शक्तियों का और जिम्मेदारियां का निर्धारण साफ-साफ अलग-अलग अंगों में कर दे अगर ऐसा नहीं कर पाया संविधान तो क्या हो जाएगा देख लेते हैं अपन अलग-अलग निर्धारण इसलिए जरूरी है के संस्थाएं शक्तियों के पालनपुर में तन सा है ना बन जाए मतलब की कोई भी एक संस्था है वह तानाशाही ना बन जाए वो संविधान से अपने आप को ऊपर ना समझना ग जाए

13:11 और संविधानिक ढांचे को ही समाप्त ना कर दें कोई एक संस्था शक्तियों का दुरुपयोग करके संविधान के मूल ढांचे को नष्ट कर शक्ति है इसलिए शक्तियों और जिम्मेदारियां का साफ-साफ निर्धारण आवश्यक है की कोई भी संस्था है वह संविधान के मूल ढांचे को नष्ट ना कर दे सत्ता के लाभ में सभी संस्थाएं अपना अपना कार्य सुचारू ढंग से करें और एक दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप ना करें देखिए शक्तियों का और जिम्मेदारियां का जब अलग-अलग निर्धारण होगा तो सभी संस्थाओं को ये बात स्पष्ट होगी की उनके कौन से कार्य हैं और उनके कौन से कार्य नहीं है तो सभी संस्थाएं अपना अपना कम करेंगे और एक दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे कोई एक संस्था संविधान का अतिक्रमण करें तो दूसरी

13:59 संस्था उसे पर नियंत्रण स्थापित करें संस्था तो दूसरी संस्था उसे पर नियंत्रण स्थापित कर लेती है तो यह सब कैसे हुआ तो यह देखिए की संविधान में अगर मां लीजिए अब अपन इस वाली बात पर चर्चा कर लेते हैं की मां लीजिए इस तरह का निर्धारण नहीं किया हुआ है किसी भी संस्था को यह नहीं पता की उसके कार्य कौन से हैं और उसके कार्य कौन-कौन से नहीं है तो सबसे पहले तो यही लड़ाई हो जाएगी की संस्थाओं में आपस में इस बात पर झगड़ा हो सकता है आपस में एक दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप हो सकता है की उनकी शक्तियों का बंटवारा वह कैसे करें यहां पास में क्योंकि हर कोई संस्था ज्यादा शक्तिशाली बन्ना चाहेगी और दूसरी बात कोई एक संस्था मजबूत होकर संविधान के ढांचे को भी नष्ट कर शक्ति है बहुत सारे

14:44 देश में ऐसा हुआ है की संवैधानिक ढांचे को नष्ट करके किसी दाल विशेष ने या फिर किसी शक्तिशाली ताकतवर व्यक्ति ने एक तानाशाही सत्ता की स्थापना कर ली इसलिए संविधान में आवश्यक है की सभी संस्थाओं की शक्तियों का और जिम्मेदारियां का साफ-साफ निर्धारण हो ताकि सभी कार्य सुचारू रूप से चल सके और संवैधानिक ढांचे की संविधान के मूल सिद्धांतों की रक्षा हो सके अगला क्वेश्चन लेते हैं शासको की सीमा का निर्धारण करना संविधान के लिए क्यों जरूरी है की जो शासन हैं जो सत्ता पक्ष है उसकी सीमाओं का निर्धारण संविधान में होता है क्या आवश्यकता है इसकी क्या कोई ऐसा भी संविधान

15:30 हो सकता है जो नागरिकों को कोई अधिकार छन ना दें देखिए सबसे पहले तो अपन इस बात पर बात करते हैं की शासको की सीमा का निर्धारण करना संविधान के लिए क्यों जरूरी है यह वाली बात अपने जब इस चैप्टर का पहले वीडियो ओपन देखा था उसमें अपन ने शायद की थी क्या बात की थी की मां लीजिए की संविधान में इस बात का निर्धारण हो गया की इस तरह से चुनाव होंगे और इस तरह से सरकार बनेगी उसे निश्चित भीम का पालनपुर करते हुए सरकार बन गई अब उसे सरकार में जो की हमारी ही चुन्नी हुई सरकार है जो की संवैधानिक नियमों का पालनपुर करते हुए बनी सरकार है उसे सरकार में कोई अन्य पूर्ण

