0:11 नमस्कार स्वागत है आपका संसद टीवी पर। मैं हूं मनोज वर्मा और आप देख रहे हैं हमारा खास कार्यक्रम मुद्दा आपका। आज हम बात करेंगे विकसित भारत रोजगार गारंटी व आजीविका मिशन ग्रामीण यानी वीबी जी राम जी की। इस मुद्दे पर बात इसलिए क्योंकि केंद्र सरकार ने नई योजना वीबी जी राम जी को लागू करने की तैयारी के साथ ही इसके लिए ₹5000 करोड़ से अधिक का बजट इस बार के बजट में आवंटित किया है। जबकि मनरेगा को भी ₹00 करोड़ का प्रावधान इस बजट में किया गया है। वीवी जी राम जी योजना के तहत साल में 125 दिनों के काम का वादा किया गया है। यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा
0:59 2005 के तहत बनी पुरानी ग्रामीण रोजगार योजना का स्थान लेगी। असल में वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में ग्रामीण रोजगार में बदलाव का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि समय के साथ ग्रामीण रोजगार की आवश्यकता का स्वरूप बदल रहा है। इसलिए मनरेगा में सुधार की आवश्यकता है। लिहाजा केंद्र सरकार ने विकसित भारत रोजगार गारंटी व आजीविका मिशन ग्रामीण यानी वीबी जी राम जी योजना का लागू करने का फैसला किया। मुद्दा आपका में आज हम बात विकसित भारत रोजगार गारंटी व आजीविका मिशन ग्रामीण की करेंगे। इसके पहलुओं को समझने की कोशिश करेंगे। क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना ग्रामीण रोजगार की
1:46 दृष्टि से। हमारे साथ खास मेहमान इस समय स्टूडियो में मौजूद हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव रोहिणी आर भाजी भाकरे जी हमारे साथ स्टूडियो में हैं। रोहिणी जी बहुत-बहुत स्वागत है संसद टीवी पर आपका। साथ ही हम बात करेंगे लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल जी से। मनोज जी बहुत-बहुत स्वागत है आपका भी संसद टीवी पर। लेकिन रोहिणी जी शुरुआत मैं आपसे करूंगा। एक ऐसा मुद्दा जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उम्मीदें भी हैं और सरकार जो ग्रामीण रोजगार है उसको एक नई दिशा देना चाहती है। और वीबी जी राम जी योजना जो है वो सरकार ने लागू करने का फैसला क्यों किया? और इस बार के बजट में 95,000 करोड़ से का प्रावधान इस योजना के लिए किया गया है।
2:33 क्यों महत्वपूर्ण है ये योजना देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिहाज से? जी इसकी शुरुआत करते समय यह मैं कहना चाहूंगा कि यह चाहूंगी कि यह केवल महज एक योजना नहीं है। विकसित भारत जीराम जी अधिनियम जो एक्ट अह संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ, वह एक्ट भारत के रूरल एंप्लॉयमेंट जो हमारी अह ग्रामीण एंप्लॉयमेंट की जो अह आर्किटेक्चर है, उसके लिए बहुत ही ऐतिहासिक एक अधिनियम एक्ट जो है अह भारत सरकार द्वारा लाया गया है। और इस एक्ट को उतने ही स्ट्रेंथ के साथ उतनी ही ताकत के साथ लागू करने के लिए इतना एक बहुत बड़ा बजटरी एलोकेशन जो है मिला है। अब आपको पता है कि पहले 100 दिन की रोजगार गारंटी होती थी जो अब विकसित भारत जी राम जी के
3:20 अंतर्गत वह गारंटी 125 दिन की बन गई है। विकसित ग्राम पंचायत प्लांस के माध्यम से जो बहुत सारे काम जो होने वाले हैं ग्रामीण एरिया में उनको अगर हमें कैटर करना है तो उसके लिए बड़े बजटीय प्रावधान की जो आवश्यकता भारत सरकार ने समझी और एक अब तक का रूरल एंप्लॉयमेंट के लिए भारत सरकार के इतिहास में भी सबसे बड़ा प्रावधान एक तरह से इसे कहा जा सकता है। 95692 करोड़ का प्रावधान जो है इस बार बजट में विकसित भारत जी राम जी के लिए मिला है। जी जाहिर तौर पे विकसित भारत जी राम जी योजना जो है सरकार उस योजना के जरिए जो ग्रामीण क्षेत्र है जो मजदूर हैं उनको रोजगार का वादा करती है। रोजगार 125 दिन देने का वादा करती है। इसमें तमाम प्रावधान किए गए
