NCERT | CBSE | Class - 11 | भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार | भारतीय संविधान में अधिकार | भाग-2

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भारतीय संविधान में स्वतंत्रता के अधिकार पर केंद्रित है। इसमें स्वतंत्रता की परिभाषा, विभिन्न प्रकार की स्वतंत्रताएं जो संविधान द्वारा प्रदान की जाती हैं, और उन पर लगाए गए प्रतिबंधों पर चर्चा की गई है। वीडियो में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार, अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण, जीवन और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और अभियुक्तों और सजा पाए लोगों के अधिकारों जैसे विषयों को शामिल किया गया है। निवारक नजरबंदी की अवधारणा और इसके संभावित दुरुपयोग पर भी प्रकाश डाला गया है।

  • स्वतंत्रता का अर्थ और महत्व
  • अनुच्छेद 19 से 22 तक स्वतंत्रता के अधिकार का विवरण
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता, दोषसिद्धि से संरक्षण, जीवन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार
  • निवारक नजरबंदी और इसके संभावित दुरुपयोग

स्वतंत्रता का अर्थ और आवश्यकता

स्वतंत्रता का अर्थ है बंधनों का अभाव, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो किसी को भी स्वतंत्रता नहीं मिल पाएगी। वास्तविक स्वतंत्रता कानूनों और नियमों के अंतर्गत आती है जो सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करते हैं। उदाहरण के लिए, स्कूल के समय का निर्धारण एक ऐसा बंधन है जो सभी छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में मदद करता है।

स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 19-22

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 19 से 22 तक स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन है। इसके अंतर्गत कई प्रकार की स्वतंत्रताएं शामिल हैं, जैसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19), अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण (अनुच्छेद 20), जीवन और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21), शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21क), और अभियुक्तों और सजा पाए लोगों के अधिकार (अनुच्छेद 22)।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19)

अनुच्छेद 19 के तहत छह प्रकार के अधिकार प्राप्त हैं: वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन करने का अधिकार, संगम या संघ बनाने का अधिकार, भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण का अधिकार, भारत के किसी भी भू-भाग में निवास करने का अधिकार, और कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार। इन अधिकारों की रक्षा राज्य के खिलाफ है, लेकिन राज्य अनुच्छेद 19 में उल्लिखित आधारों पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है।

अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण (अनुच्छेद 20)

अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में तीन प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है: कोई पूर्व पद प्रभाव कानून नहीं, एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार दंडित नहीं किया जा सकता, और किसी व्यक्ति को स्वयं के खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति को उस कार्य के लिए दंडित नहीं किया जा सकता जो उस समय अपराध नहीं था जब वह किया गया था, और उसे अपने खिलाफ सबूत देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

जीवन और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21)

अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अलावा किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन से वंचित नहीं किया जा सकता। इस अधिकार में मानवीय सम्मान और उससे जुड़े अन्य पहलू भी शामिल हैं।

शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21क)

अनुच्छेद 21क 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है। यह अधिकार प्राथमिक शिक्षा के लिए है, न कि उच्च शिक्षा या व्यावसायिक शिक्षा के लिए।

निरोध एवं गिरफ्तारी से संरक्षण (अनुच्छेद 22)

अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी और निरोध से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके दो भाग हैं: साधारण कानून के तहत गिरफ्तारी और निवारक नजरबंदी। साधारण कानून के तहत गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारणों को जानने, वकील से परामर्श करने और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार है। निवारक नजरबंदी में, किसी व्यक्ति को अपराध करने से रोकने के लिए हिरासत में लिया जाता है। निवारक नजरबंदी अधिकतम 3 महीने के लिए ही हो सकती है।

निवारक नजरबंदी: आशंका और दुरुपयोग

निवारक नजरबंदी में, किसी व्यक्ति को अपराध करने से रोकने के लिए आशंका के आधार पर हिरासत में लिया जाता है। यह सरकार को असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी तत्वों से निपटने का अधिकार देता है, लेकिन इसका दुरुपयोग भी हो सकता है। कई बार सरकारों ने अपने विरोधियों को दबाने के लिए इस अधिकार का इस्तेमाल किया है।