16:15 कानून लागू कर दिया उसे सरकार ने कोई ऐसा कानून बना दिया की मां लीजिए किसी धर्म विशेष के जो व्यक्ति हैं उनको अपनी पद्धति से पूजा करने की अनुमति नहीं है किसी रंग विशेष के व्यक्ति हैं उनको हमेशा गुलामी ही करनी है या फिर किसी जाति विशेष के व्यक्ति हैं उनको नौकरी कोई स्थान नहीं दिया जाएगा इस तरह का अगर कानून सरकार बना दे तो वो क्या कर सकते हैं अपन क्या करेंगे अपन सरकार तो वही है जिसको अपन ने चुनाव है तो इसके लिए की सरकार कोई न्याय पूर्ण निर्णय ना ले सके सरकार जनता की जो आकांक्षाएं हैं महत्त्वाकांक्षाएं हैं उनको हमेशा पुरी करती रहे इसलिए संविधान सरकार पर भी कुछ नियंत्रण लगता है वो हमें मूली का अधिकार देता है हमारे मौलिक

17:02 अधिकारों की रक्षा करता है न्यायालय को कुछ अधिकार देता है की वो सरकार के ऐसे निर्णय को अवैध घोषित करें देखते हैं अपन यहां जनता के हितों को नुकसान ना पहुंचे इसलिए सरकार पर सीमाएं लगाना आवश्यक है शासन कोई अन्य पूर्ण कानून के प्रति प्रतिबद्ध बने रहे इसलिए संविधान है वह शासको की सीमा का निर्धारण कर देता है अगला क्वेश्चन इसी में ही है की ऐसा भी संविधान हो सकता है क्या सामग्रीकों को कोई अधिकार ना दें ऐसा संविधान अगर कोई तानाशाही शासन व्यवस्था है अगर कोई ऐसी व्यवस्था है जहां पर नागरिकों की नैतिक मूल्य से कोई लेन-देन नहीं है तो इस तरह का संविधान हो सकता है लेकिन मेरा मानना

17:48 है की ऐसे संविधान भी नागरिकों को अधिकार देने का दिखावा जरूर करते हैं वो इसी तरीके से उसे संविधान का निर्माण करेंगे की जिससे वो जनता को और नागरिक अधिकारों का अपन कहेंगे अधिकार देने का दिखावा करते हैं हकीकत में जनता को कोई अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं तो ऐसे संविधान का कोई मतलब नहीं र जाता कोई भी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध संविधान ऐसा नहीं हो सकता जो नागरिकों को कोई अधिकार ना दे लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के अपन बात करें तो लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का ऐसा कोई भी संविधान नहीं हो सकता है जो नागरिकों के अधिकारों की बात ना करें जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा ना करें अगला क्वेश्चन लेते सकते हैं जब जापान का संविधान बना तब दूसरे

18:37 विश्व युद्ध में पराजित होने के बाद जापान अमेरिकी सी के कब्जे में था जापान के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान असंभव था जो अमेरिकी सी को पसंद ना हो क्या आपको लगता है की संविधान को इस तरह बनाने में कोई कठिनाई है भारत में संविधान बनाने का अनुभव किस तरह इससे अलग है इसका उत्तर देखते हैं अपन की जब राष्ट्र अन्य देश के कब्जे में होता है तो स्वयं की अपेक्षाओं के अनुरूप संविधान बनाना मुश्किल है ये बात बिल्कुल सही है क्योंकि जो शासन वर्ग होता है वो या तो अन्य देश के अधीन होता है उसके दबाव में होता है या फिर शासन ही अन्य देश के होते हैं तो ऐसे में अगर वह लोग संविधान बनाएंगे या वह लोग संविधान