4:06 हैं ताकि आम आदमी को काम मिल सके। आर्थिक दृष्टि से उसके जीवन में बदलाव आ सके। मनोज जी मैं आपसे जानना चाहता हूं। मनरेगा और अब विकसित भारत जी राम जी योजना। आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं? यह बदलाव क्यों जरूरी था? आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया था कि बदलाव की आवश्यकता है क्योंकि ग्रामीण रोजगार का स्वरूप बदल रहा है। आप कैसे देखते हैं इस मुद्दे को? विनोद जी खाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नहीं जी। पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदल चुका है। जो गरीबी पहले हुआ करती थी 55% मल्टीडमेंशनल पावर्टी हुआ करती थी। 55% जिस समय लागू किया गया अब 11% के आसपास गरीबी रह चुकी है। राज्यों को पहले ही
4:52 काफी हद तक ग्रामीण क्षेत्रों में वहां पर उनकी कनेक्टिविटी बहुत स्ट्रांग हो गई है और कनेक्टिविटी चाहे रोड की हो तो या आप मोबाइल कनेक्टिविटी देखते हैं तो ये सारी कनेक्टिविटी बहुत स्ट्रांग हो चुकी है। फिर अगर हम देखते हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में जो मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति है करीब-करीब सभी परिवारों को और गांव को कर दिया गया। जैसे सारे गांव में अब देखिए पेयजल की सुविधा हर गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था हो रही है। पक्का मकान देने की बात हो रही है। 100% हाउसहोल्ड्स को लगभग ओपीडी से उसे ओपन डिफिकेशन से फ्री कर दिया गया है और घर में शौचालय दे दिया गया है पक्का मकान के साथ। प्लस उनको देखिए इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन भी प्रोवाइड कर दिया गया है। ये
5:37 सब कहीं ना कहीं अगर इनडायरेक्टली जोड़ेंगे तो इनकम में काउंट होगा जो आज से 10 साल पहले नहीं हुआ करता था। अब इस परिस्थिति में आई है मनरेगा एक डिस्ट्रेस के तहत यह लागू किया गया था। आज स्थिति क्या है कि उत्तर प्रदेश सरीखे राज्य भी आर्थिक रूप से काफी सशक्त हो चुके हैं। कनेक्टिविटी में काफी आगे बढ़ चुके हैं। ग्रामीण रोजगार खाली मनरेगा नहीं अन्य क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे तेजी से विकसित हो रहा है। तो ऐसे में अब होता है कि उसकी रिस्ट्रक्चरिंग की जाए। तो वो रिस्ट्रक्चरिंग करके इसको जो विकसित भारत के साथ एलाइन करने की बात है और जिन फोर वर्टिकल्स को इसके साथ जोड़ा गया है कि एक उद्देश्य की पूर्ति हेतु ये रोजगार दिए जाए और यदि किसी कारण से रोजगार नहीं दिया
6:24 जा सकता है तो उनको अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस भी देने की व्यवस्था इसमें है। तो आप देखिए तो इसमें काफी व्यापक अंतर किया गया है। तो अब उसमें अगर 125 पहले 100 दिन का था अब 125% की यह वृद्धि हुई है। और सबसे बड़ी चीज यह है कि पहले यह था कि रोजगार जिस समय कटाई के समय या बुवाई के समय वाली अवधि को इसमें अलग नहीं किया गया था। अब इसमें नए प्रावधान में क्या है? 60 दिन लोकल लेवल पर अपने डिस्ट्रिक्ट लेवल पर ग्राम पंचायत के स्तर पर बताना होगा वो 60 दिन कौन से हैं जो बुवाई के लिए और कटाई के लिए आवश्यक होते हैं। उन 60 दिन हटा के 305 दिनों में से 125 दिन दिया जाना है। यानी
7:10 कि किसानों को ज्यादा या लेबर को जो है ग्रामीण श्रमिकों को अब ज्यादा अपॉर्चुनिटीज इसमें मिलती हुई दिखाई पड़ती है। जी जी बिलकुल मनोज जी यह सवाल मैंने इसलिए उठाया यह मुद्दा इसलिए उठाया क्योंकि 11 सालों में जो पिछला एक दशक है इसमें अर्थव्यवस्था के लिहाज से चाहे शहरी क्षेत्र हो चाहे ग्रामीण क्षेत्र हो एक व्यापक बदलाव देखने को मिला है। टेक्निकली भी अगर कहा जाए अगर डिजिटल इंडिया की बात की जाए उसने भी परिस्थितियों को और स्थितियों को बदलने का काम किया है। लिहाजा आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में ऐसे प्रावधान करने के लिए सिफारिश की गई या सुझाव दिया गया जिससे देश का जो ग्रामीण ग्रामीण अर्थव्यवस्था है वो और मजबूत हो सके। लोगों को रोजगार के अवसर अधिक मिल सके। यह सरकार का उद्देश्य है। लेकिन एक
7:56 बड़ा मुद्दा रोहिणी जी मैं ये जानना आपसे चाहता हूं क्योंकि मनरेगा में भी तमाम प्रवधान थे। वह भी योजना अह रोजगार की गारंटी की बात करती थी और जो विकसित भारत जी राम जी योजना है यह भी गारंटी गारंटेड रोजगार की अह बात करती है, वादा करती है। दोनों योजनाओं में क्या फर्क है? क्या अंतर है? एक आद आम आदमी के लिहाज से इसमें क्या फायदे वाली बात है? जी जैसा कि सबसे इंपॉर्टेंट फायदे वाली बात तो आप ही आपने कह ही दी कि पहले 100 दिन की गारंटी हुआ करती थी जो अब 125 दिन की गारंटी है। अब जब हम किसी चीज की गारंटी की बात करते हैं तो ये सवाल लिहाजा उठता है कि अगर वो गारंटी फुलफिल ना की जाए तो क्या? तो अगर नरेगा में देखा जाए तो देयर वाज अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस प्रोवाइड करने की प्रोविजन तो थी परंतु