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Transcript

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0:00 बच्चों पिछले वीडियो में अपन ने जाना था भारतीय संविधान में अधिकार के बड़े में की हमारा भारतीय संविधान हमें कौन-कौन से मूल अधिकार देता है उसमें अपन ने जान लिया था सामान्य की अधिकार को आज अपन जानेंगे स्वतंत्रता के अधिकार को क्या है स्वतंत्रता का अधिकार उससे पहले अपन ये जान क्या है स्वतंत्रता तो स्वतंत्रता का मतलब क्या बंदों का अभाव कोई बंधन नहीं किसी के ऊपर तो क्या वो स्वतंत्रता है सुनने में तो ऐसे ही लगता है की जो मेरी मर्जी आए वो कम ना करूं जहां मेरी मर्जी आए वहां मैं जाऊं जहां मेरी मर्जी आए वहां मैं घूम हूं तो इस तरह की अगर आजादी हो तो उसको अपन स्वतंत्रता कहेंगे ना की किसी भी प्रकार के बंधन ना हो तो उसको कहा जाएगा

0:45 स्वतंत्रता यह स्वतंत्रता की एक पतली परिभाषा दी जाति है लेकिन ऐसा नहीं है अगर इस तरह की स्वतंत्रता का अपन उपभोग करने ग गए तो फिर बहुत सारे व्यक्तियों को स्वतंत्रता नहीं मिल पे बहुत सारे मतलब किसी को भी नहीं मिल पाएगी जैसे की मां लीजिए की आपको स्वतंत्रता है की आपकी स्कूल के अंदर आप अपनी मर्जी आए तब ए सकते हैं फिर वही स्वतंत्रता आपकी जो सारे क्लासमेट्स हैं उनको भी मिलेगी तो आप में से कोई सुबह 6:00 बजे आएगा कोई रहेगा नहीं भी मेरा तो शाम को पढ़ने का मां होता है कोई रहेगा नहीं मेरा तो मां रात को होता है और टीचर का है की नहीं मेरा मां तो आ सुबह पढ़ना का ही होता है मैं तो शाम को नहीं पढ़ाऊंगा तो क्या कोई भी पढ़ाई कर पाएगा और कोई भी पढ़ा पाएगा नहीं पढ़ा पाएगा ना तो क्या हो की टीचर का मां भी

1:32 उसे वक्त पढ़ना का हो और आपका पढ़ने का भी हो इसके लिए एक कानून बना दिया जाता है की इतने बजे से इतने बजे तक स्कूल लगेगी इस वक्त मैं आपको भी स्कूल में आना है टीचर को भी स्कूल में आना है वो भी पढ़ा पाएंगे आप भी पढ़ पाएंगे यहां आप पढ़ पे आप कहानी की अपन अध्ययन कर पे इसके लिए आपको क्या करना पड़ा आपको अपनी स्वतंत्रता का थोड़ा सा त्याग करना पड़ा और आपको ज्यादा बड़ा उसमें मिला की मतलब मेरी मर्जी आए तब मैं स्कूल जाऊं इस स्वतंत्रता का त्याग करके हम एक बंधन के अंदर बंदे हम एक नियम के अंदर बंदे हम एक कानून के अंदर बंदे तो इस कानून के अंदर बैंड के स्वतंत्रता होती है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है विचारों की स्वतंत्रता होती है लेकिन इनके ऊपर कुछ

2:19 कानून बंधन होते हैं अल में वही होती है स्वतंत्रता की कुछ युक्ति युक्त बंदों के साथ में स्वतंत्रता आई है हमारे पास तो देखिए स्वतंत्रता का अधिकार किस तरह से हमारा संविधान हमें प्रधान करता है किस-किस प्रकार की स्वतत्रंताएं हमें मिली हुई है और किस प्रकार हम उनका उपभोग कर सकते हैं और क्या-क्या उन पर प्रतिबंध है चलिए जानते हैं बिना किसी अन्य की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंच बिना कानून व्यवस्था को थिस पहुंच प्रत्येक व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता का आनंद ले सकता है मतलब की हम अपनी स्वतंत्रता आनंद तभी ले पाएंगे जब हम दूसरे की स्वतंत्रता को थिस ना