19:22 सभा का निर्माण करेंगे तो निसंदेह है उसे संविधान में ऐसी कोई बात आना जो उसे वर्ग को पसंद ना हो संभव सी ही लगती है संविधान पर शासन राष्ट्र का प्रभाव होता है ऐसे संविधान में शासन राष्ट्र के हितों का अधिक ध्यान रखा जाता है यानी की वह लोग अपने देश के हितों का अपने राष्ट्र के हितों का ध्यान अवश्य रखते हैं भारत के संविधान की बात करें तो भारत का संविधान भारतीयों द्वारा चुन्नी गई संविधान सभा द्वारा बना है हमारे यहां संविधान सभा के लिए चुनाव हुआ था और भारतीयों ने वो चुनाव किया था संविधान सभा लोकप्रिय नेताओं की बनी थी इसलिए इसे जान समर्थन प्राप्त था हमारे ऐसे नेताओं ने बनाई थी संविधान सभा जो की राष्ट्रीय आंदोलन के नेता थे जो की

20:10 जनता की महत्वाकांक्षाओं को जनता की आशाओं को समझते थे भारतीय संविधान पर किसी तरह का अंग्रेजी सरकार का दबाव देखने को नहीं मिलता है भारतीय संविधान है उसमें नागरिकों के लिए लोक कल्याणकारी तत्वों का प्रावधान किया गया है मूल अधिकारों का प्रावधान किया गया है लोक कल्याणकारी मूल्य का सिद्धांतों का प्रावधान किया गया है तो स्थान को देखने से ऐसा नहीं लगता की भारतीय संविधान सभा ने अंग्रेजी सरकार की दबाव में कोई ऐसा निर्णय्या कोई ऐसा प्रावधान संविधान में शामिल किया होगा अगला क्वेश्चन देखते हैं रजत ने अपने शिक्षक से पूछा संविधान एक 50 साल पुराना दस्तावेज है और इस करण वह पुराना पद चुका है किसी ने इसको लागू करते समय मुझे राय

20:58 नहीं मांगी ये इतनी कठिन भाषा में लिखा हुआ है की मैं इसे समझ भी नहीं सकता आप मुझे बताएं की मैं इस दस्तावेज की बटन का पालनपुर क्यों करूं अगर आप शिक्षक होते तो रजत को क्या उत्तर देते तो देखिए कोई भी संविधान 50 साल पहले बना था हो सकता है की आज वो प्रासंगिक ना हो लेकिन अगर भारतीय संविधान की बात करें तो भारतीय संविधान में लचीलेपन का मिश्रण है रचीलेपन का एक गन भारतीय संविधान में है की परिस्थितियों के अनुसार भारतीय संविधान की बहुत साड़ी बटन में बदलाव संभव है और हमारे संविधान ने ऐसे बदलाव किया हैं बदलते वक्त के अनुसार बदलती परिस्थितियों के अनुसार हमारा संविधान प्रासंगिक बने रहने के लिए

21:46 संशोधन करता है और संशोधन को स्वीकार करता है तो 50 साल पुराना है लेकिन प्रासंगिक नहीं है यह बात नहीं कहीं जा शक्ति और दूसरी बात हमसे राय नहीं मांगी गई ये बात भी हम नहीं का सकते क्योंकि भारतीय जनता द्वारा भारतीय जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा संविधान सभा का निर्माण किया गया था इसका मतलब अप्रत्यक्ष तोर पे हम सभी की राय वहां मनी गई थी या फिर हम सभी की राय कहानी के वहां पर मूल्यवान थी आज भी जब सरकार बंटी है तो सरकार कोई निर्णय लेती है तो वो हमसे नहीं पूछती है वो हमसे नहीं पूछती की जीएसटी का कानून मैं बनाऊं या नहीं बना लेकिन क्योंकि सरकार हमारे ही चुने हुए प्रतिनिधियों से मिलकर बनी है तो सरकार