8:42 उसमें कुछ डिसेंटाइटलमेंट क्लॉज़ भी थे। इसका मतलब यह है कि अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस आपको मिलेगा परंतु ना मिलने के भी कुछ कारण उसमें दिए गए थे। तो उस वजह से यह होता था अगर आप डाटा देखेंगे पिछले कई सालों का तो राज्य जो अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस दे देना जिनकी जिम्मेदारी है वो वो बेरोजगारी भत्ता जो है वो लोगों तक नहीं पहुंचता था। अगर उनको काम नहीं मिलता है तो परंतु विकसित भारत जी राम जी में ये जो अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस की जो प्रोविजन की गई है वो बहुत ही स्ट्रांग प्रोविजन है कि अगर किसी को नहीं मिलता है 15 दिन के अंदर रोजगार तो उनको अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस मिलेगा और मनरेगा में जो उसके डिसएंटाइटलमेंट क्लॉजेस थे जिसकी वजह से अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस नहीं मिल पाता था वो विकसित भारत जी राम जी में रिमूव किए गए
9:28 हैं। तो यह एक इंपॉर्टेंट मुद्दा है। और एक बात मैं कहना चाहूंगी जैसे कि अभी बात की गई कि आर्थिक विकास हुआ है हमारे गांव में रहने वाले हमारे ग्रामीण प्रदेश में रहने वाले लोगों के एस्पिरेशंस में शिफ्ट हुआ है कि पहले जो एस्पिरेशंस हुआ करते थे उससे आज के एस्पिरेशंस जो है बदले हुए हैं। तो आज एक व्यक्ति जो ग्रामीण क्षेत्र में रहता है जिसका रोड जो है वो हमारे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की वजह से उसका गांव जिला स्तर पर जुड़ा हुआ है। एक मेन रोड से हर घर को मतलब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिला हुआ है। मुद्रा योजना के तहत लोंस लेके कई सारे उद्यमिता के काम हो रहे हैं। हमारी सेल्फ हेल्प ग्रुप की दीदियां अब लखपति दीदियां करोड़पति दीदियां बनने जा रही है। तो ये जो एस्पिरेशंस में शिफ्ट हुआ है। उस वजह
10:14 से ग्राम ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का भी यह एस्पिरेशन है कि जिस कार्य में मैं अपना अपना योगदान दे रहा हूं या दे रही हूं। जहां पर मैं अपना श्रम जहां पर कर रही हूं क्या वो एसेट क्या वो वर्क मेरे गांव के लिए एक ड्यूरेबल एसेट एक अच्छा काम बने या ना बने मतलब जैसे गड्ढे खोदने और भरने की बात कई बार कही जाती है तो जो व्यक्ति काम कर रहा है उसे ये लगना स्वाभाविक है कि मैं जो काम कर रहा हूं उसके लिए मेरे गांव का कोई लॉन्ग टर्म फायदा हो तो जिसे डिग्निटी ऑफ़ लेबर बोलते हैं। मुझे लगता है कि विकसित भारत जीराम जी में इसको भी टैकल किया गया है कि आप जो काम करेंगे उससे जो एसेट्स बनेंगे वो आपको विकसित गांव की ओर ले जाएंगे विकसित भारत की ओर ले जाएंगे। पहले मनरेगा
11:01 में शेलफ ऑफ प्रोजेक्ट हुआ करता था जिसमें कई सारे काम जो है कई बार बहुत ही ऐड हॉक तरीके से उसमें डाले जाते थे और फिर उन्हें एग्जीक्यूट किया जाता था। परंतु वो भी एक प्लंड वे में नहीं होता था। विकसित भारत जी राम जी विकसित ग्राम पंचायत प्लांस की बात करता है। तो अगर आपके गांव को एक विकसित ग्राम पंचायत बनना है तो कौन-कौन सी चीजों की जरूरत है उसको आप विकसित ग्राम पंचायत प्लान में ले आ और फिर जो भी एलोकेशन आपको मिल रहा है अंडर दिस प्रोग्राम उस एलोकेशन को यूज़ करते हुए आप स्टेप बाय स्टेप जो है विकसित ग्राम पंचायत की ओर बढ़े। तो मुझे लगता है कि बहुत ही प्लंड वे में विकसित भारत जी राम जी काम करेगा। मनरेगा में कई बार आपने मतलब ये सर्वज्ञात है। कई बार आपने मीडिया में भी देखा होगा और अदरवाइज भी डाटा भी