3:04 पहुंचाएं और जब हम कानून व्यवस्था को आ कानून व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करें स्वतंत्रता का अर्थ है चिंतन अभिव्यक्ति और कार्य करने की स्वतंत्रता देखते हैं अपन स्वतंत्रता का अधिकार स्वतंत्रता का अधिकार है वह हमारे संविधान में अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22 तक है अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22 तक हमें हमारा संविधान है वो स्वतंत्रता का अधिकार प्रधान करता है पहले अधिकार है स्वतंत्रता के अंतर्गत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार जो की अनुच्छेद 19 के तहत हमें प्राप्त होता है दूसरा है अपराधों के लिए दो सिद्धि के संबंध में संरक्षण ये हमें देता है अनुच्छेद 20 तीसरा है जीवन की रक्षा और

3:50 दही स्वतंत्रता का अधिकार ये हमें मिलता है अनुच्छेद 21 से और फिर अगला है शिक्षा का अधिकार जो की संविधान संशोधन करके बाद इसमें जोड़ा गया था वह मिलता है हमें अनुच्छेद 21 के अंतर्गत और फिर मिलता है अभियुक्ततो और सजा पे लोगों के अधिकार ये हमें मिलते हैं अनुच्छेद 22 के अंतर्गत तो स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत हमें ये अधिकार प्राप्त होते हैं जो की हमें हमारे संविधान द्वारा दिए जाते हैं तो चलिए जानते हैं अपन क्या है व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार यानी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अंतर्गत हमें कौन-कौन से अधिकार प्राप्त होते हैं ये अनुच्छेद 19 हमें देता है इसके तहत हमें छह प्रकार के

4:35 अधिकार प्राप्त होते हैं पहले है वाक्य एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हम अपनी भाषा का हम अपने सूर्य भाषा नहीं हम अपने विचारों की अभिव्यक्ति किसी भी मध्य से लिखकर बोलकर अपने विचारों को अभिव्यक्त कर सकते हैं हमें इस बात की स्वतंत्रता है उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत ही हमें सरकार की आलोचना करना और कहानी के अपन जो होगा हमारी व्यवस्था है प्रशासनिक व्यवस्था है उसकी भी संभल लोचन करना इस तरह की अधिकार भी प्राप्त हो जाते हैं तो पहले अधिकार है प्रत्येक व्यक्ति को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है अपने विचारों की अभिव्यक्ति फिर दूसरा आता है शांतिपूर्वक और निरायुड सम्मेलन करने का अधिकार शांतिपूर्वक बिना अस्त्र शास्त्र

5:21 के मीरा युद्ध सम्मेलन अगर नागरिक करना चाहते हैं नागरिकों का समूह करना चाहता है तो हमारा संविधान हमें इसका अधिकार देता है की मतलब की लोग कितनी भी संख्या में कठे होकर बिना किसी अस्त्र शास्त्र के शांतिपूर्वक सम्मेलन कर सकते हैं लेकिन विशेष परिस्थितियों के अनुसार सरकार इन पर प्रतिबंध लगा शक्ति है संगम या संघ बनाने का अधिकार लोगों को संगठित होने का अधिकार है संघ बनाने का अधिकार है बहुत सारे लोग संगठन बनाते हैं धर्म के नाम पर बनाते हैं जाति के नाम पर बनाते हैं पेशी प्रोफेशन के आधार पर भी बनते हैं संघ तो वह संघ बनाने का अधिकार हमें हमारा संविधान देता है भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वाधिक आबाद आचरण का अधिकार जो भारत का हमारा