22:33 द्वारा बनाए गए हर एक कानून में शामिल होती है तो देख लेते हैं अपन भारतीय संविधान में लचीलेपन का गन है इसलिए बदलते परिस्थितियों के साथ बदलाव के करण हमारा संविधान आज भी प्रासंगिक है संविधान सभा संपूर्ण देश का प्रतिनिधित्व कर रही थी अर्थात वह हमारा भी प्रतिनिधित्व कर रही थी अगला क्वेश्चन देखते हैं संविधान के क्रियाकलाप से जुड़े अनुभवों को लेकर एक चर्चा में तीन वक्ताओं ने अलग-अलग पक्ष रखें पहले वक्त ले लेते हैं पहले वक्त है हरवंश वो का रहा है की भारतीय संविधान एक लोकतांत्रिक ढांचा प्रधान करने में सफल रहा है की भारतीय संविधान में लोकतांत्रिक ढांचा प्रधान किया है इस कथन से हम सहमत

23:20 हैं या एसएमएस है तो इस कथन से हम सहमत हैं क्यों हैं हम सहमत क्योंकि भारत की जो संविधान है उसकी प्रस्तावना की शुरुआत इस शब्द से होती है की हम भारत के लोग यानी की हमारा भारतीय संविधान शक्ति किसको प्रधान कर रहा है जनता को शक्ति का स्रोत कौन है जनता है संविधान को लागू कौन कर रहा है जनता लागू कर रही है तो निसंदेह है ये एक लोकतांत्रिक ढांचे के लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का गन है की यहां संपूर्ण शक्तियां जनता में निहित हैं दूसरी बात अपने यहां नियमित अंतराल में चुनाव होते हैं भारतीय संविधान ने इस तरह की व्यवस्था की है की 1950 में संविधान लागू होने के बाद जब पहले लोकसभा चुनाव हुए 1991 में तब

24:07 से लेकर अब तक कुछ एक दो अपवादों को छोड़कर लगातार नियमित अंतराल पर चुनाव होते हैं सरकारें चुन्नी जाति हैं सरकारें बदली जाति हैं यह भी लोकतांत्रिक ढांचे का ही एक अपन कहे की प्रमाण है लोकतांत्रिक प्रणाली से चुनाव होते हैं ठीक है ना चुनाव हमेशा लोकतांत्रिक प्रणाली से होते हैं जैसा की संविधान में वर्णन किया गया है जैसा की संविधान में प्रावधान है उन सावधानों के अनुरूप चुनाव हमेशा करवाएं जाते हैं सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास भी संविधान द्वारा किया गया है जैसे की सती प्रथम के खिलाफ कानून बना जैसे की बाल विवाह के खिलाफ कानून बना जैसे की अपन अभी ये जो तीन तलाक वाला मामला था इसके खिलाफ कानून बना महिला शिक्षा के लिए लगातार सरकार कम कर रही है

24:52 जो वृद्ध है बुजुर्ग हैं उनके लिए विशेष परियोजनाएं चालू की गई है सरकार ने विधवाओं के लिए विशेष प्रयास किया हैं बेरोजगारों के लिए विशेष प्रयास किया हैं तो मतलब की समाज के हर तबले के लिए सुधार के उसे हर तबले को एक सामान्य के स्टार पर लाने के लिए हमारी सरकारे द्वारा प्रयास किया जा रहे हैं और यह प्रयास संविधान के अनुरूप ही तो हैं कहानी ना कहानी हमारे संविधान में ही तो निर्देश दिया है सरकारे को की उन्हें इस तरह से समाज में सामान्य स्थापित करनी है असमानता को समाप्त करना है हर एक उत्पीड़न तबले को सामान्य के स्टार पर लाना है और किस तरह से न्याय समाज की स्थापना करनी है नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमारा संविधान प्रतिबंध