11:47 कहता है कि कई बार फाइनेंशियल इर्रेगुलरिटी के मामले सामने आते थे। कई बार ट्रांसपेरेंसी में कमी थी। विकसित भारत जी राम जी एक्ट में ही मतलब किसी एक्ट में ही अगर ट्रांसपेरेंसी एंबेडेड हो तो मुझे लगता है कि यह जो इर्रेगुलरिटीज या फिर लीकेजेस की जो पॉसिबिलिटी है वो बहुत कम हो जाती है। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन हो या फिर सोशल ऑडिट हो जा विकसित भारत जी राम जी में ये कहा गया है कि पंचायत हर हफ्ते वीकली पब्लिक डिस्क्लोज़र करेगी। इसका मतलब यह है कि हर हफ्ते गांव के लोग एक साथ बैठेंगे और ग्राम पंचायत में उन्हें बताना पड़ेगा कि इस हफ्ते में विकसित भारत जी राम जी में कौन-कौन से काम लिए गए थे। उनमें क्या प्रगति हुई? कितने लोगों को रोजगार मिला? कितने लोगों को अगर रोजगार नहीं मिला तो कितने लोगों को अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस
12:32 मिला? तो मुझे लगता है कि लोगों के लिए विकसित भारत जी राम जी एंपावरमेंट के लिए एक बहुत बड़ा टूल बन बिल्कुल कह सकते हैं विकसित भारत जी राम जी योजना जो है वो भ्रष्टाचार मुक्त और सुशासन वाली योजना है जो सीधे आम आदमी से सरकार की योजना को जोड़ने का काम करती है। लेकिन रोहिणी जी अगला सवाल भी मेरा आपसे है क्योंकि विकसित भारत जी राम जी के तहत रोजगार और परिसंपत्ति निर्माण को मेरी जानकारी के अनुसार चार प्राथमिक कार्य क्षेत्रों में बांटा गया है। ये चार क्षेत्र कौन से हैं? जी ये बहुत ही अच्छा सवाल आपने पूछा। ये जो चार क्षेत्र हैं वो हमारे नेशनल प्रायोरिटीज के साथ और हमारे जमीनी जो नेसेसिटीज है जो जरूरत हैं उसके साथ जुड़े हुए हैं। पहला अगर आप देखें तो पहला है
13:19 वाटर सिक्योरिटी रिलेटेड वर्क्स मतलब जल संचयन के कार्य, जल संधारण के कार्य, जल संरक्षण के कार्य। दूसरा जो है वो है कोर रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर जिसे हम बुनियादी ढांचा कहेंगे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का, ग्रामीण एरिया का। तो उसमें जो रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर में आपकी सड़कें, पुल पुलिया और तमाम सारे रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर के काम आएंगे। तीसरा जो है वो बहुत ही इंटरेस्टिंग और बहुत ही मुझे लगता है फ्यूचरिस्टिक एक कोर थेटिक फोकस एरिया है। वो यह है कि आजीविका मूलक जो गतिविधियां हैं उसके लिए विकसित भारत जी राम जी में कार्य लिए जाएंगे। आजीविका मूलक लाइवलीहुड जनरेशन एक्टिविटीज़। जैसे आपको पता है कि भारत देश अभी भी कृषि प्रधान देश माना जाता है। हमारे जो फार्मर्स प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइज़ेशंस है। हमारे जो फार्मर्स हैं
14:05 उनको कई बार अह अह जो धान्य को स्टोर करने के जो स्ट्रक्चर्स होते हैं, धान भंडारण जो स्ट्रक्चर्स होते हैं, उनको बनाने की जरूरत पड़ती है। हमारे सेल्फ हेल्प ग्रुप की दीदियां इतने सारे प्रयोग करती हैं। उन्हें कई बार के अंदर वर्कशीट की जरूरत पड़ती है। तो ऐसे लाइफ सोचिए उसके लिए जो कार्य और जोटिक एरिया हमने देखा है पिछले वर्ष मानसून के चलते कई सारे हमारे हिमालयन राज्यों में बाढ़ की परिस्थिति आई थी या फिर ये जो एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स जो है वो आजकल बढ़ते जा रहे हैं। तो हमारा चौथा थेटिक फोकस एरिया यह है कि एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स को टैकल करने के लिए हमारे गांवों
14:52 को सशक्त बनाए। तो उसके लिए अगर रिटेनिंग वॉल्स बनाने हैं या फिर और भी कुछ ऐसे कार्य लेने हैं जिससे कि हम प्राकृतिक आपदाओं से निपट सकें। तो इसका जो है हमारा चौथा फोकस एरिया विकसित भारत जी राम जी है। तो मुझे ऐसा लगता है कि ये जो चार थेटिक फोकस एरियाज है उससे एक ग्राम पंचायत का सर्वांगीण विकास जो है वो साध्य होगा और उसी के साथ जो है रेिलियंस जिसे कहते हैं लचीलापन कि अगर कोई एक्सट्रीम वेदर इवेंट होता है तो फिर से उभरने की एक शक्ति जो है हमारे गांव में मिलेगी अंडर द फोर। जी बिलकुल रोहणी जी अगर कहा जाए तो विकसित भारत का दरअसल रोजगार की दृष्टि से और कार्य के कार्य की दृष्टि से दारा बढ़ाया गया है। उसका विस्तार किया गया है। जो मनरेगा में थोड़ा सिमटा हुआ था। कहा जाता है गड्ढे खोदो गड्ढे भरो। लेकिन