6:07 क्षेत्रफल है जो हमारे भारत देश की सीमा है उसके अंतर्गत हम कहानी भी विचारण कर सकते हैं घूम के ए सकते हैं अगर आप भारत से कहानी बाहर जाते हैं तो आपको पासपोर्ट की आवश्यकता होती है और मतलब की और भी कागजी कार्यवाही की आवश्यकता होती है लेकिन भारत के किसी क्षेत्र में आप कहानी जाते हैं घूमने के लिए आप तमिलनाडु हो जाइए आपका नाटक ए जाइए आप पश्चिम बंगाल जाए यह भारत के किसी भी सीमा क्षेत्र में जान के लिए घूमने के लिए बाद आचरण करने के लिए हमें किसी प्रकार की किसी भी कहानी की अपन विशेष किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती है जी तरह से आप अपने शहर में घूमते हैं वहीं यहां भारत के किसी भी सीमा क्षेत्र में आराम से घूम के ए सकते हैं ये अधिकार हमें हमारा संविधान देता है अगला

6:53 अधिकार देता है भारत के किसी भी भू भाग में निर्वाण घूमने और बस जान निवास करने का अधिकार क्या भारत के सीमा क्षेत्र में किसी भी स्थान पर वहां बस सकते हैं वहां निवास कर सकते हैं वहां अपना घर बना सकते हैं वहां अपना पूरा जीवन बता सकते हैं इस बात की स्वतंत्रता हमें हमारा संविधान देता है कोई भी वृत्तीय व्यापार या कारोबार करने का अधिकार इसको आजीविका का अधिकार भी अपन का सकते हैं की आपको आपकी आजीविका कमाने का अधिकार है उसके लिए आप कोई भी व्यापार करें चाहे आप दुकान खोलें चाहे आप कोई नौकरी करें तो किसी भी प्रकार की आजीविका वृत्ति नित कानून के तहत अगर आप प्राप्त करते हैं तो यह आपका मूल अधिकार है अपनी आजीविका कमाने का अधिकारों की रक्षा केवल राज्य के खिलाफ

7:41 मामले में है नेकी निजी मामले में है एक इंपॉर्टेंट बात है की इन बटन की जो छह अधिकार हैं इनकी रक्षा है वह राज्य के खिलाफ है राजीव अधिकारों पर अनुच्छेद 19 में उल्लिखित आधारों पर उचित प्रतिबंध लगा सकता है अनुच्छेद 19 के अंतर्गत ही हमारे संविधान ने उचित प्रबंधन सॉरी उचित प्रतिबंध की व्याख्या की है तो वह उचित प्रतिबंध हमारा राज्य है वो अनुच्छेद 19 के तहत जो उल्लिखित हैं उनके अंतर्गत लगा सकता है अगला अधिकार जानते हैं अपराध के लिए दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण जो की अनुच्छेद 20 हमें प्रधान करता है इसमें तीन व्यवस्थाएं की गई हैं सबसे पहले व्यवस्था तो कोई पूर्व पद प्रभाव कानून

8:26 नहीं की मां लीजिए की कोई व्यक्ति है उसे वक्त उसने कोई भी अपन कहें की अपराध किया लेकिन उसे वक्त वो कृति अपराध नहीं थी वो कार्य अपराध नहीं था आज अगर उसे कार्य को अपराध घोषित कर दिया गया और आज की डेट में अगर उसको अपराध घोषित किया है तो इसके पूर्व की दिनांक में अगर उसने वो कार्य किया है तो उसको अपराध नहीं माना जाएगा उसे व्यक्ति को अपराधी की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा कोई व्यक्ति अपराध के लिए तब तक सिद्ध दोष नहीं ठहरे जाएगा जब तक की उसने ऐसा कोई कार्य करने के समय जो अपराध के रूप में आरोपित है किसी पर्वत निधि का अतिक्रमण नहीं किया ठीक है तो मतलब की किसी प्रवर्तक विधि का उसे वक्त जब अपन उसके अपराध की अब छानबीन कर रहे हैं की उसे