25:38 है जैसे की अभी-अभी अपन ने बात की थी अपने मूल अधिकार हैं और उन अधिकारों की रक्षा हमारा न्यायालय करता है दूसरा कथन है नेहा का नेहा का रही है की संविधान में स्वतंत्रता संता और भाईचारा सुनिश्चित करने का विधिवत बड़ा है चूंकि ऐसा नहीं हुआ इसलिए संविधान असफल है नेहा का रही है की स्वतंत्रता और संता और भाईचारा ये सब निर्धारित करने के लिए वादा किया है संविधान ने किन स्वतंत्रता की स्थापना करेंगे सामान्य की स्थापना करेंगे लेकिन ऐसा तो कुछ हुआ ही नहीं इसलिए हमारा संविधान असफल है तो देखिए इस कथन से कुछ बिंदु सहमति के भी हैं और कुछ बिंदु सहमति के भी हैं पहले अपन सहमति के बिंदु पढ़ने हैं की आज भी असमानता व्याप्त है बिल्कुल आप अपने आसपास देखते होंगे की वंचित वर्ग

26:25 है आज भी भेदभाव है जाति के आधार पर आज भी भेदभाव है धर्म के आधार पर तो आज भी हमारे समाज इसमें असमानता है तो संता वाली बात की संविधान ने वादा किया था संता नहीं ए पी तो बिल्कुल आज भी असमानता व्याप्त है आज भी सांप्रदायिक देंगे होते हैं बहुत साड़ी जगह पर सांप्रदायिक देंगे हुए हैं बार-बार और आपसी विद्वेष भी है धर्म के नाम पर दूसरा बहुत सारे दागिन नेता अपन बात करें तो बहुत सारे अपराधी प्रवृत्ति के लोग हैं जो की हमारी सरकारे में हमारी सांसद में पहुंचे हुए हैं आज भी वंचित वर्ग है शिक्षा से वंचित वर्ग है स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित वर्ग है एक पोशाक जो भजन है पोशाक स्टार प्राप्त करने वाला उससे भी वंचित वर्ग है रोजगार से वंचित वर्ग है तो आज भी बहुत बड़ा वंचित

27:13 वर्ग हमारे देश में है और महिलाओं के साथ भेदभाव आज भी हो रहा है मैं इतने सालों के बाद संविधान लागू होने के इतने वर्षों के बाद आज भी महिला वर्ग के साथ भेदभाव होता है अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं है सरकार में या फिर कहानी की राजनीति में लेकिन केवल संविधान में कुछ भी अच्छा नहीं हुआ केवल यह सब बड़ा ही बड़ा है केवल अपन वंचित वर्ग कोई देखें केवल अपन ऐसा मानता को ही देखें केवल अपन सांप्रदायिकता कोई देखें और यह कहे की संविधान असफल है तो ये बात पूर्णतया सत्य नहीं है बहुत साड़ी ऐसी बातें हैं जिन पर अपन संविधान की सफलता भी आंख सकते हैं और अपन ये का सकते हैं की नहीं बहुत साड़ी जगह पर संविधान है वो सफल

27:58 हुआ है जैसे की शिक्षा में बढ़ोतरी हुई है जैसे की देश के विकास में भी प्रगति आई है जैसे की कृषि की भी उन्हें तो तकनीकी आई हैं जैसे की आज एक आम आदमी का जीवन स्टार ऊंचा उठा है देख लेते हैं अगर अपन विकास भी हुआ है विकास की भी हमने एक उच्च धर्म प्राप्त की है शिक्षा में भी बढ़ोतरी हुई है सामाजिक सामान्य हेतु लगातार प्रयास किया जा रहे हैं हमारी सरकार ने स्पष्ट के लिए कानून बनाया है हमारी सरकार ने महिलाओं के लिए भी बहुत साड़ी ऐसी योजनाएं शुरू की है जैसे की भामाशाह योजनाएं अपनी उसमें महिला को माना जाता है परिवार का बालिकाओं के शिक्षा के लिए भी बहुत सारे प्रयास हो रहे हैं और धीरे-धीरे बालिकाओं के शिक्षा का प्रतिशत भी बाढ़ रहा है तो कहानी ना कहानी अपन इसको सफलता ही कहेंगे