15:39 विकसित भारत जी राम जी को ऐसा व्यवहारिक बनाया है कि जिससे गांव का विकास हो, ग्रामीण क्षेत्र का विकास हो, रोजगार को गति मिले और आम आदमी आर्थिक दृष्टि से सशक्त हो। लेकिन मनोज जी मेरा सवाल अगला आपसे है क्योंकि विकसित भारत जी राम जी के तहत केंद्र सरकार योजना का 60% वाहन करेगी और राज्यों की भागीदारी 40% की रहेगी। इस हिस्सेदारी को आप कैसे देखते हैं? क्योंकि तमाम सवाल उठते थे कई राज्यों पर। इस पर आपका क्या कहना है? देखिए मनोज जी जब इसको देखते हैं तो एक साथ में यह भी देखना होगा कि जो विशेष राज्य हैं उनके लिए यह प्रोविजन अलग है। वो 60 40 नहीं है। वो 910 का है तो वो अलग प्रोविजन है। ऐसा नहीं है कि सभी के साथ
16:24 वो है। अब इसमें आप देखते हैं तो बहुत से राज्य जो आगे बढ़ रहे हैं उनको कोई आपत्ति नहीं है। और इसका कारण भी है कि अब आप देखेंगे अगले 5 साल में अगर देखेंगे तो ठीक है केंद्र सरकार ने 60% करने के बावजूद अगर देखते हैं तो बजट अपना बढ़ा के दिया है 10% और यह बजट खर्च होता हुआ भी दिखाई पड़ता है यदि राज्य उसमें अपनी हिस्सेदारी मजबूती से निभाते हुए दिखाई पड़ेंगे तो तो ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि अब राज्यों के पास एक सुवसर है वो क्या है ग्रामीण अर्थव्यवस्था को इन चार वर्टिकल्स को साधते हुए कैसे हम और सशक्त मजबूत करें। जी खासतौर पर जैसे मैंने पहले कहा कि जितनी
17:13 भी मूलभूत आवश्यकताएं हो सकती है सरकार के द्वारा वो पूर्ति पहले की जा चुकी है। बिजली, पानी, आवास, चिकित्सा, शिक्षा ये सब किया ही जा रहा है। इसके अलावा अभी प्रश्न ये उठता है कि लखपति दीदी वाला भी चल रहा है। सोलर दीदी वाला भी काम चल रहा है। द्रोण दीदी वाला भी काम चल रहा है। यानी कि आप देखिए कन्वर्जेंस है उसके बीच में अब इसको कैसे लांच किया जाए बहुत अच्छे तरीके से ये वहां की ग्राम पंचायतों को निर्णय करना होगा और सबसे बड़ी चीज मैं फिर कहूंगा पहले 100 दिन का मतलब मैक्सिमम 100 दिन अब 125 दिन का मतलब 185 दिन हो सकता है 60 दिन उसको एक्सक्लूड कर दिया गया है जो बिजी सीजन होता है ग्रामीण
17:59 अर्थव्यवस्थाओं में खासतौर पर बुवाई और कटाई वाला उसको भी हमको देखना पड़ेगा वो वो पैसा किसको आएगा उस मजदूरी का पैसा वो जाहिर सी बात है इन्हीं श्रमिकों को आएगा। अब सरकार उनके दायरे को बढ़ा रही है। इस रूप में देखिए अब इसमें आप राज्यों की भागीदारी ठीक उसी प्रकार से होनी चाहिए जैसे जीएसटी ने सब ने सहयोग किया। तो अगर करेंगे तो मुझे लगता है अगले 5 वर्ष में बढ़ी हुई राशि का केंद्र सरकार के द्वारा जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को टारगेट किया जा रहा है एक नए इकोनॉमिक हब के रूप में अगर हम वहां काम करेंगे तो निश्चित तौर पर इस फंड्स का बेहतर इस्तेमाल करके अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त कर सकेंगे और सबसे बड़ी चीज कि ग्राउंड लेवल पर
18:45 क्योंकि राज्य सरकारें हैं तो उसका क्रेडिट मैक्सिमम राज्य सरकार को ही मिलता हुआ दिखाई पड़ेगा। लेकिन इसमें काम करना पड़ेगा। क्यों? क्योंकि इसमें जिओ टैगिंग है, सारे एसेट्स की मॉनिटरिंग है, डिजिटल मॉनिटरिंग है। तो अब पहले वाला जो आपने कहा ना गड्ढा खोदो, गड्ढा भरो। इसी में मनरेगा का काम पूरा हो गया। अब नहीं चलेगा। अब तो गड्ढा है ही नहीं है। अब तो आपको जल भी देना है तो टैप वाटर सरकार फ्री दे रही है। उसके लिए भी आपको काम नहीं करना है। उसका अलग से प्रोविजन है। इससे कोई लेना देना नहीं है। ये जो वाटर सिक्योरिटी मिशन है ये दूसरे रूप में बहत स्तर पर इसको देखा जा सकता है कि कैसे हम उसको बढ़ाएं और फिर लोकल विज़डम और लोकल टैलेंट जो ग्राम पंचायत की है उस
19:32 पर निर्भर करेगा कि इस फंड्स का बेहतर इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। जी बिल्कुल फंड्स का बेहतर इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? जैसा आपने कहा शुरू में कि मनरेगा के समय तमाम सवाल उठते थे। हालांकि डिजिटल इंडिया की हम बात करते हैं। जनधन खाते खुले लोगों के उससे भी सीधा पैसा लोगों तक अब पहुंच पहुंचता है। जो दिल्ली से पैसा जाता है। पारदर्शिता एक सिस्टम में आई है। लेकिन मनरेगा को लेकर कुछ सवाल भी थे। उसमें एक बहुत बड़ा सवाल यह भी था। लेकिन विकसित भारत जी राम जी में इस तरह का प्रावधान किया गया है कि भ्रष्टाचार मुक्त पूरी व्यवस्था रहे। आम आदमी का पैसा आम आदमी तक पहुंचे। जो जो जिसको रोजगार मिला है उस तक पैसा पहुंचे। ये बदलाव कैसे देखती हैं और इसके तहत क्या कदम उठाए जा