9:13 दिनांक को तो उसे दिनांक को अगर वो कोई विधि या कानून है जिसको आज बादल दिया गया है तो आज से पहले जो अपराध आज घोषित हुआ है तो पहले किया गए किसी कार्य के लिए उसको दोष सिद्ध नहीं दिया जाएगा उससे अधिक शक्ति का भाग ही नहीं होगा जो उसे अपराध के लिए किया जान के समय प्रति विधि के अधीन आरोपित की जा शक्ति थी और मां लीजिए की आज से पहले उसने कोई अपराध किया उसे वक्त उसके लिए डांडिया को जुर्माना ₹500 था आज वो जुर्माना बढ़कर ₹2000 हो गया है लेकिन अगर उसने आज की दिनांक से पूर्व अपराध किया है तो उसे वही जुर्माना लिया जाएगा यानी की उसे दिनांक को उसे कार्य के लिए कितना इतना दंड था वही दंड उसे व्यक्ति से लिया किसी व्यक्ति को एक ही

10:00 अपराध के लिए एक से अधिक बार दंडित नहीं किया जा सकता एक ही अपराध अगर उसे व्यक्ति ने किया है तो उसे अपराध के लिए उसको बार-बार दंडित नहीं किया जाएगा एक और महत्वपूर्ण बात की कोई व्यक्ति है चाहे उसने कितना ही संगीन अपराध क्यों ना किया हो लेकिन स्वयं के ही खिलाफ गवाही देने के लिए स्वयं की ही खिलाफ कहेंगे अपन सबूत इकट्ठा करने के लिए और उसको बाध्य नहीं किया जाएगा किसी अपराध के लिए अभियुक्त किसी व्यक्ति को स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा मतलब उसको इस बात के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता की वो स्वयं अपनी ही गवाही दे अपने ही खिलाफ गवाही दे और अपने ही खिलाफ सबूत दे तो ये था अपना दोस्त सिद्धि से

10:46 संरक्षण अगला जो अपना अधिकार है स्वतंत्रता का अधिकार वह बहुत ही महत्वपूर्ण अधिकार है और यह अधिकार पता करता है हमारे प्राणों की यह अधिकार रक्षा करता है हमारे जीवन की किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन से वंचित करना एक बहुत बड़ा अपराध घोषित करता है हमारा यह मूल अधिकार की कानून में निर्धारित भीम के अलावा अन्य किसी भी रीति से किसी भी तरीके से किसी भी व्यक्ति को किसी भी तरीके से किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन से वंचित नहीं किया जा सकता उसके प्राणों से उसको कहानी वंचित नहीं किया जा सकता यानी की कोई भी व्यक्ति है चाहे वो कुछ भी करें हम उसके जीवन नहीं

11:35 इतिहास सकते हम उसकी जीवन लीला समाप्त नहीं कर सकते हम उसके प्राण नहीं ले सकते ये एक बहुत बड़ा अपराध है कानून में नित भीम के अलावा किसी भी रीति से कोई भी चाहे वो कोई सरकार हो चाहे वो कोई राजा हो चाहे वो कोई अमीर व्यक्ति हो चाहे वो कोई गरीब व्यक्ति हो किसी दूसरे व्यक्ति के उसे उसको वंचित नहीं कर सकता उसके जीवन को समाप्त नहीं कर सकता देखते हैं इसे नागरिक को कानून द्वारा निर्धारित भीम का पालनपुर किया बिना उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता उसमें प्राण के अधिकार को शारीरिक बंदों में नहीं बांध गया बल्कि मानवीय सम्मान और उससे जुड़े अन्य पहलवान को भी रखा गया है प्राण के अधिकार को केवल

12:20 शारीरिक बंधन में ना मानकर उसके जो मानवीय गरिमा है उसको भी इसमें शामिल किया गया है अगला अधिकार आता है हमारा शिक्षा का अधिकार जो की बाद में जुड़ा गया था 2002 के अंतर्गत अनुच्छेद 21 के तहत तो ये शिक्षा का अधिकार भी अधिक मूल अधिकार है क्या कहता है यह अधिकार यह अधिकार दिया गया है 6 से 14 वर्ष के बालको को 6 से 14 वर्ष के जो बालक हैं उनको निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाएगी राज्यों द्वारा की जाएगी और ये अधिकार प्राथमिक शिक्षा के लिए है उच्च शिक्षा के लिए व्यवसायिक शिक्षाओं के लिए नहीं अपना जो स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत अंतिम अधिकार जो आता है वह आता है निरोध एवं गिरफ्तारी से संरक्षण ये हमें मिलता है