28:44 संविधान की हर एक बात में संविधान असफल हुआ ऐसा नहीं है और सभी सबसे बड़ी बात जितनी भी देश हमारे जो हम आजाद हुए थे उसके आसपास के वर्षों में जितनी भी देश आजाद हुए थे उनमें सबसे सफल संविधान विकासशील देश से अगर तुलना करें तो हमारे भारत देश का है अगला जो कथन है वो है नजमा का नजमा कहती है की संविधान असफल नहीं हुआ हमने उसे असफल बनाया है क्या आप इनमें से किसी पक्ष से सहमत हैं यदि हां तो क्यों और यदि नहीं तो क्यों अपना पश्चिमान ने ये कहा की संविधान स्वयं जैसे की नेहा ने कहा की संविधान है असफल है ना जिम कहती है की संविधान असफल नहीं है हमने संविधान को असफल बनाया है क्या करण है की हम संविधान को और असफल का रहे हैं तो क्या आप इस बात

29:31 से सहमत हैं तो हम इस बात से सहमत हैं क्योंकि जाति धर्म और वर्ग के आधार पर मतदान हामी करते हैं एक राजनेता है वो वोट मांगता है तो वो किस आधार पर वोट मांगता है वो इस बात का ध्यान रखना है की जनता है वो कौन सी बात सुनकर मुझे वोट देगी तो कहानी ना कहानी हमने प्रदर्शन किया है अपने धार्मिक रूप से अपने सांप्रदायिक विचारों का हमने जातीय भेदभाव के विचारों का तभी उसको और जो भी उम्मीदवार है वो वोट मांगने की हिम्मत कर रहा है जाति के आधार पर धर्म के आधार पर और हमने मतदान भी किया है जाति वर्ग धर्म के आधार पर तो जब हम मतदान ही जाति के आधार पर कर रहे हैं मतदान ही हम धर्म के आधार पर कर रहे हैं तो फिर कहां से भेदभाव खत्म होगा दूसरा दागी नेताओं को समर्थन देने वाले भी हम ही

30:18 हैं जो अपराधी प्रति के व्यक्ति हैं जिनके खिलाफ बहुत गंभीर अपराधों के और लंबित है उनको भी जीता कर हम ही भेजते हैं सरकार में तो यहां भी हमने असफल बनाया है संविधान को सामाजिक स्टार पर भेदभाव तो सामान्य लोगों के द्वारा ही किया जाता है ना सामाजिक स्टार पर भेदभाव अगर किसी दलित को प्रताड़ित किया जा रहा है कई बार अखबारों में आता है की दलित को घोड़ी पर नीचे नहीं दिया तो दलित को घोड़ी पर नहीं चढ़ना दिया वो नहीं चढ़ना देने वाले लोग कौन हैं वो लोग हमें हैं वो लोग हमारे ही समाज के वो लोग हैं यानी की संविधान को असफल यहां हम बना रहे हैं हमारे संविधान ने इस बात का और कहानी की प्रावधान कर दिया इस बात का कानून बना दिया सामान्य की बात कर ली लेकिन फिर भी हम उसको सफल नहीं