20:18 रहे हैं? बिल्कुल। एमजी नरेगा में कई सारे रिफॉर्म्स जो है वो पिछले 10 साल में किए जा रहे हैं। और बहुत बड़ा रिफॉर्म एक यह भी रहा कि जो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर है आधार पेमेंट ब्रिज सिस्टम इनेबल्ड जो ट्रांसफर होता है वो भी होता है कि आधार लिंक जो बैंक खाता है उसी में जो है पैसा जाता है। अ परंतु उसके चलते भी अगर आप देखें तो सोशल ऑडिट ये जो मैकेनिज्म है इसमें जो कई सारी वित्तीय गड़बड़ियां वगैरह पाई जाती है वो देखते हुए यह लगा कि भले ही एमजी नरेगा में जिओ टैगिंग किया गया एसेट्स का जिओ टैगिंग करने के लिए कंपलसरी किया गया एपीबीएस कंपलसरी किया गया कई सारे और भी रिफॉर्म्स किए गए परंतु उसके चलते भी अगर वित्तीय गड़बड़ियां अगर
21:05 हो रही है तो इसको एक इसको स्ट्रक्चरल जिसे गैप्स कहते हैं उसे सुधार सुधारने के लिए आमूलचूल परिवर्तन जो है वह जरूरी था और इसीलिए यह विकसित भारत जी राम जी आया है जिसमें मैंने पहले भी मेंशन किया कि किसी एक्ट में ही ट्रांसपेरेंसी के प्रोविजंस एंबेडेड होना एक्ट में ही उसे निहित होना यह ट्रांसपेरेंसी की ओर एक बहुत बड़ा कदम मैं मानती हूं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यूज़ करते हुए हम कैसे इन इस प्रणाली को जो है बिल्कुल फूल प्रूफ बनाएं। कैसे कंप्लीटली लीकेजेस रोके? सोशल ऑडिट को और जवाबदेही कैसे बनाएं? ऐसे कई सारे प्रावधान जो है जो विकसित भारत जी राम जी में है। तो मैं ये मानती हूं कि अगर कोई मेरा श्रमिक भाई बहन अगर काम कर रहे हैं उनको उनका पूरा दाम मिलना चाहिए। एट द सेम टाइम उन्होंने जिस काम में
21:51 कंट्रीब्यूट किया है वह काम भी एक टिकाऊ परिसंपत्ति के रूप में उनके गांव के लिए उनके ग्रामीण परिसर के लिए एक अच्छी टिकाऊ परिसंपत्ति बनना चाहिए। तभी उनके श्रम का सम्मान होगा और इसीलिए पारदर्शिता यह बहुत बहुत ही जरूरी है और पब्लिक फंड्स जो है वह उसका लीकेज रोकना ये भी हमारी बहुत ही इंपॉर्टेंट जिम्मेदारी है और विकसित भारत जी राम जी उसके उसके ओर एक बहुत बड़ा कदम है। जी बिल्कुल रोहित जी पारदर्शिता की भी बात है और जवाबदेही की भी लेकिन राज्यों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। छ महीने के भीतर राज्यों को अपनी योजनाएं बनानी होंगी। राज्यों की भूमिका ah जिस तरह से बढ़ाई गई है विकसित भारत जी राम जी में इसके पीछे क्या उद्देश्य है और किस तरह का बदलाव आएगा और ये जवाबदेही जो राज्यों की
22:37 भी एक तरह से तय की गई है और उसको आप क्या कैसे देखती हैं क्या कहना है आपका ah जो आपने सवाल पहले मनोज जी को पूछा उसी को उसी में कुछ जोड़ते हुए मैं राज्यों की भूमिका के बारे में बताना चाहूंगी। अह राज्यों की भूमिका अब जब राज्य अह जो जिसे हम सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम का आर्किटेक्चर कहते हैं, सो 60-40 यह कोई बहुत नई चीज़ नहीं है। ये मैं यहां पर कहना चाहूंगी। 60-4 एक बहुत ही स्टेबलाइज्ड एक्सेप्टेड एक फंड शेयरिंग पैटर्न है जो कि कई सारे सेंट्रली स्पोंसर स्कीम में जो है यूज किया जाता है और अगर आप हिस्टोरिकली भी देखें तो भी भारत में 1960 से कई सारी एंप्लॉयमेंट रिलेटेड स्कीम्स जो है बनती आ रही है। आरएलईजीपी था, देन एसजीआरवाई था, अह जवाहर रोजगार योजना था
23:23 या फिर फ़ूड फॉर वर्क योजना थी। ऐसे कई सारी योजनाओं में ये जो फंड शेयरिंग पैटर्न है वो 60 40 80 20 75 250-50 भीकि रहा है इससे पहले तो मुझे लगता है कि 60-40 एक बहुत ही वेल एस्टैब्लिश्ड कई सारे सेंट्रली स्पोंसर स्कीम में यह रेश्यो है तो राज्य इसमें जो है एक्टिव पार्टनर्स बनेंगे रूरल एरिया के डेवलपमेंट में जब राज्य की भी एक जिम्मेदारी एक जवाबदेही जब रहेगी इन टर्म्स ऑफ फाइनेंससेस आल्सो कि अगर राज्य भी अपना 40% उसमें लगा रहा है तो अह नेचुरल तरीके से जो है अकाउंटेबिलिटी में मॉनिटरिंग में ओवरसाइट में जो है बहुत ही ज्यादा सुधार होना एक्सपेक्टेड है और इसमें राज्यों को बहुत ही एमावर किया गया है। जैसे हमने बात की 60 डेज वाले पॉज पीरियड की। अब ये