13:06 अनुच्छेद 22 के तहत अनुच्छेद 22 के तहत यह जो अधिकार हमें प्राप्त होता है इसके दो भाग हैं पहले भाग क्या है पहले भाग की अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो उसे बताया जाएगा की किस बात के लिए उसको गिरफ्तार किया जा सकता है वहां अगर किया जा रहा है सॉरी की कोई व्यक्ति को अगर गिरफ्तार किया जा रहा है तो उसको बताया जाएगा की किस करण से उसको गिरफ्तार किया जा रहा है अगर महिला को गिरफ्तार किया जा रहा है तो महिला कांस्टेबल है वो उसको गिरफ्तार करेगी इस बात की मांग महिला कर शक्ति है वो व्यक्ति जिसको गिरफ्तार किया जा रहा है वो अपने किसी वकील से सहायता ले सकता है कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है इसका उसे अधिकार दिया जाएगा और गिरफ्तार

13:51 करने के बाद में उसको 24 घंटे के अंदर इसके अंदर मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत किया अधिकार हमें मिलते हैं हमारे अनुच्छेद 22 के द्वारा जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा रहा है एक बार यहां देख लेते हैं उसे व्यक्ति को जैसे साधारण कानून के तहत हिरासत में लिया गया है उसे निम्न अधिकार देता है हमारा संविधान यानी की ये वाला जो अधिकार है वो किस व्यक्ति को मिल रहा है प्रत्येक भारतीय नागरिक को मिलता है लेकिन कब मिल रहा है हमें जब हमें हिरासत में लिया जा रहा है की साधारण कानून के तहत गिरफ्तार करने के आधार पर सूचना देने का अधिकार के किस आधार पर उसको गिरफ्तार किया जा रहा है इस बात की उसको सूचना दी जाएगी विधि व्यवसाय से परामर्श और प्रतिरक्षा

14:36 करने का अधिकार वो व्यक्ति अपने वकील से परामर्श कर सकता है सलामत कर सकता है और अपनी रक्षा करने के लिए अपनी तरफ से अपना जो कैसे है मुकदमा है वो लड़ने के लिए उसको अधिकार है मजिस्ट्रेट के समक्ष 24 घंटे में पेस्ट होने का अधिकार है यानी की मजिस्ट्रेट के समक्ष उसको 24 घंटे में मिक्स करना होगा इसका दूसरा भाग देखते हैं अपन इसका दूसरा भाग है निवारक निवारक नजर बंदी निवारक नजर बंदी बहुत महत्वपूर्ण है अपुन को याद रखना है क्या होता है निवारक नज़रबंदी इसमें गिरफ्तार किया जाता है व्यक्ति को लेकिन कब अपराध करने से पहले पहले वाले भाग में तो कोई अपराध उसे व्यक्ति से हो गया था या फिर संस्कृत था की इसने अपराध किया है तभी तक सिद्ध नहीं हुआ लेकिन फिर भी साधारण कानून के तहत जब उसको गिरफ्तार किया जा रहा है तो वो

15:23 अधिकार हमें मिल रहे थे यहां अपराध किया नहीं है व्यक्ति ने अपराध करने वाला है ये संज्ञान होने पर उसको हिरासत में ले लिया जाता है यानी की कई बार सरकार को यह सुन से हो जाता है यह संदेह हो जाता है की कोई व्यक्ति है वह अपराधिकारियों में संयुक्त है या फिर कोई अपराधिक कार्य को अंजाम देने वाला है इसके वो कोई दंड सॉरी वो कोई अपराध करने वाला है किसी को नुकसान पहचाने वाला है या फिर कोई कानून व्यवस्था को नुकसान पहुंच करने वाला है तो किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसा संशय होने पर उसको हिरासत में ले लिया जाता है यह कहलाता है निवारक नज़रबंदी की किसी व्यक्ति को अपराध करने से रोकने के लिए उसको हिरासत में ले लेना ठीक है दिखने में लगता है की हां कोई

