संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो बताता है कि भगवान शिव को अपना गुरु कैसे बनाया जाए और उनकी कृपा कैसे प्राप्त की जाए। इसमें गुरु बनाने की विधि, आवश्यक शर्तें, और शिष्य के कर्तव्य शामिल हैं।
- भगवान शिव को गुरु बनाने के लिए मन, वचन और कर्म से शुद्ध होना आवश्यक है।
- सच्चे हृदय से समर्पण और सेवाभाव से ही भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
परिचय
इस वीडियो में, ज्योतिषी बताती हैं कि भगवान शिव को गुरु के रूप में कैसे स्वीकार किया जा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो किसी सांसारिक गुरु को नहीं खोज पा रहे हैं। वह बताती हैं कि शिव को गुरु मानने से साधना, ध्यान और अन्य आध्यात्मिक क्रियाओं में कैसे प्रगति की जा सकती है।
महादेव को गुरु कैसे बनाएं
ज्ञानी गुरु को साक्षी मानकर किए गए कार्य में कोई रुकावट नहीं आती। भगवान शिव गुरु हैं और गुरु शिवजी हैं, इसलिए उनकी प्राप्ति हो जाती है। भगवान शिव को गुरु बनाने के लिए सबसे पहले मन को शांत करके ध्यान मुद्रा में बैठें। फिर, भगवान शिव से प्रार्थना करें कि आप उन्हें अपना गुरु बनाना चाहते हैं और उनसे शिष्य के रूप में स्वीकार करने का आग्रह करें। इसके बाद, दोनों हाथ ऊपर उठाकर ब्रह्मांड की ओर देखते हुए तीन बार घोषणा करें कि शिव आपके गुरु हैं और आप उनके शिष्य हैं। गुरु दक्षिणा के रूप में राम नाम सुनाने का संकल्प लें।
शिव गुरु को साक्षी मानकर कार्य करना
शिव गुरु को साक्षी मानकर शुरू किए गए कार्यों में रुकावट नहीं आती। इसलिए, कोई भी काम शुरू करने से पहले भगवान शिव को साक्षी बना लें और उनसे दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करने की प्रार्थना करें। प्रतिदिन कम से कम तीन बार कहें कि शिवजी आपके गुरु हैं और आप उनके शिष्य हैं, और उन पर दया करने की प्रार्थना करें।
शिव गुरु को नमन और गुरुदक्षिणा
हर रोज शिव गुरु को नमन करें। शांत मन से कुछ मिनटों तक "ओम नमः शिवाय गुरुदेव सचिदानंद निष्प्रपञ्चाय शांताय निरालंबा हितेश" का जाप करें। गुरुदक्षिणा के रूप में ओम नमः शिवाय मंत्र की कम से कम एक माला का जप प्रतिदिन करने का संकल्प लेकर शिवजी को अर्पित करें। इस प्रकार आप भगवान शिव को गुरु बना सकते हैं।
भगवान शिव के योग्य बनना
यदि आप भगवान शिव को गुरु बनाना चाहते हैं, तो आपको उनके योग्य बनना होगा। इसके लिए, आपको सच्चाई, ईमानदारी और छल-कपट से दूर रहना होगा। सत्कर्म करें और जनसेवा व समाज सेवा के कार्यों में आगे बढ़ें। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो भगवान शिव आपको अपने शिष्य के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे। आपको अपनी आत्मा को शुद्ध करना होगा और भोलेनाथ पर संपूर्ण विश्वास करके स्वयं को समर्पित करना होगा। तभी वे आपको अपना शिष्य स्वीकार करेंगे और आपके जीवन की समस्त रुकावटें दूर होंगी।