24:10 सोचने लायक है कि भारत में अभी भी 86% जो हमारे किसान हैं वो स्मॉल एंड मार्जिनल फार्मर्स हैं। ये स्मॉल एंड मार्जिनल फार्मर्स को कई बार बुवाई कटाई के पीक सीजन में श्रमिक नहीं मिलते हैं। अगर ये 60 डेज तक यह काम थोड़े से पॉज किए जाएंगे तो हमारे फार्मर्स को भी हमारे किसानों को भी श्रमिक जो उपलब्धता है उनकी और भी ज्यादा बढ़ेगी और उस वजह से और इसके पूरे जो अधिकार है वो राज्यों को दिए गए हैं। तो, मेरे हिसाब से राज्यों को बहुत ही इंप्लीमेंटेशन एजेंसी जो है, वह कम राज्य है। और जैसे नरेगा में था कि 6 महीने के अंदर योजना बनाई है। हमने भी कहा है कि 6 महीने के अंदर आप अपनी योजना बनाएं। विकसित भारत जी राम जी योजना और उसे नोटिफाई करें। तो, राज्यों की भूमिका एक तरीके से बहुत ही स्ट्रेंथन की गई है। उनको पूरी तरीके से एंपावर किया गया है और
24:56 उनको एक्टिव पार्टनर्स बनाके राज्यों को एक अलग तरीके का जो है उनका एंपावरमेंट हुआ है। ऐसा मैं देखती हूं इस बात में। जी। जाहिर तौर पर राज्यों की जो जिम्मेदारी है विकसित भारत जी राम जी में बढ़ाई गई है। केंद्र सरकार धन भी देगी लेकिन काम राज्यों को भी करना पड़ेगा। लेकिन मनोज जी एक बड़ा सवाल आपसे मेरा यह है कि विकसित भारत 2047 के विजन के साथ विकसित भारत जी राम जी योजना को लागू किया गया है। और इसके पीछे उद्देश्य यह है कि ग्रामीण विकास का जो ढांचा है वो और बेहतर हो सके। स्थापित करना है उसको। विकसित भारत का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री जी अलग-अलग मंचों से इस बात को कहते हैं कि विकसित भारत का लक्ष्य है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। राज्यों
25:41 की जो भूमिका है उसको आप कैसे देखते हैं? क्योंकि एक महत्वपूर्ण सवाल है विकास की दृष्टि से रोजगार की दृष्टि से। केंद्र सरकार का विज़न है। बड़ा विज़न है विकसित भारत का। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो उसके लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। योजनाएं लागू कर रही है। आप कैसे देखते हैं इस मुद्दे को? मैं यह कह रहा था कि जिस प्रकार से प्रधानमंत्री जी ने पूरी व्याख्या की है विकसित भारत की और बताए हैं कि जो हमारे कमजोर कड़ी है वही हमारे विकसित भारत के काम आएंगे। उसमें चाहे युवा हो तो महिला हो तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बात करें तो उन सारी चीजों की बात यहां पर आती है। अब प्रश्न ये उठता है कि पहले हमने क्या मान लिया था कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ग्रोथ के कोई गुंजाइश नहीं है। अब हुआ क्या है? अगर 14
26:28 के बाद का आप पूरा देखते हैं और विकसित भारत में देखते हैं तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम दिया जा रहा है और ये जो है जी राम जी वाली जो परिकल्पना है जो यथार्थ में अब सामने आएगा अगले वित्तीय वर्ष से आप इसमें देखेंगे कि ये बड़ा इंटीग्रेटेड है। पहले का मनरेगा क्या था? आइसोलेटेड था। उसका पूरे विकास से रूरल डेवलपमेंट के विकास से या परिवार के विकास में उसकी क्या बिह रचना होगी? ये स्पष्ट नहीं था। ये था कि कुछ पैसा मिल जाए इनको। बस एक इतना ही था उसमें जो मैं समझ पाया इतने दिनों में इसका व्यू रचना आप देखते हैं तो पूरा फोकस्ड है। फोकस्ड है और सबसे बड़ी चीज इंटीग्रेटेड है। टेक्नोलॉजी के रूप में ग्रामीण
27:14 अर्थव्यवस्था की जो कमियां है उसको दूर करने के रूप में नई संभावनाओं को सजित करने के लिए और सबसे बड़ी चीज ऑटोनॉमी है। इसमें ऑटोनॉमी आप ग्राम पंचायत स्तर पर देखते हैं वो ऑटोनॉमी है। अब समस्या कहां आ रही है? आप इसको समझिए। अब प्रधानमंत्री जी ने टास्क दे दिया राज्यों को कि आप अपने यहां इसकी योजना बनाइए। अब राज्यों के सामने समस्या यह है कि वो जिला स्तर पर इस टास्क को सौंपे। तो इसके लिए उन्होंने सोचा नहीं था कि प्रधानमंत्री जी होमवर्क भी दे सकते हैं। उनको लगा यह पैसा चैरिटी का पैसा आ रहा है। आने दीजिए। लेकिन अगर हमको विकसित होना है जो आज अंतरराष्ट्रीय परिवेश है उसका लाभ उठाना है आप देखिए टेक्सटाइल को लेकर के जिस प्रकार बांग्लादेश और