31:04 होने दे रहे हम वहां इस तरह की भेदभाव वाले आचरण कर रहे हैं जागरूकता की कमी है हम ही में जागरूकता की कमी है हमें ही नहीं पता हमें अधिकारों का हमें ही नहीं पता हमारे कर्तव्यों का तो फिर संविधान असफल होगा ही देश हिट के सभी कार्य करने की जिम्मेदारी हम केवल सरकार की समझ लेते हैं ऐसी हमारी सोच है आज भी हिंदुस्तान के बहुत बड़े वर्ग की यह सोच है बहुत बड़ा प्रतिशत ऐसा है जिसकी ये सोच है की देश हिट का सर कम तो सरकार करेगी अगर हमसे ये अपील की जाति है की हम कचरा ना फैलाएं तो हम इस बात को ध्यान ही नहीं देते की इतने सारे लोग हैं सभी दर-दूर फेक रहे हैं कचरा मेरे एक के ना फेंकने से क्या हो जाएगा मेरे एक के प्लास्टिक इस्तेमाल ना करने से क्या हो जाएगा मतलब की हम सरकार की जिम्मेदारी समझते हैं की

31:49 पर्यावरण प्रदूषण को कम करेगी तो सरकार करेगी अगर देश के सफाई करेगी तो सरकार करेगी अगर और भी कोई नियम कानून या फिर जो हम कर सकते हैं तो वह सरकार करेगी हम इंतजार करते हैं की जब तक कोई कानून ना बने जब तक कोई दंड हम पर ना लागू किया जाए तब तक हम कोई कम नहीं करेंगे इसका एक छोटा सा एग्जांपल मैं दे देती हूं आसपास आपने देखा होगा वह शायद आपने किया भी होगा की जब अपन देखते हैं की पुलिस वाला खड़ा है किसी चौराहे के ऊपर तब अपन हेलमेट लगाते हैं और अपन चारों और देखते हैं रेड लाइट है अपन चारों और देखते हैं की कोई नई ट्रैफिक पुलिस वाला अपन रेड लाइट क्रॉस कर जाते हैं जबकि ये सारे प्रावधान हेलमेट लगाने का नियम रेड लाइट है उसका नियम या फिर जो स्पीड है गति है की किसी आप लिखा

32:35 जाता है उसके ऊपर रोड पर हाईवे पर की भाई अधिकतम सीमा इतनी है इससे ज्यादा हाय स्पीड पर गाड़ी नहीं चलानी है तो यूं देखा है की हां पुलिस वालों की गाड़ी खड़ी है तो स्पीड कम कर लेते हैं वरना बहुत तेज गति से गाड़ी चलाई जाति है तो एक बार सोच कर देखें की यह कानून किस लिए बनाए होंगे सरकार ने ये कानून हमारी सुरक्षा के लिए बने हेलमेट हम लगाएंगे हमारी सुरक्षा है अगर हम धीमी गति से गाड़ी चलाएंगे हमारे जीवन की सुरक्षा है लेकिन फिर भी हम उनका पालनपुर कब करते हैं जब वहां कोई सरकारी पुलिसवाला खड़ा हमारी देखरेख करता है हमारे अपने सर पर डंडा लिए खड़ा राहत है इसके अलावा हम खुद अपनी मानसा से उसे कानून का ही पालनपुर नहीं कर रहे जो हमारी रक्षा के लिए है सफाई की बात सामाजिक सामान्य की बात ये तो बहुत दूर की बात है

33:23 तो बिल्कुल सहमत हैं इस कथन से नजमा के की संविधान असफल नहीं है हमने उसको असफल बनाया है हमें अपनी सोच में बदलाव करना होगा की अगर पूरे देश में साफ सफाई रहे हम तुलना करते हैं दूसरे देश से तो वो जिम्मेदारी हमें लेनी होगी व्यक्तिगत रूप से की कोई करें ना करें मुझे तो करनी है अगर प्लास्टिक का इस्तेमाल कोई बैंड करें ना करें मुझे तो करना है अगर कानून का पालनपुर कोई करें ना करें मुझे तो करना है अगर हम भारतीय यह सोच अपने ग जाएंगे निसंदेह हमारा संविधान हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली सारे के सारे बेहद सफल होंगे सफलतम होंगे धन्यवाद

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