16:10 व्यक्ति अपराध करने वाला है उसको हिरासत में ले लिया जाता है लेकिन इस संशय का आधार क्या होता है कई बार व्यवहार में ये देखने में आया है की यह अधिकार जो की मूल अधिकार के रूप में हमारे संविधान निर्माता ने हमें दिया था इस मूल अधिकार का दुरुपयोग सरकारे द्वारा किया गया जहां इसी अनुच्छेद के पहले भाग में हिरासत में लिए जान वाले व्यक्ति को अधिकार मिल रहे हैं एक तरह से उसका विपरीत ये दूसरा भाग महसूस होता है की इसका बहुत बार दुरुपयोग सरकारे के द्वारा किया गया इस करण से यह एक अधिकारों की हमारी जो आलोचना है उसका भी करण बंता है आशंका शब्द को ध्यान रखना है आशंका पर

16:57 गिरफ्तार किया जाता है की वह कोई गैरकानूनी कार्य करने वाला है अधिकार ये है की निवारक नज़रबंदी अधिकतम 3 महीने के लिए ही हो शक्ति है प्रत्यक्ष रूप से निवारक नज़रबंदी सरकार के हाथ में असामाजिक तत्वों और राष्ट्र विरोधी तत्वों से निपटाने का एक हथियार है मतलब एक तरह से यह सरकार को हथियार दिया गया था की जो भी असामाजिक तत्व हैं जो भी राष्ट्रीय विरोधी तत्व हैं उनसे निपटाने के लिए सरकार इनका उपयोग करेगी लेकिन व्यवहार में स्वार्थ वाश या फिर कोई अपना विरोधी दाल है उसके किसी व्यक्ति के प्रभुत्व को कम करने के लिए सरकारे द्वारा ऐसे कम उठा गए तो यह था अपना स्वतंत्रता का अधिकार किस स्वतंत्रता का अधिकार हमें हमारा संविधान देता है हमारी जो व्यक्तिगत स्वतत्रंताएं

17:44 हैं उनके अंदर बहुत सारे स्वतंत्रता हमें मिलती हैं चाहे हमारी आजीविका की स्वतंत्रता हो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है सम्मेलन करने की स्वतंत्रता है संघ बनाने की स्वतंत्रता है संपूर्ण देश में विचारण करने की स्वतंत्रता है और देश के किसी भी भाग में बस जान की स्वतंत्रता है फिर आता है अप्रैल 2 से 2 सिद्धि के संबंध में संरक्षण की किसी व्यक्ति को जब अगर गिरफ्तार किया जा रहा है तो उसको कौन-कौन से अधिकार प्राप्त होते हैं प्राण और एक स्वतंत्रता का अधिकार हमें प्राप्त हुआ है तो इस तरह से स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत बहुत सारे अधिकार हमें भारतीय संविधान द्वारा प्रधान किया गए हैं अब देखते हैं अपन क्वेश्चन व्यक्तिगत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत भारतीय संविधान द्वारा कौन-कौन से

18:30 अधिकार प्रधान किया जाते हैं छह अधिकार प्रधान किया जाते हैं जिनके बड़े में अपने किया था निवारक नज़रबंदी क्या है समझाइए इसका भी अध्ययन अपन ने अभी-अभी किया है की निवारक नज़रबंदी क्या है ये एक आशंका होती है की भाई कोई व्यक्ति है वो गैरकानूनी कार्य करने वाला है उसको गिरफ्तार कर लिया जाता है एक तरह से ऐसा सामाजिक तत्वों और राष्ट्र विरोधी तत्वों से निपटाने के लिए सरकार को अधिकार दिया गया था संविधान द्वारा तो ये है अपना निवारक नज़रबंदी अगले वीडियो में अपन लेंगे आगे की अधिकार धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार और शोषण के विरुद्ध अधिकार तब तक के लिए धन्यवाद

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