28:00 पाकिस्तान हुआ इस बजट में एक बड़ा जंप मारा गया है एमएसएमई को लेकर के जो था जिसको हम भूल चुके थे जी 14 के पहले बहुत हद तक उसको राइट ऑफ कर चुके थे एमएसएमई आप जितने ट्रेड डील्स हो रहे हैं एक बड़ा पिलर बन रहा है हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका से भिड़ गए आप ये सोच सोचिए जो हमारा ट्रेड डील हुआ। हम उस स्तर पर सोच रहे हैं कि हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था ग्लोबल लेवल पर स्थापित होगी। हम उस स्तर पर सोच रहे हैं। फूड प्रोसेसिंग कितना होना है। आप देखिए बजट को सब चीजों में देखिए तब जाकर समझ में आएगा कि इसकी बिह रचना कब कहां कैसे होनी है और राज्यों को ठीक है समय लगेगा। हो सकता है इस साल वो अपना इंफ्रा तैयार ना कर पाए कि कैसे इसको करना है। लेकिन मुझे लगता है
28:46 कि धीरे-धीरे उनको समझ में आएगा कि आज सोचिए कि जो अभी डाबोस में सबमिट हुआ था इन्वेस्टर का हर साल होता है। झारखंड को भेजा था केंद्र सरकार ने। कभी सोच सकते हैं झारखंड भी जा सकता है। कभी सोचा था कि उत्तर प्रदेश इतना बड़ा राशि ले आएगा अवश्य? योगी जी कल जापान में 1 लाख करोड़ का उन्होंने किया है। उत्तर प्रदेश के बारे में कभी आपने सोचा होगा मनोज जी इतने सालों से देख रहे हैं। आज जापान में है। जापान में एक बड़ी उपलब्धि करते हुए तो हमारा विज़न वहां तक जा रहा है। तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को इतने बड़े स्तर पर अब उसमें इसकी पूरी व्याख्या करेंगे तो समझ में आएगा प्रधानमंत्री जी कितने बड़े स्तर पर इसको ले जाना चाहेंगे। जी जाहिर सी बात है विकसित भारत जी राम जी का जो उद्देश्य है ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जो
29:33 ग्रामीण है उनकी आय में कैसे बढ़ोतरी हो एक बड़ा उद्देश्य यह है। आखिरी सवाल मेरा आपसे रोहिणी जी इसी पर है क्योंकि मुद्दा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का है। ग्रामीणों की आय में बढ़ोतरी हो। किसान की आय दुगनी हो। सरकार का लक्ष्य यही रहा है कि आर्थिक दृष्टि से जो कमजोर है वो मजबूत हो। आप कैसे देखती हैं इस मुद्दे को? अगर मॉनिटरी टर्म्स में देखा जाए तो आप सोचिए कि 95690 करोड़ ये तो बजटीय प्रावधान है केवल सेंट्रल शेयर का। अब राज्यों का अगर शेयर उसमें ऐड हो जाएगा तो एक टोटल एनुअल उसका आउटले अगर आप देखें तो 1 लाख 51000 करोड़ से ज्यादा जो है ये एनुअल आउटले बनता है और इमेजिन कीजिए कि अगर इतना पैसा अगर
30:19 हमारे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पंप किया जाता है इन अ फाइनेंसियल ईयर टू क्रिएट ड्यूरेबल एसेट्स मतलब जो आगे जाकर भी सस्टेनेबल लाइवलीहुड्स डेवलप करें तो मुझे लगता है कि यह बहुत ही बड़ा बूस्ट रहेगा हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जो है बहुत ही मोमेंटम देगा और इसमें जो काम लिए जाएंगे वो कार्य भी ऐसे हैं कि वह सस्टेनेबल लाइवलीहुड जनरेट करेंगे। ऐसे नहीं कि वन टाइम काम कर लिया और फिर उस काम की उपयोगिता खत्म हो गई। वह काम आपको आगे आने वाले समय में भी जो है ग्रामीणों की आय बढ़ाने में जो है मदद करेगा। तो मुझे लगता है कि इन कारणों की वजह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने में, मोमेंटम देने में और हमारे रूरल डेवलपमेंट के ओवरऑल आर्किटेक्चर को विकसित भारत अ के
31:04 आर्किटेक्चर के साथ अलाइन करने में विकसित भारत जी राम जी एक बहुत ही इंपॉर्टेंट माइलस्टोन है। जी बिल्कुल बिल्कुल रोहिणी जी विकसित भारत जी राम जी योजना जो है वो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी। मजबूती प्रदान करेगी। रोहिणी जी आपने संसद टीवी से बात की। बहुत-बहुत धन्यवाद हमसे बात करने के लिए। मनोज जी आपका भी बहुत-बहुत शुक्रिया। बहुत-बहुत धन्यवाद संसद टीवी से बात करने के लिए। तो आज इस कार्यक्रम में इतना ही। मुझे दीजिए आज्ञा। नमस्कार।